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	<title>Nangi Ladki &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>Nangi Ladki &#8211; Kahani18</title>
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		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की</title>
		<link>https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Desi Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Desi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली. दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर <a title="देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की" class="read-more" href="https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/" aria-label="Continue reading देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली.<br />
<span id="more-332"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर रेलवे के पेपर की तैयारी कर रहा हूं. मेरे परिवार में हम दो भाई और माँ-पापा है। माँ हॉउस वाइफ है जबकि पापा किसान हैं। हमारे पास 30 बीघा जमीन है जो कि बिल्कुल नहर के पास है.</p>
<p>मेरी उम्र अभी 22 वर्ष की है। मेरी हाइट पांच फीट और दस इंच है. शरीर से पूरा हट्टा कट्टा हूं. दिखने में भी ठीक हूं. मेरे लंड की लम्बाई साढ़े पांच इंच की है लेकिन उसकी मोटाई काफी है.</p>
<p>मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूं. कई बार मैं इसकी गर्म और देसी बुर चोदन कहानी पढ़ कर लंड को भी हिला लेता हूं. तो मैंने सोचा कि अपने जीवन की एक घटना आप लोगों के साथ शेयर करूं. जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो आज से करीबन 2 साल पहले की है.</p>
<p>मेरा घर गांव में पड़ता है जहां पर मेरे घर के पास से ही एक नहर निकलती है। गर्मियों के दिनों में हम नहर में सुबह शाम को नहाने के लिए अक्सर जाया करते हैं। दोपहर में नहर में लड़के नहीं नहाते तो हमारे पड़ोस की लड़कियां दोपहर में नहा लेती थी क्योंकि लड़के उस टाइम वहां पर नहीं होते थे।</p>
<p>इसी तरह एक दिन मैं घर पर बैठा बैठा बोर हो रहा था तो मैंने नहर में नहा कर आने की सोची।<br />
दोपहर के समय में घर वाले सो रहे होते थे तो मैं नहर पर नहाने आ गया।</p>
<p>अभी नहाते हुए मुझे करीब 10 मिनट ही हुई होंगी कि हमारे पड़ोस की देसी लड़की वहां पर नहाने के लिए आ गई. उस लड़की का नाम मोनिका (काल्पनिक) है. रंग से गोरी है और कमर पतली है बिल्कुल. उसके बूब्स बड़े संतरे के आकार के थे (अब तो मेरे हाथ में ही नहीं आते हैं इतने बड़े हो गए हैं, जो कि मेरा ही कमाल है) उसके साइज के नाप का तो मुझे पता नहीं।</p>
<p>वो जब नहर पर आई तो मैं नहर में तैराकी कर रहा था। वो नहर पर आकर अपने कपड़ों में ही नहाने लगी क्योंकि गांव में देसी लड़कियां सलवार कमीज में ही नहाती थी नहर में।<br />
वो मुझे पानी में डुबकी लगा कर तैरता हुआ देख कर मुझसे बोली- मेरे को भी तैरना सिखा दो।</p>
<p>मैं उसकी बात पर थोड़ा हैरान सा हुआ क्योंकि हम दोनों कभी इसके पहले इतने खुल कर बात नहीं की थी और वो भी ऐसे अकेले में. आज से पहले कभी भी मैंने उसे चुदाई वाली नजरों से नहीं देखा था।</p>
<p>मैं उसके कहने पर उसको तैराकी सिखाने के लिए राजी हो गया. वो मेरे करीब आई और पानी में गोता लगाने लगी.</p>
<p>मैंने उसको अपने हाथों में थाम लिया ताकि वो नीचे डूबे नहीं. मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और वो तैरने के लिए हाथ-पैर मार रही थी। उसी बीच मेरा हाथ उसकी छाती पर चला गया तो उसने कुछ नहीं कहा। मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग रहा था जो कि बड़े आकार के संतरे के साइज के थे.</p>
<p>अब मेरे अंदर कामुकता जागने लगी, मैंने इस देसी कमसिन जवान लड़की के बुर चोदन का मौक़ा देखा तो मैं धीरे-धीरे बहाने से उसके बूब्स को जानबूझ कर छूने और दबाने की कोशिश करने लगा. लेकिन वो इस तरह से व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हो ही न रहा हो. इसलिए मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी.</p>
<p>फिर मैंने उसके चूचों को अच्छी तरह से हाथों में भर लिया तब भी उसने कुछ नहीं कहा. अब मेरा लंड मेरे अंडरवियर में पूरा तन चुका था. लेकिन वो पानी के अंदर था. पानी के अंदर भी मुझे अपने लंड की गर्मी महसूस हो रही थी.</p>
<p>मैंने मोनिका को खड़ी होने के लिए कह दिया तो वो मेरे सामने ही खड़ी हो गई. मैं उसको सिखाने के बहाने से उसकी गांड को लंड से छूने लगा. मेरा लंड तन कर झटके दे रहा था. उसकी गीली गांड में मेरे लंड का टच होना हर पल मेरे अंदर हवस को बढ़ाये जा रहा था.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे करके उसकी गांड पर अपने लंड को अच्छी तरह से सटाने लगा. मगर वो कुछ भी नहीं बोल रही थी.</p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा. न तो वो कुछ कह रही थी और न ही मैं कुछ कह रहा था. फिर वो मुझसे छूट कर पानी से बाहर जाने लगी. मेरे अंदर तो चुदास भर चुकी थी. मैंने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो मना करके चली गई.</p>
<p>मेरे मन में डर भी था कि कहीं ये कुछ घर पर जा कर बता ना दे तो मेरी भी गांड फट रही थी।</p>
<p>उसके बाद मैं घर पर आ गया और मोनिका के साथ हुई उस घटना को याद कर करके मैंने दो बार मुठ मार डाली.</p>
<p>उस दिन तो मैं बस यही सोचता रहा कि किसी भी तरह बस उसकी बुर चोदने को मिल जाये. यही सोचते हुए उस रात मुझे नींद भी नहीं आई. रात को सपने में भी मेरा वीर्यपात हो गया.</p>
<p>अगले दिन संडे था और हमारे पड़ोस में हमारे घर पर ही टीवी था और संडे को फ़िल्म भी आती थी। अगले दिन वो हमारे घर पर टीवी देखने के लिये करीब 11 बजे मेरे घर आ गई। मेरे घर वाले टीवी नहीं देखते थे तो माँ और पापा दूसरे कमरे में सो गए थे।</p>
<p>चूंकि राजस्थान में गर्मी बहुत पड़ती है तो मेरे घरवाले शाम के तीन बजे के बाद ही सोकर उठते थे. टीवी वाले कमरे में उसके और मेरे अलावा कोई और नहीं था. मैं भी टीवी देख रहा था और साथ में बीच बीच में उसे भी। कुछ देर बाद मैं यह सुनिश्चित करने के लिए उठा कि मां और पापा सो रहे हों. मैंने माँ पापा को धीरे से देखा तो वो दोनों नींद में सो रहे थे।</p>
<p>उसके बाद मैं उसके बिल्कुल पास आ कर बैठ गया और धीरे धीरे एक हाथ से उसकी कमर पर फिराने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं अपने हाथ को उसकी कमर से होते हुए उसके चूचों पर ले गया. उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से आगे देखने लगी.</p>
<p>उसको शायद अच्छा लग रहा था. वरना कोई भी लड़की इस तरह से एकदम से शरीर को छूने नहीं देती है.</p>
<p>जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि वो भी बुर चोदन करवाने की तैयारी करके ही आई है तो मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया. उसके चूचों को दबा दिया. तब भी उसने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब तो मुझसे रुका ही नहीं गया. मैंने उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी देसी बुर को छू लिया. उसने एक बार के लिए मेरा हाथ हटाया. मैं थोड़ा सा हिचक गया कि कहीं मैं जल्दी तो नहीं कर रहा हूं लेकिन दोस्तो बहुत बुरा हाल हो रहा था.</p>
<p>मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने दोबारा से कोशिश की और फिर से उसकी बुर पर हाथ फेरा तो मेरे हाथ पर उसकी बुर का स्पर्श हुआ. मुझे पता चल गया कि उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसकी सलवार में हाथ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसने अपनी सलवार के नाड़े को कस कर बांधा हुआ था इसलिए मुझे हाथ अंदर घुसाने में बहुत मुश्किल हो रही थी.</p>
<p>काफी मशक्कत के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के अंदर जा घुसा. मैंने उसकी बुर को टटोला तो उसकी बुर चोदन के लिए गर्म थी. उसमें से हल्का सा गीलापन भी छूटने लगा था. फिर मैंन उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. मैंने अपनी उंगली सीधी उसकी बुर में डाल दी उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.</p>
<p>अब चुदाई का पूरा माहौल तैयार हो गया था. मैंने उससे कहा कि वो ऐसे ही बैठी रहे. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मां और पापा बीच में उठ कर न आ जायें इसलिए मैं दोबारा से चेक करने के लिए उनको देखने के लिए गया. वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे.</p>
<p>जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि उसने अपनी सलवार को घुटनों तक नीचे कर लिया था. मैंने उसके पास बैठते ही उसकी बुर सहलाना शुरू कर दिया. मेरा हाथ उसकी बुर को रगड़ रहा था. दूसरे हाथ से मैं उसके बूब्स को दबा रहा था.</p>
<p>मेरा लंड अब मेरी पैंट में तन कर दर्द करने लगा था. मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया और उसके हाथ को पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया.<br />
उसने लंड को छोड़ दिया.</p>
<p>मैंने धीरे से कहा कि लंड को हाथ में पकड़ लो लेकिन उसने मना कर दिया.</p>
<p>फिर मैंने जबरदस्ती उसके हाथ को अपने लंड पर रखवा लिया और उसके हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. कुछ देर के बाद उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई. वो खुद ही मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>मैं उसको किस करने लगा.</p>
<p>अब बस रुका नहीं जा रहा था और मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया. मैंने उसकी बुर को हाथ से रगड़ा और अपना लंड उसकी बुर के मुंह पर लगा दिया और उसके ऊपर लेट गया. मेरा लंड उसकी देसी बुर में अंदर घुसते हुए रास्ता बनाने लगा तो वो दर्द के मारे गर्दन को इधर उधर पटकने लगी.</p>
<p>उसकी बुर अभी कुंवारी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो उसकी आंखों से पानी आने लगा. लेकिन मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने एक झटका दिया और लंड उसकी बुर में उतार दिया.</p>
<p>वो मुझसे लिपट गई. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … लंड उसकी बुर में चला गया था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो उसकी बुर से हल्का सा खून भी बाहर आ रहा था. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसकी बुर में हल्के से लंड को चलाने लगा. वो अभी भी तड़प रही थी. मगर कुछ देर के बाद वो नॉर्मल होती चली गई.</p>
<p>उसकी कुंवारी बुर पहली बार चुद रही थी और उसमें से जो खून बाहर निकला था उसके साथ में उसका कामरस भी मिल गया था. इस वजह से खून और पानी का वो मिश्रण बन जाने से मेरा लंड अंदर जाने में अब कोई परेशानी नहीं आ रही थी.</p>
<p>चूंकि मैं भी काफी उत्तेजित था तो मेरे लंड से भी काफी चिपचिपा पदार्थ निकल चुका था. दोनों तरफ से ही बराबर चिकनाई हो गई थी और चुदाई मक्खन के माफिक चल रही थी. अब मैं उसकी बुर की चुदाई आराम से करने लगा. बीच-बीच में मैं उसकी कमीज को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को भी मसल रहा था.</p>
<p>मसलने के कारण उसकी देसी चूची टमाटर के जैसे लाल हो गये थे. लंड को बुर में लेते हुए अब उसको भी चुदाई का मजा आने लगा था. उसके मुंह से धीरे धीरे कामुक आवाजें निकल रही थीं और मेरा लंड गप्प गप्प करके उसकी बुर में जा रहा था. उसकी बुर काफी गीली हो गई थी.</p>
<p>दस मिनट तक मैं उसका बुर चोदन करता रहा. फिर मैंने उसको उठा दिया और उसको डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा. लेकिन वो मना करने लगी. उसके बाद मैंने फिर से उसको अपने नीचे ही लिटा लिया और ऐसे ही उसकी बुर की चुदाई करने लगा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में कस कर पकड़ने लगी और उसकी बुर मेरे लंड पर कसने लगी. शायद वो उस समय झड़ रही थी. उसका पानी निकलने से चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी और कुछ ही धक्कों के बाद फिर मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों शांत हो गये. लेकिन मेरा मन अभी नहीं भरा था. मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसके होंठों को चूसता रहा. मेरी गांड नंगी थी और वो मेरे नीचे पड़ी हुई थी. उसके होंठों को चूसते हुए मेरा लंड दस मिनट के बाद फिर से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैंने दोबारा से बुर चुदाई करने के लिए कहा तो वो मना करने लगी. मैंने उसको बहुत मनाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. फिर हम दोनों उठ गये. लेकिन मेरा लंड अभी तना हुआ था.</p>
<p>मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा लेकिन उसने लंड चूसने से भी मना कर दिया. फिर मेरा मायूस सा चेहरा देख कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरे लंड की मुठ मारने लगी.<br />
उसके कोमल हाथों में जाकर मेरा लंड फिर से तनतना गया और मुझे मजा आने लगा. वो मेरे लंड की मुठ मारती रही और मैं उसके चूचे दबाता रहा. उसकी चूमता और काटता रहा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद फिर से मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी मार दी. उसका हाथ मेरे वीर्य से सन गया. मैंने उसको एक गंदा सा कपड़ा दिया और उसने अपना हाथ साफ कर लिया. फिर मैंने भी अपने लंड को पोंछ दिया और पैंट पहन ली.</p>
<p>मगर वो कहने लगी कि उसको अभी भी बुर में दर्द हो रहा है.<br />
फिर मैंने धीरे से उठ कर उसके लिए एक दर्द की गोली लाकर दी. गोली खा कर वो अपने घर चली गई.</p>
<p>उसके बाद तो लगभग हर रोज ही हम चुदाई के मौके ढूंढने लगे. फिर तो जब भी मौका लगता था मैं उसकी बुर मार लेता था. आज उस घटना को इतना वक्त बीत चुका है और वो अभी भी मुझसे अपनी बुर चोदन करवाती है. मैं भी जमकर उसकी बुर चोदता हूं. मैंने दबा-दबा कर उसके चूचों को काफी बड़ा कर दिया है.</p>
<p>अगली देसी कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने मोनिका की छोटी बहन की बुर चोदन करके उसका भी उद्घाटन किया. आप कमेंट करके बताना कि आपको मेरी चुदाई की देसी कहानी कैसी लगी.<br />
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		<title>मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:48:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर <a title="मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी</p>
<p>जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।</p>
<p>तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।<br />
एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।</p>
<p>चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।<br />
मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।</p>
<p>चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।</p>
<p>मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।</p>
<p>उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।</p>
<p>अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।</p>
<p>उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।<br />
मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।</p>
<p>मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?<br />
मैंने उससे पूछा।<br />
वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!<br />
वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।</p>
<p>मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।<br />
वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?<br />
मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।</p>
<p>दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।</p>
<p>मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’<br />
अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।</p>
<p>उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।<br />
मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?<br />
वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।<br />
मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।</p>
<p>मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?<br />
मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!</p>
<p>मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’<br />
बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।</p>
<p>उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।<br />
रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।</p>
<p>इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।<br />
वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।</p>
<p>मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।<br />
जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।<br />
वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।</p>
<p>हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.<br />
वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।<br />
मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।</p>
<p>मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।<br />
मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।</p>
<p>मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.<br />
और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।</p>
<p>मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।</p>
<p>एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?<br />
वो बोली- हाँ पापा?<br />
मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?<br />
दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?<br />
मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?</p>
<p>वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।</p>
<p>उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।</p>
<p>मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।</p>
<p>मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?<br />
मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?</p>
<p>मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।<br />
तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.</p>
<p>बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।<br />
19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।<br />
मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।<br />
वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!<br />
वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।</p>
<p>उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।</p>
<p>वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया। मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।</p>
<p>मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?<br />
वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।</p>
<p>मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।</p>
<p>तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.<br />
और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।<br />
पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।</p>
<p>फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।<br />
मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।<br />
मैं तो खुशी से उछल पड़ा।</p>
<p>जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।</p>
<p>मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!<br />
कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।<br />
वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।<br />
मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।</p>
<p>मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।<br />
फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।</p>
<p>मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।<br />
वो बोली- जी पापा?<br />
मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।<br />
वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।</p>
<p>जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।</p>
<p>मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।</p>
<p>तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।</p>
<p>बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।</p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?<br />
वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।<br />
मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?<br />
वो बोली- पता नहीं पापा।</p>
<p>मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।</p>
<p>मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।</p>
<p>और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!<br />
उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।</p>
<p>वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!<br />
मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।<br />
वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।</p>
<p>मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।<br />
एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।</p>
<p>और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।<br />
उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।<br />
मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!</p>
<p>मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.</p>
<p>मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।<br />
जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.</p>
<p>मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।</p>
<p>उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।</p>
<p>थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?<br />
वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।</p>
<p>वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।</p>
<p>मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।<br />
उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।</p>
<p>मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!</p>
<p>मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।<br />
फिर बाहर आई।<br />
मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।<br />
तब कहीं वो सहज हुई।</p>
<p>शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।<br />
मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.</p>
<p>मेरी बीवी ने उसकी अच्छी सेवा की अपनी बेटी की तरह, मगर उसे ये नहीं पता था कि उसका पति और दिव्या का नकली बाप ही उसकी इस हालात का जिम्मेदार है।</p>
<p>[email protected]</p>
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		<title>सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था. आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और <a title="सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/" aria-label="Continue reading सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था.</p>
<p>आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.<br />
मेरी उम्र 42 वर्ष है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बेटा है. </p>
<p>वो सर्दियों के दिन थे, एक दिन शाम को मैं मरी पत्नी और मेरी भांजी बैठे हुए बातें कर रहे थे. हम तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे और अपनी टांगों पर कम्बल डाला हुआ था. अचानक मेरा पैर उसकी टांगों के बीच में चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा था. मैंने सोचा कि यह मेरी पत्नी के पैर हैं, लेकिन कुछ टाइम बाद मुझे मालूम हुआ मेरा पैर तो मेरी भांजी की टांगों से टकरा रहा था और वो मेरी इस बात का कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी थी.</p>
<p>बस दोस्तो, यहीं से मेरे मन में उसके लिए विचार बदल गए. मैंने उसकी जांघ पर अपने पैसे से सहलाना शुरू किया, तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. उसके कुछ वक्त बाद हम सोने की तैयारी करने लगे. मेरी पत्नी के बाजू में मेरा बेटा सोया हुआ था.</p>
<p>मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी पत्नी बहुत ही खुले विचारों वाली है और वह मुझसे सेक्सी बातें खुलकर करती है. दूसरों को चुदवाने के बारे में भी वह कहती है कि आप किसी को चोदोगे, तो मैं आपको देख कर बहुत मजे लूंगी. </p>
<p>इसी बीच मैंने मजाक मैं अपनी पत्नी और अपनी भांजी से कहा- यार, सर्दी ज्यादा ही नहीं बहुत ज्यादा है … कोई हमें भी पास सुला लो. </p>
<p>इस पर मेरी पत्नी ने मजाक में कह दिया- मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो.<br />
तभी मेरी भांजी ने कहा- मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं. आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ … मेरे पास आ जाओ.</p>
<p>देर ना करते हुए मैं तुरंत अपनी भांजी के बेड पर आ गया और उसके साथ लेट गया. मैंने लेटते ही कमरे की लाइट बंद कर दी. मेरी बीवी समझ चुकी थी कि मैं टीनएज गर्ल के कामुक बदन का मजा लूंगा.</p>
<p>करीब 10-15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरी भांजी को नींद आ गई है, वह मेरी तरफ पीठ किए हुए थे. तभी मैंने उसके पीछे से सटकर उसके ऊपर हाथ रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया. अब मैं उसके बिल्कुल बराबर में पीछे से सट कर लेट गया. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके चूतड़ों की दरार में लग रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मेरी भांजी के चूतड़ों पर स्पर्श कर रहा था. वह अब भी कोई विरोध नहीं कर रही थी.</p>
<p>तभी मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मम्मों पर लगाया. आह … बिल्कुल गोल गोल उभार लिए मस्त बूब्स थे. दोस्तों अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी. मैंने एक हाथ उसके सूट के अन्दर डालकर उसके नंगे मम्मों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसका कोई विरोध ना देख कर मैंने उसको सीधा कर लिया. </p>
<p>वह अब सीधी लेटी हुई थी. मैंने धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती को बिल्कुल ऊपर कर दिया और दोनों चूचे नंगे कर दिए. दोनों मम्मों को नंगे करने के बाद मैंने धीरे से अपने होंठ उसके एक चूचे पर लगाए और उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.</p>
<p>उसके दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं. मैं जान चुका था कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है. उसकी सांसें भी तेज हो चुकी थीं. </p>
<p>कुछ देर उसके मम्मों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार में सरका दिया और उसकी चूत पर रखा, तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भीगी हुई थी. मैं समझ गया कि यह बिल्कुल गर्म हो चुकी है.<br />
मैंने सोचा कि यह अभी कुंवारी है, किसी से चुदी नहीं है … यहां पर पूरा खेल नहीं हो पाएगा. मेरा बेटा भी इसी कमरे में सोया हुआ था. बराबर में दूसरा कमरा खाली था. मैंने कुछ टाइम उसकी चूत में उंगली से सहलाया.</p>
<p>जब मैंने महसूस किया कि अब यह पूरी गर्म हो चुकी है, तो मैंने धीरे से उसके कान में कहा- चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं.<br />
मेरे इतना कहते ही मेरी भानजी उठकर बराबर वाले कमरे में पहुंच गई. पीछे से मैं भी कमरे में पहुंच गया. दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने नीचे बिस्तर लगा दिया. </p>
<p>इसी बीच मैंने उस कमरे से दूसरे कमरे में खुलने वाली खिड़की को हल्का सा खोल दिया ताकि मेरी पत्नी भी हमारी चुदाई का आनन्द ले सके. दूसरे कमरे में जाते ही मैंने उसको नीचे लगे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उसने और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे. मेरी भांजी मेरे लंड से चुदने के लिए बिल्कुल बेकरार हो रही थी.</p>
<p>अपनी बहन की बेटी को नंगी करने के बाद मैंने देखा कि वह बहुत ही कामुक और सुंदर नजर आ रही थी. उसके चूचे बिल्कुल गोल और कड़े थे. उसकी चूत बहुत उभार लिए हुए थी. फूली हुई बुर देख कर मजा आ गया.</p>
<p>मैं उसको देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने तुरंत ही उसको चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी.<br />
अब मैंने अपनी भांजी से पूछा- कैसा लग रहा है?<br />
उसने कहा- मामा जी बहुत मजा आ रहा है … आगे करो ना कुछ. </p>
<p>कुछ समय तक उसके मम्मों को चूसने के बाद मैं नीचे आया और उसकी टांगें फैलाकर देखा, तो उभार लिए हुए उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैंने उसकी चूत की दरारों को दोनों उंगलियों से फैला कर चौड़ा किया, तो मजा आ गया.</p>
<p>क्या सेक्सी सीन था … मैं बयान नहीं कर सकता. बिल्कुल गुलाबी चूत थी. उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के रोएं आने शुरू हुए थे. एकदम फूली हुई चूत मस्त पाव रोटी सी दिख रही थी. मैं अपनी बेटी समान भानजी की चूत को देखता ही रह गया. मेरे मन में आ रहा था एकदम से इसकी चूत में अपना लंड पेल दूं, लेकिन मैं जानता था कि अभी यह बिना चुदी हुई है … इसलिए बहुत प्यार से चोदना पड़ेगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मेरा लंड भी 7 इंच लंबा और काफी मोटा तगड़ा लंड है. मैं जानता था कि इसकी कमसिन चुत की ओपनिंग बहुत प्यार से करना पड़ेगी. ये इतना बड़ा लंड आराम से नहीं ले पाएगी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत की दरार को उंगली से फैला कर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.<br />
मेरी जीभ उसकी कुंवारी बुर में लगते ही वह उछल पड़ी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को कुछ अन्दर तक डाल कर चाटना शुरू किया. उसकी चूत पहले ही पानी से भीगी हुई थी … बिल्कुल नमकीन पानी था जिसको मैं चाट कर मस्त हो रहा था. चूत से कोरेपन की भीनी खुशबू आ रही थी. पूरी तरह गीली चूत मुझको चाटने को मिल रही थी. मैं मस्ती में भर कर उसकी चूत को चाट रहा था. वह गांड उछाल उछाल कर सिसकारियां ले रही थी. वो अपने एक हाथ को मेरे सिर पर रख कर अपनी चूत पर मेरे मुँह को दबाए जा रही थी.</p>
<p>तभी उसने मुझसे कहा- मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है … जल्दी से कुछ करो ना!</p>
<p>कुछ टाइम उसकी चूत चाटने के बाद मैंने कहा- मेरी प्यारी भांजी, मेरे लंड को भी तो चाट कर मजा दो ना?</p>
<p>मेरे इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड पानी से भीग चुका था, लेकिन वो पूरे लंड को चाट कर साफ कर चुकी थी. वो आइसक्रीम की तरह मेरे लंड को चाट रही थी. </p>
<p>करीब 5 मिनट मेरे लंड को चाटने के बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और कहा- मामा जी, बहुत मोटा है, मेरा मुँह दुख रहा है … अब नीचे कुछ करो ना प्लीज. </p>
<p>मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया. उसकी टांगों के बीच में बैठकर अपनी हाथ की उंगलियों से उसकी चूत की दरार को फैलाया. अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और हल्के से धक्का लगा दिया.<br />
इस धक्के से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था. </p>
<p>तब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- हां मामाजी हल्का सा दर्द महसूस हो रहा है.<br />
मैंने उसको समझाया- हल्का दर्द होगा, उसके बाद मजा आने लगेगा. तुम चीखना नहीं.<br />
उसने सहमति से सर हिला दिया.</p>
<p>मैंने उसके एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने शुरू किया और अपने लंड के दबाव को कुछ आगे बढ़ाना शुरू किया. मेरा लंड का कुछ और हिस्सा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था, उसको थोड़ी पीड़ा हो रही थी.<br />
फिर मैंने अपने लंड को वहीं रोक कर हल्का हल्का आगे पीछे करना शुरू किया, तो उसका दर्द भी कुछ कम हुआ और उसको मजा आने लगा. अब वह नीचे से कभी-कभी अपनी गांड को उछाल कर मजा ले रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक जोरदार ठाप दे मारी, तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा समा गया. इसी के साथ मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. इस कारण उसकी हल्की सी कराहट निकल सकी. लेकिन मेरा लंड पूरा मेरी सगी बहन की बेटी की चूत में समा चुका था और उसकी सील टूट चुकी थी.</p>
<p>मैं उसकी चूत में अपना लंड फंसा कर उसके ऊपर लेटा रहा और उसके मम्मों को बार बार मुँह में लेकर चूसने लगा. वह कुछ नॉर्मल हुई, तो मैंने अपने लंड को थोड़ा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. </p>
<p>अब उसकी मादक सिसकारियां चालू हो गईं, मैं समझ चुका था कि अब मेरी भांजी चुदाई का मजा ले रही है. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी. </p>
<p>अब मैं और मेरी भांजी चुदाई का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. मैंने अपने आपको रोकते हुए अपना लंड चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का हल्का खून लगा हुआ था. मैंने उसको साफ किया और उसकी चूत को भी साफ किया. फिर दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी.</p>
<p>इसी बीच मैंने खुली खिड़की में देखा तो मेरी पत्नी हम दोनों की चुदाई देख रही थी और मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं और मेरी भांजी दोनों पूरे मजे में डूबे रहे थे. मैं अपनी भांजी से धीरे-धीरे बातें कर रहा था और पूछ रहा था- कैसा लग रहा है?<br />
वह चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और बातों का मजा ले रही थी. वो मुझसे खुलकर बातें कर रही थी. लंड चुत चुदाई के शब्द खुल कर बोल रही थी. वो हॉट चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. </p>
<p>इसी बीच मेरी भांजी ने मुझसे कहा- मामाजी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है … और मुझे कुछ हो रहा है.<br />
मैं समझ चुका था कि अभी ये झड़ने वाली है. </p>
<p>तभी उसने मुझको कस कर जकड़ लिया और कहा- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामा जी … प्लीज प्लीज … </p>
<p>तभी वह शांत पड़ गई. मैं समझ गया कि यह झड़ गई. उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.</p>
<p>फिर मैंने उसको कपड़े पहनाकर दूसरे कमरे में जाने दिया और अपनी पत्नी को इसी कमरे में बुलाकर उसकी चुदाई के मजे लेने की सोचने लगा … क्योंकि मेरे लंड का पानी अभी निकला ही नहीं था. </p>
<p>मेरी पत्नी आते ही नंगी हो गई और उसने सारे कपड़े निकाल दिए. उसने मुझे बताया कि मैं आपकी सारी चुदाई छुपकर शुरू से देख रही हूं. देखो मेरी चूत में कितना पानी है.<br />
मैंने हाथ से देखा, तो मेरी पत्नी की चूत बिल्कुल भीगी हुई थी.</p>
<p>मैंने तुरंत ही अपनी पत्नी को चित लिटाया और उसकी चूत को चाट कर पानी को पी गया. फिर अपना खड़ा लंड डालकर उसकी चुदाई की और उसकी चूत में ही झड़ गया. अब मैं भी शांत हो चुका था.</p>
<p>तभी मेरी भांजी भी उसी कमरे में आ गई. उसने मेरे झड़े हुए लंड को चूस लिया. मेरी बीवी ने उसको बिस्तर पर ले लिया. इसके बाद अगला राउंड मैंने भांजी की चुदाई से शुरू करके बीवी की चूत तक का किया. इस थ्री-सम सेक्स में बहुत मजा आया.</p>
<p>दोस्तो, उसके बाद मैं मेरी पत्नी और मेरी भांजी हम रोजाना मिलकर चुदाई का मजा लेने लगे. यह सिलसिला अभी तक बरकरार है. अभी तक मेरी भांजी की शादी नहीं हुई है और हम तीनों साथ साथ ही चुदाई का मजा ले रहे हैं. </p>
<p>आपको मेरी यह टीनएज गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है.<br />
[email protected]</p>
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		<title>मामा की लड़की के साथ सुहागरात</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/mama-ki-ladki-suhagrat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 07:21:58 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम नमन है मेरी उम्र अभी 22 साल है और मैं अपने माता-पिता व बड़ी बहन के साथ पटेल नगर दिल्ली में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैंने अपने मामा की बेटी की चुदाई की थी। चलिए अब मैं आपको सेक्स से भरपूर कहानी सुनाता हूँ। मेरे मामा एक बैंक में <a title="मामा की लड़की के साथ सुहागरात" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/mama-ki-ladki-suhagrat/" aria-label="Continue reading मामा की लड़की के साथ सुहागरात">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम नमन है मेरी उम्र अभी 22 साल है और मैं अपने माता-पिता व बड़ी बहन के साथ पटेल नगर दिल्ली में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैंने अपने मामा की बेटी की चुदाई की थी। चलिए अब मैं आपको सेक्स से भरपूर कहानी सुनाता हूँ।</p>
<p>मेरे मामा एक बैंक में जॉब करते हैं और नोएडा में रहते हैं। मामी हाउस वाइफ है, उनके साथ उनकी बेटी, जिसका नाम मृणालिनी है, रहती है जो अभी कुछ दिन पहले ही 18 साल की हो गई। उसका रंग गोरा है और शरीर पतला है। मेरे मामा का एक बेटा भी है जो फिलहाल लंदन में अपनी पढ़ाई कर रहा है।</p>
<p>जो घटना मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ ये अभी 15 दिन पहले की ही घटना है। जब मामी ने मुझे नोएडा बुलाया क्योंकि उन्हें 2 दिन के लिए किसी काम से अपने मायके जाना था। जब भी वो कहीं जाती हैं तो मुझे मृणालिनी के पास रहना पड़ता है।</p>
<p>मैं मामा के घर पहुंचा तो मामी मुझे घर के दरवाजे पे ही मिल गई। उन्होंने मुझे बताया कि मृणालिनी नहा रही है तुम बैठो, वो आकर चाय बना देगी।<br />
इतना बोल के मामी चली गई।</p>
<p>मैं अंदर जाकर बाहर वाले कमरे में बैड पर लेट गया। अभी 5 मिनट ही हुए थे कि अंदर वाले कमरे में मुझे मृणालिनी दिखाई दी जो कि सिर्फ एक तौलिया लपेटे थी। मेरे कमरे की लाइट बंद थी पर उसके कमरे में लाइट जल रही थी। उसके बाद जो हुआ, वो मेरी कल्पना से भी परे था।</p>
<p>मृणालिनी ने अचानक से अपने कमसिन बदन से तौलिया हटा दिया. अपनी बहन को पूरी नंगी देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि मैंने जीवन में कभी किसी लड़की को ऐसे नग्न हालत में नहीं देखा था।</p>
<p>उसकी लंबाई 5 फिट 6 इंच की है। उसकी फिगर सही तो नहीं बता सकता पर पर उसकी चूचियाँ 32″ की व पेट से वो बहुत पतली सी है. और हाँ उसकी गांड बड़ी जानदार लग रही थी जो लगभग 34 या 36 की होगी।</p>
<p>वो इस बात से अनजान थी कि कोई उसे बिना कपड़ों के देख रहा है। वहीं से मुझे दिखा कि उसकी चूत बड़ी खूबसूरत लग रही थी। देखकर ही पता चल रहा था कि वो अभी उसके बाल साफ करके आई है। मेरा लंड उसकी चूची, गांड व चूत को देखकर बेकाबू हो रहा था। वो शायद अपनी ब्रा व अंडरवियर ढूंढ रही थी।</p>
<p>अभी 2 से 3 मिनट ही हुए थे कि उसे कुछ शक हुआ जैसे घर पे कोई है। मेरे बारे में उसे नहीं पता था। उसने जल्दबाजी में तौलिया लपेटा और उस कमरे में आ गई जिसमें मैं लेटा था।<br />
जैसे ही उसने लाइट का स्विच ऑन किया, वो हैरानी से मुझे देखकर बोली- भैया आप कब आये? और अंदर कैसे आये?<br />
मैंने उसे बताया- जब मामी जी यहीं थी, तब आ गया था। </p>
<p>उसके बाद उसने दूसरा सवाल पूछा- आपने कुछ देखा तो नहीं?<br />
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- कुछ मतलब?<br />
वो घबराती हुई बोली- मैं अंदर कमरे में थी बिना कपड़ों के?<br />
मैंने कहा- हां, वो तो सब देखा मैंने … पर मैं करता भी क्या … क्योंकि एक अप्सरा मेरे सामने इस अवस्था में थी तो चाहकर भी आँखें नहीं हटा सका।</p>
<p>ये सब सुनकर वो घबरा के वहीं सोफे पे बैठ गई। उसके चेहरे को देखकर ही पता चल रहा था कि उसके हृदय की धड़कनें उसके काबू में नहीं थी।<br />
कुछ देर चुपचाप बैठी रही.<br />
तब मैंने पूछा- क्या हुआ?<br />
तो मेरी बहन बोली- ये सब नहीं होना चाहिए था।<br />
तब मैंने कहा- इसमें ना तुम्हारी गलती ना मेरी। फिर इसमें डरने वाली कौन सी बात है?</p>
<p>फिर पता नहीं उसके दिमाग में क्या आया, उसने अपने दोनों पैर उठाके सामने वाली मेज पर रख दिये। वो ठीक मेरे सामने थी जिसके कारण मुझे उसकी चूत साफ-2 दिखाई दे रही थी।<br />
मैंने उसे कहा- ये क्या कर रही है?<br />
हमारे बीच पहले कभी ऐसी कोई बातचीत भी नहीं हुई थी. इसलिए मैं संभलने की कोशिश कर रहा था।</p>
<p>वो बोली- आपने सब कुछ देख ही लिया फिर छुपाने का क्या फायदा? आप जी भर के देखो।</p>
<p>उसकी गोरी-2 व नंगी जांघ देखकर साथ में चूत देखकर मेरा लंड दुबारा से हरकत में आ गया। मेरी बेचैनी बढ़ने लगी थी, मेरा हाथ अपने आप उसे सहलाने लगा।<br />
ये सब देखकर वो बोली- आप क्या करने लगे?<br />
मैं बोला- जिसके सामने एक अप्सरा आधी नंगी बैठी हो वो कैसे अपने होश संभाले?<br />
तब उसने कहा- ये अप्सरा तो अब पूरी नंगी भी हो सकती है क्योंकि आपने सब देख ही लिया। लेकिन पहले मुझे आपका वो देखना है जिसे आप हाथ से सहला रहे हो।</p>
<p>मुझे और क्या चाहिए था … जल्दी से मैंने अपनी पैंट उतारी, फिर अंडरवियर उतारकर अपना लंड उसके सामने कर दिया। वो उसे देखकर हैरानी से बोली- ये इतना बड़ा होता है क्या?<br />
मैंने कहा- हां, ये इतना ही बड़ा होता है।<br />
वो बोली- क्या मैं इसे छू सकती हूं?</p>
<p>मैंने जैसे ही हां कहा, वो सोफे से खड़ी हो गई वो तौलिया पूरा निकालकर मेरे पास आकर अपने दोनों हाथों से मेरा औजार पकड़ लिया।<br />
मदहोशी में मेरी आँखें बंद हो गई।</p>
<p>तभी मेरे नाक में एक अजीब सी खुशबू महसूस हुई जो मेरी बहन के नंगे जिस्म की ही महक थी। मृणालिनी मेरे लंड को सहला रही थी. मैंने भी अपना हाथ उसकी कमर पे रखा, फिर धीरे-2 उसे नीचे लाते हुए उसकी गांड पे हाथ फिराया तो ऐसा लगा जैसे मक्खन पे हाथ चल रहा हो।</p>
<p>उसके बाद मैं अपनी जीभ उसकी नंगी जांघ पे फिराने लगा.<br />
वो बोली- भैया रहने दो ना प्लीज़।<br />
मैं कहाँ रुकने वाला था, आगे बढ़ते हुए मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पे लगा दी।</p>
<p>इतना कुछ वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। जबकि उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया था। वो पास में खड़ी होकर मेरा लंड चूस रही थी जबकि मैं लेटे-2 उसकी चूत को चाट रहा था।</p>
<p>काफी देर तक हम दोनों इसी हालत में एक दूसरे के साथ मजे लेते रहे. तभी मुझे लगा कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है तो मैंने उसे बताया पर वो तो ना जाने किस दुनिया में थी।</p>
<p>तभी मेरे लन्ड से लावा फूट पड़ा। कुछ तो उसके मुँह में ही चला गया. फिर उसने जैसे ही अपना मुँह हटाया तो मेरे वीर्य से उसका सारा चेहरा गन्दा हो गया।<br />
वो अजीब से मुँह बनाती हुई बोली- भैया ये क्या है?<br />
मैंने उसे बताया- ये वीर्य है.<br />
तो बोली- आपने पहले क्यों नहीं बताया?<br />
मैंने उसे कहा- बताया था पर तुमने सुना नहीं।</p>
<p>वो बोली- ठीक है, अब आपको मेरा पानी पीना पड़ेगा।<br />
मैंने कहा- नहीं, आज तक मैंने भी नहीं पीया, आज रहने दो, बाद में देखेंगे। </p>
<p>पहले वो अपना चेहरा धो के आई। जब वो बिल्कुल नंगी बाहर जा रही थी तो उनकी गांड देखकर मेरा लन्ड दुबारा से मस्ती में आने लगा।</p>
<p>अब वो वापिस आकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और अपनी जीभ मेरे मुँह में दे दी। यह हम दोनों के ही जीवन का पहला चुम्बन था। मैं उसकी तो वो मेरी जीभ को चूसने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर किस करने के बाद मैं उसकी चूचियों पे जीभ फिराने लगा।</p>
<p>बारी-2 से दोनों चूचियों को चाटने के बाद वो उठी और घूम कर दुबारा से मेरे लन्ड को मुँह में ले लिया. अब उसकी गोरी, मोटी गांड व बिना बालों की चूत मेरे मुँह से बस थोड़ी दूर थी. तो मैंने भी लपक कर उसकी चूत को पूरा मुँह में ले लिया।</p>
<p>लगभग 10 मिनट तक दोनों इसी हालत में रहे तो मैंने कहा- इस बार पूरा रस मुँह में ही लेना. मैं भी तुम्हारा रस मुँह में ही ले लूंगा।<br />
वो पहले तो मना करती रही फिर मान गई।</p>
<p>कुछ ही देर में मुझे झटके लगने लगे व उसकी चूत से भी कुछ बहने लगा. दोनों ने एक दूसरे का पानी पिया और अलग हो गये।<br />
मैंने उसे कहा- कोई आ सकता है इसलिए बाकी काम रात में करेंगे।<br />
तो वो मान गई और हम दोनों ने अपना मुँह धोकर कपड़े पहन लिए।</p>
<p>दिन में जब वो किचन में खाना बना रही थी तो मैंने उसके गांड पे अपना लंड लगा दिया.<br />
वो बोली- भैया रहने दो ना, रात में जो मर्जी कर लेना पर अभी काम करने दो।<br />
मैंने एक लिप किस किया और जाकर टीवी देखने लगा।</p>
<p>रात में उसने खाना बनाया और दोनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया।</p>
<p>उसके बाद दोनों एक ही बैड पे लेट गये. सर्दियां शुरू हो गई थी इसलिए दोनों ने एक कम्बल ले लिया। लेकिन अचानक से वो उठ कर दूसरे रूम में चली गई. वहां से जब वो वापिस आई तो उसने एक सेक्सी सा लाल रंग का गाउन पहना हुआ था।<br />
मेरी ममेरी बहन मेरे पास लेट गई तो मैंने कहा- आज तो हमारी सुहागरात है.<br />
तो उसने शर्मा के अपना चेहरा अपने हाथों में छिपा लिया।</p>
<p>मैंने उसका गाउन उतारा तो देखा कि उसने काले रंग की जालीदार ब्रा व पैंटी पहनी हुई थी जिसमें वो बहुत सेक्सी व हॉट लग रही थी।</p>
<p>उसके बाद उसने मेरे कपड़े खुद ही उतार दिए. मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना था जिसकी वजह से पैंट निकलते ही मैं पूरा नंगा हो गया।</p>
<p>उसने मेरे लंड को सीधा अपने मुँह में ले लिया उसके गुलाबी होठों ने मुझे मदहोश ही कर दिया। मैंने उसकी ब्रा व पैंटी निकालकर फेंक दी और उसे कहा- मेरे ऊपर आओ.<br />
तो हम दोनों 69 में आ गए.</p>
<p>उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी जो मुझे और भी पागल कर रही थी। काफी देर तक इसी हालत में रहने के बाद मृणालिनी को उठने को कहा और उसे अपने लन्ड पर बैठने को कहा। वो मेरे पेट पर लेट गई। मेरा लन्ड उसकी चूत को छू कर मस्ती से झूम रहा था। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये और हम दोनों एक दूसरे को होठों को व जीभ को चूसने लगे।</p>
<p>4 से 5 मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और कहा- नीचे आओ, आज तुम्हारी नन्ही सी चूत का उदघाटन करूँगा।<br />
मेरी बहन नीचे बिस्तर पर लेट गई। मृणालिनी डरी हुई थी, बोल रही थी- भाई, मैंने सुना है कि जब पहली बार चुदाई होती है तो बहुत दर्द होता है.<br />
तो मैंने उसे दिलासा दी- मैं आराम से करूँगा, तू जाकर कोई क्रीम ले आ।</p>
<p>उसके बाद मृणालिनी ने बहुत सारी क्रीम मेरे लन्ड पे लगाई मैंने उसकी चूत पे लगाई। उसे लिटाकर मैं ऊपर आ गया और मृणालिनी को कहा- दर्द होगा पर बर्दाश्त कर लेना, प्लीज़ चिल्लाना मत।<br />
अब मैंने उसकी एक टांग उठा के अपना लन्ड उसकी चूत पे सेट किया। पहला धक्का मारा तो वो अंदर नहीं गया साइड में फिसल गया। कई बार की कोशिश के बाद आखिर में लौड़े का आगे वाला भाग अंदर चला गया पर मृणालिनी दर्द से बिलबिला उठी।</p>
<p>मैं रुक गया क्योंकि वो बहुत नाजुक सी लड़की है। कुछ आराम मिला तो एक धक्का और मारा तो मेरा आधा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुई अंदर समा गया पर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर सकी और चिल्ला कर रोने लगी।<br />
फिर वो बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … भैया, प्लीज़ बाहर निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है, बाकी कल कर लेना।</p>
<p>मैं रुक गया और उसकी चूचियों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा। जिसमें ध्यान बटने के कारण उसका दर्द कुछ कम हुआ। अब मैंने एक आखिरी धक्का मारा तो मेरा पूरा लन्ड उसकी छोटी से चूत में समा गया. पर वो तो जैसे बेहोश सी हो गई। जिसके बाद मैं डर गया।</p>
<p>पर जल्दी ही वो होश में आ गई और मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने लगी। मैं कहाँ मानने वाला था, मैं कभी उसके होंठ चूसता कभी उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ चूसता।<br />
लगभग 5 मिनट के बाद मुझे लगा कि वो अपनी गांड हिला रही है. मैं समझ गया कि अब मृणालिनी को दर्द नहीं हो रहा।</p>
<p>मैंने धीरे-2 धक्के मारने शुरू किए तो वो भी मेरे साथ मस्ती में झूमने लगी। काफी देर तक चुदाई करने के बाद जब मुझे लगा कि छूटने वाला है तो उसकी चूत से निकालकर उसकी मुँह में दे दिया. तभी मेरा पानी छूट गया जिसे उसने पूरा पी लिया।<br />
अब उसकी बारी थी वो भी उठकर मेरे मुँह के ऊपर बैठ गई। मैं उसकी भावनाओं को समझ गया औऱ उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी इतने में ही वो भी अकड़कर ढीली हो गई।</p>
<p>उस रात हमने अपनी सुहागरात में 3 बार चुदाई की। एक बार तो मैं मृणालिनी की गांड में लन्ड देना चाहता था पर वो नहीं मानी बोली- भाई आज चूत का दर्द झेल लूं, अगली बार गांड का ही उदघाटन करवा लूंगी आप से ही।</p>
<p>उसके बाद हम दोनों सो गये।</p>
<p>अगले दिन फिर से दिन में यही चुदाई का खेल खेला जिसके बारे में अगली कहानी में बताऊंगा।</p>
<p>मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी मेरी ईमेल आईडी पे मेल करके जरूर बताना।<br />
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