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	<title>Bur Ki Chudai &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
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			</item>
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		<title>ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:55:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं. आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल का <a title="ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/" aria-label="Continue reading ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं.</p>
<p>आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल  का था और बारहवी में पढ़ रहा था। उन दिनों मैं अपने मामा के घर पर रह रहा था. मुझे क्या पता था कि मामा के यहाँ मैं सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं जा रहा बल्कि एक ऐसे रिश्ते से जुड़ने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन में एक नया मोड़ ले आएगा। </p>
<p>मेरे मामा थोड़े गरीब हैं। उनके घर में केवल एक कमरा अपने बड़े बेटे और बहू के सोने के लिए और एक कमरा बाकी लड़कियों और मामा मामी के सोने के लिए है। उनकी 3 बेटियाँ हैं जिसमें से सबसे बड़ी का नाम पूनम था। वो मुझसे 4-5 साल बड़ी थी इसलिए मैं उनको दीदी कहता था। भगवान ने उनको बहुत सुंदर बनाया है।</p>
<p>मैंने हमेशा उनको दीदी ही तो माना था। आखिर मामा की लड़की भी तो बहन है। ऊपर से उम्र में 4-5 साल बड़ी मगर उनकी हंसने की अदा, उनके गोर चेहरे की मुस्कराहट, उनके गुलाबी होंठ, उनके तीखे नैन नक्श मुझे कम से कम उस समय तक तो नहीं भाये थे जब तक आस-पड़ोस के लडकों में उनको पाने की ललक न देखी थी।</p>
<p>अब एक साथ रहने के चलते हम सब भाई-बहनों का साथ-साथ उठाना बैठना, लूडो खेलना होता था। एक सादगी भरी हसीन अदा उनकी हर हरकत में दिखती थी।<br />
पढ़ाई में लड़कियों से पाला बहुत पड़ा था लेकिन शायद उस समय तक एक लड़की के छूने पर जो अहसास अब हो पाया था वो पहले कभी नहीं हुआ था।</p>
<p>मैं अक्सर उनको सताया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई जानकर बहुत तंग किया करती थी और हम दोनों भाई-बहन ऐसे ही मस्ती करते रहते थे. हम दोनों के बीच में ऐसी ही हल्की-फुल्की शरारतें अक्सर चलती ही रहती थीं.</p>
<p>दीदी मेरा बहुत ख्याल भी रखती थी। लूडो खेलते समय जब एक दो बार उनका हाथ मेरे हाथ से छुआ तो पता चला कि इतना नर्म स्पर्श शायद कभी महसूस नहीं किया था मैंने। फिर मैं जान बूझकर खेल में चीटिंग करता था और पासा लेने के चक्कर में काफी देर तक उनके हाथों का स्पर्श महसूस करता था।</p>
<p>उनको मेरा शहरी पहनावा बहुत पसंद था। मेरी टाइट फिट टी-शर्ट्स और शर्ट्स उनको मेरी अच्छी फिटनेस दिखाती थी। मुझे भी उनका शहरी लड़कियों की तरह कुरता और लेग्गिंग का तालमेल गजब का लगता था।</p>
<p>धीरे-धीरे मेरा ध्यान उनके ऊपरी उभार पर जाने लगा। मेरी चोर नजरें अक्सर उनके उभारों को देखने की ताक में रहने लगी थीं। जब भी हम लोग लूडो खेलने बैठते तो मेरा ध्यान उनके उभारों और उनकी जांघों पर जाता था। जांघों का गदरायापन अक्सर मेरी उँगलियों को बुलाता था और मैं उनकी जाँघों पर अपनी उँगलियां चलाने के लिए मचल जाता था। मैं कई बार उनके हाथों का स्पर्श पाकर रोमांचित हो जाता था। उनके हर अंग से चिपका उनका कुर्ता और कसी लेग्गिंग मुझे आकर्षित करने लगी थी।</p>
<p>एक दिन मैं मामा के अन्दर वाले कमरे में सो रहा था। दीदी भी शायद मुझे सोता हुआ जानकर बेफिक्र सी होकर नहा रही थी। मामा की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से नहावन बस एक बंद दरवाजे के पीछे बना था जिसमें से होकर अन्दर वाले कमरे का रास्ता था जहाँ मैं सो रहा था.</p>
<p>गर्मियों के दिन थे इसलिए गर्मी की वजह से मेरी आँख खुली। मैं जैसे ही उठ कर बाहर निकला मेरी आँखें खुली रह गयीं। दीदी का पूरा यौवन मेरे सामने था। उनका पूरा गोरा नंगा जिस्म देख कर मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा।<br />
दीदी के सिर से गिर रहा पानी उनके लबों को, गर्दन को, उनके मखमली बूब्स को, उनकी पतली कमर को भिगोता हुआ और उनकी जांघों से होता हुआ योनि के रास्ते अपना सफर तय कर रहा था। </p>
<p>कुछ समय के लिए मुझे पानी से जलन होने लगी। मैं भी पानी की तरह उनके नर्म गुलाबी लबों को, उनकी गर्दन को, उनके बूब्स को, उनकी कमर को, पेट पर बनी सुंदर सी नाभि को, उनकी मुलायम जाँघों को और उस योनि को छूना चाहता था।</p>
<p>मेरा मन दीदी को अपनी आगोश में भरने को कर रहा था। एक 23-24 साल की लड़की की भरपूर जवानी, वो हसीं जिस्म, पूरे दूध की तरह सफ़ेद जिस्म पर केवल दो कपडे़, उस समय दीदी को किसी फिल्मी मॉडल की तरह दिखा रहा था। शायद मेरे अन्दर की वासना मेरी पैंट में मेरे खड़े हो रहे लंड से पता चल सकती थी। </p>
<p>मैं उनकी जाँघों के बीच में अपना हाथ रखकर उस नर्म-मुलायम और मखमली अहसास को महसूस करना चाहता था। अचानक दीदी का नहाना पूरा हुआ और मैंने नजरें बचाते हुए दबे कदमों से खुद को वापस मोड़ा और धीरे से चल कर अपने कमरे में वापस आ गया.</p>
<p>मैंने अपनी सोच पर काबू करने की कोशिश की और कुछ दिनों में मेरे दिमाग से गलत विचार जाने लगे। लेकिन रह-रह कर दीदी का यौवन मेरे अन्दर की वासना को फिर जगा देता था। वो जब भी मुस्कुरा कर देखती तो मेरा मनन कहता कि उनके लबों को लबों से भिगो दूँ। उनकी मस्त जवानी को तार तार कर दूँ और उनके जिस्म से खेलूं। मैंने किसी तरह खुद पर संयम रखा।</p>
<p>होनी को मैंने टालने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन होनी तो होकर ही रहती है.</p>
<p>गांव की लचर बिजली व्यवस्था ने भी होनी का ही साथ दिया. मामा के गांव में बिजली दिन में सुबह 4 से 11 बजे और फिर शाम को भी 4 से 11 बजे के बीच में ही आती थी. बाकी के समय में बिजली गुल रहती थी. घर में केवल एक कमरा था जिसमें एक तख्ता और 3 चारपाई आपस में सटकर बिछायी गयी थी। मैं दीदी की चारपाई के बगल वाले तख्त पे सोता था। </p>
<p>उम्र में 4-5 साल छोटा होने से किसी ने मेरे बारे में गलत न सोचा होगा; इतना तो मैं उस वक्त भी जानता ही था।</p>
<p>उस रात को जब हम सब सो रहे थे तो उस समय रात में लाइट न होने से मुझे गर्मी लगने लगी और नींद खुल गयी। मैं हाथ वाला पंखा चलाने लगा तो उसी समय दीदी मेरे हाथ से पंखा लेकर खुद ही लेटे लेटे मुझे हवा करने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि उनका हाथ दर्द कर रहा होगा इसलिए मैंने उनके हाथ से लेने के लिए हाथ चारपाई पर रखा तो उनकी बांह पर हाथ पड़ा। इतनी नर्म और मुलायम बांह पर हाथ पड़ने से मैं कुछ संकुचाया लेकिन पंखा लेने के लिए हाथ पूरी बांह पर फेरते हुए हथेली तक ले गया और पंखा लेकर चलाने लगा। </p>
<p>दीदी ने पंखा वापिस लेने की जबरदस्ती की लेकिन इस बार मैंने उनकी हथेली में अपनी हथेली फंसाकर उनको पंखा नहीं लेने दिया।</p>
<p>लेकिन न मैंने दीदी का हाथ छोड़ा और न ही दीदी ने छुड़ाया। मैं उनका हाथ छोड़ना भी नहीं चाहता था क्यूंकि मेरी नस-नस में अब दीदी को छूते रहने की लालसा थी। पूरी रात दीदी मेरे हाथों पर प्यार की थपकी (जैसे छोटे भाई को दी जाती है) देती रही और मुझे पता नहीं कब नींद आ गयी। </p>
<p>अक्सर रात में दीदी का हाथ मेरे हाथों में रहता था और दीदी के पूरे बदन को छूने की लालसा मेरे मन में हर दिन बढ़ती ही जा रही थी।</p>
<p>लेकिन यह आनंद भरा खेल उस रात को गड़बड़ा गया जब मामी की वजह से मुझे तख्ते से हटकर दूसरी चारपाई पर जाना पड़ा। उस कमरे में 3 चारपाई और एक तख्ता एक साथ एक आयताकार रूप में एक दूसरे से सटा कर बिछाए हुए थे। उस रात को मैं जिस चारपाई पर गया वो दीदी की चारपाई के विपरीत दिशा में थी। अब दीदी और मेरा सिर एक दूसरे की विपरीत दिशा में था। उस रात को दीदी के सिर में तेज दर्द था. </p>
<p>चूंकि मैं उनसे काफी छोटा था तो मैंने सिर दबाने को कहा. बहुत कहने पर दीदी मान गयी और मैं अपनी चारपाई से ही हाथ पीछे करके उनका सिर दबाने लगा। लगभग 15 मिनट बाद जब दीदी और सब लोग सो गए तब मेरी उँगलियाँ दीदी के माथे से होते हुए दीदी के गालों पर पहुंचने लगीं। ऐसा लगने लगा था कि शायद अब मेरी उँगलियाँ किसी रुई के गुच्छे में चली गयी हों। मैंने उनके गाल पर काफी देर तक उँगलियाँ फेरीं और फिर सरकाते हुए उनके गले तक पहुंचा। </p>
<p>मेरे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी क्यूंकि ठीक उसी समय दीदी थोड़ा सा ऊपर खिसकी और मेरी उँगलियाँ उनके गले से सरकते हुए थोड़ा सा नीचे चली गयी और एक मलमल से उठे हुए उनके बूब्स पर पहुँच गयीं।<br />
मेरी उँगलियाँ कुछ कांपी लेकिन तब तक अपनी वासना से इतना मजबूर हो चुका था मैं कि कब उनके एक बूब्स को पूरा हाथ में भर कर हल्का हल्का दबाने लगा मुझे इस बारे में सोचने का मौका भी नहीं दिया मेरे मन में उठ रहे वासना के वेग ने।</p>
<p>वासना जैसे-जैसे बढ़ती गयी उनके उरोज पर मेरा दबाव और पकड़ बढ़ती गयी। थोड़ी देर बाद अहसास हुआ कि टाइट सूट होने की वजह से उनके बूब्स पर हाथ फिराने में जो दिक्कत हो रही थी वो अचानक सूट के ढीला होने से दूर हो गयी। मेरा हाथ उनके बूब्स की घाटियों में पूरा घूमने लगा।</p>
<p>तभी एहसास हुआ कि मेरे हाथों पर उनके होंठों के चुम्बन हुए जिसने मेरे लंड को अपनी उत्तेजना के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया। जिसका सीधा मतलब था कि मैं यौवन की प्यास को जगा चुका था। </p>
<p>मेरे शरीर में उनके प्रति इतना आकर्षण बढ़ गया कि कब मैं अपनी चारपाई से उठकर उनकी चारपाई पर पहुँच गया पता ही न चला। उस समय मैं यह भी भूल गया था कि भले ही घर में पूरा अँधेरा था लेकिन घर में और लोग भी तो मौजूद थे।</p>
<p>बेलगाम घोड़ी होती है ये हवस … एक बार दौड़ना शुरू किया तो दौड़ाती ही चली जाती है.<br />
मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था।</p>
<p>मैं जैसे ही दीदी की चारपाई पर पहुंचा, उन्होंने भी अपनी आगोश में मुझे भर लिया। मेरा सिर उनके उभारों के मखमली और सबसे मुलायम जगह पर था।</p>
<p>अपने मुंह को दीदी के उभारों में घुसा कर उस पहले अहसास के आनंद में ऐसा डूबने लगा कि मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि अब और गहराई में उतरना है. पहली बार दीदी के उभारों को अपने होंठों से छुआ था इसलिए आनंद की कोई सीमा न थी.</p>
<p>मेरा मन कर रहा था कि अब आगे चलूं, आगे क्या होगा. हवस ने मेरे लंड का बुरा हाल कर दिया था और मेरा लंड को फाड़ने के लिए बार-बार पैंट में ही दीदी की जांघों पर धक्के पर धक्के दिये जा रहा था. मगर अभी तक ये समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना है. पहला अनुभव था किसी लड़की के बदन के स्पर्श का. </p>
<p>मगर दीदी को शायद थोड़ा ज्यादा तजुरबा था. उन्होंने मेरे बालों को सहलाया और फिर मेरी गर्दन को हल्के से उठा कर मेरा माथा चूम लिया. बस अब मुझे आगे का रास्ता भी दिख गया था. मैंने अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसते हुए खुद को थोड़ा और ऊपर घसीटा और अपने होंठों को दीदी के होंठों पर रख दिया.</p>
<p>दीदी के लबों से लब मिले तो जैसे चाशनी में डूबी जलेबी का स्वाद जबान को मिलने लगा. मगर पहली बार था इसलिए ये भी नहीं जानता था कि किस कैसे करते हैं. </p>
<p>एक दबे हुए डर के साथ ही आनंद की उन लहरों में दीदी के होंठों को चूसने लगा. जैसा जो भी समझ आ रहा था बस हम दोनों करने में लगे हुए थे. शायद दोनों के ही मन में ये डर था कि अगर चुम्बन की आवाजें बगल में सो रहे लोगों के कानों में पड़ गयीं तो लेने के देने न पड़ जायें इसलिए दोनों ही सावधानी के साथ एक दूसरे को भोगने की राह पर आगे बढ़ रहे थे. </p>
<p>दीदी ने मुझे पूरी तरह अपनी आगोश में भर रखा था और मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रहा था. मेरी छाती दीदी के बूब्स पर कसी हुई थी और लंड था कि दीदी की जांघों में छेद ही करने वाला था.</p>
<p>तभी दीदी ने नीचे से हाथ ले जाकर मेरे लंड को छुआ तो हवस में ऐसी लपटें मेरे जिस्म में उठीं कि मैंने दीदी के होंठों को जोर से काट लिया और शायद दर्द के मारे उनके हल्की सी टीस निकल गयी. लेकिन उन्होंने अपनी आवाज को होंठों से बाहर न आने दिया और अंदर ही दबा लिया. </p>
<p>मैंने दीदी की पजामी पर हाथ मारा तो दीदी की जांघों के बीच में उठी हुई सी वो आकृति हाथ को छू गई.<br />
किसी भी योनि को छूने का यह मेरा पहला अहसास था … बहुत ही कामुक और बेहद आनंददायक।</p>
<p>मैंने एक दो बार दीदी की योनि को उनकी पजामी के ऊपर से ही मसला और फिर उनकी जांघों से पजामी को नीचे खींचने की कोशिश करने लगा.<br />
दीदी भी पूरे उफान पर थी इसलिए मेरी मंशा को भांप कर दीदी ने भी अपनी गांड हल्की सी उठा दी और दीदी की बिना पैंटी वाली योनि पर मेरा हाथ जा लगा.</p>
<p>आह्ह … पहली बार नंगी चूत को छूकर ऐसा तूफान उठा कि मुझसे रहा न गया और मैंने दीदी की योनि में उंगली ही डाल दी. दीदी हल्की सी उचकी लेकिन बिना आवाज किये.<br />
हम दोनों भाई बहन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे. आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी.</p>
<p>दीदी ने मेरी पैंट की चेन खोल दी और फिर मैं समझ गया कि दीदी मेरे लंड का स्पर्श पाना चाहती है. मैंने भी लंड को बाहर निकाल लिया और दीदी के हाथ में दे दिया.</p>
<p>नर्म हाथ में जाते ही लंड में ऐसी लहर उठी कि एक बार तो लगा कि स्खलन हो ही जायेगा लेकिन किसी तरह खुद को रोका और एकदम से दीदी का हाथ हटा दिया. दीदी भी जान गयी कि शायद मैं चरम पर पहुंचने के करीब हूं इसलिए उन्होंने भी दोबारा लंड को छूने की कोशिश नहीं की. </p>
<p>मैंने दीदी की गीली चूत से उंगली निकाली और उसको अपने मुंह में भर लिया. मुझे नहीं पता था कि ये सब करना भी होता है या नहीं, मगर जो भी हो रहा था अपने आप ही होता चला जा रहा था. दीदी का रस चखने के बाद अब उनकी योनि को अपने लंड का रस देने की बारी थी. अब और कुछ सूझ ही नहीं रहा था.</p>
<p>मैंने दीदी के कान के पास अपने होंठ ले जाकर फुसफुसाते हुए पूछा- डाल दूं क्या अंदर?<br />
दीदी ने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा कर अपनी मंजूरी दे दी.</p>
<p>मैंने दीदी की चूत को टटोला और अपने लंड को दीदी की योनि पर फेरते हुए रख लिया. कुछ नहीं पता था कि लिंग योनि में कैसे डाला जाता है. एक बार में ही चला जाता है या कई बार में जाता है. कितना जोर लगाना चाहिए और कब लगाना चाहिए.</p>
<p>मगर सेक्स तो करने से ही आता है. मैंने दीदी की योनि पर लंड को लगाकर हल्का सा धक्का दिया तो लंड फिसल गया. लंड भी कामरस छोड़ कर पूरा टोपा चिकना कर चुका था और उधर दीदी की योनि भी पूरी भीगी पड़ी थी. </p>
<p>मैंने दोबारा से लंड को योनि पर सेट किया और एक धक्का मारा. दूसरी बार भी लंड फिसल गया. अब दीदी को लगा कि उनको ही आगे आना पड़ेगा. दीदी ने मेरे लंड को अपने मुलायम से हाथ में पकड़ कर अपनी योनि के द्वार पर सेट किया और मुझे अपनी तरफ खींच कर ये बताया कि अब धक्का लगा.</p>
<p>मैंने धक्का दिया तो मेरा लंड दीदी की चूत में उतर गया. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … क्या बताऊं यारों, अपनी ममेरी बहन की चूत में लंड देने का वो पहला अहसास … आज भी उस पल को याद करते ही मुट्ठ मारने का मन कर जाता है.</p>
<p>दीदी की योनि में लंड को डालकर मैंने धीरे-धीरे अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसना शुरू किया. धक्के कैसे लगाये जाते हैं ये भी मैं बाद में ही सीख पाया लेकिन उस दिन तो बस जैसे तैसे करके मुझे दीदी की योनि का रस पीना था.<br />
सेक्स का मजा कैसे लिया जाता है वो सब मैंने बाद में ही सीखा. </p>
<p>मेरी जवान ममेरी बहन की योनि इतनी गर्म और गीली थी कि मैं दो मिनट से ज्यादा उसमें टिक ही नहीं पाया और जब वीर्य निकला तो ऐसा आनंद मिला कि वैसा आनंद दुनिया में कहीं और मिल ही नहीं सकता।<br />
मैंने दीदी की चूत में अपना पूरा लंड खाली कर दिया.</p>
<p>मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं लेकिन दीदी शायद प्यासी रह गई थी. मगर फिर भी दीदी ने प्यार से मेरी पीठ को सहलाया और मुझे अलग होने के लिए कह दिया. </p>
<p>उस रात से हमारे जवान जिस्मों के बीच में जो संबंध बनने की शुरूआत हुई तो फिर हमने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.</p>
<p>एक रोज भाग्य ने भी पूरा साथ दिया और घर में हम दोनों अकेले ही थे. उस दिन मैंने दीदी की योनि को चाटा भी और चूसा भी। मगर सेक्स तो उस दिन भी पांच मिनट से ज्यादा नहीं चल पाया. फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे मैं पारंगत होता गया तो मेरी और दीदी की जवानी खिलती चली गई.</p>
<p>हम दोनों चुदाई का भरपूर मजा लेने लगे. होते-होते बात यहां तक पहुंच गई थी कि दोनों ने भाग कर शादी करने का फैसला तक कर डाला. मगर ऐसा कुछ हो न पाया। फिर मेरी पढ़ाई वहां से खत्म हो गई और मैं अपने घर आ गया.</p>
<p>मगर दीदी के लिए एक प्यास हमेशा ही मन में उठी रहती थी इसलिए बार-बार बहाना करके मामा के घर पहुंच जाता था. दीदी भी मेरी राह में पलकें बिछाये रहती थी. दोनों जब मिलते थे तो ऐसे मिलते थे जैसे सदियों के प्यासे प्रेमी हों.</p>
<p>फिर दीदी की शादी हो गई और हमारे प्यार का सफर भी खत्म हो गया.<br />
[email protected]</p>
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		<title>पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:40:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ. आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. यह तब की बात है, जब मेरी <a title="पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/pados-wali-hot-girl-ki-chudai/" aria-label="Continue reading पड़ोस वाली हॉट गर्ल की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मैंने अपने पड़ोस की एक हॉट गर्ल को चोदा. आज मैं आपको अपनी यह सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ.</p>
<p>आप सबका धन्यवाद कि आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स स्टोरी को, जो अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट पर प्रकाशित हुई थी, इतना अधिक पसंद किया. </p>
<p>यह तब की बात है, जब मेरी इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का एग्जाम हो चुका था. मैं एग्जाम देकर अपने घर आया था. </p>
<p>मेरे घर के सामने एक लड़की रहती है, जिसका नाम शीमा (नाम बदला हुआ) है. वो दिखने में बहुत हॉट, खूबसूरत और सेक्सी है. वो लड़की शीमा मुझे पहले से ही अच्छी लगती थी. उसको लेकर मैं सोचता रहता था कि काश इस हॉट गर्ल चोदने का मौका मिल जाए … तो मजा आ जाए. </p>
<p>घर आने के बाद मैं उससे रोज बात करने लगा था. वो भी मुझसे हंस हंस कर बात करती थी. हम दोनों के बीच हर तरह का हंसी मज़ाक होने लगा था. </p>
<p>इस बार हमारे बीच इतनी अधिक नजदीकी बढ़ गई थी कि मैं हंसी मजाक के बहाने उसके शरीर को जहां तहां छू देता था. जब उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ, तो मैं अब उसकी गांड भी कभी कभी छू देता था. वो मेरी इस हरकत का कभी बुरा नहीं मानती थी. इससे मुझे लगने लगा था कि ये भी मेरी तरफ आकर्षित है. हम दोनों में सेक्स को लेकर भी खुल कर चर्चा होने लगी थी. </p>
<p>एक दिन जब मैं सुबह उठा तो मेरे मम्मी और पापा कहीं जाने की तैयारी कर रहे थे.<br />
मुझे पहले तो हैरानी हुई कि अचानक मम्मी पापा का किधर जाने का प्लान बन गया. मेरे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मेरे एक दूर वाले अंकल की तबीयत खराब है, तो उन्हीं को देखने और उनसे मिलने वे दोनों अस्पताल जा रहे हैं. चूंकि अस्पताल दूर था, तो उन्होंने मुझसे कहा कि उनको वापस घर आने में रात हो जाएगी. </p>
<p>मैं कुछ नहीं बोला. </p>
<p>मम्मी ने बताया कि उन्होंने मेरे खाने का इंतज़ाम शीमा के घर पर ही कर दिया है. मम्मी ने शीमा की माँ को बोल दिया था कि आज का मेरा खाना वो ही बना दें. </p>
<p>मैं शीमा का नाम सुनकर एकदम से मन ही मन खुश हो गया था कि शायद आज शीमा को चोदने का मौका मिल जाए. </p>
<p>यही हुआ भी ऊपर वाले ने आज मेरी सुन ली थी. उस दिन दोपहर को शीमा मेरा खाना लेकर मेरे घर आई. उस वक्त मैं अपने कंप्यूटर पर व्यस्त था. उसने घर में आते ही देखा कि मैं कंप्यूटर पर गेम खेल रहा था. </p>
<p>तो उसने बोला- अरे वाह अकेले अकेले ही गेम खेल रहे हो?<br />
मैं बोला- नहीं यार … मैंने अपने दोस्त को कॉल करके बुलाया था, पर वो कुछ काम होने के कारण नहीं आ सकता था. </p>
<p>इस पर शीमा ने बोला- कोई बात नहीं यार … मैं हूँ ना. मैं तुम्हारे साथ हर तरह का गेम खेलने को तैयार हूँ.<br />
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा मुस्कुराया और मैंने कहा- हर तरह का?<br />
वो एक पल के लिए झेंपी लेकिन अगले ही पल बोली- हां, हर तरह का खेल खेलने को राजी हूँ.<br />
मैंने उसको आंख मारी और कहा- ठीक है, पहले खाना खा लेता हूँ, फिर हम दोनों मस्त वाला गेम खेलते हैं. </p>
<p>मैं खाना खाने बैठ गया. वो किचन से मेरे लिए पानी लेकर आई. मैंने खाना खाया. उसके बाद मैं और शीमा हम दोनों कंप्यूटर पर गेम खेलने बैठ गए. </p>
<p>मैंने उसे बड़ी गौर से देखा. उस दिन उसने ट्राउज़र और शर्ट पहना था, वो बड़ी मस्त लग रही थी. </p>
<p>हम दोनों चिपक कर गेम खेलने लगे. गेम खेलते खेलते कभी कभी मैं उसकी जांघ पर अपना हाथ रख देता … तो वो मुझसे और भी सट जाती.<br />
दोस्तो क्या बताऊं, उसकी जांघ छूते छूते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. </p>
<p>मैं घर में चड्डी नहीं पहनता हूँ … तो मेरा लंड खड़ा होने लगा. जब उसकी जांघ के टच से मेरा लंड खड़ा हो गया तो वो उभर कर बाहर से दिखने लगा. शीमा इस बात पर ध्यान दे रही थी.<br />
उसने मेरे खड़े होते लंड को देखा, तो वो हंसने लगी. </p>
<p>मैंने उससे हंसने का कारण पूछा, तो उसने कहा- तुम्हारा सिग्नल खड़ा हो गया है.<br />
मैंने बोला- ये तुम्हें देख कर ही सिग्नल पकड़ रहा है.<br />
वो मेरी बात से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.</p>
<p>उसी वक्त उसने अपनी मम्मी को कॉल लगाया और कहा कि मॉम मैं थोड़ी देर से आऊंगी. राज अकेले घर में बोर रहा है तो उसके साथ कंप्यूटर पर गेम खेल रही हूँ.<br />
उसकी माँ ने कहा- ठीक है.<br />
उसने माँ की हामी पाते ही कॉल कट कर दिया. </p>
<p>उसके बाद शीमा ने मेरे लंड पर हाथ रख कर कहा- देखूँ ज़रा कितना सिग्नल पकड़ रहा है?<br />
वो मेरे लंड को सहलाते हुए धीरे धीरे हिलाने लगी. वो मुझे वासना भरी निगाहों से देख रही थी. </p>
<p>मैंने तुरंत उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और अपने हाथों को उसके मम्मों पर रख कर उन्हें दबाने लगा. वो मेरी बांहों में झूल गई. हम दोनों जवानी की आग में झुलसने लगे. मेरे हाथ उसके मम्मों के अलावा उसकी गांड को भी सहलाने लगे थे. हम दोनों एक दूसरे से एकदम चिपके हुए अपने दिलों की चाहत को अपनी मंजिल तक ले जाने के लिए पूरी तरह से कामुक हो उठे थे.</p>
<p>उसने मादकता भरे स्वर में कहा- तुमने कितनी देर लगा दी … ये खेल खेलने में!<br />
मैं- देर आया … दुरुस्त आया.<br />
वो मुझसे लिपट गई.</p>
<p>कोई 10 मिनट के लगातार चुम्बन करने के बाद मैंने उसकी शर्ट के बटनों को एक एक करके खोलना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों उसकी शर्ट ने उसके शरीर का साथ छोड़ दिया था. </p>
<p>शर्ट के अन्दर शीमा ने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को रगड़ने लगा. वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां लेने लगी. </p>
<p>कुछ देर बाद मैं उसे अपनी गोद में उठा कर अपने रूम में ले गया और उसे बेड पर लेटा दिया. उसके बिस्तर पर गिरते ही उसके ऊपर चढ़ कर मैं उसे चूमने लगा. कुछ देर बाद मैंने उसके ट्राउज़र को निकाल दिया और दोस्तों क्या बताऊं उसने पैंटी भी काली पहनी थी. </p>
<p>मैं आपको बता दूँ कि मुझे गोरी लड़की जब ब्लैक ड्रेस पहनती है, तो बहुत सेक्सी लगती है. उसे इस तरह देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैं उस पर टूट पड़ा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. </p>
<p>कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर नीचे लिटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गई. वह मेरी टी-शर्ट को उतार कर मेरी छाती पर अपने हाथ फेरने लगी. फिर वो मेरे कड़ियल जिस्म को चूमने लगी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसने मेरे लोअर को भी निकाल दिया और मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया. उस हॉट गर्ल के हाथ में लंड आते ही मैं एकदम से गनगना उठा. वो लंड सहलाते और हिलाते हुए मेरी आंखों में आंखें डाल कर देखने लगी.</p>
<p>मैंने उसको इशारा किया, तो वो समझ गई और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. पहले तो उसने मेरे लंड के सुपारे ऊपर अपनी जीभ फिराई और मेरे लंड को टट्टों से लेकर ऊपर तक चाटा और इसके बाद तो मानो उसने तूफ़ान खड़ा कर दिया. अब वो मेरे तनतनाए हुए लंड को अन्दर तक लेकर बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी थी. उसके मुँह की गर्मी पाकर मेरी आंखों में मदहोशी सी छा गई. मैं अपनी दोनों आंखें बंद करके लंड चुसाई का मजा लेने लगा.</p>
<p>दो मिनट बाद उसने खुद अपनी पैंटी को उतारा और मुझे धक्का देकर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया.<br />
मैं अभी कुछ समझ पाता, तब तक वो मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चूत की मुँह में लंड सैट करने लगी. मैंने गांड हिला कर लंड को उसकी चूत का मुँह ढूंढा और लंड को चूत में सैट कर दिया.</p>
<p>अब वो अपनी गांड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी. इससे मेरा लंड पूरी तरह से उसकी चूत में घुस गया. मैंने भी उसकी कमर को पकड़ लिया. </p>
<p>अब उसने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए मुझे लिप किस करने लगी. इस वक्त उसकी चूचियां मेरी छाती पर हिलते हुए मुझे बड़ा मजा दे रही थी.</p>
<p>कोई 15 मिनट बाद मैंने उसे अपने नीचे किया और उसकी एक टाँग तो अपने कंधे पर रख लिया.</p>
<p>अब मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और आगे पीछे करने लगा. मैं इस वक्त एकदम डिप्स मारने जैसी कसरत कर रहा था, उसके दोनों मम्मों को मैं अपने दोनों हाथों में दबोचे हुए लगातार चोदे जा रहा था. उसकी मस्ती अपने चरम पर थी. </p>
<p>कोई 10 मिनट बाद वो बड़ी तेज आवाज में सीत्कार करने लगी. मैं समझ गया कि शीमा झड़ने वाली हो गई है. उसकी चूत ने पानी छोड़ा कि ठीक उसके बाद ही मेरा पानी छूटने वाला हो गया.</p>
<p>मैंने झट से अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसके नंगे बदन को चूमने लगा. इस तरह मेरा लंड झड़ने से रह गया. फिर 5 मिनट बाद जब मेरा लंड थोड़ा शांत हुआ, तो उसने फिर से अपने हाथ से मेरा लंड खड़ा कर दिया और मैंने फिर से उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों एक दूसरे के आगोश में पूरी तरह खो चुके थे. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और 10 मिनट बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया. मैं देर तक उसकी छूट में ही अपने लंड की पिचकारियां छोड़ता रहा.<br />
वो एकदम से निढाल होकर अपने जिस्म को ऐसे थिरका रही थी, मानो मेरे रस को वो अपने अन्दर जज्ब कर रही हो.</p>
<p>माल झड़ जाने के बाद मेरा लंड सिकुड़ गया. जब मैंने लंड बाहर निकाला, तो उसकी चूत से पानी टपक रहा था. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने उसे चूम लिया. </p>
<p>हम दोनों कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े रहे. तभी उसकी मम्मी का कॉल आया और वो उसे घर वापस आने के लिए बुलाने लगीं. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक ज़ोरदार स्मूच किया और अपने अपने कपड़े पहन लिए. वो टिफिन लेकर अपने घर चली गई. </p>
<p>अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों जम कर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं और मज़े करते हैं. </p>
<p>दोस्तो, मेरी ये हॉट गर्ल की चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करके बताना न भूलना. </p>
<p>आपका राज<br />
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