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	<title>Oral Sex &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>Oral Sex &#8211; Kahani18</title>
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		<title>मेरी पहली चोदाई कहानी-2</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:48:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग मेरी पहली चोदाई कहानी-1 में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था. अब आगे: जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा <a title="मेरी पहली चोदाई कहानी-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई कहानी-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग<br />
मेरी पहली चोदाई कहानी-1<br />
में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था.</p>
<p>अब आगे:</p>
<p>जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा था कि मेरी चूत की चोदाई की कहानी कब पूरी होगी.</p>
<p>पूरा दिन ऐसे ही ख्यालों में गुजर गया. मैं इंतजार करता रहा कि अभी उसका कॉल आएगा, उससे बात होगी. मगर उस दिन उसका कोई कॉल नहीं आया. मैं उसके ख्याल में मुट्ठ मारके सो गया.</p>
<p>मुठ मारने से तनाव खत्म सा हुआ और मुझे नींद भी कब आ गई, पता ही नहीं लगा. </p>
<p>फिर मैं जैसे अचानक उठा. मैंने देखा कि शाम के 7:00 बज रहे थे. मैंने अपने फोन को देखा, तो उसमें बहुत सारे मिस कॉल आए हुए थे. मैंने इतने मिस कॉल देख कर तुरंत उसको फोन किया.</p>
<p>यह सभी कॉल उसी के थे. मैंने कॉल किया, तो मेरे कुछ बोलने से पहले ही वह बोल उठी- कहां थे अब तक? कितने फोन किए … सुबह कुछ करने नहीं दिया, तो क्या नाराज हो गए?<br />
फिर मैंने उसे समझाया कि मैं नाराज नहीं हुआ हूं … मैं तुम्हारा ही वेट कर रहा था और मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं लगा.<br />
उसने कहा कि चलो अभी मेरे घर पर कोई नहीं है, अभी तुम आ जाओ. हम अपना सुबह का अधूरा काम पूरा कर लेते हैं.</p>
<p>उस वक्त रात के लगभग 8:00 बज रहे थे. मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके घर चल दिया. गाड़ी को मैंने दूर खड़ा कर दिया था ताकि कोई देख ना ले. क्योंकि वहां पर मेरी जान पहचान के भी लोग थे. </p>
<p>नजदीक जाकर मैंने उसे कॉल किया और पूछा कि मैं सीधा अन्दर आ जाऊं?<br />
तो उसने कहा कि नहीं … रुको तो … पहले मुझको देखने दो, बाहर कोई है तो नहीं … अगर किसी ने देख लिया, तो मेरा यहां रहना मुश्किल हो जाएगा.<br />
मैंने कहा कि हां देख लो, मैं वेट करता हूं.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसका कॉल आया. उसने कहा कि कोई नहीं है, जल्दी से आ जाओ. </p>
<p>मैं सीधा घर में घुस गया. घर में घुसते मैंने उसे देखा. देखते ही मैं उससे चिपक गया. उसे गले से लगाया और उसको किस करने लगा. उस वक्त मैं पागल हो चुका था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. बस पागलों की तरह से किस किया जा रहा था. </p>
<p>उसने मुझे रोकते हुए कहा- सब कुछ यहीं करोगे क्या? चलो कमरे में चलते हैं.<br />
फिर मुझे होश आया. मैंने अपने आपको संभाला.</p>
<p>हम दोनों कमरे में चले गए. कमरे में जाते ही मैं उसे घुमा कर उसकी गर्दन में चुम्बन करने लगा. तब तक मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैं पीछे से उसकी मोटी गांड में लंड को ठेले जा रहा था. आगे से अपने हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था. मैं इतना जोर से दबा रहा था कि मुझे बस पहली और आखिरी बार दूध दबाने को मिले हों.</p>
<p>वह मुझसे कह रही थी- आह धीरे से करो … मुझे लग रही है.<br />
पर मुझे कहां कुछ सुनाई देने वाला था. मैं तो बस अपने अन्दर के शैतान को जगा चुका था. उसकी एक भी आवाज मेरे कानों में नहीं आ रही थी. उस टाइम तो बस खड़े खड़े मन कर रहा था कि जल्दी से गांड में लंड घुसा दूँ.</p>
<p>मैंने उसकी साड़ी को पीछे से उठा दिया और मैंने अपने लंड को उसके सीधा गांड में सैट करके धक्का मार दिया. बिना किसी अनुभव के लंड पेल देने से लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था. मेरी हरकत से उसको हंसी आ रही थी. </p>
<p>उसने मुझसे पूछा- क्या पहली बार कर रहे हो?<br />
मैंने कहा- हां … मैंने कभी सेक्स नहीं किया है.<br />
तो उसने कहा कि फिक्र मत करो मैं सब सिखा दूंगी.<br />
मैंने कहा- जल्दी से सिखा दो न.<br />
उसने हाथ पीछे करते हुए मेरे गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- चलो हम बाथरूम में चलते हैं … वहां करेंगे. </p>
<p>अब तक हमारे कपड़े नहीं निकले थे. सिर्फ मेरा लंड मैंने पेंट से बाहर निकाला हुआ था. उसने अभी तक मेरा लंड भी नहीं देखा था.<br />
जब मैंने कहा- हां चलो अन्दर चलते हैं.<br />
वह मेरी तरफ घूमी. उसका चेहरा मेरे से चेहरे के सामने आया.</p>
<p>जबी उसकी नजर धीरे से मेरे लंड पर पड़ी, तो उसने कहा कि ओ माय गॉड … तुम इतने बड़े से हथियार को मेरे छोटे से छेद में डालने की कोशिश कर रहे हो, पर तुम्हें तो इतना भी नहीं पता कि उसको कैसे डाला जाता है. </p>
<p>उसके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं थोड़ा सा सोचने लगा कि यह तो कितनी चालू लड़की है … कितनी बेशर्मी से बातें कर रही है. </p>
<p>मैंने उसकी बातों को ध्यान नहीं देते हुए आगे बढ़ना ही अच्छा समझा. फिर वह मेरे लंड को पकड़कर मुझे बाथरूम में ले गई. मैं मेरे लंड के साथ उसके साथ में अन्दर खिंचता हुआ जाने लगा. उस टाइम मुझे ऐसा लगा कि लंड कितने कमाल की चीज होती है. सिर्फ उसने लंड को ही पकड़ा था और मेरी पूरी बॉडी उसके कंट्रोल में हो गई थी.</p>
<p>उसके लंड पकड़ते मुझे झनझनाहट होने लगी थी. यह क्या हो रहा है … ऐसी फीलिंग थी कि उस टाइम कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उसके लंड पकड़ते ही में और जोश में आ गया. </p>
<p>फिर मैं साथ में बाथरूम चला गया. बाथरूम में घुसते ही उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड को हाथ में पकड़ कर नीचे बैठ गई. वो उसे देखने लगी. </p>
<p>मैंने कहा- क्या देख रही हो?<br />
उसने कहा- मैं इसी के लिए तरस रही थी और मैंने उस दिन आपको न जाने क्या बोल दिया था. मैंने बात भी नहीं की आपसे.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं … जो हुआ सो हुआ … अभी आगे का करते हैं. </p>
<p>फिर उसने मेरे लंड को सीधा मुँह में डाल लिया, जैसे ही मेरा लंड उसके मुँह में गया. मैं कांपने लगा, मुझे अजीब सा होने लगा. मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है … क्योंकि उस टाइम पहली बार इस लड़की ने मेरे लंड को छुआ था और मुँह में लिया था. वो मेरे लंड को ऐसे मुँह में ले रही थी, जैसे उसको बहुत मस्त चीज मिल गई, जिसके लिए वो बरसों से भूखी थी. </p>
<p>मेरे दोनों हाथ मेरे बस में नहीं थे, उसकी हाथ मेरी गांड के गोलों पर टिके हुए थे और मेरा लंड उसके मुँह में था. वो हाथों से मेरी गांड को आगे पीछे करने की कोशिश में लगी थी. मुझे समझ में आया कि ये मुझे आगे पीछे होने के लिए कह रही है. मैंने उसके सर को पकड़ कर गांड को आगे पीछे करने लगा, तो उसके मुँह से ओक ओक ओक की आवाज आने लगी थी. </p>
<p>फिर ऐसे ही कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने मेरा लंड बाहर निकाला.<br />
मैंने उससे कहा- मुझे अन्दर डालना है. </p>
<p>इतना सुनते ही वो मुझे किस करने लगी. उसके किस करते करते ही मैं अपने हाथों से उसकी साड़ी उतारने लगा. धीरे-धीरे मैंने पूरी साड़ी उतार दी, वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला. </p>
<p>मेरे दिमाग में एकदम से घंटी बजी और बचपन का एक डायलाग याद आ गया जब हम कुछ कमीन दोस्त किसी भी बड़े चूचे वाली लड़की को देख कर लव स्कूल कह देते थे. कहीं आज ये वही लव स्कूल तो मेरे सामने नहीं आ गया था. </p>
<p>मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं, इतने नुकीले चूचे मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखे थे. दूध चूसने के लिए मैं पागल होने लगा. मैंने आव देखा न ताव दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. मैं अपने आप ही में पागल हो रहा था कि पता नहीं मुझे क्या हुआ. </p>
<p>उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा. अब तक चूचे चूसते चूसते मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था. उसका एक हाथ मेरे लंड को पकड़कर आगे पीछे कर रहा था. मुझे उस टाइम बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>चूंकि मैं उस टाइम पहली बार चोदाई करने वाला था. यह सब मेरे लिए नया था. फिर उसने मुझे रोकते हुए मेरी पेंट उतारी और टी-शर्ट भी उतार दी. मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था. </p>
<p>वो मेरे शरीर को देख कर पागल हो गई और कहने लगी- मैंने आज तक ऐसा शरीर नहीं देखा … तुम कितने सेक्सी दिखते हो.<br />
मैंने कहा- तुम पहली लड़की हो, जिसने मुझे ऐसे देखा है.<br />
उसने कहा कि अगर कोई तुम्हें देख ले, तो पागल ही हो जाए.</p>
<p>उसके इतना बोलते ही मैं उसे किस करने लगा. उसका ब्लाउज मैंने पीछे से फाड़ दिया क्योंकि उस टाइम मैं बहुत जोश में था. उस समय वैसी सी फीलिंग आ रही थी कि मेरे अन्दर न जाने ताकत एकदम से डबल कैसे हो गई थी. </p>
<p>वो कहने लगी- यह क्या कर दिया तुमने … ब्लाउज ही फाड़ डाला … सब्र तो कर लो … मैं कहीं नहीं जाने वाली. मैं तुम्हारी ही हूं और हमेशा तुम्हारी रहूंगी.</p>
<p>मैंने उसे सीने से लगा लिया. मैं उसको इतना जोर से हग करने लगा कि उसके नुकीले चूचे मुझे अपनी छाती में गड़ते से महसूस होने लगे. जब मेरे सीने से उसके मम्मे लग गए, तो मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे शरीर को मलाई लग रही हो. </p>
<p>मुझे बड़ा मजा आ रहा था. फिर मैंने उसका पेटीकोट खोलने की कोशिश की, पर मुझसे नहीं खुला, तो उसने अपने हाथों से खुद का पेटीकोट खोल दिया. उसने अन्दर पेंटी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसको नंगी देखकर नीचे बैठ गया. </p>
<p>एकदम मुलायम मक्खन सी चूत को देख कर मैं पागल हो गया था. जाने मुझे क्या हुआ कि मैं उसकी चूत को हाथों से फैलाने लगा. अन्दर से एकदम गुलाबी थी उसकी चूत. मुझे पता नहीं क्या हो गया कि मैंने अपना मुँह अन्दर घुसा दिया और चूत के गुलाबी होंठों को चूसने लगा. इतना दम लगाते हुए चूत को चूसने लगा कि उसकी सांसें रुकने लग गईं. </p>
<p>तब उसने मेरा सर और जोर से अपनी टांगों के बीच में दबा दिया और वह धीरे-धीरे नीचे बैठे लगी. वो नीचे बैठी, तब भी मेरा सर उसकी टांगों के बीच में घुसा हुआ था. तब तक मैं भी लेट चुका था.</p>
<p>फिर उसने मुझे रोका और कहा- अब अन्दर डाल दो.<br />
उसके ये कहते ही मैंने पोजीशन बनाई और अपना लंड उसकी चूत में रखकर तैयार हो गया.</p>
<p>मैं जैसे ही लंड अन्दर डालने लगा, तभी बाहर से किसी के आने की आवाज आने लगी. हम दोनों बाथरूम के अन्दर थे.<br />
ध्यान से सुना तो रूम में आकर कोई बोल रहा था. </p>
<p>उसने फुसफुसाते हुए कहा- मेरे पति आ गए हैं … अब हम अन्दर फंस चुके हैं. हम बाहर कैसे जाएंगे … आज तो मैं मर गई. </p>
<p>इस तरह की बहुत सी बातें करने लगी. यह सब सुनकर मेरी गांड फटने लगी. मेरा खड़ा लंड कब बैठने को हो गया, मुझे पता ही नहीं लगा.<br />
उस टाइम वो कह रही थी- बाहर जाएंगे, तो वो हमें पकड़ लेंगे. </p>
<p>फिर अचानक उसके पति की आवाज आई- कहां हो तुम?<br />
तो उसने अन्दर से कहा कि मैं बाथरूम में हूं … नहा रही हूं.<br />
उसका पति कहने लगा कि आज इतनी रात को क्या नहाने की जरूरत आ गई?<br />
उसने कहा कि मेरी साड़ी गीली हो गई थी. मैं नहाने लग गई. </p>
<p>यह सब सुनकर मुझे थोड़ी सी तसल्ली हुई. फिर मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा. अब तो शुरू करते ही हैं. </p>
<p>तब तक वह खड़ी हो चुकी थी और मैंने भी लंड को सहला कर खड़ा कर लिया था. मैंने उसे पीछे से झुका दिया और लंड को चूत के छेद पर सैट करके सीधा अन्दर पूरा का पूरा घुसा दिया. </p>
<p>लंड के चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई. उसकी चीख इतनी जोर से निकली थी कि उसके पति ने बाहर से सुन ली. </p>
<p>यह देख के मुझे डर लगने लगा कि कहीं उसका पति अन्दर ना आ जाए. उस टाइम तो माइंड में यही रहता है कि हमारी नजर में कुछ गलत हो रहा है, तो सामने वाले की नजर में भी गलत ही होगा. </p>
<p>बाहर से पति चिल्लाया- क्या हुआ?<br />
उसने अन्दर से खुद को सम्भालते हुए कहा- कुछ नहीं हुआ, मैं जरा फिसल गई थी. </p>
<p>फिर इतना सुनते ही मैं लंड को आगे पीछे करने लगा. वो भी मेरे लंड के हर झटके का मजा ले रही थी. मुझे भी न मालूम कितना मजा आने लगा था. फिर धीरे-धीरे मेरे लंड के झटकों की स्पीड बढ़ने लगी, तो उसने मुझे रोक लिया.</p>
<p>अब उसने कहा- तुमको नीचे लिटा कर करूंगी. </p>
<p>मुझे नीचे लेटने का इशारा किया. मैं फर्श पर लेट गया. वो मेरे ऊपर आ गई. उसने मेरे लंड को चूत पर सैट किया. उसने मेरा पूरा लंड में चूत में ले लिया. मेरी आंखों के सामने ही मेरा लंड चूत में गायब हो चुका था. मेरे मन में ख्याल आया कि चूत के अन्दर कितना गहरा गड्डा होगा, जो इतने बड़े लंड को भी गायब कर दिया. </p>
<p>उसके बाद वो मेरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी. मुझे बहुत मजा आने लगा था … क्योंकि जिंदगी में पहली बार मेरा लंड किसी चूत में घुसा था. </p>
<p>फिर वह इतनी स्पीड से ऊपर नीचे होकर चोदाई करने लगी कि पच पच की आवाज आने लगी. </p>
<p>उस टाइम बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया कि आवाज बाहर भी जा सकती है और बाहर कोई बैठा हुआ है. </p>
<p>वह अपनी ही धुन में मेरे ऊपर नीचे होने लगी. ऊपर नीचे होते होते मुझसे लिपट गई. फिर ऊपर नीचे का खेल खेलना बंद कर दिया. वो मुझसे कस कर लिपट गई और उसने कहा कि मेरा हो गया है. </p>
<p>उस वक्त मुझे समझ में नहीं आया कि वह क्या कह रही थी.<br />
मैंने कहा- हां कोई बात नहीं. </p>
<p>मैंने उसे मेरे नीचे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया. मैं उसकी टांगों में बैठकर चूत को देखने लगा. वो पहले के मुकाबले अभी थोड़ी अधिक उभरी हुई थी. </p>
<p>मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों हो गया है?<br />
तो उसने कहा कि आज पहली बार कोई मस्त डंडा मेरी चूत में गया है और मुझे चोदाई में संतुष्ट किया है … ऐसे में हमेशा इसी लंड से चूत ख़ुशी से फूल कर कुप्पा हो जाती है.</p>
<p>इतना सुनते मैं खुश हो गया और मैंने सीधा अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया. </p>
<p>उसने कहा- क्या हुआ? अब तक तुम्हारा हुआ नहीं था क्या?<br />
मैंने कहा- देखो ना कितना खड़ा है. तुम्हारे अन्दर जाने के लिए कितना तड़प रहा है. </p>
<p>मैंने उसको किस करते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिए. कुछ देर बाद मैं नीचे से गांड और उसकी चूत को देखने लगा. वो गांड उठाने लगी. मैंने स्पीड बढ़ा दी और धकापेल चोदाई करने लगा. </p>
<p>तब तक उसका एक बार और हो चुका था. फिर मैंने फुल स्पीड में धक्के मारते हुए उससे कहा- मेरा पानी निकलने वाला है.<br />
यह कहते कहते ही मेरे लंड का पानी उसकी चूत में निकल गया. मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- यहां से बाहर कैसे जाएंगे … आपके पति बाहर बैठे हैं.<br />
तो उसने कहा- मैं निकल कर उनको बाहर भेज देती हूं. उनके जाने के बाद तुम चले जाना. </p>
<p>फिर उसके बाद उसने अन्दर से ही आवाज लगाई कि आप दूध ले आओ ना … तब तक मैं बाहर निकल कर कपड़े पहन कर आपके लिए खाना लगा देती हूं.<br />
उसका पति ‘ठीक है..’ कह कर वहां से दूध लेने चला गया. मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने, उसको किस किया और वहां से चला आया. </p>
<p>उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता है … हम चूत चुदाई का मजा कर लेते हैं.</p>
<p>तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी पहली चोदाई कहानी … मुझे मेल करके जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खेल वही भूमिका नयी-4</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:50:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[इस कामुक सेक्स कहानी के तीसरे भाग खेल वही भूमिका नयी-3 में अब तक आपने पढ़ा कि मैं अब तक नेता और कमलनाथ के अलावा रवि से सम्भोग करके बहुत ज्यादा थक चुकी थी. इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद जब मैं जागी, तो कान्तिलाल मेरे साथ सम्भोग करने को आतुर हो रहा <a title="खेल वही भूमिका नयी-4" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-4/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-4">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस कामुक सेक्स कहानी के तीसरे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-3<br />
में अब तक आपने पढ़ा कि मैं अब तक नेता और कमलनाथ के अलावा रवि से सम्भोग करके बहुत ज्यादा थक चुकी थी. इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद जब मैं जागी, तो कान्तिलाल मेरे साथ सम्भोग करने को आतुर हो रहा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मेरा कांतिलाल के साथ पहले का भी सेक्स अनुभव था तो मैं जानती थी कि वो जल्दबाजी नहीं करेगा बल्कि मुझे पूर्ण रूप से उत्तेजित करके संभोग के लिए बाध्य कर देगा.</p>
<p>इन सब बातों को जानने के बाद भी मैं उसके वश में होती जा रही थी, पता नहीं क्यों. इससे पहले उन 3 मर्दों से मुझे नहीं मिला था, शायद उसकी कमी का मुझे अफसोस था और कांतिलाल से मेरे मन में कोई उम्मीद थी. इसी वजह से मैं उसकी बांहों के जाल में स्वयं फंसती चली जा रही थी.</p>
<p>मैं और कांतिलाल अब एक दूसरे के सीने से चिपक गए थे और वो मुझे हौले हौले से उत्तेजित करने का प्रयास करने लगा. उसने मेरी आंखों में देखता हुआ मेरी रानों, बांहों, कमर और चूतड़ सहलाने शुरू कर दिया. वो मुझे ऐसे देखने लगा, जैसे वो मेरा इन्तजार कर रहा था. उसके मादक छुवन से मेरे बदन में ऐसा लग रहा था, मानो हज़ारों चीटियां मेरे बदन में रेंग रही हों, मेरे जिस्म में एक मीठी सिहरन सी हो रही थी.</p>
<p>काफी देर इसी तरह मुझे टटोलने के बाद वो अपने होंठ, मेरे होंठों के करीब ले आया, पर मैं जस की तस रही.</p>
<p>कांतिलाल भले कितना भी सहनशील क्यों न होता … मगर बाकी मर्दों की तरह उसकी भी एक सीमा थी और अब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल था. वो भी जान चुका था कि मुझे कैसे अपने वश में करना है … क्योंकि उसने मुझे पहली मुलाकात के समय भरपूर पढ़ा था. </p>
<p>उसने खुद ही अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे चूमने लगा. मैं खुद को रोकने का प्रयास करती रही कि शायद मेरे ठंडे और नकारात्मक व्यवहार से उसकी उत्तेजना कम हो जाए, पर वो रुक नहीं रहा था बल्कि और अधिक उत्तेजना से मेरे होंठों को चूसते चूमते हुए मेरे स्तनों को दबाने सहलाने लगा था.</p>
<p>काफी देर खुद को रोकने के बाद मेरी इंद्रियां कमजोर पड़ने लगीं और आखिरकार मैं उसके आगे हार ही गई. उसने मेरे भीतर वासना की चिंगारी फ़िर से भड़काने में सफलता पा ली थी. </p>
<p>अब मैं अपने भीतर नए तरह का जोश, ताकत और कामोत्तेजना महसूस करने लगी थी. मैंने भी उसे पकड़ कर चुम्बन में साथ देते हुए उसके होंठों को बारी बारी से चूसने लगी. जब वो मेरी ऊपर के होंठ चूसता, तो मैं उसके नीचे का होंठ चूसती और जब वो मेरा नीचे का होंठ चूसता … तो मैं उसके ऊपर का होंठ चूसने लगती. मेरे भीतर एक नया रोमांच की अपेक्षा जगी हुई थी.</p>
<p>इस तरह चुम्बन का एक लंबा अधिवेशन चला. हम दोनों कभी जुबान को चूसते, तो कभी होंठों को … और एक दूसरे से ऐसे लिपट लिपट कर अंगों को सहलाते प्यार करते, जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते हों. </p>
<p>धीरे धीरे ऐसे चूमते सहलाते हुए कांतिलाल ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और फिर से लंबे चुम्बन और आलिंगन का दौर शुरू हो गया. वो एक हाथ से मेरे एक स्तन को क्रूरता से मसल रहा था, तो दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ मसल रहा था.</p>
<p>मेरी उत्तेजना इस कदर बढ़ गई थी कि उसके मसलने से जो दर्द हो रहा था, वो भी आनन्द प्रदान कर रहा था. हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी ताकत से जकड़ कर चूमने लगे थे. कभी मैं अपनी जुबान उसके मुँह में डाल देती और वो चूसता, तो कभी वो मेरे मुँह में अपनी जुबान डाल देता और मैं चूसती.</p>
<p>मुझे उसकी साँसों में एक अलग सी खुश्बू आने लगी थी, जो मेरी कामोत्तेजना को और बढ़ा रही थी. मैं उसके ऊपर अपनी दोनों जांघें फैला कर चढ़ी हुई थी और मुझे उसका सख्त लिंग मेरी योनि पर जांघिये के भीतर से चुभ रहा था.</p>
<p>चूमते हुए कांतिलाल ने पीछे से मेरे वस्त्र की डोरी खोल दी और उसे सरका कर कमर तक खींच दिया, जिससे मेरे स्तन खुल गए.</p>
<p>थोड़ी और देर चूमने के बाद उसने करवट ली और पलट कर मुझे नीचे कर दिया. अब वो मेरे ऊपर आ गया था. वो मुझे गालों से लेकर गले तक चूमने लगा था और जुबान से गले और कानों के नीचे चाटने लगा था. मुझे अब मुझे ऐसा लगने लगा कि जो चीटियां अभी तक मेरे बदन पर रेंग रही थीं, वो अब दौड़ने लगी हैं.</p>
<p>मैं उत्तेजना में उसके बालों को कसके पकड़ कर ऐंठन लेने लगी और टांगों से उसे जकड़ने का प्रयास करने लगी.</p>
<p>कुछ पल ऐसे चूमने के बाद वो मेरे स्तनों की ओर बढ़ने लगा. उसने मेरे दोनों स्तनों को एक एक हाथ से पकड़ चूचुकों को बारी बारी चूमकर बोला- क्या अब भी इनमें से दूध आता है?<br />
मैंने उत्तर दिया- हां.<br />
उसने फिर बोला- क्या मैं तुम्हारा दूध पी सकता हूँ?</p>
<p>मैंने उत्तर दिया- ऐसा पहली बार तो होने नहीं जा रहा … पहले भी आप पी चुके हो.<br />
उसने फिर बोला- पूछ लेना मुझे बेहतर लगा … क्योंकि काफी समय के बाद मिली हो न … और क्या पता औरतें ये धारणा भी रखती हैं कि दूध सिर्फ उनके बच्चे पीते हैं.<br />
मैंने उससे कहा- ये तो सच है कि बच्चे ही अपनी माँ का दूध पीते हैं.<br />
उसने कहा- हां इसलिए तो पूछना बेहतर सोचा, पर बच्चे के अलावा पति का भी हक़ होता है.<br />
मैंने कहा- आप न तो मेरे बेटे हो … न ही पति हो. अब आपको जो अच्छा लगे करिए … बातें कर समय क्यों बर्बाद करना.<br />
उसने मुझसे कहा- बेटा तो नहीं, पर आज की रात तुम्हारा पति मैं ही हूँ.</p>
<p>और मुस्कुराते हुए मेरे चूचुकों को मुँह से लगा कर चूसने लगा. मेरे स्तनों से जैसे ही दूध की तेज पिचकारी छूटी, मुझे एक अनोखा अनुभव हुआ, जो इससे पहले कभी नहीं हुई थी. मैं एकदम से सिहर उठी और मैंने कांतिलाल को कसके पकड़ लिया. वो बारी बारी से मेरे दोनों स्तनों से दूध पीने लगा और मैं उसे बच्चे की तरह उसका सिर सहलाती रही.</p>
<p>जी भर मेरा स्तनपान करने के बाद अब वो मेरे पेट को चूमते हुए नाभि को प्यार करने लगा. </p>
<p>वो काफी देर तक मेरी नाभि में अपनी जीभ फिराता रहा. इसके बाद उसने मेरे वस्त्र को खींचते हुए मेरी टांगों के नीचे से निकाल कर मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया. उस रोशनी में बिल्कुल चमक सी रही थी और मेरा पूरा बदन एकदम चिकना दिख रहा था. योनि के बालों के हटवाने से ये सब और भी ज्यादा मस्त लग रहा था. मेरी योनि के बालों की भी इस तरह से छंटनी की गई थी कि कोई भी मर्द आकर्षित हो जाए. मेरे वस्त्र निकाल कर उसने मेरी टांगें पकड़ उन्हें फैला दिया और बहुत चाव से मेरी योनि देखते हुए एक हाथ फेरने लगा. उसके छूते ही मैं कांप सी गई, पर उसने मेरी एक जांघ पर हाथ रख बिस्तर पर दबा दिया था. </p>
<p>मेरी योनि की पंखुड़ियों को अपनी उंगलियों से फैला कर बोला- वाह कितनी प्यारी, सुंदर और कामुक है तुम्हारी चुत … और देखो यही तो है स्वर्ग जाने का रास्ता.</p>
<p>मैं उसकी बातें सुन हंस पड़ी, पर मन बहुत रोमांचित हुआ जा रहा था. उसने झुक कर मेरी योनि को चूमा, फिर योनि के इर्द गिर्द चूमते हुए जांघें कमर और टांगों को चूमने लगा. </p>
<p>मैं तो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि मन हो रहा था कि अपना पानी छोड़ दूं. हालत भी मेरी ऐसी हो चली थी कि अब या तब … अपने आप ही मैं अपने रस की फुहार छोड़ दूंगी. खुद को रोक पाना चुनौती सा लगने लगा था. पर अभी तो शुरूआत ही हुई थी. </p>
<p>कांतिलाल ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वो शायद ही मुझे आज रात सोने देगा. उसने मुझे अब पलट दिया और मैं पेट के बल हो गई. वो मेरी टांगों को चूमता हुआ चूतड़ तक पहुंच गया और किसी भूखे भेड़िये की तरह चूमता हुआ मेरी पीठ और पीठ से दोबारा चूतड़ों तक चूमता रहा. मैं अपने आप में सिकुड़ कर सीधा लेटी हुई थी और अपने बदन को अकड़ा लिया था. </p>
<p>कांतिलाल ने मेरे चूतड़ों को ऐसे चूमना और काटना शुरू कर दिया कि मेरी सिसकियां रोके नहीं रुक रही थीं. आज कांतिलाल मुझे पागल कर देने जैसी हरकतें कर रहा था. </p>
<p>उसने अब मेरे चूतड़ों को दोनों हाथों से फैलाना शुरू कर दिया और अपना मुँह बीच में डाल मेरी योनि जीभ से टटोलनी शुरू कर दी.</p>
<p>मैं सीधी लेटी थी और मेरी योनि बिस्तर की तरफ थी और मेरे बड़े और मोटे मांसल चूतड़ों के बीच मेरी योनि इतनी आसानी से मिलनी मुश्किल थी. वो पूरा प्रयास करके भी मेरी योनि तक जीभ नहीं पहुंचा पा रहा था. पर वो हार मानने वालों में से नहीं था. वो थोड़ा थोड़ा जीभ से टटोलता रहा और धीरे धीरे मुझे खींचते हुए मेरे चूतड़ उठाने लगा. कुछ मैंने भी मदद की और मैं घुटने मोड़ अपने चूतड़ पीछे से उठा दिए.</p>
<p>अब मेरी योनि खुलकर उसके सामने आ गई. उसने तुरंत अपना मुँह मेरी योनि से चिपका लिया और ऐसे चाटने लगा, जैसे मेरी योनि कोई खाने की वस्तु हो. मेरी तो योनि अब बिल्कुल ही चिपचिपी हो गई थी.</p>
<p>फिर उसने अपनी जीभ मेरी योनि के भीतर घुसाने का प्रयास शुरू कर दिया. इधर मैं मादक सिसकियां भरने लगी थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ किसे पकड़ूँ और किसे छोड़ूँ. आखिरकार मैं तकिए को पकड़ कराहने लगी. वो पूरी ताकत से मेरी चूतड़ों को फैला ज्यादा से ज्यादा अपनी जीभ भीतर घुसाने का प्रयास करने लगा. </p>
<p>मैं बस हाय हाय करते हुए उससे विनती करती हुई बोलने लगी- प्लीज कांतिलाल जी छोड़ दो … नहीं तो मैं झड़ जाऊंगी, ओह्ह मां मर जाऊंगी मैं.</p>
<p>पर वो मेरी एक नहीं सुन रहा था. मैं जितना उसे मना करती, वो उतना ही जोर और ताकत लगाता. अब मेरी बेचैनी इतनी बढ़ गई कि मैं पूरा जोर लगा पलटकर सीधी हो गई और वो मुझे भूखे शेर की तरह घूरने लगा.</p>
<p>मैं बोली- अब जल्दी से मेरे अन्दर आ जाओ … वरना मैं ऐसे ही झड़ जाऊंगी.<br />
उस पर उसने कहा- हां झड़ जाओ … यही तो मैं भी चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ कि तुम आज इतनी बार झड़ो कि पूरा बिस्तर गीला हो जाए. मुझे तुम्हें वैसे ही झड़ते हुए देखना है, जैसा पिछली बार देखा था. </p>
<p>अब मुझे अपनी औरतों वाली तरकीब अपनानी पड़ी. मैं बड़े कामुक और लुभावने अंदाज में बोली- प्लीज जानू इतना भी मत तड़पाओ. अपना बाबू मेरे अन्दर डालो ना … तुम्हारे बाबू पर मुझे झड़ना है.<br />
पर वो आज कुछ और ही चाहता था. उसने भी मेरे ही अंदाज में मुझे बोला- इतनी भी क्या जल्दी है जान … अभी तो पूरी रात बाकी है.<br />
इतना कह कर वो मेरी जांघें फैलाने लगा और फिर उसने झुक कर मेरी योनि से अपना मुँह चिपका लिया.</p>
<p>मेरी हालत अब इतनी बुरी हो गई थी कि मैं उसका सिर अपनी योनि से हटाने का प्रयास करने लगी. पर उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से उंगलियों में उंगलियां फंसा मुझे कसके पकड़ लिया. मैं अपनी जांघें भी चिपकाना चाहती थी, मगर उसका सिर बीच में था और अब मैं बहुत अधिक व्याकुल होने लगी थी. वो मेरी योनि को खाने की वस्तु की तरह चाट रहा था. मेरी योनि में ऐसा लग रहा था मानो कोई आग लगी हो, बराबर पानी रिस रहा था और अब या तब पानी छूट जाएगा ऐसा लग रहा था.</p>
<p>कांतिलाल उधर कभी मेरी योनि के दाने को जोर से काटता, तो मैं हाय हाय करती रह जाती. कभी योनि के दोनों पंखुड़ियों को होंठों से पकड़ खींचता, कभी योनि की छेद में अपनी जीभ घुसाने लगता.</p>
<p>अब मुझसे और नहीं रहा जा रहा था. मैंने उससे आखिरी बार कहा- प्लीज मुझे छोड़ दो … उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैं झड़ रही हूँ.</p>
<p>इतना कहते ही मैं अपने चूतड़ों को उचकाने लगी. तभी 8 -10 बूंदों जैसी तेज पिचकारी सी मेरी योनि से 3 बार निकली और मैं जोरों से अपना पूरा बदन ऐंठाने लगी.</p>
<p>पर कांतिलाल की ताकत के आगे मेरी एक नहीं चली और वो मुझे जोरों से पकड़ कर तेज़ी से मेरी योनि चाटने लगा. मैं झड़ गई थी और हल्का महसूस करने लगी थी.<br />
मैं अपने बदन को ढीला करते हुए उससे बोली- प्लीज कांतिलाल जी, अब रुक जाइए … थोड़ा सुस्ता लूँ मैं.<br />
पर उसने बोला- अभी तो शुरू हुआ है … इतनी जल्दी कैसे छोड़ दूं.</p>
<p>ये कह कर वो फिर से मेरी योनि चाटने में लग गया. मैं सुस्त पड़ गई थी, सो उसने मेरा हाथ छोड़ दिया. वो मेरी योनि में अपनी बीच वाली उंगली घुसा कर उसे तेज़ी से अन्दर बाहर करते हुए मजा ले रहा था और मेरी योनि के दाने को मुँह में भरते हुए चूसना और काटना शुरू कर दिया था. </p>
<p>मैं उससे काफी देर तक विनती करती रही, मगर वो कुछ सुनने के मूड में नहीं था. </p>
<p>उसके लगातार चाटने से थोड़ी ही देर में मेरी योनि में फिर से हलचल शुरू हो गई और मैं अपनी जांघें खुद चौड़ी कर उसे अपनी योनि से खेलने देने लगी. थोड़ी देर में वो मेरी योनि चाटते हुए हाथ ऊपर कर मेरे स्तनों को मसलने लगा. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था और मैं उसके हाथों को खुद मदद कर रही थी.</p>
<p>अचानक वो टटोलते हुए हाथ मेरे मुँह के पास ले आया और अपनी एक उंगली मेरे मुँह में डाल दी. मैं उसकी उंगली को लिंग की भांति चूसने लगी. अब उसकी एक उंगली मेरी योनि में चल रही थी दूसरी मेरे मुँह में. बहुत कामुक और उत्तेजना से भरा पल लग रहा था वो.</p>
<p>मुझे अभी शायद 5 से 7 मिनट हुए होंगे झड़े हुए कि मैं फिर से झड़ने को तैयार हो गई थी. मेरी बुरी आदत यही है कि मैं भले देर से झड़ती हूँ, मगर उसके बाद ज्यादा मेहनत नहीं लगती किसी मर्द को मुझे चरम सीमा पर पहुंचाने में. </p>
<p>थोड़ी देर उसकी जीभ मेरी योनि पर और क्या चली कि मैं कांपते हुए झड़ने लगी. फ़िर से उसी प्रकार पानी की धारा निकली और इस बार थोड़ी ज्यादा मात्रा में थी. कांतिलाल का मुँह पूरा भीग गया और बिस्तर भी गीला हो गया था. </p>
<p>अब मुझे भी अपने चूतड़ों के नीचे बहुत गीला गीला सा लगने लगा था, सो मैं वहां से हटना चाहती थी. मगर कांतिलाल मेरी योनि से मुँह हटाने का नाम ही नहीं ले रहा था. किसी तरह बहुत विनती करने के बाद वो मुझे छोड़ा और बगल में लेट गया और मुझे अपनी ओर खींच कर सीने से लगा लिया.</p>
<p>उसने मुझे अपना लिंग चूसने को इशारा किया. मैंने उसके कहने के अनुसार उसका जांघिया खींच कर निकाल दिया. उसका लिंग तनतना रहा था. मैंने सोचा कि ये तो पहले से ही तैयार है, इसे क्या चूसना. मगर मैं जानती थी कि कांतिलाल इतनी जल्दी नहीं झड़ेगा. सो मैंने उसके लिंग को पकड़ कर हाथ से ऊपर नीचे किया, तो सुपारा खुलकर निकल आया. आज भी उसका लिंग पहले की ही तरह ताकतवर और अच्छे खासे मोटाई और लंबाई में था.</p>
<p>मैंने झुक कर पहले तो सुपारे को थूक से गीला कर दिया और सुपाड़े पर जीभ फिरानी शुरू की. क्योंकि मर्दों का सुपारा ही सबसे अधिक संवेदनशील हिस्सा होता है. मैं जीभ फिराने के साथ साथ उसे अपने हाथ से हिला भी रही थी.</p>
<p>मेरे दिमाग में अब ये था कि कांतिलाल कैसे इतना उत्तेजित हो जाए कि वो सीधा संभोग करने लगे ताकि झड़कर वो भी सो जाए और मैं भी आराम कर सकूं. इसलिए मैं धीरे धीरे उसके लिंग को हिलाते हुए लिंग मुँह में लेने लगी. थोड़ी देर में मैंने उसे तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया और हाथ से भी तेजी से हिलाना शुरू कर दिया.</p>
<p>कांतिलाल आनन्द से भर गया और वो भी मजे से कराहने लगा. मैं जितना अधिक चूस रही थी, उतना ही अधिक उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी.</p>
<p>मेरा पैर कांतिलाल के पेट की तरफ था, सो उसने जोश में आकर मुझे खींचा और मेरे जांघें फैला कर मेरी योनि अपने मुँह के ऊपर ले आया. वो मेरी योनि को फिर से चाटने लगा. इधर मैं भी गर्म थी और वो भी उत्तेजित था. </p>
<p>इधर मैं उसका लिंग चूस रही थी और वो मेरी योनि चाट रहा था. वो मेरी योनि में उंगली डाल चाट रहा था और मैं एक हाथ से उसका लिंग हिला रही थी, दूसरे हाथ से उसके आंडों को सहला रही थी.</p>
<p>मुझे बहुत आनन्द आने लगा था और मैं उसके लिंग को पूरे जोश से चूस रही थी. थोड़ी ही देर में मैं फिर से झड़ने को तैयार थी. मेरी योनि के भीतर कहीं पानी का फव्वारा सा रुका पड़ा था. मैं अभी भी दिमाग से काम ले रही थी और कांतिलाल को इतना उत्तेजित कर देना चाहती थी कि वो संभोग के लिए तैयार हो जाए या झड़ जाए. सो मैंने मर्दों के दूसरे सबसे संवेदनशील हिस्से वाली जगह को सहलाना शुरू किया.</p>
<p>अब मैंने उसके आंडों और गुदा द्वार के बीच वाले हिस्से की नसों को हल्के हल्के दबाते हुए सहलाना शुरू कर दिया. इससे कांतिलाल इतना जोश में आ गया कि मेरी योनि ही चबाने की तरह चाटने लगा. </p>
<p>फिर क्या था मैं उसके लिंग को मुँह में भर कर आंडों को पकड़ बुत की तरह शांत हो गई और अपने चूतड़ों और कमर के हिस्सा को झटकते हुए झड़ने लगी. मेरी योनि से निकलता हुआ पानी कांतिलाल के मुँह से होता हुआ छाती तक आ गया. मैं ढीली होने लगी और मैंने उसके लिंग को चूसना बन्द कर दिया.</p>
<p>कांतिलाल यही चाहता था. उसने मेरे शांत होते ही मुझे अपने ऊपर से नीचे किया और फ़िर मुझे सीधा लिटा कर मेरी टांगें पकड़ अपनी ओर खींचता हुआ मुझे पूरा फैला दिया. उसका लिंग अब पत्थर के समान कठोर हो चुका था. </p>
<p>मैंने उससे विनती की- प्लीज कांतिलाल जी, थोड़ा रुक जाओ.<br />
पर वो कहां किसी की सुनने वाला था. वो मेरे ऊपर जांघों के बीच आकर बोला- रुकना क्या जान … अब तो और मजा आएगा.</p>
<p>मैं इस बार बहुत कमजोरी महसूस करने लगी थी और मुझमें उसे हल्के से भी रोकने की ताकत नहीं बची थी. </p>
<p>वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठों को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लिंग को मेरी योनि के द्वार की दिशा देने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के छेद में मुझे महसूस हुआ, तो मेरी सांस रुकती सी महसूस हुई. इसी वक्त पर उसने अपना लिंग का सुपाड़ा हल्के से धकेल कर मेरी योनि में घुसा दिया.</p>
<p>फिर उसने मेरे हाथों को हाथों से पकड़ कर बिस्तर के दोनों तरफ फैला कर दबा दिया. वो धीरे धीरे लिंग सरकाता हुआ मेरी योनि में घुसाने लगा. मेरी योनि पहले से इतनी गीली थी कि मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही थी. मगर मुझे अंदेशा हो रहा था कि कुछ दर्दनाक होने वाला है. उसका लिंग आधा घुस चुका था कि तभी उसने वापस सुपाड़े तक लिंग खींच लिया और पूरी ताकत लगा कर उसने ऐसा धक्का मारा कि मैं चीख पड़ी. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]<br />
कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-5</p>
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		<title>किरायेदार से चुद गई मैं</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:32:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ. मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं. मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. <a title="किरायेदार से चुद गई मैं" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/" aria-label="Continue reading किरायेदार से चुद गई मैं">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ.</p>
<p>मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं.</p>
<p>मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मैं अपनी इस चुदाई की कहानी में आपको बताऊंगी कि कैसे मैं अपने किरायेदार से अपनी चूत और गांड की आग को शांत किया. हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों लोग कैसे सेक्स कर लेते हैं. </p>
<p>अब मेरी शादी हो चुकी है. मेरे पति सर्विस करते हैं. मेरे अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है. मेरा घर काफी बड़ा है, जिस वजह से मेरे पति ने चार पोर्शन किराए पर दिए हुए हैं. सभी के घरों में सर्विस क्लास के लोग ही थे. किरायेदारों में पति लोग जॉब पर चले जाते थे और उनकी पत्नियां या तो घरों में ही होती थीं, या उनमें से कुछ अपने काम काज के चलते घर से बाहर निकल जाती थीं.</p>
<p>इस तरह से दिन में मेरा पूरा घर लगभग सुनसान ही रहता था. </p>
<p>वैसे मैं अपने सभी किरायेदारों से भी बहुत अच्छे से बात करती हूँ. लेकिन क्या करूं, जब मेरी चूत में खुजली होती है, तो अपने किरायेदार से ही चुदवाने की सोचने लगती हूँ. </p>
<p>मेरे पति वैसे तो बिस्तर में बहुत मस्त हैं. जब भी उनको मौका मिलता था, तो वो मेरी चुदाई कर लेते थे. लेकिन मुझे तो रोज सेक्स करने का मन करता था और मेरे पति ऑफिस में काम की वजह से मुझे सप्ताह में एक दो बार ही चोदते थे. जिससे मेरी चुदाई ठीक से नहीं हो पाती थी.</p>
<p>मैं सुबह से घर का सब काम कर लेती हूँ और जब घर के लोग जॉब करने चले जाते हैं, तो मैं घर में अकेली रह जाती हूँ. मैं दोपहर में अपने किरायेदारों से बात करती हूँ. उनमें से ज्यादातर स्त्रियां घर से जब निकल जाती थीं, तब मैं बड़ा ही बोर फील करने लगती थी.<br />
मेरी सहेलियों की तो मौज थी, क्योंकि वो लोग अपने घर पर ही अपने ब्वॉयफ्रेंड को या पड़ोसी को बुलाकर चुदवा लेती थीं.</p>
<p>मेरे किरायेदारों में एक लड़का भी रहता है. उसका नाम सुरेश है, वो अभी अकेला है. उसकी शादी नहीं हुई है. हम दोनों में जल्दी ही दोस्ती की तरह रिश्ता बन गया था. मैं उसे बहुत पसंद करने लगी थी. हम दोनों एक दूसरे से मजाक भी करते रहते थे. वैसे सुरेश अच्छा लड़का था.</p>
<p>चूंकि वो लड़का रात को जॉब करने जाता है, इसलिए मैं उससे दोपहर में बात कर लेती हूँ. मैं जब भी कपड़े सुखाने के लिए जाती थी, तो सुरेश भी मेरे पीछे आता था और हम दोनों लोग छत पर बातें कर लेते थे.</p>
<p>जब उससे मेरी बातचीत ज्यादा होने लगी, तो वो लड़का मुझे देख कर डबल मीनिंग वाली बातें बोलने लगा था. उसे मैंने ही छूट दे दी थी, इसलिए वो और भी ज्यादा बिंदास हो गया था. मुझे वो अपने लिए एक शिकार जैसा लगता था. मैं उसको अपने हुस्न की जाल में फंसाने की सोचने लगी.</p>
<p>सुरेश मुझे अच्छा लगने लगा था, तब भी मैं अभी उसको अपने घर भी नहीं बुला सकती थी. इसलिए मैं उससे बात करके ही मजे ले लेती थी. धीरे धीरे मेरा और सुरेश का रिश्ता प्यार में बदलने लगा. </p>
<p>वैसे तो मैं हमेशा सलवार सूट पहनती हूँ. जब बहुत गर्मी होती थी, तो मैं मैक्सी भी पहन लेती थी. मैक्सी में मेरी चूची और गांड का आकार बिल्कुल साफ़ दिखाई देता था. सुरेश मुझे मैक्सी में बहुत घूर घूर कर देखता था. सुरेश कभी कभी मुझसे बात करते करते मेरी मैक्सी के अन्दर देखता था, तो उसको मेरी चूची दिख जाती थी. वो मेरी चूचियों को देखने के लिए ही मुझसे करीब होकर बात करता था. मैं भी उसको अपनी तरफ आकर्षित करने लगी थी, तो मैं उसको अब सब कुछ पहले से ज्यादा दिखाती थी. वो भी मेरे पीछे पहले से ज्यादा आने लगा था. मैं ये जानती थी कि मेरा जिस्म सुरेश को पसंद है. </p>
<p>हम दोनों लोग कभी कभी एक दूसरे से बात नहीं कर पाते थे, तो एक दूसरे को देख कर स्माइल कर देते थे. हम दोनों की इस स्माइल में एक गहरा अर्थ छिपा होता था, जो बस मुझे या सुरेश को ही समझ आता था. </p>
<p>किरायदारों से किराया उगाहने के मुझे ही उनके पास जाना पड़ता था. सुरेश की सबसे अच्छी बात ये लगती थी कि वो समय से अपना किराया मुझे दे देता था, इसलिए मैं भी उसको किराये में छूट कर देती थी. मैं कभी कभी सुरेश से बात करने के लिए उसके रूम में भी चली जाती थी. मैं देखती थी कि वो अपना रूम भी अच्छे से रखता था और मेरे पति भी उससे खुश रहते थे. उससे हम लोगों को कोई शिकायत नहीं थी. </p>
<p>उस दिन घर में कोई नहीं था. दो किराएदार अपने परिवार के साथ बाहर गए हुए थे और एक महाशय अपनी ड्यूटी पर गए थे. उनकी बीवी भी दोपहर में किसी जगह पर काम करने जाती थी. उस दिन मुझे बड़ी चुदास चढ़ी थी. मैं नहाकर छत पर कपड़े सुखाने के लिए गयी. </p>
<p>मैं कपड़े सुखा रही थी, तभी सुरेश ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया. मैं उसको मना करने लगी, पर वो मान नहीं रहा था. उसने मुझसे बोला- भाभी, मैं आपके जिस्म का दीवाना हो गया हूँ. मुझे भी पता है कि आप मुझे पसंद करती हो.</p>
<p>उसकी ये बात सच थी कि मैं भी सुरेश को पसंद करने लगी थी. वो मुझे किस करने लगा. मैं खड़ी खड़ी उसे मना तो कर रही थी … पर मुझे उसका मुझे चूमना बड़ा ही अच्छा लग रहा था.</p>
<p>कुछ ही देर में मेरा विरोध खत्म हो गया और मैं उसे सहयोग करने लगी. अब उसने मुझे किस करते हुए मेरी चूची को दबा दिया, तो मैं भी एकदम से गर्म हो गयी. अब मैं भी उसको किस करने लगी. </p>
<p>कुछ देर मैंने उसको किस करने के बाद अपने से अलग कर दिया क्योंकि कभी कभी मेरे पड़ोस के लोग भी छत पर अपना कपड़े सुखाने के लिए आ जाते हैं. अगर कोई पड़ोसी मुझे मेरे किरायेदार के साथ किस करते हुए देख लेता, तो मेरी बदनामी हो जाती थी. </p>
<p>मैं अपने रूम में आ गई. मैं रूम में आकर सुरेश के साथ किस वाले पल को याद करने लगी और मेरी चूत गर्म होने लगी. मुझे भी सुरेश के साथ सेक्स करने का मन कर रहा था. मैं ये सब याद करते हुए लेटी थी कि तभी सुरेश मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा.</p>
<p>मैंने पूछा- कौन है?<br />
उधर से सुरेश की आवाज आई- मैं हूँ भाभी जी.<br />
मैंने दरवाजा खोला, तो सुरेश अंदर आकर मुझे किस करने लगा और मेरी चूची को दबाने लगा.<br />
मैं उससे बोली कि आप अपने रूम में जाओ … मैं अभी आपके रूम में ही आती हूँ.<br />
इस पर वो मान गया.</p>
<p>मैं कुछ देर के बाद सुरेश के रूम में चली गयी. मैंने देखा कि सुरेश इस वक्त केवल एक अंडरवियर में था और उसका लंड अंडरवियर में खड़ा था. वो मुझे खींच कर अपने रूम में बिस्तर पर ले गया और मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया. वो दौड़ कर अपने रूम का दरवाजा बंद करके वापस आ गया और मुझे किस करने लगा. </p>
<p>इस वक्त मैं एकदम फ्री थी. मेरे घर के सभी लोग जॉब करने गए थे और बाकी बचा एक किरायेदार और उसकी पत्नी भी जॉब पर गए हुए थे. </p>
<p>सुरेश ने मुझे किस करने के बाद मेरी मैक्सी को निकाल दिया और मैं ब्रा और पेंटी में हो गयी. उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूची को बहुत देर तक मसला. उसके बाद वो मेरी पेंटी को चाटने लगा. मेरी चूत से पानी निकल रहा था, जिससे मेरी पेंटी भीग गयी थी. </p>
<p>सुरेश अपना लंड पकड़ कर मुठ मारने लगा और उसके बाद उसने मेरी ब्रा और पेंटी निकाल दिया. अब मैं उसके सामने नंगी हो गयी थी. मेरे बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर वो एकदम से मचल गया. वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को मसलने लगा. उसके बाद वो मेरी दूसरी चूची को चूसने लगा और पहली को मसलने लगा. </p>
<p>इसके बाद वो नीचे को हुआ और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. मैं एकदम से चुदाई के लिए बेचैन हो गयी थी. वो मेरी चूत चाटने के बाद मेरी चूत में उंगली करने लगा. मेरी चूत में हल्के हल्के बाल थे, जिससे उसे मजा आ रहा था.</p>
<p>शुरूआती बातचीत के बाद हम दोनों लोग एक दूसरे से बात करते समय अडल्ट जोक और सेक्स के टॉपिक पर भी बात करते रहते थे, इसलिए हम दोनों लोग एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे. </p>
<p>वो मेरी चूत में उंगली करने के बाद मुझे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगा. लेकिन मैंने उसको लंड चूसने के लिए मना कर दिया. वो मन मार कर मान गया. उसके बाद वो मेरी चूत में दुबारा उंगली करने लगा. </p>
<p>मेरी चूत से पानी निकलने लगा था. मैं उत्तेजित होकर उसको अपनी चूत में और अन्दर तक उंगली करने के लिए बोल रही थी. वो जोर जोर से मेरी चूत में उंगली करने लगा था. मैं भी जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी थी. </p>
<p>उसके बाद तो हम दोनों चुदाई करने लिए एकदम रेडी हो गए. मैंने सुरेश से कहा कि अब देर न करो, पहले मेरी प्यास बुझा दो, बाद में खेल लेना. </p>
<p>सुरेश राजी हो गया और उसने मुझे चित्त लिटा दिया. वो मेरी चूत के सामने अपना लंड लेकर चुदाई के लिए तैयार हो गया. </p>
<p>मैंने चूत खोल दी थी तो उसने मेरी चूत की फांकों पर अपना लौड़ा टिका दिया. उसके लंड के स्पर्श से मेरी चूत एकदम से चुदने के लिए मचल उठी.</p>
<p>कुछ देर मेरी चूत पर अपना लंड रख कर वो अपना लंड रगड़ने लगा. उसके बाद मैंने उसे एक आंख मारते हुए चुदाई करने का इशारा किया, तो उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. उसके मोटे लंड के जाते ही मेरी एक सिसकारी निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ लेकिन मेरी चूत ने जल्द ही उसके लंड को सहन कर लिया.</p>
<p>उसके बाद वो मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. हम दोनों लोग सेक्स करने लगे.<br />
कुछ देर बाद उसने मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और मेरी चूत में अपना लंड अन्दर तक डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों मस्ती से सेक्स कर रहे थे और साथ में एक दूसरे को किस कर रहे थे. चुदाई के दौरान कभी वो मेरी चूची को मसल रहा था … कभी निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगता था.</p>
<p>धकापेल चुदाई होने लगी थी. दोपहर का समय था, इसलिए हम दोनों सेक्स करते करते पसीने से भीग गए थे. मुझे बेहद पसीना आ रहा था. मुझसे ज्यादा तो सुरेश को पसीना हो रहा था. चुदाई के पहले ही मेरी चूत काफी गर्म हो गयी थी और उसका लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था, जिससे मेरी चूत को अजीब सा अच्छा फील हो रहा था. </p>
<p>मुझे बहुत दिन के बाद एक दमदार लंड से चुदने के लिए मौका मिला था. सुरेश ने भी बहुत दिन से सेक्स नहीं किया था और वो बहुत जोर लगाकर मुझे चोद रहा था. जिससे हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था. </p>
<p>सुरेश के लंड से मेरी चूत की प्यास बुझ रही थी … उसका मोटा लंड मेरी चूत को दे दनादन चोद रहा था. </p>
<p>मैंने तो सुरेश से चुदते वक्त ही सोच लिया था कि अगर मेरे पति रोज मुझे नहीं चोदेंगे, तो मैं सुरेश के रूम में आकर सुरेश से चुदूंगी. </p>
<p>सुरेश अपना पूरा लंड अन्दर डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था, जिससे मुझे और भी मजा आ रहा था और साथ में मुझे शांति भी मिल रही थी. मैं गांड उठा उठा कर सुरेश से चुदवा रही थी.</p>
<p>करीब बीस मिनट बाद हम दोनों लोग सेक्स करते करते झड़ने लगे थे. हालांकि वो इस वक्त चरम पर आने को था, लेकिन तब भी वो मुझे पूरा जोर लगा कर चोद रहा था. मेरी सिसकारियां भी तेज होने लगी थीं.</p>
<p>तभी हम दोनों चुदाई करते हुए झड़ने लगे. हम दोनों ने बहुत देर तक सेक्स किया था. इसके बाद दोनों ने ही एक साथ अपना पानी छोड़ दिया था … जिससे दोनों को ही बड़ा मजा आया था.</p>
<p>उसके बाद थक कर मैं कुछ देर के लिए उसके साथ ही लेट गई. हम दोनों लोग की सांसें तेज चल रही थीं. हम दोनों इस वक्त चुदाई के बाद एकदम नंगे पड़े थे. कुछ देर बाद मैं उठी और मैंने अपनी ब्रा पेंटी पहनी, उसके बाद अपनी मैक्सी पहन कर अपने रूम में जाने लगी.</p>
<p>सुरेश ने मुझे रोक कर कुछ देर किस किया और उसके बाद मैं अपने रूम में आ गयी.</p>
<p>अब हम दोनों लोग रोज दोपहर को सेक्स करने लगे. मेरे पति और मेरे घर वाले सब लोग ऑफिस चले जाते थे, तो मैं सुरेश के रूम में जाकर चुदवा लेती थी. वो मुझे बहुत अच्छे से चोदता था. जब भी कभी मेरे पति की नाईट ड्यूटी होती थी, तो मैं पहले से ही सुरेश को बता देती थी. </p>
<p>इसके बाद उस रात को मैं उसके साथ खुल कर चुदाई का मजा ले लेती थी. उसके साथ अब मैं ओरल सेक्स भी करने लगी थी. मुझे उसका लंड चूसना अच्छा लगने लगा था. उसने मेरी गांड भी खोल दी थी. मेरी गांड का उद्घाटन कैसे हुआ, उसकी कहानी मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखूंगी.</p>
<p>हम दोनों आज भी कभी दोपहर में सेक्स करते हैं. सुरेश अभी भी मेरे घर में किराये पर रहता है. मुझे उसको छोड़ पाना अब दुश्वार सा लगता है.</p>
<p>आप सबको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. आप सब मेरी कहानी का फीडबैक जरूर दीजिए. मुझे मेल करके जरूर बताएं क्योंकि इससे मुझे अगली कहानी लिखने में बहुत सहारा मिलेगा. मैं आप सबके कीमती मेल का इंतजार करूंगी.<br />
आपको मैं अपनी अगली चुदाई की कहानी भी जल्द बताऊंगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:31:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम। मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी <a title="दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/" aria-label="Continue reading दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम।<br />
मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. </p>
<p>मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी है.</p>
<p>यह बात आज से करीब आठ महीने पहले की है. हमारी कॉलोनी में खेल का एक मैदान बना हुआ है. वहां पर मैं कई बार क्रिकेट खेलने के लिए चला जाया करता था. मेरी ही तरह वहां पर मेरी ही कॉलोनी और आस-पास के बच्चे भी क्रिकेट खेलने के लिए आ जाया करते थे. ऐसे ही खेल खेल में मेरी दोस्ती इमरान नाम के एक लड़के के साथ हो गई. </p>
<p>मैंने यहां पर उस लड़के का असली नाम नहीं लिखा है. मैंने उसका नाम बदल दिया है क्योंकि कहानी उसकी मॉम के बारे में है इसलिए मैं नहीं चाहता कि उसकी मॉम की पहचान किसी को पता चले.</p>
<p>उससे दोस्ती होने के बाद हम दोनों कई बार साथ में ही बाहर घूमने के लिए भी चले जाते थे. इसी तरह एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया. जब मैं उसके घर गया तो उसकी मां को देख कर मैं हैरान रह गया. उसकी मां की उम्र लगभग 42 साल के करीब रही होगी. मगर चेहरे पर ऐसी चमक थी कि मैं हैरान था.</p>
<p>वो देखने में एक 30 या 35 साल की भाभी के जैसी दिख रही थी. उसकी मां का नाम तबस्सुम था. यहां पर मैंने उसकी मां का नाम भी बदल दिया है. उसका फीगर करीब 36-32-39 का था. मुझे उसके फीगर का नाप बाद में पता चला था जब मैंने उसके साथ सेक्स किया था. मगर मैं आपकी जानकारी के लिए उसके फीगर का नाप अभी बता दे रहा हूं ताकि आपको पता लग सके कि वो दिखने में कैसी रही होगी. </p>
<p>तो जब मैं उसके घर पर गया तो मेरी नजर उसकी मां से नहीं हट रही थी. मैं इस तरह से उसकी मां के बारे में नहीं सोचना चाहता था क्योंकि इमरान मेरा दोस्त था लेकिन फिर भी उसकी मां के बदन में बहुत ही गजब का आकर्षण था जो बार-बार मुझे उसके बारे में सेक्स के लिए सोचने पर मजबूर कर रहा था. </p>
<p>वैसे तो उसकी मां ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उसी पर नज़र रखे हुए हूं लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी. वो भी कई बार मेरी तरफ देख लेती थी क्योंकि हम दोनों आमने-सामने ही बैठे हुए थे. </p>
<p>फिर उसकी मां के साथ मेरी भी कुछ बात हुई. बातों ही बातों में पता चला कि उसके पापा बैंक में काम करते हैं. वो दिन में घर पर नहीं रहते हैं. फिर कुछ देर के बाद उसकी मॉम से बात करने के बाद इमरान और मैं ऊपर छत पर खेलने के लिए चले गये. लेकिन खेल में मेरा मन नहीं लग रहा था. मैं उसकी मां के बारे में ही सोच रहा था. उसकी मां के गोरे बदन के बारे में सोच कर मेरे लंड में हलचल सी होने लगी थी.</p>
<p>उस दिन घर जाने के बाद मैंने उसकी मां के बारे में सोच कर मुठ मारी तब जाकर मेरे लंड को शांति मिली.</p>
<p>अब तो रोज मेरा मन इमरान के घर जाने के लिए करने लगा था. मैं उसके घर पर जाने के लिए इमरान को उकसाता रहता था ताकि उसकी मां को देख सकूं. मैं उसकी मां को पटाने के चक्कर में था. उसके ख्याल मेरे मन से निकल ही नहीं रहे थे.</p>
<p>जब भी मैं इमरान के घर जाता था तो मेरी नजर उसकी मां के बदन को ऊपर से नीचे तक पूरा नाप लेती थी. कभी उसकी चूचियों को घूरने लगता था तो कभी उसकी गांड को. मैं सोच रहा था कि जब ये बाहर से देखने में इतनी मस्त माल लग रही है तो अंदर से तो ये बिल्कुल कयामत ही लगती होगी, मैं उसकी मां के नंगे बदन को देखने के लिए तरस जाता था लेकिन अभी मुझे ऐसी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी कि मैं उसकी मां को नंगी देख सकूं.</p>
<p>उसकी माँ भी मेरी तरफ देखती तो थी लेकिन उसकी तरफ से मुझे अभी कुछ इस तरह का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा था जिससे कि मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे साथ कुछ करना चाहती है या नहीं. इसीलिए मैं उसके मन को टटोलने में भी लगा हुआ था.</p>
<p>मैं हमेशा तबस्सुम आंटी के आस-पास ही मंडराता रहता था. कभी कभी तो मैं उसको बहाने से छू भी लेता था. वैसे मुझे जहां तक लग रहा था कि वो भी मेरे मन की इच्छा को जान चुकी थी लेकिन कुछ कह नहीं रही थी.</p>
<p>मैं जब भी उसको छूने की कोशिश करता तो ऐसे बर्ताव करता था कि वह सब मैंने जानबूझ कर नहीं किया है और गलती से ही उसको टच हो गया है. मेरी हरकतों पर वो भी हल्के से मुस्करा कर बात को टाल देती थी.</p>
<p>इस तरह से आंटी के लिए मेरी प्यास हर दिन बढ़ती ही जा रही थी. मैं उसको नंगी करके चोदने की फिराक में था लेकिन पता नहीं था कि वो दिन कब नसीब होने वाला है. </p>
<p>एक दिन की बात है जब मैं इमरान के घर गया हुआ था. खेल के बीच में ही इमराने के किसी दोस्त का फोन आ गया और वो मुझे घर पर उसकी मां के साथ ही छोड़ कर चला गया.</p>
<p>उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं उसकी मां के साथ घर पर अकेला ही था. मेरा मन था कि जाकर आंटी के चूचे दबा दूं लेकिन अभी मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर मैं इमरान के कमरे में चला गया. </p>
<p>मैंने उसके कम्प्यूटर में टाइम पास करना शुरू किया. ऐसे ही देखते देखते मुझे उसके कम्प्यूटर में ब्लू फिल्म मिल गई. मैंने देखा कि आंटी अपने किसी काम में बिजी थी तो मैंने सोचा कि इमरान के आने तक ब्लू फिल्म देख लूं. वैसे भी मैंने बहुत दिनों से ब्लू फिल्म नहीं देखी थी. मैं उसके रूम का दरवाजा बंद करके ब्लू फिल्म देखने लगा. मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैं अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगा. फिर एकदम से आंटी दरवाजा खोल कर अंदर आ गई और उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म देखते हुए अपने लंड को हिलाते हुए देख लिया. उनके हाथ में चाय का कप था.<br />
उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर ऐसे रिएक्ट किया जैसे वो मेरी इस हरकत पर गुस्सा हो गई हो; वो चाय को रख कर वापस चली गई.</p>
<p>मैंने सोचा कि इससे पहले कि बात इमरान तक पहुंचे मुझे कुछ करना चाहिए. अगर आंटी ने मेरी यह हरकत इमरान को बता दी तो शायद मैं इमरान के घर पर भी नहीं आ पाऊँगा उसके बाद। इसलिए मैं आंटी को सॉरी बोलने के लिए चला गया.</p>
<p>आंटी रसोई में कुछ काम कर रही थी. जब उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा तो वो नॉर्मल ही लगी.<br />
फिर मैंने हिम्मत करके खुद ही कहा- आंटी मुझसे गलती हो गई. मुझे ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी.<br />
आंटी बोली- कोई बात नहीं इस उम्र में लड़के ऐसे ही काम किया करते हैं.</p>
<p>मैं आंटी की बात सुन कर हैरान था इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने आंटी की गांड को ताड़ना शुरू कर दिया और मेरा लंड वहीं पर ही खड़ा होने लगा. फिर पता नहीं क्या हुआ कि मैंने आंटी की गांड को दबाने के लिए हाथ बढ़ाए लेकिन मैं डर के मारे रुक गया कहीं बात बिगड़ न जाये.</p>
<p>फिर आंटी ने कहा- तुम यहां पर क्या कर रहे हो, बाहर हॉल में चले जाओ.<br />
आंटी मेरे लंड को देख रही थी. आंटी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर बोली- मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूं.</p>
<p>मैं निराश होकर बाहर चला गया.</p>
<p>फिर कुछ देर के बाद आंटी चाय लेकर बाहर आ गई. वो मेरे सामने जब चाय का कप रखने के लिए झुकी तो मैंने आंटी की चूचियों को देख लिया. मेरे मन में एक आह्ह सी निकल गई. आंटी की चूचियों की दरार बहुत मस्त थी. आंटी ने भी मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था. फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी. </p>
<p>चाय पीते हुए आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?<br />
मैंने आंटी को कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो. अगर मैं आपका पति होता तो … कहते हुए मैं रुक गया.<br />
आंटी बोली- क्या?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं।<br />
वो बोली- बता दो, कोई बात है तो।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बहुत प्यार करता और आपको किसी बात की कमी नहीं होने देता। </p>
<p>आंटी बोली- तुम्हें मैं इतनी पसंद हूँ क्या?<br />
मैंने कहा- हाँ आंटी!<br />
कहते हुए मैं आंटी के पास ही आकर बैठ गया. </p>
<p>आंटी बोली- मेरे पति तो मुझमें बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं लेते हैं. वो कभी मेरी तारीफ नहीं करते।<br />
मैंने कहा- मैं तो आपको बहुत पसंद करता हूँ.</p>
<p>कहते हुए मैंने आंटी की जांघ पर हाथ रख दिया. आंटी ने मेरा हाथ हटा दिया और कहने लगी- मैं तुम्हारे दोस्त की मां हूँ. तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए.<br />
लेकिन अब मुझसे नहीं रुका जा रहा था, मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और उनको किस करने की कोशिश करने लगा.</p>
<p>आंटी मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी और कहने लगी- तुम उम्र में बहुत छोटे हो.<br />
मैंने कहा- मैं कुछ नहीं जानता आंटी. मैं तो आपको बहुत प्यार करता हूं. मैं बहुत दिनों से आपको ये बात कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पा रहा था.<br />
आंटी मेरी बांहों में कसमसा रही थी. उनकी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गये थे. मैंने आंटी का मुंह अपनी तरफ किया और आंटी को किस करने लगा.  </p>
<p>कुछ देर तो वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन फिर थोड़ी सी देर के बाद वो भी मेरी चुम्मी का जवाब देने लगी. मैंने अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया. मैं उनको जोर से किस करने लगा. फिर मेरे हाथ उनकी छाती पर उनके बूब्स को टटोलने लगे.</p>
<p>लेकिन तभी इमरान की गाड़ी की आवाज आई और हम दोनों अलग हो गये.<br />
आंटी की आंखों में मुझे मायूसी साफ दिखाई दे रही थी. मुझे भी मजबूरी में आंटी से अलग होकर अपने घर वापस जाना पड़ा।</p>
<p>उसके बाद हम दोनों को मिलने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग गया.<br />
आंटी ने मुझे फोन पर ये बता दिया था कि इमरान और उसके पापा दो दिन के लिए बाहर जायेंगे. इसलिए हम दोनों उसी दिन का इंतजार कर रहे थे. बहुत बेचैन रहा मैं इस दौरान आंटी से मिलने के लिए.</p>
<p>फिर जिस दिन इमरान और उसके पापा चले गये तो मैं आंटी से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंच गया. मुझे देखते ही आंटी भी खुश हो गई. </p>
<p>हम दोनों ने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मैं जाते ही आंटी को बांहों में लेकर किस करने लगा. दोनों को ही मजा आने लगा. आंटी भी एंजॉय कर रही थी और साथ में हल्की सिसकारियां भी ले रही थी. </p>
<p>फिर मैंने आंटी को वहीं रसोई के पास ही डिनर टेबल पर लिटा दिया और उनकी कुर्ती को निकाल दिया. मैं उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा. फिर उनके पेट को किस करने लगा. उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैं उनको किस करते हुए अपने कपड़े भी उतारने लगा. मैंने अपने पूरे कपड़े निकाल दिये. फिर मैं दोबारा से आंटी को किस करने लगा. आंटी लगातार ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां अपने मुंह से निकाल रही थी.</p>
<p>मैंने उसके बाद आंटी की सलवार भी निकाल दी और आंटी की जांघों को चाटने लगा. </p>
<p>आंटी की पैंटी को चूसने के बाद मैंने आंटी की पैंटी भी निकाल कर अलग कर दी. उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे.<br />
मैं वहीं पर घुटनों के बल बैठ गया और आंटी की चूत को जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>आंटी मचलने लगी, वे बोली- क्या कर रहा है, इतनी गंदी जगह को इतनी मस्ती से क्यूं चाट रहा है.<br />
मैंने कहा- आंटी मुझे तो ये गंदी जगह पसंद है.<br />
कह कर मैंने आंटी की चूत में जीभ को अंदर डाल दिया तो आंटी और तेजी के साथ सिसकारियां लेने लगी.<br />
वो कहने लगी- मेरे पति कभी ऐसा नहीं करते. आज मुझे पहली बार इतना मजा आ रहा है. मैंने कभी अपनी चूत में इतना मजा महसूस नहीं किया था. </p>
<p>उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया और आंटी के हाथ में अपना लंड दे दिया. आंटी पहले से ही काफी गर्म हो गई थी. आंटी ने मेरे लंड को तुरंत हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुट्ठ मारने लगी. वो उसको प्यार से सहला रही थी.</p>
<p>मुझे भी मस्ती सी चढ़ी जा रही थी. मैंने आंटी को अपना लंड मुंह में लेने के लिए कहा तो वो कहने लगी कि मुझसे लंड मुंह में नहीं लिया जायेगा. फिर मेरे बहुत कहने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भी ले लिया.</p>
<p>दो मिनट तक आंटी ने लंड चूसा और फिर बाहर निकाल लिया. उसके बाद वो कहने लगी कि बस इससे ज्यादा मैं नहीं कर पाऊंगी. मैं समझ गया कि आंटी को उनके पति ने लंड चूसने की आदत नहीं लगाई है. अगर वो अपने पति का लंड भी चूसती तो मेरे लंड को बड़े ही मजे से चूस लेती. फिर मैंने आंटी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया और अपने लंड को आंटी की चूत के बीच में लगा दिया. </p>
<p>लंड को चूत के बीच में लगा कर मैंने धक्का मारा तो आंटी की सिसकारी निकल गई.</p>
<p>फिर मैंने आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. आंटी की चूत को चोदते हुए मुझे मजा आने लगा और आंटी के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.<br />
आंटी बोली- मैंने पूरे एक साल बाद लंड का स्वाद चूत में लिया है.</p>
<p>मैं आंटी को पूरा मजा देते हुए उनकी चूत को चोदने लगा. आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी. मेरे धक्कों के साथ आंटी के चूचे भी तेजी के साथ हिल रहे थे. आंटी मस्त हो गई थी.</p>
<p>फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और आंटी की चूत को दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.<br />
मैंने आंटी से पूछा- मैं अपने माल को कहां पर निकालूं?<br />
तो आंटी कहने लगी- मेरी चूत में ही निकाल दो. मैं तुम्हारे माल को अपनी चूत में ही लेना चाहती हूं.</p>
<p>फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा. मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया. आज पहली बार मेरे लंड से इतना सारा माल निकला था. मैंने आंटी की चूत में कई पिचकारी मारी और फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>उसके बाद आंटी ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गये. वहां जाकर हम दोनों ने साथ में ही स्नान किया और आंटी की चूत को मैंने अपने हाथों से ही साफ किया. आंटी ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर धोया.</p>
<p>उस दिन आंटी ने फिर मुझे खाना खिलाया और फिर रात को दोबारा आने के लिए कह दिया. इस तरह से दो दिन तक मैं और आंटी चुदाई का मजा लेते रहे.<br />
आंटी भी मुझसे खुश हो गई और बोली- अब तुम जब चाहो मेरे घर पर आकर मेरी चूत को चोद सकते हो. अब हमें जब भी मौका मिलता है हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं. </p>
<p>दोस्तो, आपको मेरे दोस्त की अम्मी की चुदाई कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल के जरिये जरूर बताना. मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा.<br />
[email protected]</p>
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