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	<title>Kamvasna &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:42:48 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Kamvasna &#8211; Kahani18</title>
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		<title>बुआ की चुदाई का मज़ा</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:42:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Bua Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में … मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं। मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। <a title="बुआ की चुदाई का मज़ा" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/" aria-label="Continue reading बुआ की चुदाई का मज़ा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में …  मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं।<br />
<span id="more-372"></span></p>
<p>मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। मेरे लंड का साइज 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है। मैं इंजीनियरिंग फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरी एक गर्लफ्रैंड भी है जो बहुत खूबसूरत और हॉट है। उसका फिगर 34-28-36 है। उसे सेक्स बहुत पसंद है, मैंने उसके साथ बहुत बार चुदाई की है।</p>
<p>लेकिन मुझे शुरू से ही बड़ी उम्र की औरतों में ज़्यादा दिलचस्पी थी। आंटी और भाभी मुझे ज़्यादा आकर्षक और उत्तेजित करती थी क्योंकि उनका बदन भरा पूरा रहता था और उनके स्तन और गांड बहुत बड़े होते हैं। किसी हॉट आंटी को देखते ही मेरा लंड सलामी देना शुरू कर देता था।</p>
<p>यह बात है सर्दियों की जब मेरी बुआ मेरे घर पर आई हुई थी। हमारा परिवार बहुत छोटा है जिसमें मेरा भाई, एक बहन और मम्मी पापा हैं।<br />
मेरी बुआ 10 दिन के लिए रहने आयी थी। उनका नाम शालिनी है और उनकी उम्र लगभग 45 साल है। वो कद में नाटी हैं। उनकी हाइट लगभग 5फुट 2 इंच है लेकिन उनका फिगर बहुत मस्त है. उनके स्तनों का साइज 36 इंच है और उनकी गांड लगभग 35 इंच की होगी।</p>
<p>मेरे फूफाजी ज़्यादातर शहर से बाहर ही रहते थे जिसके कारण बुआ को बहुत काम समय दे पाते थे. वो अपने दो बच्चों के साथ रहती थी जिनमें एक बेटा और एक बेटी थी। उनका मन भी पति से दूर रहकर तड़पता होगा। फूफाजी 4 से 5 महीने पर एक बार घर पर आते थे।</p>
<p>जब बुआ हमारे घर रहने आयी हुई थी तब मेरा पूरा परिवार किसी शादी में लखनऊ जाना था. पर मैं नहीं गया क्योंकि बुआ के साथ एक जने का रहना जरूरी था। मैंने कहा कि मैं बुआ के पास रुक जाता हूँ तो सब लोग मुझे और बुआ को घर में छोड़ कर लखनऊ चले गए. उस समय मैं अपने सेमेस्टर एग्जाम ब्रेक में घर आया हुआ था।</p>
<p>मैं अपनी बुआ के साथ बात करने में बहुत फ्रैंक था, मैं उनसे कोई भी बात करने में संकोच नहीं करता था। मैं बुआ को बहुत पसंद करता था और मैं उनके साथ सेक्स करना चाहता था. पर समझ नहीं आ रहा था कि कैसे किया जाए। मैं उनकी मुस्कान पर फिदा था, उनकी मुस्कान बहुत ही खूबसूरत थी, वो जब हँसती थी तो मेरा दिल उनको देख कर और उनके प्यार में पागल हो जाता था।</p>
<p>मेरी आदत थी कि मैं हमेशा घर के बाहर नाले के पास पेशाब किया करता था और वो जगह मेरे घर के छत से साफ दिखती थी.</p>
<p>एक बार मैं वहां मूत रहा था तो बुआ ने छत से मेरा लंड देख लिया था। मेरा लंड 6 इंच का ही है लेकिन है काफी मोटा।</p>
<h2>बुआ की चुदाई की तैयारी</h2>
<p>एक दिन की बात है जब बुआ हमारे घर में नहा रही थी। हमारे घर में एक हैंडपंप है और बुआ को हैंडपंप के पास ही नहाना पसंद था। मैं उस समय अपने कमरे में था और टीवी देख रहा था।<br />
तभी बुआ ने आवाज़ लगाई- राहुल … ज़रा आकर हैंडपंप चला कर बाल्टी भर दे।<br />
तो मैं चला गया और हैंडपंप चलाने लगा.</p>
<p>और उसी समय मेरी नज़र बुआ के गदराये बदन पर पड़ी। हाय क्या बदन था बिल्कुल शीशे जैसा … मैं दंग था कि इस उम्र में भी उन्होंने इतना अपने फिगर को मेन्टेन किया हुआ है। उस वक़्त वो पेटीकोट में थी जिससे उनके स्तनों की चूचियां साफ दिख रही थी और पेटीकोट गीली होने की वजह से उनके गोल गोल गांड भी साफ दिख रही थी।</p>
<p>यह नज़ारा देख कर मैं बेक़ाबू हो रहा था और मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। मैं जैसे तैसे हैंडपंप चला रहा था।</p>
<p>तभी बुआ ने कहा- मेरी पीठ पर साबुन लगा दे.<br />
तो मैं उनकी पीठ पर साबुन लगाने लगा।</p>
<p>शायद बुआ को मेरा मोटा लंड याद आ रहा था और शायद उनका मुझसे चुदाई का मन बन रहा था जिसके लिए वो मुझे उत्तेजित कर रही थी।<br />
क्या मुलायम बदन था बुआ का … जी कर रहा था कि उसी वक़्त उनको चोद दूँ.</p>
<p>पर मैंने किसी तरह कंट्रोल किया। फिर मैंने जाकर बाथरूम में मुठ मारी और फिर उनके साथ खाना खाया और सो गया।</p>
<p>फिर शाम को बुआ ने बताया कि उनके पैर और पीठ में दर्द हो रहा है.<br />
तो मैंने उनसे पूछा- क्या मैं तेल मालिश कर दूं?<br />
तो उन्होंने मना कर दिया. परन्तु मैंने जैसे तैसे करके उनको मना लिया।</p>
<p>मैं सोच रहा था कि इसी बहाने कहीं बुआ की चुदाई करने का मौका मिल जाये तो मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। मैं जाकर तेल गर्म कर के ले आया।<br />
मैंने उनको बोला- आप पेट के बल लेट जाइए!<br />
तो वो लेट गई।</p>
<p>मैंने उनकी साड़ी को घुटनों तक ऊपर कर दिया और मालिश करने लगा। जैसे कि मैंने पहले ही बताया कि मेरी बॉडी एथेलेटिक है और मैं कसरत भी करता था जिसके कारण मैंने उनकी ज़ोरदार मालिश करना शुरू कर दिया।</p>
<p>कुछ देर में बुआ को काफी अच्छा लगने लगा और वो बोली- तू तो बहुत अच्छी मालिश करता है, तेरे हाथ भी बहुत सख्त हैं।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने उनकी साड़ी को उनके कूल्हों तक सड़क दिया और मालिश करने लगा. धीरे धीरे करते हुए मैं ऊपर बढ़ता गया जिससे उनकी लाल पैंटी दिखने लगी जो उन्होंने पहनी थी।<br />
लेकिन उसके आगे बढ़ने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।</p>
<p>पर उसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुआ ने खुद से साड़ी को पीठ तक सरका दिया और बोली- जांघों के ऊपर भी मालिश कर।<br />
मैंने शुरू कर दिया और कुछ देर बाद मैं उनकी जांघों के बीच तेल लगाने लगा।</p>
<p>मुझे उनकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि बुआ आज मुझसे चुदने का मन बना रही हैं। वैसे भी कई दिनों से उनकी चूत की प्यास किसी ने नहीं बुझाई थी, फूफाजी 4 महीनों से घर नहीं आये थे।</p>
<p>मैं तेल लगाने में व्यस्त था, तभी उन्होंने अपने ब्लाउज और ब्रा की हुक खोल दी और कहा- पीठ पर तेल लगा दे।<br />
तो मैं वैसे ही करने लगा।</p>
<p>धीरे धीरे उनका बदन गर्म और मेरा लौड़ा कड़क हो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनको बोल दिया- बुआ, मैं आपको पसंद करता हूं और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं।<br />
इतना कहकर में चुप हो गया और थोड़ा डर भी गया कि शायद वो नाराज़ न हो जायें और ये सब पापा से न बोल दें।</p>
<p>कुछ देर बाद बुआ ने कहा- मैं ये सब इसीलिये कर रही थी कि तुम मुझसे सेक्स करने क़े लिए तैयार हो जाओ।<br />
यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उनको गले से लगा लिया.</p>
<p>उसके बाद मैंने उनको किस करना शुरू किया और अपने होंठ उनके होठों पर रखकर चूसने लगा। वाह … क्या रसीले होंठ थे उनके … मैंने उसको 10 मिनट तक चूसा।</p>
<p>फिर मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा उतारकर दूर फेंक दिया और उनके स्तनों को निहारने लगा, क्या मोटे मोटे स्तन थे।<br />
मुझसे रहा न गया और मैं उनको पागलों की तरह चूसने और चाटने लगा। उनके मुंह से सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गई- आआआ आह आअ आह राहुल … और ज़ोर से चूसो!<br />
तो मैं और कस के उनको दबाने और चूसने लग गया।</p>
<p>उनकी चुचियों के निप्पल फूल कर बेर के आकार के हो गये तो मैं समझ गया कि वो गर्म हो चुकी हैं।</p>
<p>उसके बाद मैंने बुआ की पैंटी उतार दी. अब वो पूरी नंगी थी.<br />
क्या नंगा बदन था उनका … सब कुछ एकदम कड़क।</p>
<p>फिर मैंने अपनी जीन्स और चड्डी उत्तर दी और नंगा हो गया। मेरा लंड फुदकता हुआ बाहर आ गया।<br />
तब मैंने उनको बोला- बुआ मेरा लंड चूसो!<br />
तो उन्होंने चूसना शुरू किया. मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आने लगा.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उनके मुंह से बाहर निकाला और उनकी टांगों को फैलाया जिससे उनकी गुलाबी चूत दिखने लगी। मैंने तुरंत अपनी उंगली उसमें डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।<br />
अब उनकी सांसें ज़ोर ज़ोर से चलने लगी. फिर मैंने उनकी चूत को जीभ से चाटना शुरू किया। अब वो ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें निकालने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… राहुल हां हा हा और ज़ोर से चाट बेटा, अपनी बुआ को आज अपनी रानी बना ले।</p>
<p>कुछ देर तक चाटने के बाद बुआ ने कहा- अब और मत तड़पा और अपना मोटा लंड डाल दे मेरी चूत में। मैं इससे चुदने के सपने कई दिन से देख रही थी जब मैंने तुम्हें पेशाब करते हुए देखा था।</p>
<p>फिर मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और उसके सुपारे को उनकी चूत के ऊपर रख दिया और रगड़ने लगा जिससे वो और तड़पने लगी और बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … बेटा बस अब डाल दे इस मूसल को अपनी रांड बुआ की चूत में और फाड़ दे।</p>
<p>बस फिर क्या था … मैंने हल्का सा झटका लगाया और थोड़ा लंड उनकी चूत में दाखिल हो गया. बुआ की चीख निकल गयी और वो बोली- निकाल इसे बाहर!<br />
पर मैं कहाँ सुनने वाला था, एक जोरदार झटका लगाया मैंने और पूरा लंड बुआ की चूत में समा गया और शुरू हो गयी बुआ की चुदाई.</p>
<p>उनकी आंखों से आंसू निकल गए। बुआ की चुत शादी के इतने साल बाद भी काफी टाइट थी। मैंने अपने लंड को थोड़ी देर वैसे ही रोक के रखा, फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए।<br />
अब उनको भी मज़ा आने लगा था और अपनी गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी थी।</p>
<p>मैंने अपनी चोदन गति बढ़ानी चालू की और उनके मुंह से आवाज़ें आनी शुरू हो गई- राहुल लल … आह बेटे … ऐसे ही ऐसे ही चोदो … अपनी रंडी बना लो मुझे। आज मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ दो इस चूत को। कितने दिनों से मेरी चूत एक लंड के लिए तरस रही थी … आज सब कसर मिटा दे बेटा … आह आह आह आह … तेरे फूफाजी भी कभी ऐसी चुदाई नहीं कर पाते हैं और कुछ देर में ही झड़ जाते हैं। इसलिये आज तक मैंने कभी चुदाई के असली सुख को नहीं भोगा। आज मुझे वो मिल रहा है आह आह आह उफ्फ उफ्फ उफ्फ्फ।</p>
<p>15 मिनट तक मैं बुआ की चुदाई करता रहा, फिर वो झड़ गई. मैंने अपने लंड पर गर्म लावे से कुछ महसूस किया, वो उनका वीर्य था।<br />
पर मैं लगा रहा और कुछ देर औऱ चुदाई करने के बाद मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।</p>
<p>बुआ ने कहा कि मैंने उन्हें संतुष्ट किया है जो वो फूफाजी से कभी नहीं हो पाई।<br />
उसके बाद हमने पेशाब किया और एक दूसरे से चिपक कर सो गए।</p>
<p>उस दिन के बाद हम बुआ भतीजा ने कई बार एक दूसरे की प्यास बुझाई।</p>
<p>प्रिय पाठको, आपको कैसी लगी मेरी बुआ की चुदाई की इन्सेस्ट सेक्स कहानी?<br />
[email protected]</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया? दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत <a title="मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/" aria-label="Continue reading मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया?<br />
<span id="more-362"></span></p>
<p>दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत स्मार्ट भी हूं. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. </p>
<p>यह चुदाई स्टोरी अक्टूबर 2017 की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी. हमारे पड़ोस में एक आमिना नाम की आंटी रहती हैं. ये नाम बदला हुआ है. आमिना आंटी की उम्र लगभग 42 साल के आस पास की रही होगी. उनका फिगर 36-34-36 का होगा. आंटी देखने में बहुत सेक्सी, गर्म लगती थीं. उनके उठे उठे से मोटे चूचे मुझे बहुत आकर्षित करते थे. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.</p>
<p>वे जब भी हमारे घर आतीं या मुझे कोई काम के लिए बुलातीं, तो वह मुझे बहुत प्यार से और हंस कर बात करती थीं. जब वह सेक्सी मूड में होतीं, तो मुझे इधर-उधर हाथ लगा कर मुझसे छेड़खानी करतीं, मेरी जीएफ के बारे में पूछ कर मुझे चिढ़ाती थीं … जबकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. हालांकि मैं भी उनकी बातों के मजे लेता रहता था. मुझे उनके इस तरह के गर्म व्यवहार से मजा ही आता था.</p>
<p>त्यौहार से 3 दिन पहले आंटी घर की सफाई कर रही थीं. उसी दौरान उन्होंने मुझे ऊपर वाले कमरे में सामान उतारने के लिए बुलाया. उस समय उन्होंने लाल रंग का गाउन पहन रखा था, जिसमें उनकी चुचियों की लाइन साफ दिख रही थी. मैं उनकी चूचियों को देख रहा था, जो कि उन्होंने नोटिस कर लिया था. </p>
<p>थोड़ी देर में वह बाथरूम में जाकर एक नीला सूट पहन आईं, जिससे मुझे उनके मोटे चूचे और भी साफ दिखने लग गए थे. उन्हें देख कर मेरा 6.5 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया था. उन्होंने भी मेरे खड़े होते लंड पर अपनी नजर मार ली थी.</p>
<p>हम जिस कमरे में खड़े थे, वहां काफी सामान होने की वजह से जगह बहुत कम थी. आंटी कोई सामान लेने आतीं, तो वह अपनी चूची मेरी छाती से सटाते हुए निकल रही थीं.<br />
हालांकि इस तरह की परिस्थिति में एक तरीका ये होता है कि खुद को बचाते हुए निकलना, भले ही मम्मे रगड़ रहे हों, लेकिन खुद से ऐसा शो करना कि मजबूरी है.</p>
<p>पर आंटी तो जब भी मुझसे सट कर निकलतीं, तो वे और भी जानबूझ कर मेरे सीने से अपने मम्मों को रगड़ने की कोशिश कर रही थीं. इससे मुझे पता चल गया था कि आंटी का मूड आज कुछ अलग है. </p>
<p>मैंने भी आंटी के मम्मों को बातों ही बातों में कभी टच किया, तो कभी हाथ लगा दिया. आंटी भी हंस रही थीं. मैं समझ गया था कि आज लाइन क्लियर है. थोड़ी ही देर यूं ही काम चलता रहा. </p>
<p>आंटी की मोटी गांड देख कर मेरा लंड का बुरा हाल हो गया था. मैं बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने लगता.</p>
<p>आंटी ने कहा- क्या हुआ?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं!<br />
तो आंटी बोलीं- कुछ तो बताओ?<br />
मैंने कहा- नहीं आंटी … कुछ नहीं. </p>
<p>आंटी नीचे झुककर कुछ सामान उठाने लगीं, तो मुझे उनकी चूची का काला निप्पल वाला भाग दिख गया था. फिर उनके उठते ही मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.<br />
उन्होंने कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?<br />
मैंने कहा- आंटी सॉरी … मुझे प्लीज आज ना रोको.<br />
आंटी ने मुझे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मम्मी को बता दूंगी.</p>
<p>उनका बदला हुआ रूप देख कर मैं बहुत ही ज्यादा डर गया और वहां से भाग आया. उस दिन पूरे दिन मेरी फटती रही कि चुदाई स्टोरी तो बनी नहीं … आंटी मम्मी को ना बता दें और मेरी घर पर ठुकाई लग जाए.</p>
<p>फिर शाम तक यूं ही चलता रहा और रात को मैं सोते हुए सोच रहा था कि आज तो बच गया, कुछ नहीं हुआ. </p>
<p>सुबह आंटी ने मुझे वापस ऊपर बुलाया.<br />
मैंने जाते ही उनसे माफी मांग ली- आंटी कल के लिए माफ कर दो.<br />
आंटी ने कहा- कोई बात नहीं.</p>
<p>आंटी आज कल से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं. आंटी ने फिर से हंस कर कहा- आज तू मेरी तरफ नहीं देख रहा है, क्या आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?<br />
मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, आज तो आप बहुत मस्त लग रही हो. कल से भी ज्यादा मस्त लग रही हो.<br />
इस पर उन्होंने कहा- तेरे अंकल को तो यह सब दिखता ही नहीं, तो यह सब किस काम का है.<br />
इस पर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा- आपके पास मैं हूं ना आंटी.</p>
<p>मेरा सहारा पाते ही वह रोने में लग गईं.<br />
मैंने उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.<br />
आंटी बोलीं- अच्छी लगने से क्या होता है … मैं सुंदर नहीं हूं.<br />
फिर मैंने कहा- आंटी आप बहुत सुंदर हो … अपनी गली में नंबर एक पर हो.</p>
<p>आंटी ने मुझसे पूछा- क्या मैं तुझे सेक्सी लगती हूं?<br />
मैंने कहा- हां आंटी बहुत. </p>
<p>उन्होंने मेरी तरफ होंठ बढ़ाए तो मुझे ऐसा लगा कि आज शायद आंटी पहल कर रही हैं, मेरी चुदाई स्टोरी अब बन जायेगी. मैंने भी उनकी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए. आंटी ने आंख दबा दी. फिर मैंने उनको दीवार से लगाया और उनके होंठों पर एक जोरदार से किस कर दिया.</p>
<p>पहले पहल तो उन्होंने थोड़ा बहुत विरोध किया … पर 3 या 4 मिनट बाद विरोध भी बंद कर दिया. अब मैं उनकी चूचियों को सूट के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. </p>
<p>मैंने उनका कमीज उतारने की कोशिश की, तो वो कसा होने के कारण मुझसे नहीं उतरा. आंटी की मोटी चूचियों के कारण सूट काफी टाइट था.</p>
<p>आंटी ने हंस कर बोला- फाड़ेगा क्या … इसे आराम से उतार न.<br />
मैंने झटके से फाड़ दिया, तो वो बोलीं- ले नुकसान कर दिया न मेरा. </p>
<p>फिर मैं उनकी चुचियों को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उनका रंग बहुत ही गोरा था. आंटी की दूध से भी ज्यादा सफ़ेद चुचियों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था. </p>
<p>फिर मैं धीरे-धीरे उनके पेट पर किस करने लगा. जब मैं उनकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा, तो बोलीं- कोई आ जाएगा.<br />
तो मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है और मैं नीचे से आपका दरवाजा बंद करके आया हूं.<br />
आंटी बोलीं- प्लीज यह किसी को मत बताईयो!<br />
मैंने कहा- आंटी आपकी कसम … यह मेरे तक ही रहेगा. </p>
<p>मैंने आंटी का झट से नाड़ा खोला और नीचे देखा, तो उनकी टांगों के बीच में गुफा पर थोड़े से बाल थे, जो भूरे रंग के थे. </p>
<p>उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे कपड़े भी खोल दिए. कुछ देर बाद मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा और उनकी पेंटी भी उतार दी. </p>
<p>फिर मैंने बिना सोचे समझे ही नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. गर्म आंटी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी थीं. उन्होंने जोश में आकर मेरा सर दबा दिया. वे मेरा सर अपनी चूत में पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती थीं.</p>
<p>मेरे लगातार चूत चूसने के कारण उनकी चूत पनिया गयी थी और वो कभी भी पानी छोड़ सकती थीं. मैंने फिर भी चूत को चूसना बंद नहीं किया. </p>
<p>जिन लोगों ने शादीशुदा औरतों की चूत को चाटा होगा, उन्हें पता होगा कि चूत चूसने का अपना एक अलग ही आनन्द है.</p>
<p>लगातार 7 से 8 मिनट तक चूत चुसाई से आंटी एक तेज़ अकड़न के साथ झड़ गयी थीं. उन्होंने ढेर सारे कामरस की नदी बहा दी और थोड़ी देर के लिए शांत पड़ गयी थीं.</p>
<p>फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी पैंट को खोला, तो मेरी चड्डी में मेरे लौड़े ने आतंक मचा रखा था. मेरे लंड को आंटी ने मेरी चड्डी से बाहर निकाल कर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. </p>
<p>गर्म आंटी के मुँह से ‘बाप रे बाप  … इत्ता बड़ा..’ ही निकल सका.<br />
मैंने हंस दिया- आपका ही है आंटी.</p>
<p>उन्होंने मुझसे कहा- क्या करता है? तेरा लंड इतना मोटा कैसे हो गया है? ये मेरे अन्दर जाएगा, तो मेरी पूरी चूत को छील देगा. तेरे अंकल का तो पतला सा है.<br />
यह कहते ही वो जमीन पर बैठ कर मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.</p>
<p>दोस्तो, यकीन करना … वो मेरा पहला अनुभव था. मैं मुश्किल से 2 मिनट में आंटी के मुँह में ही झड़ गया. </p>
<p>उन्होंने ‘छी ..’ की आवाज़ करते हुए मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल दिया और जल्दी से एक कपड़े से साफ करने लगीं.</p>
<p>मुझे खुद पर बहुत शर्म आयी और जब वो मेरी तरफ आईं, तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.<br />
उन्होंने मुझसे कहा- पागल परेशान न हो … तेरा हथियार तो तगड़ा है, पर तेरा पहली बार था, इसलिए जल्दी निकल गया. असली मज़ा तो अब आएगा. </p>
<p>फिर मैं दोबारा से आंटी की चूत चाटने लगा. मुझे आंटी की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.<br />
आंटी मुझसे बोलीं- बेटा, अब और न तड़पा  … जल्दी से इसे मेरे अन्दर डाल कर इसकी सारी गर्मी मिटा दे.<br />
फिर उन्होंने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सैट किया और मुझे अन्दर पेलने को कहा.</p>
<p>मैं उस पल को एहसास को कभी नहीं भूलना चाहता, जब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में उतारा था; मानो मैंने लंड चूत में नहीं किसी गर्म भट्टी में झोंक दिया हो.</p>
<p>जैसे ही मैंने लंड अन्दर किया, आंटी के मुख से एक मीठी सी आह निकली, जिसमें सुकून भरा दर्द था. </p>
<p>मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. अब वो भी अपनी गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थीं.</p>
<p>कोई 5 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो एक तेज़ आह के साथ झड़ चुकी थीं, लेकिन मैंने अपनी रफ्तार कायम रखी … जिससे उनकी चूत के पानी से फच्च फच्च की एक मधुर आवाज हमारी चुदाई में चार चांद लगा रही थी.</p>
<p>लगातार 15 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी रफ्तार से उनकी चूत में ही झड़ गया. मैंने अपनी अपनी आखिरी बूंद भी आंटी की चूत में छोड़ी.</p>
<p>जब मैं उनके ऊपर से हटा, तो मैंने देखा कि मेरे लंड का पानी उनकी चूत से टपक रहा है.<br />
आंटी ने कहा- अभी तुझे बहुत कुछ सिखाना है.</p>
<p>फिर हम दोनों लेट गए. आधा घंटा आराम किया.</p>
<p>लेकिन मेरा मन नहीं भरा था, तो मैंने आंटी को टेबल पर झुकने को कहा. मैंने उनके पीछे से उनकी चूत में लंड डाला और फिर उनको चोदने लगा. कोई 7-8 मिनट तक मैं उनको यूं ही चोदता रहा. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और एक जोरदार धक्का दे मारा. </p>
<p>इससे मेरा 4 इंच लंड अन्दर चला गया और आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं. वो दर्द की अधिकता से मुझसे दूर होने लगीं, पर मैंने अपना जोर उन पर बनाए रखा और उनकी चुचियों को दबाता रहा. </p>
<p>कुछ पल बाद मैंने फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया. अबकी बार मेरा सारा लंड उनकी गांड में चला गया. धकापेल गांड चुदाई होने लगी. आंटी को भी अपनी गांड में लंड का सुकून मिलने लगा था, इसलिए वो भी मजा लेने लगी थीं.</p>
<p>कोई 15 मिनट तक यूं ही मैं ताबड़तोड़ हमले करता रहा और आंटी को भी काफी मजा आने लगा था. उनकी मस्ती भरी आवाजों से मुझे यकीन हो गया था कि आंटी की गांड मजा दे रही है.</p>
<p>आंटी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहह मर गई माँ … आहह.<br />
गर्म आंटी की इस तरह की मदभरी आवाजें निकल रही थीं. मैं उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और भी गर्म हो रही थीं. </p>
<p>इसी बीच उन्होंने अपना एक बारी पानी और छोड़ दिया था. मैं भी कुछ ही देर में निकलने वाला था. दसेक धक्के लगाने के बाद मैंने उनकी गांड में सारा पानी छोड़ दिया. </p>
<p>हम दोनों यूं ही वहां मेज पर लेट गए और किस करने लगे. दस मिनट बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया. </p>
<p>अगले 2 महीने तक मैंने उनकी चूत और गांड बहुत बार मारी. इसके बाद उन्होंने अपना घर यहां से छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट कर लिया था. अब मेरी सिर्फ उनसे फोन पर कभी-कभी बात होती है. </p>
<p>फिलहाल मैं चूत और गांड के लिए बहुत प्यासा हूं. भाइयों मेरा तो यह कहना है कि किसी लड़की को पटाने से अच्छा है, किसी आंटी या भाभी को पटा लो, उनके दोनों छेद बहुत मजा देते हैं.</p>
<p>[email protected] </p>
<p>दोस्तो, आपको गर्म आंटी के साथ मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी मेल जरूर करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:34:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13314</guid>

					<description><![CDATA[इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग खेल वही भूमिका नयी-6 में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था. अब आगे: फिर खाने पीने के साथ नाच <a title="ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/" aria-label="Continue reading ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-6<br />
में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था.<br />
अब आगे:</p>
<p>फिर खाने पीने के साथ नाच गाना होने लगा. सभी धीरे धीरे कामुक महसूस करने लगे और फिर तय हुआ कि जिसे संभोग की इच्छा हो रही हो, वो किसी के साथ भी संभोग कर सकता है.</p>
<p>राजशेखर ने मेरे साथ कभी संभोग नहीं किया था, तो उसने सबसे पहले मुझसे ही पूछा. मैं शुरू में तो थोड़ा शरमाई, पर बाकी औरतों के कहने पर मैंने हां बोल दिया.</p>
<p>पर तभी कांतिलाल बोल पड़ा- ऐसा नहीं होगा … हर कोई हर किसी के साथ मजा करेगा.</p>
<p>तो ये तय हुआ कि हर कोई थोड़ी थोड़ी देर संभोग करेगा, फिर साथियों की बदली होगी. इसलिए सबके नाम की पर्ची बनाई गई और एक कटोरे में सभी मर्दों के नाम की दो दो पर्ची बनाई गईं, क्योंकि मर्द चार थे और औरतें 5 थीं. ऐसा इसलिए भी किया गया ताकि पहले चार महिलाओं के हाथ में जो पर्ची आएगी, वो उन मर्दों के साथ पहले संभोग करेंगी. फिर जब मैं पर्ची उठाऊँगी, तो उन्हीं चारों मर्दों में से किसी एक के साथ संभोग करूँगी.</p>
<p>मतलब जिस मर्द के नाम की पर्ची मेरे हाथ में होगी, वो मेरे और उन चारों औरतों में से किसी एक के साथ संभोग करेगा. </p>
<p>तो इस प्रकार सबने पर्ची उठायी और फिर जोड़ी बन गई. </p>
<p>रमा और कमलनाथ,<br />
रवि और निर्मला,<br />
राजशेखर और कविता …<br />
कांतिलाल और राजेश्वरी की जोड़ी.</p>
<p>अंत में मैंने पर्ची खोली, तो उसमें फिर से रवि का नाम निकला.</p>
<p>सबने एक आखिरी पैग उठाया और फिर अपने अपने जोड़ीदार के साथ हो गए. सभी मर्दों ने मिलकर सोफे वहां से हटा दिए और जमीन पर काफी जगह बना ली. </p>
<p>रवि निर्मला और मेरा हाथ पकड़ नीचे जमीन पर बैठ गया. रवि मेरे और निर्मला के बीच बैठ गया. पहले तो वो मेरे स्तनों को दबाने लगा और फिर मेरे होंठों को चूमने लगा. थोड़ी देर मुझे चूमने के बाद वो निर्मला के स्तन दबाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. निर्मला भी उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी. </p>
<p>उधर मैंने देखा राजशेखर ने थोड़ी देर कविता को चूमने के बाद खड़े खड़े में ही उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैंटी उतार दी और खुद घुटनों के बल खड़े होकर उसकी टांगें फैला उसकी योनि को चूमने लगा.</p>
<p>कविता जवान थी उसकी योनि किसी कुंवारी लड़की के जैसे थी. एकदम गोरी, योनि की फांकें चिपकी हुईं और किनारे फूले हुए … मानो उसने कभी संभोग किया ही नहीं था.</p>
<p>मेरे एक तरफ रमा कमलनाथ के साथ व्यस्त हो गई. दोनों काफी उत्तेजक तरीके से एक दूसरे के बदन को टटोलते हुए होंठों से होंठ मिला कर एक दूसरे का रस पी रहे थे.</p>
<p>फिर सामने की ओर राजेश्वरी को कांतिलाल ने पूरी नंगी कर दिया था और उसे चूम रहा था. राजेश्वरी का बदन बहुत सुंदर था. उसे देखकर लग रहा था कि वो भी रमा की तरह ही बहुत ध्यान देती होगी.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद निर्मला उठी और अपनी पैंटी निकाल कर स्कर्ट ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दीं और अपनी योनि रवि के मुँह में लगा दी. रवि ने निर्मला के विशाल चूतड़ों को दोनों हाथों से थपथपाया और अपना मुँह निर्मला की योनि से चिपका कर उसे चाटने लगा. </p>
<p>ऐसा कामुक माहौल देख कर मेरे भीतर चिंगारी सी फूटने लगी. रवि ने कुछ देर के बाद मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग के ऊपर रखा और मुझे उसे हिलाने का संकेत दिया.</p>
<p>मैंने उसके जांघिये को सरकाया और उसके लिंग को बाहर निकाल लिया. उसका लिंग उत्तेजित था, पर अभी उसमें संभोग करने लायक कड़कपन नहीं था. मैंने उसे हिलाना शुरू किया. कुछ देर के बाद वो एकदम कड़क हो गया. </p>
<p>इधर राजशेखर ने अपनी अवस्था बदल ली थी और अब कविता उसका लिंग चूस रही थी. उधर कमलनाथ जमीन पे लेट गया था और रमा उसके ऊपर उल्टी दिशा में चढ़ी हुई थी. एक तरफ कमलनाथ उसकी योनि चाट रहा था और दूसरी तरफ रमा उसका लिंग चूस रही थी. </p>
<p>कांतिलाल ने तो एक तरफ राजेश्वरी को परेशान करके रख दिया था, वो कभी राजेश्वरी को सीधा लिटा कर योनि चूसता, तो कभी कुतिया की तरह झुका कर पीछे से … तो कभी उसके स्तनों को मसलता. इससे उस कमरे में राजेश्वरी की कराह गूंज रही थीं.</p>
<p>कुछ देर के बाद कांतिलाल ने राजेश्वरी को घुटनों के बल खड़ा कर दिया और खुद खड़ा होकर उसका सिर पकड़ कर अपना लिंग जांघिये से बाहर निकाला और उसके मुँह में ठूंस दिया. फिर तेज़ी से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसके मुँह में लिंग अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>देखने में उसकी ये हरकत बहुत क्रूरतापूर्ण थी, मगर राजेश्वरी को आनन्द आ रहा होगा, तभी वो उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद निर्मला कराहते हुए झटके खाने लगी. मैं समझ गई कि वो झड़ गई. फिर क्या था उसने अपनी योनि को रवि के मुँह से हटाया और नीचे बैठ कर उसका लिंग गप से मुँह में भर लिया. </p>
<p>इतनी उत्तेजक महिला मैंने कभी नहीं देखी थी. निर्मला तो कामोत्तेजना से भरी दिख रही थी. निर्मला जब उसका लिंग चूसने में व्यस्त हो गई, तो रवि ने मुझे हाथों से पकड़ कर उठने का संकेत दिया और इशारे से मुझे खड़े होकर अपनी योनि उसके मुँह में देने को कहा.</p>
<p>मेरे भीतर भी तो अब वासना की चिंगारी भड़क चुकी थी और जब चमड़ी की भूख हो, तो कोई भी इंसान निर्लज्ज हो ही जाता है.</p>
<p>मैं भी निर्लज्जता से खड़ी हो गई और स्कर्ट का हुक खोल कर मैंने अपने मांसल चूतड़ों को आज़ाद कर दिया. मैंने अपनी दोनों मोटी मोटी जांघों को फैलाया और टांगें रवि के अगल-बगल कर अपनी योनि को उसके मुँह के सामने अड़ा दिया.</p>
<p>उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को सहलाया. फिर पैंटी पर मेरी योनि के उभार को चूमने लगा. उसके चूमने से मैं और उत्तेजित होने लगी और मैंने एक हाथ से उसके सिर को सहारा दे दिया. मैंने दूसरे हाथ से अपनी पैंटी एक किनारे कर उसे अपनी योनि के स्पष्ट स्पर्श दे दिया. मेरी फूली गद्देदार योनि की पंखुड़ियों को पाते ही उसने उन्हें बारी बारी चाटा और फिर अपनी जीभ योनि की दरार में ऊपर नीचे करके मेरी योनि का स्वाद लेने लगा.</p>
<p>उसके इस तरह के व्यवहार से मैं और उत्तेजित होती चली गई और अपनी कमर उसकी तरफ धकेलते हुए अपनी योनि का दबाव उसके होंठों पर बढ़ाती चली गई.</p>
<p>मेरे अगल बगल भी बाकी के लोग धीरे धीरे एक दूसरे के अंगों को सहलाते, चूसते, चाटते हुए एक दूसरे को संभोग के लिए तैयार करने लगे थे.</p>
<p>ये किसी विदेशी अंग्रेज़ी फ़िल्म से कम दृश्य नहीं था, जिसमें लोग सामूहिक रूप से संभोग क्रिया में लिप्त थे.</p>
<p>रवि की जुबान में तो जैसे जादू था, जिस प्रकार वो अपनी जुबान से मेरी योनि के साथ खिलवाड़ कर रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि ये पल कभी न खत्म हो. उसने मेरे भीतर एक अजीब सी गुदगुदाहट के साथ कामुकता भर दी थी. इसी वजह से मेरे अगल बगल क्या हो रहा, मुझे उसकी न कोई चिंता थी, न कुछ नजर आ रहा था.</p>
<p>मेरी व्याकुलता इतनी बढ़ गई थी कि मैं रह रह के झटके खा रही थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे पानी का फव्वारा उसके मुँह में ही छोड़ दूंगी.</p>
<p>मैं संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और पल भर में मेरी अपेक्षा पूरी हो गई. निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर थपकी मारी और मुझे रवि के लिंग के ऊपर बैठने बोलने लगी. </p>
<p>निर्मला- सारिका पहले तुम सवारी करो.</p>
<p>उसकी बातें सुन रवि ने मुझे खुद से अलग किया और मेरा हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींचने लगा. उसने अपने लिंग को पकड़ कर हिलाते हुए मुझे बैठने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं उसके कंधों पर दोनों हाथ रखते हुए अपनी टांगें उसके अगल बगल फैला कर उसके लिंग के ऊपर बैठ गई. उसका लिंग ठीक मेरी योनि द्वार पर जाकर अड़ गई. रवि ने अपने लिंग को सही दिशा दिखाते हुए लिंग का सुपारा मेरी योनि द्वार में प्रवेश करा दिया. साथ ही उसने मेरे दोनों चूतड़ों को पकड़ लिया. उसका कठोर लिंग मुझे बहुत गर्म महसूस हो रहा था. </p>
<p>फिर मैंने धीरे धीरे अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करके लिंग को योनि में प्रवेश कराना शुरू किया. कोई 3-4 बार ऊपर नीचे होते ही उसका सम्पूर्ण मोटा और कठोर लिंग मेरी मुलायम योनि की दीवारों को भेदता हुआ मेरे गर्भाशय से टकराने लगा. उसके लिंग से चिकास (precum) और मेरी योनि के गीलापन से आसानी से लिंग गुदगुदाहट करता हुआ भीतर चला गया. एक संतुष्टि की कामना जगाते हुए, आनन्द की शुरूआत हुई, तो मैंने पूरी जिम्मेदारी और कामुकता से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करते हुए संभोग की प्रक्रिया शुरू कर दी.</p>
<p>जब उसका लिंग पूरी तरह से जब मेरी योनि में हिल-मिल गया, तो मैंने अपनी नजरें रवि से मिलाईं. उसकी आंखें मस्ती से भरी हुई थीं और चेहरे पर कामुकता भरी मुस्कान थी. मैं जैसे जैसे धक्के देते जा रही थी, वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे. मैंने उसके गले में हाथ डाल कर थोड़ी और गहराई में जाने लायक धक्के देने शुरू किए, तो वो अपने होंठों को होंठों से भींचता हुआ मुझे चूमने को लपक पड़ा.</p>
<p>उसने अपने दाएं हाथ को मेरे चूतड़ से अलग किया और पीछे से मेरे बालों को पकड़ मेरे सिर को खींच कर मेरे होंठों से हाथ लगा कर चूसने और चूमने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के भीतर अब तेज धार धार तलवार सा महसूस होने लगा था, जिससे मैं और अधिक ताकत और मस्ती में अपनी कमर हिला हिला उसके लिंग को अपनी योनि से मलने लगी थी.</p>
<p>रवि के ऐसे उत्तेजक भाव ने मेरे भीतर वासना की एक नई ऊर्जा भर दी थी और मैं पूरे आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी थी. पीछे से शायद निर्मला रवि के अण्डकोषों से खेल रही थी या उनको सहला रही थी, इसलिए मुझे उसके हाथों का स्पर्श कभी कभी मेरे चूतड़ों पर महसूस हो रहा था. मैं अपनी ही धुन में धक्के मारे जाने से मस्ती में और अधिक खोई जा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट हो गए थे और मेरी सम्भोग की खुमारी सातवें आसमान को छूने को थी. तभी निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर 2-3 थपकी मारते हुए कहा- बस भी करो सारिका … अब मेरी बारी है.</p>
<p>उसकी बातें मेरे कानों में पड़ते ही मेरी रफ्तार और मस्ती दोनों पर रोक लग गई. मुझे हल्का निराशा सी महसूस हुई. लेकिन मैं उन सबकी तरह नहीं थी, सो मैंने मुस्कुराते हुए शर्मीले अंदाज़ में उसके कथन का पालन किया और मैं रवि की गोद से उतर गई. </p>
<p>मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी, इस वजह से जब रवि का लिंग मेरी योनि से बाहर निकल रहा था, तो मेरी अंतरात्मा जैसे कहने लगी कि मत हटो, कुछ पल और रुक जाओ. मुझे ये पल ऐसा लगा, जैसे कोई प्रिय वस्तु मुझसे छीनी जा रही है. पर मुझे न चाहते हुए भी रवि से अलग होना पड़ा. </p>
<p>अब मैं बगल में बैठ कर खुद ही अपनी योनि को हाथ से सहलाने लगी. मेरे अलग होते ही रवि ने निर्मला को धकेलते हुए उसे नीचे जमीन पर गिरा कर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें फैला उसके मोटी मांसल जांघों के बीच झुक गया.</p>
<p>रवि ने झुक कर पहले तो निर्मला के थुल थुले स्तनों को दबोच कर चूसना शुरू कर दिया. वहीं निर्मला ने भी रवि के लिंग को एक हाथ से पकड़ हिलाना शुरू कर दिया. उनका ये खेल बस कुछ पल चला और रवि अपने तनतनाये हुए लिंग को निर्मला की योनि में घुसाने को पुनः तैयार हो गया. निर्मला ने भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे दाएं बांए करके अपनी योनि की स्थिति उसके लिए बना ली. </p>
<p>रवि ने लिंग का सुपारा खोल कर हाथ से पकड़ा और निर्मला की योनि की फांकों पर कुछ देर तक ऊपर से नीचे तक रगड़ा. फिर लाल सुपारा उसकी योनि में फंसा कर हल्के हल्के धकेलना शुरू कर दिया. </p>
<p>इस वक्त निर्मला के चेहरे पर दर्द के भाव दिखने लगे, जब रवि अपना लिंग उसकी योनि में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था. लिंग लगभग आधा चला गया था, फिर भी निर्मला असहज महसूस कर रही थी.</p>
<p>कुछ पल और प्रयास करने के पश्चात निर्मला ने रवि के कमर को पकड़ कर उसे पीछे को धकेला और खुद से अलग कर लिया. </p>
<p>जब रवि का लिंग निर्मला की योनि से बाहर आ गया, तब निर्मला ने अपनी एक हाथ में थूक लिया और अपनी योनि के ऊपर मल कर लिंग वापस अपनी योनि में सुपारे तक घुसाते हुए रवि को आगे बढ़ने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं समझ गई थी कि हम जिस उम्र से गुजर रहे हैं, उस उम्र में योनि में नमी जल्दी नहीं आती है. निर्मला की योनि भीतर से तो गीली थी, मगर ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां शायद सूखी थीं, इसी वजह से उसे तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>रवि जब अपना लिंग धकेल रहा था, तो उसकी योनि में ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां भीतर की ओर खिंची जा रही थीं, जिसकी वजह से निर्मला को तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>खैर … जब रवि ने संकेत समझा … तो धीरे धीरे करके 3-4 बार में अपना लिंग पूरी तरह से निर्मला की योनि में प्रवेश करा दिया.</p>
<p>फिर दोनों ने एक दूसरे को सजह तरीके से पकड़ कर धक्कों की गति को बढ़ाने लगे. कुछ ही पलों में दोनों एक दूसरे को सुख प्रदान करने में रम से गए. अब निर्मला खुले दिल से रवि का साथ दे रही थी और दोनों ही तेज धक्कों के साथ मादक सिसकियां भरने लगे थे.</p>
<p>दूसरी तरफ बाकी लोग भी संभोग में लिप्त हो चुके थे. एक तरफ कमलनाथ के ऊपर रमा सवारी कर रही थी, तो दूसरी तरफ कांतिलाल राजेश्वरी को घोड़ी बना कर पीछे से धक्के मार रहा था. उधर राजशेखर कविता की एक टांग उठा सोफे पर टिका कर सामने से खड़े खड़े ही धक्के दे रहा था.</p>
<p>सबकी कामुक अवस्था देख मेरी उत्तेजना जरा भी कम नहीं हो रही थी, जबकि मैं फिलहाल अकेली थी.</p>
<p>उन सबको देख कर और कमरे में गूंजती सिसकारियां मेरे हाथों को स्वयं मेरी योनि तक ले जा रहे थे.</p>
<p>कुछ देर के बाद कविता ने असहजता दिखानी शुरू कर दी, क्योंकि उस अवस्था में संभोग कर पाना सबके लिए सरल नहीं होता है.</p>
<p>मैं जहां तक अपने अनुभव से जानती हूं कि इस तरह के आसन में मर्दों को ज्यादा आनन्द आता है … क्योंकि लिंग का ऊपरी हिस्सा योनि के अन्दर सीधे जाता है, जबकि योनि का रास्ता पेट की तरफ होता है. इस वजह से लिंग के ऊपरी हिस्से में योनि कठोर तरीके से रगड़ खाती है, जिससे मर्दों को अधिक आनन्द आता है. वहीं स्त्रियों को आनन्द तो आता है, मगर अधिक समय के घर्षण से पीड़ा होनी शुरू हो जाती है. हालांकि अति उत्तेजना की अवस्था में महिलाएं ये पीड़ा भी झेल लेती हैं.</p>
<p>कविता के आग्रह पर राजशेखर ने कविता की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल लिया और उसे सोफे पर थोड़ा आराम करने दिया. राजशेखर वहीं खड़े खड़े अपने लिंग को हाथ से सहला रहा था कि उसकी नजर मुझ पर पड़ी.</p>
<p>मुझे खाली देख कर वो मुस्कुराते हुए मेरे पास चला आया. उसे मुझसे किसी तरह के विरोध की आशा नहीं थी. क्योंकि ये पहले से तय था. मैं भी इस बात से परिचित थी, सो मैंने भी किसी तरह का विरोध भाव नहीं दिखाया. जैसा कि मैं खुद ही गरम थी, तो मन में भी किसी तरह के विरोध की बात भी नहीं आई.</p>
<p>वो सीधा मेरे पास आकर मेरे सामने बैठ गया और मेरी टांगें पकड़ अपने दोनों तरफ फैलाते हुए मेरे बीच में आ गया. उसने मेरे स्तनों को दबाया और फिर अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आया.</p>
<p>मैंने भी बिना संकोच के अपने होंठ उसके होंठों से लगा कर चुम्बन करना शुरू कर दिया. वो मुझे चूमते हुए धीरे धीरे धकेलने लगा और ठीक मुझे जमीन पर गिराते हुए वो मेरे ऊपर आ गया.</p>
<p>मेरे भीतर वासना की आग तेजी से धधक रही थी और मैं भी उसे अपनी ओर ऐसे खींच रही थी, मानो उसे अपने भीतर छुपा लूंगी. </p>
<p>जिस तरह से वो मेरी जुबान को चूस रहा था और मेरे स्तनों को मसल रहा था, उससे लग रहा था … मानो अब वो झड़ जाएगा. पर यहां हर मर्द इतना तो अनुभवी था ही कि अपनी उत्तेजना को काबू में कर ले.</p>
<p>धीरे धीरे राजशेखर मेरे होंठों को छोड़ कर मेरे स्तनों को चूसने लगा. मेरे दूध का घूंट पीते ही उसमें ताजगी सी दिखने लगी. वो एक हाथ से मेरी एक स्तन को मसलते हुए मेरे दूसरे स्तन का पान करने लगा. </p>
<p>थोड़ी ही देर के बाद वो मेरी योनि तक पहुंच गया और मेरी योनि को चूमने और चाटने लगा.</p>
<p>उधर कविता खुद कांतिलाल के पास गई और उसे राजेश्वरी से अलग होने को कहा. राजेश्वरी भी बहुत अधिक गर्म थी, सो वो ज्यादा देर अलग होकर न रह सकी. जब तक कांतिलाल और कविता ने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू किया, वो कमलनाथ के पास चली गई. कमलनाथ ने भी रमा को धक्के मारना बन्द किया और राजेश्वरी को अपनी गोद में बिठा लिया.</p>
<p>इधर राजशेखर ने जी भरकर मेरी योनि चाटने के बाद मुझे उठाया और मुझे कुतिया की तरह झुक जाने का इशारा किया. मैं उसके निर्देशानुसार कुतिया की तरह झुक गई और मैंने अपना सिर जमीन पर रख अपने चूतड़ों को पूरा उठा दिया.</p>
<p>राजशेखर ने पीछे आकर अपना लिंग एक बार में ही मेरी योनि की गहराई में उतार दिया. उसका लिंग मुझे बहुत ही कड़क महसूस हुआ. उसके लिंग पर नसें एकदम सख्त लग रही थीं और सुपारा आग की तरह गर्म था.</p>
<p>करीबन 7 इंच लंबा और मोटाई 3 इंच लिंग की वजह से जब उसने धक्का मारना शुरू किया, तो मस्ती मैं में कसमसाने लगी. </p>
<p>मैं अभी इतना तो अंदाज लगा सकती थी कि मेरे साथ उसे भी काफी मजा आ रहा था. उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी योनि में आ जा रहा था और मुझे कराहने पर विवश करे दे रहा था.</p>
<p>वो कभी मेरे ऊपर पूरा झुक मेरे स्तनों को दबाते हुए धक्का मारता, तो कभी मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को दबाते सहलाते मजा लेने लगता.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे हम दोनों में जोश भी बढ़ता जा रहा था. मैं अब अपने कानों में उसके हांफने की आवाज सुन सकती थी.</p>
<p>करीब 10 मिनट उसने मुझे यूँ ही बिना रुके धक्के मारे और फिर वो रुक गया. कुछ पल के लिए उसने अपना लिंग पूरी तरह मेरी योनि की गहराई में दबा दिया और सांस लेने लगा. इसके बाद उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मुझसे अलग हो गया.</p>
<p>मेरी ग्रुप सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-8</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो … मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और <a title="पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो …<br />
<span id="more-316"></span></p>
<p>मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और अपनी चूत में उंगली करती रहें व लड़के अपना लन्ड हिला लें।</p>
<p>हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी. उसमें एक 25 साल की खूबसूरत भाभी थी, नाम था प्रभा. उनकी शादी को 3 साल हो गए थे पर उनके घर मे कोई बच्चा नहीं था. उनकी सास उन्हें बच्चा न होने की वजह से परेशान करती थी।</p>
<p>हमारी व उनकी छत मिली हुई थी व बीच में एक छोटी सी दीवार थी. एक दिन मैं छत पर एकांत में मुठ मार रहा था. तब प्रभा भाभी एकदम आ गई व उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया. मैं उस समय झड़ना शुरु हो गया था इसलिए रोक भी न सका और मेरे वीर्य की धार निकल कर दूर जाकर पड़ी.</p>
<p>उन्होंने मुझे सख्त धमकाया- ये क्या कर रहे हो? तुम्हारी मम्मी से बताती हूँ।<br />
मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए और माफी मांगी और यह भी कहा कि दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।<br />
उन्होंने बड़े प्यार से मेरे गाल पर एक थपकी दी और बोली- तुम अभी 18 साल के ही हो. ये सब करने से मर्द में कमजोरी आ जाती है.</p>
<p>बात आई गई हो गई पर जब भी वो मुझे मिलती तो उनके गाल लाल हो जाते थे.</p>
<p>एक दिन उनकी सास 6 दिन के लिए शादी में जा रही थी और उन्हें घर पर अकेला रहना था क्योंकि उनके पति भी एक महीने के लिए बाहर गए हुए थे. इसलिए उनकी सास ने मेरी माँ से कहा कि राकेश को कुछ दिनों के लिए रात को सोने को भेज देना क्योंकि घर में बहू अकेली रहेगी।</p>
<p>रात को खाना खाने के बाद मैं उनके घर चला गया. भाभी ने काली नाइटी पहनी थी.<br />
भाभी ने बादाम का दूध पीने को दिया और बोली- अबी तो पहले वाली शैतानी तो नहीं करते हो?<br />
मैं एकदम डर गया और बोला- नहीं भाभी, अब नहीं करता।</p>
<p>भाभी बोली- तुम्हारे भैया भी बचपन से यही करते आ रहे थे; अब उनमें कमजोरी आ गई और अब उनसे बच्चा पैदा नहीं होता।</p>
<p>कुल मिला कर सोने का समय हो गया और हम एक ही बेड पर सो गए.</p>
<p>रात को मेरी नींद खुली तो भाभी मेरा लन्ड सहला रही थी और मेरा लन्ड एकदम फटने को हो रहा था.<br />
मुझे जगा देख कर भाभी बोली- राज, मेरे पति का वीर्य कमजोर है और वो बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं.<br />
उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करूँ.</p>
<p>भाभी ने अपनी चूची मेरे मुंह मे दे दी. मैंने बारी बारी से दोनों चूची खूब चूसी. फिर भाभी ने मेरा लन्ड मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो पागल होता जा रहा था.<br />
फिर भाभी ने उंगली के इशारे से चूत चाटने को बोला और हम 69 की पोजिशन में आ गए और खूब चुसम चुसाई खेली.</p>
<p>फिर भाभी बोली- मैं उस दिन तुम्हारे वीर्य की धार देख कर ही समझ गई थी कि तुम ही मेरे बच्चे के बाप बनोगे।</p>
<p>उसके बाद भाभी टांगें फैला कर लेट गईं और बोली- मेरे राज, अब डाल दे अपना हथियार मेरी कचिया चूत में!<br />
मैंने लन्ड के अगले हिस्से पर थोड़ा थूक लगाया और चूत से भी काफी नमकीन पानी टपक रहा था. जैसे ही मैंने लन्ड का टोपा चूत के मुख पर लगाया, भाभी ने बड़ी तेज सिसकारी भरी और चूत ऊपर उठाकर लन्ड चूत में लेने को बेताब हो गईं.</p>
<p>मैंने भी हल्का सा जोर लगाया और चूत में लन्ड अंदर जाने लगा. एक अलग ही एहसास था दोस्तो!</p>
<p>प्रभा भाभी ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए और सीत्कार करने लगी. मैं तो जैसे पागल होने को हो गया. मैंने एक तेज झटका मार कर गहराई तक पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और तेजी से शॉट लगाने शुरू कर दिए और साथ में भाभी ने मेरा हाथ अपने स्तनों पर लेजाकर दबाने का इशारा किया.</p>
<p>मैं भाभी की चूचियाँ दबा दबा कर उन्हें मजा देने लगा और मैंने धक्कों की रेल छोड़ दी. 10 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई. उसके बाद हम नंगे ही लिपट कर सो गए.</p>
<p>उस रात मैंने 3 बार भाभी की चूत चुदाई की. उसके बाद 8 दिन में भाभी की कई बार चुदाई हुई.<br />
इस तरह से मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पूरी हुई.</p>
<p>और फिर एक दिन पता चला कि भाभी को गर्भ ठहर गया है.<br />
उसके बाद जब वो मुझे मिली तो मुझे बहुत प्यार किया औऱ मेरी खूब पप्पियाँ ली.</p>
<p>समयानुसार भाभी के घर एक सुन्दर बच्चा पैदा हुआ।</p>
<p>लेकिन बाद में पता चला कि भाभी ने यह बात अपनी बहन ज्योति को बता दी. एक दिन उसने मुझे ज्योति से मिलवाया और बताया कि ये मुन्ने के पापा हैं, तुम्हारे जीजा जी हैं.<br />
मैं शर्मा गया.</p>
<p>शाम को मैं भाभी से बोला- भाभी, इस बच्चे के लिए मुझे भी कुछ गिफ्ट चाहिए.<br />
तो उन्होंने पूछा- क्या?<br />
मैंने बताया- भाभी, उस हनीमून के बाद मुझे सेक्स की भूख पैदा हो गई है और आप बच्चे में व्यस्त हो गई हो तो मेरी सेक्स समस्या का समाधान करवाओ, किसी से मेरा सेक्स करवाओ.<br />
तो वो बोली- मैं ज्योति से बात करती हूं. वो इसी शहर में रहती है और मुझे लगता है उसका तेरे में इंट्रेस्ट भी है. क्योंकि जिस दिन मैंने तुझे उससे मिलवाया तो वो तुझे बड़े ध्यान से देख रही थी और कह रही थी ‘प्रभा, गजब का लौंडा पटाया है तूने!’</p>
<p>दोस्तो, मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पसन्द आयी या नहीं … कमेंट करना.<br />
आपका राज<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/step-mom-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी सेक्स की शुरूआत अपनी स्टेप मॉम की चुदाई आज से दस साल पहले करके की थी. नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम कुणाल है. मेरी उम्र तीस साल की है. अब तक मैं 130 लड़कियां 65 भाभियाँ, 60 आंटियां, 52 बार अपनी मॉम को चोद चुका हूं. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. चलिए दोस्तो, <a title="स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/step-mom-ki-chudai/" aria-label="Continue reading स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी सेक्स की शुरूआत अपनी स्टेप मॉम की चुदाई आज से दस साल पहले करके की थी. </p>
<p>नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम कुणाल है. मेरी उम्र तीस साल की है. अब तक मैं 130 लड़कियां 65 भाभियाँ, 60 आंटियां, 52 बार अपनी मॉम को चोद चुका हूं. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.</p>
<p>चलिए दोस्तो, पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बताता हूं. मेरे परिवार में मेरी मॉम, मेरा बड़ा भाई और पापा रहते हैं. मेरी ये वाली मॉम मेरे पापा की दूसरी शादी से हैं. बहुत सुंदर और सेक्सी हैं. उनके लंबे और काले बाल हैं और उनके स्तन काफी बड़े हो गए हैं. </p>
<p>मेरी मॉम की गांड फूली हुई है. मेरे पापा रोज मेरी मॉम की गांड मारते हैं. माफ करना दोस्तो, मैंने अपनी मॉम का नाम नहीं बताया, मेरी मॉम का नाम नीलम है. जब मॉम की चूत मारी थी, तब मेरी मॉम की उम्र 39 साल की थी. उनका फिगर 34-26-38 का है. उनके इस फिगर को देख कर मेरा लौड़ा रोज खड़ा हो जाता था. ऊपर से वह बहुत खूबसूरत थीं तो वह मुझे मेरी मॉम नहीं, मुझे अपनी पत्नी जैसी लगती थीं. </p>
<p>मेरी मॉम को आसपास के सभी लोग चोदना चाहते थे. लेकिन मेरी मॉम केवल परिवार वालों से ही चुदवाती हैं. जी हां, परिवार के मर्द ही उनको चोदते हैं, ये खुलासा आपको कहानी के अंत में हो जाएगा.</p>
<p>जब मैं 19-20 साल का था, जब मैंने पहली बार अपनी मॉम को जमकर चोदा था. उस दिन पापा घर से बाहर गए हुए थे और मेरा भाई कॉलेज के टूर पर गया था. घर पर केवल मैं और मेरी मॉम थे.</p>
<p>मैंने उस दिन तय कर लिया था कि आज रात अपनी मॉम को अपना बना लूंगा उन्हें अपनी पहली पत्नी का दर्जा दूंगा. रात को जब मैं सेक्स फिल्में और कहानी पढ़कर घर आया, तो मुझे मेरी मॉम मेरी पत्नी के रूप में दिख रही थीं और ऐसा लग रहा था कि उन्हें अभी पकड़ कर चोद दूं.</p>
<p>उस समय मेरी मॉम खाना बना रही थीं. खाना बनाने के बाद उन्होंने मुझे आवाज दी- कुणाल आ जा, खाना खा ले बेटा.</p>
<p>मैंने अपनी मॉम के साथ खाना खाया और अपने कमरे में चला गया. मॉम भी सारा काम खत्म करके अपने कमरे में चली गईं.</p>
<p>मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी. रात को जब मैं अपने मॉम के कमरे में गया तो उन्हें देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. मॉम ने नाइटी पहनी हुई थी. मैंने मॉम के होंठों को देखा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और जोर जोर से किस करने लगा. इससे मेरी मॉम की आंख खुल गई.</p>
<p>उन्होंने मुझे यह करता देख कर पीछे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मॉम हूं. यह सब गलत है, जा अपने कमरे में चला जा … मैं तेरे साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी. </p>
<p>मैंने कहा- मॉम तो तू मेरी है पर मॉम से पहले तू एक औरत है. और मैं तेरे बेटे से पहले एक मर्द हूं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है, मर्द हमेशा औरत को चोदता है. आज मैं तुझे चोद कर अपनी पहली पत्नी का दर्जा दूंगा. तू बहुत खूबसूरत और सेक्सी है. आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा, तेरी गांड में अपना लंड दे कर रहूंगा. </p>
<p>कुछ देर की ना नानुकुर के बाद जब मैंने अपना लम्बा लंड खोल कर मॉम के सामने लहराया, तो मेरी मॉम मेरा लंड देख कर हैरान रह गईं. उन्होंने मेरे लंड को बड़ी बेताबी से देखा. मुझे मालूम था कि मेरे पापा का लंड मुझसे काफी छोटा है.</p>
<p>अब मॉम भी लंड देख कर खुश हो गई थीं. चूंकि उनको भी रोज रात को लंड की आदत थी. मॉम ने कहा- तुमको मुझे चोदने के लिए मुझे पकड़ना होगा.<br />
यह कह कर मॉम कमरे में पलंग के चारों तरफ भागने लगीं. मैंने बड़ी मेहनत के बाद आखिरकार मॉम को पकड़ ही लिया.</p>
<p>उसके बाद मैंने मॉम को अपनी बांहों में जकड़ा और उन्हें लिप किस करने लगा. अब मॉम भी मेरा साथ देने लगीं. वह भी मुझे लिप किस करने लगीं. किस करते करते मैं मॉम के स्तनों को भी दबा रहा था. मॉम को अपने मम्मों को मिंजवाने में बड़ा मजा आ रहा था. वह भी बड़े मजे से मुझे किस कर रही थीं. </p>
<p>मैंने मॉम को बेड से उठाकर उन्हें खड़ा कर दिया और‌ उनकी नाइटी खोल दी. मेरी मॉम ने भी मेरी शर्ट खोल दी. मेरी मॉम अब मेरे सामने पैंटी और ब्रा में थीं. दोस्तों मैंने कभी अपनी मॉम को पैंटी और ब्रा में इस तरह नहीं देखा था. आज मैंने पहली बार मॉम को इस तरह से देखा था. </p>
<p>उसके बाद मैं अपनी मॉम को फिर से किस करने लगा और उनके बालों पर हाथ फेरने लगा. मॉम के बाल बहुत लंबे थे इसलिए मैं उन्हें खींच भी रहा था.<br />
वह ‘आह आआहह …’ कर रही थीं. </p>
<p>मैं 5 मिनट तक मॉम को किस करता रहा और उनके मुँह का सारा पानी अपने मुँह में ले लिया. मॉम को किस करने के बाद में उनके स्तनों को दबाने लगा और चूमने लगा. </p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने उनकी ब्रा को एक झटके में फाड़ दिया. अब मेरी मॉम मेरे सामने ऊपर से पूरी नंगी थीं. मैंने अपनी मॉम के स्तनों का दूध पीना शुरू किया. </p>
<p>मॉम जोर जोर से आवाज निकाल रही थीं- आह आई … और जोर से दबा कर पी … आई … पी ले बेटा … यह तेरे लिए ही हैं. बचपन में अपनी मॉम का बहुत दूध पिया था. अब जवानी में भी चूस ले..’</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने मॉम को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी पैंटी भी फाड़ दी. मॉम ने भी मेरे सारे कपड़े केवल अंडरवियर को छोड़कर उतार दिए. </p>
<p>अब मेरे सामने मेरी मॉम पूरी नंगी खड़ी थीं. जब मैंने मॉम के नंगे बदन को देखा, तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई मेरे सामने एक ही बहुत खूबसूरत लड़की खड़ी हो. </p>
<p>फिर मैंने मॉम को गोदी में उठाया और बेड पर पटक दिया. बेड पर पटकने के बाद मैंने उनकी चुत को देखा, उनकी चुत पर एक भी बाल नहीं था. </p>
<p>जब मैंने उनसे चूत की झांटों के बारे में पूछा कि आपकी चुत पर बाल क्यों नहीं हैं? </p>
<p>तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे पापा मुझे रोज चोदते हैं, इसलिए मैं सुबह ही अपने बाल साफ कर लेती हूं. </p>
<p>फिर मैंने मॉम के दोनों पैर खोले और इशारा किया. मैंने उनका इशारा समझ लिया और उनकी चुत में अपना सिर दे दिया. मैं जोर जोर से मॉम की चुत चाटने लगा. उनकी चूत बिल्कुल मक्खन जैसी मुलायम थी. मैं अपनी मॉम की चुत से निकलता हुआ लिसलिसा पानी पी रहा था और वह जोर-जोर से आवाज निकाल रही थीं. </p>
<p>‘आह उई आई मर गई अम्मा … चोद दे मादरचोद … अपनी मॉम की चुत का सारा पानी पी ले … आह आई आई रे … मर गई मैं तो..’ </p>
<p>उनकी आवाज ने मेरे अन्दर उन्हें चोदने का जुनून बना दिया था. मैंने 10 मिनट के अन्दर उनकी चुत का सारा पानी अपने मुँह में पी लिया. उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया. मेरा लौड़ा अंडरवियर से बाहर निकलने के बाद मेरी मॉम ने उसे देख कर कहा कि तेरा लौड़ा तो तेरे बाप से भी ज्यादा मोटा और लम्बा है. आज तू इसे मेरी चुत में डाल दे, जिससे मेरी चुत की प्यास शांत हो जाए. अपनी मॉम की चुत में घुसा दे बेटा. </p>
<p>फिर मैंने मॉम की चुत को चुदाई के लिए खोला और निशाना लगाते हुए एक ही झटके में अपना आधा लौड़ा मॉम की चूत में घुसा दिया.<br />
मॉम एकदम से हुए इस दर्द से चीख उठीं.</p>
<p>मैंने उनकी चीख पर ध्यान ही नहीं दिया और अपना बचा हुआ आधा लौड़ा दूसरे झटके में अन्दर घुसा दिया.</p>
<p>पूरा लंड घुसने के बाद मॉम और जोर से चीख उठीं. अब मेरा पूरा का पूरा लौड़ा मॉम की चूत में घुसा हुआ था … और मैं लंड पेल कर रुक गया. </p>
<p>मॉम दर्द से चीख रही थीं, क्योंकि मेरा लौड़ा लंबा और मोटा था. फिर मैंने धीरे-धीरे धक्का मारना शुरू किया. मॉम दर्द से कलपते हुए भी चोदने के लिए कह रही थीं- आह उम्म्ह … अहह … हय … ओह … अई आह … चोद अपनी मॉम को बेटा चोद दे. </p>
<p>मैंने आराम आराम से धक्का मारना शुरू किया. मॉम को दर्द हो रहा था इसलिए मैंने उनका एक पैर उठाया और अपने कंधे पर रख दिया. उसके बाद मैंने मॉम की चुदाई जोर जोर से करनी शुरू किया.</p>
<p>मॉम की सेक्सी आवाजें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. वे अब तक एक बार झड़ चुकी थीं. थोड़ी देर की धकापेल चुदाई के बाद मैंने मॉम की‌ चुत में से लौड़ा निकाला और उनके मुँह में दे दिया. </p>
<p>मॉम ने मेरा लौड़ा 10 मिनट तक चूसा. जब मॉम मेरा लौड़ा चूस रही थीं, तब मैंने उनकी चुत में उंगली की. </p>
<p>लौड़ा चूसने के बाद मैंने मॉम की चुत का माल उन्हें खिलाया. फिर किस करने लगा. </p>
<p>किस करने के बाद मैंने मॉम की घोड़ी बना कर चुदाई की. कुछ मिनट की चुदाई के बाद मॉम फिर से झड़ गईं. बाद में मैं भी झड़ गया. इस बार मैंने अपना सारा पानी में मॉम की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>दो बार मॉम की चुदाई करने के बाद मैं सोने के लिए अपने कमरे में जाने लगा. तभी मॉम ने मेरा हाथ पकड़ा और खींच कर मुझे तरह तरह की गाली देने लगीं और कहने लगीं- मेरी गांड क्या तेरा बाप मारेगा … साले गांड मार … फिर सोने जाना.</p>
<p>मैंने मॉम की गांड चाटना शुरू किया. मॉम की गांड चाटते चाटते बीच में मैं उनकी गांड में उंगली भी कर रहा था. मॉम फिर से आवाज निकालने लगीं- आआह अई अई आह मर गई मैं तो!<br />
कुछ देर तक गांड चाटने के बाद मैंने अपना लौड़ा उनकी गांड में दे दिया और उनकी गांड चोदने लगा. </p>
<p>मैं मॉम के चूचे पकड़ कर कहने लगा- नीलम साली … आज से तू मेरी रखैल है. मैं तुझे जब चाहे चोद दूंगा. तुझे चोदे बिना मैं कभी नहीं सोऊंगा. </p>
<p>गांड मारने के बाद में मॉम ने पूछा- तू मुझे अपने बच्चे की मॉम कब बनाएगा.<br />
मैंने मॉम से कहा- मैं तुझे 40 दिन में अपने बच्चे की मॉम बना दूंगा. </p>
<p>उस रात मैंने मॉम की 4 बार चुदाई की और उन्हें मैंने अपनी पहली पत्नी बना दिया.</p>
<p>अगले दिन जब हम सुबह उठे … तो मैंने मॉम से कहा- पापा मुझ पर बहुत गुस्सा करेंगे, अगर मैंने आपको अपने बच्चे की मॉम बना दिया.<br />
तब मॉम ने कहा- हमारा परिवार चुत मारने वाला परिवार है … तुझसे पहले तेरा भाई मुझे चोद चुका है. तेरे पापा को यह बात पता है कि उनके बाद मैं तेरे भाई से चुत चुदवाती हूं. अगर तूने मुझे माँ बना दिया, तो कोई दिक्कत नहीं.</p>
<p>फिर मैंने मॉम को लिप किस किया और पूछा- तुम्हें सबसे पहले किसने चोदा था?<br />
मॉम ने कहा- सबसे पहले मुझे तेरे बाप ने चोदा था. तेरे बाप ने मुझे रुला दिया था.<br />
“फिर उसके बाद?”<br />
मॉम ने कहा- मैंने तेरे बाप से शादी की थी. उस साले ने मुझे चोद चोद कर मार दिया था. अगर तुम मुझे अपने बाप के सामने भी चोदेगा, तो उसे कोई दिक्कत नहीं होगी. </p>
<p>उसके बाद मैंने फिर से सुबह अपनी मम्मी की चुदाई कर डाली. अब मैं अपनी मॉम को रोज़ चोदता हूं. अब तो मम्मी एकदम बिंदास नंगी ही घर में घूमती हैं. मैंने अपने पापा के साथ भी उनको चोदा है. उसकी कहानी मैं बाद में लिखूंगा.</p>
<p>इस तरह मैंने अपनी मॉम की चुदाई करके अपनी सेक्स सफर की शुरूआत की.</p>
<p>अगर आपको मेरी मॉम की चुदाई की सेक्स कहानी अच्छी लगी?<br />
मेरी ईमेल आईडी पर मैसेज भेजिए.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेरी पहली चोदाई कहानी-2</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:48:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग मेरी पहली चोदाई कहानी-1 में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था. अब आगे: जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा <a title="मेरी पहली चोदाई कहानी-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई कहानी-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग<br />
मेरी पहली चोदाई कहानी-1<br />
में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था.</p>
<p>अब आगे:</p>
<p>जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा था कि मेरी चूत की चोदाई की कहानी कब पूरी होगी.</p>
<p>पूरा दिन ऐसे ही ख्यालों में गुजर गया. मैं इंतजार करता रहा कि अभी उसका कॉल आएगा, उससे बात होगी. मगर उस दिन उसका कोई कॉल नहीं आया. मैं उसके ख्याल में मुट्ठ मारके सो गया.</p>
<p>मुठ मारने से तनाव खत्म सा हुआ और मुझे नींद भी कब आ गई, पता ही नहीं लगा. </p>
<p>फिर मैं जैसे अचानक उठा. मैंने देखा कि शाम के 7:00 बज रहे थे. मैंने अपने फोन को देखा, तो उसमें बहुत सारे मिस कॉल आए हुए थे. मैंने इतने मिस कॉल देख कर तुरंत उसको फोन किया.</p>
<p>यह सभी कॉल उसी के थे. मैंने कॉल किया, तो मेरे कुछ बोलने से पहले ही वह बोल उठी- कहां थे अब तक? कितने फोन किए … सुबह कुछ करने नहीं दिया, तो क्या नाराज हो गए?<br />
फिर मैंने उसे समझाया कि मैं नाराज नहीं हुआ हूं … मैं तुम्हारा ही वेट कर रहा था और मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं लगा.<br />
उसने कहा कि चलो अभी मेरे घर पर कोई नहीं है, अभी तुम आ जाओ. हम अपना सुबह का अधूरा काम पूरा कर लेते हैं.</p>
<p>उस वक्त रात के लगभग 8:00 बज रहे थे. मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके घर चल दिया. गाड़ी को मैंने दूर खड़ा कर दिया था ताकि कोई देख ना ले. क्योंकि वहां पर मेरी जान पहचान के भी लोग थे. </p>
<p>नजदीक जाकर मैंने उसे कॉल किया और पूछा कि मैं सीधा अन्दर आ जाऊं?<br />
तो उसने कहा कि नहीं … रुको तो … पहले मुझको देखने दो, बाहर कोई है तो नहीं … अगर किसी ने देख लिया, तो मेरा यहां रहना मुश्किल हो जाएगा.<br />
मैंने कहा कि हां देख लो, मैं वेट करता हूं.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसका कॉल आया. उसने कहा कि कोई नहीं है, जल्दी से आ जाओ. </p>
<p>मैं सीधा घर में घुस गया. घर में घुसते मैंने उसे देखा. देखते ही मैं उससे चिपक गया. उसे गले से लगाया और उसको किस करने लगा. उस वक्त मैं पागल हो चुका था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. बस पागलों की तरह से किस किया जा रहा था. </p>
<p>उसने मुझे रोकते हुए कहा- सब कुछ यहीं करोगे क्या? चलो कमरे में चलते हैं.<br />
फिर मुझे होश आया. मैंने अपने आपको संभाला.</p>
<p>हम दोनों कमरे में चले गए. कमरे में जाते ही मैं उसे घुमा कर उसकी गर्दन में चुम्बन करने लगा. तब तक मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैं पीछे से उसकी मोटी गांड में लंड को ठेले जा रहा था. आगे से अपने हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था. मैं इतना जोर से दबा रहा था कि मुझे बस पहली और आखिरी बार दूध दबाने को मिले हों.</p>
<p>वह मुझसे कह रही थी- आह धीरे से करो … मुझे लग रही है.<br />
पर मुझे कहां कुछ सुनाई देने वाला था. मैं तो बस अपने अन्दर के शैतान को जगा चुका था. उसकी एक भी आवाज मेरे कानों में नहीं आ रही थी. उस टाइम तो बस खड़े खड़े मन कर रहा था कि जल्दी से गांड में लंड घुसा दूँ.</p>
<p>मैंने उसकी साड़ी को पीछे से उठा दिया और मैंने अपने लंड को उसके सीधा गांड में सैट करके धक्का मार दिया. बिना किसी अनुभव के लंड पेल देने से लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था. मेरी हरकत से उसको हंसी आ रही थी. </p>
<p>उसने मुझसे पूछा- क्या पहली बार कर रहे हो?<br />
मैंने कहा- हां … मैंने कभी सेक्स नहीं किया है.<br />
तो उसने कहा कि फिक्र मत करो मैं सब सिखा दूंगी.<br />
मैंने कहा- जल्दी से सिखा दो न.<br />
उसने हाथ पीछे करते हुए मेरे गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- चलो हम बाथरूम में चलते हैं … वहां करेंगे. </p>
<p>अब तक हमारे कपड़े नहीं निकले थे. सिर्फ मेरा लंड मैंने पेंट से बाहर निकाला हुआ था. उसने अभी तक मेरा लंड भी नहीं देखा था.<br />
जब मैंने कहा- हां चलो अन्दर चलते हैं.<br />
वह मेरी तरफ घूमी. उसका चेहरा मेरे से चेहरे के सामने आया.</p>
<p>जबी उसकी नजर धीरे से मेरे लंड पर पड़ी, तो उसने कहा कि ओ माय गॉड … तुम इतने बड़े से हथियार को मेरे छोटे से छेद में डालने की कोशिश कर रहे हो, पर तुम्हें तो इतना भी नहीं पता कि उसको कैसे डाला जाता है. </p>
<p>उसके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं थोड़ा सा सोचने लगा कि यह तो कितनी चालू लड़की है … कितनी बेशर्मी से बातें कर रही है. </p>
<p>मैंने उसकी बातों को ध्यान नहीं देते हुए आगे बढ़ना ही अच्छा समझा. फिर वह मेरे लंड को पकड़कर मुझे बाथरूम में ले गई. मैं मेरे लंड के साथ उसके साथ में अन्दर खिंचता हुआ जाने लगा. उस टाइम मुझे ऐसा लगा कि लंड कितने कमाल की चीज होती है. सिर्फ उसने लंड को ही पकड़ा था और मेरी पूरी बॉडी उसके कंट्रोल में हो गई थी.</p>
<p>उसके लंड पकड़ते मुझे झनझनाहट होने लगी थी. यह क्या हो रहा है … ऐसी फीलिंग थी कि उस टाइम कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उसके लंड पकड़ते ही में और जोश में आ गया. </p>
<p>फिर मैं साथ में बाथरूम चला गया. बाथरूम में घुसते ही उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड को हाथ में पकड़ कर नीचे बैठ गई. वो उसे देखने लगी. </p>
<p>मैंने कहा- क्या देख रही हो?<br />
उसने कहा- मैं इसी के लिए तरस रही थी और मैंने उस दिन आपको न जाने क्या बोल दिया था. मैंने बात भी नहीं की आपसे.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं … जो हुआ सो हुआ … अभी आगे का करते हैं. </p>
<p>फिर उसने मेरे लंड को सीधा मुँह में डाल लिया, जैसे ही मेरा लंड उसके मुँह में गया. मैं कांपने लगा, मुझे अजीब सा होने लगा. मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है … क्योंकि उस टाइम पहली बार इस लड़की ने मेरे लंड को छुआ था और मुँह में लिया था. वो मेरे लंड को ऐसे मुँह में ले रही थी, जैसे उसको बहुत मस्त चीज मिल गई, जिसके लिए वो बरसों से भूखी थी. </p>
<p>मेरे दोनों हाथ मेरे बस में नहीं थे, उसकी हाथ मेरी गांड के गोलों पर टिके हुए थे और मेरा लंड उसके मुँह में था. वो हाथों से मेरी गांड को आगे पीछे करने की कोशिश में लगी थी. मुझे समझ में आया कि ये मुझे आगे पीछे होने के लिए कह रही है. मैंने उसके सर को पकड़ कर गांड को आगे पीछे करने लगा, तो उसके मुँह से ओक ओक ओक की आवाज आने लगी थी. </p>
<p>फिर ऐसे ही कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने मेरा लंड बाहर निकाला.<br />
मैंने उससे कहा- मुझे अन्दर डालना है. </p>
<p>इतना सुनते ही वो मुझे किस करने लगी. उसके किस करते करते ही मैं अपने हाथों से उसकी साड़ी उतारने लगा. धीरे-धीरे मैंने पूरी साड़ी उतार दी, वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला. </p>
<p>मेरे दिमाग में एकदम से घंटी बजी और बचपन का एक डायलाग याद आ गया जब हम कुछ कमीन दोस्त किसी भी बड़े चूचे वाली लड़की को देख कर लव स्कूल कह देते थे. कहीं आज ये वही लव स्कूल तो मेरे सामने नहीं आ गया था. </p>
<p>मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं, इतने नुकीले चूचे मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखे थे. दूध चूसने के लिए मैं पागल होने लगा. मैंने आव देखा न ताव दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. मैं अपने आप ही में पागल हो रहा था कि पता नहीं मुझे क्या हुआ. </p>
<p>उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा. अब तक चूचे चूसते चूसते मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था. उसका एक हाथ मेरे लंड को पकड़कर आगे पीछे कर रहा था. मुझे उस टाइम बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>चूंकि मैं उस टाइम पहली बार चोदाई करने वाला था. यह सब मेरे लिए नया था. फिर उसने मुझे रोकते हुए मेरी पेंट उतारी और टी-शर्ट भी उतार दी. मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था. </p>
<p>वो मेरे शरीर को देख कर पागल हो गई और कहने लगी- मैंने आज तक ऐसा शरीर नहीं देखा … तुम कितने सेक्सी दिखते हो.<br />
मैंने कहा- तुम पहली लड़की हो, जिसने मुझे ऐसे देखा है.<br />
उसने कहा कि अगर कोई तुम्हें देख ले, तो पागल ही हो जाए.</p>
<p>उसके इतना बोलते ही मैं उसे किस करने लगा. उसका ब्लाउज मैंने पीछे से फाड़ दिया क्योंकि उस टाइम मैं बहुत जोश में था. उस समय वैसी सी फीलिंग आ रही थी कि मेरे अन्दर न जाने ताकत एकदम से डबल कैसे हो गई थी. </p>
<p>वो कहने लगी- यह क्या कर दिया तुमने … ब्लाउज ही फाड़ डाला … सब्र तो कर लो … मैं कहीं नहीं जाने वाली. मैं तुम्हारी ही हूं और हमेशा तुम्हारी रहूंगी.</p>
<p>मैंने उसे सीने से लगा लिया. मैं उसको इतना जोर से हग करने लगा कि उसके नुकीले चूचे मुझे अपनी छाती में गड़ते से महसूस होने लगे. जब मेरे सीने से उसके मम्मे लग गए, तो मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे शरीर को मलाई लग रही हो. </p>
<p>मुझे बड़ा मजा आ रहा था. फिर मैंने उसका पेटीकोट खोलने की कोशिश की, पर मुझसे नहीं खुला, तो उसने अपने हाथों से खुद का पेटीकोट खोल दिया. उसने अन्दर पेंटी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसको नंगी देखकर नीचे बैठ गया. </p>
<p>एकदम मुलायम मक्खन सी चूत को देख कर मैं पागल हो गया था. जाने मुझे क्या हुआ कि मैं उसकी चूत को हाथों से फैलाने लगा. अन्दर से एकदम गुलाबी थी उसकी चूत. मुझे पता नहीं क्या हो गया कि मैंने अपना मुँह अन्दर घुसा दिया और चूत के गुलाबी होंठों को चूसने लगा. इतना दम लगाते हुए चूत को चूसने लगा कि उसकी सांसें रुकने लग गईं. </p>
<p>तब उसने मेरा सर और जोर से अपनी टांगों के बीच में दबा दिया और वह धीरे-धीरे नीचे बैठे लगी. वो नीचे बैठी, तब भी मेरा सर उसकी टांगों के बीच में घुसा हुआ था. तब तक मैं भी लेट चुका था.</p>
<p>फिर उसने मुझे रोका और कहा- अब अन्दर डाल दो.<br />
उसके ये कहते ही मैंने पोजीशन बनाई और अपना लंड उसकी चूत में रखकर तैयार हो गया.</p>
<p>मैं जैसे ही लंड अन्दर डालने लगा, तभी बाहर से किसी के आने की आवाज आने लगी. हम दोनों बाथरूम के अन्दर थे.<br />
ध्यान से सुना तो रूम में आकर कोई बोल रहा था. </p>
<p>उसने फुसफुसाते हुए कहा- मेरे पति आ गए हैं … अब हम अन्दर फंस चुके हैं. हम बाहर कैसे जाएंगे … आज तो मैं मर गई. </p>
<p>इस तरह की बहुत सी बातें करने लगी. यह सब सुनकर मेरी गांड फटने लगी. मेरा खड़ा लंड कब बैठने को हो गया, मुझे पता ही नहीं लगा.<br />
उस टाइम वो कह रही थी- बाहर जाएंगे, तो वो हमें पकड़ लेंगे. </p>
<p>फिर अचानक उसके पति की आवाज आई- कहां हो तुम?<br />
तो उसने अन्दर से कहा कि मैं बाथरूम में हूं … नहा रही हूं.<br />
उसका पति कहने लगा कि आज इतनी रात को क्या नहाने की जरूरत आ गई?<br />
उसने कहा कि मेरी साड़ी गीली हो गई थी. मैं नहाने लग गई. </p>
<p>यह सब सुनकर मुझे थोड़ी सी तसल्ली हुई. फिर मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा. अब तो शुरू करते ही हैं. </p>
<p>तब तक वह खड़ी हो चुकी थी और मैंने भी लंड को सहला कर खड़ा कर लिया था. मैंने उसे पीछे से झुका दिया और लंड को चूत के छेद पर सैट करके सीधा अन्दर पूरा का पूरा घुसा दिया. </p>
<p>लंड के चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई. उसकी चीख इतनी जोर से निकली थी कि उसके पति ने बाहर से सुन ली. </p>
<p>यह देख के मुझे डर लगने लगा कि कहीं उसका पति अन्दर ना आ जाए. उस टाइम तो माइंड में यही रहता है कि हमारी नजर में कुछ गलत हो रहा है, तो सामने वाले की नजर में भी गलत ही होगा. </p>
<p>बाहर से पति चिल्लाया- क्या हुआ?<br />
उसने अन्दर से खुद को सम्भालते हुए कहा- कुछ नहीं हुआ, मैं जरा फिसल गई थी. </p>
<p>फिर इतना सुनते ही मैं लंड को आगे पीछे करने लगा. वो भी मेरे लंड के हर झटके का मजा ले रही थी. मुझे भी न मालूम कितना मजा आने लगा था. फिर धीरे-धीरे मेरे लंड के झटकों की स्पीड बढ़ने लगी, तो उसने मुझे रोक लिया.</p>
<p>अब उसने कहा- तुमको नीचे लिटा कर करूंगी. </p>
<p>मुझे नीचे लेटने का इशारा किया. मैं फर्श पर लेट गया. वो मेरे ऊपर आ गई. उसने मेरे लंड को चूत पर सैट किया. उसने मेरा पूरा लंड में चूत में ले लिया. मेरी आंखों के सामने ही मेरा लंड चूत में गायब हो चुका था. मेरे मन में ख्याल आया कि चूत के अन्दर कितना गहरा गड्डा होगा, जो इतने बड़े लंड को भी गायब कर दिया. </p>
<p>उसके बाद वो मेरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी. मुझे बहुत मजा आने लगा था … क्योंकि जिंदगी में पहली बार मेरा लंड किसी चूत में घुसा था. </p>
<p>फिर वह इतनी स्पीड से ऊपर नीचे होकर चोदाई करने लगी कि पच पच की आवाज आने लगी. </p>
<p>उस टाइम बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया कि आवाज बाहर भी जा सकती है और बाहर कोई बैठा हुआ है. </p>
<p>वह अपनी ही धुन में मेरे ऊपर नीचे होने लगी. ऊपर नीचे होते होते मुझसे लिपट गई. फिर ऊपर नीचे का खेल खेलना बंद कर दिया. वो मुझसे कस कर लिपट गई और उसने कहा कि मेरा हो गया है. </p>
<p>उस वक्त मुझे समझ में नहीं आया कि वह क्या कह रही थी.<br />
मैंने कहा- हां कोई बात नहीं. </p>
<p>मैंने उसे मेरे नीचे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया. मैं उसकी टांगों में बैठकर चूत को देखने लगा. वो पहले के मुकाबले अभी थोड़ी अधिक उभरी हुई थी. </p>
<p>मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों हो गया है?<br />
तो उसने कहा कि आज पहली बार कोई मस्त डंडा मेरी चूत में गया है और मुझे चोदाई में संतुष्ट किया है … ऐसे में हमेशा इसी लंड से चूत ख़ुशी से फूल कर कुप्पा हो जाती है.</p>
<p>इतना सुनते मैं खुश हो गया और मैंने सीधा अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया. </p>
<p>उसने कहा- क्या हुआ? अब तक तुम्हारा हुआ नहीं था क्या?<br />
मैंने कहा- देखो ना कितना खड़ा है. तुम्हारे अन्दर जाने के लिए कितना तड़प रहा है. </p>
<p>मैंने उसको किस करते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिए. कुछ देर बाद मैं नीचे से गांड और उसकी चूत को देखने लगा. वो गांड उठाने लगी. मैंने स्पीड बढ़ा दी और धकापेल चोदाई करने लगा. </p>
<p>तब तक उसका एक बार और हो चुका था. फिर मैंने फुल स्पीड में धक्के मारते हुए उससे कहा- मेरा पानी निकलने वाला है.<br />
यह कहते कहते ही मेरे लंड का पानी उसकी चूत में निकल गया. मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- यहां से बाहर कैसे जाएंगे … आपके पति बाहर बैठे हैं.<br />
तो उसने कहा- मैं निकल कर उनको बाहर भेज देती हूं. उनके जाने के बाद तुम चले जाना. </p>
<p>फिर उसके बाद उसने अन्दर से ही आवाज लगाई कि आप दूध ले आओ ना … तब तक मैं बाहर निकल कर कपड़े पहन कर आपके लिए खाना लगा देती हूं.<br />
उसका पति ‘ठीक है..’ कह कर वहां से दूध लेने चला गया. मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने, उसको किस किया और वहां से चला आया. </p>
<p>उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता है … हम चूत चुदाई का मजा कर लेते हैं.</p>
<p>तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी पहली चोदाई कहानी … मुझे मेल करके जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का! दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ <a title="भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का!<br />
<span id="more-309"></span></p>
<p>दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं।<br />
मगर एक बात मैंने अभी तक अपनी किसी भी कहानी में नहीं बताई कि मैं एक बहुत ही जिद्दी औरत हूँ। एक बार मेरे को खुन्नस चढ़ जाए तो फिर तो उस खुन्नस को निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ। आज मैं आपको अपनी खुन्नस की कहानी सुनाती हूँ। </p>
<p>हम तीन भाई बहन है। मैं छोटी हूँ, दोनों भाई बड़े हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई तो बाहर दूसरे शहर में रहते हैं। मगर छोटा भाई हमारे पैतृक घर में ही माँ के साथ रहता है। बाकी सब तो घर में खूब खाये पिये मोटे तगड़े हैं। मगर वो पता नहीं क्यों बहुत ही दुबला पतला सा है. और वैसे भी एक नंबर का चूतिया है, हर किसी से हर बार से डरता है।</p>
<p>बीवी उसकी बहुत सुंदर है, देखने में भी अच्छी तगड़ी है। शादी के बाद आते ही उसने भाई को अपने कब्जे में कर लिया। भाई तो बस उसका गुलाम ही बन गया।</p>
<p>जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तब मेरा और भैया भाभी का कमरा बिल्कुल मेरे साथ वाला था. रोज़ रात को मैं अपने कमरे में भाभी की सिसकारियाँ सुनती थी जब मेरा भाई कितनी कितनी देर तक मेरी भाभी की चूत को बजाता।<br />
अब पता नहीं वो उसकी चुदाई करता था या भाभी की चूत चाटता था। मगर भाभी की ‘हाय हाय’ नहीं खत्म होती थी।</p>
<p>भाभी की ‘हाय हाय’ सुन कर मेरी चूत भी पानी छोड़ देती और फिर मुझे भी अपनी गर्म चूत को ठंडा करना करने के लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ता। कभी मेरी उंगलियाँ होती, कभी कोई बाल बनाने वाला ब्रुश, कभी कोई छुपा कर रखी हुई गाजर मूली।</p>
<p>एक बात और थी कि भाभी की मेरी माँ से कभी नहीं बनी। दोनों को जब भी मौका मिलता दोनों आपस में उलझ पड़ती। भाई तो हमेशा भाभी की तरफदारी करता। माँ अकेली पड़ जाती।<br />
मगर मेरी माँ भी कम नहीं थी, उसके आगे भी घर में कोई बोल नहीं पाता था। पूरा रोआब था घर में उसका!<br />
बस यही भाभी थी, जिसने आ कर माँ की सत्ता को चुनौती दी थी।</p>
<p>फिर मेरी भी शादी हो गई, मैं अपने ससुराल आ गई। अब जैसे भाभी की सिसकारियाँ निकलती थी, अब मेरी निकलने लगीं।</p>
<p>समय बीतता गया। एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा धार्मिक स्थल है, जिसकी देखभाल एक मौलवी जी करते हैं। वो अक्सर मोहल्ले भर के घरों में घूम घूम कर चंदा इकट्ठा करते हैं, और उस पैसे से स्थान के काम, रखरखाव करते हैं।</p>
<p>तो वो मौलवी जी हमारे घर भी अक्सर आते हैं और इसी बात का भाभी मुद्दा बनाती हैं। वो पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि मम्मी का न इस मौलवी से कोई टांका है। जब भी वो बुड्ढा आता है। मम्मी उसे बहुत प्यार से चाय बना कर पिलायेंगी, उसकी बड़ी आवभगत करेंगी।</p>
<p>पहले तो यह बात सिर्फ भाभी मेरे को मज़ाक में कहती थी। पर एक बार भाभी और मम्मी की किसी बात पर कहासुनी हो गई, तो भाभी ने खुल्लम खुल्ला ये इल्ज़ाम मम्मी पर लगा दिया कि तेरा उस मौलवी से चक्कर चल रहा है। आज भी बुढ़िया की रंगीन मिजाजी खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मम्मी तो रोने लगी। अब बेटी तो माँ का ही पक्ष लेगी। मेरे दिल में भाभी के लिए बहुत गुस्सा था।</p>
<p>उसके बाद माँ ने मुझे बताया- पता नहीं तेरा भाई इसको कहाँ से पसंद कर लाया। अब एक तो ये अपने उच्च वर्ग होने का हम पर रोआब डालती है, दूसरा सभी घर वालों को जलील करती है, तेरे बारे, मेरे बारे सब के बारे में अनर्गल अनाप शनाप बोलती है। इस कुतिया ने तो जीना हराम कर रखा है।</p>
<p>वैसे तो भाभी मुझे भी कभी कभी कुछ न कुछ सुना देती थी, मगर इस बार तो उसने मेरी माँ के दामन पर छींटे उछले थे। मुझे बहुत बुरा लगा। मेरे दिल में भी आया कि ये जो अपने उच्च वर्ग के होने पर इतना इतराती है, और दूसरे लोगों से इतनी नफरत करती है, अगर इस साल में मैंने इसे किसी विधर्मी से न चुदवाया तो मेरा भी नाम नहीं।</p>
<p>मगर अब ऐसे मैं इसे कैसे किसी ऐरे गैरे के नीचे लेटा दूँ, और वैसे भी कोई आदमी क्यों मेरी बात मानेगा। मगर मुझे इतना जरूर था कि अगर इसने मेरी माँ के दामन को दागदार किया है, तो मैंने भी इसकी शराफत को तार तार नहीं किया, तो मुझे भी चैन नहीं पड़ेगा।</p>
<p>शाम को मैं और मम्मी बाज़ार गई। हमारे मोहल्ले में ही बहुत सारी दुकानें हैं। एक दुकान है, उस्मान पठान की … वो औरतों के सामान की दुकान करते हैं। लिपस्टिक बिंदी पाउडर क्रीम, ब्रा पेंटी ये सब। तो मैं बहुत पहले से उनसे समान लेती हूँ।</p>
<p>वो अक्सर मुझ पर अपनी निगाह रखते, मुझ से कभी कभी मज़ाक भी कर लेते। मतलब ठर्की आदमी।</p>
<p>मगर दिक्कत यह कि एक तो उसका काला रंग, शक्ल कहो तो बदशक्ल … कोई खूबसूरती नहीं पठानों वाली। मगर कद 6 फीट दो इंच, चौड़ा सीना। कद काठी पूरी पठानों वाली थी। रंग रूप छोड़ दो देख कर लगे कि अगर कोई औरत इसके नीचे लेट जाए तो उसकी तो ये माँ चोद कर रख दे।</p>
<p>अब मैं तो बचपन से ही सुंदर हूँ तो जब पहले भी कभी उनकी दुकान से ब्रा पेंटी लेने जाती तो वो मेरी ब्रा और पेंटी पर हाथ फेर कर मुझे देते, जैसे सोच रहे हों, इस ब्रा और पेंटी जिन पर मैं आज हाथ फेर रहा हूँ, कल ये तेरे गोल गोल मम्मो और फुद्दी से लिपटे होंगे।</p>
<p>खैर … ऐसा तो वो सबके साथ करते होंगे।<br />
मगर मुझ पर वो कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थे।</p>
<p>तो जब भाभी ने मेरी माँ पर गंदा इल्ज़ाम लगाया तो मेरी तो गांड जल गई। मैं सोचने लगी कि कुछ ऐसा करूँ कि भाभी कभी भी मेरे सामने सर न उठा सके, ऐसा जलील करूँ कि साली हमेशा के लिए इसकी नज़र नीची हो जाए।<br />
मगर ऐसा क्या करूँ?</p>
<p>एक दिन मैं वैसे ही घर में अकेली थी, बैठी बैठी बोर हो रही थी कि खामख्वाह मेरा हाथ मेरे मम्मों से फिसलते हुये मेरी सलवार में घुस गया।<br />
अब हाथ सलवार में घुसा तो सीधा मेरी फुद्दी पर जा कर रुका, फुद्दी को थोड़ा सहलाया, तो मन बहकने लगा, एक उंगली फुद्दी के अंदर ही घुस गई।</p>
<p>बस फिर क्या था, मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला और लगी उंगली की फुद्दी के अंदर बाहर करने। करते करते सोचने लगी कि आज किस से चुदवाऊँ। तो वैसे ही मन में उस्मान भाई का विचार आया … लंबा चौड़ा, ताकतवर! बस उसको सोच कर मैं हस्तमैथुन करने लगी।</p>
<p>सच में बड़ा मज़ा आया सोच कर के वो कैसी बेदर्दी से मुझे चोद गया। जब मेरी चूत का पानी निकल गया और मैं ठंडी हो कर लेट गई तो वैसे ही ख्याल आया कि अगर ये उस्मान मेरी भाभी की फुद्दी मारे तो एक तो वो जो इन लोगों को नफरत करती है, उसका वो मुंह बंद हो जाए, दूसरा अगर भाभी की चूत मेरे सामने चुदे तो मेरे सामने ज़ुबान खोलने लायक नहीं रहेगी और तीसरा जो उसने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया है, उसका भी बदला मिल जाएगा मुझे।</p>
<p>मगर सबसे बड़ी दिक्कत, उस्मान मेरी भाभी की चूत को क्यों चोदेगा, वो भी मेरे कहने पर। भाभी तो उसे पसंद भी नहीं करती तो फिर वो उसको क्यों पास आने देगी।<br />
बड़ी मुश्किल थी।</p>
<p>फिर दिमाग में एक आइडिया आया कि अगर मैं उस्मान से सेट हो जाऊँ, तो एक तो वो मेरी फुद्दी भी ठंडी करेगा, और अगर मैं उस से कहूँ कि वो मेरी भाभी को पटा ले किसी भी तरह, तो शायद ये बात बन सकती है।<br />
बेशक यह बहुत ही मुश्किल, काम था, अगर भाभी न पटी तो मेरी तो पक्का फटी क्योंकि उस्मान मुझे छोड़ेगा थोड़े, वो तो कहेगा, तुमने कहा, था भाभी को पटा कर चोद दो, वो तो नहीं पटी, पर तू तो आ मेरे नीचे।<br />
मगर कोशिश तो करनी चाहिए।</p>
<p>इस लिए मैंने सबसे पहले उसमान को लाइन देनी शुरू की। मैं अक्सर किसी न किसी छोटे मोटे सामान के बहाने उसकी दुकान पर जाती, वो मुझपे अपनी ठर्क मिटाता और मैं हंस हंस कर उसकी बातों के जवाब देती।</p>
<p>कुछ ही दिन में बात मज़ाक से छूने तक आ गई. वो मेरे हाथ बाजू कंधे को छू लेता, तो मैं ऐसे रिएक्ट करती, जैसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p>तो बस एक दिन हिम्मत करके उस्मान में बातों बातों में मेरे मम्मों को भी छू लिया। छू क्या लिया … ब्रा दिखाते वक़्त उसने ब्रा मेरे मम्मों पर रखी और पूरी फिटिंग करके दिखाई. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।</p>
<p>मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।</p>
<p>मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।</p>
<p>मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.<br />
मैं जान बूझ कर ड्रामा करती रही- रहने दो भाई, कोई देख लेगा, जाने दो, कोई आ जाएगा.</p>
<p>मगर इन कमजोर दलीलों का उस पर क्या असर … उसने दो नींबू की तरह मेरे दोनों मम्मे निचोड़ दिये और मेरी गांड फुद्दी हर जगह हाथ फिरा दिया और बोला- अब सब्र नहीं होता मेरी जान, किसी दिन मिल मुझे तुझे जन्नत की सैर करवाऊँगा।<br />
मुझे पता था कि मुझे चोदने का जुगाड़ कर रहा है ये!</p>
<p>तो मैंने कहा- ऐसे नहीं मुझे आपसे एक और काम भी करवाना है।<br />
वो बोला- क्या काम?<br />
मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि अगर आप मेरी भाभी की चूत को पहले ठोक दो, तो मैं तो आपको फ्री में सब कुछ दे दूँगी.<br />
वो बोला- तेरी भाभी? उससे तेरी क्या दुश्मनी है जो तू उसको मुझसे चुदवाना चाहती है?</p>
<p>मैंने कहा- है बस … आप बोलो आप क्या ये कर सकते हो?<br />
वो बोला- पक्का तो नहीं, पर कोशिश कर सकता हूँ। लगता तो है जैसे उसे भी कुछ चाहिए, मगर अगर वो मान गई तो!<br />
मैंने कहा- वो मान गई तो मैं भी मान गई।<br />
वो बोला- तो अभी के लिए कुछ और भी कर जाओ।<br />
मैंने कहा- और क्या इतना तो नोच लिए मुझे।</p>
<p>उसने अपने पाजामे में अपना लंड हिलाते हुये कहा- इसका कोई इंतजाम कर जाओ।<br />
मैंने दुकान के बाहर देखा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके पाजामे के ऊपर से उसका लंड पकड़ा और दबाने लगी। मोटा सा लंड मेरे थोड़ा सा दबाने से ही खड़ा हो गया। मगर जब मैं छोड़ने लगी, तो उस्मान ने मुझे पकड़ लिया।<br />
मैंने कहा- मुझे जाने दो।<br />
वो बोला- एक मिनट बस।</p>
<p>कहकर उसने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और अपना लंड निकाल कर मेरी तरफ किया और मुझे नीचे को दबाने लगा। मैं समझ गई कि साला लंड के चुप्पे लगवाना चाहता है।<br />
मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और 5-7 बार ज़ोर ज़ोर से चूस लिया और बस फिर तो मैं छोड़ कर भागी।</p>
<p>इससे उसको भी एतबार हो गया कि मैं उससे पट गई, और मुझे भी कि अब ये पक्का मेरी भाभी को पटायेगा।</p>
<p>वक़्त गुज़रता गया, करीब तीन महीने बाद एक बार मैं जब उस्मान की दुकान पर गई, तब वो बोला- सुन … जांघों पर तेल मल ले अपनी!<br />
मैंने पूछा- क्यों?</p>
<p>तो उसने अपने मोबाइल में कुछ पिक्स दिखाई, जिसमें मेरी भाभी उस्मान के साथ किस कर रही थी, उसको बांहों में भर रही थी।<br />
मैंने कहा- उस्मान भाई, बस अब एक काम करो, मेरी भाभी की चूत को मेरे सामने ठोकना, उसके बाद जब कहोगे मैं तुम्हारी।<br />
वो बोला- दिक्कत क्या है, दोनों ननद भाभी को एक साथ ठोक दूँगा, तू बता पहले तू चुदेगी, या तेरी भाभी?<br />
मैंने कहा- पहले भाभी … वो भी मेरे सामने, उसके बाद मैं अपनी पूरी एक रात तुमको दूँगी। उस रात अपनी सुहागरात होगी।</p>
<p>अब एक खूबसूरत नौजवान लड़की किसी को ऐसी पेशकश करे तो भला कौन टाल सकता है।</p>
<p>फिर एक दिन उस्मान ने कहा- कल तेरा भाई बाहर जा रहा है, कल मैं तेरे घर आऊँगा, तेरी भाभी की चूत चोदने! तू बता, तू कल चुदेगी, या बाद में?<br />
मैंने कहा- पूरी रात दूँगी आपको उस्मान भाई, बस मेरी भाभी की माँ बहन एक कर देना, उसको खूब गाली देना, मारना, तड़पाना, जलील करना। बस यही ख़्वाहिश है मेरी!<br />
वो मान गया।</p>
<p>अगले दिन करीब 12 बजे वो आया, तब मैं अपनी माँ के साथ किसी काम से बाज़ार चली गई।<br />
भाभी अकेली थी घर पर!</p>
<p>मगर मैं माँ को उनकी एक सहेली के घर बैठा कर, यह कह कर कि ‘आप बात करो, मैं आधे घंटे में आई।’ वापिस अपने घर आ गई।</p>
<h2>चुद गयी भाभी की चूत</h2>
<p>घर आई तो भाभी के कमरे का दरवाजा बंद था। मतलब उस्मान अंदर था।</p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।</p>
<p>मैंने भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से उस्मान ने ही दरवाजा खोला और मुझे अंदर ही खींच लिया।<br />
मैंने जब अंदर देखा, भाभी बेड पर बैठी थी, शायद बिल्कुल नंगी थी क्योंकि बेड से नीचे मैंने उसकी साड़ी, ब्रा और पेटीकोट गिरा पड़ा देखा, उस्मान भी बिल्कुल नंगा था।<br />
काला बदन, मगर बेहद खतरनाक, जैसे कोई जल्लाद हो, लंबा चौड़ा और भयावह।<br />
और उससे भी खतरनाक उसका लंड, जैसे कोई काला नाग हो।</p>
<p>भाभी मुझे देख कर चौंकी- रूपा … तुम तुम कहाँ से आ गई?<br />
शायद वो मेरे सामने अपना ये राज़ नहीं खोलना चाहती थी।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे चिंता मत कर मेरी जान … तेरे बाद उसकी भोंसड़ी भी लेनी है मुझे।<br />
भाभी थोड़ हैरान हो कर बोली- रूपा तू भी?<br />
मैं मुस्कुरा दी- बस क्या बताऊँ भाभी … पता नहीं इनकी बातों में क्या जादू था, मैं खुद को रोक ही नहीं पाई। और जब इन्होंने आपका बताया तो मैंने कहा कि ‘भाभी बड़ी हैं पहले उसको … फिर मुझको।’</p>
<p>भाभी के चेहरे पर एक विश्वास की चमक आ गई कि अगर मैं इसके सामने नंगी हुई हूँ, तो ये भी तो इस पठान से चुदवाएगी।<br />
मैंने भाभी को विश्वास में लेने के लिए अपनी सलवार उतार दी और सामने सोफ़े पर ही बैठ गई।</p>
<p>उस्मान भाभी के पास गया और उसने भाभी के जिस्म से चादर खींच कर उसे नंगी कर दिया।<br />
क्या शानदार जिस्म की मल्लिका है भाभी मेरी … गोरा, बेदाग चिकना जिस्म।<br />
दो बच्चों की माँ … मगर किसी भी मर्द का ईमान बिगाड़ दे, ऐसी सुंदरता।</p>
<p>मगर अब वो किसी इंसान के सामने नहीं … बल्कि एक वहशी के सामने नंगी लेटी थी।</p>
<p>उस्मान सीधा उसके ऊपर जा कर लेट गया और लेटते ही उसने भाभी की दोनों टाँगें खोली, और अपना काला भुसंड लौड़ा भाभी की गुलाबी फुद्दी में घुसेड़ दिया।</p>
<p>भाभी इस अकस्मात हमले के लिए तैयार नहीं थी, शायद वो उस्मान से पहले कुछ प्रेमालाप की उम्मीद लगाए बैठी थी. मगर जब उसने अपना लंड भाभी की फुद्दी में डाला, भाभी की तो चीख ही निकाल गई- अरे … आह उस्मान भाई धीरे!<br />
मगर उसे तो जैसे कोई जन्नत की हूर मिल गई हो और वो उसे जल्द से जल्द चोद कर अपनी हवस मिटा लेना चाहता था।</p>
<p>बस दो चार घस्सों में ही उसने अपना लौड़ा भाभी की चूत में घुसा दिया। मोटा, लंबा और खुरदुरा लंड लेकर भाभी खुश थी।<br />
“उस्मान तेरा औज़ार तो बहुत तगड़ा है.” वो बोली।<br />
उस्मान बोला- क्यों तेरे खसम का छोटा है क्या?<br />
भाभी बोली- छोटा भी, पतला भी, और कमजोर भी। तू तो बहुत दमदार है रे!</p>
<p>उस्मान के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी। बोला- साली अभी तूने मेरा दम देखा कहाँ है, अभी तो सिर्फ पठान का लौड़ा देखा है, जब मैं अपनी आई पे आऊँगा, तब देखना तेरी माँ न चोद कर रख दी, तो कहना!<br />
और वो भाभी के फुद्दी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.</p>
<p>तो मोटे लंड की रगड़ से भाभी भी मस्ती में आ गई और वो लगी सिसकारियाँ भरने। वही सिसकारियाँ जो वो मेरे भाई के साथ सेक्स करते हुये भरती थी।<br />
और अपने सामने प्रत्यक्ष चुदाई होते देख कर मेरी फुद्दी भी पानी पानी होने लगी और मैंने भी अपनी टाँगें खोल कर उनको देखते हुये अपनी फुद्दी में उंगली करना शुरू कर दिया।</p>
<p>उस्मान मेरी और देख कर बोला- अरे तू क्यों उंगली कर रही है मादरचोद। इधर आ … और देख पठान का लौड़ा, तेरी चूत का भोंसड़ा न बना दूँ तो कहना, इधर आ।</p>
<p>मैं उठ कर उनके पास ही बेड पर बैठ गई तो उस्मान ने मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी जांघें और मेरी फुद्दी नंगी कर दी। मेरी हल्की हल्की झांट पर हाथ फेर कर बोला- अपनी कमीज़ उतार! मैंने अपनी कमीज़ उतार दी, अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी।</p>
<p>उस्मान मेरे मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- क्या मुलायम माल है साली, जैसी माँ मलाई, वैसी बेटी मक्खन!<br />
भाभी तो एकदम से बोली- तो क्या उस्मान … तूने मम्मी जी को भी चोदा है?<br />
शायद वो जानना चाहती थी कि कहीं मेरी मम्मी का कोई कारनामा पता चले ताकि कल को वो उस बात को मेरी माँ के खिलाफ इस्तेमाल कर सके।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे नहीं, मैंने इसकी माँ नहीं चोदी, पर जब भी देखता हूँ, तो सोचता हूँ कि बुढ़िया इस उम्र में इतनी हसीन है, तो जवानी क्या कयामत रही होगी। हाँ अगर मौका मिले तो मैं तो साली बुड्ढी को आज भी चोद दूँ।</p>
<p>मैंने उस्मान से कहा- पहले जिसको चोद रहे हो, उसको तो चोद लो।<br />
उस्मान बोला- अरे ये अब कहाँ जाएगी, आज के बाद अगर ये अपने पति के पास भी चली जाए तो मेरा नाम बादल देना।</p>
<p>भाभी बोली- अच्छाजी, ऐसी क्या बात है तुम में?<br />
उस्मान बोला- तो ले साली छिनाल, अब देख, तेरी चीखें तेरी माँ को न सुना दी तो कहना।</p>
<p>उसके बाद उस्मान ने भाभी की चूत को खूब पेला, इतनी ज़ोर से पेला कि भाभी का चीख चीख कर गला भर आया, उसकी आँखों से आँसू बह निकले- उस्मान, नहीं धीरे धीरे उस्मान, नहीं, उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई मैं मेरी माँ … नहीं उस्मान धीरे … आह … बस रुक कमीने साले … बस आह।</p>
<p>मगर एक कमजोर औरत जिसको हट्टे कट्टे उस्मान ने अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि भाभी तो हिल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ रो रही थी, चीख चिल्ला रही थी।<br />
उस्मान तो सच में बड़ी बेदर्दी से मेरी भाभी को चोद रहा था।<br />
मुझे तो उसे देख कर अपना डर लगने लगा कि जब ये मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरा क्या हाल करेगा। </p>
<p>जितना भाभी चीख रही थी, उस्मान को उतना ही मज़ा आ रहा था और वो भी उसे उतना ही और तकलीफ दे रहा था- चीख, भैन की लौड़ी, तेरी माँ को चोदूँ, साली कुतिया की औलाद, चीख और शोर मचा, साली कैसे रंडी की तरह ड्रामा करती है, किसने सिखाया इस तरह चीखना, तेरी माँ ने या तेरी बहन ने। साली वो भी क्या ऐसी ही रंडियाँ हैं तेरी तरह? बुला उनको भी … यहीं इसी बिस्तर पर तेरे सामने तेरी माँ चोदूँगा, कुतिया, साली … तेरी बहन की भी इसी बिस्तर पर गांड के चीथड़े उड़ा दूँगा। और ये तेरी ननद, इसकी फुद्दी का फूल भी मैं ही खिलाऊँगा।</p>
<p>और पता नहीं क्या क्या उस्मान भाभी को और उसे खानदान की सब औरतों की गालियां देता रहा।</p>
<p>मगर जैसे उसने भाभी को शिकंजे में कस कर उसकी चुदाई कर रहा था, उसे देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।<br />
मैं भी उनके बिल्कुल पास भाभी की चूत चुदाई देख कर अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी। पांच मिनट में मेरी तो फुद्दी पानी छोड़ गई मगर उस्मान नहीं रुका।</p>
<p>भाभी ने भी थोड़ी देर बाद कह दिया- उस्मान भाई, मेरा हो गया, बस तू भी अपना पानी गिरा दे।<br />
मगर उस्मान बोला- अरे रंडी की औलाद, अभी तो मैं शुरू ही किया है, अभी तेरी माँ कहाँ चुदी है, अभी देख तो तेरी फुद्दी अभी भी सफ़ेद पड़ी है, इसे लाल तो होने दे।</p>
<p>कुछ देर और बैठी मैं उसकी चुदाई देखती रही मगर फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।<br />
उस्मान बोला- अरे तू क्यों कपड़े पहनने लगी?<br />
मैंने कहा- मम्मी को लेने जाना है।<br />
वो बोला- अरे यार ये क्या बात हुई? अभी तो इस कुतिया को चोदने में मज़ा आने लगा था।</p>
<p>मगर मैं चली आई। बाद में शायद उस्मान भी चला गया होगा।<br />
जब मैं मम्मी को लेकर घर आई तो घर पर भाभी ही अकेली थी. मगर उसकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उसकी तसल्ली से पिटाई की हो।</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ, आपकी तो बड़ी हालात खराब लग रही है?<br />
वो बोली- अरे पूछा मत, कहाँ पंगा ले लिया मैंने। तेरे जाने के बाद, साले ने मेरी पिटाई भी करी, और मैंने गुस्सा किया, तो साले ने ज़बरदस्ती पीछे गांड में डाल दिया। इतना दर्द हो रहा है न नीचे, क्या बताऊँ।</p>
<p>बेशक मैं भाभी के साथ उसका दुख सांझा कर रही थी, मगर अंदर ही अंदर मैं खुश थी कि साली तूने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया था, देखा उसका नतीजा, गांड फाड़ कर रख दी तेरी।</p>
<p>फिलहाल इतना ही बाकी फिर कभी।<br />
कैसी लगी मेरी भाभी की चूत की चुदाई स्टोरी?<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hotel Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और… हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण <a title="होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/" aria-label="Continue reading होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और…<br />
<span id="more-291"></span></p>
<p>हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण परिवार है लेकिन हम लोग बहुत अच्छे से रहते हैं. मेरा भाई मुझसे बड़ा है. मेरी मम्मी हाउसवाइफ है और पापा का अपना काम है और भाई नौकरी करते हैं.</p>
<p>मैं भी एक अच्छी सी जगह नौकरी करती हूँ जो मेरे भाई ने लगवाई है. मैं और मेरा भाई हम दोनों साथ में ही नौकरी करने जाते हैं. मैं अपने भाई एक साथ ऑफिस जाती थी और अपने भाई के साथ ऑफिस से आती थी.</p>
<p>मैं अपने आपको बहुत अच्छे से रखती हूँ मतलब मैं बहुत खूबसूरत हूँ. मेरा फिगर भी बहुत अच्छा है और मेरी गांड थोड़ी सी सेक्सी है. मतलब कि जब मैं चलती हूँ तो मेरी गांड ऊपर नीचे हिलती है. मेरी चूची भी बड़ी बड़ी है और मैं खाते पीते घर की हूँ तो मेरा फिगर बहुत अच्छा है.</p>
<p>मुझे ऑफिस में बहुत सारे लोग घूरते रहते है. ऑफिस में एक लड़की जिसका नाम मौलीश्री है, मेरी सहेली बन गयी और हम दोनों एक दूसरे से घुलमिल गयी. वो लड़की बहुत चालू थी और उसने ऑफिस में ही कई बॉयफ्रेंड बनाये हुए थे. वो सबसे मजा लेती थी.</p>
<p>ऑफिस में और उसके साथ रहते रहते ऑफिस में एक लड़के जगेश के साथ मेरी भी बातें होने लगी. मेरे भाई को ये बात पता नहीं थी कि ऑफिस में एक लड़का मेरा दोस्त बन गया है. मेरी सहेली मौलीश्री एकदम खुल कर बात करती थी और उसके साथ रहते रहते मैं भी खुल गयी थी.</p>
<p>एक दिन मैं अपने रूम में सो रही थी तो भाई के रूम में लाइट चालू थी. भाई हमेशा अपने रूम की लाइट बंद करना भूल जाते थे इसलिए मैं उनके रूम में उनके रूम का लाइट बंद करने के लिए गयी तो देखा कि भाई अपने मोबाइल में पोर्न देख कर मुठ मार रहे थे.</p>
<p>मैं ये खिड़की से देख कर बाहर आ गयी. भाई को देख कर मुझे भी अपने मोबाइल में पोर्न देखने का मन किया तो मैं अपने मोबाइल में पोर्न देखने लगी.</p>
<p>मेरे मोबाइल में पोर्न पहले से ही था क्योंकि मेरे ऑफिस में जो लड़की मेरी सहेली बनी थी, वो मुझे हमेशा पोर्न भेजती रहती थी. उसके बॉयफ्रेंड उसको पोर्न विडियो भेजते थे तो वो मुझे भेजती थी. मैं उससे दोस्ती करने के बाद ही इतना बिगड़ गयी थी कि मैं रोज मोबाइल में पोर्न देखने के बाद और अपनी चूत में उंगली करने के बाद ही सोती थी.</p>
<p>मैं अपनी ऑफिस वाली सहेली मौलीश्री के साथ रहते रहते कभी कभी भाई से छुपकर घूमने भी चली जाती थी. मौलीश्री मेरे घर से कुछ दूरी पर रहती थी और वो अपनी स्कूटी से आती थी तो हम दोनों सहेलियां जिस दिन हम लोग की छुट्टी रहती थी, घूमने जाती थी.</p>
<p>मैं भी अपने ऑफिस वाले लड़के से बात करती थी और ऐसे ही मौली के कहने पर मैं भी उसके साथ घूमने जाने लगी.</p>
<p>हम दोनों एक दिन घूमने गए थे और जगेश ने मुझे उसकी गर्लफ्रेंड बनाने के लिए मुझे कहा. उस वक्त तो मैंने उसे कुछ नहीं कहा पर अगले दिन मैंने अपनी सहेली से पूछने के बाद उसको हाँ बोल दी.<br />
और अब मैं और जगेश हम दोनों एक दूसरे के साथ रोज बात करने लगे.</p>
<p>मेरी सहली मौली मुझे बताती थी कि वो अपने बॉयफ्रेंड से कैसे चुदाई का मजा लेती है तो मुझे भी चुदवाने का मन करता था और मेरी चूत भी गीली हो जाती थी. मैं मौली से पूछती थी कि ‘कैसे चुदवाती हो’ तो वो सब कुछ खुल कर बताती थी.<br />
मेरे अन्दर की वासना जग गयी थी और मुझे भी चुदवाने का मन करता था. मैं रोज रात को अपनी चूत उंगली करती थी लेकिन अब मेरा उंगली करने से भी ज्यादा सेक्स करने का मन करता था.<br />
मेरी सहेली ने मुझे बताया कि मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स कर लूं क्योंकि वो भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स करती थी.</p>
<p>एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड जगेश ने मुझे किस करते हुए बोला कि वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता है. हम दोनों बहुत दिन से एक दूसरे के साथ थे. मैं भी सेक्स करना चाहती थी तो मैं भी मान गयी. मेरी सहेली के बताये होटल में जाने का हम दोनों ने एक दिन तय कर लिया. मैं बहुत खुश थी कि आज मुझे लंड से चुदवाने के लिए मिलेगा क्योंकि मैं अपनी चूत में उंगली करते करते एकदम बोर हो गयी थी. मुझे लंड से चुदवाने का मन करता था.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड दोनों होटल में गए और उसने रूम लिया. होटल रूम में जाने के बाद हम एक दूसरे को किस करने लगे. वो मुझे किस करते हुए मेरी गांड को भी दबा रहा था.</p>
<p>तभी हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए और हम नंगे हो गए. मैं इतना गर्म हो गई थी कि मेरी चूत गीली हो गयी थी, मेरी चूत से पानी निकल रहा था.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड जगेश मुझे बिस्तर पर ले गया और मेरी चूची को चूसने लगा. मेरी चूचियों को चूसने के बाद उसने मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और उसे किस करने लगा. मैं भी गर्म होकर सिसकारियाँ लेने लगी.</p>
<p>अब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डाल कर मेरी चूत को चाटने लगा. मैं और ज्यादा जोश में आकर सिसकारियाँ भरने लगी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाने लगी.</p>
<p>हम दोनों अब होटल के रूम में असली सेक्स करने के लिए बेचैन होने लगे. मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में आधा डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. मुझे शुरू में दर्द हो रहा था लेकिन जब उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया तो मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी. उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए ताकि मेरी सिसकारियाँ होटल रूम से बाहर नहीं जायें.</p>
<p>वो मुझे किस करने लगा और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर कुछ देर के लिए रुक गया. मैं जब कुछ देर के बाद नार्मल हो गयी तो जगेश मुझे चोदने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी और अपनी गांड उठा उठाकर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी.</p>
<p>हम दोनों प्रेमी सेक्स करने लगे. हम दोनों कभी एक दूसरे को किस कर रहे थे तो कभी एक दूसरे को जोर से गले लगा रहे थे.</p>
<p>मुझे अपनी सहेली की बात याद आ रही थी. वो कहती थी कि सेक्स करने में बहुत मजा आता है और सच में सेक्स करने में बहुत मजा आता है.</p>
<p>मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करने के साथ सिसकारियाँ भी ले रही थी. उसने मुझे चोदते चोदते मेरी चूची को जोर से दबा दिया तो मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गयी. मेरा बॉयफ्रेंड मुझे चोद रहा था और मैं उतावली होकर उससे चुदवा रही थी.</p>
<p>कुछ ही देर बाद हम दोनों सेक्स करते करते झड़ गए और कुछ देर के लिए शांत हो गए.</p>
<p>एक बार सेक्स करने के बाद जगेश ने कॉफ़ी का आर्डर दिया और कुछ देर बाद वेटर हमारे लिए कॉफ़ी लेकर आया. जब वेटर रूम में आया तो मैं बाथरूम में चली गयी क्योंकि मैं नंगी थी और वो कॉफ़ी देकर चला गया और मेरे बॉयफ्रेंड ने उसको टिप दिया.</p>
<p>हम दोनों ने स्वाद ले ले कर कॉफ़ी पी. होटल रूम में एक बड़ी टी.वी. लगा था और हम दोनों टी.वी. देखने लगे. हम दोनों को रोमांटिक गाने बहुत पसंद हैं तो हम रोमांटिक गाने देख रहे थे.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दोनों लोग नंगे थे और वो मुझे अपनी बाँहों में लेकर मेरी चूची को दबा रहा था. मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दुबारा सेक्स करने के लिए गर्म हो गए और हम एक दूसरे को चूमने लगे.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड होंठ को चूम रहा था और मैं उसके होंठ को चूम रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे को किस कर रहे थे. मुझे किस करने के बाद जगेश मेरे बूब्स को मसलने लगा और उसका मोटा लंड मैं हिलाने लगी.<br />
मेरा बॉयफ्रेंड मेरी चूची को मसलने के बाद मेरी चूत को चाटने लगा और उसके बाद उसने अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>मैं सिस्कारियाँ लेने लगी और मुझे सेक्स करने का मन करने लगा. उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और जोर से धक्का मेरी चूत में मारा था तो मैं चीख उठी और कुछ देर में मैं सीत्कारें भरने लगी- आह उई उई आह!<br />
और वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा.</p>
<p>मेरी जान ही निकल गयी थी क्योंकि वो बहुत जोर जोर से धक्का मार रहा था. उसका लंड पूरा मेरी चूत के अन्दर जा रहा था और मैं चुदासी आवाजें निकाल रही थी. हम दोनों सेक्स कर रहे थे और मैं अपनी गांड उठा उठाकर अपने बॉयफ्रेंड का लंड अपनी चूत में ले रही थी.</p>
<p>फिर सेक्स करते करते हमने पोजीशन बदल ली, मैं घोड़ी बन गयी और मेरा बॉयफ्रेंड मेरे पीछे आ गया और मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. जगेश मेरी गांड को मसल रहा था और मुझे चोद रहा था.<br />
थोड़ी देर में ही हम सेक्स करते करते झड़ गए, हमारा पानी निकल गया था और हम दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए थे. ऐसी जोरदार चूत चोदन करने के बाद कब हमारी नींद लग गयी पता ही नहीं चला.</p>
<p>हम दोनों जब उठे तो शाम हो चुकी थी. मुझे दो बार सेक्स करने के बाद बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.</p>
<p>मैं अपनी चूत को साफ़ करने बाथरूम में गयी, अपने आपको अच्छे से साफ़ किया और उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>जगेश भी जाग चुका था, वो बाथरूम जाकर लौटा और कुछ देर में उसने अपने कपड़े पहन लिये. हम दोनों ने होटल रूम में ही कुछ देर तक बैठ कर बातें की और उसके बाद हम होटल रूम से बाहर आ गए.</p>
<p>मैंने अपने मुंह पर कपड़ा बाँध कर अपना चेहरा छुपा लिया था. हम होटल से बाहर आ कर एक गार्डन में गए और वहां कुछ देर बैठकर एक दूसरे की बाँहों एक दूसरे को किस किया.<br />
और उसके बाद मैं और मेरा बॉयफ्रेंड अपने अपने घर आ गए.</p>
<p>मैंने अपनी होटल सेक्स की बात अपनी सहेली मौलीश्री को बताई तो वो भी गर्म हो गयी थी और वो भी अगले दिन ही अपने बॉयफ्रेंड से सेक्स के लिए होटल गयी.</p>
<p>अब हम दोनों सहेलियां अपनी अपनी चुदाई की बातें शेयर करती हैं. हम दोनों एक साथ ऑफिस में काम करते हैं. मौलीश्री तो इतने दिन में बहुत सारे बॉयफ्रेंड बदल चुकी है लेकिन मैं अभी भी उसी से चुदवाती हूँ.<br />
मेरी सहेली मुझे नए बॉयफ्रेंड बनाने के लिए बोलती है. अगर मैंने कोई नया बॉयफ्रेंड बनाया तो मैं आपको तो अपनी सेक्स कहानी अवश्य बताऊँगी.<br />
आप सबको मेरी होटल सेक्स कहानी कैसी लगी? आप सब मुझे मेल करके बताये. आप सब फीडबैक देंगे तो मैं अपनी और भी कहानी बताऊँगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेरी पहली चोदाई की कहानी-1</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:26:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर <a title="मेरी पहली चोदाई की कहानी-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई की कहानी-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी.</p>
<p>मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर के साथ झटके लगा रहा था कि उस चूत से पच पच की आवाज आ रही थी. हम दोनों चुदाई में कितने खोए हुए थे कि हमें पता ही नहीं की हम कहां थे … हम भूल गए कि बाहर कोई बैठा हुआ है.</p>
<p>माफी चाहता हूं … मैंने आपको बिना बताए कहानी शुरू कर दी.</p>
<p>यह कहानी मेरी और एक ऐसी औरत के बीच में है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. </p>
<p>पहले मैं आपको मेरे बारे में बता दूं. मेरा नाम धर्मेंद्र है, मैं उदयपुर में रहता हूं. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है. मैं 24 साल का एक हैंडसम बंदा हूं, जिसे देख कर हर किसी की चूत में खुजली मच सकती है. मुझे देख कर प्रिय पाठिकाओं, तुम सब भी अपनी चूत में उंगली कर सकती हो … क्योंकि ऐसा मुझे बहुत सी लड़कियों ने और औरतों ने कहा है. </p>
<p>मैं जिम करता हूं, इसलिए मेरी अच्छी खासी बॉडी है.</p>
<p>ये मेरी लाइफ की पहली अन्तर्वासना कहानी है. मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी लिखने की सोच रहा था. अन्तर्वासना के बारे में सबसे पहले मुझे मेरे दोस्त ने बताया था. मैंने भी इधर की सेक्स कहानी पढ़ना शुरू किया. मुझे अच्छा लगने लगा, तो मैंने मन बनाया कि मेरे साथ जो हादसा गुजरा है, उसे आप लोगों के साथ शेयर करूं. </p>
<p>चूँकि पहली बार लिख रहा हूँ … अगर कोई समझ ना आए … या कुछ गलती हो तो माफ कर देना.</p>
<p>मैं जब छोटा था, तो मेरा बहुत सेक्स का मन करता था. जब मेरा मन सेक्स करने का होता था, तब मैं छिप छिप कर पोर्न फिल्में देखा करता था. जब मैं गंदी फिल्में देखता था, तब चूत चुदाई करने का मेरा मन बहुत होता था, लेकिन उम्र छोटी थी, उस वक्त शक्ल सूरत भी अच्छी नहीं थी … तो कोई लड़की मुझे भाव ही नहीं देती थी. न ही सामने से देखती थी. </p>
<p>उस वक्त मुझे अपने आपसे बड़ी घिन होती थी कि मैं ऐसा क्यों हूं. मैं क्यों अच्छा नहीं दिखता हूँ. </p>
<p>इन सब वजहों से लड़की पटाने के मामले में मुझे बचपन में बहुत प्रॉब्लम हुई. मैंने अपने हाथ से हिला कर अपने आपको संतुष्ट किया था. जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई, मुझे समझदारी आती गई. हालांकि मुझे अब भी ये नहीं मालूम था कि औरतों को क्या चाहिए होता है … या लड़कियां कैसे खुश होती हैं. लड़कियों को कैसे पटाना चाहिए. </p>
<p>फिर धीरे-धीरे मैंने जिम जाना शुरू किया अच्छी बॉडी बनाई. उसके बाद मुझे अच्छा रेस्पॉन्स आने लगा. </p>
<p>ये एक जीता जागता गुजरा हुआ सच्चा मसाला है. जो कि बिल्कुल ही सच है और इसमें सच के सिवा कुछ भी नहीं है. </p>
<p>एक ऐसी लड़की की जो मुझे अचानक मिली जिसको मैंने कभी देखा तक नहीं था न सोचा था कि ऐसी कोई जिंदगी में आई थी बाद उस टाइम की है जब मैं शुरू शुरू में जिम जाया करता था. जिम के पास में खूबसूरत लड़की थी, जिसका नाम मैं नहीं लूंगा … लेकिन दिखने में वो जबरदस्त कमाल की लड़की थी. उसकी तारीफ जितनी भी करो, कम है. </p>
<p>उसकी आंखें क्या मस्त झील सी गहरी थीं कि बस एक बार देख लूं, तो घायल ही हो गया. उसका फिगर साइज 36-30-36 का था. जब वो चलती थी, तो उसकी गांड क्या मटक मटक कर … उछल उछल कर दिखती थी. क्या मस्त उभरी हुई गांड थी. उसकी गांड को देख कर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाए. उसकी गांड देखकर ऐसा मन करता था कि बस अभी के अभी ही अपना 7 इंच का सरिया अन्दर घुसा दूं. उसकी चीखें निकाल दूं. बस रोज इसी तरह दिन निकलते थे. </p>
<p>जब भी मैं वहां जिम के पास से जाता था, उसे देखने का मौका नहीं छोड़ता था. बस उसको देख कर खुश हो जाया करता था. मैंने उसे देखा बस ही था, अब तक मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता था कि वो कौन है, कहां से आई है … उसका नाम क्या है … वो करती क्या है. मुझे उस टाइम तक कुछ भी नहीं मालूम था. </p>
<p>एक दिन मैं उसे देख रहा था कि उसने भी मुझे देखा. मैंने नजरें नीचे कर लीं और न जाने क्या समझ आया कि जेब से पेन निकाल कर एक कागज़ के टुकड़े पर अपना फोन नम्बर लिखा और कागज को अपनी मुट्ठी से मरोड़ कर फेंक दिया. इसके बाद उसकी तरफ देखा और चला गया.</p>
<p>मुझे बहुत ज्यादा कोई उम्मीद तो नहीं थी, बस एक बार मन ने कहा और नम्बर लिख कर फेंक दिया.</p>
<p>हालांकि उससे कुछ नहीं हुआ. अब मेरा रोज का यही काम था. जिम से लौट कर अपने कमरे में आता था … उसे अपनी कल्पनाओं में देखता था और उसके नाम की मुठ मारके सो जाता था. मैं मन में दुआ करता था कि एक दिन ये मुझे मिल जाए और दबा दबा कर चोद दूँ. मगर हमारी किस्मत तो गधे के लंड से बंधी हुई थी, इसमें कभी कुछ अच्छा होना ही नहीं था. उम्मीद ही लगा रखी थी कि होगा तो कुछ बुरा ही होगा … साला अच्छा तो कभी हुआ ही नहीं है. इतनी अच्छी लड़की कहां से मिलेगी.</p>
<p>लेकिन आपने सुना ही होगा कि अगर किसी चीज को दिल से चाहो, तो सारी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है और यह सिर्फ डायलॉग नहीं है, हकीकत भी है. क्योंकि जब तक मेरे साथ हादसा नहीं हुआ, उससे पहले मुझे लगता था कि चाहने से कुछ नहीं होता है, कोई कायनात वायनात नहीं होती. </p>
<p>फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि मुझे यकीन होने लगा कि ऐसा होता है. </p>
<p>बात को ज्यादा ना घुमाते हुए सीधा पॉइंट पर आते हैं.</p>
<p>मैं रोज की तरह उसके ख्यालों में खोया हुआ था. अचानक मेरे फोन पर एक कॉल आया. उधर से हल्की सी आवाज में कहा गया- हैलो. </p>
<p>मैं एक पल के लिए सोचने लग गया कि ऐसा कौन है, जो मुझे कॉल कर रहा है.<br />
फिर मैंने भी जवाब दिया- हैलो … हां जी बोलिए!<br />
तो उसने कहा कि मैं रूबीना बोल रही हूँ.<br />
(यह उसका काल्पनिक नाम है असली नाम नहीं बताऊंगा)<br />
मैंने चौंकते हुए पूछा कि कौन रूबीना?<br />
तो उसने कहा कि मैं वही रूबीना, जिसे आप रोज देखते हैं और बात तक नहीं करते. आपने ही नम्बर को लिख कर सड़क पर फेंक दिया था न!</p>
<p>इतना सुनते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे और मैं अपने आपके बारे में सोचने लगा कि साला मैंने अब तक उससे क्यों बात नहीं की … जबकि वो तो मुझसे बात करने को तैयार थी.</p>
<p>मैंने अपने आपको संभालते हुए कहा कि मैं तो आपको नहीं देखता हूं … मैं तो बस अपने काम से काम रखता हूं. वहां से गुजरता हूं और वापस आ जाता हूं. </p>
<p>वह बोली- क्यों … चलो अब बनाओ मत … मुझे सब पता है, तुम मुझे क्यों देखते हो?<br />
मैंने भी पूछ लिया- आप मुझे बताओ न … मैं क्यों देखता हूँ?<br />
उसने भी शरारती अंदाज में कहा- अब इतने भोले मत बनो, जैसे तुम्हें कुछ पता ही नहीं है. </p>
<p>इस तरह उस दिन हमारे बीच बातें शुरू हुईं. फिर उसने बताया कि मेरी यहां शादी हुई है, मेरा पूरा दिन इसी घर में गुजर जाता है. ना कभी मैं बाहर निकलती हूँ, ना कहीं जाती हूँ. बस पूरा दिन उसी घर में, घर के काम करने में निकल जाता है. मेरा पति भी ऐसा है, जिसे काम से फुर्सत ही नहीं है कि मुझ पर ध्यान दे … मुझसे प्यार करे … मुझसे सेक्स करे, मेरी जरूरतों को पूरी करे. </p>
<p>मैंने उसके मुँह से सब सुना.</p>
<p>जब उसने ये बताया कि उसका पति उसे वह सुख नहीं दे पाता है, जो उसे मिलना चाहिए. तो मुझे समझ आ गया कि सौदा बिना खतरे का है. सिर्फ मजा लेने देने का मामला है.</p>
<p>इस तरह की हमारी बातें होने लगीं. वो अपने दुख मुझे सुनाती. मुझे भी सुनने पड़ते … क्योंकि मुझे तो उसकी चूत और गांड मारनी थी. </p>
<p>एक दिन मैंने उससे कहा- आप ऐसी बातें मत किया करो, सीधी सी बात है … मैंने जब से आपको देखा है, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं. </p>
<p>मेरी यह बात सुनकर वो गुस्सा हो गई और बोली- तुम मेरे बारे में ऐसी सोच रखते हो … मैं तो तुम्हें अच्छा समझती थी … लेकिन तुम तो ऐसे निकले. आज के बाद मुझे फोन मत करना.</p>
<p>अक्सर होता है ना कि लड़की हमसे कुछ और उम्मीद लगाकर बैठी होती है … और हम कुछ और भी लगा कर बैठे होते हैं. मुझे तो उसके साथ सेक्स करना था, तो मैंने खुलकर कह दिया. उसे भी ना जाने कहीं ना कहीं अपने अन्दर अपने पति से ना मिलने वाले सुख के कारण मुझसे बात करना ठीक लगा था. उसे भी सेक्स की जरूरत थी, पर वह मुझसे कह नहीं पाई. </p>
<p>हालांकि वो इतनी जल्दी सेक्स की बात पर खुलना नहीं चाहती थी. शायद मुझे ये बात करने में कुछ और टाइम लेना चाहिए था. लेकिन मैंने बहुत जल्दी कर दी. </p>
<p>जब उसने मुझसे कहा कि मुझसे बात मत करना, तो मामला फ़ैल गया. उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया.</p>
<p>मैंने सोचा कि कितना अच्छा माल मिला और क्या गड़बड़ी कर दी यार तूने … माल तो तेरा ही था … थोड़ा सब्र रख लेता, तो सब काम हो जाता. </p>
<p>फिर भी टेंशन में टेंशन होती है. मैं उसे पहले की तरह देखने लगा, पर वो रोज की तरह अब मुझे नहीं दिखती. मैं और परेशान होने लगा. </p>
<p>फिर अचानक चार दिन बाद सुबह के 4:00 बजे उसका कॉल आया. उसने कॉल करते ही कहा- जल्दी से मुझे मिलने आ जाओ.<br />
मैंने कहा- इतनी जल्दी? क्या हुआ?<br />
तो उसने कहा- ज्यादा टाइम नहीं है … मेरे पति अभी सोए हुए हैं. आप जल्दी से यहां पर आ जाइए, मैं आपका वेट कर रही हूं. मैं घर के बाहर ही हूं. </p>
<p>जल्दी में उठकर मैंने अपनी बाइक निकाली और उसके घर के पास चला गया. सुबह के अंधेरे में मैं वहां पहुंचा था. मेरे पहुंचते ही वो मुझसे लिपट गई और रोने लगी.</p>
<p>रूबीना- मुझे माफ कर दो, मैंने आपसे बात नहीं की.<br />
मैंने कहा- माफी तो मुझे मांगनी चाहिए. मैंने आपको गलत कह दिया था, मुझे सोच समझकर बोलना चाहिए था कि आप मुझसे क्या चाहती हो.<br />
उसने कहा- मैं वही चाहती हूं, जो आपने मुझसे कहा था, लेकिन पता नहीं मुझे उस टाइम क्या हो गया था. मैंने आपसे बात करना बंद कर दिया. </p>
<p>इतना सुनते ही मैं उसे किस करने लगा. मैं रोड पर खड़ा हुआ था और वह भी मेरे साथ खड़ी थी. वहां मुझे कुछ ख्याल ही नहीं रहा. मैं बस उसे किस करने लगा. ये सब मेरे लिए पहली बार था. </p>
<p>उसे तो सब पता था क्योंकि वो एक शादीशुदा थी. मुझे उस टाइम ऐसा लग रहा था, जैसे मानो मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा सुख मिल गया हो. मैंने ऐसी फीलिंग आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी. </p>
<p>वो मेरे होंठों को इस तरह चूस रही थी, जैसे कई बरसों की प्यासी हो.</p>
<p>उसके होंठ चूसने से मेरी हालत खराब हो रही थी. मेरा लंड इतना कड़क हो चुका था कि अगर दीवार में घुसा दूं, तो दीवार में छेद हो जाए. उसने मेरे लंड को महसूस कर लिया था. </p>
<p>मैंने उसे कसके पकड़ लिया था और लंड को वहीं खड़े खड़े उसके पेट में गड़ाने लगा. जैसे ही मैंने उसके मम्मों को छूने की कोशिश की, तो उसने मेरे हाथों को रोक लिया.<br />
अब उसने कहा- हम सड़क पर खड़े हैं. </p>
<p>तभी मुझे होश आया और मैंने अपने आपको संभाला. </p>
<p>उसने कहा- बाकी सब बाद में … </p>
<p>उस टाइम मुझे बहत ज्यादा गुस्सा आया, पर मैं क्या कर सकता था. मुझे निराश होना पड़ा … मैं वापस अपने घर आ गया.</p>
<p>अब दोस्तो, बाकी कहानी अगले भाग में. मैंने कैसे उसे चोदा और जब चुदाई की, तब उसका पति आ गया और तब क्या हुआ … ये सब आपको अगले भाग में लिखूँगा.<br />
आपके मेल की प्रतीक्षा में आपका धर्मेंद्र<br />
[email protected]</p>
<p>चोदाई की कहानी का अगला भाग: मेरी पहली चोदाई की कहानी-2</p>
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