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	<title>Best Sex Stories &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>Best Sex Stories &#8211; Kahani18</title>
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		<title>दोस्त की साली की अन्तर्वासना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:41:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Train Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना. आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. मेरे दोस्त के साथ उसका <a title="दोस्त की साली की अन्तर्वासना" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-sali-ki-antarvasna/" aria-label="Continue reading दोस्त की साली की अन्तर्वासना">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना.</p>
<p>आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. </p>
<p>मेरे दोस्त के साथ उसका पूरा परिवार था और उसके साथ उनकी भांजी और उनकी साली भी थी. दोस्त की साली का नाम नलिनी और भांजी का पिंकी था. नलिनी की उम्र 23 साल थी और पिंकी 19 साल की थी. </p>
<p>आरम्भ में मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि वे दोनों हमारे साथ यात्रा में होंगे. हमारी यात्रा रेल से शुरू हुई. शुरू में सब कुछ सामान्य था. हमें जहां जाना था, वहां पहुंचे, रात को रूम लेकर सो गए. </p>
<p>सुबह उठ कर भगवान के दर्शन किए और वापस अपने रुकने की जगह आ गए. दोपहर को खाना खाने के बाद थोड़ा आराम किया, बाद में हम सब लोग घूमने निकले. </p>
<p>हमें घूमने के लिए आस पास के एरिया में ही जाना था और दो दिन वहीं घूमना था. इसलिए हम सभी ने तय किया और एक बस ले ली. </p>
<p>बस की यात्रा शुरू हुई. मैं सबसे लास्ट वाली सीट पर बैठा था. नलिनी को जगह न मिलने के कारण वह खड़ी थी. कुछ देर बाद वह आकर मेरे घुटनों पर बैठ गई. तब तक मेरे मन में कोई भी गलत विचार नहीं था. </p>
<p>बस चलती रही, वो हिलती रही. उसके स्पर्श ने मेरी भावना बदल दी. इसी बीच मेरा लंड अपने आप ही खड़ा हो गया और उसे टच करने लगा. इस बात को नलिनी भी जान चुकी थी. मैंने उसको उठने को कहा, लेकिन वह न उठी, शायद वो भी लंड के मजे ले रही थी. हम दोनों बिना कुछ बोले मजा लेने लगे. स्टॉप आता, तो उतर कर घूमने लगते और वापस अपनी जगह आकर बैठ जाते. जब भी बैठते, तो वो और भी ज्यादा चिपक कर लंड का स्पर्श पाने की पोजीशन में खुद को बैठा लेती.</p>
<p>ऐसे ही दो दिन की यात्रा समाप्त हुई. बाहर गांव था, नलिनी के परिवार के लोग होने के कारण वहां कुछ नहीं हो सकता था और ना ही कुछ आगे हो सका. बस इतना ही हुआ कि उसने और मैंने एक दूसरे का साथ पाने की लालसा एक दूसरे तक बिना बोले ही पहुंचा दी थी.</p>
<p>फिर हम वापस घर की ओर निकलने लगे. उधर से रात की ट्रेन थी. हमारी कोई भी सीट कन्फर्म नहीं थी. फिर हम लोग ऐसे ही बिना आरक्षण के ट्रेन में बैठ गए. हम सब ये सोच कर बैठ गए थे कि रास्ते टीटीई से मिलकर कुछ जुगाड़ कर लेंगे.</p>
<p>लेकिन हमारा नसीब खराब था या फिर मेरा ही अच्छा था. ये मुझे बाद में पता चला था. </p>
<p>हुआ यूं कि ट्रेन में सब लोग अलग अलग जगह एडजस्ट हो गए. बाद में टीटीई से मिलकर मैंने एक सीट कन्फर्म करवा ली. इस बात को लगभग 2 घंटे निकल गए थे. सब सामान उस सीट के पास रखकर सब फैल गए. उस सीट पर सिर्फ दोस्त की बीवी, मेरी भाभी और उसकी बहन नलिनी बैठ गई.</p>
<p>इस सब में रात के 12 कब बजे, मुझे पता ही नहीं चला. फिर सबको जुगाड़ करके और सबको सुला देने के बाद मैंने सामान के पास जाने का सोचा और उधर की तरफ निकल पड़ा. </p>
<p>वहां पहुंचने के बाद देखा कि भाभी नीचे सो गई थीं और नलिनी ऊपर अकेली पैर मोड़ कर बैठी थी, क्योंकि लास्ट वाली सीट थी और ऊपर के दोनों लोग सो गए थे. </p>
<p>फिर मैं वहीं जगह बना कर बैठ गया.</p>
<p>अब तक नलिनी और मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी, तो उसने मुझे बैठने के लिए रोका नहीं. फिर हमारी कुछ इधर उधर की बातें शुरू हो गईं. कॉलेज से लेकर पर्सनल बातें तक हुईं.</p>
<p>अब तक मेरे दिल में कुछ भी गलत बात नहीं थी, पर एक झटका ऐसा लगा कि कुछ हुआ हुआ यूं कि उसका हाथ मेरे हाथों से जा टकराया. फिर हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, तो वो शरमा गई. </p>
<p>मैंने उसके हाथ को अब तक छोड़ा नहीं था. मैं उसके हाथ को सहलाने लगा. वो कुछ नहीं बोली. बस फिर क्या था. </p>
<p>अब तक रात के करीब 2 बज चुके थे. किसी के देखने का सवाल ही नहीं था. फिर भी मैं सावधानी पूर्वक आगे बढ़ा और उसके पैर को सहलाया. वो कुछ नहीं बोली. इससे मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं उसके पाँव को सहलाता रहा. </p>
<p>फिर उसी ने पहल की- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?<br />
मैंने तुरंत ना कहा, जोकि सच था. </p>
<p>फिर ऐसे ही सहलाते हुए गर्मा-गर्मी में सफर चल रहा था. अब मैंने हिम्मत करके उसकी छाती पर हाथ लगाया, तो उसके मुँह से ‘ऊंह … आह..’ की आवाज आई. मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो मुस्कुरा दी. मैंने बेहिचक उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. </p>
<p>ऐसे ही 10 मिनट तक लंड सहलाने के बाद मैंने उसको इशारा किया कि टॉयलेट में चलो. </p>
<p>मैं उसे इशारा करके आगे बढ़ गया और वो भी 2-3 मिनट बाद आ गई. उसके अन्दर आते ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा बंद किया और उस पर टूट पड़ा. जहां जी चाहा, वहां सहलाने लगा.</p>
<p>उसने नाईट पैंट और टी-शर्ट पहनी थी. मैंने उसकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डालकर मम्मों को मसलने लगा. वो चुदासी तो थी ही, एकदम से बहुत गर्म हो गई. </p>
<p>फिर मैंने उसकी पैंट में हाथ डाल कर उसकी चूत में फिंगरिंग की. उसने भी अपनी टांगें फैला दीं … ताकि उसकी चूत में मेरी उंगलियां ठीक से चल सकें. उसकी चूत एकदम से गीली थी.</p>
<p>उसके बाद मैंने उसकी पैंटी नीचे कर दी और नीचे बैठ कर उसकी चूत में अपना मुँह लगा दिया. मेरी जीभ के स्पर्श ने उसे मजा दे दिया. मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल कर उसे मजा देने लगा. वो ऊपर उसका मुँह अपने हाथों से दबा कर ‘उह … ओह …’ कर रही थी. मैं उसकी चूत चाटने के साथ ही अपने हाथ ऊपर करके उसके रसीले मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था.</p>
<p>कुछ ही मिनटों में वो गांड उठाते हुए झड़ गई. फिर मैंने उसको नीचे बिठा दिया और मैं खड़ा हो गया. मैंने अपना 7 इंच का लंड हवा में लहरा दिया. उसने लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी. </p>
<p>मैंने जोर देकर कहा- मुँह में ले लो.<br />
तो वो सर हिलाते ना बोलने लगी.<br />
फिर मैंने थोड़ा जोर देकर कहा- टेस्ट तो करो … मजा आएगा.</p>
<p>इस बार वो मान गई. उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और मुझे मजा देने लगी. कुछ एक मिनट तक चूसने के बाद उसने छोड़ दिया, मैंने भी उससे कुछ नहीं कहा.</p>
<p>फिर वो अपने हाथों से लंड सहलाने लगी. कुछ ही सेकंडों में मेरा रस निकल गया.</p>
<p>फिर हम चुपचाप नजर बचाते हुए बाहर आ गए और अपनी जगह पर बैठ गए. </p>
<p>इसके आगे ट्रेन में कुछ ना हो सका. हम 2 दिन की यात्रा करके वापस अपने शहर आ गए.</p>
<p>वापस आकर मैं अपने काम में लग गया. एक हफ्ते बाद पिंकी का मुझे कॉल आया. उसने मुझपे एक बम गिराया कि वो नलिनी और मेरे साथ हुए सब खेल को जान चुकी है.<br />
उसकी बात सुनकर मैं डर गया.</p>
<p>उसके दूसरे दिन पिंकी का फिर से कॉल आया. पहले तो मैंने नहीं उठाया, फिर डरते डरते कॉल उठाया, तो सामने नलिनी थी. </p>
<p>उसने मुझे बताया कि उसने ही पिंकी को सब बताया है और वो किसी को भी कुछ नहीं बताएगी. तब जाकर मेरी जान में जान आ गई. फिर कुछ सामान्य बात करके उसने कॉल बंद कर दिया.</p>
<p>उसी दिन करीब 4 बजे फिर कॉल आया तो नलिनी बोली- मेरा आपसे मिलने का मन हो रहा है, क्या आप मिल सकते हो?<br />
मैंने उसकी अन्तर्वासना को पहचाना और तुरन्त हां बोला. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक मॉल में शाम के 6 बजे मिलने का तय किया.</p>
<p>मैं समय से पहले ही मॉल के गेट के पास उसकी राह देखने लगा. वो तय समय से दो मिनट बाद सामने से आती हुई दिखी. वो गुलाबी वनपीस ड्रेस में क्या मस्त माल लग रही थी. मैं उसको देखते ही उसी में खो गया. </p>
<p>वो मेरे नजदीक आ गई. मुझे इस हालत को देख कर वो पहले तो खूब हंसी. मैं भी थोड़ा शरमाते हुए हंस गया.</p>
<p>एक दो मिनट यूं ही बात करने के बाद हम दोनों अन्दर आ गए. एक कॉफी स्टाल पर बैठ कर मैंने कॉफी आर्डर की. फिर एक दूसरे के सामने बैठकर बातें करने लगे. अभी सब सामान्य बातें हो रही थीं.</p>
<p>मैंने ही उस रात का जिक्र किया, तो वो क्या शरमाई थी … आह … मुझे आज भी याद है.</p>
<p>तब तक कॉफी आ गई, कॉफी पीते हुए मैंने उससे बोला- आगे क्या?<br />
वो समझ गई, पर कुछ नहीं बोली.<br />
मैंने ही फिर बोला- चलो कुछ मजे करने चलते हैं. </p>
<p>वो कुछ नहीं बोली, मैं समझ गया कि ये राजी है … आज मजा नहीं लिया, तो कभी नहीं मिलेगा.</p>
<p>मैंने कॉफी के पैसे दिए और उसका हाथ पकड़ कर आने का इशारा किया. वो उठी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया. मैं आगे चल दिया, वो मेरे पीछे आने लगी. हम दोनों अपनी मंज़िल पर निकल पड़े. </p>
<p>वो थोड़ा नाटक कर रही थी कि कोई देख लेगा.<br />
मैं बोला- कोई नहीं देखेगा, तुम चलो तो सही. </p>
<p>मैंने अपनी कार निकाली और उसको अन्दर बिठा लिया.<br />
तभी वो बोली- इधर मेरी एक्टिवा रखी है.<br />
मैं बोला- कोई चिंता की बात नहीं है. हम 2 घंटे में वापस आ जाएंगे. </p>
<p>वो मान गई. हम हाईवे के तरफ निकल पड़े. कोई 20 मिनट के दौरान मैंने उसको खूब सहलाया. वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी. हम एक होटल में आ पहुंचे. पहले मैंने अकेले जाकर एक रूम बुक किया और उसको फोन करके अन्दर बुला लिया.</p>
<p>कमरे में अन्दर जाते ही मैंने उसको कसके पकड़ लिया. वो तो पहले से ही बहुत चुदासी थी. इसी वजह से उसने भी मुझे कसके पकड़ लिया. इसी हड़बड़ी में हम दोनों पास के पलंग पर गिर पड़े.</p>
<p>मैंने उसे अपने नीचे दबा कर खूब चूसा.<br />
वो बोली- कपड़े खराब हो जाएंगे.</p>
<p>मैं समझ गया. हमने एक दूसरे के कपड़े निकाले. पहले मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके निप्पलों को अपने होंठों में दबा लिया और मम्मे मसलते हुए निप्पल चूसने लगा. </p>
<p>वो बेकाबू होकर मुझे जकड़ते हुए मेरे सर को अपने दूध पर दबा रही थी.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना मोर्चा नीचे सैट कर लिया. उसकी चूत को खूब चूसा. </p>
<p>थोड़ी ही देर में वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ करती हुई स्खलित हो गई.</p>
<p>फिर मैंने अपना 7 इंच का लंड उसके मुँह में देना चाहा, तो साली ना करने लगी. मैंने थोड़ा जोर दिया, तो मान गई और मेरा लौड़ा चूसने लगी. हम दोनों जल्दी ही 69 में हो गए. </p>
<p>उसने चूसना बंद किया और बोली- जल्दी करो … मुझसे अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा.<br />
मैंने भी सोचा कि वक्त कम है, निपट ही लो.</p>
<p>मैंने उसको सीधा किया और चुदाई की पोजीशन बनाई. सुपारा सैट करके धक्का मारा, तो मेरा फिसल गया. मैंने लंड को वापस चूत की फांकों में सैट किया और जोर का झटका लगा दिया. </p>
<p>वो जोर से चिल्ला दी. मैंने हाथों से उसका मुँह दबाया और शांत रहा. अब वो थोड़ी शांत हुई, तो मैंने अपना काम शुरू किया. हालांकि उसकी सील पहले से टूट चुकी थी, पर ज्यादा वक्त गुजर जाने की वजह से चूत अभी बड़ी टाइट थी. उसकी सील टूटने की बात उसने मुझे बताई थी, पर वो कहानी मैं बाद में बताऊंगा.</p>
<p>मैंने अपना काम जारी रखते हुए उसे धीरे धीरे ढीला किया. वो दो मिनट बाद ही मेरे लंड से मजे लेने लगी थी. हम दोनों के बीच धकापेल चुदाई होने लगी. मैं उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत को रगड़ने में लगा था. उसकी अकड़न मुझे बता रही थी कि लौंडिया अब झड़ने की कगार पर आ गई है. </p>
<p>उसने इस वक्त मुझे कसके पकड़ा हुआ था. मैं जोर जोर से उसकी चुदाई कर रहा था. इसी बीच वो निकल गई और निढाल हो गई. मैं अभी भी पूरे जोरों से चुदाई कर रहा था. उसकी गर्मी ने मेरे लंड को चिकनाई दे दी थी, जिससे मेरे झटके और भी स्पीड से लगने लगे थे. इसी बीच वो फिर से चार्ज हो गई और गांड उठा उठा कर लंड के मजे लेने लगी.</p>
<p>करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने के कगार पर आ गया था. वो भी दूसरी बार होने को थी. मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?<br />
तो वो बोली- अन्दर ही निकालो … मैं दवा ले लूँगी.</p>
<p>उसके ऐसा बोलते ही मेरा खून जमा होने लगा. मैं 10-15 करारे झटकों के साथ ही उसके अन्दर ही झड़ गया.</p>
<p>चुदाई के बाद 10 मिनट तक हम दोनों ने आराम किया. फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर आपने आपको साफ किया. फिर अपने अपने कपड़े पहने और होटल से बाहर निकल आए.</p>
<p>यह मेरी पहली अन्तर्वासना कहानी है, आपको कैसी लगी … जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था. आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और <a title="सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/" aria-label="Continue reading सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था.</p>
<p>आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.<br />
मेरी उम्र 42 वर्ष है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बेटा है. </p>
<p>वो सर्दियों के दिन थे, एक दिन शाम को मैं मरी पत्नी और मेरी भांजी बैठे हुए बातें कर रहे थे. हम तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे और अपनी टांगों पर कम्बल डाला हुआ था. अचानक मेरा पैर उसकी टांगों के बीच में चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा था. मैंने सोचा कि यह मेरी पत्नी के पैर हैं, लेकिन कुछ टाइम बाद मुझे मालूम हुआ मेरा पैर तो मेरी भांजी की टांगों से टकरा रहा था और वो मेरी इस बात का कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी थी.</p>
<p>बस दोस्तो, यहीं से मेरे मन में उसके लिए विचार बदल गए. मैंने उसकी जांघ पर अपने पैसे से सहलाना शुरू किया, तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. उसके कुछ वक्त बाद हम सोने की तैयारी करने लगे. मेरी पत्नी के बाजू में मेरा बेटा सोया हुआ था.</p>
<p>मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी पत्नी बहुत ही खुले विचारों वाली है और वह मुझसे सेक्सी बातें खुलकर करती है. दूसरों को चुदवाने के बारे में भी वह कहती है कि आप किसी को चोदोगे, तो मैं आपको देख कर बहुत मजे लूंगी. </p>
<p>इसी बीच मैंने मजाक मैं अपनी पत्नी और अपनी भांजी से कहा- यार, सर्दी ज्यादा ही नहीं बहुत ज्यादा है … कोई हमें भी पास सुला लो. </p>
<p>इस पर मेरी पत्नी ने मजाक में कह दिया- मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो.<br />
तभी मेरी भांजी ने कहा- मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं. आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ … मेरे पास आ जाओ.</p>
<p>देर ना करते हुए मैं तुरंत अपनी भांजी के बेड पर आ गया और उसके साथ लेट गया. मैंने लेटते ही कमरे की लाइट बंद कर दी. मेरी बीवी समझ चुकी थी कि मैं टीनएज गर्ल के कामुक बदन का मजा लूंगा.</p>
<p>करीब 10-15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरी भांजी को नींद आ गई है, वह मेरी तरफ पीठ किए हुए थे. तभी मैंने उसके पीछे से सटकर उसके ऊपर हाथ रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया. अब मैं उसके बिल्कुल बराबर में पीछे से सट कर लेट गया. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके चूतड़ों की दरार में लग रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मेरी भांजी के चूतड़ों पर स्पर्श कर रहा था. वह अब भी कोई विरोध नहीं कर रही थी.</p>
<p>तभी मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मम्मों पर लगाया. आह … बिल्कुल गोल गोल उभार लिए मस्त बूब्स थे. दोस्तों अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी. मैंने एक हाथ उसके सूट के अन्दर डालकर उसके नंगे मम्मों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसका कोई विरोध ना देख कर मैंने उसको सीधा कर लिया. </p>
<p>वह अब सीधी लेटी हुई थी. मैंने धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती को बिल्कुल ऊपर कर दिया और दोनों चूचे नंगे कर दिए. दोनों मम्मों को नंगे करने के बाद मैंने धीरे से अपने होंठ उसके एक चूचे पर लगाए और उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.</p>
<p>उसके दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं. मैं जान चुका था कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है. उसकी सांसें भी तेज हो चुकी थीं. </p>
<p>कुछ देर उसके मम्मों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार में सरका दिया और उसकी चूत पर रखा, तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भीगी हुई थी. मैं समझ गया कि यह बिल्कुल गर्म हो चुकी है.<br />
मैंने सोचा कि यह अभी कुंवारी है, किसी से चुदी नहीं है … यहां पर पूरा खेल नहीं हो पाएगा. मेरा बेटा भी इसी कमरे में सोया हुआ था. बराबर में दूसरा कमरा खाली था. मैंने कुछ टाइम उसकी चूत में उंगली से सहलाया.</p>
<p>जब मैंने महसूस किया कि अब यह पूरी गर्म हो चुकी है, तो मैंने धीरे से उसके कान में कहा- चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं.<br />
मेरे इतना कहते ही मेरी भानजी उठकर बराबर वाले कमरे में पहुंच गई. पीछे से मैं भी कमरे में पहुंच गया. दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने नीचे बिस्तर लगा दिया. </p>
<p>इसी बीच मैंने उस कमरे से दूसरे कमरे में खुलने वाली खिड़की को हल्का सा खोल दिया ताकि मेरी पत्नी भी हमारी चुदाई का आनन्द ले सके. दूसरे कमरे में जाते ही मैंने उसको नीचे लगे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उसने और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे. मेरी भांजी मेरे लंड से चुदने के लिए बिल्कुल बेकरार हो रही थी.</p>
<p>अपनी बहन की बेटी को नंगी करने के बाद मैंने देखा कि वह बहुत ही कामुक और सुंदर नजर आ रही थी. उसके चूचे बिल्कुल गोल और कड़े थे. उसकी चूत बहुत उभार लिए हुए थी. फूली हुई बुर देख कर मजा आ गया.</p>
<p>मैं उसको देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने तुरंत ही उसको चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी.<br />
अब मैंने अपनी भांजी से पूछा- कैसा लग रहा है?<br />
उसने कहा- मामा जी बहुत मजा आ रहा है … आगे करो ना कुछ. </p>
<p>कुछ समय तक उसके मम्मों को चूसने के बाद मैं नीचे आया और उसकी टांगें फैलाकर देखा, तो उभार लिए हुए उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैंने उसकी चूत की दरारों को दोनों उंगलियों से फैला कर चौड़ा किया, तो मजा आ गया.</p>
<p>क्या सेक्सी सीन था … मैं बयान नहीं कर सकता. बिल्कुल गुलाबी चूत थी. उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के रोएं आने शुरू हुए थे. एकदम फूली हुई चूत मस्त पाव रोटी सी दिख रही थी. मैं अपनी बेटी समान भानजी की चूत को देखता ही रह गया. मेरे मन में आ रहा था एकदम से इसकी चूत में अपना लंड पेल दूं, लेकिन मैं जानता था कि अभी यह बिना चुदी हुई है … इसलिए बहुत प्यार से चोदना पड़ेगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मेरा लंड भी 7 इंच लंबा और काफी मोटा तगड़ा लंड है. मैं जानता था कि इसकी कमसिन चुत की ओपनिंग बहुत प्यार से करना पड़ेगी. ये इतना बड़ा लंड आराम से नहीं ले पाएगी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत की दरार को उंगली से फैला कर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.<br />
मेरी जीभ उसकी कुंवारी बुर में लगते ही वह उछल पड़ी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को कुछ अन्दर तक डाल कर चाटना शुरू किया. उसकी चूत पहले ही पानी से भीगी हुई थी … बिल्कुल नमकीन पानी था जिसको मैं चाट कर मस्त हो रहा था. चूत से कोरेपन की भीनी खुशबू आ रही थी. पूरी तरह गीली चूत मुझको चाटने को मिल रही थी. मैं मस्ती में भर कर उसकी चूत को चाट रहा था. वह गांड उछाल उछाल कर सिसकारियां ले रही थी. वो अपने एक हाथ को मेरे सिर पर रख कर अपनी चूत पर मेरे मुँह को दबाए जा रही थी.</p>
<p>तभी उसने मुझसे कहा- मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है … जल्दी से कुछ करो ना!</p>
<p>कुछ टाइम उसकी चूत चाटने के बाद मैंने कहा- मेरी प्यारी भांजी, मेरे लंड को भी तो चाट कर मजा दो ना?</p>
<p>मेरे इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड पानी से भीग चुका था, लेकिन वो पूरे लंड को चाट कर साफ कर चुकी थी. वो आइसक्रीम की तरह मेरे लंड को चाट रही थी. </p>
<p>करीब 5 मिनट मेरे लंड को चाटने के बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और कहा- मामा जी, बहुत मोटा है, मेरा मुँह दुख रहा है … अब नीचे कुछ करो ना प्लीज. </p>
<p>मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया. उसकी टांगों के बीच में बैठकर अपनी हाथ की उंगलियों से उसकी चूत की दरार को फैलाया. अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और हल्के से धक्का लगा दिया.<br />
इस धक्के से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था. </p>
<p>तब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- हां मामाजी हल्का सा दर्द महसूस हो रहा है.<br />
मैंने उसको समझाया- हल्का दर्द होगा, उसके बाद मजा आने लगेगा. तुम चीखना नहीं.<br />
उसने सहमति से सर हिला दिया.</p>
<p>मैंने उसके एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने शुरू किया और अपने लंड के दबाव को कुछ आगे बढ़ाना शुरू किया. मेरा लंड का कुछ और हिस्सा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था, उसको थोड़ी पीड़ा हो रही थी.<br />
फिर मैंने अपने लंड को वहीं रोक कर हल्का हल्का आगे पीछे करना शुरू किया, तो उसका दर्द भी कुछ कम हुआ और उसको मजा आने लगा. अब वह नीचे से कभी-कभी अपनी गांड को उछाल कर मजा ले रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक जोरदार ठाप दे मारी, तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा समा गया. इसी के साथ मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. इस कारण उसकी हल्की सी कराहट निकल सकी. लेकिन मेरा लंड पूरा मेरी सगी बहन की बेटी की चूत में समा चुका था और उसकी सील टूट चुकी थी.</p>
<p>मैं उसकी चूत में अपना लंड फंसा कर उसके ऊपर लेटा रहा और उसके मम्मों को बार बार मुँह में लेकर चूसने लगा. वह कुछ नॉर्मल हुई, तो मैंने अपने लंड को थोड़ा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. </p>
<p>अब उसकी मादक सिसकारियां चालू हो गईं, मैं समझ चुका था कि अब मेरी भांजी चुदाई का मजा ले रही है. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी. </p>
<p>अब मैं और मेरी भांजी चुदाई का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. मैंने अपने आपको रोकते हुए अपना लंड चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का हल्का खून लगा हुआ था. मैंने उसको साफ किया और उसकी चूत को भी साफ किया. फिर दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी.</p>
<p>इसी बीच मैंने खुली खिड़की में देखा तो मेरी पत्नी हम दोनों की चुदाई देख रही थी और मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं और मेरी भांजी दोनों पूरे मजे में डूबे रहे थे. मैं अपनी भांजी से धीरे-धीरे बातें कर रहा था और पूछ रहा था- कैसा लग रहा है?<br />
वह चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और बातों का मजा ले रही थी. वो मुझसे खुलकर बातें कर रही थी. लंड चुत चुदाई के शब्द खुल कर बोल रही थी. वो हॉट चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. </p>
<p>इसी बीच मेरी भांजी ने मुझसे कहा- मामाजी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है … और मुझे कुछ हो रहा है.<br />
मैं समझ चुका था कि अभी ये झड़ने वाली है. </p>
<p>तभी उसने मुझको कस कर जकड़ लिया और कहा- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामा जी … प्लीज प्लीज … </p>
<p>तभी वह शांत पड़ गई. मैं समझ गया कि यह झड़ गई. उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.</p>
<p>फिर मैंने उसको कपड़े पहनाकर दूसरे कमरे में जाने दिया और अपनी पत्नी को इसी कमरे में बुलाकर उसकी चुदाई के मजे लेने की सोचने लगा … क्योंकि मेरे लंड का पानी अभी निकला ही नहीं था. </p>
<p>मेरी पत्नी आते ही नंगी हो गई और उसने सारे कपड़े निकाल दिए. उसने मुझे बताया कि मैं आपकी सारी चुदाई छुपकर शुरू से देख रही हूं. देखो मेरी चूत में कितना पानी है.<br />
मैंने हाथ से देखा, तो मेरी पत्नी की चूत बिल्कुल भीगी हुई थी.</p>
<p>मैंने तुरंत ही अपनी पत्नी को चित लिटाया और उसकी चूत को चाट कर पानी को पी गया. फिर अपना खड़ा लंड डालकर उसकी चुदाई की और उसकी चूत में ही झड़ गया. अब मैं भी शांत हो चुका था.</p>
<p>तभी मेरी भांजी भी उसी कमरे में आ गई. उसने मेरे झड़े हुए लंड को चूस लिया. मेरी बीवी ने उसको बिस्तर पर ले लिया. इसके बाद अगला राउंड मैंने भांजी की चुदाई से शुरू करके बीवी की चूत तक का किया. इस थ्री-सम सेक्स में बहुत मजा आया.</p>
<p>दोस्तो, उसके बाद मैं मेरी पत्नी और मेरी भांजी हम रोजाना मिलकर चुदाई का मजा लेने लगे. यह सिलसिला अभी तक बरकरार है. अभी तक मेरी भांजी की शादी नहीं हुई है और हम तीनों साथ साथ ही चुदाई का मजा ले रहे हैं. </p>
<p>आपको मेरी यह टीनएज गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/munhboli-beti-ki-mammi-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:27:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये। मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है। आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागों <a title="मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/munhboli-beti-ki-mammi-ki-chudai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये।</p>
<p>मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है।<br />
आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागों<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2<br />
में पढ़ा कि अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली रूपा मेरे साथ खुलने लगी, वो मुझे जीजाजी कह कर हंसी मज़ाक करने लगी तो मैंने मौक़ा ताड़ कर रूपा को चोद दिया और उसके बाद हमारे नाजायज रिश्ता आगे बढ़ा।</p>
<p>रूपा के घर में मेरी हैसियत उसके पति की ही है, आज भी है। रूपा की दोनों बेटियाँ मुझे ही पापा कहती हैं, उन सबकी हर एक ज़रूरत को मैं पूरी ज़िम्मेदारी से निभाता हूँ।</p>
<p>बढ़ते बढ़ते प्रेम इतना बढ़ा कि मैं खुद भूल गया कि मेरे सिर्फ एक बेटा है. मैंने उन दोनों लड़कियों को भी बाप का प्यार भरपूर दिया। उन्हें कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। मेरी बीवी भी<br />
कहती थी कि दोनों लड़कियाँ आपको अपने सगे बाप से भी ज़्यादा प्यार करती हैं।</p>
<p>और यह सही भी था क्योंकि रूपा का पति अपने घर में रोआब रखता था और अक्सर लड़कियों को डांट देना, कम बोलना उसकी आदत थी। मगर मैं लड़कियों से खूब हंस बोल लेता था। जब भी उनके घर जाता, दोनों लड़कियाँ बड़े प्यार से आकर मेरे से चिपक जाती।</p>
<p>मगर मुझे कभी ऐसी फीलिंग नहीं आई कि ये किसी गैर की लड़कियाँ हैं। कुछ मौके ऐसे भी आए, जब खेलते खेलते दोनों लड़कियों को मैंने गोद में उठाया, अपने कंधों पर बैठाया, एक ही बेड पर एक साथ लेट कर मोबाइल पर गेम भी खेली। खुशी तो जैसे चारों तरफ से बरस रही थी।<br />
अब तो मेरी बीवी को भी विश्वास हो चला था कि मैं सिर्फ उन लड़कियों के प्रेम के कारण रूपा के घर जाता हूँ, तो कभी कभी मैं अकेला भी रूपा के घर जा आता था।</p>
<p>बस इतनी बात ज़रूर थी कि रूपा अक्सर कहा करती थी- हम सिर्फ दिन में ही क्यों मिलते हैं। कभी कोई प्रोग्राम बनाओ न, ताकि हम दोनों सारी रात प्रेम का खेल खेल सकें। मुझे रात को आपकी बहुत याद आती है। बहुत दिल करता है कि आप मेरे साथ लेटे हों, और हम दोनों बिल्कुल नंगे सारी रात एक दूसरे को प्यार करें।</p>
<p>मगर अब मेरे पास भी यही दिक्कत थी। बीवी जब घर में हो तो मैं रात बाहर कैसे गुज़ारूँ। और दूसरी दिक्कत रूपा की बेटियाँ। उसके घर में वो दिक्कत … मेरे घर में ये दिक्कत।<br />
मगर किस्मत आपको कब किस मोड़, किस दोराहे या चौराहे पर ला कर खड़ा कर दे, आपको नहीं पता।</p>
<p>ऐसा ही मेरे साथ हुआ.</p>
<p>एक दिन मैं रूपा के घर गया। रूपा रसोई में थी तो मैं सीधा रसोई में गया, अपने साथ लाये गर्मागर्म समोसे मैंने रूपा को दिये और मौका देख कर उसको पीछे से ही अच्छी तरह से अपनी बांहों में भर लिया.<br />
और जब उसने मुंह घुमाया, तो उसके होंठों को चूम लिया, उसने भी चुम्बन का जवाब चुम्बन से दिया।</p>
<p>मैंने पूछा- लड़कियाँ कहाँ हैं?<br />
वो बोली- ऊपर कमरे में बैठी पढ़ रही हैं।<br />
झट से मैंने उसकी नाईटी ऊपर उठानी शुरू की, वो बिदकी- अरे क्या करते हो, कोई आ जाएगा।</p>
<p>मैंने तो सिर्फ उसकी फुद्दी ही देखनी थी, वो देख ली।<br />
उसे मैंने कहा- अच्छा ठीक चाय लेकर ऊपर आ जाओ।</p>
<p>मैं ऊपर लड़कियों के कमरे में चला गया। दोनों लड़कियाँ मुझे देख कर खुशी से चहक उठी और दौड़ कर आकर मुझसे लिपट गई- हैलो पापा, नमस्ते पापा।<br />
मैंने दोनों को प्यार किया और दोनों फिर अपनी अपनी जगह जाकर बैठ गई।</p>
<p>उसके बाद मैंने उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और इधर उधर की बातें की। इतने में रूपा चाय और समोसे लेकर आ गई।<br />
तभी दिव्या बोली- अरे समोसे … सच में पापा, मेरा न अभी समोसे खाने को ही दिल कर रहा था।<br />
मैंने कहा- और देखो तुम्हारे दिल की बात मैंने सुन ली, और अपनी बेटी के लिए समोसे ले आया।</p>
<p>दिव्या ने एक समोसा उठाया और साथ में मुझे एक पप्पी भी दी।<br />
हमने समोसे खाये, चाय पी।</p>
<p>चाय पीने के बाद हम वहीं बैठे बातें करने लगे। पहले बैठे थे, फिर धीरे धीरे खिसकते हुये लेट ही गए।</p>
<p>मैं उन्हें अपने मोबाइल पर कुछ फन्नी सी वीडियोज़ दिखा रहा था, जिन्हें देख देख कर हम सब हंस रहे थे। दोनों लड़कियाँ मेरे अगल बगल लेटी हुई थी और रूपा मेरे पाँव के पास बैठी थी. ये एक विशुद्ध पारिवारिक माहौल था। फिर रूपा बर्तन उठा कर रसोई में चली गई, और रम्या भी उसके साथ चली गई।</p>
<p>कमरे में सिर्फ मैं और दिव्या थे। अब जब हम दोनों कमरे में अकेले रह गए, तो मैं उठ कर बैठ गया, तब दिव्या बोली- पापा एक बात पूछूँ?<br />
मैंने कहा- पूछ, मेरा बाबू, क्या बात है?<br />
वो बोली- आप गुस्सा तो नहीं करोगे?<br />
मैंने अपना मोबाइल बंद करके साइड पर रखा क्योंकि बात कोई गंभीर थी, तभी तो उसने मेरी नाराजगी के बारे में पहले ही पूछ लिया।</p>
<p>मैंने कहा- मैं अपने बाबू की की किसी बात पर गुस्सा नहीं होता, पूछो।<br />
वो बोली- आप मम्मी से प्यार करते हो?</p>
<p>एक बार तो मैं उसकी बात सुन कर सन्न रह गया मगर अब जवाब तो देना था। अब सच बात तो यह थी कि मैं रूपा से कोई दिल से सच्चा प्यार नहीं करता था, सिर्फ मेरा उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण था।<br />
मगर फिर भी मैंने कहा- हाँ करता हूँ।<br />
वो बोली- कितना प्यार करते हो?<br />
मैंने कहा- पहले ये बताओ, तुम ये सब क्यों पूछ रही हो?<br />
वो बोली- मैंने मम्मी की आँखों में आपके लिए बेहद प्यार देखा है। जैसे वो आपको देखती है।</p>
<p>मैंने कहा- देखो बेटा, अब तुम बड़ी हो गई हो, सब दुनियादारी समझती हो। तो मैं तुम्हारे सामने ये बात कबूल कर सकता हूँ कि हाँ मुझे तुम्हारी मम्मी से मोहब्बत है।<br />
वो लड़की एकदम से मेरे से लिपट गई- बस पापा, आप मेरी मम्मी को कभी मत छोड़ना, वो आपसे बहुत प्यार करती है। मैंने मम्मी से पूछ लिया था, वो आपको बहुत चाहती हैं। वादा करो आप मम्मी को कभी धोका नहीं दोगे।</p>
<p>अब उसका दिल मैं कैसे तोड़ सकता था, मैंने भी वादा कर दिया कि मैं उसकी मम्मी को कभी धोखा नहीं दूँगा। पर सच्चाई ये थी कि इस रिश्ते की तो बुनियाद ही धोखे पर रखी गई थी। अगर मैंने अपनी ब्याहता पत्नी को धोखा दिया, तब तो रूपा के साथ मेरे सम्बन्ध बने।</p>
<p>मगर मेरे इस झूठे वादे ने मेरे लिए उस घर में नए दरवाजे खोल दिये। उसके बाद तो मैं पूरी तरह से ही उस घर का सदस्य बन गया। अब लड़कियों के ज़िद करने पर मैं हर रोज़ उनके घर जाता, चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही। दोनों लड़कियाँ मुझे बहुत प्यार करती। अब उनके सामने ही मैं रूपा से हंसी मज़ाक कर लेता, उसे बांहों में भर लेता, कभी कभी चूम भी लेता।<br />
दोनों लड़कियां हमारे इस प्रेमालाप की साक्षी थी और वो दोनों ये देख कर बहुत खुश होती कि उनकी माँ को भरपूर प्यार मिल रहा है।</p>
<p>फिर एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि वो कुछ दिनो के लिए अपने मायके जाना चाहती है।<br />
मैंने क्या मना करना था, दोनों माँ बेटा, 3-4 दिन के लिए चले गए।</p>
<p>जिस दिन वो गए, उसी दिन मैंने रूपा को फोन पर कह दिया कि मेरी पत्नी मायके गई है 3 दिन के लिए, अगर कहो तो तुम्हारे घर रहने आ जाऊँ।<br />
उसने कहाँ मना करना था।<br />
उसी शाम अपने दफ्तर से मैं सीधा रूपा के घर गया।</p>
<p>पहले शाम की चाय पी, उसके बाद उसे और लड़कियों को लेकर बाज़ार गया, सब घुमाया, बाहर ही खाना खिलाया। खूब मज़े कर के हम घर वापिस आए।</p>
<p>तो अब वक्त आया सोने का। अभी रूपा थोड़ा झिझक रही थी कि अपनी लड़कियों के सामने वो किसी और मर्द के साथ सोने के लिए कैसे जाए।<br />
मगर दिव्या ने खुद ही उसे कह दिया- मम्मी, आज आप पापा के साथ सो जाओ।<br />
बेशक कुछ शर्माती, कुछ सकुचाती, मगर रूपा मेरा बेडरूम में आ गई।</p>
<p>मैंने दरवाजा बंद कर लिया और दरवाजा बंद करके रूपा को अपनी बांहों में भर लिया। बस बांहों में भरने की देरी थी कि रूपा भी पूरी शिद्दत से मुझसे लिपट गई। सबसे पहले हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे, और सीधा बेड पर लेटते ही मेरा लंड उसकी फुद्दी में घुस चुका था। उम्म्ह … अहह … हय … ओह …<br />
आज तो जैसे हमारी सुहागरात थी। आज मेरी भी इच्छा थी कि साली रूपा की अच्छे से भोंसड़ी मारूँ।</p>
<p>अब मेरी आदत थी, बिना तैयारी के तो मैं रूपा के पास जाता नहीं था, तो आज भी पूरी तैयारी के साथ आया था। तीन चार मिनट की चुदाई में रूपा का पानी झड़ गया, मगर जब उसका पानी झड़ा तो वो खूब तड़पी, खूब चिल्लाई, खूब शोर मचाया, बिना इस बात की परवाह किए कि साथ वाले कमरे में लेटी उसकी दो जवान बेटियाँ क्या सोचेंगी कि मम्मी की क्या ज़बरदस्त चुदाई हो रही है।</p>
<p>मगर बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। उस रात हम दोनों नहीं सोये, अगर सोये तो थोड़ी थोड़ी देर के लिए। जब भी जिसकी भी नींद खुलती, वो दूसरे को जगा लेता और फिर चुदाई शुरू हो जाती।</p>
<p>उस रात मैंने तीन बार रूपा को चोदा, और वो तो शायद 6-7 बार स्खलित हुई और हर बार उसने बिना किसी शर्म के खूब शोर मचा कर अपनी चुदाई का प्रदर्शन किया।</p>
<p>सुबह 5 बजे हम सोये।<br />
[email protected]</p>
<p>आगे की कहानी:  मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मामा की लड़की के साथ सुहागरात</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/mama-ki-ladki-suhagrat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 07:21:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम नमन है मेरी उम्र अभी 22 साल है और मैं अपने माता-पिता व बड़ी बहन के साथ पटेल नगर दिल्ली में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैंने अपने मामा की बेटी की चुदाई की थी। चलिए अब मैं आपको सेक्स से भरपूर कहानी सुनाता हूँ। मेरे मामा एक बैंक में <a title="मामा की लड़की के साथ सुहागरात" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/mama-ki-ladki-suhagrat/" aria-label="Continue reading मामा की लड़की के साथ सुहागरात">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम नमन है मेरी उम्र अभी 22 साल है और मैं अपने माता-पिता व बड़ी बहन के साथ पटेल नगर दिल्ली में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैंने अपने मामा की बेटी की चुदाई की थी। चलिए अब मैं आपको सेक्स से भरपूर कहानी सुनाता हूँ।</p>
<p>मेरे मामा एक बैंक में जॉब करते हैं और नोएडा में रहते हैं। मामी हाउस वाइफ है, उनके साथ उनकी बेटी, जिसका नाम मृणालिनी है, रहती है जो अभी कुछ दिन पहले ही 18 साल की हो गई। उसका रंग गोरा है और शरीर पतला है। मेरे मामा का एक बेटा भी है जो फिलहाल लंदन में अपनी पढ़ाई कर रहा है।</p>
<p>जो घटना मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ ये अभी 15 दिन पहले की ही घटना है। जब मामी ने मुझे नोएडा बुलाया क्योंकि उन्हें 2 दिन के लिए किसी काम से अपने मायके जाना था। जब भी वो कहीं जाती हैं तो मुझे मृणालिनी के पास रहना पड़ता है।</p>
<p>मैं मामा के घर पहुंचा तो मामी मुझे घर के दरवाजे पे ही मिल गई। उन्होंने मुझे बताया कि मृणालिनी नहा रही है तुम बैठो, वो आकर चाय बना देगी।<br />
इतना बोल के मामी चली गई।</p>
<p>मैं अंदर जाकर बाहर वाले कमरे में बैड पर लेट गया। अभी 5 मिनट ही हुए थे कि अंदर वाले कमरे में मुझे मृणालिनी दिखाई दी जो कि सिर्फ एक तौलिया लपेटे थी। मेरे कमरे की लाइट बंद थी पर उसके कमरे में लाइट जल रही थी। उसके बाद जो हुआ, वो मेरी कल्पना से भी परे था।</p>
<p>मृणालिनी ने अचानक से अपने कमसिन बदन से तौलिया हटा दिया. अपनी बहन को पूरी नंगी देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि मैंने जीवन में कभी किसी लड़की को ऐसे नग्न हालत में नहीं देखा था।</p>
<p>उसकी लंबाई 5 फिट 6 इंच की है। उसकी फिगर सही तो नहीं बता सकता पर पर उसकी चूचियाँ 32″ की व पेट से वो बहुत पतली सी है. और हाँ उसकी गांड बड़ी जानदार लग रही थी जो लगभग 34 या 36 की होगी।</p>
<p>वो इस बात से अनजान थी कि कोई उसे बिना कपड़ों के देख रहा है। वहीं से मुझे दिखा कि उसकी चूत बड़ी खूबसूरत लग रही थी। देखकर ही पता चल रहा था कि वो अभी उसके बाल साफ करके आई है। मेरा लंड उसकी चूची, गांड व चूत को देखकर बेकाबू हो रहा था। वो शायद अपनी ब्रा व अंडरवियर ढूंढ रही थी।</p>
<p>अभी 2 से 3 मिनट ही हुए थे कि उसे कुछ शक हुआ जैसे घर पे कोई है। मेरे बारे में उसे नहीं पता था। उसने जल्दबाजी में तौलिया लपेटा और उस कमरे में आ गई जिसमें मैं लेटा था।<br />
जैसे ही उसने लाइट का स्विच ऑन किया, वो हैरानी से मुझे देखकर बोली- भैया आप कब आये? और अंदर कैसे आये?<br />
मैंने उसे बताया- जब मामी जी यहीं थी, तब आ गया था। </p>
<p>उसके बाद उसने दूसरा सवाल पूछा- आपने कुछ देखा तो नहीं?<br />
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- कुछ मतलब?<br />
वो घबराती हुई बोली- मैं अंदर कमरे में थी बिना कपड़ों के?<br />
मैंने कहा- हां, वो तो सब देखा मैंने … पर मैं करता भी क्या … क्योंकि एक अप्सरा मेरे सामने इस अवस्था में थी तो चाहकर भी आँखें नहीं हटा सका।</p>
<p>ये सब सुनकर वो घबरा के वहीं सोफे पे बैठ गई। उसके चेहरे को देखकर ही पता चल रहा था कि उसके हृदय की धड़कनें उसके काबू में नहीं थी।<br />
कुछ देर चुपचाप बैठी रही.<br />
तब मैंने पूछा- क्या हुआ?<br />
तो मेरी बहन बोली- ये सब नहीं होना चाहिए था।<br />
तब मैंने कहा- इसमें ना तुम्हारी गलती ना मेरी। फिर इसमें डरने वाली कौन सी बात है?</p>
<p>फिर पता नहीं उसके दिमाग में क्या आया, उसने अपने दोनों पैर उठाके सामने वाली मेज पर रख दिये। वो ठीक मेरे सामने थी जिसके कारण मुझे उसकी चूत साफ-2 दिखाई दे रही थी।<br />
मैंने उसे कहा- ये क्या कर रही है?<br />
हमारे बीच पहले कभी ऐसी कोई बातचीत भी नहीं हुई थी. इसलिए मैं संभलने की कोशिश कर रहा था।</p>
<p>वो बोली- आपने सब कुछ देख ही लिया फिर छुपाने का क्या फायदा? आप जी भर के देखो।</p>
<p>उसकी गोरी-2 व नंगी जांघ देखकर साथ में चूत देखकर मेरा लंड दुबारा से हरकत में आ गया। मेरी बेचैनी बढ़ने लगी थी, मेरा हाथ अपने आप उसे सहलाने लगा।<br />
ये सब देखकर वो बोली- आप क्या करने लगे?<br />
मैं बोला- जिसके सामने एक अप्सरा आधी नंगी बैठी हो वो कैसे अपने होश संभाले?<br />
तब उसने कहा- ये अप्सरा तो अब पूरी नंगी भी हो सकती है क्योंकि आपने सब देख ही लिया। लेकिन पहले मुझे आपका वो देखना है जिसे आप हाथ से सहला रहे हो।</p>
<p>मुझे और क्या चाहिए था … जल्दी से मैंने अपनी पैंट उतारी, फिर अंडरवियर उतारकर अपना लंड उसके सामने कर दिया। वो उसे देखकर हैरानी से बोली- ये इतना बड़ा होता है क्या?<br />
मैंने कहा- हां, ये इतना ही बड़ा होता है।<br />
वो बोली- क्या मैं इसे छू सकती हूं?</p>
<p>मैंने जैसे ही हां कहा, वो सोफे से खड़ी हो गई वो तौलिया पूरा निकालकर मेरे पास आकर अपने दोनों हाथों से मेरा औजार पकड़ लिया।<br />
मदहोशी में मेरी आँखें बंद हो गई।</p>
<p>तभी मेरे नाक में एक अजीब सी खुशबू महसूस हुई जो मेरी बहन के नंगे जिस्म की ही महक थी। मृणालिनी मेरे लंड को सहला रही थी. मैंने भी अपना हाथ उसकी कमर पे रखा, फिर धीरे-2 उसे नीचे लाते हुए उसकी गांड पे हाथ फिराया तो ऐसा लगा जैसे मक्खन पे हाथ चल रहा हो।</p>
<p>उसके बाद मैं अपनी जीभ उसकी नंगी जांघ पे फिराने लगा.<br />
वो बोली- भैया रहने दो ना प्लीज़।<br />
मैं कहाँ रुकने वाला था, आगे बढ़ते हुए मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पे लगा दी।</p>
<p>इतना कुछ वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। जबकि उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया था। वो पास में खड़ी होकर मेरा लंड चूस रही थी जबकि मैं लेटे-2 उसकी चूत को चाट रहा था।</p>
<p>काफी देर तक हम दोनों इसी हालत में एक दूसरे के साथ मजे लेते रहे. तभी मुझे लगा कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है तो मैंने उसे बताया पर वो तो ना जाने किस दुनिया में थी।</p>
<p>तभी मेरे लन्ड से लावा फूट पड़ा। कुछ तो उसके मुँह में ही चला गया. फिर उसने जैसे ही अपना मुँह हटाया तो मेरे वीर्य से उसका सारा चेहरा गन्दा हो गया।<br />
वो अजीब से मुँह बनाती हुई बोली- भैया ये क्या है?<br />
मैंने उसे बताया- ये वीर्य है.<br />
तो बोली- आपने पहले क्यों नहीं बताया?<br />
मैंने उसे कहा- बताया था पर तुमने सुना नहीं।</p>
<p>वो बोली- ठीक है, अब आपको मेरा पानी पीना पड़ेगा।<br />
मैंने कहा- नहीं, आज तक मैंने भी नहीं पीया, आज रहने दो, बाद में देखेंगे। </p>
<p>पहले वो अपना चेहरा धो के आई। जब वो बिल्कुल नंगी बाहर जा रही थी तो उनकी गांड देखकर मेरा लन्ड दुबारा से मस्ती में आने लगा।</p>
<p>अब वो वापिस आकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और अपनी जीभ मेरे मुँह में दे दी। यह हम दोनों के ही जीवन का पहला चुम्बन था। मैं उसकी तो वो मेरी जीभ को चूसने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर किस करने के बाद मैं उसकी चूचियों पे जीभ फिराने लगा।</p>
<p>बारी-2 से दोनों चूचियों को चाटने के बाद वो उठी और घूम कर दुबारा से मेरे लन्ड को मुँह में ले लिया. अब उसकी गोरी, मोटी गांड व बिना बालों की चूत मेरे मुँह से बस थोड़ी दूर थी. तो मैंने भी लपक कर उसकी चूत को पूरा मुँह में ले लिया।</p>
<p>लगभग 10 मिनट तक दोनों इसी हालत में रहे तो मैंने कहा- इस बार पूरा रस मुँह में ही लेना. मैं भी तुम्हारा रस मुँह में ही ले लूंगा।<br />
वो पहले तो मना करती रही फिर मान गई।</p>
<p>कुछ ही देर में मुझे झटके लगने लगे व उसकी चूत से भी कुछ बहने लगा. दोनों ने एक दूसरे का पानी पिया और अलग हो गये।<br />
मैंने उसे कहा- कोई आ सकता है इसलिए बाकी काम रात में करेंगे।<br />
तो वो मान गई और हम दोनों ने अपना मुँह धोकर कपड़े पहन लिए।</p>
<p>दिन में जब वो किचन में खाना बना रही थी तो मैंने उसके गांड पे अपना लंड लगा दिया.<br />
वो बोली- भैया रहने दो ना, रात में जो मर्जी कर लेना पर अभी काम करने दो।<br />
मैंने एक लिप किस किया और जाकर टीवी देखने लगा।</p>
<p>रात में उसने खाना बनाया और दोनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया।</p>
<p>उसके बाद दोनों एक ही बैड पे लेट गये. सर्दियां शुरू हो गई थी इसलिए दोनों ने एक कम्बल ले लिया। लेकिन अचानक से वो उठ कर दूसरे रूम में चली गई. वहां से जब वो वापिस आई तो उसने एक सेक्सी सा लाल रंग का गाउन पहना हुआ था।<br />
मेरी ममेरी बहन मेरे पास लेट गई तो मैंने कहा- आज तो हमारी सुहागरात है.<br />
तो उसने शर्मा के अपना चेहरा अपने हाथों में छिपा लिया।</p>
<p>मैंने उसका गाउन उतारा तो देखा कि उसने काले रंग की जालीदार ब्रा व पैंटी पहनी हुई थी जिसमें वो बहुत सेक्सी व हॉट लग रही थी।</p>
<p>उसके बाद उसने मेरे कपड़े खुद ही उतार दिए. मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना था जिसकी वजह से पैंट निकलते ही मैं पूरा नंगा हो गया।</p>
<p>उसने मेरे लंड को सीधा अपने मुँह में ले लिया उसके गुलाबी होठों ने मुझे मदहोश ही कर दिया। मैंने उसकी ब्रा व पैंटी निकालकर फेंक दी और उसे कहा- मेरे ऊपर आओ.<br />
तो हम दोनों 69 में आ गए.</p>
<p>उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी जो मुझे और भी पागल कर रही थी। काफी देर तक इसी हालत में रहने के बाद मृणालिनी को उठने को कहा और उसे अपने लन्ड पर बैठने को कहा। वो मेरे पेट पर लेट गई। मेरा लन्ड उसकी चूत को छू कर मस्ती से झूम रहा था। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये और हम दोनों एक दूसरे को होठों को व जीभ को चूसने लगे।</p>
<p>4 से 5 मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और कहा- नीचे आओ, आज तुम्हारी नन्ही सी चूत का उदघाटन करूँगा।<br />
मेरी बहन नीचे बिस्तर पर लेट गई। मृणालिनी डरी हुई थी, बोल रही थी- भाई, मैंने सुना है कि जब पहली बार चुदाई होती है तो बहुत दर्द होता है.<br />
तो मैंने उसे दिलासा दी- मैं आराम से करूँगा, तू जाकर कोई क्रीम ले आ।</p>
<p>उसके बाद मृणालिनी ने बहुत सारी क्रीम मेरे लन्ड पे लगाई मैंने उसकी चूत पे लगाई। उसे लिटाकर मैं ऊपर आ गया और मृणालिनी को कहा- दर्द होगा पर बर्दाश्त कर लेना, प्लीज़ चिल्लाना मत।<br />
अब मैंने उसकी एक टांग उठा के अपना लन्ड उसकी चूत पे सेट किया। पहला धक्का मारा तो वो अंदर नहीं गया साइड में फिसल गया। कई बार की कोशिश के बाद आखिर में लौड़े का आगे वाला भाग अंदर चला गया पर मृणालिनी दर्द से बिलबिला उठी।</p>
<p>मैं रुक गया क्योंकि वो बहुत नाजुक सी लड़की है। कुछ आराम मिला तो एक धक्का और मारा तो मेरा आधा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुई अंदर समा गया पर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर सकी और चिल्ला कर रोने लगी।<br />
फिर वो बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … भैया, प्लीज़ बाहर निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है, बाकी कल कर लेना।</p>
<p>मैं रुक गया और उसकी चूचियों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा। जिसमें ध्यान बटने के कारण उसका दर्द कुछ कम हुआ। अब मैंने एक आखिरी धक्का मारा तो मेरा पूरा लन्ड उसकी छोटी से चूत में समा गया. पर वो तो जैसे बेहोश सी हो गई। जिसके बाद मैं डर गया।</p>
<p>पर जल्दी ही वो होश में आ गई और मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने लगी। मैं कहाँ मानने वाला था, मैं कभी उसके होंठ चूसता कभी उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ चूसता।<br />
लगभग 5 मिनट के बाद मुझे लगा कि वो अपनी गांड हिला रही है. मैं समझ गया कि अब मृणालिनी को दर्द नहीं हो रहा।</p>
<p>मैंने धीरे-2 धक्के मारने शुरू किए तो वो भी मेरे साथ मस्ती में झूमने लगी। काफी देर तक चुदाई करने के बाद जब मुझे लगा कि छूटने वाला है तो उसकी चूत से निकालकर उसकी मुँह में दे दिया. तभी मेरा पानी छूट गया जिसे उसने पूरा पी लिया।<br />
अब उसकी बारी थी वो भी उठकर मेरे मुँह के ऊपर बैठ गई। मैं उसकी भावनाओं को समझ गया औऱ उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी इतने में ही वो भी अकड़कर ढीली हो गई।</p>
<p>उस रात हमने अपनी सुहागरात में 3 बार चुदाई की। एक बार तो मैं मृणालिनी की गांड में लन्ड देना चाहता था पर वो नहीं मानी बोली- भाई आज चूत का दर्द झेल लूं, अगली बार गांड का ही उदघाटन करवा लूंगी आप से ही।</p>
<p>उसके बाद हम दोनों सो गये।</p>
<p>अगले दिन फिर से दिन में यही चुदाई का खेल खेला जिसके बारे में अगली कहानी में बताऊंगा।</p>
<p>मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी मेरी ईमेल आईडी पे मेल करके जरूर बताना।<br />
[email protected]</p>
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		<title>बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:54:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे <a title="बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/" aria-label="Continue reading बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे पूछ पूछ कर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है.<br />
लीजिये पढ़िये।</p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम रत्न लाल है, मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा … बस यही मेरा परिवार है।</p>
<p>अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली बनी। वो औरत हमारे मोहल्ले की दूसरी गली में रहती है। दोस्ती की वजह यह हुई कि मेरी पत्नी और उस औरत, दोनों का नाम रूपा है। उस औरत रूपा के दो बेटियाँ है, बड़ी बेटी दिव्या 20 साल की है, और छोटी बेटी रम्या 18 साल की है। छोटी लड़की तो पतली दुबली सी, साँवली सी है। बड़ी लड़की दिव्या भी पतली है मगर वो गोरी है, देखने<br />
में भी सुंदर है और अभी बी ए कर रही है।</p>
<p>रूपा का पति पहले तो यहीं रहता था और दोनों मियां बीवी छोटे मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते थे तो घर के हालात कुछ खास अच्छे नहीं थे।<br />
फिर रूपा के पति को विदेश जाने का मौक़ा मिला तो वो पैसा कमाने विदेश चला गया।</p>
<p>वैसे तो हमारा एक दूसरे के घर आना जाना हो जाता था। मगर जब रूपा का पति विदेश चला गया तो मुझे रूपा कुछ विशेष लगने लगी। हालांकि रंग रूप में, या शारीरिक बनावट में वो मेरी पत्नी के मुक़ाबले कहीं भी नहीं ठहरती थी मगर पराई औरत तो पराई औरत ही होती है। अच्छी न भी हो, तो भी बस उसके मम्मे, उसकी गाँड, उसकी फुद्दी आपको अपनी ओर आकर्षित करती ही करती है।</p>
<p>मेरे मन में भी कई बार इस बात का ख्याल आया कि रूपा को थोड़ा टटोल के देखूँ, पति इसका पास में नहीं, तो रात को ये भी तो बिस्तर पर करवटें बदलती होगी. अगर किसी तरह से बात बन गई, तो अपने को बाहर मुँह मारने का मौका मिल जाएगा।</p>
<p>हालांकि मैं उसके घर कम जाता था, मैं तो अपने काम धंधे में ही बिज़ी रहता था मगर कभी कभार आना जाना हो जाता था या कभी कभी वो भी आ जाती थी।</p>
<p>अब मेरी बीवी के साथ उसका अच्छा दोस्तना था, वो मेरी बीवी को दीदी और मुझे जीजाजी कहती थी। मगर मैंने कभी उसके साथ साली कह कर कोई हंसी मज़ाक नहीं किया, मैं थोड़ा रिज़र्व ही रहता था. हाँ उसकी बेटियों के साथ मैं हंस बोल लेता था।</p>
<p>पति के विदेश जाने के बाद उसने घर के कई कामों में कई बार मेरी मदद भी ली मगर मैंने खुद आगे बढ़ कर कभी कुछ नहीं किया. मेरे और रूपा के बीच मेरी पत्नी हमारी कड़ी थी। सारा<br />
काम, बातचीत मेरी पत्नी के द्वारा ही होती थी।</p>
<p>मगर एक बात जो मैं नोटिस कर रहा था कि रूपा का व्यवहार अब बदलने लगा था। जब भी मौका मिलता उसे, वो मुझे जीजाजी कह कर खूब हंसी मज़ाक कर लेती। मुझे अक्सर लगता कि वो अपनी आँखों से अपनी बातों से अपने हाव भाव से यह जता रही थी कि जीजाजी हिम्मत करो और मुझे पकड़ लो, मैं आपको ना नहीं करूंगी।</p>
<p>मगर मैं अपनी पत्नी के सामने होते उसे कैसे पकड़ सकता था।</p>
<p>समझती वो भी थी कि जब तक हम अकेले नहीं मिलते तब तक कोई भी सम्बन्ध हमारे बीच नहीं बन सकता था। मगर अकेले मिलने का कोई भी मौका हमें नहीं मिल रहा था।</p>
<p>हमारी दोस्ती या यूं कहो कि दिल में छुपा हुआ प्यार इसी तरह चल रहा था। अपने अपने मन में हम दोनों तड़प रहे थे। मैं कम तड़प रहा था, वो ज़्यादा तड़प रही थी। वो कई बार कह भी चुकी थी- जीजाजी, आपके पास कार है, मुझे कार चलानी सिखाइए। जीजाजी, किसी दिन अपन दोनों कोई फिल्म देखने चलते हैं। मेरी तो इच्छा है कि बरसात हो रही हो, और हम दोनों जीजा साली कहीं दूर तक गाड़ी में घूम कर आयें।</p>
<p>ये सब बातें वो बातों बातों में मेरी पत्नी के सामने कह चुकी थी और ऐसी ही बातों से मेरे दिल में ये विचार आए कि शायद ये मुझसे अकेले मिलने का बहाना ढूंढ रही है।</p>
<p>फिर एक दिन उसने और बड़ा ब्यान दाग दिया।<br />
हुआ यूं कि हम बाज़ार गए थे, वहीं वो भी मिल गई, अपनी दोनों बेटियों के साथ। तो औपचारिकतावश हमने उन्हें शाम के खाने का न्योता दिया।<br />
वो झट से मान</p>
<p>हम एक मिठाई की दुकान में गए, ऊपर उनका ही रेस्टोरेन्ट बना था। सब कुछ शाकाहारी था। हमने वहाँ बैठ कर खाना खाया।</p>
<p>अब उसकी बड़ी बेटी मेरे साथ बैठी जबकि रूपा, उसकी छोटी बेटी, और मेरी पत्नी मेरे सामने बैठी।<br />
दिव्या वैसे भी मेरे से बहुत स्नेह करती थी।</p>
<p>हम दोनों चुपचाप बैठे खाना खा रहे थे, वो रूपा बोली- देखो दोनों कैसे बिल्कुल एक ही स्टाइल से खाना खा रहे हैं, जैसे दिव्या आपकी ही बेटी हो।<br />
मैंने कहा- हाँ, मेरी बेटी है।<br />
अब मैं और क्या कहता।<br />
मगर तभी रूपा बोली- आपकी कैसे हो सकती है, हम कभी मिले तो है नहीं?</p>
<p>मैं तो सन्न रह गया। मिले नहीं मतलब सेक्स नहीं किया। मैंने सोचा- अरे भाई ये तो चुदवाने के चक्कर में है, और मैं यूं ही शराफत में मारा जा रहा हूँ।<br />
मगर उस वक्त मैंने सिर्फ हाथ उठा कर आशीर्वाद देने का ढोंग कर दिया कि दिव्या तो मेरी आशीर्वाद से पैदा हुई बेटी है।<br />
तो दिव्या बोली- मौसा जी, अगर आप बुरा न माने तो मैं आपको पापा कह लिया करूँ।<br />
अब उस बेटी की यह नन्ही सी प्यारी सी गुजारिश को मैं ना नहीं कर सका, मैंने कहा- हाँ, बेटा, मुझे तो खुशी होगी, मेरी कोई बेटी नहीं, तुम मेरी बेटी बन जाओ।</p>
<p>उस दिन के बाद दिव्या मुझे हमेशा पापा ही कहती। मगर छोटी बेटी कभी पापा तो कभी मौसा जी कह देती थी। उसके साथ मेरा रिश्ता ठीक ठाक सा ही था क्योंकि वो चुप ज़्यादा रहती थी।</p>
<p>फिर एक दिन दिव्या ने मुझसे मेरा फोन नंबर मांगा, उसके बाद वो मुझे कभी कभी फोन भी करती, सुबह शाम को कभी कभी मेसेज भी करती और मैं भी उसे अच्छे अच्छे मेसेज भेज दिया करता था जैसा कोई भी बाप बेटी करते हैं।</p>
<p>एक दिन मैं और मेरी पत्नी उनके घर गए, तो उस दिन रविवार था और वो सब लोग सर के बाल धोकर बैठे थे।<br />
फिर दिव्या तेल ले कर आई और तीनों माँ बेटी एक दूसरी के सर में तेल लगाने लगी।</p>
<p>मैंने भी बैठे ने यूं ही कह दिया- अरे वाह, दिव्या, बहुत बढ़िया से तेल लगाती हो तुम तो!<br />
वो बोली- पापा, आपके भी लगा दूँ?<br />
मैंने कहा- हाँ, लगा दो।</p>
<p>जब उनका निबट गया तो दिव्या तेल की शीशी लेकर मेरे पास आई। मैं उनके दीवान पर बैठा था, वो मेरे पीछे आई और कटोरी से तेल लेकर मेरे बालों में लगाने लगी।<br />
“आहह … हह … आहा …” कितना आनंद आया, जब बेटी पिता के सर में तेल लगाये अपने नर्म नर्म हाथों से।</p>
<p>रूपा बोली- अरे जीजाजी, मैं लगा दूँ आपके तेल?<br />
उसकी बात में एक तंज़ मैं समझ गया मगर मैंने कहा- अजी नहीं शुक्रिया, बिटिया बहुत बढ़िया लगा रही है।</p>
<p>उसके बाद उनके घर ही हमने खाना खाया और जब वापिस आए, तो अपनापन दिखाने के लिए रूपा ने पहले मुझे नमस्ते बोली और फिर आगे बढ़ कर मुझे आलिंगन भी किया. मगर उसने आलिंगन करते हुये अपना मम्मा मेरी बगल से अच्छे से रगड़ दिया और मेरी तरफ देख कर शरारत से मुस्कुराई।<br />
वो मुझे साफ से साफ इशारे कर रही थी कि आओ मुझे पकड़ो मगर मैं ही ढीला चल रहा था।</p>
<p>मैंने सोचा कि अब अगर एक भी मौका और मिला, तो मैं रूपा से बात कर लूँगा।</p>
<p>फिर एक दिन मौका मिला, वो हमारे घर ही आई हुई थी, मेरी बीवी रसोई में थी। मैंने पूछा- अरे रूपा, तुमने मेरा मोबाइल नंबर लिया था, पर कभी फोन तो किया नहीं?<br />
वो बोली- आप तो वैसे ही कम बात करते हो, क्या पता फोन पर बात करो भी या नहीं।<br />
मैंने कहा- अरे नहीं, मैं तो बल्कि इंतज़ार कर रहा था कि कभी हैलो हाई, नमस्ते, गुड मॉर्निंग, आई लव यू, कुछ तो मेसेज करो।<br />
वो मेरी बात सुन कर बहुत हंसी, बोली- अच्छा अब करूंगी।</p>
<p>और अगले ही दिन सुबह उसका मेसेज आया ‘गुड मॉर्निंग’ का। जवाब में मैंने भी उसको गुड मॉर्निंग का मेसेज भेजा। और दिन में ही हम दोनों ने 40 करीब व्हाट्सअप मेसेज एक दूसरे को कर दिये।</p>
<p>जितना मैं खुल कर चला, वो उससे भी ज़्यादा खुल कर चली और अपने जीजा साली के रिश्ते की सारी मान मर्यादा तोड़ कर हम दोनों ने एक दूसरे को खुल्लम खुल्ला प्यार का इज़हार तक कर दिया। यहाँ तक के उसने ये भी कह दिया कि अगर आप न कहते तो मैं खुद ही कहने वाली थी।</p>
<p>अब जब प्यार का इज़हार ही हो गया, तो और क्या बाकी रहा। वो पूरी तरह से मेरे साथ सेट हो चुकी थी। मन में खुशी के लड्डू फूट रहे थे कि यार कमाल हाई, 50 साल की उम्र में भी माशूक पटा ली।</p>
<p>उसके बाद तो अक्सर हम फोन पर बाते करते, दो तीन दिन में ही, बातें शीशे की तरह साफ हो गई। दोनों ने एक दूसरे से कह दिया कि अब जिस दिन भी मिलेंगे, अकेले में मिलेंगे, और उसी दिन हम सभी हदें पार कर जाएंगे।</p>
<p>मैंने सोचा, अब माशूक के पास जाना है, तो पूरी तैयारी के साथ जाया जाए। बुधवार की मैंने अपने काम से पहले ही एक दिन की छुट्टी ले ली थी।<br />
मगर मंगलवार को मैंने कुछ और काम भी किया। मैंने आधी गोली *** की खा ली। यह गोली खाने से आप जब कहो, तब आपका लंड आपके इशारे पर खड़ा हो जाता है, और वो भी पूरा कड़क, पत्थर की तरह सख्त। बस इतना ज़रूर है कि ये गोली यूरिक एसिड बढ़ा देती है। मगर इसका असर 2-3 दिन रहता है।</p>
<p>बुधवार की सुबह मैंने एक चने के आकार की गोली अफीम की कड़क चाय के साथ निगल ली। अब सफ़ेद गोली लंड को खड़ा रखने के लिए और काली देर तक न झड़ने के लिए।</p>
<p>हमारा 11 बजे मिलने का प्रोग्राम था। मगर मैं 10 बजे से पहले ही हर तरह से तैयार था। करीब पौने 11 बजे मैंने रूपा को फोन करके पूछा- हां जी क्या हाल हैं साली साहिबा?<br />
वो बोली- बहुत बढ़िया, आप सुनाओ।<br />
मैंने पूछा- मैं तो सोच रहा था, सुबह सुबह आपके दर्शन हो जाते तो, सारा दिन बढ़िया गुज़रता।<br />
वो उधर से बोली- तो आ जाइए, किसने रोका है, आपका ही घर तो है।</p>
<p>मैं तो उड़ता हुआ उसके घर पहुंचा। गेट खोल कर अंदर गया, अंदर घर में वो रसोई में कुछ कर रही थी। मैंने आस पास देखा, घर में और किसी के होने की आहट नहीं थी। मगर फिर भी मैं रसोई में गया, उस से नमस्ते की, उसका, बच्चों का हाल चाल पूछा।</p>
<p>फिर पूछा- बच्चे कहाँ हैं।<br />
वो बोली- बड़ी कॉलेज, छोटी स्कूल। बस घर में मैं अकेली हूँ।<br />
मतलब जो मैं पूछना चाहता था, वो उसने खुद बता दिया।</p>
<p>वो गैस पर चाय बना रही थी, मैं उसके पीछे जा कर खड़ा हो गया। दिल तो कर रहा था कि इसे पीछे से ही बांहों में भर लूँ, मगर फिर भी दिल में एक डर सा था। मगर फिर भी मैंने हिम्मत करके उसको अपनी बांहों में भर लिया।</p>
<p>वो एकदम से चौंकी- अरे जीजाजी, ये क्या कर रहे हो?<br />
वो गुस्सा नहीं हुई तो मेरी भी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने झट से उसकी गर्दन पर एक दो चुंबन जड़ दिये और उसे कस कर अपने से चिपका कर बोला- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी रूपा, अब सब्र नहीं होता यार!<br />
और मैंने उसकी गर्दन कंधो को चूमते हुये, उसका चेहरा घुमाया, और उसके गाल पर भी चूम लिया।</p>
<p>वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो बड़े बेशर्म हो, छोटी साली तो बेटी जैसी होती है।</p>
<p>[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2</p>
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