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	<title>College Girl &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sat, 11 Oct 2025 16:15:32 +0000</lastBuildDate>
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	<title>College Girl &#8211; Kahani18</title>
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		<title>मेरी बहन की चुदाई की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:15:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने? दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने <a title="मेरी बहन की चुदाई की कहानी" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/" aria-label="Continue reading मेरी बहन की चुदाई की कहानी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने?<br />
<span id="more-340"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने में सांवली है. उसकी हाईट ज्यादा तो नहीं है पर उसके मम्मे बड़े बड़े हैं. उसके मम्मों को देख कर मैं खुद रोज उसके नाम की मुठ मारता हूँ.</p>
<p>अंतरा के एग्जाम चल रहे थे तो उसे परीक्षा दिलवाने लेकर मुझे जाना था. कुल 7 दिनों के एग्जाम थे और परीक्षा केंद्र घर से दूर होने के कारण हम लोगों ने वहीं एक रूम किराये पर ले लिया था. </p>
<p>रूम में पलंग आदि नहीं था, नीचे ही सोने की व्यवस्था थी. रूम के बगल वाले रूम में भी 4 लोग एग्जाम देने आए हुए थे. वे चारों 20-21 साल के ही रहे होंगे. </p>
<p>पहला दिन का एग्जाम हो गया और उसी शाम तक उन चारों लड़कों से मेरी दोस्ती हो गई. चारों लड़कों ने कोई सैटिंग की हुई थी, जिसके कारण उनको एग्जाम में आने वाले प्रश्न उत्तर पहले ही मिल जाते थे. वो सब अपने एग्जाम सही करके आते थे. </p>
<p>दूसरा दिन भी निकल गया. शाम को उन चारों में से एक ने बताया कि मैं आपको प्रश्न और उत्तर दे दूंगा. </p>
<p>ये सुन कर मेरी उन लोगों से और भी अच्छी दोस्ती हो गई. वो मुझे भैया बुलाते थे और अंतरा को नाम से बुलाते थे. </p>
<p>अंतरा उन सबमें छोटी थी और अब उन चारों लड़कों के साथ घुल मिल गई थी. शाम को चारों बैठ कर अंतरा के साथ पढ़ते थे. </p>
<p>आखिरी एग्जाम से एक दिन पहले की बात है. उस दिन रविवार था, इसलिए छुट्टी थी. सब लोग घर पर ही थे. वे चारों मेरे रूम में आकर अंतरा के साथ पढ़ाई करने लगे.</p>
<p>उन लोगों को पढ़ता देख कर मैं अंतरा को बोल कर निकल गया कि मैं मूवी देखने जा रहा हूँ. बस 3 से 4 घंटे में आ जाऊंगा. तुम पढ़ाई करके आराम कर लेना.<br />
यह कह कर मैं चला गया. पर मुझे टिकट नहीं मिली और मैं कमरे के लिए वापस निकल आया.</p>
<p>जब मैं कमरे पर वापस आया, तो घर का दरवाजा बाहर से बंद था. मैं अन्दर गया, तो अंतरा नहीं थी. मैंने सोचा बाथरूम गई होगी या पढ़ने गई होगी. </p>
<p>मैं आराम करने लगा. जब 15-20 मिनट हो गए, अंतरा नहीं आई तो मैं समझ गया कि उन लड़कों के साथ पढ़ाई कर रही होगी. मैं उठकर अंतरा को देखने चला गया. </p>
<p>जब मैं लड़कों के पास गया, तो दरवाजा अन्दर से बंद था, मुझे शक हुआ और मैं अन्दर झांकने की कोशिश करने लगा. पर मुझे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था. </p>
<p>तब मुझे याद आया कि बाथरूम से उनका रूम नजर आता है. मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और बाथरूम के एक छेद से अन्दर देखने लगा. उस छेद से सब कुछ साफ नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम का वो छेद थोड़ा बड़ा था.</p>
<p>जब मैंने अन्दर देखा तो सामने बेड था. बेड पर तीन लड़के पूरी तरह नंगे बैठे थे और अपने अपने लंड सहला रहे थे, पर अंतरा कहीं नजर नहीं आ रही थी. </p>
<p>मैं मोबाइल से उनकी रिकॉर्डिंग करने लगा. तभी मेरी नजर लड़कों पर पड़ी, जो एक तरफ देखे जा रहे थे. मैंने भी उसी तरफ देखा, तो मैं दंग रह गया. </p>
<p>मेरी अपनी सगी बहन अंतरा पूरी नंगी थी और टेबल पर अपनी बुर चुदाई करवा रही थी. जो लड़का अंतरा को चोद रहा था, उसका नाम सोनू था. वो अंतरा की चूची को अपने मुँह में रख कर एक बच्चे की तरह चूस रहा था. वो एक चूचे को चूस रहा था और एक हाथ से उसके दूसरे चूचे को दबाने में लगा था. उसने अंतरा का एक दूध अपने मुँह में पूरा भर लिया था और जबरदस्त तरीके से चुसाई करने में लगा था.</p>
<p>तभी मैंने देखा कि वो अपने दूसरे हाथ को अंतरा की चूत पर ले गया और अपनी उंगली उसकी बुर में घुसा दी. उस लड़के की उंगली गीली हो गई. उसने अपनी उंगली को निकाल कर देखा कि मेरी बहन खुद ही चुदाई को उतावली हो रही थी.</p>
<p>फिर मैंने देखा कि अंतरा ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं. सोनू ने अंतरा की बुर के दाने को मसलना चालू कर दिया. अंतरा के मुँह से मस्त सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>लड़के ने उसे उल्टी तरफ घुमा कर उसे घुटनों के बल पर कर दिया, वो अंतरा को डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. उसने अपने तने हुए लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख कर सुपारे से उसकी बुर के दाने को रगड़ने लगा. </p>
<p>अंतरा के मुँह से जोरदार सिसकरियां निकल रही थीं. तभी सोनू ने अपने मूसल जैसे लंड को हल्का सा धक्का दिया, तो उसके लंड का सुपारा भीतर चला गया. </p>
<p>अंतरा के मुँह से ज़ोर से मतवाली सिसकारी छूटी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. सोनू का लंड धीरे धीरे अंतरा की बुर में एकदम भीतर घुस गया.</p>
<p>मुझे अपनी बहन की चुदाई और उसके मजे लेने पर बहुत गुस्सा आ रहा था. अंतरा के मुँह से दर्द और काम से मिश्रित कराह निकल रही थी. थोड़ी ही देर बाद वो खुद अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>दूसरे लड़के भी चुप नहीं बैठे थे, वो भी मैदान में कूदने को तैयार थे. एक ने लंड को अंतरा के मुँह के पास जाकर उससे लंड को मुँह में लेकर चूसने को कहा. अंतरा फट से उसके लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी. उधर सोनू अब फकफ़ाक धक्के लगाते हुए झड़ने को हो रहा था. उसके लंड के गोटे सीधे अंतरा के चूतड़ों पर जा कर ढोलक की तरह ठाप लगा रहे थे. </p>
<p>मेरी बहन के मुँह से जोरदार सीत्कार निकल रही थी, जैसे उस की लंड से चुदाई में मस्त सीटियां बज रही हों. सोनू अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर से धकेलता था, जिससे अंतरा की चीख निकल जाती थी. </p>
<p>इधर अपनी सगी बहन की चुदाई देख कर मेरा मन कर रहा था कि मैं भी अभी अंतरा को चोद दूँ. आगे अंतरा के मुँह में एक लंड से पूरा भरा हुआ था. </p>
<p>तभी सोनू ने आगे हाथ बढ़ा कर अंतरा के मम्मों को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. एकाएक सोनू के धक्कों की रफ्तार बहुत तेज हो गई और उसने अंतरा की चुत में ज़ोर से अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी. </p>
<p>अंतरा की आंखें मस्ती से मुंद गई थीं. सोनू ने अंतरा चुत को चाट कर साफ कर दिया. </p>
<p>अब तीसरा लड़का आकाश, जिसका लंड का सर आसमान पर उठा हुआ था, वो आया और अंतरा की चुत में लंड घुसाने लगा. </p>
<p>उसने अपने लंड को अंतरा की चूत के दरवाजे पर रखा और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. उसका लंड पूरा का पूरा अंतरा की चुत की जड़ में समा गया.</p>
<p>अंतरा ज़ोर ज़ोर से आनन्द से सिसकरियां भर रही थी. </p>
<p>अब उस लड़के का सुनो, जिसका लंड अंतरा चूस रही थी, उसके मुँह से एकाएक आह की आवाज निकली और उसने अपना गाढ़ा सफेद वीर्य अंतरा के मुँह में छोड़ दिया. अंतरा लंड से निकले वीर्य को स्वाद लेकर पीने लगी. फिर भी कुछ माल उसके मुँह से बाहर आकर उसके गालों पर बहने लगा. </p>
<p>मुझे समझ आ गया कि मेरी बहन पक्की चुदक्कड़ है.</p>
<p>उस लंड चुसाने वाले लड़के के हटते ही चौथा लड़का मुन्ना, जिसका लंड सबसे बड़ा था, वो आ गया. उसने तीसरे लड़के की जगह ले ली और अंतरा उसके लंड को चूसने लगी.</p>
<p>अब जो लड़का आकाश अंतरा को चोद रहा था, वो पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था. उसने अंतरा के गोल गोल चूतड़ों को अपनी मुट्ठी में भर रखे थे. वो पूरी ताकत और वेग से चूत में धक्के लगा रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद वो भी झड़ गया और अंतरा की चूत पूरी वीर्य की झील हो गई. </p>
<p>चौथे लड़के मुन्ना ने अंतरा के मुँह को आज़ाद कर दिया. उसने अंतरा को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया. उसकी टांगें अपने कंधे पर रखीं और फ्रंट फॉर्वर्ड पोज़िशन में लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख दिया. इसके बाद उसने एक बड़े ही ज़ोर का धक्का दे मारा. उसका मूसल किस्म का लंड पहले झटके में ही आधे से ज्यादा चूत के भीतर चला गया.</p>
<p>अंतरा की एक तेज चीख निकल गई. लेकिन तीन लंड खाने के बाद अंतरा की चूत खुल गई थी. इसलिए अंतरा ने भी अगले ही अपने हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर नीचे से एक जोर का जबावी धक्का लगा दिया. इस धक्के से लड़के का बाकी लंड भी एकदम जड़ तक समा गया.</p>
<p>फिर उस मुन्ना नाम के लड़के ने अपने दोनों हाथ अंतरा के चूतड़ों के नीचे ले जा कर उनको तकिया जैसा सहारा दे दिया और ज़ोर ज़ोर उसकी चुत का बाजा बजाना शुरू कर दिया. </p>
<p>अंतरा चुदाई के आनन्द के मारे पागल हो गई और अजीब अजीब सी आवाजें उसके मुँह से निकलने लगी थीं. </p>
<p>मुन्ना ने अंतरा को चोदने में पूरा 30 मिनट का टाइम लिया. फिर वो भी आख़िर ‘आह आह..’ करते हुए उसके ऊपर ढेर हो गया. उसने अपने लंड का ढेर सारा गाड़ा वीर्य एक पिचकारी के रूप में अंतरा की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>अंतरा इस दौरान कई बार अपना पानी निकाल चुकी थी. उसे सबके लंड और चूस करके साफ़ करना पड़ा. सब लड़कों ने भी अंतरा की चुत को चाट कर साफ कर दिया. इसी बीच अंतरा फिर से गर्म होकर झड़ भी गई. </p>
<p>मैंने ये सब अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया था. जब मेरी बहन की चुदाई पूरी हो गई, तो मैं वहां से निकल गया. </p>
<p>एक घंटे बाद जब मैं वापस आया, तो अंतरा अपने रूम में बैठ कर पढ़ रही थी. मैंने अंतरा को कुछ नहीं बोला. </p>
<p>रात को मैंने उसे वीडियो दिखा दिया, वो एकदम से डर गई. वो बोली- भैया माफ कर दो.. अब ऐसा नहीं होगा.<br />
मैं- एक शर्त पर माफ कर दूंगा.. तुम्हें मुझसे चुदना होगा.</p>
<p>वो शर्मा गई. मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया.<br />
वो बोली- मैं तो आपसे न जाने कबसे चुदने के लिए मरी जा रही थी.<br />
मैंने पूछा- क्यों?<br />
वो बोली- मैंने आपका लंड देखा है, ये बहुत बड़ा है.<br />
मैंने कहा- तो फिर कभी बोला क्यों नहीं?<br />
वो बोली- मैं शर्म रही थी कि कहीं आप नाराज न हो जाओ.</p>
<p>मैंने कहा- मेरी प्यारी बहन की चुदाई कब से चल रही है?<br />
वो बोली- आज दूसरी बार किया है.<br />
मैंने पूछा- पहली बार किसके साथ किया था.<br />
वो बोली- अब इस सवाल का जबाव बहुत लम्बा है, आपको बाद में सब बता दूंगी.</p>
<p>उसने अपनी सील टूटने का किस्सा मुझे बाद में बताने का वायदा किया. मैं अपनी बहन की सील टूटने की चुदाई की कहानी को आप तक जरूर भेजूँगा.</p>
<h2>मेरी बहन की चुदाई की मैंने</h2>
<p>उसने कहा- अब देर न करो भैया. मुझे बड़ी जोर से मस्ती चढ़ रही है.</p>
<p>मैंने अंतरा की चूत को सहलाया और अपनी बहन को नंगी करके चित लिटा दिया. फिर मैंने अपना लौड़ा निकाल कर अंतरा की चूत में घुसाने की कोशिश की.</p>
<p>लेकिन मेरा लंड उन चारों लौंडों से कम से कम दो इंच लम्बा था और मोटा भी बहुत ज्यादा था. इसलिए मेरा थोड़ा सा ही लंड अन्दर गया था. अंतरा को उससे दर्द तो हुआ, लेकिन वो चूंकि दिन में चुद चुकी थी, इसलिए उसने ज्यादा चिल्लपों नहीं की. मगर मुझे उसकी कसी हुई चूत में लंड पेलने से दर्द होने लगा था.</p>
<p>तब भी मैं किसी तरह से अंतरा की चूत में लौड़ा घुसाने लगा और कामयाब भी हो गया. अंतरा ने भी लंड लेने में मेरी मदद की. उसको खुद ही मेरा लंड लेने में मजा आ रहा था. मैंने अपनी बहन की चूचियां दबाईं और उसके होंठ भी चूसे. </p>
<p>उसके बाद मैं पूरा लंड पेल कर अपनी बहन अंतरा की झटके देते हुए चुदाई करने लगा. अंतरा की चूत अभी भी काफी टाइट थी. बाद में मैंने अंतरा की चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया था. मैं अपना लंड अंतरा की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मुझसे चुदने का खूब मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं अंतरा की चूचियां दबाने लगा, वो भी मुझे चूमने लगी. फिर मैं अपना सुपारा अंतरा की चूत तक बाहर निकाल कर जोर जोर से उसको पेलने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर अंतरा को चूसने को बोला. अंतरा ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी.</p>
<p>अंतरा के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया. कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था. मैंने बिना अंतरा को बताए ही उसके मुँह में ही रस को निकाल दिया. अंतरा भी उसको जूस की तरह पी गई.</p>
<p>फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे. कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे.</p>
<p>अब अंतरा ने कहा- अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी पूरी आग बुझा दो.</p>
<p>मैंने अपना लंड अंतरा की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. मेरा लंड अंतरा की चूत में पूरा अन्दर तक चला गया. </p>
<p>अंतरा जोर से चिल्ला उठी- आऊ.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह. </p>
<p>मैंने अंतरा को बहुत जोर से जकड़ लिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. अंतरा जब चुप सी हुई.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.</p>
<p>अंतरा और जोर से चिल्लाने लगी, मैंने उसकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और अंतरा के होंठों को किस करने लगा. होंठों को दबाने से अंतरा की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई. </p>
<p>उस दिन मैं अंतरा को बीस मिनट तक चोदता रहा. इस दौरान अंतरा दो बार झड़ चुकी थी. फिर मैंने अपना सारा रस अंतरा की चूत में ही छोड़ दिया.</p>
<p>मेरी बहन को अपने भाई के साथ चुदाई में बहुत मजा आया. हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे. हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला. </p>
<p>मुझे अंतरा को और चोदने का मन था, पर इस वक्त हमारी बहन की चुदाई बीच में ही छूट गयी पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा. </p>
<p>दूसरी बार में अंतरा बिना कपड़ों के थी क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था. मैं भी अपने कपड़े खोल कर अंतरा की चुदाई के लिए रेडी था. अंतरा ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया. </p>
<p>उस रात को हमने पूरी रात में तीन बार बहन की चुदाई का मजा लिया. फिर अंतरा ने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>आज अंतरा तो इतनी ज्यादा खुश थी कि वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी. ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा.</p>
<p>इसके बाद बहन की चुदाई का कार्यक्रम आज तक चल रहा है. मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अंतरा की चूत को शांत जरूर कर देता हूँ. जब भी अंतरा अपनी चूत की खुजली से ज्यादा परेशान हो उठती है.. तो मैं उसे कहीं बाहर ले जाकर उसकी चूत चोद कर उसे शांत कर देता हूँ.</p>
<p>आप मुझे मेरी बहन की चुदाई की कहानी पर अपने मेल जरूर भेजें.<br />
[email protected]</p>
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			</item>
		<item>
		<title>कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/college-girl-jism-pehla-sparsh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:53:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी दो कॉलेज गर्ल के बारे में है दोनों लड़कियाँ टीनएज थी करीब 19 साल की … मैं आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, आशा करता हूं कि आप सभी को मेरी सेक्स कहानी काफी पसन्द आएगी. मैं उत्तर प्रदेश के एक बड़े से शहर में रहता हूं. <a title="कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/college-girl-jism-pehla-sparsh/" aria-label="Continue reading कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी दो कॉलेज गर्ल के बारे में है दोनों लड़कियाँ टीनएज थी करीब 19 साल की … मैं आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, आशा करता हूं कि आप सभी को मेरी सेक्स कहानी काफी पसन्द आएगी.</p>
<p>मैं उत्तर प्रदेश के एक बड़े से शहर में रहता हूं. यहां पर मैं अपने शहर का नाम नहीं बताना चाहता हूं उसके लिए मुझे क्षमा करें. मैं एक प्रतिष्ठित चॉकलेट कंपनी में सेल्स मैंनेजर के पद पर पिछले दस वर्षों से काम कर रहा हूं.</p>
<p>मैंने 20 साल का होने तक भी अपने लंड की मुट्ठ नहीं मारी थी. हां मुझे तो इतना तो पता था कि मुट्ठ कैसे मारते हैं लेकिन मैंने सुना था कि मुट्ठ मारने से लंड की नसों पर दुष्प्रभाव पड़ता है इसलिए मैं मुट्ठ मारने की आदत नहीं डालना चाहता था. </p>
<p>फिर एक दिन की बात है कि मैं अपने दोस्त के रूम पर उसके साथ टीवी पर फिल्म देख रहा था. फिल्म में सेक्स के सीन थे और मेरे दोस्त ने अपनी पैंट से लंड को निकाल कर मेरे सामने ही अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया. उसने मुझसे भी कहा कि तू भी हिला ले लेकिन मैंने मना कर दिया. फिर वो बाथरूम में चला गया और वहां पर अपना वीर्य निकाल कर आ गया. </p>
<p>उस घटना को कई दिन बीत गये. एक दिन मैं घर पर अकेला था तो पता नहीं मेरा मन भी किया कि एक बार तो हस्तमैथुन करके देखना चाहिए कि कितना मजा आता है. शादी के बाद सेक्स तो हो ही जायेगा.<br />
फिर मैंने टीवी ऑन कर लिया और कुछ सेक्सी सामग्री वाले प्रोग्राम खोजने लगा. बहुत देर तक मुझे कुछ नहीं मिला. फिर मैंने फिल्मों के गानों में दिख रही हिरोइन के चूचों को देख कर ही अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया.<br />
उस दिन जब पहली बार मैंने लंड को हिलाया तो मुझे सच में बहुत मजा आया. </p>
<p>फिर तो बस मैंने अपने लंड की रेलम-पेल शुरू कर दी. मजा आता रहा और मैं लंड पर हाथ को चलाता रहा. फिर जब मैं क्लाइमेक्स पर पहुंच गया तो मेरे लंड से वीर्य की इतनी तेज पिचकारी निकली कि वो सीधी टीवी स्क्रीन पर जाकर लगी. उस दिन जब मैंने लंड की मुट्ठ मार कर वीर्य निकाला तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे कितना मजा आया. इस तरह से वीर्य निकलने का मजा मैंने जिन्दगी में पहली बार ही चखा था. </p>
<p>उसके बाद तो जैसे मुझे इसकी लत ही लग गई. मुझे हर लड़की में बस उसकी चूत ही दिखाई देने लगी थी. जब भी कोई जवान लड़की सामने होती थी तो सबसे पहले नजर उसके चूचों पर जाती थी. उसके बाद उसके चूत के ख्यालों में खो जाता था. अब तो मैं चुदाई के लिए तड़पता रहता था. इस सब के चक्कर में पढ़ाई की तो जैसे ही मां ही चुद गई. </p>
<p>मैं अब ऐसा अय्याश बन गया था कि कॉलेज के बचे हुए दिनों में मैंने केवल तफरी ही मारी. न कभी क्लास में गया और न ही पढ़ाई में ही फोकस कर पाया. कॉलेज जाता था तो बस एग्जाम देने के लिए. </p>
<p>अपनी कहानी बताने के चक्कर में मैं आप लोगों को अपने शरीर के बारे में तो बताना भूल ही गया. मैं दिखने में काफी स्मार्ट था. मेरा रंग भी गोरा है और उन दिनों में तो मेरी पर्सनेलिटी भी काफी अच्छी थी. जब मैं अय्याशी की दुनिया में उतरा तो कई लड़कियां मुझ पर फिदा रहती थी.</p>
<p>आप लोगों को एक सच्चाई यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने कभी भी अपनी तरफ से किसी लड़की को प्रपोज नहीं किया था. जिसकी भी चूत में खुजली होती थी वो खुद मेरे पास आकर अपनी चूत को मेरे हवाले कर दिया करती थी. मैं इस मामले में काफी ईमानदार भी था. मैंने कभी किसी लड़की से सेक्स करने के बाद उसकी प्राइवेसी किसी के साथ शेयर नहीं की थी. जब भी किसी की इच्छा होती थी तो वो मुझे बुला कर अपना काम पूरा करवा लेती थी.</p>
<p>मेरे लंड का साइज भी 6 इंच का है और मोटाई 3 इंच की है. मैं ज्यादा बढ़ चढ़कर नहीं बता रहा हूं, जैसा है वैसा ही बता रहा हूं. मुझे तो अपने लंड से कोई शिकायत नहीं थी क्योंकि कोई भी भाभी या आंटी इस साइज के लंड से संतुष्ट हो सकती थी. वैसे भी मैंने अपने जीवन में ये खुद अनुभव किया है कि लंड के साइज से ज्यादा सेक्स करने की क्रिया पर बहुत कुछ निर्भर करता है.<br />
लंड कितना भी बड़ा या मोटा क्यों न हो, अगर किसी को सेक्स करने की कला नहीं आती है तो वह ज्यादा संतुष्टि अपने पार्टनर को नहीं दे पायेगा. </p>
<p>मैंने अपने जीवन में 20 से ज्यादा लड़कियों और भाभियों की चूत बजाई थी. वो आज तक भी मेरी कायल हैं और मुझे याद करती रहती हैं. यह कहानी भी उन्हीं दिनों की है. कॉलेज में एक लड़की थी युक्ता. यहां पर नाम मैंने बदल दिया है. मेरे दोस्त ने बताया कि वो लड़की कई बार दूसरी लड़कियों के माध्यम से मेरे बारे में बात कर चुकी है. मैंने तो कभी उसकी तरफ ध्यान भी नहीं दिया था. फिर मेरे दोस्त ने बताया कि युक्ता की सहेली उसके साथ सेट थी. युक्ता की सहेली ने ही मेरे दोस्त को युक्ता के मन की बात बताई थी.</p>
<p>मेरे दोस्त ने अपनी वाली की ठुकाई कर बार की थी. अब मेरे मन में भी युक्ता की चूत के लिए तूफान उठने लगा था. फिर मैंने और मेरे दोस्त ने साथ मूवी देखने का प्लान किया. साथ में उसकी गर्लफ्रेंड शोभा भी आने वाली थी. दरअसल मूवी का तो बहाना था. यहां पर चूत चुदाई तो युक्ता की होने वाली थी. मैं उसकी चूत चोदने के लिए बेताब सा था. </p>
<p>किसी जवान कॉलेज गर्ल के साथ वो मेरा पहला अनुभव होने वाला था. इसलिए मैं उस दिन हल्का सा नर्वस भी हो रहा था. फिर मैंने सोचा कि जो होगा वो देखा जायेगा. वहां पर जाकर देखा कि शोभा और उसकी सहेली युक्ता चली आ रही थीं. </p>
<p>पास पहुंचने के बाद शोभा ने मेरा परिचय युक्ता से करवाया. काफी खूबसूरत सी लड़की थी वो. जब उसने हाथ मिलाया तो उसका हाथ छोड़ने का मन ही नहीं किया. मैं उसको देखता ही रहा. 32 के साइज के चूचियां थीं और गांड एकदम मस्त और बिल्कुल बाहर निकली हुई थी. रंग ऐसा गोरा कि जैसे अभी दूध में नहा कर बाहर आई हो.</p>
<p>मन तो कर रहा था कि अभी यहीं पकड़ कर चोद दूं. काफी देर तक उसको देखता रहा तो युक्ता ने ही मेरा ध्यान भंग किया.<br />
बोली- कहां खो गये? चलना नहीं है क्या?</p>
<p>मेरा दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड शोभा को लेकर निकल चुका था. फिर मैंने युक्ता को बाइक पर बैठाया और हम दोनों भी उनके पीछे निकल पड़े. रास्ते में चलते हुए मैं बार-बार ब्रेक लगा रहा था. मुझे उसकी चूचियों का स्पर्श अपनी पीठ पर महसूस हो रहा था. वो मुझसे बिल्कुल चिपक कर बैठी थी. शायद उसको भी मजा आ रहा था. </p>
<p>आखिर हम चारों सिनेमा हॉल में पहुंच गये. हमने जान बूझ कर एक बकवास सी मूवी चुनी थी. इसलिए सिनेमा हॉल में इक्का दुक्का लोग ही थे. वो भी सब कपल ही थे. आप ऐसा भी समझ लें कि वो सब शायद इसीलिये उस मूवी को देखने आये थे ताकि मूवी के बहाने बस मजे ले सकें. हमारे आगे और पीछे वाली सीटों पर दूर तक कोई नहीं था. </p>
<p>जैसे ही मूवी शुरू हुई, हम लोगों की एक्टिविटी भी शुरू हो गई. शोभा और मेरा दोस्त दोनों एक दूसरे को किस करने में लगे हुए थे. उनको देख कर हम दोनों भी एक दूसरे के बारे में यही सोच रहे थे कि कैसे शुरूआत हो.</p>
<p>आखिर मैंने उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगा. वो भी समझ गयी और उसने मेरी तरफ देख कर हल्का सा स्माइल किया और मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया. मैंने भी उसको प्यार से उसके गालों पर एक किस कर लिया, ये मेरे जीवन का पहला किस था. </p>
<p>फिर धीरे-धीरे हम दोनों की सांसें एक दूसरे से टकराने लगीं और मैंने ही पहल करते हुए उसके सिर के पीछे से हाथ ले जाकर उसके कंधों पर रख लिया. उसने भी मेरा साथ देते हुए अपने सिर को थोड़ा सा उठा लिया और मेरे हाथ में सिर रख कर मुझसे चिपक गई, फिर मैंने दूसरे हाथ से उसके चेहरे को ऊपर की तरफ उठाया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिया.</p>
<p>अब मैं किसी और दुनिया में था, उसके लब इतने मुलायम थे कि मैं तो उसे चूसता ही रह गया. 5 मिनट बाद वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी, अचानक एक आवाज आई-  उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैंने पलट कर देखा तो मेरा दोस्त शोभा की चूचियों को बाहर निकाल कर उसके निप्पल को जोर जोर से चूस रहा था.</p>
<p>शोभा मुझे और युक्ता को देख कर थोड़ा शरमा गई और अपनी चूचियों को थोड़ा चुन्नी से ढक लिया और मेरे दोस्त से बोली- धीरे से करो, युक्ता और तुम्हारा दोस्त देख रहे हैं.<br />
मेरे दोस्त ने कहा- उसे सब पता है.</p>
<p>शोभा को इस हालत में देख कर मेरा तो लन्ड खड़ा हो चुका था, ये युक्ता ने भी महसूस कर लिया था.</p>
<p>फिर मैंने अपना दाहिना हाथ युक्ता की चूचियों पर रख दिया. उसके बाद मैं उसी हाथ से युक्ता की चूचियों को दबाने लगा. वो भी बहुत गर्म हो गई थी. उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया. बल्कि उसको तो मज़ा आ रहा था.</p>
<p>युक्ता की चूचियां बिल्कुल रूई के जैसे मुलायम थीं. उसके मुंह से हल्की कामुक आवाजें भी आना शुरू हो गई थीं. फिर मैंने अपने हाथ को उसके गले के ऊपर से कमीज को थोड़ा खींचते हुए अंदर हाथ डाल दिया. मेरा हाथ उसकी चूचियों की चमड़ी से टकराया तो मजा आ गया. एकदम गर्म गर्म रुई का गोला. </p>
<p>मैंने तुरंत उसका कमीज ऊपर किया और एक चूची को बाहर निकाल लिया और उसमें अपने होंठों को रख दिया. उसके मुंह से एक सी … सी … आवाज आई और उसने मेरे सिर को अपनी चूची पर दबा लिया और मेरे बालों पर अपनी उंगलियों से सहलाने लगी.<br />
वो दिन मैं कभी भूल नहीं सकता. हमें बिल्कुल भी होश नहीं था कि हम सिनेमा हॉल में एक पब्लिक प्लेस में हैं. </p>
<p>जवानी के जोश में दोनों ही होश खो बैठे थे. लेकिन मैं चाहता था कि शोभा ये देखे कि कैसे मैं उसकी फ्रेंड युक्ता की चूचियों का मर्दन पान कर रहा हूं. यहां तक कि मैं तो शोभा की चूचियों को चूसने के बारे में भी सोच रहा था. बाद में मैंने शोभा के साथ भी चूत और लंड का खेल खेला लेकिन वो वाकया मैं आप लोगों को बाद में कभी बताऊंगा. </p>
<p>उसके बाद मैंने धीरे से युक्ता का एक हाथ पकड़ कर अपने लन्ड पर रख दिया और धीरे से उसको दबा दिया. युक्ता तो जैसे तैयार बैठी थी. उसने तुरंत मेरे लन्ड को पकड़ लिया और उस पर अपने कोमल हाथ से सहलाने लगी.</p>
<p>युक्ता के कोमल हाथ का लंड पर स्पर्श होते ही मुझसे रहा न गया और मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया. लंड के टोपे को पीछे खिसका दिया. मेरा लंड जोर जोर से झटके खा रहा था.<br />
हर वो लड़का और लड़की ये अच्छी तरह से जानते हैं कि जब पहला सेक्स होता है और जब पहली बार कोई आपके सेक्सुअल पार्ट्स को टच करता है तो वो पहला नशा एकदम अजीब सा होता है. तन-बदन में सरसराहट होने लगती है. दिमाग काम करना बंद कर देता है. दिल की धड़कनें 2 गुना तेजी से चलने लगती हैं.</p>
<p>उस समय लड़कियों के दिमाग में केवल एक ही सोच दिमाग में हावी होती है कि कैसे कितनी जल्दी ये लन्ड उखाड़ कर अपनी चूत में डाल लें. और लड़के सोचते हैं कि चूत में लन्ड डाल कर उसका भोसड़ा बना दें, इतना चोदें, इतना चोदें कि उसकी चूत के परखच्चे उड़ा दें मगर अफसोस ऐसा हो नहीं पाता.</p>
<p>ज्यादातर लड़कियां ही इसमें विजय श्री हासिल करती हैं. </p>
<p>लेकिन कभी-कभी मां भी चुद जाती है, अगर लन्ड मोटा हुआ और चूत का छेद छोटा होता है तो वहां गांड फटने में समय नहीं लगता. लड़की चिल्लाती है कि बस करो, छोड़ दो. रहम करो. युक्ता के साथ भी बाद में ऐसा ही हुआ. </p>
<p>जैसे ही युक्ता ने लन्ड के टोपे को पकड़ कर पीछे किया और फिर से आगे किया और फिर से पीछे. बार-बार यही करती रही. मैं बहुत ज्यादा उत्तेजना में था और लंड का वीर्य छूटने का डर हो चला था. इसलिए मैंने तुरंत उसको रोका और केवल सहलाने को बोला.</p>
<p>फिर धीरे से मैंने उसकी लैगी में हाथ डाला तो उसमें नाड़ा तो था नहीं. मेरा हाथ सीधे उसकी चूत के ऊपर पहुंच गया था. उसकी पैंटी बहुत गीली हो चुकी थी. मैंने पैंटी को साइड में करके उसकी चूत में उंगली डाल दी.</p>
<p>जैसे ही चूत में उंगली घुसी, युक्ता के मुंह से सी … सी … आह … की आवाज आने लगी और वो अपनी कमर को मरोड़ने लगी. मैंने भी उंगली से उसकी चूत का चोदन चालू रखा.</p>
<p>वो पागलों की तरह मेरे कानों को काटती हुई मेरे बालों में अपनी उंगलियां चलाने लगी और फिर एक जोर से आह भरते हुए अपनी कमर के नीचे जांघों के पास से मेरे हाथ को कस लिया और फिर 2 मिनट तक झड़ती रही.<br />
मैं इस बीच में उसकी चूचियों को दबाता रहा. वो मेरे लंड को आगे पीछे करती हुई झड़ती रही. </p>
<p>उसका सारा माल मेरी उंगलियों से होता हुआ मेरे पूरे हाथ में भर गया. इधर मेरा भी लन्ड अपने उफान पर आ गया और मैंने भी एक जोर की पिचकारी छोड़ दी. वो पिचकारी इतनी जोर से निकली थी कि आगे वाली सीट के बिल्कुल ऊपर तक गई थी. अगर हमारे आगे वाली सीट पर कोई बैठा होता तो उस दिन उसके सिर में शैम्पू ही लग जाना था. एक पिचकारी ऊपर हवा में जाने के बाद बाकी का माल युक्ता के हाथ से होता हुआ उसकी उंगलियों में भर गया.</p>
<p>इस दौरान हम दोनों ये तो भूल ही गए थे कि कोई चुपके से हम दोनों को देख रहा है. वो कोई और नहीं बल्कि शोभा ही थी और मुझे और युक्ता को देख कर हंस रही थी. वो पिछले 10 मिनट से हमारी सारी कारस्तानी पर ध्यान लगा कर देख रही थी.</p>
<p>शोभा भी मेरे लन्ड से खेलना चाहती थी. ये मुझे उसने बाद में बताया और ऐसा हो भी क्यों न … जब एक हैंडसम स्मार्ट सा लड़का अपने गोरे लंड के गुलाबी सुपारे के साथ नजरों के सामने बैठा हो तो चूत को गीली होने में भला कितना समय लगना था. </p>
<p>जब मैंने देखा कि शोभा हमारी तरफ ध्यान लगा कर देख रही है तो मैंने तुरंत शोभा को देख कर स्माइल पास कर दी और अपने लन्ड को ऐसे ही बाहर रखा और धीरे से युक्ता से कहा- हमारा पूरा लाइव शो शोभा ने भी देखा है.</p>
<p>युक्ता बोली- वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ है. मुझे उसकी कोई परवाह नहीं, वो तो बेशर्म है ही लेकिन तुम भी कम बेशर्म नहीं हो.</p>
<p>इन्हीं बातों के बीच में मैंने धीरे से युक्ता का मोबाइल नंबर लेकर अपने मोबाइल में सेव कर लिया और शोभा को धीरे से आंख मार दी. वो समझ गई कि मैं और वो दोनों क्या चाहते हैं. फिर हम चारों वहां से शो खत्म होने के पहले ही निकल गए. बाहर आकर हमने एक अच्छे से रेस्तरां में फ़ास्ट फ़ूड खाया. खाना खाते हुए हम सब एक दूसरे को देख कर मुस्करा रहे थे. शोभा मुझे देख कर कुछ ज्यादा ही फ्रेंक हो रही थी.</p>
<p>एक बात मैंने नोटिस की कि युक्ता को शायद मुझसे कुछ ज्यादा ही लगाव हो गया था. उसकी बातों में मुझे प्यार वाला फील आ रहा था. युक्ता थी भी बहुत सुंदर. उसके बाद हम दोनों दोस्तों ने उन दोनों को ऑटो रिक्शा स्टैंड पर ड्राप कर दिया लेकिन युक्ता की नज़र मुझ पर से हट ही नहीं रही थी.<br />
मैंने उसको बाय बोला और उसे एक फ्लाइंग किस दे दिया. उसने भी रिप्लाई में मुझे फ्लाइंग किस दी और बाय बोल कर चली गई. </p>
<p>वो दोनों तो चली गईं लेकिन मैं इस अधूरी चुदाई से जैसे पागल सा हो उठा.</p>
<p>रात में मैंने युक्ता और शोभा की चूचियों और चूत के बारे में सोच कर मुट्ठ मारी. दो बार लंड से वीर्य फेंका दब जाकर मेरी अन्तर्वासना थोड़ी ठंडी पड़ी. फिर लेटे हुए रात के दो बजे का समय हो गया.</p>
<p>अचानक से फोन का मैसेज बजा तो मैंने देखा कि फोन में मेरे पास दो मैसेज आये हुए हैं.<br />
एक में लिखा था- तुमसे मिल कर मुझे बहुत अच्छा लगा. ये शोभा का मैसेज था.<br />
दूसरे में लिखा था- आई लव यू. (मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं) ये युक्ता का मैसेज था. </p>
<p>दोस्तो, इसके बाद की अगली कहानियों में मैं आप लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने एक साथ युक्ता और शोभा की चुदाई की. उन दोनों की चुदाई उनकी सहमति से ही हुई थी. लेकिन उसके लिए आप लोगों को मेरी अगली कहानी का इंतजार करना पड़ेगा. जैसे ही समय मिलेगा मैं अपनी अगली कहानी लिखूंगा. </p>
<p>फिलहाल आप इस कॉलेज गर्ल स्टोरी के बारे में मुझे बतायें कि आपको मेरी यह कैसी लगी. आपको मजा आया कि नहीं. मैंने अपनी मेल आई डी नीचे दी हुई है.<br />
[email protected]</p>
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		<title>मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:48:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर <a title="मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी</p>
<p>जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।</p>
<p>तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।<br />
एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।</p>
<p>चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।<br />
मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।</p>
<p>चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।</p>
<p>मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।</p>
<p>उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।</p>
<p>अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।</p>
<p>उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।<br />
मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।</p>
<p>मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?<br />
मैंने उससे पूछा।<br />
वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!<br />
वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।</p>
<p>मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।<br />
वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?<br />
मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।</p>
<p>दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।</p>
<p>मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’<br />
अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।</p>
<p>उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।<br />
मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?<br />
वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।<br />
मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।</p>
<p>मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?<br />
मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!</p>
<p>मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’<br />
बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।</p>
<p>उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।<br />
रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।</p>
<p>इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।<br />
वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।</p>
<p>मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।<br />
जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।<br />
वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।</p>
<p>हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.<br />
वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।<br />
मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।</p>
<p>मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।<br />
मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।</p>
<p>मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.<br />
और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।</p>
<p>मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।</p>
<p>एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?<br />
वो बोली- हाँ पापा?<br />
मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?<br />
दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?<br />
मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?</p>
<p>वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।</p>
<p>उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।</p>
<p>मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।</p>
<p>मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?<br />
मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?</p>
<p>मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।<br />
तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.</p>
<p>बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।<br />
19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।<br />
मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।<br />
वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!<br />
वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।</p>
<p>उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।</p>
<p>वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया। मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।</p>
<p>मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?<br />
वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।</p>
<p>मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।</p>
<p>तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.<br />
और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।<br />
पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।</p>
<p>फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।<br />
मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।<br />
मैं तो खुशी से उछल पड़ा।</p>
<p>जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।</p>
<p>मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!<br />
कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।<br />
वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।<br />
मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।</p>
<p>मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।<br />
फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।</p>
<p>मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।<br />
वो बोली- जी पापा?<br />
मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।<br />
वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।</p>
<p>जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।</p>
<p>मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।</p>
<p>तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।</p>
<p>बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।</p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?<br />
वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।<br />
मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?<br />
वो बोली- पता नहीं पापा।</p>
<p>मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।</p>
<p>मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।</p>
<p>और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!<br />
उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।</p>
<p>वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!<br />
मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।<br />
वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।</p>
<p>मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।<br />
एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।</p>
<p>और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।<br />
उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।<br />
मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!</p>
<p>मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.</p>
<p>मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।<br />
जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.</p>
<p>मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।</p>
<p>उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।</p>
<p>थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?<br />
वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।</p>
<p>वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।</p>
<p>मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।<br />
उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।</p>
<p>मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!</p>
<p>मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।<br />
फिर बाहर आई।<br />
मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।<br />
तब कहीं वो सहज हुई।</p>
<p>शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।<br />
मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.</p>
<p>मेरी बीवी ने उसकी अच्छी सेवा की अपनी बेटी की तरह, मगर उसे ये नहीं पता था कि उसका पति और दिव्या का नकली बाप ही उसकी इस हालात का जिम्मेदार है।</p>
<p>[email protected]</p>
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		<title>दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:43:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ. आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी <a title="दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/" aria-label="Continue reading दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ.</p>
<p>आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी दूसरी सेक्स कहानी है. सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है. </p>
<p>यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था. </p>
<p>उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.</p>
<p>अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था. </p>
<p>मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था. </p>
<p>प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था. </p>
<p>प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था. </p>
<p>जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था. </p>
<p>हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया. </p>
<p>मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.<br />
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?<br />
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे. </p>
<p>मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.</p>
<p>मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया. </p>
<p>प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.</p>
<p>हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा. </p>
<p>अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.</p>
<p>खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे. </p>
<p>तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.<br />
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी. </p>
<p>उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था. </p>
<p>प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.</p>
<p>अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी. </p>
<p>जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?<br />
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया. </p>
<p>दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.<br />
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला. </p>
<p>मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.</p>
<p>हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था. </p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है. </p>
<p>उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था. </p>
<p>थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.<br />
मैंने भी हामी भर दी. </p>
<p>फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.<br />
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं. </p>
<p>इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था. </p>
<p>मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.</p>
<p>तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.</p>
<p>दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.</p>
<p>जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.</p>
<p>मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.<br />
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी. </p>
<p>मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.</p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा. </p>
<p>मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे. </p>
<p>मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा. </p>
<p>फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. </p>
<p>इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था. </p>
<p>इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे. </p>
<p>फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया. </p>
<p>अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे. </p>
<p>जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था. </p>
<p>मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ. </p>
<p>फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.</p>
<p>इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा. </p>
<p>कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी. </p>
<p>उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.</p>
<p>मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.</p>
<p>मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था. </p>
<p>इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.</p>
<p>थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया. </p>
<p>इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.<br />
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती. </p>
<p>आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.</p>
<p>मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.</p>
<p>उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.<br />
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे. </p>
<p>आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी, कृपया जरूर बताएं. आपके मेल मिलने के बाद मैं आपको अपनी बहन की कुछ और सहेलियों की चुदाई के किस्से लिखूंगा. अब इजाजत दीजिए, जल्द ही मैं फिर से एक नयी चुदाई की कहानी के साथ प्रस्तुत होऊंगा.<br />
[email protected]</p>
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		<title>कामुक चचेरी बहन की पहली चुदाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:42:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, यह कहानी मेरी पहली और सच्ची कहानी है चचेरी बहन की चुदाई की … अगर कोई गलती हो तो माफ़ करना। मेरा नाम है आनंद और मैं गाजीपुर (उ.प्र.) से हूँ, मेरी उम्र 21 साल है और मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है। मैं दिखने में थोड़ा स्मार्ट हूँ, ऐसा लोग कहते <a title="कामुक चचेरी बहन की पहली चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%95-%e0%a4%9a%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81/" aria-label="Continue reading कामुक चचेरी बहन की पहली चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>नमस्कार दोस्तो, यह कहानी मेरी पहली और सच्ची कहानी है चचेरी बहन की चुदाई की … अगर कोई गलती हो तो माफ़ करना।</p>



<p>मेरा नाम है आनंद और मैं गाजीपुर (उ.प्र.) से हूँ, मेरी उम्र 21 साल है और मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है। मैं दिखने में थोड़ा स्मार्ट हूँ, ऐसा लोग कहते हैं। मैं अभी दिल्ली में रहता हूँ जहाँ मैं जॉब कर रहा हूँ।</p>



<p>मैं अन्तर्वासना को पिछले 7 सालों से पढ़ रहा हूँ। यह कहानी पांच साल पहले जून महीने की है। जब मैं छुट्टी में घर गया था। क्या बताऊँ दोस्तो, मैं अपने चाचा की लड़की यानि मेरी छोटी बहन (प्रिया) से पूरे दो साल बाद मिला था। वो देखने में एकदम भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह जैसी लग रही थी। वो मुझ से डेढ़ साल छोटी है, उसका फिगर 34-32-36 था.</p>



<p>मेरे चाचा जी आर्मी में हैं और मेरी चाची गृहिणी हैं. उनके तीन लड़के और दो लड़कियां हैं. चाचा बहुत कम ही घर पर रहते हैं. चाची अकेली घर का सारा काम करती है. चाचा के न होने के कारण चाची ही खेत का काम भी करती थी.</p>



<p>उस दिन बाहर खेतों में काम अधिक था इसलिए शाम को आते ही वह खाना खाकर सोने छत पर चली गयी। छत पर सबका बिस्तर लगा हुआ था.</p>



<p>चाची के बगल में उनके तीन बच्चे सोये हुए थे. मेरा और चाचा के बड़े लड़के और प्रिया का बिस्तर दूसरी छत पर लगा हुआ था. मैं और मेरे चाचा का लड़का सो रहे थे.</p>



<p>कुछ देर बाद प्रिया सोने के लिए छत पर आयी और मैं और चाचा का लड़का एक साथ सोये थे. प्रिया चाचा के लड़के बगल में आकर सो गयी। मेरे सोने के कुछ समय बाद मुझे अहसास हुआ कि मेरा हाथ कहीं जा रहा है. कुछ समय तक मैं सोने का नाटक करता रहा।</p>



<p>मैं देखना चाहता था कि मेरा हाथ कौन टच कर रहा है. प्रिया ने मेरा हाथ अपनी चूची पर ले जाकर रख दिया. उसके बाद उसने कुछ समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं की क्योंकि भाई बीच में सोया था.</p>



<p>कुछ समय बाद वह अपनी चूची पर मेरा हाथ रख कर मसल रही थी. तभी भाई जग गया. भाई के जाग जाने के कारण अब हम दोनों में कोई भी हरकत नहीं करना चाह रहा था. प्रिया ने मेरा हाथ यूं का यूं रहने दिया. मुझे अब तक बहुत मजा आ रहा था लेकिन अब मेरी गांड भी फटने लगी थी कि कहीं भाई देख न ले और प्रिया को छेड़ने का सारा इल्जाम मेरे सिर पर आ जाये.</p>



<p>उसकी चूची पर से अब भी मेरा हाथ नहीं हटा था. फिर जब भाई दोबारा सो गया तो कुछ समय बाद मैंने उसकी कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर चूची बहुत तेज दबा दी. इधर मेरा लन्ड खड़ा होने लगा. कुछ समय बाद मैंने उसकी पजामी में हाथ डालना चाहा लेकिन उसने डालने नहीं दिया. शायद भाई बीच में सोया था इसलिए वो मुझे ऐसा नहीं करने देना चाहती थी.</p>



<p>फिर मैंने कामुक बहन की पजामी के ऊपर से ही उसकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया.<br>कुछ समय बाद मुझे अपने हाथ पर पानी पानी सा लगा. उस समय तक वह झड़ चुकी थी. फिर वह उठ कर बैठ गयी. उसके बाद मैंने उस रात कुछ नहीं किया और हम सो गये।</p>



<p>अगले दिन हम दोपहर में टी.वी. देख रहे थे. उस समय घर पर छोटा भाई ही था और कोई नहीं था. तभी उसने मेरी जांघों पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. मैं उसके हाथों को बार-बार हटा रहा था क्योंकि दिन का मामला था और कोई भी आ सकता था.</p>



<p>शाम हुई तो चाची खाना खाकर सोने गई. मैं टी.वी. देख रहा था. मैंने बोला- आप लोग सो जाओ. मैं टी.वी. देख कर सो जाऊंगा।</p>



<p>सभी लोग छत पर जाकर सोने लगे। कुछ समय बाद प्रिया छत से नीचे आयी और मेरे बगल में बैठ गयी. वह अपने हाथ कभी मेरे पैर पर तो कभी मेरे गाल पर चला रही थी। काफी देर तक वो ऐसे ही करती रही.</p>



<p>मुझ से नहीं रहा गया और लाईट ऑफ करके मैंने प्रिया को अपने गोद में बैठा लिया. उसकी चूचियों को खूब रगड़ा और किस करने लगा.</p>



<p>लगभग पांच मिनट तक यही खेल चलता रहा. उसके बाद ऊपर से कोई आवाज आई और हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गये. मुझे भी प्रिया के साथ ये सब करने में बहुत मजा आ रहा था. मेरा लंड खड़ा हो गया था और मैं उसके हाथ में लंड देना चाह रहा था लेकिन उसी वक्त फिर वो उठ कर चली गई. ऊपर छत पर जाने के बाद वो सो गई.</p>



<p>अगले दिन प्रिया के तीनों भाई और बहन 9 बजे के करीब स्कूल चले गये. चाची किसी काम से बाजार गई थी.</p>



<p>उनके जाते ही मैंने दरवाजे को कुन्डी लगाई और अन्दर आकर देखा तो प्रिया खाना बना रही थी. मैंने पीछे से जाकर प्रिया को पकड़ लिया. उसकी कुर्ती के ऊपर से उसके चूचों के साथ खेलना शुरू कर दिया.<br>वो मुझे हटाने लगी लेकिन मैंने उसके चूचों को नहीं छोड़ा और उनको दबाता रहा. मेरा लंड खड़ा हो गया था और मैंने प्रिया की गांड पर अपना लंड लगा दिया था. फिर उसने भी कुछ नहीं कहा और मैं आराम से प्रिया के चूचों को दबाने लगा. वो भी अब गर्म होने लगी थी.</p>



<p>फिर मैंने उसकी कुर्ती को निकाल दिया. उसकी ब्रा को भी निकाल दिया. वो ऊपर से नंगी हो गई और मैं उसके चूचों को पीने लगा. किचन में नंगी प्रिया के चूचों के साथ खेलते हुए मुझे भी जोश आने लगा था. मैंने उसकी चूचियों को जोर से पकड़ कर दबा दिया. बीच-बीच में मैं उसके चूचों के निप्पलों को काट भी लेता था. उसके मुंह से चीख सी निकल जाती थी लेकिन उसको भी मजा आ रहा था.</p>



<p>मैंने प्रिया का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखवा दिया तो वो मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी.</p>



<p>फिर मैंने प्रिया की पजामी को नीचे करने की कोशिश की तो उसने मेरे हाथों को रोक लिया. मैंने थोड़ा जोर लगाया तो उसने अपने हाथ हटा लिये. मैंने प्रिया की पजामी को नीचे कर दिया और उसकी पैंटी मुझे मेरी नजरों के सामने दिखाई देने लगी. उसकी चूत उभरी हुई सी दिख रही थी.</p>



<p>मैंने प्रिया की चूत पर हाथ फेर दिया तो वो चिहुंक सी गई. उसकी चूत काफी गर्म हो चुकी थी. उसकी चूत पर हाथ लगाते ही मेरे लंड का जोश भी और ज्यादा बढ़ गया. मैंने अपनी पैंट की चेन को खोल कर अपने लंड को बाहर निकाल लिया. मैं अब प्रिया के होंठों को चूसने लगा और मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखवा दिया.</p>



<p>वो मेरे लंड को पकड़ कर मेरे लंड के टोपे को आगे और पीछे करने लगी. मेरा लंड काफी देर से खड़ा हुआ था तो इस वजह से मेरे लंड को जब उसके हाथ का कोमल सा स्पर्श मिला तो मुझे बहुत मजा आने लगा.<br>मेरी कामुक बहन भी मेरे गर्म लंड को पकड़ कर मजे से उसके टोपे को आगे-पीछे करने में लगी हुई थी. उसको मेरे लंड का साइज पसंद आ गया था. वो उसको बार-बार हाथ में भर कर नाप रही थी. कभी मेरी गोलियों को छेड़ रही थी तो कभी मेरे लंड के सुपारे को मसल रही थी.</p>



<p>उसकी हरकतों से मेरे लंड के अंदर से भी कामरस निकलना शुरू हो गया था.</p>



<p>मैंने वहीं पर खड़े हुए ही उसकी चूत पर अपने लंड को सटा दिया. मेरा मन कर रहा था कि मैं वहीं पर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दूं. मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था. फिर मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर प्रिया की चूत पर फिराया और अपनी उंगली उसकी चूत में डाल दी.<br>प्रिया एकदम से उछल पड़ी.</p>



<p>मैंने उसके अपनी बांहों में उठा लिया. उसकी गांड को दबाने लगा और उसकी चूत मेरे लंड पर आकर सट गई. मैं अपनी गांड को आगे धकेल कर उसकी चूत पर लंड के धक्के देने लगा.<br>मुझे बहुत मजा आ रहा था ये सब करने में.</p>



<p>मेरा लंड प्रिया की चूत में घुसने ही वाला था कि तभी उसने मुझे अपने से अलग कर दिया, वो बोली- अंदर चलो कमरे में.<br>उसके कहने पर हम कमरे की तरफ जाने लगे. उसकी गांड पीछे से नंगी दिखाई दे रही थी. जब वो चल रही थी तो मैं उसकी गांड को पकड़ कर दबा रहा था. मेरा लंड बार-बार झटके दे रहा था.<br>मैंने प्रिया की गांड को कस कर दबा दिया तो वो उछल गई और उसकी पजामी उसकी टांगों में उलझ गई जिसके कारण वो एकदम से संतुलन खो बैठी और नीचे गिर पड़ी. मगर उसने अपने हाथ नीचे जमीन पर टिका लिये.<br>उसकी नंगी गांड मेरे सामने उठ कर आ गई. मैंने अपने लंड को उसकी गांड पर लगा दिया और मैं भी प्रिया के ऊपर ही झुक गया. पीछे से उसकी नंगी गांड पर लंड लगा कर मैं उसके चूचों को दबाने लगा. उसको चोदने का मन करने लगा.</p>



<p>लेकिन वो उठने की कोशिश कर रही थी. उसने मुझे पीछे धकेल दिया और फिर वो उठ गई.</p>



<p>हम दोनों उठ कर कमरे में चले गये. कमरे में जाते ही वो बेड पर लेट गयी. उसने अपनी पजामी निकाल दी. वो मेरे सामने अब पूरी नंगी हो चुकी थी. उसने अपनी टांगें खोल दी थी और मैं समझ गया कि वो भी लंड को अंदर लेने के लिए तैयार है.</p>



<p>मैंने अपनी पैंट को निकाल दिया और फिर अपने अंडरवियर को भी निकाल कर एक तरफ डाल दिया. वो बोली कि शर्ट भी निकाल दो. वो मुझे पूरा का पूरा नंगा देखना चाहती थी. मैंने भी उसके कहने पर अपनी शर्ट निकाल दी और मैं भी पूरा नंगा हो गया. वो मेरे नंगे शरीर को ऊपर से नीचे तक देख रही थी.</p>



<p>फिर मैं उसके ऊपर जाकर चढ़ गया. मैंने उसकी टांगों को फैला दिया और उसके चूचों को पीते हुए अपना लंड उसकी पानी छोड़ रही चूत पर रगड़ने लगा. उसके मुंह से सीत्कार निकलने लगे. आह्ह् … स्स्स … उम्म… मैं भी अपना लंड उसकी चूत पर लगा रहा था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था.</p>



<p>कुछ देर तक उसके चूचों को पीने के बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर लगा दिया और एक जोर का धक्का लगा दिया.<br>मेरा लंड बहन की चूत में नहीं घुस पाया क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी. मेरा लंड उसकी चूत पर फिसल गया. फिर मैंने दोबारा से लंड को उसकी चूत पर लगाया और दोबारा से लंड का जोर उसकी चूत के मुंह पर देकर मारा तो लंड का सुपारा उसकी चूत में चला गया. मुझे मजा आ गया लेकिन प्रिया चिल्ला पड़ी. उसकी चूत खुल गई थी.</p>



<p>मैंने उसको शांत करने की कोशिश की लेकिन वो चुप नहीं हो रही थी और दर्द से कराह रही थी. फिर मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया. उसके बाद मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगा लिया. उसकी चूत पर भी तेल लगा दिया. तेल लगाने के बाद मेरा लंड और उसकी चूत दोनों ही बिल्कुल चिकने हो गये थे.</p>



<p>मैंने अपने लंड से उसकी चूत की मालिश की और फिर उसका दर्द कम हो गया. मैंने दोबारा से अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत पर लगा कर एक धक्का मारा. अबकी बार मेरा आधा लंड उसकी चूत में उतर गया.<br>वो फिर से दर्द से चिल्ला पड़ी ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’</p>



<p>लेकिन अबकी बार मैंने अपने लंड को बाहर नहीं निकाला. मेरे लंड को उसकी गर्म चूत में जाकर बहुत मजा आ रहा था इसलिए मैं उसकी चूत का मजा लेना चाहता था. मैंने उसकी आवाज को कम करने के लिए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. उसकी चूत में भी मैं साथ ही साथ दबाव बनाता गया और धीरे-धीरे करके मैंने पूरा का पूरा लंड प्रिया की चूत में उतार दिया.</p>



<p>फिर मैं कुछ देर तक रुका रहा. जब वो पूरी तरह से शांत हो गयी तो मैंने धीरे से प्रिया बहन की चूत में धक्के लगाने शुरू किये. उसको दर्द होने लगा. इसलिए मैं बहुत धीरे से उसकी चूत को खोल रहा था. मैंने उसकी टांगों को खोल कर देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था. उसकी चूत फट गई थी. लेकिन मैंने उसको कुछ नहीं कहा.</p>



<p>वापस उसके ऊपर आकर मैं उसके चूचों को पीने लगा तो वो भी फिर मजा लेने लगी. अब मेरा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा था. मैंने उसकी चूत में लंड को पूरा घुसा दिया. अब मैंने तेजी के साथ उसकी चूत में लंड को चलाना शुरू किया और उसकी चूत की चुदाई करने लगा.</p>



<p>वो भी अब मजे से मेरे लंड को लेने लगी. उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट ली और मेरे होंठों को चूसने लगी.</p>



<p>मेरा जोश और ज्यादा तेज हो गया तो मैं और तेजी से उसकी चूत की चुदाई करने लगा. उसकी टाइट चूत को चोद कर मुझे बहुत ही आनंद मिल रहा था. वो भी मेरे लंड के मजे ले रही थी. पांच-सात मिनट तक उसकी चूत की चुदाई मैंने उसी तरह की और फिर मैंने उसको उठने के लिए कहा.</p>



<p>जब वो उठी तो उसने अपनी चूत से निकला हुआ खून देखा और डर गई.<br>मैंने कहा- घबराने की बात नहीं है. तुम्हारी चूत की झिल्ली फट गई है. इसलिए ये हल्का सा खून निकल आया है.</p>



<p>फिर मैंने उसको घोड़ी बना लिया. उसकी गांड बहुत मस्त थी. मेरा मन उसकी गांड की चुदाई करने का भी कर रहा था लेकिन अभी ये हमारा पहली बार था तो अभी मैं उसकी गांड में लंड डाल कर उसको डराना नहीं चाहता था.</p>



<p>वैसे तो उसने मुझे कई दिनों से परेशान कर रखा था लेकिन वो इस बात को नहीं जानती थी शायद कि चुदाई करवाने में दर्द भी झेलना पड़ता है. इसलिए मैं उसको और ज्यादा दर्द नहीं देना चाह रहा था.</p>



<p>मैंने फिर प्रिया को घोड़ी बना कर झुका लिया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया. अब उसकी चूत अंदर से भी पूरी की पूरी चिकनी हो चुकी थी. इसलिए जब मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला तो मेरा लंड एकदम से अंदर चला गया.</p>



<p>एक तो लंड पर तेल लगा हुआ था और दूजा उसकी चूत ने अपना कामरस छोड़ना चालू कर दिया था. इधर मेरे लंड से चिकना पदार्थ निकल रहा था. मैंने उसकी चूत को में लंड को डाल कर एक धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया.<br>वो आह्हह … करके रह गयी.</p>



<p>फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया. अब पोजीशन ठीक थी तो मैंने उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी.<br>मैं पीछे से चूत में पूरा लंड घुसा कर उसको अंदर और बाहर कर रहा था. मेरे लंड के धक्के अब तेज हो गये थे. उसकी चूत के अंदर जब लंड जा रहा था तो पच्च-पच्च की आवाज हो रही थी.</p>



<p>मैंने उसकी चूत में अपने लंड की स्पीड बढ़ा दी. वो फिर दर्द से चीखने लगी लेकिन अबकी बार मैं नहीं रुका. मैंने दस मिनट तक इसी पोज में उसकी चुदाई की और फिर मेरे लंड का माल मैंने प्रिया की चूत में ही गिरा दिया.</p>



<p>हम दोनों नंगे थे और मैं उसके ऊपर ही लेट गया. कुछ देर तक मैं उसके ऊपर ही पड़ा रहा. कुछ मिनट के बाद मैं उठा. फिर वो भी उठ गयी.</p>



<p>सच में दोस्तो, अपनी कामुक चचेरी बहन की चूत की चुदाई करके मजा आ गया था मुझे. वैसे वो भी खुद ही मेरा लंड लेना चाहती थी. इसलिए मैंने मौके का पूरा फायदा उठाया.<br>मगर फिर उस दिन चाची के आने का टाइम हो गया था तो मैंने अपने कपड़े पहन लिये.</p>



<p>उसने भी अपने कपड़े पहन लिये. मैं कई दिनों तक चाची के घर में रहा लेकिन फिर हमको चुदाई का मौका नहीं मिल पाया.</p>



<p>उसके बाद फिर मेरी जॉब दिल्ली में लग गई थी तो मैं दिल्ली में आ गया था. उसके बाद मुझे कभी प्रिया की चूत को चोदने का मौका नहीं मिला. उसकी चूत की वो पहली चुदाई याद करके आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है. मैं मुठ मार कर ही उसकी चूत के बारे में सोच कर अपना पानी निकाल लेता हूँ और अपने लंड को शांत कर लेता हूँ.</p>



<p>तो दोस्तो, आपको मेरी कामुक चचेरी बहन की चुदाई की ये कहानी कैसी लगी. इस बारे में कमेंट करके बताना मुझे. मैंने अपनी मेल आई-डी भी नीचे दी हुई है.<br>pragya236186@gmail.com</p>
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		<title>सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था. आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और <a title="सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/" aria-label="Continue reading सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था.</p>
<p>आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.<br />
मेरी उम्र 42 वर्ष है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बेटा है. </p>
<p>वो सर्दियों के दिन थे, एक दिन शाम को मैं मरी पत्नी और मेरी भांजी बैठे हुए बातें कर रहे थे. हम तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे और अपनी टांगों पर कम्बल डाला हुआ था. अचानक मेरा पैर उसकी टांगों के बीच में चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा था. मैंने सोचा कि यह मेरी पत्नी के पैर हैं, लेकिन कुछ टाइम बाद मुझे मालूम हुआ मेरा पैर तो मेरी भांजी की टांगों से टकरा रहा था और वो मेरी इस बात का कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी थी.</p>
<p>बस दोस्तो, यहीं से मेरे मन में उसके लिए विचार बदल गए. मैंने उसकी जांघ पर अपने पैसे से सहलाना शुरू किया, तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. उसके कुछ वक्त बाद हम सोने की तैयारी करने लगे. मेरी पत्नी के बाजू में मेरा बेटा सोया हुआ था.</p>
<p>मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी पत्नी बहुत ही खुले विचारों वाली है और वह मुझसे सेक्सी बातें खुलकर करती है. दूसरों को चुदवाने के बारे में भी वह कहती है कि आप किसी को चोदोगे, तो मैं आपको देख कर बहुत मजे लूंगी. </p>
<p>इसी बीच मैंने मजाक मैं अपनी पत्नी और अपनी भांजी से कहा- यार, सर्दी ज्यादा ही नहीं बहुत ज्यादा है … कोई हमें भी पास सुला लो. </p>
<p>इस पर मेरी पत्नी ने मजाक में कह दिया- मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो.<br />
तभी मेरी भांजी ने कहा- मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं. आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ … मेरे पास आ जाओ.</p>
<p>देर ना करते हुए मैं तुरंत अपनी भांजी के बेड पर आ गया और उसके साथ लेट गया. मैंने लेटते ही कमरे की लाइट बंद कर दी. मेरी बीवी समझ चुकी थी कि मैं टीनएज गर्ल के कामुक बदन का मजा लूंगा.</p>
<p>करीब 10-15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरी भांजी को नींद आ गई है, वह मेरी तरफ पीठ किए हुए थे. तभी मैंने उसके पीछे से सटकर उसके ऊपर हाथ रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया. अब मैं उसके बिल्कुल बराबर में पीछे से सट कर लेट गया. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके चूतड़ों की दरार में लग रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मेरी भांजी के चूतड़ों पर स्पर्श कर रहा था. वह अब भी कोई विरोध नहीं कर रही थी.</p>
<p>तभी मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मम्मों पर लगाया. आह … बिल्कुल गोल गोल उभार लिए मस्त बूब्स थे. दोस्तों अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी. मैंने एक हाथ उसके सूट के अन्दर डालकर उसके नंगे मम्मों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसका कोई विरोध ना देख कर मैंने उसको सीधा कर लिया. </p>
<p>वह अब सीधी लेटी हुई थी. मैंने धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती को बिल्कुल ऊपर कर दिया और दोनों चूचे नंगे कर दिए. दोनों मम्मों को नंगे करने के बाद मैंने धीरे से अपने होंठ उसके एक चूचे पर लगाए और उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.</p>
<p>उसके दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं. मैं जान चुका था कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है. उसकी सांसें भी तेज हो चुकी थीं. </p>
<p>कुछ देर उसके मम्मों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार में सरका दिया और उसकी चूत पर रखा, तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भीगी हुई थी. मैं समझ गया कि यह बिल्कुल गर्म हो चुकी है.<br />
मैंने सोचा कि यह अभी कुंवारी है, किसी से चुदी नहीं है … यहां पर पूरा खेल नहीं हो पाएगा. मेरा बेटा भी इसी कमरे में सोया हुआ था. बराबर में दूसरा कमरा खाली था. मैंने कुछ टाइम उसकी चूत में उंगली से सहलाया.</p>
<p>जब मैंने महसूस किया कि अब यह पूरी गर्म हो चुकी है, तो मैंने धीरे से उसके कान में कहा- चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं.<br />
मेरे इतना कहते ही मेरी भानजी उठकर बराबर वाले कमरे में पहुंच गई. पीछे से मैं भी कमरे में पहुंच गया. दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने नीचे बिस्तर लगा दिया. </p>
<p>इसी बीच मैंने उस कमरे से दूसरे कमरे में खुलने वाली खिड़की को हल्का सा खोल दिया ताकि मेरी पत्नी भी हमारी चुदाई का आनन्द ले सके. दूसरे कमरे में जाते ही मैंने उसको नीचे लगे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उसने और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे. मेरी भांजी मेरे लंड से चुदने के लिए बिल्कुल बेकरार हो रही थी.</p>
<p>अपनी बहन की बेटी को नंगी करने के बाद मैंने देखा कि वह बहुत ही कामुक और सुंदर नजर आ रही थी. उसके चूचे बिल्कुल गोल और कड़े थे. उसकी चूत बहुत उभार लिए हुए थी. फूली हुई बुर देख कर मजा आ गया.</p>
<p>मैं उसको देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने तुरंत ही उसको चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी.<br />
अब मैंने अपनी भांजी से पूछा- कैसा लग रहा है?<br />
उसने कहा- मामा जी बहुत मजा आ रहा है … आगे करो ना कुछ. </p>
<p>कुछ समय तक उसके मम्मों को चूसने के बाद मैं नीचे आया और उसकी टांगें फैलाकर देखा, तो उभार लिए हुए उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैंने उसकी चूत की दरारों को दोनों उंगलियों से फैला कर चौड़ा किया, तो मजा आ गया.</p>
<p>क्या सेक्सी सीन था … मैं बयान नहीं कर सकता. बिल्कुल गुलाबी चूत थी. उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के रोएं आने शुरू हुए थे. एकदम फूली हुई चूत मस्त पाव रोटी सी दिख रही थी. मैं अपनी बेटी समान भानजी की चूत को देखता ही रह गया. मेरे मन में आ रहा था एकदम से इसकी चूत में अपना लंड पेल दूं, लेकिन मैं जानता था कि अभी यह बिना चुदी हुई है … इसलिए बहुत प्यार से चोदना पड़ेगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मेरा लंड भी 7 इंच लंबा और काफी मोटा तगड़ा लंड है. मैं जानता था कि इसकी कमसिन चुत की ओपनिंग बहुत प्यार से करना पड़ेगी. ये इतना बड़ा लंड आराम से नहीं ले पाएगी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत की दरार को उंगली से फैला कर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.<br />
मेरी जीभ उसकी कुंवारी बुर में लगते ही वह उछल पड़ी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को कुछ अन्दर तक डाल कर चाटना शुरू किया. उसकी चूत पहले ही पानी से भीगी हुई थी … बिल्कुल नमकीन पानी था जिसको मैं चाट कर मस्त हो रहा था. चूत से कोरेपन की भीनी खुशबू आ रही थी. पूरी तरह गीली चूत मुझको चाटने को मिल रही थी. मैं मस्ती में भर कर उसकी चूत को चाट रहा था. वह गांड उछाल उछाल कर सिसकारियां ले रही थी. वो अपने एक हाथ को मेरे सिर पर रख कर अपनी चूत पर मेरे मुँह को दबाए जा रही थी.</p>
<p>तभी उसने मुझसे कहा- मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है … जल्दी से कुछ करो ना!</p>
<p>कुछ टाइम उसकी चूत चाटने के बाद मैंने कहा- मेरी प्यारी भांजी, मेरे लंड को भी तो चाट कर मजा दो ना?</p>
<p>मेरे इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड पानी से भीग चुका था, लेकिन वो पूरे लंड को चाट कर साफ कर चुकी थी. वो आइसक्रीम की तरह मेरे लंड को चाट रही थी. </p>
<p>करीब 5 मिनट मेरे लंड को चाटने के बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और कहा- मामा जी, बहुत मोटा है, मेरा मुँह दुख रहा है … अब नीचे कुछ करो ना प्लीज. </p>
<p>मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया. उसकी टांगों के बीच में बैठकर अपनी हाथ की उंगलियों से उसकी चूत की दरार को फैलाया. अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और हल्के से धक्का लगा दिया.<br />
इस धक्के से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था. </p>
<p>तब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- हां मामाजी हल्का सा दर्द महसूस हो रहा है.<br />
मैंने उसको समझाया- हल्का दर्द होगा, उसके बाद मजा आने लगेगा. तुम चीखना नहीं.<br />
उसने सहमति से सर हिला दिया.</p>
<p>मैंने उसके एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने शुरू किया और अपने लंड के दबाव को कुछ आगे बढ़ाना शुरू किया. मेरा लंड का कुछ और हिस्सा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था, उसको थोड़ी पीड़ा हो रही थी.<br />
फिर मैंने अपने लंड को वहीं रोक कर हल्का हल्का आगे पीछे करना शुरू किया, तो उसका दर्द भी कुछ कम हुआ और उसको मजा आने लगा. अब वह नीचे से कभी-कभी अपनी गांड को उछाल कर मजा ले रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक जोरदार ठाप दे मारी, तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा समा गया. इसी के साथ मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. इस कारण उसकी हल्की सी कराहट निकल सकी. लेकिन मेरा लंड पूरा मेरी सगी बहन की बेटी की चूत में समा चुका था और उसकी सील टूट चुकी थी.</p>
<p>मैं उसकी चूत में अपना लंड फंसा कर उसके ऊपर लेटा रहा और उसके मम्मों को बार बार मुँह में लेकर चूसने लगा. वह कुछ नॉर्मल हुई, तो मैंने अपने लंड को थोड़ा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. </p>
<p>अब उसकी मादक सिसकारियां चालू हो गईं, मैं समझ चुका था कि अब मेरी भांजी चुदाई का मजा ले रही है. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी. </p>
<p>अब मैं और मेरी भांजी चुदाई का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. मैंने अपने आपको रोकते हुए अपना लंड चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का हल्का खून लगा हुआ था. मैंने उसको साफ किया और उसकी चूत को भी साफ किया. फिर दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी.</p>
<p>इसी बीच मैंने खुली खिड़की में देखा तो मेरी पत्नी हम दोनों की चुदाई देख रही थी और मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं और मेरी भांजी दोनों पूरे मजे में डूबे रहे थे. मैं अपनी भांजी से धीरे-धीरे बातें कर रहा था और पूछ रहा था- कैसा लग रहा है?<br />
वह चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और बातों का मजा ले रही थी. वो मुझसे खुलकर बातें कर रही थी. लंड चुत चुदाई के शब्द खुल कर बोल रही थी. वो हॉट चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. </p>
<p>इसी बीच मेरी भांजी ने मुझसे कहा- मामाजी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है … और मुझे कुछ हो रहा है.<br />
मैं समझ चुका था कि अभी ये झड़ने वाली है. </p>
<p>तभी उसने मुझको कस कर जकड़ लिया और कहा- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामा जी … प्लीज प्लीज … </p>
<p>तभी वह शांत पड़ गई. मैं समझ गया कि यह झड़ गई. उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.</p>
<p>फिर मैंने उसको कपड़े पहनाकर दूसरे कमरे में जाने दिया और अपनी पत्नी को इसी कमरे में बुलाकर उसकी चुदाई के मजे लेने की सोचने लगा … क्योंकि मेरे लंड का पानी अभी निकला ही नहीं था. </p>
<p>मेरी पत्नी आते ही नंगी हो गई और उसने सारे कपड़े निकाल दिए. उसने मुझे बताया कि मैं आपकी सारी चुदाई छुपकर शुरू से देख रही हूं. देखो मेरी चूत में कितना पानी है.<br />
मैंने हाथ से देखा, तो मेरी पत्नी की चूत बिल्कुल भीगी हुई थी.</p>
<p>मैंने तुरंत ही अपनी पत्नी को चित लिटाया और उसकी चूत को चाट कर पानी को पी गया. फिर अपना खड़ा लंड डालकर उसकी चुदाई की और उसकी चूत में ही झड़ गया. अब मैं भी शांत हो चुका था.</p>
<p>तभी मेरी भांजी भी उसी कमरे में आ गई. उसने मेरे झड़े हुए लंड को चूस लिया. मेरी बीवी ने उसको बिस्तर पर ले लिया. इसके बाद अगला राउंड मैंने भांजी की चुदाई से शुरू करके बीवी की चूत तक का किया. इस थ्री-सम सेक्स में बहुत मजा आया.</p>
<p>दोस्तो, उसके बाद मैं मेरी पत्नी और मेरी भांजी हम रोजाना मिलकर चुदाई का मजा लेने लगे. यह सिलसिला अभी तक बरकरार है. अभी तक मेरी भांजी की शादी नहीं हुई है और हम तीनों साथ साथ ही चुदाई का मजा ले रहे हैं. </p>
<p>आपको मेरी यह टीनएज गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है.<br />
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		<title>दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:28:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है। मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है। पहले मैं निधि के बारे <a title="दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/" aria-label="Continue reading दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।</p>
<p>मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है।</p>
<p>पहले मैं निधि के बारे में बता दूँ कि निधि बहुत ही खूबसूरत है, सेक्सी हैं, बहुत ही कामुक स्वभाव की है, उसका फिगर बहुत ही अच्छा है बड़े-बड़े चूची हैं, गांड एकदम फैली हुई है। सेक्स की बहुत बड़ी भूखी है वह हमेशा सेक्स करने को आतुर रहती है।</p>
<p>कुणाल ने मुझे पहले भी बताया था कि निधि सेक्स में बहुत रुचि दिखाती है, वह बहुत ज्यादा सेक्स करना चाहती है, वह सब पोजीशन पर सेक्स करना चाहती है। निधि को चूत चुदाई के लंबे लंबे दौर पसंद हैं, उसे तेज तेज धक्के पसंद हैं। वो लड़की अपनी गांड मरवाना भी पसंद करती है. निधि को वाइल्ड सेक्स और रफ़ सेक्स भी पसंद है।</p>
<p>मुझे कुणाल ने यह भी बताया था कि निधि के पहले भी कई सेक्स अफेयर रह चुके हैं और पहले भी बहुत लण्ड ले चुकी थी. कुणाल ने निधि के दोस्तों से पता लगाया था कि वह कॉलेज में बहुत सारे लड़कों के साथ चुदाई कर चुकी थी। चुदाई करना उसे बहुत पसंद था, उसे नए-नए लण्ड के साथ सेक्स करना बहुत पसंद था।</p>
<p>कुणाल हमेशा निधि को चोदने के लिए मेरे कमरे का इस्तेमाल करता था, वह हमेशा निधि को लेकर मेरे रूम पर आता था. वे दोनों दिन दिन भर सेक्स करते थे, उसके बाद चले जाते थे.<br />
लेकिन जब वे दोनों जाती थे तो निधि का चेहरा देख कर लगता था कि कुणाल निधि को खुश नहीं कर पाता था। </p>
<p>एक दिन की बात है, कुणाल और निधि मेरे रूम पर चुदाई कर रहे थे. अचानक से कुणाल को कुछ काम आ गया और उसे निधि को मेरे रूम पर छोड़कर जाना पड़ा।</p>
<p>अब मैं और निधि घर पर अकेले थे तो मैं निधि से बातचीत करने के लिए रूम में गया। कमरे में से कंडोम की सुगंध आ रही थी। बिस्तर की चादर की सिलवटें चुदाई की दास्तां बता रही थी।</p>
<p>निधि रूम में बेड पर लेटी हुई थी, वह थोड़ी उदास लग रही थी।</p>
<p>हम दोनों बात करने लगे. बात करते-करते हम लोग नॉनवेज बात करने लगे। वो अपनी चुदाई की बात बताने लगी, बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि कुणाल उसे खुश नहीं कर पाता है और वह रोने लगी।</p>
<p>मैं बगल में ही बैठा हुआ था उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया। मैं उसे चुप कराने के लिए उसके सिर को सहलाने लगा। समझाते हुए मेरे और निधि के होंठ आपस में नजदीक आ गए, मैं निधि को किस करने लगा, निधि मेरा पूरा साथ देने लगी।</p>
<p>हम लोगों ने लगभग 10 मिनट तक किस किया. निधि पूरे जानवरों की तरह मेरे होंठों पर टूट पड़ी, लग रहा था जैसे वह मेरे होठों को खा जाएगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे निधि ने सालों से किस नहीं किया है.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे किस करते करते हुए मैं निधि के चूचे दबा रहा था और वह मेरे लण्ड को सहला रही थी, हम दोनों बहुत मजे ले रहे थे। </p>
<p>निधि के चुचे को दबाते दबाते मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसकी मुलायम चूची को चूसने लगा। वो पूरे मस्ती में अपनी कामुक आवाज उम्म्ह … अहह … हय … ओह … निकाल रही थी.<br />
उसने मेरी पैंट की चेन खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे हाथ से हिलाने लगी.</p>
<p>लड़की के हाथसे लंड सहलवाने में मुझे भी मज़ा आने लगा था, मैंने भी जींस के ऊपर से ही निधि की चूत को सहलाना आरम्भ कर दिया। अब तक निधि बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी.<br />
मैंने उसकी जींस का बटन खोल दिया, फिर ज़िप भी खोल दी और जीन्स को नीचे सरका दिया.</p>
<p>मैंने देखा कि उसकी पैंटी चूत के पास से उससे निकले रस से पूरी गीली हो चुकी थी।</p>
<p>तभी निधि ने मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. निधि मेरे लंड को एकदम रंडी की तरह चूस रही थी, काट रही थी. निधि कभी मेरे लंड को जीभ से चूसती, चाटती तो कभी दाँत से काटती। उसकी कामवासना पूरे उफान पर लग रही थी. शायद मेरा दोस्त उसे छोड़ते छोड़ते बीच में ही छोड़ गया था.</p>
<p>मैंने मौके का फायदा उठाया और मैंने उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया. करीब दस मिनट तक मुख चोदन के बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया वह मेरा सारा पानी पी गई।</p>
<p>उसके बाद निधि ने मुझे अपना चूत चाटने के लिए इशारा किया. मैं भी उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत पहले से बहुत गीली थी. मैं चूत चाटने लगा तो वह मेरे बालों से खेलने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी जिससे मुझे मज़ा आने लगा।</p>
<p>वह मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. लग रहा था जैसे कि वह मेरे मुंह को अपनी चूत के अंदर घुसा लेगी। पांच सात मिनट चूत चूसने के बाद वो झड़ गई, मैंने उसका सारा पानी पी लिया.</p>
<p>लेकिन निधि का मन नहीं भरा था, निधि ने मुझे फिर से उसकी चूत चूसने को कहा. इस बार निधि ने मुझे बिस्तर पर नीचे लिटाया और अपनी चूत मेरे मुंह के ऊपर रख कर बैठ गई, मेरे मुंह को चोदने लगी।</p>
<p>अपनी चूत को पाँच मिनट तक मेरे होंठों पर रगड़ने के बाद पीछे वो घूम कर 69 की पोजीशन में लेट गई। अब निधि दोबारा मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत चूस रहा था।</p>
<p>5 मिनट के बाद उसने मुझसे कहा- रवीश यार … अब मुझे चोद दो!<br />
मैं अपने दूसरे कमरे से कंडोम लेकर आया।</p>
<p>निधि ने एकदम प्रोफेशनल रंडी की तरह मुंह में कंडोम को रख कर, कंडोम को मुंह में फंसा कर मेरे लंड में कंडोम पहनाया. निधि का यह अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा।</p>
<p>मैं निधि के ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी प्यासी चूत पर सेट करके मैंने एक धक्का लगाया. मेरा लण्ड बड़े आराम से एक बार में ही पूरा अंदर चला गया। लेकिन निधि ने झूठ का दर्द होने का दिखावा किया और मना करने लगी, रुकने को कहने लगी. मुझे पता था कि साली रांड नौटंकी कर रही है. और पर मुझ पर सेक्स का भूत सवार हो चुका था तो मैंने उसे गंदी गंदी गालियां देते हुए चोदना शुरू कर दिया।</p>
<p>वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… करती हुई चुद रही थी. उसे मजा आ रहा था. वो मेरे नीचे लेटी हुई अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चूत चोदन में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और मजा ले रही थी.<br />
मैंने निधि को 20-25 मिनट तक लगातार हचक हचक कर कर चोदा। जिसमें निधि दो बार झड़ गयी, जिससे चादर भी गीली हो गयी।<br />
उसके बाद मैं भी कुछ तेज धक्के लगाकर उसकी चूत में ही झड़ गया क्योंकि मैंने कंडोम लगाया हुआ था तो कोई डर नहीं था। </p>
<p>उसके बाद हम दोनों अगल बगल लेट गए और बातें करने लगे. बीइच बीच में हम चूमा छाती भी कर रहे थे. नीचे नीचे मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही थी.</p>
<p>मेरा लंड थोड़ी देर बाद खड़ा हो गया तो मैंने निधि से गांड मारने की बात की, निधि बिना किसी आनाकानी के तुरंत राजी हो गई।</p>
<p>उसने अपने पर्स से वैसलीन क्रीम निकाल कर दी. मैं कंडोम लेने दूसरे कमरे में जाने लगा तो उसने मुझे रोका और अपने पर्स में से कंडोम निकाल कर मेरे लंड पर चढ़ाया और उस पर वैसलीन क्रीम लगा दी जिससे कि लंड आसानी से उसकी गांड में चला जाए।</p>
<p>फिर मैंने उसे घोड़ी बनाकर गांड के छेद पर लंड लगाकर जोरलगाना शुरू किया और मेरे लंड का सुपारा अंदर घुस गया. इस बार शायद निधि को थोड़ा दर्द हुआ, वो रोने लगी और उसकी आंखें बाहर आने लगी।</p>
<p>2 मिनट तक मैंने उसकी नंगी पीठ को सहलाया और किस किया। उसके बाद मैंने फिर से एक जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लंड निधि के गांड में समा चुका था।<br />
निधि बेड पर गिर गई क्योंकि वह इस धक्के के लिए तैयार नहीं थी।</p>
<p>5 मिनट तक रुकने के बाद मैंने धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया लंड अपनी जगह बना चुका था। फिर मैंने धक्के लगाना तेज कर दिया मैं निधि की गांड की जोरदार ठुकाई कर रहा था।<br />
अब मैं लंड को पूरा बाहर निकालता और एक बार में अंदर डाल देता। जिससे निधि को दर्द भी देता और मजा भी आता। कभी-कभी मैं गांड मारते मारते लंड निकालकर अचानक से चूत में डाल देता। चूत में धक्के मारने लगता मुझसे निधि को बहुत मजा आ रहा था। मैं बारी-बारी निधि की गांड और चूत एक साथ चोद रहा था।</p>
<p>निधि की चूत इस बीच एक बार और झड़ चुकी थी।</p>
<p>लगभग आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं निधि की गांड में ही झड़ गया। </p>
<p>इस तरह से मैंने निधि को एक डेढ़ घंटे जमकर चोदा. वो अपनी चूत और गांड चुदाई में मिले आनन्द के कारण बहुत खुश नजर आ रही थी।</p>
<p>उसके बाद हम लोगों ने कुछ देर आराम किया. तब निधि नंगी ही बिस्तर से उठी और उसने अपने आप को बाथरूम में जाकर साफ किया।</p>
<p>थोड़ी देर बाद कुणाल आ गया. उसके बाद निधि और कुणाल फिर से रूम में चले गए, कुणाल और निधि ने फिर से चुदाई की।</p>
<p>चुदाई करने के बाद वे लोग चले गए।</p>
<p>तब से निधि से मेरी सीधी बात होने लगी, अब जब भी हम लोगों को मन करता है, हम लोग मिलकर चुदाई करते हैं।</p>
<p>अगली कहानी में आप लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने और निधि ने अन्तर्वासना पर मिले एक जोड़े के साथ ग्रुप सेक्स किया।<br />
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