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	<title>Hindi Desi Sex &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का! दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ <a title="भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का!<br />
<span id="more-309"></span></p>
<p>दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं।<br />
मगर एक बात मैंने अभी तक अपनी किसी भी कहानी में नहीं बताई कि मैं एक बहुत ही जिद्दी औरत हूँ। एक बार मेरे को खुन्नस चढ़ जाए तो फिर तो उस खुन्नस को निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ। आज मैं आपको अपनी खुन्नस की कहानी सुनाती हूँ। </p>
<p>हम तीन भाई बहन है। मैं छोटी हूँ, दोनों भाई बड़े हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई तो बाहर दूसरे शहर में रहते हैं। मगर छोटा भाई हमारे पैतृक घर में ही माँ के साथ रहता है। बाकी सब तो घर में खूब खाये पिये मोटे तगड़े हैं। मगर वो पता नहीं क्यों बहुत ही दुबला पतला सा है. और वैसे भी एक नंबर का चूतिया है, हर किसी से हर बार से डरता है।</p>
<p>बीवी उसकी बहुत सुंदर है, देखने में भी अच्छी तगड़ी है। शादी के बाद आते ही उसने भाई को अपने कब्जे में कर लिया। भाई तो बस उसका गुलाम ही बन गया।</p>
<p>जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तब मेरा और भैया भाभी का कमरा बिल्कुल मेरे साथ वाला था. रोज़ रात को मैं अपने कमरे में भाभी की सिसकारियाँ सुनती थी जब मेरा भाई कितनी कितनी देर तक मेरी भाभी की चूत को बजाता।<br />
अब पता नहीं वो उसकी चुदाई करता था या भाभी की चूत चाटता था। मगर भाभी की ‘हाय हाय’ नहीं खत्म होती थी।</p>
<p>भाभी की ‘हाय हाय’ सुन कर मेरी चूत भी पानी छोड़ देती और फिर मुझे भी अपनी गर्म चूत को ठंडा करना करने के लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ता। कभी मेरी उंगलियाँ होती, कभी कोई बाल बनाने वाला ब्रुश, कभी कोई छुपा कर रखी हुई गाजर मूली।</p>
<p>एक बात और थी कि भाभी की मेरी माँ से कभी नहीं बनी। दोनों को जब भी मौका मिलता दोनों आपस में उलझ पड़ती। भाई तो हमेशा भाभी की तरफदारी करता। माँ अकेली पड़ जाती।<br />
मगर मेरी माँ भी कम नहीं थी, उसके आगे भी घर में कोई बोल नहीं पाता था। पूरा रोआब था घर में उसका!<br />
बस यही भाभी थी, जिसने आ कर माँ की सत्ता को चुनौती दी थी।</p>
<p>फिर मेरी भी शादी हो गई, मैं अपने ससुराल आ गई। अब जैसे भाभी की सिसकारियाँ निकलती थी, अब मेरी निकलने लगीं।</p>
<p>समय बीतता गया। एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा धार्मिक स्थल है, जिसकी देखभाल एक मौलवी जी करते हैं। वो अक्सर मोहल्ले भर के घरों में घूम घूम कर चंदा इकट्ठा करते हैं, और उस पैसे से स्थान के काम, रखरखाव करते हैं।</p>
<p>तो वो मौलवी जी हमारे घर भी अक्सर आते हैं और इसी बात का भाभी मुद्दा बनाती हैं। वो पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि मम्मी का न इस मौलवी से कोई टांका है। जब भी वो बुड्ढा आता है। मम्मी उसे बहुत प्यार से चाय बना कर पिलायेंगी, उसकी बड़ी आवभगत करेंगी।</p>
<p>पहले तो यह बात सिर्फ भाभी मेरे को मज़ाक में कहती थी। पर एक बार भाभी और मम्मी की किसी बात पर कहासुनी हो गई, तो भाभी ने खुल्लम खुल्ला ये इल्ज़ाम मम्मी पर लगा दिया कि तेरा उस मौलवी से चक्कर चल रहा है। आज भी बुढ़िया की रंगीन मिजाजी खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मम्मी तो रोने लगी। अब बेटी तो माँ का ही पक्ष लेगी। मेरे दिल में भाभी के लिए बहुत गुस्सा था।</p>
<p>उसके बाद माँ ने मुझे बताया- पता नहीं तेरा भाई इसको कहाँ से पसंद कर लाया। अब एक तो ये अपने उच्च वर्ग होने का हम पर रोआब डालती है, दूसरा सभी घर वालों को जलील करती है, तेरे बारे, मेरे बारे सब के बारे में अनर्गल अनाप शनाप बोलती है। इस कुतिया ने तो जीना हराम कर रखा है।</p>
<p>वैसे तो भाभी मुझे भी कभी कभी कुछ न कुछ सुना देती थी, मगर इस बार तो उसने मेरी माँ के दामन पर छींटे उछले थे। मुझे बहुत बुरा लगा। मेरे दिल में भी आया कि ये जो अपने उच्च वर्ग के होने पर इतना इतराती है, और दूसरे लोगों से इतनी नफरत करती है, अगर इस साल में मैंने इसे किसी विधर्मी से न चुदवाया तो मेरा भी नाम नहीं।</p>
<p>मगर अब ऐसे मैं इसे कैसे किसी ऐरे गैरे के नीचे लेटा दूँ, और वैसे भी कोई आदमी क्यों मेरी बात मानेगा। मगर मुझे इतना जरूर था कि अगर इसने मेरी माँ के दामन को दागदार किया है, तो मैंने भी इसकी शराफत को तार तार नहीं किया, तो मुझे भी चैन नहीं पड़ेगा।</p>
<p>शाम को मैं और मम्मी बाज़ार गई। हमारे मोहल्ले में ही बहुत सारी दुकानें हैं। एक दुकान है, उस्मान पठान की … वो औरतों के सामान की दुकान करते हैं। लिपस्टिक बिंदी पाउडर क्रीम, ब्रा पेंटी ये सब। तो मैं बहुत पहले से उनसे समान लेती हूँ।</p>
<p>वो अक्सर मुझ पर अपनी निगाह रखते, मुझ से कभी कभी मज़ाक भी कर लेते। मतलब ठर्की आदमी।</p>
<p>मगर दिक्कत यह कि एक तो उसका काला रंग, शक्ल कहो तो बदशक्ल … कोई खूबसूरती नहीं पठानों वाली। मगर कद 6 फीट दो इंच, चौड़ा सीना। कद काठी पूरी पठानों वाली थी। रंग रूप छोड़ दो देख कर लगे कि अगर कोई औरत इसके नीचे लेट जाए तो उसकी तो ये माँ चोद कर रख दे।</p>
<p>अब मैं तो बचपन से ही सुंदर हूँ तो जब पहले भी कभी उनकी दुकान से ब्रा पेंटी लेने जाती तो वो मेरी ब्रा और पेंटी पर हाथ फेर कर मुझे देते, जैसे सोच रहे हों, इस ब्रा और पेंटी जिन पर मैं आज हाथ फेर रहा हूँ, कल ये तेरे गोल गोल मम्मो और फुद्दी से लिपटे होंगे।</p>
<p>खैर … ऐसा तो वो सबके साथ करते होंगे।<br />
मगर मुझ पर वो कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थे।</p>
<p>तो जब भाभी ने मेरी माँ पर गंदा इल्ज़ाम लगाया तो मेरी तो गांड जल गई। मैं सोचने लगी कि कुछ ऐसा करूँ कि भाभी कभी भी मेरे सामने सर न उठा सके, ऐसा जलील करूँ कि साली हमेशा के लिए इसकी नज़र नीची हो जाए।<br />
मगर ऐसा क्या करूँ?</p>
<p>एक दिन मैं वैसे ही घर में अकेली थी, बैठी बैठी बोर हो रही थी कि खामख्वाह मेरा हाथ मेरे मम्मों से फिसलते हुये मेरी सलवार में घुस गया।<br />
अब हाथ सलवार में घुसा तो सीधा मेरी फुद्दी पर जा कर रुका, फुद्दी को थोड़ा सहलाया, तो मन बहकने लगा, एक उंगली फुद्दी के अंदर ही घुस गई।</p>
<p>बस फिर क्या था, मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला और लगी उंगली की फुद्दी के अंदर बाहर करने। करते करते सोचने लगी कि आज किस से चुदवाऊँ। तो वैसे ही मन में उस्मान भाई का विचार आया … लंबा चौड़ा, ताकतवर! बस उसको सोच कर मैं हस्तमैथुन करने लगी।</p>
<p>सच में बड़ा मज़ा आया सोच कर के वो कैसी बेदर्दी से मुझे चोद गया। जब मेरी चूत का पानी निकल गया और मैं ठंडी हो कर लेट गई तो वैसे ही ख्याल आया कि अगर ये उस्मान मेरी भाभी की फुद्दी मारे तो एक तो वो जो इन लोगों को नफरत करती है, उसका वो मुंह बंद हो जाए, दूसरा अगर भाभी की चूत मेरे सामने चुदे तो मेरे सामने ज़ुबान खोलने लायक नहीं रहेगी और तीसरा जो उसने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया है, उसका भी बदला मिल जाएगा मुझे।</p>
<p>मगर सबसे बड़ी दिक्कत, उस्मान मेरी भाभी की चूत को क्यों चोदेगा, वो भी मेरे कहने पर। भाभी तो उसे पसंद भी नहीं करती तो फिर वो उसको क्यों पास आने देगी।<br />
बड़ी मुश्किल थी।</p>
<p>फिर दिमाग में एक आइडिया आया कि अगर मैं उस्मान से सेट हो जाऊँ, तो एक तो वो मेरी फुद्दी भी ठंडी करेगा, और अगर मैं उस से कहूँ कि वो मेरी भाभी को पटा ले किसी भी तरह, तो शायद ये बात बन सकती है।<br />
बेशक यह बहुत ही मुश्किल, काम था, अगर भाभी न पटी तो मेरी तो पक्का फटी क्योंकि उस्मान मुझे छोड़ेगा थोड़े, वो तो कहेगा, तुमने कहा, था भाभी को पटा कर चोद दो, वो तो नहीं पटी, पर तू तो आ मेरे नीचे।<br />
मगर कोशिश तो करनी चाहिए।</p>
<p>इस लिए मैंने सबसे पहले उसमान को लाइन देनी शुरू की। मैं अक्सर किसी न किसी छोटे मोटे सामान के बहाने उसकी दुकान पर जाती, वो मुझपे अपनी ठर्क मिटाता और मैं हंस हंस कर उसकी बातों के जवाब देती।</p>
<p>कुछ ही दिन में बात मज़ाक से छूने तक आ गई. वो मेरे हाथ बाजू कंधे को छू लेता, तो मैं ऐसे रिएक्ट करती, जैसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p>तो बस एक दिन हिम्मत करके उस्मान में बातों बातों में मेरे मम्मों को भी छू लिया। छू क्या लिया … ब्रा दिखाते वक़्त उसने ब्रा मेरे मम्मों पर रखी और पूरी फिटिंग करके दिखाई. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।</p>
<p>मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।</p>
<p>मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।</p>
<p>मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.<br />
मैं जान बूझ कर ड्रामा करती रही- रहने दो भाई, कोई देख लेगा, जाने दो, कोई आ जाएगा.</p>
<p>मगर इन कमजोर दलीलों का उस पर क्या असर … उसने दो नींबू की तरह मेरे दोनों मम्मे निचोड़ दिये और मेरी गांड फुद्दी हर जगह हाथ फिरा दिया और बोला- अब सब्र नहीं होता मेरी जान, किसी दिन मिल मुझे तुझे जन्नत की सैर करवाऊँगा।<br />
मुझे पता था कि मुझे चोदने का जुगाड़ कर रहा है ये!</p>
<p>तो मैंने कहा- ऐसे नहीं मुझे आपसे एक और काम भी करवाना है।<br />
वो बोला- क्या काम?<br />
मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि अगर आप मेरी भाभी की चूत को पहले ठोक दो, तो मैं तो आपको फ्री में सब कुछ दे दूँगी.<br />
वो बोला- तेरी भाभी? उससे तेरी क्या दुश्मनी है जो तू उसको मुझसे चुदवाना चाहती है?</p>
<p>मैंने कहा- है बस … आप बोलो आप क्या ये कर सकते हो?<br />
वो बोला- पक्का तो नहीं, पर कोशिश कर सकता हूँ। लगता तो है जैसे उसे भी कुछ चाहिए, मगर अगर वो मान गई तो!<br />
मैंने कहा- वो मान गई तो मैं भी मान गई।<br />
वो बोला- तो अभी के लिए कुछ और भी कर जाओ।<br />
मैंने कहा- और क्या इतना तो नोच लिए मुझे।</p>
<p>उसने अपने पाजामे में अपना लंड हिलाते हुये कहा- इसका कोई इंतजाम कर जाओ।<br />
मैंने दुकान के बाहर देखा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके पाजामे के ऊपर से उसका लंड पकड़ा और दबाने लगी। मोटा सा लंड मेरे थोड़ा सा दबाने से ही खड़ा हो गया। मगर जब मैं छोड़ने लगी, तो उस्मान ने मुझे पकड़ लिया।<br />
मैंने कहा- मुझे जाने दो।<br />
वो बोला- एक मिनट बस।</p>
<p>कहकर उसने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और अपना लंड निकाल कर मेरी तरफ किया और मुझे नीचे को दबाने लगा। मैं समझ गई कि साला लंड के चुप्पे लगवाना चाहता है।<br />
मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और 5-7 बार ज़ोर ज़ोर से चूस लिया और बस फिर तो मैं छोड़ कर भागी।</p>
<p>इससे उसको भी एतबार हो गया कि मैं उससे पट गई, और मुझे भी कि अब ये पक्का मेरी भाभी को पटायेगा।</p>
<p>वक़्त गुज़रता गया, करीब तीन महीने बाद एक बार मैं जब उस्मान की दुकान पर गई, तब वो बोला- सुन … जांघों पर तेल मल ले अपनी!<br />
मैंने पूछा- क्यों?</p>
<p>तो उसने अपने मोबाइल में कुछ पिक्स दिखाई, जिसमें मेरी भाभी उस्मान के साथ किस कर रही थी, उसको बांहों में भर रही थी।<br />
मैंने कहा- उस्मान भाई, बस अब एक काम करो, मेरी भाभी की चूत को मेरे सामने ठोकना, उसके बाद जब कहोगे मैं तुम्हारी।<br />
वो बोला- दिक्कत क्या है, दोनों ननद भाभी को एक साथ ठोक दूँगा, तू बता पहले तू चुदेगी, या तेरी भाभी?<br />
मैंने कहा- पहले भाभी … वो भी मेरे सामने, उसके बाद मैं अपनी पूरी एक रात तुमको दूँगी। उस रात अपनी सुहागरात होगी।</p>
<p>अब एक खूबसूरत नौजवान लड़की किसी को ऐसी पेशकश करे तो भला कौन टाल सकता है।</p>
<p>फिर एक दिन उस्मान ने कहा- कल तेरा भाई बाहर जा रहा है, कल मैं तेरे घर आऊँगा, तेरी भाभी की चूत चोदने! तू बता, तू कल चुदेगी, या बाद में?<br />
मैंने कहा- पूरी रात दूँगी आपको उस्मान भाई, बस मेरी भाभी की माँ बहन एक कर देना, उसको खूब गाली देना, मारना, तड़पाना, जलील करना। बस यही ख़्वाहिश है मेरी!<br />
वो मान गया।</p>
<p>अगले दिन करीब 12 बजे वो आया, तब मैं अपनी माँ के साथ किसी काम से बाज़ार चली गई।<br />
भाभी अकेली थी घर पर!</p>
<p>मगर मैं माँ को उनकी एक सहेली के घर बैठा कर, यह कह कर कि ‘आप बात करो, मैं आधे घंटे में आई।’ वापिस अपने घर आ गई।</p>
<h2>चुद गयी भाभी की चूत</h2>
<p>घर आई तो भाभी के कमरे का दरवाजा बंद था। मतलब उस्मान अंदर था।</p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।</p>
<p>मैंने भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से उस्मान ने ही दरवाजा खोला और मुझे अंदर ही खींच लिया।<br />
मैंने जब अंदर देखा, भाभी बेड पर बैठी थी, शायद बिल्कुल नंगी थी क्योंकि बेड से नीचे मैंने उसकी साड़ी, ब्रा और पेटीकोट गिरा पड़ा देखा, उस्मान भी बिल्कुल नंगा था।<br />
काला बदन, मगर बेहद खतरनाक, जैसे कोई जल्लाद हो, लंबा चौड़ा और भयावह।<br />
और उससे भी खतरनाक उसका लंड, जैसे कोई काला नाग हो।</p>
<p>भाभी मुझे देख कर चौंकी- रूपा … तुम तुम कहाँ से आ गई?<br />
शायद वो मेरे सामने अपना ये राज़ नहीं खोलना चाहती थी।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे चिंता मत कर मेरी जान … तेरे बाद उसकी भोंसड़ी भी लेनी है मुझे।<br />
भाभी थोड़ हैरान हो कर बोली- रूपा तू भी?<br />
मैं मुस्कुरा दी- बस क्या बताऊँ भाभी … पता नहीं इनकी बातों में क्या जादू था, मैं खुद को रोक ही नहीं पाई। और जब इन्होंने आपका बताया तो मैंने कहा कि ‘भाभी बड़ी हैं पहले उसको … फिर मुझको।’</p>
<p>भाभी के चेहरे पर एक विश्वास की चमक आ गई कि अगर मैं इसके सामने नंगी हुई हूँ, तो ये भी तो इस पठान से चुदवाएगी।<br />
मैंने भाभी को विश्वास में लेने के लिए अपनी सलवार उतार दी और सामने सोफ़े पर ही बैठ गई।</p>
<p>उस्मान भाभी के पास गया और उसने भाभी के जिस्म से चादर खींच कर उसे नंगी कर दिया।<br />
क्या शानदार जिस्म की मल्लिका है भाभी मेरी … गोरा, बेदाग चिकना जिस्म।<br />
दो बच्चों की माँ … मगर किसी भी मर्द का ईमान बिगाड़ दे, ऐसी सुंदरता।</p>
<p>मगर अब वो किसी इंसान के सामने नहीं … बल्कि एक वहशी के सामने नंगी लेटी थी।</p>
<p>उस्मान सीधा उसके ऊपर जा कर लेट गया और लेटते ही उसने भाभी की दोनों टाँगें खोली, और अपना काला भुसंड लौड़ा भाभी की गुलाबी फुद्दी में घुसेड़ दिया।</p>
<p>भाभी इस अकस्मात हमले के लिए तैयार नहीं थी, शायद वो उस्मान से पहले कुछ प्रेमालाप की उम्मीद लगाए बैठी थी. मगर जब उसने अपना लंड भाभी की फुद्दी में डाला, भाभी की तो चीख ही निकाल गई- अरे … आह उस्मान भाई धीरे!<br />
मगर उसे तो जैसे कोई जन्नत की हूर मिल गई हो और वो उसे जल्द से जल्द चोद कर अपनी हवस मिटा लेना चाहता था।</p>
<p>बस दो चार घस्सों में ही उसने अपना लौड़ा भाभी की चूत में घुसा दिया। मोटा, लंबा और खुरदुरा लंड लेकर भाभी खुश थी।<br />
“उस्मान तेरा औज़ार तो बहुत तगड़ा है.” वो बोली।<br />
उस्मान बोला- क्यों तेरे खसम का छोटा है क्या?<br />
भाभी बोली- छोटा भी, पतला भी, और कमजोर भी। तू तो बहुत दमदार है रे!</p>
<p>उस्मान के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी। बोला- साली अभी तूने मेरा दम देखा कहाँ है, अभी तो सिर्फ पठान का लौड़ा देखा है, जब मैं अपनी आई पे आऊँगा, तब देखना तेरी माँ न चोद कर रख दी, तो कहना!<br />
और वो भाभी के फुद्दी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.</p>
<p>तो मोटे लंड की रगड़ से भाभी भी मस्ती में आ गई और वो लगी सिसकारियाँ भरने। वही सिसकारियाँ जो वो मेरे भाई के साथ सेक्स करते हुये भरती थी।<br />
और अपने सामने प्रत्यक्ष चुदाई होते देख कर मेरी फुद्दी भी पानी पानी होने लगी और मैंने भी अपनी टाँगें खोल कर उनको देखते हुये अपनी फुद्दी में उंगली करना शुरू कर दिया।</p>
<p>उस्मान मेरी और देख कर बोला- अरे तू क्यों उंगली कर रही है मादरचोद। इधर आ … और देख पठान का लौड़ा, तेरी चूत का भोंसड़ा न बना दूँ तो कहना, इधर आ।</p>
<p>मैं उठ कर उनके पास ही बेड पर बैठ गई तो उस्मान ने मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी जांघें और मेरी फुद्दी नंगी कर दी। मेरी हल्की हल्की झांट पर हाथ फेर कर बोला- अपनी कमीज़ उतार! मैंने अपनी कमीज़ उतार दी, अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी।</p>
<p>उस्मान मेरे मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- क्या मुलायम माल है साली, जैसी माँ मलाई, वैसी बेटी मक्खन!<br />
भाभी तो एकदम से बोली- तो क्या उस्मान … तूने मम्मी जी को भी चोदा है?<br />
शायद वो जानना चाहती थी कि कहीं मेरी मम्मी का कोई कारनामा पता चले ताकि कल को वो उस बात को मेरी माँ के खिलाफ इस्तेमाल कर सके।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे नहीं, मैंने इसकी माँ नहीं चोदी, पर जब भी देखता हूँ, तो सोचता हूँ कि बुढ़िया इस उम्र में इतनी हसीन है, तो जवानी क्या कयामत रही होगी। हाँ अगर मौका मिले तो मैं तो साली बुड्ढी को आज भी चोद दूँ।</p>
<p>मैंने उस्मान से कहा- पहले जिसको चोद रहे हो, उसको तो चोद लो।<br />
उस्मान बोला- अरे ये अब कहाँ जाएगी, आज के बाद अगर ये अपने पति के पास भी चली जाए तो मेरा नाम बादल देना।</p>
<p>भाभी बोली- अच्छाजी, ऐसी क्या बात है तुम में?<br />
उस्मान बोला- तो ले साली छिनाल, अब देख, तेरी चीखें तेरी माँ को न सुना दी तो कहना।</p>
<p>उसके बाद उस्मान ने भाभी की चूत को खूब पेला, इतनी ज़ोर से पेला कि भाभी का चीख चीख कर गला भर आया, उसकी आँखों से आँसू बह निकले- उस्मान, नहीं धीरे धीरे उस्मान, नहीं, उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई मैं मेरी माँ … नहीं उस्मान धीरे … आह … बस रुक कमीने साले … बस आह।</p>
<p>मगर एक कमजोर औरत जिसको हट्टे कट्टे उस्मान ने अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि भाभी तो हिल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ रो रही थी, चीख चिल्ला रही थी।<br />
उस्मान तो सच में बड़ी बेदर्दी से मेरी भाभी को चोद रहा था।<br />
मुझे तो उसे देख कर अपना डर लगने लगा कि जब ये मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरा क्या हाल करेगा। </p>
<p>जितना भाभी चीख रही थी, उस्मान को उतना ही मज़ा आ रहा था और वो भी उसे उतना ही और तकलीफ दे रहा था- चीख, भैन की लौड़ी, तेरी माँ को चोदूँ, साली कुतिया की औलाद, चीख और शोर मचा, साली कैसे रंडी की तरह ड्रामा करती है, किसने सिखाया इस तरह चीखना, तेरी माँ ने या तेरी बहन ने। साली वो भी क्या ऐसी ही रंडियाँ हैं तेरी तरह? बुला उनको भी … यहीं इसी बिस्तर पर तेरे सामने तेरी माँ चोदूँगा, कुतिया, साली … तेरी बहन की भी इसी बिस्तर पर गांड के चीथड़े उड़ा दूँगा। और ये तेरी ननद, इसकी फुद्दी का फूल भी मैं ही खिलाऊँगा।</p>
<p>और पता नहीं क्या क्या उस्मान भाभी को और उसे खानदान की सब औरतों की गालियां देता रहा।</p>
<p>मगर जैसे उसने भाभी को शिकंजे में कस कर उसकी चुदाई कर रहा था, उसे देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।<br />
मैं भी उनके बिल्कुल पास भाभी की चूत चुदाई देख कर अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी। पांच मिनट में मेरी तो फुद्दी पानी छोड़ गई मगर उस्मान नहीं रुका।</p>
<p>भाभी ने भी थोड़ी देर बाद कह दिया- उस्मान भाई, मेरा हो गया, बस तू भी अपना पानी गिरा दे।<br />
मगर उस्मान बोला- अरे रंडी की औलाद, अभी तो मैं शुरू ही किया है, अभी तेरी माँ कहाँ चुदी है, अभी देख तो तेरी फुद्दी अभी भी सफ़ेद पड़ी है, इसे लाल तो होने दे।</p>
<p>कुछ देर और बैठी मैं उसकी चुदाई देखती रही मगर फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।<br />
उस्मान बोला- अरे तू क्यों कपड़े पहनने लगी?<br />
मैंने कहा- मम्मी को लेने जाना है।<br />
वो बोला- अरे यार ये क्या बात हुई? अभी तो इस कुतिया को चोदने में मज़ा आने लगा था।</p>
<p>मगर मैं चली आई। बाद में शायद उस्मान भी चला गया होगा।<br />
जब मैं मम्मी को लेकर घर आई तो घर पर भाभी ही अकेली थी. मगर उसकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उसकी तसल्ली से पिटाई की हो।</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ, आपकी तो बड़ी हालात खराब लग रही है?<br />
वो बोली- अरे पूछा मत, कहाँ पंगा ले लिया मैंने। तेरे जाने के बाद, साले ने मेरी पिटाई भी करी, और मैंने गुस्सा किया, तो साले ने ज़बरदस्ती पीछे गांड में डाल दिया। इतना दर्द हो रहा है न नीचे, क्या बताऊँ।</p>
<p>बेशक मैं भाभी के साथ उसका दुख सांझा कर रही थी, मगर अंदर ही अंदर मैं खुश थी कि साली तूने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया था, देखा उसका नतीजा, गांड फाड़ कर रख दी तेरी।</p>
<p>फिलहाल इतना ही बाकी फिर कभी।<br />
कैसी लगी मेरी भाभी की चूत की चुदाई स्टोरी?<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड <a title="भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.</p>
<p>यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.</p>
<p>भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया. </p>
<p>मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.<br />
मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.</p>
<p>मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.<br />
हम दोनों में बातें होने लगी.</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.</p>
<p>भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.</p>
<p>फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.</p>
<p>हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है. </p>
<p>उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.<br />
मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.</p>
<p>तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.<br />
मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.</p>
<p>फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.</p>
<p>भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.</p>
<p>मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.</p>
<p>तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा. </p>
<p>फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.</p>
<p>लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.</p>
<p>वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.</p>
<p>ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया. </p>
<p>मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.</p>
<p>कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.</p>
<p>फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया. </p>
<p>मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.<br />
उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया. </p>
<p>भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.<br />
धीमी चुदाई शुरू हो गई. </p>
<p>भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था. </p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.<br />
उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.<br />
उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.<br />
भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है. </p>
<p>भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.</p>
<p>भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली. </p>
<p>फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया. </p>
<p>मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.<br />
वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है. </p>
<p>मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.</p>
<p>दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं. </p>
<p>गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.</p>
<p>काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.</p>
<p>मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की. </p>
<p>भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.</p>
<p>उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है. </p>
<p>फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.</p>
<p>मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा. </p>
<p>जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.</p>
<p>सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.</p>
<p>वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.</p>
<p>अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी. </p>
<p>तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी. मुझे आप लोग मैसेज करके बताना ताकि मैं आप लोगों के मैसेज से प्रेरित होकर आगे भी आपके लिए अपनी कहानी लेकर आऊं.<br />
आपका योगू<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/sex-after-delivery/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:47:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Sex Problems]]></category>
		<category><![CDATA[पाठकों के पत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[मुझे एक पाठक का मेल मिला है जिसमें उसने यह जानना चाहा है कि बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें? तो निम्न उत्तर सामान्य जानकारी व बौद्धिक ज्ञान पर आधारित है. मैं कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ नहीं हूँ. अगर आप इस बारे में गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो <a title="बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/sex-after-delivery/" aria-label="Continue reading बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे एक पाठक का मेल मिला है जिसमें उसने यह जानना चाहा है कि बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?</p>
<p>तो निम्न उत्तर सामान्य जानकारी व बौद्धिक ज्ञान पर आधारित है. मैं कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ नहीं हूँ. अगर आप इस बारे में गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से ही संपर्क करें.</p>
<p>इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं दिया जा सकता. इस प्रश्न का उत्तर काफी सारी बातों पर निर्भर करता है.<br />
संक्षेप में कहें तो बेबी होने के पश्चात जब महिला शारीरिक रूप से पूरी तरह से चुस्त तंदरूस्त हो जाये, तभी पति पत्नी को सम्भोग शुरू करना चाहिए.</p>
<p>गर्भावस्था के नौ माह में महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उस पर शारीरिक दबाव भी होता है और मानसिक भी … पहली डिलीवरी के समय तो मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहता है क्योंकि स्त्री प्रसव में होने वाले दर्द से भयभीत रहती है. शारीरिक रूप से भी उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. दो तीन महीने तो उल्टियों वगैरा में ही निकल जाते हैं. उसके बाद पेट का उभार दिखना शुरू हो जाता है, वजन भी बढ़ जाता है. खान पान का भी विशेष ध्यान रखना होता है.</p>
<p>प्रसव होने के बाद यानि बच्चे होने के बाद नारी में स्वाभाविक रूप से कमजोरी आ जाती है और बच्चे के साथ काम भी बढ़ जाता है, जिम्मेदारियां भी … दिन का समय बच्चे की देखभाल, उसकी आवश्यकताएं पूरी करने में निकल जाता है और रात को भी अक्सर जागना पड़ता है इससे नवप्रसूता को आराम नहीं मिल पाता है, नींद पूरी ना होने से वो चिड़चिड़ी होने लगती है. इसलिए सेक्स करने में उतावलापन ना दिखाएँ.</p>
<p>वैसे भी आजकल अधिकतर सीजेरियन विधि द्वारा ही बच्चे का जन्म होता है तो कम से कम तीन महीने तो टांकों पर कोई जोर नहीं पड़ना चाहिए. इसलिए सीजेरियन केस में तो कम से कम तीन महीने सम्भोग से दूर रहना चाहिए.</p>
<p>सामान्य डिलीवरी में भी थोड़ी बहुत चीर फाड़ सामान्य बात है, उसमें भी टाँके लगते हैं तो इस केस में भी तीन महीने का समय कम से कम बिना सेक्स के निकालना अनिवार्य है.<br />
अगर डिलीवरी एकदम सामान्य हुई हो तो भी गर्भाशय में दर्द, योनि का फैला होना, योनि में सूजन, दर्द के कारण प्रसूता स्त्री से सम्भोग करने में उसे तकलीफ होगी. तो बिल्कुल सामान्य अवस्था में भी कम से कम दो महीने तो सेक्स नहीं करना चाहिए.</p>
<p>भारत में तो सामान्य रिवाज है कि प्रसूति के चालीस दिन तक तो स्त्री को पूरा आराम दिया जाता है. वो अपने घर में किसी अन्य स्त्री की देखरेख में होती है. और चालीस दिन बाद वो मायके जाती है तो इस रिवाज से नारी डिलीवरी के बाद सम्भोग से स्वतः दूर रहती है.</p>
<p>डिलीवरी के बाद सम्भोग शुरू करने से पहले महिला रोग विशेषज्ञ यानि गायनी डॉक्टर से जांच करवा के उसकी अनुमति से ही सेक्स करना शुरू करना चाहिए. डॉक्टर से अनुमति लेने के बाद भी जब स्त्री खुद मानसिक रूप से तैयार हो तो ही सेक्स करना चाहिए.</p>
<p>अगर पति कुछ जबरदस्ती करता है तो पत्नी के मन में पति के प्रति वितृष्णा के भाव आ सकते हैं. उसे लगेगा कि पति को उससे नहीं उसके जिस्म से प्यार है. इस लिए सभी पति पत्नी के लिए यह सही राय है कि वे प्रसव के तीन महीने तक संयम बरतें, उसके बाद सब कुछ सामान्य रहने पर ही सेक्स शुरू करें … वो भी सीमित मात्रा में जैसे सप्ताह में एक बार … </p>
<p>डिलीवरी के कुछ माह बाद स्त्री का मासिक धर्म शुरू हो जाता है लेकिन यह अनियमित रहता है इसलिए दोबारा गर्भ धारण से बचने के लिए गर्भ निरोध के साधन इस्तेमाल करने चाहिए. चूंकि बच्चा माँ का दूध पीता है तो दवाई यानि गर्भ निरोधक गोली का प्रयोग मत करें तो बेहतर है.</p>
<p>कंडोम इस समय में सबसे अच्छा उपाय है अनचाहे गर्भ से बचने का.</p>
<p>कई बार प्रसव होने के कई माह तक भी स्त्री के मन में सेक्स करने की इच्छा जागृत नहीं होती तो ऐसी अवस्था में पति को बहुत सहनशीलता, समझदारी से प्यार से अपनी पत्नी के मन में कामवासना जगाने का प्रयास करना चाहिए, उससे जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए.</p>
<p>सेक्स प्रेम प्यार का विषय है, जोर जबरदस्ती, जोश, आवेश, मर्दानगी दिखाने का नहीं!</p>
<p>पति को चाहिए कि वो अपनी पत्नी की परेशानी को समझे. साथ ही पत्नी को भी चाहिए कि वो अपने पति की जरूरत को समझे. आपसी तालमेल से ही पति पत्नी के अद्भुत रिश्ते को निभाना चाहिए. </p>
<p>पाठकों से निवेदन: अगर आप इस विषय पर अपनी राय देना चाहते हैं तो कृपया अपने विचार नीचे डिस्कस कमेंट्स में लिखे.<br />
धन्यवाद.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:33:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamukta]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13272</guid>

					<description><![CDATA[यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है. रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने <a title="भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/" aria-label="Continue reading भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है.</p>
<p>रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने लिए दुकानदार को फोन लगवाकर बल्लू को बुलाया.<br />
वंदना भाभी- हैलो … बल्लू को बुलाएंगे क्या एक बार?<br />
उधर से आवाज आई- आप कौन बोल रही हैं?<br />
वंदना भाभी- बोल देना कि वंदना का फोन है.</p>
<p>दुकानदार ने बल्लू को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा.<br />
लड़के ने कहा- बल्लू सेठ, किसी वंदना का फोन है आपके लिए.</p>
<p>बल्लू ने जो काम था, वो बाजू मे रख कर तुरंत जाकर फोन लिया- हैलो भाभी, बोलो?<br />
वंदना भाभी- बल्लू कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं?</p>
<p>बल्लू- ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं. बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो.<br />
वंदना भाभी- सच्ची बल्लू, मेरे नॉटी बल्लू… गुन्डाराज … मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं</p>
<p>बल्लू- ओह भाभी, तुम भी ना… आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं. लेकिन भाभी तेरा पति भी तो घर पर है. रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है.<br />
वंदना भाभी- बल्लू, मेरे पास एक आइडिया है. आज ये शराब पीने के मूड में है. तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना. मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी. तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना. मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी. </p>
<p>बल्लू- सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा. क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी. मुझे भी भाभी की चूत का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी. आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी. </p>
<p>फोन को रखने के बाद बल्लू ने दुकानदार को देखा.<br />
दुकानदार बोला- क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने बल्लू.<br />
बल्लू- हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती. साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है. कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो न जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है.</p>
<p>दुकानदार- हां बल्लू सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना. इसके पति से बच कर रहना. वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है.<br />
बल्लू- हां, ये बात तो है. चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है.</p>
<p>रात के 11 बजे बल्लू वंदना भाभी के घर पर पहुंच गया और देखा कि वंदना भाभी एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी. भाभी ने बल्लू सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था. उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो. उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था. वंदना का इशारा बल्लू की तरफ था. बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी. भाभी ने बल्लू को आंख मार दी. बल्लू ने बिजली बंद कर दी और भाभी ने बल्लू को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया.</p>
<p>लाइट बंद होते ही वीजू की दारू में भंग पड़ गया. वो उठ कर अपने बेड पर चला गया. पांच मिनट के अंदर ही वीजू के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई. बल्लू भी ताक में था कि कब भाभी का पति वीजू सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा.</p>
<p>जैसे ही बल्लू को पता चला कि वीजू सो चुका है तो पीछे से आकर उसने भाभी को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा. भाभी भी बल्लू की बांहों में आते ही चुदासी हो गई.<br />
भाभी की गांड को छूते ही बल्लू का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और भाभी की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा.</p>
<p>बल्लू ने अपने तने हुए लंड को भाभी की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया. कपड़ों के ऊपर से ही जब बल्लू का लंड भाभी की गांड पर लगा तो भाभी मचल सी गई. उसने पलट कर बल्लू के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. </p>
<p>बल्लू ने भाभी की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया. उसके बाद उसने भाभी को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड भाभी की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर भाभी के मोटे चूचों को दबाने लगा. भाभी के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था. इसलिए भाभी बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी. बल्लू जोर से भाभी के चूचों को दबा रहा था. </p>
<p>उसका लंड अपने पूरे आकार में आ गया था. जब भाभी से रहा न गया तो भाभी ने पीछे हाथ ले जाकर बल्लू के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. भाभी के हाथ में लंड आते ही बल्लू की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो भाभी को बुरी तरह से काटने लगा.</p>
<p>भाभी ने कहा- चलो अंदर चलते हैं. ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला. बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं. </p>
<p>बल्लू ने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया. लेकिन चुदाई की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये. लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है. बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये. </p>
<p>अंदर जाते ही भाभी ने बल्लू की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया. बल्लू का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था. बल्लू ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया. उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो.</p>
<p>फिर भाभी ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर बल्लू की गोद में आकर बैठ गई. बल्लू का तना हुआ लौड़ा भाभी की गांड के नीचे दब गया. गोद में बैठी हुई भाभी के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो. लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी. वो जोर से भाभी के चूचों को पीने में लगा हुआ था भाभी के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे.</p>
<p>बल्लू का लंड भाभी की गांड के नीचे उसकी चूत में जाने के तड़प रहा था. इधर भाभी की गांड भी बल्लू के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी.<br />
फिर बल्लू ही बोल पड़ा- बस भाभी बस … अब और क्यूं तड़पा रही हो. इस पर उछलो ना …<br />
भाभी बोली- आह्ह बल्लू … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो. मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो. मेरी चूत ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है. </p>
<p>फिर भाभी ने अपनी टांगों को फैलाते हुए बल्लू के तने हुए लौड़े पर अपनी चूत को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी चूत में लेते हुए बैठती चली गई. भाभी की गीली चिकनी चूत में बल्लू का लंड उतरने लगा और पूरा का पूरा लंड उतरते ही भाभी और बल्लू के मुंह से एक साथ आह्ह … निकल गई.</p>
<p>लंड पूरा का पूरा चूत में उतर गया था और भाभी अब बल्लू के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी. भाभी ने बल्लू के गले में बांहें डाल दीं और बल्लू के लंड पर उछलना शुरू हो गई. बल्लू ने भाभी के चूचों को मुंह में भर लिया.</p>
<p>“उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म चूत में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं.”<br />
भाभी बोली- स्सस् … मेरे राजा … तुम्हारा लंड मेरी चूत की प्यास और बढ़ा देता है. मैं इसको खा जाऊंगी … आह्ह् … चोदो मुझे मेरे राजा … आह्हह … </p>
<p>दोनों ही मस्ती में सेक्स का मजा लेने लगे. उछलने के कारण भाभी की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं. भाभी की चूत पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह् … आह … कर रही थी. अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है. वो दोनों चुदाई में खोये हुए थे.</p>
<p>लेकिन इसी बीच भाभी का पति वीजू नींद से उठ गया. भाभी की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से आ रही है. साथ में ही वंदना भाभी के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी वीजू ने झट से पहचान ली.</p>
<p>वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा. जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है.</p>
<p>जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो वंदना भाभी और बल्लू की गांड फट गई. दोनों को ही उसके पति ने चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था. वो हक्का-बक्का होकर वीजू को देखते ही रह गये.<br />
उनको अंदाजा नहीं था कि वीजू नींद से जाग भी सकता है. मगर वीजू ने नंगी भाभी को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था.</p>
<p>वीजू बोला- साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है. साली रांड. मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में. वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना. उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया. लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है.</p>
<p>भले ही वीजू ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी बल्लू का लंड वंदना भाभी की चूत में ही था और उसने अपनी मलाई वंदना भाभी की चूत में गिरा दी थी. लेकिन बस वीजू के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे.</p>
<p>वंदना भाभी को भी अहसास हो गया था कि बल्लू का माल चूत में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था. वीजू की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था.<br />
इधर वीजू वंदना को गालियां दे रहा था. साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई. </p>
<p>वंदना भाभी बोली- तो क्या करती मैं? तुम्हारे लंड से मेरी चूत की प्यास नहीं बुझती है. तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो.<br />
वीजू- तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती.<br />
भाभी बोली- मैं तो बल्लू का ही लूंगी. तुमको जो करना है कर लो.</p>
<p>वन्दना भाभी ने बल्लू की तरफ देख कर कहा- तुम रुक क्यों गये. इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है. तुम चुदाई चालू रखो.<br />
बल्लू बोला- लेकिन मेरे लंड का माल चूत में निकल चुका है. </p>
<p>भाभी ने बल्लू के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई. बल्लू भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो वीजू ने लैम्प बल्लू की गांड पर फेंक कर मारा. बल्लू की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया. </p>
<p>उसके बाद वीजू वंदना के कमरे की तरफ गया लेकिन वंदना भाभी ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था. वीजू अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया. </p>
<p>आपको ये भाभी की कामुकता और सेक्स की कहानी कैसी लगी. नीचे दिये गये मेल पर मैसेज करके बताना.<br />
[email protected]</p>
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		<title>साली ने घरवाली का सुख दिया</title>
		<link>https://kahani18.com/sali-sex/sali-gharwali-ka-sukh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:52:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sali Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी <a title="साली ने घरवाली का सुख दिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/sali-sex/sali-gharwali-ka-sukh/" aria-label="Continue reading साली ने घरवाली का सुख दिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।</p>
<p>मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी मेरी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी।</p>
<p>शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया.  क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।<br />
अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था. मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी. सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।</p>
<p>पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था. लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।</p>
<p>एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए … इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।</p>
<p>एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया. बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ. फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं … अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा.</p>
<p>यही सोच कर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।</p>
<p>शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था. उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया. मैंने सोचा था कि उसकी कुँवारी चूत आज ही चोदने को मिल जायेगी लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये।</p>
<p>उस रात को मैंने अपनी साली को सोच कर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली. अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं?<br />
ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!</p>
<p>यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया. मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया.<br />
मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली- जीज्जा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये. आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ।</p>
<p>मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा. उसकी गोल बड़ी बड़ी चुचियाँ और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।<br />
वो बोली- मैं सब्जी लेकर आती हूँ.<br />
और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया.</p>
<p>बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर पोर्च में बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी.</p>
<p>मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं. मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था.<br />
मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं.<br />
लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था।</p>
<p>अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे.<br />
मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरी मौका आते आते हाथ से निकल गया।</p>
<p>उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था. लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।<br />
2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा.</p>
<p>मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी.<br />
मैंने उसको बोला- यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा.</p>
<p>मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी. मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया. लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी.</p>
<p>मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया. अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया.</p>
<p>लंड की चुभन से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा. उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं.</p>
<p>शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था. थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही.<br />
तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई. फिर मैं भी चुपचाप सो गया.</p>
<p>लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपन साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मज़ा ले लेता.<br />
खैर कोई भी कम अपने समय से पहले नहीं होता.</p>
<p>दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है. उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया.</p>
<p>दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया. थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा- जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?<br />
मैंने उसको बोला- मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ. सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।</p>
<p>यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला- इस सबकी वजह मैं हूँ, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।<br />
मैंने उसको समझाया- ऐसा नहीं है.<br />
लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया.</p>
<p>फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा. तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई. पर वो लगातार रो रही थी. मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!</p>
<p>तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला- आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ. अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा. अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।</p>
<p>अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी चुचियों को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी वासना भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी. उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.</p>
<p>मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने मेरे लंड को पैंट के उपर से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था.</p>
<p>तभी मैंने उसके कपड़े उतरने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली- मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!<br />
यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुँवारी चूत मिलने वाली थी.</p>
<p>मैंने उसको समझाते हुए कहा- अरे पगली … शरमाने से काम नहीं चलेगा. प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है. जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है.</p>
<p>धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था.</p>
<p>साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देख कर मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुचियों को चूसना शुरू कर दिया. वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा.</p>
<p>मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था.</p>
<p>और फिर मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला. अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा.</p>
<p>मेरी साली की आँखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी. मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है.<br />
तभी मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.</p>
<p>जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी ज़ीभ लगाई तो वो बहुत ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. मैंने ज़ीभ को चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- आह … जीज्जा … बहुत मज़ा आ रहा है. आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया.</p>
<p>वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.</p>
<p>फिर मैंने बोला- मेरा लंड भी झड़ने वाला है.<br />
तो वो बोली- अपना माल मेरे मुँह में ही गिरा दो.<br />
तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुँह भर गया जिसको वो पी गई।</p>
<p>थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे. फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा. वो भी मुझसे लिपटी हुई थी.</p>
<p>मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा- कैसा लगा?<br />
तो वो मुस्कराते हुए बोली- बहुत मज़ा आया … अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!</p>
<p>तो मैंने पूछा- तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती.<br />
वो बोली- नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं. और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी सीधी बात करे. मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी. इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।</p>
<p>ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा.<br />
तो वो बोली- क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली ज़ीभ से ही काम चलना पड़ेगा?<br />
मैं बोला- ज़रूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ.<br />
वो बोली- कैसे?<br />
तो मैंने कहा- जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागदिन मनाएँगे.</p>
<p>वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली- आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ.<br />
मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी.</p>
<p>मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मानने जा रहा था … वो भी एक कुँवारी कली के साथ।</p>
<p>मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी.</p>
<p>धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोच कर पहले ही खड़ा था. मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछाल गई और बोली- उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूँगी?<br />
मैंने कहा- डरो नहीं मेरे जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाउँगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. वो तो एक बार सब को होता है. लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा।</p>
<p>अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया और उसको अपना लंड चूसने को बोला.</p>
<p>जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला- आओ मेरी जान … अब हम दोनों एक हो जाएँ.<br />
इतना कह कर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया. वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी- जल्दी करो मेरे राजा … अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ.</p>
<p>मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया. जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी. मैंने फ़ौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा. उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया.</p>
<p>जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा. लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा क़ि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.</p>
<p>अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछलने लगी. लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ मेरे राजा!<br />
तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकालने को तैयार हो गया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा- मैं भी झड़ने वाला हूँ अपना माल कहाँ गिरा दूं?<br />
तो वो बोली- आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!</p>
<p>यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई. इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गये कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गये.</p>
<p>शाम को हमारी नींद देर से खुली. उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली- आप भी कपड़े पहन लो. कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी।</p>
<p>मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली- अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ. तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए. लेकिन अब कॉंडोम के बिना नहीं चोदने दूँगी. इसलिए अभी बाज़ार जाकर कॉंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा.</p>
<p>उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाज़ार चला गया.</p>
<p>उस दिन से दोस्तो … मेरी तो दुनिया ही बदल गई. अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा. अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी।</p>
<p>दोस्तो, उम्मीद है कि मेरी ये कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल ज़रूर लिखिएगा.<br />
जल्दी ही मिलेंगे एक नये अनुभव और नई कहानी के साथ!<br />
[email protected]</p>
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