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	<title>Gand Ki Chudai &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>Gand Ki Chudai &#8211; Kahani18</title>
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		<title>मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया? दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत <a title="मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/" aria-label="Continue reading मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया?<br />
<span id="more-362"></span></p>
<p>दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत स्मार्ट भी हूं. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. </p>
<p>यह चुदाई स्टोरी अक्टूबर 2017 की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी. हमारे पड़ोस में एक आमिना नाम की आंटी रहती हैं. ये नाम बदला हुआ है. आमिना आंटी की उम्र लगभग 42 साल के आस पास की रही होगी. उनका फिगर 36-34-36 का होगा. आंटी देखने में बहुत सेक्सी, गर्म लगती थीं. उनके उठे उठे से मोटे चूचे मुझे बहुत आकर्षित करते थे. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.</p>
<p>वे जब भी हमारे घर आतीं या मुझे कोई काम के लिए बुलातीं, तो वह मुझे बहुत प्यार से और हंस कर बात करती थीं. जब वह सेक्सी मूड में होतीं, तो मुझे इधर-उधर हाथ लगा कर मुझसे छेड़खानी करतीं, मेरी जीएफ के बारे में पूछ कर मुझे चिढ़ाती थीं … जबकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. हालांकि मैं भी उनकी बातों के मजे लेता रहता था. मुझे उनके इस तरह के गर्म व्यवहार से मजा ही आता था.</p>
<p>त्यौहार से 3 दिन पहले आंटी घर की सफाई कर रही थीं. उसी दौरान उन्होंने मुझे ऊपर वाले कमरे में सामान उतारने के लिए बुलाया. उस समय उन्होंने लाल रंग का गाउन पहन रखा था, जिसमें उनकी चुचियों की लाइन साफ दिख रही थी. मैं उनकी चूचियों को देख रहा था, जो कि उन्होंने नोटिस कर लिया था. </p>
<p>थोड़ी देर में वह बाथरूम में जाकर एक नीला सूट पहन आईं, जिससे मुझे उनके मोटे चूचे और भी साफ दिखने लग गए थे. उन्हें देख कर मेरा 6.5 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया था. उन्होंने भी मेरे खड़े होते लंड पर अपनी नजर मार ली थी.</p>
<p>हम जिस कमरे में खड़े थे, वहां काफी सामान होने की वजह से जगह बहुत कम थी. आंटी कोई सामान लेने आतीं, तो वह अपनी चूची मेरी छाती से सटाते हुए निकल रही थीं.<br />
हालांकि इस तरह की परिस्थिति में एक तरीका ये होता है कि खुद को बचाते हुए निकलना, भले ही मम्मे रगड़ रहे हों, लेकिन खुद से ऐसा शो करना कि मजबूरी है.</p>
<p>पर आंटी तो जब भी मुझसे सट कर निकलतीं, तो वे और भी जानबूझ कर मेरे सीने से अपने मम्मों को रगड़ने की कोशिश कर रही थीं. इससे मुझे पता चल गया था कि आंटी का मूड आज कुछ अलग है. </p>
<p>मैंने भी आंटी के मम्मों को बातों ही बातों में कभी टच किया, तो कभी हाथ लगा दिया. आंटी भी हंस रही थीं. मैं समझ गया था कि आज लाइन क्लियर है. थोड़ी ही देर यूं ही काम चलता रहा. </p>
<p>आंटी की मोटी गांड देख कर मेरा लंड का बुरा हाल हो गया था. मैं बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने लगता.</p>
<p>आंटी ने कहा- क्या हुआ?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं!<br />
तो आंटी बोलीं- कुछ तो बताओ?<br />
मैंने कहा- नहीं आंटी … कुछ नहीं. </p>
<p>आंटी नीचे झुककर कुछ सामान उठाने लगीं, तो मुझे उनकी चूची का काला निप्पल वाला भाग दिख गया था. फिर उनके उठते ही मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.<br />
उन्होंने कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?<br />
मैंने कहा- आंटी सॉरी … मुझे प्लीज आज ना रोको.<br />
आंटी ने मुझे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मम्मी को बता दूंगी.</p>
<p>उनका बदला हुआ रूप देख कर मैं बहुत ही ज्यादा डर गया और वहां से भाग आया. उस दिन पूरे दिन मेरी फटती रही कि चुदाई स्टोरी तो बनी नहीं … आंटी मम्मी को ना बता दें और मेरी घर पर ठुकाई लग जाए.</p>
<p>फिर शाम तक यूं ही चलता रहा और रात को मैं सोते हुए सोच रहा था कि आज तो बच गया, कुछ नहीं हुआ. </p>
<p>सुबह आंटी ने मुझे वापस ऊपर बुलाया.<br />
मैंने जाते ही उनसे माफी मांग ली- आंटी कल के लिए माफ कर दो.<br />
आंटी ने कहा- कोई बात नहीं.</p>
<p>आंटी आज कल से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं. आंटी ने फिर से हंस कर कहा- आज तू मेरी तरफ नहीं देख रहा है, क्या आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?<br />
मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, आज तो आप बहुत मस्त लग रही हो. कल से भी ज्यादा मस्त लग रही हो.<br />
इस पर उन्होंने कहा- तेरे अंकल को तो यह सब दिखता ही नहीं, तो यह सब किस काम का है.<br />
इस पर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा- आपके पास मैं हूं ना आंटी.</p>
<p>मेरा सहारा पाते ही वह रोने में लग गईं.<br />
मैंने उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.<br />
आंटी बोलीं- अच्छी लगने से क्या होता है … मैं सुंदर नहीं हूं.<br />
फिर मैंने कहा- आंटी आप बहुत सुंदर हो … अपनी गली में नंबर एक पर हो.</p>
<p>आंटी ने मुझसे पूछा- क्या मैं तुझे सेक्सी लगती हूं?<br />
मैंने कहा- हां आंटी बहुत. </p>
<p>उन्होंने मेरी तरफ होंठ बढ़ाए तो मुझे ऐसा लगा कि आज शायद आंटी पहल कर रही हैं, मेरी चुदाई स्टोरी अब बन जायेगी. मैंने भी उनकी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए. आंटी ने आंख दबा दी. फिर मैंने उनको दीवार से लगाया और उनके होंठों पर एक जोरदार से किस कर दिया.</p>
<p>पहले पहल तो उन्होंने थोड़ा बहुत विरोध किया … पर 3 या 4 मिनट बाद विरोध भी बंद कर दिया. अब मैं उनकी चूचियों को सूट के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. </p>
<p>मैंने उनका कमीज उतारने की कोशिश की, तो वो कसा होने के कारण मुझसे नहीं उतरा. आंटी की मोटी चूचियों के कारण सूट काफी टाइट था.</p>
<p>आंटी ने हंस कर बोला- फाड़ेगा क्या … इसे आराम से उतार न.<br />
मैंने झटके से फाड़ दिया, तो वो बोलीं- ले नुकसान कर दिया न मेरा. </p>
<p>फिर मैं उनकी चुचियों को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उनका रंग बहुत ही गोरा था. आंटी की दूध से भी ज्यादा सफ़ेद चुचियों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था. </p>
<p>फिर मैं धीरे-धीरे उनके पेट पर किस करने लगा. जब मैं उनकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा, तो बोलीं- कोई आ जाएगा.<br />
तो मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है और मैं नीचे से आपका दरवाजा बंद करके आया हूं.<br />
आंटी बोलीं- प्लीज यह किसी को मत बताईयो!<br />
मैंने कहा- आंटी आपकी कसम … यह मेरे तक ही रहेगा. </p>
<p>मैंने आंटी का झट से नाड़ा खोला और नीचे देखा, तो उनकी टांगों के बीच में गुफा पर थोड़े से बाल थे, जो भूरे रंग के थे. </p>
<p>उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे कपड़े भी खोल दिए. कुछ देर बाद मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा और उनकी पेंटी भी उतार दी. </p>
<p>फिर मैंने बिना सोचे समझे ही नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. गर्म आंटी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी थीं. उन्होंने जोश में आकर मेरा सर दबा दिया. वे मेरा सर अपनी चूत में पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती थीं.</p>
<p>मेरे लगातार चूत चूसने के कारण उनकी चूत पनिया गयी थी और वो कभी भी पानी छोड़ सकती थीं. मैंने फिर भी चूत को चूसना बंद नहीं किया. </p>
<p>जिन लोगों ने शादीशुदा औरतों की चूत को चाटा होगा, उन्हें पता होगा कि चूत चूसने का अपना एक अलग ही आनन्द है.</p>
<p>लगातार 7 से 8 मिनट तक चूत चुसाई से आंटी एक तेज़ अकड़न के साथ झड़ गयी थीं. उन्होंने ढेर सारे कामरस की नदी बहा दी और थोड़ी देर के लिए शांत पड़ गयी थीं.</p>
<p>फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी पैंट को खोला, तो मेरी चड्डी में मेरे लौड़े ने आतंक मचा रखा था. मेरे लंड को आंटी ने मेरी चड्डी से बाहर निकाल कर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. </p>
<p>गर्म आंटी के मुँह से ‘बाप रे बाप  … इत्ता बड़ा..’ ही निकल सका.<br />
मैंने हंस दिया- आपका ही है आंटी.</p>
<p>उन्होंने मुझसे कहा- क्या करता है? तेरा लंड इतना मोटा कैसे हो गया है? ये मेरे अन्दर जाएगा, तो मेरी पूरी चूत को छील देगा. तेरे अंकल का तो पतला सा है.<br />
यह कहते ही वो जमीन पर बैठ कर मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.</p>
<p>दोस्तो, यकीन करना … वो मेरा पहला अनुभव था. मैं मुश्किल से 2 मिनट में आंटी के मुँह में ही झड़ गया. </p>
<p>उन्होंने ‘छी ..’ की आवाज़ करते हुए मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल दिया और जल्दी से एक कपड़े से साफ करने लगीं.</p>
<p>मुझे खुद पर बहुत शर्म आयी और जब वो मेरी तरफ आईं, तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.<br />
उन्होंने मुझसे कहा- पागल परेशान न हो … तेरा हथियार तो तगड़ा है, पर तेरा पहली बार था, इसलिए जल्दी निकल गया. असली मज़ा तो अब आएगा. </p>
<p>फिर मैं दोबारा से आंटी की चूत चाटने लगा. मुझे आंटी की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.<br />
आंटी मुझसे बोलीं- बेटा, अब और न तड़पा  … जल्दी से इसे मेरे अन्दर डाल कर इसकी सारी गर्मी मिटा दे.<br />
फिर उन्होंने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सैट किया और मुझे अन्दर पेलने को कहा.</p>
<p>मैं उस पल को एहसास को कभी नहीं भूलना चाहता, जब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में उतारा था; मानो मैंने लंड चूत में नहीं किसी गर्म भट्टी में झोंक दिया हो.</p>
<p>जैसे ही मैंने लंड अन्दर किया, आंटी के मुख से एक मीठी सी आह निकली, जिसमें सुकून भरा दर्द था. </p>
<p>मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. अब वो भी अपनी गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थीं.</p>
<p>कोई 5 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो एक तेज़ आह के साथ झड़ चुकी थीं, लेकिन मैंने अपनी रफ्तार कायम रखी … जिससे उनकी चूत के पानी से फच्च फच्च की एक मधुर आवाज हमारी चुदाई में चार चांद लगा रही थी.</p>
<p>लगातार 15 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी रफ्तार से उनकी चूत में ही झड़ गया. मैंने अपनी अपनी आखिरी बूंद भी आंटी की चूत में छोड़ी.</p>
<p>जब मैं उनके ऊपर से हटा, तो मैंने देखा कि मेरे लंड का पानी उनकी चूत से टपक रहा है.<br />
आंटी ने कहा- अभी तुझे बहुत कुछ सिखाना है.</p>
<p>फिर हम दोनों लेट गए. आधा घंटा आराम किया.</p>
<p>लेकिन मेरा मन नहीं भरा था, तो मैंने आंटी को टेबल पर झुकने को कहा. मैंने उनके पीछे से उनकी चूत में लंड डाला और फिर उनको चोदने लगा. कोई 7-8 मिनट तक मैं उनको यूं ही चोदता रहा. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और एक जोरदार धक्का दे मारा. </p>
<p>इससे मेरा 4 इंच लंड अन्दर चला गया और आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं. वो दर्द की अधिकता से मुझसे दूर होने लगीं, पर मैंने अपना जोर उन पर बनाए रखा और उनकी चुचियों को दबाता रहा. </p>
<p>कुछ पल बाद मैंने फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया. अबकी बार मेरा सारा लंड उनकी गांड में चला गया. धकापेल गांड चुदाई होने लगी. आंटी को भी अपनी गांड में लंड का सुकून मिलने लगा था, इसलिए वो भी मजा लेने लगी थीं.</p>
<p>कोई 15 मिनट तक यूं ही मैं ताबड़तोड़ हमले करता रहा और आंटी को भी काफी मजा आने लगा था. उनकी मस्ती भरी आवाजों से मुझे यकीन हो गया था कि आंटी की गांड मजा दे रही है.</p>
<p>आंटी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहह मर गई माँ … आहह.<br />
गर्म आंटी की इस तरह की मदभरी आवाजें निकल रही थीं. मैं उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और भी गर्म हो रही थीं. </p>
<p>इसी बीच उन्होंने अपना एक बारी पानी और छोड़ दिया था. मैं भी कुछ ही देर में निकलने वाला था. दसेक धक्के लगाने के बाद मैंने उनकी गांड में सारा पानी छोड़ दिया. </p>
<p>हम दोनों यूं ही वहां मेज पर लेट गए और किस करने लगे. दस मिनट बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया. </p>
<p>अगले 2 महीने तक मैंने उनकी चूत और गांड बहुत बार मारी. इसके बाद उन्होंने अपना घर यहां से छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट कर लिया था. अब मेरी सिर्फ उनसे फोन पर कभी-कभी बात होती है. </p>
<p>फिलहाल मैं चूत और गांड के लिए बहुत प्यासा हूं. भाइयों मेरा तो यह कहना है कि किसी लड़की को पटाने से अच्छा है, किसी आंटी या भाभी को पटा लो, उनके दोनों छेद बहुत मजा देते हैं.</p>
<p>[email protected] </p>
<p>दोस्तो, आपको गर्म आंटी के साथ मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी मेल जरूर करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/gand-chudai-sexy-chachi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:29:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Chachi Ki Chudai Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपने दोस्त की चाची की गांड की चुदाई कर डाली … एक दिन मैं अपने दोस्त के घर गया तो उसकी चाची से नजर मिली. उनकी कामुक आँखों से पता चल गया कि माल चंचल है और लंड ले सकती है. प्रणाम, मैं राहुल आप सबके लिए एक सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ. मैं <a title="गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/gand-chudai-sexy-chachi/" aria-label="Continue reading गांड की चुदाई दोस्त की सेक्सी चाची की">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपने दोस्त की चाची की गांड की चुदाई कर डाली  … एक दिन मैं अपने दोस्त के घर गया तो उसकी चाची से नजर मिली. उनकी कामुक आँखों से पता चल गया कि माल चंचल है और लंड ले सकती है.<br />
<span id="more-295"></span></p>
<p>प्रणाम, मैं राहुल आप सबके लिए एक सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ. मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. यह कहानी मेरे दोस्त राज से सम्बन्धित है.</p>
<p>मैं राज के घर अक्सर जाता रहता था. राज मुझसे करीब पाँच साल छोटा है और उसका शरीर व शक्ल एकदम लड़की के जैसा है. मैं उसको लड़की ही की तरह देखता था और उसकी गांड मारने के बारे में सोचता रहता था, पर वो इस सबसे अन्जान था.</p>
<p>एक रोज मैं राज से मिलने उसके घर गया, तो बगीचे में एक जवान मदमस्त औरत को देख कर दंग रह गया. छोटे बाल, गदराया बदन, मखमली गोरी जांघें, भरा हुआ चेहरा, भरे भरे गाल. उसे देखते ही मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.</p>
<p>राज की आवाज सुनकर मैं चौंका और पूछने पर उसने बताया कि यह उसकी चाची है और कुछ दिनों के लिए आई है. क्योंकि मेरे घर वाले कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे है. इसलिए चाची मेरी देखभाल के लिए आ गई हैं.</p>
<p>मैं सोच रहा था कि अगर राज अकेला होता, तो मैं उसकी गांड मार सकता था. लेकिन अब मैं उसकी चाची की गांड भी मारने की सोचने लगा था.</p>
<p>चाची से मेरी निगाह मिली, तो उनकी कामुक आँखों ने मुझे काफी कुछ बता दिया था कि ये माल चंचल है और लंड ले सकती है.</p>
<p>मैंने राज से कहा- चल थोड़ा बाहर चल कर घूमते हैं.<br />
वह मेरे साथ आ गया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर वाले कब जा रहे हैं?<br />
तो उसने बताया- कल सुबह छह बजे की ट्रेन है.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं, पाँच छः दिन मस्ती करेंगे.<br />
वो बोला- नहीं यार कालेज का एक बहुत जरूरी प्रोजेक्ट है, जिसमें मुझे बहुत व्यस्त रहना होगा.<br />
मैं उससे बोला- कालेज की छुट्टी कर लो.<br />
पर उसने एकदम से मना कर दिया.</p>
<p>मैंने उससे पूछा कि कालेज कब जाओगे?<br />
वो बोला- सुबह आठ बजे और शाम को चार बजे वापस आऊंगा.</p>
<p>यह सुन कर तो मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को हो गया … क्योंकि उतनी देर राज की चाची घर में अकेली रह जाने वाली थी. अब मैं उसकी चाची की गांड मारने की योजना बनाने लगा.</p>
<p>मैंने राज से कहा- चलो कल शाम को मिलते हैं.</p>
<p>रात भर राज की चाची मेरी आखों के सामने आती रहीं और मेरे लंड ने मुझको सारी रात सोने नहीं दिया. रात भर मैं उनको चोदने के बारे में सोचता हुआ कब सो गया, पता ही नहीं चला. </p>
<p>सुबह करीब आठ बजे मेरी आंख खुली, तो मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था. रात भर मैं राज की चाची की कभी गांड, तो कभी चूत मारता रहा. वैसे मुझे गांड की चुदाई करने में ज्यादा मजा आता है.</p>
<p>मैं नहा धोकर तैयार हुआ और नाश्ता करने लगा. मेरे दिमाग में तो राज की चाची ही घूम रही थीं और आज मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था. </p>
<p>मैंने अपने बदन पे तेल की अच्छी मालिश की और लंड की भी बहुत अच्छी तेल मालिश की. मैंने सिर्फ जीन्स पहनी, जिससे मेरा लंड बिल्कुल फ्री था. ऊपर मैंने टी-शर्ट डाल ली ताकि नंगा होने में आसानी रहे. सेक्स का मजा नंगे में ही आता है.</p>
<p>अब दस बज चुके थे. मुझको पता था कि राज कालेज जा चुका होगा और उसकी चाची अकेली होंगी.</p>
<p>मैं राज के घर की तरफ चल दिया और उसके घर से कुछ दूर मोटर साइकिल खड़ी दी. राज का घर थोड़ा सुनसान जगह पर सड़क से थोड़ी दूरी पर है. आसपास के घर भी थोड़ी दूरी पर बने हुए हैं.</p>
<p>मैं घर पर पहुंचा, तो सन्न रह गया. राज की चाची ने आसमानी रंग की स्कर्ट पहनी हुई थी और हल्के पीले रंग का टॉप पहन रखा था. वो नीचे बैठी हुई फूलों को देख रही थीं और अन्जाने में अपने संगमरमर जैसे जिस्म के दर्शन करा रही थीं. उनकी मखमली जांघों में से उनकी सफेद पैन्टी साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके बड़े बड़े चूचों का उभार भी उनके चुस्त टॉप से साफ दिख रहा था. </p>
<p>मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू किया लेकिन मेरा लंड पूरा बेकाबू हो गया था और खड़ा हुआ साफ दिख रहा था.</p>
<p>मैंने कंपाउंड गेट खटखटाया, तो चाची ने मुझे देखा और पूछा- आप कौन हैं?<br />
मैं- जी मैं राज का दोस्त हूँ.<br />
चाची- राज तो घर पर नहीं है.<br />
मैं- कहां गया है?<br />
चाची- कालेज गया है.<br />
मैं- कब तक आ जाएगा?<br />
चाची- शाम तक ही आएगा, बोल रहा था कि काफी काम है.</p>
<p>चाची का भरा पूरा बदन, मांसल गोरी जांघें, भरे भरे गाल … मेरे लंड की उठक बैठक करा रहे थे और शायद वो यह समझ भी गयी थीं. मैं उनसे बात करते हुए उनको घूर कर देख जो रहा था. मेरी निगाहें चाची के मदमस्त जोबन पर ही टिकी थीं. मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था.</p>
<p>मैं- आप कौन हैं?<br />
चाची- मैं राज की चाची हूँ.<br />
मैं- आप उसकी चाची लगती तो नहीं हो.<br />
चाची- क्यों इसमें लगने वाली क्या बात है?<br />
मैं- मेरा मतलब आप काफी कम उम्र की एक मार्डन और स्मार्ट लड़की सी लग रही हो ना … इसलिए कहा.<br />
मेरी बात पर वो हँस पड़ीं और बोलीं- तुम कहां से आए हो?<br />
मैंने बोला- काफी दूर से.<br />
वो बोलीं- आओ बैठो, चाय लोगे?</p>
<p>मैं अब इस मौकै का फायदा उठाना चाहता था. मैं गेट खोल कर उनके सामने जाकर अपना तना लंड और आंखों में मचल रहे उनको चोदने के इरादे जता देना चाहता था. वो मेरी वासना में डूबी आंखें देख कर इस चाहत को बखूबी समझ भी गई थीं.</p>
<p>मैं उनके एकदम पास जाकर बोला- जी जरूर . … पर आपको तकलीफ होगी.<br />
वो भी शायद अब मस्ती में आ गई थीं. वो इठला कर बोलीं- इसमें तकलीफ कैसी. आओ न मुझे भी अच्छा लगेगा.<br />
मुझे अब उनकी तरफ से हरा सिग्नल मिल चुका था. </p>
<p>मैंने कहा कि मेरी मोटर साइकिल बाहर खड़ी है … मैं उसको लेकर आता हूँ.<br />
वो बोलीं- ठीक है.</p>
<p>अब मैं थोड़ा रिलेक्स महसूस कर रहा था क्योंकि काफी हद तक मैंने उनको चोदने के लिए पटा लिया था. अब मैं आस पड़ोस के बारे में भी निश्चिंत हो जाना चाहता था कि ऐन वक्त पर कोई आ ना जाए. इस समय पड़ोस काफी सुनसान लग रहा था. लगता था कि जैसे कोई जंगल हो. </p>
<p>मैंने अपनी मोटर साइकिल को घर में लाकर गेट बंद कर दिया. फिर मैं घर के अन्दर चला गया और दरवाजे को बन्द कर दिया. अन्दर मेरी कयामत रसोई में चाय बना रही थी. </p>
<p>राज का घर तो काफी बड़ा था, लेकिन रसोई में फ्रिज की वजह से बहुत तंग जगह हो गई थी. जिस वजह से एक सतह दो लोग आपस में मिले बिना आ जा नहीं सकते थे. </p>
<p>मेरी दिलरुबा रसोई में चाय बना रही थी. मैं तेजी से उनके पीछे आ गया और अपने लंड को उनके चूतड़ों के बीच घुसा के एक धक्का दे मारा. </p>
<p>चाची का मुँह लाल हो गया. वो बोलीं- ये क्या कर रहे हो?<br />
मैंने अन्जान बनते हुए कहा कि मैं पानी लेने जा रहा था.<br />
वो बोलीं- मेरे को कह देते.<br />
अब मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था. मैं बोला- मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था.</p>
<p>यह बोल कर मैं उनकी जांघों को हाथ से सहलाते हुए हट कर कमरे में आ गया. चाची ने हंस कर मुझे समझ लिया.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उनकी खनकती हुई आवाज आई- लो इधर आकर ले लो.<br />
मैंने पूछा- क्या ले लूँ.<br />
चाची हंस कर बोलीं- चाय ले लो.<br />
मैं बोला- यहीं ले आओ.</p>
<p>वो चाय लेकर मेरे कमरे में आ गईं. वो जैसे ही कमरे में आईं, मैंने एकदम से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उनको पीछे से पकड़ लिया. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके चूचे मसल रहे थे.</p>
<p>एकदम से ये सब होने से वो थोड़ा घबरा सी गईं, पर मेरे बदन और लंड की गर्मी ने उन्हें मस्त सा कर दिया था.<br />
वो दबे हुए स्वर में बोलीं- क्या कर रहे हो?<br />
मैं बोला- आज तेरी गांड मारने का मन है.</p>
<p>मैंने उनको जोर से जकड़ रखा था. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके मम्मे मसल रहे थे.</p>
<p>मैं भी पूरा गर्म हो चुका था और उसे गालियाँ बके जा रहा था- तेरी माँ का भोसड़ा मारूं … हरामजादी कल से लंड तड़पा रखा है … कुतिया … रात भर तेरे गदराये बदन ने मेरी नींद उड़ा रखी थी साली … अब भुगत लंड का कहर.</p>
<p>मेरे ठोस बदन कड़कते लंड बदन की गर्मी ने उनको दर्द और मजा दोनों मिल रहा था. चाची के भरे बदन ने मुझे हैवान बना दिया था. मैं अपने लंड के धक्के उनकी गांड में मारे जा रहा था. मेरे दोनों हाथ चाची के चूचे निचोड़ रहे थे. </p>
<p>चाची भी अब तक गर्मा गयी थीं. मैंने मौका देख कर उनका टॉप अलग कर दिया. अब वो छिनाल ऊपर से पूरी नंगी मेरे सामने थी. मैंने जल्दी से अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपने नंगे बदन से उनकी नंगी पीठ को सटा दी. मैं चाची के मम्मों की घुन्डियां मसलने लगा. वो भी अब थोड़ी मदहोश सी हो गई थीं. </p>
<p>वो जैसे ही कुछ ढीली पड़ीं, मैंने तेजी से हाथ नीचे ले जाकर उनकी कच्छी को उतार दिया. </p>
<p>उफ्फ … अब उनके बदन पर सिर्फ स्कर्ट ही रह गयी थी. मेरे बदन में तो अब खून के बजाय सेक्स दौड़ रहा था. चाची की गोरी मांसल जांघों को तो मैं पहले ही देख चुका था और अब उनके नंगे कूल्हों ने मुझे मानो वहशी बना दिया था. </p>
<p>मैं उनकी फूली गुलाबी चिकनी चूत को देखकर पागल हो गया था. मेरा लंड तो अब पूरा लोहा बन कर सीधा खड़ा हो गया था. मैं बिल्कुल जंगलियों की तरह चाची पर टूट पड़ा. मेरे बोझ की वजह से वो पास के बिस्तर पर दोनों हाथ टिका कर झुक गईं, तो मैंने अपनी जींस निकाल दी.</p>
<p>मेरा लंड छुट्टा सांड की तरह लाल होकर खड़ा था. मेरे दिमाग पे तो जैसे शैतान सवार हो चुका था. मैंने चाची की दोनों टांगों को अपने हाथों से उठा लीं. मेरे हाथों की पकड़ इतनी कसी हुई थी कि वो एक बार के लिए सिहर सी गईं. </p>
<p>मैं गौर से उनकी चूत और गांड देखकर उत्तेजना से हांफ रहा था और मेरा लंड ऊपर नीचे हो रहा था. वो भी अब चुदने को बिल्कुल तैयार थीं. पर मेरे शैतानी दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. अब मैं चाची को जरा तड़पाना चाहता था, उनको दर्द देना चाहता था. उनसे अपनी एक रात की तड़फन का बदला लेना चाहता था. मैं भी उनको तरसाना चाहता था. </p>
<p>मुझे पता था कि चाची एक हफ्ते तक तो मेरी ही हैं. मैंने चाची की गांड की चुदाई की सोची, जिससे कि वो चुदवाने को तरसे और गांड में मेरे लौड़े का दर्द झेल लें. </p>
<p>मैंने उनकी टांगें छोड़ दीं, तो चाची ने चुदने के लिए अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं. </p>
<p>मैंने अपने लंड का सुपारा उनकी गांड के छल्ले के ऊपर करके लगा दिया और उनके चुच्चे मसलने लगा. मेरे लंड की गर्मी उनकी गांड के छल्ले को गर्म कर रही थी. पीछे से मेरा पूरा नंगा बदन उनको गर्म कर रहा था. मेरी गर्म सांसें धौंकनी की तरह उनके कानों को गर्माहट दे रही थीं. </p>
<p>वो अब निढाल हो गई थीं, उन्होंने जैसे ही अपनी गांड के छल्ले को थोड़ा ढीला छोड़ा, मैंने जोर मार कर अपने लंड को चाची की गांड में घुसा दिया. </p>
<p>वो दर्द से तड़प उठीं और ‘उईईई ईईईईई..’ चिल्लाते हुए बोलने लगीं- क्या कर रहे हो? वो गलत जगह है.<br />
चाची मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं, मगर मेरी मजबूत पकड़ की वजह से उनको कोई मौका नहीं मिल पा रहा था. </p>
<p>मैं- साली मैं तेरी गांड मार रहा हूँ.<br />
चाची- आह कुत्ते … मुझे दर्द हो रहा है … बाहर निकाल इसे.<br />
मैं- कुतिया तूने कल से मुझे परेशान किया हुआ है … अब भुगत.<br />
चाची- हरामजादे किसी लड़की से नहीं किया क्या कभी … या लड़कों की ही मारता रहा?<br />
मैं- भोसड़ी की, तेरी तो आज गांड ही बजेगी.</p>
<p>यह बोल कर मैंने पूरी ताकत से पूरे लंड को चाची की गांड में अन्दर घुसा दिया. वो दर्द से बिलख पड़ीं ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’</p>
<p>पूरा लंड पेलने के बाद मैंने उनको कुछ देर तक ऐसे ही जकड़े रखा. उसके बाद मैंने गांड की चुदाई शुरू की, हल्के हल्के धक्के मारने शुरू किए. वो दर्द से रोने लगीं, लेकिन मुझे उनको रोता देखकर मजा आ रहा था. मेरे धक्कों से जब वो बहुत रोने लगीं, तो मैंने उनको जकड़ कर लंड पूरा घुसा दिया और उनकी चूत सहलाने लगा. थोड़ी देर चूत सहलाने पर उनका दर्द कुछ कम हो गया. </p>
<p>अब मैंने अपनी उंगली उनकी चूत में घुसा दी और चूत में उंगली करने लगा. इससे उनको दर्द और मजा दोनों आ रहे थे. मैंने लंड के धक्के मारने शुरू कर दिए … साथ ही साथ चूत में उंगली भी कर रहा था. </p>
<p>कुछ ही पलों में वो एक अलग ही मस्ती में आ गई थीं. चाची दर्द और मजा दोनों एक साथ ले रही थीं. मैं भी अब अपने लंड को पूरा अन्दर बाहर कर रहा था और चाची की चूत में उंगली किए जा रहा था. </p>
<p>चाची को अब गांड मरवाने में मजा आने लगा था और वो अब मेरे लंड पे अपनी गांड के धक्के मार रही थीं. ये देख कर मैंने एक हाथ से उनके चूचे दबाने चालू कर दिए और दूसरा हाथ चूत में उंगली करने में लगाए रखा. मेरा लंड पिस्टन की तरह उनकी गांड में घचाघच करे जा रहा था. </p>
<p>थोड़ी देर में चाची की चूत ने पानी छोड़ दिया और अपनी गांड भींच ली. तभी मेरा लंड भी फैलने लगा, वो दर्द से चिल्लाईं … लेकिन मैं अब गांड की तेज चुदाई करने लगा. थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गया. वो भी एकदम से निढाल हो गई थीं और मैं भी बेसुध उनके ऊपर पड़ गया था.</p>
<p>काफी देर बाद वो मेरे नीचे से निकलीं. मैंने भी जल्दी से कपड़े पहने. वो भी कपड़े पहन चुकी थीं.</p>
<p>मैंने उनको कसके अपनी छाती से लगा कर उनको बहुत चूमा- कैसा लगा मेरा अन्दाज?<br />
वो शरमा गईं.<br />
तब मैंने उनके होंठों को चूमते हुए कहा- आज आपकी गांड की चुदाई की … कल आपकी चूत चोदेंगे.<br />
ये बोल कर मैंने उनकी चूत पकड़ ली.<br />
वो हंस पड़ीं और मैं वहां से निकल गया.</p>
<p>चाची की गांड की चुदाई कहानी पर आप अपने मेल मुझे जरूर भेजिएगा.<br />
[email protected]</p>
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