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	<title>Real Sex Story &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:25:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Real Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरे प्रिय दोस्तो, मेरा नाम अजय है, मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड बहुत मस्त है, इसकी तारीफ़ मैं नहीं इसका शिकार हुई लौंडियों और भाभियों ने की है. ये मेरी और मेरी एक मदमस्त भाभी की चुदाई की कहानी है. मैं आपको कहानी विस्तार से बताता हूं. मेरा स्कूल खत्म हो चुका <a title="भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chuchi-gand/" aria-label="Continue reading भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे प्रिय दोस्तो, मेरा नाम अजय है, मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड बहुत मस्त है, इसकी तारीफ़ मैं नहीं इसका शिकार हुई लौंडियों और भाभियों ने की है. ये मेरी और मेरी एक मदमस्त भाभी की चुदाई की कहानी है.</p>
<p>मैं आपको कहानी विस्तार से बताता हूं. मेरा स्कूल खत्म हो चुका था, अब मुझे कॉलेज जाना था. इस वजह से मुझे दूर शहर में भेज दिया गया. मेरी पड़ोस की एक आंटी की बहू और बेटा वहां रहते थे. पापा ने मुझे उनका पता आदि देकर मुझे भेज दिया.</p>
<p>मैं जब वहां गया और उनके घर जाकर मैंने उनका दरवाजा खटखटाया, तो भाभी ने दरवाजा खोला. मैं तो बस भाभी को देखता ही रह गया. उफ्फ्फ क्या मादक जिस्म था. खुले काले लंबे बाल, गोरे गाल, लाल होंठ, बड़े बड़े दूध … सपाट पेट, चौड़ी गांड. मैं तो मदहोश हो गया था.</p>
<p>तभी भाभी ने प्यारी सी आवाज़ में कहा- अरे अजय … तुम आ गए मम्मी जी का फ़ोन आया था कि अजय आ रहा है.<br />
मैं- हां भाभी, मैं आ गया.<br />
भाभी- चलो अन्दर आ जाओ.</p>
<p>यह कह कर भाभी मुड़ीं, तो मुझे उनकी गांड देखी … उफ्फ्फ हिलती हुई गांड बड़ी मस्त लग रही थी. उनके दोनों चूतड़ जब थिरक रहे थे, तो ऐसा लग रहा था … मानो एक दूसरे से बातें कर रहे हों. उनके दोनों चूतड़ों के बीच में छुपा हुआ मज़े से भरा हुआ गांड का छेद कैसा होगा … मैं तो बस इस कल्पना को लेकर सोचता ही रह गया. मैं उनके लावण्यमयी शरीर की मदहोशी में सोफे पर जाकर बैठ गया. </p>
<p>भाभी मेरे लिए पानी लाईं. फिर भाभी बैठ कर मुझसे बातें करने लगीं. भाभी ने बताया कि भैया तो ऑफिस के काम से दस दिन के लिए टूर पर गए हैं, मैं अकेली ही घर में हूँ. उनकी इस बात को सुनते ही मेरे दिल में भाभी को चोदने का ख्याल आने लगा.</p>
<p>इससे पहले मैं आगे बढूं, पहले आप सभी को भाभी के बारे में बता दूँ कि भाभी का फिगर 38-34-36 का है और उनकी उम्र 35 साल की है. भाभी इतनी सेक्सी दिखती हैं कि उनको जो भी बंदा एक बार देख ले, बस वो उसी पल से भाभी को अपने बिस्तर की रानी बनाने की सोचने लगेगा. </p>
<p>चूंकि पिता जी का फोन आ चुका था कि मुझे भाभी भैया के घर ही रहना है, तो भाभी ने मुझे मेरा कमरा दिखा दिया. मैंने अपना सामान रूम में सैट कर दिया और भाभी के साथ बातें करता रहा. </p>
<p>रात में भाभी ने खाना लगाया, तो मैं टेबल पर बैठा था. इस वक्त भाभी ने एक नीले रंग की झीनी सी नाइटी डाली हुई थी, जिसमें से उनका गोरा बदन चमक रहा था. नाइटी जरा चुस्त थी, तो भाभी के मोटे चुचे मानो जैसे अभी बाहर फट पड़ेंगे … ऐसा साफ़ दिख रहा था.</p>
<p>नाइटी में चूचों के निप्पलों के ऊपर वाली जगह में एक स्टार जैसा कुछ चमकदार नग सा लगा था, जोकि उनके चूचों को और भी पूरा दिखाते हुए भी ढक रहा था. एक इस गहरे गले वाली नाइटी में से भाभी मुझे झुक कर खाना दे रही थीं. जिससे मुझे न केवल ऊपर से बल्कि अन्दर से भी उनके पूरे हिमालय के दर्शन हो रहे थे. मैं उनके हाव भाव से समझ गया कि भाभी आज मुझसे चुदने को राजी हैं. </p>
<p>मैंने और भाभी ने खाना खाया और रूम में आ गए. कुछ देर मैं भाभी के रूम में ही रहा.<br />
उसी वक्त भाभी बोलीं- अब तुम सो जाओ … मैं नहा लूं. </p>
<p>मैंने आश्चर्य जताया कि भाभी ये कौन सा वक्त है नहाने का?<br />
भाभी बोलीं- मैं रात में नहा कर ही सोती हूँ. ये कहते हुए भाभी ने दोनों हाथ ऊपर करके अपने चुचे हिला दिए. </p>
<p>मैं तो उनकी इस अदा से पागल ही हो गया. मुझे दीवाना सा देख कर भाभी मुस्कुरा कर नहाने चली गईं. मैं अपने कमरे में आ गया, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी. बस बार बार भाभी के चुचे आंखों में आ रहे थे. </p>
<p>कुछ देर बाद मैं भाभी के पास आया, तो भाभी बिस्तर में लेटी थीं.<br />
मैं बोला- भाभी मुझे नींद नहीं आ रही है … क्या मैं आपके पास सो सकता हूँ?<br />
भाभी ने हां कर दी.</p>
<p>मैं बस अगले ही एक पल भाभी के पास लेट गया और बिना कुछ सोचे उनसे लिपट गया. मुझे उम्मीद थी कि भाभी कुछ विरोध करेंगी. मगर भाभी ने मुझे अपनी बांहों में समा लिया.<br />
मैंने सबसे पहले भाभी की चुचियों में मुँह लगा दिया. उफ्फ्फ … कितने नर्म चुचे थे. </p>
<p>भाभी पहले तो ना ना करने लगीं- क्या कर रहे हो अजय … छोड़ भी दो उफ्फ्फ्फ बदमाश! </p>
<p>मैं भाभी की कुछ नहीं सुन रहा था और भाभी के चूचों से पूरा लिपट गया था. मेरे लगातार चूचे चूसने के बाद भाभी ने मुझे रोकना बंद कर दिया और मुझे अपनी उफनती जवानी में डुबकी लगाने दिया.</p>
<p>काफी देर बाद मैंने भाभी के चूचों को छोड़ा. इसके तुरंत बाद मैंने उनकी नाइटी को निकाल कर फेंक दिया और खुद भी नंगा हो गया. भाभी भी मेरे लंड को देखकर एकदम से मोहित हो गईं. उनकी चुदास भड़क उठी और वो मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगीं.</p>
<p>मैंने कहा- भाभी जी सब्र करो, आज मेरा केला आपको ही मिलने वाला है.<br />
भाभी बोलीं- इसे देख कर तो सब्र ही नहीं होता, पहले एक बार प्यास बुझा दो, फिर बाद में बाकी का खेल कर लेंगे.</p>
<p>मैंने उनकी बात से सहमति जताते हुए उनकी टांगें फैला दीं और दोनों टांगों के बीच में आकर अपने लंड को निशाना दिखाने लगा. भाभी ने लंड को चूत की फांकों में फंसाया और गांड उठा कर सुपारा फंसा लिया. इधर सुपारे का फंसना हुआ और उधर मैंने ठोकर मार दी. </p>
<p>भाभी की माँ चुद गई … उनके मुँह से दर्द भरी आह निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ भाभी की आंखें फ़ैल गईं और उनकी मुट्ठियों ने बिस्तर की चादर को भींच लिया.</p>
<p>मैं बिना कोई परवाह किये पूरा का पूरा लंड भाभी की रसीली चुत में डालने लगा. पूरा लंड पेलने के बाद मैं एक पल के लिए रुका और उनकी चूचियों को पकड़ कर दबादब चोदने लगा. एक मिनट में ही भाभी की चूत मस्त हो गई और मेरे लंड का उछल उछल कर स्वागत करने लगी. </p>
<p>मैं काफी देर तक भाभी को चोदता रहा. उनकी गांड को सहलाते हुए चुचे चूसते और काटते हुए चुदाई की गति को तेज से तेज करने लगा.</p>
<p>भाभी भी मेरे मोटे लंड से चुद कर जन्नत का मजा ले रही थीं. भाभी ने मुझे अपनी चूचियों से चिपका लिया और मेरे बालों में हाथ फेरते हुए लंड की ठोकरों का मजा लेने लगीं. सच में भाभी की चुदाई में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. </p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की तेज आह निकलने लगीं और वे झड़ गईं. उनके झड़ने के कुछ पल बाद मैंने भी अपने लंड का पूरा रस भाभी की चूत में ही भर दिया. स्खलन के आनन्द से हम दोनों की आंखें मुंद गई थीं.</p>
<p>एक मिनट बाद जब सैलाब बह गया, तो हम दोनों भाभी देवर सेक्सी बातें करने लगे. मुझे भाभी की नंगी गांड बहुत मस्त माल लगी थी. मैं बार बार भाभी की गांड पर हाथ फेर रहा था और उंगली भी कर रहा था. उंगली के स्पर्श से भाभी अपनी गांड को उचका रही थीं. </p>
<p>कुछ देर बाद एक और दौर चुदाई का चला और हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए. </p>
<p>मैं सुबह उठा, तो भाभी से चिपका हुआ था. मैंने उनकी चूचियों को चूसना शुरू किया और अपने खड़े लंड को एक बार फिर से भाभी की चुत में पेल दिया. चुदाई का जलजला फिर से अपनी छटाएं बिखेरने लगा. मैंने भाभी की चूत चोद दी और फिर से सो गया. </p>
<p>काफी देर बाद जब मैं उठा, तो भाभी रसोई में चली गई थीं. मैं उठ कर रसोई में गया. भाभी को पीछे से पकड़ लिया और मस्ती करने लगा. </p>
<p>भाभी बोलीं- अभी तक मन नहीं भरा तुम्हारा?<br />
मैं- नहीं भाभी … जब आप जैसी सेक्सी माल भाभी हो … तो किस देवर का मन भरेगा.<br />
भाभी- तुम बहुत शैतान हो … यू नॉटी.</p>
<p>तभी दरवाज़े पर दस्तक की आवाज़ हुई. मैं भाग कर कमरे में जाकर अपना बरमूडा पहनने लगा. उधर भाभी ने भाग कर दरवाज़ा खोला और उनको अन्दर बुला लिया.</p>
<p>मैंने वापस आ कर देखा कि ड्राइंग रूम में भाभी की दो सहेलियां अपने 4 बच्चों के साथ आई हुई थीं. सब लोग आपस में मिल कर बात करने लगे. उनकी बातचीत से मालूम हुआ कि उन तीनों को मार्किट जाना था.</p>
<p>भाभी ने मुझसे उन बालकों को शाम तक घर रहने की बोला और वो चली गईं.</p>
<p>इधर मुझे भाभी को चोदने की आग लगी थी. मेरी चाहत जैसी चाहत ही शायद भाभी की भी थी. इसलिए वो अपनी सहेलियों से पीछा छुड़ा कर एक घंटे में ही बाजार से वापस घर आ गईं. </p>
<p>वे अपनी सहेलियों के बच्चों को बाहर वाले कमरे में बिठा कर कमरे में चली गईं. भाभी ने अपने कमरे में जाकर ड्रेस बदल ली. अब भाभी फिर से नाईट ड्रेस में आ गई थीं. मैंने भाभी को पकड़ा और अलग ले जाकर चुम्मी लेने लगा. </p>
<p>उधर भाभी की सहेलियों के बच्चे आवाज देने लगे- आप कहां हो आंटी?<br />
तो भाभी भाग कर उनके पास चली गईं. मैंने भाभी को इशारा किया कि अब नहीं रहा जाता, बस जल्दी से चुदवा लो. </p>
<p>उधर वे चार बच्चे जान की आफत बनाए हुए थे. भाभी से उन सब बच्चों को लुका छुपी खेलने को कहा.<br />
मैंने कहा- सिर्फ बच्चे ही क्यों हम सभी लुका छिपी खेलते हैं न.<br />
मेरी बात सुनकर सब तैयार हो गए. मैं भी साथ में खेलने लगा. </p>
<p>फिर एक जना बारी देने जाता, तो सब छिप जाते. दो बार का खेल तो सामान्य हुआ. तीसरी बार में मैं भाभी को लेकर रूम में ही छिप गया. भाभी इस वक्त मेरे आगे खड़ी थीं. मैंने पीछे से उनकी नाइटी उठाई और पेंटी नीचे करके उनकी चूत में लंड पेल दिया. भाभी बड़ी मुश्किल में अपनी आवाज दबा सकी थीं. मैं भाभी को पकड़ कर चोदने लगा. भाभी मुझे मना कर रही थीं और वे मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं.</p>
<p>तभी मेरी पकड़ ढीली हुई और भाभी उठ कर भागने लगीं. मैंने फिर से उनको पकड़ लिया और एक कोने में ले जाकर पीछे से अपना तन्नाया हुआ लंड उनकी चुत में घुसा दिया. भाभी के चूचों को दबाते हुए मैंने चुदाई के बहुत मज़े लिए. चुदाई पूरी करके मैंने लंड को उनकी नाइटी से ही पौंछा और बरमूडा ऊपर कर लिया. मैं अभी उनको छोड़ना नहीं चाहता था. पर भाभी बाहर भागने को हो गई थीं.</p>
<p>तभी कुछ ही देर में हमारे वाले इस कमरे के बाहर सब बच्चे एक साथ खड़े हो कर आवाज लगाने लगे थे. </p>
<p>भाभी- अजय, अभी इतना ही रहने दो, सब आ गए हैं.<br />
इतना कह कर वे अपनी गांड मटका कर चलते हुए दरवाजा खोलने चली गईं. मैं बेड पर आ गया थ और उधर से ही भाभी की मटकती हुई गांड को देख रहा था. </p>
<p>भाभी दरवाजा खोल कर अपनी सहेलियों के बच्चों से बात करने लगीं.<br />
एक बच्चा बोला- आंटी आप मिल गईं … आपने कितनी देर में दरवाजा खोला … वो भैया कहां हैं?</p>
<p>तभी मैंने पीछे से आकर भाभी की गांड पर दांत से काट लिया. भाभी चिहुँक गईं और मुझे दूर करने लगीं. </p>
<p>भाभी- जाओ अपने अजय भैया को कहीं और ढूंढ लो. वे इधर नहीं हैं.</p>
<p>इतना बोल कर भाभी ने दरवाजा बन्द कर लिया. मैंने करीब आकर भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया. फिर मैं उनकी चूत खोल कर उनको चोदने लगा. में फिर से भाभी की चुचियों से लिपट गया और उनकी मोटी चुचियों को मुँह में भर कर चूसते हुए भाभी को चोदने लगा. कुछ देर में फिर से दरवाज़ा बजने लगा, पर इस बार मैं नहीं रुका. मैं भाभी को ज़ोर से चोद रहा था.</p>
<p>कुछ देर में लंड की पिचकारी पर पिचकारी निकलीं और मैंने भाभी के चूचों को ज़ोर से मुँह में भर कर कस कर माल निकाल दिया. मुझे बहुत मज़ा आया. भाभी की चुचियों पर दांतों के निशान हो गए थे. मुझे भाभी से अलग होने का मन नहीं था, पर होना पड़ा क्योंकि बच्चे परेशान करने लगे थे. </p>
<p>भाभी ने दरवाज़ा खोल दिया. वे नाइटी डाल कर बच्चों के साथ बाहर जाकर बैठ गईं और उनसे बातें करने लगीं. इधर मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गया और बैठ गया. </p>
<p>शाम होने को थी, बच्चे अपने घर जाने वाले थे. मेरा मन तो भाभी की गांड में अटका हुआ था. मैं बार बार जब भी मौका मिलता, भाभी की चूचियों को और गांड को दबा देता था. </p>
<p>फिर उनकी सहेलियां आकर बच्चों को ले गईं. हम भाभी देवर फिर से एक हो गए. </p>
<p>जब तक भैया टूर से वापस नहीं आ गए हम दोनों ने जी भरके चुदाई का मजा लिया. मैंने भाभी की गांड भी मार ली थी. उसकी कहानी मैं अगली बार लिखूंगा. मेरे दिन मज़े से निकलने लगे थे. </p>
<p>इसी बीच मुझे पता लगा कि भाभी अपनी सहेली के भांजे से भी चुद चुकी हैं. ये सुनकर मुझे बहुत जलन हुई कि इतनी सेक्सी सुन्दर भाभी को किसी और ने भी लूट लिया है. </p>
<p>ये कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा. इस बारे में मैंने भाभी को चोदते हुए एक दिन पूछ लिया था और भाभी ने भी मज़े से बता दिया था कि कैसे वो सहेली के भांजे से चुद गयी थीं.</p>
<p>फिर मैंने भी भाभी की सहेली को चोद दिया था. आप अपना प्यार देते रहना, मैं ऐसे ही चुदाई की कहानी लिखता रहूंगा.<br />
मेरा ईमेल है [email protected]</p>
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		<title>टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:58:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
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		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं. मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना <a title="टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/" aria-label="Continue reading टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं.</p>



<p>मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना चाहता हूं कि सोनिपत के कुंडली तहसील के एरिया से हूं। मैं किसी भी लड़की को ये नहीं कहने वाला कि वो मुझे चोदने के लिए संपर्क करे। यह मैं उन पर ही छोड़ता हूं कि मेरी कहानी पढ़ने के बाद वो खुद ही फैसला ले।</p>



<p>चलिए तो मैं कहानी पर आता हूं:</p>



<p>यह मेरे और मेरे पड़ोस के गांव की एक टीनएज लड़की की कहानी है।<br>मैं कुछ अपने बारे में बता दूँ मेरा नाम मोहित (बदला हुआ) है। हाइट 6 फुट भरा हुआ शरीर … मुझे जिम का कोई शौक नहीं है पर दोस्तों के साथ गांव की जिम में चला जाता हूं. वैसे मैं अपने छोटे भाई के बारे में तो बताना ही भूल गया. छोटा भाई मतलब मेरे लंड से है जो 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।<br>चलिए मामला शुरू करते हैं.</p>



<p>कहानी पिछले साल नवंबर की है जब मैंने दिल्ली में सरकारी नौकरी की कोचिंग शुरू की थी।</p>



<p>जब मैंने कोचिंग लेनी शुरू की तो मुझे नहीं पता था कि ये लड़की मेरे ही बैच में एडमिशन ले लेगी क्योंकि मैंने उसे तब देखा था जब मैं अपने दोस्त के साथ एडमिशन के लिए गया हुआ था।</p>



<p>हम दोनों काफी जल्दी घर से निकल गए थे हम दोनों ने काफी सेंटर पर जाकर बातचीत की लेकिन दिमाग तो जैसे बंद ही हो गया था। फिर हमने सोचा कि जहां भी जाएंगे आरपार कर के आएंगे तो हमें वहां अच्छा भी लगा और हमने वहीं एडमिशन ले लिया।</p>



<p>फिर हम दोनों को काफी भूख लग रही थी तो हम दोनों एक होटल में चले गए।</p>



<p>मैंने ऑर्डर देने के लिए वेटर को आवाज़ लगाई तो उसने भी मेरे साथ आवाज़ लगाई। मुझे उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। पर आवाज़ से लगा कि काफी मस्त लड़की होगी। तो मैंने उठ कर उसे देखने की कोशिश की और मैं उसे देखता ही रह गया उसने काली शर्ट और नीली जीन्स डाल रखी थी। मेरा तो मुंह खुला का खुला ही रह गया था. फिर मेरे दोस्त ने आवाज़ दी तो मैं वापस बैठ गया।</p>



<p>उसने पूछा- क्या हुआ?<br>तो मैंने मजाक में कह दिया- बेटा! तेरी भाभी बैठी है वहां।<br>मैंने तो मजाक में ही ये बात कही थी पर वो सच में ही उसकी भाभी बन गई।</p>



<p>20 नवंबर से मेरी क्लास शुरू हो गई। मेरे शुरू के कुछ दिन तो बस यूं ही चले गए कुछ नए दोस्त बन गए थे और मैं भी उस लड़की को भूल गया था। मैं अपनी लाइफ और स्टडी एन्जॉय कर रहा था.</p>



<p>वो मुझे एक दिन डीटीसी की बस में मिली. मैं उसके आगे खड़ा था तो उसने पीछे से कहा- आपको उतरना है क्या?<br>मुझे वहीं आवाज़ दोबारा सुनने को मिली तो मैं भी तुरंत पीछे पलट गया और देखा तो वहीं लड़की मेरे पीछे खड़ी थी।<br>मैंने उससे कहा- नहीं मुझे नहीं उतरना.<br>और मैंने उसे आगे कर दिया।</p>



<p>जब मैंने उसकी गांड को देखा तो मुझे लगा कि ये बिल्कुल सील पैक है। फिर मन में आया कि आज भी कोई बिना चुदे रह सकती है क्या भला?<br>उस दिन तो वो मुझे फिर नहीं दिखी।</p>



<p>पर अगले दिन मैंने उसे सीढ़ियों पर मेरी ही क्लास में जाते हुए देखा.<br>अरे दोस्तो … मैं तो उस हसीना के बारे में तो बताना ही भूल गया।<br>उसका नाम काजल(बदला हुआ) है, उसकी हाइट 5’9″ है। उसका फिगर 32-28-32 है, आंखें तो ऐसी है बस कोई एक बार देखे तो खो ही जाए।</p>



<p>जब मैंने उसे सीढ़ियों पर देखा तो उसने भी मुझे देख लिया और बस हल्की सी स्माइल दी कर बढ़ गई।</p>



<p>जब वो क्लास में गई तो मैंने उसे ढूंढा पर वो नहीं दिखी। जिन भाईयों ने दिल्ली में कोचिंग ली होगी, उन्हें पता होगा वहां कुत्तों की तरह रखा जाता है स्टूडेंट्स को।<br>ख़ैर आगे बढ़ते हैं:</p>



<p>अब उसका और मेरा मिलना लगभग रोज ही होने लगा था। जब वो बस लिए इन्तजार करती थी तो मैं उसके पास चला जाता था और उससे कुछ बात हो जाती थी। बात बात में ही उसने अपना नाम मुझे बताया था और मैंने उससे अपना।</p>



<p>फिर एक दिन वो आजादपुर वाले स्टैंड पर खड़ी क्लास में जाने लिए बस का इन्तजार कर रही थी। उस दिन बस में बहुत भीड़ थी। तो मैंने उसे तो बस में चढ़ा दिया. पर मैं रह गया.<br>मैं जैसे कैसे कोचिंग में पहुंचा. तो पहले तो वो कुछ नहीं बोली।</p>



<p>जाते वक़्त मैं रोज की तरह उसके पास चला गया। पर मैं आज कुछ बोल नहीं रहा था तो वो खुद ही बोल पड़ी- मैं तो आज लेट हो जाती अगर तू ना आता!<br>तो फिर उसने बात ख़त्म करके उसने मुझे थैंक यू कहा।<br>मुझे तो जैसे करंट सा लगा।</p>



<p>फिर बस आ गई तो मैंने उसे दोबारा चढ़ा दिया बस में; उसने फिर से कातिलाना स्माइल दी।</p>



<p>मैं तो बस मरा जा रहा था। अब तक मैंने उसे बस दोस्त की तरह ट्रीट किया था। पर जो वो दिन ब दिन कर रही थी उससे तो मैं उसकी तरफ और भी आकर्षित हो रहा था।</p>



<p>फिर अगले दिन उसने मुझे दूर से ही हलो बोला; जो दो चार बन्दे वहां खड़े थे वे सभी मेरे तरफ देखने लगे।</p>



<p>मैं जल्दी से उसके पास गया और उसे ई रिक्शा में ले गया। पर दिन वो काफी जल्दी आ गई थी।<br>मैंने पूछा तो उसने बताया कि उनकी घड़ी खराब हो गई थी तो उसे टाइम का पता नहीं चला।<br>वैसे मैं भी उस दिन जल्दी चला गया था।</p>



<p>फिर मैंने उससे बातें करना शुरू किया क्योंकि हमरे पास 2 घंटे थे क्लास शुरू होने।<br>उसने बताया कि उसके पापा दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और भाई सब इंस्पेक्टर है।</p>



<p>ऐसे ही मैंने बातों में उससे उसका मोबाइल नंबर मांगा तो उसने मना कर दिया. पर उसने मुझे अपना इंस्टाग्राम आईडी दे दी। अब हम दोनों घंटों बातें करने लगे।</p>



<p>फिर उसने मुझे बताया कि उसका उन्नीसवाँ जन्म दिन आ रहा है।<br>मैंने पूछा- कब है?<br>तो उसने बता दिया।</p>



<p>फिर उसका जन्म दिन भी आ गया। मैंने उसे ट्रीट के लिए कहा तो पहले तो उसने मना किया पर काफी कहने के बाद वो मान गई। फिर जब हम जाने लगे तो मैंने बिल दिया और मैंने उसे एक चॉकलेट दिया और एक गुलाब का फूल।<br>शायद वो भी मेरी फीलिंग्स समझने लगी थी; उसने वो फूल बिना कुछ कहे ले लिया।</p>



<p>हम दोनों सब कुछ एक दूसरे के साथ शेयर करने लगे। फिर हम दोनों ने कभी कभी क्लास भी बंक करना शुरू कर दिया।<br>हम दोनों कभी लाल किला जाते … कभी कहीं … कभी कहीं … हमने सारी दिल्ली घूम ली थी।<br>आखिरकार फरवरी आ गयी।</p>



<p>मैंने 14 तारीख को उसे मुगलगार्डन में परपोज कर दिया और उसने भी हां कर दी।<br>हम दोनों बहुत खुश थे।<br>अब तो बातें और भी होने लगीं।</p>



<p>हमारी कोचिंग ख़तम होने में सिर्फ एक माह रह गया था।<br>मैं उससे अब सेक्स की बातें करने लगा था और वो भी मजे लिया करती थी। पर वो उन बातों कभी भी सीधा जवाब नहीं देती थी।</p>



<p>एक दिन मैंने उससे कहा- चलो ना कहीं पे चलते हैं घूमने!<br>तो उसने हाँ कर दी और हम दोनों पुराना किला घूमने चले गए।<br>मैंने ही यह प्लान बनाया था क्यूंकि मुझे पता था कि पुराने किले के गार्डन में कपल्स बैठे रहते हैं।</p>



<p>तो हम दोनों भी वहीं बैठ गए। हम दोनों एक पेड़ पर कमर लगा के बैठ गए. कुछ दूरी पर झाड़ी में से ‘उह … अहह आराम से करो … दर्द हो रहा है!’ आवाज़ आ रही थी।<br>काजल वहां से जाने को बोलने लगी।<br>तो हमें जाना पड़ा।</p>



<p>फिर हम 1 ऐसी जगह गए जहां कोई नहीं था. तो मैंने उसे किस करना चाहा परन्तु उसने मना कर दिया और कहा- मैं ये सब नहीं करने वाली! ओके?<br>और वो जाने लगी।<br>तो मैंने भी उसे जाने दिया और मैंने उससे बातें कम कर दी।</p>



<p>वो अब खुद ही मुझसे बातें करने का ट्राई करने लगी। तो मैं 1 या 2 बार उससे बोल लेता था। अब उसे भी लगा कि उसे मुझे किस करने देना चाहिए था।</p>



<p>अब हम दोनों फिर से सेक्स रिलेटिड बातें करने लगे। वो भी खुल के मेरा साथ देने लगी। अब वो मुझे किस करने दे रही थी। मैंने उसे जब भी मौका मिलता किस किया करता था। आग दोनों तरफ लगी थी।</p>



<p>मैंने उसे किसी तरह सेक्स करने के लिए मना लिया। पहले तो वो मान नहीं रही थी पर मैं भी कमीना था, कसम दे कर मना ही लिया।<br>फिर काजल ने पूछा- हम कहाँ जाएंगे?<br>मैंने कहा- मेरे दोस्त का फ्लैट है, हम उस पर चले जाएंगे।</p>



<p>फिर मैंने रात को ही अपने फ्रेंड को कॉल किया पर उसने भी हाँ कह दी। अगले दिन हम दोनों 9 बजे ही उसके फ्लैट पे चले गए।<br>उस दिन काजल काफी हॉट लग रही थी।</p>



<p>मैंने रूम का लोक खोला और उसे बेड पे बिठा के कोल्डड्रिंक दी।</p>



<p>अब मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब हम दोनों ने काफी देर तक ऐसे ही आपस में किस करना जारी रखा। मैंने धीरे से उसकी चूची को दबा दिया तो उसने जोर से आह भरी और मुझ से लिपट गई।</p>



<p>मैंने 10-15 मिनट उसे किस किया फिर हम दोनों अलग हो गए। मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी अब वो सिर्फ ब्रा में ही थी। उसने लाल रंग की जालीदार ब्रा पहन रखी थी।<br>मैंने उससे पूछा- ये तो तुम्हारे पास नहीं थी।<br>उसने कहा- कल ही ले ली थी। मुझे पता था कि तुम कहीं ना कहीं का प्लान जरूर बना रहे होगे।</p>



<p>और वो ये कहते ही मुझे किस करने लगी और मैं उसकी चूची दबा रहा था। वो लगातार उम्म्ह … अहह … हय … ओह … की आवाज़ निकाल रही थी।</p>



<p>अब मैंने उसकी ब्रा को निकाल दिया; तो मैं तो जैसे सपनों में ही खो गया; मैंने उसे जोर से किस किया और कहा- इतने मस्त चूचे तो मैंने आज तक नहीं देखे।<br>उस टीनएज लड़की ने कहा- ले ले मोहित … आज के बाद इन पर तेरा ही हक है। ये तो तेरा वेट कर रहे हैं. चूस इनको मोहित और जोर से चूस!</p>



<p>उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब नहीं रहा जा रहा … कुछ कर ना मोहित … मैं मर जाऊंगी।<br>अब उसकी सिसकारियां और भी जोर जोर से होने लग गई थी।<br>मैंने उससे कही- आज तो मैं तुझे अपनी दुल्हन बन कर ही चोदूंगा।<br>उसने कहा- जो भी करना है, जल्दी कर, मुझसे नहीं रहा जा रहा अब।</p>



<p>मैंने उसकी जींस उतार दी और अब वो सिर्फ पैंटी में ही रह गई थी। मैंने पैंटी पर उंगली फेरी तो वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी पैंटी को झट से उतार दिया और उसकी चुत में जीभ डाल कर चाटने लगा.</p>



<p>वो जोर जोर से चिल्ला रहे थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह्ह ऊऊह्ह हाहा हा!<br>उसने अब मेरा सिर में अपनी उंगली फेरनी शुरु कर दी।</p>



<p>5 मिनट तक चूत चाटने के बाद वो अब मेरा सिर अपनी चूत पर दबा रही थी। मैं समझ गया था कि ये झड़ने वाली है तो मैंने उसे और जोर चूसना शुरू कर दिया। वो इतनी जोर से झड़ी कि मेरा मुंह उसके कामरस से पूरी तरह भीग गया था।</p>



<p>वो अब शांत हो गई थी. मैंने उसे अपने लंड की तरफ करके चूसने के लिए बोला तो नहीं मानी. फिर मैंने सोचा कि छोड़ यार … अब तो ये अपना ही माल है, जब मन करेगा तब चुसवा लेंगे।</p>



<p>अब मैं अपना लंड काजल की चूत पर रगड़ने लगा वो फिर से गर्म होने लगी थी।<br>मैंने काजल के पास जाकर उसके कानों में कहा- थोड़ा दर्द होगा, सम्भाल लेना।<br>उसने आंखों ही आंखों में मुझे मंजूरी दे दी।</p>



<p>मैंने धक्का लगाया तो लंड फिसल गया।<br>वो थोड़ा सा मुस्कुरा रही थी। मैंने सोचा ‘उस्ताद ये तो मजाक बना रही है।’</p>



<p>फिर मैंने इस बार दुबारा धक्का लगाया तो सिर्फ टोपा ही उसकी चूत में घुसा था।<br>वो जोर से चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’<br>उसने कहा- मुझे नहीं करना इस बाहर निकाल ले अभी।<br>मैंने उसे समझाया तो वो मान गई और मैंने उसे किस किया तो वो नॉर्मल हो गई।</p>



<p>अब मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब उसकी आंखों में आसूं आ गए थे।<br>मैंने वैसे ही उसे किस किया और जब वो नॉर्मल हुई तो एक और धक्का लगाया। इस बार पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और झिल्ली भी फट गई थी और उसमें से खून भी आ रहा था।<br>मैंने उसे खून के बारे में नहीं बताया।<br>पर अब वो रो रही थी।</p>



<p>मैं वैसे ही 5 मिनट रुकने के बाद आगे पीछे होने लगा। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो कह रही थी – आआह्ह ऊऊह्ह हा हा हा … और जोर से चोद मेरे इस छेद को बहुत आग लगी हुई थी इसमें जब से तुझे देखा था।<br>मैंने कहा- तूने मुझे कब देखा?<br>तो उसने कहा- पहले मेरी आग शांत कर; फिर आराम से बता दूंगी।</p>



<p>मैं भी जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। वो अभी तक 2 बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा होना बाकी था।<br>15 मिनट की धक्का पेल के बाद मैं भी आने वाला था। मैंने उससे बस इतनी ही कहा- कहाँ?<br>उसने कहा- अंदर।<br>और मैं उसके अंदर ही झड़ गया।</p>



<p>मैं एक तरफ होकर लेट गया। हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी। हम दोनों पसीने में लथपथ थे। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था।<br>मैंने पूछा- मज़ा आया?<br>उसने कहा- आज से मैं तुम्हारी हूं। और जब तुम कहोगे हम मजे किया करेंगे।</p>



<p>उस दिन हमने 2 बार सेक्स किया। मैंने उसे किस किया और उसके कपड़े उसे दिए। वो बाथरूम में जाकर थोड़ा ठीक ठाक होकर आई तो हम दोनों चल दिए। वो अपने घर चली गई और मैं अपने।</p>



<p>मैंने उसे काफी बार चोदा है लेकिन आज किसी कारण से वो मेरे साथ नहीं है। मुझे पता लगा कि मुझसे अलग होने के दो महीने बाद ही उसकी शादी हो गई थी।<br>अब मैं उसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश नहीं करता।<br>तो दोस्तो, यह थी मेरी ज़िन्दगी की सच्ची कहानी टीनएज लड़की की।<br>mk502038@gmail.com</p>
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		<title>मार्केटिंग मैनेजर की चुत चुदाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:53:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Gandi Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Real Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[अन्तर्वासना की सभी चूतों को मेरे लंड का सलाम, मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज का पुराना पाठक हूँ और 4-5 साल से अपनी हिन्दी सेक्सी स्टोरी लिखना चाह रहा था, मगर समय नहीं मिल पा रहा था. मैं 30 साल का अविवाहित युवक हूँ और लखनऊ उत्तर प्रदेश में रहता हूँ. मैं एक साधरण कद काठी <a title="मार्केटिंग मैनेजर की चुत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/manager-ki-chut-chudai/" aria-label="Continue reading मार्केटिंग मैनेजर की चुत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अन्तर्वासना की सभी चूतों को मेरे लंड का सलाम, मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज का पुराना पाठक हूँ और 4-5 साल से अपनी हिन्दी सेक्सी स्टोरी लिखना चाह रहा था, मगर समय नहीं मिल पा रहा था. मैं 30 साल का अविवाहित युवक हूँ और लखनऊ उत्तर प्रदेश में रहता हूँ. मैं एक साधरण कद काठी का 5 फुट 7 इन्च का इन्सान हूँ. फिलहाल मैं अपना व्यापार करता हूँ, यह कहानी मेरी तब शुरू हुई थी, जब मैंने 2009 में मुम्बई की एक कम्पनी में जॉब शुरू की थी.</p>
<p>वैसे दोस्तो, मैं लिखने के मामले में थोड़ा आलसी हूँ इसलिए कोई गलती कहानी में हो जाए तो माफ कर देना.. मगर यह सेक्स कहानी है बिल्कुल सच्ची. </p>
<p>सन 2009 में मेरी एक गर्ल फ़्रेड थी दूसरे धर्म की… और उसकी शादी जून में उसके भाइयों ने कर दी क्योंकि उनको मेरे और उनकी बहन के संबंधों के बारे में पता लग गया था. इस वजह से मैं दो महीने तक डिप्रेशन में चला गया. उसके बाद मैंने सोचा मैं खुद का ही नुकसान कर रहा हूँ, तो मैंने मुम्बई की एक कम्पनी में एरिया मैनेजर की जॉब ज्वाइन कर ली. </p>
<p>इस कम्पनी में मेरी रिपोर्टिंग कम्पनी की स्टेट हेड एक महिला लेती थी. उसकी उम्र 39 साल थी, और उसका नाम साराह (काल्पनिक) था. वैसे मेरी साराह से कोई मुलाकात नहीं हुई थी, मुझे तो कम्पनी के एच आर ने ज्वाइन करवाया था. चूंकि मैं सेल्स में था तो मेरी फील्ड जॉब थी और मुझे रोज की रिपोर्टिग मेल से देनी होती थी. तथा दिन में भी साराह मैम मुझे 2-3 बार फोन करके जानकारी लेती रहती थी. </p>
<p>जब दिन में साराह मैम फोन करती थी तो कभी कभी मैं उदास रहता था, तो वो पूछने लगती कि आखिर क्यों दुखी लग रहे हो.<br />
मैं अपनी गर्लफ्रेड को भुला नहीं पा रहा था, इसलिए कभी कभी रो लेता था. आखिरकार एक दिन साराह मैम के ज्यादा पूछने पर मैंने सब बता दिया. उनके कहने पर एक दिन मैंने अपनी गर्लफ्रेड का नम्बर भी दे दिया और फोटो भी ईमेल कर दी.</p>
<p>अब जब भी साराह मैम का फोन आता तो ज्यादातर बात गर्लफ्रेंड को लेकर ही होती और वो मुझे समझाती रहती थी. मैडम को मुझे से सहानुभूति हो गई थी. साराह ने मुझे अपना पर्सनल नम्बर भी दे दिया था और बोल दिया था कि तुम मुझे कभी भी कॉल कर सकते हो.</p>
<p>आफिस से छुट्टी के बाद साराह मैम जब घर जाती थी, तो लोकल बस पर बैठ जाने के बाद मुझे काल करती थी और 40-45 मिनट मेरे से जब तक बात करती रहती थी.. जब तक उनका स्टाप नहीं आ जाता था.</p>
<p>अब वो मुझे शाम को 9 बजे के करीब 5-7 मिनट के लिए भी कॉल करती थी. जब उसके पति नहाने के लिए बाथरूम में जाते थे.</p>
<p>इतनी बातें जरूर हम दोनों में होती थीं, लेकिन अभी तक किसी ने किसी को प्रपोज नहीं किया था.</p>
<p>साराह मैम के पति सरकारी जॉब में हैं, तो वो सुबह 6 बजे ड्यूटी पर चले जाते थे. उनके जाने के बाद साराह मैम मेरे से फोन पर एक घंटा बात करती थी.</p>
<p>ऐसे ही एक दिन हम दोनों सुबह फोन पर बात कर रहे थे तो साराह मैम ने पूछा कि तुमने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स नहीं किया?<br />
तो मैंने भी कहा- नहीं, सिर्फ फोन पर किया है.<br />
यह सुनकर के साराह मैम हैरान होते हुए बोली- ये सब फोन पर कैसे हो सकता है.. और यदि हो सकता है तो फिर आज मेरे साथ भी कर लो, लेकिन वादा करो तुम अपनी गर्ल फ्रेड को याद करके रोओगे नहीं, मैं तुम को खुश देखना चाहती हूँ.</p>
<p>यह सुन कर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने साराह के साथ फोन सेक्स चैट शुरू कर दिया. लगभग 25-30 मिनट में मैंने साराह को इतना उत्तेजित कर दिया कि उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी.<br />
साराह मैम बहुत खुश थी और हैरान भी कि फोन पर भी सेक्स किया जा सकता है.</p>
<p>अब साराह मैम जैसे ही घर से आफिस के लिए निकलती तो मुझे फोन करती और जब तक उनका आफिस नहीं आ जाता.. बात चलती रहती. ये सब छुट्टी के बाद भी चलता रहता था. अब यह सिलसिला रोज का हो गया था. फिर चार पांच महीने बाद ही मेरा कम्पनी के एम डी से मेरे कमीशन को लेकर पंगा हो गया और मैंने जॉब छोड़ दी, लेकिन साराह मैम से मेरी बात होती रही. </p>
<p>साराह मैम अब मेरे से मिलने की जिद करने लगी थीं कि तुम अब जल्दी से मुम्बई आ जाओ और मुझ से मिल कर जाओ.<br />
लेकिन मैं हमेशा टाल जाता था.<br />
कुछ दिन के बाद साराह मैम के पति का 10 दिन का ट्रेनिंग का प्रोग्राम लग गया तो साराह मैम ने मुझे बताया- मेरे हसबैंड दस दिन के लिए आउट ऑफ़ स्टेशन जा रहे हैं, अब मौक़ा अच्छा है, तुम आ जाओ. </p>
<p>मुझे भी लगा कि ऐसा मौक़ा बार बार नहीं मिलेगा, मैडम की चूत मिलनी तो निश्चित ही थी, मैंने भी अपने ट्रेवल एजेन्ट से कह कर स्लीपर का टिकट बुक करा दिया और तय तारीख और समय पर मेरी ट्रेन मुम्बई पहुँच गई. </p>
<p>मैं भी पहली बार ही मुम्बई गया था. साराह मैम मुझे रिसीव करने आफिस से ही सीधे रेलवे स्टेशन आ गई थी. </p>
<p>अब तक हम लोगों ने एक दूसरे को देखा तो नहीं था, मगर मोबाईल की वजह से एक दूसरे को पहचानने में कोई परेशानी नहीं हुई. स्टेशन से हमने टैक्सी ली और सीधे हम साराह मैम के घर पहुँच गए. मैं जब साराह मैम के घर पहुँचा तो उनके दोनों बच्चे कोचिंग गए थे. मगर यह बात मुझे नहीं पता थी. </p>
<p>पानी पीने के बाद मैं खड़ा था तो साराह मैम मेरे ऊपर एक दम से हमला बोलते हुए मेरे होंठों पर किस करने लगी. थोड़ा सम्भलते हुए मैंने भी साथ देना शुरू कर दिया, मगर दो मिनट के बाद ही हम दोनों अलग हो गए.<br />
उस शाम को तो मैम के दोनों बच्चे खाना खाने के बाद सो गए लेकिन हम दोनों पूरी रात सिर्फ बातें करते रहे.. सुबह सोये. </p>
<p>अगले दिन मैम ने छुट्टी ले रखी थी. साराह के दोनों बच्चे स्कूल चले गए तो मैम किचन में कुछ बना रही थी. मैडम ने एक पतला सा होजरी का गाउन पहन रखा था वो भी ढीला ढाला सा… मैं गया और पीछे से उसे पकड़ लिया, मैं अपना लंड उनकी गांड की दरार में छुआ कर उनकी चूचियां पकड़ कर मसलने लगा…<br />
मैडम ने मुस्कुराते हुए पीछे देखा और बोली- बहुत बेसबरे हो रहे?</p>
<p>मैं बोला- मैडम चौदह घंटे बीत गए मुझे यहाँ आये हुआ और अभी तक कुछ नहीं हुआ, फिर भी कहती हो कि बेसबरे हो रहे हो? और कितना इम्तिहान लोगी मेरे सब्र का?<br />
तो मैम ने एक हाथ से मेरे गाल को थपथपाते हुए कहा- तो चलो बेडरूम में चलते हैं.</p>
<p>मैं साराह को लेकर के बेडरूम में आ गया. मैंने साराह के होंठों को किस करना शुरू कर दिया. लगभग 3-4 मिनट के बाद मैंने साराह का गाउन उतार दिया और उस में से उसके 32 साइज के मम्मों को देख कर मैं हैरान था कि दो बच्चों की माँ और फिगर इतना मस्त.</p>
<p>खैर.. मैंने साराह की ब्रा भी उतार दी और मैंने उसके मम्मों पर किस करना शुरू कर दिया. दोस्तो क्या बताऊं यार साराह के चूचे पीते हुए मैं खुद को भूल गया. मैं उसके चूचे ऐसे पीने लगा जैसे मैं वर्षों का प्यासा हूँ. साराह अब सिर्फ पैंटी में थी.</p>
<p>साराह के मम्मों को चूसते चूसते मैंने अपना एक हाथ उन की पैंटी में घुसा दिया और मैडम की चूत में उंगली करने लगा. मैडम की चूत एक दम क्लीन शेव चिकनी लग रही थी, मुझे ऐसे लगा कि मेरा हाथ मक्खन पर फिसल रहा हो.</p>
<p>तभी साराह ने कहा- अपना लंड भी मुझे देखने दो ना.<br />
तो मैंने अपना लोअर नीचे करते हुए कहा- खुद ही निकाल लो. साराह ने मेरी चड्डी नीचे सरकाते हुए मेरा लंड बाहर निकाल लिया.<br />
मेरा लंड देख के साराह खुश हो गई और बोली कि ये तो एक दम मेरे पति जैसा ही है, उतना ही लंबा और मोटा! </p>
<p>साराह मेरे लंड को अपने नाजुक हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी, मुझे बहुत मजा आ रहा था.<br />
कुछ देर के बाद बाद मैंने साराह की पैंटी भी निकाल दी और साराह को बेड पर लेटा दिया. पूरी नंगी साराह मेरे सामने लेटी थी, मेरा लंड उसका चिकना बदन देख कर सलामी दे रहा था, लंड को हिलते देख मैडम ने उसे फिर अपने हाथों में पकड़ लिया और बोली- ये कुछ ज्यादा ही उतावला हो रहा है.<br />
मैंने कहा- यार इसे अपना निशाना सामने दिख रहा है.<br />
मैडम बोली- तो देर किस बात की है, आ जाओ!<br />
मैंने कहा- इतनी जल्दी नहीं, अभी तो बहुत कुछ बाक़ी है.</p>
<p>फिर मैंने साराह से पूछा- घर में शहद नहीं है क्या?<br />
तो साराह ने कहा- फ्रिज में है.. निकाल लाओ. </p>
<p>मैं रसोई में गया और शहद ले आया. मैंने थोड़ा सा शहद साराह की नाभि पर गिरा दिया और चाटने लगा. उसके बाद मम्मों और बगल में भी शहद डाल के चाटने लगा.</p>
<p>जब मैंने शहद साराह की जांघ पर और चूत के अगल बगल में डाल कर अपनी जीभ घुमाई, तो साराह का पूरा शरीर कंपकंपाने लगा. साराह उत्तेजना के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी.</p>
<p>अब मैं साराह की जांघों और चूत के अगल बगल में बड़ी तल्लीनता से चाट रहा था और साथ में मम्मों को भी दबा रहा था.<br />
दोस्तो अब मैंने थोड़ा सा शहद सीचे मैडम की चूत की दरार के बीच में टपकाया और जैसे ही मैंने अपनी जीभ की नोक साराह की चूत में घुसाई, वैसे ही साराह की चीख निकल गई और ढेर साराह गाढ़ा चूतामृत निकल कर बाहर आ गया, जिसको मैंने शहद के साथ ही चाट लिया. </p>
<p>अब मैडम बेचैन हो गई, कहने लगी- बस अब बहुत खेल लिए, अब अपने शेर को मेरी गुफा में घुसा दो.<br />
मैंने भी मैदन की तड़प को समझा और अपना शर्ट उतार दिया. लोअर और चड्डी तो मेरी पहले ही उतर चुकी थी. बनियान मैंने पहनी ही नहीं थी.<br />
पूरा नंगा मैं पूरी नंगी लेटी मैडम के बदन के ऊपर आ गया. मेरा लंड मैडम की चूत पर दस्तक दे रहा था, मैंने कोई जल्द बाजी नहीं की, मैं आराम से मैडम के होंठ चूसने लगा, उनके मुख में अपनी जीभ घुसाने लगा. मैडम मेरी जीभ को चूसने लगी. लेकिन मैडम को चुदाने की बेचैनी हो रही थी तो वो खुद अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाने लगी.</p>
<p>मैंने मैडम को जांघें चौड़ी करने को कहा, उन्होंने अपने पैर दायें बायें फैला कर अपनी जांघें खोल दी और मेरे लंड का निशाना अपनी चूत के छेद में सेट कर लिया. उन्होंने नीचे से अपने चूतड़ उचकाये कि लंड अंदर घुस जाए लेकिन ऐसे कैसे लंड अंदर घुस जाता… जब मैंने ऊपर से एक झटका अंदर को मारा तो गीली चूत में मेरा लंड ऐसे घुस गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.<br />
मैडम से मुख से निकला- उम्म्ह … अहह … हय … ओह …</p>
<p>बस इसके बाद साराह की चुत की दमदार चुदाई हुई लेकिन दोस्तो अब इससे ज्यादा मैं नहीं लिख सकता.. क्योंकि मेरे लंड महाराज अपने रौ में आ गए हैं और इसको शान्त करना जरूरी है. </p>
<p>आप सबके ईमेल सुझाव का इन्तजार करूँगा.. खास कर महिलाओं और लड़कियों के.. मेरे ईमेल पर सम्पर्क करें. मेरा ई-मेल पता है.<br />
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