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	<title>Mastram Sex Story &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:40:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई. दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, <a title="पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई.<br />
<span id="more-353"></span></p>
<p>दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, इसी कारण मेरी शरीर गठीला है। मैं हरियाणा के पानीपत का रहने वाला हूं.</p>
<p>मैं अपनी पहली कहानी इस साईट पर लिख रहा हूं। मेरे लंड का साइज तो 5 इंच का है पर किसी को भी सतुंष्ट कर सकता हूं। मुझे टी.वी. पर ब्लु फिल्म चलाकर भाबी की चुदाई का सपना है, क्योंकि ऐसे करने से दोनों दिल अपनी-अपनी हसरत पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>वैसे तो मैं पिछले करीब 8 सालों से हर कहानी को पढ़ता आ रहा हूं, शायद ऐसी कोई ही ऐसी कहानी होगी जो मैंने नहीं पढ़ी हो. पर मुझे भाबी की कहानियां पढ़ने में अलग ही मजा आता है<br />
क्योंकि आप सब को तो पता है कि भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है.</p>
<p>इसलिए मैं अपने जीवन में घटित हुई असल भाबी की चुदाई कहानी को आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूंः</p>
<p>यह घटना आज से करीब 5 साल पुरानी गर्मी के दिनों की है. उन दिनों अगर कोई दो बार नहीं नहाता तो उसकी हालत मानो एक काम करते हुए मजदूर की तरह हो जाती है।</p>
<p>मेरे पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहने के लिए आया। उस परिवार में विजय कुमार, उसकी पत्नि मीहा (बदला हुआ नाम) और 4 साल का एक लड़का था। विजय और उनके परिवार को हमारा परिवार अच्छी तरह से जानता था क्योंकि भाबी हमारी दुकान पर सामान लेने आती थी और कभी-कभी भैया भी सामान लेने आते थे।</p>
<p>मीहा भाबी को आते-जाते समय मैं नमस्ते करता था। मैंने उनको अपना फोन नम्बर दे दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वे फोन करके हमारी दूकान से सामान मंगवा सकें.<br />
मीहा भाबी की आयु करीबन 24 साल, 34″ के चुच्चे और बाहर निकली हुई उसकी मस्त गांड किसी को भी पागल कर सकती थी. जबकि विजय भाई की आयु करीबन 40 के आस-पास थी।</p>
<p>उसका पति विजय एक सरकारी विभाग में नौकरी करता था। उनकी रोजाना शराब पीने की आदत थी, जिससे उनका स्वास्थ्य बिल्कुल गिर गया था। भैया सरकारी नौकरी होते हुए भी बहुत ही कम नौकरी पर जाते थे।</p>
<p>थोड़े दिन के बाद किसी अनजान नम्बर का मेरे नम्बर पर फोन आया और कहने लगी- मैं मीहा बोल रही हूं। क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?<br />
भाबी ने बाजार से कुछ दवाइयां लाने के लिए कहा। मैं भाबी के घर पर गया तो भाबी ने एक पर्ची और कुछ पैसे दिये।<br />
मैंने बाजार से दवाई और बचे हुए पैसे लाकर भाबी को दिये।<br />
भाबी ने मुझे धन्यवाद कहा और भाई साहब ने भी धन्यवाद किया।<br />
मैंने दोनों को कहा- इसमें धन्यवाद वाली ऐसी कोई बात नहीं। आप लोगों को मेरी जरूरत जब भी लगे, आप मुझे फोन कर सकते हो।</p>
<p>इस तरह से मैं उनसे मिलने-जुलने लगा और उनका मेरे ऊपर विश्वास होने लगा। कभी-कभार तो भाबी मुझसे फोन करके भी घर का सामान लाने को कहती। इसी बहाने से मैं उसके घर पर जाने लगा और कभी-कभी उसके धीरे से टच करता तो कभी अनजाने ढंग से उसके चुच्चे दबा देता। इस पर भी भाबी कभी भी बुरा नहीं मानती थी बल्कि हंस देती थी।<br />
भाबी भी अब मेरे इशारे समझने लगी थी।</p>
<p>मुझ पता था कि भैया की बीमारी के चलते भाबी की चुदाई नहीं हो पाती होगी तो उनकी जवानी प्यासी रहती होगी.<br />
एक बार मैंने उसे मिलने के लिए बोला तो कहा- मैं शादीशुदा औरत हूँ और हमें ये बात शोभा नहीं देती।<br />
पर बार-बार जिद करने पर वो मेरी बात मान गई और रात को 8 बजे घर पर आने के लिए कहा।</p>
<p>मैंने घर वालों को बहाना बनाया कि मैं एक दोस्त के साथ बाहर जा रहा हूं और रात को देरी से आऊँगा।</p>
<p>फिर उसी दिन करीब आठ बजे मैं उसके घर पहुंच गया और विजय भाई से बातचीत करने लग गया.<br />
भाबी ने बात ही बात में मुझे दूसरे मकान में जाने का इशारा किया। उनके घर से पीछे का एक मकान उन्होंने अभी खरीदा है जिसमें वो थोड़े ही दिन में शिफ्ट होने वाले थे। उसने अपने पति को कहा कि वह दूसरे मकान की सफाई करने जा रही है और बाद में नहा कर आएगी।<br />
मैं तो पहले से ही उस मकान में आ गया था।</p>
<p>थोड़ी देर के बाद भाबी आई और मुझे कहने लगी- मैं अभी नहा कर आती हूँ।<br />
भाबी जी ने जानबूझ कर बाथरूम की कुंडी नहीं लगाई।</p>
<p>मुझे बैडरूम में बैठे-बैठे बाथरूम का खुला दरवाजा दिख रहा था क्योंकि बाथरूम बैडरूम के पास ही था।</p>
<p>मैं रूम में बैठे-बैठे यही सोच रहा था कि क्यों ना भाबी के साथ बाथरूम में मजे कर लूं।<br />
मैंने फट से अपने सारे कपड़े उतारे और बाथरूम में जाते ही भाबी के मस्त चुच्चों को पीछे से दबोच लिया। मुझे बाथरूम में देखकर भाबी बहुत खुश हुई। मैं और भाबी दोनों एक-दूसरे को साबुन से नहला रहे थे।</p>
<p>नहलाते समय मैंने भाबी के एक चुच्चे को मुंह में लेकर चुसने लगा और दूसरे चुच्चे की निप्पल को हाथ से दबाने लगा।<br />
भाबी अपने चुच्चे चुसवाते हुए बोल रही थी- और जोर से मेरे राजा … ओह … आह … और जोर से … सारा … सारा निचोड़ दे दोनों को!</p>
<p>अब भाबी ने मेरे लंड को सहलाया और बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी. जैसे ही मेरे लंड को उसने अपने मुंह में लिया मैं तो सातवें आसमान की सैर करने लग गया.</p>
<p>थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने अपना सारा माल भाबी के मुख में छोड़ दिया, वो भी बड़े प्यार से मेरे माल को बूंद बूंद तक गटक गई।</p>
<p>दोबारा हम एक दूसरे को सहलाने में मस्त हो गये और मैंने दोबारा से उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कोई देरी किए मेरे लंड को चूसने लग गई।<br />
5 मिनट बाद मेरा लंड टाईट हो गया तो मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और अपना लंड भाबी की चुत में डाल दिया. चुत में बड़ी मुश्किल से मेरा लंड गया क्योंकि उसका पति बहुत ही कम भाबी की चुदाई करता था.<br />
और उसने कहा- जोर से … जोर से मेरे राजा!</p>
<p>चोदते समय भाबी के चुच्चे ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ की टहनी पर आम लटक रहे हों। मैं उसके एक चुच्चे को मुंह में डालकर चूस रहा था और दूसरे चुच्चे को दूसरे हाथ से दबा रहा था। भाबी भी सिसकारी ले रही थी- आह … आह … आह … जोर से … फाड़ दे मेरी चुत को … आह!</p>
<p>करीब दस मिनट बाद उसकी चुत में अपना सारा माल छोड़ दिया।</p>
<p>उसके बाद हम 10 मिनट तक नहाये और बैडरूम में चले गये।</p>
<p>बैडरूम में जाते ही हम एक-दूसरे की चुम्मा चाटी करने लग गये और भाबी ने कहा- मुझे करने दे जो करना है, तुम आराम से लेटा रहो।</p>
<p>फिर भाबी ने बेड की दराज से शहद की शीशी निकाली और उसे मेरे लंड पर डाल दिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई बालक लोलीपोप चूसता है।</p>
<p>मैंने भी उसके दोनों चुच्चों पर शहद डाल कर चूसा और उसे पागल बना दिया।</p>
<p>उसने मुझे 69 की पोजिशन में आने के लिए कहा। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी के साथ 69 किया। वो मेरे लंड को चूसने में मस्त थी और मैं उसकी चुत को।<br />
करीबन दस मिनट तक उसकी चुत चूसने के दौरान 2 बार अपना नमकीन पानी छोड़ दिया। मैं भी उसका सारा पानी पी गया।</p>
<p>मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत घोड़ी बन गई।<br />
मैं अपना लंड जैसे ही उसकी चुत में डालने लगा तो मेरा लंड फिसल कर उसकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लग गई- उइइइई मां … छोड़ दे मुझे … मर गई मैं तो … आह… बड़ा दर्द हो रहा है।<br />
भाबी ने कहा- मैंने तक आज तक अपनी गांड नहीं मरवाई है।<br />
मैंने उसे कहा- धीरे से करूंगा, अब दर्द नहीं होगा.</p>
<p>फिर मैंने धीरे-धीरे से उसकी गांड मारी। करीब दस मिनट बाद वो खुद मेरा साथ देने लग गई। थोड़ी देर की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।</p>
<p>इस तरह उस रात मैंने तीन बार भाबी की चुदाई की।<br />
मेरी चुदाई देखकर वो बहुत खुश हुई और कहा- तेरे भाई साहब से तो कुछ नहीं बनता। महीने में एक-दो बार ही करते हैं। करते ही साथ में उनका छुट जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ। आज तुमने मेरे जीवन में प्यार का रस डाल दिया जिससे मैं निहाल हो गई हूँ।<br />
इस तरह मैंने उसके साथ मजे लिए।</p>
<p>थोड़ी देर इकट्ठे लेटने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और चुपके से मैं उसके घर से निकल आया।</p>
<p>उसके बाद उसकी अपने पड़ोस में रहने वाली दो सहेलियों को भी मुझसे चुदवाया।</p>
<p>अधिक शराब पीने के कारण उसके पति को मौत हो चुकी है और उसने दोबारा किसी ओर से शादी कर ली है। अब कभी-कभार बाजार में आते-जाते मुझे मिलती है तो मैं गर्दन हिलाकर उसे नमस्कार करता हूं। उसके बाद मुझे उसकी गर्मी शांत करने का मौका नहीं मिला।</p>
<p>मेरी भाबी की चुदाई सेक्स स्टोरी कैसी लगी। मेरा इस साइट पर ये पहला अनुभव था, जिसे मैंने आप लोगों तक सांझा किया। अपने विचार मुझे आप मेल भी कर सकते हैं.<br />
[email protected]</p>
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		<title>देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की</title>
		<link>https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Desi Kahani]]></category>
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		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली. दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर <a title="देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की" class="read-more" href="https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/" aria-label="Continue reading देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली.<br />
<span id="more-332"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर रेलवे के पेपर की तैयारी कर रहा हूं. मेरे परिवार में हम दो भाई और माँ-पापा है। माँ हॉउस वाइफ है जबकि पापा किसान हैं। हमारे पास 30 बीघा जमीन है जो कि बिल्कुल नहर के पास है.</p>
<p>मेरी उम्र अभी 22 वर्ष की है। मेरी हाइट पांच फीट और दस इंच है. शरीर से पूरा हट्टा कट्टा हूं. दिखने में भी ठीक हूं. मेरे लंड की लम्बाई साढ़े पांच इंच की है लेकिन उसकी मोटाई काफी है.</p>
<p>मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूं. कई बार मैं इसकी गर्म और देसी बुर चोदन कहानी पढ़ कर लंड को भी हिला लेता हूं. तो मैंने सोचा कि अपने जीवन की एक घटना आप लोगों के साथ शेयर करूं. जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो आज से करीबन 2 साल पहले की है.</p>
<p>मेरा घर गांव में पड़ता है जहां पर मेरे घर के पास से ही एक नहर निकलती है। गर्मियों के दिनों में हम नहर में सुबह शाम को नहाने के लिए अक्सर जाया करते हैं। दोपहर में नहर में लड़के नहीं नहाते तो हमारे पड़ोस की लड़कियां दोपहर में नहा लेती थी क्योंकि लड़के उस टाइम वहां पर नहीं होते थे।</p>
<p>इसी तरह एक दिन मैं घर पर बैठा बैठा बोर हो रहा था तो मैंने नहर में नहा कर आने की सोची।<br />
दोपहर के समय में घर वाले सो रहे होते थे तो मैं नहर पर नहाने आ गया।</p>
<p>अभी नहाते हुए मुझे करीब 10 मिनट ही हुई होंगी कि हमारे पड़ोस की देसी लड़की वहां पर नहाने के लिए आ गई. उस लड़की का नाम मोनिका (काल्पनिक) है. रंग से गोरी है और कमर पतली है बिल्कुल. उसके बूब्स बड़े संतरे के आकार के थे (अब तो मेरे हाथ में ही नहीं आते हैं इतने बड़े हो गए हैं, जो कि मेरा ही कमाल है) उसके साइज के नाप का तो मुझे पता नहीं।</p>
<p>वो जब नहर पर आई तो मैं नहर में तैराकी कर रहा था। वो नहर पर आकर अपने कपड़ों में ही नहाने लगी क्योंकि गांव में देसी लड़कियां सलवार कमीज में ही नहाती थी नहर में।<br />
वो मुझे पानी में डुबकी लगा कर तैरता हुआ देख कर मुझसे बोली- मेरे को भी तैरना सिखा दो।</p>
<p>मैं उसकी बात पर थोड़ा हैरान सा हुआ क्योंकि हम दोनों कभी इसके पहले इतने खुल कर बात नहीं की थी और वो भी ऐसे अकेले में. आज से पहले कभी भी मैंने उसे चुदाई वाली नजरों से नहीं देखा था।</p>
<p>मैं उसके कहने पर उसको तैराकी सिखाने के लिए राजी हो गया. वो मेरे करीब आई और पानी में गोता लगाने लगी.</p>
<p>मैंने उसको अपने हाथों में थाम लिया ताकि वो नीचे डूबे नहीं. मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और वो तैरने के लिए हाथ-पैर मार रही थी। उसी बीच मेरा हाथ उसकी छाती पर चला गया तो उसने कुछ नहीं कहा। मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग रहा था जो कि बड़े आकार के संतरे के साइज के थे.</p>
<p>अब मेरे अंदर कामुकता जागने लगी, मैंने इस देसी कमसिन जवान लड़की के बुर चोदन का मौक़ा देखा तो मैं धीरे-धीरे बहाने से उसके बूब्स को जानबूझ कर छूने और दबाने की कोशिश करने लगा. लेकिन वो इस तरह से व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हो ही न रहा हो. इसलिए मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी.</p>
<p>फिर मैंने उसके चूचों को अच्छी तरह से हाथों में भर लिया तब भी उसने कुछ नहीं कहा. अब मेरा लंड मेरे अंडरवियर में पूरा तन चुका था. लेकिन वो पानी के अंदर था. पानी के अंदर भी मुझे अपने लंड की गर्मी महसूस हो रही थी.</p>
<p>मैंने मोनिका को खड़ी होने के लिए कह दिया तो वो मेरे सामने ही खड़ी हो गई. मैं उसको सिखाने के बहाने से उसकी गांड को लंड से छूने लगा. मेरा लंड तन कर झटके दे रहा था. उसकी गीली गांड में मेरे लंड का टच होना हर पल मेरे अंदर हवस को बढ़ाये जा रहा था.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे करके उसकी गांड पर अपने लंड को अच्छी तरह से सटाने लगा. मगर वो कुछ भी नहीं बोल रही थी.</p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा. न तो वो कुछ कह रही थी और न ही मैं कुछ कह रहा था. फिर वो मुझसे छूट कर पानी से बाहर जाने लगी. मेरे अंदर तो चुदास भर चुकी थी. मैंने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो मना करके चली गई.</p>
<p>मेरे मन में डर भी था कि कहीं ये कुछ घर पर जा कर बता ना दे तो मेरी भी गांड फट रही थी।</p>
<p>उसके बाद मैं घर पर आ गया और मोनिका के साथ हुई उस घटना को याद कर करके मैंने दो बार मुठ मार डाली.</p>
<p>उस दिन तो मैं बस यही सोचता रहा कि किसी भी तरह बस उसकी बुर चोदने को मिल जाये. यही सोचते हुए उस रात मुझे नींद भी नहीं आई. रात को सपने में भी मेरा वीर्यपात हो गया.</p>
<p>अगले दिन संडे था और हमारे पड़ोस में हमारे घर पर ही टीवी था और संडे को फ़िल्म भी आती थी। अगले दिन वो हमारे घर पर टीवी देखने के लिये करीब 11 बजे मेरे घर आ गई। मेरे घर वाले टीवी नहीं देखते थे तो माँ और पापा दूसरे कमरे में सो गए थे।</p>
<p>चूंकि राजस्थान में गर्मी बहुत पड़ती है तो मेरे घरवाले शाम के तीन बजे के बाद ही सोकर उठते थे. टीवी वाले कमरे में उसके और मेरे अलावा कोई और नहीं था. मैं भी टीवी देख रहा था और साथ में बीच बीच में उसे भी। कुछ देर बाद मैं यह सुनिश्चित करने के लिए उठा कि मां और पापा सो रहे हों. मैंने माँ पापा को धीरे से देखा तो वो दोनों नींद में सो रहे थे।</p>
<p>उसके बाद मैं उसके बिल्कुल पास आ कर बैठ गया और धीरे धीरे एक हाथ से उसकी कमर पर फिराने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं अपने हाथ को उसकी कमर से होते हुए उसके चूचों पर ले गया. उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से आगे देखने लगी.</p>
<p>उसको शायद अच्छा लग रहा था. वरना कोई भी लड़की इस तरह से एकदम से शरीर को छूने नहीं देती है.</p>
<p>जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि वो भी बुर चोदन करवाने की तैयारी करके ही आई है तो मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया. उसके चूचों को दबा दिया. तब भी उसने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब तो मुझसे रुका ही नहीं गया. मैंने उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी देसी बुर को छू लिया. उसने एक बार के लिए मेरा हाथ हटाया. मैं थोड़ा सा हिचक गया कि कहीं मैं जल्दी तो नहीं कर रहा हूं लेकिन दोस्तो बहुत बुरा हाल हो रहा था.</p>
<p>मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने दोबारा से कोशिश की और फिर से उसकी बुर पर हाथ फेरा तो मेरे हाथ पर उसकी बुर का स्पर्श हुआ. मुझे पता चल गया कि उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसकी सलवार में हाथ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसने अपनी सलवार के नाड़े को कस कर बांधा हुआ था इसलिए मुझे हाथ अंदर घुसाने में बहुत मुश्किल हो रही थी.</p>
<p>काफी मशक्कत के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के अंदर जा घुसा. मैंने उसकी बुर को टटोला तो उसकी बुर चोदन के लिए गर्म थी. उसमें से हल्का सा गीलापन भी छूटने लगा था. फिर मैंन उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. मैंने अपनी उंगली सीधी उसकी बुर में डाल दी उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.</p>
<p>अब चुदाई का पूरा माहौल तैयार हो गया था. मैंने उससे कहा कि वो ऐसे ही बैठी रहे. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मां और पापा बीच में उठ कर न आ जायें इसलिए मैं दोबारा से चेक करने के लिए उनको देखने के लिए गया. वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे.</p>
<p>जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि उसने अपनी सलवार को घुटनों तक नीचे कर लिया था. मैंने उसके पास बैठते ही उसकी बुर सहलाना शुरू कर दिया. मेरा हाथ उसकी बुर को रगड़ रहा था. दूसरे हाथ से मैं उसके बूब्स को दबा रहा था.</p>
<p>मेरा लंड अब मेरी पैंट में तन कर दर्द करने लगा था. मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया और उसके हाथ को पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया.<br />
उसने लंड को छोड़ दिया.</p>
<p>मैंने धीरे से कहा कि लंड को हाथ में पकड़ लो लेकिन उसने मना कर दिया.</p>
<p>फिर मैंने जबरदस्ती उसके हाथ को अपने लंड पर रखवा लिया और उसके हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. कुछ देर के बाद उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई. वो खुद ही मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>मैं उसको किस करने लगा.</p>
<p>अब बस रुका नहीं जा रहा था और मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया. मैंने उसकी बुर को हाथ से रगड़ा और अपना लंड उसकी बुर के मुंह पर लगा दिया और उसके ऊपर लेट गया. मेरा लंड उसकी देसी बुर में अंदर घुसते हुए रास्ता बनाने लगा तो वो दर्द के मारे गर्दन को इधर उधर पटकने लगी.</p>
<p>उसकी बुर अभी कुंवारी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो उसकी आंखों से पानी आने लगा. लेकिन मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने एक झटका दिया और लंड उसकी बुर में उतार दिया.</p>
<p>वो मुझसे लिपट गई. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … लंड उसकी बुर में चला गया था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो उसकी बुर से हल्का सा खून भी बाहर आ रहा था. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसकी बुर में हल्के से लंड को चलाने लगा. वो अभी भी तड़प रही थी. मगर कुछ देर के बाद वो नॉर्मल होती चली गई.</p>
<p>उसकी कुंवारी बुर पहली बार चुद रही थी और उसमें से जो खून बाहर निकला था उसके साथ में उसका कामरस भी मिल गया था. इस वजह से खून और पानी का वो मिश्रण बन जाने से मेरा लंड अंदर जाने में अब कोई परेशानी नहीं आ रही थी.</p>
<p>चूंकि मैं भी काफी उत्तेजित था तो मेरे लंड से भी काफी चिपचिपा पदार्थ निकल चुका था. दोनों तरफ से ही बराबर चिकनाई हो गई थी और चुदाई मक्खन के माफिक चल रही थी. अब मैं उसकी बुर की चुदाई आराम से करने लगा. बीच-बीच में मैं उसकी कमीज को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को भी मसल रहा था.</p>
<p>मसलने के कारण उसकी देसी चूची टमाटर के जैसे लाल हो गये थे. लंड को बुर में लेते हुए अब उसको भी चुदाई का मजा आने लगा था. उसके मुंह से धीरे धीरे कामुक आवाजें निकल रही थीं और मेरा लंड गप्प गप्प करके उसकी बुर में जा रहा था. उसकी बुर काफी गीली हो गई थी.</p>
<p>दस मिनट तक मैं उसका बुर चोदन करता रहा. फिर मैंने उसको उठा दिया और उसको डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा. लेकिन वो मना करने लगी. उसके बाद मैंने फिर से उसको अपने नीचे ही लिटा लिया और ऐसे ही उसकी बुर की चुदाई करने लगा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में कस कर पकड़ने लगी और उसकी बुर मेरे लंड पर कसने लगी. शायद वो उस समय झड़ रही थी. उसका पानी निकलने से चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी और कुछ ही धक्कों के बाद फिर मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों शांत हो गये. लेकिन मेरा मन अभी नहीं भरा था. मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसके होंठों को चूसता रहा. मेरी गांड नंगी थी और वो मेरे नीचे पड़ी हुई थी. उसके होंठों को चूसते हुए मेरा लंड दस मिनट के बाद फिर से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैंने दोबारा से बुर चुदाई करने के लिए कहा तो वो मना करने लगी. मैंने उसको बहुत मनाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. फिर हम दोनों उठ गये. लेकिन मेरा लंड अभी तना हुआ था.</p>
<p>मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा लेकिन उसने लंड चूसने से भी मना कर दिया. फिर मेरा मायूस सा चेहरा देख कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरे लंड की मुठ मारने लगी.<br />
उसके कोमल हाथों में जाकर मेरा लंड फिर से तनतना गया और मुझे मजा आने लगा. वो मेरे लंड की मुठ मारती रही और मैं उसके चूचे दबाता रहा. उसकी चूमता और काटता रहा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद फिर से मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी मार दी. उसका हाथ मेरे वीर्य से सन गया. मैंने उसको एक गंदा सा कपड़ा दिया और उसने अपना हाथ साफ कर लिया. फिर मैंने भी अपने लंड को पोंछ दिया और पैंट पहन ली.</p>
<p>मगर वो कहने लगी कि उसको अभी भी बुर में दर्द हो रहा है.<br />
फिर मैंने धीरे से उठ कर उसके लिए एक दर्द की गोली लाकर दी. गोली खा कर वो अपने घर चली गई.</p>
<p>उसके बाद तो लगभग हर रोज ही हम चुदाई के मौके ढूंढने लगे. फिर तो जब भी मौका लगता था मैं उसकी बुर मार लेता था. आज उस घटना को इतना वक्त बीत चुका है और वो अभी भी मुझसे अपनी बुर चोदन करवाती है. मैं भी जमकर उसकी बुर चोदता हूं. मैंने दबा-दबा कर उसके चूचों को काफी बड़ा कर दिया है.</p>
<p>अगली देसी कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने मोनिका की छोटी बहन की बुर चोदन करके उसका भी उद्घाटन किया. आप कमेंट करके बताना कि आपको मेरी चुदाई की देसी कहानी कैसी लगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेरी पहली चोदाई कहानी-2</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:48:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग मेरी पहली चोदाई कहानी-1 में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था. अब आगे: जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा <a title="मेरी पहली चोदाई कहानी-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई कहानी-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग<br />
मेरी पहली चोदाई कहानी-1<br />
में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था.</p>
<p>अब आगे:</p>
<p>जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा था कि मेरी चूत की चोदाई की कहानी कब पूरी होगी.</p>
<p>पूरा दिन ऐसे ही ख्यालों में गुजर गया. मैं इंतजार करता रहा कि अभी उसका कॉल आएगा, उससे बात होगी. मगर उस दिन उसका कोई कॉल नहीं आया. मैं उसके ख्याल में मुट्ठ मारके सो गया.</p>
<p>मुठ मारने से तनाव खत्म सा हुआ और मुझे नींद भी कब आ गई, पता ही नहीं लगा. </p>
<p>फिर मैं जैसे अचानक उठा. मैंने देखा कि शाम के 7:00 बज रहे थे. मैंने अपने फोन को देखा, तो उसमें बहुत सारे मिस कॉल आए हुए थे. मैंने इतने मिस कॉल देख कर तुरंत उसको फोन किया.</p>
<p>यह सभी कॉल उसी के थे. मैंने कॉल किया, तो मेरे कुछ बोलने से पहले ही वह बोल उठी- कहां थे अब तक? कितने फोन किए … सुबह कुछ करने नहीं दिया, तो क्या नाराज हो गए?<br />
फिर मैंने उसे समझाया कि मैं नाराज नहीं हुआ हूं … मैं तुम्हारा ही वेट कर रहा था और मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं लगा.<br />
उसने कहा कि चलो अभी मेरे घर पर कोई नहीं है, अभी तुम आ जाओ. हम अपना सुबह का अधूरा काम पूरा कर लेते हैं.</p>
<p>उस वक्त रात के लगभग 8:00 बज रहे थे. मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके घर चल दिया. गाड़ी को मैंने दूर खड़ा कर दिया था ताकि कोई देख ना ले. क्योंकि वहां पर मेरी जान पहचान के भी लोग थे. </p>
<p>नजदीक जाकर मैंने उसे कॉल किया और पूछा कि मैं सीधा अन्दर आ जाऊं?<br />
तो उसने कहा कि नहीं … रुको तो … पहले मुझको देखने दो, बाहर कोई है तो नहीं … अगर किसी ने देख लिया, तो मेरा यहां रहना मुश्किल हो जाएगा.<br />
मैंने कहा कि हां देख लो, मैं वेट करता हूं.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसका कॉल आया. उसने कहा कि कोई नहीं है, जल्दी से आ जाओ. </p>
<p>मैं सीधा घर में घुस गया. घर में घुसते मैंने उसे देखा. देखते ही मैं उससे चिपक गया. उसे गले से लगाया और उसको किस करने लगा. उस वक्त मैं पागल हो चुका था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. बस पागलों की तरह से किस किया जा रहा था. </p>
<p>उसने मुझे रोकते हुए कहा- सब कुछ यहीं करोगे क्या? चलो कमरे में चलते हैं.<br />
फिर मुझे होश आया. मैंने अपने आपको संभाला.</p>
<p>हम दोनों कमरे में चले गए. कमरे में जाते ही मैं उसे घुमा कर उसकी गर्दन में चुम्बन करने लगा. तब तक मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैं पीछे से उसकी मोटी गांड में लंड को ठेले जा रहा था. आगे से अपने हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था. मैं इतना जोर से दबा रहा था कि मुझे बस पहली और आखिरी बार दूध दबाने को मिले हों.</p>
<p>वह मुझसे कह रही थी- आह धीरे से करो … मुझे लग रही है.<br />
पर मुझे कहां कुछ सुनाई देने वाला था. मैं तो बस अपने अन्दर के शैतान को जगा चुका था. उसकी एक भी आवाज मेरे कानों में नहीं आ रही थी. उस टाइम तो बस खड़े खड़े मन कर रहा था कि जल्दी से गांड में लंड घुसा दूँ.</p>
<p>मैंने उसकी साड़ी को पीछे से उठा दिया और मैंने अपने लंड को उसके सीधा गांड में सैट करके धक्का मार दिया. बिना किसी अनुभव के लंड पेल देने से लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था. मेरी हरकत से उसको हंसी आ रही थी. </p>
<p>उसने मुझसे पूछा- क्या पहली बार कर रहे हो?<br />
मैंने कहा- हां … मैंने कभी सेक्स नहीं किया है.<br />
तो उसने कहा कि फिक्र मत करो मैं सब सिखा दूंगी.<br />
मैंने कहा- जल्दी से सिखा दो न.<br />
उसने हाथ पीछे करते हुए मेरे गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- चलो हम बाथरूम में चलते हैं … वहां करेंगे. </p>
<p>अब तक हमारे कपड़े नहीं निकले थे. सिर्फ मेरा लंड मैंने पेंट से बाहर निकाला हुआ था. उसने अभी तक मेरा लंड भी नहीं देखा था.<br />
जब मैंने कहा- हां चलो अन्दर चलते हैं.<br />
वह मेरी तरफ घूमी. उसका चेहरा मेरे से चेहरे के सामने आया.</p>
<p>जबी उसकी नजर धीरे से मेरे लंड पर पड़ी, तो उसने कहा कि ओ माय गॉड … तुम इतने बड़े से हथियार को मेरे छोटे से छेद में डालने की कोशिश कर रहे हो, पर तुम्हें तो इतना भी नहीं पता कि उसको कैसे डाला जाता है. </p>
<p>उसके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं थोड़ा सा सोचने लगा कि यह तो कितनी चालू लड़की है … कितनी बेशर्मी से बातें कर रही है. </p>
<p>मैंने उसकी बातों को ध्यान नहीं देते हुए आगे बढ़ना ही अच्छा समझा. फिर वह मेरे लंड को पकड़कर मुझे बाथरूम में ले गई. मैं मेरे लंड के साथ उसके साथ में अन्दर खिंचता हुआ जाने लगा. उस टाइम मुझे ऐसा लगा कि लंड कितने कमाल की चीज होती है. सिर्फ उसने लंड को ही पकड़ा था और मेरी पूरी बॉडी उसके कंट्रोल में हो गई थी.</p>
<p>उसके लंड पकड़ते मुझे झनझनाहट होने लगी थी. यह क्या हो रहा है … ऐसी फीलिंग थी कि उस टाइम कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उसके लंड पकड़ते ही में और जोश में आ गया. </p>
<p>फिर मैं साथ में बाथरूम चला गया. बाथरूम में घुसते ही उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड को हाथ में पकड़ कर नीचे बैठ गई. वो उसे देखने लगी. </p>
<p>मैंने कहा- क्या देख रही हो?<br />
उसने कहा- मैं इसी के लिए तरस रही थी और मैंने उस दिन आपको न जाने क्या बोल दिया था. मैंने बात भी नहीं की आपसे.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं … जो हुआ सो हुआ … अभी आगे का करते हैं. </p>
<p>फिर उसने मेरे लंड को सीधा मुँह में डाल लिया, जैसे ही मेरा लंड उसके मुँह में गया. मैं कांपने लगा, मुझे अजीब सा होने लगा. मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है … क्योंकि उस टाइम पहली बार इस लड़की ने मेरे लंड को छुआ था और मुँह में लिया था. वो मेरे लंड को ऐसे मुँह में ले रही थी, जैसे उसको बहुत मस्त चीज मिल गई, जिसके लिए वो बरसों से भूखी थी. </p>
<p>मेरे दोनों हाथ मेरे बस में नहीं थे, उसकी हाथ मेरी गांड के गोलों पर टिके हुए थे और मेरा लंड उसके मुँह में था. वो हाथों से मेरी गांड को आगे पीछे करने की कोशिश में लगी थी. मुझे समझ में आया कि ये मुझे आगे पीछे होने के लिए कह रही है. मैंने उसके सर को पकड़ कर गांड को आगे पीछे करने लगा, तो उसके मुँह से ओक ओक ओक की आवाज आने लगी थी. </p>
<p>फिर ऐसे ही कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने मेरा लंड बाहर निकाला.<br />
मैंने उससे कहा- मुझे अन्दर डालना है. </p>
<p>इतना सुनते ही वो मुझे किस करने लगी. उसके किस करते करते ही मैं अपने हाथों से उसकी साड़ी उतारने लगा. धीरे-धीरे मैंने पूरी साड़ी उतार दी, वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला. </p>
<p>मेरे दिमाग में एकदम से घंटी बजी और बचपन का एक डायलाग याद आ गया जब हम कुछ कमीन दोस्त किसी भी बड़े चूचे वाली लड़की को देख कर लव स्कूल कह देते थे. कहीं आज ये वही लव स्कूल तो मेरे सामने नहीं आ गया था. </p>
<p>मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं, इतने नुकीले चूचे मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखे थे. दूध चूसने के लिए मैं पागल होने लगा. मैंने आव देखा न ताव दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. मैं अपने आप ही में पागल हो रहा था कि पता नहीं मुझे क्या हुआ. </p>
<p>उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा. अब तक चूचे चूसते चूसते मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था. उसका एक हाथ मेरे लंड को पकड़कर आगे पीछे कर रहा था. मुझे उस टाइम बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>चूंकि मैं उस टाइम पहली बार चोदाई करने वाला था. यह सब मेरे लिए नया था. फिर उसने मुझे रोकते हुए मेरी पेंट उतारी और टी-शर्ट भी उतार दी. मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था. </p>
<p>वो मेरे शरीर को देख कर पागल हो गई और कहने लगी- मैंने आज तक ऐसा शरीर नहीं देखा … तुम कितने सेक्सी दिखते हो.<br />
मैंने कहा- तुम पहली लड़की हो, जिसने मुझे ऐसे देखा है.<br />
उसने कहा कि अगर कोई तुम्हें देख ले, तो पागल ही हो जाए.</p>
<p>उसके इतना बोलते ही मैं उसे किस करने लगा. उसका ब्लाउज मैंने पीछे से फाड़ दिया क्योंकि उस टाइम मैं बहुत जोश में था. उस समय वैसी सी फीलिंग आ रही थी कि मेरे अन्दर न जाने ताकत एकदम से डबल कैसे हो गई थी. </p>
<p>वो कहने लगी- यह क्या कर दिया तुमने … ब्लाउज ही फाड़ डाला … सब्र तो कर लो … मैं कहीं नहीं जाने वाली. मैं तुम्हारी ही हूं और हमेशा तुम्हारी रहूंगी.</p>
<p>मैंने उसे सीने से लगा लिया. मैं उसको इतना जोर से हग करने लगा कि उसके नुकीले चूचे मुझे अपनी छाती में गड़ते से महसूस होने लगे. जब मेरे सीने से उसके मम्मे लग गए, तो मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे शरीर को मलाई लग रही हो. </p>
<p>मुझे बड़ा मजा आ रहा था. फिर मैंने उसका पेटीकोट खोलने की कोशिश की, पर मुझसे नहीं खुला, तो उसने अपने हाथों से खुद का पेटीकोट खोल दिया. उसने अन्दर पेंटी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसको नंगी देखकर नीचे बैठ गया. </p>
<p>एकदम मुलायम मक्खन सी चूत को देख कर मैं पागल हो गया था. जाने मुझे क्या हुआ कि मैं उसकी चूत को हाथों से फैलाने लगा. अन्दर से एकदम गुलाबी थी उसकी चूत. मुझे पता नहीं क्या हो गया कि मैंने अपना मुँह अन्दर घुसा दिया और चूत के गुलाबी होंठों को चूसने लगा. इतना दम लगाते हुए चूत को चूसने लगा कि उसकी सांसें रुकने लग गईं. </p>
<p>तब उसने मेरा सर और जोर से अपनी टांगों के बीच में दबा दिया और वह धीरे-धीरे नीचे बैठे लगी. वो नीचे बैठी, तब भी मेरा सर उसकी टांगों के बीच में घुसा हुआ था. तब तक मैं भी लेट चुका था.</p>
<p>फिर उसने मुझे रोका और कहा- अब अन्दर डाल दो.<br />
उसके ये कहते ही मैंने पोजीशन बनाई और अपना लंड उसकी चूत में रखकर तैयार हो गया.</p>
<p>मैं जैसे ही लंड अन्दर डालने लगा, तभी बाहर से किसी के आने की आवाज आने लगी. हम दोनों बाथरूम के अन्दर थे.<br />
ध्यान से सुना तो रूम में आकर कोई बोल रहा था. </p>
<p>उसने फुसफुसाते हुए कहा- मेरे पति आ गए हैं … अब हम अन्दर फंस चुके हैं. हम बाहर कैसे जाएंगे … आज तो मैं मर गई. </p>
<p>इस तरह की बहुत सी बातें करने लगी. यह सब सुनकर मेरी गांड फटने लगी. मेरा खड़ा लंड कब बैठने को हो गया, मुझे पता ही नहीं लगा.<br />
उस टाइम वो कह रही थी- बाहर जाएंगे, तो वो हमें पकड़ लेंगे. </p>
<p>फिर अचानक उसके पति की आवाज आई- कहां हो तुम?<br />
तो उसने अन्दर से कहा कि मैं बाथरूम में हूं … नहा रही हूं.<br />
उसका पति कहने लगा कि आज इतनी रात को क्या नहाने की जरूरत आ गई?<br />
उसने कहा कि मेरी साड़ी गीली हो गई थी. मैं नहाने लग गई. </p>
<p>यह सब सुनकर मुझे थोड़ी सी तसल्ली हुई. फिर मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा. अब तो शुरू करते ही हैं. </p>
<p>तब तक वह खड़ी हो चुकी थी और मैंने भी लंड को सहला कर खड़ा कर लिया था. मैंने उसे पीछे से झुका दिया और लंड को चूत के छेद पर सैट करके सीधा अन्दर पूरा का पूरा घुसा दिया. </p>
<p>लंड के चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई. उसकी चीख इतनी जोर से निकली थी कि उसके पति ने बाहर से सुन ली. </p>
<p>यह देख के मुझे डर लगने लगा कि कहीं उसका पति अन्दर ना आ जाए. उस टाइम तो माइंड में यही रहता है कि हमारी नजर में कुछ गलत हो रहा है, तो सामने वाले की नजर में भी गलत ही होगा. </p>
<p>बाहर से पति चिल्लाया- क्या हुआ?<br />
उसने अन्दर से खुद को सम्भालते हुए कहा- कुछ नहीं हुआ, मैं जरा फिसल गई थी. </p>
<p>फिर इतना सुनते ही मैं लंड को आगे पीछे करने लगा. वो भी मेरे लंड के हर झटके का मजा ले रही थी. मुझे भी न मालूम कितना मजा आने लगा था. फिर धीरे-धीरे मेरे लंड के झटकों की स्पीड बढ़ने लगी, तो उसने मुझे रोक लिया.</p>
<p>अब उसने कहा- तुमको नीचे लिटा कर करूंगी. </p>
<p>मुझे नीचे लेटने का इशारा किया. मैं फर्श पर लेट गया. वो मेरे ऊपर आ गई. उसने मेरे लंड को चूत पर सैट किया. उसने मेरा पूरा लंड में चूत में ले लिया. मेरी आंखों के सामने ही मेरा लंड चूत में गायब हो चुका था. मेरे मन में ख्याल आया कि चूत के अन्दर कितना गहरा गड्डा होगा, जो इतने बड़े लंड को भी गायब कर दिया. </p>
<p>उसके बाद वो मेरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी. मुझे बहुत मजा आने लगा था … क्योंकि जिंदगी में पहली बार मेरा लंड किसी चूत में घुसा था. </p>
<p>फिर वह इतनी स्पीड से ऊपर नीचे होकर चोदाई करने लगी कि पच पच की आवाज आने लगी. </p>
<p>उस टाइम बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया कि आवाज बाहर भी जा सकती है और बाहर कोई बैठा हुआ है. </p>
<p>वह अपनी ही धुन में मेरे ऊपर नीचे होने लगी. ऊपर नीचे होते होते मुझसे लिपट गई. फिर ऊपर नीचे का खेल खेलना बंद कर दिया. वो मुझसे कस कर लिपट गई और उसने कहा कि मेरा हो गया है. </p>
<p>उस वक्त मुझे समझ में नहीं आया कि वह क्या कह रही थी.<br />
मैंने कहा- हां कोई बात नहीं. </p>
<p>मैंने उसे मेरे नीचे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया. मैं उसकी टांगों में बैठकर चूत को देखने लगा. वो पहले के मुकाबले अभी थोड़ी अधिक उभरी हुई थी. </p>
<p>मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों हो गया है?<br />
तो उसने कहा कि आज पहली बार कोई मस्त डंडा मेरी चूत में गया है और मुझे चोदाई में संतुष्ट किया है … ऐसे में हमेशा इसी लंड से चूत ख़ुशी से फूल कर कुप्पा हो जाती है.</p>
<p>इतना सुनते मैं खुश हो गया और मैंने सीधा अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया. </p>
<p>उसने कहा- क्या हुआ? अब तक तुम्हारा हुआ नहीं था क्या?<br />
मैंने कहा- देखो ना कितना खड़ा है. तुम्हारे अन्दर जाने के लिए कितना तड़प रहा है. </p>
<p>मैंने उसको किस करते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिए. कुछ देर बाद मैं नीचे से गांड और उसकी चूत को देखने लगा. वो गांड उठाने लगी. मैंने स्पीड बढ़ा दी और धकापेल चोदाई करने लगा. </p>
<p>तब तक उसका एक बार और हो चुका था. फिर मैंने फुल स्पीड में धक्के मारते हुए उससे कहा- मेरा पानी निकलने वाला है.<br />
यह कहते कहते ही मेरे लंड का पानी उसकी चूत में निकल गया. मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- यहां से बाहर कैसे जाएंगे … आपके पति बाहर बैठे हैं.<br />
तो उसने कहा- मैं निकल कर उनको बाहर भेज देती हूं. उनके जाने के बाद तुम चले जाना. </p>
<p>फिर उसके बाद उसने अन्दर से ही आवाज लगाई कि आप दूध ले आओ ना … तब तक मैं बाहर निकल कर कपड़े पहन कर आपके लिए खाना लगा देती हूं.<br />
उसका पति ‘ठीक है..’ कह कर वहां से दूध लेने चला गया. मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने, उसको किस किया और वहां से चला आया. </p>
<p>उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता है … हम चूत चुदाई का मजा कर लेते हैं.</p>
<p>तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी पहली चोदाई कहानी … मुझे मेल करके जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>माँ की चूत की सफाई और चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/maa-ki-chut-safayi-chudayi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:47:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी माँ की चूत नंगी देखी तो मेरा मन माँ की चुदाई को करने लगा. मुझे पता था कि माँ पिताजी की चुदाई से खुश नहीं हैं. तभी शायद माँ ने अपनी चूत मुझे दिखाई थी. दोस्तो नमस्कार, मेरा नाम पंकज है. मेरी उम्र 23 साल है और मैं जयपुर का रहने वाला हूं. <a title="माँ की चूत की सफाई और चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/maa-ki-chut-safayi-chudayi/" aria-label="Continue reading माँ की चूत की सफाई और चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी माँ की चूत नंगी देखी तो मेरा मन माँ की चुदाई को करने लगा. मुझे पता था कि माँ पिताजी की चुदाई से खुश नहीं हैं. तभी शायद माँ ने अपनी चूत मुझे दिखाई थी.<br />
<span id="more-314"></span></p>
<p>दोस्तो नमस्कार, मेरा नाम पंकज है. मेरी उम्र 23 साल है और मैं जयपुर का रहने वाला हूं. आज मैं जो कहानी आप लोगों को बताने के लिए जा रहा हूं वो मेरी मां की कहानी है. मेरी मां का नाम सरिता है. उनकी उम्र 44 साल है. उनको देख कर कोई भी यह नहीं कर सकता है कि वो मेरी मां है. उनको देख कर उनकी उम्र का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है. इसके दो कारण हैं. </p>
<p>पहला कारण यह कि मेरी मां की शादी छोटी उम्र में ही हो गई थी और इस वजह से उनको बच्चा भी जल्दी हो गया. दूसरा कारण यह कि मेरी मां ने अपने बदन को काफी मेंटेन करके रखा हुआ है. वो देखने में अपनी उम्र से दस साल कम ही लगती हैं. उनका साइज 32-30-36 है. रंग एकदम दूध के जैसा बिल्कुल सफेद है और घर में साड़ी पहनती हैं लेकिन जब चलती हैं तो उनकी साड़ी में उनकी गांड में फंस जाती है. आप इस बात को समझ ही सकते होंगे की मेरी मां की गांड कितनी शेप में होगी. </p>
<p>मेरी मां की जवानी की तारीफ मैं ही नहीं कर रहा बल्कि उनको देखने वाला हर आदमी दीवाना हो जाता है. मैंने कई बार देखा था कि घर पर चाहे कोई रिश्तेदार आये या फिर कोई और मर्द आये वो मेरी मां को देखता ही रह जाता था. सबकी नजर मेरी मां के बदन पर जाकर रुक जाती थी. हर मर्द मेरी मां के साथ सोने के सपने देखता था. यहां तक कि मेरे दोस्त भी मेरी मां के बदन को घूरते रहते थे.</p>
<p>मुझे पता था कि मेरे पापा मेरी मां को सेक्स में संतुष्ट नहीं कर पाते हैं.<br />
सेक्स की प्यास के बारे में कई बार मैंने अपने मां और पापा को बातें करते हुए अपने ही कानों से सुना हुआ था. वो बातें करते थे तो मां कहती थी कि मुझे अभी भी मजा नहीं आया. रात को अक्सर इस तरह की आवाजें मुझे उनके कमरे से सुनाई दिया करती थीं.</p>
<p>कई बार तो मेरी मां की प्यास अधूरी रह जाने के कारण वो चिड़चिड़ी हो जाया करती थी. इस वजह से मैंने मां और पापा को कई बार लड़ाई करते हुए भी देखा था.</p>
<p>मगर मां किसी को इस बारे में नहीं बताती थी क्योंकि वो घर की बात को घर में रखना चाह रही थी. जब उन दोनों के बीच का झगड़ा बहुत ज्यादा बढ़ जाता था तो मुझसे रहा नहीं जाता था.</p>
<p>एक दिन तो मैंने मां से पूछ भी लिया- आपको अगर पापा के साथ खुशी नहीं मिलती है तो मैं कुछ मदद करूं आपकी?<br />
लेकिन उस बात को सुन कर मेरी मां को इस बात पर गुस्सा आ गया कि मैं चुपके उन दोनों के बीच की बातें सुनता रहती हूं. उस दिन मां ने मुझे डांट भी दिया था लेकिन बाद में सब कुछ नॉर्मल होता चला गया.</p>
<p>उस दिन के बाद से मां मेरे साथ दोस्त की तरह रहने लगी थी. मां मुझसे कई बार अपनी ब्रा और पैंटी के सेट को दिखा कर पूछ लेती थी कि कौन सा रंग सही रहेगा और मैं मां की मदद भी कर दिया करता था. मगर मैं मन ही मन सोच रहा होता था कि जब वो खुश ही नहीं हो पाती तो यह सब अच्छे सेट पहनने का क्या फायदा है. ऐसे ही दिन गुजर रहे थे. </p>
<p>एक दिन की बात है जब मां ने मुझसे अपने साथ मार्केट में चलने के लिए कहा. मैंने उनके साथ जाने के लिए हां कर दी. मां को अपने लिये कुछ कपडे़ लेने थे.</p>
<p>हम बाजार में एक गार्मेंट शॉप में चले गये. वहां पर जाकर मेरी मां अपने लिये ब्रा और पेंटी का सेट देखने लगी. मुझे तो अंदर जाकर काफी शर्म आ रही थी लेकिन मैं मां के साथ ही रहना चाह रहा था इसलिए मेरे पास कोई चारा नहीं था.</p>
<p>अंदर जाकर देखा तो मैंने पाया कि वो दुकानदार भी मेरी मां के चूचों को ही घूर रहा था. वो शक्ल से देखने में भी हरामी लग रहा था. </p>
<p>मां ने एक सेट पसंद कर लिया और उसके बाद वो उसको ट्राई करने के लिए अंदर चली गई. मगर फिर अंदर आवाज आई और मां मुझे अपने पास बुलाने लगी.</p>
<p>मैंने जाकर देखा तो मेरी मां ब्रा और पैंटी पहने हुए खड़ी थी. उनके बदन को देख कर मेरी तो आंखें खुली की खुली रह गईं. उस दिन मैंने अपनी मां को पहली बार ऐसी हालत में देखा था. मां को देख कर मेरे मुंह में भी एक बार तो पानी सा आ गया और मेरा लंड भी खड़ा हो गया.</p>
<p>अपने बदन पर ब्रा को एडजस्ट करते हुए मां मुझसे पूछ रही थी कि कैसी लग रही है. कलर कैसा लग रहा है. लेकिन मैं तो मुंह फाड़ कर अपनी मां को ही देखता जा रहा था. उस दिन जब मैंने अपनी मां के दूध से श्वेत बदन को देखा तो मुझे पता चला कि क्यों सारे मर्द मेरी मां को इस तरह से हवस भरी नजरों के साथ घूरते रहते हैं. मेरी मां की जवानी देख कर मेरा लंड उछलने लगा लेकिन मां को अपनी गार्मेंट के ध्यान में मेरे लंड का तनाव दिखाई नहीं दिया.</p>
<p>बहुत देर तक मां को देखने के बाद उन्होंने मेरी तंद्रा को तोड़ कर कहते हुए फिर से पूछा- हरामी कहां पर खोया हुआ है. मैं तुझसे पूछ रही हूं कि ये सेट मेरे ऊपर कैसा लग रहा है?<br />
मां के दोबारा पुकारने पर मैं होश में आया और मैंने कहा- अच्छा लग रहा है. </p>
<p>मगर उसके बाद जो हुआ उसको देख कर तो मैं पसीना-पसीना हो गया.<br />
मां ने कहा- रुक अभी यहीं पर!<br />
यह कह कर मेरी मां ने ब्रा और पैंटी को उतारना शुरू कर दिया. देखते ही देखते मेरी मां का बदन मेरी आंखों के सामने नंगा हो गया.</p>
<p>मेरी मां की चूत देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया लेकिन साथ ही मुझे शर्म भी आ रही थी इसलिए मैंने मुंह को दूसरी तरफ कर लिया.</p>
<p>फिर जब मां ने दूसरा सेट पहना तो कहने लगी- इसको देख कर बता कि ये कैसा लग रहा है?<br />
मैंने देखा तो मां की चूत पर आये हुए बाल उनकी पैंटी से बाहर की तरफ झांक रहे थे. मैंने कहा- मां, यह कुछ ठीक नहीं लग रहा है. इसमें तो आपके नीचे के बाल भी वैसे के वैसे ही दिखाई दे रहे हैं. बालों के साथ में ये बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा.</p>
<p>फिर मैंने मां से कहा कि वह अपनी चूत के बालों की सफाई कर लिया करे.<br />
इस पर मां ने पूछ लिया- वो कैसे करते हैं?<br />
मैंने बताया- दो तरीके से हो सकती है. एक तो रेजर से करते हैं और दूसरा एक बाल हटाने के लिए क्रीम भी आती है.</p>
<p>मां बोली- मैं अपनी चूत पर रेजर नहीं लगा सकती. मुझे तो बहुत डर लगता है.<br />
फिर मैंने कहा- अगर रेजर से डर लग रहा है तो आप क्रीम से अपने बालों को हटा लिया करो.<br />
मां ने पूछा- वो कहां मिलेगी?<br />
मैंने बताया- यहीं पर मार्केट में ही मिल जाती है.</p>
<p>उसके बाद हम दोनों वो सेट ले कर वहां से आ गये. साथ में उस दिन मां ने वो बाल हटाने वाली क्रीम भी ले ली. </p>
<p>हम दोनों घर आ गये. घर पर उस वक्त मेरे और मां के अलावा कोई नहीं था. घर पर आते ही मां बाथरूम के अंदर चली गई. मेरे मन में मां की चूत देखने के बाद एक कौतूहल सा उठा हुआ था. दुकान में मां की चूत देख कर मेरा लंड मुझे चैन से बैठने नहीं दे रहा था.</p>
<p>मैंने बाथरूम की तरफ देखा तो दरवाजा अंदर से बंद किया हुआ था. लेकिन मैं मां को फिर से नंगी देखना चाह रहा था. फिर मैं दरवाजे के पास गया तो मुझे वहां पर एक छेद मिल गया. मैंने उस छेद पर आंख जमा दी और अंदर चल रहे नजारे को देखने की कोशिश करने लगा.</p>
<p>मैंने देखा कि अंदर जाने के बाद मां ने गाउन को ऊपर करके पैंटी उतार ली थी. उन्होंने गाउन को उठा कर ऊपर किया और अपनी चूत पर क्रीम लगाने लगी. क्रीम लगाने के बाद मां एकदम से चिल्लाने लगी. मां बोली- स्स्स् … मुझे जलन हो रही है. जल्दी कोई कुछ करो.</p>
<p>मैं तो वहीं पास में ही खडा़ हुआ था, मैंने मां से कहा- मां, आपने दरवाजा बंद किया हुआ है. मैं अंदर आकर आपकी मदद नहीं कर सकता.<br />
मेरे कहने पर मां ने दरवाजा खोल दिया.</p>
<p>मेरे मन में पहले से लड्डू फूट रहे थे. मैं झट से अंदर घुस गया. मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिल रहा था.<br />
अन्दर जाते ही मां कहने लगी- इस क्रीम ने तो मेरी जान ही निकाल दी. मुझे बहुत तेज जलन हो रही है.</p>
<p>मैंने कहा- सब ठीक हो जायेगा. मुझे दिखाओ.<br />
मैंने देखा तो मां की चूत लाल हो चुकी थी. मैंने कहा- आपने सही तरीके से क्रीम का प्रयोग नहीं किया. ये क्रीम मुझे दो. मैं आपके बालों की सफाई करने में आपकी मदद कर देता हूं.</p>
<p>यह कह कर मैं मां को बाहर ले आया. </p>
<p>बाहर आने के बाद मैं अपनी शेविंग क्रीम ले आया. पहले मैंने मां के बालों को कैंची से छोटा किया. मां ने जो गाउन पहना था वो गीला हो गया था. मैंने मां से गाउन निकालने के लिए कह दिया. पहले तो मां ने मना कर दिया लेकिन फिर बाद में मां ने गाउन निकाल दिया.  </p>
<p>ध्यान से मैंने मां की चूत को देखा तो उनकी चूत से गीला सा पदार्थ निकल रहा था. मेरा मन तो कर रहा था कि चूत को अभी चोद दूं. लेकिन मैं रुका रहा.</p>
<p>चूत पर क्रीम लगाने के बाद मैंने कुछ देर इंतजार किया कि ताकि चूत के बाल नर्म हो जायें. उसके बाद मैंने रेजर लिया और धीरे से मां की चूत पर रेजर चलाने लगा. हल्के हाथ से मैं बालों को रेजर से हटाता गया और चूत से बाल साफ होते गये.</p>
<p>बीच में मैं मां की चूत में उंगली भी कर रहा था. मगर अभी मैं यह नहीं दिखा रहा था कि मैं उनकी चूत को चादने की फिराक में हूं. मैं बस बहाने से मां की चूत को उंगलियों से सहला रहा था.<br />
कुछ देर के बाद मेरी माँ की चूत बिल्कुल साफ हो गई. मैंने उनकी चूत को एक कपडे़ से पोंछ दिया. मैं जब चूत पर कपड़ा फेर रहा था तो मैंने मां के चेहरे को देखा. मुझे पता चल गया था कि मां को अपनी चूत के साथ इस तरह से छेड़खानी करवाने में मजा आ रहा है.</p>
<p>मैंने जानबूझ कर अपनी माँ की चूत को रगड़ना जारी रखा. मां की चूत धीरे-धीरे फूलती हुई सी मालूम पड़ी. उनकी चूत को को पोंछते हुए मेरे लंड का भी बुरा हाल हो रहा था. फिर जब मुझसे न रहा गया तो मैंने मां की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया.<br />
मां ने भी इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया. वो अब धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी.</p>
<p>तभी पापा का फोन आ गया. मां ने बात की तो पापा ने कहा कि वो आज रात को घर नहीं आने वाले हैं.<br />
यह सुन कर मैंने मां के चेहरे की तरफ देखा तो वो मुस्करा रही थी.</p>
<p>मैं भी खुश हो गया. मैं तो पहले से अपनी मां की चूत की चुदाई करने की फिराक में था. उसके बाद हम दोनों ने जल्दी से घर का काम खत्म किया और शाम का खाना खाने के बाद फ्री हो गये.<br />
फिर रात को असली खेल शुरू होने से पहले मां ने कहा- चलो, पहले नहा लेते हैं.</p>
<p>मैं और मां दोनों बाथरूम में चले गये. अंदर जाते ही मां और मैं पूरे नंगे हो गये. मेरा लंड तन कर ऊपर आ गया था. मां ने मेरे लंड को हाथ में ले लिया. ऊपर से शावर का पानी गिर रहा था और नीचे से मां ने मेरे गर्म लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया था.</p>
<p>मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैंने मां के चूचों वहीं पर पीना शुरू कर दिया. उनके चूचों पर गिर रहा पानी मेरे मुंह में जा रहा था. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मन कर रहा था कि मां की गीली चूत को अभी चोद दूं. लेकिन मां ने मना कर दिया. मां मेरे लंड को पकड़ कर सहलाती रही जैसे बहुत दिनों से उन्होंने लंड का स्पर्श मिला ही न हो.  </p>
<p>नहाने के बाद फिर हम दोनों बाहर आ गये. फिर एक घंटे के बाद मां मेरे कमरे में आ गयी. उन्होंने नाइट ड्रेस पहनी हुई थी जो कि उनके बदन पर बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मेरे पास आते ही मैंने मां को अपनी बांहों में भर लिया और फिर दोनों ही एक दूसरे को चूसने लगे.</p>
<p>मेरा लंड खड़ा होते ही मां ने उसको मेरे पजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया और मेरे लंड को अपने हाथ में भर कर मसलने लगी. अब मैंने भी मां की नाइट ड्रेस को निकलवा दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा.</p>
<p>वो जल्दी से सेक्स के लिए बावली सी हो गयी, कहने लगी- बेटा, अब उंगली से काम नहीं चलेगा. अपनी माँ की चूत को लंड का मजा दे दे.<br />
मैंने मां को बेड पर गिरा लिया और उनकी टांगों को फैला कर अपना आठ इंच का लंड मां की चूत पर सेट कर दिया. मैंने धक्का लगाया तो मां की चीख निकल गयी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैं मर गयी … जान निकल गयी.</p>
<p>मैंने उनकी गांड को अपने हाथ से उठा लिया और माँ की चूत में और जोर से धक्के मारने लगा. साथ ही मैं उनकी गांड के दोनों पहाड़ मस्ती से मसल रहा था. वैसे तो चूत में धक्के मारते टाइम बूब्स ही मसलते हैं … किंतु मैं थोड़े अलग अंदाज में उनकी गांड मसल रहा था.</p>
<p>काफी देर की चुदाई के बाद मेरी माँ चरम पर आ गई थी. हम एक दूसरे को होंठों में किस करते हुए बस अपने जोश का मजा ले रहे थे. ऊम्म्म्म … आआह …</p>
<p>जब मेरी मान की चूत ने पानी छोड़ दिया तो मैंने अपना लंड निकाला और माँ की चूत का पानी मुँह से चाटना शुरू कर दिया.<br />
मां बोली- आह्ह … मैं तो बहुत दिनों से इस तरह की चुदाई के लिए प्यासी थी बेटा. तू तो बहुत ही मस्त चुदाई करता है. </p>
<p>मगर मुझे मां की गांड बहुत अच्छी लगती थी और मेरा मन मां की गांड मारने का कर रहा था. अभी मेरा वीर्यपात नहीं हुआ था. मैंने मां को ये इच्छा बताई तो वो कहने लगी- मैंने कभी गांड नहीं मरवाई है.<br />
लेकिन मेरे जोर देने पर फिर वो मान गई, बोली- अगर दर्द हुआ तो निकाल देना.</p>
<p>मैंने मन ही मन कहा- एक बार अंदर जायेगा तो फिर कौन निकालने वाला है.</p>
<p>मैंने मां की गांड को ऊपर करवा दिया और उनकी गांड पर हाथ लगा कर उसको दबाते हुए अपने लंड के टोपे को गांड पर सेट कर दिया. फिर एक धक्का मारा तो मां को जैसे बेहोशी सी आ गई. कई मिनट में मां संभली और मुझे पीछे धकेलने लगी लेकिन तब तक मैंने पूरा लंड गांड में घुसा दिया था. मैं मां के ऊपर लेट गया और उनके चूचे दबाने लगा. कुछ ही देर में मां शांत हो गई. फिर मैंने मां की गांड को चोदना शुरू कर दिया. </p>
<p>उनकी गांड बहुत ही ज्यादा टाइट थी. मेरे पापा ने तो कभी चूत भी ढंग से नहीं मारी थी तो फिर गांड तो बिल्कुल कुंवारी ही थी. मुझे गांड चोदने में बहुत मजा आ रहा था. 15 मिनट तक मैंने गांड की चुदाई की और फिर दोबारा से लंड को निकाल कर चूत में पेल दिया.<br />
मां बोली- आज ही जान निकाल देगा क्या हरामी. </p>
<p>मैंने मां की बात नहीं सुनी और अपनी ही मस्ती में लगा रहा. मां की चिकनी हो चुकी चूत को पांच मिनट तक जम कर चोदा और फिर मेरा माल मां की चूत में ही निकल गया. मैं बुरी तरह से हांफ रहा था और मां की हालत भी खराब हो गयी थी. मां को उस रात मैंने कई बार चोदा. उस दिन रात भर हम मां-बेटे की चुदाई चली. इस दौरान मां कई बार झड़ी और वो बिल्कुल खुश हो गई. </p>
<p>उसके बाद तो जब भी मुझे मौका मिलता रहा मैं माँ की चूत चुदाई का मजा लेता रहा. बाकी की कहानियां मैं फिर कभी लेकर आऊंगा.<br />
[email protected]</p>
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		<title>सलहज के साथ प्यार और सेक्स</title>
		<link>https://kahani18.com/sali-sex/salhaj-love-aur-sex/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:30:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sali Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरे साले की शादी उससे आधी उम्र की लड़की से होने से मेरी सलहज सेक्सुअली संतुष्ट नहीं थी. मेरी कामुक नजर भी उस पर थी. आखिर मैंने उसे कैसे चोदा. पढ़ कर मजा लें! मेरा अनिल है और मेरी सलहज का नाम विशाखा है. मेरी सलहज काफ़ी सुंदर है, मैंने ही अपने साले की शादी <a title="सलहज के साथ प्यार और सेक्स" class="read-more" href="https://kahani18.com/sali-sex/salhaj-love-aur-sex/" aria-label="Continue reading सलहज के साथ प्यार और सेक्स">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे साले की शादी उससे आधी उम्र की लड़की से होने से मेरी सलहज सेक्सुअली संतुष्ट नहीं थी. मेरी कामुक नजर भी उस पर थी. आखिर मैंने उसे कैसे चोदा. पढ़ कर मजा लें!<br />
<span id="more-301"></span></p>
<p>मेरा अनिल है और मेरी सलहज का नाम विशाखा है. मेरी सलहज काफ़ी सुंदर है, मैंने ही अपने साले की शादी उससे कराई थी. मेरे साले मेरे से रिश्ते में बड़े हैं, मेरी जब शादी हुई थी, तो मेरे साले टेलीकॉम सेक्टर में जॉब करते थे. हालांकि उनकी उस वक्त शादी नहीं हुई थी. मेरी शादी के बाद मेरे ससुर ने मुझसे कहा कि दामाद जी अब आप ही मेरे बड़े बेटे की कहीं शादी तय करवाइए. </p>
<p>मैंने ओके कह दिया और अपने साले के लिए लड़की ढूँढ़ने लगा. ऐसे ही एक दिन मेरे एक रिश्तेदार ने मुझसे कहा कि मेरी नजर में एक लड़की है, काफी अच्छी है पर अभी बारहवीं का एग्जाम दे रही है.<br />
मैंने पूछा कि लड़की की उम्र क्या होगी?<br />
उन्होंने कहा- अभी उन्नीस साल की हुई है. पर गरीब खानदान से है और उसकी शादी सिर्फ एक जोड़े में ही हो सकेगी.<br />
मैंने कहा- चलो बालिग तो है ही, शादी हो सकती है. </p>
<p>इधर मेरे साले की उम्र 35 साल हो चुकी थी. मैंने अपने उन रिश्तेदार को बताया कि लड़के की उम्र ज्यादा है, आप बात करके देखो, यदि बात बन जाए, तो साले की शादी हो जाएगी. </p>
<p>उस लड़की के पिता थोड़ा ग़रीब थे, इसलिए उन लोगों ने शादी करने के लिए हां भर दी. </p>
<p>जब मैं शादी में दूल्हा को लेकर स्टेज पर गया, तब मेरी सलहज मुझे ही लड़का समझ रही थी. वो इसी ग़लती से मेरे गले में वरमाला डालना चाह रही थी, फिर मैंने इशारा किया तो वो शरमा गयी.<br />
उसकी ये हरकत मेरे दिल को भा गयी. शादी के बाद हम लोग वापिस आ गए.</p>
<p>उसकी ये हरकत से मैं काफ़ी गर्म हो गया था. जब मैं सुसराल पहुंचा, तो मैंने अपनी बीवी को चार बार चोद दिया. </p>
<p>बीवी बोली- क्या बात है … भाभी के आने की खुशी में मेरी चूत का भोसड़ा बना देने पर तुले हो क्या.<br />
मैं हंस दिया और उसकी चुम्मी ले ली.</p>
<p>शादी के कुछ दिनों के बाद मेरे साले की नौकरी छूट गयी, जिस वजह से सुसराल में रोज लड़ाई हो रही थी. उसकी बीवी शायद उससे सेक्सुअली भी संतुष्ट नहीं थी. इसका कारण आधी दुगनी उम्र का अंतर होना भी हो सकता था. मुझे ये बात समझ आ गयी थी कि विशाखा मुझसे चुद सकती है. मैं बस मौका तलाश कर रहा था.</p>
<p>एक दिन मेरे ससुर ने मुझे फोन किया कि आपके साले और उसकी बीवी को आपके पास दिल्ली भेज रहा हूँ. इसकी कहीं नौकरी लगवा दीजिएगा, आपका बड़ा उपकार होगा.<br />
मैंने भी कहा कि अरे इसमें उपकार की क्या बात है, मैं कुछ करता हूँ. आप उन दोनों को इधर भेज दीजिएगा.</p>
<p>मेरे दिलो दिमाग में अभी भी सलहज की मस्त जवानी छाई हुई थी. मुझे लगने लगा कि यदि साले की नौकरी कहीं दूर लगवा दी जाए, तो मैं विशाखा को चोद सकता हूँ.</p>
<p>जब मेरे पास दोनों आए, तो मैंने अपनी बीवी को दोनों का खास ध्यान देने के लिए कहा था. मैंने अपने साले को कहा आप आराम से नौकरी खोजिए … मैं भी आपके लिए कुछ करता हूँ. घर की कोई समस्या नहीं है. मैं आपका जीजा हूँ, आप दोनों इधर ही आराम से रहिए. आपको और आपकी बीवी को यहां कोई दिक्कत नहीं है. </p>
<p>दोस्तो, सबसे पहले आपको अपनी सलहज विशाखा के फिगर के बारे में बता दूं. उस वक्त उसकी चुचियां 34 साइज़ की थीं … कमर 26 की पीछे उसकी गांड 32 की उभरी हुई थी. उसकी निगाहें मेरी तरफ बड़ी कामुक सी रहती थीं. मैंने उसकी चुदास को समझ लिया था. बीवी की नजर बचा उसके साथ हल्के फुल्के मजाक करते समय भी मैं उसको टच कर देता था, जिससे वो मुझे मुस्कुरा कर देख लेती थी.</p>
<p>मेरे साले की नौकरी नॉएडा में लग गई थी. जिधर से उसको आने जाने काफी देर लगती थी. चूंकि प्राइवेट सेक्टर की जॉब थी, सो आने का कोई वक्त निश्चित भी नहीं रहता था. मैं जल्दी आकर विशाखा से हंसी मजाक करके उसको पटाने के चक्कर में रहता था.</p>
<p>एक दिन की बात है मेरा साले ने फोन करके बताया कि आज मैं आपके घर पर नहीं आ पाऊंगा, काम का लोड ज्यादा है, इसलिए आप विशाखा का ख्याल रखना. </p>
<p>रात में वो बेचारी अकेले दूसरे कमरे सोई हुई थी, जब मैं अपनी बीवी को रात में चोद रहा था, तो मुझे लगा कि कोई मुझे छुप कर देख रहा है. मैंने देखा तो वो शायद विशाखा थी. मैं उसकी तरफ मुँह करके अपना लंड दिखा कर चुदाई करता रहा. उस वक्त मैं चोद तो अपनी बीवी को रहा था … पर मुझे महसूस हो रहा था कि मैं अपनी सलहज को चोद रहा हूँ.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने पानी छोड़ा तो विशाखा उधर से हट गई. अब वो मुझे साफ़ नजर आ गई थी. मेरा शक सही था, वो कोई और नहीं … मेरी सलहज विशाखा ही थी, पर ये बात मैंने अपनी बीवी को नहीं बताई. </p>
<p>चुदाई के बाद बीवी बोली- यार मुझे तो ठंड सी लग रही है.<br />
मैंने उसे एक बुखार की दवा के साथ दो गोलियां नींद की भी दे दीं. मेरी बीवी चुदाई की थकान से और नींद की गोलियों के नशे में घोड़े बेच कर सो गई.</p>
<p>मैं दो बजे रात को उठा, तो मेरा लौड़ा टाइट था और बिल्कुल लोहे के रॉड की तरह कड़क था. </p>
<p>मैंने देखा कि मेरी बीवी गहरी नींद में सोई पड़ी है, मैं सीधा अपने सलहज के कमरे में आ गया. वो बेचारी चुदास की मारी सिर्फ़ ब्रा और पेंटी सोई पड़ी थी. जैसे ही मैंने उसके होंठों पर किस किया, तो उसने मुझको कसकर अपने उभरी हुई चुचियों से चिपका लिया. </p>
<p>विशाखा कहने लगी- मैं आपको अपने शादी के टाइम से लाइक कर रही थी, पर बोलने में डर लगता था. जब मैंने आज आपको चोदते देखा, तो मैं काफ़ी व्याकुल हो गयी थी. जब मैंने आपके लौड़ा को देखा, तो उसी वक्त से अपनी भोस में उंगली कर रही थी. फिर पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गयी.<br />
मैंने भी उसे ‘आई लव यू’ बोल दिया. </p>
<p>इसके साथ ही विशाखा के मुँह में अपनी जीभ डालकर एक दूसरे को चूसने लगा. फिर मैंने उसकी ब्रा को खोला और उसकी गोरी गोरी चुचियों को मुँह में लेकर खूब चूसा.<br />
विशाखा मुझसे बोली- जीजा जी … मुझे आपका लंड चूसना है. </p>
<p>मैं राजी हो गया. इतने में उसने जोश में आकर मेरा निक्कर खोल दिया और मेरे लम्बे और मोटे लंड को मुँह में लेकर भूखी रंडी की तरह चूसने लगी.<br />
इस तरह मैं भी 69 में आकर उसकी मखमली चूत जीभ पर मारकर चाटने लगा. फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डालकर उसे पूरा गर्म कर दिया, जिससे उसकी चूत से रस निकल गया. उसकी चूत के रस को मैं पूरा चट कर गया और वो भी मेरे लंड का रस पी गयी. </p>
<p>इसके बाद हम दोनों बाथरूम में मूत कर आए. कुछ देर बाद वो फिर से मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी. उसने दो मिनट में ही मेरे लंड को खड़ा कर दिया.<br />
अब विशाखा बोली- मेरे सोना … अपनी सलहज की जवान चूत में अपने लौड़े को जल्दी से पेल दो. </p>
<p>इस बार मैंने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर उसके चूत में घुसाना शुरू किया. उसकी चूत बड़ी टाईट थी. लंड घुस ही नहीं रहा था. मैंने चूत की फांकों में लौड़ा फंसाया और धक्का मार दिया. इस धक्के से मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया. वो जोर से चिल्लाने को हुई, पर मैंने उसके मुँह पर हाथ लगाकर बंद कर दिया. फिर बिना रुके धक्का मारकर लंड पूरा अन्दर बाहर करने लगा. </p>
<p>विशाखा के मुँह से ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहो उई उई’ की आवाजें निकल रही थीं. लेकिन कुछ देर बाद वो मज़े से चुदने लगी थी. मैं लंड पेलते हुए उसके गोरे गोरे चुचों को बेरहमी से मसल रहा था. वो मेरे को मदहोश होकर प्यार कर रही थी. </p>
<p>जब मेरा वीर्य निकलने वाला था, तो मैंने पूछा कि माल कहां निकालूं?<br />
वो बोली- मेरी बुर में ही गिरा दीजिए.<br />
मैं बोला- ऐसे में तो तुम पेट से रह जाओगी.<br />
तो वो बोली- मैं पहले से ही प्रेगनेंट हूँ, बस अभी एक महीना ही हुआ है.</p>
<p>उसका इतना बोलते ही मैंने सारा माल उसकी चुत में गिरा दिया. </p>
<p>फिर हम लोग अलग हुए और मैं कमरे में जाकर सो गया. सुबह हुए मेरी बीवी अपनी भाभी को डॉक्टर के यहां रूटीन चैकअप कराने ले गई. </p>
<p>जब शाम में मेरा साला वापिस अपने फ्रेंड के यहां से आया, तो उसने बताया कि मेरी जॉब यूपी में हो गई है. इसलिए हम लोग दो दिन बाद वापिस चले जाएंगे. </p>
<p>फिर वो दिन आ ही गया, मेरी सलहज मेरे को छोड़ कर चली गयी. मैं बहुत मायूस हो गया. </p>
<p>पर खुदा को लगा कि मैं फिर अपनी सलहज से मिलूं, ऐसा ही हुआ. इत्तेफाक से मेरा ट्रांसफर अपनी सुसराल में ही हो गया.<br />
मैंने अपनी बीवी को बताया कि मेरा ट्रांस्फर तुम्हारे मायके में हो गया है.<br />
यह सुनकर वो भी खुश हो गयी. </p>
<p>फिर हम लोग सुसराल के लिए निकल गए. जब मैं सुसराल पहुंचा, तो मेरी आंखें अपनी प्यारी सलहज विशाखा को देखकर मन खुश हो गया. इस बार जब मैंने देखा कि विशाखा की चुचियां अब करीब 36 डी की हो गयी थीं, क्योंकि वो एक बेबी की माँ बन गयी थी. </p>
<p>हम लोगों ने एक फ्लैट किराए से ले लिया था. चूंकि मैं अब अपनी ससुराल के शहर में था, तो मेरी बीवी अपनी माँ के साथ ज्यादा जाती रहती थी. </p>
<p>मैंने कुछ दिन के बाद सब जान लिया था कि ससुराल में किस वक्त मेरी सलहज अकेली रहती है. जब सुसराल में कोई नहीं रहता है, तो मैं चुपके से सुसराल पहुंच कर अपनी सलहज विशाखा को खूब चोदता हूँ. </p>
<p>इस बार विशाखा अपने पति के साथ रहने नहीं गई थी … क्योंकि उसका बेबी अभी छोटा था. इससे दो बातें मजेदार हुई थीं. एक तो विशाखा की चूत बिना लंड के चुदासी सी ही रहती थी. दूसरी बात ये कि उसकी चूचियों से दूध निकलता था, जो मुझे पीने में बड़ा मजा आता था.</p>
<p>दोस्तो, मेरी साली सलहज की चुदाई की कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताना … प्लीज़ मेल करना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>खेल वही भूमिका नयी-5</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/khel-vahi-bhumika-nayi-part-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:27:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamukta]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[अभी तक इस सेक्स स्टोरी के चौथे भाग खेल वही भूमिका नयी-5 तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली का पति कांतिलाल मुझे बेतहाशा पेले जा रहा था. अब आगे: मैं अपनी टांगें बिस्तर पर पटकने लगी और दर्द से छटपटाने लगी. मैं सिर पटकने लगी. मुझे इतनी जोर दर्द हुआ कि पेट में ऐसा लगा <a title="खेल वही भूमिका नयी-5" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/khel-vahi-bhumika-nayi-part-5/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-5">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तक इस सेक्स स्टोरी के चौथे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-5<br />
तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली का पति कांतिलाल मुझे बेतहाशा पेले जा रहा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मैं अपनी टांगें बिस्तर पर पटकने लगी और दर्द से छटपटाने लगी. मैं सिर पटकने लगी. मुझे इतनी जोर दर्द हुआ कि पेट में ऐसा लगा कि मेरी बच्चेदानी फट गई. मैं अभी संभल भी नहीं पाई थी कि उसने एक ही सांस में उसी तरह के लगातार तीन धक्के मार कर अपना लिंग मेरी योनि के अंतिम छोर तक पेला और मेरे ऊपर रुक गया.</p>
<p>मैं दर्द से छटपटाने का प्रयास भी नहीं कर पा रही थी … क्योंकि उसने मुझे अपनी पूरी ताकत से पकड़ रखा था. मेरी सांस जैसे रुक सी गई थी और मुँह से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी. मैं अपने पैर घुटनों से मोड़ जांघें चिपकाने जैसे करने लगी. </p>
<p>वो मुझे तड़पता हुआ देखता रहा और बहुत समय के बाद जब मैंने अपनी आंखें खोलीं, तो वो मुझे मुस्कुराते हुए देख रहा था. मेरे पेट में नाभि के पास दर्द था, पर अब कम हो गया था.</p>
<p>मैंने उसे गुस्से में बोला- हटो मेरे ऊपर से … आप बहुत बेरहम इंसान हो.<br />
पर उसने मेरे हाथों को और जोर से दबाया और धीरे धीरे लिंग अन्दर बाहर करता हुआ बोला- दर्द में ही तो मजा है सारिका, अभी ये दर्द तुम्हें खुद मजेदार लगने लगेगा.</p>
<p>मैं गुस्से में थी और उसे अपने ऊपर से हटाने का प्रयास करते हुए बोली- कोई इतनी बेरहमी से चोदता है क्या, मैंने क्या मना किया था आपको … मैं आपको सम्भोग तो खुद मर्जी से करने दे रही थी.<br />
पर वो मुझे हिलने तक नहीं दे रहा था और बोला- अच्छा माफ कर दो, अब आराम से करूंगा. क्या करूं, तुम हो इतनी सेक्सी कि खुद को रोक पाना मुश्किल था.</p>
<p>इतना कह कर वो धीरे धीरे मुझे धक्के देते हुए लिंग अन्दर बाहर करने लगा. पर मैं अभी भी उसे अपने ऊपर से हटाने का प्रयास कर रही थी. वो मुझे धक्के मारे जा रहा था और मैं बिना उसे कुछ बोले अपने ऊपर से हटाने का जोर लगा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट तो ऐसे ही हम दोनों में लड़ाई चलती रही. फ़िर उसने मेरे हाथ छोड़ दिए और सिर मेरे सिर के पास रख मुझे कंधों से पकड़ लिया. अब तो मैं और भी उसे हटा नहीं सकती थी. उसके धक्के अब मेरे मन को कमजोर करने लगे थे और जैसे जैसे वो मेरे गले को चूमता हुआ धक्कों की गिनती बढ़ाने लगा, मैं भी उसके आनन्द में खोने लगी.</p>
<p>जैसे जैसे धक्के बढ़ते गए, वैसे वैसे मेरी गर्माहट भी बढ़ती गई और मैं उस मस्ती में उसको अपनी बांहों में जकड़ने लगी. कुछ ही पलों मैं उसके लिंग से मेरी योनि में हो रही रगड़ से प्यार करने लगी. मैं खुद ही अपनी पूरी जांघें खोल कर उसे भरपूर जगह देने लगी कि वो आराम से मुझे धक्के मारे.</p>
<p>कांतिलाल अब तेज़ी से सांसें लेने लगा था. वो अब थकने जरूर लगा था, मगर धक्कों में कोई कमी नहीं आने दे रहा था. दूसरी तरफ मेरी भी उत्तेजना में कोई कमी नहीं थी. मैं भी आह आह ओह ओह करती हुई उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>तभी मैं उसके चूतड़ों को अपनी टांगों से लपेट कर और हाथों से उसे पीठ को पकड़ अपनी ओर खींच कर बोल पड़ी- कांतिलाल जी … आह आह और तेज़ चोदो और तेज़ धक्के मारो … रुकना मत.</p>
<p>कांतिलाल ने मुझे इस कामुक अवस्था में पाते ही मेरे होंठों से होंठ चिपका लिया. टांगें अपनी सीधी कर और हाथों को बिस्तर पर टिका कर मुझे इतने तेज तर्रार धक्के मारे कि एक पल में ही मैं सिसकते, कराहते हुए उसे पकड़ कर नीचे से उछलती हुई झड़ने लगी.</p>
<p>एक मिनट से कम समय में ही उसने अनगिनत धक्के मारे और मैं झड़ कर ढीली पड़ गई, पर उसके धक्के रुके नहीं. मैं हांफ रही थी और उसकी भी सांसें फूलने लगी थी.</p>
<p>मैंने बोला- थोड़ी देर रुक जाओ कांतिलाल जी. </p>
<p>उसने भी मेरी बात सुनते हुए अपना लिंग मेरी योनि के भीतर ही रखा और मेरे ऊपर लेटा रहा.<br />
वो बोला- अंत तक मेरा साथ दोगी न?<br />
मैं बोली- कोशिश करूँगी, आपने तो पहले ही मेरी ताकत सारी खत्म कर दी है.<br />
उसने बोला- कुछ नहीं होगा, बस कोशिश करती रहो, अभी काफी देर तक करना है और अभी तो दो दिन और यहां रहना है.<br />
मैंने बोला- पता नहीं मैं अभी बिस्तर से उठ पाऊंगी या नहीं … दो दिन तो बहुत दूर की बात है. आपने तो पहले ही मेरी सारी ऊर्जा चूस ली है. मेरी जांघें फैले फैल दर्द होने लगी हैं.<br />
तब उसने कहा- कोई बात नहीं. इतनी सारी तरकीबें सीखी हैं जीवन में, वो कब काम आएंगी.</p>
<p>इतना कह कर वो मेरे ऊपर से उठ गया और घुटनों के बल बिस्तर पर बैठ गया. उसका लिंग बुरी तरह से तनतना रहा था और मेरे योनि के रस में भीग कर झागदार और चिपचिपी दिख रही थी.</p>
<p>उसके उठने से मेरी जांघों को बड़ी राहत मिली और मेरी योनि, जांघें, चूतड़ों को भी राहत सी मिल गई. बिस्तर भी गीला हो गया था.</p>
<p>कांतिलाल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उठाया और बोला- आओ अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ.<br />
मैंने बोला- मुझमें इतनी ताकत नहीं बची है.<br />
उसने बोला- आराम से धीरे धीरे हिलना और जांघें घुटनों से मोड़ लेना, इससे आराम मिलेगा. नीचे से मैं भी जोर लगाऊंगा.</p>
<p>मैं फिर भी नहीं मान रही थी … मगर उसने जबरदस्ती मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और मेरी टांगें दोनों तरफ फैला कर अपना लिंग मेरी योनि में प्रवेश कराते हुए मुझे सीधा होने को बोला.</p>
<p>मैं बिल्कुल 90 डिग्री के कोण में उसके ऊपर थी. लिंग तो उसने घुसा लिया था मगर मुझसे जोर लग ही नहीं रहा था. इसलिए उसने खुद नीचे से हल्का हल्का जोर देना शुरू किया और मेरी कमर पकड़ कर अपने हाथ से मुझे हिलाना भी शुरू कर दिया.</p>
<p>संभोग करते हुए लगभग एक घंटा होने को था और कांतिलाल उन मर्दों में से था, जो अपने अनुसार अपना वीर्य रोक सकते थे. सम्भोग के बीच में अंतराल होने का मतलब था, अब कांतिलाल ने इससे पहले जित्तनी देर सम्भोग किया था, उतनी ही देर संभोग वो बिना झड़े फिर से कर सकता है. मैं बिल्कुल उसके विपरीत थी, मैं और अधिक जल्दी झड़ने वाली थी. </p>
<p>यही हुआ, धीरे धीरे उसके धक्के बढ़ने लगे और संभोग की क्रिया भी आगे बढ़ने लगी. </p>
<p>कुछ पलों के धक्कों में मैं फिर से गर्म होने लगी और मेरी कमर अपने आप चलते हुए लिंग पर योनि धकेलनी लगी. मैं अपने हाथ बिस्तर पर टिका कर जोर लगाते हुए तेज़ धक्के मारने लगी.</p>
<p>कांतिलाल आनन्द से सिसकारियां भरने लगा और पूरी ताकत से कभी मेरे स्तन, तो कभी चूतड़ों को मसलने लगा. मैं उसकी उत्तेजना समझ गई थी और संभोग की अवधि भी बहुत अधिक हो चुकी थी, इसलिये अब कांतिलाल को झड़ना थोड़ा आसान सा लगने लगा था.</p>
<p>मर्दों की कमजोरी ये होती है कि वे औरत की उत्तेजना देख कर बेकाबू हो जाते हैं. अब मेरे लिए सही मौका था और जिस तरह से उसके लिंग की नाड़ियां अभी चल रही थीं, उससे मुझे एहसास हो रहा था कि उसका लक्ष्य समीप है.</p>
<p>मैं भी अब खुद को ज्यादा देर नहीं रोक सकती थी, इसलिए पूरे जोर से धक्के देने लगी ताकि मैं झड़ जाऊं.</p>
<p>पर एक ही पल में कांतिलाल ने मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से गिरा दिया और बहुत तेज़ी में बिस्तर से नीचे उतर गया.</p>
<p>अपनी मर्दानी ताकत का प्रयोग करते हुए उसने मुझे भी मेरी टांगें पकड़ खींचा और बिस्तर से नीचे उतार दिया. उसने मुझसे कुछ नहीं कहा, बल्कि अपनी मनमानी करते हुए मेरी गर्दन पकड़ मुझे बिस्तर पर झुका दिया.</p>
<p>मैं उसके जोर के आगे कुछ समझ ही नहीं पाई और कमजोर महिला की भांति उसके अनुसार बिस्तर पर पेट के बल लेट गई.</p>
<p>मेरा पेट से लेकर सिर तक का हिस्सा बिस्तर पर था और टांगें जमीन पर टिकी थीं. कांतिलाल ने तेज़ी में मेरी टांगें फैलाईं और तुरंत अपना लिंग में योनि में घुसा दिया. ये सब इतनी जल्दी में उसने किया कि मेरे लिए न कुछ समझ पाना आसान था, न खुद को संभाल पाना. </p>
<p>इस तरह के जल्दबाजी से मैं इतना तो समझ गई कि कांतिलाल हद से ज्यादा उत्तेजित था और अब उसके धक्के मेरे लिए बड़ी चुनौती थी.</p>
<p>मुझे अंदाज़ा हो चुका था कि वो झड़ने के क्रम में जो धक्के मुझे मारेगा, वो असहनीय होगा … पर मैं उसके वश में थी और मेरे पास बर्दाश्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.</p>
<p>उसने जैसे ही अपना लिंग घुसाया, पल भर के भीतर ही उसने 20-25 धक्के मार दिए. पर वो धक्के ज्यादा गहराई तक नहीं थे, सो मुझे परेशानी की जगह आनन्द मिला.</p>
<p>इससे मुझे लगा कि कोई डर की बात नहीं है और मैं बेफिक्र हो गई थी. इन धक्कों के बाद दो पल के लिए कांतिलाल रुक गया और हांफने लगा. मैं भी अपनी बेचैनी संभाले अगले पल के इंतज़ार में बिस्तर पर लेटी राह देखने लगी.</p>
<p>हम दोनों अब तक पसीने पसीने हो चुके थे और मेरी जांघों में बहुत दर्द होने लगा था. योनि के भीतर भी बहुत दुख रहा था मगर उस वक़्त चरम सुख की लालसा के आगे हर दर्द सहने को तैयार थी. कांतिलाल का लिंग मेरी योनि के भीतर हिचकियां ले रहा था. उसने अब अपने बाएं हाथ से मेरी कंधे को पकड़ा और दाएं हाथ से मेरी कमर को थामा. फिर एक सुर में उसने धक्के मारने शुरू कर दिए.</p>
<p>उसके इस बार के धक्के इतनी ताकत और तेज़ी से थे कि मेरी सिसकारियां कराहों में बदल गईं. उसका हर धक्का इतनी गहराई तक जा रहा था, जैसे मानो मेरी नाभि भेद कर निकल जाएगा. दो मिनट के भीतर ही मैं अपनी जांघें चिपकाने का प्रयास करने लगी और योनि बिस्तर के किनारों पर दबाने लगी. मैंने चादर को मुठ्ठियों में भर लिया और उसके धक्कों के साथ अपनी आवाजें निकालने लगी.</p>
<p>‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … आह … ओह्ह..’</p>
<p>मैं भलभला कर झड़ने लगी.</p>
<p>मेरी टांगें काम्पने लगी थी और मैं अपनी जांघें आपस में ऐसे चिपकाना चाह रही थी, जैसे मानो अपनी योनि छुपाने के प्रयास करना चाह रही होऊं. पर मेरे लिए संभव नहीं था, क्योंकि कांतिलाल ने अपनी दोनों टांगों से मेरी टांगें फैला रखी थीं और धक्के मारते हुए अपने घुटनों से मेरी टांगें रोक कर उन्हें फैलाये रखा था.</p>
<p>मेरी योनि से रस की झड़ी फूट गई थी और मैं रस को अपनी जांघों से पैर तक बहता हुआ महसूस करने लगी थी.</p>
<p>मैं अगले 20 से 30 धक्कों में पूरी तरह झड़ चुकी थी. मगर कांतिलाल रुकने का नाम नहीं ले रहा था. वो मुझे उसी तेज़ी, ताकत और गहराई से धक्के मारे जा रहा था.</p>
<p>मैं ढीली पड़ने लगी थी और अब विनती करने लगी- छोड़ दो कांतिलाल जी … मैं मर जाऊंगी, अब और नहीं सह सकती.</p>
<p>पर कांतिलाल के कानों में जूँ तक नहीं रेंगी. वो निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा. लगभग 5 मिनट के बाद उसने मुझे एक बहुत ही जोर का धक्का मारा और मैं चीख पड़ी- ओह्ह … म म. … अअअअह..<br />
मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी बच्चेदानी के मुँह में उसका सुपारा घुस गया. उसने उस झटके के साथ एक तेज़ पिचकारी मारी. फिर 1-2-3-4 धक्के मार मेरे पीठ पर निढाल होकर गिर पड़ा और तेज़ी से हांफने लगा.</p>
<p>उसके झड़ने से मुझे बहुत राहत मिली, पर उसका वजन मेरे ऊपर था. उसका लिंग अभी भी मुझे तना हुआ महसूस हो रहा था और रह रह कर हिचकियां ले रहा था. उसके लिंग की नसों में दौड़ता हुआ खून मैं अपनी योनि में महसूस कर रही थी. </p>
<p>काफी देर तक वो मुझे पकड़ कर सुस्ताता रहा. उसका लिंग भी सिकुड़ कर सामान्य हो गया और फिसलता हुआ मेरी योनि से बाहर निकल गया.</p>
<p>लिंग के निकलते ही उसका गाढ़ा वीर्य धीरे धीरे मेरी योनि की अंतिम छोर से रिसता हुआ योनि द्वार से बाहर निकलने लगा.</p>
<p>मैं बहुत कमजोर महसूस करने लगी थी. बाकी के समय तो बदन में इतनी ताकत रहती है कि अपनी योनि की मांसपेशियों को अपने मन मुताबिक सिकोड़ और ढीली कर सकूं. पर मेरे बदन में अब इतनी ताकत नहीं बची थी और न ही मैं जोर लगा पा रही थी.</p>
<p>स्खलन के बाद का समय तो योनि सिकोड़ने और ढीली करने से वीर्य बाहर निकलने लगता था, पर अब तो मुझसे कुछ भी नहीं हो पा रहा था. मेरी योनि का छेद जैसा का तैसा खुला महसूस हो रहा था, जिससे मैं ठंडी हवा का बहाव महसूस कर रही थी.</p>
<p>कांतिलाल का वीर्य इतना गाढ़ा था कि वो बहकर योनि द्वार तक आ तो गया था, पर एक बड़े से बूंदा की तरह मेरी योनि के बाहर चिपक कर झूलता रहा.</p>
<p>थोड़ी देर में कांतिलाल मेरे ऊपर से उठकर बिस्तर पर लेट गया और मैं वैसी ही पड़ी रही. मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था, सो कांतिलाल ने मुझे पकड़ कर बिस्तर पर चढ़ा लिया. पूरा बिस्तर पानी से गीला हो ही चुका था और अब वीर्य के दाग भी लग गए थे.</p>
<p>मैं बुरी तरह थक चुकी थी और ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी योनि की नसें सुन्न हो गई हैं. मेरी टांगों को मानो लकवा सा मार गया था. पूरे बदन में खून रुक सा गया था.</p>
<p>कांतिलाल के मित्रों ने तो अभी तक मेरे साथ केवल संभोग किया था, पर कांतिलाल ने तो मुझे पूरी तरह से निचोड़ लिया था. पता नहीं अगले सुबह क्या होने वाला था, पर अब मैं सोचना छोड़ आंखें बंद करके सो गई. रात के तीन बज चुके थे और कांतिलाल ने करीब डेढ़ घंटे तक मेरे पूरे बदन को रौंदा था.</p>
<p>अगली सुबह मैं 10 बजे उठी, तो कमरे में कांतिलाल नहीं था. मैं अभी भी पूरी तरह से नंगी पड़ी थी. मैंने सामने पड़ा गाउन पहना और स्नानागार चली गई. वहां मैंने शौच किया और गाउन उतार खुद को आईने में देखा. वहां बड़ा सा आइना लगा था, सो मैं उसमें ऊपर से नीचे तक अपने आपको देख सकती थी. अपनी हालात देख कर रात की कहानी पल पल मेरे आंखों के सामने आ गई. वो जो रात नहीं दुखा था, मुझे वो भी दुख रहा था. कांतिलाल का वीर्य सूखकर पापड़ की तरह मेरी योनि के आस पास और बालों में चिपका हुआ था. स्तनों पर हल्के दांतों के निशान थे और छूने से दर्द भी हो रहा था.</p>
<p>मैं कुछ देर में नहा धो कर साफ़ हो गई और बाहर आ गई. बाहर बिस्तर की तरफ गई, तो दंग रह गई. मुझे डर लगने लगा कि कमरे की साफ सफाई के लिए जो भी आएगा, वो समझ जाएगा. </p>
<p>तभी रमा कमरे में आ गई और मुझे अपने गले से लगाकर बोली- क्या एक्टिंग की तुमने कल, आज सब चकित हो जाएंगे.</p>
<p>फिर उसने मुझे पूछा- रात कैसी कटी तुम्हारी?<br />
मैंने उत्तर दिया- ठीक रही.<br />
रमा- कांति ने तुम्हें सोने दिया या नहीं?<br />
मैं- हां सोने तो दिया, पर उससे पहले मुझे निचोड़ कर रख दिया.</p>
<p>रमा हंसती हुई कहने लगी- अरे यही तो असली मजा है. जब तक थक के कोई चूर न हो जाए, सेक्स का क्या मजा. वैसे कांति तुम्हें बहुत पसंद करता है, इसलिए शायद कल ज्यादा ही आक्रामक हो गया होगा.<br />
मैं- जो भी हो, तुम्हारा पति बहुत ताकतवर है.<br />
रमा- हां जानती हूं और मुझे बहुत पसंद है. जब मैं उसकी मर्दानगी देखती हूं, तो मुझे घमंड होने लगता है. कल मेरी इच्छा थी तुम दोनों को देखने की, पर किस्मत में नहीं था. पर आज या कल में शायद मुझे देखने का मौका मिले. मुझे अपने पति की मर्दानगी पर गर्व होता है.</p>
<p>मैं कुछ नहीं बोली.</p>
<p>वो आगे बोली- मैं भी नहा धो लूं, कल रात में हमारा भी दो राउंड चला.</p>
<p>वो नहाने स्नानागार चली गई और मैं शृंगार करने लगी. जब वो बाहर आई तो केवल एक तौलिए में थी और बहुत मादक दिख रही थी. हो भी क्यों न … इतना संजो के रखा जो था. हफ्ते में 3 बार पार्लर भी तो जाती थी. ऊपर से खान-पान भी अच्छा और कसरत भी करती थी. </p>
<p>कमरे में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था, सो वो आईने के सामने आते ही अपने बाल सुखाने लगी और फिर अलमारी से कपड़े निकाल कर आईने के सामने तौलिया निकाल कर नंगी हो गई.</p>
<p>मैं भी एक औरत हूँ और कुछ भी नया नहीं था, सो उसे शायद कोई असहज नहीं लगा. वो नंगी हो गई. मैंने उसे देखा, रमा में पहले के मुकाबले थोड़ा बदलाव आया था, अब उसके स्तन पहले की तरह सुडौल नहीं थे बल्कि झूल रहे थे, उसके चूचुक भी काफी लंबे दिख रहे थे. चूतड़ पहले से बड़े बड़े, पर पेट सपाट था क्योंकि व्यायाम करती थी. उम्र की वजह से ऐसा था, पर अभी भी वो बहुत कामुक और आकर्षक थी. फिर दिल से तो अभी भी वो जवान ही थी. </p>
<p>उसने अपना शृंगार करना शुरू किया. महंगा लोशन और मेकअप लगाया और जीन्स और शर्ट पहन तैयार हो गई. जीन्स और शर्ट में वो किसी 30 साल की महिला के जैसे दिख रही थी. </p>
<p>मैं अभी भी गाउन में थी और उलझन में थी कि क्या पहनूँ. पर जैसे ही रमा तैयार हो गई, उसने मेरी उलझन दूर करने में सहायता तो की, पर वो सब उसकी मर्जी से था … न कि मेरी मर्ज़ी से.</p>
<p>उसने पहले तो मुझे एक टी-शर्ट और स्कर्ट पहनने को कहा, पर वो मुझे जंच नहीं रहे थे.</p>
<p>तो उसने मुझे एक लेगिंग और टॉप दिया. वो वैसे तो मेरे नाप के ही थे, मगर मैंने ऐसे कपड़े कभी नहीं पहने थे … सो मुझे बहुत कसाव सा महसूस हो रहा था. हालांकि उस परिधान में मैं ज्यादा बुरी भी नहीं लग रही थी. पर उम्र के हिसाब से देखा जाए, तो सही भी नहीं लग रहे थे. पर शहरों में तो मुझसे भी बूढ़ी औरतें ये सब पहनती हैं. बाकी बुराई ये थी कि कपड़ों में मेरे उभार साफ दिख रहे थे. मेरे चूतड़ गठीले और काफी बड़े दिख रहे थे और टॉप ऐसा था, जिसकी गर्दन बहुत अधिक खुली थी और उसमें से मेरे एक तिहाई स्तन साफ़ दिख रहे थे.</p>
<p>मुझे जहां तक पता था कि उस होटल से बाहर नहीं जाना था, सो मैंने ज्यादा संकोच नहीं किया. पर जब मैंने गौर से अपने पेट को देखा, तो सच में बहुत लज्जा सा महसूस हुई कि मेरा पेट इतना बड़ा दिख रहा है और दूसरी के मेरी योनि उस लेगिंग में उभर कर दिख रही थी. </p>
<p>इसलिए मैंने रमा से बोला- ये ड्रेस अच्छी नहीं लग रही. मुझे अपने तरीके से तैयार होने दो. </p>
<p>इस पर वो मुझसे नाराज़ होने लगी. तब मैंने उसे समझाया कि जब सबको चौंकाना ही है, तो थोड़ी मेरी भी बात मान लो.</p>
<p>इस बार वो मान गई और फिर मैं अपने तरीके से अपनी साड़ी पहन कर घरेलू और संस्कारी महिला की तरह तैयार हो गई. मुझे इस रूप में देख रमा खुद चकित हो गई. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
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<p>कहानी का छठा भाग: खेल वही भूमिका नयी-6</p>
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		<title>भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड <a title="भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.</p>
<p>यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.</p>
<p>भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया. </p>
<p>मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.<br />
मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.</p>
<p>मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.<br />
हम दोनों में बातें होने लगी.</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.</p>
<p>भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.</p>
<p>फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.</p>
<p>हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है. </p>
<p>उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.<br />
मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.</p>
<p>तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.<br />
मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.</p>
<p>फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.</p>
<p>भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.</p>
<p>मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.</p>
<p>तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा. </p>
<p>फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.</p>
<p>लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.</p>
<p>वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.</p>
<p>ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया. </p>
<p>मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.</p>
<p>कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.</p>
<p>फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया. </p>
<p>मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.<br />
उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया. </p>
<p>भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.<br />
धीमी चुदाई शुरू हो गई. </p>
<p>भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था. </p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.<br />
उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.<br />
उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.<br />
भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है. </p>
<p>भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.</p>
<p>भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली. </p>
<p>फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया. </p>
<p>मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.<br />
वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है. </p>
<p>मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.</p>
<p>दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं. </p>
<p>गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.</p>
<p>काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.</p>
<p>मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की. </p>
<p>भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.</p>
<p>उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है. </p>
<p>फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.</p>
<p>मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा. </p>
<p>जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.</p>
<p>सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.</p>
<p>वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.</p>
<p>अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी. </p>
<p>तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी. मुझे आप लोग मैसेज करके बताना ताकि मैं आप लोगों के मैसेज से प्रेरित होकर आगे भी आपके लिए अपनी कहानी लेकर आऊं.<br />
आपका योगू<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दोस्त की साली की अन्तर्वासना</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-sali-ki-antarvasna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:41:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Train Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना. आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. मेरे दोस्त के साथ उसका <a title="दोस्त की साली की अन्तर्वासना" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-sali-ki-antarvasna/" aria-label="Continue reading दोस्त की साली की अन्तर्वासना">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना.</p>
<p>आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. </p>
<p>मेरे दोस्त के साथ उसका पूरा परिवार था और उसके साथ उनकी भांजी और उनकी साली भी थी. दोस्त की साली का नाम नलिनी और भांजी का पिंकी था. नलिनी की उम्र 23 साल थी और पिंकी 19 साल की थी. </p>
<p>आरम्भ में मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि वे दोनों हमारे साथ यात्रा में होंगे. हमारी यात्रा रेल से शुरू हुई. शुरू में सब कुछ सामान्य था. हमें जहां जाना था, वहां पहुंचे, रात को रूम लेकर सो गए. </p>
<p>सुबह उठ कर भगवान के दर्शन किए और वापस अपने रुकने की जगह आ गए. दोपहर को खाना खाने के बाद थोड़ा आराम किया, बाद में हम सब लोग घूमने निकले. </p>
<p>हमें घूमने के लिए आस पास के एरिया में ही जाना था और दो दिन वहीं घूमना था. इसलिए हम सभी ने तय किया और एक बस ले ली. </p>
<p>बस की यात्रा शुरू हुई. मैं सबसे लास्ट वाली सीट पर बैठा था. नलिनी को जगह न मिलने के कारण वह खड़ी थी. कुछ देर बाद वह आकर मेरे घुटनों पर बैठ गई. तब तक मेरे मन में कोई भी गलत विचार नहीं था. </p>
<p>बस चलती रही, वो हिलती रही. उसके स्पर्श ने मेरी भावना बदल दी. इसी बीच मेरा लंड अपने आप ही खड़ा हो गया और उसे टच करने लगा. इस बात को नलिनी भी जान चुकी थी. मैंने उसको उठने को कहा, लेकिन वह न उठी, शायद वो भी लंड के मजे ले रही थी. हम दोनों बिना कुछ बोले मजा लेने लगे. स्टॉप आता, तो उतर कर घूमने लगते और वापस अपनी जगह आकर बैठ जाते. जब भी बैठते, तो वो और भी ज्यादा चिपक कर लंड का स्पर्श पाने की पोजीशन में खुद को बैठा लेती.</p>
<p>ऐसे ही दो दिन की यात्रा समाप्त हुई. बाहर गांव था, नलिनी के परिवार के लोग होने के कारण वहां कुछ नहीं हो सकता था और ना ही कुछ आगे हो सका. बस इतना ही हुआ कि उसने और मैंने एक दूसरे का साथ पाने की लालसा एक दूसरे तक बिना बोले ही पहुंचा दी थी.</p>
<p>फिर हम वापस घर की ओर निकलने लगे. उधर से रात की ट्रेन थी. हमारी कोई भी सीट कन्फर्म नहीं थी. फिर हम लोग ऐसे ही बिना आरक्षण के ट्रेन में बैठ गए. हम सब ये सोच कर बैठ गए थे कि रास्ते टीटीई से मिलकर कुछ जुगाड़ कर लेंगे.</p>
<p>लेकिन हमारा नसीब खराब था या फिर मेरा ही अच्छा था. ये मुझे बाद में पता चला था. </p>
<p>हुआ यूं कि ट्रेन में सब लोग अलग अलग जगह एडजस्ट हो गए. बाद में टीटीई से मिलकर मैंने एक सीट कन्फर्म करवा ली. इस बात को लगभग 2 घंटे निकल गए थे. सब सामान उस सीट के पास रखकर सब फैल गए. उस सीट पर सिर्फ दोस्त की बीवी, मेरी भाभी और उसकी बहन नलिनी बैठ गई.</p>
<p>इस सब में रात के 12 कब बजे, मुझे पता ही नहीं चला. फिर सबको जुगाड़ करके और सबको सुला देने के बाद मैंने सामान के पास जाने का सोचा और उधर की तरफ निकल पड़ा. </p>
<p>वहां पहुंचने के बाद देखा कि भाभी नीचे सो गई थीं और नलिनी ऊपर अकेली पैर मोड़ कर बैठी थी, क्योंकि लास्ट वाली सीट थी और ऊपर के दोनों लोग सो गए थे. </p>
<p>फिर मैं वहीं जगह बना कर बैठ गया.</p>
<p>अब तक नलिनी और मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी, तो उसने मुझे बैठने के लिए रोका नहीं. फिर हमारी कुछ इधर उधर की बातें शुरू हो गईं. कॉलेज से लेकर पर्सनल बातें तक हुईं.</p>
<p>अब तक मेरे दिल में कुछ भी गलत बात नहीं थी, पर एक झटका ऐसा लगा कि कुछ हुआ हुआ यूं कि उसका हाथ मेरे हाथों से जा टकराया. फिर हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, तो वो शरमा गई. </p>
<p>मैंने उसके हाथ को अब तक छोड़ा नहीं था. मैं उसके हाथ को सहलाने लगा. वो कुछ नहीं बोली. बस फिर क्या था. </p>
<p>अब तक रात के करीब 2 बज चुके थे. किसी के देखने का सवाल ही नहीं था. फिर भी मैं सावधानी पूर्वक आगे बढ़ा और उसके पैर को सहलाया. वो कुछ नहीं बोली. इससे मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं उसके पाँव को सहलाता रहा. </p>
<p>फिर उसी ने पहल की- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?<br />
मैंने तुरंत ना कहा, जोकि सच था. </p>
<p>फिर ऐसे ही सहलाते हुए गर्मा-गर्मी में सफर चल रहा था. अब मैंने हिम्मत करके उसकी छाती पर हाथ लगाया, तो उसके मुँह से ‘ऊंह … आह..’ की आवाज आई. मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो मुस्कुरा दी. मैंने बेहिचक उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. </p>
<p>ऐसे ही 10 मिनट तक लंड सहलाने के बाद मैंने उसको इशारा किया कि टॉयलेट में चलो. </p>
<p>मैं उसे इशारा करके आगे बढ़ गया और वो भी 2-3 मिनट बाद आ गई. उसके अन्दर आते ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा बंद किया और उस पर टूट पड़ा. जहां जी चाहा, वहां सहलाने लगा.</p>
<p>उसने नाईट पैंट और टी-शर्ट पहनी थी. मैंने उसकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डालकर मम्मों को मसलने लगा. वो चुदासी तो थी ही, एकदम से बहुत गर्म हो गई. </p>
<p>फिर मैंने उसकी पैंट में हाथ डाल कर उसकी चूत में फिंगरिंग की. उसने भी अपनी टांगें फैला दीं … ताकि उसकी चूत में मेरी उंगलियां ठीक से चल सकें. उसकी चूत एकदम से गीली थी.</p>
<p>उसके बाद मैंने उसकी पैंटी नीचे कर दी और नीचे बैठ कर उसकी चूत में अपना मुँह लगा दिया. मेरी जीभ के स्पर्श ने उसे मजा दे दिया. मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल कर उसे मजा देने लगा. वो ऊपर उसका मुँह अपने हाथों से दबा कर ‘उह … ओह …’ कर रही थी. मैं उसकी चूत चाटने के साथ ही अपने हाथ ऊपर करके उसके रसीले मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था.</p>
<p>कुछ ही मिनटों में वो गांड उठाते हुए झड़ गई. फिर मैंने उसको नीचे बिठा दिया और मैं खड़ा हो गया. मैंने अपना 7 इंच का लंड हवा में लहरा दिया. उसने लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी. </p>
<p>मैंने जोर देकर कहा- मुँह में ले लो.<br />
तो वो सर हिलाते ना बोलने लगी.<br />
फिर मैंने थोड़ा जोर देकर कहा- टेस्ट तो करो … मजा आएगा.</p>
<p>इस बार वो मान गई. उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और मुझे मजा देने लगी. कुछ एक मिनट तक चूसने के बाद उसने छोड़ दिया, मैंने भी उससे कुछ नहीं कहा.</p>
<p>फिर वो अपने हाथों से लंड सहलाने लगी. कुछ ही सेकंडों में मेरा रस निकल गया.</p>
<p>फिर हम चुपचाप नजर बचाते हुए बाहर आ गए और अपनी जगह पर बैठ गए. </p>
<p>इसके आगे ट्रेन में कुछ ना हो सका. हम 2 दिन की यात्रा करके वापस अपने शहर आ गए.</p>
<p>वापस आकर मैं अपने काम में लग गया. एक हफ्ते बाद पिंकी का मुझे कॉल आया. उसने मुझपे एक बम गिराया कि वो नलिनी और मेरे साथ हुए सब खेल को जान चुकी है.<br />
उसकी बात सुनकर मैं डर गया.</p>
<p>उसके दूसरे दिन पिंकी का फिर से कॉल आया. पहले तो मैंने नहीं उठाया, फिर डरते डरते कॉल उठाया, तो सामने नलिनी थी. </p>
<p>उसने मुझे बताया कि उसने ही पिंकी को सब बताया है और वो किसी को भी कुछ नहीं बताएगी. तब जाकर मेरी जान में जान आ गई. फिर कुछ सामान्य बात करके उसने कॉल बंद कर दिया.</p>
<p>उसी दिन करीब 4 बजे फिर कॉल आया तो नलिनी बोली- मेरा आपसे मिलने का मन हो रहा है, क्या आप मिल सकते हो?<br />
मैंने उसकी अन्तर्वासना को पहचाना और तुरन्त हां बोला. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक मॉल में शाम के 6 बजे मिलने का तय किया.</p>
<p>मैं समय से पहले ही मॉल के गेट के पास उसकी राह देखने लगा. वो तय समय से दो मिनट बाद सामने से आती हुई दिखी. वो गुलाबी वनपीस ड्रेस में क्या मस्त माल लग रही थी. मैं उसको देखते ही उसी में खो गया. </p>
<p>वो मेरे नजदीक आ गई. मुझे इस हालत को देख कर वो पहले तो खूब हंसी. मैं भी थोड़ा शरमाते हुए हंस गया.</p>
<p>एक दो मिनट यूं ही बात करने के बाद हम दोनों अन्दर आ गए. एक कॉफी स्टाल पर बैठ कर मैंने कॉफी आर्डर की. फिर एक दूसरे के सामने बैठकर बातें करने लगे. अभी सब सामान्य बातें हो रही थीं.</p>
<p>मैंने ही उस रात का जिक्र किया, तो वो क्या शरमाई थी … आह … मुझे आज भी याद है.</p>
<p>तब तक कॉफी आ गई, कॉफी पीते हुए मैंने उससे बोला- आगे क्या?<br />
वो समझ गई, पर कुछ नहीं बोली.<br />
मैंने ही फिर बोला- चलो कुछ मजे करने चलते हैं. </p>
<p>वो कुछ नहीं बोली, मैं समझ गया कि ये राजी है … आज मजा नहीं लिया, तो कभी नहीं मिलेगा.</p>
<p>मैंने कॉफी के पैसे दिए और उसका हाथ पकड़ कर आने का इशारा किया. वो उठी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया. मैं आगे चल दिया, वो मेरे पीछे आने लगी. हम दोनों अपनी मंज़िल पर निकल पड़े. </p>
<p>वो थोड़ा नाटक कर रही थी कि कोई देख लेगा.<br />
मैं बोला- कोई नहीं देखेगा, तुम चलो तो सही. </p>
<p>मैंने अपनी कार निकाली और उसको अन्दर बिठा लिया.<br />
तभी वो बोली- इधर मेरी एक्टिवा रखी है.<br />
मैं बोला- कोई चिंता की बात नहीं है. हम 2 घंटे में वापस आ जाएंगे. </p>
<p>वो मान गई. हम हाईवे के तरफ निकल पड़े. कोई 20 मिनट के दौरान मैंने उसको खूब सहलाया. वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी. हम एक होटल में आ पहुंचे. पहले मैंने अकेले जाकर एक रूम बुक किया और उसको फोन करके अन्दर बुला लिया.</p>
<p>कमरे में अन्दर जाते ही मैंने उसको कसके पकड़ लिया. वो तो पहले से ही बहुत चुदासी थी. इसी वजह से उसने भी मुझे कसके पकड़ लिया. इसी हड़बड़ी में हम दोनों पास के पलंग पर गिर पड़े.</p>
<p>मैंने उसे अपने नीचे दबा कर खूब चूसा.<br />
वो बोली- कपड़े खराब हो जाएंगे.</p>
<p>मैं समझ गया. हमने एक दूसरे के कपड़े निकाले. पहले मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके निप्पलों को अपने होंठों में दबा लिया और मम्मे मसलते हुए निप्पल चूसने लगा. </p>
<p>वो बेकाबू होकर मुझे जकड़ते हुए मेरे सर को अपने दूध पर दबा रही थी.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना मोर्चा नीचे सैट कर लिया. उसकी चूत को खूब चूसा. </p>
<p>थोड़ी ही देर में वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ करती हुई स्खलित हो गई.</p>
<p>फिर मैंने अपना 7 इंच का लंड उसके मुँह में देना चाहा, तो साली ना करने लगी. मैंने थोड़ा जोर दिया, तो मान गई और मेरा लौड़ा चूसने लगी. हम दोनों जल्दी ही 69 में हो गए. </p>
<p>उसने चूसना बंद किया और बोली- जल्दी करो … मुझसे अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा.<br />
मैंने भी सोचा कि वक्त कम है, निपट ही लो.</p>
<p>मैंने उसको सीधा किया और चुदाई की पोजीशन बनाई. सुपारा सैट करके धक्का मारा, तो मेरा फिसल गया. मैंने लंड को वापस चूत की फांकों में सैट किया और जोर का झटका लगा दिया. </p>
<p>वो जोर से चिल्ला दी. मैंने हाथों से उसका मुँह दबाया और शांत रहा. अब वो थोड़ी शांत हुई, तो मैंने अपना काम शुरू किया. हालांकि उसकी सील पहले से टूट चुकी थी, पर ज्यादा वक्त गुजर जाने की वजह से चूत अभी बड़ी टाइट थी. उसकी सील टूटने की बात उसने मुझे बताई थी, पर वो कहानी मैं बाद में बताऊंगा.</p>
<p>मैंने अपना काम जारी रखते हुए उसे धीरे धीरे ढीला किया. वो दो मिनट बाद ही मेरे लंड से मजे लेने लगी थी. हम दोनों के बीच धकापेल चुदाई होने लगी. मैं उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत को रगड़ने में लगा था. उसकी अकड़न मुझे बता रही थी कि लौंडिया अब झड़ने की कगार पर आ गई है. </p>
<p>उसने इस वक्त मुझे कसके पकड़ा हुआ था. मैं जोर जोर से उसकी चुदाई कर रहा था. इसी बीच वो निकल गई और निढाल हो गई. मैं अभी भी पूरे जोरों से चुदाई कर रहा था. उसकी गर्मी ने मेरे लंड को चिकनाई दे दी थी, जिससे मेरे झटके और भी स्पीड से लगने लगे थे. इसी बीच वो फिर से चार्ज हो गई और गांड उठा उठा कर लंड के मजे लेने लगी.</p>
<p>करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने के कगार पर आ गया था. वो भी दूसरी बार होने को थी. मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?<br />
तो वो बोली- अन्दर ही निकालो … मैं दवा ले लूँगी.</p>
<p>उसके ऐसा बोलते ही मेरा खून जमा होने लगा. मैं 10-15 करारे झटकों के साथ ही उसके अन्दर ही झड़ गया.</p>
<p>चुदाई के बाद 10 मिनट तक हम दोनों ने आराम किया. फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर आपने आपको साफ किया. फिर अपने अपने कपड़े पहने और होटल से बाहर निकल आए.</p>
<p>यह मेरी पहली अन्तर्वासना कहानी है, आपको कैसी लगी … जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:40:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ. आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. यह तब की बात है, जब मेरी <a title="पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/" aria-label="Continue reading पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ.</p>
<p>आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. </p>
<p>यह तब की बात है, जब मेरी इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का एग्जाम हो चुका था. मैं एग्जाम देकर अपने घर आया था. </p>
<p>मेरे घर के सामने एक लड़की रहती है, जिसका नाम शीमा (नाम बदला हुआ) है. वो दिखने में बहुत हॉट, खूबसूरत और सेक्सी है. वो लड़की शीमा मुझे पहले से ही अच्छी लगती थी. उसको लेकर मैं सोचता रहता था कि काश इस हॉट गर्ल चोदने का मौका मिल जाए … तो मजा आ जाए. </p>
<p>घर आने के बाद मैं उससे रोज बात करने लगा था. वो भी मुझसे हंस हंस कर बात करती थी. हम दोनों के बीच हर तरह का हंसी मज़ाक होने लगा था. </p>
<p>इस बार हमारे बीच इतनी अधिक नजदीकी बढ़ गई थी कि मैं हंसी मजाक के बहाने उसके शरीर को जहां तहां छू देता था. जब उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ, तो मैं अब उसकी गांड भी कभी कभी छू देता था. वो मेरी इस हरकत का कभी बुरा नहीं मानती थी. इससे मुझे लगने लगा था कि ये भी मेरी तरफ आकर्षित है. हम दोनों में सेक्स को लेकर भी खुल कर चर्चा होने लगी थी. </p>
<p>एक दिन जब मैं सुबह उठा तो मेरे मम्मी और पापा कहीं जाने की तैयारी कर रहे थे.<br />
मुझे पहले तो हैरानी हुई कि अचानक मम्मी पापा का किधर जाने का प्लान बन गया. मेरे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मेरे एक दूर वाले अंकल की तबीयत खराब है, तो उन्हीं को देखने और उनसे मिलने वे दोनों अस्पताल जा रहे हैं. चूंकि अस्पताल दूर था, तो उन्होंने मुझसे कहा कि उनको वापस घर आने में रात हो जाएगी. </p>
<p>मैं कुछ नहीं बोला. </p>
<p>मम्मी ने बताया कि उन्होंने मेरे खाने का इंतज़ाम शीमा के घर पर ही कर दिया है. मम्मी ने शीमा की माँ को बोल दिया था कि आज का मेरा खाना वो ही बना दें. </p>
<p>मैं शीमा का नाम सुनकर एकदम से मन ही मन खुश हो गया था कि शायद आज शीमा को चोदने का मौका मिल जाए. </p>
<p>यही हुआ भी ऊपर वाले ने आज मेरी सुन ली थी. उस दिन दोपहर को शीमा मेरा खाना लेकर मेरे घर आई. उस वक्त मैं अपने कंप्यूटर पर व्यस्त था. उसने घर में आते ही देखा कि मैं कंप्यूटर पर गेम खेल रहा था. </p>
<p>तो उसने बोला- अरे वाह अकेले अकेले ही गेम खेल रहे हो?<br />
मैं बोला- नहीं यार … मैंने अपने दोस्त को कॉल करके बुलाया था, पर वो कुछ काम होने के कारण नहीं आ सकता था. </p>
<p>इस पर शीमा ने बोला- कोई बात नहीं यार … मैं हूँ ना. मैं तुम्हारे साथ हर तरह का गेम खेलने को तैयार हूँ.<br />
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा मुस्कुराया और मैंने कहा- हर तरह का?<br />
वो एक पल के लिए झेंपी लेकिन अगले ही पल बोली- हां, हर तरह का खेल खेलने को राजी हूँ.<br />
मैंने उसको आंख मारी और कहा- ठीक है, पहले खाना खा लेता हूँ, फिर हम दोनों मस्त वाला गेम खेलते हैं. </p>
<p>मैं खाना खाने बैठ गया. वो किचन से मेरे लिए पानी लेकर आई. मैंने खाना खाया. उसके बाद मैं और शीमा हम दोनों कंप्यूटर पर गेम खेलने बैठ गए. </p>
<p>मैंने उसे बड़ी गौर से देखा. उस दिन उसने ट्राउज़र और शर्ट पहना था, वो बड़ी मस्त लग रही थी. </p>
<p>हम दोनों चिपक कर गेम खेलने लगे. गेम खेलते खेलते कभी कभी मैं उसकी जांघ पर अपना हाथ रख देता … तो वो मुझसे और भी सट जाती.<br />
दोस्तो क्या बताऊं, उसकी जांघ छूते छूते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. </p>
<p>मैं घर में चड्डी नहीं पहनता हूँ … तो मेरा लंड खड़ा होने लगा. जब उसकी जांघ के टच से मेरा लंड खड़ा हो गया तो वो उभर कर बाहर से दिखने लगा. शीमा इस बात पर ध्यान दे रही थी.<br />
उसने मेरे खड़े होते लंड को देखा, तो वो हंसने लगी. </p>
<p>मैंने उससे हंसने का कारण पूछा, तो उसने कहा- तुम्हारा सिग्नल खड़ा हो गया है.<br />
मैंने बोला- ये तुम्हें देख कर ही सिग्नल पकड़ रहा है.<br />
वो मेरी बात से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.</p>
<p>उसी वक्त उसने अपनी मम्मी को कॉल लगाया और कहा कि मॉम मैं थोड़ी देर से आऊंगी. राज अकेले घर में बोर रहा है तो उसके साथ कंप्यूटर पर गेम खेल रही हूँ.<br />
उसकी माँ ने कहा- ठीक है.<br />
उसने माँ की हामी पाते ही कॉल कट कर दिया. </p>
<p>उसके बाद शीमा ने मेरे लंड पर हाथ रख कर कहा- देखूँ ज़रा कितना सिग्नल पकड़ रहा है?<br />
वो मेरे लंड को सहलाते हुए धीरे धीरे हिलाने लगी. वो मुझे वासना भरी निगाहों से देख रही थी. </p>
<p>मैंने तुरंत उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और अपने हाथों को उसके मम्मों पर रख कर उन्हें दबाने लगा. वो मेरी बांहों में झूल गई. हम दोनों जवानी की आग में झुलसने लगे. मेरे हाथ उसके मम्मों के अलावा उसकी गांड को भी सहलाने लगे थे. हम दोनों एक दूसरे से एकदम चिपके हुए अपने दिलों की चाहत को अपनी मंजिल तक ले जाने के लिए पूरी तरह से कामुक हो उठे थे.</p>
<p>उसने मादकता भरे स्वर में कहा- तुमने कितनी देर लगा दी … ये खेल खेलने में!<br />
मैं- देर आया … दुरुस्त आया.<br />
वो मुझसे लिपट गई.</p>
<p>कोई 10 मिनट के लगातार चुम्बन करने के बाद मैंने उसकी शर्ट के बटनों को एक एक करके खोलना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों उसकी शर्ट ने उसके शरीर का साथ छोड़ दिया था. </p>
<p>शर्ट के अन्दर शीमा ने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को रगड़ने लगा. वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां लेने लगी. </p>
<p>कुछ देर बाद मैं उसे अपनी गोद में उठा कर अपने रूम में ले गया और उसे बेड पर लेटा दिया. उसके बिस्तर पर गिरते ही उसके ऊपर चढ़ कर मैं उसे चूमने लगा. कुछ देर बाद मैंने उसके ट्राउज़र को निकाल दिया और दोस्तों क्या बताऊं उसने पैंटी भी काली पहनी थी. </p>
<p>मैं आपको बता दूँ कि मुझे गोरी लड़की जब ब्लैक ड्रेस पहनती है, तो बहुत सेक्सी लगती है. उसे इस तरह देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैं उस पर टूट पड़ा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. </p>
<p>कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर नीचे लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गई. वह मेरी टी-शर्ट को उतार कर मेरी छाती पर अपने हाथ फेरने लगी. फिर वो मेरे कड़ियल जिस्म को चूमने लगी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसने मेरे लोअर को भी निकाल दिया और मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया. उस हॉट गर्ल के हाथ में लंड आते ही मैं एकदम से गनगना उठा. वो लंड सहलाते और हिलाते हुए मेरी आंखों में आंखें डाल कर देखने लगी.</p>
<p>मैंने उसको इशारा किया, तो वो समझ गई और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. पहले तो उसने मेरे लंड के सुपारे ऊपर अपनी जीभ फिराई और मेरे लंड को टट्टों से लेकर ऊपर तक चाटा और इसके बाद तो मानो उसने तूफ़ान खड़ा कर दिया. अब वो मेरे तनतनाए हुए लंड को अन्दर तक लेकर बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी थी. उसके मुँह की गर्मी पाकर मेरी आंखों में मदहोशी सी छा गई. मैं अपनी दोनों आंखें बंद करके लंड चुसाई का मजा लेने लगा.</p>
<p>दो मिनट बाद उसने खुद अपनी पैंटी को उतारा और मुझे धक्का देकर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया.<br />
मैं अभी कुछ समझ पाता, तब तक वो मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चूत की मुँह में लंड सैट करने लगी. मैंने गांड हिला कर लंड को उसकी चूत का मुँह ढूंढा और लंड को चूत में सैट कर दिया.</p>
<p>अब वो अपनी गांड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी. इससे मेरा लंड पूरी तरह से उसकी चूत में घुस गया. मैंने भी उसकी कमर को पकड़ लिया. </p>
<p>अब उसने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए मुझे लिप किस करने लगी. इस वक्त उसकी चूचियां मेरी छाती पर हिलते हुए मुझे बड़ा मजा दे रही थी.</p>
<p>कोई 15 मिनट बाद मैंने उसे अपने नीचे किया और उसकी एक टाँग तो अपने कंधे पर रख लिया.</p>
<p>अब मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और आगे पीछे करने लगा. मैं इस वक्त एकदम डिप्स मारने जैसी कसरत कर रहा था, उसके दोनों मम्मों को मैं अपने दोनों हाथों में दबोचे हुए लगातार चोदे जा रहा था. उसकी मस्ती अपने चरम पर थी. </p>
<p>कोई 10 मिनट बाद वो बड़ी तेज आवाज में सीत्कार करने लगी. मैं समझ गया कि शीमा झड़ने वाली हो गई है. उसकी चूत ने पानी छोड़ा कि ठीक उसके बाद ही मेरा पानी छूटने वाला हो गया.</p>
<p>मैंने झट से अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसके नंगे बदन को चूमने लगा. इस तरह मेरा लंड झड़ने से रह गया. फिर 5 मिनट बाद जब मेरा लंड थोड़ा शांत हुआ, तो उसने फिर से अपने हाथ से मेरा लंड खड़ा कर दिया और मैंने फिर से उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों एक दूसरे के आगोश में पूरी तरह खो चुके थे. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और 10 मिनट बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया. मैं देर तक उसकी छूट में ही अपने लंड की पिचकारियां छोड़ता रहा.<br />
वो एकदम से निढाल होकर अपने जिस्म को ऐसे थिरका रही थी, मानो मेरे रस को वो अपने अन्दर जज्ब कर रही हो.</p>
<p>माल झड़ जाने के बाद मेरा लंड सिकुड़ गया. जब मैंने लंड बाहर निकाला, तो उसकी चूत से पानी टपक रहा था. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने उसे चूम लिया. </p>
<p>हम दोनों कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े रहे. तभी उसकी मम्मी का कॉल आया और वो उसे घर वापस आने के लिए बुलाने लगीं. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक ज़ोरदार स्मूच किया और अपने अपने कपड़े पहन लिए. वो टिफिन लेकर अपने घर चली गई. </p>
<p>अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों जम कर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं और मज़े करते हैं. </p>
<p>दोस्तो, मेरी ये हॉट गर्ल की चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करके बताना न भूलना. </p>
<p>आपका राज<br />
[email protected]</p>
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		<title>सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था. आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और <a title="सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/" aria-label="Continue reading सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था.</p>
<p>आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.<br />
मेरी उम्र 42 वर्ष है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बेटा है. </p>
<p>वो सर्दियों के दिन थे, एक दिन शाम को मैं मरी पत्नी और मेरी भांजी बैठे हुए बातें कर रहे थे. हम तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे और अपनी टांगों पर कम्बल डाला हुआ था. अचानक मेरा पैर उसकी टांगों के बीच में चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा था. मैंने सोचा कि यह मेरी पत्नी के पैर हैं, लेकिन कुछ टाइम बाद मुझे मालूम हुआ मेरा पैर तो मेरी भांजी की टांगों से टकरा रहा था और वो मेरी इस बात का कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी थी.</p>
<p>बस दोस्तो, यहीं से मेरे मन में उसके लिए विचार बदल गए. मैंने उसकी जांघ पर अपने पैसे से सहलाना शुरू किया, तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. उसके कुछ वक्त बाद हम सोने की तैयारी करने लगे. मेरी पत्नी के बाजू में मेरा बेटा सोया हुआ था.</p>
<p>मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी पत्नी बहुत ही खुले विचारों वाली है और वह मुझसे सेक्सी बातें खुलकर करती है. दूसरों को चुदवाने के बारे में भी वह कहती है कि आप किसी को चोदोगे, तो मैं आपको देख कर बहुत मजे लूंगी. </p>
<p>इसी बीच मैंने मजाक मैं अपनी पत्नी और अपनी भांजी से कहा- यार, सर्दी ज्यादा ही नहीं बहुत ज्यादा है … कोई हमें भी पास सुला लो. </p>
<p>इस पर मेरी पत्नी ने मजाक में कह दिया- मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो.<br />
तभी मेरी भांजी ने कहा- मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं. आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ … मेरे पास आ जाओ.</p>
<p>देर ना करते हुए मैं तुरंत अपनी भांजी के बेड पर आ गया और उसके साथ लेट गया. मैंने लेटते ही कमरे की लाइट बंद कर दी. मेरी बीवी समझ चुकी थी कि मैं टीनएज गर्ल के कामुक बदन का मजा लूंगा.</p>
<p>करीब 10-15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरी भांजी को नींद आ गई है, वह मेरी तरफ पीठ किए हुए थे. तभी मैंने उसके पीछे से सटकर उसके ऊपर हाथ रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया. अब मैं उसके बिल्कुल बराबर में पीछे से सट कर लेट गया. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके चूतड़ों की दरार में लग रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मेरी भांजी के चूतड़ों पर स्पर्श कर रहा था. वह अब भी कोई विरोध नहीं कर रही थी.</p>
<p>तभी मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मम्मों पर लगाया. आह … बिल्कुल गोल गोल उभार लिए मस्त बूब्स थे. दोस्तों अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी. मैंने एक हाथ उसके सूट के अन्दर डालकर उसके नंगे मम्मों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसका कोई विरोध ना देख कर मैंने उसको सीधा कर लिया. </p>
<p>वह अब सीधी लेटी हुई थी. मैंने धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती को बिल्कुल ऊपर कर दिया और दोनों चूचे नंगे कर दिए. दोनों मम्मों को नंगे करने के बाद मैंने धीरे से अपने होंठ उसके एक चूचे पर लगाए और उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.</p>
<p>उसके दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं. मैं जान चुका था कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है. उसकी सांसें भी तेज हो चुकी थीं. </p>
<p>कुछ देर उसके मम्मों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार में सरका दिया और उसकी चूत पर रखा, तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भीगी हुई थी. मैं समझ गया कि यह बिल्कुल गर्म हो चुकी है.<br />
मैंने सोचा कि यह अभी कुंवारी है, किसी से चुदी नहीं है … यहां पर पूरा खेल नहीं हो पाएगा. मेरा बेटा भी इसी कमरे में सोया हुआ था. बराबर में दूसरा कमरा खाली था. मैंने कुछ टाइम उसकी चूत में उंगली से सहलाया.</p>
<p>जब मैंने महसूस किया कि अब यह पूरी गर्म हो चुकी है, तो मैंने धीरे से उसके कान में कहा- चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं.<br />
मेरे इतना कहते ही मेरी भानजी उठकर बराबर वाले कमरे में पहुंच गई. पीछे से मैं भी कमरे में पहुंच गया. दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने नीचे बिस्तर लगा दिया. </p>
<p>इसी बीच मैंने उस कमरे से दूसरे कमरे में खुलने वाली खिड़की को हल्का सा खोल दिया ताकि मेरी पत्नी भी हमारी चुदाई का आनन्द ले सके. दूसरे कमरे में जाते ही मैंने उसको नीचे लगे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उसने और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे. मेरी भांजी मेरे लंड से चुदने के लिए बिल्कुल बेकरार हो रही थी.</p>
<p>अपनी बहन की बेटी को नंगी करने के बाद मैंने देखा कि वह बहुत ही कामुक और सुंदर नजर आ रही थी. उसके चूचे बिल्कुल गोल और कड़े थे. उसकी चूत बहुत उभार लिए हुए थी. फूली हुई बुर देख कर मजा आ गया.</p>
<p>मैं उसको देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने तुरंत ही उसको चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी.<br />
अब मैंने अपनी भांजी से पूछा- कैसा लग रहा है?<br />
उसने कहा- मामा जी बहुत मजा आ रहा है … आगे करो ना कुछ. </p>
<p>कुछ समय तक उसके मम्मों को चूसने के बाद मैं नीचे आया और उसकी टांगें फैलाकर देखा, तो उभार लिए हुए उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैंने उसकी चूत की दरारों को दोनों उंगलियों से फैला कर चौड़ा किया, तो मजा आ गया.</p>
<p>क्या सेक्सी सीन था … मैं बयान नहीं कर सकता. बिल्कुल गुलाबी चूत थी. उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के रोएं आने शुरू हुए थे. एकदम फूली हुई चूत मस्त पाव रोटी सी दिख रही थी. मैं अपनी बेटी समान भानजी की चूत को देखता ही रह गया. मेरे मन में आ रहा था एकदम से इसकी चूत में अपना लंड पेल दूं, लेकिन मैं जानता था कि अभी यह बिना चुदी हुई है … इसलिए बहुत प्यार से चोदना पड़ेगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मेरा लंड भी 7 इंच लंबा और काफी मोटा तगड़ा लंड है. मैं जानता था कि इसकी कमसिन चुत की ओपनिंग बहुत प्यार से करना पड़ेगी. ये इतना बड़ा लंड आराम से नहीं ले पाएगी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत की दरार को उंगली से फैला कर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.<br />
मेरी जीभ उसकी कुंवारी बुर में लगते ही वह उछल पड़ी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को कुछ अन्दर तक डाल कर चाटना शुरू किया. उसकी चूत पहले ही पानी से भीगी हुई थी … बिल्कुल नमकीन पानी था जिसको मैं चाट कर मस्त हो रहा था. चूत से कोरेपन की भीनी खुशबू आ रही थी. पूरी तरह गीली चूत मुझको चाटने को मिल रही थी. मैं मस्ती में भर कर उसकी चूत को चाट रहा था. वह गांड उछाल उछाल कर सिसकारियां ले रही थी. वो अपने एक हाथ को मेरे सिर पर रख कर अपनी चूत पर मेरे मुँह को दबाए जा रही थी.</p>
<p>तभी उसने मुझसे कहा- मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है … जल्दी से कुछ करो ना!</p>
<p>कुछ टाइम उसकी चूत चाटने के बाद मैंने कहा- मेरी प्यारी भांजी, मेरे लंड को भी तो चाट कर मजा दो ना?</p>
<p>मेरे इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड पानी से भीग चुका था, लेकिन वो पूरे लंड को चाट कर साफ कर चुकी थी. वो आइसक्रीम की तरह मेरे लंड को चाट रही थी. </p>
<p>करीब 5 मिनट मेरे लंड को चाटने के बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और कहा- मामा जी, बहुत मोटा है, मेरा मुँह दुख रहा है … अब नीचे कुछ करो ना प्लीज. </p>
<p>मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया. उसकी टांगों के बीच में बैठकर अपनी हाथ की उंगलियों से उसकी चूत की दरार को फैलाया. अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और हल्के से धक्का लगा दिया.<br />
इस धक्के से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था. </p>
<p>तब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- हां मामाजी हल्का सा दर्द महसूस हो रहा है.<br />
मैंने उसको समझाया- हल्का दर्द होगा, उसके बाद मजा आने लगेगा. तुम चीखना नहीं.<br />
उसने सहमति से सर हिला दिया.</p>
<p>मैंने उसके एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने शुरू किया और अपने लंड के दबाव को कुछ आगे बढ़ाना शुरू किया. मेरा लंड का कुछ और हिस्सा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था, उसको थोड़ी पीड़ा हो रही थी.<br />
फिर मैंने अपने लंड को वहीं रोक कर हल्का हल्का आगे पीछे करना शुरू किया, तो उसका दर्द भी कुछ कम हुआ और उसको मजा आने लगा. अब वह नीचे से कभी-कभी अपनी गांड को उछाल कर मजा ले रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक जोरदार ठाप दे मारी, तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा समा गया. इसी के साथ मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. इस कारण उसकी हल्की सी कराहट निकल सकी. लेकिन मेरा लंड पूरा मेरी सगी बहन की बेटी की चूत में समा चुका था और उसकी सील टूट चुकी थी.</p>
<p>मैं उसकी चूत में अपना लंड फंसा कर उसके ऊपर लेटा रहा और उसके मम्मों को बार बार मुँह में लेकर चूसने लगा. वह कुछ नॉर्मल हुई, तो मैंने अपने लंड को थोड़ा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. </p>
<p>अब उसकी मादक सिसकारियां चालू हो गईं, मैं समझ चुका था कि अब मेरी भांजी चुदाई का मजा ले रही है. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी. </p>
<p>अब मैं और मेरी भांजी चुदाई का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. मैंने अपने आपको रोकते हुए अपना लंड चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का हल्का खून लगा हुआ था. मैंने उसको साफ किया और उसकी चूत को भी साफ किया. फिर दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी.</p>
<p>इसी बीच मैंने खुली खिड़की में देखा तो मेरी पत्नी हम दोनों की चुदाई देख रही थी और मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं और मेरी भांजी दोनों पूरे मजे में डूबे रहे थे. मैं अपनी भांजी से धीरे-धीरे बातें कर रहा था और पूछ रहा था- कैसा लग रहा है?<br />
वह चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और बातों का मजा ले रही थी. वो मुझसे खुलकर बातें कर रही थी. लंड चुत चुदाई के शब्द खुल कर बोल रही थी. वो हॉट चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. </p>
<p>इसी बीच मेरी भांजी ने मुझसे कहा- मामाजी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है … और मुझे कुछ हो रहा है.<br />
मैं समझ चुका था कि अभी ये झड़ने वाली है. </p>
<p>तभी उसने मुझको कस कर जकड़ लिया और कहा- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामा जी … प्लीज प्लीज … </p>
<p>तभी वह शांत पड़ गई. मैं समझ गया कि यह झड़ गई. उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.</p>
<p>फिर मैंने उसको कपड़े पहनाकर दूसरे कमरे में जाने दिया और अपनी पत्नी को इसी कमरे में बुलाकर उसकी चुदाई के मजे लेने की सोचने लगा … क्योंकि मेरे लंड का पानी अभी निकला ही नहीं था. </p>
<p>मेरी पत्नी आते ही नंगी हो गई और उसने सारे कपड़े निकाल दिए. उसने मुझे बताया कि मैं आपकी सारी चुदाई छुपकर शुरू से देख रही हूं. देखो मेरी चूत में कितना पानी है.<br />
मैंने हाथ से देखा, तो मेरी पत्नी की चूत बिल्कुल भीगी हुई थी.</p>
<p>मैंने तुरंत ही अपनी पत्नी को चित लिटाया और उसकी चूत को चाट कर पानी को पी गया. फिर अपना खड़ा लंड डालकर उसकी चुदाई की और उसकी चूत में ही झड़ गया. अब मैं भी शांत हो चुका था.</p>
<p>तभी मेरी भांजी भी उसी कमरे में आ गई. उसने मेरे झड़े हुए लंड को चूस लिया. मेरी बीवी ने उसको बिस्तर पर ले लिया. इसके बाद अगला राउंड मैंने भांजी की चुदाई से शुरू करके बीवी की चूत तक का किया. इस थ्री-सम सेक्स में बहुत मजा आया.</p>
<p>दोस्तो, उसके बाद मैं मेरी पत्नी और मेरी भांजी हम रोजाना मिलकर चुदाई का मजा लेने लगे. यह सिलसिला अभी तक बरकरार है. अभी तक मेरी भांजी की शादी नहीं हुई है और हम तीनों साथ साथ ही चुदाई का मजा ले रहे हैं. </p>
<p>आपको मेरी यह टीनएज गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है.<br />
[email protected]</p>
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