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	<title>Porn story in Hindi &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:36:14 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Porn story in Hindi &#8211; Kahani18</title>
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		<title>मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:36:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Mami Ki Chudai Story]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[मैं पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर रहता था. एक रात मैंने चुपके से मामा मामी की चुदाई देखी. तब से मैं मामी की चुदाई के ख्वाब देखने लगा. मैंने मामी की गर्म चूत की प्यास कैसे बुझाई? नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं इंदौर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरी <a title="मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/maami-ki-chudai-pyas/" aria-label="Continue reading मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैं पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर रहता था. एक रात मैंने चुपके से मामा मामी की चुदाई देखी. तब से मैं मामी की चुदाई के ख्वाब देखने लगा. मैंने मामी की गर्म चूत की प्यास कैसे बुझाई?<br />
<span id="more-347"></span></p>
<p>नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं इंदौर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 22 साल है.</p>
<p>मेरे मामाजी ग्वालियर में रहते हैं. उनका परिवार बहुत ही मॉडर्न है. मामा जी के घर पर मेरे नाना-नानी, मामा-मामी और उनके दो जुड़वा बच्चे हैं जो बहुत छोटे हैं.</p>
<p>मामी जी के बारे में बताऊं तो वह बिल्कुल गदराई हुई मस्त जवान महिला है. उनके बूब्स मीडियम साइज के हैं. वह बहुत ही गोरी भी हैं देखने में। मतलब कि उन्हें देख कर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो सकता है.</p>
<p>मामी जी से मेरी बहुत ही अच्छी दोस्ती है और मैं उनसे अपनी हर बात शेयर करता हूं लेकिन उनसे मैंने कभी भी सेक्स वगैरह के बारे में बात नहीं की थी। मैंने कभी भी मामी जी को गलत नजरों से नहीं देखा था। </p>
<p>अब मैं असली कहानी पर आता हूं. यह कहानी तब की है जब मैं 20 साल का था और मेरे कॉलेज का फर्स्ट ईयर था. जब मैं वहां पर पढ़ाई करने के लिए गया तो मेरा बहुत ही अच्छे तरीके से स्वागत किया गया और मेरे लिये स्पेशल खाना बनाया गया. रात का खाना खाने के बाद हम लोगों की सोने की तैयारी हो गई.</p>
<p>फ्लैट में दो ही कमरे थे। एक में नाना-नानी सोते हैं और एक में मामा जी, मामी जी और उनके बच्चे सोते हैं.<br />
मैं ड्राइंग रूम में टीवी देखने लगा और वहीं सोफे पर सो गया.</p>
<p>कुछ समय बाद मेरी आंख खुली और मैं बाथरूम में गया तो मुझे कुछ आवाजें आईं. मैंने मामी जी के कमरे के पास जाकर देखा तो देखता ही रह गया. </p>
<p>मामा जी बिल्कुल नंगे लेटे हुए थे। मगर उनका लंड बहुत ही छोटा था. मामी जी कपड़े उतार रही थी. मामी जी केवल ब्रा पेंटी में थी और उनकी गोरी गोरी मांसल जांघें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को रगड़ने लगा.</p>
<p>उनके कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था जिसकी रोशनी में बहुत ही कम दिख रहा था और मैं गेट की सांस(दरार) में से यह सब देख रहा था. मामी जी लेट गई और मामा जी मिशनरी पोजिशन में आकर उन्हें चोदने लगे और 7-8 धक्कों के बाद ही मामा जी का निकल गया और वह चुपचाप लेट गए. </p>
<p>मामा-मामी की चुदाई देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मेरे अन्दर भी सेक्स जाग गया था. मेरा लंड बिल्कुल तन गया था. मैं अपने लंड को वहीं पर खड़ा होकर मसलने लगा.</p>
<p>मैं अभी भी वहीं पर देख रहा था और मैंने महसूस किया कि मामी जी के चेहरे पर हल्की सी मायूसी सी दिखाई दे रही थी. वो मामा जी के द्वारा किये गये सेक्स से खुश नहीं लग रही थी. मुझे भी ऐसा लग रहा था कि मामा जी का बहुत जल्दी निकल गया. इसी वजह से मामी की प्यास अधूरी रह गई होगी.</p>
<p>कुछ देर तक मामा जी लेटे रहे फिर उठ कर एक तरफ होकर चादर तान ली और सो गये. मगर मामी की नंगी चूत अभी भी मुझे दिखाई दे रही थी. मैं वहां से हटना नहीं चाह रहा था. मैंने पहली बार मामी की नंगी चूत को देखा था और बार-बार उसको देख कर मैं अपने लंड को मसल कर मजा लेने में लगा हुआ था.</p>
<p>उसके बाद मामी जी ने अपनी चूत में अपने हाथ से ही उंगली करनी शुरू कर दी. कुछ ही देर में मामी जी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>इधर मैं मामी जी की चूत को देख कर अपना लंड मसल रहा था और वहां मामी जी अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी. वो फिर जोर जोर से उंगली करने लगी और उनके मुंह में से तेज तेज सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>उसके बाद मैं वहां से आ गया. मैं चुपचाप जाकर सोफे पर लेट गया. मगर लेटे हुए भी मुझे नींद नहीं आ रहा थी. उस रात को मामी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया. मैं काफी देर तक मामी की चूत के बारे में सोच कर मुट्ठ मारता रहा. जब तक मेरे लंड से वीर्य न निकल गया मुझे शांति नहीं मिली. अपना वीर्य निकाल कर फिर मैं शांत हो गया और मुझे नींद आ गई. </p>
<p>अगली सुबह को जब मेरी आंख खुली तो मामी मुझे चाय के लिए जगा रही थी. मैंने आंखें मलते हुए उनको देखा तो वो चाय का कप नीचे रख रही थी. मैंने उनके चूचों को देख लिया. मुझे जब उनके चूचों की झलक मिली तो मेरे लंड में हलचल सी होने लगी. उनकी वक्षरेखा देख कर मेरा लंड एकदम से अंदर ही अंदर तनना शुरू हो गया.</p>
<p>मैं उनको ताड़ रहा था और मामी ने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया. मामी ने मुझसे पूछा- ऐसे क्यों देख रहा है?<br />
मैंने शर्म के मारे नजर नीचे कर ली.<br />
फिर मामी ने कहा- चाय पी लो, ये ठंडी हो रही है.</p>
<p>उस दिन मेरा मन कर रहा था कि मामी के चूचे को दबा ही दूं लेकिन अभी मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. मामी वापस चली गई.</p>
<p>उसके बाद मैं कुछ दिन के लिए अपने घर पर चला गया. वहां पर जाकर भी मैं मामी के बारे में ही सोचता रहा. उनके चूचे मुझे रात को सोने नहीं देते थे. मैं रोज उनके बारे में सोच कर मुट्ठ मार लिया करता था. </p>
<p>कुछ दिन बीत जाने के बाद नानी ने मेरी मां के पास फोन किया और मेरे आने के बारे में पूछा क्योंकि मामा जी कुछ दिन के बाहर जा रहे थे और नानी ने मां को कह दिया कि वो मुझे यहां मामा के घर जल्दी ही भेज दें क्योंकि वहां पर घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं था. मां ने मेरे कपड़े पैक कर दिये और मैं वापस नानी के यहां आने के लिए तैयार हो गया. </p>
<p>मैं मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि अब मुझे मामी को चोदने का मन कर रहा था और मैं सोच रहा था कि अब ये मौका भी अच्छा हाथ लगा है क्योंकि मामा के रहते हुए तो मैं मामी से इस तरह की बात नहीं कर पाता. अब जो कि मामा बाहर जा रहे हैं तो मामी की चूत चुदाई का रास्ता भी मेरे लिए आसान हो जायेगा. मैं किसी ने किसी बहाने से मामी से उनके मन की इच्छा जान ही लूंगा. </p>
<p>मेरे नानी के यहां आने पर मामा जी तैयार हो गए और मैं उन्हें ट्रेन में बिठा कर वापस आ गया. शाम हुई तो खाना वगैरह खा कर फिर सोने की तैयारी होने लगी. मामी जी ना बोला कि रोहित तुम हमारे साथ ही सो जाओ, आज तो मामा जी भी नहीं है.</p>
<p>मैं तो जैसे मामी के मुंह से यही सुनना चाह रहा था. मैं झट से तैयार हो गया उनके साथ सोने के लिए. हम लोग मामी जी के साथ ही सोने लगे.</p>
<p>मामी एक साइड सो रही थी, मैं एक साइड में था और बीच में दोनों बच्चे सो रहे थे. अब मैं मामी जी के सोने का इंतजार कर रहा था.</p>
<p>रात को करीब 12:00 बजे जब मुझे विश्वास हो गया कि सब सो गए हैं तब मैं जागा और मामी जी के बगल में जाकर लेट गया और उनकी जांघ पर हाथ रख कर उनकी मांसल जाँघों को छूने लगा.</p>
<p>छूते ही मेरा लंड जैसे फटने को हो गया. मैं धीरे-धीरे जांघों पर हाथ फेरने लगा. मैं उनकी मैक्सी के ऊपर से ही हाथ फेरने में लगा था. मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा. मामी ने शायद पैंटी नहीं पहनी हुई थी. उनकी चूत की झांट मेरे हाथ पर महसूस हो रही थी. यह अहसास पाकर मैं तो जैसे पागल ही हो गया. </p>
<p>मैंने धीरे-धीरे मैक्सी को ऊपर उठाना शुरू किया और कमर तक मैक्सी ऊपर कर दी. अब मैं भूल चुका था कि अगर वह जाग गई तो कितना बड़ा कांड हो जाएगा. मैं तो हवस के चक्कर में पागल ही हो गया था.</p>
<p>मैंने अपना लौड़ा निकाला और उनकी जांघों पर फेरने लगा.</p>
<p>तभी थोड़ी सी हलचल हुई और मामी मेरी तरफ पीठ करके लेट गई. एक बार तो मैं घबरा गया … लेकिन मामी जगी नहीं थी शायद … इसलिए मैंने दोबारा से कोशिश करने के लिए सोचा.<br />
मैं थोड़ा रुका और फिर अपना लौड़ा उनकी गांड पर रगड़ने लगा. मेरा मोटा और सख्त लंड उनको अपनी गांड पर शायद महसूस हुआ तो वो एकदम से उठ गई. </p>
<p>मैं भी झट से नीचे लेट गया. उसके बाद मैंने आंखें बंद कर लीं. मुझे डर लग रहा था. पता नहीं मामी ने क्या देखा और क्या नहीं. मगर जब मैंने दोबारा से आंखें खोलीं तो वो अपनी मैक्सी को अंधेरे में ही नीचे करके वापस लेट चुकी थी. मगर मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैं सोच रहा था कि शायद ये मौका फिर नहीं मिलेगा. </p>
<p>कुछ समय बाद मैंने उनके मम्मों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उन्हें दबाने लगा.<br />
मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था तो मैंने मैक्सी ऊपर उठाई और जल्दी से लौड़ा निकाल कर उनकी चूत के छेद पर रख दिया. तभी मामी जग गई और मुझे देख कर एकदम सकपका गई और धीमी आवाज में चिल्लाते हुए गुस्से से बोली- यह क्या कर रहे हो रोहित? तुम्हें समझ नहीं आता? मैं तुम्हारी मामी हूं. यह सब जो तुम कर रहे हो, यह गलत है.</p>
<p>मामी का गुस्सा देख कर मेरी गांड फट गई और मैंने उनको सॉरी बोला और उठ कर कमरे से बाहर चला गया और सोफे पर लेट गया और वहीं लेटे लेटे सो गया. मुझे डर लग रहा था कि कहीं वह शिकायत ना कर दे.</p>
<p>फिर सुबह वह चाय लेकर आई और मुझे जगाया. मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं. मैं नजर नीचे करके चाय पीता रहा और वह मेरे सामने ही टेबल साफ कर रही थी तो उनके मम्मों के दर्शन होने लगे.</p>
<p>पता नहीं क्यों अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था. जब भी उनको देखता था तो खुद को रोकना मुश्किल हो जाता था. उनके चूचों को देखते ही उस वक्त भी मेरा लौड़ा तो जैसे फटने को हो रहा था. मैं चाय बीच में ही रख कर बाथरूम की तरफ भागा.</p>
<p>मुझे एकदम से ऐसे अधूरी चाय छोड़ कर जाते हुए देख कर मामी ने पूछ लिया कि कहां जा रहे हो. मैंने बाथरूम में घुस कर मामी को अंदर से ही आवाज लगाई कि कुछ नहीं मामी, बस अभी आ रहा हूं वापस.</p>
<p>अंदर जाने के बाद मैं बाथरूम का गेट लगाना भूल गया और लंड की मुट्ठ मारने लगा. मेरी आंखें बंद थीं और मैं तेजी से अपने लंड को हिला रहा था. पता नहीं कब मामी आ गई और उन्होंने मुझे देख लिया.</p>
<p>जब मुझे मामी के आने की आवाज सुनाई दी तो मैंने आंखें खोली ही थीं लेकिन उस वक्त मेरे हाथ में मेरा लंड था और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकल रही थी. मामी ने मुझे इसी हालत में देख लिया.</p>
<p>उन्होंने हैरानी से मेरे लंड की तरफ देखा और फिर मेरे चेहरे की तरफ. फिर वो चली गईं.</p>
<p>मैंने सोचा कि मेरी किस्मत ही खराब है. मामी ने मेरा लंड देख कर भी कोई रिएक्शन नहीं दिया. अगर आज मामी गर्म हो जाती तो आज तो बाथरूम में ही मामी की चूत की चुदाई कर देनी थी मैंने। </p>
<p>मामी गेट बंद करके वापस चली गई रसोई में और मैं वापस आकर सोफे पर बैठ गया.<br />
फिर हम लोगों ने ज्यादा कुछ बात नहीं की.</p>
<p>शाम को खाने के वक्त मामी ने सुबह वाली बात का जिक्र करते हुए कहा- सुबह के लिए सॉरी रोहित. मुझे ऐसे नहीं आना चाहिए था.<br />
मैंने भी मामी को कह दिया- कोई बात नहीं मामी. मैं तो खुद आपसे कल रात के लिए माफी मांगने वाला था. मगर कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी.</p>
<p>मगर फिर मामी ने जो बोला … वो सुन कर मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ.<br />
मामी ने कहा- कल की बात तो कल ही खत्म हो गई. अगर तुम्हारा मन करे तो तुम आज भी मेरे साथ ही सो सकते हो.</p>
<p>यह सुनते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने जल्दी से खाना खाया और अंदर जाकर लेट गया. मैं बस सोने की एक्टिंग कर रहा था. मैं तो असल में मामी के आने का इंतजार कर रहा था. मेरा लंड पहले से ही मामी की चूत के बारे में सोच कर तना हुआ था. मैंने अपने लंड को अंडरवियर में दबाया हुआ था ताकि मामी को मेरा तना हुआ लंड दिखाई न दे.  </p>
<p>तभी मामी जी आई कमरे में और लाइट जलाई. तब तक बच्चे सो चुके थे और उन्हें लगा शायद मैं भी सो चुका हूं. मैं धीरे से आंख खोल कर देखा तो मामी अपने कपड़े उतार रही थी. वो अपने कपड़े उतार कर ब्रा और पैंटी में ही चादर के अंदर आ गई. उन्होंने लाइट बंद कर दी थी और कमरे में अंधेरा हो गया था. </p>
<p>मैं अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगा. मैं जानता था कि अंधेरे में मामी को कुछ दिखाई नहीं पड़ेगा. वैसे भी मुझसे तो रहा नहीं जा रहा था. मामी और मेरे बीच में पिछली रात की तरह बच्चे सो रहे थे. </p>
<p>एक दो घंटे के बाद भी मुझे नींद नहीं आई और मैं कल रात की तरह ही उठ कर मामी के बगल में जाकर लेट गया. मैंने धीरे से मामी के तन से चादर को हटाया और उनके बदन पर हाथ फिराने लगा. आज मामी कोई हलचल नहीं कर रही थी. मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा. मैंने मामी के चूचों को ब्रा के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया. मामी ने तब भी कोई हरकत नहीं की. </p>
<p>अब मेरी हिम्मत भी बढ़ गई थी. मैंने मामी की पैंटी को मसला और उनकी चूत को छूते ही मैं बेकाबू हो गया. मैंने मामी की पैंटी को खींच कर नीचे करने की कोशिश की तो मामी ने अपनी गांड को हल्के से उठा लिया और मैं समझ गया कि मामी की तरफ से भी लाइन क्लियर है.</p>
<p>बस फिर क्या था … मैं मामी पर टूट पड़ा, उनके चूचों को चूसने काटने लगा और मामी मेरे बालों में हाथ फिराने लगी. उनके गुदाज बदन को छूकर मैं बेकाबू हो गया था और मैंने झट से अपने लंड को निकाल कर मामी की चूत में लगा दिया.</p>
<p>लंड को चूत में लगा कर मैंने एक झटका मारा और मेरा लंड मामी की चूत में घुस गया. मामी ने जरा सी भी हरकत नहीं की. मेरा लंड मामी की चूत में मैंने पूरा उतार दिया. फिर मैं धीरे-धीरे उनकी चूत में धक्के मारने लगा. मैं भी कोई आवाज नहीं कर रहा था क्योंकि साथ में ही बच्चे भी सो रहे थे.</p>
<p>मैंने पांच मिनट तक मामी की चुदाई की और फिर मेरा वीर्य निकल गया. फिर मामी ने मेरे कान के पास मुंह लाकर मुझे वापस जाने के लिए कह दिया. </p>
<p>मगर मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी. इतने दिनों के बाद मुझे मामी की चूत मिली थी. मैंने सुबह के करीब तीन बजे फिर से मामी को जगाया और हम दोनों चुपके से उठ कर बाथरूम में चले गये.</p>
<p>वहां जाते ही हमने धीरे से दरवाजा बंद किया और एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. मैंने मामी के पूरे बदन को चूसा और चाटा और फिर उनकी चूत में उंगली दे दी. मामी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और फिर मैंने उनको दीवार के सहारे लगा कर उनकी चूत में लंड को पेल दिया.</p>
<p>मैं मामी को वहीं दीवार के सहारे लगा कर चोदने लगा. मैंने दस मिनट तक मामी की चुदाई की और फिर मैं दूसरी बार मामी की चूत में झड़ गया. फिर हम दोनों चुपके से आकर लेट गये.</p>
<p>सुबह जब मामी चाय देने आई तो वह मुस्करा रही थी. जब वो मेरे करीब आई तो मैंने मामी के चूचों को नजर बचाकर छू लिया और मामी ने मेरा हाथ झटक दिया. मामी को शायद डर था कि घर में कोई देख लेगा. उसके बाद मैंने मामी की चूत कई बार चोदी. </p>
<p>अब मामी भी खुश रहने लगी थी. हमें जब भी मौका मिलता था हम चुदाई कर लेते थे.</p>
<p>फिर जब मामा वापस आ गये तो हमें मौका मिलना बंद हो गया. मगर हम दोनों ही इस बात के इंतजार में रहते थे कि कब हमें चुदाई करने का मौका मिलेगा. मामी मेरा लंड लेकर खुश रहने लगी थी और मैं भी मामी की मामी की चुदाई करके मजे लेता रहा.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो … मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और <a title="पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो …<br />
<span id="more-316"></span></p>
<p>मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और अपनी चूत में उंगली करती रहें व लड़के अपना लन्ड हिला लें।</p>
<p>हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी. उसमें एक 25 साल की खूबसूरत भाभी थी, नाम था प्रभा. उनकी शादी को 3 साल हो गए थे पर उनके घर मे कोई बच्चा नहीं था. उनकी सास उन्हें बच्चा न होने की वजह से परेशान करती थी।</p>
<p>हमारी व उनकी छत मिली हुई थी व बीच में एक छोटी सी दीवार थी. एक दिन मैं छत पर एकांत में मुठ मार रहा था. तब प्रभा भाभी एकदम आ गई व उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया. मैं उस समय झड़ना शुरु हो गया था इसलिए रोक भी न सका और मेरे वीर्य की धार निकल कर दूर जाकर पड़ी.</p>
<p>उन्होंने मुझे सख्त धमकाया- ये क्या कर रहे हो? तुम्हारी मम्मी से बताती हूँ।<br />
मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए और माफी मांगी और यह भी कहा कि दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।<br />
उन्होंने बड़े प्यार से मेरे गाल पर एक थपकी दी और बोली- तुम अभी 18 साल के ही हो. ये सब करने से मर्द में कमजोरी आ जाती है.</p>
<p>बात आई गई हो गई पर जब भी वो मुझे मिलती तो उनके गाल लाल हो जाते थे.</p>
<p>एक दिन उनकी सास 6 दिन के लिए शादी में जा रही थी और उन्हें घर पर अकेला रहना था क्योंकि उनके पति भी एक महीने के लिए बाहर गए हुए थे. इसलिए उनकी सास ने मेरी माँ से कहा कि राकेश को कुछ दिनों के लिए रात को सोने को भेज देना क्योंकि घर में बहू अकेली रहेगी।</p>
<p>रात को खाना खाने के बाद मैं उनके घर चला गया. भाभी ने काली नाइटी पहनी थी.<br />
भाभी ने बादाम का दूध पीने को दिया और बोली- अबी तो पहले वाली शैतानी तो नहीं करते हो?<br />
मैं एकदम डर गया और बोला- नहीं भाभी, अब नहीं करता।</p>
<p>भाभी बोली- तुम्हारे भैया भी बचपन से यही करते आ रहे थे; अब उनमें कमजोरी आ गई और अब उनसे बच्चा पैदा नहीं होता।</p>
<p>कुल मिला कर सोने का समय हो गया और हम एक ही बेड पर सो गए.</p>
<p>रात को मेरी नींद खुली तो भाभी मेरा लन्ड सहला रही थी और मेरा लन्ड एकदम फटने को हो रहा था.<br />
मुझे जगा देख कर भाभी बोली- राज, मेरे पति का वीर्य कमजोर है और वो बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं.<br />
उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करूँ.</p>
<p>भाभी ने अपनी चूची मेरे मुंह मे दे दी. मैंने बारी बारी से दोनों चूची खूब चूसी. फिर भाभी ने मेरा लन्ड मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो पागल होता जा रहा था.<br />
फिर भाभी ने उंगली के इशारे से चूत चाटने को बोला और हम 69 की पोजिशन में आ गए और खूब चुसम चुसाई खेली.</p>
<p>फिर भाभी बोली- मैं उस दिन तुम्हारे वीर्य की धार देख कर ही समझ गई थी कि तुम ही मेरे बच्चे के बाप बनोगे।</p>
<p>उसके बाद भाभी टांगें फैला कर लेट गईं और बोली- मेरे राज, अब डाल दे अपना हथियार मेरी कचिया चूत में!<br />
मैंने लन्ड के अगले हिस्से पर थोड़ा थूक लगाया और चूत से भी काफी नमकीन पानी टपक रहा था. जैसे ही मैंने लन्ड का टोपा चूत के मुख पर लगाया, भाभी ने बड़ी तेज सिसकारी भरी और चूत ऊपर उठाकर लन्ड चूत में लेने को बेताब हो गईं.</p>
<p>मैंने भी हल्का सा जोर लगाया और चूत में लन्ड अंदर जाने लगा. एक अलग ही एहसास था दोस्तो!</p>
<p>प्रभा भाभी ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए और सीत्कार करने लगी. मैं तो जैसे पागल होने को हो गया. मैंने एक तेज झटका मार कर गहराई तक पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और तेजी से शॉट लगाने शुरू कर दिए और साथ में भाभी ने मेरा हाथ अपने स्तनों पर लेजाकर दबाने का इशारा किया.</p>
<p>मैं भाभी की चूचियाँ दबा दबा कर उन्हें मजा देने लगा और मैंने धक्कों की रेल छोड़ दी. 10 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई. उसके बाद हम नंगे ही लिपट कर सो गए.</p>
<p>उस रात मैंने 3 बार भाभी की चूत चुदाई की. उसके बाद 8 दिन में भाभी की कई बार चुदाई हुई.<br />
इस तरह से मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पूरी हुई.</p>
<p>और फिर एक दिन पता चला कि भाभी को गर्भ ठहर गया है.<br />
उसके बाद जब वो मुझे मिली तो मुझे बहुत प्यार किया औऱ मेरी खूब पप्पियाँ ली.</p>
<p>समयानुसार भाभी के घर एक सुन्दर बच्चा पैदा हुआ।</p>
<p>लेकिन बाद में पता चला कि भाभी ने यह बात अपनी बहन ज्योति को बता दी. एक दिन उसने मुझे ज्योति से मिलवाया और बताया कि ये मुन्ने के पापा हैं, तुम्हारे जीजा जी हैं.<br />
मैं शर्मा गया.</p>
<p>शाम को मैं भाभी से बोला- भाभी, इस बच्चे के लिए मुझे भी कुछ गिफ्ट चाहिए.<br />
तो उन्होंने पूछा- क्या?<br />
मैंने बताया- भाभी, उस हनीमून के बाद मुझे सेक्स की भूख पैदा हो गई है और आप बच्चे में व्यस्त हो गई हो तो मेरी सेक्स समस्या का समाधान करवाओ, किसी से मेरा सेक्स करवाओ.<br />
तो वो बोली- मैं ज्योति से बात करती हूं. वो इसी शहर में रहती है और मुझे लगता है उसका तेरे में इंट्रेस्ट भी है. क्योंकि जिस दिन मैंने तुझे उससे मिलवाया तो वो तुझे बड़े ध्यान से देख रही थी और कह रही थी ‘प्रभा, गजब का लौंडा पटाया है तूने!’</p>
<p>दोस्तो, मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पसन्द आयी या नहीं … कमेंट करना.<br />
आपका राज<br />
[email protected]</p>
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		<title>मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/mastani-figure-bhabhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:22:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्ते अन्तर्वासना के सभी दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी भाभी की चुदाई की है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा. मेरा नाम विशाल शर्मा है. मैं राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला लड़का हूँ. मैं देखने में अच्छा खासा हूँ और मेरे लंड का आकार 8 इंच है. मुझे अन्तर्वासना की <a title="मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/mastani-figure-bhabhi/" aria-label="Continue reading मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्ते अन्तर्वासना के सभी दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी भाभी की चुदाई की है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा.</p>
<p>मेरा नाम विशाल शर्मा है. मैं राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला लड़का हूँ. मैं देखने में अच्छा खासा हूँ और मेरे लंड का आकार 8 इंच है. मुझे अन्तर्वासना की कहानियां पढ़कर बहुत मजा आता है. </p>
<p>यह मेरी पहली कहानी है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा.</p>
<p>बात उस समय की है, जब मैं करीब 19 साल का था. उस टाइम हमारे पड़ोस में एक मस्त भाभी रहती थीं. उनका नाम आशा था. उनका पति जॉब करता था, जो सुबह जाता और सीधे रात को ही वापस आता था. मस्तानी भाभी की उम्र लगभग 30 साल की थी और उनका फिगर बड़ा ही मस्त था. भाभी के बूब्स 36 इंच के थे, कमर 30 की थी और उनकी गांड तो इतनी बाहर को निकली हुई थी कि जो भी भाभी को एक बार देख भर ले, उसका लंड तुरंत खड़ा हो जाए. </p>
<p>मैं जब भी भाभी को देखता, तो उनके नाम की मुठ जरूर मारता था. मेरे और भाभी के बीच बहुत बनती थी. वो अक्सर मुझे कुछ न कुछ काम के लिए बोलती रहती थीं. </p>
<p>एक दिन की बात है, उन्होंने मुझसे बोला- विशाल भैया, मुझे मार्किट जाना है क्या आप मुझे ले चलोगे?<br />
मैं बोला- हां क्यों नहीं भाभी … चलो.<br />
फिर उन्होंने बोला- रुको, मैं 5 मिनट में तैयार होकर आती हूँ. </p>
<p>फिर 5 मिनट बाद उन्होंने मुझे आवाज दी- चलो मैं रेडी हूँ.<br />
मैंने सोचा ‘भाभी आप तो आज रेडी हो, मगर मैं तो कबसे आपको चोदने के लिए रेडी हूँ.’</p>
<p>यह सोचता हुआ मैं बाहर आ गया और भाभी को देखने लगा. भाभी बड़ी मस्त लग रही थीं. मुझे यूं घूरता हुआ देख कर भाभी बोलीं- क्या हुआ … ऐसे क्या देख रहे हो … मुझमें कोई कमी दिख रही है क्या?<br />
मैंने पलट कर जवाब दिया- भाभी आप में कोई कमी ही तो नहीं दिख रही है, यही तो समस्या है.<br />
मुझे फ्लर्ट करते देख कर भाभी हंस दीं और बोलीं- अब ये मसखरी छोड़ो और जल्दी चलो. वापस भी आना है.</p>
<p>भाभी मेरे करीब आई और मैंने उनको अपने पीछे बैठने का इशारा किया. भाभी गांड उचका कर सीट पर बैठ गईं. जैसे ही भाभी बैठीं, तो उन्होंने मेरे कंधे का सहारा लिया और बैठते समय उनका शरीर मेरी पीठ से रगड़ गया. मुझे इतने में ही तरन्नुम आ गई थी.</p>
<p>मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. हम बाइक पे चल दिए. बाजार जाकर भाभी ने कुछ सामान लिया और एक शॉप से उन्होंने अपने बेटे के लिए चॉकलेट ले ली. फिर हम घर की ओर चल दिए.<br />
आधे रास्ते में पहुंचने पर भाभी ने मुझसे एक सवाल पूछा- विशाल, आपकी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?<br />
मैंने बोला- भाभी आप ये क्या पूछ रही हो?<br />
भाभी ने बोला- शर्माने की कोई बात नहीं … आप मुझे बता सकते हो.<br />
मैं मना किया कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.</p>
<p>भाभी बोलीं- क्यों नहीं है. कोई मिली नहीं क्या?<br />
मैंने कहा- हां आप ऐसा ही समझ लो कि अभी तक मन की कोई मिली ही नहीं.<br />
भाभी बोलीं- कैसी चाहिए?<br />
मैं बोला- भाभी आप जैसी चाहिए … मुझे अभी तक आप जैसी कोई मिली ही नहीं. </p>
<p>इस पर भाभी ने बोला कि मुझमें ऐसा क्या ख़ास है?<br />
मैं बोला- भाभी सब कुछ तो ख़ास है आपमें … सच में भैया बहुत किस्मत वाले हैं, जो उनको आप जैसी वाइफ मिली है.<br />
फिर भाभी बोलीं- अच्छा जी … पर मुझे पहले ये तो बताओ कि आपको मुझमें ऐसा क्या ख़ास दिखा है … ये बताओगे जरा?<br />
मैं बोला- छोड़ो भाभी. </p>
<p>भाभी ने जिद करते हुए कहा- बताओ ना यार?<br />
मैंने बोला- आपका फिगर … आपका फेस सब कुछ मस्त है.<br />
उन्होंने बोला- अच्छा आपको मेरा फिगर मस्त लगता है.<br />
ये कहते हुए भाभी हंस दीं. </p>
<p>अब तक हम दोनों घर पहुंच गए थे. फिर उन्होंने बोला- चलो … जरा मेरा सामान अन्दर रखवा दो. </p>
<p>मैं सामान अन्दर रखने गया. सामान रख कर मैं वापस निकल रहा था, तो भाभी ने बोला- लो चॉकलेट तो खा लो.<br />
मैंने बोला- ओके भाभी, लाओ दे दो.<br />
फिर मैं बोला- भाभी, आप भी तो खा लो. </p>
<p>तो वो मेरे पास को आईं. भाभी ने चॉकलेट मेरे मुँह में रख कर अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर चॉकलेट खाने लगीं. उनके ऐसा करते ही मेरी तो सांस ही रुक गयी. मैं हतप्रभ था, लेकिन बस चुपचाप उनका साथ दिए जा रहा था. भाभी के गर्म होंठों से मुझे भी बहुत गर्मी चढ़ने लगी. </p>
<p>फिर 5 मिनट बाद मैं भी उनको किस करने लगा. उसके बाद उन्होंने मेरा हाथ ले कर अपने मम्मों पर रखा और ब्लाउज के ऊपर से ही दूध दबवाने लगीं. </p>
<p>कोई दस मिनट तक ऐसा ही चला, फिर भाभी की चूत चुदाई के लिए बेचैन होने लगी तो वो मुझसे अलग होते हुए बोलीं- चलो, रूम में चलते हैं.</p>
<p>मैं भाभी के साथ उनके बेडरूम में आ गया. रूम में जाते ही मैंने रूम का गेट बंद किया और उनको किस करने लगा. फिर मैंने उनकी साड़ी उतार दी और ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियों को दबाने लगा.</p>
<p>कुछ मिनट तक ऐसे ही करने के बाद मैंने भाभी का ब्लाउज और पेटीकोट खोल दिया. अब भाभी सिर्फ पिंक ब्रा और पैंटी में मेरे सामने रह गई थीं.<br />
मैंने भाभी को बिस्तर पर लेटा दिया और उनके ऊपर आ गया. मैं उनको किस करते करते उनके बूब्स दबाने में लग गया. अब तक भाभी भी चुदास से भर गई थीं. वे बिस्तर से उठीं और उन्होंने अपनी ब्रा और पेंटी खोल कर फेंक दी.</p>
<p>इसके बाद भाभी ने मेरे भी सारे कपड़े खोल दिए. पूरी तरह से हम दोनों नंगे हो चुके थे. मेरा लंड छत की तरफ मुँह उठाए खड़ा था.</p>
<p>भाभी बेड पर लेट कर बोलीं- आजा मेरे राजा … खा जा मेरी इस जवानी को.<br />
बस इतना सुनते ही मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूचियों को दबाने और चूसने में लग गया. </p>
<p>भाभी मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोल रही थीं- आह चूस लो मेरे राजा … खा जा इनको … आह और चूस. </p>
<p>फिर मैं थोड़ा नीचे आकर उनके पेट पर किस करते हुए उनकी चूत तक पहुंच गया. पहले तो मैंने उनकी चूत के ऊपर किस किया और फिर उसके आस पास किस किया.<br />
उतने में भाभी सिसकारियां लेते हुए बोलीं- विशाल अब इतना मत तड़पाओ … चूस लो … खा जाओ मेरे चूत को … ये मुझे बहुत परेशान करती है … साली को लंड ही नहीं मिलता.</p>
<p>मैं ये सुनकर थोड़ा चौंका, फिर मैंने भाभी की चूत पे मुँह रख दिया. भाभी की चुत पहले से ही गीली हो चुकी थी. </p>
<p>मैंने जैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत पर लगाई, उन्होंने मेरा सर चूत में घुसा दिया. मैं भी उनकी चूत चाटने लगा.<br />
भाभी मादक सिसकारियां लेते हुए बोल रही थीं- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … हां ऐसे ही चूसो … आह और तेज … हां खा जाओ इसको हां और तेज..</p>
<p>वो मेरा सर जोर से अन्दर डालने लगीं. फिर वो झड़ गईं और मैं उनकी चूत का सारा पानी पी गया. क्या मस्त टेस्ट था यार मजा आ गया. </p>
<p>फिर भाभी खड़ी हुईं और मुझे बेड पर धक्का दे कर खुद घुटनों पर बैठ गईं. अब वो मेरा लंड चूसने लगीं. भाभी लंड चूसते हुए बोल रही थीं- क्या मस्त लंड है तेरा विशाल … तेरे भैया का तो इसका आधा भी नहीं है … उनको चुदाई में मन ही नहीं लगता है, आज तो तू मेरी चूत फाड़ ही देगा.</p>
<p>बस भाभी लंड चूसने में मस्ती से लग गईं. भाभी मेरे लंड को ऐसे चूस रही थीं, जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप चूसता है. </p>
<p>कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनके पैरों को फैला दिया. मैंने लंड को हिलाया और उनकी टांगों के बीच में आकर उनकी चूत पर रगड़ने लगा. </p>
<p>मेरी मस्तानी भाभी तो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी थीं. वे सिसकारियां लेते हुए बोलीं- मेरे राजा और मत तड़पा अपनी भाभी को … जल्दी से डाल दो अपना लंड … अपनी भाभी की चूत के अन्दर पेल दे.</p>
<p>मैंने भी भाभी को ज्यादा तड़पाना ठीक न समझा और बस लंड को उनकी चूत के छेद पर रख कर एक धक्का लगा दिया. इस पहले ही तगड़े धक्के से मेरा आधा लंड भाभी की चूत में अन्दर घुस गया. तभी भाभी की जोर से चीख निकल गयी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह …<br />
भाभी दर्द से तड़फते हुए बोलीं- आह विशाल … बहुत मोटा है… मर गई … इसे जल्दी से बाहर निकालो … आह इसको निकालो. </p>
<p>मैं भाभी के ऊपर पूरी तरह से छा गया और उनको किस करने लगा. उनके मम्मों को दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हुआ, तो मैंने एक और जोरदार धक्का दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया. </p>
<p>फिर मैं कुछ देर भाभी के ऊपर लेटा रहा. भाभी के सामान्य होने के बाद मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए. अब भाभी भी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं और बोल रही थीं- आह और जोर चोद मुझको … हां ऐसे ही … तेरा लंड मेरी चूत की पूरी खुदाई कर रहा है … आह.</p>
<p>यह सिलसिला 30 मिनट तक चला. उसके बाद मैंने बोला- भाभी मेरा आने वाला है, कहां निकालूं?<br />
भाभी बोलीं- मेरी चूत में ही झड़ जा, ये बहुत दिन से सूखी है.</p>
<p>फिर 5-6 धक्कों के बाद मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर लेट गया.</p>
<p>इसके बाद भाभी की चूत मुझे हमेशा ही चोदने के लिए मिलने लगी. कुछ दिनों बाद उनकी गांड मारने की ख्वाहिश भी जोर मारने लगी. मैंने भाभी की गांड कैसे मारी, वो मैं अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.</p>
<p>आपको मेरी मस्तानी भाभी की चुदाई की सेक्स स्टोरी पसन्द आई या नहीं … प्लीज़ मुझे मेल जरूर करना.<br />
धन्यवाद.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खेल वही भूमिका नयी-4</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:50:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[इस कामुक सेक्स कहानी के तीसरे भाग खेल वही भूमिका नयी-3 में अब तक आपने पढ़ा कि मैं अब तक नेता और कमलनाथ के अलावा रवि से सम्भोग करके बहुत ज्यादा थक चुकी थी. इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद जब मैं जागी, तो कान्तिलाल मेरे साथ सम्भोग करने को आतुर हो रहा <a title="खेल वही भूमिका नयी-4" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-4/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-4">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस कामुक सेक्स कहानी के तीसरे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-3<br />
में अब तक आपने पढ़ा कि मैं अब तक नेता और कमलनाथ के अलावा रवि से सम्भोग करके बहुत ज्यादा थक चुकी थी. इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद जब मैं जागी, तो कान्तिलाल मेरे साथ सम्भोग करने को आतुर हो रहा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मेरा कांतिलाल के साथ पहले का भी सेक्स अनुभव था तो मैं जानती थी कि वो जल्दबाजी नहीं करेगा बल्कि मुझे पूर्ण रूप से उत्तेजित करके संभोग के लिए बाध्य कर देगा.</p>
<p>इन सब बातों को जानने के बाद भी मैं उसके वश में होती जा रही थी, पता नहीं क्यों. इससे पहले उन 3 मर्दों से मुझे नहीं मिला था, शायद उसकी कमी का मुझे अफसोस था और कांतिलाल से मेरे मन में कोई उम्मीद थी. इसी वजह से मैं उसकी बांहों के जाल में स्वयं फंसती चली जा रही थी.</p>
<p>मैं और कांतिलाल अब एक दूसरे के सीने से चिपक गए थे और वो मुझे हौले हौले से उत्तेजित करने का प्रयास करने लगा. उसने मेरी आंखों में देखता हुआ मेरी रानों, बांहों, कमर और चूतड़ सहलाने शुरू कर दिया. वो मुझे ऐसे देखने लगा, जैसे वो मेरा इन्तजार कर रहा था. उसके मादक छुवन से मेरे बदन में ऐसा लग रहा था, मानो हज़ारों चीटियां मेरे बदन में रेंग रही हों, मेरे जिस्म में एक मीठी सिहरन सी हो रही थी.</p>
<p>काफी देर इसी तरह मुझे टटोलने के बाद वो अपने होंठ, मेरे होंठों के करीब ले आया, पर मैं जस की तस रही.</p>
<p>कांतिलाल भले कितना भी सहनशील क्यों न होता … मगर बाकी मर्दों की तरह उसकी भी एक सीमा थी और अब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल था. वो भी जान चुका था कि मुझे कैसे अपने वश में करना है … क्योंकि उसने मुझे पहली मुलाकात के समय भरपूर पढ़ा था. </p>
<p>उसने खुद ही अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे चूमने लगा. मैं खुद को रोकने का प्रयास करती रही कि शायद मेरे ठंडे और नकारात्मक व्यवहार से उसकी उत्तेजना कम हो जाए, पर वो रुक नहीं रहा था बल्कि और अधिक उत्तेजना से मेरे होंठों को चूसते चूमते हुए मेरे स्तनों को दबाने सहलाने लगा था.</p>
<p>काफी देर खुद को रोकने के बाद मेरी इंद्रियां कमजोर पड़ने लगीं और आखिरकार मैं उसके आगे हार ही गई. उसने मेरे भीतर वासना की चिंगारी फ़िर से भड़काने में सफलता पा ली थी. </p>
<p>अब मैं अपने भीतर नए तरह का जोश, ताकत और कामोत्तेजना महसूस करने लगी थी. मैंने भी उसे पकड़ कर चुम्बन में साथ देते हुए उसके होंठों को बारी बारी से चूसने लगी. जब वो मेरी ऊपर के होंठ चूसता, तो मैं उसके नीचे का होंठ चूसती और जब वो मेरा नीचे का होंठ चूसता … तो मैं उसके ऊपर का होंठ चूसने लगती. मेरे भीतर एक नया रोमांच की अपेक्षा जगी हुई थी.</p>
<p>इस तरह चुम्बन का एक लंबा अधिवेशन चला. हम दोनों कभी जुबान को चूसते, तो कभी होंठों को … और एक दूसरे से ऐसे लिपट लिपट कर अंगों को सहलाते प्यार करते, जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते हों. </p>
<p>धीरे धीरे ऐसे चूमते सहलाते हुए कांतिलाल ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और फिर से लंबे चुम्बन और आलिंगन का दौर शुरू हो गया. वो एक हाथ से मेरे एक स्तन को क्रूरता से मसल रहा था, तो दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ मसल रहा था.</p>
<p>मेरी उत्तेजना इस कदर बढ़ गई थी कि उसके मसलने से जो दर्द हो रहा था, वो भी आनन्द प्रदान कर रहा था. हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी ताकत से जकड़ कर चूमने लगे थे. कभी मैं अपनी जुबान उसके मुँह में डाल देती और वो चूसता, तो कभी वो मेरे मुँह में अपनी जुबान डाल देता और मैं चूसती.</p>
<p>मुझे उसकी साँसों में एक अलग सी खुश्बू आने लगी थी, जो मेरी कामोत्तेजना को और बढ़ा रही थी. मैं उसके ऊपर अपनी दोनों जांघें फैला कर चढ़ी हुई थी और मुझे उसका सख्त लिंग मेरी योनि पर जांघिये के भीतर से चुभ रहा था.</p>
<p>चूमते हुए कांतिलाल ने पीछे से मेरे वस्त्र की डोरी खोल दी और उसे सरका कर कमर तक खींच दिया, जिससे मेरे स्तन खुल गए.</p>
<p>थोड़ी और देर चूमने के बाद उसने करवट ली और पलट कर मुझे नीचे कर दिया. अब वो मेरे ऊपर आ गया था. वो मुझे गालों से लेकर गले तक चूमने लगा था और जुबान से गले और कानों के नीचे चाटने लगा था. मुझे अब मुझे ऐसा लगने लगा कि जो चीटियां अभी तक मेरे बदन पर रेंग रही थीं, वो अब दौड़ने लगी हैं.</p>
<p>मैं उत्तेजना में उसके बालों को कसके पकड़ कर ऐंठन लेने लगी और टांगों से उसे जकड़ने का प्रयास करने लगी.</p>
<p>कुछ पल ऐसे चूमने के बाद वो मेरे स्तनों की ओर बढ़ने लगा. उसने मेरे दोनों स्तनों को एक एक हाथ से पकड़ चूचुकों को बारी बारी चूमकर बोला- क्या अब भी इनमें से दूध आता है?<br />
मैंने उत्तर दिया- हां.<br />
उसने फिर बोला- क्या मैं तुम्हारा दूध पी सकता हूँ?</p>
<p>मैंने उत्तर दिया- ऐसा पहली बार तो होने नहीं जा रहा … पहले भी आप पी चुके हो.<br />
उसने फिर बोला- पूछ लेना मुझे बेहतर लगा … क्योंकि काफी समय के बाद मिली हो न … और क्या पता औरतें ये धारणा भी रखती हैं कि दूध सिर्फ उनके बच्चे पीते हैं.<br />
मैंने उससे कहा- ये तो सच है कि बच्चे ही अपनी माँ का दूध पीते हैं.<br />
उसने कहा- हां इसलिए तो पूछना बेहतर सोचा, पर बच्चे के अलावा पति का भी हक़ होता है.<br />
मैंने कहा- आप न तो मेरे बेटे हो … न ही पति हो. अब आपको जो अच्छा लगे करिए … बातें कर समय क्यों बर्बाद करना.<br />
उसने मुझसे कहा- बेटा तो नहीं, पर आज की रात तुम्हारा पति मैं ही हूँ.</p>
<p>और मुस्कुराते हुए मेरे चूचुकों को मुँह से लगा कर चूसने लगा. मेरे स्तनों से जैसे ही दूध की तेज पिचकारी छूटी, मुझे एक अनोखा अनुभव हुआ, जो इससे पहले कभी नहीं हुई थी. मैं एकदम से सिहर उठी और मैंने कांतिलाल को कसके पकड़ लिया. वो बारी बारी से मेरे दोनों स्तनों से दूध पीने लगा और मैं उसे बच्चे की तरह उसका सिर सहलाती रही.</p>
<p>जी भर मेरा स्तनपान करने के बाद अब वो मेरे पेट को चूमते हुए नाभि को प्यार करने लगा. </p>
<p>वो काफी देर तक मेरी नाभि में अपनी जीभ फिराता रहा. इसके बाद उसने मेरे वस्त्र को खींचते हुए मेरी टांगों के नीचे से निकाल कर मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया. उस रोशनी में बिल्कुल चमक सी रही थी और मेरा पूरा बदन एकदम चिकना दिख रहा था. योनि के बालों के हटवाने से ये सब और भी ज्यादा मस्त लग रहा था. मेरी योनि के बालों की भी इस तरह से छंटनी की गई थी कि कोई भी मर्द आकर्षित हो जाए. मेरे वस्त्र निकाल कर उसने मेरी टांगें पकड़ उन्हें फैला दिया और बहुत चाव से मेरी योनि देखते हुए एक हाथ फेरने लगा. उसके छूते ही मैं कांप सी गई, पर उसने मेरी एक जांघ पर हाथ रख बिस्तर पर दबा दिया था. </p>
<p>मेरी योनि की पंखुड़ियों को अपनी उंगलियों से फैला कर बोला- वाह कितनी प्यारी, सुंदर और कामुक है तुम्हारी चुत … और देखो यही तो है स्वर्ग जाने का रास्ता.</p>
<p>मैं उसकी बातें सुन हंस पड़ी, पर मन बहुत रोमांचित हुआ जा रहा था. उसने झुक कर मेरी योनि को चूमा, फिर योनि के इर्द गिर्द चूमते हुए जांघें कमर और टांगों को चूमने लगा. </p>
<p>मैं तो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि मन हो रहा था कि अपना पानी छोड़ दूं. हालत भी मेरी ऐसी हो चली थी कि अब या तब … अपने आप ही मैं अपने रस की फुहार छोड़ दूंगी. खुद को रोक पाना चुनौती सा लगने लगा था. पर अभी तो शुरूआत ही हुई थी. </p>
<p>कांतिलाल ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वो शायद ही मुझे आज रात सोने देगा. उसने मुझे अब पलट दिया और मैं पेट के बल हो गई. वो मेरी टांगों को चूमता हुआ चूतड़ तक पहुंच गया और किसी भूखे भेड़िये की तरह चूमता हुआ मेरी पीठ और पीठ से दोबारा चूतड़ों तक चूमता रहा. मैं अपने आप में सिकुड़ कर सीधा लेटी हुई थी और अपने बदन को अकड़ा लिया था. </p>
<p>कांतिलाल ने मेरे चूतड़ों को ऐसे चूमना और काटना शुरू कर दिया कि मेरी सिसकियां रोके नहीं रुक रही थीं. आज कांतिलाल मुझे पागल कर देने जैसी हरकतें कर रहा था. </p>
<p>उसने अब मेरे चूतड़ों को दोनों हाथों से फैलाना शुरू कर दिया और अपना मुँह बीच में डाल मेरी योनि जीभ से टटोलनी शुरू कर दी.</p>
<p>मैं सीधी लेटी थी और मेरी योनि बिस्तर की तरफ थी और मेरे बड़े और मोटे मांसल चूतड़ों के बीच मेरी योनि इतनी आसानी से मिलनी मुश्किल थी. वो पूरा प्रयास करके भी मेरी योनि तक जीभ नहीं पहुंचा पा रहा था. पर वो हार मानने वालों में से नहीं था. वो थोड़ा थोड़ा जीभ से टटोलता रहा और धीरे धीरे मुझे खींचते हुए मेरे चूतड़ उठाने लगा. कुछ मैंने भी मदद की और मैं घुटने मोड़ अपने चूतड़ पीछे से उठा दिए.</p>
<p>अब मेरी योनि खुलकर उसके सामने आ गई. उसने तुरंत अपना मुँह मेरी योनि से चिपका लिया और ऐसे चाटने लगा, जैसे मेरी योनि कोई खाने की वस्तु हो. मेरी तो योनि अब बिल्कुल ही चिपचिपी हो गई थी.</p>
<p>फिर उसने अपनी जीभ मेरी योनि के भीतर घुसाने का प्रयास शुरू कर दिया. इधर मैं मादक सिसकियां भरने लगी थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ किसे पकड़ूँ और किसे छोड़ूँ. आखिरकार मैं तकिए को पकड़ कराहने लगी. वो पूरी ताकत से मेरी चूतड़ों को फैला ज्यादा से ज्यादा अपनी जीभ भीतर घुसाने का प्रयास करने लगा. </p>
<p>मैं बस हाय हाय करते हुए उससे विनती करती हुई बोलने लगी- प्लीज कांतिलाल जी छोड़ दो … नहीं तो मैं झड़ जाऊंगी, ओह्ह मां मर जाऊंगी मैं.</p>
<p>पर वो मेरी एक नहीं सुन रहा था. मैं जितना उसे मना करती, वो उतना ही जोर और ताकत लगाता. अब मेरी बेचैनी इतनी बढ़ गई कि मैं पूरा जोर लगा पलटकर सीधी हो गई और वो मुझे भूखे शेर की तरह घूरने लगा.</p>
<p>मैं बोली- अब जल्दी से मेरे अन्दर आ जाओ … वरना मैं ऐसे ही झड़ जाऊंगी.<br />
उस पर उसने कहा- हां झड़ जाओ … यही तो मैं भी चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ कि तुम आज इतनी बार झड़ो कि पूरा बिस्तर गीला हो जाए. मुझे तुम्हें वैसे ही झड़ते हुए देखना है, जैसा पिछली बार देखा था. </p>
<p>अब मुझे अपनी औरतों वाली तरकीब अपनानी पड़ी. मैं बड़े कामुक और लुभावने अंदाज में बोली- प्लीज जानू इतना भी मत तड़पाओ. अपना बाबू मेरे अन्दर डालो ना … तुम्हारे बाबू पर मुझे झड़ना है.<br />
पर वो आज कुछ और ही चाहता था. उसने भी मेरे ही अंदाज में मुझे बोला- इतनी भी क्या जल्दी है जान … अभी तो पूरी रात बाकी है.<br />
इतना कह कर वो मेरी जांघें फैलाने लगा और फिर उसने झुक कर मेरी योनि से अपना मुँह चिपका लिया.</p>
<p>मेरी हालत अब इतनी बुरी हो गई थी कि मैं उसका सिर अपनी योनि से हटाने का प्रयास करने लगी. पर उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से उंगलियों में उंगलियां फंसा मुझे कसके पकड़ लिया. मैं अपनी जांघें भी चिपकाना चाहती थी, मगर उसका सिर बीच में था और अब मैं बहुत अधिक व्याकुल होने लगी थी. वो मेरी योनि को खाने की वस्तु की तरह चाट रहा था. मेरी योनि में ऐसा लग रहा था मानो कोई आग लगी हो, बराबर पानी रिस रहा था और अब या तब पानी छूट जाएगा ऐसा लग रहा था.</p>
<p>कांतिलाल उधर कभी मेरी योनि के दाने को जोर से काटता, तो मैं हाय हाय करती रह जाती. कभी योनि के दोनों पंखुड़ियों को होंठों से पकड़ खींचता, कभी योनि की छेद में अपनी जीभ घुसाने लगता.</p>
<p>अब मुझसे और नहीं रहा जा रहा था. मैंने उससे आखिरी बार कहा- प्लीज मुझे छोड़ दो … उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैं झड़ रही हूँ.</p>
<p>इतना कहते ही मैं अपने चूतड़ों को उचकाने लगी. तभी 8 -10 बूंदों जैसी तेज पिचकारी सी मेरी योनि से 3 बार निकली और मैं जोरों से अपना पूरा बदन ऐंठाने लगी.</p>
<p>पर कांतिलाल की ताकत के आगे मेरी एक नहीं चली और वो मुझे जोरों से पकड़ कर तेज़ी से मेरी योनि चाटने लगा. मैं झड़ गई थी और हल्का महसूस करने लगी थी.<br />
मैं अपने बदन को ढीला करते हुए उससे बोली- प्लीज कांतिलाल जी, अब रुक जाइए … थोड़ा सुस्ता लूँ मैं.<br />
पर उसने बोला- अभी तो शुरू हुआ है … इतनी जल्दी कैसे छोड़ दूं.</p>
<p>ये कह कर वो फिर से मेरी योनि चाटने में लग गया. मैं सुस्त पड़ गई थी, सो उसने मेरा हाथ छोड़ दिया. वो मेरी योनि में अपनी बीच वाली उंगली घुसा कर उसे तेज़ी से अन्दर बाहर करते हुए मजा ले रहा था और मेरी योनि के दाने को मुँह में भरते हुए चूसना और काटना शुरू कर दिया था. </p>
<p>मैं उससे काफी देर तक विनती करती रही, मगर वो कुछ सुनने के मूड में नहीं था. </p>
<p>उसके लगातार चाटने से थोड़ी ही देर में मेरी योनि में फिर से हलचल शुरू हो गई और मैं अपनी जांघें खुद चौड़ी कर उसे अपनी योनि से खेलने देने लगी. थोड़ी देर में वो मेरी योनि चाटते हुए हाथ ऊपर कर मेरे स्तनों को मसलने लगा. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था और मैं उसके हाथों को खुद मदद कर रही थी.</p>
<p>अचानक वो टटोलते हुए हाथ मेरे मुँह के पास ले आया और अपनी एक उंगली मेरे मुँह में डाल दी. मैं उसकी उंगली को लिंग की भांति चूसने लगी. अब उसकी एक उंगली मेरी योनि में चल रही थी दूसरी मेरे मुँह में. बहुत कामुक और उत्तेजना से भरा पल लग रहा था वो.</p>
<p>मुझे अभी शायद 5 से 7 मिनट हुए होंगे झड़े हुए कि मैं फिर से झड़ने को तैयार हो गई थी. मेरी बुरी आदत यही है कि मैं भले देर से झड़ती हूँ, मगर उसके बाद ज्यादा मेहनत नहीं लगती किसी मर्द को मुझे चरम सीमा पर पहुंचाने में. </p>
<p>थोड़ी देर उसकी जीभ मेरी योनि पर और क्या चली कि मैं कांपते हुए झड़ने लगी. फ़िर से उसी प्रकार पानी की धारा निकली और इस बार थोड़ी ज्यादा मात्रा में थी. कांतिलाल का मुँह पूरा भीग गया और बिस्तर भी गीला हो गया था. </p>
<p>अब मुझे भी अपने चूतड़ों के नीचे बहुत गीला गीला सा लगने लगा था, सो मैं वहां से हटना चाहती थी. मगर कांतिलाल मेरी योनि से मुँह हटाने का नाम ही नहीं ले रहा था. किसी तरह बहुत विनती करने के बाद वो मुझे छोड़ा और बगल में लेट गया और मुझे अपनी ओर खींच कर सीने से लगा लिया.</p>
<p>उसने मुझे अपना लिंग चूसने को इशारा किया. मैंने उसके कहने के अनुसार उसका जांघिया खींच कर निकाल दिया. उसका लिंग तनतना रहा था. मैंने सोचा कि ये तो पहले से ही तैयार है, इसे क्या चूसना. मगर मैं जानती थी कि कांतिलाल इतनी जल्दी नहीं झड़ेगा. सो मैंने उसके लिंग को पकड़ कर हाथ से ऊपर नीचे किया, तो सुपारा खुलकर निकल आया. आज भी उसका लिंग पहले की ही तरह ताकतवर और अच्छे खासे मोटाई और लंबाई में था.</p>
<p>मैंने झुक कर पहले तो सुपारे को थूक से गीला कर दिया और सुपाड़े पर जीभ फिरानी शुरू की. क्योंकि मर्दों का सुपारा ही सबसे अधिक संवेदनशील हिस्सा होता है. मैं जीभ फिराने के साथ साथ उसे अपने हाथ से हिला भी रही थी.</p>
<p>मेरे दिमाग में अब ये था कि कांतिलाल कैसे इतना उत्तेजित हो जाए कि वो सीधा संभोग करने लगे ताकि झड़कर वो भी सो जाए और मैं भी आराम कर सकूं. इसलिए मैं धीरे धीरे उसके लिंग को हिलाते हुए लिंग मुँह में लेने लगी. थोड़ी देर में मैंने उसे तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया और हाथ से भी तेजी से हिलाना शुरू कर दिया.</p>
<p>कांतिलाल आनन्द से भर गया और वो भी मजे से कराहने लगा. मैं जितना अधिक चूस रही थी, उतना ही अधिक उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी.</p>
<p>मेरा पैर कांतिलाल के पेट की तरफ था, सो उसने जोश में आकर मुझे खींचा और मेरे जांघें फैला कर मेरी योनि अपने मुँह के ऊपर ले आया. वो मेरी योनि को फिर से चाटने लगा. इधर मैं भी गर्म थी और वो भी उत्तेजित था. </p>
<p>इधर मैं उसका लिंग चूस रही थी और वो मेरी योनि चाट रहा था. वो मेरी योनि में उंगली डाल चाट रहा था और मैं एक हाथ से उसका लिंग हिला रही थी, दूसरे हाथ से उसके आंडों को सहला रही थी.</p>
<p>मुझे बहुत आनन्द आने लगा था और मैं उसके लिंग को पूरे जोश से चूस रही थी. थोड़ी ही देर में मैं फिर से झड़ने को तैयार थी. मेरी योनि के भीतर कहीं पानी का फव्वारा सा रुका पड़ा था. मैं अभी भी दिमाग से काम ले रही थी और कांतिलाल को इतना उत्तेजित कर देना चाहती थी कि वो संभोग के लिए तैयार हो जाए या झड़ जाए. सो मैंने मर्दों के दूसरे सबसे संवेदनशील हिस्से वाली जगह को सहलाना शुरू किया.</p>
<p>अब मैंने उसके आंडों और गुदा द्वार के बीच वाले हिस्से की नसों को हल्के हल्के दबाते हुए सहलाना शुरू कर दिया. इससे कांतिलाल इतना जोश में आ गया कि मेरी योनि ही चबाने की तरह चाटने लगा. </p>
<p>फिर क्या था मैं उसके लिंग को मुँह में भर कर आंडों को पकड़ बुत की तरह शांत हो गई और अपने चूतड़ों और कमर के हिस्सा को झटकते हुए झड़ने लगी. मेरी योनि से निकलता हुआ पानी कांतिलाल के मुँह से होता हुआ छाती तक आ गया. मैं ढीली होने लगी और मैंने उसके लिंग को चूसना बन्द कर दिया.</p>
<p>कांतिलाल यही चाहता था. उसने मेरे शांत होते ही मुझे अपने ऊपर से नीचे किया और फ़िर मुझे सीधा लिटा कर मेरी टांगें पकड़ अपनी ओर खींचता हुआ मुझे पूरा फैला दिया. उसका लिंग अब पत्थर के समान कठोर हो चुका था. </p>
<p>मैंने उससे विनती की- प्लीज कांतिलाल जी, थोड़ा रुक जाओ.<br />
पर वो कहां किसी की सुनने वाला था. वो मेरे ऊपर जांघों के बीच आकर बोला- रुकना क्या जान … अब तो और मजा आएगा.</p>
<p>मैं इस बार बहुत कमजोरी महसूस करने लगी थी और मुझमें उसे हल्के से भी रोकने की ताकत नहीं बची थी. </p>
<p>वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठों को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लिंग को मेरी योनि के द्वार की दिशा देने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के छेद में मुझे महसूस हुआ, तो मेरी सांस रुकती सी महसूस हुई. इसी वक्त पर उसने अपना लिंग का सुपाड़ा हल्के से धकेल कर मेरी योनि में घुसा दिया.</p>
<p>फिर उसने मेरे हाथों को हाथों से पकड़ कर बिस्तर के दोनों तरफ फैला कर दबा दिया. वो धीरे धीरे लिंग सरकाता हुआ मेरी योनि में घुसाने लगा. मेरी योनि पहले से इतनी गीली थी कि मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही थी. मगर मुझे अंदेशा हो रहा था कि कुछ दर्दनाक होने वाला है. उसका लिंग आधा घुस चुका था कि तभी उसने वापस सुपाड़े तक लिंग खींच लिया और पूरी ताकत लगा कर उसने ऐसा धक्का मारा कि मैं चीख पड़ी. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
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कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-5</p>
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		<title>दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:28:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है। मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है। पहले मैं निधि के बारे <a title="दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/" aria-label="Continue reading दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।</p>
<p>मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है।</p>
<p>पहले मैं निधि के बारे में बता दूँ कि निधि बहुत ही खूबसूरत है, सेक्सी हैं, बहुत ही कामुक स्वभाव की है, उसका फिगर बहुत ही अच्छा है बड़े-बड़े चूची हैं, गांड एकदम फैली हुई है। सेक्स की बहुत बड़ी भूखी है वह हमेशा सेक्स करने को आतुर रहती है।</p>
<p>कुणाल ने मुझे पहले भी बताया था कि निधि सेक्स में बहुत रुचि दिखाती है, वह बहुत ज्यादा सेक्स करना चाहती है, वह सब पोजीशन पर सेक्स करना चाहती है। निधि को चूत चुदाई के लंबे लंबे दौर पसंद हैं, उसे तेज तेज धक्के पसंद हैं। वो लड़की अपनी गांड मरवाना भी पसंद करती है. निधि को वाइल्ड सेक्स और रफ़ सेक्स भी पसंद है।</p>
<p>मुझे कुणाल ने यह भी बताया था कि निधि के पहले भी कई सेक्स अफेयर रह चुके हैं और पहले भी बहुत लण्ड ले चुकी थी. कुणाल ने निधि के दोस्तों से पता लगाया था कि वह कॉलेज में बहुत सारे लड़कों के साथ चुदाई कर चुकी थी। चुदाई करना उसे बहुत पसंद था, उसे नए-नए लण्ड के साथ सेक्स करना बहुत पसंद था।</p>
<p>कुणाल हमेशा निधि को चोदने के लिए मेरे कमरे का इस्तेमाल करता था, वह हमेशा निधि को लेकर मेरे रूम पर आता था. वे दोनों दिन दिन भर सेक्स करते थे, उसके बाद चले जाते थे.<br />
लेकिन जब वे दोनों जाती थे तो निधि का चेहरा देख कर लगता था कि कुणाल निधि को खुश नहीं कर पाता था। </p>
<p>एक दिन की बात है, कुणाल और निधि मेरे रूम पर चुदाई कर रहे थे. अचानक से कुणाल को कुछ काम आ गया और उसे निधि को मेरे रूम पर छोड़कर जाना पड़ा।</p>
<p>अब मैं और निधि घर पर अकेले थे तो मैं निधि से बातचीत करने के लिए रूम में गया। कमरे में से कंडोम की सुगंध आ रही थी। बिस्तर की चादर की सिलवटें चुदाई की दास्तां बता रही थी।</p>
<p>निधि रूम में बेड पर लेटी हुई थी, वह थोड़ी उदास लग रही थी।</p>
<p>हम दोनों बात करने लगे. बात करते-करते हम लोग नॉनवेज बात करने लगे। वो अपनी चुदाई की बात बताने लगी, बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि कुणाल उसे खुश नहीं कर पाता है और वह रोने लगी।</p>
<p>मैं बगल में ही बैठा हुआ था उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया। मैं उसे चुप कराने के लिए उसके सिर को सहलाने लगा। समझाते हुए मेरे और निधि के होंठ आपस में नजदीक आ गए, मैं निधि को किस करने लगा, निधि मेरा पूरा साथ देने लगी।</p>
<p>हम लोगों ने लगभग 10 मिनट तक किस किया. निधि पूरे जानवरों की तरह मेरे होंठों पर टूट पड़ी, लग रहा था जैसे वह मेरे होठों को खा जाएगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे निधि ने सालों से किस नहीं किया है.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे किस करते करते हुए मैं निधि के चूचे दबा रहा था और वह मेरे लण्ड को सहला रही थी, हम दोनों बहुत मजे ले रहे थे। </p>
<p>निधि के चुचे को दबाते दबाते मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसकी मुलायम चूची को चूसने लगा। वो पूरे मस्ती में अपनी कामुक आवाज उम्म्ह … अहह … हय … ओह … निकाल रही थी.<br />
उसने मेरी पैंट की चेन खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे हाथ से हिलाने लगी.</p>
<p>लड़की के हाथसे लंड सहलवाने में मुझे भी मज़ा आने लगा था, मैंने भी जींस के ऊपर से ही निधि की चूत को सहलाना आरम्भ कर दिया। अब तक निधि बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी.<br />
मैंने उसकी जींस का बटन खोल दिया, फिर ज़िप भी खोल दी और जीन्स को नीचे सरका दिया.</p>
<p>मैंने देखा कि उसकी पैंटी चूत के पास से उससे निकले रस से पूरी गीली हो चुकी थी।</p>
<p>तभी निधि ने मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. निधि मेरे लंड को एकदम रंडी की तरह चूस रही थी, काट रही थी. निधि कभी मेरे लंड को जीभ से चूसती, चाटती तो कभी दाँत से काटती। उसकी कामवासना पूरे उफान पर लग रही थी. शायद मेरा दोस्त उसे छोड़ते छोड़ते बीच में ही छोड़ गया था.</p>
<p>मैंने मौके का फायदा उठाया और मैंने उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया. करीब दस मिनट तक मुख चोदन के बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया वह मेरा सारा पानी पी गई।</p>
<p>उसके बाद निधि ने मुझे अपना चूत चाटने के लिए इशारा किया. मैं भी उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत पहले से बहुत गीली थी. मैं चूत चाटने लगा तो वह मेरे बालों से खेलने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी जिससे मुझे मज़ा आने लगा।</p>
<p>वह मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. लग रहा था जैसे कि वह मेरे मुंह को अपनी चूत के अंदर घुसा लेगी। पांच सात मिनट चूत चूसने के बाद वो झड़ गई, मैंने उसका सारा पानी पी लिया.</p>
<p>लेकिन निधि का मन नहीं भरा था, निधि ने मुझे फिर से उसकी चूत चूसने को कहा. इस बार निधि ने मुझे बिस्तर पर नीचे लिटाया और अपनी चूत मेरे मुंह के ऊपर रख कर बैठ गई, मेरे मुंह को चोदने लगी।</p>
<p>अपनी चूत को पाँच मिनट तक मेरे होंठों पर रगड़ने के बाद पीछे वो घूम कर 69 की पोजीशन में लेट गई। अब निधि दोबारा मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत चूस रहा था।</p>
<p>5 मिनट के बाद उसने मुझसे कहा- रवीश यार … अब मुझे चोद दो!<br />
मैं अपने दूसरे कमरे से कंडोम लेकर आया।</p>
<p>निधि ने एकदम प्रोफेशनल रंडी की तरह मुंह में कंडोम को रख कर, कंडोम को मुंह में फंसा कर मेरे लंड में कंडोम पहनाया. निधि का यह अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा।</p>
<p>मैं निधि के ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी प्यासी चूत पर सेट करके मैंने एक धक्का लगाया. मेरा लण्ड बड़े आराम से एक बार में ही पूरा अंदर चला गया। लेकिन निधि ने झूठ का दर्द होने का दिखावा किया और मना करने लगी, रुकने को कहने लगी. मुझे पता था कि साली रांड नौटंकी कर रही है. और पर मुझ पर सेक्स का भूत सवार हो चुका था तो मैंने उसे गंदी गंदी गालियां देते हुए चोदना शुरू कर दिया।</p>
<p>वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… करती हुई चुद रही थी. उसे मजा आ रहा था. वो मेरे नीचे लेटी हुई अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चूत चोदन में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और मजा ले रही थी.<br />
मैंने निधि को 20-25 मिनट तक लगातार हचक हचक कर कर चोदा। जिसमें निधि दो बार झड़ गयी, जिससे चादर भी गीली हो गयी।<br />
उसके बाद मैं भी कुछ तेज धक्के लगाकर उसकी चूत में ही झड़ गया क्योंकि मैंने कंडोम लगाया हुआ था तो कोई डर नहीं था। </p>
<p>उसके बाद हम दोनों अगल बगल लेट गए और बातें करने लगे. बीइच बीच में हम चूमा छाती भी कर रहे थे. नीचे नीचे मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही थी.</p>
<p>मेरा लंड थोड़ी देर बाद खड़ा हो गया तो मैंने निधि से गांड मारने की बात की, निधि बिना किसी आनाकानी के तुरंत राजी हो गई।</p>
<p>उसने अपने पर्स से वैसलीन क्रीम निकाल कर दी. मैं कंडोम लेने दूसरे कमरे में जाने लगा तो उसने मुझे रोका और अपने पर्स में से कंडोम निकाल कर मेरे लंड पर चढ़ाया और उस पर वैसलीन क्रीम लगा दी जिससे कि लंड आसानी से उसकी गांड में चला जाए।</p>
<p>फिर मैंने उसे घोड़ी बनाकर गांड के छेद पर लंड लगाकर जोरलगाना शुरू किया और मेरे लंड का सुपारा अंदर घुस गया. इस बार शायद निधि को थोड़ा दर्द हुआ, वो रोने लगी और उसकी आंखें बाहर आने लगी।</p>
<p>2 मिनट तक मैंने उसकी नंगी पीठ को सहलाया और किस किया। उसके बाद मैंने फिर से एक जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लंड निधि के गांड में समा चुका था।<br />
निधि बेड पर गिर गई क्योंकि वह इस धक्के के लिए तैयार नहीं थी।</p>
<p>5 मिनट तक रुकने के बाद मैंने धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया लंड अपनी जगह बना चुका था। फिर मैंने धक्के लगाना तेज कर दिया मैं निधि की गांड की जोरदार ठुकाई कर रहा था।<br />
अब मैं लंड को पूरा बाहर निकालता और एक बार में अंदर डाल देता। जिससे निधि को दर्द भी देता और मजा भी आता। कभी-कभी मैं गांड मारते मारते लंड निकालकर अचानक से चूत में डाल देता। चूत में धक्के मारने लगता मुझसे निधि को बहुत मजा आ रहा था। मैं बारी-बारी निधि की गांड और चूत एक साथ चोद रहा था।</p>
<p>निधि की चूत इस बीच एक बार और झड़ चुकी थी।</p>
<p>लगभग आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं निधि की गांड में ही झड़ गया। </p>
<p>इस तरह से मैंने निधि को एक डेढ़ घंटे जमकर चोदा. वो अपनी चूत और गांड चुदाई में मिले आनन्द के कारण बहुत खुश नजर आ रही थी।</p>
<p>उसके बाद हम लोगों ने कुछ देर आराम किया. तब निधि नंगी ही बिस्तर से उठी और उसने अपने आप को बाथरूम में जाकर साफ किया।</p>
<p>थोड़ी देर बाद कुणाल आ गया. उसके बाद निधि और कुणाल फिर से रूम में चले गए, कुणाल और निधि ने फिर से चुदाई की।</p>
<p>चुदाई करने के बाद वे लोग चले गए।</p>
<p>तब से निधि से मेरी सीधी बात होने लगी, अब जब भी हम लोगों को मन करता है, हम लोग मिलकर चुदाई करते हैं।</p>
<p>अगली कहानी में आप लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने और निधि ने अन्तर्वासना पर मिले एक जोड़े के साथ ग्रुप सेक्स किया।<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:33:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamukta]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है. रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने <a title="भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/" aria-label="Continue reading भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है.</p>
<p>रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने लिए दुकानदार को फोन लगवाकर बल्लू को बुलाया.<br />
वंदना भाभी- हैलो … बल्लू को बुलाएंगे क्या एक बार?<br />
उधर से आवाज आई- आप कौन बोल रही हैं?<br />
वंदना भाभी- बोल देना कि वंदना का फोन है.</p>
<p>दुकानदार ने बल्लू को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा.<br />
लड़के ने कहा- बल्लू सेठ, किसी वंदना का फोन है आपके लिए.</p>
<p>बल्लू ने जो काम था, वो बाजू मे रख कर तुरंत जाकर फोन लिया- हैलो भाभी, बोलो?<br />
वंदना भाभी- बल्लू कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं?</p>
<p>बल्लू- ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं. बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो.<br />
वंदना भाभी- सच्ची बल्लू, मेरे नॉटी बल्लू… गुन्डाराज … मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं</p>
<p>बल्लू- ओह भाभी, तुम भी ना… आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं. लेकिन भाभी तेरा पति भी तो घर पर है. रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है.<br />
वंदना भाभी- बल्लू, मेरे पास एक आइडिया है. आज ये शराब पीने के मूड में है. तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना. मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी. तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना. मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी. </p>
<p>बल्लू- सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा. क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी. मुझे भी भाभी की चूत का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी. आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी. </p>
<p>फोन को रखने के बाद बल्लू ने दुकानदार को देखा.<br />
दुकानदार बोला- क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने बल्लू.<br />
बल्लू- हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती. साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है. कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो न जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है.</p>
<p>दुकानदार- हां बल्लू सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना. इसके पति से बच कर रहना. वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है.<br />
बल्लू- हां, ये बात तो है. चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है.</p>
<p>रात के 11 बजे बल्लू वंदना भाभी के घर पर पहुंच गया और देखा कि वंदना भाभी एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी. भाभी ने बल्लू सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था. उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो. उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था. वंदना का इशारा बल्लू की तरफ था. बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी. भाभी ने बल्लू को आंख मार दी. बल्लू ने बिजली बंद कर दी और भाभी ने बल्लू को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया.</p>
<p>लाइट बंद होते ही वीजू की दारू में भंग पड़ गया. वो उठ कर अपने बेड पर चला गया. पांच मिनट के अंदर ही वीजू के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई. बल्लू भी ताक में था कि कब भाभी का पति वीजू सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा.</p>
<p>जैसे ही बल्लू को पता चला कि वीजू सो चुका है तो पीछे से आकर उसने भाभी को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा. भाभी भी बल्लू की बांहों में आते ही चुदासी हो गई.<br />
भाभी की गांड को छूते ही बल्लू का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और भाभी की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा.</p>
<p>बल्लू ने अपने तने हुए लंड को भाभी की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया. कपड़ों के ऊपर से ही जब बल्लू का लंड भाभी की गांड पर लगा तो भाभी मचल सी गई. उसने पलट कर बल्लू के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. </p>
<p>बल्लू ने भाभी की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया. उसके बाद उसने भाभी को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड भाभी की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर भाभी के मोटे चूचों को दबाने लगा. भाभी के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था. इसलिए भाभी बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी. बल्लू जोर से भाभी के चूचों को दबा रहा था. </p>
<p>उसका लंड अपने पूरे आकार में आ गया था. जब भाभी से रहा न गया तो भाभी ने पीछे हाथ ले जाकर बल्लू के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. भाभी के हाथ में लंड आते ही बल्लू की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो भाभी को बुरी तरह से काटने लगा.</p>
<p>भाभी ने कहा- चलो अंदर चलते हैं. ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला. बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं. </p>
<p>बल्लू ने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया. लेकिन चुदाई की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये. लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है. बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये. </p>
<p>अंदर जाते ही भाभी ने बल्लू की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया. बल्लू का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था. बल्लू ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया. उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो.</p>
<p>फिर भाभी ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर बल्लू की गोद में आकर बैठ गई. बल्लू का तना हुआ लौड़ा भाभी की गांड के नीचे दब गया. गोद में बैठी हुई भाभी के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो. लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी. वो जोर से भाभी के चूचों को पीने में लगा हुआ था भाभी के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे.</p>
<p>बल्लू का लंड भाभी की गांड के नीचे उसकी चूत में जाने के तड़प रहा था. इधर भाभी की गांड भी बल्लू के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी.<br />
फिर बल्लू ही बोल पड़ा- बस भाभी बस … अब और क्यूं तड़पा रही हो. इस पर उछलो ना …<br />
भाभी बोली- आह्ह बल्लू … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो. मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो. मेरी चूत ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है. </p>
<p>फिर भाभी ने अपनी टांगों को फैलाते हुए बल्लू के तने हुए लौड़े पर अपनी चूत को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी चूत में लेते हुए बैठती चली गई. भाभी की गीली चिकनी चूत में बल्लू का लंड उतरने लगा और पूरा का पूरा लंड उतरते ही भाभी और बल्लू के मुंह से एक साथ आह्ह … निकल गई.</p>
<p>लंड पूरा का पूरा चूत में उतर गया था और भाभी अब बल्लू के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी. भाभी ने बल्लू के गले में बांहें डाल दीं और बल्लू के लंड पर उछलना शुरू हो गई. बल्लू ने भाभी के चूचों को मुंह में भर लिया.</p>
<p>“उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म चूत में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं.”<br />
भाभी बोली- स्सस् … मेरे राजा … तुम्हारा लंड मेरी चूत की प्यास और बढ़ा देता है. मैं इसको खा जाऊंगी … आह्ह् … चोदो मुझे मेरे राजा … आह्हह … </p>
<p>दोनों ही मस्ती में सेक्स का मजा लेने लगे. उछलने के कारण भाभी की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं. भाभी की चूत पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह् … आह … कर रही थी. अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है. वो दोनों चुदाई में खोये हुए थे.</p>
<p>लेकिन इसी बीच भाभी का पति वीजू नींद से उठ गया. भाभी की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से आ रही है. साथ में ही वंदना भाभी के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी वीजू ने झट से पहचान ली.</p>
<p>वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा. जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है.</p>
<p>जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो वंदना भाभी और बल्लू की गांड फट गई. दोनों को ही उसके पति ने चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था. वो हक्का-बक्का होकर वीजू को देखते ही रह गये.<br />
उनको अंदाजा नहीं था कि वीजू नींद से जाग भी सकता है. मगर वीजू ने नंगी भाभी को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था.</p>
<p>वीजू बोला- साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है. साली रांड. मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में. वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना. उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया. लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है.</p>
<p>भले ही वीजू ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी बल्लू का लंड वंदना भाभी की चूत में ही था और उसने अपनी मलाई वंदना भाभी की चूत में गिरा दी थी. लेकिन बस वीजू के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे.</p>
<p>वंदना भाभी को भी अहसास हो गया था कि बल्लू का माल चूत में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था. वीजू की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था.<br />
इधर वीजू वंदना को गालियां दे रहा था. साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई. </p>
<p>वंदना भाभी बोली- तो क्या करती मैं? तुम्हारे लंड से मेरी चूत की प्यास नहीं बुझती है. तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो.<br />
वीजू- तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती.<br />
भाभी बोली- मैं तो बल्लू का ही लूंगी. तुमको जो करना है कर लो.</p>
<p>वन्दना भाभी ने बल्लू की तरफ देख कर कहा- तुम रुक क्यों गये. इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है. तुम चुदाई चालू रखो.<br />
बल्लू बोला- लेकिन मेरे लंड का माल चूत में निकल चुका है. </p>
<p>भाभी ने बल्लू के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई. बल्लू भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो वीजू ने लैम्प बल्लू की गांड पर फेंक कर मारा. बल्लू की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया. </p>
<p>उसके बाद वीजू वंदना के कमरे की तरफ गया लेकिन वंदना भाभी ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था. वीजू अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया. </p>
<p>आपको ये भाभी की कामुकता और सेक्स की कहानी कैसी लगी. नीचे दिये गये मेल पर मैसेज करके बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:31:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम। मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी <a title="दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/" aria-label="Continue reading दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम।<br />
मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. </p>
<p>मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी है.</p>
<p>यह बात आज से करीब आठ महीने पहले की है. हमारी कॉलोनी में खेल का एक मैदान बना हुआ है. वहां पर मैं कई बार क्रिकेट खेलने के लिए चला जाया करता था. मेरी ही तरह वहां पर मेरी ही कॉलोनी और आस-पास के बच्चे भी क्रिकेट खेलने के लिए आ जाया करते थे. ऐसे ही खेल खेल में मेरी दोस्ती इमरान नाम के एक लड़के के साथ हो गई. </p>
<p>मैंने यहां पर उस लड़के का असली नाम नहीं लिखा है. मैंने उसका नाम बदल दिया है क्योंकि कहानी उसकी मॉम के बारे में है इसलिए मैं नहीं चाहता कि उसकी मॉम की पहचान किसी को पता चले.</p>
<p>उससे दोस्ती होने के बाद हम दोनों कई बार साथ में ही बाहर घूमने के लिए भी चले जाते थे. इसी तरह एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया. जब मैं उसके घर गया तो उसकी मां को देख कर मैं हैरान रह गया. उसकी मां की उम्र लगभग 42 साल के करीब रही होगी. मगर चेहरे पर ऐसी चमक थी कि मैं हैरान था.</p>
<p>वो देखने में एक 30 या 35 साल की भाभी के जैसी दिख रही थी. उसकी मां का नाम तबस्सुम था. यहां पर मैंने उसकी मां का नाम भी बदल दिया है. उसका फीगर करीब 36-32-39 का था. मुझे उसके फीगर का नाप बाद में पता चला था जब मैंने उसके साथ सेक्स किया था. मगर मैं आपकी जानकारी के लिए उसके फीगर का नाप अभी बता दे रहा हूं ताकि आपको पता लग सके कि वो दिखने में कैसी रही होगी. </p>
<p>तो जब मैं उसके घर पर गया तो मेरी नजर उसकी मां से नहीं हट रही थी. मैं इस तरह से उसकी मां के बारे में नहीं सोचना चाहता था क्योंकि इमरान मेरा दोस्त था लेकिन फिर भी उसकी मां के बदन में बहुत ही गजब का आकर्षण था जो बार-बार मुझे उसके बारे में सेक्स के लिए सोचने पर मजबूर कर रहा था. </p>
<p>वैसे तो उसकी मां ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उसी पर नज़र रखे हुए हूं लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी. वो भी कई बार मेरी तरफ देख लेती थी क्योंकि हम दोनों आमने-सामने ही बैठे हुए थे. </p>
<p>फिर उसकी मां के साथ मेरी भी कुछ बात हुई. बातों ही बातों में पता चला कि उसके पापा बैंक में काम करते हैं. वो दिन में घर पर नहीं रहते हैं. फिर कुछ देर के बाद उसकी मॉम से बात करने के बाद इमरान और मैं ऊपर छत पर खेलने के लिए चले गये. लेकिन खेल में मेरा मन नहीं लग रहा था. मैं उसकी मां के बारे में ही सोच रहा था. उसकी मां के गोरे बदन के बारे में सोच कर मेरे लंड में हलचल सी होने लगी थी.</p>
<p>उस दिन घर जाने के बाद मैंने उसकी मां के बारे में सोच कर मुठ मारी तब जाकर मेरे लंड को शांति मिली.</p>
<p>अब तो रोज मेरा मन इमरान के घर जाने के लिए करने लगा था. मैं उसके घर पर जाने के लिए इमरान को उकसाता रहता था ताकि उसकी मां को देख सकूं. मैं उसकी मां को पटाने के चक्कर में था. उसके ख्याल मेरे मन से निकल ही नहीं रहे थे.</p>
<p>जब भी मैं इमरान के घर जाता था तो मेरी नजर उसकी मां के बदन को ऊपर से नीचे तक पूरा नाप लेती थी. कभी उसकी चूचियों को घूरने लगता था तो कभी उसकी गांड को. मैं सोच रहा था कि जब ये बाहर से देखने में इतनी मस्त माल लग रही है तो अंदर से तो ये बिल्कुल कयामत ही लगती होगी, मैं उसकी मां के नंगे बदन को देखने के लिए तरस जाता था लेकिन अभी मुझे ऐसी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी कि मैं उसकी मां को नंगी देख सकूं.</p>
<p>उसकी माँ भी मेरी तरफ देखती तो थी लेकिन उसकी तरफ से मुझे अभी कुछ इस तरह का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा था जिससे कि मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे साथ कुछ करना चाहती है या नहीं. इसीलिए मैं उसके मन को टटोलने में भी लगा हुआ था.</p>
<p>मैं हमेशा तबस्सुम आंटी के आस-पास ही मंडराता रहता था. कभी कभी तो मैं उसको बहाने से छू भी लेता था. वैसे मुझे जहां तक लग रहा था कि वो भी मेरे मन की इच्छा को जान चुकी थी लेकिन कुछ कह नहीं रही थी.</p>
<p>मैं जब भी उसको छूने की कोशिश करता तो ऐसे बर्ताव करता था कि वह सब मैंने जानबूझ कर नहीं किया है और गलती से ही उसको टच हो गया है. मेरी हरकतों पर वो भी हल्के से मुस्करा कर बात को टाल देती थी.</p>
<p>इस तरह से आंटी के लिए मेरी प्यास हर दिन बढ़ती ही जा रही थी. मैं उसको नंगी करके चोदने की फिराक में था लेकिन पता नहीं था कि वो दिन कब नसीब होने वाला है. </p>
<p>एक दिन की बात है जब मैं इमरान के घर गया हुआ था. खेल के बीच में ही इमराने के किसी दोस्त का फोन आ गया और वो मुझे घर पर उसकी मां के साथ ही छोड़ कर चला गया.</p>
<p>उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं उसकी मां के साथ घर पर अकेला ही था. मेरा मन था कि जाकर आंटी के चूचे दबा दूं लेकिन अभी मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर मैं इमरान के कमरे में चला गया. </p>
<p>मैंने उसके कम्प्यूटर में टाइम पास करना शुरू किया. ऐसे ही देखते देखते मुझे उसके कम्प्यूटर में ब्लू फिल्म मिल गई. मैंने देखा कि आंटी अपने किसी काम में बिजी थी तो मैंने सोचा कि इमरान के आने तक ब्लू फिल्म देख लूं. वैसे भी मैंने बहुत दिनों से ब्लू फिल्म नहीं देखी थी. मैं उसके रूम का दरवाजा बंद करके ब्लू फिल्म देखने लगा. मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैं अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगा. फिर एकदम से आंटी दरवाजा खोल कर अंदर आ गई और उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म देखते हुए अपने लंड को हिलाते हुए देख लिया. उनके हाथ में चाय का कप था.<br />
उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर ऐसे रिएक्ट किया जैसे वो मेरी इस हरकत पर गुस्सा हो गई हो; वो चाय को रख कर वापस चली गई.</p>
<p>मैंने सोचा कि इससे पहले कि बात इमरान तक पहुंचे मुझे कुछ करना चाहिए. अगर आंटी ने मेरी यह हरकत इमरान को बता दी तो शायद मैं इमरान के घर पर भी नहीं आ पाऊँगा उसके बाद। इसलिए मैं आंटी को सॉरी बोलने के लिए चला गया.</p>
<p>आंटी रसोई में कुछ काम कर रही थी. जब उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा तो वो नॉर्मल ही लगी.<br />
फिर मैंने हिम्मत करके खुद ही कहा- आंटी मुझसे गलती हो गई. मुझे ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी.<br />
आंटी बोली- कोई बात नहीं इस उम्र में लड़के ऐसे ही काम किया करते हैं.</p>
<p>मैं आंटी की बात सुन कर हैरान था इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने आंटी की गांड को ताड़ना शुरू कर दिया और मेरा लंड वहीं पर ही खड़ा होने लगा. फिर पता नहीं क्या हुआ कि मैंने आंटी की गांड को दबाने के लिए हाथ बढ़ाए लेकिन मैं डर के मारे रुक गया कहीं बात बिगड़ न जाये.</p>
<p>फिर आंटी ने कहा- तुम यहां पर क्या कर रहे हो, बाहर हॉल में चले जाओ.<br />
आंटी मेरे लंड को देख रही थी. आंटी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर बोली- मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूं.</p>
<p>मैं निराश होकर बाहर चला गया.</p>
<p>फिर कुछ देर के बाद आंटी चाय लेकर बाहर आ गई. वो मेरे सामने जब चाय का कप रखने के लिए झुकी तो मैंने आंटी की चूचियों को देख लिया. मेरे मन में एक आह्ह सी निकल गई. आंटी की चूचियों की दरार बहुत मस्त थी. आंटी ने भी मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था. फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी. </p>
<p>चाय पीते हुए आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?<br />
मैंने आंटी को कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो. अगर मैं आपका पति होता तो … कहते हुए मैं रुक गया.<br />
आंटी बोली- क्या?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं।<br />
वो बोली- बता दो, कोई बात है तो।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बहुत प्यार करता और आपको किसी बात की कमी नहीं होने देता। </p>
<p>आंटी बोली- तुम्हें मैं इतनी पसंद हूँ क्या?<br />
मैंने कहा- हाँ आंटी!<br />
कहते हुए मैं आंटी के पास ही आकर बैठ गया. </p>
<p>आंटी बोली- मेरे पति तो मुझमें बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं लेते हैं. वो कभी मेरी तारीफ नहीं करते।<br />
मैंने कहा- मैं तो आपको बहुत पसंद करता हूँ.</p>
<p>कहते हुए मैंने आंटी की जांघ पर हाथ रख दिया. आंटी ने मेरा हाथ हटा दिया और कहने लगी- मैं तुम्हारे दोस्त की मां हूँ. तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए.<br />
लेकिन अब मुझसे नहीं रुका जा रहा था, मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और उनको किस करने की कोशिश करने लगा.</p>
<p>आंटी मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी और कहने लगी- तुम उम्र में बहुत छोटे हो.<br />
मैंने कहा- मैं कुछ नहीं जानता आंटी. मैं तो आपको बहुत प्यार करता हूं. मैं बहुत दिनों से आपको ये बात कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पा रहा था.<br />
आंटी मेरी बांहों में कसमसा रही थी. उनकी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गये थे. मैंने आंटी का मुंह अपनी तरफ किया और आंटी को किस करने लगा.  </p>
<p>कुछ देर तो वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन फिर थोड़ी सी देर के बाद वो भी मेरी चुम्मी का जवाब देने लगी. मैंने अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया. मैं उनको जोर से किस करने लगा. फिर मेरे हाथ उनकी छाती पर उनके बूब्स को टटोलने लगे.</p>
<p>लेकिन तभी इमरान की गाड़ी की आवाज आई और हम दोनों अलग हो गये.<br />
आंटी की आंखों में मुझे मायूसी साफ दिखाई दे रही थी. मुझे भी मजबूरी में आंटी से अलग होकर अपने घर वापस जाना पड़ा।</p>
<p>उसके बाद हम दोनों को मिलने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग गया.<br />
आंटी ने मुझे फोन पर ये बता दिया था कि इमरान और उसके पापा दो दिन के लिए बाहर जायेंगे. इसलिए हम दोनों उसी दिन का इंतजार कर रहे थे. बहुत बेचैन रहा मैं इस दौरान आंटी से मिलने के लिए.</p>
<p>फिर जिस दिन इमरान और उसके पापा चले गये तो मैं आंटी से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंच गया. मुझे देखते ही आंटी भी खुश हो गई. </p>
<p>हम दोनों ने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मैं जाते ही आंटी को बांहों में लेकर किस करने लगा. दोनों को ही मजा आने लगा. आंटी भी एंजॉय कर रही थी और साथ में हल्की सिसकारियां भी ले रही थी. </p>
<p>फिर मैंने आंटी को वहीं रसोई के पास ही डिनर टेबल पर लिटा दिया और उनकी कुर्ती को निकाल दिया. मैं उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा. फिर उनके पेट को किस करने लगा. उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैं उनको किस करते हुए अपने कपड़े भी उतारने लगा. मैंने अपने पूरे कपड़े निकाल दिये. फिर मैं दोबारा से आंटी को किस करने लगा. आंटी लगातार ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां अपने मुंह से निकाल रही थी.</p>
<p>मैंने उसके बाद आंटी की सलवार भी निकाल दी और आंटी की जांघों को चाटने लगा. </p>
<p>आंटी की पैंटी को चूसने के बाद मैंने आंटी की पैंटी भी निकाल कर अलग कर दी. उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे.<br />
मैं वहीं पर घुटनों के बल बैठ गया और आंटी की चूत को जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>आंटी मचलने लगी, वे बोली- क्या कर रहा है, इतनी गंदी जगह को इतनी मस्ती से क्यूं चाट रहा है.<br />
मैंने कहा- आंटी मुझे तो ये गंदी जगह पसंद है.<br />
कह कर मैंने आंटी की चूत में जीभ को अंदर डाल दिया तो आंटी और तेजी के साथ सिसकारियां लेने लगी.<br />
वो कहने लगी- मेरे पति कभी ऐसा नहीं करते. आज मुझे पहली बार इतना मजा आ रहा है. मैंने कभी अपनी चूत में इतना मजा महसूस नहीं किया था. </p>
<p>उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया और आंटी के हाथ में अपना लंड दे दिया. आंटी पहले से ही काफी गर्म हो गई थी. आंटी ने मेरे लंड को तुरंत हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुट्ठ मारने लगी. वो उसको प्यार से सहला रही थी.</p>
<p>मुझे भी मस्ती सी चढ़ी जा रही थी. मैंने आंटी को अपना लंड मुंह में लेने के लिए कहा तो वो कहने लगी कि मुझसे लंड मुंह में नहीं लिया जायेगा. फिर मेरे बहुत कहने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भी ले लिया.</p>
<p>दो मिनट तक आंटी ने लंड चूसा और फिर बाहर निकाल लिया. उसके बाद वो कहने लगी कि बस इससे ज्यादा मैं नहीं कर पाऊंगी. मैं समझ गया कि आंटी को उनके पति ने लंड चूसने की आदत नहीं लगाई है. अगर वो अपने पति का लंड भी चूसती तो मेरे लंड को बड़े ही मजे से चूस लेती. फिर मैंने आंटी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया और अपने लंड को आंटी की चूत के बीच में लगा दिया. </p>
<p>लंड को चूत के बीच में लगा कर मैंने धक्का मारा तो आंटी की सिसकारी निकल गई.</p>
<p>फिर मैंने आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. आंटी की चूत को चोदते हुए मुझे मजा आने लगा और आंटी के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.<br />
आंटी बोली- मैंने पूरे एक साल बाद लंड का स्वाद चूत में लिया है.</p>
<p>मैं आंटी को पूरा मजा देते हुए उनकी चूत को चोदने लगा. आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी. मेरे धक्कों के साथ आंटी के चूचे भी तेजी के साथ हिल रहे थे. आंटी मस्त हो गई थी.</p>
<p>फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और आंटी की चूत को दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.<br />
मैंने आंटी से पूछा- मैं अपने माल को कहां पर निकालूं?<br />
तो आंटी कहने लगी- मेरी चूत में ही निकाल दो. मैं तुम्हारे माल को अपनी चूत में ही लेना चाहती हूं.</p>
<p>फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा. मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया. आज पहली बार मेरे लंड से इतना सारा माल निकला था. मैंने आंटी की चूत में कई पिचकारी मारी और फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>उसके बाद आंटी ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गये. वहां जाकर हम दोनों ने साथ में ही स्नान किया और आंटी की चूत को मैंने अपने हाथों से ही साफ किया. आंटी ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर धोया.</p>
<p>उस दिन आंटी ने फिर मुझे खाना खिलाया और फिर रात को दोबारा आने के लिए कह दिया. इस तरह से दो दिन तक मैं और आंटी चुदाई का मजा लेते रहे.<br />
आंटी भी मुझसे खुश हो गई और बोली- अब तुम जब चाहो मेरे घर पर आकर मेरी चूत को चोद सकते हो. अब हमें जब भी मौका मिलता है हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं. </p>
<p>दोस्तो, आपको मेरे दोस्त की अम्मी की चुदाई कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल के जरिये जरूर बताना. मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/</link>
					<comments>https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:58:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Desi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Real Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं. मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना <a title="टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/" aria-label="Continue reading टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं.</p>



<p>मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना चाहता हूं कि सोनिपत के कुंडली तहसील के एरिया से हूं। मैं किसी भी लड़की को ये नहीं कहने वाला कि वो मुझे चोदने के लिए संपर्क करे। यह मैं उन पर ही छोड़ता हूं कि मेरी कहानी पढ़ने के बाद वो खुद ही फैसला ले।</p>



<p>चलिए तो मैं कहानी पर आता हूं:</p>



<p>यह मेरे और मेरे पड़ोस के गांव की एक टीनएज लड़की की कहानी है।<br>मैं कुछ अपने बारे में बता दूँ मेरा नाम मोहित (बदला हुआ) है। हाइट 6 फुट भरा हुआ शरीर … मुझे जिम का कोई शौक नहीं है पर दोस्तों के साथ गांव की जिम में चला जाता हूं. वैसे मैं अपने छोटे भाई के बारे में तो बताना ही भूल गया. छोटा भाई मतलब मेरे लंड से है जो 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।<br>चलिए मामला शुरू करते हैं.</p>



<p>कहानी पिछले साल नवंबर की है जब मैंने दिल्ली में सरकारी नौकरी की कोचिंग शुरू की थी।</p>



<p>जब मैंने कोचिंग लेनी शुरू की तो मुझे नहीं पता था कि ये लड़की मेरे ही बैच में एडमिशन ले लेगी क्योंकि मैंने उसे तब देखा था जब मैं अपने दोस्त के साथ एडमिशन के लिए गया हुआ था।</p>



<p>हम दोनों काफी जल्दी घर से निकल गए थे हम दोनों ने काफी सेंटर पर जाकर बातचीत की लेकिन दिमाग तो जैसे बंद ही हो गया था। फिर हमने सोचा कि जहां भी जाएंगे आरपार कर के आएंगे तो हमें वहां अच्छा भी लगा और हमने वहीं एडमिशन ले लिया।</p>



<p>फिर हम दोनों को काफी भूख लग रही थी तो हम दोनों एक होटल में चले गए।</p>



<p>मैंने ऑर्डर देने के लिए वेटर को आवाज़ लगाई तो उसने भी मेरे साथ आवाज़ लगाई। मुझे उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। पर आवाज़ से लगा कि काफी मस्त लड़की होगी। तो मैंने उठ कर उसे देखने की कोशिश की और मैं उसे देखता ही रह गया उसने काली शर्ट और नीली जीन्स डाल रखी थी। मेरा तो मुंह खुला का खुला ही रह गया था. फिर मेरे दोस्त ने आवाज़ दी तो मैं वापस बैठ गया।</p>



<p>उसने पूछा- क्या हुआ?<br>तो मैंने मजाक में कह दिया- बेटा! तेरी भाभी बैठी है वहां।<br>मैंने तो मजाक में ही ये बात कही थी पर वो सच में ही उसकी भाभी बन गई।</p>



<p>20 नवंबर से मेरी क्लास शुरू हो गई। मेरे शुरू के कुछ दिन तो बस यूं ही चले गए कुछ नए दोस्त बन गए थे और मैं भी उस लड़की को भूल गया था। मैं अपनी लाइफ और स्टडी एन्जॉय कर रहा था.</p>



<p>वो मुझे एक दिन डीटीसी की बस में मिली. मैं उसके आगे खड़ा था तो उसने पीछे से कहा- आपको उतरना है क्या?<br>मुझे वहीं आवाज़ दोबारा सुनने को मिली तो मैं भी तुरंत पीछे पलट गया और देखा तो वहीं लड़की मेरे पीछे खड़ी थी।<br>मैंने उससे कहा- नहीं मुझे नहीं उतरना.<br>और मैंने उसे आगे कर दिया।</p>



<p>जब मैंने उसकी गांड को देखा तो मुझे लगा कि ये बिल्कुल सील पैक है। फिर मन में आया कि आज भी कोई बिना चुदे रह सकती है क्या भला?<br>उस दिन तो वो मुझे फिर नहीं दिखी।</p>



<p>पर अगले दिन मैंने उसे सीढ़ियों पर मेरी ही क्लास में जाते हुए देखा.<br>अरे दोस्तो … मैं तो उस हसीना के बारे में तो बताना ही भूल गया।<br>उसका नाम काजल(बदला हुआ) है, उसकी हाइट 5’9″ है। उसका फिगर 32-28-32 है, आंखें तो ऐसी है बस कोई एक बार देखे तो खो ही जाए।</p>



<p>जब मैंने उसे सीढ़ियों पर देखा तो उसने भी मुझे देख लिया और बस हल्की सी स्माइल दी कर बढ़ गई।</p>



<p>जब वो क्लास में गई तो मैंने उसे ढूंढा पर वो नहीं दिखी। जिन भाईयों ने दिल्ली में कोचिंग ली होगी, उन्हें पता होगा वहां कुत्तों की तरह रखा जाता है स्टूडेंट्स को।<br>ख़ैर आगे बढ़ते हैं:</p>



<p>अब उसका और मेरा मिलना लगभग रोज ही होने लगा था। जब वो बस लिए इन्तजार करती थी तो मैं उसके पास चला जाता था और उससे कुछ बात हो जाती थी। बात बात में ही उसने अपना नाम मुझे बताया था और मैंने उससे अपना।</p>



<p>फिर एक दिन वो आजादपुर वाले स्टैंड पर खड़ी क्लास में जाने लिए बस का इन्तजार कर रही थी। उस दिन बस में बहुत भीड़ थी। तो मैंने उसे तो बस में चढ़ा दिया. पर मैं रह गया.<br>मैं जैसे कैसे कोचिंग में पहुंचा. तो पहले तो वो कुछ नहीं बोली।</p>



<p>जाते वक़्त मैं रोज की तरह उसके पास चला गया। पर मैं आज कुछ बोल नहीं रहा था तो वो खुद ही बोल पड़ी- मैं तो आज लेट हो जाती अगर तू ना आता!<br>तो फिर उसने बात ख़त्म करके उसने मुझे थैंक यू कहा।<br>मुझे तो जैसे करंट सा लगा।</p>



<p>फिर बस आ गई तो मैंने उसे दोबारा चढ़ा दिया बस में; उसने फिर से कातिलाना स्माइल दी।</p>



<p>मैं तो बस मरा जा रहा था। अब तक मैंने उसे बस दोस्त की तरह ट्रीट किया था। पर जो वो दिन ब दिन कर रही थी उससे तो मैं उसकी तरफ और भी आकर्षित हो रहा था।</p>



<p>फिर अगले दिन उसने मुझे दूर से ही हलो बोला; जो दो चार बन्दे वहां खड़े थे वे सभी मेरे तरफ देखने लगे।</p>



<p>मैं जल्दी से उसके पास गया और उसे ई रिक्शा में ले गया। पर दिन वो काफी जल्दी आ गई थी।<br>मैंने पूछा तो उसने बताया कि उनकी घड़ी खराब हो गई थी तो उसे टाइम का पता नहीं चला।<br>वैसे मैं भी उस दिन जल्दी चला गया था।</p>



<p>फिर मैंने उससे बातें करना शुरू किया क्योंकि हमरे पास 2 घंटे थे क्लास शुरू होने।<br>उसने बताया कि उसके पापा दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और भाई सब इंस्पेक्टर है।</p>



<p>ऐसे ही मैंने बातों में उससे उसका मोबाइल नंबर मांगा तो उसने मना कर दिया. पर उसने मुझे अपना इंस्टाग्राम आईडी दे दी। अब हम दोनों घंटों बातें करने लगे।</p>



<p>फिर उसने मुझे बताया कि उसका उन्नीसवाँ जन्म दिन आ रहा है।<br>मैंने पूछा- कब है?<br>तो उसने बता दिया।</p>



<p>फिर उसका जन्म दिन भी आ गया। मैंने उसे ट्रीट के लिए कहा तो पहले तो उसने मना किया पर काफी कहने के बाद वो मान गई। फिर जब हम जाने लगे तो मैंने बिल दिया और मैंने उसे एक चॉकलेट दिया और एक गुलाब का फूल।<br>शायद वो भी मेरी फीलिंग्स समझने लगी थी; उसने वो फूल बिना कुछ कहे ले लिया।</p>



<p>हम दोनों सब कुछ एक दूसरे के साथ शेयर करने लगे। फिर हम दोनों ने कभी कभी क्लास भी बंक करना शुरू कर दिया।<br>हम दोनों कभी लाल किला जाते … कभी कहीं … कभी कहीं … हमने सारी दिल्ली घूम ली थी।<br>आखिरकार फरवरी आ गयी।</p>



<p>मैंने 14 तारीख को उसे मुगलगार्डन में परपोज कर दिया और उसने भी हां कर दी।<br>हम दोनों बहुत खुश थे।<br>अब तो बातें और भी होने लगीं।</p>



<p>हमारी कोचिंग ख़तम होने में सिर्फ एक माह रह गया था।<br>मैं उससे अब सेक्स की बातें करने लगा था और वो भी मजे लिया करती थी। पर वो उन बातों कभी भी सीधा जवाब नहीं देती थी।</p>



<p>एक दिन मैंने उससे कहा- चलो ना कहीं पे चलते हैं घूमने!<br>तो उसने हाँ कर दी और हम दोनों पुराना किला घूमने चले गए।<br>मैंने ही यह प्लान बनाया था क्यूंकि मुझे पता था कि पुराने किले के गार्डन में कपल्स बैठे रहते हैं।</p>



<p>तो हम दोनों भी वहीं बैठ गए। हम दोनों एक पेड़ पर कमर लगा के बैठ गए. कुछ दूरी पर झाड़ी में से ‘उह … अहह आराम से करो … दर्द हो रहा है!’ आवाज़ आ रही थी।<br>काजल वहां से जाने को बोलने लगी।<br>तो हमें जाना पड़ा।</p>



<p>फिर हम 1 ऐसी जगह गए जहां कोई नहीं था. तो मैंने उसे किस करना चाहा परन्तु उसने मना कर दिया और कहा- मैं ये सब नहीं करने वाली! ओके?<br>और वो जाने लगी।<br>तो मैंने भी उसे जाने दिया और मैंने उससे बातें कम कर दी।</p>



<p>वो अब खुद ही मुझसे बातें करने का ट्राई करने लगी। तो मैं 1 या 2 बार उससे बोल लेता था। अब उसे भी लगा कि उसे मुझे किस करने देना चाहिए था।</p>



<p>अब हम दोनों फिर से सेक्स रिलेटिड बातें करने लगे। वो भी खुल के मेरा साथ देने लगी। अब वो मुझे किस करने दे रही थी। मैंने उसे जब भी मौका मिलता किस किया करता था। आग दोनों तरफ लगी थी।</p>



<p>मैंने उसे किसी तरह सेक्स करने के लिए मना लिया। पहले तो वो मान नहीं रही थी पर मैं भी कमीना था, कसम दे कर मना ही लिया।<br>फिर काजल ने पूछा- हम कहाँ जाएंगे?<br>मैंने कहा- मेरे दोस्त का फ्लैट है, हम उस पर चले जाएंगे।</p>



<p>फिर मैंने रात को ही अपने फ्रेंड को कॉल किया पर उसने भी हाँ कह दी। अगले दिन हम दोनों 9 बजे ही उसके फ्लैट पे चले गए।<br>उस दिन काजल काफी हॉट लग रही थी।</p>



<p>मैंने रूम का लोक खोला और उसे बेड पे बिठा के कोल्डड्रिंक दी।</p>



<p>अब मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब हम दोनों ने काफी देर तक ऐसे ही आपस में किस करना जारी रखा। मैंने धीरे से उसकी चूची को दबा दिया तो उसने जोर से आह भरी और मुझ से लिपट गई।</p>



<p>मैंने 10-15 मिनट उसे किस किया फिर हम दोनों अलग हो गए। मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी अब वो सिर्फ ब्रा में ही थी। उसने लाल रंग की जालीदार ब्रा पहन रखी थी।<br>मैंने उससे पूछा- ये तो तुम्हारे पास नहीं थी।<br>उसने कहा- कल ही ले ली थी। मुझे पता था कि तुम कहीं ना कहीं का प्लान जरूर बना रहे होगे।</p>



<p>और वो ये कहते ही मुझे किस करने लगी और मैं उसकी चूची दबा रहा था। वो लगातार उम्म्ह … अहह … हय … ओह … की आवाज़ निकाल रही थी।</p>



<p>अब मैंने उसकी ब्रा को निकाल दिया; तो मैं तो जैसे सपनों में ही खो गया; मैंने उसे जोर से किस किया और कहा- इतने मस्त चूचे तो मैंने आज तक नहीं देखे।<br>उस टीनएज लड़की ने कहा- ले ले मोहित … आज के बाद इन पर तेरा ही हक है। ये तो तेरा वेट कर रहे हैं. चूस इनको मोहित और जोर से चूस!</p>



<p>उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब नहीं रहा जा रहा … कुछ कर ना मोहित … मैं मर जाऊंगी।<br>अब उसकी सिसकारियां और भी जोर जोर से होने लग गई थी।<br>मैंने उससे कही- आज तो मैं तुझे अपनी दुल्हन बन कर ही चोदूंगा।<br>उसने कहा- जो भी करना है, जल्दी कर, मुझसे नहीं रहा जा रहा अब।</p>



<p>मैंने उसकी जींस उतार दी और अब वो सिर्फ पैंटी में ही रह गई थी। मैंने पैंटी पर उंगली फेरी तो वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी पैंटी को झट से उतार दिया और उसकी चुत में जीभ डाल कर चाटने लगा.</p>



<p>वो जोर जोर से चिल्ला रहे थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह्ह ऊऊह्ह हाहा हा!<br>उसने अब मेरा सिर में अपनी उंगली फेरनी शुरु कर दी।</p>



<p>5 मिनट तक चूत चाटने के बाद वो अब मेरा सिर अपनी चूत पर दबा रही थी। मैं समझ गया था कि ये झड़ने वाली है तो मैंने उसे और जोर चूसना शुरू कर दिया। वो इतनी जोर से झड़ी कि मेरा मुंह उसके कामरस से पूरी तरह भीग गया था।</p>



<p>वो अब शांत हो गई थी. मैंने उसे अपने लंड की तरफ करके चूसने के लिए बोला तो नहीं मानी. फिर मैंने सोचा कि छोड़ यार … अब तो ये अपना ही माल है, जब मन करेगा तब चुसवा लेंगे।</p>



<p>अब मैं अपना लंड काजल की चूत पर रगड़ने लगा वो फिर से गर्म होने लगी थी।<br>मैंने काजल के पास जाकर उसके कानों में कहा- थोड़ा दर्द होगा, सम्भाल लेना।<br>उसने आंखों ही आंखों में मुझे मंजूरी दे दी।</p>



<p>मैंने धक्का लगाया तो लंड फिसल गया।<br>वो थोड़ा सा मुस्कुरा रही थी। मैंने सोचा ‘उस्ताद ये तो मजाक बना रही है।’</p>



<p>फिर मैंने इस बार दुबारा धक्का लगाया तो सिर्फ टोपा ही उसकी चूत में घुसा था।<br>वो जोर से चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’<br>उसने कहा- मुझे नहीं करना इस बाहर निकाल ले अभी।<br>मैंने उसे समझाया तो वो मान गई और मैंने उसे किस किया तो वो नॉर्मल हो गई।</p>



<p>अब मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब उसकी आंखों में आसूं आ गए थे।<br>मैंने वैसे ही उसे किस किया और जब वो नॉर्मल हुई तो एक और धक्का लगाया। इस बार पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और झिल्ली भी फट गई थी और उसमें से खून भी आ रहा था।<br>मैंने उसे खून के बारे में नहीं बताया।<br>पर अब वो रो रही थी।</p>



<p>मैं वैसे ही 5 मिनट रुकने के बाद आगे पीछे होने लगा। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो कह रही थी – आआह्ह ऊऊह्ह हा हा हा … और जोर से चोद मेरे इस छेद को बहुत आग लगी हुई थी इसमें जब से तुझे देखा था।<br>मैंने कहा- तूने मुझे कब देखा?<br>तो उसने कहा- पहले मेरी आग शांत कर; फिर आराम से बता दूंगी।</p>



<p>मैं भी जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। वो अभी तक 2 बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा होना बाकी था।<br>15 मिनट की धक्का पेल के बाद मैं भी आने वाला था। मैंने उससे बस इतनी ही कहा- कहाँ?<br>उसने कहा- अंदर।<br>और मैं उसके अंदर ही झड़ गया।</p>



<p>मैं एक तरफ होकर लेट गया। हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी। हम दोनों पसीने में लथपथ थे। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था।<br>मैंने पूछा- मज़ा आया?<br>उसने कहा- आज से मैं तुम्हारी हूं। और जब तुम कहोगे हम मजे किया करेंगे।</p>



<p>उस दिन हमने 2 बार सेक्स किया। मैंने उसे किस किया और उसके कपड़े उसे दिए। वो बाथरूम में जाकर थोड़ा ठीक ठाक होकर आई तो हम दोनों चल दिए। वो अपने घर चली गई और मैं अपने।</p>



<p>मैंने उसे काफी बार चोदा है लेकिन आज किसी कारण से वो मेरे साथ नहीं है। मुझे पता लगा कि मुझसे अलग होने के दो महीने बाद ही उसकी शादी हो गई थी।<br>अब मैं उसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश नहीं करता।<br>तो दोस्तो, यह थी मेरी ज़िन्दगी की सच्ची कहानी टीनएज लड़की की।<br>mk502038@gmail.com</p>
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