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	<title>Padosi &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:17 +0000</lastBuildDate>
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		<title>मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया? दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत <a title="मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/" aria-label="Continue reading मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया?<br />
<span id="more-362"></span></p>
<p>दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत स्मार्ट भी हूं. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. </p>
<p>यह चुदाई स्टोरी अक्टूबर 2017 की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी. हमारे पड़ोस में एक आमिना नाम की आंटी रहती हैं. ये नाम बदला हुआ है. आमिना आंटी की उम्र लगभग 42 साल के आस पास की रही होगी. उनका फिगर 36-34-36 का होगा. आंटी देखने में बहुत सेक्सी, गर्म लगती थीं. उनके उठे उठे से मोटे चूचे मुझे बहुत आकर्षित करते थे. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.</p>
<p>वे जब भी हमारे घर आतीं या मुझे कोई काम के लिए बुलातीं, तो वह मुझे बहुत प्यार से और हंस कर बात करती थीं. जब वह सेक्सी मूड में होतीं, तो मुझे इधर-उधर हाथ लगा कर मुझसे छेड़खानी करतीं, मेरी जीएफ के बारे में पूछ कर मुझे चिढ़ाती थीं … जबकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. हालांकि मैं भी उनकी बातों के मजे लेता रहता था. मुझे उनके इस तरह के गर्म व्यवहार से मजा ही आता था.</p>
<p>त्यौहार से 3 दिन पहले आंटी घर की सफाई कर रही थीं. उसी दौरान उन्होंने मुझे ऊपर वाले कमरे में सामान उतारने के लिए बुलाया. उस समय उन्होंने लाल रंग का गाउन पहन रखा था, जिसमें उनकी चुचियों की लाइन साफ दिख रही थी. मैं उनकी चूचियों को देख रहा था, जो कि उन्होंने नोटिस कर लिया था. </p>
<p>थोड़ी देर में वह बाथरूम में जाकर एक नीला सूट पहन आईं, जिससे मुझे उनके मोटे चूचे और भी साफ दिखने लग गए थे. उन्हें देख कर मेरा 6.5 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया था. उन्होंने भी मेरे खड़े होते लंड पर अपनी नजर मार ली थी.</p>
<p>हम जिस कमरे में खड़े थे, वहां काफी सामान होने की वजह से जगह बहुत कम थी. आंटी कोई सामान लेने आतीं, तो वह अपनी चूची मेरी छाती से सटाते हुए निकल रही थीं.<br />
हालांकि इस तरह की परिस्थिति में एक तरीका ये होता है कि खुद को बचाते हुए निकलना, भले ही मम्मे रगड़ रहे हों, लेकिन खुद से ऐसा शो करना कि मजबूरी है.</p>
<p>पर आंटी तो जब भी मुझसे सट कर निकलतीं, तो वे और भी जानबूझ कर मेरे सीने से अपने मम्मों को रगड़ने की कोशिश कर रही थीं. इससे मुझे पता चल गया था कि आंटी का मूड आज कुछ अलग है. </p>
<p>मैंने भी आंटी के मम्मों को बातों ही बातों में कभी टच किया, तो कभी हाथ लगा दिया. आंटी भी हंस रही थीं. मैं समझ गया था कि आज लाइन क्लियर है. थोड़ी ही देर यूं ही काम चलता रहा. </p>
<p>आंटी की मोटी गांड देख कर मेरा लंड का बुरा हाल हो गया था. मैं बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने लगता.</p>
<p>आंटी ने कहा- क्या हुआ?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं!<br />
तो आंटी बोलीं- कुछ तो बताओ?<br />
मैंने कहा- नहीं आंटी … कुछ नहीं. </p>
<p>आंटी नीचे झुककर कुछ सामान उठाने लगीं, तो मुझे उनकी चूची का काला निप्पल वाला भाग दिख गया था. फिर उनके उठते ही मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.<br />
उन्होंने कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?<br />
मैंने कहा- आंटी सॉरी … मुझे प्लीज आज ना रोको.<br />
आंटी ने मुझे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मम्मी को बता दूंगी.</p>
<p>उनका बदला हुआ रूप देख कर मैं बहुत ही ज्यादा डर गया और वहां से भाग आया. उस दिन पूरे दिन मेरी फटती रही कि चुदाई स्टोरी तो बनी नहीं … आंटी मम्मी को ना बता दें और मेरी घर पर ठुकाई लग जाए.</p>
<p>फिर शाम तक यूं ही चलता रहा और रात को मैं सोते हुए सोच रहा था कि आज तो बच गया, कुछ नहीं हुआ. </p>
<p>सुबह आंटी ने मुझे वापस ऊपर बुलाया.<br />
मैंने जाते ही उनसे माफी मांग ली- आंटी कल के लिए माफ कर दो.<br />
आंटी ने कहा- कोई बात नहीं.</p>
<p>आंटी आज कल से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं. आंटी ने फिर से हंस कर कहा- आज तू मेरी तरफ नहीं देख रहा है, क्या आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?<br />
मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, आज तो आप बहुत मस्त लग रही हो. कल से भी ज्यादा मस्त लग रही हो.<br />
इस पर उन्होंने कहा- तेरे अंकल को तो यह सब दिखता ही नहीं, तो यह सब किस काम का है.<br />
इस पर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा- आपके पास मैं हूं ना आंटी.</p>
<p>मेरा सहारा पाते ही वह रोने में लग गईं.<br />
मैंने उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.<br />
आंटी बोलीं- अच्छी लगने से क्या होता है … मैं सुंदर नहीं हूं.<br />
फिर मैंने कहा- आंटी आप बहुत सुंदर हो … अपनी गली में नंबर एक पर हो.</p>
<p>आंटी ने मुझसे पूछा- क्या मैं तुझे सेक्सी लगती हूं?<br />
मैंने कहा- हां आंटी बहुत. </p>
<p>उन्होंने मेरी तरफ होंठ बढ़ाए तो मुझे ऐसा लगा कि आज शायद आंटी पहल कर रही हैं, मेरी चुदाई स्टोरी अब बन जायेगी. मैंने भी उनकी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए. आंटी ने आंख दबा दी. फिर मैंने उनको दीवार से लगाया और उनके होंठों पर एक जोरदार से किस कर दिया.</p>
<p>पहले पहल तो उन्होंने थोड़ा बहुत विरोध किया … पर 3 या 4 मिनट बाद विरोध भी बंद कर दिया. अब मैं उनकी चूचियों को सूट के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. </p>
<p>मैंने उनका कमीज उतारने की कोशिश की, तो वो कसा होने के कारण मुझसे नहीं उतरा. आंटी की मोटी चूचियों के कारण सूट काफी टाइट था.</p>
<p>आंटी ने हंस कर बोला- फाड़ेगा क्या … इसे आराम से उतार न.<br />
मैंने झटके से फाड़ दिया, तो वो बोलीं- ले नुकसान कर दिया न मेरा. </p>
<p>फिर मैं उनकी चुचियों को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उनका रंग बहुत ही गोरा था. आंटी की दूध से भी ज्यादा सफ़ेद चुचियों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था. </p>
<p>फिर मैं धीरे-धीरे उनके पेट पर किस करने लगा. जब मैं उनकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा, तो बोलीं- कोई आ जाएगा.<br />
तो मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है और मैं नीचे से आपका दरवाजा बंद करके आया हूं.<br />
आंटी बोलीं- प्लीज यह किसी को मत बताईयो!<br />
मैंने कहा- आंटी आपकी कसम … यह मेरे तक ही रहेगा. </p>
<p>मैंने आंटी का झट से नाड़ा खोला और नीचे देखा, तो उनकी टांगों के बीच में गुफा पर थोड़े से बाल थे, जो भूरे रंग के थे. </p>
<p>उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे कपड़े भी खोल दिए. कुछ देर बाद मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा और उनकी पेंटी भी उतार दी. </p>
<p>फिर मैंने बिना सोचे समझे ही नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. गर्म आंटी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी थीं. उन्होंने जोश में आकर मेरा सर दबा दिया. वे मेरा सर अपनी चूत में पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती थीं.</p>
<p>मेरे लगातार चूत चूसने के कारण उनकी चूत पनिया गयी थी और वो कभी भी पानी छोड़ सकती थीं. मैंने फिर भी चूत को चूसना बंद नहीं किया. </p>
<p>जिन लोगों ने शादीशुदा औरतों की चूत को चाटा होगा, उन्हें पता होगा कि चूत चूसने का अपना एक अलग ही आनन्द है.</p>
<p>लगातार 7 से 8 मिनट तक चूत चुसाई से आंटी एक तेज़ अकड़न के साथ झड़ गयी थीं. उन्होंने ढेर सारे कामरस की नदी बहा दी और थोड़ी देर के लिए शांत पड़ गयी थीं.</p>
<p>फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी पैंट को खोला, तो मेरी चड्डी में मेरे लौड़े ने आतंक मचा रखा था. मेरे लंड को आंटी ने मेरी चड्डी से बाहर निकाल कर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. </p>
<p>गर्म आंटी के मुँह से ‘बाप रे बाप  … इत्ता बड़ा..’ ही निकल सका.<br />
मैंने हंस दिया- आपका ही है आंटी.</p>
<p>उन्होंने मुझसे कहा- क्या करता है? तेरा लंड इतना मोटा कैसे हो गया है? ये मेरे अन्दर जाएगा, तो मेरी पूरी चूत को छील देगा. तेरे अंकल का तो पतला सा है.<br />
यह कहते ही वो जमीन पर बैठ कर मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.</p>
<p>दोस्तो, यकीन करना … वो मेरा पहला अनुभव था. मैं मुश्किल से 2 मिनट में आंटी के मुँह में ही झड़ गया. </p>
<p>उन्होंने ‘छी ..’ की आवाज़ करते हुए मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल दिया और जल्दी से एक कपड़े से साफ करने लगीं.</p>
<p>मुझे खुद पर बहुत शर्म आयी और जब वो मेरी तरफ आईं, तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.<br />
उन्होंने मुझसे कहा- पागल परेशान न हो … तेरा हथियार तो तगड़ा है, पर तेरा पहली बार था, इसलिए जल्दी निकल गया. असली मज़ा तो अब आएगा. </p>
<p>फिर मैं दोबारा से आंटी की चूत चाटने लगा. मुझे आंटी की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.<br />
आंटी मुझसे बोलीं- बेटा, अब और न तड़पा  … जल्दी से इसे मेरे अन्दर डाल कर इसकी सारी गर्मी मिटा दे.<br />
फिर उन्होंने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सैट किया और मुझे अन्दर पेलने को कहा.</p>
<p>मैं उस पल को एहसास को कभी नहीं भूलना चाहता, जब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में उतारा था; मानो मैंने लंड चूत में नहीं किसी गर्म भट्टी में झोंक दिया हो.</p>
<p>जैसे ही मैंने लंड अन्दर किया, आंटी के मुख से एक मीठी सी आह निकली, जिसमें सुकून भरा दर्द था. </p>
<p>मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. अब वो भी अपनी गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थीं.</p>
<p>कोई 5 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो एक तेज़ आह के साथ झड़ चुकी थीं, लेकिन मैंने अपनी रफ्तार कायम रखी … जिससे उनकी चूत के पानी से फच्च फच्च की एक मधुर आवाज हमारी चुदाई में चार चांद लगा रही थी.</p>
<p>लगातार 15 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी रफ्तार से उनकी चूत में ही झड़ गया. मैंने अपनी अपनी आखिरी बूंद भी आंटी की चूत में छोड़ी.</p>
<p>जब मैं उनके ऊपर से हटा, तो मैंने देखा कि मेरे लंड का पानी उनकी चूत से टपक रहा है.<br />
आंटी ने कहा- अभी तुझे बहुत कुछ सिखाना है.</p>
<p>फिर हम दोनों लेट गए. आधा घंटा आराम किया.</p>
<p>लेकिन मेरा मन नहीं भरा था, तो मैंने आंटी को टेबल पर झुकने को कहा. मैंने उनके पीछे से उनकी चूत में लंड डाला और फिर उनको चोदने लगा. कोई 7-8 मिनट तक मैं उनको यूं ही चोदता रहा. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और एक जोरदार धक्का दे मारा. </p>
<p>इससे मेरा 4 इंच लंड अन्दर चला गया और आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं. वो दर्द की अधिकता से मुझसे दूर होने लगीं, पर मैंने अपना जोर उन पर बनाए रखा और उनकी चुचियों को दबाता रहा. </p>
<p>कुछ पल बाद मैंने फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया. अबकी बार मेरा सारा लंड उनकी गांड में चला गया. धकापेल गांड चुदाई होने लगी. आंटी को भी अपनी गांड में लंड का सुकून मिलने लगा था, इसलिए वो भी मजा लेने लगी थीं.</p>
<p>कोई 15 मिनट तक यूं ही मैं ताबड़तोड़ हमले करता रहा और आंटी को भी काफी मजा आने लगा था. उनकी मस्ती भरी आवाजों से मुझे यकीन हो गया था कि आंटी की गांड मजा दे रही है.</p>
<p>आंटी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहह मर गई माँ … आहह.<br />
गर्म आंटी की इस तरह की मदभरी आवाजें निकल रही थीं. मैं उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और भी गर्म हो रही थीं. </p>
<p>इसी बीच उन्होंने अपना एक बारी पानी और छोड़ दिया था. मैं भी कुछ ही देर में निकलने वाला था. दसेक धक्के लगाने के बाद मैंने उनकी गांड में सारा पानी छोड़ दिया. </p>
<p>हम दोनों यूं ही वहां मेज पर लेट गए और किस करने लगे. दस मिनट बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया. </p>
<p>अगले 2 महीने तक मैंने उनकी चूत और गांड बहुत बार मारी. इसके बाद उन्होंने अपना घर यहां से छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट कर लिया था. अब मेरी सिर्फ उनसे फोन पर कभी-कभी बात होती है. </p>
<p>फिलहाल मैं चूत और गांड के लिए बहुत प्यासा हूं. भाइयों मेरा तो यह कहना है कि किसी लड़की को पटाने से अच्छा है, किसी आंटी या भाभी को पटा लो, उनके दोनों छेद बहुत मजा देते हैं.</p>
<p>[email protected] </p>
<p>दोस्तो, आपको गर्म आंटी के साथ मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी मेल जरूर करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:40:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई. दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, <a title="पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई.<br />
<span id="more-353"></span></p>
<p>दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, इसी कारण मेरी शरीर गठीला है। मैं हरियाणा के पानीपत का रहने वाला हूं.</p>
<p>मैं अपनी पहली कहानी इस साईट पर लिख रहा हूं। मेरे लंड का साइज तो 5 इंच का है पर किसी को भी सतुंष्ट कर सकता हूं। मुझे टी.वी. पर ब्लु फिल्म चलाकर भाबी की चुदाई का सपना है, क्योंकि ऐसे करने से दोनों दिल अपनी-अपनी हसरत पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>वैसे तो मैं पिछले करीब 8 सालों से हर कहानी को पढ़ता आ रहा हूं, शायद ऐसी कोई ही ऐसी कहानी होगी जो मैंने नहीं पढ़ी हो. पर मुझे भाबी की कहानियां पढ़ने में अलग ही मजा आता है<br />
क्योंकि आप सब को तो पता है कि भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है.</p>
<p>इसलिए मैं अपने जीवन में घटित हुई असल भाबी की चुदाई कहानी को आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूंः</p>
<p>यह घटना आज से करीब 5 साल पुरानी गर्मी के दिनों की है. उन दिनों अगर कोई दो बार नहीं नहाता तो उसकी हालत मानो एक काम करते हुए मजदूर की तरह हो जाती है।</p>
<p>मेरे पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहने के लिए आया। उस परिवार में विजय कुमार, उसकी पत्नि मीहा (बदला हुआ नाम) और 4 साल का एक लड़का था। विजय और उनके परिवार को हमारा परिवार अच्छी तरह से जानता था क्योंकि भाबी हमारी दुकान पर सामान लेने आती थी और कभी-कभी भैया भी सामान लेने आते थे।</p>
<p>मीहा भाबी को आते-जाते समय मैं नमस्ते करता था। मैंने उनको अपना फोन नम्बर दे दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वे फोन करके हमारी दूकान से सामान मंगवा सकें.<br />
मीहा भाबी की आयु करीबन 24 साल, 34″ के चुच्चे और बाहर निकली हुई उसकी मस्त गांड किसी को भी पागल कर सकती थी. जबकि विजय भाई की आयु करीबन 40 के आस-पास थी।</p>
<p>उसका पति विजय एक सरकारी विभाग में नौकरी करता था। उनकी रोजाना शराब पीने की आदत थी, जिससे उनका स्वास्थ्य बिल्कुल गिर गया था। भैया सरकारी नौकरी होते हुए भी बहुत ही कम नौकरी पर जाते थे।</p>
<p>थोड़े दिन के बाद किसी अनजान नम्बर का मेरे नम्बर पर फोन आया और कहने लगी- मैं मीहा बोल रही हूं। क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?<br />
भाबी ने बाजार से कुछ दवाइयां लाने के लिए कहा। मैं भाबी के घर पर गया तो भाबी ने एक पर्ची और कुछ पैसे दिये।<br />
मैंने बाजार से दवाई और बचे हुए पैसे लाकर भाबी को दिये।<br />
भाबी ने मुझे धन्यवाद कहा और भाई साहब ने भी धन्यवाद किया।<br />
मैंने दोनों को कहा- इसमें धन्यवाद वाली ऐसी कोई बात नहीं। आप लोगों को मेरी जरूरत जब भी लगे, आप मुझे फोन कर सकते हो।</p>
<p>इस तरह से मैं उनसे मिलने-जुलने लगा और उनका मेरे ऊपर विश्वास होने लगा। कभी-कभार तो भाबी मुझसे फोन करके भी घर का सामान लाने को कहती। इसी बहाने से मैं उसके घर पर जाने लगा और कभी-कभी उसके धीरे से टच करता तो कभी अनजाने ढंग से उसके चुच्चे दबा देता। इस पर भी भाबी कभी भी बुरा नहीं मानती थी बल्कि हंस देती थी।<br />
भाबी भी अब मेरे इशारे समझने लगी थी।</p>
<p>मुझ पता था कि भैया की बीमारी के चलते भाबी की चुदाई नहीं हो पाती होगी तो उनकी जवानी प्यासी रहती होगी.<br />
एक बार मैंने उसे मिलने के लिए बोला तो कहा- मैं शादीशुदा औरत हूँ और हमें ये बात शोभा नहीं देती।<br />
पर बार-बार जिद करने पर वो मेरी बात मान गई और रात को 8 बजे घर पर आने के लिए कहा।</p>
<p>मैंने घर वालों को बहाना बनाया कि मैं एक दोस्त के साथ बाहर जा रहा हूं और रात को देरी से आऊँगा।</p>
<p>फिर उसी दिन करीब आठ बजे मैं उसके घर पहुंच गया और विजय भाई से बातचीत करने लग गया.<br />
भाबी ने बात ही बात में मुझे दूसरे मकान में जाने का इशारा किया। उनके घर से पीछे का एक मकान उन्होंने अभी खरीदा है जिसमें वो थोड़े ही दिन में शिफ्ट होने वाले थे। उसने अपने पति को कहा कि वह दूसरे मकान की सफाई करने जा रही है और बाद में नहा कर आएगी।<br />
मैं तो पहले से ही उस मकान में आ गया था।</p>
<p>थोड़ी देर के बाद भाबी आई और मुझे कहने लगी- मैं अभी नहा कर आती हूँ।<br />
भाबी जी ने जानबूझ कर बाथरूम की कुंडी नहीं लगाई।</p>
<p>मुझे बैडरूम में बैठे-बैठे बाथरूम का खुला दरवाजा दिख रहा था क्योंकि बाथरूम बैडरूम के पास ही था।</p>
<p>मैं रूम में बैठे-बैठे यही सोच रहा था कि क्यों ना भाबी के साथ बाथरूम में मजे कर लूं।<br />
मैंने फट से अपने सारे कपड़े उतारे और बाथरूम में जाते ही भाबी के मस्त चुच्चों को पीछे से दबोच लिया। मुझे बाथरूम में देखकर भाबी बहुत खुश हुई। मैं और भाबी दोनों एक-दूसरे को साबुन से नहला रहे थे।</p>
<p>नहलाते समय मैंने भाबी के एक चुच्चे को मुंह में लेकर चुसने लगा और दूसरे चुच्चे की निप्पल को हाथ से दबाने लगा।<br />
भाबी अपने चुच्चे चुसवाते हुए बोल रही थी- और जोर से मेरे राजा … ओह … आह … और जोर से … सारा … सारा निचोड़ दे दोनों को!</p>
<p>अब भाबी ने मेरे लंड को सहलाया और बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी. जैसे ही मेरे लंड को उसने अपने मुंह में लिया मैं तो सातवें आसमान की सैर करने लग गया.</p>
<p>थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने अपना सारा माल भाबी के मुख में छोड़ दिया, वो भी बड़े प्यार से मेरे माल को बूंद बूंद तक गटक गई।</p>
<p>दोबारा हम एक दूसरे को सहलाने में मस्त हो गये और मैंने दोबारा से उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कोई देरी किए मेरे लंड को चूसने लग गई।<br />
5 मिनट बाद मेरा लंड टाईट हो गया तो मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और अपना लंड भाबी की चुत में डाल दिया. चुत में बड़ी मुश्किल से मेरा लंड गया क्योंकि उसका पति बहुत ही कम भाबी की चुदाई करता था.<br />
और उसने कहा- जोर से … जोर से मेरे राजा!</p>
<p>चोदते समय भाबी के चुच्चे ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ की टहनी पर आम लटक रहे हों। मैं उसके एक चुच्चे को मुंह में डालकर चूस रहा था और दूसरे चुच्चे को दूसरे हाथ से दबा रहा था। भाबी भी सिसकारी ले रही थी- आह … आह … आह … जोर से … फाड़ दे मेरी चुत को … आह!</p>
<p>करीब दस मिनट बाद उसकी चुत में अपना सारा माल छोड़ दिया।</p>
<p>उसके बाद हम 10 मिनट तक नहाये और बैडरूम में चले गये।</p>
<p>बैडरूम में जाते ही हम एक-दूसरे की चुम्मा चाटी करने लग गये और भाबी ने कहा- मुझे करने दे जो करना है, तुम आराम से लेटा रहो।</p>
<p>फिर भाबी ने बेड की दराज से शहद की शीशी निकाली और उसे मेरे लंड पर डाल दिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई बालक लोलीपोप चूसता है।</p>
<p>मैंने भी उसके दोनों चुच्चों पर शहद डाल कर चूसा और उसे पागल बना दिया।</p>
<p>उसने मुझे 69 की पोजिशन में आने के लिए कहा। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी के साथ 69 किया। वो मेरे लंड को चूसने में मस्त थी और मैं उसकी चुत को।<br />
करीबन दस मिनट तक उसकी चुत चूसने के दौरान 2 बार अपना नमकीन पानी छोड़ दिया। मैं भी उसका सारा पानी पी गया।</p>
<p>मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत घोड़ी बन गई।<br />
मैं अपना लंड जैसे ही उसकी चुत में डालने लगा तो मेरा लंड फिसल कर उसकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लग गई- उइइइई मां … छोड़ दे मुझे … मर गई मैं तो … आह… बड़ा दर्द हो रहा है।<br />
भाबी ने कहा- मैंने तक आज तक अपनी गांड नहीं मरवाई है।<br />
मैंने उसे कहा- धीरे से करूंगा, अब दर्द नहीं होगा.</p>
<p>फिर मैंने धीरे-धीरे से उसकी गांड मारी। करीब दस मिनट बाद वो खुद मेरा साथ देने लग गई। थोड़ी देर की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।</p>
<p>इस तरह उस रात मैंने तीन बार भाबी की चुदाई की।<br />
मेरी चुदाई देखकर वो बहुत खुश हुई और कहा- तेरे भाई साहब से तो कुछ नहीं बनता। महीने में एक-दो बार ही करते हैं। करते ही साथ में उनका छुट जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ। आज तुमने मेरे जीवन में प्यार का रस डाल दिया जिससे मैं निहाल हो गई हूँ।<br />
इस तरह मैंने उसके साथ मजे लिए।</p>
<p>थोड़ी देर इकट्ठे लेटने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और चुपके से मैं उसके घर से निकल आया।</p>
<p>उसके बाद उसकी अपने पड़ोस में रहने वाली दो सहेलियों को भी मुझसे चुदवाया।</p>
<p>अधिक शराब पीने के कारण उसके पति को मौत हो चुकी है और उसने दोबारा किसी ओर से शादी कर ली है। अब कभी-कभार बाजार में आते-जाते मुझे मिलती है तो मैं गर्दन हिलाकर उसे नमस्कार करता हूं। उसके बाद मुझे उसकी गर्मी शांत करने का मौका नहीं मिला।</p>
<p>मेरी भाबी की चुदाई सेक्स स्टोरी कैसी लगी। मेरा इस साइट पर ये पहला अनुभव था, जिसे मैंने आप लोगों तक सांझा किया। अपने विचार मुझे आप मेल भी कर सकते हैं.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो … मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और <a title="पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो …<br />
<span id="more-316"></span></p>
<p>मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और अपनी चूत में उंगली करती रहें व लड़के अपना लन्ड हिला लें।</p>
<p>हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी. उसमें एक 25 साल की खूबसूरत भाभी थी, नाम था प्रभा. उनकी शादी को 3 साल हो गए थे पर उनके घर मे कोई बच्चा नहीं था. उनकी सास उन्हें बच्चा न होने की वजह से परेशान करती थी।</p>
<p>हमारी व उनकी छत मिली हुई थी व बीच में एक छोटी सी दीवार थी. एक दिन मैं छत पर एकांत में मुठ मार रहा था. तब प्रभा भाभी एकदम आ गई व उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया. मैं उस समय झड़ना शुरु हो गया था इसलिए रोक भी न सका और मेरे वीर्य की धार निकल कर दूर जाकर पड़ी.</p>
<p>उन्होंने मुझे सख्त धमकाया- ये क्या कर रहे हो? तुम्हारी मम्मी से बताती हूँ।<br />
मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए और माफी मांगी और यह भी कहा कि दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।<br />
उन्होंने बड़े प्यार से मेरे गाल पर एक थपकी दी और बोली- तुम अभी 18 साल के ही हो. ये सब करने से मर्द में कमजोरी आ जाती है.</p>
<p>बात आई गई हो गई पर जब भी वो मुझे मिलती तो उनके गाल लाल हो जाते थे.</p>
<p>एक दिन उनकी सास 6 दिन के लिए शादी में जा रही थी और उन्हें घर पर अकेला रहना था क्योंकि उनके पति भी एक महीने के लिए बाहर गए हुए थे. इसलिए उनकी सास ने मेरी माँ से कहा कि राकेश को कुछ दिनों के लिए रात को सोने को भेज देना क्योंकि घर में बहू अकेली रहेगी।</p>
<p>रात को खाना खाने के बाद मैं उनके घर चला गया. भाभी ने काली नाइटी पहनी थी.<br />
भाभी ने बादाम का दूध पीने को दिया और बोली- अबी तो पहले वाली शैतानी तो नहीं करते हो?<br />
मैं एकदम डर गया और बोला- नहीं भाभी, अब नहीं करता।</p>
<p>भाभी बोली- तुम्हारे भैया भी बचपन से यही करते आ रहे थे; अब उनमें कमजोरी आ गई और अब उनसे बच्चा पैदा नहीं होता।</p>
<p>कुल मिला कर सोने का समय हो गया और हम एक ही बेड पर सो गए.</p>
<p>रात को मेरी नींद खुली तो भाभी मेरा लन्ड सहला रही थी और मेरा लन्ड एकदम फटने को हो रहा था.<br />
मुझे जगा देख कर भाभी बोली- राज, मेरे पति का वीर्य कमजोर है और वो बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं.<br />
उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करूँ.</p>
<p>भाभी ने अपनी चूची मेरे मुंह मे दे दी. मैंने बारी बारी से दोनों चूची खूब चूसी. फिर भाभी ने मेरा लन्ड मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो पागल होता जा रहा था.<br />
फिर भाभी ने उंगली के इशारे से चूत चाटने को बोला और हम 69 की पोजिशन में आ गए और खूब चुसम चुसाई खेली.</p>
<p>फिर भाभी बोली- मैं उस दिन तुम्हारे वीर्य की धार देख कर ही समझ गई थी कि तुम ही मेरे बच्चे के बाप बनोगे।</p>
<p>उसके बाद भाभी टांगें फैला कर लेट गईं और बोली- मेरे राज, अब डाल दे अपना हथियार मेरी कचिया चूत में!<br />
मैंने लन्ड के अगले हिस्से पर थोड़ा थूक लगाया और चूत से भी काफी नमकीन पानी टपक रहा था. जैसे ही मैंने लन्ड का टोपा चूत के मुख पर लगाया, भाभी ने बड़ी तेज सिसकारी भरी और चूत ऊपर उठाकर लन्ड चूत में लेने को बेताब हो गईं.</p>
<p>मैंने भी हल्का सा जोर लगाया और चूत में लन्ड अंदर जाने लगा. एक अलग ही एहसास था दोस्तो!</p>
<p>प्रभा भाभी ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए और सीत्कार करने लगी. मैं तो जैसे पागल होने को हो गया. मैंने एक तेज झटका मार कर गहराई तक पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और तेजी से शॉट लगाने शुरू कर दिए और साथ में भाभी ने मेरा हाथ अपने स्तनों पर लेजाकर दबाने का इशारा किया.</p>
<p>मैं भाभी की चूचियाँ दबा दबा कर उन्हें मजा देने लगा और मैंने धक्कों की रेल छोड़ दी. 10 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई. उसके बाद हम नंगे ही लिपट कर सो गए.</p>
<p>उस रात मैंने 3 बार भाभी की चूत चुदाई की. उसके बाद 8 दिन में भाभी की कई बार चुदाई हुई.<br />
इस तरह से मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पूरी हुई.</p>
<p>और फिर एक दिन पता चला कि भाभी को गर्भ ठहर गया है.<br />
उसके बाद जब वो मुझे मिली तो मुझे बहुत प्यार किया औऱ मेरी खूब पप्पियाँ ली.</p>
<p>समयानुसार भाभी के घर एक सुन्दर बच्चा पैदा हुआ।</p>
<p>लेकिन बाद में पता चला कि भाभी ने यह बात अपनी बहन ज्योति को बता दी. एक दिन उसने मुझे ज्योति से मिलवाया और बताया कि ये मुन्ने के पापा हैं, तुम्हारे जीजा जी हैं.<br />
मैं शर्मा गया.</p>
<p>शाम को मैं भाभी से बोला- भाभी, इस बच्चे के लिए मुझे भी कुछ गिफ्ट चाहिए.<br />
तो उन्होंने पूछा- क्या?<br />
मैंने बताया- भाभी, उस हनीमून के बाद मुझे सेक्स की भूख पैदा हो गई है और आप बच्चे में व्यस्त हो गई हो तो मेरी सेक्स समस्या का समाधान करवाओ, किसी से मेरा सेक्स करवाओ.<br />
तो वो बोली- मैं ज्योति से बात करती हूं. वो इसी शहर में रहती है और मुझे लगता है उसका तेरे में इंट्रेस्ट भी है. क्योंकि जिस दिन मैंने तुझे उससे मिलवाया तो वो तुझे बड़े ध्यान से देख रही थी और कह रही थी ‘प्रभा, गजब का लौंडा पटाया है तूने!’</p>
<p>दोस्तो, मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पसन्द आयी या नहीं … कमेंट करना.<br />
आपका राज<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का! दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ <a title="भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का!<br />
<span id="more-309"></span></p>
<p>दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं।<br />
मगर एक बात मैंने अभी तक अपनी किसी भी कहानी में नहीं बताई कि मैं एक बहुत ही जिद्दी औरत हूँ। एक बार मेरे को खुन्नस चढ़ जाए तो फिर तो उस खुन्नस को निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ। आज मैं आपको अपनी खुन्नस की कहानी सुनाती हूँ। </p>
<p>हम तीन भाई बहन है। मैं छोटी हूँ, दोनों भाई बड़े हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई तो बाहर दूसरे शहर में रहते हैं। मगर छोटा भाई हमारे पैतृक घर में ही माँ के साथ रहता है। बाकी सब तो घर में खूब खाये पिये मोटे तगड़े हैं। मगर वो पता नहीं क्यों बहुत ही दुबला पतला सा है. और वैसे भी एक नंबर का चूतिया है, हर किसी से हर बार से डरता है।</p>
<p>बीवी उसकी बहुत सुंदर है, देखने में भी अच्छी तगड़ी है। शादी के बाद आते ही उसने भाई को अपने कब्जे में कर लिया। भाई तो बस उसका गुलाम ही बन गया।</p>
<p>जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तब मेरा और भैया भाभी का कमरा बिल्कुल मेरे साथ वाला था. रोज़ रात को मैं अपने कमरे में भाभी की सिसकारियाँ सुनती थी जब मेरा भाई कितनी कितनी देर तक मेरी भाभी की चूत को बजाता।<br />
अब पता नहीं वो उसकी चुदाई करता था या भाभी की चूत चाटता था। मगर भाभी की ‘हाय हाय’ नहीं खत्म होती थी।</p>
<p>भाभी की ‘हाय हाय’ सुन कर मेरी चूत भी पानी छोड़ देती और फिर मुझे भी अपनी गर्म चूत को ठंडा करना करने के लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ता। कभी मेरी उंगलियाँ होती, कभी कोई बाल बनाने वाला ब्रुश, कभी कोई छुपा कर रखी हुई गाजर मूली।</p>
<p>एक बात और थी कि भाभी की मेरी माँ से कभी नहीं बनी। दोनों को जब भी मौका मिलता दोनों आपस में उलझ पड़ती। भाई तो हमेशा भाभी की तरफदारी करता। माँ अकेली पड़ जाती।<br />
मगर मेरी माँ भी कम नहीं थी, उसके आगे भी घर में कोई बोल नहीं पाता था। पूरा रोआब था घर में उसका!<br />
बस यही भाभी थी, जिसने आ कर माँ की सत्ता को चुनौती दी थी।</p>
<p>फिर मेरी भी शादी हो गई, मैं अपने ससुराल आ गई। अब जैसे भाभी की सिसकारियाँ निकलती थी, अब मेरी निकलने लगीं।</p>
<p>समय बीतता गया। एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा धार्मिक स्थल है, जिसकी देखभाल एक मौलवी जी करते हैं। वो अक्सर मोहल्ले भर के घरों में घूम घूम कर चंदा इकट्ठा करते हैं, और उस पैसे से स्थान के काम, रखरखाव करते हैं।</p>
<p>तो वो मौलवी जी हमारे घर भी अक्सर आते हैं और इसी बात का भाभी मुद्दा बनाती हैं। वो पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि मम्मी का न इस मौलवी से कोई टांका है। जब भी वो बुड्ढा आता है। मम्मी उसे बहुत प्यार से चाय बना कर पिलायेंगी, उसकी बड़ी आवभगत करेंगी।</p>
<p>पहले तो यह बात सिर्फ भाभी मेरे को मज़ाक में कहती थी। पर एक बार भाभी और मम्मी की किसी बात पर कहासुनी हो गई, तो भाभी ने खुल्लम खुल्ला ये इल्ज़ाम मम्मी पर लगा दिया कि तेरा उस मौलवी से चक्कर चल रहा है। आज भी बुढ़िया की रंगीन मिजाजी खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मम्मी तो रोने लगी। अब बेटी तो माँ का ही पक्ष लेगी। मेरे दिल में भाभी के लिए बहुत गुस्सा था।</p>
<p>उसके बाद माँ ने मुझे बताया- पता नहीं तेरा भाई इसको कहाँ से पसंद कर लाया। अब एक तो ये अपने उच्च वर्ग होने का हम पर रोआब डालती है, दूसरा सभी घर वालों को जलील करती है, तेरे बारे, मेरे बारे सब के बारे में अनर्गल अनाप शनाप बोलती है। इस कुतिया ने तो जीना हराम कर रखा है।</p>
<p>वैसे तो भाभी मुझे भी कभी कभी कुछ न कुछ सुना देती थी, मगर इस बार तो उसने मेरी माँ के दामन पर छींटे उछले थे। मुझे बहुत बुरा लगा। मेरे दिल में भी आया कि ये जो अपने उच्च वर्ग के होने पर इतना इतराती है, और दूसरे लोगों से इतनी नफरत करती है, अगर इस साल में मैंने इसे किसी विधर्मी से न चुदवाया तो मेरा भी नाम नहीं।</p>
<p>मगर अब ऐसे मैं इसे कैसे किसी ऐरे गैरे के नीचे लेटा दूँ, और वैसे भी कोई आदमी क्यों मेरी बात मानेगा। मगर मुझे इतना जरूर था कि अगर इसने मेरी माँ के दामन को दागदार किया है, तो मैंने भी इसकी शराफत को तार तार नहीं किया, तो मुझे भी चैन नहीं पड़ेगा।</p>
<p>शाम को मैं और मम्मी बाज़ार गई। हमारे मोहल्ले में ही बहुत सारी दुकानें हैं। एक दुकान है, उस्मान पठान की … वो औरतों के सामान की दुकान करते हैं। लिपस्टिक बिंदी पाउडर क्रीम, ब्रा पेंटी ये सब। तो मैं बहुत पहले से उनसे समान लेती हूँ।</p>
<p>वो अक्सर मुझ पर अपनी निगाह रखते, मुझ से कभी कभी मज़ाक भी कर लेते। मतलब ठर्की आदमी।</p>
<p>मगर दिक्कत यह कि एक तो उसका काला रंग, शक्ल कहो तो बदशक्ल … कोई खूबसूरती नहीं पठानों वाली। मगर कद 6 फीट दो इंच, चौड़ा सीना। कद काठी पूरी पठानों वाली थी। रंग रूप छोड़ दो देख कर लगे कि अगर कोई औरत इसके नीचे लेट जाए तो उसकी तो ये माँ चोद कर रख दे।</p>
<p>अब मैं तो बचपन से ही सुंदर हूँ तो जब पहले भी कभी उनकी दुकान से ब्रा पेंटी लेने जाती तो वो मेरी ब्रा और पेंटी पर हाथ फेर कर मुझे देते, जैसे सोच रहे हों, इस ब्रा और पेंटी जिन पर मैं आज हाथ फेर रहा हूँ, कल ये तेरे गोल गोल मम्मो और फुद्दी से लिपटे होंगे।</p>
<p>खैर … ऐसा तो वो सबके साथ करते होंगे।<br />
मगर मुझ पर वो कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थे।</p>
<p>तो जब भाभी ने मेरी माँ पर गंदा इल्ज़ाम लगाया तो मेरी तो गांड जल गई। मैं सोचने लगी कि कुछ ऐसा करूँ कि भाभी कभी भी मेरे सामने सर न उठा सके, ऐसा जलील करूँ कि साली हमेशा के लिए इसकी नज़र नीची हो जाए।<br />
मगर ऐसा क्या करूँ?</p>
<p>एक दिन मैं वैसे ही घर में अकेली थी, बैठी बैठी बोर हो रही थी कि खामख्वाह मेरा हाथ मेरे मम्मों से फिसलते हुये मेरी सलवार में घुस गया।<br />
अब हाथ सलवार में घुसा तो सीधा मेरी फुद्दी पर जा कर रुका, फुद्दी को थोड़ा सहलाया, तो मन बहकने लगा, एक उंगली फुद्दी के अंदर ही घुस गई।</p>
<p>बस फिर क्या था, मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला और लगी उंगली की फुद्दी के अंदर बाहर करने। करते करते सोचने लगी कि आज किस से चुदवाऊँ। तो वैसे ही मन में उस्मान भाई का विचार आया … लंबा चौड़ा, ताकतवर! बस उसको सोच कर मैं हस्तमैथुन करने लगी।</p>
<p>सच में बड़ा मज़ा आया सोच कर के वो कैसी बेदर्दी से मुझे चोद गया। जब मेरी चूत का पानी निकल गया और मैं ठंडी हो कर लेट गई तो वैसे ही ख्याल आया कि अगर ये उस्मान मेरी भाभी की फुद्दी मारे तो एक तो वो जो इन लोगों को नफरत करती है, उसका वो मुंह बंद हो जाए, दूसरा अगर भाभी की चूत मेरे सामने चुदे तो मेरे सामने ज़ुबान खोलने लायक नहीं रहेगी और तीसरा जो उसने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया है, उसका भी बदला मिल जाएगा मुझे।</p>
<p>मगर सबसे बड़ी दिक्कत, उस्मान मेरी भाभी की चूत को क्यों चोदेगा, वो भी मेरे कहने पर। भाभी तो उसे पसंद भी नहीं करती तो फिर वो उसको क्यों पास आने देगी।<br />
बड़ी मुश्किल थी।</p>
<p>फिर दिमाग में एक आइडिया आया कि अगर मैं उस्मान से सेट हो जाऊँ, तो एक तो वो मेरी फुद्दी भी ठंडी करेगा, और अगर मैं उस से कहूँ कि वो मेरी भाभी को पटा ले किसी भी तरह, तो शायद ये बात बन सकती है।<br />
बेशक यह बहुत ही मुश्किल, काम था, अगर भाभी न पटी तो मेरी तो पक्का फटी क्योंकि उस्मान मुझे छोड़ेगा थोड़े, वो तो कहेगा, तुमने कहा, था भाभी को पटा कर चोद दो, वो तो नहीं पटी, पर तू तो आ मेरे नीचे।<br />
मगर कोशिश तो करनी चाहिए।</p>
<p>इस लिए मैंने सबसे पहले उसमान को लाइन देनी शुरू की। मैं अक्सर किसी न किसी छोटे मोटे सामान के बहाने उसकी दुकान पर जाती, वो मुझपे अपनी ठर्क मिटाता और मैं हंस हंस कर उसकी बातों के जवाब देती।</p>
<p>कुछ ही दिन में बात मज़ाक से छूने तक आ गई. वो मेरे हाथ बाजू कंधे को छू लेता, तो मैं ऐसे रिएक्ट करती, जैसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p>तो बस एक दिन हिम्मत करके उस्मान में बातों बातों में मेरे मम्मों को भी छू लिया। छू क्या लिया … ब्रा दिखाते वक़्त उसने ब्रा मेरे मम्मों पर रखी और पूरी फिटिंग करके दिखाई. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।</p>
<p>मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।</p>
<p>मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।</p>
<p>मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.<br />
मैं जान बूझ कर ड्रामा करती रही- रहने दो भाई, कोई देख लेगा, जाने दो, कोई आ जाएगा.</p>
<p>मगर इन कमजोर दलीलों का उस पर क्या असर … उसने दो नींबू की तरह मेरे दोनों मम्मे निचोड़ दिये और मेरी गांड फुद्दी हर जगह हाथ फिरा दिया और बोला- अब सब्र नहीं होता मेरी जान, किसी दिन मिल मुझे तुझे जन्नत की सैर करवाऊँगा।<br />
मुझे पता था कि मुझे चोदने का जुगाड़ कर रहा है ये!</p>
<p>तो मैंने कहा- ऐसे नहीं मुझे आपसे एक और काम भी करवाना है।<br />
वो बोला- क्या काम?<br />
मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि अगर आप मेरी भाभी की चूत को पहले ठोक दो, तो मैं तो आपको फ्री में सब कुछ दे दूँगी.<br />
वो बोला- तेरी भाभी? उससे तेरी क्या दुश्मनी है जो तू उसको मुझसे चुदवाना चाहती है?</p>
<p>मैंने कहा- है बस … आप बोलो आप क्या ये कर सकते हो?<br />
वो बोला- पक्का तो नहीं, पर कोशिश कर सकता हूँ। लगता तो है जैसे उसे भी कुछ चाहिए, मगर अगर वो मान गई तो!<br />
मैंने कहा- वो मान गई तो मैं भी मान गई।<br />
वो बोला- तो अभी के लिए कुछ और भी कर जाओ।<br />
मैंने कहा- और क्या इतना तो नोच लिए मुझे।</p>
<p>उसने अपने पाजामे में अपना लंड हिलाते हुये कहा- इसका कोई इंतजाम कर जाओ।<br />
मैंने दुकान के बाहर देखा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके पाजामे के ऊपर से उसका लंड पकड़ा और दबाने लगी। मोटा सा लंड मेरे थोड़ा सा दबाने से ही खड़ा हो गया। मगर जब मैं छोड़ने लगी, तो उस्मान ने मुझे पकड़ लिया।<br />
मैंने कहा- मुझे जाने दो।<br />
वो बोला- एक मिनट बस।</p>
<p>कहकर उसने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और अपना लंड निकाल कर मेरी तरफ किया और मुझे नीचे को दबाने लगा। मैं समझ गई कि साला लंड के चुप्पे लगवाना चाहता है।<br />
मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और 5-7 बार ज़ोर ज़ोर से चूस लिया और बस फिर तो मैं छोड़ कर भागी।</p>
<p>इससे उसको भी एतबार हो गया कि मैं उससे पट गई, और मुझे भी कि अब ये पक्का मेरी भाभी को पटायेगा।</p>
<p>वक़्त गुज़रता गया, करीब तीन महीने बाद एक बार मैं जब उस्मान की दुकान पर गई, तब वो बोला- सुन … जांघों पर तेल मल ले अपनी!<br />
मैंने पूछा- क्यों?</p>
<p>तो उसने अपने मोबाइल में कुछ पिक्स दिखाई, जिसमें मेरी भाभी उस्मान के साथ किस कर रही थी, उसको बांहों में भर रही थी।<br />
मैंने कहा- उस्मान भाई, बस अब एक काम करो, मेरी भाभी की चूत को मेरे सामने ठोकना, उसके बाद जब कहोगे मैं तुम्हारी।<br />
वो बोला- दिक्कत क्या है, दोनों ननद भाभी को एक साथ ठोक दूँगा, तू बता पहले तू चुदेगी, या तेरी भाभी?<br />
मैंने कहा- पहले भाभी … वो भी मेरे सामने, उसके बाद मैं अपनी पूरी एक रात तुमको दूँगी। उस रात अपनी सुहागरात होगी।</p>
<p>अब एक खूबसूरत नौजवान लड़की किसी को ऐसी पेशकश करे तो भला कौन टाल सकता है।</p>
<p>फिर एक दिन उस्मान ने कहा- कल तेरा भाई बाहर जा रहा है, कल मैं तेरे घर आऊँगा, तेरी भाभी की चूत चोदने! तू बता, तू कल चुदेगी, या बाद में?<br />
मैंने कहा- पूरी रात दूँगी आपको उस्मान भाई, बस मेरी भाभी की माँ बहन एक कर देना, उसको खूब गाली देना, मारना, तड़पाना, जलील करना। बस यही ख़्वाहिश है मेरी!<br />
वो मान गया।</p>
<p>अगले दिन करीब 12 बजे वो आया, तब मैं अपनी माँ के साथ किसी काम से बाज़ार चली गई।<br />
भाभी अकेली थी घर पर!</p>
<p>मगर मैं माँ को उनकी एक सहेली के घर बैठा कर, यह कह कर कि ‘आप बात करो, मैं आधे घंटे में आई।’ वापिस अपने घर आ गई।</p>
<h2>चुद गयी भाभी की चूत</h2>
<p>घर आई तो भाभी के कमरे का दरवाजा बंद था। मतलब उस्मान अंदर था।</p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।</p>
<p>मैंने भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से उस्मान ने ही दरवाजा खोला और मुझे अंदर ही खींच लिया।<br />
मैंने जब अंदर देखा, भाभी बेड पर बैठी थी, शायद बिल्कुल नंगी थी क्योंकि बेड से नीचे मैंने उसकी साड़ी, ब्रा और पेटीकोट गिरा पड़ा देखा, उस्मान भी बिल्कुल नंगा था।<br />
काला बदन, मगर बेहद खतरनाक, जैसे कोई जल्लाद हो, लंबा चौड़ा और भयावह।<br />
और उससे भी खतरनाक उसका लंड, जैसे कोई काला नाग हो।</p>
<p>भाभी मुझे देख कर चौंकी- रूपा … तुम तुम कहाँ से आ गई?<br />
शायद वो मेरे सामने अपना ये राज़ नहीं खोलना चाहती थी।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे चिंता मत कर मेरी जान … तेरे बाद उसकी भोंसड़ी भी लेनी है मुझे।<br />
भाभी थोड़ हैरान हो कर बोली- रूपा तू भी?<br />
मैं मुस्कुरा दी- बस क्या बताऊँ भाभी … पता नहीं इनकी बातों में क्या जादू था, मैं खुद को रोक ही नहीं पाई। और जब इन्होंने आपका बताया तो मैंने कहा कि ‘भाभी बड़ी हैं पहले उसको … फिर मुझको।’</p>
<p>भाभी के चेहरे पर एक विश्वास की चमक आ गई कि अगर मैं इसके सामने नंगी हुई हूँ, तो ये भी तो इस पठान से चुदवाएगी।<br />
मैंने भाभी को विश्वास में लेने के लिए अपनी सलवार उतार दी और सामने सोफ़े पर ही बैठ गई।</p>
<p>उस्मान भाभी के पास गया और उसने भाभी के जिस्म से चादर खींच कर उसे नंगी कर दिया।<br />
क्या शानदार जिस्म की मल्लिका है भाभी मेरी … गोरा, बेदाग चिकना जिस्म।<br />
दो बच्चों की माँ … मगर किसी भी मर्द का ईमान बिगाड़ दे, ऐसी सुंदरता।</p>
<p>मगर अब वो किसी इंसान के सामने नहीं … बल्कि एक वहशी के सामने नंगी लेटी थी।</p>
<p>उस्मान सीधा उसके ऊपर जा कर लेट गया और लेटते ही उसने भाभी की दोनों टाँगें खोली, और अपना काला भुसंड लौड़ा भाभी की गुलाबी फुद्दी में घुसेड़ दिया।</p>
<p>भाभी इस अकस्मात हमले के लिए तैयार नहीं थी, शायद वो उस्मान से पहले कुछ प्रेमालाप की उम्मीद लगाए बैठी थी. मगर जब उसने अपना लंड भाभी की फुद्दी में डाला, भाभी की तो चीख ही निकाल गई- अरे … आह उस्मान भाई धीरे!<br />
मगर उसे तो जैसे कोई जन्नत की हूर मिल गई हो और वो उसे जल्द से जल्द चोद कर अपनी हवस मिटा लेना चाहता था।</p>
<p>बस दो चार घस्सों में ही उसने अपना लौड़ा भाभी की चूत में घुसा दिया। मोटा, लंबा और खुरदुरा लंड लेकर भाभी खुश थी।<br />
“उस्मान तेरा औज़ार तो बहुत तगड़ा है.” वो बोली।<br />
उस्मान बोला- क्यों तेरे खसम का छोटा है क्या?<br />
भाभी बोली- छोटा भी, पतला भी, और कमजोर भी। तू तो बहुत दमदार है रे!</p>
<p>उस्मान के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी। बोला- साली अभी तूने मेरा दम देखा कहाँ है, अभी तो सिर्फ पठान का लौड़ा देखा है, जब मैं अपनी आई पे आऊँगा, तब देखना तेरी माँ न चोद कर रख दी, तो कहना!<br />
और वो भाभी के फुद्दी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.</p>
<p>तो मोटे लंड की रगड़ से भाभी भी मस्ती में आ गई और वो लगी सिसकारियाँ भरने। वही सिसकारियाँ जो वो मेरे भाई के साथ सेक्स करते हुये भरती थी।<br />
और अपने सामने प्रत्यक्ष चुदाई होते देख कर मेरी फुद्दी भी पानी पानी होने लगी और मैंने भी अपनी टाँगें खोल कर उनको देखते हुये अपनी फुद्दी में उंगली करना शुरू कर दिया।</p>
<p>उस्मान मेरी और देख कर बोला- अरे तू क्यों उंगली कर रही है मादरचोद। इधर आ … और देख पठान का लौड़ा, तेरी चूत का भोंसड़ा न बना दूँ तो कहना, इधर आ।</p>
<p>मैं उठ कर उनके पास ही बेड पर बैठ गई तो उस्मान ने मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी जांघें और मेरी फुद्दी नंगी कर दी। मेरी हल्की हल्की झांट पर हाथ फेर कर बोला- अपनी कमीज़ उतार! मैंने अपनी कमीज़ उतार दी, अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी।</p>
<p>उस्मान मेरे मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- क्या मुलायम माल है साली, जैसी माँ मलाई, वैसी बेटी मक्खन!<br />
भाभी तो एकदम से बोली- तो क्या उस्मान … तूने मम्मी जी को भी चोदा है?<br />
शायद वो जानना चाहती थी कि कहीं मेरी मम्मी का कोई कारनामा पता चले ताकि कल को वो उस बात को मेरी माँ के खिलाफ इस्तेमाल कर सके।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे नहीं, मैंने इसकी माँ नहीं चोदी, पर जब भी देखता हूँ, तो सोचता हूँ कि बुढ़िया इस उम्र में इतनी हसीन है, तो जवानी क्या कयामत रही होगी। हाँ अगर मौका मिले तो मैं तो साली बुड्ढी को आज भी चोद दूँ।</p>
<p>मैंने उस्मान से कहा- पहले जिसको चोद रहे हो, उसको तो चोद लो।<br />
उस्मान बोला- अरे ये अब कहाँ जाएगी, आज के बाद अगर ये अपने पति के पास भी चली जाए तो मेरा नाम बादल देना।</p>
<p>भाभी बोली- अच्छाजी, ऐसी क्या बात है तुम में?<br />
उस्मान बोला- तो ले साली छिनाल, अब देख, तेरी चीखें तेरी माँ को न सुना दी तो कहना।</p>
<p>उसके बाद उस्मान ने भाभी की चूत को खूब पेला, इतनी ज़ोर से पेला कि भाभी का चीख चीख कर गला भर आया, उसकी आँखों से आँसू बह निकले- उस्मान, नहीं धीरे धीरे उस्मान, नहीं, उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई मैं मेरी माँ … नहीं उस्मान धीरे … आह … बस रुक कमीने साले … बस आह।</p>
<p>मगर एक कमजोर औरत जिसको हट्टे कट्टे उस्मान ने अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि भाभी तो हिल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ रो रही थी, चीख चिल्ला रही थी।<br />
उस्मान तो सच में बड़ी बेदर्दी से मेरी भाभी को चोद रहा था।<br />
मुझे तो उसे देख कर अपना डर लगने लगा कि जब ये मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरा क्या हाल करेगा। </p>
<p>जितना भाभी चीख रही थी, उस्मान को उतना ही मज़ा आ रहा था और वो भी उसे उतना ही और तकलीफ दे रहा था- चीख, भैन की लौड़ी, तेरी माँ को चोदूँ, साली कुतिया की औलाद, चीख और शोर मचा, साली कैसे रंडी की तरह ड्रामा करती है, किसने सिखाया इस तरह चीखना, तेरी माँ ने या तेरी बहन ने। साली वो भी क्या ऐसी ही रंडियाँ हैं तेरी तरह? बुला उनको भी … यहीं इसी बिस्तर पर तेरे सामने तेरी माँ चोदूँगा, कुतिया, साली … तेरी बहन की भी इसी बिस्तर पर गांड के चीथड़े उड़ा दूँगा। और ये तेरी ननद, इसकी फुद्दी का फूल भी मैं ही खिलाऊँगा।</p>
<p>और पता नहीं क्या क्या उस्मान भाभी को और उसे खानदान की सब औरतों की गालियां देता रहा।</p>
<p>मगर जैसे उसने भाभी को शिकंजे में कस कर उसकी चुदाई कर रहा था, उसे देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।<br />
मैं भी उनके बिल्कुल पास भाभी की चूत चुदाई देख कर अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी। पांच मिनट में मेरी तो फुद्दी पानी छोड़ गई मगर उस्मान नहीं रुका।</p>
<p>भाभी ने भी थोड़ी देर बाद कह दिया- उस्मान भाई, मेरा हो गया, बस तू भी अपना पानी गिरा दे।<br />
मगर उस्मान बोला- अरे रंडी की औलाद, अभी तो मैं शुरू ही किया है, अभी तेरी माँ कहाँ चुदी है, अभी देख तो तेरी फुद्दी अभी भी सफ़ेद पड़ी है, इसे लाल तो होने दे।</p>
<p>कुछ देर और बैठी मैं उसकी चुदाई देखती रही मगर फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।<br />
उस्मान बोला- अरे तू क्यों कपड़े पहनने लगी?<br />
मैंने कहा- मम्मी को लेने जाना है।<br />
वो बोला- अरे यार ये क्या बात हुई? अभी तो इस कुतिया को चोदने में मज़ा आने लगा था।</p>
<p>मगर मैं चली आई। बाद में शायद उस्मान भी चला गया होगा।<br />
जब मैं मम्मी को लेकर घर आई तो घर पर भाभी ही अकेली थी. मगर उसकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उसकी तसल्ली से पिटाई की हो।</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ, आपकी तो बड़ी हालात खराब लग रही है?<br />
वो बोली- अरे पूछा मत, कहाँ पंगा ले लिया मैंने। तेरे जाने के बाद, साले ने मेरी पिटाई भी करी, और मैंने गुस्सा किया, तो साले ने ज़बरदस्ती पीछे गांड में डाल दिया। इतना दर्द हो रहा है न नीचे, क्या बताऊँ।</p>
<p>बेशक मैं भाभी के साथ उसका दुख सांझा कर रही थी, मगर अंदर ही अंदर मैं खुश थी कि साली तूने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया था, देखा उसका नतीजा, गांड फाड़ कर रख दी तेरी।</p>
<p>फिलहाल इतना ही बाकी फिर कभी।<br />
कैसी लगी मेरी भाभी की चूत की चुदाई स्टोरी?<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड <a title="भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.</p>
<p>यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.</p>
<p>भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया. </p>
<p>मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.<br />
मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.</p>
<p>मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.<br />
हम दोनों में बातें होने लगी.</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.</p>
<p>भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.</p>
<p>फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.</p>
<p>हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है. </p>
<p>उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.<br />
मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.</p>
<p>तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.<br />
मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.</p>
<p>फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.</p>
<p>भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.</p>
<p>मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.</p>
<p>तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा. </p>
<p>फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.</p>
<p>लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.</p>
<p>वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.</p>
<p>ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया. </p>
<p>मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.</p>
<p>कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.</p>
<p>फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया. </p>
<p>मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.<br />
उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया. </p>
<p>भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.<br />
धीमी चुदाई शुरू हो गई. </p>
<p>भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था. </p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.<br />
उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.<br />
उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.<br />
भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है. </p>
<p>भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.</p>
<p>भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली. </p>
<p>फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया. </p>
<p>मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.<br />
वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है. </p>
<p>मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.</p>
<p>दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं. </p>
<p>गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.</p>
<p>काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.</p>
<p>मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की. </p>
<p>भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.</p>
<p>उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है. </p>
<p>फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.</p>
<p>मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा. </p>
<p>जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.</p>
<p>सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.</p>
<p>वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.</p>
<p>अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी. </p>
<p>तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी. मुझे आप लोग मैसेज करके बताना ताकि मैं आप लोगों के मैसेज से प्रेरित होकर आगे भी आपके लिए अपनी कहानी लेकर आऊं.<br />
आपका योगू<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/padosan-aunty-sex-maja-2/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:38:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[हाय फ्रेंड्स, मैं मोहित मेरी पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स की मेरे जीवन की सच्ची कहानी आपके सामने लेकर आया हूँ. जो है. मैं कुचामन का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं. मैं, मेरी छोटी बहन और मम्मी पापा. हमारे घर के पास वाले घर में एक परिवार रहता है. मैं <a title="पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/padosan-aunty-sex-maja-2/" aria-label="Continue reading पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाय फ्रेंड्स, मैं मोहित मेरी पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स की मेरे जीवन की सच्ची कहानी आपके सामने लेकर आया हूँ. जो है. मैं कुचामन का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं. मैं, मेरी छोटी बहन और मम्मी पापा.</p>



<p>हमारे घर के पास वाले घर में एक परिवार रहता है. मैं उनको अंकल आंटी ही बोलता हूं. अंकल आंटी की शादी को अभी 7 साल ही हुए थे और उनके एक 3 साल का लड़का भी है।</p>



<p>हमारे घर अगल बगल में ही है, तो हमारा उनसे संबंध घर जैसा ही है. आंटी हमारे घर आती जाती रहती हैं. आंटी एक बहुत ही सुन्दर शरीर की मालकिन है आंटी का फिगर 34-32-36 है आंटी जब चलती है तो उनकी गांड और बोबे हर किसी को अपना दीवाना बना लेती है।</p>



<p>मैं शुरू से ही आंटी को बहुत पसंद करता हूँ आंटी हमारे घर आती जाती रहती थी इस कारण मेरी भी उनसे अच्छी बात-चीत होती थी. आंटी को मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में भी पता था. आंटी बहुत खुले विचारों की थी तो मैं कभी-कभी आंटी के गर्दन और गांड पर हाथ फेर देता था जो मुझे बहुत अच्छा लगता था।</p>



<p>एक दिन आंटी का फोन खराब हो गया था तो वो हमारे घर आ गई और हमारे घर के लैंडलाइन वाले फोन से फोन लगाने लगी. लेकिन आंटी से फोन नहीं लगा तो उन्होंने मेरे को फोन लगाने के लिए बोला. मैं फोन लगाने के बहाने आंटी की गांड से टच होकर फोन मिलाने लग गया और अपने लन्ड को उपर से ही आंटी की गांड पर सेट करके फोन लगाने लग गया। मैंने आंटी को फोन लगा के दे दिया.</p>



<p>जब तक आंटी बात कर रही थी तब तक मैं बाथरूम में जाके आंटी के नाम की मुठ मार के आ गया।</p>



<p>मैं अपने रूम में आके बैठ गया और आंटी भी मेरे पास आके बैठ गई और हम दोनों बातें करने लग गए बातों ही बातों में हम सेक्स की बातें करने लग गए. मैंने आंटी से उनकी सेक्स लाइफ के बारे में पूछ लिया.<br>तब आंटी ने बताया- तुम्हारे अंकल सेक्स करते ही नहीं हैं, पूरे दिन बस अपने काम में लगे रहते हैं. वे मेरे को साल में बस 10-12 बार ही चोदते हैं. आजकल तो सेक्स करते ही नहीं है.</p>



<p>तभी मैंने मजाक में आंटी को बोल दिया- मैं आपकी हेल्प कर दूँ?<br>इस बात पर आंटी एक कातिल मुस्कुराहट देकर अपने घर चली गई।</p>



<p>फिर थोड़ी देर बाद जब मैं आंटी के घर गया, तब आंटी का बेबी सो रहा था और आंटी दूसरे रूम में बेडशीट सही कर रही थी. मैंने आंटी के पीछे से जाकर आंटी को पकड़ लिया.<br>तो आंटी मेरे को बोलने लगी- यह सही नहीं है, कोई आ जायेगा.</p>



<p>इतने में ही आंटी घूम गई और आंटी के घूमते ही मेरे होंठ आंटी के होंठ से मिल गए. मैं तो किस करने लग गया लेकिन आंटी दिखावटी रूप से छुड़ाने की कोशिश करने लग गई।</p>



<p>और जब मैंने नहीं छोड़ा तो आंटी भी मेरा साथ देने लग गई. अब मैं आंटी की कुर्ते के ऊपर से ही बोबे दबाने लग गया और आंटी आह उम्ह की सीत्कार निकालने लग गई. इतने में ही मेरी मम्मी का फोन आ गया तो मेरे को जाना पड़ा और मैं आंटी को किस करके आ गया और उनको बोला- तुम सलवार कुर्ते में बहुत अच्छी लगती हो।</p>



<p>फिर दूसरे दिन वापस आंटी अपने बेबी के साथ फोन करने आयी. तब वो काले रंग के सलवार कुर्ते में आयी थी. उस ड्रेस में वो क्या कयामत लग रही थी कि क्या बताऊं दोस्तो!</p>



<p>उस समय मेरे घर पर कोई नहीं था और आंटी ने मेरे को फोन लगाने के लिए बोला.<br>तो मैंने फोन लगा दिया और फोन आंटी को दे दिया. और आज मैं भी आंटी के पास ही बैठ गया और आंटी के जिस्म के साथ खेलने लग गया. मैं कभी उनके होंठ पर अपनी उंगली फेरता तो कभी गर्दन पर फिर धीरे धीरे मैंने अपने हाथ को आंटी के कुर्ते के अंदर डाल दिया और उनके बोबे को दबा दिया. उनके बोबे को दबाते-दबाते मैंने आंटी की ब्रा के हुक खोल दिए और अब मैंने कुर्ते के ऊपर से ही आंटी के बोबे को मेरे होंठों से काटने लग गया।</p>



<p>फिर धीरे-धीरे मैं नाभि पर हाथ फेरते हुए नाभि को चाटने लग गया और आंटी भी अब धीरे-धीरे गर्म होने लग गई थी और वो भी मेरी टी-शर्ट में हाथ डालने लग गई थी.<br>फिर मैंने धीरे से आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लग गया।</p>



<p>मैंने देखा कि आंटी की चूत पानी-पानी हो गई थी. फिर मैंने धीरे से एक उंगली चूत में डाल के अपने मुंह में ले ली और फिर वही उंगली आंटी के मुंह में दे दी. अब मैंने आंटी की पैंटी भी उतार दी और उनकी चूत को देखने लग गया।</p>



<p>इतने में ही आंटी ने फोन काट दिया और मेरे होंठों को जोर जोर से चूमने लग गई. आंटी मेरा पूरा साथ देने लग गई और धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए.<br>आंटी मेरे 6 इंच लंबे व 3 इंच मोटे लन्ड को देखते ही रह गई, फिर वो बोली- मेरे पति का बस 4 इंच का ही है.<br>और वो मेरे लन्ड को हाथ में लेकर सहलाने लग गई।</p>



<p>फिर आंटी को मैं गोदी में लेकर अपने बेड पर ले आया और उनको बेड लेटा कर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लग गए.</p>



<p>मगर किस्मत ने हमारा साथ नहीं दिया. इतने में ही आंटी का बेटा रोने लग गया और किसी ने बाहर डोरबेल बजा दी.<br>तो मैंने जल्दी से कपड़े पहने और मैं बाहर देखने गया तो बाहर पोस्टमैन पोस्ट देने आया था. मैं पोस्ट लेकर वापस आ गया.<br>पर तब तक भाभी ने भी अपने कपड़े सही कर लिए और वो मेरे को एक किस करके सॉरी बोल के अपने घर चली गई क्योंकि आंटी को अपनी ननद को लेने जाना था तो वो चली गई।</p>



<p>अब उसकी ननद आने के कारण अब मैं उसके घर नहीं जा सकता था।</p>



<p>फिर 2 दिन बाद मेरे परिवार वाले 5 दिन के लिए हमारे गाँव चले गए. वहां किसी की शादी थी. मैं उनके साथ नहीं गया था। तो मम्मी आंटी को मेरा ध्यान रखने के लिए बोल के चली गई।<br>अंकल भी अपने किसी बिजनेस के काम से बाहर गए हुए थे. इसी कारण आंटी की ननद आंटी के घर आयी हुई थी।</p>



<p>तो मैं घर पर अकेला था तो आंटी ने खाना खाने के लिए मेरे को अपनी घर बुला लिया. मैं चला गया. इस समय आंटी काले रंग के गाउन में क्या मस्त लग रही थी. मन तो कर रहा था कि अभी पकड़ के चोद दूँ … पर आंटी की ननद होने के कारण ऐसा नहीं कर सकता था।</p>



<p>फिर हमने साथ बैठ कर खाना खाया और थोड़ी देर बातें की.<br>तब आंटी ने बोला- तुम भी यहीं सो जाओ. हम दोनों घर पर अकेली हैं.<br>इसलिए मैं भी वहीं रुक गया.</p>



<p>तब आंटी और आंटी की ननद व उनका बेबी एक रूम में सो गए और मैं दूसरे रूम में सो गया।</p>



<p>मेरे को नींद आ नहीं रही थी, मैं मोबाइल में अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ कर आंटी के नाम की मुठ मार ही रहा था कि तभी आंटी मेरे रूम में आ गई।</p>



<p>तो मैं आंटी को मेरी बांहों में लेकर जोर-जोर से चूमने लग गया. वो भी मेरा साथ दे रही थी. फिर मैं किस करते करते आंटी की गाउन के ऊपर से ही उनके बोबे को दबाने लग गया.</p>



<p>फिर मैंने आंटी की गाउन को उतार दिया और उनके 34″ के मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने और चाटने लग गया. उस समय आंटी काली ब्रा पैंटी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। फिर मैंने आंटी की ब्रा पैंटी को उतार दिया.<br>आंटी ने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए और हम एक दूसरे के नंगे बदन को देखने लग गए। अब मैं और आंटी सेक्स के लिए तैयार थे.</p>



<p>और फिर से हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग गए. अब मैं आंटी के बोबे को हाथों से मसलने लग गया, एक हाथ से आंटी के बोबे को दबाता तो दूसरे बोबे को मुंह में लेकर चूसता. मैं ऐसे बारी-बारी करने लग गया और आंटी भी जोर जोर से सिसकारियां लेने लेने लग गई।</p>



<p>अब मैंने मेरे एक हाथ से आंटी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. आंटी की चूत पानी पानी हो गई थी. अब मैं आंटी की चूत को चाटने लग गया. वो मेरे बालों में हाथ डाल कर अपनी चूत पर जोर जोर से दबाने लग गई और जोर जोर से आह उहउह की सिसकारियां लेने हुए झड़ गई.<br>मैंने उनकी चूत को चाट चाट के साफ़ कर दिया।</p>



<p>फिर आंटी भी मेरे लन्ड को मुंह में लेकर चाटने लग गई. वो पोर्न वीडियो की तरह मेरे लन्ड को चाट रही थी, कभी मेरे लन्ड के टॉप पर जीभ चलाती तो कभी पूरे लन्ड को मुंह में ले लेती. आंटी जब मेरा लन्ड चाट रही थीं तब मैं तो जन्नत में ही चला गया था.</p>



<p>थोड़ी ही देर में आंटी के मुंह में ही मेरा वीर्य छोड़ दिया ओर आंटी ने चाट चाट के मेरे लन्ड को साफ़ कर दिया।</p>



<p>फिर हम दोनों ने दोबारा किस करना शुरू कर दिया. अब मैं आंटी के एक बोबे को हाथ से मसलने लगा और दूसरे बोबे को मुंह में लेकर चूसने लग गया.<br>तभी आंटी बोलने लग गई- अब और नहीं सहन होता. जल्दी से चोद दे!</p>



<p>फिर मैंने आंटी की चूत पर थोड़ा तेल लगाया और थोड़ा तेल मेरे लन्ड पर लगा कर आंटी की चूत में डालने लगा। लेकिन आंटी ने बहुत दिनों से सेक्स नहीं किया था, इस कारण उनकी चूत टाइट थी.<br>तो मैंने एक हाथ से लन्ड को टाइट पकड़ के जोर से धक्का लगा दिया. मेरे लन्ड का टोपा आंटी की चूत में चला गया और वो जोर जोर से चिल्लाने लग गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और वो लन्ड बाहर निकालने के लिए बोलने लग गई.</p>



<p>मैंने आंटी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ी देर तक किस करने लग गया. जब आंटी नॉर्मल हुई तो वो अपनी गान्ड को आगे पीछे करने लग गई।</p>



<p>फिर मैंने धीरे धीरे धके लगाने चालू किए. फिर एकदम से एक जोर का धक्का लगाया जिससे मेरा लन्ड आंटी की चूत में जड़ तक चला गया और आंटी की आंखों में से आंसू आने लग गए. फिर मैं थोड़ी देर रुका और आंटी को किस करने लगा.</p>



<p>जब वो नॉर्मल हुई तो मैं उन्हें धीरे धीरे चोदने लगा. इसी बीच आंटी जोर जोर की सिसकारियों के साथ एक बार झड़ गई. अब आंटी के झड़ने के कारण चूत में से पच पच की आवाजें आने लग गई जो पूरे कमरे में गूंज रही थी.</p>



<p>और अब मैंने भी धक्कों की स्पीड तेज कर दी जिससे अब मेरा लन्ड सीधा आंटी की बच्चेदानी को ठोकर मार रहा था जिससे आंटी को और मज़ा आने लग गया.<br>अब मेरा होने वाला था तो मैंने आंटी से पूछा- कहाँ डालूँ अपना रस?<br>तो वो बोली- मेरी चूत में ही डाल दो, बहुत दिनों से प्यासी है यह!<br>फिर कुछ मिनट की धकापेल चुदाई के साथ मैं और आंटी दोनों एक साथ ही झड़ गए.</p>



<p>फिर थोड़ी देर मैं आंटी के ऊपर ही लेटा रहा।</p>



<p>मैं आंटी को किस करते हुए साइड में लेट गया और आंटी से बात करने लगा.<br>फिर मैंने उनको उनकी ननद की चुदाई के लिए बोला तो वो बोली- मैं उससे बात करूंगी.</p>



<p>इतने में ही मेरी नजर गेट पर पड़ी। गेट पर उसकी ननद खड़ी हमें देख रही थी और अपने बोबे दबा रहा थी.</p>



<p>मैंने उनकी ननद को अनदेखा कर दिया और आंटी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. पूरे कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. आंटी कराह रही थीं, जब मैं आंटी को चोद रहा था.</p>



<p>आंटी अपनी टांगें खोल कर बोलीं- आह मजा आ रहा है … और चोदो और ज़ोर से चोदो!</p>



<p>जब मेरा वीर्य निकलने वाला हुआ, तो उसी टाइम आंटी ने भी अपना पानी छोड़ दिया. मेरा सारा वीर्य उनकी चुत में ही निकल गया.</p>



<p>अब आंटी को डर लगा कि कहीं वो पेट से ना हो जाएं, तो उन्होंने अगले दिन अपने पति से भी चुदवा लिया था और आंटी प्रेगनेंट हो गईं. मेरी चुदाई से उनको एक बेटा हुआ, जो बाद में उन्होंने मुझे बताया कि ये मेरा ही बच्चा है. बच्चा पेट में आ जाने के बाद आंटी वहां से चली गई थीं.</p>



<p>खैर वो बाद का किस्सा है, उसे फिर कभी सुनाऊंगा.</p>



<p>अभी तो आंटी ने पहले तो अपनी गांड को पूरे मजे लेकर मस्त तरीके से चुदवाया. फिर जब मैंने उनको बताया कि आपकी ननद भी चुदासी है.<br>उन्होंने मुझसे पूछा- तुमको कैसे मालूम है?</p>



<p>मैंने उस खिड़की की तरफ आंटी का चेहरा कर दिया, जिधर खड़ी होकर अपने मम्मे मसल रही थी.<br>आंटी एक पल के लिए तो सकपका गईं, फिर उन्होंने अपनी ननद को कमरे में आने को कहा, वो गर्म लौंडिया कमरे में आ गई.</p>



<p>फिर हम दोनों ने मिल कर आंटी की ननद को सेक्स का मज़ा चखाया. चूंकि उनकी ननद अभी सील पैक माल थी, इसलिए आंटी को लगा कि इसकी चूत की ओपनिंग जरूरी है, वरना ये उनकी बदनामी कर सकती थी.</p>



<p>मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसको चूमने लगा. कुछ ही देर में आंटी ने उसको पूरा नंगी कर दिया. मैंने उसे अपने लंड के नीचे ले लिया.</p>



<p>जैसा कि मैंने लिखा कि उसका ये पहली बार का सेक्स था, तो जैसे ही मैंने लंड पेला, वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी थी. आंटी ने उसके मुँह को दबा लिया और मुझे फुल स्पीड से चुदाई करने के लिए कह दिया. कुछ ही देर में उनकी ननद की सील टूट गई और वो भी चुदाई का मजा लेने लगी.</p>



<p>मैंने दो ही दिन में उसकी गांड से लेकर चूत और मुँह सभी छेदों को चोद दिया.</p>



<p>अब हम तीनों मस्ती से चुदाई का मजा ले रहे थे.</p>



<p>पांच दिन बाद मुझे जानकारी हुई कि मम्मी को अभी दो तीन दिन और लगेंगे. बस मस्ती की ये घड़ियां मुझे और कुछ दिन के लिए मिल गई थीं.</p>



<p>आंटी मेरी रखैल जैसी बन गई थीं, उनके साथ मैंने हर तरह की चुदाई के मजे लिए.</p>



<p>आपको आंटी के साथ सेक्स की कहानी कैसी लगी, मुझे मेल लिख कर जरूर बताएं.<br>sonimohit030@gmail.com</p>
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		<title>किरायेदार से चुद गई मैं</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:32:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ. मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं. मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. <a title="किरायेदार से चुद गई मैं" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/" aria-label="Continue reading किरायेदार से चुद गई मैं">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ.</p>
<p>मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं.</p>
<p>मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मैं अपनी इस चुदाई की कहानी में आपको बताऊंगी कि कैसे मैं अपने किरायेदार से अपनी चूत और गांड की आग को शांत किया. हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों लोग कैसे सेक्स कर लेते हैं. </p>
<p>अब मेरी शादी हो चुकी है. मेरे पति सर्विस करते हैं. मेरे अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है. मेरा घर काफी बड़ा है, जिस वजह से मेरे पति ने चार पोर्शन किराए पर दिए हुए हैं. सभी के घरों में सर्विस क्लास के लोग ही थे. किरायेदारों में पति लोग जॉब पर चले जाते थे और उनकी पत्नियां या तो घरों में ही होती थीं, या उनमें से कुछ अपने काम काज के चलते घर से बाहर निकल जाती थीं.</p>
<p>इस तरह से दिन में मेरा पूरा घर लगभग सुनसान ही रहता था. </p>
<p>वैसे मैं अपने सभी किरायेदारों से भी बहुत अच्छे से बात करती हूँ. लेकिन क्या करूं, जब मेरी चूत में खुजली होती है, तो अपने किरायेदार से ही चुदवाने की सोचने लगती हूँ. </p>
<p>मेरे पति वैसे तो बिस्तर में बहुत मस्त हैं. जब भी उनको मौका मिलता था, तो वो मेरी चुदाई कर लेते थे. लेकिन मुझे तो रोज सेक्स करने का मन करता था और मेरे पति ऑफिस में काम की वजह से मुझे सप्ताह में एक दो बार ही चोदते थे. जिससे मेरी चुदाई ठीक से नहीं हो पाती थी.</p>
<p>मैं सुबह से घर का सब काम कर लेती हूँ और जब घर के लोग जॉब करने चले जाते हैं, तो मैं घर में अकेली रह जाती हूँ. मैं दोपहर में अपने किरायेदारों से बात करती हूँ. उनमें से ज्यादातर स्त्रियां घर से जब निकल जाती थीं, तब मैं बड़ा ही बोर फील करने लगती थी.<br />
मेरी सहेलियों की तो मौज थी, क्योंकि वो लोग अपने घर पर ही अपने ब्वॉयफ्रेंड को या पड़ोसी को बुलाकर चुदवा लेती थीं.</p>
<p>मेरे किरायेदारों में एक लड़का भी रहता है. उसका नाम सुरेश है, वो अभी अकेला है. उसकी शादी नहीं हुई है. हम दोनों में जल्दी ही दोस्ती की तरह रिश्ता बन गया था. मैं उसे बहुत पसंद करने लगी थी. हम दोनों एक दूसरे से मजाक भी करते रहते थे. वैसे सुरेश अच्छा लड़का था.</p>
<p>चूंकि वो लड़का रात को जॉब करने जाता है, इसलिए मैं उससे दोपहर में बात कर लेती हूँ. मैं जब भी कपड़े सुखाने के लिए जाती थी, तो सुरेश भी मेरे पीछे आता था और हम दोनों लोग छत पर बातें कर लेते थे.</p>
<p>जब उससे मेरी बातचीत ज्यादा होने लगी, तो वो लड़का मुझे देख कर डबल मीनिंग वाली बातें बोलने लगा था. उसे मैंने ही छूट दे दी थी, इसलिए वो और भी ज्यादा बिंदास हो गया था. मुझे वो अपने लिए एक शिकार जैसा लगता था. मैं उसको अपने हुस्न की जाल में फंसाने की सोचने लगी.</p>
<p>सुरेश मुझे अच्छा लगने लगा था, तब भी मैं अभी उसको अपने घर भी नहीं बुला सकती थी. इसलिए मैं उससे बात करके ही मजे ले लेती थी. धीरे धीरे मेरा और सुरेश का रिश्ता प्यार में बदलने लगा. </p>
<p>वैसे तो मैं हमेशा सलवार सूट पहनती हूँ. जब बहुत गर्मी होती थी, तो मैं मैक्सी भी पहन लेती थी. मैक्सी में मेरी चूची और गांड का आकार बिल्कुल साफ़ दिखाई देता था. सुरेश मुझे मैक्सी में बहुत घूर घूर कर देखता था. सुरेश कभी कभी मुझसे बात करते करते मेरी मैक्सी के अन्दर देखता था, तो उसको मेरी चूची दिख जाती थी. वो मेरी चूचियों को देखने के लिए ही मुझसे करीब होकर बात करता था. मैं भी उसको अपनी तरफ आकर्षित करने लगी थी, तो मैं उसको अब सब कुछ पहले से ज्यादा दिखाती थी. वो भी मेरे पीछे पहले से ज्यादा आने लगा था. मैं ये जानती थी कि मेरा जिस्म सुरेश को पसंद है. </p>
<p>हम दोनों लोग कभी कभी एक दूसरे से बात नहीं कर पाते थे, तो एक दूसरे को देख कर स्माइल कर देते थे. हम दोनों की इस स्माइल में एक गहरा अर्थ छिपा होता था, जो बस मुझे या सुरेश को ही समझ आता था. </p>
<p>किरायदारों से किराया उगाहने के मुझे ही उनके पास जाना पड़ता था. सुरेश की सबसे अच्छी बात ये लगती थी कि वो समय से अपना किराया मुझे दे देता था, इसलिए मैं भी उसको किराये में छूट कर देती थी. मैं कभी कभी सुरेश से बात करने के लिए उसके रूम में भी चली जाती थी. मैं देखती थी कि वो अपना रूम भी अच्छे से रखता था और मेरे पति भी उससे खुश रहते थे. उससे हम लोगों को कोई शिकायत नहीं थी. </p>
<p>उस दिन घर में कोई नहीं था. दो किराएदार अपने परिवार के साथ बाहर गए हुए थे और एक महाशय अपनी ड्यूटी पर गए थे. उनकी बीवी भी दोपहर में किसी जगह पर काम करने जाती थी. उस दिन मुझे बड़ी चुदास चढ़ी थी. मैं नहाकर छत पर कपड़े सुखाने के लिए गयी. </p>
<p>मैं कपड़े सुखा रही थी, तभी सुरेश ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया. मैं उसको मना करने लगी, पर वो मान नहीं रहा था. उसने मुझसे बोला- भाभी, मैं आपके जिस्म का दीवाना हो गया हूँ. मुझे भी पता है कि आप मुझे पसंद करती हो.</p>
<p>उसकी ये बात सच थी कि मैं भी सुरेश को पसंद करने लगी थी. वो मुझे किस करने लगा. मैं खड़ी खड़ी उसे मना तो कर रही थी … पर मुझे उसका मुझे चूमना बड़ा ही अच्छा लग रहा था.</p>
<p>कुछ ही देर में मेरा विरोध खत्म हो गया और मैं उसे सहयोग करने लगी. अब उसने मुझे किस करते हुए मेरी चूची को दबा दिया, तो मैं भी एकदम से गर्म हो गयी. अब मैं भी उसको किस करने लगी. </p>
<p>कुछ देर मैंने उसको किस करने के बाद अपने से अलग कर दिया क्योंकि कभी कभी मेरे पड़ोस के लोग भी छत पर अपना कपड़े सुखाने के लिए आ जाते हैं. अगर कोई पड़ोसी मुझे मेरे किरायेदार के साथ किस करते हुए देख लेता, तो मेरी बदनामी हो जाती थी. </p>
<p>मैं अपने रूम में आ गई. मैं रूम में आकर सुरेश के साथ किस वाले पल को याद करने लगी और मेरी चूत गर्म होने लगी. मुझे भी सुरेश के साथ सेक्स करने का मन कर रहा था. मैं ये सब याद करते हुए लेटी थी कि तभी सुरेश मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा.</p>
<p>मैंने पूछा- कौन है?<br />
उधर से सुरेश की आवाज आई- मैं हूँ भाभी जी.<br />
मैंने दरवाजा खोला, तो सुरेश अंदर आकर मुझे किस करने लगा और मेरी चूची को दबाने लगा.<br />
मैं उससे बोली कि आप अपने रूम में जाओ … मैं अभी आपके रूम में ही आती हूँ.<br />
इस पर वो मान गया.</p>
<p>मैं कुछ देर के बाद सुरेश के रूम में चली गयी. मैंने देखा कि सुरेश इस वक्त केवल एक अंडरवियर में था और उसका लंड अंडरवियर में खड़ा था. वो मुझे खींच कर अपने रूम में बिस्तर पर ले गया और मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया. वो दौड़ कर अपने रूम का दरवाजा बंद करके वापस आ गया और मुझे किस करने लगा. </p>
<p>इस वक्त मैं एकदम फ्री थी. मेरे घर के सभी लोग जॉब करने गए थे और बाकी बचा एक किरायेदार और उसकी पत्नी भी जॉब पर गए हुए थे. </p>
<p>सुरेश ने मुझे किस करने के बाद मेरी मैक्सी को निकाल दिया और मैं ब्रा और पेंटी में हो गयी. उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूची को बहुत देर तक मसला. उसके बाद वो मेरी पेंटी को चाटने लगा. मेरी चूत से पानी निकल रहा था, जिससे मेरी पेंटी भीग गयी थी. </p>
<p>सुरेश अपना लंड पकड़ कर मुठ मारने लगा और उसके बाद उसने मेरी ब्रा और पेंटी निकाल दिया. अब मैं उसके सामने नंगी हो गयी थी. मेरे बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर वो एकदम से मचल गया. वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को मसलने लगा. उसके बाद वो मेरी दूसरी चूची को चूसने लगा और पहली को मसलने लगा. </p>
<p>इसके बाद वो नीचे को हुआ और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. मैं एकदम से चुदाई के लिए बेचैन हो गयी थी. वो मेरी चूत चाटने के बाद मेरी चूत में उंगली करने लगा. मेरी चूत में हल्के हल्के बाल थे, जिससे उसे मजा आ रहा था.</p>
<p>शुरूआती बातचीत के बाद हम दोनों लोग एक दूसरे से बात करते समय अडल्ट जोक और सेक्स के टॉपिक पर भी बात करते रहते थे, इसलिए हम दोनों लोग एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे. </p>
<p>वो मेरी चूत में उंगली करने के बाद मुझे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगा. लेकिन मैंने उसको लंड चूसने के लिए मना कर दिया. वो मन मार कर मान गया. उसके बाद वो मेरी चूत में दुबारा उंगली करने लगा. </p>
<p>मेरी चूत से पानी निकलने लगा था. मैं उत्तेजित होकर उसको अपनी चूत में और अन्दर तक उंगली करने के लिए बोल रही थी. वो जोर जोर से मेरी चूत में उंगली करने लगा था. मैं भी जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी थी. </p>
<p>उसके बाद तो हम दोनों चुदाई करने लिए एकदम रेडी हो गए. मैंने सुरेश से कहा कि अब देर न करो, पहले मेरी प्यास बुझा दो, बाद में खेल लेना. </p>
<p>सुरेश राजी हो गया और उसने मुझे चित्त लिटा दिया. वो मेरी चूत के सामने अपना लंड लेकर चुदाई के लिए तैयार हो गया. </p>
<p>मैंने चूत खोल दी थी तो उसने मेरी चूत की फांकों पर अपना लौड़ा टिका दिया. उसके लंड के स्पर्श से मेरी चूत एकदम से चुदने के लिए मचल उठी.</p>
<p>कुछ देर मेरी चूत पर अपना लंड रख कर वो अपना लंड रगड़ने लगा. उसके बाद मैंने उसे एक आंख मारते हुए चुदाई करने का इशारा किया, तो उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. उसके मोटे लंड के जाते ही मेरी एक सिसकारी निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ लेकिन मेरी चूत ने जल्द ही उसके लंड को सहन कर लिया.</p>
<p>उसके बाद वो मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. हम दोनों लोग सेक्स करने लगे.<br />
कुछ देर बाद उसने मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और मेरी चूत में अपना लंड अन्दर तक डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों मस्ती से सेक्स कर रहे थे और साथ में एक दूसरे को किस कर रहे थे. चुदाई के दौरान कभी वो मेरी चूची को मसल रहा था … कभी निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगता था.</p>
<p>धकापेल चुदाई होने लगी थी. दोपहर का समय था, इसलिए हम दोनों सेक्स करते करते पसीने से भीग गए थे. मुझे बेहद पसीना आ रहा था. मुझसे ज्यादा तो सुरेश को पसीना हो रहा था. चुदाई के पहले ही मेरी चूत काफी गर्म हो गयी थी और उसका लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था, जिससे मेरी चूत को अजीब सा अच्छा फील हो रहा था. </p>
<p>मुझे बहुत दिन के बाद एक दमदार लंड से चुदने के लिए मौका मिला था. सुरेश ने भी बहुत दिन से सेक्स नहीं किया था और वो बहुत जोर लगाकर मुझे चोद रहा था. जिससे हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था. </p>
<p>सुरेश के लंड से मेरी चूत की प्यास बुझ रही थी … उसका मोटा लंड मेरी चूत को दे दनादन चोद रहा था. </p>
<p>मैंने तो सुरेश से चुदते वक्त ही सोच लिया था कि अगर मेरे पति रोज मुझे नहीं चोदेंगे, तो मैं सुरेश के रूम में आकर सुरेश से चुदूंगी. </p>
<p>सुरेश अपना पूरा लंड अन्दर डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था, जिससे मुझे और भी मजा आ रहा था और साथ में मुझे शांति भी मिल रही थी. मैं गांड उठा उठा कर सुरेश से चुदवा रही थी.</p>
<p>करीब बीस मिनट बाद हम दोनों लोग सेक्स करते करते झड़ने लगे थे. हालांकि वो इस वक्त चरम पर आने को था, लेकिन तब भी वो मुझे पूरा जोर लगा कर चोद रहा था. मेरी सिसकारियां भी तेज होने लगी थीं.</p>
<p>तभी हम दोनों चुदाई करते हुए झड़ने लगे. हम दोनों ने बहुत देर तक सेक्स किया था. इसके बाद दोनों ने ही एक साथ अपना पानी छोड़ दिया था … जिससे दोनों को ही बड़ा मजा आया था.</p>
<p>उसके बाद थक कर मैं कुछ देर के लिए उसके साथ ही लेट गई. हम दोनों लोग की सांसें तेज चल रही थीं. हम दोनों इस वक्त चुदाई के बाद एकदम नंगे पड़े थे. कुछ देर बाद मैं उठी और मैंने अपनी ब्रा पेंटी पहनी, उसके बाद अपनी मैक्सी पहन कर अपने रूम में जाने लगी.</p>
<p>सुरेश ने मुझे रोक कर कुछ देर किस किया और उसके बाद मैं अपने रूम में आ गयी.</p>
<p>अब हम दोनों लोग रोज दोपहर को सेक्स करने लगे. मेरे पति और मेरे घर वाले सब लोग ऑफिस चले जाते थे, तो मैं सुरेश के रूम में जाकर चुदवा लेती थी. वो मुझे बहुत अच्छे से चोदता था. जब भी कभी मेरे पति की नाईट ड्यूटी होती थी, तो मैं पहले से ही सुरेश को बता देती थी. </p>
<p>इसके बाद उस रात को मैं उसके साथ खुल कर चुदाई का मजा ले लेती थी. उसके साथ अब मैं ओरल सेक्स भी करने लगी थी. मुझे उसका लंड चूसना अच्छा लगने लगा था. उसने मेरी गांड भी खोल दी थी. मेरी गांड का उद्घाटन कैसे हुआ, उसकी कहानी मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखूंगी.</p>
<p>हम दोनों आज भी कभी दोपहर में सेक्स करते हैं. सुरेश अभी भी मेरे घर में किराये पर रहता है. मुझे उसको छोड़ पाना अब दुश्वार सा लगता है.</p>
<p>आप सबको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. आप सब मेरी कहानी का फीडबैक जरूर दीजिए. मुझे मेल करके जरूर बताएं क्योंकि इससे मुझे अगली कहानी लिखने में बहुत सहारा मिलेगा. मैं आप सबके कीमती मेल का इंतजार करूंगी.<br />
आपको मैं अपनी अगली चुदाई की कहानी भी जल्द बताऊंगी.<br />
[email protected]</p>
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