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	<title>Garam Kahani &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>Garam Kahani &#8211; Kahani18</title>
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		<title>बुआ की चुदाई का मज़ा</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:42:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Bua Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में … मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं। मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। <a title="बुआ की चुदाई का मज़ा" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/" aria-label="Continue reading बुआ की चुदाई का मज़ा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में …  मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं।<br />
<span id="more-372"></span></p>
<p>मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। मेरे लंड का साइज 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है। मैं इंजीनियरिंग फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरी एक गर्लफ्रैंड भी है जो बहुत खूबसूरत और हॉट है। उसका फिगर 34-28-36 है। उसे सेक्स बहुत पसंद है, मैंने उसके साथ बहुत बार चुदाई की है।</p>
<p>लेकिन मुझे शुरू से ही बड़ी उम्र की औरतों में ज़्यादा दिलचस्पी थी। आंटी और भाभी मुझे ज़्यादा आकर्षक और उत्तेजित करती थी क्योंकि उनका बदन भरा पूरा रहता था और उनके स्तन और गांड बहुत बड़े होते हैं। किसी हॉट आंटी को देखते ही मेरा लंड सलामी देना शुरू कर देता था।</p>
<p>यह बात है सर्दियों की जब मेरी बुआ मेरे घर पर आई हुई थी। हमारा परिवार बहुत छोटा है जिसमें मेरा भाई, एक बहन और मम्मी पापा हैं।<br />
मेरी बुआ 10 दिन के लिए रहने आयी थी। उनका नाम शालिनी है और उनकी उम्र लगभग 45 साल है। वो कद में नाटी हैं। उनकी हाइट लगभग 5फुट 2 इंच है लेकिन उनका फिगर बहुत मस्त है. उनके स्तनों का साइज 36 इंच है और उनकी गांड लगभग 35 इंच की होगी।</p>
<p>मेरे फूफाजी ज़्यादातर शहर से बाहर ही रहते थे जिसके कारण बुआ को बहुत काम समय दे पाते थे. वो अपने दो बच्चों के साथ रहती थी जिनमें एक बेटा और एक बेटी थी। उनका मन भी पति से दूर रहकर तड़पता होगा। फूफाजी 4 से 5 महीने पर एक बार घर पर आते थे।</p>
<p>जब बुआ हमारे घर रहने आयी हुई थी तब मेरा पूरा परिवार किसी शादी में लखनऊ जाना था. पर मैं नहीं गया क्योंकि बुआ के साथ एक जने का रहना जरूरी था। मैंने कहा कि मैं बुआ के पास रुक जाता हूँ तो सब लोग मुझे और बुआ को घर में छोड़ कर लखनऊ चले गए. उस समय मैं अपने सेमेस्टर एग्जाम ब्रेक में घर आया हुआ था।</p>
<p>मैं अपनी बुआ के साथ बात करने में बहुत फ्रैंक था, मैं उनसे कोई भी बात करने में संकोच नहीं करता था। मैं बुआ को बहुत पसंद करता था और मैं उनके साथ सेक्स करना चाहता था. पर समझ नहीं आ रहा था कि कैसे किया जाए। मैं उनकी मुस्कान पर फिदा था, उनकी मुस्कान बहुत ही खूबसूरत थी, वो जब हँसती थी तो मेरा दिल उनको देख कर और उनके प्यार में पागल हो जाता था।</p>
<p>मेरी आदत थी कि मैं हमेशा घर के बाहर नाले के पास पेशाब किया करता था और वो जगह मेरे घर के छत से साफ दिखती थी.</p>
<p>एक बार मैं वहां मूत रहा था तो बुआ ने छत से मेरा लंड देख लिया था। मेरा लंड 6 इंच का ही है लेकिन है काफी मोटा।</p>
<h2>बुआ की चुदाई की तैयारी</h2>
<p>एक दिन की बात है जब बुआ हमारे घर में नहा रही थी। हमारे घर में एक हैंडपंप है और बुआ को हैंडपंप के पास ही नहाना पसंद था। मैं उस समय अपने कमरे में था और टीवी देख रहा था।<br />
तभी बुआ ने आवाज़ लगाई- राहुल … ज़रा आकर हैंडपंप चला कर बाल्टी भर दे।<br />
तो मैं चला गया और हैंडपंप चलाने लगा.</p>
<p>और उसी समय मेरी नज़र बुआ के गदराये बदन पर पड़ी। हाय क्या बदन था बिल्कुल शीशे जैसा … मैं दंग था कि इस उम्र में भी उन्होंने इतना अपने फिगर को मेन्टेन किया हुआ है। उस वक़्त वो पेटीकोट में थी जिससे उनके स्तनों की चूचियां साफ दिख रही थी और पेटीकोट गीली होने की वजह से उनके गोल गोल गांड भी साफ दिख रही थी।</p>
<p>यह नज़ारा देख कर मैं बेक़ाबू हो रहा था और मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। मैं जैसे तैसे हैंडपंप चला रहा था।</p>
<p>तभी बुआ ने कहा- मेरी पीठ पर साबुन लगा दे.<br />
तो मैं उनकी पीठ पर साबुन लगाने लगा।</p>
<p>शायद बुआ को मेरा मोटा लंड याद आ रहा था और शायद उनका मुझसे चुदाई का मन बन रहा था जिसके लिए वो मुझे उत्तेजित कर रही थी।<br />
क्या मुलायम बदन था बुआ का … जी कर रहा था कि उसी वक़्त उनको चोद दूँ.</p>
<p>पर मैंने किसी तरह कंट्रोल किया। फिर मैंने जाकर बाथरूम में मुठ मारी और फिर उनके साथ खाना खाया और सो गया।</p>
<p>फिर शाम को बुआ ने बताया कि उनके पैर और पीठ में दर्द हो रहा है.<br />
तो मैंने उनसे पूछा- क्या मैं तेल मालिश कर दूं?<br />
तो उन्होंने मना कर दिया. परन्तु मैंने जैसे तैसे करके उनको मना लिया।</p>
<p>मैं सोच रहा था कि इसी बहाने कहीं बुआ की चुदाई करने का मौका मिल जाये तो मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। मैं जाकर तेल गर्म कर के ले आया।<br />
मैंने उनको बोला- आप पेट के बल लेट जाइए!<br />
तो वो लेट गई।</p>
<p>मैंने उनकी साड़ी को घुटनों तक ऊपर कर दिया और मालिश करने लगा। जैसे कि मैंने पहले ही बताया कि मेरी बॉडी एथेलेटिक है और मैं कसरत भी करता था जिसके कारण मैंने उनकी ज़ोरदार मालिश करना शुरू कर दिया।</p>
<p>कुछ देर में बुआ को काफी अच्छा लगने लगा और वो बोली- तू तो बहुत अच्छी मालिश करता है, तेरे हाथ भी बहुत सख्त हैं।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने उनकी साड़ी को उनके कूल्हों तक सड़क दिया और मालिश करने लगा. धीरे धीरे करते हुए मैं ऊपर बढ़ता गया जिससे उनकी लाल पैंटी दिखने लगी जो उन्होंने पहनी थी।<br />
लेकिन उसके आगे बढ़ने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।</p>
<p>पर उसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुआ ने खुद से साड़ी को पीठ तक सरका दिया और बोली- जांघों के ऊपर भी मालिश कर।<br />
मैंने शुरू कर दिया और कुछ देर बाद मैं उनकी जांघों के बीच तेल लगाने लगा।</p>
<p>मुझे उनकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि बुआ आज मुझसे चुदने का मन बना रही हैं। वैसे भी कई दिनों से उनकी चूत की प्यास किसी ने नहीं बुझाई थी, फूफाजी 4 महीनों से घर नहीं आये थे।</p>
<p>मैं तेल लगाने में व्यस्त था, तभी उन्होंने अपने ब्लाउज और ब्रा की हुक खोल दी और कहा- पीठ पर तेल लगा दे।<br />
तो मैं वैसे ही करने लगा।</p>
<p>धीरे धीरे उनका बदन गर्म और मेरा लौड़ा कड़क हो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनको बोल दिया- बुआ, मैं आपको पसंद करता हूं और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं।<br />
इतना कहकर में चुप हो गया और थोड़ा डर भी गया कि शायद वो नाराज़ न हो जायें और ये सब पापा से न बोल दें।</p>
<p>कुछ देर बाद बुआ ने कहा- मैं ये सब इसीलिये कर रही थी कि तुम मुझसे सेक्स करने क़े लिए तैयार हो जाओ।<br />
यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उनको गले से लगा लिया.</p>
<p>उसके बाद मैंने उनको किस करना शुरू किया और अपने होंठ उनके होठों पर रखकर चूसने लगा। वाह … क्या रसीले होंठ थे उनके … मैंने उसको 10 मिनट तक चूसा।</p>
<p>फिर मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा उतारकर दूर फेंक दिया और उनके स्तनों को निहारने लगा, क्या मोटे मोटे स्तन थे।<br />
मुझसे रहा न गया और मैं उनको पागलों की तरह चूसने और चाटने लगा। उनके मुंह से सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गई- आआआ आह आअ आह राहुल … और ज़ोर से चूसो!<br />
तो मैं और कस के उनको दबाने और चूसने लग गया।</p>
<p>उनकी चुचियों के निप्पल फूल कर बेर के आकार के हो गये तो मैं समझ गया कि वो गर्म हो चुकी हैं।</p>
<p>उसके बाद मैंने बुआ की पैंटी उतार दी. अब वो पूरी नंगी थी.<br />
क्या नंगा बदन था उनका … सब कुछ एकदम कड़क।</p>
<p>फिर मैंने अपनी जीन्स और चड्डी उत्तर दी और नंगा हो गया। मेरा लंड फुदकता हुआ बाहर आ गया।<br />
तब मैंने उनको बोला- बुआ मेरा लंड चूसो!<br />
तो उन्होंने चूसना शुरू किया. मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आने लगा.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उनके मुंह से बाहर निकाला और उनकी टांगों को फैलाया जिससे उनकी गुलाबी चूत दिखने लगी। मैंने तुरंत अपनी उंगली उसमें डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।<br />
अब उनकी सांसें ज़ोर ज़ोर से चलने लगी. फिर मैंने उनकी चूत को जीभ से चाटना शुरू किया। अब वो ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें निकालने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… राहुल हां हा हा और ज़ोर से चाट बेटा, अपनी बुआ को आज अपनी रानी बना ले।</p>
<p>कुछ देर तक चाटने के बाद बुआ ने कहा- अब और मत तड़पा और अपना मोटा लंड डाल दे मेरी चूत में। मैं इससे चुदने के सपने कई दिन से देख रही थी जब मैंने तुम्हें पेशाब करते हुए देखा था।</p>
<p>फिर मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और उसके सुपारे को उनकी चूत के ऊपर रख दिया और रगड़ने लगा जिससे वो और तड़पने लगी और बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … बेटा बस अब डाल दे इस मूसल को अपनी रांड बुआ की चूत में और फाड़ दे।</p>
<p>बस फिर क्या था … मैंने हल्का सा झटका लगाया और थोड़ा लंड उनकी चूत में दाखिल हो गया. बुआ की चीख निकल गयी और वो बोली- निकाल इसे बाहर!<br />
पर मैं कहाँ सुनने वाला था, एक जोरदार झटका लगाया मैंने और पूरा लंड बुआ की चूत में समा गया और शुरू हो गयी बुआ की चुदाई.</p>
<p>उनकी आंखों से आंसू निकल गए। बुआ की चुत शादी के इतने साल बाद भी काफी टाइट थी। मैंने अपने लंड को थोड़ी देर वैसे ही रोक के रखा, फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए।<br />
अब उनको भी मज़ा आने लगा था और अपनी गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी थी।</p>
<p>मैंने अपनी चोदन गति बढ़ानी चालू की और उनके मुंह से आवाज़ें आनी शुरू हो गई- राहुल लल … आह बेटे … ऐसे ही ऐसे ही चोदो … अपनी रंडी बना लो मुझे। आज मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ दो इस चूत को। कितने दिनों से मेरी चूत एक लंड के लिए तरस रही थी … आज सब कसर मिटा दे बेटा … आह आह आह आह … तेरे फूफाजी भी कभी ऐसी चुदाई नहीं कर पाते हैं और कुछ देर में ही झड़ जाते हैं। इसलिये आज तक मैंने कभी चुदाई के असली सुख को नहीं भोगा। आज मुझे वो मिल रहा है आह आह आह उफ्फ उफ्फ उफ्फ्फ।</p>
<p>15 मिनट तक मैं बुआ की चुदाई करता रहा, फिर वो झड़ गई. मैंने अपने लंड पर गर्म लावे से कुछ महसूस किया, वो उनका वीर्य था।<br />
पर मैं लगा रहा और कुछ देर औऱ चुदाई करने के बाद मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।</p>
<p>बुआ ने कहा कि मैंने उन्हें संतुष्ट किया है जो वो फूफाजी से कभी नहीं हो पाई।<br />
उसके बाद हमने पेशाब किया और एक दूसरे से चिपक कर सो गए।</p>
<p>उस दिन के बाद हम बुआ भतीजा ने कई बार एक दूसरे की प्यास बुझाई।</p>
<p>प्रिय पाठको, आपको कैसी लगी मेरी बुआ की चुदाई की इन्सेस्ट सेक्स कहानी?<br />
[email protected]</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया? दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत <a title="मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/" aria-label="Continue reading मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया?<br />
<span id="more-362"></span></p>
<p>दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत स्मार्ट भी हूं. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. </p>
<p>यह चुदाई स्टोरी अक्टूबर 2017 की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी. हमारे पड़ोस में एक आमिना नाम की आंटी रहती हैं. ये नाम बदला हुआ है. आमिना आंटी की उम्र लगभग 42 साल के आस पास की रही होगी. उनका फिगर 36-34-36 का होगा. आंटी देखने में बहुत सेक्सी, गर्म लगती थीं. उनके उठे उठे से मोटे चूचे मुझे बहुत आकर्षित करते थे. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.</p>
<p>वे जब भी हमारे घर आतीं या मुझे कोई काम के लिए बुलातीं, तो वह मुझे बहुत प्यार से और हंस कर बात करती थीं. जब वह सेक्सी मूड में होतीं, तो मुझे इधर-उधर हाथ लगा कर मुझसे छेड़खानी करतीं, मेरी जीएफ के बारे में पूछ कर मुझे चिढ़ाती थीं … जबकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. हालांकि मैं भी उनकी बातों के मजे लेता रहता था. मुझे उनके इस तरह के गर्म व्यवहार से मजा ही आता था.</p>
<p>त्यौहार से 3 दिन पहले आंटी घर की सफाई कर रही थीं. उसी दौरान उन्होंने मुझे ऊपर वाले कमरे में सामान उतारने के लिए बुलाया. उस समय उन्होंने लाल रंग का गाउन पहन रखा था, जिसमें उनकी चुचियों की लाइन साफ दिख रही थी. मैं उनकी चूचियों को देख रहा था, जो कि उन्होंने नोटिस कर लिया था. </p>
<p>थोड़ी देर में वह बाथरूम में जाकर एक नीला सूट पहन आईं, जिससे मुझे उनके मोटे चूचे और भी साफ दिखने लग गए थे. उन्हें देख कर मेरा 6.5 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया था. उन्होंने भी मेरे खड़े होते लंड पर अपनी नजर मार ली थी.</p>
<p>हम जिस कमरे में खड़े थे, वहां काफी सामान होने की वजह से जगह बहुत कम थी. आंटी कोई सामान लेने आतीं, तो वह अपनी चूची मेरी छाती से सटाते हुए निकल रही थीं.<br />
हालांकि इस तरह की परिस्थिति में एक तरीका ये होता है कि खुद को बचाते हुए निकलना, भले ही मम्मे रगड़ रहे हों, लेकिन खुद से ऐसा शो करना कि मजबूरी है.</p>
<p>पर आंटी तो जब भी मुझसे सट कर निकलतीं, तो वे और भी जानबूझ कर मेरे सीने से अपने मम्मों को रगड़ने की कोशिश कर रही थीं. इससे मुझे पता चल गया था कि आंटी का मूड आज कुछ अलग है. </p>
<p>मैंने भी आंटी के मम्मों को बातों ही बातों में कभी टच किया, तो कभी हाथ लगा दिया. आंटी भी हंस रही थीं. मैं समझ गया था कि आज लाइन क्लियर है. थोड़ी ही देर यूं ही काम चलता रहा. </p>
<p>आंटी की मोटी गांड देख कर मेरा लंड का बुरा हाल हो गया था. मैं बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने लगता.</p>
<p>आंटी ने कहा- क्या हुआ?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं!<br />
तो आंटी बोलीं- कुछ तो बताओ?<br />
मैंने कहा- नहीं आंटी … कुछ नहीं. </p>
<p>आंटी नीचे झुककर कुछ सामान उठाने लगीं, तो मुझे उनकी चूची का काला निप्पल वाला भाग दिख गया था. फिर उनके उठते ही मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.<br />
उन्होंने कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?<br />
मैंने कहा- आंटी सॉरी … मुझे प्लीज आज ना रोको.<br />
आंटी ने मुझे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मम्मी को बता दूंगी.</p>
<p>उनका बदला हुआ रूप देख कर मैं बहुत ही ज्यादा डर गया और वहां से भाग आया. उस दिन पूरे दिन मेरी फटती रही कि चुदाई स्टोरी तो बनी नहीं … आंटी मम्मी को ना बता दें और मेरी घर पर ठुकाई लग जाए.</p>
<p>फिर शाम तक यूं ही चलता रहा और रात को मैं सोते हुए सोच रहा था कि आज तो बच गया, कुछ नहीं हुआ. </p>
<p>सुबह आंटी ने मुझे वापस ऊपर बुलाया.<br />
मैंने जाते ही उनसे माफी मांग ली- आंटी कल के लिए माफ कर दो.<br />
आंटी ने कहा- कोई बात नहीं.</p>
<p>आंटी आज कल से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं. आंटी ने फिर से हंस कर कहा- आज तू मेरी तरफ नहीं देख रहा है, क्या आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?<br />
मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, आज तो आप बहुत मस्त लग रही हो. कल से भी ज्यादा मस्त लग रही हो.<br />
इस पर उन्होंने कहा- तेरे अंकल को तो यह सब दिखता ही नहीं, तो यह सब किस काम का है.<br />
इस पर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा- आपके पास मैं हूं ना आंटी.</p>
<p>मेरा सहारा पाते ही वह रोने में लग गईं.<br />
मैंने उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.<br />
आंटी बोलीं- अच्छी लगने से क्या होता है … मैं सुंदर नहीं हूं.<br />
फिर मैंने कहा- आंटी आप बहुत सुंदर हो … अपनी गली में नंबर एक पर हो.</p>
<p>आंटी ने मुझसे पूछा- क्या मैं तुझे सेक्सी लगती हूं?<br />
मैंने कहा- हां आंटी बहुत. </p>
<p>उन्होंने मेरी तरफ होंठ बढ़ाए तो मुझे ऐसा लगा कि आज शायद आंटी पहल कर रही हैं, मेरी चुदाई स्टोरी अब बन जायेगी. मैंने भी उनकी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए. आंटी ने आंख दबा दी. फिर मैंने उनको दीवार से लगाया और उनके होंठों पर एक जोरदार से किस कर दिया.</p>
<p>पहले पहल तो उन्होंने थोड़ा बहुत विरोध किया … पर 3 या 4 मिनट बाद विरोध भी बंद कर दिया. अब मैं उनकी चूचियों को सूट के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. </p>
<p>मैंने उनका कमीज उतारने की कोशिश की, तो वो कसा होने के कारण मुझसे नहीं उतरा. आंटी की मोटी चूचियों के कारण सूट काफी टाइट था.</p>
<p>आंटी ने हंस कर बोला- फाड़ेगा क्या … इसे आराम से उतार न.<br />
मैंने झटके से फाड़ दिया, तो वो बोलीं- ले नुकसान कर दिया न मेरा. </p>
<p>फिर मैं उनकी चुचियों को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उनका रंग बहुत ही गोरा था. आंटी की दूध से भी ज्यादा सफ़ेद चुचियों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था. </p>
<p>फिर मैं धीरे-धीरे उनके पेट पर किस करने लगा. जब मैं उनकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा, तो बोलीं- कोई आ जाएगा.<br />
तो मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है और मैं नीचे से आपका दरवाजा बंद करके आया हूं.<br />
आंटी बोलीं- प्लीज यह किसी को मत बताईयो!<br />
मैंने कहा- आंटी आपकी कसम … यह मेरे तक ही रहेगा. </p>
<p>मैंने आंटी का झट से नाड़ा खोला और नीचे देखा, तो उनकी टांगों के बीच में गुफा पर थोड़े से बाल थे, जो भूरे रंग के थे. </p>
<p>उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे कपड़े भी खोल दिए. कुछ देर बाद मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा और उनकी पेंटी भी उतार दी. </p>
<p>फिर मैंने बिना सोचे समझे ही नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. गर्म आंटी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी थीं. उन्होंने जोश में आकर मेरा सर दबा दिया. वे मेरा सर अपनी चूत में पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती थीं.</p>
<p>मेरे लगातार चूत चूसने के कारण उनकी चूत पनिया गयी थी और वो कभी भी पानी छोड़ सकती थीं. मैंने फिर भी चूत को चूसना बंद नहीं किया. </p>
<p>जिन लोगों ने शादीशुदा औरतों की चूत को चाटा होगा, उन्हें पता होगा कि चूत चूसने का अपना एक अलग ही आनन्द है.</p>
<p>लगातार 7 से 8 मिनट तक चूत चुसाई से आंटी एक तेज़ अकड़न के साथ झड़ गयी थीं. उन्होंने ढेर सारे कामरस की नदी बहा दी और थोड़ी देर के लिए शांत पड़ गयी थीं.</p>
<p>फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी पैंट को खोला, तो मेरी चड्डी में मेरे लौड़े ने आतंक मचा रखा था. मेरे लंड को आंटी ने मेरी चड्डी से बाहर निकाल कर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. </p>
<p>गर्म आंटी के मुँह से ‘बाप रे बाप  … इत्ता बड़ा..’ ही निकल सका.<br />
मैंने हंस दिया- आपका ही है आंटी.</p>
<p>उन्होंने मुझसे कहा- क्या करता है? तेरा लंड इतना मोटा कैसे हो गया है? ये मेरे अन्दर जाएगा, तो मेरी पूरी चूत को छील देगा. तेरे अंकल का तो पतला सा है.<br />
यह कहते ही वो जमीन पर बैठ कर मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.</p>
<p>दोस्तो, यकीन करना … वो मेरा पहला अनुभव था. मैं मुश्किल से 2 मिनट में आंटी के मुँह में ही झड़ गया. </p>
<p>उन्होंने ‘छी ..’ की आवाज़ करते हुए मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल दिया और जल्दी से एक कपड़े से साफ करने लगीं.</p>
<p>मुझे खुद पर बहुत शर्म आयी और जब वो मेरी तरफ आईं, तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.<br />
उन्होंने मुझसे कहा- पागल परेशान न हो … तेरा हथियार तो तगड़ा है, पर तेरा पहली बार था, इसलिए जल्दी निकल गया. असली मज़ा तो अब आएगा. </p>
<p>फिर मैं दोबारा से आंटी की चूत चाटने लगा. मुझे आंटी की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.<br />
आंटी मुझसे बोलीं- बेटा, अब और न तड़पा  … जल्दी से इसे मेरे अन्दर डाल कर इसकी सारी गर्मी मिटा दे.<br />
फिर उन्होंने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सैट किया और मुझे अन्दर पेलने को कहा.</p>
<p>मैं उस पल को एहसास को कभी नहीं भूलना चाहता, जब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में उतारा था; मानो मैंने लंड चूत में नहीं किसी गर्म भट्टी में झोंक दिया हो.</p>
<p>जैसे ही मैंने लंड अन्दर किया, आंटी के मुख से एक मीठी सी आह निकली, जिसमें सुकून भरा दर्द था. </p>
<p>मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. अब वो भी अपनी गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थीं.</p>
<p>कोई 5 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो एक तेज़ आह के साथ झड़ चुकी थीं, लेकिन मैंने अपनी रफ्तार कायम रखी … जिससे उनकी चूत के पानी से फच्च फच्च की एक मधुर आवाज हमारी चुदाई में चार चांद लगा रही थी.</p>
<p>लगातार 15 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी रफ्तार से उनकी चूत में ही झड़ गया. मैंने अपनी अपनी आखिरी बूंद भी आंटी की चूत में छोड़ी.</p>
<p>जब मैं उनके ऊपर से हटा, तो मैंने देखा कि मेरे लंड का पानी उनकी चूत से टपक रहा है.<br />
आंटी ने कहा- अभी तुझे बहुत कुछ सिखाना है.</p>
<p>फिर हम दोनों लेट गए. आधा घंटा आराम किया.</p>
<p>लेकिन मेरा मन नहीं भरा था, तो मैंने आंटी को टेबल पर झुकने को कहा. मैंने उनके पीछे से उनकी चूत में लंड डाला और फिर उनको चोदने लगा. कोई 7-8 मिनट तक मैं उनको यूं ही चोदता रहा. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और एक जोरदार धक्का दे मारा. </p>
<p>इससे मेरा 4 इंच लंड अन्दर चला गया और आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं. वो दर्द की अधिकता से मुझसे दूर होने लगीं, पर मैंने अपना जोर उन पर बनाए रखा और उनकी चुचियों को दबाता रहा. </p>
<p>कुछ पल बाद मैंने फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया. अबकी बार मेरा सारा लंड उनकी गांड में चला गया. धकापेल गांड चुदाई होने लगी. आंटी को भी अपनी गांड में लंड का सुकून मिलने लगा था, इसलिए वो भी मजा लेने लगी थीं.</p>
<p>कोई 15 मिनट तक यूं ही मैं ताबड़तोड़ हमले करता रहा और आंटी को भी काफी मजा आने लगा था. उनकी मस्ती भरी आवाजों से मुझे यकीन हो गया था कि आंटी की गांड मजा दे रही है.</p>
<p>आंटी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहह मर गई माँ … आहह.<br />
गर्म आंटी की इस तरह की मदभरी आवाजें निकल रही थीं. मैं उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और भी गर्म हो रही थीं. </p>
<p>इसी बीच उन्होंने अपना एक बारी पानी और छोड़ दिया था. मैं भी कुछ ही देर में निकलने वाला था. दसेक धक्के लगाने के बाद मैंने उनकी गांड में सारा पानी छोड़ दिया. </p>
<p>हम दोनों यूं ही वहां मेज पर लेट गए और किस करने लगे. दस मिनट बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया. </p>
<p>अगले 2 महीने तक मैंने उनकी चूत और गांड बहुत बार मारी. इसके बाद उन्होंने अपना घर यहां से छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट कर लिया था. अब मेरी सिर्फ उनसे फोन पर कभी-कभी बात होती है. </p>
<p>फिलहाल मैं चूत और गांड के लिए बहुत प्यासा हूं. भाइयों मेरा तो यह कहना है कि किसी लड़की को पटाने से अच्छा है, किसी आंटी या भाभी को पटा लो, उनके दोनों छेद बहुत मजा देते हैं.</p>
<p>[email protected] </p>
<p>दोस्तो, आपको गर्म आंटी के साथ मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी मेल जरूर करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:34:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13314</guid>

					<description><![CDATA[इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग खेल वही भूमिका नयी-6 में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था. अब आगे: फिर खाने पीने के साथ नाच <a title="ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/" aria-label="Continue reading ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-6<br />
में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था.<br />
अब आगे:</p>
<p>फिर खाने पीने के साथ नाच गाना होने लगा. सभी धीरे धीरे कामुक महसूस करने लगे और फिर तय हुआ कि जिसे संभोग की इच्छा हो रही हो, वो किसी के साथ भी संभोग कर सकता है.</p>
<p>राजशेखर ने मेरे साथ कभी संभोग नहीं किया था, तो उसने सबसे पहले मुझसे ही पूछा. मैं शुरू में तो थोड़ा शरमाई, पर बाकी औरतों के कहने पर मैंने हां बोल दिया.</p>
<p>पर तभी कांतिलाल बोल पड़ा- ऐसा नहीं होगा … हर कोई हर किसी के साथ मजा करेगा.</p>
<p>तो ये तय हुआ कि हर कोई थोड़ी थोड़ी देर संभोग करेगा, फिर साथियों की बदली होगी. इसलिए सबके नाम की पर्ची बनाई गई और एक कटोरे में सभी मर्दों के नाम की दो दो पर्ची बनाई गईं, क्योंकि मर्द चार थे और औरतें 5 थीं. ऐसा इसलिए भी किया गया ताकि पहले चार महिलाओं के हाथ में जो पर्ची आएगी, वो उन मर्दों के साथ पहले संभोग करेंगी. फिर जब मैं पर्ची उठाऊँगी, तो उन्हीं चारों मर्दों में से किसी एक के साथ संभोग करूँगी.</p>
<p>मतलब जिस मर्द के नाम की पर्ची मेरे हाथ में होगी, वो मेरे और उन चारों औरतों में से किसी एक के साथ संभोग करेगा. </p>
<p>तो इस प्रकार सबने पर्ची उठायी और फिर जोड़ी बन गई. </p>
<p>रमा और कमलनाथ,<br />
रवि और निर्मला,<br />
राजशेखर और कविता …<br />
कांतिलाल और राजेश्वरी की जोड़ी.</p>
<p>अंत में मैंने पर्ची खोली, तो उसमें फिर से रवि का नाम निकला.</p>
<p>सबने एक आखिरी पैग उठाया और फिर अपने अपने जोड़ीदार के साथ हो गए. सभी मर्दों ने मिलकर सोफे वहां से हटा दिए और जमीन पर काफी जगह बना ली. </p>
<p>रवि निर्मला और मेरा हाथ पकड़ नीचे जमीन पर बैठ गया. रवि मेरे और निर्मला के बीच बैठ गया. पहले तो वो मेरे स्तनों को दबाने लगा और फिर मेरे होंठों को चूमने लगा. थोड़ी देर मुझे चूमने के बाद वो निर्मला के स्तन दबाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. निर्मला भी उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी. </p>
<p>उधर मैंने देखा राजशेखर ने थोड़ी देर कविता को चूमने के बाद खड़े खड़े में ही उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैंटी उतार दी और खुद घुटनों के बल खड़े होकर उसकी टांगें फैला उसकी योनि को चूमने लगा.</p>
<p>कविता जवान थी उसकी योनि किसी कुंवारी लड़की के जैसे थी. एकदम गोरी, योनि की फांकें चिपकी हुईं और किनारे फूले हुए … मानो उसने कभी संभोग किया ही नहीं था.</p>
<p>मेरे एक तरफ रमा कमलनाथ के साथ व्यस्त हो गई. दोनों काफी उत्तेजक तरीके से एक दूसरे के बदन को टटोलते हुए होंठों से होंठ मिला कर एक दूसरे का रस पी रहे थे.</p>
<p>फिर सामने की ओर राजेश्वरी को कांतिलाल ने पूरी नंगी कर दिया था और उसे चूम रहा था. राजेश्वरी का बदन बहुत सुंदर था. उसे देखकर लग रहा था कि वो भी रमा की तरह ही बहुत ध्यान देती होगी.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद निर्मला उठी और अपनी पैंटी निकाल कर स्कर्ट ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दीं और अपनी योनि रवि के मुँह में लगा दी. रवि ने निर्मला के विशाल चूतड़ों को दोनों हाथों से थपथपाया और अपना मुँह निर्मला की योनि से चिपका कर उसे चाटने लगा. </p>
<p>ऐसा कामुक माहौल देख कर मेरे भीतर चिंगारी सी फूटने लगी. रवि ने कुछ देर के बाद मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग के ऊपर रखा और मुझे उसे हिलाने का संकेत दिया.</p>
<p>मैंने उसके जांघिये को सरकाया और उसके लिंग को बाहर निकाल लिया. उसका लिंग उत्तेजित था, पर अभी उसमें संभोग करने लायक कड़कपन नहीं था. मैंने उसे हिलाना शुरू किया. कुछ देर के बाद वो एकदम कड़क हो गया. </p>
<p>इधर राजशेखर ने अपनी अवस्था बदल ली थी और अब कविता उसका लिंग चूस रही थी. उधर कमलनाथ जमीन पे लेट गया था और रमा उसके ऊपर उल्टी दिशा में चढ़ी हुई थी. एक तरफ कमलनाथ उसकी योनि चाट रहा था और दूसरी तरफ रमा उसका लिंग चूस रही थी. </p>
<p>कांतिलाल ने तो एक तरफ राजेश्वरी को परेशान करके रख दिया था, वो कभी राजेश्वरी को सीधा लिटा कर योनि चूसता, तो कभी कुतिया की तरह झुका कर पीछे से … तो कभी उसके स्तनों को मसलता. इससे उस कमरे में राजेश्वरी की कराह गूंज रही थीं.</p>
<p>कुछ देर के बाद कांतिलाल ने राजेश्वरी को घुटनों के बल खड़ा कर दिया और खुद खड़ा होकर उसका सिर पकड़ कर अपना लिंग जांघिये से बाहर निकाला और उसके मुँह में ठूंस दिया. फिर तेज़ी से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसके मुँह में लिंग अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>देखने में उसकी ये हरकत बहुत क्रूरतापूर्ण थी, मगर राजेश्वरी को आनन्द आ रहा होगा, तभी वो उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद निर्मला कराहते हुए झटके खाने लगी. मैं समझ गई कि वो झड़ गई. फिर क्या था उसने अपनी योनि को रवि के मुँह से हटाया और नीचे बैठ कर उसका लिंग गप से मुँह में भर लिया. </p>
<p>इतनी उत्तेजक महिला मैंने कभी नहीं देखी थी. निर्मला तो कामोत्तेजना से भरी दिख रही थी. निर्मला जब उसका लिंग चूसने में व्यस्त हो गई, तो रवि ने मुझे हाथों से पकड़ कर उठने का संकेत दिया और इशारे से मुझे खड़े होकर अपनी योनि उसके मुँह में देने को कहा.</p>
<p>मेरे भीतर भी तो अब वासना की चिंगारी भड़क चुकी थी और जब चमड़ी की भूख हो, तो कोई भी इंसान निर्लज्ज हो ही जाता है.</p>
<p>मैं भी निर्लज्जता से खड़ी हो गई और स्कर्ट का हुक खोल कर मैंने अपने मांसल चूतड़ों को आज़ाद कर दिया. मैंने अपनी दोनों मोटी मोटी जांघों को फैलाया और टांगें रवि के अगल-बगल कर अपनी योनि को उसके मुँह के सामने अड़ा दिया.</p>
<p>उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को सहलाया. फिर पैंटी पर मेरी योनि के उभार को चूमने लगा. उसके चूमने से मैं और उत्तेजित होने लगी और मैंने एक हाथ से उसके सिर को सहारा दे दिया. मैंने दूसरे हाथ से अपनी पैंटी एक किनारे कर उसे अपनी योनि के स्पष्ट स्पर्श दे दिया. मेरी फूली गद्देदार योनि की पंखुड़ियों को पाते ही उसने उन्हें बारी बारी चाटा और फिर अपनी जीभ योनि की दरार में ऊपर नीचे करके मेरी योनि का स्वाद लेने लगा.</p>
<p>उसके इस तरह के व्यवहार से मैं और उत्तेजित होती चली गई और अपनी कमर उसकी तरफ धकेलते हुए अपनी योनि का दबाव उसके होंठों पर बढ़ाती चली गई.</p>
<p>मेरे अगल बगल भी बाकी के लोग धीरे धीरे एक दूसरे के अंगों को सहलाते, चूसते, चाटते हुए एक दूसरे को संभोग के लिए तैयार करने लगे थे.</p>
<p>ये किसी विदेशी अंग्रेज़ी फ़िल्म से कम दृश्य नहीं था, जिसमें लोग सामूहिक रूप से संभोग क्रिया में लिप्त थे.</p>
<p>रवि की जुबान में तो जैसे जादू था, जिस प्रकार वो अपनी जुबान से मेरी योनि के साथ खिलवाड़ कर रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि ये पल कभी न खत्म हो. उसने मेरे भीतर एक अजीब सी गुदगुदाहट के साथ कामुकता भर दी थी. इसी वजह से मेरे अगल बगल क्या हो रहा, मुझे उसकी न कोई चिंता थी, न कुछ नजर आ रहा था.</p>
<p>मेरी व्याकुलता इतनी बढ़ गई थी कि मैं रह रह के झटके खा रही थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे पानी का फव्वारा उसके मुँह में ही छोड़ दूंगी.</p>
<p>मैं संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और पल भर में मेरी अपेक्षा पूरी हो गई. निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर थपकी मारी और मुझे रवि के लिंग के ऊपर बैठने बोलने लगी. </p>
<p>निर्मला- सारिका पहले तुम सवारी करो.</p>
<p>उसकी बातें सुन रवि ने मुझे खुद से अलग किया और मेरा हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींचने लगा. उसने अपने लिंग को पकड़ कर हिलाते हुए मुझे बैठने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं उसके कंधों पर दोनों हाथ रखते हुए अपनी टांगें उसके अगल बगल फैला कर उसके लिंग के ऊपर बैठ गई. उसका लिंग ठीक मेरी योनि द्वार पर जाकर अड़ गई. रवि ने अपने लिंग को सही दिशा दिखाते हुए लिंग का सुपारा मेरी योनि द्वार में प्रवेश करा दिया. साथ ही उसने मेरे दोनों चूतड़ों को पकड़ लिया. उसका कठोर लिंग मुझे बहुत गर्म महसूस हो रहा था. </p>
<p>फिर मैंने धीरे धीरे अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करके लिंग को योनि में प्रवेश कराना शुरू किया. कोई 3-4 बार ऊपर नीचे होते ही उसका सम्पूर्ण मोटा और कठोर लिंग मेरी मुलायम योनि की दीवारों को भेदता हुआ मेरे गर्भाशय से टकराने लगा. उसके लिंग से चिकास (precum) और मेरी योनि के गीलापन से आसानी से लिंग गुदगुदाहट करता हुआ भीतर चला गया. एक संतुष्टि की कामना जगाते हुए, आनन्द की शुरूआत हुई, तो मैंने पूरी जिम्मेदारी और कामुकता से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करते हुए संभोग की प्रक्रिया शुरू कर दी.</p>
<p>जब उसका लिंग पूरी तरह से जब मेरी योनि में हिल-मिल गया, तो मैंने अपनी नजरें रवि से मिलाईं. उसकी आंखें मस्ती से भरी हुई थीं और चेहरे पर कामुकता भरी मुस्कान थी. मैं जैसे जैसे धक्के देते जा रही थी, वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे. मैंने उसके गले में हाथ डाल कर थोड़ी और गहराई में जाने लायक धक्के देने शुरू किए, तो वो अपने होंठों को होंठों से भींचता हुआ मुझे चूमने को लपक पड़ा.</p>
<p>उसने अपने दाएं हाथ को मेरे चूतड़ से अलग किया और पीछे से मेरे बालों को पकड़ मेरे सिर को खींच कर मेरे होंठों से हाथ लगा कर चूसने और चूमने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के भीतर अब तेज धार धार तलवार सा महसूस होने लगा था, जिससे मैं और अधिक ताकत और मस्ती में अपनी कमर हिला हिला उसके लिंग को अपनी योनि से मलने लगी थी.</p>
<p>रवि के ऐसे उत्तेजक भाव ने मेरे भीतर वासना की एक नई ऊर्जा भर दी थी और मैं पूरे आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी थी. पीछे से शायद निर्मला रवि के अण्डकोषों से खेल रही थी या उनको सहला रही थी, इसलिए मुझे उसके हाथों का स्पर्श कभी कभी मेरे चूतड़ों पर महसूस हो रहा था. मैं अपनी ही धुन में धक्के मारे जाने से मस्ती में और अधिक खोई जा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट हो गए थे और मेरी सम्भोग की खुमारी सातवें आसमान को छूने को थी. तभी निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर 2-3 थपकी मारते हुए कहा- बस भी करो सारिका … अब मेरी बारी है.</p>
<p>उसकी बातें मेरे कानों में पड़ते ही मेरी रफ्तार और मस्ती दोनों पर रोक लग गई. मुझे हल्का निराशा सी महसूस हुई. लेकिन मैं उन सबकी तरह नहीं थी, सो मैंने मुस्कुराते हुए शर्मीले अंदाज़ में उसके कथन का पालन किया और मैं रवि की गोद से उतर गई. </p>
<p>मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी, इस वजह से जब रवि का लिंग मेरी योनि से बाहर निकल रहा था, तो मेरी अंतरात्मा जैसे कहने लगी कि मत हटो, कुछ पल और रुक जाओ. मुझे ये पल ऐसा लगा, जैसे कोई प्रिय वस्तु मुझसे छीनी जा रही है. पर मुझे न चाहते हुए भी रवि से अलग होना पड़ा. </p>
<p>अब मैं बगल में बैठ कर खुद ही अपनी योनि को हाथ से सहलाने लगी. मेरे अलग होते ही रवि ने निर्मला को धकेलते हुए उसे नीचे जमीन पर गिरा कर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें फैला उसके मोटी मांसल जांघों के बीच झुक गया.</p>
<p>रवि ने झुक कर पहले तो निर्मला के थुल थुले स्तनों को दबोच कर चूसना शुरू कर दिया. वहीं निर्मला ने भी रवि के लिंग को एक हाथ से पकड़ हिलाना शुरू कर दिया. उनका ये खेल बस कुछ पल चला और रवि अपने तनतनाये हुए लिंग को निर्मला की योनि में घुसाने को पुनः तैयार हो गया. निर्मला ने भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे दाएं बांए करके अपनी योनि की स्थिति उसके लिए बना ली. </p>
<p>रवि ने लिंग का सुपारा खोल कर हाथ से पकड़ा और निर्मला की योनि की फांकों पर कुछ देर तक ऊपर से नीचे तक रगड़ा. फिर लाल सुपारा उसकी योनि में फंसा कर हल्के हल्के धकेलना शुरू कर दिया. </p>
<p>इस वक्त निर्मला के चेहरे पर दर्द के भाव दिखने लगे, जब रवि अपना लिंग उसकी योनि में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था. लिंग लगभग आधा चला गया था, फिर भी निर्मला असहज महसूस कर रही थी.</p>
<p>कुछ पल और प्रयास करने के पश्चात निर्मला ने रवि के कमर को पकड़ कर उसे पीछे को धकेला और खुद से अलग कर लिया. </p>
<p>जब रवि का लिंग निर्मला की योनि से बाहर आ गया, तब निर्मला ने अपनी एक हाथ में थूक लिया और अपनी योनि के ऊपर मल कर लिंग वापस अपनी योनि में सुपारे तक घुसाते हुए रवि को आगे बढ़ने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं समझ गई थी कि हम जिस उम्र से गुजर रहे हैं, उस उम्र में योनि में नमी जल्दी नहीं आती है. निर्मला की योनि भीतर से तो गीली थी, मगर ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां शायद सूखी थीं, इसी वजह से उसे तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>रवि जब अपना लिंग धकेल रहा था, तो उसकी योनि में ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां भीतर की ओर खिंची जा रही थीं, जिसकी वजह से निर्मला को तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>खैर … जब रवि ने संकेत समझा … तो धीरे धीरे करके 3-4 बार में अपना लिंग पूरी तरह से निर्मला की योनि में प्रवेश करा दिया.</p>
<p>फिर दोनों ने एक दूसरे को सजह तरीके से पकड़ कर धक्कों की गति को बढ़ाने लगे. कुछ ही पलों में दोनों एक दूसरे को सुख प्रदान करने में रम से गए. अब निर्मला खुले दिल से रवि का साथ दे रही थी और दोनों ही तेज धक्कों के साथ मादक सिसकियां भरने लगे थे.</p>
<p>दूसरी तरफ बाकी लोग भी संभोग में लिप्त हो चुके थे. एक तरफ कमलनाथ के ऊपर रमा सवारी कर रही थी, तो दूसरी तरफ कांतिलाल राजेश्वरी को घोड़ी बना कर पीछे से धक्के मार रहा था. उधर राजशेखर कविता की एक टांग उठा सोफे पर टिका कर सामने से खड़े खड़े ही धक्के दे रहा था.</p>
<p>सबकी कामुक अवस्था देख मेरी उत्तेजना जरा भी कम नहीं हो रही थी, जबकि मैं फिलहाल अकेली थी.</p>
<p>उन सबको देख कर और कमरे में गूंजती सिसकारियां मेरे हाथों को स्वयं मेरी योनि तक ले जा रहे थे.</p>
<p>कुछ देर के बाद कविता ने असहजता दिखानी शुरू कर दी, क्योंकि उस अवस्था में संभोग कर पाना सबके लिए सरल नहीं होता है.</p>
<p>मैं जहां तक अपने अनुभव से जानती हूं कि इस तरह के आसन में मर्दों को ज्यादा आनन्द आता है … क्योंकि लिंग का ऊपरी हिस्सा योनि के अन्दर सीधे जाता है, जबकि योनि का रास्ता पेट की तरफ होता है. इस वजह से लिंग के ऊपरी हिस्से में योनि कठोर तरीके से रगड़ खाती है, जिससे मर्दों को अधिक आनन्द आता है. वहीं स्त्रियों को आनन्द तो आता है, मगर अधिक समय के घर्षण से पीड़ा होनी शुरू हो जाती है. हालांकि अति उत्तेजना की अवस्था में महिलाएं ये पीड़ा भी झेल लेती हैं.</p>
<p>कविता के आग्रह पर राजशेखर ने कविता की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल लिया और उसे सोफे पर थोड़ा आराम करने दिया. राजशेखर वहीं खड़े खड़े अपने लिंग को हाथ से सहला रहा था कि उसकी नजर मुझ पर पड़ी.</p>
<p>मुझे खाली देख कर वो मुस्कुराते हुए मेरे पास चला आया. उसे मुझसे किसी तरह के विरोध की आशा नहीं थी. क्योंकि ये पहले से तय था. मैं भी इस बात से परिचित थी, सो मैंने भी किसी तरह का विरोध भाव नहीं दिखाया. जैसा कि मैं खुद ही गरम थी, तो मन में भी किसी तरह के विरोध की बात भी नहीं आई.</p>
<p>वो सीधा मेरे पास आकर मेरे सामने बैठ गया और मेरी टांगें पकड़ अपने दोनों तरफ फैलाते हुए मेरे बीच में आ गया. उसने मेरे स्तनों को दबाया और फिर अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आया.</p>
<p>मैंने भी बिना संकोच के अपने होंठ उसके होंठों से लगा कर चुम्बन करना शुरू कर दिया. वो मुझे चूमते हुए धीरे धीरे धकेलने लगा और ठीक मुझे जमीन पर गिराते हुए वो मेरे ऊपर आ गया.</p>
<p>मेरे भीतर वासना की आग तेजी से धधक रही थी और मैं भी उसे अपनी ओर ऐसे खींच रही थी, मानो उसे अपने भीतर छुपा लूंगी. </p>
<p>जिस तरह से वो मेरी जुबान को चूस रहा था और मेरे स्तनों को मसल रहा था, उससे लग रहा था … मानो अब वो झड़ जाएगा. पर यहां हर मर्द इतना तो अनुभवी था ही कि अपनी उत्तेजना को काबू में कर ले.</p>
<p>धीरे धीरे राजशेखर मेरे होंठों को छोड़ कर मेरे स्तनों को चूसने लगा. मेरे दूध का घूंट पीते ही उसमें ताजगी सी दिखने लगी. वो एक हाथ से मेरी एक स्तन को मसलते हुए मेरे दूसरे स्तन का पान करने लगा. </p>
<p>थोड़ी ही देर के बाद वो मेरी योनि तक पहुंच गया और मेरी योनि को चूमने और चाटने लगा.</p>
<p>उधर कविता खुद कांतिलाल के पास गई और उसे राजेश्वरी से अलग होने को कहा. राजेश्वरी भी बहुत अधिक गर्म थी, सो वो ज्यादा देर अलग होकर न रह सकी. जब तक कांतिलाल और कविता ने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू किया, वो कमलनाथ के पास चली गई. कमलनाथ ने भी रमा को धक्के मारना बन्द किया और राजेश्वरी को अपनी गोद में बिठा लिया.</p>
<p>इधर राजशेखर ने जी भरकर मेरी योनि चाटने के बाद मुझे उठाया और मुझे कुतिया की तरह झुक जाने का इशारा किया. मैं उसके निर्देशानुसार कुतिया की तरह झुक गई और मैंने अपना सिर जमीन पर रख अपने चूतड़ों को पूरा उठा दिया.</p>
<p>राजशेखर ने पीछे आकर अपना लिंग एक बार में ही मेरी योनि की गहराई में उतार दिया. उसका लिंग मुझे बहुत ही कड़क महसूस हुआ. उसके लिंग पर नसें एकदम सख्त लग रही थीं और सुपारा आग की तरह गर्म था.</p>
<p>करीबन 7 इंच लंबा और मोटाई 3 इंच लिंग की वजह से जब उसने धक्का मारना शुरू किया, तो मस्ती मैं में कसमसाने लगी. </p>
<p>मैं अभी इतना तो अंदाज लगा सकती थी कि मेरे साथ उसे भी काफी मजा आ रहा था. उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी योनि में आ जा रहा था और मुझे कराहने पर विवश करे दे रहा था.</p>
<p>वो कभी मेरे ऊपर पूरा झुक मेरे स्तनों को दबाते हुए धक्का मारता, तो कभी मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को दबाते सहलाते मजा लेने लगता.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे हम दोनों में जोश भी बढ़ता जा रहा था. मैं अब अपने कानों में उसके हांफने की आवाज सुन सकती थी.</p>
<p>करीब 10 मिनट उसने मुझे यूँ ही बिना रुके धक्के मारे और फिर वो रुक गया. कुछ पल के लिए उसने अपना लिंग पूरी तरह मेरी योनि की गहराई में दबा दिया और सांस लेने लगा. इसके बाद उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मुझसे अलग हो गया.</p>
<p>मेरी ग्रुप सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-8</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेरी बहन की चुदाई की कहानी</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:15:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13318</guid>

					<description><![CDATA[यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने? दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने <a title="मेरी बहन की चुदाई की कहानी" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/" aria-label="Continue reading मेरी बहन की चुदाई की कहानी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने?<br />
<span id="more-340"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने में सांवली है. उसकी हाईट ज्यादा तो नहीं है पर उसके मम्मे बड़े बड़े हैं. उसके मम्मों को देख कर मैं खुद रोज उसके नाम की मुठ मारता हूँ.</p>
<p>अंतरा के एग्जाम चल रहे थे तो उसे परीक्षा दिलवाने लेकर मुझे जाना था. कुल 7 दिनों के एग्जाम थे और परीक्षा केंद्र घर से दूर होने के कारण हम लोगों ने वहीं एक रूम किराये पर ले लिया था. </p>
<p>रूम में पलंग आदि नहीं था, नीचे ही सोने की व्यवस्था थी. रूम के बगल वाले रूम में भी 4 लोग एग्जाम देने आए हुए थे. वे चारों 20-21 साल के ही रहे होंगे. </p>
<p>पहला दिन का एग्जाम हो गया और उसी शाम तक उन चारों लड़कों से मेरी दोस्ती हो गई. चारों लड़कों ने कोई सैटिंग की हुई थी, जिसके कारण उनको एग्जाम में आने वाले प्रश्न उत्तर पहले ही मिल जाते थे. वो सब अपने एग्जाम सही करके आते थे. </p>
<p>दूसरा दिन भी निकल गया. शाम को उन चारों में से एक ने बताया कि मैं आपको प्रश्न और उत्तर दे दूंगा. </p>
<p>ये सुन कर मेरी उन लोगों से और भी अच्छी दोस्ती हो गई. वो मुझे भैया बुलाते थे और अंतरा को नाम से बुलाते थे. </p>
<p>अंतरा उन सबमें छोटी थी और अब उन चारों लड़कों के साथ घुल मिल गई थी. शाम को चारों बैठ कर अंतरा के साथ पढ़ते थे. </p>
<p>आखिरी एग्जाम से एक दिन पहले की बात है. उस दिन रविवार था, इसलिए छुट्टी थी. सब लोग घर पर ही थे. वे चारों मेरे रूम में आकर अंतरा के साथ पढ़ाई करने लगे.</p>
<p>उन लोगों को पढ़ता देख कर मैं अंतरा को बोल कर निकल गया कि मैं मूवी देखने जा रहा हूँ. बस 3 से 4 घंटे में आ जाऊंगा. तुम पढ़ाई करके आराम कर लेना.<br />
यह कह कर मैं चला गया. पर मुझे टिकट नहीं मिली और मैं कमरे के लिए वापस निकल आया.</p>
<p>जब मैं कमरे पर वापस आया, तो घर का दरवाजा बाहर से बंद था. मैं अन्दर गया, तो अंतरा नहीं थी. मैंने सोचा बाथरूम गई होगी या पढ़ने गई होगी. </p>
<p>मैं आराम करने लगा. जब 15-20 मिनट हो गए, अंतरा नहीं आई तो मैं समझ गया कि उन लड़कों के साथ पढ़ाई कर रही होगी. मैं उठकर अंतरा को देखने चला गया. </p>
<p>जब मैं लड़कों के पास गया, तो दरवाजा अन्दर से बंद था, मुझे शक हुआ और मैं अन्दर झांकने की कोशिश करने लगा. पर मुझे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था. </p>
<p>तब मुझे याद आया कि बाथरूम से उनका रूम नजर आता है. मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और बाथरूम के एक छेद से अन्दर देखने लगा. उस छेद से सब कुछ साफ नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम का वो छेद थोड़ा बड़ा था.</p>
<p>जब मैंने अन्दर देखा तो सामने बेड था. बेड पर तीन लड़के पूरी तरह नंगे बैठे थे और अपने अपने लंड सहला रहे थे, पर अंतरा कहीं नजर नहीं आ रही थी. </p>
<p>मैं मोबाइल से उनकी रिकॉर्डिंग करने लगा. तभी मेरी नजर लड़कों पर पड़ी, जो एक तरफ देखे जा रहे थे. मैंने भी उसी तरफ देखा, तो मैं दंग रह गया. </p>
<p>मेरी अपनी सगी बहन अंतरा पूरी नंगी थी और टेबल पर अपनी बुर चुदाई करवा रही थी. जो लड़का अंतरा को चोद रहा था, उसका नाम सोनू था. वो अंतरा की चूची को अपने मुँह में रख कर एक बच्चे की तरह चूस रहा था. वो एक चूचे को चूस रहा था और एक हाथ से उसके दूसरे चूचे को दबाने में लगा था. उसने अंतरा का एक दूध अपने मुँह में पूरा भर लिया था और जबरदस्त तरीके से चुसाई करने में लगा था.</p>
<p>तभी मैंने देखा कि वो अपने दूसरे हाथ को अंतरा की चूत पर ले गया और अपनी उंगली उसकी बुर में घुसा दी. उस लड़के की उंगली गीली हो गई. उसने अपनी उंगली को निकाल कर देखा कि मेरी बहन खुद ही चुदाई को उतावली हो रही थी.</p>
<p>फिर मैंने देखा कि अंतरा ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं. सोनू ने अंतरा की बुर के दाने को मसलना चालू कर दिया. अंतरा के मुँह से मस्त सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>लड़के ने उसे उल्टी तरफ घुमा कर उसे घुटनों के बल पर कर दिया, वो अंतरा को डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. उसने अपने तने हुए लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख कर सुपारे से उसकी बुर के दाने को रगड़ने लगा. </p>
<p>अंतरा के मुँह से जोरदार सिसकरियां निकल रही थीं. तभी सोनू ने अपने मूसल जैसे लंड को हल्का सा धक्का दिया, तो उसके लंड का सुपारा भीतर चला गया. </p>
<p>अंतरा के मुँह से ज़ोर से मतवाली सिसकारी छूटी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. सोनू का लंड धीरे धीरे अंतरा की बुर में एकदम भीतर घुस गया.</p>
<p>मुझे अपनी बहन की चुदाई और उसके मजे लेने पर बहुत गुस्सा आ रहा था. अंतरा के मुँह से दर्द और काम से मिश्रित कराह निकल रही थी. थोड़ी ही देर बाद वो खुद अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>दूसरे लड़के भी चुप नहीं बैठे थे, वो भी मैदान में कूदने को तैयार थे. एक ने लंड को अंतरा के मुँह के पास जाकर उससे लंड को मुँह में लेकर चूसने को कहा. अंतरा फट से उसके लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी. उधर सोनू अब फकफ़ाक धक्के लगाते हुए झड़ने को हो रहा था. उसके लंड के गोटे सीधे अंतरा के चूतड़ों पर जा कर ढोलक की तरह ठाप लगा रहे थे. </p>
<p>मेरी बहन के मुँह से जोरदार सीत्कार निकल रही थी, जैसे उस की लंड से चुदाई में मस्त सीटियां बज रही हों. सोनू अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर से धकेलता था, जिससे अंतरा की चीख निकल जाती थी. </p>
<p>इधर अपनी सगी बहन की चुदाई देख कर मेरा मन कर रहा था कि मैं भी अभी अंतरा को चोद दूँ. आगे अंतरा के मुँह में एक लंड से पूरा भरा हुआ था. </p>
<p>तभी सोनू ने आगे हाथ बढ़ा कर अंतरा के मम्मों को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. एकाएक सोनू के धक्कों की रफ्तार बहुत तेज हो गई और उसने अंतरा की चुत में ज़ोर से अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी. </p>
<p>अंतरा की आंखें मस्ती से मुंद गई थीं. सोनू ने अंतरा चुत को चाट कर साफ कर दिया. </p>
<p>अब तीसरा लड़का आकाश, जिसका लंड का सर आसमान पर उठा हुआ था, वो आया और अंतरा की चुत में लंड घुसाने लगा. </p>
<p>उसने अपने लंड को अंतरा की चूत के दरवाजे पर रखा और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. उसका लंड पूरा का पूरा अंतरा की चुत की जड़ में समा गया.</p>
<p>अंतरा ज़ोर ज़ोर से आनन्द से सिसकरियां भर रही थी. </p>
<p>अब उस लड़के का सुनो, जिसका लंड अंतरा चूस रही थी, उसके मुँह से एकाएक आह की आवाज निकली और उसने अपना गाढ़ा सफेद वीर्य अंतरा के मुँह में छोड़ दिया. अंतरा लंड से निकले वीर्य को स्वाद लेकर पीने लगी. फिर भी कुछ माल उसके मुँह से बाहर आकर उसके गालों पर बहने लगा. </p>
<p>मुझे समझ आ गया कि मेरी बहन पक्की चुदक्कड़ है.</p>
<p>उस लंड चुसाने वाले लड़के के हटते ही चौथा लड़का मुन्ना, जिसका लंड सबसे बड़ा था, वो आ गया. उसने तीसरे लड़के की जगह ले ली और अंतरा उसके लंड को चूसने लगी.</p>
<p>अब जो लड़का आकाश अंतरा को चोद रहा था, वो पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था. उसने अंतरा के गोल गोल चूतड़ों को अपनी मुट्ठी में भर रखे थे. वो पूरी ताकत और वेग से चूत में धक्के लगा रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद वो भी झड़ गया और अंतरा की चूत पूरी वीर्य की झील हो गई. </p>
<p>चौथे लड़के मुन्ना ने अंतरा के मुँह को आज़ाद कर दिया. उसने अंतरा को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया. उसकी टांगें अपने कंधे पर रखीं और फ्रंट फॉर्वर्ड पोज़िशन में लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख दिया. इसके बाद उसने एक बड़े ही ज़ोर का धक्का दे मारा. उसका मूसल किस्म का लंड पहले झटके में ही आधे से ज्यादा चूत के भीतर चला गया.</p>
<p>अंतरा की एक तेज चीख निकल गई. लेकिन तीन लंड खाने के बाद अंतरा की चूत खुल गई थी. इसलिए अंतरा ने भी अगले ही अपने हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर नीचे से एक जोर का जबावी धक्का लगा दिया. इस धक्के से लड़के का बाकी लंड भी एकदम जड़ तक समा गया.</p>
<p>फिर उस मुन्ना नाम के लड़के ने अपने दोनों हाथ अंतरा के चूतड़ों के नीचे ले जा कर उनको तकिया जैसा सहारा दे दिया और ज़ोर ज़ोर उसकी चुत का बाजा बजाना शुरू कर दिया. </p>
<p>अंतरा चुदाई के आनन्द के मारे पागल हो गई और अजीब अजीब सी आवाजें उसके मुँह से निकलने लगी थीं. </p>
<p>मुन्ना ने अंतरा को चोदने में पूरा 30 मिनट का टाइम लिया. फिर वो भी आख़िर ‘आह आह..’ करते हुए उसके ऊपर ढेर हो गया. उसने अपने लंड का ढेर सारा गाड़ा वीर्य एक पिचकारी के रूप में अंतरा की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>अंतरा इस दौरान कई बार अपना पानी निकाल चुकी थी. उसे सबके लंड और चूस करके साफ़ करना पड़ा. सब लड़कों ने भी अंतरा की चुत को चाट कर साफ कर दिया. इसी बीच अंतरा फिर से गर्म होकर झड़ भी गई. </p>
<p>मैंने ये सब अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया था. जब मेरी बहन की चुदाई पूरी हो गई, तो मैं वहां से निकल गया. </p>
<p>एक घंटे बाद जब मैं वापस आया, तो अंतरा अपने रूम में बैठ कर पढ़ रही थी. मैंने अंतरा को कुछ नहीं बोला. </p>
<p>रात को मैंने उसे वीडियो दिखा दिया, वो एकदम से डर गई. वो बोली- भैया माफ कर दो.. अब ऐसा नहीं होगा.<br />
मैं- एक शर्त पर माफ कर दूंगा.. तुम्हें मुझसे चुदना होगा.</p>
<p>वो शर्मा गई. मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया.<br />
वो बोली- मैं तो आपसे न जाने कबसे चुदने के लिए मरी जा रही थी.<br />
मैंने पूछा- क्यों?<br />
वो बोली- मैंने आपका लंड देखा है, ये बहुत बड़ा है.<br />
मैंने कहा- तो फिर कभी बोला क्यों नहीं?<br />
वो बोली- मैं शर्म रही थी कि कहीं आप नाराज न हो जाओ.</p>
<p>मैंने कहा- मेरी प्यारी बहन की चुदाई कब से चल रही है?<br />
वो बोली- आज दूसरी बार किया है.<br />
मैंने पूछा- पहली बार किसके साथ किया था.<br />
वो बोली- अब इस सवाल का जबाव बहुत लम्बा है, आपको बाद में सब बता दूंगी.</p>
<p>उसने अपनी सील टूटने का किस्सा मुझे बाद में बताने का वायदा किया. मैं अपनी बहन की सील टूटने की चुदाई की कहानी को आप तक जरूर भेजूँगा.</p>
<h2>मेरी बहन की चुदाई की मैंने</h2>
<p>उसने कहा- अब देर न करो भैया. मुझे बड़ी जोर से मस्ती चढ़ रही है.</p>
<p>मैंने अंतरा की चूत को सहलाया और अपनी बहन को नंगी करके चित लिटा दिया. फिर मैंने अपना लौड़ा निकाल कर अंतरा की चूत में घुसाने की कोशिश की.</p>
<p>लेकिन मेरा लंड उन चारों लौंडों से कम से कम दो इंच लम्बा था और मोटा भी बहुत ज्यादा था. इसलिए मेरा थोड़ा सा ही लंड अन्दर गया था. अंतरा को उससे दर्द तो हुआ, लेकिन वो चूंकि दिन में चुद चुकी थी, इसलिए उसने ज्यादा चिल्लपों नहीं की. मगर मुझे उसकी कसी हुई चूत में लंड पेलने से दर्द होने लगा था.</p>
<p>तब भी मैं किसी तरह से अंतरा की चूत में लौड़ा घुसाने लगा और कामयाब भी हो गया. अंतरा ने भी लंड लेने में मेरी मदद की. उसको खुद ही मेरा लंड लेने में मजा आ रहा था. मैंने अपनी बहन की चूचियां दबाईं और उसके होंठ भी चूसे. </p>
<p>उसके बाद मैं पूरा लंड पेल कर अपनी बहन अंतरा की झटके देते हुए चुदाई करने लगा. अंतरा की चूत अभी भी काफी टाइट थी. बाद में मैंने अंतरा की चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया था. मैं अपना लंड अंतरा की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मुझसे चुदने का खूब मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं अंतरा की चूचियां दबाने लगा, वो भी मुझे चूमने लगी. फिर मैं अपना सुपारा अंतरा की चूत तक बाहर निकाल कर जोर जोर से उसको पेलने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर अंतरा को चूसने को बोला. अंतरा ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी.</p>
<p>अंतरा के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया. कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था. मैंने बिना अंतरा को बताए ही उसके मुँह में ही रस को निकाल दिया. अंतरा भी उसको जूस की तरह पी गई.</p>
<p>फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे. कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे.</p>
<p>अब अंतरा ने कहा- अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी पूरी आग बुझा दो.</p>
<p>मैंने अपना लंड अंतरा की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. मेरा लंड अंतरा की चूत में पूरा अन्दर तक चला गया. </p>
<p>अंतरा जोर से चिल्ला उठी- आऊ.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह. </p>
<p>मैंने अंतरा को बहुत जोर से जकड़ लिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. अंतरा जब चुप सी हुई.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.</p>
<p>अंतरा और जोर से चिल्लाने लगी, मैंने उसकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और अंतरा के होंठों को किस करने लगा. होंठों को दबाने से अंतरा की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई. </p>
<p>उस दिन मैं अंतरा को बीस मिनट तक चोदता रहा. इस दौरान अंतरा दो बार झड़ चुकी थी. फिर मैंने अपना सारा रस अंतरा की चूत में ही छोड़ दिया.</p>
<p>मेरी बहन को अपने भाई के साथ चुदाई में बहुत मजा आया. हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे. हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला. </p>
<p>मुझे अंतरा को और चोदने का मन था, पर इस वक्त हमारी बहन की चुदाई बीच में ही छूट गयी पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा. </p>
<p>दूसरी बार में अंतरा बिना कपड़ों के थी क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था. मैं भी अपने कपड़े खोल कर अंतरा की चुदाई के लिए रेडी था. अंतरा ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया. </p>
<p>उस रात को हमने पूरी रात में तीन बार बहन की चुदाई का मजा लिया. फिर अंतरा ने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>आज अंतरा तो इतनी ज्यादा खुश थी कि वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी. ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा.</p>
<p>इसके बाद बहन की चुदाई का कार्यक्रम आज तक चल रहा है. मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अंतरा की चूत को शांत जरूर कर देता हूँ. जब भी अंतरा अपनी चूत की खुजली से ज्यादा परेशान हो उठती है.. तो मैं उसे कहीं बाहर ले जाकर उसकी चूत चोद कर उसे शांत कर देता हूँ.</p>
<p>आप मुझे मेरी बहन की चुदाई की कहानी पर अपने मेल जरूर भेजें.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/step-mom-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13300</guid>

					<description><![CDATA[मैंने अपनी सेक्स की शुरूआत अपनी स्टेप मॉम की चुदाई आज से दस साल पहले करके की थी. नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम कुणाल है. मेरी उम्र तीस साल की है. अब तक मैं 130 लड़कियां 65 भाभियाँ, 60 आंटियां, 52 बार अपनी मॉम को चोद चुका हूं. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. चलिए दोस्तो, <a title="स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/step-mom-ki-chudai/" aria-label="Continue reading स्टेप मॉम की चुदाई से किया सेक्स सफर शुरू">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी सेक्स की शुरूआत अपनी स्टेप मॉम की चुदाई आज से दस साल पहले करके की थी. </p>
<p>नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम कुणाल है. मेरी उम्र तीस साल की है. अब तक मैं 130 लड़कियां 65 भाभियाँ, 60 आंटियां, 52 बार अपनी मॉम को चोद चुका हूं. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.</p>
<p>चलिए दोस्तो, पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बताता हूं. मेरे परिवार में मेरी मॉम, मेरा बड़ा भाई और पापा रहते हैं. मेरी ये वाली मॉम मेरे पापा की दूसरी शादी से हैं. बहुत सुंदर और सेक्सी हैं. उनके लंबे और काले बाल हैं और उनके स्तन काफी बड़े हो गए हैं. </p>
<p>मेरी मॉम की गांड फूली हुई है. मेरे पापा रोज मेरी मॉम की गांड मारते हैं. माफ करना दोस्तो, मैंने अपनी मॉम का नाम नहीं बताया, मेरी मॉम का नाम नीलम है. जब मॉम की चूत मारी थी, तब मेरी मॉम की उम्र 39 साल की थी. उनका फिगर 34-26-38 का है. उनके इस फिगर को देख कर मेरा लौड़ा रोज खड़ा हो जाता था. ऊपर से वह बहुत खूबसूरत थीं तो वह मुझे मेरी मॉम नहीं, मुझे अपनी पत्नी जैसी लगती थीं. </p>
<p>मेरी मॉम को आसपास के सभी लोग चोदना चाहते थे. लेकिन मेरी मॉम केवल परिवार वालों से ही चुदवाती हैं. जी हां, परिवार के मर्द ही उनको चोदते हैं, ये खुलासा आपको कहानी के अंत में हो जाएगा.</p>
<p>जब मैं 19-20 साल का था, जब मैंने पहली बार अपनी मॉम को जमकर चोदा था. उस दिन पापा घर से बाहर गए हुए थे और मेरा भाई कॉलेज के टूर पर गया था. घर पर केवल मैं और मेरी मॉम थे.</p>
<p>मैंने उस दिन तय कर लिया था कि आज रात अपनी मॉम को अपना बना लूंगा उन्हें अपनी पहली पत्नी का दर्जा दूंगा. रात को जब मैं सेक्स फिल्में और कहानी पढ़कर घर आया, तो मुझे मेरी मॉम मेरी पत्नी के रूप में दिख रही थीं और ऐसा लग रहा था कि उन्हें अभी पकड़ कर चोद दूं.</p>
<p>उस समय मेरी मॉम खाना बना रही थीं. खाना बनाने के बाद उन्होंने मुझे आवाज दी- कुणाल आ जा, खाना खा ले बेटा.</p>
<p>मैंने अपनी मॉम के साथ खाना खाया और अपने कमरे में चला गया. मॉम भी सारा काम खत्म करके अपने कमरे में चली गईं.</p>
<p>मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी. रात को जब मैं अपने मॉम के कमरे में गया तो उन्हें देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. मॉम ने नाइटी पहनी हुई थी. मैंने मॉम के होंठों को देखा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए और जोर जोर से किस करने लगा. इससे मेरी मॉम की आंख खुल गई.</p>
<p>उन्होंने मुझे यह करता देख कर पीछे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मॉम हूं. यह सब गलत है, जा अपने कमरे में चला जा … मैं तेरे साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी. </p>
<p>मैंने कहा- मॉम तो तू मेरी है पर मॉम से पहले तू एक औरत है. और मैं तेरे बेटे से पहले एक मर्द हूं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है, मर्द हमेशा औरत को चोदता है. आज मैं तुझे चोद कर अपनी पहली पत्नी का दर्जा दूंगा. तू बहुत खूबसूरत और सेक्सी है. आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा, तेरी गांड में अपना लंड दे कर रहूंगा. </p>
<p>कुछ देर की ना नानुकुर के बाद जब मैंने अपना लम्बा लंड खोल कर मॉम के सामने लहराया, तो मेरी मॉम मेरा लंड देख कर हैरान रह गईं. उन्होंने मेरे लंड को बड़ी बेताबी से देखा. मुझे मालूम था कि मेरे पापा का लंड मुझसे काफी छोटा है.</p>
<p>अब मॉम भी लंड देख कर खुश हो गई थीं. चूंकि उनको भी रोज रात को लंड की आदत थी. मॉम ने कहा- तुमको मुझे चोदने के लिए मुझे पकड़ना होगा.<br />
यह कह कर मॉम कमरे में पलंग के चारों तरफ भागने लगीं. मैंने बड़ी मेहनत के बाद आखिरकार मॉम को पकड़ ही लिया.</p>
<p>उसके बाद मैंने मॉम को अपनी बांहों में जकड़ा और उन्हें लिप किस करने लगा. अब मॉम भी मेरा साथ देने लगीं. वह भी मुझे लिप किस करने लगीं. किस करते करते मैं मॉम के स्तनों को भी दबा रहा था. मॉम को अपने मम्मों को मिंजवाने में बड़ा मजा आ रहा था. वह भी बड़े मजे से मुझे किस कर रही थीं. </p>
<p>मैंने मॉम को बेड से उठाकर उन्हें खड़ा कर दिया और‌ उनकी नाइटी खोल दी. मेरी मॉम ने भी मेरी शर्ट खोल दी. मेरी मॉम अब मेरे सामने पैंटी और ब्रा में थीं. दोस्तों मैंने कभी अपनी मॉम को पैंटी और ब्रा में इस तरह नहीं देखा था. आज मैंने पहली बार मॉम को इस तरह से देखा था. </p>
<p>उसके बाद मैं अपनी मॉम को फिर से किस करने लगा और उनके बालों पर हाथ फेरने लगा. मॉम के बाल बहुत लंबे थे इसलिए मैं उन्हें खींच भी रहा था.<br />
वह ‘आह आआहह …’ कर रही थीं. </p>
<p>मैं 5 मिनट तक मॉम को किस करता रहा और उनके मुँह का सारा पानी अपने मुँह में ले लिया. मॉम को किस करने के बाद में उनके स्तनों को दबाने लगा और चूमने लगा. </p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने उनकी ब्रा को एक झटके में फाड़ दिया. अब मेरी मॉम मेरे सामने ऊपर से पूरी नंगी थीं. मैंने अपनी मॉम के स्तनों का दूध पीना शुरू किया. </p>
<p>मॉम जोर जोर से आवाज निकाल रही थीं- आह आई … और जोर से दबा कर पी … आई … पी ले बेटा … यह तेरे लिए ही हैं. बचपन में अपनी मॉम का बहुत दूध पिया था. अब जवानी में भी चूस ले..’</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने मॉम को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी पैंटी भी फाड़ दी. मॉम ने भी मेरे सारे कपड़े केवल अंडरवियर को छोड़कर उतार दिए. </p>
<p>अब मेरे सामने मेरी मॉम पूरी नंगी खड़ी थीं. जब मैंने मॉम के नंगे बदन को देखा, तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई मेरे सामने एक ही बहुत खूबसूरत लड़की खड़ी हो. </p>
<p>फिर मैंने मॉम को गोदी में उठाया और बेड पर पटक दिया. बेड पर पटकने के बाद मैंने उनकी चुत को देखा, उनकी चुत पर एक भी बाल नहीं था. </p>
<p>जब मैंने उनसे चूत की झांटों के बारे में पूछा कि आपकी चुत पर बाल क्यों नहीं हैं? </p>
<p>तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे पापा मुझे रोज चोदते हैं, इसलिए मैं सुबह ही अपने बाल साफ कर लेती हूं. </p>
<p>फिर मैंने मॉम के दोनों पैर खोले और इशारा किया. मैंने उनका इशारा समझ लिया और उनकी चुत में अपना सिर दे दिया. मैं जोर जोर से मॉम की चुत चाटने लगा. उनकी चूत बिल्कुल मक्खन जैसी मुलायम थी. मैं अपनी मॉम की चुत से निकलता हुआ लिसलिसा पानी पी रहा था और वह जोर-जोर से आवाज निकाल रही थीं. </p>
<p>‘आह उई आई मर गई अम्मा … चोद दे मादरचोद … अपनी मॉम की चुत का सारा पानी पी ले … आह आई आई रे … मर गई मैं तो..’ </p>
<p>उनकी आवाज ने मेरे अन्दर उन्हें चोदने का जुनून बना दिया था. मैंने 10 मिनट के अन्दर उनकी चुत का सारा पानी अपने मुँह में पी लिया. उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया. मेरा लौड़ा अंडरवियर से बाहर निकलने के बाद मेरी मॉम ने उसे देख कर कहा कि तेरा लौड़ा तो तेरे बाप से भी ज्यादा मोटा और लम्बा है. आज तू इसे मेरी चुत में डाल दे, जिससे मेरी चुत की प्यास शांत हो जाए. अपनी मॉम की चुत में घुसा दे बेटा. </p>
<p>फिर मैंने मॉम की चुत को चुदाई के लिए खोला और निशाना लगाते हुए एक ही झटके में अपना आधा लौड़ा मॉम की चूत में घुसा दिया.<br />
मॉम एकदम से हुए इस दर्द से चीख उठीं.</p>
<p>मैंने उनकी चीख पर ध्यान ही नहीं दिया और अपना बचा हुआ आधा लौड़ा दूसरे झटके में अन्दर घुसा दिया.</p>
<p>पूरा लंड घुसने के बाद मॉम और जोर से चीख उठीं. अब मेरा पूरा का पूरा लौड़ा मॉम की चूत में घुसा हुआ था … और मैं लंड पेल कर रुक गया. </p>
<p>मॉम दर्द से चीख रही थीं, क्योंकि मेरा लौड़ा लंबा और मोटा था. फिर मैंने धीरे-धीरे धक्का मारना शुरू किया. मॉम दर्द से कलपते हुए भी चोदने के लिए कह रही थीं- आह उम्म्ह … अहह … हय … ओह … अई आह … चोद अपनी मॉम को बेटा चोद दे. </p>
<p>मैंने आराम आराम से धक्का मारना शुरू किया. मॉम को दर्द हो रहा था इसलिए मैंने उनका एक पैर उठाया और अपने कंधे पर रख दिया. उसके बाद मैंने मॉम की चुदाई जोर जोर से करनी शुरू किया.</p>
<p>मॉम की सेक्सी आवाजें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. वे अब तक एक बार झड़ चुकी थीं. थोड़ी देर की धकापेल चुदाई के बाद मैंने मॉम की‌ चुत में से लौड़ा निकाला और उनके मुँह में दे दिया. </p>
<p>मॉम ने मेरा लौड़ा 10 मिनट तक चूसा. जब मॉम मेरा लौड़ा चूस रही थीं, तब मैंने उनकी चुत में उंगली की. </p>
<p>लौड़ा चूसने के बाद मैंने मॉम की चुत का माल उन्हें खिलाया. फिर किस करने लगा. </p>
<p>किस करने के बाद मैंने मॉम की घोड़ी बना कर चुदाई की. कुछ मिनट की चुदाई के बाद मॉम फिर से झड़ गईं. बाद में मैं भी झड़ गया. इस बार मैंने अपना सारा पानी में मॉम की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>दो बार मॉम की चुदाई करने के बाद मैं सोने के लिए अपने कमरे में जाने लगा. तभी मॉम ने मेरा हाथ पकड़ा और खींच कर मुझे तरह तरह की गाली देने लगीं और कहने लगीं- मेरी गांड क्या तेरा बाप मारेगा … साले गांड मार … फिर सोने जाना.</p>
<p>मैंने मॉम की गांड चाटना शुरू किया. मॉम की गांड चाटते चाटते बीच में मैं उनकी गांड में उंगली भी कर रहा था. मॉम फिर से आवाज निकालने लगीं- आआह अई अई आह मर गई मैं तो!<br />
कुछ देर तक गांड चाटने के बाद मैंने अपना लौड़ा उनकी गांड में दे दिया और उनकी गांड चोदने लगा. </p>
<p>मैं मॉम के चूचे पकड़ कर कहने लगा- नीलम साली … आज से तू मेरी रखैल है. मैं तुझे जब चाहे चोद दूंगा. तुझे चोदे बिना मैं कभी नहीं सोऊंगा. </p>
<p>गांड मारने के बाद में मॉम ने पूछा- तू मुझे अपने बच्चे की मॉम कब बनाएगा.<br />
मैंने मॉम से कहा- मैं तुझे 40 दिन में अपने बच्चे की मॉम बना दूंगा. </p>
<p>उस रात मैंने मॉम की 4 बार चुदाई की और उन्हें मैंने अपनी पहली पत्नी बना दिया.</p>
<p>अगले दिन जब हम सुबह उठे … तो मैंने मॉम से कहा- पापा मुझ पर बहुत गुस्सा करेंगे, अगर मैंने आपको अपने बच्चे की मॉम बना दिया.<br />
तब मॉम ने कहा- हमारा परिवार चुत मारने वाला परिवार है … तुझसे पहले तेरा भाई मुझे चोद चुका है. तेरे पापा को यह बात पता है कि उनके बाद मैं तेरे भाई से चुत चुदवाती हूं. अगर तूने मुझे माँ बना दिया, तो कोई दिक्कत नहीं.</p>
<p>फिर मैंने मॉम को लिप किस किया और पूछा- तुम्हें सबसे पहले किसने चोदा था?<br />
मॉम ने कहा- सबसे पहले मुझे तेरे बाप ने चोदा था. तेरे बाप ने मुझे रुला दिया था.<br />
“फिर उसके बाद?”<br />
मॉम ने कहा- मैंने तेरे बाप से शादी की थी. उस साले ने मुझे चोद चोद कर मार दिया था. अगर तुम मुझे अपने बाप के सामने भी चोदेगा, तो उसे कोई दिक्कत नहीं होगी. </p>
<p>उसके बाद मैंने फिर से सुबह अपनी मम्मी की चुदाई कर डाली. अब मैं अपनी मॉम को रोज़ चोदता हूं. अब तो मम्मी एकदम बिंदास नंगी ही घर में घूमती हैं. मैंने अपने पापा के साथ भी उनको चोदा है. उसकी कहानी मैं बाद में लिखूंगा.</p>
<p>इस तरह मैंने अपनी मॉम की चुदाई करके अपनी सेक्स सफर की शुरूआत की.</p>
<p>अगर आपको मेरी मॉम की चुदाई की सेक्स कहानी अच्छी लगी?<br />
मेरी ईमेल आईडी पर मैसेज भेजिए.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खेल वही भूमिका नयी-6</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Call Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[कामुकता से भरपूर इस सेक्स कहानी के पांचवें भाग खेल वही भूमिका नयी-5 में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी सहेली के पति ने मुझे रात तीन बजे तक रौंदा था, जिस वजह से मुझे बड़ी थकान हो गई थी. सुबह उठ कर मैं नहायी तो रमा ने मुझे तैयार होने के लिए कुछ <a title="खेल वही भूमिका नयी-6" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-6/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-6">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कामुकता से भरपूर इस सेक्स कहानी के पांचवें भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-5<br />
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी सहेली के पति ने मुझे रात तीन बजे तक रौंदा था, जिस वजह से मुझे बड़ी थकान हो गई थी. सुबह उठ कर मैं नहायी तो रमा ने मुझे तैयार होने के लिए कुछ मॉडर्न कपड़े दिए. मगर मैंने साड़ी पहनना ही थी समझा.<br />
अब आगे:</p>
<p>मेरी सहेली रमा बोली- सच में सारिका मैं ही गलत थी, आज जब भेद खुलेगा तो सच में लोग चौंक जाएंगे.<br />
जब हम दोनों तैयार हो गए, तो हम बिस्तर के पास आगे की योजना के बारे में बात करने के लिए चले आए.</p>
<p>वहां पहुंच जब रमा ने बिस्तर देखा, तो चकित होते हुए बहुत जोरों से हंसती हुई बोली- सारिका ये क्या है, रात की कहानी तो ये चादर बता रही है.<br />
मुझे थोड़ी शर्मिंदगी सी महसूस हुई. </p>
<p>पर रमा ने बोला- लगता है कान्ति ने तुम्हें पूरी तरह निचोड़ कर रख दिया. मैं यकीन से कह सकती हूं तुम्हें बहुत मजा आया होगा. खैर … अभी कमरे सफाई के लिए आएंगे, हम दोनों नीचे चलते हैं.<br />
रमा की बात तो सही ही थी कि कांतिलाल ने मुझे निचोड़ कर रख दिया था, पर आनन्द भी उतना ही आया था. </p>
<p>मैं उसके साथ शर्माती हुई चल पड़ी. दोपहर का समय तो हो ही चुका था, पर अभी तक किसी का अता-पता नहीं था. केवल मैं और रमा ही थे. हम दोनों एक केबिन वाले स्विमिंग पूल के सामने कमरे में चले गए और खाने का आर्डर दे दिया.</p>
<p>वहां का नज़ारा ही अलग था. एक पल तो मुझे लगा कि यहां आए सभी लोग हमारी तरह ही मजे करने आए हैं. क्योंकि जितने भी मर्द और औरतें पूल के आसपास थे, सभी आधे नंगे ही थे. औरतें केवल ब्रा और पैंटी में … और मर्द केवल जांघिया या हाफ पैंट में थे.</p>
<p>पर जब ध्यान दिया तो कुछ लोग परिवार के साथ भी थे. तब मुझे धीरे धीरे समझ आया कि ये लोग अच्छे खासे खुले और ऊंचे वर्ग के लोग हैं. हमारी तरह रूढ़िवादी सोच के नहीं हैं.</p>
<p>खैर … जो भी हो … मुझे यहां अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं जैसा जीवन चाहती थी वैसा ही सब दिख रहा था. फर्क ये था कि इस तरह की जीवन शैली हम जैसे सामान्य वर्ग के लोगों के लिए संभव नहीं होती है.</p>
<p>हम दोनों सहेलियाँ खाने के साथ अब आगे की योजना पर बात करने लगी. रमा ने बताया कि आज और कल यानि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सब लोग बहुत मजे करने वाले हैं. हर कोई अपनी अपनी सोच सामने रखेगा, देखा जाएगा कि किसकी तरकीब सबसे बढ़िया है. उसने बताया कि शाम तक बाकी लोगों की बीवियां भी आ जाएंगी और फिर एक अलग कमरे में हमारा नया साल मनाने का बंदोबस्त हो चुका है. </p>
<p>फिर उसने मुझसे कहा कि मैं अभी कुछ देर कमरे में आराम कर लूं, फिर जब वो मुझे बुलाएगी, तब बताए हुए कमरे में जाना.<br />
हम खाना खाने के बाद इधर उधर टहलने के बाद कमरे में वापस चले गए. मैं रात की थकान के वजह से सोफे पे ही बैठे बैठे सो गई. रमा ने मुझे परेशान नहीं किया और सोने दिया.</p>
<p>शाम करीब 6 बजे मेरी नींद खुली, तो मैं कमरे में अकेली थी. मुँह हाथ धोकर मैं फिर से उसी साफ सुथरी घरेलू महिला के रूप में आ गई. मुझे तो पहले से पता था कि आज की रात क्या होने वाला है, सो मैं बस इन्तजार में थी.</p>
<p>करीब 7 बजे मुझे रमा का फ़ोन आया. उसने मुझे बताए हुए कमरे में आने को कहा. मैं उस कमरे की तरफ बढ़ने लगी. पर पता नहीं क्यों मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. </p>
<p>मुझे अंदेशा हो रहा था कि आज कुछ अलग होने को है, बाकी ऐसा तो कुछ नहीं था जो कि मैं पहली बार करने जा रही थी. शायद मुझे उन 3 औरतों की फिक्र थी, जिनसें मैं पहले कभी नहीं मिली थी. पर अब जो होना था, सो होना था. यही सोच कर मैं कमरे तक पहुंच गई.</p>
<p>दरवाजे की घंटी बजाई, तो रमा ने दरवाजा खोला और मुझे पकड़ कर भीतर ले जाते हुए सभी से मुखातिब होते हुए जोर से बोली- फ्रेंड्स ये है आज का तोहफा मेरी तरफ से … ये है मेरी सबसे खास सहेली सारिका.</p>
<p>उधर मौजूद रवि, राजशेखर और कमलनाथ आंख फाड़े देखते रह गए.<br />
तभी राजशेखर बोल पड़ा- क्या यही सारिका है तुम्हारी सहेली?<br />
रमा ने हंसते हुए जवाब दिया- जी हां चौंक गए न … मेरी इस तरकीब से सब … यही है वो सहेली, जिसका आप सब बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे.</p>
<p>रमा ने बाकी के 3 औरतों को संबोधित करते हुए कहा- तुम सब ये नहीं जानना चाहती हो कि तुम तीनों के पतियों के चेहरे ऐसे क्यों हो गए?<br />
इस पर एक महिला ने कहा- हां बताओ … इन सब के चेहरे देख मैं भी सोच में पड़ गई थी कि ऐसा क्या अनोखा हुआ. हम सबको पता था कि सारिका यहां आने वाली है.</p>
<p>तब तक दूसरी महिला ने पूछा- क्या आप सब सारिका को पहले से जानते हो?<br />
तब कांतिलाल ने उत्तर दिया- हां कल रात से तीनों सारिका को अच्छे से पहचान चुके हैं.</p>
<p>तभी रवि ने बोला- रमा जब तुम जानती थी, तो इतना नाटक क्यों किया?<br />
रमा बोली- अरे यार थोड़ी बहुत मौज मस्ती और क्या … मैं सबको चौंकाना चाहती थी.</p>
<p>इस पर कमलनाथ ने कहा- वो तो ठीक है रमा … पर तुम अपनी सहेली को उस चूतिये नेता के साथ क्यों सोने दिया?<br />
रमा बोली- नहीं करती तो तुम सबको बेवकूफ कैसे बनाती और फिर क्या हुआ … कौन सा उस गधे नेता ने कुछ लूट लिया. वो तो जिस्म का भूखा था, सो चला गया. और फिर तुमने भी तो अपनी बीवी के साथ उसे सोने दिया था न … क्या फर्क पड़ता है … ऐसे छोटे मोटे लोगों से. हम सब के मन के साथ उसने थोड़े छेड़खानी की, हम सब आज भी एक दूसरे के साथ हैं और सबकी भावनाएं समझते हैं, सबको सम्मान देते हैं.</p>
<p>इस पर तीसरी महिला ने रमा का समर्थन करते हुए बोला- हां, रमा सही कह रही है, हमारे लिए सेक्स इतनी भी बड़ी चीज नहीं, सेक्स को तो हम अगले पायदान तक ले जाते हैं. जरूरी हम सब का साथ है. एक समान विचार और काम काज से थोड़ा दूर अपने लिए समय निकालना.</p>
<p>उसके बाद वे सब बीती रात की घटना के बारे में पूछने लगी. तब जाकर रमा ने सबको पिछली रात की घटना को बताया. उन तीनों मर्दों को बेवकूफ समझ कर सभी महिलाएं हंसने लगीं.</p>
<p>इस तरह की जीवन शैली में ढलने की वजह से किसी को अचरज इस बात से बिल्कुल भी नहीं हुआ था, न ही किसी में इस बात से नाराजगी थी कि उन लोगों ने मेरे साथ संभोग किया. बल्कि इस रोचक खेल के लाने से रमा की उल्टे तारीफ ही हुई. मेरी अभिनय की भी तारीफ़ हुई कि अब तक उनको पता नहीं चलने दिया कि मैं एक सामान्य महिला हूँ, कोई वेश्या नहीं.</p>
<p>फिर हमारे एक साथ होने की बहुत देर बहस छिड़ी रही. मुझे एक हद तक उनकी बातें सही लगीं, क्योंकि यहां कोई किसी के साथ जोर जबरदस्ती नहीं कर रहा था. सबको एक दूसरे की भावनाओं की फिक्र थी. संभोग न केवल शारीरिक संतुष्टि के मार्ग था … बल्कि मानसिक तनाव से भी दूर करने का साधन था.</p>
<p>मैं तो घरेलू महिला थी, केवल घर के काम देखती थी. पर वे सभी मर्दों के साथ परस्पर उनके कामों में हाथ बंटाती थीं. काम के बोझ से सच में तनाव पैदा होता ही है, सो एक अलग समय निकाल अगर कुछ मौज मस्ती कर ली जाए और किसी को कोई परेशानी न हो, तो क्या गलत है.</p>
<p>अब मैं बाकी की 3 महिलाओं का परिचय करवाती हूँ. जिस तरह रमा ने सबसे मेरा परिचय करवाया था. </p>
<p>पहली महिला निर्मला थी, जो कमलनाथ की पत्नी थी. वो करीब 45-46 की उम्र होगी, उसका कद 5 फुट का रहा होगा. रंग गोरा और शरीर भारी भरकम, लगभग 38 साइज़ के स्तन और कूल्हे अंदाजन 44 के रहे होंगे. कुर्ती और पजामे में वो अच्छी दिख रही थी. वो एक सभ्य समझदार महिला लग रही थी.</p>
<p>वही दूसरी महिला राजेश्वरी, राजशेखर की पत्नी थी और वो भी लगभग निर्मला से मिलती जुलती ही थी. उसकी उम्र भी उसी के आस पास होगी. वो साड़ी पहने हुई थी और वो भी एक सभ्य महिला की भांति दिख रही थी.</p>
<p>तीसरी महिला कविता थी, जो हम सब में से सबसे कम उम्र की थी. वो करीब 35-36 की थी और वो जीन्स और शर्ट पहने हुए थी. उसका बदन भरा भरा था और उस शर्ट में उसके सुडौल स्तन और जीन्स में उसके चूतड़ काफी बड़े दिख रहे थे. वो भी बहुत गोरी थी और हम सबमें से वही एक ज्यादा मॉडर्न दिख रही थी.</p>
<p>यहां मैं बता दूं कि कविता रवि की दूसरी पत्नी थी और उम्र में रवि से बहुत छोटी थी. दोनों ने प्रेम विवाह किया था. ये शादी रवि के तलाक होने के बाद हुई थी. उनका प्रेम प्रसंग पहले से था, शादी से पहले कविता कुंवारी थी और रवि शादीशुदा था. दोनों एक साथ काम करते थे, फिर शादी के बाद खुद का व्यापार शुरू किया.</p>
<p>अब आगे की कहानी बताती हूँ. शाम 8 बजे तक हम सब एक दूसरे से अच्छे से परिचित हो चुके थे. वेटर से सभी खाने पीने और जितनी भी जरूरत की चीज़ें चाहिए थीं, हमने मंगवा कर रख लीं और उन्हें कहलवा दिया कि हमें अब कोई परेशान करने न आए. हम सब नए साल के स्वागत में अपना समय बिताएंगे.</p>
<p>वहां सभी मदिरा पीने वाले थे, पर मैंने आज तक कभी मदिरा को चखा भी नहीं था. मुझे कविता ने छोटी सी बोतल में कुछ दिया और कहा कि शराब नहीं पी सकती, तो कम से कम फ्रूटबियर तो पियो.<br />
मैं तो जानती भी नहीं थी कि बियर क्या होती है … पर फ्रूट सुनकर समझी के फल का रस होगा. मुझे पीने में भी अच्छा लगा, जैसे अनानास का रस पी रही हूँ.</p>
<p>हम सब खाते पीते 12 बजने का इंतजार करने लगे.</p>
<p>तभी कविता ने कहा- चलो अब सारे मर्द एक तरफ हो जाएं और पार्टी के लिए अपने पसंद के कपड़े बदल लें.<br />
सारे मर्द दूसरे कमरे में चले गए और कविता ने दरवाजा बंद कर दिया.</p>
<p>वो हम सभी से कहने लगी- आप सबको मैं जो कपड़े दूंगी, वही पहनना होगा. आज ये सारे मर्द हमें देख कर पागल हो जाएंगे. कविता ने एक बैग निकाला और उसमें से एक ही तरह के 5 जोड़े कपड़े निकाले. </p>
<p>उन कपड़ों को देख राजेश्वरी बहुत खुश हुई और बोली- यार, मैंने भी यही कपड़े आज के रात पहनने की सोची थी.</p>
<p>कविता- तो फिर सोच क्या रही हो … फटाफट पहन लो … इलास्टिक वाले हैं सबको फिट हो जाएंगे … कोई भी लूज़ तो नहीं होगी पक्का … पर टाइट हो सकती हैं. ही..ही..ही..<br />
राजेश्वरी- टाइट देख कर तो हमारे मर्दों का और भी टाइट हो जाएगा … हा हा हा..</p>
<p>कविता और राजेश्वरी ने फटाफट कपड़े अपने उतारे और हमारे सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी होकर हमें कहने लगीं- आप सबको क्या न्यौता भेजना होगा, तब पहनोगी. जल्दी करो पार्टी करनी है.</p>
<p>मैंने देखा कविता और राजेश्वरी ने मैचिंग की ब्रा पैंटी पहनी थी और वो दोनों तो उसी में ज्यादा आकर्षक और कामुक दिख रही थीं.<br />
जब कविता ने अपने कपड़े पहने, तो मैं हैरान हो गई. ये किसी स्कूल की यूनिफार्म थी. शर्ट इतनी कसी थी कि स्तन लग रहे थे, बटन तोड़कर बाहर निकल आएंगे. उसकी स्कर्ट इतनी छोटी थी कि सिर्फ चूतड़ ढके दिख रहे थे.</p>
<p>वो जब तैयार होकर सामने बैठी, तो उसकी पैंटी तो साफ दिख रही थी.</p>
<p>यही हाल राजेश्वरी का था. उसके बाद रमा ने मुझे कपड़े दिए और खुद भी पहन लिए.</p>
<p>निर्मला ने पहना और चिड़चिड़ाने लगी और बोली- इसे पहनने से तो अच्छा है कि मैं नंगी ही रह जाऊं और वैसे भी वो लोग हमें नंगी कर ही देंगे तो पहनने का क्या फायदा.<br />
इस पर रमा ने उसे समझाया कि ये बस पार्टी के लिए है. तुम्हारे मन में भी कोई विचार हो तो बताओ.</p>
<p>निर्मला ने रूखे मन से कहा- ठीक है.<br />
वो मुझसे बोलने लगी- तुम क्यों नहीं पहन रही हो?</p>
<p>वैसे निर्मला इन कपड़ों में थोड़ी थुलथुली दिख रही थी और स्कर्ट उसके लिए बहुत अधिक छोटा था, जिसके वजह से उसका आधे चूतड़ दिख रहे थे.</p>
<p>मैंने तो जीवन में कभी स्कूल जाते हुए ऐसे कपड़े नहीं पहने थे, सो मुझे और अधिक अटपटा लग रहा था.</p>
<p>जब मैंने उस परिधान को पहनने के लिए अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतारे … तो निर्मला बोली- बहुत गठीला बदन है तुम्हारा.<br />
मैंने उसे अपनी मुस्कुराहट से उसका धन्यवाद किया और वो कपड़े पहन लिए. सच में बहुत ही अजीब कपड़े थे, वो पर हम सब जवान लड़कियों की तरह दिख रहे थे … जैसे कि कोई अंग्रेज़ी फ़िल्म की लड़कियां हों.</p>
<p>हम सबकी जांघें और थोड़े चूतड़ तो दिख ही रहे थे. ऊपर की शर्ट तो ऐसे लग रही थी कि अभी ही सबकी फट जाएगी.</p>
<p>हम सब तैयार होकर हॉल में चले आए, तो देखा चारों मर्द पहले से तैयार होकर बैठे थे. उनका हुलिया तो हम सबसे भी ज्यादा हंसाने वाला था. सबने पतली डोरी की जांघिया को पहन रखा था और गले में केवल टाई थी.<br />
हम सब उन्हें देखकर जहां हंसने लगी थी, वहीं वो लोग हमें देख अचंभित होने के साथ कामुक भी होने लगे थे.</p>
<p>सब लोग हमें बारी बारी ललचाई नजरों से निहार रहे थे.</p>
<p>तभी कमलनाथ ने कहा- आज का खेल मैं शुरू करूंगा. </p>
<p>वो भीतर से 5 प्लास्टिक के छोटे छोटे गमले लाया, जिनमें रेत भरी हुई थी. </p>
<p>उसने वो गमले हम पाँचों महिलाओं के हाथ में देकर कहा- तो आज का खेल ये है कि सभी महिलाएं अपने अपने गमलों के ऊपर करीब आधे फुट ऊंचाई से बैठ पेशाब करेंगी, उसके बाद इस खेल का राज खोला जाएगा.</p>
<p>मुझे बड़ा अजीब लगा … पर बाकी की महिलाएं उत्सुक दिखीं और आपस में बातें कानाफूसी करते हुए पेशाब करने की तैयारी करने लगीं.</p>
<p>सबने पहले ही बहुत पानी मदिरा और ठंडा पिया था, इस वजह से हम सबको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही थी. हम सबने अपनी अपनी पैंटी घुटनों तक सरकाया और एक कतार में गमलों के ऊपर बैठ गए. </p>
<p>हम सब जब पेशाब करने जा रही थी तो कमलनाथ ने कहा- सबका पेशाब एक धार में होना चाहिए और रेत के बीच में एक ही जगह गिरना चाहिए, इधर उधर धार नहीं जाना चाहिए.</p>
<p>हम सब उसके दिशा निर्देश अनुसार पेशाब करने लगी और 2-3 मिनट में सब उठकर फिर अपनी अपनी पैंटी पहन सोफे पे आ गई.<br />
अब वो राज जानने की जिज्ञासा सब में थी, जिसके वजह से हमने ये सब किया था.</p>
<p>कमलनाथ ने एक मापने के लिए एक स्केल ली और हर एक गमले में उसे डालकर कुछ नापने लगा.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद उसने हम सबके लिए एक परिणाम घोषित किया.</p>
<p>उसने बताया- राजेश्वरी 0.80 इंच, सारिका 0.86 इंच, रमा 0.90 इंच, निर्मला 0.77इंच … और अंत में कविता 1.75 इंच. </p>
<p>हम सब उसके कहने का मतलब नहीं समझ पा रहे थे. इस वजह सबने उससे मतलब पूछना शुरू कर दिया. तब उसने बताया कि ये गहराई वो है, जो रेत में पेशाब की तेज धार से बनी है.</p>
<p>हम सबने पूछा कि उससे क्या पता चलता है.<br />
तब उसने बताया कि इससे ये पता चलता है कि किस औरत में ज्यादा दम है.<br />
उस पर निर्मला ने पूछा- वो कैसे?<br />
तो उसने बताया कि जिसकी योनि की नसें और मांसपेशियां अधिक ताकतवर होती हैं, वो ज्यादा दबाव से पेशाब कर सकती है और रेत में ज्यादा गहरी छाप बना सकती है.</p>
<p>उसका सीधे सीधे ये कहना था कि हम पाँचों में कविता की योनि सबसे कसी हुई थी.</p>
<p>इस बात पर हम सबको बहुत बुरा लगा कि इस तरह का भेदभाव क्यों पैदा करना, जब सब एक मन से यहां आए हुए हैं. सब क्रोधित भी होने लगे, पर कमलनाथ ने सब से माफी मांगते हुए इसे एक तरह का केवल खेल बता कर स्थिति नियंत्रित कर ली. </p>
<p>वैसे जो भी हो हम सभी महिलाओं में कविता ही सबसे कम उम्र की थी, तो स्वाभाविक है कि उसकी नसें और मांसपेशियां हम बाकी की महिलाओं से थोड़ी ज्यादा मजबूत और सख्त होंगी ही.</p>
<p>अभी 9:30 बज चुके थे और अब खेल का दूसरा पड़ाव सामने आया.</p>
<p>कविता ने पिछले खेल का तर्क देते हुए कहा कि यदि उसकी योनि सबसे ज्यादा कसी हुई है, तो उसी मर्द का लिंग भी इसमें आज की रात सबसे पहले जाएगा, जो चारों में से ज्यादा ताकतवर होगा.</p>
<p>अब इसके बाद बाकी के मर्द ये सोच में पड़ गए कि कैसे अपनी अपनी योग्यता साबित करें.</p>
<p>थोड़ी देर चिंतन और मंथन के बाद एक नतीजे पे पहुंचा गया. पर जहां औरतों की बारी होती है, वहां तो परीक्षा लेने में औरतें आगे होती ही हैं. </p>
<p>मर्दों को दो पड़ाव पार करने की चुनौती दी गई. निर्मला जहां सबसे अधिक प्रौढ़ लग रही थी, वही उसका मन शैतानी से भी भरा हुआ था. उसने ही पहले पड़ाव का चयन किया.</p>
<p>निर्मला ने वहां रखी खाली बियर की बोतलों में पानी भर दिया और फिर उसे रस्सी से बांध दिया. अब सभी मर्दों को करना ये था कि उस बोतल को लिंग से बांध कर करीब 5 मिनट तक पूरे कमरे में घूमना था. </p>
<p>सभी अपनी अपनी जांघिया निकाल तैयार हो गए और फिर सबसे पहले रवि ने शुरूवात की. वो इस परीक्षा में पास हो गया.</p>
<p>इसके बाद कांतिलाल ने, जो कि पास हो गया. फिर राजशेखर ने और वो भी पास हो गया.<br />
पर अंत में जब कमलनाथ की बारी आई, तो वो अंतिम पल में हार मान गया. उससे बोतल का वजन सहा नहीं गया. शुरूआत उसने एक खेल से की थी मगर जब कमलनाथ की बारी आई … तो वो पहले ही चरण में विफल हो गया.</p>
<p>कमलनाथ के लिए परीक्षा समाप्त हो चुकी थी. अब बाकी के तीन मर्दों को अगली परीक्षा के लिए जाना था.</p>
<p>अब उन्हें ये काम दिया गया कि सभी मर्दों को अपना अपना लिंग उत्तेजित करना है और फिर उसी अवस्था में पेशाब करना है. जिस किसी का भी लिंग मूत्र निकलते हुए ढीला पड़ने लगेगा, वो हार जाएगा.</p>
<p>ये राजेश्वरी का दिमाग था. हम सब जानते थे कि ऐसा करना असंभव सा है. फिर भी हमने उन्हें ये काम दिया. सभी मर्द तैयार हो गए और इसमें हम महिलाएं उनका कोई साथ नहीं देने वाली थीं.</p>
<p>सबने खुद से अपना अपना लिंग हाथ से पकड़ हिलाना शुरू किया. हम सब जिस वेशवूषा में थे. उससे तो वे सारे मर्द पहले से ही थोड़े बहुत उत्तेजित थे ही, इस वजह से उन्हें लिंग कड़क करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी.</p>
<p>फिर प्रतिस्पर्धा का खेल शुरू हुआ. तीनों ने बहुत जोर लगाया, पर किसी के लिए ऐसी अवस्था में पेशाब करना संभव नहीं था. जब जब किसी ने भी जोर लगाया, उसका लिंग स्थूल पड़ने लगता. </p>
<p>आधे घंटे तक प्रयास करने के बाद आखिरकार सबने हार मान ली और सब बैठ गए. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]<br />
कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-7</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का! दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ <a title="भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का!<br />
<span id="more-309"></span></p>
<p>दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं।<br />
मगर एक बात मैंने अभी तक अपनी किसी भी कहानी में नहीं बताई कि मैं एक बहुत ही जिद्दी औरत हूँ। एक बार मेरे को खुन्नस चढ़ जाए तो फिर तो उस खुन्नस को निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ। आज मैं आपको अपनी खुन्नस की कहानी सुनाती हूँ। </p>
<p>हम तीन भाई बहन है। मैं छोटी हूँ, दोनों भाई बड़े हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई तो बाहर दूसरे शहर में रहते हैं। मगर छोटा भाई हमारे पैतृक घर में ही माँ के साथ रहता है। बाकी सब तो घर में खूब खाये पिये मोटे तगड़े हैं। मगर वो पता नहीं क्यों बहुत ही दुबला पतला सा है. और वैसे भी एक नंबर का चूतिया है, हर किसी से हर बार से डरता है।</p>
<p>बीवी उसकी बहुत सुंदर है, देखने में भी अच्छी तगड़ी है। शादी के बाद आते ही उसने भाई को अपने कब्जे में कर लिया। भाई तो बस उसका गुलाम ही बन गया।</p>
<p>जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तब मेरा और भैया भाभी का कमरा बिल्कुल मेरे साथ वाला था. रोज़ रात को मैं अपने कमरे में भाभी की सिसकारियाँ सुनती थी जब मेरा भाई कितनी कितनी देर तक मेरी भाभी की चूत को बजाता।<br />
अब पता नहीं वो उसकी चुदाई करता था या भाभी की चूत चाटता था। मगर भाभी की ‘हाय हाय’ नहीं खत्म होती थी।</p>
<p>भाभी की ‘हाय हाय’ सुन कर मेरी चूत भी पानी छोड़ देती और फिर मुझे भी अपनी गर्म चूत को ठंडा करना करने के लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ता। कभी मेरी उंगलियाँ होती, कभी कोई बाल बनाने वाला ब्रुश, कभी कोई छुपा कर रखी हुई गाजर मूली।</p>
<p>एक बात और थी कि भाभी की मेरी माँ से कभी नहीं बनी। दोनों को जब भी मौका मिलता दोनों आपस में उलझ पड़ती। भाई तो हमेशा भाभी की तरफदारी करता। माँ अकेली पड़ जाती।<br />
मगर मेरी माँ भी कम नहीं थी, उसके आगे भी घर में कोई बोल नहीं पाता था। पूरा रोआब था घर में उसका!<br />
बस यही भाभी थी, जिसने आ कर माँ की सत्ता को चुनौती दी थी।</p>
<p>फिर मेरी भी शादी हो गई, मैं अपने ससुराल आ गई। अब जैसे भाभी की सिसकारियाँ निकलती थी, अब मेरी निकलने लगीं।</p>
<p>समय बीतता गया। एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा धार्मिक स्थल है, जिसकी देखभाल एक मौलवी जी करते हैं। वो अक्सर मोहल्ले भर के घरों में घूम घूम कर चंदा इकट्ठा करते हैं, और उस पैसे से स्थान के काम, रखरखाव करते हैं।</p>
<p>तो वो मौलवी जी हमारे घर भी अक्सर आते हैं और इसी बात का भाभी मुद्दा बनाती हैं। वो पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि मम्मी का न इस मौलवी से कोई टांका है। जब भी वो बुड्ढा आता है। मम्मी उसे बहुत प्यार से चाय बना कर पिलायेंगी, उसकी बड़ी आवभगत करेंगी।</p>
<p>पहले तो यह बात सिर्फ भाभी मेरे को मज़ाक में कहती थी। पर एक बार भाभी और मम्मी की किसी बात पर कहासुनी हो गई, तो भाभी ने खुल्लम खुल्ला ये इल्ज़ाम मम्मी पर लगा दिया कि तेरा उस मौलवी से चक्कर चल रहा है। आज भी बुढ़िया की रंगीन मिजाजी खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मम्मी तो रोने लगी। अब बेटी तो माँ का ही पक्ष लेगी। मेरे दिल में भाभी के लिए बहुत गुस्सा था।</p>
<p>उसके बाद माँ ने मुझे बताया- पता नहीं तेरा भाई इसको कहाँ से पसंद कर लाया। अब एक तो ये अपने उच्च वर्ग होने का हम पर रोआब डालती है, दूसरा सभी घर वालों को जलील करती है, तेरे बारे, मेरे बारे सब के बारे में अनर्गल अनाप शनाप बोलती है। इस कुतिया ने तो जीना हराम कर रखा है।</p>
<p>वैसे तो भाभी मुझे भी कभी कभी कुछ न कुछ सुना देती थी, मगर इस बार तो उसने मेरी माँ के दामन पर छींटे उछले थे। मुझे बहुत बुरा लगा। मेरे दिल में भी आया कि ये जो अपने उच्च वर्ग के होने पर इतना इतराती है, और दूसरे लोगों से इतनी नफरत करती है, अगर इस साल में मैंने इसे किसी विधर्मी से न चुदवाया तो मेरा भी नाम नहीं।</p>
<p>मगर अब ऐसे मैं इसे कैसे किसी ऐरे गैरे के नीचे लेटा दूँ, और वैसे भी कोई आदमी क्यों मेरी बात मानेगा। मगर मुझे इतना जरूर था कि अगर इसने मेरी माँ के दामन को दागदार किया है, तो मैंने भी इसकी शराफत को तार तार नहीं किया, तो मुझे भी चैन नहीं पड़ेगा।</p>
<p>शाम को मैं और मम्मी बाज़ार गई। हमारे मोहल्ले में ही बहुत सारी दुकानें हैं। एक दुकान है, उस्मान पठान की … वो औरतों के सामान की दुकान करते हैं। लिपस्टिक बिंदी पाउडर क्रीम, ब्रा पेंटी ये सब। तो मैं बहुत पहले से उनसे समान लेती हूँ।</p>
<p>वो अक्सर मुझ पर अपनी निगाह रखते, मुझ से कभी कभी मज़ाक भी कर लेते। मतलब ठर्की आदमी।</p>
<p>मगर दिक्कत यह कि एक तो उसका काला रंग, शक्ल कहो तो बदशक्ल … कोई खूबसूरती नहीं पठानों वाली। मगर कद 6 फीट दो इंच, चौड़ा सीना। कद काठी पूरी पठानों वाली थी। रंग रूप छोड़ दो देख कर लगे कि अगर कोई औरत इसके नीचे लेट जाए तो उसकी तो ये माँ चोद कर रख दे।</p>
<p>अब मैं तो बचपन से ही सुंदर हूँ तो जब पहले भी कभी उनकी दुकान से ब्रा पेंटी लेने जाती तो वो मेरी ब्रा और पेंटी पर हाथ फेर कर मुझे देते, जैसे सोच रहे हों, इस ब्रा और पेंटी जिन पर मैं आज हाथ फेर रहा हूँ, कल ये तेरे गोल गोल मम्मो और फुद्दी से लिपटे होंगे।</p>
<p>खैर … ऐसा तो वो सबके साथ करते होंगे।<br />
मगर मुझ पर वो कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थे।</p>
<p>तो जब भाभी ने मेरी माँ पर गंदा इल्ज़ाम लगाया तो मेरी तो गांड जल गई। मैं सोचने लगी कि कुछ ऐसा करूँ कि भाभी कभी भी मेरे सामने सर न उठा सके, ऐसा जलील करूँ कि साली हमेशा के लिए इसकी नज़र नीची हो जाए।<br />
मगर ऐसा क्या करूँ?</p>
<p>एक दिन मैं वैसे ही घर में अकेली थी, बैठी बैठी बोर हो रही थी कि खामख्वाह मेरा हाथ मेरे मम्मों से फिसलते हुये मेरी सलवार में घुस गया।<br />
अब हाथ सलवार में घुसा तो सीधा मेरी फुद्दी पर जा कर रुका, फुद्दी को थोड़ा सहलाया, तो मन बहकने लगा, एक उंगली फुद्दी के अंदर ही घुस गई।</p>
<p>बस फिर क्या था, मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला और लगी उंगली की फुद्दी के अंदर बाहर करने। करते करते सोचने लगी कि आज किस से चुदवाऊँ। तो वैसे ही मन में उस्मान भाई का विचार आया … लंबा चौड़ा, ताकतवर! बस उसको सोच कर मैं हस्तमैथुन करने लगी।</p>
<p>सच में बड़ा मज़ा आया सोच कर के वो कैसी बेदर्दी से मुझे चोद गया। जब मेरी चूत का पानी निकल गया और मैं ठंडी हो कर लेट गई तो वैसे ही ख्याल आया कि अगर ये उस्मान मेरी भाभी की फुद्दी मारे तो एक तो वो जो इन लोगों को नफरत करती है, उसका वो मुंह बंद हो जाए, दूसरा अगर भाभी की चूत मेरे सामने चुदे तो मेरे सामने ज़ुबान खोलने लायक नहीं रहेगी और तीसरा जो उसने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया है, उसका भी बदला मिल जाएगा मुझे।</p>
<p>मगर सबसे बड़ी दिक्कत, उस्मान मेरी भाभी की चूत को क्यों चोदेगा, वो भी मेरे कहने पर। भाभी तो उसे पसंद भी नहीं करती तो फिर वो उसको क्यों पास आने देगी।<br />
बड़ी मुश्किल थी।</p>
<p>फिर दिमाग में एक आइडिया आया कि अगर मैं उस्मान से सेट हो जाऊँ, तो एक तो वो मेरी फुद्दी भी ठंडी करेगा, और अगर मैं उस से कहूँ कि वो मेरी भाभी को पटा ले किसी भी तरह, तो शायद ये बात बन सकती है।<br />
बेशक यह बहुत ही मुश्किल, काम था, अगर भाभी न पटी तो मेरी तो पक्का फटी क्योंकि उस्मान मुझे छोड़ेगा थोड़े, वो तो कहेगा, तुमने कहा, था भाभी को पटा कर चोद दो, वो तो नहीं पटी, पर तू तो आ मेरे नीचे।<br />
मगर कोशिश तो करनी चाहिए।</p>
<p>इस लिए मैंने सबसे पहले उसमान को लाइन देनी शुरू की। मैं अक्सर किसी न किसी छोटे मोटे सामान के बहाने उसकी दुकान पर जाती, वो मुझपे अपनी ठर्क मिटाता और मैं हंस हंस कर उसकी बातों के जवाब देती।</p>
<p>कुछ ही दिन में बात मज़ाक से छूने तक आ गई. वो मेरे हाथ बाजू कंधे को छू लेता, तो मैं ऐसे रिएक्ट करती, जैसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p>तो बस एक दिन हिम्मत करके उस्मान में बातों बातों में मेरे मम्मों को भी छू लिया। छू क्या लिया … ब्रा दिखाते वक़्त उसने ब्रा मेरे मम्मों पर रखी और पूरी फिटिंग करके दिखाई. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।</p>
<p>मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।</p>
<p>मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।</p>
<p>मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.<br />
मैं जान बूझ कर ड्रामा करती रही- रहने दो भाई, कोई देख लेगा, जाने दो, कोई आ जाएगा.</p>
<p>मगर इन कमजोर दलीलों का उस पर क्या असर … उसने दो नींबू की तरह मेरे दोनों मम्मे निचोड़ दिये और मेरी गांड फुद्दी हर जगह हाथ फिरा दिया और बोला- अब सब्र नहीं होता मेरी जान, किसी दिन मिल मुझे तुझे जन्नत की सैर करवाऊँगा।<br />
मुझे पता था कि मुझे चोदने का जुगाड़ कर रहा है ये!</p>
<p>तो मैंने कहा- ऐसे नहीं मुझे आपसे एक और काम भी करवाना है।<br />
वो बोला- क्या काम?<br />
मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि अगर आप मेरी भाभी की चूत को पहले ठोक दो, तो मैं तो आपको फ्री में सब कुछ दे दूँगी.<br />
वो बोला- तेरी भाभी? उससे तेरी क्या दुश्मनी है जो तू उसको मुझसे चुदवाना चाहती है?</p>
<p>मैंने कहा- है बस … आप बोलो आप क्या ये कर सकते हो?<br />
वो बोला- पक्का तो नहीं, पर कोशिश कर सकता हूँ। लगता तो है जैसे उसे भी कुछ चाहिए, मगर अगर वो मान गई तो!<br />
मैंने कहा- वो मान गई तो मैं भी मान गई।<br />
वो बोला- तो अभी के लिए कुछ और भी कर जाओ।<br />
मैंने कहा- और क्या इतना तो नोच लिए मुझे।</p>
<p>उसने अपने पाजामे में अपना लंड हिलाते हुये कहा- इसका कोई इंतजाम कर जाओ।<br />
मैंने दुकान के बाहर देखा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके पाजामे के ऊपर से उसका लंड पकड़ा और दबाने लगी। मोटा सा लंड मेरे थोड़ा सा दबाने से ही खड़ा हो गया। मगर जब मैं छोड़ने लगी, तो उस्मान ने मुझे पकड़ लिया।<br />
मैंने कहा- मुझे जाने दो।<br />
वो बोला- एक मिनट बस।</p>
<p>कहकर उसने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और अपना लंड निकाल कर मेरी तरफ किया और मुझे नीचे को दबाने लगा। मैं समझ गई कि साला लंड के चुप्पे लगवाना चाहता है।<br />
मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और 5-7 बार ज़ोर ज़ोर से चूस लिया और बस फिर तो मैं छोड़ कर भागी।</p>
<p>इससे उसको भी एतबार हो गया कि मैं उससे पट गई, और मुझे भी कि अब ये पक्का मेरी भाभी को पटायेगा।</p>
<p>वक़्त गुज़रता गया, करीब तीन महीने बाद एक बार मैं जब उस्मान की दुकान पर गई, तब वो बोला- सुन … जांघों पर तेल मल ले अपनी!<br />
मैंने पूछा- क्यों?</p>
<p>तो उसने अपने मोबाइल में कुछ पिक्स दिखाई, जिसमें मेरी भाभी उस्मान के साथ किस कर रही थी, उसको बांहों में भर रही थी।<br />
मैंने कहा- उस्मान भाई, बस अब एक काम करो, मेरी भाभी की चूत को मेरे सामने ठोकना, उसके बाद जब कहोगे मैं तुम्हारी।<br />
वो बोला- दिक्कत क्या है, दोनों ननद भाभी को एक साथ ठोक दूँगा, तू बता पहले तू चुदेगी, या तेरी भाभी?<br />
मैंने कहा- पहले भाभी … वो भी मेरे सामने, उसके बाद मैं अपनी पूरी एक रात तुमको दूँगी। उस रात अपनी सुहागरात होगी।</p>
<p>अब एक खूबसूरत नौजवान लड़की किसी को ऐसी पेशकश करे तो भला कौन टाल सकता है।</p>
<p>फिर एक दिन उस्मान ने कहा- कल तेरा भाई बाहर जा रहा है, कल मैं तेरे घर आऊँगा, तेरी भाभी की चूत चोदने! तू बता, तू कल चुदेगी, या बाद में?<br />
मैंने कहा- पूरी रात दूँगी आपको उस्मान भाई, बस मेरी भाभी की माँ बहन एक कर देना, उसको खूब गाली देना, मारना, तड़पाना, जलील करना। बस यही ख़्वाहिश है मेरी!<br />
वो मान गया।</p>
<p>अगले दिन करीब 12 बजे वो आया, तब मैं अपनी माँ के साथ किसी काम से बाज़ार चली गई।<br />
भाभी अकेली थी घर पर!</p>
<p>मगर मैं माँ को उनकी एक सहेली के घर बैठा कर, यह कह कर कि ‘आप बात करो, मैं आधे घंटे में आई।’ वापिस अपने घर आ गई।</p>
<h2>चुद गयी भाभी की चूत</h2>
<p>घर आई तो भाभी के कमरे का दरवाजा बंद था। मतलब उस्मान अंदर था।</p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।</p>
<p>मैंने भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से उस्मान ने ही दरवाजा खोला और मुझे अंदर ही खींच लिया।<br />
मैंने जब अंदर देखा, भाभी बेड पर बैठी थी, शायद बिल्कुल नंगी थी क्योंकि बेड से नीचे मैंने उसकी साड़ी, ब्रा और पेटीकोट गिरा पड़ा देखा, उस्मान भी बिल्कुल नंगा था।<br />
काला बदन, मगर बेहद खतरनाक, जैसे कोई जल्लाद हो, लंबा चौड़ा और भयावह।<br />
और उससे भी खतरनाक उसका लंड, जैसे कोई काला नाग हो।</p>
<p>भाभी मुझे देख कर चौंकी- रूपा … तुम तुम कहाँ से आ गई?<br />
शायद वो मेरे सामने अपना ये राज़ नहीं खोलना चाहती थी।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे चिंता मत कर मेरी जान … तेरे बाद उसकी भोंसड़ी भी लेनी है मुझे।<br />
भाभी थोड़ हैरान हो कर बोली- रूपा तू भी?<br />
मैं मुस्कुरा दी- बस क्या बताऊँ भाभी … पता नहीं इनकी बातों में क्या जादू था, मैं खुद को रोक ही नहीं पाई। और जब इन्होंने आपका बताया तो मैंने कहा कि ‘भाभी बड़ी हैं पहले उसको … फिर मुझको।’</p>
<p>भाभी के चेहरे पर एक विश्वास की चमक आ गई कि अगर मैं इसके सामने नंगी हुई हूँ, तो ये भी तो इस पठान से चुदवाएगी।<br />
मैंने भाभी को विश्वास में लेने के लिए अपनी सलवार उतार दी और सामने सोफ़े पर ही बैठ गई।</p>
<p>उस्मान भाभी के पास गया और उसने भाभी के जिस्म से चादर खींच कर उसे नंगी कर दिया।<br />
क्या शानदार जिस्म की मल्लिका है भाभी मेरी … गोरा, बेदाग चिकना जिस्म।<br />
दो बच्चों की माँ … मगर किसी भी मर्द का ईमान बिगाड़ दे, ऐसी सुंदरता।</p>
<p>मगर अब वो किसी इंसान के सामने नहीं … बल्कि एक वहशी के सामने नंगी लेटी थी।</p>
<p>उस्मान सीधा उसके ऊपर जा कर लेट गया और लेटते ही उसने भाभी की दोनों टाँगें खोली, और अपना काला भुसंड लौड़ा भाभी की गुलाबी फुद्दी में घुसेड़ दिया।</p>
<p>भाभी इस अकस्मात हमले के लिए तैयार नहीं थी, शायद वो उस्मान से पहले कुछ प्रेमालाप की उम्मीद लगाए बैठी थी. मगर जब उसने अपना लंड भाभी की फुद्दी में डाला, भाभी की तो चीख ही निकाल गई- अरे … आह उस्मान भाई धीरे!<br />
मगर उसे तो जैसे कोई जन्नत की हूर मिल गई हो और वो उसे जल्द से जल्द चोद कर अपनी हवस मिटा लेना चाहता था।</p>
<p>बस दो चार घस्सों में ही उसने अपना लौड़ा भाभी की चूत में घुसा दिया। मोटा, लंबा और खुरदुरा लंड लेकर भाभी खुश थी।<br />
“उस्मान तेरा औज़ार तो बहुत तगड़ा है.” वो बोली।<br />
उस्मान बोला- क्यों तेरे खसम का छोटा है क्या?<br />
भाभी बोली- छोटा भी, पतला भी, और कमजोर भी। तू तो बहुत दमदार है रे!</p>
<p>उस्मान के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी। बोला- साली अभी तूने मेरा दम देखा कहाँ है, अभी तो सिर्फ पठान का लौड़ा देखा है, जब मैं अपनी आई पे आऊँगा, तब देखना तेरी माँ न चोद कर रख दी, तो कहना!<br />
और वो भाभी के फुद्दी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.</p>
<p>तो मोटे लंड की रगड़ से भाभी भी मस्ती में आ गई और वो लगी सिसकारियाँ भरने। वही सिसकारियाँ जो वो मेरे भाई के साथ सेक्स करते हुये भरती थी।<br />
और अपने सामने प्रत्यक्ष चुदाई होते देख कर मेरी फुद्दी भी पानी पानी होने लगी और मैंने भी अपनी टाँगें खोल कर उनको देखते हुये अपनी फुद्दी में उंगली करना शुरू कर दिया।</p>
<p>उस्मान मेरी और देख कर बोला- अरे तू क्यों उंगली कर रही है मादरचोद। इधर आ … और देख पठान का लौड़ा, तेरी चूत का भोंसड़ा न बना दूँ तो कहना, इधर आ।</p>
<p>मैं उठ कर उनके पास ही बेड पर बैठ गई तो उस्मान ने मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी जांघें और मेरी फुद्दी नंगी कर दी। मेरी हल्की हल्की झांट पर हाथ फेर कर बोला- अपनी कमीज़ उतार! मैंने अपनी कमीज़ उतार दी, अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी।</p>
<p>उस्मान मेरे मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- क्या मुलायम माल है साली, जैसी माँ मलाई, वैसी बेटी मक्खन!<br />
भाभी तो एकदम से बोली- तो क्या उस्मान … तूने मम्मी जी को भी चोदा है?<br />
शायद वो जानना चाहती थी कि कहीं मेरी मम्मी का कोई कारनामा पता चले ताकि कल को वो उस बात को मेरी माँ के खिलाफ इस्तेमाल कर सके।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे नहीं, मैंने इसकी माँ नहीं चोदी, पर जब भी देखता हूँ, तो सोचता हूँ कि बुढ़िया इस उम्र में इतनी हसीन है, तो जवानी क्या कयामत रही होगी। हाँ अगर मौका मिले तो मैं तो साली बुड्ढी को आज भी चोद दूँ।</p>
<p>मैंने उस्मान से कहा- पहले जिसको चोद रहे हो, उसको तो चोद लो।<br />
उस्मान बोला- अरे ये अब कहाँ जाएगी, आज के बाद अगर ये अपने पति के पास भी चली जाए तो मेरा नाम बादल देना।</p>
<p>भाभी बोली- अच्छाजी, ऐसी क्या बात है तुम में?<br />
उस्मान बोला- तो ले साली छिनाल, अब देख, तेरी चीखें तेरी माँ को न सुना दी तो कहना।</p>
<p>उसके बाद उस्मान ने भाभी की चूत को खूब पेला, इतनी ज़ोर से पेला कि भाभी का चीख चीख कर गला भर आया, उसकी आँखों से आँसू बह निकले- उस्मान, नहीं धीरे धीरे उस्मान, नहीं, उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई मैं मेरी माँ … नहीं उस्मान धीरे … आह … बस रुक कमीने साले … बस आह।</p>
<p>मगर एक कमजोर औरत जिसको हट्टे कट्टे उस्मान ने अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि भाभी तो हिल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ रो रही थी, चीख चिल्ला रही थी।<br />
उस्मान तो सच में बड़ी बेदर्दी से मेरी भाभी को चोद रहा था।<br />
मुझे तो उसे देख कर अपना डर लगने लगा कि जब ये मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरा क्या हाल करेगा। </p>
<p>जितना भाभी चीख रही थी, उस्मान को उतना ही मज़ा आ रहा था और वो भी उसे उतना ही और तकलीफ दे रहा था- चीख, भैन की लौड़ी, तेरी माँ को चोदूँ, साली कुतिया की औलाद, चीख और शोर मचा, साली कैसे रंडी की तरह ड्रामा करती है, किसने सिखाया इस तरह चीखना, तेरी माँ ने या तेरी बहन ने। साली वो भी क्या ऐसी ही रंडियाँ हैं तेरी तरह? बुला उनको भी … यहीं इसी बिस्तर पर तेरे सामने तेरी माँ चोदूँगा, कुतिया, साली … तेरी बहन की भी इसी बिस्तर पर गांड के चीथड़े उड़ा दूँगा। और ये तेरी ननद, इसकी फुद्दी का फूल भी मैं ही खिलाऊँगा।</p>
<p>और पता नहीं क्या क्या उस्मान भाभी को और उसे खानदान की सब औरतों की गालियां देता रहा।</p>
<p>मगर जैसे उसने भाभी को शिकंजे में कस कर उसकी चुदाई कर रहा था, उसे देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।<br />
मैं भी उनके बिल्कुल पास भाभी की चूत चुदाई देख कर अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी। पांच मिनट में मेरी तो फुद्दी पानी छोड़ गई मगर उस्मान नहीं रुका।</p>
<p>भाभी ने भी थोड़ी देर बाद कह दिया- उस्मान भाई, मेरा हो गया, बस तू भी अपना पानी गिरा दे।<br />
मगर उस्मान बोला- अरे रंडी की औलाद, अभी तो मैं शुरू ही किया है, अभी तेरी माँ कहाँ चुदी है, अभी देख तो तेरी फुद्दी अभी भी सफ़ेद पड़ी है, इसे लाल तो होने दे।</p>
<p>कुछ देर और बैठी मैं उसकी चुदाई देखती रही मगर फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।<br />
उस्मान बोला- अरे तू क्यों कपड़े पहनने लगी?<br />
मैंने कहा- मम्मी को लेने जाना है।<br />
वो बोला- अरे यार ये क्या बात हुई? अभी तो इस कुतिया को चोदने में मज़ा आने लगा था।</p>
<p>मगर मैं चली आई। बाद में शायद उस्मान भी चला गया होगा।<br />
जब मैं मम्मी को लेकर घर आई तो घर पर भाभी ही अकेली थी. मगर उसकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उसकी तसल्ली से पिटाई की हो।</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ, आपकी तो बड़ी हालात खराब लग रही है?<br />
वो बोली- अरे पूछा मत, कहाँ पंगा ले लिया मैंने। तेरे जाने के बाद, साले ने मेरी पिटाई भी करी, और मैंने गुस्सा किया, तो साले ने ज़बरदस्ती पीछे गांड में डाल दिया। इतना दर्द हो रहा है न नीचे, क्या बताऊँ।</p>
<p>बेशक मैं भाभी के साथ उसका दुख सांझा कर रही थी, मगर अंदर ही अंदर मैं खुश थी कि साली तूने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया था, देखा उसका नतीजा, गांड फाड़ कर रख दी तेरी।</p>
<p>फिलहाल इतना ही बाकी फिर कभी।<br />
कैसी लगी मेरी भाभी की चूत की चुदाई स्टोरी?<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सलहज के साथ प्यार और सेक्स</title>
		<link>https://kahani18.com/sali-sex/salhaj-love-aur-sex/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:30:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sali Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरे साले की शादी उससे आधी उम्र की लड़की से होने से मेरी सलहज सेक्सुअली संतुष्ट नहीं थी. मेरी कामुक नजर भी उस पर थी. आखिर मैंने उसे कैसे चोदा. पढ़ कर मजा लें! मेरा अनिल है और मेरी सलहज का नाम विशाखा है. मेरी सलहज काफ़ी सुंदर है, मैंने ही अपने साले की शादी <a title="सलहज के साथ प्यार और सेक्स" class="read-more" href="https://kahani18.com/sali-sex/salhaj-love-aur-sex/" aria-label="Continue reading सलहज के साथ प्यार और सेक्स">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे साले की शादी उससे आधी उम्र की लड़की से होने से मेरी सलहज सेक्सुअली संतुष्ट नहीं थी. मेरी कामुक नजर भी उस पर थी. आखिर मैंने उसे कैसे चोदा. पढ़ कर मजा लें!<br />
<span id="more-301"></span></p>
<p>मेरा अनिल है और मेरी सलहज का नाम विशाखा है. मेरी सलहज काफ़ी सुंदर है, मैंने ही अपने साले की शादी उससे कराई थी. मेरे साले मेरे से रिश्ते में बड़े हैं, मेरी जब शादी हुई थी, तो मेरे साले टेलीकॉम सेक्टर में जॉब करते थे. हालांकि उनकी उस वक्त शादी नहीं हुई थी. मेरी शादी के बाद मेरे ससुर ने मुझसे कहा कि दामाद जी अब आप ही मेरे बड़े बेटे की कहीं शादी तय करवाइए. </p>
<p>मैंने ओके कह दिया और अपने साले के लिए लड़की ढूँढ़ने लगा. ऐसे ही एक दिन मेरे एक रिश्तेदार ने मुझसे कहा कि मेरी नजर में एक लड़की है, काफी अच्छी है पर अभी बारहवीं का एग्जाम दे रही है.<br />
मैंने पूछा कि लड़की की उम्र क्या होगी?<br />
उन्होंने कहा- अभी उन्नीस साल की हुई है. पर गरीब खानदान से है और उसकी शादी सिर्फ एक जोड़े में ही हो सकेगी.<br />
मैंने कहा- चलो बालिग तो है ही, शादी हो सकती है. </p>
<p>इधर मेरे साले की उम्र 35 साल हो चुकी थी. मैंने अपने उन रिश्तेदार को बताया कि लड़के की उम्र ज्यादा है, आप बात करके देखो, यदि बात बन जाए, तो साले की शादी हो जाएगी. </p>
<p>उस लड़की के पिता थोड़ा ग़रीब थे, इसलिए उन लोगों ने शादी करने के लिए हां भर दी. </p>
<p>जब मैं शादी में दूल्हा को लेकर स्टेज पर गया, तब मेरी सलहज मुझे ही लड़का समझ रही थी. वो इसी ग़लती से मेरे गले में वरमाला डालना चाह रही थी, फिर मैंने इशारा किया तो वो शरमा गयी.<br />
उसकी ये हरकत मेरे दिल को भा गयी. शादी के बाद हम लोग वापिस आ गए.</p>
<p>उसकी ये हरकत से मैं काफ़ी गर्म हो गया था. जब मैं सुसराल पहुंचा, तो मैंने अपनी बीवी को चार बार चोद दिया. </p>
<p>बीवी बोली- क्या बात है … भाभी के आने की खुशी में मेरी चूत का भोसड़ा बना देने पर तुले हो क्या.<br />
मैं हंस दिया और उसकी चुम्मी ले ली.</p>
<p>शादी के कुछ दिनों के बाद मेरे साले की नौकरी छूट गयी, जिस वजह से सुसराल में रोज लड़ाई हो रही थी. उसकी बीवी शायद उससे सेक्सुअली भी संतुष्ट नहीं थी. इसका कारण आधी दुगनी उम्र का अंतर होना भी हो सकता था. मुझे ये बात समझ आ गयी थी कि विशाखा मुझसे चुद सकती है. मैं बस मौका तलाश कर रहा था.</p>
<p>एक दिन मेरे ससुर ने मुझे फोन किया कि आपके साले और उसकी बीवी को आपके पास दिल्ली भेज रहा हूँ. इसकी कहीं नौकरी लगवा दीजिएगा, आपका बड़ा उपकार होगा.<br />
मैंने भी कहा कि अरे इसमें उपकार की क्या बात है, मैं कुछ करता हूँ. आप उन दोनों को इधर भेज दीजिएगा.</p>
<p>मेरे दिलो दिमाग में अभी भी सलहज की मस्त जवानी छाई हुई थी. मुझे लगने लगा कि यदि साले की नौकरी कहीं दूर लगवा दी जाए, तो मैं विशाखा को चोद सकता हूँ.</p>
<p>जब मेरे पास दोनों आए, तो मैंने अपनी बीवी को दोनों का खास ध्यान देने के लिए कहा था. मैंने अपने साले को कहा आप आराम से नौकरी खोजिए … मैं भी आपके लिए कुछ करता हूँ. घर की कोई समस्या नहीं है. मैं आपका जीजा हूँ, आप दोनों इधर ही आराम से रहिए. आपको और आपकी बीवी को यहां कोई दिक्कत नहीं है. </p>
<p>दोस्तो, सबसे पहले आपको अपनी सलहज विशाखा के फिगर के बारे में बता दूं. उस वक्त उसकी चुचियां 34 साइज़ की थीं … कमर 26 की पीछे उसकी गांड 32 की उभरी हुई थी. उसकी निगाहें मेरी तरफ बड़ी कामुक सी रहती थीं. मैंने उसकी चुदास को समझ लिया था. बीवी की नजर बचा उसके साथ हल्के फुल्के मजाक करते समय भी मैं उसको टच कर देता था, जिससे वो मुझे मुस्कुरा कर देख लेती थी.</p>
<p>मेरे साले की नौकरी नॉएडा में लग गई थी. जिधर से उसको आने जाने काफी देर लगती थी. चूंकि प्राइवेट सेक्टर की जॉब थी, सो आने का कोई वक्त निश्चित भी नहीं रहता था. मैं जल्दी आकर विशाखा से हंसी मजाक करके उसको पटाने के चक्कर में रहता था.</p>
<p>एक दिन की बात है मेरा साले ने फोन करके बताया कि आज मैं आपके घर पर नहीं आ पाऊंगा, काम का लोड ज्यादा है, इसलिए आप विशाखा का ख्याल रखना. </p>
<p>रात में वो बेचारी अकेले दूसरे कमरे सोई हुई थी, जब मैं अपनी बीवी को रात में चोद रहा था, तो मुझे लगा कि कोई मुझे छुप कर देख रहा है. मैंने देखा तो वो शायद विशाखा थी. मैं उसकी तरफ मुँह करके अपना लंड दिखा कर चुदाई करता रहा. उस वक्त मैं चोद तो अपनी बीवी को रहा था … पर मुझे महसूस हो रहा था कि मैं अपनी सलहज को चोद रहा हूँ.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने पानी छोड़ा तो विशाखा उधर से हट गई. अब वो मुझे साफ़ नजर आ गई थी. मेरा शक सही था, वो कोई और नहीं … मेरी सलहज विशाखा ही थी, पर ये बात मैंने अपनी बीवी को नहीं बताई. </p>
<p>चुदाई के बाद बीवी बोली- यार मुझे तो ठंड सी लग रही है.<br />
मैंने उसे एक बुखार की दवा के साथ दो गोलियां नींद की भी दे दीं. मेरी बीवी चुदाई की थकान से और नींद की गोलियों के नशे में घोड़े बेच कर सो गई.</p>
<p>मैं दो बजे रात को उठा, तो मेरा लौड़ा टाइट था और बिल्कुल लोहे के रॉड की तरह कड़क था. </p>
<p>मैंने देखा कि मेरी बीवी गहरी नींद में सोई पड़ी है, मैं सीधा अपने सलहज के कमरे में आ गया. वो बेचारी चुदास की मारी सिर्फ़ ब्रा और पेंटी सोई पड़ी थी. जैसे ही मैंने उसके होंठों पर किस किया, तो उसने मुझको कसकर अपने उभरी हुई चुचियों से चिपका लिया. </p>
<p>विशाखा कहने लगी- मैं आपको अपने शादी के टाइम से लाइक कर रही थी, पर बोलने में डर लगता था. जब मैंने आज आपको चोदते देखा, तो मैं काफ़ी व्याकुल हो गयी थी. जब मैंने आपके लौड़ा को देखा, तो उसी वक्त से अपनी भोस में उंगली कर रही थी. फिर पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गयी.<br />
मैंने भी उसे ‘आई लव यू’ बोल दिया. </p>
<p>इसके साथ ही विशाखा के मुँह में अपनी जीभ डालकर एक दूसरे को चूसने लगा. फिर मैंने उसकी ब्रा को खोला और उसकी गोरी गोरी चुचियों को मुँह में लेकर खूब चूसा.<br />
विशाखा मुझसे बोली- जीजा जी … मुझे आपका लंड चूसना है. </p>
<p>मैं राजी हो गया. इतने में उसने जोश में आकर मेरा निक्कर खोल दिया और मेरे लम्बे और मोटे लंड को मुँह में लेकर भूखी रंडी की तरह चूसने लगी.<br />
इस तरह मैं भी 69 में आकर उसकी मखमली चूत जीभ पर मारकर चाटने लगा. फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डालकर उसे पूरा गर्म कर दिया, जिससे उसकी चूत से रस निकल गया. उसकी चूत के रस को मैं पूरा चट कर गया और वो भी मेरे लंड का रस पी गयी. </p>
<p>इसके बाद हम दोनों बाथरूम में मूत कर आए. कुछ देर बाद वो फिर से मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी. उसने दो मिनट में ही मेरे लंड को खड़ा कर दिया.<br />
अब विशाखा बोली- मेरे सोना … अपनी सलहज की जवान चूत में अपने लौड़े को जल्दी से पेल दो. </p>
<p>इस बार मैंने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर उसके चूत में घुसाना शुरू किया. उसकी चूत बड़ी टाईट थी. लंड घुस ही नहीं रहा था. मैंने चूत की फांकों में लौड़ा फंसाया और धक्का मार दिया. इस धक्के से मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया. वो जोर से चिल्लाने को हुई, पर मैंने उसके मुँह पर हाथ लगाकर बंद कर दिया. फिर बिना रुके धक्का मारकर लंड पूरा अन्दर बाहर करने लगा. </p>
<p>विशाखा के मुँह से ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहो उई उई’ की आवाजें निकल रही थीं. लेकिन कुछ देर बाद वो मज़े से चुदने लगी थी. मैं लंड पेलते हुए उसके गोरे गोरे चुचों को बेरहमी से मसल रहा था. वो मेरे को मदहोश होकर प्यार कर रही थी. </p>
<p>जब मेरा वीर्य निकलने वाला था, तो मैंने पूछा कि माल कहां निकालूं?<br />
वो बोली- मेरी बुर में ही गिरा दीजिए.<br />
मैं बोला- ऐसे में तो तुम पेट से रह जाओगी.<br />
तो वो बोली- मैं पहले से ही प्रेगनेंट हूँ, बस अभी एक महीना ही हुआ है.</p>
<p>उसका इतना बोलते ही मैंने सारा माल उसकी चुत में गिरा दिया. </p>
<p>फिर हम लोग अलग हुए और मैं कमरे में जाकर सो गया. सुबह हुए मेरी बीवी अपनी भाभी को डॉक्टर के यहां रूटीन चैकअप कराने ले गई. </p>
<p>जब शाम में मेरा साला वापिस अपने फ्रेंड के यहां से आया, तो उसने बताया कि मेरी जॉब यूपी में हो गई है. इसलिए हम लोग दो दिन बाद वापिस चले जाएंगे. </p>
<p>फिर वो दिन आ ही गया, मेरी सलहज मेरे को छोड़ कर चली गयी. मैं बहुत मायूस हो गया. </p>
<p>पर खुदा को लगा कि मैं फिर अपनी सलहज से मिलूं, ऐसा ही हुआ. इत्तेफाक से मेरा ट्रांसफर अपनी सुसराल में ही हो गया.<br />
मैंने अपनी बीवी को बताया कि मेरा ट्रांस्फर तुम्हारे मायके में हो गया है.<br />
यह सुनकर वो भी खुश हो गयी. </p>
<p>फिर हम लोग सुसराल के लिए निकल गए. जब मैं सुसराल पहुंचा, तो मेरी आंखें अपनी प्यारी सलहज विशाखा को देखकर मन खुश हो गया. इस बार जब मैंने देखा कि विशाखा की चुचियां अब करीब 36 डी की हो गयी थीं, क्योंकि वो एक बेबी की माँ बन गयी थी. </p>
<p>हम लोगों ने एक फ्लैट किराए से ले लिया था. चूंकि मैं अब अपनी ससुराल के शहर में था, तो मेरी बीवी अपनी माँ के साथ ज्यादा जाती रहती थी. </p>
<p>मैंने कुछ दिन के बाद सब जान लिया था कि ससुराल में किस वक्त मेरी सलहज अकेली रहती है. जब सुसराल में कोई नहीं रहता है, तो मैं चुपके से सुसराल पहुंच कर अपनी सलहज विशाखा को खूब चोदता हूँ. </p>
<p>इस बार विशाखा अपने पति के साथ रहने नहीं गई थी … क्योंकि उसका बेबी अभी छोटा था. इससे दो बातें मजेदार हुई थीं. एक तो विशाखा की चूत बिना लंड के चुदासी सी ही रहती थी. दूसरी बात ये कि उसकी चूचियों से दूध निकलता था, जो मुझे पीने में बड़ा मजा आता था.</p>
<p>दोस्तो, मेरी साली सलहज की चुदाई की कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताना … प्लीज़ मेल करना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/gand-chudai-sexy-chachi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:29:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Chachi Ki Chudai Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपने दोस्त की चाची की गांड की चुदाई कर डाली … एक दिन मैं अपने दोस्त के घर गया तो उसकी चाची से नजर मिली. उनकी कामुक आँखों से पता चल गया कि माल चंचल है और लंड ले सकती है. प्रणाम, मैं राहुल आप सबके लिए एक सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ. मैं <a title="गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/gand-chudai-sexy-chachi/" aria-label="Continue reading गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपने दोस्त की चाची की गांड की चुदाई कर डाली  … एक दिन मैं अपने दोस्त के घर गया तो उसकी चाची से नजर मिली. उनकी कामुक आँखों से पता चल गया कि माल चंचल है और लंड ले सकती है.<br />
<span id="more-295"></span></p>
<p>प्रणाम, मैं राहुल आप सबके लिए एक सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ. मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. यह कहानी मेरे दोस्त राज से सम्बन्धित है.</p>
<p>मैं राज के घर अक्सर जाता रहता था. राज मुझसे करीब पाँच साल छोटा है और उसका शरीर व शक्ल एकदम लड़की के जैसा है. मैं उसको लड़की ही की तरह देखता था और उसकी गांड मारने के बारे में सोचता रहता था, पर वो इस सबसे अन्जान था.</p>
<p>एक रोज मैं राज से मिलने उसके घर गया, तो बगीचे में एक जवान मदमस्त औरत को देख कर दंग रह गया. छोटे बाल, गदराया बदन, मखमली गोरी जांघें, भरा हुआ चेहरा, भरे भरे गाल. उसे देखते ही मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.</p>
<p>राज की आवाज सुनकर मैं चौंका और पूछने पर उसने बताया कि यह उसकी चाची है और कुछ दिनों के लिए आई है. क्योंकि मेरे घर वाले कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे है. इसलिए चाची मेरी देखभाल के लिए आ गई हैं.</p>
<p>मैं सोच रहा था कि अगर राज अकेला होता, तो मैं उसकी गांड मार सकता था. लेकिन अब मैं उसकी चाची की गांड भी मारने की सोचने लगा था.</p>
<p>चाची से मेरी निगाह मिली, तो उनकी कामुक आँखों ने मुझे काफी कुछ बता दिया था कि ये माल चंचल है और लंड ले सकती है.</p>
<p>मैंने राज से कहा- चल थोड़ा बाहर चल कर घूमते हैं.<br />
वह मेरे साथ आ गया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर वाले कब जा रहे हैं?<br />
तो उसने बताया- कल सुबह छह बजे की ट्रेन है.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं, पाँच छः दिन मस्ती करेंगे.<br />
वो बोला- नहीं यार कालेज का एक बहुत जरूरी प्रोजेक्ट है, जिसमें मुझे बहुत व्यस्त रहना होगा.<br />
मैं उससे बोला- कालेज की छुट्टी कर लो.<br />
पर उसने एकदम से मना कर दिया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा कि कालेज कब जाओगे?<br />
वो बोला- सुबह आठ बजे और शाम को चार बजे वापस आऊंगा.</p>
<p>यह सुन कर तो मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को हो गया … क्योंकि उतनी देर राज की चाची घर में अकेली रह जाने वाली थी. अब मैं उसकी चाची की गांड मारने की योजना बनाने लगा.</p>
<p>मैंने राज से कहा- चलो कल शाम को मिलते हैं.</p>
<p>रात भर राज की चाची मेरी आखों के सामने आती रहीं और मेरे लंड ने मुझको सारी रात सोने नहीं दिया. रात भर मैं उनको चोदने के बारे में सोचता हुआ कब सो गया, पता ही नहीं चला. </p>
<p>सुबह करीब आठ बजे मेरी आंख खुली, तो मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था. रात भर मैं राज की चाची की कभी गांड, तो कभी चूत मारता रहा. वैसे मुझे गांड की चुदाई करने में ज्यादा मजा आता है.</p>
<p>मैं नहा धोकर तैयार हुआ और नाश्ता करने लगा. मेरे दिमाग में तो राज की चाची ही घूम रही थीं और आज मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था. </p>
<p>मैंने अपने बदन पे तेल की अच्छी मालिश की और लंड की भी बहुत अच्छी तेल मालिश की. मैंने सिर्फ जीन्स पहनी, जिससे मेरा लंड बिल्कुल फ्री था. ऊपर मैंने टी-शर्ट डाल ली ताकि नंगा होने में आसानी रहे. सेक्स का मजा नंगे में ही आता है.</p>
<p>अब दस बज चुके थे. मुझको पता था कि राज कालेज जा चुका होगा और उसकी चाची अकेली होंगी.</p>
<p>मैं राज के घर की तरफ चल दिया और उसके घर से कुछ दूर मोटर साइकिल खड़ी दी. राज का घर थोड़ा सुनसान जगह पर सड़क से थोड़ी दूरी पर है. आसपास के घर भी थोड़ी दूरी पर बने हुए हैं.</p>
<p>मैं घर पर पहुंचा, तो सन्न रह गया. राज की चाची ने आसमानी रंग की स्कर्ट पहनी हुई थी और हल्के पीले रंग का टॉप पहन रखा था. वो नीचे बैठी हुई फूलों को देख रही थीं और अन्जाने में अपने संगमरमर जैसे जिस्म के दर्शन करा रही थीं. उनकी मखमली जांघों में से उनकी सफेद पैन्टी साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके बड़े बड़े चूचों का उभार भी उनके चुस्त टॉप से साफ दिख रहा था. </p>
<p>मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू किया लेकिन मेरा लंड पूरा बेकाबू हो गया था और खड़ा हुआ साफ दिख रहा था.</p>
<p>मैंने कंपाउंड गेट खटखटाया, तो चाची ने मुझे देखा और पूछा- आप कौन हैं?<br />
मैं- जी मैं राज का दोस्त हूँ.<br />
चाची- राज तो घर पर नहीं है.<br />
मैं- कहां गया है?<br />
चाची- कालेज गया है.<br />
मैं- कब तक आ जाएगा?<br />
चाची- शाम तक ही आएगा, बोल रहा था कि काफी काम है.</p>
<p>चाची का भरा पूरा बदन, मांसल गोरी जांघें, भरे भरे गाल … मेरे लंड की उठक बैठक करा रहे थे और शायद वो यह समझ भी गयी थीं. मैं उनसे बात करते हुए उनको घूर कर देख जो रहा था. मेरी निगाहें चाची के मदमस्त जोबन पर ही टिकी थीं. मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था.</p>
<p>मैं- आप कौन हैं?<br />
चाची- मैं राज की चाची हूँ.<br />
मैं- आप उसकी चाची लगती तो नहीं हो.<br />
चाची- क्यों इसमें लगने वाली क्या बात है?<br />
मैं- मेरा मतलब आप काफी कम उम्र की एक मार्डन और स्मार्ट लड़की सी लग रही हो ना … इसलिए कहा.<br />
मेरी बात पर वो हँस पड़ीं और बोलीं- तुम कहां से आए हो?<br />
मैंने बोला- काफी दूर से.<br />
वो बोलीं- आओ बैठो, चाय लोगे?</p>
<p>मैं अब इस मौकै का फायदा उठाना चाहता था. मैं गेट खोल कर उनके सामने जाकर अपना तना लंड और आंखों में मचल रहे उनको चोदने के इरादे जता देना चाहता था. वो मेरी वासना में डूबी आंखें देख कर इस चाहत को बखूबी समझ भी गई थीं.</p>
<p>मैं उनके एकदम पास जाकर बोला- जी जरूर . … पर आपको तकलीफ होगी.<br />
वो भी शायद अब मस्ती में आ गई थीं. वो इठला कर बोलीं- इसमें तकलीफ कैसी. आओ न मुझे भी अच्छा लगेगा.<br />
मुझे अब उनकी तरफ से हरा सिग्नल मिल चुका था. </p>
<p>मैंने कहा कि मेरी मोटर साइकिल बाहर खड़ी है … मैं उसको लेकर आता हूँ.<br />
वो बोलीं- ठीक है.</p>
<p>अब मैं थोड़ा रिलेक्स महसूस कर रहा था क्योंकि काफी हद तक मैंने उनको चोदने के लिए पटा लिया था. अब मैं आस पड़ोस के बारे में भी निश्चिंत हो जाना चाहता था कि ऐन वक्त पर कोई आ ना जाए. इस समय पड़ोस काफी सुनसान लग रहा था. लगता था कि जैसे कोई जंगल हो. </p>
<p>मैंने अपनी मोटर साइकिल को घर में लाकर गेट बंद कर दिया. फिर मैं घर के अन्दर चला गया और दरवाजे को बन्द कर दिया. अन्दर मेरी कयामत रसोई में चाय बना रही थी. </p>
<p>राज का घर तो काफी बड़ा था, लेकिन रसोई में फ्रिज की वजह से बहुत तंग जगह हो गई थी. जिस वजह से एक सतह दो लोग आपस में मिले बिना आ जा नहीं सकते थे. </p>
<p>मेरी दिलरुबा रसोई में चाय बना रही थी. मैं तेजी से उनके पीछे आ गया और अपने लंड को उनके चूतड़ों के बीच घुसा के एक धक्का दे मारा. </p>
<p>चाची का मुँह लाल हो गया. वो बोलीं- ये क्या कर रहे हो?<br />
मैंने अन्जान बनते हुए कहा कि मैं पानी लेने जा रहा था.<br />
वो बोलीं- मेरे को कह देते.<br />
अब मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था. मैं बोला- मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था.</p>
<p>यह बोल कर मैं उनकी जांघों को हाथ से सहलाते हुए हट कर कमरे में आ गया. चाची ने हंस कर मुझे समझ लिया.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उनकी खनकती हुई आवाज आई- लो इधर आकर ले लो.<br />
मैंने पूछा- क्या ले लूँ.<br />
चाची हंस कर बोलीं- चाय ले लो.<br />
मैं बोला- यहीं ले आओ.</p>
<p>वो चाय लेकर मेरे कमरे में आ गईं. वो जैसे ही कमरे में आईं, मैंने एकदम से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उनको पीछे से पकड़ लिया. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके चूचे मसल रहे थे.</p>
<p>एकदम से ये सब होने से वो थोड़ा घबरा सी गईं, पर मेरे बदन और लंड की गर्मी ने उन्हें मस्त सा कर दिया था.<br />
वो दबे हुए स्वर में बोलीं- क्या कर रहे हो?<br />
मैं बोला- आज तेरी गांड मारने का मन है.</p>
<p>मैंने उनको जोर से जकड़ रखा था. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके मम्मे मसल रहे थे.</p>
<p>मैं भी पूरा गर्म हो चुका था और उसे गालियाँ बके जा रहा था- तेरी माँ का भोसड़ा मारूं … हरामजादी कल से लंड तड़पा रखा है … कुतिया … रात भर तेरे गदराये बदन ने मेरी नींद उड़ा रखी थी साली … अब भुगत लंड का कहर.</p>
<p>मेरे ठोस बदन कड़कते लंड बदन की गर्मी ने उनको दर्द और मजा दोनों मिल रहा था. चाची के भरे बदन ने मुझे हैवान बना दिया था. मैं अपने लंड के धक्के उनकी गांड में मारे जा रहा था. मेरे दोनों हाथ चाची के चूचे निचोड़ रहे थे. </p>
<p>चाची भी अब तक गर्मा गयी थीं. मैंने मौका देख कर उनका टॉप अलग कर दिया. अब वो छिनाल ऊपर से पूरी नंगी मेरे सामने थी. मैंने जल्दी से अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपने नंगे बदन से उनकी नंगी पीठ को सटा दी. मैं चाची के मम्मों की घुन्डियां मसलने लगा. वो भी अब थोड़ी मदहोश सी हो गई थीं. </p>
<p>वो जैसे ही कुछ ढीली पड़ीं, मैंने तेजी से हाथ नीचे ले जाकर उनकी कच्छी को उतार दिया. </p>
<p>उफ्फ … अब उनके बदन पर सिर्फ स्कर्ट ही रह गयी थी. मेरे बदन में तो अब खून के बजाय सेक्स दौड़ रहा था. चाची की गोरी मांसल जांघों को तो मैं पहले ही देख चुका था और अब उनके नंगे कूल्हों ने मुझे मानो वहशी बना दिया था. </p>
<p>मैं उनकी फूली गुलाबी चिकनी चूत को देखकर पागल हो गया था. मेरा लंड तो अब पूरा लोहा बन कर सीधा खड़ा हो गया था. मैं बिल्कुल जंगलियों की तरह चाची पर टूट पड़ा. मेरे बोझ की वजह से वो पास के बिस्तर पर दोनों हाथ टिका कर झुक गईं, तो मैंने अपनी जींस निकाल दी.</p>
<p>मेरा लंड छुट्टा सांड की तरह लाल होकर खड़ा था. मेरे दिमाग पे तो जैसे शैतान सवार हो चुका था. मैंने चाची की दोनों टांगों को अपने हाथों से उठा लीं. मेरे हाथों की पकड़ इतनी कसी हुई थी कि वो एक बार के लिए सिहर सी गईं. </p>
<p>मैं गौर से उनकी चूत और गांड देखकर उत्तेजना से हांफ रहा था और मेरा लंड ऊपर नीचे हो रहा था. वो भी अब चुदने को बिल्कुल तैयार थीं. पर मेरे शैतानी दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. अब मैं चाची को जरा तड़पाना चाहता था, उनको दर्द देना चाहता था. उनसे अपनी एक रात की तड़फन का बदला लेना चाहता था. मैं भी उनको तरसाना चाहता था. </p>
<p>मुझे पता था कि चाची एक हफ्ते तक तो मेरी ही हैं. मैंने चाची की गांड की चुदाई की सोची, जिससे कि वो चुदवाने को तरसे और गांड में मेरे लौड़े का दर्द झेल लें. </p>
<p>मैंने उनकी टांगें छोड़ दीं, तो चाची ने चुदने के लिए अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं. </p>
<p>मैंने अपने लंड का सुपारा उनकी गांड के छल्ले के ऊपर करके लगा दिया और उनके चुच्चे मसलने लगा. मेरे लंड की गर्मी उनकी गांड के छल्ले को गर्म कर रही थी. पीछे से मेरा पूरा नंगा बदन उनको गर्म कर रहा था. मेरी गर्म सांसें धौंकनी की तरह उनके कानों को गर्माहट दे रही थीं. </p>
<p>वो अब निढाल हो गई थीं, उन्होंने जैसे ही अपनी गांड के छल्ले को थोड़ा ढीला छोड़ा, मैंने जोर मार कर अपने लंड को चाची की गांड में घुसा दिया. </p>
<p>वो दर्द से तड़प उठीं और ‘उईईई ईईईईई..’ चिल्लाते हुए बोलने लगीं- क्या कर रहे हो? वो गलत जगह है.<br />
चाची मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं, मगर मेरी मजबूत पकड़ की वजह से उनको कोई मौका नहीं मिल पा रहा था. </p>
<p>मैं- साली मैं तेरी गांड मार रहा हूँ.<br />
चाची- आह कुत्ते … मुझे दर्द हो रहा है … बाहर निकाल इसे.<br />
मैं- कुतिया तूने कल से मुझे परेशान किया हुआ है … अब भुगत.<br />
चाची- हरामजादे किसी लड़की से नहीं किया क्या कभी … या लड़कों की ही मारता रहा?<br />
मैं- भोसड़ी की, तेरी तो आज गांड ही बजेगी.</p>
<p>यह बोल कर मैंने पूरी ताकत से पूरे लंड को चाची की गांड में अन्दर घुसा दिया. वो दर्द से बिलख पड़ीं ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’</p>
<p>पूरा लंड पेलने के बाद मैंने उनको कुछ देर तक ऐसे ही जकड़े रखा. उसके बाद मैंने गांड की चुदाई शुरू की, हल्के हल्के धक्के मारने शुरू किए. वो दर्द से रोने लगीं, लेकिन मुझे उनको रोता देखकर मजा आ रहा था. मेरे धक्कों से जब वो बहुत रोने लगीं, तो मैंने उनको जकड़ कर लंड पूरा घुसा दिया और उनकी चूत सहलाने लगा. थोड़ी देर चूत सहलाने पर उनका दर्द कुछ कम हो गया. </p>
<p>अब मैंने अपनी उंगली उनकी चूत में घुसा दी और चूत में उंगली करने लगा. इससे उनको दर्द और मजा दोनों आ रहे थे. मैंने लंड के धक्के मारने शुरू कर दिए … साथ ही साथ चूत में उंगली भी कर रहा था. </p>
<p>कुछ ही पलों में वो एक अलग ही मस्ती में आ गई थीं. चाची दर्द और मजा दोनों एक साथ ले रही थीं. मैं भी अब अपने लंड को पूरा अन्दर बाहर कर रहा था और चाची की चूत में उंगली किए जा रहा था. </p>
<p>चाची को अब गांड मरवाने में मजा आने लगा था और वो अब मेरे लंड पे अपनी गांड के धक्के मार रही थीं. ये देख कर मैंने एक हाथ से उनके चूचे दबाने चालू कर दिए और दूसरा हाथ चूत में उंगली करने में लगाए रखा. मेरा लंड पिस्टन की तरह उनकी गांड में घचाघच करे जा रहा था. </p>
<p>थोड़ी देर में चाची की चूत ने पानी छोड़ दिया और अपनी गांड भींच ली. तभी मेरा लंड भी फैलने लगा, वो दर्द से चिल्लाईं … लेकिन मैं अब गांड की तेज चुदाई करने लगा. थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गया. वो भी एकदम से निढाल हो गई थीं और मैं भी बेसुध उनके ऊपर पड़ गया था.</p>
<p>काफी देर बाद वो मेरे नीचे से निकलीं. मैंने भी जल्दी से कपड़े पहने. वो भी कपड़े पहन चुकी थीं.</p>
<p>मैंने उनको कसके अपनी छाती से लगा कर उनको बहुत चूमा- कैसा लगा मेरा अन्दाज?<br />
वो शरमा गईं.<br />
तब मैंने उनके होंठों को चूमते हुए कहा- आज आपकी गांड की चुदाई की … कल आपकी चूत चोदेंगे.<br />
ये बोल कर मैंने उनकी चूत पकड़ ली.<br />
वो हंस पड़ीं और मैं वहां से निकल गया.</p>
<p>चाची की गांड की चुदाई कहानी पर आप अपने मेल मुझे जरूर भेजिएगा.<br />
[email protected]</p>
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		<title>होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hotel Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और… हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण <a title="होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/" aria-label="Continue reading होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और…<br />
<span id="more-291"></span></p>
<p>हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण परिवार है लेकिन हम लोग बहुत अच्छे से रहते हैं. मेरा भाई मुझसे बड़ा है. मेरी मम्मी हाउसवाइफ है और पापा का अपना काम है और भाई नौकरी करते हैं.</p>
<p>मैं भी एक अच्छी सी जगह नौकरी करती हूँ जो मेरे भाई ने लगवाई है. मैं और मेरा भाई हम दोनों साथ में ही नौकरी करने जाते हैं. मैं अपने भाई एक साथ ऑफिस जाती थी और अपने भाई के साथ ऑफिस से आती थी.</p>
<p>मैं अपने आपको बहुत अच्छे से रखती हूँ मतलब मैं बहुत खूबसूरत हूँ. मेरा फिगर भी बहुत अच्छा है और मेरी गांड थोड़ी सी सेक्सी है. मतलब कि जब मैं चलती हूँ तो मेरी गांड ऊपर नीचे हिलती है. मेरी चूची भी बड़ी बड़ी है और मैं खाते पीते घर की हूँ तो मेरा फिगर बहुत अच्छा है.</p>
<p>मुझे ऑफिस में बहुत सारे लोग घूरते रहते है. ऑफिस में एक लड़की जिसका नाम मौलीश्री है, मेरी सहेली बन गयी और हम दोनों एक दूसरे से घुलमिल गयी. वो लड़की बहुत चालू थी और उसने ऑफिस में ही कई बॉयफ्रेंड बनाये हुए थे. वो सबसे मजा लेती थी.</p>
<p>ऑफिस में और उसके साथ रहते रहते ऑफिस में एक लड़के जगेश के साथ मेरी भी बातें होने लगी. मेरे भाई को ये बात पता नहीं थी कि ऑफिस में एक लड़का मेरा दोस्त बन गया है. मेरी सहेली मौलीश्री एकदम खुल कर बात करती थी और उसके साथ रहते रहते मैं भी खुल गयी थी.</p>
<p>एक दिन मैं अपने रूम में सो रही थी तो भाई के रूम में लाइट चालू थी. भाई हमेशा अपने रूम की लाइट बंद करना भूल जाते थे इसलिए मैं उनके रूम में उनके रूम का लाइट बंद करने के लिए गयी तो देखा कि भाई अपने मोबाइल में पोर्न देख कर मुठ मार रहे थे.</p>
<p>मैं ये खिड़की से देख कर बाहर आ गयी. भाई को देख कर मुझे भी अपने मोबाइल में पोर्न देखने का मन किया तो मैं अपने मोबाइल में पोर्न देखने लगी.</p>
<p>मेरे मोबाइल में पोर्न पहले से ही था क्योंकि मेरे ऑफिस में जो लड़की मेरी सहेली बनी थी, वो मुझे हमेशा पोर्न भेजती रहती थी. उसके बॉयफ्रेंड उसको पोर्न विडियो भेजते थे तो वो मुझे भेजती थी. मैं उससे दोस्ती करने के बाद ही इतना बिगड़ गयी थी कि मैं रोज मोबाइल में पोर्न देखने के बाद और अपनी चूत में उंगली करने के बाद ही सोती थी.</p>
<p>मैं अपनी ऑफिस वाली सहेली मौलीश्री के साथ रहते रहते कभी कभी भाई से छुपकर घूमने भी चली जाती थी. मौलीश्री मेरे घर से कुछ दूरी पर रहती थी और वो अपनी स्कूटी से आती थी तो हम दोनों सहेलियां जिस दिन हम लोग की छुट्टी रहती थी, घूमने जाती थी.</p>
<p>मैं भी अपने ऑफिस वाले लड़के से बात करती थी और ऐसे ही मौली के कहने पर मैं भी उसके साथ घूमने जाने लगी.</p>
<p>हम दोनों एक दिन घूमने गए थे और जगेश ने मुझे उसकी गर्लफ्रेंड बनाने के लिए मुझे कहा. उस वक्त तो मैंने उसे कुछ नहीं कहा पर अगले दिन मैंने अपनी सहेली से पूछने के बाद उसको हाँ बोल दी.<br />
और अब मैं और जगेश हम दोनों एक दूसरे के साथ रोज बात करने लगे.</p>
<p>मेरी सहली मौली मुझे बताती थी कि वो अपने बॉयफ्रेंड से कैसे चुदाई का मजा लेती है तो मुझे भी चुदवाने का मन करता था और मेरी चूत भी गीली हो जाती थी. मैं मौली से पूछती थी कि ‘कैसे चुदवाती हो’ तो वो सब कुछ खुल कर बताती थी.<br />
मेरे अन्दर की वासना जग गयी थी और मुझे भी चुदवाने का मन करता था. मैं रोज रात को अपनी चूत उंगली करती थी लेकिन अब मेरा उंगली करने से भी ज्यादा सेक्स करने का मन करता था.<br />
मेरी सहेली ने मुझे बताया कि मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स कर लूं क्योंकि वो भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स करती थी.</p>
<p>एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड जगेश ने मुझे किस करते हुए बोला कि वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता है. हम दोनों बहुत दिन से एक दूसरे के साथ थे. मैं भी सेक्स करना चाहती थी तो मैं भी मान गयी. मेरी सहेली के बताये होटल में जाने का हम दोनों ने एक दिन तय कर लिया. मैं बहुत खुश थी कि आज मुझे लंड से चुदवाने के लिए मिलेगा क्योंकि मैं अपनी चूत में उंगली करते करते एकदम बोर हो गयी थी. मुझे लंड से चुदवाने का मन करता था.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड दोनों होटल में गए और उसने रूम लिया. होटल रूम में जाने के बाद हम एक दूसरे को किस करने लगे. वो मुझे किस करते हुए मेरी गांड को भी दबा रहा था.</p>
<p>तभी हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए और हम नंगे हो गए. मैं इतना गर्म हो गई थी कि मेरी चूत गीली हो गयी थी, मेरी चूत से पानी निकल रहा था.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड जगेश मुझे बिस्तर पर ले गया और मेरी चूची को चूसने लगा. मेरी चूचियों को चूसने के बाद उसने मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और उसे किस करने लगा. मैं भी गर्म होकर सिसकारियाँ लेने लगी.</p>
<p>अब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डाल कर मेरी चूत को चाटने लगा. मैं और ज्यादा जोश में आकर सिसकारियाँ भरने लगी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाने लगी.</p>
<p>हम दोनों अब होटल के रूम में असली सेक्स करने के लिए बेचैन होने लगे. मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में आधा डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. मुझे शुरू में दर्द हो रहा था लेकिन जब उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया तो मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी. उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए ताकि मेरी सिसकारियाँ होटल रूम से बाहर नहीं जायें.</p>
<p>वो मुझे किस करने लगा और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर कुछ देर के लिए रुक गया. मैं जब कुछ देर के बाद नार्मल हो गयी तो जगेश मुझे चोदने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी और अपनी गांड उठा उठाकर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी.</p>
<p>हम दोनों प्रेमी सेक्स करने लगे. हम दोनों कभी एक दूसरे को किस कर रहे थे तो कभी एक दूसरे को जोर से गले लगा रहे थे.</p>
<p>मुझे अपनी सहेली की बात याद आ रही थी. वो कहती थी कि सेक्स करने में बहुत मजा आता है और सच में सेक्स करने में बहुत मजा आता है.</p>
<p>मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करने के साथ सिसकारियाँ भी ले रही थी. उसने मुझे चोदते चोदते मेरी चूची को जोर से दबा दिया तो मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गयी. मेरा बॉयफ्रेंड मुझे चोद रहा था और मैं उतावली होकर उससे चुदवा रही थी.</p>
<p>कुछ ही देर बाद हम दोनों सेक्स करते करते झड़ गए और कुछ देर के लिए शांत हो गए.</p>
<p>एक बार सेक्स करने के बाद जगेश ने कॉफ़ी का आर्डर दिया और कुछ देर बाद वेटर हमारे लिए कॉफ़ी लेकर आया. जब वेटर रूम में आया तो मैं बाथरूम में चली गयी क्योंकि मैं नंगी थी और वो कॉफ़ी देकर चला गया और मेरे बॉयफ्रेंड ने उसको टिप दिया.</p>
<p>हम दोनों ने स्वाद ले ले कर कॉफ़ी पी. होटल रूम में एक बड़ी टी.वी. लगा था और हम दोनों टी.वी. देखने लगे. हम दोनों को रोमांटिक गाने बहुत पसंद हैं तो हम रोमांटिक गाने देख रहे थे.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दोनों लोग नंगे थे और वो मुझे अपनी बाँहों में लेकर मेरी चूची को दबा रहा था. मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दुबारा सेक्स करने के लिए गर्म हो गए और हम एक दूसरे को चूमने लगे.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड होंठ को चूम रहा था और मैं उसके होंठ को चूम रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे को किस कर रहे थे. मुझे किस करने के बाद जगेश मेरे बूब्स को मसलने लगा और उसका मोटा लंड मैं हिलाने लगी.<br />
मेरा बॉयफ्रेंड मेरी चूची को मसलने के बाद मेरी चूत को चाटने लगा और उसके बाद उसने अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>मैं सिस्कारियाँ लेने लगी और मुझे सेक्स करने का मन करने लगा. उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और जोर से धक्का मेरी चूत में मारा था तो मैं चीख उठी और कुछ देर में मैं सीत्कारें भरने लगी- आह उई उई आह!<br />
और वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा.</p>
<p>मेरी जान ही निकल गयी थी क्योंकि वो बहुत जोर जोर से धक्का मार रहा था. उसका लंड पूरा मेरी चूत के अन्दर जा रहा था और मैं चुदासी आवाजें निकाल रही थी. हम दोनों सेक्स कर रहे थे और मैं अपनी गांड उठा उठाकर अपने बॉयफ्रेंड का लंड अपनी चूत में ले रही थी.</p>
<p>फिर सेक्स करते करते हमने पोजीशन बदल ली, मैं घोड़ी बन गयी और मेरा बॉयफ्रेंड मेरे पीछे आ गया और मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. जगेश मेरी गांड को मसल रहा था और मुझे चोद रहा था.<br />
थोड़ी देर में ही हम सेक्स करते करते झड़ गए, हमारा पानी निकल गया था और हम दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए थे. ऐसी जोरदार चूत चोदन करने के बाद कब हमारी नींद लग गयी पता ही नहीं चला.</p>
<p>हम दोनों जब उठे तो शाम हो चुकी थी. मुझे दो बार सेक्स करने के बाद बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.</p>
<p>मैं अपनी चूत को साफ़ करने बाथरूम में गयी, अपने आपको अच्छे से साफ़ किया और उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>जगेश भी जाग चुका था, वो बाथरूम जाकर लौटा और कुछ देर में उसने अपने कपड़े पहन लिये. हम दोनों ने होटल रूम में ही कुछ देर तक बैठ कर बातें की और उसके बाद हम होटल रूम से बाहर आ गए.</p>
<p>मैंने अपने मुंह पर कपड़ा बाँध कर अपना चेहरा छुपा लिया था. हम होटल से बाहर आ कर एक गार्डन में गए और वहां कुछ देर बैठकर एक दूसरे की बाँहों एक दूसरे को किस किया.<br />
और उसके बाद मैं और मेरा बॉयफ्रेंड अपने अपने घर आ गए.</p>
<p>मैंने अपनी होटल सेक्स की बात अपनी सहेली मौलीश्री को बताई तो वो भी गर्म हो गयी थी और वो भी अगले दिन ही अपने बॉयफ्रेंड से सेक्स के लिए होटल गयी.</p>
<p>अब हम दोनों सहेलियां अपनी अपनी चुदाई की बातें शेयर करती हैं. हम दोनों एक साथ ऑफिस में काम करते हैं. मौलीश्री तो इतने दिन में बहुत सारे बॉयफ्रेंड बदल चुकी है लेकिन मैं अभी भी उसी से चुदवाती हूँ.<br />
मेरी सहेली मुझे नए बॉयफ्रेंड बनाने के लिए बोलती है. अगर मैंने कोई नया बॉयफ्रेंड बनाया तो मैं आपको तो अपनी सेक्स कहानी अवश्य बताऊँगी.<br />
आप सबको मेरी होटल सेक्स कहानी कैसी लगी? आप सब मुझे मेल करके बताये. आप सब फीडबैक देंगे तो मैं अपनी और भी कहानी बताऊँगी.<br />
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