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	<title>Hot Sex Stories &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:25 +0000</lastBuildDate>
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		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
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		<title>दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:43:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ. आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी <a title="दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/" aria-label="Continue reading दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ.</p>
<p>आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी दूसरी सेक्स कहानी है. सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है. </p>
<p>यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था. </p>
<p>उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.</p>
<p>अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था. </p>
<p>मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था. </p>
<p>प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था. </p>
<p>प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था. </p>
<p>जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था. </p>
<p>हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया. </p>
<p>मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.<br />
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?<br />
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे. </p>
<p>मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.</p>
<p>मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया. </p>
<p>प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.</p>
<p>हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा. </p>
<p>अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.</p>
<p>खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे. </p>
<p>तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.<br />
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी. </p>
<p>उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था. </p>
<p>प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.</p>
<p>अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी. </p>
<p>जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?<br />
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया. </p>
<p>दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.<br />
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला. </p>
<p>मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.</p>
<p>हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था. </p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है. </p>
<p>उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था. </p>
<p>थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.<br />
मैंने भी हामी भर दी. </p>
<p>फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.<br />
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं. </p>
<p>इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था. </p>
<p>मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.</p>
<p>तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.</p>
<p>दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.</p>
<p>जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.</p>
<p>मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.<br />
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी. </p>
<p>मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.</p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा. </p>
<p>मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे. </p>
<p>मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा. </p>
<p>फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. </p>
<p>इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था. </p>
<p>इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे. </p>
<p>फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया. </p>
<p>अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे. </p>
<p>जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था. </p>
<p>मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ. </p>
<p>फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.</p>
<p>इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा. </p>
<p>कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी. </p>
<p>उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.</p>
<p>मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.</p>
<p>मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था. </p>
<p>इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.</p>
<p>थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया. </p>
<p>इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.<br />
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती. </p>
<p>आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.</p>
<p>मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.</p>
<p>उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.<br />
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे. </p>
<p>आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी, कृपया जरूर बताएं. आपके मेल मिलने के बाद मैं आपको अपनी बहन की कुछ और सहेलियों की चुदाई के किस्से लिखूंगा. अब इजाजत दीजिए, जल्द ही मैं फिर से एक नयी चुदाई की कहानी के साथ प्रस्तुत होऊंगा.<br />
[email protected]</p>
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		<title>खेल वही भूमिका नयी-3</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/khel-vahi-bhumika-nayi-part-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:39:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Call Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[अभी तक मेरी फ्री क्सक्सक्स कहानी के दूसरे भाग खेल वही भूमिका नयी-2 में आपने पढ़ा कि मैं नेता के साथ काल गर्ल बन कर सम्भोग कर चुकी थी. मुझे देख कर बाकी के मर्द भी गर्म हो उठे थे. नेता के जाने के बाद रमा के मित्रों ने मेरे साथ सम्भोग करना चाहा. इस <a title="खेल वही भूमिका नयी-3" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/khel-vahi-bhumika-nayi-part-3/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-3">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तक मेरी फ्री क्सक्सक्स कहानी के दूसरे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-2<br />
में आपने पढ़ा कि मैं नेता के साथ काल गर्ल बन कर सम्भोग कर चुकी थी. मुझे देख कर बाकी के मर्द भी गर्म हो उठे थे. नेता के जाने के बाद रमा के मित्रों ने मेरे साथ सम्भोग करना चाहा. इस पर रमा ने मुझे वेश्या के जैसे ही बने रहने को कहा और अभी राज को गुप्त रखने को कहा. मेरी मदमस्त जवानी से लट्टू होकर कमलनाथ मेरे साथ सम्भोग करने लगा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>अब तक के संभोग में मेरे भीतर भी वासना की चिंगारी आग बन चुकी थी और मन में चरम सुख पाने की तीव्र इच्छा होने लगी थी. मैं जल्दी से उसकी गोद में बैठ कर लिंग को योनि में प्रवेश कराते हुए उसकी गोद में उछल उछल कर संभोग को आगे बढ़ाने लगी.</p>
<p>मैंने खुद को उसके कंधों को पकड़ कर खुद को सहारा दिया और अपने घुटने मोड़ कर ऐसे धक्के देने लगी कि उसका लिंग ज्यादा भीतर जाए.</p>
<p>कमलनाथ ने मेरे चूतड़ों को पकड़ लिया और मुझे धक्के लगाने में सहायता करने लगा. साथ ही बारी बारी मेरे स्तनों का दूध भी पीने लगा. उसे बहुत ज्यादा आनन्द आ रहा था और मुझे भी और मैं भूल ही गई थी कि कोई और भी हमें देख रहा है.</p>
<p>मुझे धक्के लगाते हुए अब 5 मिनट होने को चले थे. कमलनाथ के भी आव भाव बता रहे थे कि अब वो जल्द ही झड़ने वाला है.</p>
<p>जैसे जैसे धक्के बढ़ते जा रहे थे, हम दोनों सिसकारी भरते हुए तेज़ सांस लेने लगे थे. मैं इतनी तेज धक्के मारने लगी कि कमलनाथ समझ गया कि मैं भी झड़ने वाली हूँ. </p>
<p>एक औरत को झड़ते देख कर किसी भी मर्द को अपनी मर्दानगी पर गर्व होता है. यही सोच शायद उसकी उत्तेजना दुगुनी हो गई.</p>
<p>मैं बस और धक्के मारते हुए कमलनाथ से पूरी ताकत से चिपक गई और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करते हुए झड़ने लगी. मुझे झड़ती देख कमलनाथ भी अपने पर काबू न रख सका और वो भी गुर्राते हुए मेरे चूतड़ पकड़ कर नीचे से झटके मारने लगा. कुछ ही पल में हम दोनों एक साथ झड़ने लगे.</p>
<p>एक तरफ जहां मैं पूरी ताकत लगा कर उसे धक्के मारते हुए अपनी योनि का रस उसके लिंग पर छोड़ने लगी, वहीं कमलनाथ भी नीचे से झटके देता हुआ मेरी योनि के भीतर अपने वीर्य की पिचकरी मारने लगा. मैं झड़कर उसकी गोद में ढीली होने लगी और कमलनाथ भी अपने हाथ छोड़ सोफे पे हांफता रहा.</p>
<p>हम दोनों एक बार के सम्भोग के बाद शांत पड़े थे.</p>
<p>तभी पीछे से रवि ने हाथ डालकर मुझे उठाना चाहा. जबकि मैं थक चुकी थी. पर रवि हमारा संभोग देख इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि अब उससे सब्र नहीं हो रहा था. </p>
<p>उसने मुझे जबरदस्ती विनती करते हुए उठाकर सोफे पर झुका दिया और खुद मेरे पीछे आ गया.</p>
<p>मेरी योनि अभी भी वीर्य से लबालब भरी थी, तो रवि ने जल्दी से एक कपड़े से मेरी योनि से टपकते वीर्य को साफ किया और अपनी हवस मिटाने को तैयार हो गया.</p>
<p>वो इतना अधिक उत्तेजित था कि उसने एक बार भी मुझे लिंग चूसने को नहीं कहा. </p>
<p>तभी राजशेखर बोला- रमा अब बर्दाश्त नहीं होता … चलो हम भी बढ़ चलें.<br />
इस पर रमा बोली- अभी तो मुझे मेरे पति का भी प्रदर्शन देखना है. हम बाद में रात भर एन्जॉय करेंगे.</p>
<p>रमा की बात खत्म होते होते रवि ने अपना लिंग एक झटके में मेरी योनि में घुसा दिया. उसके लिंग का जोर इतना तेज था कि मैं अपनी कराह रोक नहीं पाई. रवि का लिंग मैंने देखा भी नहीं था, पर झटके के अंदाज से ये साफ हो गया था कि उसका आकार क्या है और ताकत कितनी अधिक है. मैं अभी भी थकान महसूस कर रही थी, मगर रवि ने मुझे पूरी ताकत से कमर से पकड़ लिया था. मैं अपने हाथ और सिर सोफे पर टिका कर अपना वजन संतुलित करने की कोशिश करने लगी. </p>
<p>रवि का लिंग मुझे थोड़ा मोटा तो लग रहा था और जिस प्रकार से उसने झटका मारा था, मुझे उसका सुपारा मेरी योनि को भरपूर खोलते हुए भीतर घुस गया था. </p>
<p>रवि इतना अधिक उत्तेजित था कि उस झटके के पल भर बाद ही वो तेज़ी से धक्के मारते हुए आगे बढ़ने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था मानो ये कुछ ही पलों में झड़ जाएगा … पर मेरा अंदाज गलत था. वो भी कम अनुभवी नहीं था और कई सालों से संभोग क्रियायों में था. इसलिए इतनी जल्दी उसका भी स्खलन स्वभाविक नहीं था. ये तो उसकी उत्तेजना थी, जिसकी वजह से वो पूरे जोश से धक्के मार रहा था. </p>
<p>उसके दमदार धक्कों के कारण मैं खुद में इतनी कमजोरी महसूस करने लगी कि मेरे मुँह से रोने जैसी कराह निकलने लगी और जिस्म ढीला पड़ने लगा. </p>
<p>रवि एक खूंखार जानवर की तरह मुझमें धक्के मारे जा रहा था और बेरहमी से कभी मेरे चूतड़ों को, तो कभी नीचे से स्तनों को मसलता. उसके धक्के लगातार एक सांस में चल रहे थे और जब कभी उसे थकान लगती, तो लिंग मेरी योनि के भीतर दबा कर मेरे स्तनों, चूतड़ों और जांघों को सहलाकर मेरे बदन का आनन्द लेते हुए थोड़ा सुस्ता लेता. </p>
<p>उसकी इस तरह के संभोग क्रिया से मुझे लगने लगा कि रवि के आगे मैं देर तक नहीं टिक पाऊंगी.</p>
<p>उधर रमा ने ये भी बोल दिया था कि उसके पति का प्रदर्शन भी बाकी है. मतलब साफ था कि रवि के बाद कांतिलाल की बारी थी … और क्या पता कहीं राजशेखर भी उठ खड़ा हुआ, तो मैं तो मर ही जाऊंगी. मैं कमजोरी महसूस करने लगी थी और लड़खड़ाने भी लगी थी.</p>
<p>रवि भी पिछले बीस मिनट से एक ही आसान में संभोग करते हुए थकने लगा था. इस वजह उसमें जोश तो भरपूर दिख रहा था, मगर पहले की तरह वो ताकत नहीं लगा पा रहा था. रवि इस हाल में भी जबरदस्ती मुझे धक्के मारे जा रहा था.<br />
मैं धक्कों की वजह से इधर उधर लड़खड़ाते हुए गिरने जैसी हो रही थी. मेरे गले से रोने जैसी आवाजें निकलने लगी थीं, पर उन लोगों में से किसी ने दया जैसी चीज नहीं दिखाई. शायद वो जानते थे कि औरत हर तकलीफ झेल लेती है और शायद इसी वजह से मैं भी अपना उपयोग होने दे रही थी. </p>
<p>अब झुके झुके मेरी थकान इतनी अधिक हो गई थी कि कमर में दर्द होने लगा था और मेरी टांगें सुन्न सी होने लगी थीं. फिर अचानक मैं लड़खड़ाते हुए सोफे पर गिर पड़ी. मेरा भारी भरकम शरीर रवि नहीं संभाल पाया और मैं उसके चंगुल से निकल गई. सोफे पर गिरते ही मैं हांफते हुए ‘उणहहहहह..’ कर रही थी. </p>
<p>तभी रवि ने मुझे पकड़ कर जमीन पर सीधा पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टांगें फैलाता हुआ बीच में आने लगा. मेरे पास अब उससे विनती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. सो मैंने उससे कुछ देर सुस्ताने के नाम पर थोड़ा समय मांग लिया. मुझे इस बात की ख़ुशी हुई कि उसके भीतर इंसानों वाली थोड़ी बात तो थी. वो वैसे ही मेरे जांघों के बीच अपने घुटनों पर खड़े होकर लिंग हाथ से हिलाता हुआ इंतजार करने लगा. शायद वो भी थक चुका था, इसी वजह से उसने थोड़ी रहम दिखाई. </p>
<p>थोड़ी राहत मिलते ही उसने मुझसे पूछा और मैंने उसे आने को कहा. वो मेरे ऊपर झुक कर अपना लिंग मेरी योनि में घुसाते हुए पूरी तरह से मेरे ऊपर आ गया. उसने अपने घुटने को जांघों तक मोड़ लिया था और मैंने भी अपनी टांग उसकी जांघों पर चढ़ा दिया था. उसने धीरे धीरे से पूरा का पूरा लिंग मेरी योनि के भीतर घुसा दिया था और उसके सुपारे का स्पर्श मैं अपनी बच्चेदानी में महसूस करने लगी थी. उसने अपना पूरा शरीर मेरे ऊपर चढ़ा दिया था और हम दोनों के चेहरे एकदम आमने सामने थे. </p>
<p>मैंने उसके गले में हाथ डाल दिया और उसने मुझे कंधों से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया. अब उसने अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. थोड़ा आराम के वजह से जब मैं अपनी योनि में लिंग का घर्षण महसूस करने लगी, तो अच्छा लगने लगा था.</p>
<p>रवि के धक्के आराम और धीमी गति के थे, जिससे मैं समझ गई थी कि थकान की वजह से जोश और उत्तेजना दोनों ही कम हो गए थे. पर इतना तो मेरे दिमाग में था कि शायद रवि काफी देर तक संभोग करने के बाद ही झड़ेगा.</p>
<p>उधर कमलनाथ पूरा संतुष्ट दिख रहा था और वो मदिरा का स्वाद लेने में मग्न था. दूसरी तरफ रमा, कांतिलाल और राजशेखर काम वासना की आग में जलते दिख रहे थे.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग की क्रिया अपने चरम की ओर अग्रसर होती जा रही थी, वैसे वैसे हम दोनों को अब आनन्द की अनुभूति होने लगी थी. रवि अब केवल धक्के ही नहीं मार रहा था बल्कि धक्कों के साथ साथ मेरे शरीर के अंगों को सहलाकर, दबा और मसल कर उनका आनन्द ले रहा था. वहीं मेरी उत्तेजना भी इस तरह बढ़ चुकी थी कि उसकी हर हरकत का मैं खुले मन से स्वागत करने लगी और साथ ही सभोग में बराबर की भागीदारी देने लगी थी.</p>
<p>रवि के धक्कों में अब फिर से धीरे धीरे तीव्रता आने लगी और मुझसे भी जहां तक हो सकता था, वहां तक अपनी कमर उठा कर उसके लिंग को अपनी योनि में आने देती थी.</p>
<p>कोई 20 मिनट के करीब हो चुके थे और हम दोनों पसीने पसीने हो गए थे. उधर मेरी योनि से झाग सा बहता हुआ मुझे महसूस होने लगा था. दोनों अब एक दूसरे को पूरी ताकत के साथ पकड़ कर लंबी लंबी सांस ले रहे थे. हम दोनों हांफते हुए अपने अपने चूतड़ हिला हिला योनि में लिंग रगड़ते हुए आगे बढ़ने लगे. </p>
<p>मैं अब बहुत जल्द झड़ने वाली थी और ऐसा लग रहा था मानो रवि भी किसी पल पिचकारी छोड़ देगा. मेरी योनि बहुत चिपचिपी और गीली हो गई थी, जिसकी वजह से जब जब रवि लिंग बाहर कर अन्दर धकेलता, तो मेरी योनि से छप छप की आवाज आती.</p>
<p>कुछ पल और संभोग करते हुए रवि के धक्के दुगुनी तेज़ी से लगने लगे और उसने अचानक धक्के मारते हुए ही मुझे पकड़ कर करवट ले ली. उसने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया. वो इस तरह से पलटा था कि उसका लिंग मेरी योनि से बाहर नहीं आया.</p>
<p>मैं भी बहुत गर्म थी, सो मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और मैं बिना रुके धक्के लगाने लगी. रवि ने भी मेरे चूतड़ पकड़ नीचे से जोर लगाना शुरू कर दिए.</p>
<p>अब तो आनन्द दोगुनी बढ़ गई और चरम सुख ऐसा लगने लगा जैसे सामने ही है.</p>
<p>मेरे जांघों में कम्पकपी सी होने लगी और मैं रवि के सीने से चिपक कर अपने भारी भरकम चूतड़ ऊपर नीचे करते हुए धक्के देने लगी. मेरी नाभि से करंट सा निकलने लगा और मेरी योनि तक दौड़ लगाने लगा. मैं अब पूरे जोश में आ गई और मेरे भीतर ऐसा लगने लगा, जैसे ऊर्जा का भंडार फूट पड़ा हो. मैं तेज़ी से धक्के मारने लगी और रवि भी अपने चूतड़ तेज़ी से उछालने लगा. मैं समझ गई कि रवि भी झड़ने वाला है. </p>
<p>तभी मैं अचानक से चीख पड़ी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … माँ मर गई!</p>
<p>मैं झटके मारते हुए झड़ने लगी. मेरी योनि की मांसपेशियां अकड़ने लगीं और योनि की दीवारों से तेज़ तरल रिसने लगा. इधर जब तक मैंने 3 से 4 धक्के मारे थे, रवि भी मेरे चूतड़ और ज्यादा ताकत से पकड़ गुर्राने लगा और फिर एक तेज़ गर्म लावा सी मेरी योनि के बच्चेदानी से टकराया. </p>
<p>बस अब अंत नजदीक था. मैं जहां जहां धक्के मार उसे पकड़ चिपकी रही, वहीं वो तब तक गुर्राते हुए झटके मारता रहा. जब तक उसने अपनी वीर्य की थैली खाली न कर दी. मैं उसके वार झेलती हुई उसके ऊपर लेटी ढीली पड़ने लगी. उसने भी अपनी आखिरी बूंद छोड़ कर शांत लेटा रहा.</p>
<p>मैं अब महसूस करने लगी कि लिंग मेरी योनि के भीतर ढीला हो रहा है. जैसे जैसे लिंग सामान्य अवस्था में आता गया, वीर्य टिप टिप कर मेरी योनि से टपकने लगा. दोनों पूरी तरह सुस्ताने के बाद अलग हुए, तो एक दूसरे को देख ये लगा कि हमने काफी मेहनत की है.</p>
<p>हम दोनों पसीने में लथपथ थे और अलग होने के बाद भी हम लंबी लंबी सांस ले रहे थे. </p>
<p>मैं उठकर नंगी ही स्नानागार में चली गई और खुद को साफ करने लगी. पर जाते हुए समय मैंने देखा कि कांतिलाल और राजशेखर के चेहरे पर वासना की भूख थी. </p>
<p>खुद को साफ कर मैंने रमा से कहा- मैडम मेरे कपड़े तो दे दीजिए.<br />
उधर से जवाब आया- अरे आजा तौलिया लपेटकर … खेल अभी बाकी है.</p>
<p>यह सुन मेरे मन में ख्याल आया कि आज रमा मुझे मरवा के ही रहेगी, इसलिए एक बार सोचा कि सब कह दूँ.<br />
मैंने कहा- अब और नहीं होगा … मुझे घर भी जाना है, रात हो जाएगी तो परेशानी होगी.</p>
<p>रमा मेरे पास आई, तो मैंने उससे बोला कि सबको मेरी सच्चाई बता दे.<br />
पर वो जिद पर अड़ी थी कि कल सबको बताएगी. वो चाह रही थी कि एक बार कांतिलाल और राजशेखर भी मेरे साथ संभोग कर लें. </p>
<p>पर मैं बहुत थक गई थी, इसलिए मैं उससे विनती करने लगी कि अब और नहीं हो पाएगा. लेकिन वो जिद पर अड़ी थी.<br />
तब मैंने उससे कहा कि मैं खुद सबको बता देती हूं.</p>
<p>अब रमा मान गई और बोली कि खाना खाने के बाद सब अपने अपने कमरे में चले जाएंगे और वो आज राजशेखर के साथ सोएगी.</p>
<p>उसने मुझे कांतिलाल के साथ ही रहने को कहा और फिर मुझे एक नए तरह के कपड़े दे दिए.</p>
<p>रमा सबको खाने के लिए बोल बाहर चली गई और उसने मेरे लिए कमरे में ही व्यवस्था कर दी.</p>
<p>मैं रमा के दिए हुए वस्त्र पहन तैयार हो गई, हालांकि ऐसे कपड़े मैंने पहले कभी पहने नहीं थे, पर ये मुझ पर जंच रहे थे. नाइटी के ही जैसी, मगर छोटी सी थी. उसके ऊपर से पहनने का गाउन भी था. </p>
<p>मैं खाना खाकर आराम करने लगी और कब मेरी आंख लगी, पता ही नहीं चला. ठंडी हवा और गद्देदार बिस्तर बहुत ही आरामदायक था.</p>
<p>ठंड की वजह से बार बार पेशाब आने की बीमारी ने मुझे बैचैन कर दिया. नींद से जगने पर आधी नींद में ही मैं पेशाब करने चल पड़ी. पेशाब करके मेरी नींद पूरी तरह से खुल गई थी. जब मैंने वापस आकर देखा, तो मुझे सामने बिस्तर पर कांतिलाल जांघिये में मुस्कुराता हुआ दिखा.</p>
<p>जब मैंने समय देखा, तो एहसास हुआ कि मैं ज्यादा देर नहीं सो सकी थी. अभी 11 ही बज रहे थे. संभोग की संतुष्टि और थकान ने मुझे सुला दिया था … पर अब कांतिलाल के रूप में एक और पड़ाव मेरे सामने आ गया था.</p>
<p>उसके मुस्कुराने की वजह से मैंने भी मुस्कुराते हुए उसका उत्तर दिया. फिर उसने मुझे पास बैठने को कहा और फिर हम बातें करने लगे.<br />
उसने मेरे कामुक बदन की तारीफ करते हुए कहा- तुम पिछले बार से कहीं अधिक कामुक, सुंदर और खुली हुई लग रही हो.<br />
मैंने भी उसे उत्तर दिया- रमा ने ही मेरा सब कायाकल्प किया है … वरना मैं तो पहले की ही तरह हूँ.</p>
<p>फिर उसने मेरे किरदार की सराहना करनी शुरू कर दी और कहा कि उन तीनों को जरा भी शक नहीं हुआ और अगले दिन जब पता चलेगा, तो सब चकित रह जाएंगे.</p>
<p>हम दोनों करीब एक साल बाद मिले थे और बातें करते करते काफी खुल चुके थे. हालांकि उसने मेरे साथ पहले भी संभोग किया था, पर उस समय मैं इतना अधिक खुली हुई नहीं थी.</p>
<p>बातें करते हुए हम एक दूसरे के आमने सामने हो गए थे और मैं एक टांग मोड़कर बैठ गई. लेकिन मुझे जरा भी अंदेशा नहीं था कि ये वस्त्र एक तरफ से कमर के पास से नीचे तक कटा हुआ था और मैंने पैंटी भी नहीं पहनी थी.</p>
<p>सोने के कारण गाउन तो मैं पहले ही निकाल चुकी थी, जिसकी वजह से मेरे स्तनों का अधिकांश हिस्सा दिख रहा था. </p>
<p>कांतिलाल की नजर शुरू से ही मेरे स्तनों पर थी. जबकि कुछ देर पहले उसने मुझे न सिर्फ नंगी देखा था, बल्कि अपने मित्रों के साथ कामक्रीड़ा में संलग्न भी देखा था. </p>
<p>शायद वस्त्रों का एक अलग प्रभाव पड़ता है और इसी वजह से मर्द स्त्रियों को कामुक वस्त्र में देखना पसंद करते हैं.</p>
<p>मैंने ध्यान दिया कि कांतिलाल बात करते हुए बीच बीच में मेरी जांघों के पास देख रहा. मैंने जब अपने नीचे देखा, तो उस वस्त्र के कटे हुए हिस्से की वजह से मेरी एक टांग बिल्कुल नंगी दिख रही थी और एक तरफ से मेरी योनि के बाल भी दिख रहे थे.</p>
<p>मैं चाहा कि उन्हें चुपके से छुपा लूँ, पर कांतिलाल ने टोक दिया- क्यों छुपा रही हो सारिका जी, अब हम दोनों के बीच क्या शर्म और लज्जा … </p>
<p>पता नहीं हम दोनों के बीच पति पत्नी जैसे संबंध भी बन चुके थे, पर बाकी और मित्रों की तरह हम आज भी एक दूसरे का नाम लेने के साथ जी जरूर लगाते थे.</p>
<p>खैर … उसकी विनती करने के बाद भी मैं मुस्कुराते हुए अपनी योनि को छुपाने के प्रयास करती रही. कांतिलाल वैसे भी केवल जांघिये में था. उसके शौक की क्या बात करूं, जैसा उसका जांघिया था, वैसा तो आजकल के नौजवान भी नहीं पहनते.</p>
<p>उसकी जांघिया को देख कर एक पल के लिए कोई भी कह सकता था कि वो औरतों वाली पैंटी है या मर्द के लिए भी ऐसे चलती है. ये सच में पुरुषों का अधोवस्त्र ही था.</p>
<p>हम दोनों यूँ ही बातें करते हुए समय बिताने लगे और मैं बार बार अपनी योनि छुपाने के प्रयास करती रही. मैं इतना तो समझ गई थी कि कांतिलाल मेरा भोग किए बगैर सोएगा नहीं. फिर भी मैं जान बूझकर समय टाल रही थी कि नशे में वो सो जाएगा.</p>
<p>पर ये मेरी भूल थी, जिसके सिर पर किसी महिला के जिस्म का नशा चढ़ा हो, उसे और कोई नशा क्या चढ़ेगा.</p>
<p>धीरे धीरे कांतिलाल मेरे नजदीक आ गया और तकिए पर सिर रख बातें करने लगा. उसने अब मेरे बदन की तारीफ मुझे छू छू कर करना शुरू कर दिया. कभी मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए उन्हें रेशम कहता, कभी बांहों पर हाथ फेर कहता कि आज ये कितनी मखमली लग रही है. कभी मेरी जांघों पर हाथ फेर कर कहता कि कितनी गोरी, चिकनी और गठीली जांघ हैं. </p>
<p>थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपनी ओर खींच कर बगल में लिटा लिया और मेरे होंठों पर उंगलियां फेरने लगा. </p>
<p>मैं ना तो उसे हां कहना चाह रही थी … और न ही ना कर पा रही थी. मेरा किसी तरह का विरोध न पाकर, वो आगे बढ़ गया. वो मेरे गले में उंगलियां फेरते हुए मेरे स्तनों तक जाने लगा. </p>
<p>उसके हाथ मेरे स्तनों पर पड़ते ही मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज और नहीं … मैं बहुत थक गई हूं.</p>
<p>पर कांतिलाल तो बहुत उत्तेजित लग रहा था. मुझे इस रूप में देख कर वो कहां मानने वाला था. उसने मुझसे कहा- कोई जल्दी नहीं है … हमारे पास बहुत समय है. कल कोई काम भी नहीं है. </p>
<p>यह बोलकर उसने मुझे कमर से पकड़ अपनी ओर खींचते हुए अपने सीने से मुझे लगा लिया. उसकी आंखों में कामवासना की आग दिखने लगी थी. </p>
<p>मेरी इस क्सक्सक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]<br />
क्सक्सक्स कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-4</p>
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		<item>
		<title>पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/padosan-aunty-sex-maja-2/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:38:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[हाय फ्रेंड्स, मैं मोहित मेरी पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स की मेरे जीवन की सच्ची कहानी आपके सामने लेकर आया हूँ. जो है. मैं कुचामन का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं. मैं, मेरी छोटी बहन और मम्मी पापा. हमारे घर के पास वाले घर में एक परिवार रहता है. मैं <a title="पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/padosan-aunty-sex-maja-2/" aria-label="Continue reading पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स का मजा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाय फ्रेंड्स, मैं मोहित मेरी पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स की मेरे जीवन की सच्ची कहानी आपके सामने लेकर आया हूँ. जो है. मैं कुचामन का रहने वाला हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं. मैं, मेरी छोटी बहन और मम्मी पापा.</p>



<p>हमारे घर के पास वाले घर में एक परिवार रहता है. मैं उनको अंकल आंटी ही बोलता हूं. अंकल आंटी की शादी को अभी 7 साल ही हुए थे और उनके एक 3 साल का लड़का भी है।</p>



<p>हमारे घर अगल बगल में ही है, तो हमारा उनसे संबंध घर जैसा ही है. आंटी हमारे घर आती जाती रहती हैं. आंटी एक बहुत ही सुन्दर शरीर की मालकिन है आंटी का फिगर 34-32-36 है आंटी जब चलती है तो उनकी गांड और बोबे हर किसी को अपना दीवाना बना लेती है।</p>



<p>मैं शुरू से ही आंटी को बहुत पसंद करता हूँ आंटी हमारे घर आती जाती रहती थी इस कारण मेरी भी उनसे अच्छी बात-चीत होती थी. आंटी को मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में भी पता था. आंटी बहुत खुले विचारों की थी तो मैं कभी-कभी आंटी के गर्दन और गांड पर हाथ फेर देता था जो मुझे बहुत अच्छा लगता था।</p>



<p>एक दिन आंटी का फोन खराब हो गया था तो वो हमारे घर आ गई और हमारे घर के लैंडलाइन वाले फोन से फोन लगाने लगी. लेकिन आंटी से फोन नहीं लगा तो उन्होंने मेरे को फोन लगाने के लिए बोला. मैं फोन लगाने के बहाने आंटी की गांड से टच होकर फोन मिलाने लग गया और अपने लन्ड को उपर से ही आंटी की गांड पर सेट करके फोन लगाने लग गया। मैंने आंटी को फोन लगा के दे दिया.</p>



<p>जब तक आंटी बात कर रही थी तब तक मैं बाथरूम में जाके आंटी के नाम की मुठ मार के आ गया।</p>



<p>मैं अपने रूम में आके बैठ गया और आंटी भी मेरे पास आके बैठ गई और हम दोनों बातें करने लग गए बातों ही बातों में हम सेक्स की बातें करने लग गए. मैंने आंटी से उनकी सेक्स लाइफ के बारे में पूछ लिया.<br>तब आंटी ने बताया- तुम्हारे अंकल सेक्स करते ही नहीं हैं, पूरे दिन बस अपने काम में लगे रहते हैं. वे मेरे को साल में बस 10-12 बार ही चोदते हैं. आजकल तो सेक्स करते ही नहीं है.</p>



<p>तभी मैंने मजाक में आंटी को बोल दिया- मैं आपकी हेल्प कर दूँ?<br>इस बात पर आंटी एक कातिल मुस्कुराहट देकर अपने घर चली गई।</p>



<p>फिर थोड़ी देर बाद जब मैं आंटी के घर गया, तब आंटी का बेबी सो रहा था और आंटी दूसरे रूम में बेडशीट सही कर रही थी. मैंने आंटी के पीछे से जाकर आंटी को पकड़ लिया.<br>तो आंटी मेरे को बोलने लगी- यह सही नहीं है, कोई आ जायेगा.</p>



<p>इतने में ही आंटी घूम गई और आंटी के घूमते ही मेरे होंठ आंटी के होंठ से मिल गए. मैं तो किस करने लग गया लेकिन आंटी दिखावटी रूप से छुड़ाने की कोशिश करने लग गई।</p>



<p>और जब मैंने नहीं छोड़ा तो आंटी भी मेरा साथ देने लग गई. अब मैं आंटी की कुर्ते के ऊपर से ही बोबे दबाने लग गया और आंटी आह उम्ह की सीत्कार निकालने लग गई. इतने में ही मेरी मम्मी का फोन आ गया तो मेरे को जाना पड़ा और मैं आंटी को किस करके आ गया और उनको बोला- तुम सलवार कुर्ते में बहुत अच्छी लगती हो।</p>



<p>फिर दूसरे दिन वापस आंटी अपने बेबी के साथ फोन करने आयी. तब वो काले रंग के सलवार कुर्ते में आयी थी. उस ड्रेस में वो क्या कयामत लग रही थी कि क्या बताऊं दोस्तो!</p>



<p>उस समय मेरे घर पर कोई नहीं था और आंटी ने मेरे को फोन लगाने के लिए बोला.<br>तो मैंने फोन लगा दिया और फोन आंटी को दे दिया. और आज मैं भी आंटी के पास ही बैठ गया और आंटी के जिस्म के साथ खेलने लग गया. मैं कभी उनके होंठ पर अपनी उंगली फेरता तो कभी गर्दन पर फिर धीरे धीरे मैंने अपने हाथ को आंटी के कुर्ते के अंदर डाल दिया और उनके बोबे को दबा दिया. उनके बोबे को दबाते-दबाते मैंने आंटी की ब्रा के हुक खोल दिए और अब मैंने कुर्ते के ऊपर से ही आंटी के बोबे को मेरे होंठों से काटने लग गया।</p>



<p>फिर धीरे-धीरे मैं नाभि पर हाथ फेरते हुए नाभि को चाटने लग गया और आंटी भी अब धीरे-धीरे गर्म होने लग गई थी और वो भी मेरी टी-शर्ट में हाथ डालने लग गई थी.<br>फिर मैंने धीरे से आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लग गया।</p>



<p>मैंने देखा कि आंटी की चूत पानी-पानी हो गई थी. फिर मैंने धीरे से एक उंगली चूत में डाल के अपने मुंह में ले ली और फिर वही उंगली आंटी के मुंह में दे दी. अब मैंने आंटी की पैंटी भी उतार दी और उनकी चूत को देखने लग गया।</p>



<p>इतने में ही आंटी ने फोन काट दिया और मेरे होंठों को जोर जोर से चूमने लग गई. आंटी मेरा पूरा साथ देने लग गई और धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए.<br>आंटी मेरे 6 इंच लंबे व 3 इंच मोटे लन्ड को देखते ही रह गई, फिर वो बोली- मेरे पति का बस 4 इंच का ही है.<br>और वो मेरे लन्ड को हाथ में लेकर सहलाने लग गई।</p>



<p>फिर आंटी को मैं गोदी में लेकर अपने बेड पर ले आया और उनको बेड लेटा कर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लग गए.</p>



<p>मगर किस्मत ने हमारा साथ नहीं दिया. इतने में ही आंटी का बेटा रोने लग गया और किसी ने बाहर डोरबेल बजा दी.<br>तो मैंने जल्दी से कपड़े पहने और मैं बाहर देखने गया तो बाहर पोस्टमैन पोस्ट देने आया था. मैं पोस्ट लेकर वापस आ गया.<br>पर तब तक भाभी ने भी अपने कपड़े सही कर लिए और वो मेरे को एक किस करके सॉरी बोल के अपने घर चली गई क्योंकि आंटी को अपनी ननद को लेने जाना था तो वो चली गई।</p>



<p>अब उसकी ननद आने के कारण अब मैं उसके घर नहीं जा सकता था।</p>



<p>फिर 2 दिन बाद मेरे परिवार वाले 5 दिन के लिए हमारे गाँव चले गए. वहां किसी की शादी थी. मैं उनके साथ नहीं गया था। तो मम्मी आंटी को मेरा ध्यान रखने के लिए बोल के चली गई।<br>अंकल भी अपने किसी बिजनेस के काम से बाहर गए हुए थे. इसी कारण आंटी की ननद आंटी के घर आयी हुई थी।</p>



<p>तो मैं घर पर अकेला था तो आंटी ने खाना खाने के लिए मेरे को अपनी घर बुला लिया. मैं चला गया. इस समय आंटी काले रंग के गाउन में क्या मस्त लग रही थी. मन तो कर रहा था कि अभी पकड़ के चोद दूँ … पर आंटी की ननद होने के कारण ऐसा नहीं कर सकता था।</p>



<p>फिर हमने साथ बैठ कर खाना खाया और थोड़ी देर बातें की.<br>तब आंटी ने बोला- तुम भी यहीं सो जाओ. हम दोनों घर पर अकेली हैं.<br>इसलिए मैं भी वहीं रुक गया.</p>



<p>तब आंटी और आंटी की ननद व उनका बेबी एक रूम में सो गए और मैं दूसरे रूम में सो गया।</p>



<p>मेरे को नींद आ नहीं रही थी, मैं मोबाइल में अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ कर आंटी के नाम की मुठ मार ही रहा था कि तभी आंटी मेरे रूम में आ गई।</p>



<p>तो मैं आंटी को मेरी बांहों में लेकर जोर-जोर से चूमने लग गया. वो भी मेरा साथ दे रही थी. फिर मैं किस करते करते आंटी की गाउन के ऊपर से ही उनके बोबे को दबाने लग गया.</p>



<p>फिर मैंने आंटी की गाउन को उतार दिया और उनके 34″ के मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने और चाटने लग गया. उस समय आंटी काली ब्रा पैंटी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। फिर मैंने आंटी की ब्रा पैंटी को उतार दिया.<br>आंटी ने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए और हम एक दूसरे के नंगे बदन को देखने लग गए। अब मैं और आंटी सेक्स के लिए तैयार थे.</p>



<p>और फिर से हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग गए. अब मैं आंटी के बोबे को हाथों से मसलने लग गया, एक हाथ से आंटी के बोबे को दबाता तो दूसरे बोबे को मुंह में लेकर चूसता. मैं ऐसे बारी-बारी करने लग गया और आंटी भी जोर जोर से सिसकारियां लेने लेने लग गई।</p>



<p>अब मैंने मेरे एक हाथ से आंटी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. आंटी की चूत पानी पानी हो गई थी. अब मैं आंटी की चूत को चाटने लग गया. वो मेरे बालों में हाथ डाल कर अपनी चूत पर जोर जोर से दबाने लग गई और जोर जोर से आह उहउह की सिसकारियां लेने हुए झड़ गई.<br>मैंने उनकी चूत को चाट चाट के साफ़ कर दिया।</p>



<p>फिर आंटी भी मेरे लन्ड को मुंह में लेकर चाटने लग गई. वो पोर्न वीडियो की तरह मेरे लन्ड को चाट रही थी, कभी मेरे लन्ड के टॉप पर जीभ चलाती तो कभी पूरे लन्ड को मुंह में ले लेती. आंटी जब मेरा लन्ड चाट रही थीं तब मैं तो जन्नत में ही चला गया था.</p>



<p>थोड़ी ही देर में आंटी के मुंह में ही मेरा वीर्य छोड़ दिया ओर आंटी ने चाट चाट के मेरे लन्ड को साफ़ कर दिया।</p>



<p>फिर हम दोनों ने दोबारा किस करना शुरू कर दिया. अब मैं आंटी के एक बोबे को हाथ से मसलने लगा और दूसरे बोबे को मुंह में लेकर चूसने लग गया.<br>तभी आंटी बोलने लग गई- अब और नहीं सहन होता. जल्दी से चोद दे!</p>



<p>फिर मैंने आंटी की चूत पर थोड़ा तेल लगाया और थोड़ा तेल मेरे लन्ड पर लगा कर आंटी की चूत में डालने लगा। लेकिन आंटी ने बहुत दिनों से सेक्स नहीं किया था, इस कारण उनकी चूत टाइट थी.<br>तो मैंने एक हाथ से लन्ड को टाइट पकड़ के जोर से धक्का लगा दिया. मेरे लन्ड का टोपा आंटी की चूत में चला गया और वो जोर जोर से चिल्लाने लग गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और वो लन्ड बाहर निकालने के लिए बोलने लग गई.</p>



<p>मैंने आंटी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ी देर तक किस करने लग गया. जब आंटी नॉर्मल हुई तो वो अपनी गान्ड को आगे पीछे करने लग गई।</p>



<p>फिर मैंने धीरे धीरे धके लगाने चालू किए. फिर एकदम से एक जोर का धक्का लगाया जिससे मेरा लन्ड आंटी की चूत में जड़ तक चला गया और आंटी की आंखों में से आंसू आने लग गए. फिर मैं थोड़ी देर रुका और आंटी को किस करने लगा.</p>



<p>जब वो नॉर्मल हुई तो मैं उन्हें धीरे धीरे चोदने लगा. इसी बीच आंटी जोर जोर की सिसकारियों के साथ एक बार झड़ गई. अब आंटी के झड़ने के कारण चूत में से पच पच की आवाजें आने लग गई जो पूरे कमरे में गूंज रही थी.</p>



<p>और अब मैंने भी धक्कों की स्पीड तेज कर दी जिससे अब मेरा लन्ड सीधा आंटी की बच्चेदानी को ठोकर मार रहा था जिससे आंटी को और मज़ा आने लग गया.<br>अब मेरा होने वाला था तो मैंने आंटी से पूछा- कहाँ डालूँ अपना रस?<br>तो वो बोली- मेरी चूत में ही डाल दो, बहुत दिनों से प्यासी है यह!<br>फिर कुछ मिनट की धकापेल चुदाई के साथ मैं और आंटी दोनों एक साथ ही झड़ गए.</p>



<p>फिर थोड़ी देर मैं आंटी के ऊपर ही लेटा रहा।</p>



<p>मैं आंटी को किस करते हुए साइड में लेट गया और आंटी से बात करने लगा.<br>फिर मैंने उनको उनकी ननद की चुदाई के लिए बोला तो वो बोली- मैं उससे बात करूंगी.</p>



<p>इतने में ही मेरी नजर गेट पर पड़ी। गेट पर उसकी ननद खड़ी हमें देख रही थी और अपने बोबे दबा रहा थी.</p>



<p>मैंने उनकी ननद को अनदेखा कर दिया और आंटी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. पूरे कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. आंटी कराह रही थीं, जब मैं आंटी को चोद रहा था.</p>



<p>आंटी अपनी टांगें खोल कर बोलीं- आह मजा आ रहा है … और चोदो और ज़ोर से चोदो!</p>



<p>जब मेरा वीर्य निकलने वाला हुआ, तो उसी टाइम आंटी ने भी अपना पानी छोड़ दिया. मेरा सारा वीर्य उनकी चुत में ही निकल गया.</p>



<p>अब आंटी को डर लगा कि कहीं वो पेट से ना हो जाएं, तो उन्होंने अगले दिन अपने पति से भी चुदवा लिया था और आंटी प्रेगनेंट हो गईं. मेरी चुदाई से उनको एक बेटा हुआ, जो बाद में उन्होंने मुझे बताया कि ये मेरा ही बच्चा है. बच्चा पेट में आ जाने के बाद आंटी वहां से चली गई थीं.</p>



<p>खैर वो बाद का किस्सा है, उसे फिर कभी सुनाऊंगा.</p>



<p>अभी तो आंटी ने पहले तो अपनी गांड को पूरे मजे लेकर मस्त तरीके से चुदवाया. फिर जब मैंने उनको बताया कि आपकी ननद भी चुदासी है.<br>उन्होंने मुझसे पूछा- तुमको कैसे मालूम है?</p>



<p>मैंने उस खिड़की की तरफ आंटी का चेहरा कर दिया, जिधर खड़ी होकर अपने मम्मे मसल रही थी.<br>आंटी एक पल के लिए तो सकपका गईं, फिर उन्होंने अपनी ननद को कमरे में आने को कहा, वो गर्म लौंडिया कमरे में आ गई.</p>



<p>फिर हम दोनों ने मिल कर आंटी की ननद को सेक्स का मज़ा चखाया. चूंकि उनकी ननद अभी सील पैक माल थी, इसलिए आंटी को लगा कि इसकी चूत की ओपनिंग जरूरी है, वरना ये उनकी बदनामी कर सकती थी.</p>



<p>मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसको चूमने लगा. कुछ ही देर में आंटी ने उसको पूरा नंगी कर दिया. मैंने उसे अपने लंड के नीचे ले लिया.</p>



<p>जैसा कि मैंने लिखा कि उसका ये पहली बार का सेक्स था, तो जैसे ही मैंने लंड पेला, वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी थी. आंटी ने उसके मुँह को दबा लिया और मुझे फुल स्पीड से चुदाई करने के लिए कह दिया. कुछ ही देर में उनकी ननद की सील टूट गई और वो भी चुदाई का मजा लेने लगी.</p>



<p>मैंने दो ही दिन में उसकी गांड से लेकर चूत और मुँह सभी छेदों को चोद दिया.</p>



<p>अब हम तीनों मस्ती से चुदाई का मजा ले रहे थे.</p>



<p>पांच दिन बाद मुझे जानकारी हुई कि मम्मी को अभी दो तीन दिन और लगेंगे. बस मस्ती की ये घड़ियां मुझे और कुछ दिन के लिए मिल गई थीं.</p>



<p>आंटी मेरी रखैल जैसी बन गई थीं, उनके साथ मैंने हर तरह की चुदाई के मजे लिए.</p>



<p>आपको आंटी के साथ सेक्स की कहानी कैसी लगी, मुझे मेल लिख कर जरूर बताएं.<br>sonimohit030@gmail.com</p>
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		<title>खेल वही भूमिका नयी-2</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:26:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indian Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Call Girl]]></category>
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					<description><![CDATA[अभी तक इस सेक्स कहानी के पहले भाग खेल वही भूमिका नयी-1 में आपने पढ़ा कि मेरी सखी रमा ने मुझे एक नेता के सामने वेश्या बना कर पेश कर दिया. अब वो नेता मेरे साथ कमरे में एकांत में मजा करना चाहता था. अब आगे: मैं भीतर गई, तो नेताजी बिस्तर पर लेटे हुए <a title="खेल वही भूमिका नयी-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/indian-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-2/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तक इस सेक्स कहानी के पहले भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-1<br />
में आपने पढ़ा कि मेरी सखी रमा ने मुझे एक नेता के सामने वेश्या बना कर पेश कर दिया. अब वो नेता मेरे साथ कमरे में एकांत में मजा करना चाहता था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मैं भीतर गई, तो नेताजी बिस्तर पर लेटे हुए थे. मुझे आते देख बोले- आ जा, इधर बैठ बगल में. </p>
<p>मैं उसकी बेइज्जती भारी बातें दरकिनार करती हुई मुख पर बनावटी हँसी दिखाते हुए उसके बगल बैठ गई. </p>
<p>उसने मेरे हाथ से पैग लेते हुए बोला- मस्त है तू तो, कभी पहले नहीं दिखी, बाहर से आई है क्या?<br />
मैंने भी हां कहते हुए बोला- उत्तरप्रदेश से आई हूं.<br />
इतना सुनने के बाद वो अपने पजामे के ऊपर लिंग को हाथ से सहलाते हुए बोला- चल थोड़ा तैयार कर … बहुत दिन हो गए है मुझे.</p>
<p>मैंने मुस्कुराते हुए उसके पजामे का नाड़ा खोल कर उसके जांघिये को नीचे सरका दिया. उसका लिंग किसी मांस के लोथड़े सा बिल्कुल ढीला ढाला बेजान सा पड़ा था. नेता 60 साल से ऊपर का ही होगा, पर लिंग सामान्य मर्दों की ही तरह बालों से भरा पड़ा था.</p>
<p>मैंने उसके लिंग को हाथ से हिलाना डुलाना शुरू किया, तो थोड़ा थोड़ा सख्त होने लगा.</p>
<p>नेताजी लगभग आधा गिलास खाली करने के बाद बोले- मुँह से चूसती नहीं है क्या … थोड़ा मुँह तो लगा.</p>
<p>उसकी बात सुन अपने किरदार के हिसाब से हंसती हुई मैं उसके लिंग को मुँह में भर चूसने लगी. मुझे उस आदमी को ये भी जताना था कि ये सब मेरे लिए रोज का काम है. मैं उसके लिंग के सुपारे को खोल चूसने लगी और एक हाथ से उसके अण्डकोषों को दबाने ओर सहलाने लगी.</p>
<p>कुछ ही पलों में उसका लिंग सख्त हो गया और गिलास भी खाली हो गया.</p>
<p>फिर नेता गिलास बगल में रखते हुए बोला- चल अब चोदने दे, मस्त माल है तू … तो मजा देगी न अच्छे से?<br />
मैं भी बोली- हां साहब, आपके लिए ही तो आयी हूँ, ऐसा मजा दूंगी कि दोबारा किसी औरत को नहीं देखोगे. बताओ कैसे करोगे?<br />
उसने बोला- चल साड़ी खोलकर लेट जा, मुझे औरतें अपने नीचे अच्छी लगती हैं.</p>
<p>मैंने बिना ज्यादा सवाल किए अपनी साड़ी उठा दी, पैंटी उतार दी और पल्लू सीने से हटा कर टांगें फैला कर चित लेट गई. </p>
<p>नेताजी ने मेरे स्तनों को देखा और बोला- मस्त बड़े बड़े है … अपनी चुचियां दिखा तो जरा. </p>
<p>मेरे ब्लाउज का हुक आगे की तरफ का था, तो मैंने उन्हें खोल दिया. ब्लाउज खोलते ही मुझे भी थोड़ी राहत मिली क्योंकि ब्लाउज थोड़ा ज्यादा ही कसा हुआ था. </p>
<p>उसने दोनों हाथों से मेरे दोनों स्तनों को बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया … तो मैं दर्द से कराह उठी ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’</p>
<p>फिर वो मेरी जांघों के बीच झुकने लगा और एक हाथ से अपना कुर्ता ऊपर करके लिंग पकड़ मेरी योनि की ओर ले जाने लगा.</p>
<p>मैंने बोला- साहब, कंडोम तो लगा लो.<br />
उसने सख्ती से मुझसे बोला- साली, अब तू मुझे बताएगी कि मुझे कैसे चोदना है … ऐसे ही पड़ी रह.</p>
<p>मैं उसकी इतनी लज्जित करने वाली भाषा सुन कर सन्न रह गई. मुझे बहुत बुरा लगने लगा, पर मैं अपनी भावनाएं दबाए मुस्कुराती रही.</p>
<p>उसने अपना लिंग जोर से एक बार आगे पीछे किया और फिर उसे मेरी योनि की छेद पर सटा कर आसन ले लिया. लिंग का सुपारा अब तक मेरी योनि में प्रवेश कर चुका था और अपना संतुलन बनाने के बाद उसने धक्का मारा. उसका लिंग मेरी योनि में आराम से चला गया.<br />
उसके लिंग में उतना कड़कपन नहीं था, जैसे आम मर्दों में होता है और न ही उसके धक्के में इतनी ताकत थी. मुझे कोई परेशानी भी नहीं हुई … क्योंकि पहले से मैंने क्रीम भी लगा रखा था और ये भी उतना तकलीफ देने लायक नहीं था.</p>
<p>वो अपनी ताकत के हिसाब से पूरा जोर देकर कमर आगे पीछे करके लिंग मेरी योनि में अन्दर बाहर करते हुए संभोग करने लगा. दो मिनट बाद बोला- मजा आ रहा यार … मस्त चुत है तेरी, ऐसी औरत को चोदने का मजा ही कुछ और होता है, कंडोम में थोड़े इतना मजा आता है और तू कंडोम लगाने को बोलती है.</p>
<p>उसकी बातें सुनती हुई मैं अपने किरदार में ही रमी रही और मुझे कुछ खास परेशानी नहीं हो रही थी. कोई 5 से 7 मिनट होने को थे कि नेता झटके खाने लगा और जोर जोर से गुर्राते हुए पूरी ताकत से धक्के मारने लगा.</p>
<p>भले वो अपनी पूरी ताकत लगा रहा था, मगर मुझे उसकी ताकत में दम नहीं दिख रहा था. बाकी उसके गुर्राने की आवाज बाहर कमरे तक तो जरूर जा रही होगी.</p>
<p>फिर उसने एक बार अंतिम धक्का मार दिया और हांफने लगा. वो लिंग मेरी योनि में फंसा कर घुटनों के बल खड़े होकर अपनी कमर में हाथ रख बोला- मजा आ गया.<br />
दो पल ऐसे ही घुटनों के बल खड़ा रहा और फिर बिस्तर पर गिर पड़ा और मुझे तौलिए से लिंग साफ करने को कहा.</p>
<p>मैंने उसका लिंग साफ किया, फिर अपनी योनि भी पौंछ ली. मैं अपनी साड़ी पहले की तरह पहन बैठ गई. जैसे कि मुझे उम्मीद थी, वैसा तो हुआ नहीं बल्कि जल्दी जान छूट गई. पर अभी और क्या होना था … उसके बारे में सोच कर मन विचलित था.</p>
<p>कुछ देर बाद वो उठा अपने कपड़े सही किए और मुझे अपनी एक बांह के बगल पकड़ बाहर निकल गया. रमा मेरी तरफ देखने लगी और उसके चेहरे पर चिंता थी.</p>
<p>पर मैंने नजरों से इशारा कर दिया कि सब ठीक रहा. तब उसके चेहरे पर सुकून की रेखाएं दिखने लगीं.</p>
<p>मुझे एक बगल बिठा कर नेता जी फिर से उनके साथ व्यापार की बातों में लग गए और मदिरा भी अब अधिक हो चली थी.</p>
<p>इस वजह अब वो जाने की सोचने लगा. रमा के पति को जब भरोसा हो गया कि अब उसका काम हो जाएगा. तो वो नेता जी को नीचे उनकी गाड़ी तक छोड़ने चले गए. साथ ही वो तीनों मर्द भी चले गए.</p>
<p>मुझे अकेले में पाते ही रमा मेरे काम की तारीफ करने लगी और वो इस बात से काफी खुश थी कि किसी को शक नहीं हुआ.</p>
<p>अब रमा ने कहा- अभी और अधिक मजा आने वाला है.</p>
<p>रमा की तारीफ सुन मैं पिछली बातें भूल चुकी थी और अब रमा के दिमाग में एक और बात आई.</p>
<p>उसने मुझे बताया कि वो 3 मर्द भी वही लोग हैं, जो नए साल के उत्सव के लिए आए हैं. पर उन्हें रमा ने ये नहीं बताया था कि जो सारिका धनबाद से आने वाली थी, वो मैं ही हूँ.</p>
<p>मैं उसकी बात को कुछ समझी नहीं. तब उसने मुझे समझाना शुरू किया. रमा चाहती थी कि आज की रात उन 3 मर्दों को बिल्कुल न पता चले कि मैं कोई वेश्या नहीं, बल्कि वो मुझे वेश्या ही समझें और जब अगले दिन उन सबकी पत्नियां आएंगी, तब वो इस बात का खुलासा करेगी.</p>
<p>पर मैंने जब पूछा कि अगर कांतिलाल ने बता दिया होगा.<br />
इस पर उसने बताया कि मैं कांतिलाल को पहले ही समझा चुकी हूँ.<br />
शायद इसी वजह से मुझे देख कांतिलाल बिल्कुल भी चकित नहीं हुआ था. </p>
<p>रमा अब ये मौहाल बने रहने देने के लिए मुझे जोर देने लगी. जब मैंने उससे कहा कि अगर वो लोग मेरे साथ संभोग करने चाहेंगे, तब क्या होगा?<br />
उसने बोला- कोई बात नहीं वैसे भी हम सब यहां मजे करने आए हैं और संभोग हम सबके बीच सामान्य बात है. किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होगी. चाहे जिसके साथ कोई भी संभोग करे.<br />
मेरे लिए ये सब बहुत अनोखा था, पर रमा के जिद के आगे मुझे झुकना ही पड़ा.</p>
<p>उसने मुझे सिखा दिया कि कैसे किसी मर्द के साथ अधिकांश उच्च वेश्याएं मोल भाव करती हैं. मोल भाव के अंतर्गत वेश्याएं क्या क्या करेंगी और क्या क्या करने देंगी. ये सब तय होता है.</p>
<p>उसकी बातों से ये तो ज्ञात हुआ कि रमा पहले भी किसी वेश्या की मदद ले चुकी होगी. इसी वजह से मैंने उससे पूछ भी लिया.<br />
तब उसने बताया कि उनके व्यापार में कभी कभी ऐसा भी करना पड़ता है, जहां अच्छे खासे उच्च वर्ग की वेश्याओं का सहारा लेना पड़ता है. इसी वजह से वो खुद कई बार वेश्याओं से मिल मोल भाव कर चुकी है. उसने ये भी बताया कि शुरुआती समय में इस तरह के वातावरण में आने से पहले उन्होंने मजे के लिए पुरुष तथा महिला वेश्याओं का सहारा भी लिया था.</p>
<p>उसने पहली बार खुलासा किया कि उसने और कांतिलाल शुरुआत में कभी दो मर्द और कभी 2 औरत वाली संभोग क्रिया करते थे. पहले वो किसी को जानते नहीं थे, इसी वजह से वेश्याओं का सहारा लेते थे. पर अब उनके कई सारे देसी और विदेशी मित्र हैं, जो इस तरह की जीवन शैली पसंद करते हैं.</p>
<p>हमारी बातें अभी खत्म भी नहीं हुई थीं कि 4 मर्द कमरे में आ गए और हम चुप हो गए. उन चारों ने फिर से मदिरा पीनी शुरू की और अपनी अपनी पत्नियों के अगले दिन आने की बात कही.</p>
<p>इसी बीच मुझे उनके नाम पता चले और वे कहां कहां से आए थे ये भी मालूम हुआ. </p>
<p>मैं आपको रमा और कांतिलाल के बारे में बता चुकी हूं. अब बाकियों के बारे में बता दूं. </p>
<p>पहला आदमी रवि था, जो दिल्ली से था, दूसरा राजशेखर, जो गुजरात से और तीसरा कमलनाथ, जो मुम्बई से आया था. सभी के बात व्यवहार और कपड़ों के पहनावे से लग रहा था कि वे सब काफी उच्च घराने से थे और काफी अमीर थे.</p>
<p>उन्होंने अब कल की योजनाओं के बारे में बात करनी शुरू की. </p>
<p>फिर कमलनाथ ने रमा से पूछा- भाभी जी आज तो आपने कमाल कर दिया, ऐसी कामुक महिला आपको कहां से मिली?<br />
तभी रवि बोला- भाभीजी आपकी कोई सहेली आने वाली थी … उसका क्या हुआ?<br />
रमा ने उत्तर दिया- कल वो भी यहीं आ जाएगी.</p>
<p>तभी राजशेखर ने कहा- यार कांतिलाल, तुम तो रोज भाभीजी के साथ मजे करते हो … अगर बुरा न मानो तो आज भाभी जी को मैं अपने बिस्तर पर न्यौता देना चाहता हूँ.<br />
इस पर कांतिलाल ने कहा- भाई देखो रमा और मुझमें कोई ऊंचा नीचा नहीं है, अगर रमा को अच्छा लगे, तो साथ समय बिताने में क्या बुराई है.<br />
उधर कमलनाथ ने कहा- यार, आज की रात तो मैं भाभीजी को न्यौता देने वाला था, पर तूने पहले बोल दिया.<br />
इस पर रमा बोली- सबकी बातों को बराबर ध्यान दिया जाएगा, पर आज जिसने पहले न्यौता दिया, पहला हक़ उसका बनता है.</p>
<p>ये कहते हुए रमा सोफे से उठकर राजशेखर के पास बैठ गई और दोनों एक दूसरे के होंठों से होंठ मिला कर चूमने लगे. इसके बाद सब हंसने लगे.</p>
<p>इधर कमलनाथ और रवि की नजर मुझ पर पड़ी, तो उन्होंने कहा कि आज की रात हम तुम्हारे साथ बिताएंगे. </p>
<p>अब यहां से मुझे खेल शुरू करना था और रमा ने मुझे सिखा दिया था कि अब क्या क्या करना है.</p>
<p>जैसे ही कमलनाथ मेरे पास आकर बैठा. तो सबसे पहले तो उसने मेरी पल्लू गिरा दिया.<br />
पर मैंने वापस पल्लू ऊपर किया और बोली- कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता साहब.<br />
इस पर कमलनाथ ने कहा- पैसे तो रमा ने दे दिए थे न तुझे.<br />
मैंने बोला- एक का मिला था और इतने मर्दों के बारे में मुझे नहीं बोला था.<br />
कमलनाथ बोला- अच्छा ठीक है … पैसे ले लेना, कितने लेगी बोल?<br />
मैंने रमा के सिखाए अंदाज में बोला- एक शॉट का 5000, बिना कंडोम 7000 और चूसने का 1000 अलग से लगेगा. </p>
<p>मेरी बातें सुन कर रमा भी एक तरह से बहुत खुश थी, मगर वो अपनी ख़ुशी बाहर नहीं दिखने दे रही थी.</p>
<p>रवि और कमलनाथ ने बोला- ये तो बहुत ज्यादा है … कुछ कम करो.<br />
मैंने बोला- मुझे अब जाना है और ज्यादा रात हो गई, तो मैं जा भी नहीं पाऊंगी, करना है, तो बोलो.</p>
<p>तब दोनों मान गए. उधर कांतिलाल भी मन ही मन मेरा नाटक देख मुस्कुरा रहा था.<br />
कमलनाथ ने तुरंत अपने बैग से 8000 निकाले और कहा- हां चल ये ले.</p>
<p>फिर रमा से कमलनाथ ने कहा- भाभीजी, आपको कोई परेशानी नहीं तो क्या मैं इसे यहीं चोद सकता हूँ?<br />
रमा यही तो चाहती थी. वो झट से बोली- प्लीज आप लोग मुझे भाभी कहना बन्द कीजिये … केवल रमा कहिए … और किसे कहां चोदना है, मुझसे ना पूछें, मैं भी तो देखना चाहती हूँ कि आखिर ये कैसी सर्विस देती है.</p>
<p>कमलनाथ ने मुझे उठा कर पहले तो खड़ा किया. फिर बड़े ही इत्मीनान से मेरे पूरे बदन को लिपट लिपट कर मुझे टटोला. फिर मेरे आगे खड़े होकर उसने मेरा पल्लू हटा दिया. मेरे स्तनों को दबाने लगा और मसलते हुए मेरा ब्लाउज खोल दिया. </p>
<p>मेरे स्तन अब खुल के आजाद हो गए. उसने बारी बारी से मेरे स्तनों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.<br />
वो बोला- वाह रमा भाभी, ये तो दुधारू गाय है.</p>
<p>ये सुन रमा हंसने लगी और रवि और कान्तिलाल भी खुश हो गए. कमलनाथ मेरा दूध चूस चूस कर पीने लगा. </p>
<p>फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपना पेंट खोल दिया और लिंग बाहर निकाल मुझे चूसने को कहा. मैं उसके आदेश के अनुसार नीचे घुटनों के बल हो गई और उसके लिंग को देखते हुए उसे हाथों में लेकर हिलाने लगी. उसका लिंग सच में बहुत मस्त आकार में था और लंबाई और मोटाई एकदम सही थी. उसका लिंग किसी भी स्त्री को चरम सीमा तक पहुंचाने के लिए बड़ा मजबूत दिख रहा था. </p>
<p>अभी से ही उसके लिंग ने हल्के हल्के से सख्त होना शुरू कर दिया था. थोड़ा और हिलाने से वो और थोड़ा सख्त हुआ और फिर मैंने उसके सुपारे को खोल उसके सुपारे पर अपनी जुबान फिरानी शुरू कर दी. उसे वाकयी बहुत आनन्द आने लगा और उसके चेहरे पर वासना की आग बढ़ती हुई दिखने लगी.</p>
<p>थोड़ी देर और चूसते हुए उसका लिंग अब पूरी तरह से कड़क हो गया. मैंने उसे पूरा मुँह में भर उसे चूसते हुए जीभ से सुपारे को भी सहलाने लगी. </p>
<p>मैंने अपने किरदार के मुताबिक उसे खुश करने का प्रयत्न करना शुरू कर दिया था. मैंने पूरी तरह से उसके लिंग को थूक में डुबाकर गीला कर दिया था. उसके अण्डकोषों में नसें सिकुड़ और फूलने लगी थीं. ऐसा लग रहा था, मानो जैसे अभी ये पिचाकरी छोड़ देगा. इसी वजह से मैं थोड़ा सतर्क होकर उसके लिंग को चूस रही थी ताकि कहीं अगर वो वीर्य छोड़े, तो मेरे मुँह में न चला जाए.</p>
<p>मुझे उस व्यक्ति के बारे में कोई ज्ञान नहीं था. इस वजह से और अधिक सतर्क रहना जरूरी था.</p>
<p>तभी उसने बोला- अब चल सोफे पे बैठ.<br />
मैं सोफे की तरफ गई … तो रमा बोली- अरे साड़ी वाड़ी तो उतार ही दे तू … अभी और ग्राहक दे रही हूँ आज तुझे. </p>
<p>मैंने भी ‘जी मैडम..’ कह कर अपनी साड़ी खोल दी. कमलनाथ भी मुझे नंगा करने में मदद करते हुए मेरी पेटीकोट का नाड़ा खोलते हुए मेरी पैंटी निकालने लगा.<br />
वो बोला- बहुत फैंसी पैंटी पहनती है तू तो … और तेरी गांड कितनी मस्त है.<br />
मैं मुस्कुराती हुई सोफे पर चित लेट गई और अपनी एक टांग को सोफे के नीचे झुला दिया.</p>
<p>कमलनाथ भी सोफे पे मेरे सामने आ गया और अपनी कमीज निकाल कर मेरी जांघों के बीच चला आया. उसका लिंग फुंफकार मार रहा था. एक सामान्य मर्द के हिसाब से उसके लिंग का आकार बहुत सही था. मोटाई और लंबाई भी काफी अच्छी थी. काले काले बालों से घिरा हुआ लिंग था.</p>
<p>वो मेरे ऊपर झुकते हुए अपने लिंग को पकड़ मेरी योनि की दिशा में ले जाने लगा. योनि तक लिंग पहुंचते ही उसने लिंग का सुपारा मेरी योनि की छेद में टिका दिया. अब वो अपने दोनों हाथ मेरे सिरहाने रख कर संभोग के आसन में आ गया. उसने अच्छे से जगह बनाने के बाद धीरे धीरे लिंग मेरी योनि में धकेलना शुरू किया. कुछ हल्के फुल्के धक्कों में उसका लिंग मेरी योनि में सरकते हुए मेरी योनि के भीतर जाने लगा. </p>
<p>मुझे उसके लिंग के आकार से आनन्द सा महसूस होने लगा. उधर सभी लोग हमारी तरफ ही देख रहे थे और उनके भीतर भी मस्ती भरी वासना जागृत होने लगी थी.</p>
<p>मैंने ध्यान दिया तो कांतिलाल, रवि और राजशेखर तीनों बीच बीच में मदिरा पीते हुए अपने अपने लिंग पर हाथ फेर रहे थे. उसने हाथ पैंट के ऊपर से ऐसे लग रहे थे, मानो वे अपने कड़क होते लिंग को अपनी अपनी जांघियों के भीतर ठीक कर रहे हों.</p>
<p>इधर कमलनाथ ने मुझे धक्के मारने शुरू कर दिए. धीरे धीरे मुझे अच्छा लग रहा था कि ये आदमी अपनी कुशलता के अनुसार किसी प्रकार की हड़बड़ी में नहीं था … बल्कि मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मेरे बदन का आनन्द लेने के साथ मुझे भी तृप्त करना चाहता है.</p>
<p>वो धक्के मारते हुए मेरी आंखों में देखने लगा और मैं कभी उसकी नजरों से नजर मिला लेती, तो कभी उन पांचों की तरफ देखने लगती.</p>
<p>कोई 5 मिनट होते होते तो अब मेरी योनि के भीतर भी रस रिसने लगा और मेरी योनि गीली होने लगी. अब मुझे आनन्द आने लगा था और मैं उसे कभी पकड़ कर, कभी अपने चूतड़ उठा कर मजे आने के संकेत देने लगी थी. मैं कराहने भी लगी थी.</p>
<p>दस मिनट होते होते तो कमलनाथ चरम पर पहुंचने की स्थिति में आने लगा था. अब उसके आव भाव भी बता रहे थे कि उसे बहुत आनन्द आ रहा था. उसकी संभोग की कला से इतना तो मुझे अंदाज लग चुका था कि ये बहुत अनुभवी है और जल्दी नहीं झड़ेगा. उसकी संभोग क्रिया की तकनीक और चेहरे के आव भाव से लग रहा था कि उसे बहुत ज्यादा आनन्द आ रहा था. मुझे धक्के देने में साथ ही ऐसा लग रहा था मानो वो स्वयं को जल्द पतन होने से रोक रहा था. </p>
<p>मैं अब अपने भीतर काम वासना की आग में जलन महसूस करने लगी थी. मुझे इस तरह वेश्या का किरदार करने से खुद निर्लज्ज स्त्री की भांति जिज्ञासा जागने लगी थी. मैं बोल तो नहीं पा रही थी, पर मेरी सिसकियों, कराहों और हाथों पैरों की छटपटाहट से शायद उसे भी अब अन्दाज हो गया था कि मुझे आनन्द आ रहा था.</p>
<p>जहां इतनी देर जांघें फैलाये हुए अब मुझे मेरी जांघों में अकड़न होने लगी थी … वहीं कमलनाथ भी धक्के मारते हुए थकान महसूस करने लगा था. पर मैं कुछ नहीं बोल सकती थी क्योंकि मेरे किरदार के हिसाब से मालिक कमलनाथ था और मुझे हर कष्ट बर्दाश्त करना था. क्योंकि उसने पैसे चुकाए थे.</p>
<p>कमलनाथ कोई नौजवान तो था नहीं कि इतनी देर तक धक्के मार सके … हालांकि वो इतना अनुभवी तो था कि संभोग को लंबे समय तक खींच सके.</p>
<p>उधर रमा और राजशेखर भी उत्तेजित होते दिख रहे थे. राजशेखर ने रमा के ब्लाउज के ऊपर से उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था. वहीं रमा भी उसके पैंट के ऊपर से उसके लिंग को टटोल रही थी.</p>
<p>बाकी कांतिलाल और रवि का तो जैसे सब्र का बांध टूटने को था. कमलनाथ धक्के मारते हुए थक चुका था, सो उसने मुझे आसान बदलने को कहा. वो सोफे पर बैठ गया … अपनी टांगें जमीन पर रख कर और मुझे अपनी गोद में बैठने को बोला.</p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-3</p>
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			</item>
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		<title>बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/biwi-ki-saheli-part-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:30:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मैं अन्तर्वासना कहानी का बहुत पुराना लेखक हूँ. मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1 में आपने पढ़ा कि मेरा दिल मेरी बीवी की सहेली पर आ गया. वो भी मेरे ऊपर मरती थी तो हमारी बात बन गयी. मैं उसके घर में उसके साथ था. अब आगे: मैंने <a title="बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/biwi-ki-saheli-part-2/" aria-label="Continue reading बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मैं अन्तर्वासना कहानी का बहुत पुराना लेखक हूँ.<br />
मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1<br />
में आपने पढ़ा कि मेरा दिल मेरी बीवी की सहेली पर आ गया. वो भी मेरे ऊपर मरती थी तो हमारी बात बन गयी. मैं उसके घर में उसके साथ था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मैंने थोड़ी और बदतमीजी की और उसके दोनों मम्मे भी पकड़ लिए और दबा कर बोला- साली आधी घर वाली होती है।<br />
जब उसके मम्मे दबाये तो उसने हल्की सी चीख मारी, मगर ये चीख आनंद से ओत प्रोत थी।</p>
<p>दो प्यासे जिस्म, घर में कोई नहीं।</p>
<p>मैंने उसे अपनी और घुमाया और उसे फिर से कसके अपनी बांहों में जकड़ा और उसके होंठों को चूम लिया. जैसे ही होंठों से होंठ मिले, उसने पीछे को हाथ घुमा कर गैस बंद कर दी और फिर उसने भी मुझे अपनी आगोश में कस लिया।</p>
<p>जितना मैंने उसके होंठ चूसे, उतना ही वो भी मुझे चूस रही थी, बल्कि वो तो मेरे नीचे वाले होंठ को काट रही थी, चबा रही थी। बेशक ये मेरे लिए थोड़ा दर्दनाक था मगर इसमे मज़ा भी बहुत आ रहा था।</p>
<p>एक प्यासी औरत कामरस की बारिश में भीगने को आतुर थी।</p>
<p>मैंने उसकी पीठ को भी अपनी मुट्ठियों में ऐसे भींचा जैसे मैं उसके मम्मे दबा रहा होऊँ। फिर उसकी एक टांग उठा कर पास की तिपाई पर रख दी, और फिर उसका वो चूतड़ और जांघ को मैंने खूब सहलाया और उसके चूतड़ पर खूब सारे हाथ भी मारे।</p>
<p>उसके बर्ताव से लग रहा था कि वो मुझे चूस चूस कर ही झाड़ देगी। मगर अब आगे बढ़ने का वक्त था। मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और हाल में ले गया।</p>
<p>हाल में बिछे दीवान पर मैंने उसे लेटाया और खुद भी उसके ऊपर ही लेट गया। उसने खुद ही अपने हाथ अपने सर के पीछे ऊपर को फैला दिये. जब मैं उसके ऊपर लेटा तो उसने अपनी टांगें फैला कर मेरे जिस्म को अपनी जांघों में जकड़ लिया।</p>
<p>एक औरत का पूर्ण समर्पण था ये; हाथ पीछे … ताकि मैं उसके चेहरे उसके स्तनों के साथ कुछ भी कर सकूँ। टांगें पूरी खुली … ताकि मैं उसकी जांघों, उसकी फुद्दी के साथ कुछ भी कर सकूँ।</p>
<p>मैंने उसके दोनों मम्मों को अपने हाथों में पकड़ा। वो वैसे ही शांत बहती हुई नदी की तरह मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैंने उसके मम्मे दबाये, हिलाये, ऊपर को उठा कर उसका बड़ा सारा क्लीवेज उसकी कमीज़ के गले से बाहर निकाल कर देखा।</p>
<p>एक शानदार क्लीवेज, जिसे मैंने अपनी जीभ से ही चाट लिया, और फिर अपने दाँत से ज़ोर से काट कर उसके मम्मे पर अपने दाँतों का निशान बनाया।<br />
वो बोली- अरे दर्द होता है जीजाजी, ये क्या किया, देखो निशान भी डाल दिया।</p>
<p>मैंने कहा- इसी लिए तो काटा है मेरी जान … ताकि कल को परसों को जब भी तू नहाएगी, इस निशान को देखेगी, तो मुझे याद करेगी।<br />
वो बोली- तो फिर एक निशान क्यों, सारे बदन पर निशान बनाओ।</p>
<p>मैं उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दिया, वो भी हंस दी।</p>
<p>मैंने उसकी कमीज़ ऊपर उठाई और उतार ही डाली। हल्के गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी। बदन के गेहुएँ रंग पर गुलाबी ब्रा अच्छी लगी। मैंने उसके हुक खोले और ब्रा भी उतार दी। दो मोटे, गोल मम्मे जिन पर गहरे भूरे रंग के दो उभरे हुये निप्पल।</p>
<p>उसके नंगे मम्मे मैंने अपने हाथों में पकड़ कर दबा कर देखे, वो फिर से लेट गई। मैं भी उसके ऊपर झुक गया, मगर उसके मम्मों से खेलने के लिए।<br />
वो मेरे सर के बालों को सहलाने लगी और मैं उसके मम्मों को चूसने लगा. चूसते चूसते मैंने कई बार उसके मम्मों पर यहाँ वहाँ काटा; ज़ोर से काटा के निशान बन जाए मगर वो भी रब की बंदी मेरे हर बार काटने पर सिसकारियाँ तो भरती मगर कभी भी उसने मना नहीं किया।</p>
<p>उसके दोनों मम्मों पर मैंने काटने के 5-6 गहरे निशान बना दिये।</p>
<p>फिर मैंने उसके पेट पर चूमा, कमर को भी गुदगुदाया। गुदगुदी होने पर वो खूब हंसी। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और खींच कर उसकी सलवार खोल दी और फिर उतार भी दी।<br />
मेरे सामने वो बिल्कुल नंगी लेटी थी। कितने दिनों, महीनों से मैं उसके बारे में ऐसा सोचता था; आज वो दिन आया था, जब मैंने उसे पूर्ण रूप से नंगी देखा था।</p>
<p>वो बोली- क्या देख रहे हो जीजाजी?<br />
मैंने कहा- मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा था, तब सोचा था कि अगर कभी मौका मिले तो मैं तुम्हें नंगी देखना चाहूँगा। आज मुझे वो मौका मिला।<br />
वो बोली- मैं बताऊँ, जब मैंने आपको पहली बार देखा, तब मेरे दिल में भी ये ख्याल आया था; आपसे सेक्स करने का। मगर आप ऐसे बुद्धू कि अपनी बीवी के नाड़े से ही बंधे रहे।</p>
<p>मैंने कहा- अरे यार देखो, अब बात ये है कि मुझे अपनी बीवी से ज़्यादा और कोई सुंदर लगती ही नहीं। तो मैं किसी और को देखता ही नहीं। ऐसी बात नहीं है कि मैं तुम्हारे इशारे नहीं समझ रहा था. मगर क्या करता, हर बार बीवी साथ थी, तो तुमसे अपने दिल बात कहता तो कहता कैसे?<br />
वो बोली- तो अब कह दो; अब तो आपकी बीवी भी आपके साथ नहीं है।</p>
<p>मैंने अपनी कमीज़ खोली, अपनी पैन्ट, बनियान चड्डी सब उतार दी, और रूपा के सामने बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
“लो मेरी जान!” मैंने रूपा से कहा- आज मैंने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया.</p>
<p>वो उठ कर खड़ी हुई और मेरे पास आ कर मुझे लिपट गई। हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से जैसे चिपक गए हों। कितनी देर हम एक दूसरे के बदन से चिपके रहे, इस एहसास से चिपके रहे कि जिसको इतने महीनों से देख देख कर मन मसोसते थे, आज वो बिल्कुल नग्न मेरी बांहों में है।</p>
<p>मेरा पूरा तना हुआ लंड हम दोनों के पेट के बीच में अटका हुआ था।</p>
<p>मैंने कहा- रूपा मेरी जान, मेरा लंड चूसेगी?<br />
वो बोली- आज से पहले सिर्फ मेरे पति ने मुझे नंगी देखा है, उनके जाने के बाद मैंने आपको अपना तन मन सब अर्पण कर दिया है। आप बस मुझे धोखा मत देना। सब कुछ आपका है, जो कहोगे, मैंने करूंगी, आपकी बाँदी हूँ, गोल्ली हूँ, नौकर हूँ। जो समझो वो हूँ। आपका हुकुम मेरे सर आँखों पर!</p>
<p>कहते कहते वो नीचे को बैठ गई और अपने हाथ में मेरा लंड पकड़ा और उसकी चमड़ी पीछे हटा कर उसने मेरे लंड का टोपा बाहर निकाला और अपने मुँह में ले लिया। अब मेरी पत्नी थोड़ा नखरे<br />
करती है, रूपा का एकदम से मेरा लंड चूसना मुझे अंदर तक गुदगुदा गया।</p>
<p>बहुत आनंद आया जब उसके होंठों ने मेरे लंड को अपनी आगोश में कस लिया।</p>
<p>मैं दीवान पर ही बैठ गया और वो मेरे सामने फर्श पर बैठी, मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़े और अपने मुँह में मेरा लंड भरे, उसे चूसने में मस्त थी।<br />
हालांकि मेरा लंड कोई बहुत बड़ा नहीं है, सिर्फ 6 इंच का ही है, एक आम साधारण सा ही लंड है। मगर प्यासी औरत को तो ढाई इंच का लंड भी ठंडा कर सकता है।</p>
<p>मैं उसके सर को सहला रहा था, उसके बदन को अपने पाँव से मसल रहा था। मोटी चर्बी से भरी कमर, पेट, जांघें। हिलाओ तो लहरें उठती थी बदन में।</p>
<p>कुछ देर चुसवा कर मेरा भी दिल करने लगा कि मैं भी उसकी फुद्दी चाट कर देखूँ। मैंने उसे कहा- रूपा, ऊपर बेड पर आ कर लेट जाओ।<br />
वो उठी और बेड पर लेट गई।</p>
<p>मगर जब मैं उसके ऊपर उल्टा हो कर लेटने लगा, तो वो मुझे रोकते हुये बोली- नहीं नहीं, चाटना मत। मैं बस एक दो मिनट से ज़्यादा नहीं टिक पाऊँगी। आप अंदर डालो, और शुरू करो।<br />
मैंने उसकी फुद्दी देखी, पानी की दो तीन बारीक धारें उसकी जांघों तक बह आई थी। मतलब वो इतनी गर्म थी, इतनी प्यासी थी कि बिना छूये भी झड़ने के करीब थी।</p>
<p>मैंने उसकी टांगें खोली और अपना लंड उसकी फुद्दी पर रखा, और जैसे ही मेरा लंड उसकी फुद्दी में घुसा, उसने अपने नाखून मेरे कंधों में गड़ा दिये- ओह … मेरे मालिक!<br />
उसकी आँखें बंद, होंठ खुले।</p>
<p>मैंने अपने होंठों से उसके होंठ पकड़ लिए और अपनी जीभ उसके मुँह में घुमाई। कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो मेरी जीभ को चूसने लगी, और नीचे से अपनी कमर भी चलाने लगी।</p>
<p>अभी मुश्किल से एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उसने मुझे अपने आगोश में कस के जकड़ लिया, अपनी कमर ऊपर को हवा में उठा ली और मुझे बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ज़ोर से … और ज़ोर से चोदो जीजाजी मुझे!<br />
मैं एकदम से तेज़ गति से अपनी बीवी की सहेली यानि मुंह बोली साली को चोदने लगा।</p>
<p>और अगले ही पल वो अपनी जांघों से कभी मेरी कमर को जकड़ लेती, कभी छोड़ देती। ऐसा उसने कई बार किया. मैंने भी महसूस किया, जैसे उसकी फुद्दी से बेशुमार पानी बह निकला हो।</p>
<p>मैंने उसके गाल पर काट लिया, मगर हल्के से … कि निशान न पड़े।</p>
<p>पहले तो उसकी तड़प तेज़ थी मगर फिर धीरे धीरे उसकी तड़प शांत होती गई। जब उसकी जांघों की जकड़ ढीली पड़ी तो मैंने फिर से चुदाई शुरू करी। मगर वो बहुत शांत, संतुष्ट मेरे नीचे लेटी थी। उसने अपनी टांगें हवा में उठा ली, जिस से उसकी फुद्दी पूरी तरह से खुल गई। मैं उसे घपाघप चोदने लगा।</p>
<p>अब मैं तो पूरी तैयारी के साथ आया था क्योंकि उस पर धाक जमाने के लिए, मुझे उसे खूब सारा चोदना था।</p>
<p>करीब 5-6 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- मैं घोड़ी बनना चाहती हूँ।<br />
मुझे क्या ऐतराज हो सकता था, मैं पीछे हटा तो वो मेरे सामने घोड़ी बन गई।</p>
<p>अपना लंड मैंने उसकी फुद्दी में डाला तो वो खुद आगे पीछे कमर हिला कर चुदवाने लगी।<br />
मैंने कहा- अरे वाह, तू तो मस्त चुदवाती है।<br />
वो बोली- अरे मेरे मालिक, अभी तो देखते जाओ, मैं आपको कैसे कैसे निहाल करती हूँ।<br />
मैंने कहा- तो रोका किसने है … करो निहाल!</p>
<p>कुछ देर खुद ही घोड़ी बन कर चुदवाने के बाद वो आगे को बढ़ी, मेरा लंड उसी फुद्दी से बाहर निकल गया। उसने मुझे धकिया कर नीचे लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई। मेरा लंड पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रख कर खुद ही अंदर ले लिया। अपने दोनों हाथ मेरे सर के अगल बगल रख कर वो मेरे ऊपर झुक गई।</p>
<p>मैंने उसके झूलते हुये मम्मे देखे तो उसने अपने हाथ से पकड़ कर अपना मम्मा मेरे मुँह में दिया- पियो मेरे मालिक!<br />
वो बोली।</p>
<p>मैंने कहा- अरे यार … ये मालिक मालिक क्या है? मुझे मेरे नाम से पुकारो।<br />
वो बोली- आप मेरे मालिक हो … जैसे कहोगे, वैसे ही करूंगी।</p>
<p>मैंने बारी बारी से उसकी मम्मे चूसे।</p>
<p>एक बात तो है, प्यासी औरत जब खुद सेक्स करती है तो मर्द को वो मज़ा देती है, जो मर्द उसे खुद चोद कर भी नहीं ले सकता। मुझे बिल्कुल ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं जन्नत में हूँ और कोई बहुत ही समझदार औरत मुझे सेक्स करना सीखा रही है।<br />
क्योंकि इतना मज़ा तो मुझे पिछले 26 सालों में मेरी पत्नी भी नहीं दे सकी जबकि मैं उसके साथ भी ये सब आसन कर चुका था।</p>
<p>इस रूपा से चुदवाने का मज़ा ही कुछ और था। ऊपर बैठ कर उसकी फुद्दी मुझे बहुत ही कसी हुई लग रही थी या शायद उसे ही पता था कि फुद्दी को टाइट करके कैसे चोदा जाता है कि मर्द को और मज़ा आए।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने कहा- रूपा नीचे आ जाओ!<br />
वो मेरे ऊपर से उठी और बेड पर सीधी लेट गई। मैं उसके ऊपर आया, उसने खुद मेरा लंड पकड़ कर अपनी फुद्दी पर रखा। इस बार हमारा मुक़ाबला बड़े ज़ोर का रहा। वो एक बार झड़ चुकी थी तो दूसरी बार उसने भी खूब टाइम लिया.</p>
<p>इधर मैं तो आया ही खा पी कर था तो मैंने तो लंबा टाइम खेलना था। दोनों में जोश भरपूर था, वो भी अपनी फुद्दी से पानी पर पानी छोड़ रही थी, मेरा भी लंड पूरा पत्थर हो रहा था। इस बार तो मैंने उसे इतने ज़ोर से चोदा कि मैं तो पसीने से नहा गया. नीचे से वो भी अपनी कमर चला रही थी तो उसके चेहरे, कंधों, सीने, पेट और जांघों पर पसीना साफ दिख रहा था।</p>
<p>हमारी चुदाई ऐसे चल रही थी, जैसे दोनों में कोई मुक़ाबला चल रहा हो कि पहले कौन झड़ेगा। मगर वो नॉर्मल थी, तो ज़्यादा जोश में आने से वो फिर से पानी गिराने लगी।<br />
नीचे से कमर उचकाती वो ज़ोर ज़ोर से बोली- चोद साले … और चोद … और चोद … आह, मार ज़ोर से मार मेरी … ले डाल, अंदर तक मार साले, फाड़ इसे, ज़ोर से मार लौड़ा … और ज़ोर से मार।</p>
<p>उसकी तड़प देख कर, मुझे इतनी खुशी हो रही थी, जैसे मैंने आज पहली बार सेक्स किया हो। और फिर उसने अपनी कमर पूरी तरह से ऊपर को उठा दी, और कमान की तरह अपने बदन को अकड़ा लिया। मैंने भी उसके मम्मों को अपने मुँह में भर के ज़ोर से काटा। इतने ज़ोर से कि मेरे दाँत उसके मम्मे में गड़ गए.</p>
<p>वो दर्द से चीखी, मगर उसके स्खलन का आनंद उसके दर्द पर भारी था। मेरी बांहों में वो जैसे बेहोश होकर ही गिर गई थी।</p>
<p>मैंने उसे बेड पर ठीक से लेटाया और जल्दी जल्दी अपना काम भी पूरा किया। उसकी तरफ से अब कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी। मैंने अपना माल उसके पेट पर गिरा दिया। वो सिर्फ शांत लेटी मुझे देखती रही।</p>
<p>उसको चोदने के बाद मैं भी उसकी बगल में लेट गया।</p>
<p>कितनी देर लेटे हम सिर्फ एक दूसरे की आँखों में देखते रहे; कोई बात नहीं की। धीरे धीरे हम दोनों की सांस में सांस आई।<br />
वो मुझसे लिपट गई, उसकी आँखों में आँसू आ गए।<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ?<br />
मगर वो बोली कुछ नहीं, बस रोती रही।</p>
<p>काफी रोने के बाद और मेरे बहुत समझाने के बाद वो चुप हुई। उसके बाद मैं उसे बाथरूम में ले गया और वहाँ हम दोनों एक साथ नहाये, फिर कपड़े पहने।</p>
<p>फिर उसने चाय बनाई और हम दोनों ने पी।</p>
<p>उसके बाद मैं अपने घर आ गया। आज इस बात को करीब 6 महीने हो गए हैं और इस दौरान मैं उसे सिर्फ 3-4 बार ही चोद पाया हूँ। मगर इन 6 महीनों में मैं उनके परिवार में इतना घुलमिल गया हूँ कि मुझे लगने लगा है जैसे मैं सच में ही दिव्या का बाप हूँ। वो भी बिल्कुल मेरी बेटी बन गई। मैं उसके साथ उसके कॉलेज में जा रहा हूँ, उसके साथ बाज़ार, मूवी देखने सब जगह।</p>
<p>मगर तब एक दिन मेरी ज़िंदगी में एक नया मोड़ आया।<br />
वो क्या था … बताऊँगा अपनी अगली कहानी में।<br />
[email protected]</p>
<p>आगे की कहानी: मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:54:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे <a title="बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/" aria-label="Continue reading बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे पूछ पूछ कर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है.<br />
लीजिये पढ़िये।</p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम रत्न लाल है, मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा … बस यही मेरा परिवार है।</p>
<p>अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली बनी। वो औरत हमारे मोहल्ले की दूसरी गली में रहती है। दोस्ती की वजह यह हुई कि मेरी पत्नी और उस औरत, दोनों का नाम रूपा है। उस औरत रूपा के दो बेटियाँ है, बड़ी बेटी दिव्या 20 साल की है, और छोटी बेटी रम्या 18 साल की है। छोटी लड़की तो पतली दुबली सी, साँवली सी है। बड़ी लड़की दिव्या भी पतली है मगर वो गोरी है, देखने<br />
में भी सुंदर है और अभी बी ए कर रही है।</p>
<p>रूपा का पति पहले तो यहीं रहता था और दोनों मियां बीवी छोटे मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते थे तो घर के हालात कुछ खास अच्छे नहीं थे।<br />
फिर रूपा के पति को विदेश जाने का मौक़ा मिला तो वो पैसा कमाने विदेश चला गया।</p>
<p>वैसे तो हमारा एक दूसरे के घर आना जाना हो जाता था। मगर जब रूपा का पति विदेश चला गया तो मुझे रूपा कुछ विशेष लगने लगी। हालांकि रंग रूप में, या शारीरिक बनावट में वो मेरी पत्नी के मुक़ाबले कहीं भी नहीं ठहरती थी मगर पराई औरत तो पराई औरत ही होती है। अच्छी न भी हो, तो भी बस उसके मम्मे, उसकी गाँड, उसकी फुद्दी आपको अपनी ओर आकर्षित करती ही करती है।</p>
<p>मेरे मन में भी कई बार इस बात का ख्याल आया कि रूपा को थोड़ा टटोल के देखूँ, पति इसका पास में नहीं, तो रात को ये भी तो बिस्तर पर करवटें बदलती होगी. अगर किसी तरह से बात बन गई, तो अपने को बाहर मुँह मारने का मौका मिल जाएगा।</p>
<p>हालांकि मैं उसके घर कम जाता था, मैं तो अपने काम धंधे में ही बिज़ी रहता था मगर कभी कभार आना जाना हो जाता था या कभी कभी वो भी आ जाती थी।</p>
<p>अब मेरी बीवी के साथ उसका अच्छा दोस्तना था, वो मेरी बीवी को दीदी और मुझे जीजाजी कहती थी। मगर मैंने कभी उसके साथ साली कह कर कोई हंसी मज़ाक नहीं किया, मैं थोड़ा रिज़र्व ही रहता था. हाँ उसकी बेटियों के साथ मैं हंस बोल लेता था।</p>
<p>पति के विदेश जाने के बाद उसने घर के कई कामों में कई बार मेरी मदद भी ली मगर मैंने खुद आगे बढ़ कर कभी कुछ नहीं किया. मेरे और रूपा के बीच मेरी पत्नी हमारी कड़ी थी। सारा<br />
काम, बातचीत मेरी पत्नी के द्वारा ही होती थी।</p>
<p>मगर एक बात जो मैं नोटिस कर रहा था कि रूपा का व्यवहार अब बदलने लगा था। जब भी मौका मिलता उसे, वो मुझे जीजाजी कह कर खूब हंसी मज़ाक कर लेती। मुझे अक्सर लगता कि वो अपनी आँखों से अपनी बातों से अपने हाव भाव से यह जता रही थी कि जीजाजी हिम्मत करो और मुझे पकड़ लो, मैं आपको ना नहीं करूंगी।</p>
<p>मगर मैं अपनी पत्नी के सामने होते उसे कैसे पकड़ सकता था।</p>
<p>समझती वो भी थी कि जब तक हम अकेले नहीं मिलते तब तक कोई भी सम्बन्ध हमारे बीच नहीं बन सकता था। मगर अकेले मिलने का कोई भी मौका हमें नहीं मिल रहा था।</p>
<p>हमारी दोस्ती या यूं कहो कि दिल में छुपा हुआ प्यार इसी तरह चल रहा था। अपने अपने मन में हम दोनों तड़प रहे थे। मैं कम तड़प रहा था, वो ज़्यादा तड़प रही थी। वो कई बार कह भी चुकी थी- जीजाजी, आपके पास कार है, मुझे कार चलानी सिखाइए। जीजाजी, किसी दिन अपन दोनों कोई फिल्म देखने चलते हैं। मेरी तो इच्छा है कि बरसात हो रही हो, और हम दोनों जीजा साली कहीं दूर तक गाड़ी में घूम कर आयें।</p>
<p>ये सब बातें वो बातों बातों में मेरी पत्नी के सामने कह चुकी थी और ऐसी ही बातों से मेरे दिल में ये विचार आए कि शायद ये मुझसे अकेले मिलने का बहाना ढूंढ रही है।</p>
<p>फिर एक दिन उसने और बड़ा ब्यान दाग दिया।<br />
हुआ यूं कि हम बाज़ार गए थे, वहीं वो भी मिल गई, अपनी दोनों बेटियों के साथ। तो औपचारिकतावश हमने उन्हें शाम के खाने का न्योता दिया।<br />
वो झट से मान</p>
<p>हम एक मिठाई की दुकान में गए, ऊपर उनका ही रेस्टोरेन्ट बना था। सब कुछ शाकाहारी था। हमने वहाँ बैठ कर खाना खाया।</p>
<p>अब उसकी बड़ी बेटी मेरे साथ बैठी जबकि रूपा, उसकी छोटी बेटी, और मेरी पत्नी मेरे सामने बैठी।<br />
दिव्या वैसे भी मेरे से बहुत स्नेह करती थी।</p>
<p>हम दोनों चुपचाप बैठे खाना खा रहे थे, वो रूपा बोली- देखो दोनों कैसे बिल्कुल एक ही स्टाइल से खाना खा रहे हैं, जैसे दिव्या आपकी ही बेटी हो।<br />
मैंने कहा- हाँ, मेरी बेटी है।<br />
अब मैं और क्या कहता।<br />
मगर तभी रूपा बोली- आपकी कैसे हो सकती है, हम कभी मिले तो है नहीं?</p>
<p>मैं तो सन्न रह गया। मिले नहीं मतलब सेक्स नहीं किया। मैंने सोचा- अरे भाई ये तो चुदवाने के चक्कर में है, और मैं यूं ही शराफत में मारा जा रहा हूँ।<br />
मगर उस वक्त मैंने सिर्फ हाथ उठा कर आशीर्वाद देने का ढोंग कर दिया कि दिव्या तो मेरी आशीर्वाद से पैदा हुई बेटी है।<br />
तो दिव्या बोली- मौसा जी, अगर आप बुरा न माने तो मैं आपको पापा कह लिया करूँ।<br />
अब उस बेटी की यह नन्ही सी प्यारी सी गुजारिश को मैं ना नहीं कर सका, मैंने कहा- हाँ, बेटा, मुझे तो खुशी होगी, मेरी कोई बेटी नहीं, तुम मेरी बेटी बन जाओ।</p>
<p>उस दिन के बाद दिव्या मुझे हमेशा पापा ही कहती। मगर छोटी बेटी कभी पापा तो कभी मौसा जी कह देती थी। उसके साथ मेरा रिश्ता ठीक ठाक सा ही था क्योंकि वो चुप ज़्यादा रहती थी।</p>
<p>फिर एक दिन दिव्या ने मुझसे मेरा फोन नंबर मांगा, उसके बाद वो मुझे कभी कभी फोन भी करती, सुबह शाम को कभी कभी मेसेज भी करती और मैं भी उसे अच्छे अच्छे मेसेज भेज दिया करता था जैसा कोई भी बाप बेटी करते हैं।</p>
<p>एक दिन मैं और मेरी पत्नी उनके घर गए, तो उस दिन रविवार था और वो सब लोग सर के बाल धोकर बैठे थे।<br />
फिर दिव्या तेल ले कर आई और तीनों माँ बेटी एक दूसरी के सर में तेल लगाने लगी।</p>
<p>मैंने भी बैठे ने यूं ही कह दिया- अरे वाह, दिव्या, बहुत बढ़िया से तेल लगाती हो तुम तो!<br />
वो बोली- पापा, आपके भी लगा दूँ?<br />
मैंने कहा- हाँ, लगा दो।</p>
<p>जब उनका निबट गया तो दिव्या तेल की शीशी लेकर मेरे पास आई। मैं उनके दीवान पर बैठा था, वो मेरे पीछे आई और कटोरी से तेल लेकर मेरे बालों में लगाने लगी।<br />
“आहह … हह … आहा …” कितना आनंद आया, जब बेटी पिता के सर में तेल लगाये अपने नर्म नर्म हाथों से।</p>
<p>रूपा बोली- अरे जीजाजी, मैं लगा दूँ आपके तेल?<br />
उसकी बात में एक तंज़ मैं समझ गया मगर मैंने कहा- अजी नहीं शुक्रिया, बिटिया बहुत बढ़िया लगा रही है।</p>
<p>उसके बाद उनके घर ही हमने खाना खाया और जब वापिस आए, तो अपनापन दिखाने के लिए रूपा ने पहले मुझे नमस्ते बोली और फिर आगे बढ़ कर मुझे आलिंगन भी किया. मगर उसने आलिंगन करते हुये अपना मम्मा मेरी बगल से अच्छे से रगड़ दिया और मेरी तरफ देख कर शरारत से मुस्कुराई।<br />
वो मुझे साफ से साफ इशारे कर रही थी कि आओ मुझे पकड़ो मगर मैं ही ढीला चल रहा था।</p>
<p>मैंने सोचा कि अब अगर एक भी मौका और मिला, तो मैं रूपा से बात कर लूँगा।</p>
<p>फिर एक दिन मौका मिला, वो हमारे घर ही आई हुई थी, मेरी बीवी रसोई में थी। मैंने पूछा- अरे रूपा, तुमने मेरा मोबाइल नंबर लिया था, पर कभी फोन तो किया नहीं?<br />
वो बोली- आप तो वैसे ही कम बात करते हो, क्या पता फोन पर बात करो भी या नहीं।<br />
मैंने कहा- अरे नहीं, मैं तो बल्कि इंतज़ार कर रहा था कि कभी हैलो हाई, नमस्ते, गुड मॉर्निंग, आई लव यू, कुछ तो मेसेज करो।<br />
वो मेरी बात सुन कर बहुत हंसी, बोली- अच्छा अब करूंगी।</p>
<p>और अगले ही दिन सुबह उसका मेसेज आया ‘गुड मॉर्निंग’ का। जवाब में मैंने भी उसको गुड मॉर्निंग का मेसेज भेजा। और दिन में ही हम दोनों ने 40 करीब व्हाट्सअप मेसेज एक दूसरे को कर दिये।</p>
<p>जितना मैं खुल कर चला, वो उससे भी ज़्यादा खुल कर चली और अपने जीजा साली के रिश्ते की सारी मान मर्यादा तोड़ कर हम दोनों ने एक दूसरे को खुल्लम खुल्ला प्यार का इज़हार तक कर दिया। यहाँ तक के उसने ये भी कह दिया कि अगर आप न कहते तो मैं खुद ही कहने वाली थी।</p>
<p>अब जब प्यार का इज़हार ही हो गया, तो और क्या बाकी रहा। वो पूरी तरह से मेरे साथ सेट हो चुकी थी। मन में खुशी के लड्डू फूट रहे थे कि यार कमाल हाई, 50 साल की उम्र में भी माशूक पटा ली।</p>
<p>उसके बाद तो अक्सर हम फोन पर बाते करते, दो तीन दिन में ही, बातें शीशे की तरह साफ हो गई। दोनों ने एक दूसरे से कह दिया कि अब जिस दिन भी मिलेंगे, अकेले में मिलेंगे, और उसी दिन हम सभी हदें पार कर जाएंगे।</p>
<p>मैंने सोचा, अब माशूक के पास जाना है, तो पूरी तैयारी के साथ जाया जाए। बुधवार की मैंने अपने काम से पहले ही एक दिन की छुट्टी ले ली थी।<br />
मगर मंगलवार को मैंने कुछ और काम भी किया। मैंने आधी गोली *** की खा ली। यह गोली खाने से आप जब कहो, तब आपका लंड आपके इशारे पर खड़ा हो जाता है, और वो भी पूरा कड़क, पत्थर की तरह सख्त। बस इतना ज़रूर है कि ये गोली यूरिक एसिड बढ़ा देती है। मगर इसका असर 2-3 दिन रहता है।</p>
<p>बुधवार की सुबह मैंने एक चने के आकार की गोली अफीम की कड़क चाय के साथ निगल ली। अब सफ़ेद गोली लंड को खड़ा रखने के लिए और काली देर तक न झड़ने के लिए।</p>
<p>हमारा 11 बजे मिलने का प्रोग्राम था। मगर मैं 10 बजे से पहले ही हर तरह से तैयार था। करीब पौने 11 बजे मैंने रूपा को फोन करके पूछा- हां जी क्या हाल हैं साली साहिबा?<br />
वो बोली- बहुत बढ़िया, आप सुनाओ।<br />
मैंने पूछा- मैं तो सोच रहा था, सुबह सुबह आपके दर्शन हो जाते तो, सारा दिन बढ़िया गुज़रता।<br />
वो उधर से बोली- तो आ जाइए, किसने रोका है, आपका ही घर तो है।</p>
<p>मैं तो उड़ता हुआ उसके घर पहुंचा। गेट खोल कर अंदर गया, अंदर घर में वो रसोई में कुछ कर रही थी। मैंने आस पास देखा, घर में और किसी के होने की आहट नहीं थी। मगर फिर भी मैं रसोई में गया, उस से नमस्ते की, उसका, बच्चों का हाल चाल पूछा।</p>
<p>फिर पूछा- बच्चे कहाँ हैं।<br />
वो बोली- बड़ी कॉलेज, छोटी स्कूल। बस घर में मैं अकेली हूँ।<br />
मतलब जो मैं पूछना चाहता था, वो उसने खुद बता दिया।</p>
<p>वो गैस पर चाय बना रही थी, मैं उसके पीछे जा कर खड़ा हो गया। दिल तो कर रहा था कि इसे पीछे से ही बांहों में भर लूँ, मगर फिर भी दिल में एक डर सा था। मगर फिर भी मैंने हिम्मत करके उसको अपनी बांहों में भर लिया।</p>
<p>वो एकदम से चौंकी- अरे जीजाजी, ये क्या कर रहे हो?<br />
वो गुस्सा नहीं हुई तो मेरी भी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने झट से उसकी गर्दन पर एक दो चुंबन जड़ दिये और उसे कस कर अपने से चिपका कर बोला- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी रूपा, अब सब्र नहीं होता यार!<br />
और मैंने उसकी गर्दन कंधो को चूमते हुये, उसका चेहरा घुमाया, और उसके गाल पर भी चूम लिया।</p>
<p>वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो बड़े बेशर्म हो, छोटी साली तो बेटी जैसी होती है।</p>
<p>[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>साली ने घरवाली का सुख दिया</title>
		<link>https://kahani18.com/sali-sex/sali-gharwali-ka-sukh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:52:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sali Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी <a title="साली ने घरवाली का सुख दिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/sali-sex/sali-gharwali-ka-sukh/" aria-label="Continue reading साली ने घरवाली का सुख दिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।</p>
<p>मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी मेरी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी।</p>
<p>शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया.  क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।<br />
अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था. मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी. सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।</p>
<p>पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था. लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।</p>
<p>एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए … इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।</p>
<p>एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया. बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ. फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं … अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा.</p>
<p>यही सोच कर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।</p>
<p>शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था. उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया. मैंने सोचा था कि उसकी कुँवारी चूत आज ही चोदने को मिल जायेगी लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये।</p>
<p>उस रात को मैंने अपनी साली को सोच कर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली. अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं?<br />
ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!</p>
<p>यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया. मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया.<br />
मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली- जीज्जा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये. आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ।</p>
<p>मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा. उसकी गोल बड़ी बड़ी चुचियाँ और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।<br />
वो बोली- मैं सब्जी लेकर आती हूँ.<br />
और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया.</p>
<p>बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर पोर्च में बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी.</p>
<p>मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं. मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था.<br />
मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं.<br />
लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था।</p>
<p>अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे.<br />
मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरी मौका आते आते हाथ से निकल गया।</p>
<p>उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था. लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।<br />
2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा.</p>
<p>मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी.<br />
मैंने उसको बोला- यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा.</p>
<p>मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी. मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया. लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी.</p>
<p>मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया. अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया.</p>
<p>लंड की चुभन से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा. उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं.</p>
<p>शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था. थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही.<br />
तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई. फिर मैं भी चुपचाप सो गया.</p>
<p>लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपन साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मज़ा ले लेता.<br />
खैर कोई भी कम अपने समय से पहले नहीं होता.</p>
<p>दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है. उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया.</p>
<p>दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया. थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा- जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?<br />
मैंने उसको बोला- मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ. सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।</p>
<p>यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला- इस सबकी वजह मैं हूँ, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।<br />
मैंने उसको समझाया- ऐसा नहीं है.<br />
लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया.</p>
<p>फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा. तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई. पर वो लगातार रो रही थी. मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!</p>
<p>तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला- आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ. अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा. अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।</p>
<p>अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी चुचियों को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी वासना भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी. उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.</p>
<p>मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने मेरे लंड को पैंट के उपर से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था.</p>
<p>तभी मैंने उसके कपड़े उतरने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली- मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!<br />
यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुँवारी चूत मिलने वाली थी.</p>
<p>मैंने उसको समझाते हुए कहा- अरे पगली … शरमाने से काम नहीं चलेगा. प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है. जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है.</p>
<p>धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था.</p>
<p>साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देख कर मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुचियों को चूसना शुरू कर दिया. वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा.</p>
<p>मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था.</p>
<p>और फिर मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला. अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा.</p>
<p>मेरी साली की आँखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी. मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है.<br />
तभी मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.</p>
<p>जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी ज़ीभ लगाई तो वो बहुत ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. मैंने ज़ीभ को चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- आह … जीज्जा … बहुत मज़ा आ रहा है. आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया.</p>
<p>वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.</p>
<p>फिर मैंने बोला- मेरा लंड भी झड़ने वाला है.<br />
तो वो बोली- अपना माल मेरे मुँह में ही गिरा दो.<br />
तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुँह भर गया जिसको वो पी गई।</p>
<p>थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे. फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा. वो भी मुझसे लिपटी हुई थी.</p>
<p>मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा- कैसा लगा?<br />
तो वो मुस्कराते हुए बोली- बहुत मज़ा आया … अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!</p>
<p>तो मैंने पूछा- तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती.<br />
वो बोली- नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं. और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी सीधी बात करे. मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी. इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।</p>
<p>ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा.<br />
तो वो बोली- क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली ज़ीभ से ही काम चलना पड़ेगा?<br />
मैं बोला- ज़रूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ.<br />
वो बोली- कैसे?<br />
तो मैंने कहा- जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागदिन मनाएँगे.</p>
<p>वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली- आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ.<br />
मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी.</p>
<p>मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मानने जा रहा था … वो भी एक कुँवारी कली के साथ।</p>
<p>मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी.</p>
<p>धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोच कर पहले ही खड़ा था. मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछाल गई और बोली- उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूँगी?<br />
मैंने कहा- डरो नहीं मेरे जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाउँगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. वो तो एक बार सब को होता है. लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा।</p>
<p>अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया और उसको अपना लंड चूसने को बोला.</p>
<p>जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला- आओ मेरी जान … अब हम दोनों एक हो जाएँ.<br />
इतना कह कर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया. वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी- जल्दी करो मेरे राजा … अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ.</p>
<p>मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया. जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी. मैंने फ़ौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा. उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया.</p>
<p>जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा. लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा क़ि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.</p>
<p>अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछलने लगी. लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ मेरे राजा!<br />
तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकालने को तैयार हो गया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा- मैं भी झड़ने वाला हूँ अपना माल कहाँ गिरा दूं?<br />
तो वो बोली- आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!</p>
<p>यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई. इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गये कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गये.</p>
<p>शाम को हमारी नींद देर से खुली. उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली- आप भी कपड़े पहन लो. कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी।</p>
<p>मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली- अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ. तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए. लेकिन अब कॉंडोम के बिना नहीं चोदने दूँगी. इसलिए अभी बाज़ार जाकर कॉंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा.</p>
<p>उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाज़ार चला गया.</p>
<p>उस दिन से दोस्तो … मेरी तो दुनिया ही बदल गई. अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा. अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी।</p>
<p>दोस्तो, उम्मीद है कि मेरी ये कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल ज़रूर लिखिएगा.<br />
जल्दी ही मिलेंगे एक नये अनुभव और नई कहानी के साथ!<br />
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