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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Desi Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Desi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
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					<description><![CDATA[यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली. दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर <a title="देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की" class="read-more" href="https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/" aria-label="Continue reading देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली.<br />
<span id="more-332"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर रेलवे के पेपर की तैयारी कर रहा हूं. मेरे परिवार में हम दो भाई और माँ-पापा है। माँ हॉउस वाइफ है जबकि पापा किसान हैं। हमारे पास 30 बीघा जमीन है जो कि बिल्कुल नहर के पास है.</p>
<p>मेरी उम्र अभी 22 वर्ष की है। मेरी हाइट पांच फीट और दस इंच है. शरीर से पूरा हट्टा कट्टा हूं. दिखने में भी ठीक हूं. मेरे लंड की लम्बाई साढ़े पांच इंच की है लेकिन उसकी मोटाई काफी है.</p>
<p>मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूं. कई बार मैं इसकी गर्म और देसी बुर चोदन कहानी पढ़ कर लंड को भी हिला लेता हूं. तो मैंने सोचा कि अपने जीवन की एक घटना आप लोगों के साथ शेयर करूं. जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो आज से करीबन 2 साल पहले की है.</p>
<p>मेरा घर गांव में पड़ता है जहां पर मेरे घर के पास से ही एक नहर निकलती है। गर्मियों के दिनों में हम नहर में सुबह शाम को नहाने के लिए अक्सर जाया करते हैं। दोपहर में नहर में लड़के नहीं नहाते तो हमारे पड़ोस की लड़कियां दोपहर में नहा लेती थी क्योंकि लड़के उस टाइम वहां पर नहीं होते थे।</p>
<p>इसी तरह एक दिन मैं घर पर बैठा बैठा बोर हो रहा था तो मैंने नहर में नहा कर आने की सोची।<br />
दोपहर के समय में घर वाले सो रहे होते थे तो मैं नहर पर नहाने आ गया।</p>
<p>अभी नहाते हुए मुझे करीब 10 मिनट ही हुई होंगी कि हमारे पड़ोस की देसी लड़की वहां पर नहाने के लिए आ गई. उस लड़की का नाम मोनिका (काल्पनिक) है. रंग से गोरी है और कमर पतली है बिल्कुल. उसके बूब्स बड़े संतरे के आकार के थे (अब तो मेरे हाथ में ही नहीं आते हैं इतने बड़े हो गए हैं, जो कि मेरा ही कमाल है) उसके साइज के नाप का तो मुझे पता नहीं।</p>
<p>वो जब नहर पर आई तो मैं नहर में तैराकी कर रहा था। वो नहर पर आकर अपने कपड़ों में ही नहाने लगी क्योंकि गांव में देसी लड़कियां सलवार कमीज में ही नहाती थी नहर में।<br />
वो मुझे पानी में डुबकी लगा कर तैरता हुआ देख कर मुझसे बोली- मेरे को भी तैरना सिखा दो।</p>
<p>मैं उसकी बात पर थोड़ा हैरान सा हुआ क्योंकि हम दोनों कभी इसके पहले इतने खुल कर बात नहीं की थी और वो भी ऐसे अकेले में. आज से पहले कभी भी मैंने उसे चुदाई वाली नजरों से नहीं देखा था।</p>
<p>मैं उसके कहने पर उसको तैराकी सिखाने के लिए राजी हो गया. वो मेरे करीब आई और पानी में गोता लगाने लगी.</p>
<p>मैंने उसको अपने हाथों में थाम लिया ताकि वो नीचे डूबे नहीं. मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और वो तैरने के लिए हाथ-पैर मार रही थी। उसी बीच मेरा हाथ उसकी छाती पर चला गया तो उसने कुछ नहीं कहा। मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग रहा था जो कि बड़े आकार के संतरे के साइज के थे.</p>
<p>अब मेरे अंदर कामुकता जागने लगी, मैंने इस देसी कमसिन जवान लड़की के बुर चोदन का मौक़ा देखा तो मैं धीरे-धीरे बहाने से उसके बूब्स को जानबूझ कर छूने और दबाने की कोशिश करने लगा. लेकिन वो इस तरह से व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हो ही न रहा हो. इसलिए मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी.</p>
<p>फिर मैंने उसके चूचों को अच्छी तरह से हाथों में भर लिया तब भी उसने कुछ नहीं कहा. अब मेरा लंड मेरे अंडरवियर में पूरा तन चुका था. लेकिन वो पानी के अंदर था. पानी के अंदर भी मुझे अपने लंड की गर्मी महसूस हो रही थी.</p>
<p>मैंने मोनिका को खड़ी होने के लिए कह दिया तो वो मेरे सामने ही खड़ी हो गई. मैं उसको सिखाने के बहाने से उसकी गांड को लंड से छूने लगा. मेरा लंड तन कर झटके दे रहा था. उसकी गीली गांड में मेरे लंड का टच होना हर पल मेरे अंदर हवस को बढ़ाये जा रहा था.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे करके उसकी गांड पर अपने लंड को अच्छी तरह से सटाने लगा. मगर वो कुछ भी नहीं बोल रही थी.</p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा. न तो वो कुछ कह रही थी और न ही मैं कुछ कह रहा था. फिर वो मुझसे छूट कर पानी से बाहर जाने लगी. मेरे अंदर तो चुदास भर चुकी थी. मैंने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो मना करके चली गई.</p>
<p>मेरे मन में डर भी था कि कहीं ये कुछ घर पर जा कर बता ना दे तो मेरी भी गांड फट रही थी।</p>
<p>उसके बाद मैं घर पर आ गया और मोनिका के साथ हुई उस घटना को याद कर करके मैंने दो बार मुठ मार डाली.</p>
<p>उस दिन तो मैं बस यही सोचता रहा कि किसी भी तरह बस उसकी बुर चोदने को मिल जाये. यही सोचते हुए उस रात मुझे नींद भी नहीं आई. रात को सपने में भी मेरा वीर्यपात हो गया.</p>
<p>अगले दिन संडे था और हमारे पड़ोस में हमारे घर पर ही टीवी था और संडे को फ़िल्म भी आती थी। अगले दिन वो हमारे घर पर टीवी देखने के लिये करीब 11 बजे मेरे घर आ गई। मेरे घर वाले टीवी नहीं देखते थे तो माँ और पापा दूसरे कमरे में सो गए थे।</p>
<p>चूंकि राजस्थान में गर्मी बहुत पड़ती है तो मेरे घरवाले शाम के तीन बजे के बाद ही सोकर उठते थे. टीवी वाले कमरे में उसके और मेरे अलावा कोई और नहीं था. मैं भी टीवी देख रहा था और साथ में बीच बीच में उसे भी। कुछ देर बाद मैं यह सुनिश्चित करने के लिए उठा कि मां और पापा सो रहे हों. मैंने माँ पापा को धीरे से देखा तो वो दोनों नींद में सो रहे थे।</p>
<p>उसके बाद मैं उसके बिल्कुल पास आ कर बैठ गया और धीरे धीरे एक हाथ से उसकी कमर पर फिराने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं अपने हाथ को उसकी कमर से होते हुए उसके चूचों पर ले गया. उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से आगे देखने लगी.</p>
<p>उसको शायद अच्छा लग रहा था. वरना कोई भी लड़की इस तरह से एकदम से शरीर को छूने नहीं देती है.</p>
<p>जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि वो भी बुर चोदन करवाने की तैयारी करके ही आई है तो मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया. उसके चूचों को दबा दिया. तब भी उसने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब तो मुझसे रुका ही नहीं गया. मैंने उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी देसी बुर को छू लिया. उसने एक बार के लिए मेरा हाथ हटाया. मैं थोड़ा सा हिचक गया कि कहीं मैं जल्दी तो नहीं कर रहा हूं लेकिन दोस्तो बहुत बुरा हाल हो रहा था.</p>
<p>मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने दोबारा से कोशिश की और फिर से उसकी बुर पर हाथ फेरा तो मेरे हाथ पर उसकी बुर का स्पर्श हुआ. मुझे पता चल गया कि उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसकी सलवार में हाथ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसने अपनी सलवार के नाड़े को कस कर बांधा हुआ था इसलिए मुझे हाथ अंदर घुसाने में बहुत मुश्किल हो रही थी.</p>
<p>काफी मशक्कत के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के अंदर जा घुसा. मैंने उसकी बुर को टटोला तो उसकी बुर चोदन के लिए गर्म थी. उसमें से हल्का सा गीलापन भी छूटने लगा था. फिर मैंन उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. मैंने अपनी उंगली सीधी उसकी बुर में डाल दी उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.</p>
<p>अब चुदाई का पूरा माहौल तैयार हो गया था. मैंने उससे कहा कि वो ऐसे ही बैठी रहे. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मां और पापा बीच में उठ कर न आ जायें इसलिए मैं दोबारा से चेक करने के लिए उनको देखने के लिए गया. वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे.</p>
<p>जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि उसने अपनी सलवार को घुटनों तक नीचे कर लिया था. मैंने उसके पास बैठते ही उसकी बुर सहलाना शुरू कर दिया. मेरा हाथ उसकी बुर को रगड़ रहा था. दूसरे हाथ से मैं उसके बूब्स को दबा रहा था.</p>
<p>मेरा लंड अब मेरी पैंट में तन कर दर्द करने लगा था. मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया और उसके हाथ को पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया.<br />
उसने लंड को छोड़ दिया.</p>
<p>मैंने धीरे से कहा कि लंड को हाथ में पकड़ लो लेकिन उसने मना कर दिया.</p>
<p>फिर मैंने जबरदस्ती उसके हाथ को अपने लंड पर रखवा लिया और उसके हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. कुछ देर के बाद उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई. वो खुद ही मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>मैं उसको किस करने लगा.</p>
<p>अब बस रुका नहीं जा रहा था और मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया. मैंने उसकी बुर को हाथ से रगड़ा और अपना लंड उसकी बुर के मुंह पर लगा दिया और उसके ऊपर लेट गया. मेरा लंड उसकी देसी बुर में अंदर घुसते हुए रास्ता बनाने लगा तो वो दर्द के मारे गर्दन को इधर उधर पटकने लगी.</p>
<p>उसकी बुर अभी कुंवारी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो उसकी आंखों से पानी आने लगा. लेकिन मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने एक झटका दिया और लंड उसकी बुर में उतार दिया.</p>
<p>वो मुझसे लिपट गई. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … लंड उसकी बुर में चला गया था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो उसकी बुर से हल्का सा खून भी बाहर आ रहा था. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसकी बुर में हल्के से लंड को चलाने लगा. वो अभी भी तड़प रही थी. मगर कुछ देर के बाद वो नॉर्मल होती चली गई.</p>
<p>उसकी कुंवारी बुर पहली बार चुद रही थी और उसमें से जो खून बाहर निकला था उसके साथ में उसका कामरस भी मिल गया था. इस वजह से खून और पानी का वो मिश्रण बन जाने से मेरा लंड अंदर जाने में अब कोई परेशानी नहीं आ रही थी.</p>
<p>चूंकि मैं भी काफी उत्तेजित था तो मेरे लंड से भी काफी चिपचिपा पदार्थ निकल चुका था. दोनों तरफ से ही बराबर चिकनाई हो गई थी और चुदाई मक्खन के माफिक चल रही थी. अब मैं उसकी बुर की चुदाई आराम से करने लगा. बीच-बीच में मैं उसकी कमीज को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को भी मसल रहा था.</p>
<p>मसलने के कारण उसकी देसी चूची टमाटर के जैसे लाल हो गये थे. लंड को बुर में लेते हुए अब उसको भी चुदाई का मजा आने लगा था. उसके मुंह से धीरे धीरे कामुक आवाजें निकल रही थीं और मेरा लंड गप्प गप्प करके उसकी बुर में जा रहा था. उसकी बुर काफी गीली हो गई थी.</p>
<p>दस मिनट तक मैं उसका बुर चोदन करता रहा. फिर मैंने उसको उठा दिया और उसको डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा. लेकिन वो मना करने लगी. उसके बाद मैंने फिर से उसको अपने नीचे ही लिटा लिया और ऐसे ही उसकी बुर की चुदाई करने लगा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में कस कर पकड़ने लगी और उसकी बुर मेरे लंड पर कसने लगी. शायद वो उस समय झड़ रही थी. उसका पानी निकलने से चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी और कुछ ही धक्कों के बाद फिर मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों शांत हो गये. लेकिन मेरा मन अभी नहीं भरा था. मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसके होंठों को चूसता रहा. मेरी गांड नंगी थी और वो मेरे नीचे पड़ी हुई थी. उसके होंठों को चूसते हुए मेरा लंड दस मिनट के बाद फिर से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैंने दोबारा से बुर चुदाई करने के लिए कहा तो वो मना करने लगी. मैंने उसको बहुत मनाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. फिर हम दोनों उठ गये. लेकिन मेरा लंड अभी तना हुआ था.</p>
<p>मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा लेकिन उसने लंड चूसने से भी मना कर दिया. फिर मेरा मायूस सा चेहरा देख कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरे लंड की मुठ मारने लगी.<br />
उसके कोमल हाथों में जाकर मेरा लंड फिर से तनतना गया और मुझे मजा आने लगा. वो मेरे लंड की मुठ मारती रही और मैं उसके चूचे दबाता रहा. उसकी चूमता और काटता रहा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद फिर से मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी मार दी. उसका हाथ मेरे वीर्य से सन गया. मैंने उसको एक गंदा सा कपड़ा दिया और उसने अपना हाथ साफ कर लिया. फिर मैंने भी अपने लंड को पोंछ दिया और पैंट पहन ली.</p>
<p>मगर वो कहने लगी कि उसको अभी भी बुर में दर्द हो रहा है.<br />
फिर मैंने धीरे से उठ कर उसके लिए एक दर्द की गोली लाकर दी. गोली खा कर वो अपने घर चली गई.</p>
<p>उसके बाद तो लगभग हर रोज ही हम चुदाई के मौके ढूंढने लगे. फिर तो जब भी मौका लगता था मैं उसकी बुर मार लेता था. आज उस घटना को इतना वक्त बीत चुका है और वो अभी भी मुझसे अपनी बुर चोदन करवाती है. मैं भी जमकर उसकी बुर चोदता हूं. मैंने दबा-दबा कर उसके चूचों को काफी बड़ा कर दिया है.</p>
<p>अगली देसी कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने मोनिका की छोटी बहन की बुर चोदन करके उसका भी उद्घाटन किया. आप कमेंट करके बताना कि आपको मेरी चुदाई की देसी कहानी कैसी लगी.<br />
[email protected]</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मेरी पहली चोदाई की कहानी-1</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:26:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
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					<description><![CDATA[यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर <a title="मेरी पहली चोदाई की कहानी-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई की कहानी-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी.</p>
<p>मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर के साथ झटके लगा रहा था कि उस चूत से पच पच की आवाज आ रही थी. हम दोनों चुदाई में कितने खोए हुए थे कि हमें पता ही नहीं की हम कहां थे … हम भूल गए कि बाहर कोई बैठा हुआ है.</p>
<p>माफी चाहता हूं … मैंने आपको बिना बताए कहानी शुरू कर दी.</p>
<p>यह कहानी मेरी और एक ऐसी औरत के बीच में है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. </p>
<p>पहले मैं आपको मेरे बारे में बता दूं. मेरा नाम धर्मेंद्र है, मैं उदयपुर में रहता हूं. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है. मैं 24 साल का एक हैंडसम बंदा हूं, जिसे देख कर हर किसी की चूत में खुजली मच सकती है. मुझे देख कर प्रिय पाठिकाओं, तुम सब भी अपनी चूत में उंगली कर सकती हो … क्योंकि ऐसा मुझे बहुत सी लड़कियों ने और औरतों ने कहा है. </p>
<p>मैं जिम करता हूं, इसलिए मेरी अच्छी खासी बॉडी है.</p>
<p>ये मेरी लाइफ की पहली अन्तर्वासना कहानी है. मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी लिखने की सोच रहा था. अन्तर्वासना के बारे में सबसे पहले मुझे मेरे दोस्त ने बताया था. मैंने भी इधर की सेक्स कहानी पढ़ना शुरू किया. मुझे अच्छा लगने लगा, तो मैंने मन बनाया कि मेरे साथ जो हादसा गुजरा है, उसे आप लोगों के साथ शेयर करूं. </p>
<p>चूँकि पहली बार लिख रहा हूँ … अगर कोई समझ ना आए … या कुछ गलती हो तो माफ कर देना.</p>
<p>मैं जब छोटा था, तो मेरा बहुत सेक्स का मन करता था. जब मेरा मन सेक्स करने का होता था, तब मैं छिप छिप कर पोर्न फिल्में देखा करता था. जब मैं गंदी फिल्में देखता था, तब चूत चुदाई करने का मेरा मन बहुत होता था, लेकिन उम्र छोटी थी, उस वक्त शक्ल सूरत भी अच्छी नहीं थी … तो कोई लड़की मुझे भाव ही नहीं देती थी. न ही सामने से देखती थी. </p>
<p>उस वक्त मुझे अपने आपसे बड़ी घिन होती थी कि मैं ऐसा क्यों हूं. मैं क्यों अच्छा नहीं दिखता हूँ. </p>
<p>इन सब वजहों से लड़की पटाने के मामले में मुझे बचपन में बहुत प्रॉब्लम हुई. मैंने अपने हाथ से हिला कर अपने आपको संतुष्ट किया था. जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई, मुझे समझदारी आती गई. हालांकि मुझे अब भी ये नहीं मालूम था कि औरतों को क्या चाहिए होता है … या लड़कियां कैसे खुश होती हैं. लड़कियों को कैसे पटाना चाहिए. </p>
<p>फिर धीरे-धीरे मैंने जिम जाना शुरू किया अच्छी बॉडी बनाई. उसके बाद मुझे अच्छा रेस्पॉन्स आने लगा. </p>
<p>ये एक जीता जागता गुजरा हुआ सच्चा मसाला है. जो कि बिल्कुल ही सच है और इसमें सच के सिवा कुछ भी नहीं है. </p>
<p>एक ऐसी लड़की की जो मुझे अचानक मिली जिसको मैंने कभी देखा तक नहीं था न सोचा था कि ऐसी कोई जिंदगी में आई थी बाद उस टाइम की है जब मैं शुरू शुरू में जिम जाया करता था. जिम के पास में खूबसूरत लड़की थी, जिसका नाम मैं नहीं लूंगा … लेकिन दिखने में वो जबरदस्त कमाल की लड़की थी. उसकी तारीफ जितनी भी करो, कम है. </p>
<p>उसकी आंखें क्या मस्त झील सी गहरी थीं कि बस एक बार देख लूं, तो घायल ही हो गया. उसका फिगर साइज 36-30-36 का था. जब वो चलती थी, तो उसकी गांड क्या मटक मटक कर … उछल उछल कर दिखती थी. क्या मस्त उभरी हुई गांड थी. उसकी गांड को देख कर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाए. उसकी गांड देखकर ऐसा मन करता था कि बस अभी के अभी ही अपना 7 इंच का सरिया अन्दर घुसा दूं. उसकी चीखें निकाल दूं. बस रोज इसी तरह दिन निकलते थे. </p>
<p>जब भी मैं वहां जिम के पास से जाता था, उसे देखने का मौका नहीं छोड़ता था. बस उसको देख कर खुश हो जाया करता था. मैंने उसे देखा बस ही था, अब तक मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता था कि वो कौन है, कहां से आई है … उसका नाम क्या है … वो करती क्या है. मुझे उस टाइम तक कुछ भी नहीं मालूम था. </p>
<p>एक दिन मैं उसे देख रहा था कि उसने भी मुझे देखा. मैंने नजरें नीचे कर लीं और न जाने क्या समझ आया कि जेब से पेन निकाल कर एक कागज़ के टुकड़े पर अपना फोन नम्बर लिखा और कागज को अपनी मुट्ठी से मरोड़ कर फेंक दिया. इसके बाद उसकी तरफ देखा और चला गया.</p>
<p>मुझे बहुत ज्यादा कोई उम्मीद तो नहीं थी, बस एक बार मन ने कहा और नम्बर लिख कर फेंक दिया.</p>
<p>हालांकि उससे कुछ नहीं हुआ. अब मेरा रोज का यही काम था. जिम से लौट कर अपने कमरे में आता था … उसे अपनी कल्पनाओं में देखता था और उसके नाम की मुठ मारके सो जाता था. मैं मन में दुआ करता था कि एक दिन ये मुझे मिल जाए और दबा दबा कर चोद दूँ. मगर हमारी किस्मत तो गधे के लंड से बंधी हुई थी, इसमें कभी कुछ अच्छा होना ही नहीं था. उम्मीद ही लगा रखी थी कि होगा तो कुछ बुरा ही होगा … साला अच्छा तो कभी हुआ ही नहीं है. इतनी अच्छी लड़की कहां से मिलेगी.</p>
<p>लेकिन आपने सुना ही होगा कि अगर किसी चीज को दिल से चाहो, तो सारी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है और यह सिर्फ डायलॉग नहीं है, हकीकत भी है. क्योंकि जब तक मेरे साथ हादसा नहीं हुआ, उससे पहले मुझे लगता था कि चाहने से कुछ नहीं होता है, कोई कायनात वायनात नहीं होती. </p>
<p>फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि मुझे यकीन होने लगा कि ऐसा होता है. </p>
<p>बात को ज्यादा ना घुमाते हुए सीधा पॉइंट पर आते हैं.</p>
<p>मैं रोज की तरह उसके ख्यालों में खोया हुआ था. अचानक मेरे फोन पर एक कॉल आया. उधर से हल्की सी आवाज में कहा गया- हैलो. </p>
<p>मैं एक पल के लिए सोचने लग गया कि ऐसा कौन है, जो मुझे कॉल कर रहा है.<br />
फिर मैंने भी जवाब दिया- हैलो … हां जी बोलिए!<br />
तो उसने कहा कि मैं रूबीना बोल रही हूँ.<br />
(यह उसका काल्पनिक नाम है असली नाम नहीं बताऊंगा)<br />
मैंने चौंकते हुए पूछा कि कौन रूबीना?<br />
तो उसने कहा कि मैं वही रूबीना, जिसे आप रोज देखते हैं और बात तक नहीं करते. आपने ही नम्बर को लिख कर सड़क पर फेंक दिया था न!</p>
<p>इतना सुनते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे और मैं अपने आपके बारे में सोचने लगा कि साला मैंने अब तक उससे क्यों बात नहीं की … जबकि वो तो मुझसे बात करने को तैयार थी.</p>
<p>मैंने अपने आपको संभालते हुए कहा कि मैं तो आपको नहीं देखता हूं … मैं तो बस अपने काम से काम रखता हूं. वहां से गुजरता हूं और वापस आ जाता हूं. </p>
<p>वह बोली- क्यों … चलो अब बनाओ मत … मुझे सब पता है, तुम मुझे क्यों देखते हो?<br />
मैंने भी पूछ लिया- आप मुझे बताओ न … मैं क्यों देखता हूँ?<br />
उसने भी शरारती अंदाज में कहा- अब इतने भोले मत बनो, जैसे तुम्हें कुछ पता ही नहीं है. </p>
<p>इस तरह उस दिन हमारे बीच बातें शुरू हुईं. फिर उसने बताया कि मेरी यहां शादी हुई है, मेरा पूरा दिन इसी घर में गुजर जाता है. ना कभी मैं बाहर निकलती हूँ, ना कहीं जाती हूँ. बस पूरा दिन उसी घर में, घर के काम करने में निकल जाता है. मेरा पति भी ऐसा है, जिसे काम से फुर्सत ही नहीं है कि मुझ पर ध्यान दे … मुझसे प्यार करे … मुझसे सेक्स करे, मेरी जरूरतों को पूरी करे. </p>
<p>मैंने उसके मुँह से सब सुना.</p>
<p>जब उसने ये बताया कि उसका पति उसे वह सुख नहीं दे पाता है, जो उसे मिलना चाहिए. तो मुझे समझ आ गया कि सौदा बिना खतरे का है. सिर्फ मजा लेने देने का मामला है.</p>
<p>इस तरह की हमारी बातें होने लगीं. वो अपने दुख मुझे सुनाती. मुझे भी सुनने पड़ते … क्योंकि मुझे तो उसकी चूत और गांड मारनी थी. </p>
<p>एक दिन मैंने उससे कहा- आप ऐसी बातें मत किया करो, सीधी सी बात है … मैंने जब से आपको देखा है, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं. </p>
<p>मेरी यह बात सुनकर वो गुस्सा हो गई और बोली- तुम मेरे बारे में ऐसी सोच रखते हो … मैं तो तुम्हें अच्छा समझती थी … लेकिन तुम तो ऐसे निकले. आज के बाद मुझे फोन मत करना.</p>
<p>अक्सर होता है ना कि लड़की हमसे कुछ और उम्मीद लगाकर बैठी होती है … और हम कुछ और भी लगा कर बैठे होते हैं. मुझे तो उसके साथ सेक्स करना था, तो मैंने खुलकर कह दिया. उसे भी ना जाने कहीं ना कहीं अपने अन्दर अपने पति से ना मिलने वाले सुख के कारण मुझसे बात करना ठीक लगा था. उसे भी सेक्स की जरूरत थी, पर वह मुझसे कह नहीं पाई. </p>
<p>हालांकि वो इतनी जल्दी सेक्स की बात पर खुलना नहीं चाहती थी. शायद मुझे ये बात करने में कुछ और टाइम लेना चाहिए था. लेकिन मैंने बहुत जल्दी कर दी. </p>
<p>जब उसने मुझसे कहा कि मुझसे बात मत करना, तो मामला फ़ैल गया. उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया.</p>
<p>मैंने सोचा कि कितना अच्छा माल मिला और क्या गड़बड़ी कर दी यार तूने … माल तो तेरा ही था … थोड़ा सब्र रख लेता, तो सब काम हो जाता. </p>
<p>फिर भी टेंशन में टेंशन होती है. मैं उसे पहले की तरह देखने लगा, पर वो रोज की तरह अब मुझे नहीं दिखती. मैं और परेशान होने लगा. </p>
<p>फिर अचानक चार दिन बाद सुबह के 4:00 बजे उसका कॉल आया. उसने कॉल करते ही कहा- जल्दी से मुझे मिलने आ जाओ.<br />
मैंने कहा- इतनी जल्दी? क्या हुआ?<br />
तो उसने कहा- ज्यादा टाइम नहीं है … मेरे पति अभी सोए हुए हैं. आप जल्दी से यहां पर आ जाइए, मैं आपका वेट कर रही हूं. मैं घर के बाहर ही हूं. </p>
<p>जल्दी में उठकर मैंने अपनी बाइक निकाली और उसके घर के पास चला गया. सुबह के अंधेरे में मैं वहां पहुंचा था. मेरे पहुंचते ही वो मुझसे लिपट गई और रोने लगी.</p>
<p>रूबीना- मुझे माफ कर दो, मैंने आपसे बात नहीं की.<br />
मैंने कहा- माफी तो मुझे मांगनी चाहिए. मैंने आपको गलत कह दिया था, मुझे सोच समझकर बोलना चाहिए था कि आप मुझसे क्या चाहती हो.<br />
उसने कहा- मैं वही चाहती हूं, जो आपने मुझसे कहा था, लेकिन पता नहीं मुझे उस टाइम क्या हो गया था. मैंने आपसे बात करना बंद कर दिया. </p>
<p>इतना सुनते ही मैं उसे किस करने लगा. मैं रोड पर खड़ा हुआ था और वह भी मेरे साथ खड़ी थी. वहां मुझे कुछ ख्याल ही नहीं रहा. मैं बस उसे किस करने लगा. ये सब मेरे लिए पहली बार था. </p>
<p>उसे तो सब पता था क्योंकि वो एक शादीशुदा थी. मुझे उस टाइम ऐसा लग रहा था, जैसे मानो मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा सुख मिल गया हो. मैंने ऐसी फीलिंग आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी. </p>
<p>वो मेरे होंठों को इस तरह चूस रही थी, जैसे कई बरसों की प्यासी हो.</p>
<p>उसके होंठ चूसने से मेरी हालत खराब हो रही थी. मेरा लंड इतना कड़क हो चुका था कि अगर दीवार में घुसा दूं, तो दीवार में छेद हो जाए. उसने मेरे लंड को महसूस कर लिया था. </p>
<p>मैंने उसे कसके पकड़ लिया था और लंड को वहीं खड़े खड़े उसके पेट में गड़ाने लगा. जैसे ही मैंने उसके मम्मों को छूने की कोशिश की, तो उसने मेरे हाथों को रोक लिया.<br />
अब उसने कहा- हम सड़क पर खड़े हैं. </p>
<p>तभी मुझे होश आया और मैंने अपने आपको संभाला. </p>
<p>उसने कहा- बाकी सब बाद में … </p>
<p>उस टाइम मुझे बहत ज्यादा गुस्सा आया, पर मैं क्या कर सकता था. मुझे निराश होना पड़ा … मैं वापस अपने घर आ गया.</p>
<p>अब दोस्तो, बाकी कहानी अगले भाग में. मैंने कैसे उसे चोदा और जब चुदाई की, तब उसका पति आ गया और तब क्या हुआ … ये सब आपको अगले भाग में लिखूँगा.<br />
आपके मेल की प्रतीक्षा में आपका धर्मेंद्र<br />
[email protected]</p>
<p>चोदाई की कहानी का अगला भाग: मेरी पहली चोदाई की कहानी-2</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:55:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं. आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल का <a title="ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/" aria-label="Continue reading ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं.</p>
<p>आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल  का था और बारहवी में पढ़ रहा था। उन दिनों मैं अपने मामा के घर पर रह रहा था. मुझे क्या पता था कि मामा के यहाँ मैं सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं जा रहा बल्कि एक ऐसे रिश्ते से जुड़ने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन में एक नया मोड़ ले आएगा। </p>
<p>मेरे मामा थोड़े गरीब हैं। उनके घर में केवल एक कमरा अपने बड़े बेटे और बहू के सोने के लिए और एक कमरा बाकी लड़कियों और मामा मामी के सोने के लिए है। उनकी 3 बेटियाँ हैं जिसमें से सबसे बड़ी का नाम पूनम था। वो मुझसे 4-5 साल बड़ी थी इसलिए मैं उनको दीदी कहता था। भगवान ने उनको बहुत सुंदर बनाया है।</p>
<p>मैंने हमेशा उनको दीदी ही तो माना था। आखिर मामा की लड़की भी तो बहन है। ऊपर से उम्र में 4-5 साल बड़ी मगर उनकी हंसने की अदा, उनके गोर चेहरे की मुस्कराहट, उनके गुलाबी होंठ, उनके तीखे नैन नक्श मुझे कम से कम उस समय तक तो नहीं भाये थे जब तक आस-पड़ोस के लडकों में उनको पाने की ललक न देखी थी।</p>
<p>अब एक साथ रहने के चलते हम सब भाई-बहनों का साथ-साथ उठाना बैठना, लूडो खेलना होता था। एक सादगी भरी हसीन अदा उनकी हर हरकत में दिखती थी।<br />
पढ़ाई में लड़कियों से पाला बहुत पड़ा था लेकिन शायद उस समय तक एक लड़की के छूने पर जो अहसास अब हो पाया था वो पहले कभी नहीं हुआ था।</p>
<p>मैं अक्सर उनको सताया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई जानकर बहुत तंग किया करती थी और हम दोनों भाई-बहन ऐसे ही मस्ती करते रहते थे. हम दोनों के बीच में ऐसी ही हल्की-फुल्की शरारतें अक्सर चलती ही रहती थीं.</p>
<p>दीदी मेरा बहुत ख्याल भी रखती थी। लूडो खेलते समय जब एक दो बार उनका हाथ मेरे हाथ से छुआ तो पता चला कि इतना नर्म स्पर्श शायद कभी महसूस नहीं किया था मैंने। फिर मैं जान बूझकर खेल में चीटिंग करता था और पासा लेने के चक्कर में काफी देर तक उनके हाथों का स्पर्श महसूस करता था।</p>
<p>उनको मेरा शहरी पहनावा बहुत पसंद था। मेरी टाइट फिट टी-शर्ट्स और शर्ट्स उनको मेरी अच्छी फिटनेस दिखाती थी। मुझे भी उनका शहरी लड़कियों की तरह कुरता और लेग्गिंग का तालमेल गजब का लगता था।</p>
<p>धीरे-धीरे मेरा ध्यान उनके ऊपरी उभार पर जाने लगा। मेरी चोर नजरें अक्सर उनके उभारों को देखने की ताक में रहने लगी थीं। जब भी हम लोग लूडो खेलने बैठते तो मेरा ध्यान उनके उभारों और उनकी जांघों पर जाता था। जांघों का गदरायापन अक्सर मेरी उँगलियों को बुलाता था और मैं उनकी जाँघों पर अपनी उँगलियां चलाने के लिए मचल जाता था। मैं कई बार उनके हाथों का स्पर्श पाकर रोमांचित हो जाता था। उनके हर अंग से चिपका उनका कुर्ता और कसी लेग्गिंग मुझे आकर्षित करने लगी थी।</p>
<p>एक दिन मैं मामा के अन्दर वाले कमरे में सो रहा था। दीदी भी शायद मुझे सोता हुआ जानकर बेफिक्र सी होकर नहा रही थी। मामा की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से नहावन बस एक बंद दरवाजे के पीछे बना था जिसमें से होकर अन्दर वाले कमरे का रास्ता था जहाँ मैं सो रहा था.</p>
<p>गर्मियों के दिन थे इसलिए गर्मी की वजह से मेरी आँख खुली। मैं जैसे ही उठ कर बाहर निकला मेरी आँखें खुली रह गयीं। दीदी का पूरा यौवन मेरे सामने था। उनका पूरा गोरा नंगा जिस्म देख कर मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा।<br />
दीदी के सिर से गिर रहा पानी उनके लबों को, गर्दन को, उनके मखमली बूब्स को, उनकी पतली कमर को भिगोता हुआ और उनकी जांघों से होता हुआ योनि के रास्ते अपना सफर तय कर रहा था। </p>
<p>कुछ समय के लिए मुझे पानी से जलन होने लगी। मैं भी पानी की तरह उनके नर्म गुलाबी लबों को, उनकी गर्दन को, उनके बूब्स को, उनकी कमर को, पेट पर बनी सुंदर सी नाभि को, उनकी मुलायम जाँघों को और उस योनि को छूना चाहता था।</p>
<p>मेरा मन दीदी को अपनी आगोश में भरने को कर रहा था। एक 23-24 साल की लड़की की भरपूर जवानी, वो हसीं जिस्म, पूरे दूध की तरह सफ़ेद जिस्म पर केवल दो कपडे़, उस समय दीदी को किसी फिल्मी मॉडल की तरह दिखा रहा था। शायद मेरे अन्दर की वासना मेरी पैंट में मेरे खड़े हो रहे लंड से पता चल सकती थी। </p>
<p>मैं उनकी जाँघों के बीच में अपना हाथ रखकर उस नर्म-मुलायम और मखमली अहसास को महसूस करना चाहता था। अचानक दीदी का नहाना पूरा हुआ और मैंने नजरें बचाते हुए दबे कदमों से खुद को वापस मोड़ा और धीरे से चल कर अपने कमरे में वापस आ गया.</p>
<p>मैंने अपनी सोच पर काबू करने की कोशिश की और कुछ दिनों में मेरे दिमाग से गलत विचार जाने लगे। लेकिन रह-रह कर दीदी का यौवन मेरे अन्दर की वासना को फिर जगा देता था। वो जब भी मुस्कुरा कर देखती तो मेरा मनन कहता कि उनके लबों को लबों से भिगो दूँ। उनकी मस्त जवानी को तार तार कर दूँ और उनके जिस्म से खेलूं। मैंने किसी तरह खुद पर संयम रखा।</p>
<p>होनी को मैंने टालने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन होनी तो होकर ही रहती है.</p>
<p>गांव की लचर बिजली व्यवस्था ने भी होनी का ही साथ दिया. मामा के गांव में बिजली दिन में सुबह 4 से 11 बजे और फिर शाम को भी 4 से 11 बजे के बीच में ही आती थी. बाकी के समय में बिजली गुल रहती थी. घर में केवल एक कमरा था जिसमें एक तख्ता और 3 चारपाई आपस में सटकर बिछायी गयी थी। मैं दीदी की चारपाई के बगल वाले तख्त पे सोता था। </p>
<p>उम्र में 4-5 साल छोटा होने से किसी ने मेरे बारे में गलत न सोचा होगा; इतना तो मैं उस वक्त भी जानता ही था।</p>
<p>उस रात को जब हम सब सो रहे थे तो उस समय रात में लाइट न होने से मुझे गर्मी लगने लगी और नींद खुल गयी। मैं हाथ वाला पंखा चलाने लगा तो उसी समय दीदी मेरे हाथ से पंखा लेकर खुद ही लेटे लेटे मुझे हवा करने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि उनका हाथ दर्द कर रहा होगा इसलिए मैंने उनके हाथ से लेने के लिए हाथ चारपाई पर रखा तो उनकी बांह पर हाथ पड़ा। इतनी नर्म और मुलायम बांह पर हाथ पड़ने से मैं कुछ संकुचाया लेकिन पंखा लेने के लिए हाथ पूरी बांह पर फेरते हुए हथेली तक ले गया और पंखा लेकर चलाने लगा। </p>
<p>दीदी ने पंखा वापिस लेने की जबरदस्ती की लेकिन इस बार मैंने उनकी हथेली में अपनी हथेली फंसाकर उनको पंखा नहीं लेने दिया।</p>
<p>लेकिन न मैंने दीदी का हाथ छोड़ा और न ही दीदी ने छुड़ाया। मैं उनका हाथ छोड़ना भी नहीं चाहता था क्यूंकि मेरी नस-नस में अब दीदी को छूते रहने की लालसा थी। पूरी रात दीदी मेरे हाथों पर प्यार की थपकी (जैसे छोटे भाई को दी जाती है) देती रही और मुझे पता नहीं कब नींद आ गयी। </p>
<p>अक्सर रात में दीदी का हाथ मेरे हाथों में रहता था और दीदी के पूरे बदन को छूने की लालसा मेरे मन में हर दिन बढ़ती ही जा रही थी।</p>
<p>लेकिन यह आनंद भरा खेल उस रात को गड़बड़ा गया जब मामी की वजह से मुझे तख्ते से हटकर दूसरी चारपाई पर जाना पड़ा। उस कमरे में 3 चारपाई और एक तख्ता एक साथ एक आयताकार रूप में एक दूसरे से सटा कर बिछाए हुए थे। उस रात को मैं जिस चारपाई पर गया वो दीदी की चारपाई के विपरीत दिशा में थी। अब दीदी और मेरा सिर एक दूसरे की विपरीत दिशा में था। उस रात को दीदी के सिर में तेज दर्द था. </p>
<p>चूंकि मैं उनसे काफी छोटा था तो मैंने सिर दबाने को कहा. बहुत कहने पर दीदी मान गयी और मैं अपनी चारपाई से ही हाथ पीछे करके उनका सिर दबाने लगा। लगभग 15 मिनट बाद जब दीदी और सब लोग सो गए तब मेरी उँगलियाँ दीदी के माथे से होते हुए दीदी के गालों पर पहुंचने लगीं। ऐसा लगने लगा था कि शायद अब मेरी उँगलियाँ किसी रुई के गुच्छे में चली गयी हों। मैंने उनके गाल पर काफी देर तक उँगलियाँ फेरीं और फिर सरकाते हुए उनके गले तक पहुंचा। </p>
<p>मेरे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी क्यूंकि ठीक उसी समय दीदी थोड़ा सा ऊपर खिसकी और मेरी उँगलियाँ उनके गले से सरकते हुए थोड़ा सा नीचे चली गयी और एक मलमल से उठे हुए उनके बूब्स पर पहुँच गयीं।<br />
मेरी उँगलियाँ कुछ कांपी लेकिन तब तक अपनी वासना से इतना मजबूर हो चुका था मैं कि कब उनके एक बूब्स को पूरा हाथ में भर कर हल्का हल्का दबाने लगा मुझे इस बारे में सोचने का मौका भी नहीं दिया मेरे मन में उठ रहे वासना के वेग ने।</p>
<p>वासना जैसे-जैसे बढ़ती गयी उनके उरोज पर मेरा दबाव और पकड़ बढ़ती गयी। थोड़ी देर बाद अहसास हुआ कि टाइट सूट होने की वजह से उनके बूब्स पर हाथ फिराने में जो दिक्कत हो रही थी वो अचानक सूट के ढीला होने से दूर हो गयी। मेरा हाथ उनके बूब्स की घाटियों में पूरा घूमने लगा।</p>
<p>तभी एहसास हुआ कि मेरे हाथों पर उनके होंठों के चुम्बन हुए जिसने मेरे लंड को अपनी उत्तेजना के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया। जिसका सीधा मतलब था कि मैं यौवन की प्यास को जगा चुका था। </p>
<p>मेरे शरीर में उनके प्रति इतना आकर्षण बढ़ गया कि कब मैं अपनी चारपाई से उठकर उनकी चारपाई पर पहुँच गया पता ही न चला। उस समय मैं यह भी भूल गया था कि भले ही घर में पूरा अँधेरा था लेकिन घर में और लोग भी तो मौजूद थे।</p>
<p>बेलगाम घोड़ी होती है ये हवस … एक बार दौड़ना शुरू किया तो दौड़ाती ही चली जाती है.<br />
मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था।</p>
<p>मैं जैसे ही दीदी की चारपाई पर पहुंचा, उन्होंने भी अपनी आगोश में मुझे भर लिया। मेरा सिर उनके उभारों के मखमली और सबसे मुलायम जगह पर था।</p>
<p>अपने मुंह को दीदी के उभारों में घुसा कर उस पहले अहसास के आनंद में ऐसा डूबने लगा कि मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि अब और गहराई में उतरना है. पहली बार दीदी के उभारों को अपने होंठों से छुआ था इसलिए आनंद की कोई सीमा न थी.</p>
<p>मेरा मन कर रहा था कि अब आगे चलूं, आगे क्या होगा. हवस ने मेरे लंड का बुरा हाल कर दिया था और मेरा लंड को फाड़ने के लिए बार-बार पैंट में ही दीदी की जांघों पर धक्के पर धक्के दिये जा रहा था. मगर अभी तक ये समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना है. पहला अनुभव था किसी लड़की के बदन के स्पर्श का. </p>
<p>मगर दीदी को शायद थोड़ा ज्यादा तजुरबा था. उन्होंने मेरे बालों को सहलाया और फिर मेरी गर्दन को हल्के से उठा कर मेरा माथा चूम लिया. बस अब मुझे आगे का रास्ता भी दिख गया था. मैंने अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसते हुए खुद को थोड़ा और ऊपर घसीटा और अपने होंठों को दीदी के होंठों पर रख दिया.</p>
<p>दीदी के लबों से लब मिले तो जैसे चाशनी में डूबी जलेबी का स्वाद जबान को मिलने लगा. मगर पहली बार था इसलिए ये भी नहीं जानता था कि किस कैसे करते हैं. </p>
<p>एक दबे हुए डर के साथ ही आनंद की उन लहरों में दीदी के होंठों को चूसने लगा. जैसा जो भी समझ आ रहा था बस हम दोनों करने में लगे हुए थे. शायद दोनों के ही मन में ये डर था कि अगर चुम्बन की आवाजें बगल में सो रहे लोगों के कानों में पड़ गयीं तो लेने के देने न पड़ जायें इसलिए दोनों ही सावधानी के साथ एक दूसरे को भोगने की राह पर आगे बढ़ रहे थे. </p>
<p>दीदी ने मुझे पूरी तरह अपनी आगोश में भर रखा था और मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रहा था. मेरी छाती दीदी के बूब्स पर कसी हुई थी और लंड था कि दीदी की जांघों में छेद ही करने वाला था.</p>
<p>तभी दीदी ने नीचे से हाथ ले जाकर मेरे लंड को छुआ तो हवस में ऐसी लपटें मेरे जिस्म में उठीं कि मैंने दीदी के होंठों को जोर से काट लिया और शायद दर्द के मारे उनके हल्की सी टीस निकल गयी. लेकिन उन्होंने अपनी आवाज को होंठों से बाहर न आने दिया और अंदर ही दबा लिया. </p>
<p>मैंने दीदी की पजामी पर हाथ मारा तो दीदी की जांघों के बीच में उठी हुई सी वो आकृति हाथ को छू गई.<br />
किसी भी योनि को छूने का यह मेरा पहला अहसास था … बहुत ही कामुक और बेहद आनंददायक।</p>
<p>मैंने एक दो बार दीदी की योनि को उनकी पजामी के ऊपर से ही मसला और फिर उनकी जांघों से पजामी को नीचे खींचने की कोशिश करने लगा.<br />
दीदी भी पूरे उफान पर थी इसलिए मेरी मंशा को भांप कर दीदी ने भी अपनी गांड हल्की सी उठा दी और दीदी की बिना पैंटी वाली योनि पर मेरा हाथ जा लगा.</p>
<p>आह्ह … पहली बार नंगी चूत को छूकर ऐसा तूफान उठा कि मुझसे रहा न गया और मैंने दीदी की योनि में उंगली ही डाल दी. दीदी हल्की सी उचकी लेकिन बिना आवाज किये.<br />
हम दोनों भाई बहन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे. आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी.</p>
<p>दीदी ने मेरी पैंट की चेन खोल दी और फिर मैं समझ गया कि दीदी मेरे लंड का स्पर्श पाना चाहती है. मैंने भी लंड को बाहर निकाल लिया और दीदी के हाथ में दे दिया.</p>
<p>नर्म हाथ में जाते ही लंड में ऐसी लहर उठी कि एक बार तो लगा कि स्खलन हो ही जायेगा लेकिन किसी तरह खुद को रोका और एकदम से दीदी का हाथ हटा दिया. दीदी भी जान गयी कि शायद मैं चरम पर पहुंचने के करीब हूं इसलिए उन्होंने भी दोबारा लंड को छूने की कोशिश नहीं की. </p>
<p>मैंने दीदी की गीली चूत से उंगली निकाली और उसको अपने मुंह में भर लिया. मुझे नहीं पता था कि ये सब करना भी होता है या नहीं, मगर जो भी हो रहा था अपने आप ही होता चला जा रहा था. दीदी का रस चखने के बाद अब उनकी योनि को अपने लंड का रस देने की बारी थी. अब और कुछ सूझ ही नहीं रहा था.</p>
<p>मैंने दीदी के कान के पास अपने होंठ ले जाकर फुसफुसाते हुए पूछा- डाल दूं क्या अंदर?<br />
दीदी ने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा कर अपनी मंजूरी दे दी.</p>
<p>मैंने दीदी की चूत को टटोला और अपने लंड को दीदी की योनि पर फेरते हुए रख लिया. कुछ नहीं पता था कि लिंग योनि में कैसे डाला जाता है. एक बार में ही चला जाता है या कई बार में जाता है. कितना जोर लगाना चाहिए और कब लगाना चाहिए.</p>
<p>मगर सेक्स तो करने से ही आता है. मैंने दीदी की योनि पर लंड को लगाकर हल्का सा धक्का दिया तो लंड फिसल गया. लंड भी कामरस छोड़ कर पूरा टोपा चिकना कर चुका था और उधर दीदी की योनि भी पूरी भीगी पड़ी थी. </p>
<p>मैंने दोबारा से लंड को योनि पर सेट किया और एक धक्का मारा. दूसरी बार भी लंड फिसल गया. अब दीदी को लगा कि उनको ही आगे आना पड़ेगा. दीदी ने मेरे लंड को अपने मुलायम से हाथ में पकड़ कर अपनी योनि के द्वार पर सेट किया और मुझे अपनी तरफ खींच कर ये बताया कि अब धक्का लगा.</p>
<p>मैंने धक्का दिया तो मेरा लंड दीदी की चूत में उतर गया. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … क्या बताऊं यारों, अपनी ममेरी बहन की चूत में लंड देने का वो पहला अहसास … आज भी उस पल को याद करते ही मुट्ठ मारने का मन कर जाता है.</p>
<p>दीदी की योनि में लंड को डालकर मैंने धीरे-धीरे अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसना शुरू किया. धक्के कैसे लगाये जाते हैं ये भी मैं बाद में ही सीख पाया लेकिन उस दिन तो बस जैसे तैसे करके मुझे दीदी की योनि का रस पीना था.<br />
सेक्स का मजा कैसे लिया जाता है वो सब मैंने बाद में ही सीखा. </p>
<p>मेरी जवान ममेरी बहन की योनि इतनी गर्म और गीली थी कि मैं दो मिनट से ज्यादा उसमें टिक ही नहीं पाया और जब वीर्य निकला तो ऐसा आनंद मिला कि वैसा आनंद दुनिया में कहीं और मिल ही नहीं सकता।<br />
मैंने दीदी की चूत में अपना पूरा लंड खाली कर दिया.</p>
<p>मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं लेकिन दीदी शायद प्यासी रह गई थी. मगर फिर भी दीदी ने प्यार से मेरी पीठ को सहलाया और मुझे अलग होने के लिए कह दिया. </p>
<p>उस रात से हमारे जवान जिस्मों के बीच में जो संबंध बनने की शुरूआत हुई तो फिर हमने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.</p>
<p>एक रोज भाग्य ने भी पूरा साथ दिया और घर में हम दोनों अकेले ही थे. उस दिन मैंने दीदी की योनि को चाटा भी और चूसा भी। मगर सेक्स तो उस दिन भी पांच मिनट से ज्यादा नहीं चल पाया. फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे मैं पारंगत होता गया तो मेरी और दीदी की जवानी खिलती चली गई.</p>
<p>हम दोनों चुदाई का भरपूर मजा लेने लगे. होते-होते बात यहां तक पहुंच गई थी कि दोनों ने भाग कर शादी करने का फैसला तक कर डाला. मगर ऐसा कुछ हो न पाया। फिर मेरी पढ़ाई वहां से खत्म हो गई और मैं अपने घर आ गया.</p>
<p>मगर दीदी के लिए एक प्यास हमेशा ही मन में उठी रहती थी इसलिए बार-बार बहाना करके मामा के घर पहुंच जाता था. दीदी भी मेरी राह में पलकें बिछाये रहती थी. दोनों जब मिलते थे तो ऐसे मिलते थे जैसे सदियों के प्यासे प्रेमी हों.</p>
<p>फिर दीदी की शादी हो गई और हमारे प्यार का सफर भी खत्म हो गया.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:48:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13296</guid>

					<description><![CDATA[मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर <a title="मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी</p>
<p>जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।</p>
<p>तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।<br />
एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।</p>
<p>चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।<br />
मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।</p>
<p>चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।</p>
<p>मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।</p>
<p>उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।</p>
<p>अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।</p>
<p>उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।<br />
मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।</p>
<p>मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?<br />
मैंने उससे पूछा।<br />
वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!<br />
वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।</p>
<p>मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।<br />
वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?<br />
मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।</p>
<p>दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।</p>
<p>मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’<br />
अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।</p>
<p>उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।<br />
मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?<br />
वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।<br />
मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।</p>
<p>मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?<br />
मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!</p>
<p>मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’<br />
बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।</p>
<p>उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।<br />
रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।</p>
<p>इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।<br />
वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।</p>
<p>मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।<br />
जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।<br />
वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।</p>
<p>हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.<br />
वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।<br />
मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।</p>
<p>मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।<br />
मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।</p>
<p>मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.<br />
और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।</p>
<p>मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।</p>
<p>एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?<br />
वो बोली- हाँ पापा?<br />
मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?<br />
दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?<br />
मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?</p>
<p>वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।</p>
<p>उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।</p>
<p>मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।</p>
<p>मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?<br />
मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?</p>
<p>मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।<br />
तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.</p>
<p>बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।<br />
19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।<br />
मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।<br />
वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!<br />
वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।</p>
<p>उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।</p>
<p>वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया। मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।</p>
<p>मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?<br />
वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।</p>
<p>मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।</p>
<p>तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.<br />
और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।<br />
पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।</p>
<p>फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।<br />
मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।<br />
मैं तो खुशी से उछल पड़ा।</p>
<p>जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।</p>
<p>मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!<br />
कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।<br />
वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।<br />
मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।</p>
<p>मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।<br />
फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।</p>
<p>मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।<br />
वो बोली- जी पापा?<br />
मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।<br />
वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।</p>
<p>जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।</p>
<p>मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।</p>
<p>तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।</p>
<p>बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।</p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?<br />
वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।<br />
मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?<br />
वो बोली- पता नहीं पापा।</p>
<p>मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।</p>
<p>मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।</p>
<p>और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!<br />
उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।</p>
<p>वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!<br />
मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।<br />
वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।</p>
<p>मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।<br />
एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।</p>
<p>और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।<br />
उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।<br />
मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!</p>
<p>मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.</p>
<p>मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।<br />
जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.</p>
<p>मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।</p>
<p>उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।</p>
<p>थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?<br />
वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।</p>
<p>वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।</p>
<p>मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।<br />
उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।</p>
<p>मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!</p>
<p>मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।<br />
फिर बाहर आई।<br />
मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।<br />
तब कहीं वो सहज हुई।</p>
<p>शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।<br />
मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.</p>
<p>मेरी बीवी ने उसकी अच्छी सेवा की अपनी बेटी की तरह, मगर उसे ये नहीं पता था कि उसका पति और दिव्या का नकली बाप ही उसकी इस हालात का जिम्मेदार है।</p>
<p>[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:40:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ. आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. यह तब की बात है, जब मेरी <a title="पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/" aria-label="Continue reading पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ.</p>
<p>आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. </p>
<p>यह तब की बात है, जब मेरी इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का एग्जाम हो चुका था. मैं एग्जाम देकर अपने घर आया था. </p>
<p>मेरे घर के सामने एक लड़की रहती है, जिसका नाम शीमा (नाम बदला हुआ) है. वो दिखने में बहुत हॉट, खूबसूरत और सेक्सी है. वो लड़की शीमा मुझे पहले से ही अच्छी लगती थी. उसको लेकर मैं सोचता रहता था कि काश इस हॉट गर्ल चोदने का मौका मिल जाए … तो मजा आ जाए. </p>
<p>घर आने के बाद मैं उससे रोज बात करने लगा था. वो भी मुझसे हंस हंस कर बात करती थी. हम दोनों के बीच हर तरह का हंसी मज़ाक होने लगा था. </p>
<p>इस बार हमारे बीच इतनी अधिक नजदीकी बढ़ गई थी कि मैं हंसी मजाक के बहाने उसके शरीर को जहां तहां छू देता था. जब उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ, तो मैं अब उसकी गांड भी कभी कभी छू देता था. वो मेरी इस हरकत का कभी बुरा नहीं मानती थी. इससे मुझे लगने लगा था कि ये भी मेरी तरफ आकर्षित है. हम दोनों में सेक्स को लेकर भी खुल कर चर्चा होने लगी थी. </p>
<p>एक दिन जब मैं सुबह उठा तो मेरे मम्मी और पापा कहीं जाने की तैयारी कर रहे थे.<br />
मुझे पहले तो हैरानी हुई कि अचानक मम्मी पापा का किधर जाने का प्लान बन गया. मेरे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मेरे एक दूर वाले अंकल की तबीयत खराब है, तो उन्हीं को देखने और उनसे मिलने वे दोनों अस्पताल जा रहे हैं. चूंकि अस्पताल दूर था, तो उन्होंने मुझसे कहा कि उनको वापस घर आने में रात हो जाएगी. </p>
<p>मैं कुछ नहीं बोला. </p>
<p>मम्मी ने बताया कि उन्होंने मेरे खाने का इंतज़ाम शीमा के घर पर ही कर दिया है. मम्मी ने शीमा की माँ को बोल दिया था कि आज का मेरा खाना वो ही बना दें. </p>
<p>मैं शीमा का नाम सुनकर एकदम से मन ही मन खुश हो गया था कि शायद आज शीमा को चोदने का मौका मिल जाए. </p>
<p>यही हुआ भी ऊपर वाले ने आज मेरी सुन ली थी. उस दिन दोपहर को शीमा मेरा खाना लेकर मेरे घर आई. उस वक्त मैं अपने कंप्यूटर पर व्यस्त था. उसने घर में आते ही देखा कि मैं कंप्यूटर पर गेम खेल रहा था. </p>
<p>तो उसने बोला- अरे वाह अकेले अकेले ही गेम खेल रहे हो?<br />
मैं बोला- नहीं यार … मैंने अपने दोस्त को कॉल करके बुलाया था, पर वो कुछ काम होने के कारण नहीं आ सकता था. </p>
<p>इस पर शीमा ने बोला- कोई बात नहीं यार … मैं हूँ ना. मैं तुम्हारे साथ हर तरह का गेम खेलने को तैयार हूँ.<br />
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा मुस्कुराया और मैंने कहा- हर तरह का?<br />
वो एक पल के लिए झेंपी लेकिन अगले ही पल बोली- हां, हर तरह का खेल खेलने को राजी हूँ.<br />
मैंने उसको आंख मारी और कहा- ठीक है, पहले खाना खा लेता हूँ, फिर हम दोनों मस्त वाला गेम खेलते हैं. </p>
<p>मैं खाना खाने बैठ गया. वो किचन से मेरे लिए पानी लेकर आई. मैंने खाना खाया. उसके बाद मैं और शीमा हम दोनों कंप्यूटर पर गेम खेलने बैठ गए. </p>
<p>मैंने उसे बड़ी गौर से देखा. उस दिन उसने ट्राउज़र और शर्ट पहना था, वो बड़ी मस्त लग रही थी. </p>
<p>हम दोनों चिपक कर गेम खेलने लगे. गेम खेलते खेलते कभी कभी मैं उसकी जांघ पर अपना हाथ रख देता … तो वो मुझसे और भी सट जाती.<br />
दोस्तो क्या बताऊं, उसकी जांघ छूते छूते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. </p>
<p>मैं घर में चड्डी नहीं पहनता हूँ … तो मेरा लंड खड़ा होने लगा. जब उसकी जांघ के टच से मेरा लंड खड़ा हो गया तो वो उभर कर बाहर से दिखने लगा. शीमा इस बात पर ध्यान दे रही थी.<br />
उसने मेरे खड़े होते लंड को देखा, तो वो हंसने लगी. </p>
<p>मैंने उससे हंसने का कारण पूछा, तो उसने कहा- तुम्हारा सिग्नल खड़ा हो गया है.<br />
मैंने बोला- ये तुम्हें देख कर ही सिग्नल पकड़ रहा है.<br />
वो मेरी बात से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.</p>
<p>उसी वक्त उसने अपनी मम्मी को कॉल लगाया और कहा कि मॉम मैं थोड़ी देर से आऊंगी. राज अकेले घर में बोर रहा है तो उसके साथ कंप्यूटर पर गेम खेल रही हूँ.<br />
उसकी माँ ने कहा- ठीक है.<br />
उसने माँ की हामी पाते ही कॉल कट कर दिया. </p>
<p>उसके बाद शीमा ने मेरे लंड पर हाथ रख कर कहा- देखूँ ज़रा कितना सिग्नल पकड़ रहा है?<br />
वो मेरे लंड को सहलाते हुए धीरे धीरे हिलाने लगी. वो मुझे वासना भरी निगाहों से देख रही थी. </p>
<p>मैंने तुरंत उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और अपने हाथों को उसके मम्मों पर रख कर उन्हें दबाने लगा. वो मेरी बांहों में झूल गई. हम दोनों जवानी की आग में झुलसने लगे. मेरे हाथ उसके मम्मों के अलावा उसकी गांड को भी सहलाने लगे थे. हम दोनों एक दूसरे से एकदम चिपके हुए अपने दिलों की चाहत को अपनी मंजिल तक ले जाने के लिए पूरी तरह से कामुक हो उठे थे.</p>
<p>उसने मादकता भरे स्वर में कहा- तुमने कितनी देर लगा दी … ये खेल खेलने में!<br />
मैं- देर आया … दुरुस्त आया.<br />
वो मुझसे लिपट गई.</p>
<p>कोई 10 मिनट के लगातार चुम्बन करने के बाद मैंने उसकी शर्ट के बटनों को एक एक करके खोलना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों उसकी शर्ट ने उसके शरीर का साथ छोड़ दिया था. </p>
<p>शर्ट के अन्दर शीमा ने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को रगड़ने लगा. वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां लेने लगी. </p>
<p>कुछ देर बाद मैं उसे अपनी गोद में उठा कर अपने रूम में ले गया और उसे बेड पर लेटा दिया. उसके बिस्तर पर गिरते ही उसके ऊपर चढ़ कर मैं उसे चूमने लगा. कुछ देर बाद मैंने उसके ट्राउज़र को निकाल दिया और दोस्तों क्या बताऊं उसने पैंटी भी काली पहनी थी. </p>
<p>मैं आपको बता दूँ कि मुझे गोरी लड़की जब ब्लैक ड्रेस पहनती है, तो बहुत सेक्सी लगती है. उसे इस तरह देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैं उस पर टूट पड़ा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. </p>
<p>कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर नीचे लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गई. वह मेरी टी-शर्ट को उतार कर मेरी छाती पर अपने हाथ फेरने लगी. फिर वो मेरे कड़ियल जिस्म को चूमने लगी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसने मेरे लोअर को भी निकाल दिया और मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया. उस हॉट गर्ल के हाथ में लंड आते ही मैं एकदम से गनगना उठा. वो लंड सहलाते और हिलाते हुए मेरी आंखों में आंखें डाल कर देखने लगी.</p>
<p>मैंने उसको इशारा किया, तो वो समझ गई और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. पहले तो उसने मेरे लंड के सुपारे ऊपर अपनी जीभ फिराई और मेरे लंड को टट्टों से लेकर ऊपर तक चाटा और इसके बाद तो मानो उसने तूफ़ान खड़ा कर दिया. अब वो मेरे तनतनाए हुए लंड को अन्दर तक लेकर बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी थी. उसके मुँह की गर्मी पाकर मेरी आंखों में मदहोशी सी छा गई. मैं अपनी दोनों आंखें बंद करके लंड चुसाई का मजा लेने लगा.</p>
<p>दो मिनट बाद उसने खुद अपनी पैंटी को उतारा और मुझे धक्का देकर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया.<br />
मैं अभी कुछ समझ पाता, तब तक वो मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चूत की मुँह में लंड सैट करने लगी. मैंने गांड हिला कर लंड को उसकी चूत का मुँह ढूंढा और लंड को चूत में सैट कर दिया.</p>
<p>अब वो अपनी गांड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी. इससे मेरा लंड पूरी तरह से उसकी चूत में घुस गया. मैंने भी उसकी कमर को पकड़ लिया. </p>
<p>अब उसने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए मुझे लिप किस करने लगी. इस वक्त उसकी चूचियां मेरी छाती पर हिलते हुए मुझे बड़ा मजा दे रही थी.</p>
<p>कोई 15 मिनट बाद मैंने उसे अपने नीचे किया और उसकी एक टाँग तो अपने कंधे पर रख लिया.</p>
<p>अब मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और आगे पीछे करने लगा. मैं इस वक्त एकदम डिप्स मारने जैसी कसरत कर रहा था, उसके दोनों मम्मों को मैं अपने दोनों हाथों में दबोचे हुए लगातार चोदे जा रहा था. उसकी मस्ती अपने चरम पर थी. </p>
<p>कोई 10 मिनट बाद वो बड़ी तेज आवाज में सीत्कार करने लगी. मैं समझ गया कि शीमा झड़ने वाली हो गई है. उसकी चूत ने पानी छोड़ा कि ठीक उसके बाद ही मेरा पानी छूटने वाला हो गया.</p>
<p>मैंने झट से अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसके नंगे बदन को चूमने लगा. इस तरह मेरा लंड झड़ने से रह गया. फिर 5 मिनट बाद जब मेरा लंड थोड़ा शांत हुआ, तो उसने फिर से अपने हाथ से मेरा लंड खड़ा कर दिया और मैंने फिर से उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों एक दूसरे के आगोश में पूरी तरह खो चुके थे. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और 10 मिनट बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया. मैं देर तक उसकी छूट में ही अपने लंड की पिचकारियां छोड़ता रहा.<br />
वो एकदम से निढाल होकर अपने जिस्म को ऐसे थिरका रही थी, मानो मेरे रस को वो अपने अन्दर जज्ब कर रही हो.</p>
<p>माल झड़ जाने के बाद मेरा लंड सिकुड़ गया. जब मैंने लंड बाहर निकाला, तो उसकी चूत से पानी टपक रहा था. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने उसे चूम लिया. </p>
<p>हम दोनों कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े रहे. तभी उसकी मम्मी का कॉल आया और वो उसे घर वापस आने के लिए बुलाने लगीं. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक ज़ोरदार स्मूच किया और अपने अपने कपड़े पहन लिए. वो टिफिन लेकर अपने घर चली गई. </p>
<p>अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों जम कर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं और मज़े करते हैं. </p>
<p>दोस्तो, मेरी ये हॉट गर्ल की चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करके बताना न भूलना. </p>
<p>आपका राज<br />
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