<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Kahani18</title>
	<atom:link href="https://kahani18.com/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://kahani18.com</link>
	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:42:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://kahani18.com/wp-content/uploads/2025/08/cropped-favicon-32x32.png</url>
	<title>Kahani18</title>
	<link>https://kahani18.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>बुआ की चुदाई का मज़ा</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:42:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Bua Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13328</guid>

					<description><![CDATA[मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में … मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं। मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। ... <a title="बुआ की चुदाई का मज़ा" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/bua-ki-chudai-ka-maja/" aria-label="Read more about बुआ की चुदाई का मज़ा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी बुआ की चुदाई कैसे की, पढ़ें इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में …  मुझे बड़ी उम्र की औरतों में दिलचस्पी है क्योंकि उनका बदन भरा पूरा और उनके स्तन, गांड बहुत बड़े होते हैं।<br />
<span id="more-372"></span></p>
<p>मेरा नाम राहुल सिंह है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरा क़द 5’6″ है और मेरा शरीर एथलेटिक है। मेरे लंड का साइज 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है। मैं इंजीनियरिंग फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरी एक गर्लफ्रैंड भी है जो बहुत खूबसूरत और हॉट है। उसका फिगर 34-28-36 है। उसे सेक्स बहुत पसंद है, मैंने उसके साथ बहुत बार चुदाई की है।</p>
<p>लेकिन मुझे शुरू से ही बड़ी उम्र की औरतों में ज़्यादा दिलचस्पी थी। आंटी और भाभी मुझे ज़्यादा आकर्षक और उत्तेजित करती थी क्योंकि उनका बदन भरा पूरा रहता था और उनके स्तन और गांड बहुत बड़े होते हैं। किसी हॉट आंटी को देखते ही मेरा लंड सलामी देना शुरू कर देता था।</p>
<p>यह बात है सर्दियों की जब मेरी बुआ मेरे घर पर आई हुई थी। हमारा परिवार बहुत छोटा है जिसमें मेरा भाई, एक बहन और मम्मी पापा हैं।<br />
मेरी बुआ 10 दिन के लिए रहने आयी थी। उनका नाम शालिनी है और उनकी उम्र लगभग 45 साल है। वो कद में नाटी हैं। उनकी हाइट लगभग 5फुट 2 इंच है लेकिन उनका फिगर बहुत मस्त है. उनके स्तनों का साइज 36 इंच है और उनकी गांड लगभग 35 इंच की होगी।</p>
<p>मेरे फूफाजी ज़्यादातर शहर से बाहर ही रहते थे जिसके कारण बुआ को बहुत काम समय दे पाते थे. वो अपने दो बच्चों के साथ रहती थी जिनमें एक बेटा और एक बेटी थी। उनका मन भी पति से दूर रहकर तड़पता होगा। फूफाजी 4 से 5 महीने पर एक बार घर पर आते थे।</p>
<p>जब बुआ हमारे घर रहने आयी हुई थी तब मेरा पूरा परिवार किसी शादी में लखनऊ जाना था. पर मैं नहीं गया क्योंकि बुआ के साथ एक जने का रहना जरूरी था। मैंने कहा कि मैं बुआ के पास रुक जाता हूँ तो सब लोग मुझे और बुआ को घर में छोड़ कर लखनऊ चले गए. उस समय मैं अपने सेमेस्टर एग्जाम ब्रेक में घर आया हुआ था।</p>
<p>मैं अपनी बुआ के साथ बात करने में बहुत फ्रैंक था, मैं उनसे कोई भी बात करने में संकोच नहीं करता था। मैं बुआ को बहुत पसंद करता था और मैं उनके साथ सेक्स करना चाहता था. पर समझ नहीं आ रहा था कि कैसे किया जाए। मैं उनकी मुस्कान पर फिदा था, उनकी मुस्कान बहुत ही खूबसूरत थी, वो जब हँसती थी तो मेरा दिल उनको देख कर और उनके प्यार में पागल हो जाता था।</p>
<p>मेरी आदत थी कि मैं हमेशा घर के बाहर नाले के पास पेशाब किया करता था और वो जगह मेरे घर के छत से साफ दिखती थी.</p>
<p>एक बार मैं वहां मूत रहा था तो बुआ ने छत से मेरा लंड देख लिया था। मेरा लंड 6 इंच का ही है लेकिन है काफी मोटा।</p>
<h2>बुआ की चुदाई की तैयारी</h2>
<p>एक दिन की बात है जब बुआ हमारे घर में नहा रही थी। हमारे घर में एक हैंडपंप है और बुआ को हैंडपंप के पास ही नहाना पसंद था। मैं उस समय अपने कमरे में था और टीवी देख रहा था।<br />
तभी बुआ ने आवाज़ लगाई- राहुल … ज़रा आकर हैंडपंप चला कर बाल्टी भर दे।<br />
तो मैं चला गया और हैंडपंप चलाने लगा.</p>
<p>और उसी समय मेरी नज़र बुआ के गदराये बदन पर पड़ी। हाय क्या बदन था बिल्कुल शीशे जैसा … मैं दंग था कि इस उम्र में भी उन्होंने इतना अपने फिगर को मेन्टेन किया हुआ है। उस वक़्त वो पेटीकोट में थी जिससे उनके स्तनों की चूचियां साफ दिख रही थी और पेटीकोट गीली होने की वजह से उनके गोल गोल गांड भी साफ दिख रही थी।</p>
<p>यह नज़ारा देख कर मैं बेक़ाबू हो रहा था और मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। मैं जैसे तैसे हैंडपंप चला रहा था।</p>
<p>तभी बुआ ने कहा- मेरी पीठ पर साबुन लगा दे.<br />
तो मैं उनकी पीठ पर साबुन लगाने लगा।</p>
<p>शायद बुआ को मेरा मोटा लंड याद आ रहा था और शायद उनका मुझसे चुदाई का मन बन रहा था जिसके लिए वो मुझे उत्तेजित कर रही थी।<br />
क्या मुलायम बदन था बुआ का … जी कर रहा था कि उसी वक़्त उनको चोद दूँ.</p>
<p>पर मैंने किसी तरह कंट्रोल किया। फिर मैंने जाकर बाथरूम में मुठ मारी और फिर उनके साथ खाना खाया और सो गया।</p>
<p>फिर शाम को बुआ ने बताया कि उनके पैर और पीठ में दर्द हो रहा है.<br />
तो मैंने उनसे पूछा- क्या मैं तेल मालिश कर दूं?<br />
तो उन्होंने मना कर दिया. परन्तु मैंने जैसे तैसे करके उनको मना लिया।</p>
<p>मैं सोच रहा था कि इसी बहाने कहीं बुआ की चुदाई करने का मौका मिल जाये तो मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। मैं जाकर तेल गर्म कर के ले आया।<br />
मैंने उनको बोला- आप पेट के बल लेट जाइए!<br />
तो वो लेट गई।</p>
<p>मैंने उनकी साड़ी को घुटनों तक ऊपर कर दिया और मालिश करने लगा। जैसे कि मैंने पहले ही बताया कि मेरी बॉडी एथेलेटिक है और मैं कसरत भी करता था जिसके कारण मैंने उनकी ज़ोरदार मालिश करना शुरू कर दिया।</p>
<p>कुछ देर में बुआ को काफी अच्छा लगने लगा और वो बोली- तू तो बहुत अच्छी मालिश करता है, तेरे हाथ भी बहुत सख्त हैं।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने उनकी साड़ी को उनके कूल्हों तक सड़क दिया और मालिश करने लगा. धीरे धीरे करते हुए मैं ऊपर बढ़ता गया जिससे उनकी लाल पैंटी दिखने लगी जो उन्होंने पहनी थी।<br />
लेकिन उसके आगे बढ़ने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।</p>
<p>पर उसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुआ ने खुद से साड़ी को पीठ तक सरका दिया और बोली- जांघों के ऊपर भी मालिश कर।<br />
मैंने शुरू कर दिया और कुछ देर बाद मैं उनकी जांघों के बीच तेल लगाने लगा।</p>
<p>मुझे उनकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि बुआ आज मुझसे चुदने का मन बना रही हैं। वैसे भी कई दिनों से उनकी चूत की प्यास किसी ने नहीं बुझाई थी, फूफाजी 4 महीनों से घर नहीं आये थे।</p>
<p>मैं तेल लगाने में व्यस्त था, तभी उन्होंने अपने ब्लाउज और ब्रा की हुक खोल दी और कहा- पीठ पर तेल लगा दे।<br />
तो मैं वैसे ही करने लगा।</p>
<p>धीरे धीरे उनका बदन गर्म और मेरा लौड़ा कड़क हो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनको बोल दिया- बुआ, मैं आपको पसंद करता हूं और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं।<br />
इतना कहकर में चुप हो गया और थोड़ा डर भी गया कि शायद वो नाराज़ न हो जायें और ये सब पापा से न बोल दें।</p>
<p>कुछ देर बाद बुआ ने कहा- मैं ये सब इसीलिये कर रही थी कि तुम मुझसे सेक्स करने क़े लिए तैयार हो जाओ।<br />
यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उनको गले से लगा लिया.</p>
<p>उसके बाद मैंने उनको किस करना शुरू किया और अपने होंठ उनके होठों पर रखकर चूसने लगा। वाह … क्या रसीले होंठ थे उनके … मैंने उसको 10 मिनट तक चूसा।</p>
<p>फिर मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा उतारकर दूर फेंक दिया और उनके स्तनों को निहारने लगा, क्या मोटे मोटे स्तन थे।<br />
मुझसे रहा न गया और मैं उनको पागलों की तरह चूसने और चाटने लगा। उनके मुंह से सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गई- आआआ आह आअ आह राहुल … और ज़ोर से चूसो!<br />
तो मैं और कस के उनको दबाने और चूसने लग गया।</p>
<p>उनकी चुचियों के निप्पल फूल कर बेर के आकार के हो गये तो मैं समझ गया कि वो गर्म हो चुकी हैं।</p>
<p>उसके बाद मैंने बुआ की पैंटी उतार दी. अब वो पूरी नंगी थी.<br />
क्या नंगा बदन था उनका … सब कुछ एकदम कड़क।</p>
<p>फिर मैंने अपनी जीन्स और चड्डी उत्तर दी और नंगा हो गया। मेरा लंड फुदकता हुआ बाहर आ गया।<br />
तब मैंने उनको बोला- बुआ मेरा लंड चूसो!<br />
तो उन्होंने चूसना शुरू किया. मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आने लगा.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उनके मुंह से बाहर निकाला और उनकी टांगों को फैलाया जिससे उनकी गुलाबी चूत दिखने लगी। मैंने तुरंत अपनी उंगली उसमें डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।<br />
अब उनकी सांसें ज़ोर ज़ोर से चलने लगी. फिर मैंने उनकी चूत को जीभ से चाटना शुरू किया। अब वो ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें निकालने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… राहुल हां हा हा और ज़ोर से चाट बेटा, अपनी बुआ को आज अपनी रानी बना ले।</p>
<p>कुछ देर तक चाटने के बाद बुआ ने कहा- अब और मत तड़पा और अपना मोटा लंड डाल दे मेरी चूत में। मैं इससे चुदने के सपने कई दिन से देख रही थी जब मैंने तुम्हें पेशाब करते हुए देखा था।</p>
<p>फिर मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और उसके सुपारे को उनकी चूत के ऊपर रख दिया और रगड़ने लगा जिससे वो और तड़पने लगी और बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … बेटा बस अब डाल दे इस मूसल को अपनी रांड बुआ की चूत में और फाड़ दे।</p>
<p>बस फिर क्या था … मैंने हल्का सा झटका लगाया और थोड़ा लंड उनकी चूत में दाखिल हो गया. बुआ की चीख निकल गयी और वो बोली- निकाल इसे बाहर!<br />
पर मैं कहाँ सुनने वाला था, एक जोरदार झटका लगाया मैंने और पूरा लंड बुआ की चूत में समा गया और शुरू हो गयी बुआ की चुदाई.</p>
<p>उनकी आंखों से आंसू निकल गए। बुआ की चुत शादी के इतने साल बाद भी काफी टाइट थी। मैंने अपने लंड को थोड़ी देर वैसे ही रोक के रखा, फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए।<br />
अब उनको भी मज़ा आने लगा था और अपनी गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी थी।</p>
<p>मैंने अपनी चोदन गति बढ़ानी चालू की और उनके मुंह से आवाज़ें आनी शुरू हो गई- राहुल लल … आह बेटे … ऐसे ही ऐसे ही चोदो … अपनी रंडी बना लो मुझे। आज मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ दो इस चूत को। कितने दिनों से मेरी चूत एक लंड के लिए तरस रही थी … आज सब कसर मिटा दे बेटा … आह आह आह आह … तेरे फूफाजी भी कभी ऐसी चुदाई नहीं कर पाते हैं और कुछ देर में ही झड़ जाते हैं। इसलिये आज तक मैंने कभी चुदाई के असली सुख को नहीं भोगा। आज मुझे वो मिल रहा है आह आह आह उफ्फ उफ्फ उफ्फ्फ।</p>
<p>15 मिनट तक मैं बुआ की चुदाई करता रहा, फिर वो झड़ गई. मैंने अपने लंड पर गर्म लावे से कुछ महसूस किया, वो उनका वीर्य था।<br />
पर मैं लगा रहा और कुछ देर औऱ चुदाई करने के बाद मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।</p>
<p>बुआ ने कहा कि मैंने उन्हें संतुष्ट किया है जो वो फूफाजी से कभी नहीं हो पाई।<br />
उसके बाद हमने पेशाब किया और एक दूसरे से चिपक कर सो गए।</p>
<p>उस दिन के बाद हम बुआ भतीजा ने कई बार एक दूसरे की प्यास बुझाई।</p>
<p>प्रिय पाठको, आपको कैसी लगी मेरी बुआ की चुदाई की इन्सेस्ट सेक्स कहानी?<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Aunty Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13309</guid>

					<description><![CDATA[गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया? दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत ... <a title="मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/aunty-sex-story/garam-aunty-ki-chudai-story/" aria-label="Read more about मोटी गांड वाली गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गर्म आंटी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने पड़ोस की एक आंटी को पसंद करता था और चोदना चाहता था. वो भी कामुक हावभाव से मुझे ललचाती थी. तो मैंने क्या किया?<br />
<span id="more-362"></span></p>
<p>दोस्तो मेरा नाम अमन है. मैं हिसार हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 21 साल की है और बहुत स्मार्ट भी हूं. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. </p>
<p>यह चुदाई स्टोरी अक्टूबर 2017 की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी. हमारे पड़ोस में एक आमिना नाम की आंटी रहती हैं. ये नाम बदला हुआ है. आमिना आंटी की उम्र लगभग 42 साल के आस पास की रही होगी. उनका फिगर 36-34-36 का होगा. आंटी देखने में बहुत सेक्सी, गर्म लगती थीं. उनके उठे उठे से मोटे चूचे मुझे बहुत आकर्षित करते थे. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.</p>
<p>वे जब भी हमारे घर आतीं या मुझे कोई काम के लिए बुलातीं, तो वह मुझे बहुत प्यार से और हंस कर बात करती थीं. जब वह सेक्सी मूड में होतीं, तो मुझे इधर-उधर हाथ लगा कर मुझसे छेड़खानी करतीं, मेरी जीएफ के बारे में पूछ कर मुझे चिढ़ाती थीं … जबकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी. हालांकि मैं भी उनकी बातों के मजे लेता रहता था. मुझे उनके इस तरह के गर्म व्यवहार से मजा ही आता था.</p>
<p>त्यौहार से 3 दिन पहले आंटी घर की सफाई कर रही थीं. उसी दौरान उन्होंने मुझे ऊपर वाले कमरे में सामान उतारने के लिए बुलाया. उस समय उन्होंने लाल रंग का गाउन पहन रखा था, जिसमें उनकी चुचियों की लाइन साफ दिख रही थी. मैं उनकी चूचियों को देख रहा था, जो कि उन्होंने नोटिस कर लिया था. </p>
<p>थोड़ी देर में वह बाथरूम में जाकर एक नीला सूट पहन आईं, जिससे मुझे उनके मोटे चूचे और भी साफ दिखने लग गए थे. उन्हें देख कर मेरा 6.5 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया था. उन्होंने भी मेरे खड़े होते लंड पर अपनी नजर मार ली थी.</p>
<p>हम जिस कमरे में खड़े थे, वहां काफी सामान होने की वजह से जगह बहुत कम थी. आंटी कोई सामान लेने आतीं, तो वह अपनी चूची मेरी छाती से सटाते हुए निकल रही थीं.<br />
हालांकि इस तरह की परिस्थिति में एक तरीका ये होता है कि खुद को बचाते हुए निकलना, भले ही मम्मे रगड़ रहे हों, लेकिन खुद से ऐसा शो करना कि मजबूरी है.</p>
<p>पर आंटी तो जब भी मुझसे सट कर निकलतीं, तो वे और भी जानबूझ कर मेरे सीने से अपने मम्मों को रगड़ने की कोशिश कर रही थीं. इससे मुझे पता चल गया था कि आंटी का मूड आज कुछ अलग है. </p>
<p>मैंने भी आंटी के मम्मों को बातों ही बातों में कभी टच किया, तो कभी हाथ लगा दिया. आंटी भी हंस रही थीं. मैं समझ गया था कि आज लाइन क्लियर है. थोड़ी ही देर यूं ही काम चलता रहा. </p>
<p>आंटी की मोटी गांड देख कर मेरा लंड का बुरा हाल हो गया था. मैं बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने लगता.</p>
<p>आंटी ने कहा- क्या हुआ?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं!<br />
तो आंटी बोलीं- कुछ तो बताओ?<br />
मैंने कहा- नहीं आंटी … कुछ नहीं. </p>
<p>आंटी नीचे झुककर कुछ सामान उठाने लगीं, तो मुझे उनकी चूची का काला निप्पल वाला भाग दिख गया था. फिर उनके उठते ही मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.<br />
उन्होंने कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?<br />
मैंने कहा- आंटी सॉरी … मुझे प्लीज आज ना रोको.<br />
आंटी ने मुझे धक्का दिया और कहा- मैं तेरी मम्मी को बता दूंगी.</p>
<p>उनका बदला हुआ रूप देख कर मैं बहुत ही ज्यादा डर गया और वहां से भाग आया. उस दिन पूरे दिन मेरी फटती रही कि चुदाई स्टोरी तो बनी नहीं … आंटी मम्मी को ना बता दें और मेरी घर पर ठुकाई लग जाए.</p>
<p>फिर शाम तक यूं ही चलता रहा और रात को मैं सोते हुए सोच रहा था कि आज तो बच गया, कुछ नहीं हुआ. </p>
<p>सुबह आंटी ने मुझे वापस ऊपर बुलाया.<br />
मैंने जाते ही उनसे माफी मांग ली- आंटी कल के लिए माफ कर दो.<br />
आंटी ने कहा- कोई बात नहीं.</p>
<p>आंटी आज कल से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं. आंटी ने फिर से हंस कर कहा- आज तू मेरी तरफ नहीं देख रहा है, क्या आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?<br />
मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, आज तो आप बहुत मस्त लग रही हो. कल से भी ज्यादा मस्त लग रही हो.<br />
इस पर उन्होंने कहा- तेरे अंकल को तो यह सब दिखता ही नहीं, तो यह सब किस काम का है.<br />
इस पर मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा- आपके पास मैं हूं ना आंटी.</p>
<p>मेरा सहारा पाते ही वह रोने में लग गईं.<br />
मैंने उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.<br />
आंटी बोलीं- अच्छी लगने से क्या होता है … मैं सुंदर नहीं हूं.<br />
फिर मैंने कहा- आंटी आप बहुत सुंदर हो … अपनी गली में नंबर एक पर हो.</p>
<p>आंटी ने मुझसे पूछा- क्या मैं तुझे सेक्सी लगती हूं?<br />
मैंने कहा- हां आंटी बहुत. </p>
<p>उन्होंने मेरी तरफ होंठ बढ़ाए तो मुझे ऐसा लगा कि आज शायद आंटी पहल कर रही हैं, मेरी चुदाई स्टोरी अब बन जायेगी. मैंने भी उनकी तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए. आंटी ने आंख दबा दी. फिर मैंने उनको दीवार से लगाया और उनके होंठों पर एक जोरदार से किस कर दिया.</p>
<p>पहले पहल तो उन्होंने थोड़ा बहुत विरोध किया … पर 3 या 4 मिनट बाद विरोध भी बंद कर दिया. अब मैं उनकी चूचियों को सूट के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. </p>
<p>मैंने उनका कमीज उतारने की कोशिश की, तो वो कसा होने के कारण मुझसे नहीं उतरा. आंटी की मोटी चूचियों के कारण सूट काफी टाइट था.</p>
<p>आंटी ने हंस कर बोला- फाड़ेगा क्या … इसे आराम से उतार न.<br />
मैंने झटके से फाड़ दिया, तो वो बोलीं- ले नुकसान कर दिया न मेरा. </p>
<p>फिर मैं उनकी चुचियों को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उनका रंग बहुत ही गोरा था. आंटी की दूध से भी ज्यादा सफ़ेद चुचियों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था. </p>
<p>फिर मैं धीरे-धीरे उनके पेट पर किस करने लगा. जब मैं उनकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा, तो बोलीं- कोई आ जाएगा.<br />
तो मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है और मैं नीचे से आपका दरवाजा बंद करके आया हूं.<br />
आंटी बोलीं- प्लीज यह किसी को मत बताईयो!<br />
मैंने कहा- आंटी आपकी कसम … यह मेरे तक ही रहेगा. </p>
<p>मैंने आंटी का झट से नाड़ा खोला और नीचे देखा, तो उनकी टांगों के बीच में गुफा पर थोड़े से बाल थे, जो भूरे रंग के थे. </p>
<p>उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे कपड़े भी खोल दिए. कुछ देर बाद मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा और उनकी पेंटी भी उतार दी. </p>
<p>फिर मैंने बिना सोचे समझे ही नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. गर्म आंटी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी थीं. उन्होंने जोश में आकर मेरा सर दबा दिया. वे मेरा सर अपनी चूत में पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती थीं.</p>
<p>मेरे लगातार चूत चूसने के कारण उनकी चूत पनिया गयी थी और वो कभी भी पानी छोड़ सकती थीं. मैंने फिर भी चूत को चूसना बंद नहीं किया. </p>
<p>जिन लोगों ने शादीशुदा औरतों की चूत को चाटा होगा, उन्हें पता होगा कि चूत चूसने का अपना एक अलग ही आनन्द है.</p>
<p>लगातार 7 से 8 मिनट तक चूत चुसाई से आंटी एक तेज़ अकड़न के साथ झड़ गयी थीं. उन्होंने ढेर सारे कामरस की नदी बहा दी और थोड़ी देर के लिए शांत पड़ गयी थीं.</p>
<p>फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी पैंट को खोला, तो मेरी चड्डी में मेरे लौड़े ने आतंक मचा रखा था. मेरे लंड को आंटी ने मेरी चड्डी से बाहर निकाल कर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. </p>
<p>गर्म आंटी के मुँह से ‘बाप रे बाप  … इत्ता बड़ा..’ ही निकल सका.<br />
मैंने हंस दिया- आपका ही है आंटी.</p>
<p>उन्होंने मुझसे कहा- क्या करता है? तेरा लंड इतना मोटा कैसे हो गया है? ये मेरे अन्दर जाएगा, तो मेरी पूरी चूत को छील देगा. तेरे अंकल का तो पतला सा है.<br />
यह कहते ही वो जमीन पर बैठ कर मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.</p>
<p>दोस्तो, यकीन करना … वो मेरा पहला अनुभव था. मैं मुश्किल से 2 मिनट में आंटी के मुँह में ही झड़ गया. </p>
<p>उन्होंने ‘छी ..’ की आवाज़ करते हुए मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल दिया और जल्दी से एक कपड़े से साफ करने लगीं.</p>
<p>मुझे खुद पर बहुत शर्म आयी और जब वो मेरी तरफ आईं, तो मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.<br />
उन्होंने मुझसे कहा- पागल परेशान न हो … तेरा हथियार तो तगड़ा है, पर तेरा पहली बार था, इसलिए जल्दी निकल गया. असली मज़ा तो अब आएगा. </p>
<p>फिर मैं दोबारा से आंटी की चूत चाटने लगा. मुझे आंटी की चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था. कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.<br />
आंटी मुझसे बोलीं- बेटा, अब और न तड़पा  … जल्दी से इसे मेरे अन्दर डाल कर इसकी सारी गर्मी मिटा दे.<br />
फिर उन्होंने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर सैट किया और मुझे अन्दर पेलने को कहा.</p>
<p>मैं उस पल को एहसास को कभी नहीं भूलना चाहता, जब मैंने धीरे धीरे अपने लंड को आंटी की चूत की गहराई में उतारा था; मानो मैंने लंड चूत में नहीं किसी गर्म भट्टी में झोंक दिया हो.</p>
<p>जैसे ही मैंने लंड अन्दर किया, आंटी के मुख से एक मीठी सी आह निकली, जिसमें सुकून भरा दर्द था. </p>
<p>मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. अब वो भी अपनी गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थीं.</p>
<p>कोई 5 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो एक तेज़ आह के साथ झड़ चुकी थीं, लेकिन मैंने अपनी रफ्तार कायम रखी … जिससे उनकी चूत के पानी से फच्च फच्च की एक मधुर आवाज हमारी चुदाई में चार चांद लगा रही थी.</p>
<p>लगातार 15 मिनट चोदने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी रफ्तार से उनकी चूत में ही झड़ गया. मैंने अपनी अपनी आखिरी बूंद भी आंटी की चूत में छोड़ी.</p>
<p>जब मैं उनके ऊपर से हटा, तो मैंने देखा कि मेरे लंड का पानी उनकी चूत से टपक रहा है.<br />
आंटी ने कहा- अभी तुझे बहुत कुछ सिखाना है.</p>
<p>फिर हम दोनों लेट गए. आधा घंटा आराम किया.</p>
<p>लेकिन मेरा मन नहीं भरा था, तो मैंने आंटी को टेबल पर झुकने को कहा. मैंने उनके पीछे से उनकी चूत में लंड डाला और फिर उनको चोदने लगा. कोई 7-8 मिनट तक मैं उनको यूं ही चोदता रहा. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड पर लगाया और एक जोरदार धक्का दे मारा. </p>
<p>इससे मेरा 4 इंच लंड अन्दर चला गया और आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं. वो दर्द की अधिकता से मुझसे दूर होने लगीं, पर मैंने अपना जोर उन पर बनाए रखा और उनकी चुचियों को दबाता रहा. </p>
<p>कुछ पल बाद मैंने फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया. अबकी बार मेरा सारा लंड उनकी गांड में चला गया. धकापेल गांड चुदाई होने लगी. आंटी को भी अपनी गांड में लंड का सुकून मिलने लगा था, इसलिए वो भी मजा लेने लगी थीं.</p>
<p>कोई 15 मिनट तक यूं ही मैं ताबड़तोड़ हमले करता रहा और आंटी को भी काफी मजा आने लगा था. उनकी मस्ती भरी आवाजों से मुझे यकीन हो गया था कि आंटी की गांड मजा दे रही है.</p>
<p>आंटी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आहह मर गई माँ … आहह.<br />
गर्म आंटी की इस तरह की मदभरी आवाजें निकल रही थीं. मैं उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और भी गर्म हो रही थीं. </p>
<p>इसी बीच उन्होंने अपना एक बारी पानी और छोड़ दिया था. मैं भी कुछ ही देर में निकलने वाला था. दसेक धक्के लगाने के बाद मैंने उनकी गांड में सारा पानी छोड़ दिया. </p>
<p>हम दोनों यूं ही वहां मेज पर लेट गए और किस करने लगे. दस मिनट बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया. </p>
<p>अगले 2 महीने तक मैंने उनकी चूत और गांड बहुत बार मारी. इसके बाद उन्होंने अपना घर यहां से छोड़ कर दिल्ली शिफ्ट कर लिया था. अब मेरी सिर्फ उनसे फोन पर कभी-कभी बात होती है. </p>
<p>फिलहाल मैं चूत और गांड के लिए बहुत प्यासा हूं. भाइयों मेरा तो यह कहना है कि किसी लड़की को पटाने से अच्छा है, किसी आंटी या भाभी को पटा लो, उनके दोनों छेद बहुत मजा देते हैं.</p>
<p>[email protected] </p>
<p>दोस्तो, आपको गर्म आंटी के साथ मेरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी मेल जरूर करें.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:40:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13310</guid>

					<description><![CDATA[पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई. दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, ... <a title="पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/" aria-label="Read more about पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई.<br />
<span id="more-353"></span></p>
<p>दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, इसी कारण मेरी शरीर गठीला है। मैं हरियाणा के पानीपत का रहने वाला हूं.</p>
<p>मैं अपनी पहली कहानी इस साईट पर लिख रहा हूं। मेरे लंड का साइज तो 5 इंच का है पर किसी को भी सतुंष्ट कर सकता हूं। मुझे टी.वी. पर ब्लु फिल्म चलाकर भाबी की चुदाई का सपना है, क्योंकि ऐसे करने से दोनों दिल अपनी-अपनी हसरत पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>वैसे तो मैं पिछले करीब 8 सालों से हर कहानी को पढ़ता आ रहा हूं, शायद ऐसी कोई ही ऐसी कहानी होगी जो मैंने नहीं पढ़ी हो. पर मुझे भाबी की कहानियां पढ़ने में अलग ही मजा आता है<br />
क्योंकि आप सब को तो पता है कि भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है.</p>
<p>इसलिए मैं अपने जीवन में घटित हुई असल भाबी की चुदाई कहानी को आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूंः</p>
<p>यह घटना आज से करीब 5 साल पुरानी गर्मी के दिनों की है. उन दिनों अगर कोई दो बार नहीं नहाता तो उसकी हालत मानो एक काम करते हुए मजदूर की तरह हो जाती है।</p>
<p>मेरे पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहने के लिए आया। उस परिवार में विजय कुमार, उसकी पत्नि मीहा (बदला हुआ नाम) और 4 साल का एक लड़का था। विजय और उनके परिवार को हमारा परिवार अच्छी तरह से जानता था क्योंकि भाबी हमारी दुकान पर सामान लेने आती थी और कभी-कभी भैया भी सामान लेने आते थे।</p>
<p>मीहा भाबी को आते-जाते समय मैं नमस्ते करता था। मैंने उनको अपना फोन नम्बर दे दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वे फोन करके हमारी दूकान से सामान मंगवा सकें.<br />
मीहा भाबी की आयु करीबन 24 साल, 34″ के चुच्चे और बाहर निकली हुई उसकी मस्त गांड किसी को भी पागल कर सकती थी. जबकि विजय भाई की आयु करीबन 40 के आस-पास थी।</p>
<p>उसका पति विजय एक सरकारी विभाग में नौकरी करता था। उनकी रोजाना शराब पीने की आदत थी, जिससे उनका स्वास्थ्य बिल्कुल गिर गया था। भैया सरकारी नौकरी होते हुए भी बहुत ही कम नौकरी पर जाते थे।</p>
<p>थोड़े दिन के बाद किसी अनजान नम्बर का मेरे नम्बर पर फोन आया और कहने लगी- मैं मीहा बोल रही हूं। क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?<br />
भाबी ने बाजार से कुछ दवाइयां लाने के लिए कहा। मैं भाबी के घर पर गया तो भाबी ने एक पर्ची और कुछ पैसे दिये।<br />
मैंने बाजार से दवाई और बचे हुए पैसे लाकर भाबी को दिये।<br />
भाबी ने मुझे धन्यवाद कहा और भाई साहब ने भी धन्यवाद किया।<br />
मैंने दोनों को कहा- इसमें धन्यवाद वाली ऐसी कोई बात नहीं। आप लोगों को मेरी जरूरत जब भी लगे, आप मुझे फोन कर सकते हो।</p>
<p>इस तरह से मैं उनसे मिलने-जुलने लगा और उनका मेरे ऊपर विश्वास होने लगा। कभी-कभार तो भाबी मुझसे फोन करके भी घर का सामान लाने को कहती। इसी बहाने से मैं उसके घर पर जाने लगा और कभी-कभी उसके धीरे से टच करता तो कभी अनजाने ढंग से उसके चुच्चे दबा देता। इस पर भी भाबी कभी भी बुरा नहीं मानती थी बल्कि हंस देती थी।<br />
भाबी भी अब मेरे इशारे समझने लगी थी।</p>
<p>मुझ पता था कि भैया की बीमारी के चलते भाबी की चुदाई नहीं हो पाती होगी तो उनकी जवानी प्यासी रहती होगी.<br />
एक बार मैंने उसे मिलने के लिए बोला तो कहा- मैं शादीशुदा औरत हूँ और हमें ये बात शोभा नहीं देती।<br />
पर बार-बार जिद करने पर वो मेरी बात मान गई और रात को 8 बजे घर पर आने के लिए कहा।</p>
<p>मैंने घर वालों को बहाना बनाया कि मैं एक दोस्त के साथ बाहर जा रहा हूं और रात को देरी से आऊँगा।</p>
<p>फिर उसी दिन करीब आठ बजे मैं उसके घर पहुंच गया और विजय भाई से बातचीत करने लग गया.<br />
भाबी ने बात ही बात में मुझे दूसरे मकान में जाने का इशारा किया। उनके घर से पीछे का एक मकान उन्होंने अभी खरीदा है जिसमें वो थोड़े ही दिन में शिफ्ट होने वाले थे। उसने अपने पति को कहा कि वह दूसरे मकान की सफाई करने जा रही है और बाद में नहा कर आएगी।<br />
मैं तो पहले से ही उस मकान में आ गया था।</p>
<p>थोड़ी देर के बाद भाबी आई और मुझे कहने लगी- मैं अभी नहा कर आती हूँ।<br />
भाबी जी ने जानबूझ कर बाथरूम की कुंडी नहीं लगाई।</p>
<p>मुझे बैडरूम में बैठे-बैठे बाथरूम का खुला दरवाजा दिख रहा था क्योंकि बाथरूम बैडरूम के पास ही था।</p>
<p>मैं रूम में बैठे-बैठे यही सोच रहा था कि क्यों ना भाबी के साथ बाथरूम में मजे कर लूं।<br />
मैंने फट से अपने सारे कपड़े उतारे और बाथरूम में जाते ही भाबी के मस्त चुच्चों को पीछे से दबोच लिया। मुझे बाथरूम में देखकर भाबी बहुत खुश हुई। मैं और भाबी दोनों एक-दूसरे को साबुन से नहला रहे थे।</p>
<p>नहलाते समय मैंने भाबी के एक चुच्चे को मुंह में लेकर चुसने लगा और दूसरे चुच्चे की निप्पल को हाथ से दबाने लगा।<br />
भाबी अपने चुच्चे चुसवाते हुए बोल रही थी- और जोर से मेरे राजा … ओह … आह … और जोर से … सारा … सारा निचोड़ दे दोनों को!</p>
<p>अब भाबी ने मेरे लंड को सहलाया और बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी. जैसे ही मेरे लंड को उसने अपने मुंह में लिया मैं तो सातवें आसमान की सैर करने लग गया.</p>
<p>थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने अपना सारा माल भाबी के मुख में छोड़ दिया, वो भी बड़े प्यार से मेरे माल को बूंद बूंद तक गटक गई।</p>
<p>दोबारा हम एक दूसरे को सहलाने में मस्त हो गये और मैंने दोबारा से उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कोई देरी किए मेरे लंड को चूसने लग गई।<br />
5 मिनट बाद मेरा लंड टाईट हो गया तो मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और अपना लंड भाबी की चुत में डाल दिया. चुत में बड़ी मुश्किल से मेरा लंड गया क्योंकि उसका पति बहुत ही कम भाबी की चुदाई करता था.<br />
और उसने कहा- जोर से … जोर से मेरे राजा!</p>
<p>चोदते समय भाबी के चुच्चे ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ की टहनी पर आम लटक रहे हों। मैं उसके एक चुच्चे को मुंह में डालकर चूस रहा था और दूसरे चुच्चे को दूसरे हाथ से दबा रहा था। भाबी भी सिसकारी ले रही थी- आह … आह … आह … जोर से … फाड़ दे मेरी चुत को … आह!</p>
<p>करीब दस मिनट बाद उसकी चुत में अपना सारा माल छोड़ दिया।</p>
<p>उसके बाद हम 10 मिनट तक नहाये और बैडरूम में चले गये।</p>
<p>बैडरूम में जाते ही हम एक-दूसरे की चुम्मा चाटी करने लग गये और भाबी ने कहा- मुझे करने दे जो करना है, तुम आराम से लेटा रहो।</p>
<p>फिर भाबी ने बेड की दराज से शहद की शीशी निकाली और उसे मेरे लंड पर डाल दिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई बालक लोलीपोप चूसता है।</p>
<p>मैंने भी उसके दोनों चुच्चों पर शहद डाल कर चूसा और उसे पागल बना दिया।</p>
<p>उसने मुझे 69 की पोजिशन में आने के लिए कहा। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी के साथ 69 किया। वो मेरे लंड को चूसने में मस्त थी और मैं उसकी चुत को।<br />
करीबन दस मिनट तक उसकी चुत चूसने के दौरान 2 बार अपना नमकीन पानी छोड़ दिया। मैं भी उसका सारा पानी पी गया।</p>
<p>मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत घोड़ी बन गई।<br />
मैं अपना लंड जैसे ही उसकी चुत में डालने लगा तो मेरा लंड फिसल कर उसकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लग गई- उइइइई मां … छोड़ दे मुझे … मर गई मैं तो … आह… बड़ा दर्द हो रहा है।<br />
भाबी ने कहा- मैंने तक आज तक अपनी गांड नहीं मरवाई है।<br />
मैंने उसे कहा- धीरे से करूंगा, अब दर्द नहीं होगा.</p>
<p>फिर मैंने धीरे-धीरे से उसकी गांड मारी। करीब दस मिनट बाद वो खुद मेरा साथ देने लग गई। थोड़ी देर की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।</p>
<p>इस तरह उस रात मैंने तीन बार भाबी की चुदाई की।<br />
मेरी चुदाई देखकर वो बहुत खुश हुई और कहा- तेरे भाई साहब से तो कुछ नहीं बनता। महीने में एक-दो बार ही करते हैं। करते ही साथ में उनका छुट जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ। आज तुमने मेरे जीवन में प्यार का रस डाल दिया जिससे मैं निहाल हो गई हूँ।<br />
इस तरह मैंने उसके साथ मजे लिए।</p>
<p>थोड़ी देर इकट्ठे लेटने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और चुपके से मैं उसके घर से निकल आया।</p>
<p>उसके बाद उसकी अपने पड़ोस में रहने वाली दो सहेलियों को भी मुझसे चुदवाया।</p>
<p>अधिक शराब पीने के कारण उसके पति को मौत हो चुकी है और उसने दोबारा किसी ओर से शादी कर ली है। अब कभी-कभार बाजार में आते-जाते मुझे मिलती है तो मैं गर्दन हिलाकर उसे नमस्कार करता हूं। उसके बाद मुझे उसकी गर्मी शांत करने का मौका नहीं मिला।</p>
<p>मेरी भाबी की चुदाई सेक्स स्टोरी कैसी लगी। मेरा इस साइट पर ये पहला अनुभव था, जिसे मैंने आप लोगों तक सांझा किया। अपने विचार मुझे आप मेल भी कर सकते हैं.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई</title>
		<link>https://kahani18.com/family-sex-stories/maami-ki-chudai-pyas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:36:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Family Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Mami Ki Chudai Story]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13311</guid>

					<description><![CDATA[मैं पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर रहता था. एक रात मैंने चुपके से मामा मामी की चुदाई देखी. तब से मैं मामी की चुदाई के ख्वाब देखने लगा. मैंने मामी की गर्म चूत की प्यास कैसे बुझाई? नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं इंदौर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरी ... <a title="मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/family-sex-stories/maami-ki-chudai-pyas/" aria-label="Read more about मामी की चुदाई करके प्यास बुझाई">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैं पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर रहता था. एक रात मैंने चुपके से मामा मामी की चुदाई देखी. तब से मैं मामी की चुदाई के ख्वाब देखने लगा. मैंने मामी की गर्म चूत की प्यास कैसे बुझाई?<br />
<span id="more-347"></span></p>
<p>नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं इंदौर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 22 साल है.</p>
<p>मेरे मामाजी ग्वालियर में रहते हैं. उनका परिवार बहुत ही मॉडर्न है. मामा जी के घर पर मेरे नाना-नानी, मामा-मामी और उनके दो जुड़वा बच्चे हैं जो बहुत छोटे हैं.</p>
<p>मामी जी के बारे में बताऊं तो वह बिल्कुल गदराई हुई मस्त जवान महिला है. उनके बूब्स मीडियम साइज के हैं. वह बहुत ही गोरी भी हैं देखने में। मतलब कि उन्हें देख कर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो सकता है.</p>
<p>मामी जी से मेरी बहुत ही अच्छी दोस्ती है और मैं उनसे अपनी हर बात शेयर करता हूं लेकिन उनसे मैंने कभी भी सेक्स वगैरह के बारे में बात नहीं की थी। मैंने कभी भी मामी जी को गलत नजरों से नहीं देखा था। </p>
<p>अब मैं असली कहानी पर आता हूं. यह कहानी तब की है जब मैं 20 साल का था और मेरे कॉलेज का फर्स्ट ईयर था. जब मैं वहां पर पढ़ाई करने के लिए गया तो मेरा बहुत ही अच्छे तरीके से स्वागत किया गया और मेरे लिये स्पेशल खाना बनाया गया. रात का खाना खाने के बाद हम लोगों की सोने की तैयारी हो गई.</p>
<p>फ्लैट में दो ही कमरे थे। एक में नाना-नानी सोते हैं और एक में मामा जी, मामी जी और उनके बच्चे सोते हैं.<br />
मैं ड्राइंग रूम में टीवी देखने लगा और वहीं सोफे पर सो गया.</p>
<p>कुछ समय बाद मेरी आंख खुली और मैं बाथरूम में गया तो मुझे कुछ आवाजें आईं. मैंने मामी जी के कमरे के पास जाकर देखा तो देखता ही रह गया. </p>
<p>मामा जी बिल्कुल नंगे लेटे हुए थे। मगर उनका लंड बहुत ही छोटा था. मामी जी कपड़े उतार रही थी. मामी जी केवल ब्रा पेंटी में थी और उनकी गोरी गोरी मांसल जांघें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को रगड़ने लगा.</p>
<p>उनके कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था जिसकी रोशनी में बहुत ही कम दिख रहा था और मैं गेट की सांस(दरार) में से यह सब देख रहा था. मामी जी लेट गई और मामा जी मिशनरी पोजिशन में आकर उन्हें चोदने लगे और 7-8 धक्कों के बाद ही मामा जी का निकल गया और वह चुपचाप लेट गए. </p>
<p>मामा-मामी की चुदाई देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मेरे अन्दर भी सेक्स जाग गया था. मेरा लंड बिल्कुल तन गया था. मैं अपने लंड को वहीं पर खड़ा होकर मसलने लगा.</p>
<p>मैं अभी भी वहीं पर देख रहा था और मैंने महसूस किया कि मामी जी के चेहरे पर हल्की सी मायूसी सी दिखाई दे रही थी. वो मामा जी के द्वारा किये गये सेक्स से खुश नहीं लग रही थी. मुझे भी ऐसा लग रहा था कि मामा जी का बहुत जल्दी निकल गया. इसी वजह से मामी की प्यास अधूरी रह गई होगी.</p>
<p>कुछ देर तक मामा जी लेटे रहे फिर उठ कर एक तरफ होकर चादर तान ली और सो गये. मगर मामी की नंगी चूत अभी भी मुझे दिखाई दे रही थी. मैं वहां से हटना नहीं चाह रहा था. मैंने पहली बार मामी की नंगी चूत को देखा था और बार-बार उसको देख कर मैं अपने लंड को मसल कर मजा लेने में लगा हुआ था.</p>
<p>उसके बाद मामी जी ने अपनी चूत में अपने हाथ से ही उंगली करनी शुरू कर दी. कुछ ही देर में मामी जी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>इधर मैं मामी जी की चूत को देख कर अपना लंड मसल रहा था और वहां मामी जी अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी. वो फिर जोर जोर से उंगली करने लगी और उनके मुंह में से तेज तेज सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>उसके बाद मैं वहां से आ गया. मैं चुपचाप जाकर सोफे पर लेट गया. मगर लेटे हुए भी मुझे नींद नहीं आ रहा थी. उस रात को मामी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया. मैं काफी देर तक मामी की चूत के बारे में सोच कर मुट्ठ मारता रहा. जब तक मेरे लंड से वीर्य न निकल गया मुझे शांति नहीं मिली. अपना वीर्य निकाल कर फिर मैं शांत हो गया और मुझे नींद आ गई. </p>
<p>अगली सुबह को जब मेरी आंख खुली तो मामी मुझे चाय के लिए जगा रही थी. मैंने आंखें मलते हुए उनको देखा तो वो चाय का कप नीचे रख रही थी. मैंने उनके चूचों को देख लिया. मुझे जब उनके चूचों की झलक मिली तो मेरे लंड में हलचल सी होने लगी. उनकी वक्षरेखा देख कर मेरा लंड एकदम से अंदर ही अंदर तनना शुरू हो गया.</p>
<p>मैं उनको ताड़ रहा था और मामी ने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया. मामी ने मुझसे पूछा- ऐसे क्यों देख रहा है?<br />
मैंने शर्म के मारे नजर नीचे कर ली.<br />
फिर मामी ने कहा- चाय पी लो, ये ठंडी हो रही है.</p>
<p>उस दिन मेरा मन कर रहा था कि मामी के चूचे को दबा ही दूं लेकिन अभी मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. मामी वापस चली गई.</p>
<p>उसके बाद मैं कुछ दिन के लिए अपने घर पर चला गया. वहां पर जाकर भी मैं मामी के बारे में ही सोचता रहा. उनके चूचे मुझे रात को सोने नहीं देते थे. मैं रोज उनके बारे में सोच कर मुट्ठ मार लिया करता था. </p>
<p>कुछ दिन बीत जाने के बाद नानी ने मेरी मां के पास फोन किया और मेरे आने के बारे में पूछा क्योंकि मामा जी कुछ दिन के बाहर जा रहे थे और नानी ने मां को कह दिया कि वो मुझे यहां मामा के घर जल्दी ही भेज दें क्योंकि वहां पर घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं था. मां ने मेरे कपड़े पैक कर दिये और मैं वापस नानी के यहां आने के लिए तैयार हो गया. </p>
<p>मैं मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि अब मुझे मामी को चोदने का मन कर रहा था और मैं सोच रहा था कि अब ये मौका भी अच्छा हाथ लगा है क्योंकि मामा के रहते हुए तो मैं मामी से इस तरह की बात नहीं कर पाता. अब जो कि मामा बाहर जा रहे हैं तो मामी की चूत चुदाई का रास्ता भी मेरे लिए आसान हो जायेगा. मैं किसी ने किसी बहाने से मामी से उनके मन की इच्छा जान ही लूंगा. </p>
<p>मेरे नानी के यहां आने पर मामा जी तैयार हो गए और मैं उन्हें ट्रेन में बिठा कर वापस आ गया. शाम हुई तो खाना वगैरह खा कर फिर सोने की तैयारी होने लगी. मामी जी ना बोला कि रोहित तुम हमारे साथ ही सो जाओ, आज तो मामा जी भी नहीं है.</p>
<p>मैं तो जैसे मामी के मुंह से यही सुनना चाह रहा था. मैं झट से तैयार हो गया उनके साथ सोने के लिए. हम लोग मामी जी के साथ ही सोने लगे.</p>
<p>मामी एक साइड सो रही थी, मैं एक साइड में था और बीच में दोनों बच्चे सो रहे थे. अब मैं मामी जी के सोने का इंतजार कर रहा था.</p>
<p>रात को करीब 12:00 बजे जब मुझे विश्वास हो गया कि सब सो गए हैं तब मैं जागा और मामी जी के बगल में जाकर लेट गया और उनकी जांघ पर हाथ रख कर उनकी मांसल जाँघों को छूने लगा.</p>
<p>छूते ही मेरा लंड जैसे फटने को हो गया. मैं धीरे-धीरे जांघों पर हाथ फेरने लगा. मैं उनकी मैक्सी के ऊपर से ही हाथ फेरने में लगा था. मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा. मामी ने शायद पैंटी नहीं पहनी हुई थी. उनकी चूत की झांट मेरे हाथ पर महसूस हो रही थी. यह अहसास पाकर मैं तो जैसे पागल ही हो गया. </p>
<p>मैंने धीरे-धीरे मैक्सी को ऊपर उठाना शुरू किया और कमर तक मैक्सी ऊपर कर दी. अब मैं भूल चुका था कि अगर वह जाग गई तो कितना बड़ा कांड हो जाएगा. मैं तो हवस के चक्कर में पागल ही हो गया था.</p>
<p>मैंने अपना लौड़ा निकाला और उनकी जांघों पर फेरने लगा.</p>
<p>तभी थोड़ी सी हलचल हुई और मामी मेरी तरफ पीठ करके लेट गई. एक बार तो मैं घबरा गया … लेकिन मामी जगी नहीं थी शायद … इसलिए मैंने दोबारा से कोशिश करने के लिए सोचा.<br />
मैं थोड़ा रुका और फिर अपना लौड़ा उनकी गांड पर रगड़ने लगा. मेरा मोटा और सख्त लंड उनको अपनी गांड पर शायद महसूस हुआ तो वो एकदम से उठ गई. </p>
<p>मैं भी झट से नीचे लेट गया. उसके बाद मैंने आंखें बंद कर लीं. मुझे डर लग रहा था. पता नहीं मामी ने क्या देखा और क्या नहीं. मगर जब मैंने दोबारा से आंखें खोलीं तो वो अपनी मैक्सी को अंधेरे में ही नीचे करके वापस लेट चुकी थी. मगर मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैं सोच रहा था कि शायद ये मौका फिर नहीं मिलेगा. </p>
<p>कुछ समय बाद मैंने उनके मम्मों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उन्हें दबाने लगा.<br />
मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था तो मैंने मैक्सी ऊपर उठाई और जल्दी से लौड़ा निकाल कर उनकी चूत के छेद पर रख दिया. तभी मामी जग गई और मुझे देख कर एकदम सकपका गई और धीमी आवाज में चिल्लाते हुए गुस्से से बोली- यह क्या कर रहे हो रोहित? तुम्हें समझ नहीं आता? मैं तुम्हारी मामी हूं. यह सब जो तुम कर रहे हो, यह गलत है.</p>
<p>मामी का गुस्सा देख कर मेरी गांड फट गई और मैंने उनको सॉरी बोला और उठ कर कमरे से बाहर चला गया और सोफे पर लेट गया और वहीं लेटे लेटे सो गया. मुझे डर लग रहा था कि कहीं वह शिकायत ना कर दे.</p>
<p>फिर सुबह वह चाय लेकर आई और मुझे जगाया. मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं. मैं नजर नीचे करके चाय पीता रहा और वह मेरे सामने ही टेबल साफ कर रही थी तो उनके मम्मों के दर्शन होने लगे.</p>
<p>पता नहीं क्यों अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था. जब भी उनको देखता था तो खुद को रोकना मुश्किल हो जाता था. उनके चूचों को देखते ही उस वक्त भी मेरा लौड़ा तो जैसे फटने को हो रहा था. मैं चाय बीच में ही रख कर बाथरूम की तरफ भागा.</p>
<p>मुझे एकदम से ऐसे अधूरी चाय छोड़ कर जाते हुए देख कर मामी ने पूछ लिया कि कहां जा रहे हो. मैंने बाथरूम में घुस कर मामी को अंदर से ही आवाज लगाई कि कुछ नहीं मामी, बस अभी आ रहा हूं वापस.</p>
<p>अंदर जाने के बाद मैं बाथरूम का गेट लगाना भूल गया और लंड की मुट्ठ मारने लगा. मेरी आंखें बंद थीं और मैं तेजी से अपने लंड को हिला रहा था. पता नहीं कब मामी आ गई और उन्होंने मुझे देख लिया.</p>
<p>जब मुझे मामी के आने की आवाज सुनाई दी तो मैंने आंखें खोली ही थीं लेकिन उस वक्त मेरे हाथ में मेरा लंड था और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकल रही थी. मामी ने मुझे इसी हालत में देख लिया.</p>
<p>उन्होंने हैरानी से मेरे लंड की तरफ देखा और फिर मेरे चेहरे की तरफ. फिर वो चली गईं.</p>
<p>मैंने सोचा कि मेरी किस्मत ही खराब है. मामी ने मेरा लंड देख कर भी कोई रिएक्शन नहीं दिया. अगर आज मामी गर्म हो जाती तो आज तो बाथरूम में ही मामी की चूत की चुदाई कर देनी थी मैंने। </p>
<p>मामी गेट बंद करके वापस चली गई रसोई में और मैं वापस आकर सोफे पर बैठ गया.<br />
फिर हम लोगों ने ज्यादा कुछ बात नहीं की.</p>
<p>शाम को खाने के वक्त मामी ने सुबह वाली बात का जिक्र करते हुए कहा- सुबह के लिए सॉरी रोहित. मुझे ऐसे नहीं आना चाहिए था.<br />
मैंने भी मामी को कह दिया- कोई बात नहीं मामी. मैं तो खुद आपसे कल रात के लिए माफी मांगने वाला था. मगर कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी.</p>
<p>मगर फिर मामी ने जो बोला … वो सुन कर मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ.<br />
मामी ने कहा- कल की बात तो कल ही खत्म हो गई. अगर तुम्हारा मन करे तो तुम आज भी मेरे साथ ही सो सकते हो.</p>
<p>यह सुनते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने जल्दी से खाना खाया और अंदर जाकर लेट गया. मैं बस सोने की एक्टिंग कर रहा था. मैं तो असल में मामी के आने का इंतजार कर रहा था. मेरा लंड पहले से ही मामी की चूत के बारे में सोच कर तना हुआ था. मैंने अपने लंड को अंडरवियर में दबाया हुआ था ताकि मामी को मेरा तना हुआ लंड दिखाई न दे.  </p>
<p>तभी मामी जी आई कमरे में और लाइट जलाई. तब तक बच्चे सो चुके थे और उन्हें लगा शायद मैं भी सो चुका हूं. मैं धीरे से आंख खोल कर देखा तो मामी अपने कपड़े उतार रही थी. वो अपने कपड़े उतार कर ब्रा और पैंटी में ही चादर के अंदर आ गई. उन्होंने लाइट बंद कर दी थी और कमरे में अंधेरा हो गया था. </p>
<p>मैं अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगा. मैं जानता था कि अंधेरे में मामी को कुछ दिखाई नहीं पड़ेगा. वैसे भी मुझसे तो रहा नहीं जा रहा था. मामी और मेरे बीच में पिछली रात की तरह बच्चे सो रहे थे. </p>
<p>एक दो घंटे के बाद भी मुझे नींद नहीं आई और मैं कल रात की तरह ही उठ कर मामी के बगल में जाकर लेट गया. मैंने धीरे से मामी के तन से चादर को हटाया और उनके बदन पर हाथ फिराने लगा. आज मामी कोई हलचल नहीं कर रही थी. मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा. मैंने मामी के चूचों को ब्रा के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया. मामी ने तब भी कोई हरकत नहीं की. </p>
<p>अब मेरी हिम्मत भी बढ़ गई थी. मैंने मामी की पैंटी को मसला और उनकी चूत को छूते ही मैं बेकाबू हो गया. मैंने मामी की पैंटी को खींच कर नीचे करने की कोशिश की तो मामी ने अपनी गांड को हल्के से उठा लिया और मैं समझ गया कि मामी की तरफ से भी लाइन क्लियर है.</p>
<p>बस फिर क्या था … मैं मामी पर टूट पड़ा, उनके चूचों को चूसने काटने लगा और मामी मेरे बालों में हाथ फिराने लगी. उनके गुदाज बदन को छूकर मैं बेकाबू हो गया था और मैंने झट से अपने लंड को निकाल कर मामी की चूत में लगा दिया.</p>
<p>लंड को चूत में लगा कर मैंने एक झटका मारा और मेरा लंड मामी की चूत में घुस गया. मामी ने जरा सी भी हरकत नहीं की. मेरा लंड मामी की चूत में मैंने पूरा उतार दिया. फिर मैं धीरे-धीरे उनकी चूत में धक्के मारने लगा. मैं भी कोई आवाज नहीं कर रहा था क्योंकि साथ में ही बच्चे भी सो रहे थे.</p>
<p>मैंने पांच मिनट तक मामी की चुदाई की और फिर मेरा वीर्य निकल गया. फिर मामी ने मेरे कान के पास मुंह लाकर मुझे वापस जाने के लिए कह दिया. </p>
<p>मगर मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी. इतने दिनों के बाद मुझे मामी की चूत मिली थी. मैंने सुबह के करीब तीन बजे फिर से मामी को जगाया और हम दोनों चुपके से उठ कर बाथरूम में चले गये.</p>
<p>वहां जाते ही हमने धीरे से दरवाजा बंद किया और एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. मैंने मामी के पूरे बदन को चूसा और चाटा और फिर उनकी चूत में उंगली दे दी. मामी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और फिर मैंने उनको दीवार के सहारे लगा कर उनकी चूत में लंड को पेल दिया.</p>
<p>मैं मामी को वहीं दीवार के सहारे लगा कर चोदने लगा. मैंने दस मिनट तक मामी की चुदाई की और फिर मैं दूसरी बार मामी की चूत में झड़ गया. फिर हम दोनों चुपके से आकर लेट गये.</p>
<p>सुबह जब मामी चाय देने आई तो वह मुस्करा रही थी. जब वो मेरे करीब आई तो मैंने मामी के चूचों को नजर बचाकर छू लिया और मामी ने मेरा हाथ झटक दिया. मामी को शायद डर था कि घर में कोई देख लेगा. उसके बाद मैंने मामी की चूत कई बार चोदी. </p>
<p>अब मामी भी खुश रहने लगी थी. हमें जब भी मौका मिलता था हम चुदाई कर लेते थे.</p>
<p>फिर जब मामा वापस आ गये तो हमें मौका मिलना बंद हो गया. मगर हम दोनों ही इस बात के इंतजार में रहते थे कि कब हमें चुदाई करने का मौका मिलेगा. मामी मेरा लंड लेकर खुश रहने लगी थी और मैं भी मामी की मामी की चुदाई करके मजे लेता रहा.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:34:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13314</guid>

					<description><![CDATA[इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग खेल वही भूमिका नयी-6 में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था. अब आगे: फिर खाने पीने के साथ नाच ... <a title="ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/" aria-label="Read more about ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-6<br />
में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था.<br />
अब आगे:</p>
<p>फिर खाने पीने के साथ नाच गाना होने लगा. सभी धीरे धीरे कामुक महसूस करने लगे और फिर तय हुआ कि जिसे संभोग की इच्छा हो रही हो, वो किसी के साथ भी संभोग कर सकता है.</p>
<p>राजशेखर ने मेरे साथ कभी संभोग नहीं किया था, तो उसने सबसे पहले मुझसे ही पूछा. मैं शुरू में तो थोड़ा शरमाई, पर बाकी औरतों के कहने पर मैंने हां बोल दिया.</p>
<p>पर तभी कांतिलाल बोल पड़ा- ऐसा नहीं होगा … हर कोई हर किसी के साथ मजा करेगा.</p>
<p>तो ये तय हुआ कि हर कोई थोड़ी थोड़ी देर संभोग करेगा, फिर साथियों की बदली होगी. इसलिए सबके नाम की पर्ची बनाई गई और एक कटोरे में सभी मर्दों के नाम की दो दो पर्ची बनाई गईं, क्योंकि मर्द चार थे और औरतें 5 थीं. ऐसा इसलिए भी किया गया ताकि पहले चार महिलाओं के हाथ में जो पर्ची आएगी, वो उन मर्दों के साथ पहले संभोग करेंगी. फिर जब मैं पर्ची उठाऊँगी, तो उन्हीं चारों मर्दों में से किसी एक के साथ संभोग करूँगी.</p>
<p>मतलब जिस मर्द के नाम की पर्ची मेरे हाथ में होगी, वो मेरे और उन चारों औरतों में से किसी एक के साथ संभोग करेगा. </p>
<p>तो इस प्रकार सबने पर्ची उठायी और फिर जोड़ी बन गई. </p>
<p>रमा और कमलनाथ,<br />
रवि और निर्मला,<br />
राजशेखर और कविता …<br />
कांतिलाल और राजेश्वरी की जोड़ी.</p>
<p>अंत में मैंने पर्ची खोली, तो उसमें फिर से रवि का नाम निकला.</p>
<p>सबने एक आखिरी पैग उठाया और फिर अपने अपने जोड़ीदार के साथ हो गए. सभी मर्दों ने मिलकर सोफे वहां से हटा दिए और जमीन पर काफी जगह बना ली. </p>
<p>रवि निर्मला और मेरा हाथ पकड़ नीचे जमीन पर बैठ गया. रवि मेरे और निर्मला के बीच बैठ गया. पहले तो वो मेरे स्तनों को दबाने लगा और फिर मेरे होंठों को चूमने लगा. थोड़ी देर मुझे चूमने के बाद वो निर्मला के स्तन दबाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. निर्मला भी उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी. </p>
<p>उधर मैंने देखा राजशेखर ने थोड़ी देर कविता को चूमने के बाद खड़े खड़े में ही उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैंटी उतार दी और खुद घुटनों के बल खड़े होकर उसकी टांगें फैला उसकी योनि को चूमने लगा.</p>
<p>कविता जवान थी उसकी योनि किसी कुंवारी लड़की के जैसे थी. एकदम गोरी, योनि की फांकें चिपकी हुईं और किनारे फूले हुए … मानो उसने कभी संभोग किया ही नहीं था.</p>
<p>मेरे एक तरफ रमा कमलनाथ के साथ व्यस्त हो गई. दोनों काफी उत्तेजक तरीके से एक दूसरे के बदन को टटोलते हुए होंठों से होंठ मिला कर एक दूसरे का रस पी रहे थे.</p>
<p>फिर सामने की ओर राजेश्वरी को कांतिलाल ने पूरी नंगी कर दिया था और उसे चूम रहा था. राजेश्वरी का बदन बहुत सुंदर था. उसे देखकर लग रहा था कि वो भी रमा की तरह ही बहुत ध्यान देती होगी.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद निर्मला उठी और अपनी पैंटी निकाल कर स्कर्ट ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दीं और अपनी योनि रवि के मुँह में लगा दी. रवि ने निर्मला के विशाल चूतड़ों को दोनों हाथों से थपथपाया और अपना मुँह निर्मला की योनि से चिपका कर उसे चाटने लगा. </p>
<p>ऐसा कामुक माहौल देख कर मेरे भीतर चिंगारी सी फूटने लगी. रवि ने कुछ देर के बाद मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग के ऊपर रखा और मुझे उसे हिलाने का संकेत दिया.</p>
<p>मैंने उसके जांघिये को सरकाया और उसके लिंग को बाहर निकाल लिया. उसका लिंग उत्तेजित था, पर अभी उसमें संभोग करने लायक कड़कपन नहीं था. मैंने उसे हिलाना शुरू किया. कुछ देर के बाद वो एकदम कड़क हो गया. </p>
<p>इधर राजशेखर ने अपनी अवस्था बदल ली थी और अब कविता उसका लिंग चूस रही थी. उधर कमलनाथ जमीन पे लेट गया था और रमा उसके ऊपर उल्टी दिशा में चढ़ी हुई थी. एक तरफ कमलनाथ उसकी योनि चाट रहा था और दूसरी तरफ रमा उसका लिंग चूस रही थी. </p>
<p>कांतिलाल ने तो एक तरफ राजेश्वरी को परेशान करके रख दिया था, वो कभी राजेश्वरी को सीधा लिटा कर योनि चूसता, तो कभी कुतिया की तरह झुका कर पीछे से … तो कभी उसके स्तनों को मसलता. इससे उस कमरे में राजेश्वरी की कराह गूंज रही थीं.</p>
<p>कुछ देर के बाद कांतिलाल ने राजेश्वरी को घुटनों के बल खड़ा कर दिया और खुद खड़ा होकर उसका सिर पकड़ कर अपना लिंग जांघिये से बाहर निकाला और उसके मुँह में ठूंस दिया. फिर तेज़ी से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसके मुँह में लिंग अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>देखने में उसकी ये हरकत बहुत क्रूरतापूर्ण थी, मगर राजेश्वरी को आनन्द आ रहा होगा, तभी वो उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद निर्मला कराहते हुए झटके खाने लगी. मैं समझ गई कि वो झड़ गई. फिर क्या था उसने अपनी योनि को रवि के मुँह से हटाया और नीचे बैठ कर उसका लिंग गप से मुँह में भर लिया. </p>
<p>इतनी उत्तेजक महिला मैंने कभी नहीं देखी थी. निर्मला तो कामोत्तेजना से भरी दिख रही थी. निर्मला जब उसका लिंग चूसने में व्यस्त हो गई, तो रवि ने मुझे हाथों से पकड़ कर उठने का संकेत दिया और इशारे से मुझे खड़े होकर अपनी योनि उसके मुँह में देने को कहा.</p>
<p>मेरे भीतर भी तो अब वासना की चिंगारी भड़क चुकी थी और जब चमड़ी की भूख हो, तो कोई भी इंसान निर्लज्ज हो ही जाता है.</p>
<p>मैं भी निर्लज्जता से खड़ी हो गई और स्कर्ट का हुक खोल कर मैंने अपने मांसल चूतड़ों को आज़ाद कर दिया. मैंने अपनी दोनों मोटी मोटी जांघों को फैलाया और टांगें रवि के अगल-बगल कर अपनी योनि को उसके मुँह के सामने अड़ा दिया.</p>
<p>उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को सहलाया. फिर पैंटी पर मेरी योनि के उभार को चूमने लगा. उसके चूमने से मैं और उत्तेजित होने लगी और मैंने एक हाथ से उसके सिर को सहारा दे दिया. मैंने दूसरे हाथ से अपनी पैंटी एक किनारे कर उसे अपनी योनि के स्पष्ट स्पर्श दे दिया. मेरी फूली गद्देदार योनि की पंखुड़ियों को पाते ही उसने उन्हें बारी बारी चाटा और फिर अपनी जीभ योनि की दरार में ऊपर नीचे करके मेरी योनि का स्वाद लेने लगा.</p>
<p>उसके इस तरह के व्यवहार से मैं और उत्तेजित होती चली गई और अपनी कमर उसकी तरफ धकेलते हुए अपनी योनि का दबाव उसके होंठों पर बढ़ाती चली गई.</p>
<p>मेरे अगल बगल भी बाकी के लोग धीरे धीरे एक दूसरे के अंगों को सहलाते, चूसते, चाटते हुए एक दूसरे को संभोग के लिए तैयार करने लगे थे.</p>
<p>ये किसी विदेशी अंग्रेज़ी फ़िल्म से कम दृश्य नहीं था, जिसमें लोग सामूहिक रूप से संभोग क्रिया में लिप्त थे.</p>
<p>रवि की जुबान में तो जैसे जादू था, जिस प्रकार वो अपनी जुबान से मेरी योनि के साथ खिलवाड़ कर रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि ये पल कभी न खत्म हो. उसने मेरे भीतर एक अजीब सी गुदगुदाहट के साथ कामुकता भर दी थी. इसी वजह से मेरे अगल बगल क्या हो रहा, मुझे उसकी न कोई चिंता थी, न कुछ नजर आ रहा था.</p>
<p>मेरी व्याकुलता इतनी बढ़ गई थी कि मैं रह रह के झटके खा रही थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे पानी का फव्वारा उसके मुँह में ही छोड़ दूंगी.</p>
<p>मैं संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और पल भर में मेरी अपेक्षा पूरी हो गई. निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर थपकी मारी और मुझे रवि के लिंग के ऊपर बैठने बोलने लगी. </p>
<p>निर्मला- सारिका पहले तुम सवारी करो.</p>
<p>उसकी बातें सुन रवि ने मुझे खुद से अलग किया और मेरा हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींचने लगा. उसने अपने लिंग को पकड़ कर हिलाते हुए मुझे बैठने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं उसके कंधों पर दोनों हाथ रखते हुए अपनी टांगें उसके अगल बगल फैला कर उसके लिंग के ऊपर बैठ गई. उसका लिंग ठीक मेरी योनि द्वार पर जाकर अड़ गई. रवि ने अपने लिंग को सही दिशा दिखाते हुए लिंग का सुपारा मेरी योनि द्वार में प्रवेश करा दिया. साथ ही उसने मेरे दोनों चूतड़ों को पकड़ लिया. उसका कठोर लिंग मुझे बहुत गर्म महसूस हो रहा था. </p>
<p>फिर मैंने धीरे धीरे अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करके लिंग को योनि में प्रवेश कराना शुरू किया. कोई 3-4 बार ऊपर नीचे होते ही उसका सम्पूर्ण मोटा और कठोर लिंग मेरी मुलायम योनि की दीवारों को भेदता हुआ मेरे गर्भाशय से टकराने लगा. उसके लिंग से चिकास (precum) और मेरी योनि के गीलापन से आसानी से लिंग गुदगुदाहट करता हुआ भीतर चला गया. एक संतुष्टि की कामना जगाते हुए, आनन्द की शुरूआत हुई, तो मैंने पूरी जिम्मेदारी और कामुकता से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करते हुए संभोग की प्रक्रिया शुरू कर दी.</p>
<p>जब उसका लिंग पूरी तरह से जब मेरी योनि में हिल-मिल गया, तो मैंने अपनी नजरें रवि से मिलाईं. उसकी आंखें मस्ती से भरी हुई थीं और चेहरे पर कामुकता भरी मुस्कान थी. मैं जैसे जैसे धक्के देते जा रही थी, वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे. मैंने उसके गले में हाथ डाल कर थोड़ी और गहराई में जाने लायक धक्के देने शुरू किए, तो वो अपने होंठों को होंठों से भींचता हुआ मुझे चूमने को लपक पड़ा.</p>
<p>उसने अपने दाएं हाथ को मेरे चूतड़ से अलग किया और पीछे से मेरे बालों को पकड़ मेरे सिर को खींच कर मेरे होंठों से हाथ लगा कर चूसने और चूमने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के भीतर अब तेज धार धार तलवार सा महसूस होने लगा था, जिससे मैं और अधिक ताकत और मस्ती में अपनी कमर हिला हिला उसके लिंग को अपनी योनि से मलने लगी थी.</p>
<p>रवि के ऐसे उत्तेजक भाव ने मेरे भीतर वासना की एक नई ऊर्जा भर दी थी और मैं पूरे आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी थी. पीछे से शायद निर्मला रवि के अण्डकोषों से खेल रही थी या उनको सहला रही थी, इसलिए मुझे उसके हाथों का स्पर्श कभी कभी मेरे चूतड़ों पर महसूस हो रहा था. मैं अपनी ही धुन में धक्के मारे जाने से मस्ती में और अधिक खोई जा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट हो गए थे और मेरी सम्भोग की खुमारी सातवें आसमान को छूने को थी. तभी निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर 2-3 थपकी मारते हुए कहा- बस भी करो सारिका … अब मेरी बारी है.</p>
<p>उसकी बातें मेरे कानों में पड़ते ही मेरी रफ्तार और मस्ती दोनों पर रोक लग गई. मुझे हल्का निराशा सी महसूस हुई. लेकिन मैं उन सबकी तरह नहीं थी, सो मैंने मुस्कुराते हुए शर्मीले अंदाज़ में उसके कथन का पालन किया और मैं रवि की गोद से उतर गई. </p>
<p>मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी, इस वजह से जब रवि का लिंग मेरी योनि से बाहर निकल रहा था, तो मेरी अंतरात्मा जैसे कहने लगी कि मत हटो, कुछ पल और रुक जाओ. मुझे ये पल ऐसा लगा, जैसे कोई प्रिय वस्तु मुझसे छीनी जा रही है. पर मुझे न चाहते हुए भी रवि से अलग होना पड़ा. </p>
<p>अब मैं बगल में बैठ कर खुद ही अपनी योनि को हाथ से सहलाने लगी. मेरे अलग होते ही रवि ने निर्मला को धकेलते हुए उसे नीचे जमीन पर गिरा कर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें फैला उसके मोटी मांसल जांघों के बीच झुक गया.</p>
<p>रवि ने झुक कर पहले तो निर्मला के थुल थुले स्तनों को दबोच कर चूसना शुरू कर दिया. वहीं निर्मला ने भी रवि के लिंग को एक हाथ से पकड़ हिलाना शुरू कर दिया. उनका ये खेल बस कुछ पल चला और रवि अपने तनतनाये हुए लिंग को निर्मला की योनि में घुसाने को पुनः तैयार हो गया. निर्मला ने भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे दाएं बांए करके अपनी योनि की स्थिति उसके लिए बना ली. </p>
<p>रवि ने लिंग का सुपारा खोल कर हाथ से पकड़ा और निर्मला की योनि की फांकों पर कुछ देर तक ऊपर से नीचे तक रगड़ा. फिर लाल सुपारा उसकी योनि में फंसा कर हल्के हल्के धकेलना शुरू कर दिया. </p>
<p>इस वक्त निर्मला के चेहरे पर दर्द के भाव दिखने लगे, जब रवि अपना लिंग उसकी योनि में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था. लिंग लगभग आधा चला गया था, फिर भी निर्मला असहज महसूस कर रही थी.</p>
<p>कुछ पल और प्रयास करने के पश्चात निर्मला ने रवि के कमर को पकड़ कर उसे पीछे को धकेला और खुद से अलग कर लिया. </p>
<p>जब रवि का लिंग निर्मला की योनि से बाहर आ गया, तब निर्मला ने अपनी एक हाथ में थूक लिया और अपनी योनि के ऊपर मल कर लिंग वापस अपनी योनि में सुपारे तक घुसाते हुए रवि को आगे बढ़ने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं समझ गई थी कि हम जिस उम्र से गुजर रहे हैं, उस उम्र में योनि में नमी जल्दी नहीं आती है. निर्मला की योनि भीतर से तो गीली थी, मगर ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां शायद सूखी थीं, इसी वजह से उसे तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>रवि जब अपना लिंग धकेल रहा था, तो उसकी योनि में ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां भीतर की ओर खिंची जा रही थीं, जिसकी वजह से निर्मला को तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>खैर … जब रवि ने संकेत समझा … तो धीरे धीरे करके 3-4 बार में अपना लिंग पूरी तरह से निर्मला की योनि में प्रवेश करा दिया.</p>
<p>फिर दोनों ने एक दूसरे को सजह तरीके से पकड़ कर धक्कों की गति को बढ़ाने लगे. कुछ ही पलों में दोनों एक दूसरे को सुख प्रदान करने में रम से गए. अब निर्मला खुले दिल से रवि का साथ दे रही थी और दोनों ही तेज धक्कों के साथ मादक सिसकियां भरने लगे थे.</p>
<p>दूसरी तरफ बाकी लोग भी संभोग में लिप्त हो चुके थे. एक तरफ कमलनाथ के ऊपर रमा सवारी कर रही थी, तो दूसरी तरफ कांतिलाल राजेश्वरी को घोड़ी बना कर पीछे से धक्के मार रहा था. उधर राजशेखर कविता की एक टांग उठा सोफे पर टिका कर सामने से खड़े खड़े ही धक्के दे रहा था.</p>
<p>सबकी कामुक अवस्था देख मेरी उत्तेजना जरा भी कम नहीं हो रही थी, जबकि मैं फिलहाल अकेली थी.</p>
<p>उन सबको देख कर और कमरे में गूंजती सिसकारियां मेरे हाथों को स्वयं मेरी योनि तक ले जा रहे थे.</p>
<p>कुछ देर के बाद कविता ने असहजता दिखानी शुरू कर दी, क्योंकि उस अवस्था में संभोग कर पाना सबके लिए सरल नहीं होता है.</p>
<p>मैं जहां तक अपने अनुभव से जानती हूं कि इस तरह के आसन में मर्दों को ज्यादा आनन्द आता है … क्योंकि लिंग का ऊपरी हिस्सा योनि के अन्दर सीधे जाता है, जबकि योनि का रास्ता पेट की तरफ होता है. इस वजह से लिंग के ऊपरी हिस्से में योनि कठोर तरीके से रगड़ खाती है, जिससे मर्दों को अधिक आनन्द आता है. वहीं स्त्रियों को आनन्द तो आता है, मगर अधिक समय के घर्षण से पीड़ा होनी शुरू हो जाती है. हालांकि अति उत्तेजना की अवस्था में महिलाएं ये पीड़ा भी झेल लेती हैं.</p>
<p>कविता के आग्रह पर राजशेखर ने कविता की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल लिया और उसे सोफे पर थोड़ा आराम करने दिया. राजशेखर वहीं खड़े खड़े अपने लिंग को हाथ से सहला रहा था कि उसकी नजर मुझ पर पड़ी.</p>
<p>मुझे खाली देख कर वो मुस्कुराते हुए मेरे पास चला आया. उसे मुझसे किसी तरह के विरोध की आशा नहीं थी. क्योंकि ये पहले से तय था. मैं भी इस बात से परिचित थी, सो मैंने भी किसी तरह का विरोध भाव नहीं दिखाया. जैसा कि मैं खुद ही गरम थी, तो मन में भी किसी तरह के विरोध की बात भी नहीं आई.</p>
<p>वो सीधा मेरे पास आकर मेरे सामने बैठ गया और मेरी टांगें पकड़ अपने दोनों तरफ फैलाते हुए मेरे बीच में आ गया. उसने मेरे स्तनों को दबाया और फिर अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आया.</p>
<p>मैंने भी बिना संकोच के अपने होंठ उसके होंठों से लगा कर चुम्बन करना शुरू कर दिया. वो मुझे चूमते हुए धीरे धीरे धकेलने लगा और ठीक मुझे जमीन पर गिराते हुए वो मेरे ऊपर आ गया.</p>
<p>मेरे भीतर वासना की आग तेजी से धधक रही थी और मैं भी उसे अपनी ओर ऐसे खींच रही थी, मानो उसे अपने भीतर छुपा लूंगी. </p>
<p>जिस तरह से वो मेरी जुबान को चूस रहा था और मेरे स्तनों को मसल रहा था, उससे लग रहा था … मानो अब वो झड़ जाएगा. पर यहां हर मर्द इतना तो अनुभवी था ही कि अपनी उत्तेजना को काबू में कर ले.</p>
<p>धीरे धीरे राजशेखर मेरे होंठों को छोड़ कर मेरे स्तनों को चूसने लगा. मेरे दूध का घूंट पीते ही उसमें ताजगी सी दिखने लगी. वो एक हाथ से मेरी एक स्तन को मसलते हुए मेरे दूसरे स्तन का पान करने लगा. </p>
<p>थोड़ी ही देर के बाद वो मेरी योनि तक पहुंच गया और मेरी योनि को चूमने और चाटने लगा.</p>
<p>उधर कविता खुद कांतिलाल के पास गई और उसे राजेश्वरी से अलग होने को कहा. राजेश्वरी भी बहुत अधिक गर्म थी, सो वो ज्यादा देर अलग होकर न रह सकी. जब तक कांतिलाल और कविता ने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू किया, वो कमलनाथ के पास चली गई. कमलनाथ ने भी रमा को धक्के मारना बन्द किया और राजेश्वरी को अपनी गोद में बिठा लिया.</p>
<p>इधर राजशेखर ने जी भरकर मेरी योनि चाटने के बाद मुझे उठाया और मुझे कुतिया की तरह झुक जाने का इशारा किया. मैं उसके निर्देशानुसार कुतिया की तरह झुक गई और मैंने अपना सिर जमीन पर रख अपने चूतड़ों को पूरा उठा दिया.</p>
<p>राजशेखर ने पीछे आकर अपना लिंग एक बार में ही मेरी योनि की गहराई में उतार दिया. उसका लिंग मुझे बहुत ही कड़क महसूस हुआ. उसके लिंग पर नसें एकदम सख्त लग रही थीं और सुपारा आग की तरह गर्म था.</p>
<p>करीबन 7 इंच लंबा और मोटाई 3 इंच लिंग की वजह से जब उसने धक्का मारना शुरू किया, तो मस्ती मैं में कसमसाने लगी. </p>
<p>मैं अभी इतना तो अंदाज लगा सकती थी कि मेरे साथ उसे भी काफी मजा आ रहा था. उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी योनि में आ जा रहा था और मुझे कराहने पर विवश करे दे रहा था.</p>
<p>वो कभी मेरे ऊपर पूरा झुक मेरे स्तनों को दबाते हुए धक्का मारता, तो कभी मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को दबाते सहलाते मजा लेने लगता.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे हम दोनों में जोश भी बढ़ता जा रहा था. मैं अब अपने कानों में उसके हांफने की आवाज सुन सकती थी.</p>
<p>करीब 10 मिनट उसने मुझे यूँ ही बिना रुके धक्के मारे और फिर वो रुक गया. कुछ पल के लिए उसने अपना लिंग पूरी तरह मेरी योनि की गहराई में दबा दिया और सांस लेने लगा. इसके बाद उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मुझसे अलग हो गया.</p>
<p>मेरी ग्रुप सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-8</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13315</guid>

					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। ... <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Read more about कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम</title>
		<link>https://kahani18.com/hindi-sex-stories/sex-problem-behan-sex/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:31:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी सेक्स स्टोरीज]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Sex Problems]]></category>
		<category><![CDATA[पाठकों के पत्र]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13316</guid>

					<description><![CDATA[मेरी भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम मैं आपके पास भेज रहा हूँ ताकि आप मुझे सुझाव दे सकें कि मैं क्या करूं. मेरी तलाकशुदा बहन मेरे साथ रहती है. मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता हूँ. क्या करूं? मेरा नाम जीवन है. मैं पुणे का रहने वाला हूँ. मैं शादीशुदा हूँ और मेरे दो बच्चे हैं. ... <a title="भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम" class="read-more" href="https://kahani18.com/hindi-sex-stories/sex-problem-behan-sex/" aria-label="Read more about भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम मैं आपके पास भेज रहा हूँ ताकि आप मुझे सुझाव दे सकें कि मैं क्या करूं. मेरी तलाकशुदा बहन मेरे साथ रहती है. मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता हूँ. क्या करूं?<br />
<span id="more-322"></span></p>
<p>मेरा नाम जीवन है. मैं पुणे का रहने वाला हूँ. मैं शादीशुदा हूँ और मेरे दो बच्चे हैं. मेरी उम्र 35 साल है. मेरी बहन का तलाक़ हो चुका है और वो हमारे साथ ही रहती है. उसकी उम्र 33 साल है. मेरी बहन का नाम टीना है.</p>
<p>हमारे घर में दो कमरे हैं. एक कमरे मेरा परिवार सोता है और दूसरे रूम में मेरी छोटी बहन सोती है. </p>
<p>मैं शुरू से ही हिंदी सेक्स कहानी का पाठक रहा हूँ. मुझे अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. पहले मैं सेक्स कहानी को लिखने से कुछ संकोच करता था, पर जब इस साईट पर अबकी सेक्स कहानी को पढ़ा, तो मुझे भी लगा कि अपने अनुभव बांटने से मजा बढ़ता ही है. इस बात एक अच्छा सा असर मेरे दिमाग़ पर पड़ा है. मुझे भाई बहन के रिश्ते पर लिखी हुई सेक्स स्टोरी बहुत पसंद आती हैं. </p>
<p>एक दिन ऐसे हुआ कि मेरी बीवी और बच्चे मेरी ससुराल में छुट्टियों में गए हुए थे. घर में मैं और मेरी बहन हम दोनों ही थे. </p>
<p>हमारा पहला दिन तो नॉर्मल ही गया. दूसरे दिन जब मैं ऑफिस से घर आया था, तो मेरी बहन शाम के खाने का इंतजाम कर रही थी.</p>
<p>मैं फ्रेश होने बाद आया, हम दोनों ने खाना खाया. खाना खाने टाइम अचानक मुझे मेरी बहन के मम्मों के दर्शन हो गए. वो कोई चीज परोसने के लिए झुकी, तो उसके गहरे गले से मुझे उसकी चूचियों के दीदार हो गए. मेरे देखने के बाद भी उसने अपने मम्मे छिपाने की कोई कोशिश नहीं की. इससे मुझे बड़ी चुदास सी जाग उठी.</p>
<p>मैं खाना खाने के बाद अपने कमरे में गया और अन्तर्वासना साईट खोल कर भाई बहन की सेक्स स्टोरी पढ़ने लगा. रात के ग्यारह बजे तक मैं सेक्स स्टोरी पढ़ता रहा. फिर मैं अपनी बहन के कमरे गया और टीवी चालू करके सीरियल देखने लगा. टीवी की आवाज़ सुन कर वो भी उठ गई और बैठ कर टीवी देखने लगी. </p>
<p>वो मुझे बड़ी अजीब सी निगाहों से देख रही थी. बड़ी हिम्मत करके मैं उससे बात करने लगा.</p>
<h2>भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम</h2>
<p>मैं- टीना नींद नहीं आ रही क्या?<br />
टीना- हां!<br />
मैं- मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं.<br />
टीना- हां बोलो?<br />
मैं- नहीं, कुछ नहीं.<br />
टीना- अरे भाई बोलो क्या हो गया?<br />
मैं- नहीं तुम किसी को बोल दोगी.<br />
टीना- भाई ऐसा क्या बोलना चाहते हो कि इतना डर रहे हो. बोलो क्या बोलना चाहते हो.<br />
मैं- ठीक है.. लेकिन तुम एक वायदा करो कि तुम किसी से नहीं बोलोगी और मुझसे नाराज़ नहीं होगी.<br />
टीना- भाई अब बोलना है, तो बोलो नहीं तो मैं सोने जा रही हूँ. </p>
<p>मैं उसके पास जाके बैठा और उसका हाथ मेरे हाथ में लेकर उससे बोला- टीना मैं तुमको बहुत चाहता हूँ और मैं तुमसे हमबिस्तर होना चाहता हूँ.<br />
टीना- भाई, ये तुम क्या बोल रहे हो, तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है?<br />
मैं- हां … पर क्या करूं … मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. </p>
<p>मैंने उसको झटके से अपने बांहों में भर लिया और दबोच के रखा. फिर उसको किस करने लगा. </p>
<p>टीना- भाई छोड़ो मुझे, ये बहुत ही ग़लत है.<br />
मैं- टीना कुछ ग़लत नहीं है बहन … तुम्हें अच्छे से मज़ा आएगा.<br />
टीना- पर भाई …<br />
मैं- अभी कुछ बोल मत. </p>
<p>मैंने उसे उठाया और खड़ा करके उसे किस करने लगा. उसने मेरे बीवी की नाइटी पहनी हुई थी, जिसमें मम्मों के ऊपर एक चैन लगी हुई थी. उधर से बच्चों को दूध पिलाने में आसानी होती थी.</p>
<p>मैंने उसको लगातार किस करता जा रहा था. वो आंख बंद करके खड़ी थी. फिर मैंने उसे सोफे पर बैठाया और उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसके पैर को किस करने लगा. </p>
<p>जैसे ही मैं उसकी जांघ तक पहुंचा, उसने आंख खोल कर बोला- भाई, मेरे को बहुत गुदगुदी हो रही हैं. </p>
<p>मैंने ऊपर जाकर उसके मम्मों के ऊपर की चैन खोल दी और उसके मम्मों को चूसने लगा. वो भी धीरे धीरे वासना भरी सिसकारियां लेने लगी. उसने मेरे सर पर हाथ रखा था.</p>
<p>अब मैंने उसको उसके बिस्तर पर लिटा दिया और पूरा गाउन गले तक ऊपर करके उसके दूध चूसने लगा. </p>
<p>तभी मेरे को उसकी आवाज़ सुनाई दी- भाई ये ठीक नहीं हो रहा. भाई बहन के बीच यह काम गलत है.</p>
<p>मैं उससे अलग हो गया. उसके बात सुन कर मैं बहुत बुरा फील कर रहा था.<br />
मैं उससे माफी मांगने लगा- मुझे माफ़ कर दो बहन, आगे से ऐसा कभी नहीं होगा.<br />
लेकिन वो बात ही नहीं कर रही थी. उसने सब कपड़े ठीक किए, बस इतना बोली- ठीक है.</p>
<p>मैं फिर सोने के लिए चला गया. सुबह उसने मेरे से कुछ बात नहीं की. मैं फिर ऑफिस चला गया. दो दिन के बाद मेरे बीवी बच्चे आ गए और सब नॉर्मल चलने लगा.</p>
<p>तकरीबन पांच महीने बाद मेरी बीवी दोबारा नासिक गई. वो अपने दादा के घर पर गई थी. </p>
<p>मुझे फिर से बहन के साथ सोने ख्वाइश जाग गई. मैं तकरीबन रात के एक बजे तक सोचता रहा. फिर हिम्म्त करके मैं रात को एक बजे उसके पास गया और उसके पास बैठ कर मैंने उसे जगाया. </p>
<p>टीना- भाई क्या हो गया, तुम मेरे बिस्तर पर क्यों बैठे हो?<br />
मैं- मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ और प्यार करना चाहता हूँ.<br />
टीना- भाई नहीं, अभी बहुत रात हो चुकी है.</p>
<p>मैं उसको पकड़ के सीधा किस करने लगा और उसके बूब दबाने लगा.</p>
<p>बाद में मैंने उसका गाउन निकाल दिया. वो मेरे सामने केवल ब्रा और पेंटी में रह गई थी. </p>
<p>मैंने उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके मम्मों को चूसने लगा. वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए मज़े ले रही थी.</p>
<p>टीना- भाई, धीरे … छाती में बहुत दर्द हो रहा है.<br />
मैं- अरे मज़ा भी तो आ रहा है ना तुम्हें.<br />
टीना- भाई अब बस करो ना.<br />
मैं- एक बार मुझे तेरे को चोदना है.<br />
टीना- भाई, हम सही नहीं कर रहे … जो कर चुके हैं, वही बहुत ज्यादा है.</p>
<p>मैं उससे अलग हो गया और किस कर के सोने के लिए चला गया.</p>
<p>तब से अभी तक हमारे बीच में इससे ज्यादा कुछ भी नहीं हुआ है. वो मेरे से बात करती है, बूब्स के दर्शन करवा देती है, चुसवा भी लेती है. पर इससे ज्यादा कुछ नहीं.</p>
<p>मुझे मालूम है कि उसको भी लंड की जरूरत है, वो भी जवानी की आग में सुलग रही है. लेकिन हम दोनों को ही भाई बहन का रिश्ता एक अनजानी सी डोर से बांधे हुए है. हम दोनों चाह कर भी सेक्स नहीं कर पा रहे हैं. </p>
<p>मुझे आगे क्या करना चाहिए? आप लोग मुझे सलाह दीजिएगा मेरी भाई बहन सेक्स प्रॉब्लम पर!</p>
<p>मेरी इमेल आईडी है.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13317</guid>

					<description><![CDATA[न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो … मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और ... <a title="पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/" aria-label="Read more about पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो …<br />
<span id="more-316"></span></p>
<p>मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और अपनी चूत में उंगली करती रहें व लड़के अपना लन्ड हिला लें।</p>
<p>हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी. उसमें एक 25 साल की खूबसूरत भाभी थी, नाम था प्रभा. उनकी शादी को 3 साल हो गए थे पर उनके घर मे कोई बच्चा नहीं था. उनकी सास उन्हें बच्चा न होने की वजह से परेशान करती थी।</p>
<p>हमारी व उनकी छत मिली हुई थी व बीच में एक छोटी सी दीवार थी. एक दिन मैं छत पर एकांत में मुठ मार रहा था. तब प्रभा भाभी एकदम आ गई व उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया. मैं उस समय झड़ना शुरु हो गया था इसलिए रोक भी न सका और मेरे वीर्य की धार निकल कर दूर जाकर पड़ी.</p>
<p>उन्होंने मुझे सख्त धमकाया- ये क्या कर रहे हो? तुम्हारी मम्मी से बताती हूँ।<br />
मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए और माफी मांगी और यह भी कहा कि दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।<br />
उन्होंने बड़े प्यार से मेरे गाल पर एक थपकी दी और बोली- तुम अभी 18 साल के ही हो. ये सब करने से मर्द में कमजोरी आ जाती है.</p>
<p>बात आई गई हो गई पर जब भी वो मुझे मिलती तो उनके गाल लाल हो जाते थे.</p>
<p>एक दिन उनकी सास 6 दिन के लिए शादी में जा रही थी और उन्हें घर पर अकेला रहना था क्योंकि उनके पति भी एक महीने के लिए बाहर गए हुए थे. इसलिए उनकी सास ने मेरी माँ से कहा कि राकेश को कुछ दिनों के लिए रात को सोने को भेज देना क्योंकि घर में बहू अकेली रहेगी।</p>
<p>रात को खाना खाने के बाद मैं उनके घर चला गया. भाभी ने काली नाइटी पहनी थी.<br />
भाभी ने बादाम का दूध पीने को दिया और बोली- अबी तो पहले वाली शैतानी तो नहीं करते हो?<br />
मैं एकदम डर गया और बोला- नहीं भाभी, अब नहीं करता।</p>
<p>भाभी बोली- तुम्हारे भैया भी बचपन से यही करते आ रहे थे; अब उनमें कमजोरी आ गई और अब उनसे बच्चा पैदा नहीं होता।</p>
<p>कुल मिला कर सोने का समय हो गया और हम एक ही बेड पर सो गए.</p>
<p>रात को मेरी नींद खुली तो भाभी मेरा लन्ड सहला रही थी और मेरा लन्ड एकदम फटने को हो रहा था.<br />
मुझे जगा देख कर भाभी बोली- राज, मेरे पति का वीर्य कमजोर है और वो बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं.<br />
उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करूँ.</p>
<p>भाभी ने अपनी चूची मेरे मुंह मे दे दी. मैंने बारी बारी से दोनों चूची खूब चूसी. फिर भाभी ने मेरा लन्ड मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो पागल होता जा रहा था.<br />
फिर भाभी ने उंगली के इशारे से चूत चाटने को बोला और हम 69 की पोजिशन में आ गए और खूब चुसम चुसाई खेली.</p>
<p>फिर भाभी बोली- मैं उस दिन तुम्हारे वीर्य की धार देख कर ही समझ गई थी कि तुम ही मेरे बच्चे के बाप बनोगे।</p>
<p>उसके बाद भाभी टांगें फैला कर लेट गईं और बोली- मेरे राज, अब डाल दे अपना हथियार मेरी कचिया चूत में!<br />
मैंने लन्ड के अगले हिस्से पर थोड़ा थूक लगाया और चूत से भी काफी नमकीन पानी टपक रहा था. जैसे ही मैंने लन्ड का टोपा चूत के मुख पर लगाया, भाभी ने बड़ी तेज सिसकारी भरी और चूत ऊपर उठाकर लन्ड चूत में लेने को बेताब हो गईं.</p>
<p>मैंने भी हल्का सा जोर लगाया और चूत में लन्ड अंदर जाने लगा. एक अलग ही एहसास था दोस्तो!</p>
<p>प्रभा भाभी ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए और सीत्कार करने लगी. मैं तो जैसे पागल होने को हो गया. मैंने एक तेज झटका मार कर गहराई तक पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और तेजी से शॉट लगाने शुरू कर दिए और साथ में भाभी ने मेरा हाथ अपने स्तनों पर लेजाकर दबाने का इशारा किया.</p>
<p>मैं भाभी की चूचियाँ दबा दबा कर उन्हें मजा देने लगा और मैंने धक्कों की रेल छोड़ दी. 10 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई. उसके बाद हम नंगे ही लिपट कर सो गए.</p>
<p>उस रात मैंने 3 बार भाभी की चूत चुदाई की. उसके बाद 8 दिन में भाभी की कई बार चुदाई हुई.<br />
इस तरह से मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पूरी हुई.</p>
<p>और फिर एक दिन पता चला कि भाभी को गर्भ ठहर गया है.<br />
उसके बाद जब वो मुझे मिली तो मुझे बहुत प्यार किया औऱ मेरी खूब पप्पियाँ ली.</p>
<p>समयानुसार भाभी के घर एक सुन्दर बच्चा पैदा हुआ।</p>
<p>लेकिन बाद में पता चला कि भाभी ने यह बात अपनी बहन ज्योति को बता दी. एक दिन उसने मुझे ज्योति से मिलवाया और बताया कि ये मुन्ने के पापा हैं, तुम्हारे जीजा जी हैं.<br />
मैं शर्मा गया.</p>
<p>शाम को मैं भाभी से बोला- भाभी, इस बच्चे के लिए मुझे भी कुछ गिफ्ट चाहिए.<br />
तो उन्होंने पूछा- क्या?<br />
मैंने बताया- भाभी, उस हनीमून के बाद मुझे सेक्स की भूख पैदा हो गई है और आप बच्चे में व्यस्त हो गई हो तो मेरी सेक्स समस्या का समाधान करवाओ, किसी से मेरा सेक्स करवाओ.<br />
तो वो बोली- मैं ज्योति से बात करती हूं. वो इसी शहर में रहती है और मुझे लगता है उसका तेरे में इंट्रेस्ट भी है. क्योंकि जिस दिन मैंने तुझे उससे मिलवाया तो वो तुझे बड़े ध्यान से देख रही थी और कह रही थी ‘प्रभा, गजब का लौंडा पटाया है तूने!’</p>
<p>दोस्तो, मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पसन्द आयी या नहीं … कमेंट करना.<br />
आपका राज<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेरी बहन की चुदाई की कहानी</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:15:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13318</guid>

					<description><![CDATA[यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने? दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने ... <a title="मेरी बहन की चुदाई की कहानी" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/" aria-label="Read more about मेरी बहन की चुदाई की कहानी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने?<br />
<span id="more-340"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने में सांवली है. उसकी हाईट ज्यादा तो नहीं है पर उसके मम्मे बड़े बड़े हैं. उसके मम्मों को देख कर मैं खुद रोज उसके नाम की मुठ मारता हूँ.</p>
<p>अंतरा के एग्जाम चल रहे थे तो उसे परीक्षा दिलवाने लेकर मुझे जाना था. कुल 7 दिनों के एग्जाम थे और परीक्षा केंद्र घर से दूर होने के कारण हम लोगों ने वहीं एक रूम किराये पर ले लिया था. </p>
<p>रूम में पलंग आदि नहीं था, नीचे ही सोने की व्यवस्था थी. रूम के बगल वाले रूम में भी 4 लोग एग्जाम देने आए हुए थे. वे चारों 20-21 साल के ही रहे होंगे. </p>
<p>पहला दिन का एग्जाम हो गया और उसी शाम तक उन चारों लड़कों से मेरी दोस्ती हो गई. चारों लड़कों ने कोई सैटिंग की हुई थी, जिसके कारण उनको एग्जाम में आने वाले प्रश्न उत्तर पहले ही मिल जाते थे. वो सब अपने एग्जाम सही करके आते थे. </p>
<p>दूसरा दिन भी निकल गया. शाम को उन चारों में से एक ने बताया कि मैं आपको प्रश्न और उत्तर दे दूंगा. </p>
<p>ये सुन कर मेरी उन लोगों से और भी अच्छी दोस्ती हो गई. वो मुझे भैया बुलाते थे और अंतरा को नाम से बुलाते थे. </p>
<p>अंतरा उन सबमें छोटी थी और अब उन चारों लड़कों के साथ घुल मिल गई थी. शाम को चारों बैठ कर अंतरा के साथ पढ़ते थे. </p>
<p>आखिरी एग्जाम से एक दिन पहले की बात है. उस दिन रविवार था, इसलिए छुट्टी थी. सब लोग घर पर ही थे. वे चारों मेरे रूम में आकर अंतरा के साथ पढ़ाई करने लगे.</p>
<p>उन लोगों को पढ़ता देख कर मैं अंतरा को बोल कर निकल गया कि मैं मूवी देखने जा रहा हूँ. बस 3 से 4 घंटे में आ जाऊंगा. तुम पढ़ाई करके आराम कर लेना.<br />
यह कह कर मैं चला गया. पर मुझे टिकट नहीं मिली और मैं कमरे के लिए वापस निकल आया.</p>
<p>जब मैं कमरे पर वापस आया, तो घर का दरवाजा बाहर से बंद था. मैं अन्दर गया, तो अंतरा नहीं थी. मैंने सोचा बाथरूम गई होगी या पढ़ने गई होगी. </p>
<p>मैं आराम करने लगा. जब 15-20 मिनट हो गए, अंतरा नहीं आई तो मैं समझ गया कि उन लड़कों के साथ पढ़ाई कर रही होगी. मैं उठकर अंतरा को देखने चला गया. </p>
<p>जब मैं लड़कों के पास गया, तो दरवाजा अन्दर से बंद था, मुझे शक हुआ और मैं अन्दर झांकने की कोशिश करने लगा. पर मुझे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था. </p>
<p>तब मुझे याद आया कि बाथरूम से उनका रूम नजर आता है. मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और बाथरूम के एक छेद से अन्दर देखने लगा. उस छेद से सब कुछ साफ नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम का वो छेद थोड़ा बड़ा था.</p>
<p>जब मैंने अन्दर देखा तो सामने बेड था. बेड पर तीन लड़के पूरी तरह नंगे बैठे थे और अपने अपने लंड सहला रहे थे, पर अंतरा कहीं नजर नहीं आ रही थी. </p>
<p>मैं मोबाइल से उनकी रिकॉर्डिंग करने लगा. तभी मेरी नजर लड़कों पर पड़ी, जो एक तरफ देखे जा रहे थे. मैंने भी उसी तरफ देखा, तो मैं दंग रह गया. </p>
<p>मेरी अपनी सगी बहन अंतरा पूरी नंगी थी और टेबल पर अपनी बुर चुदाई करवा रही थी. जो लड़का अंतरा को चोद रहा था, उसका नाम सोनू था. वो अंतरा की चूची को अपने मुँह में रख कर एक बच्चे की तरह चूस रहा था. वो एक चूचे को चूस रहा था और एक हाथ से उसके दूसरे चूचे को दबाने में लगा था. उसने अंतरा का एक दूध अपने मुँह में पूरा भर लिया था और जबरदस्त तरीके से चुसाई करने में लगा था.</p>
<p>तभी मैंने देखा कि वो अपने दूसरे हाथ को अंतरा की चूत पर ले गया और अपनी उंगली उसकी बुर में घुसा दी. उस लड़के की उंगली गीली हो गई. उसने अपनी उंगली को निकाल कर देखा कि मेरी बहन खुद ही चुदाई को उतावली हो रही थी.</p>
<p>फिर मैंने देखा कि अंतरा ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं. सोनू ने अंतरा की बुर के दाने को मसलना चालू कर दिया. अंतरा के मुँह से मस्त सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>लड़के ने उसे उल्टी तरफ घुमा कर उसे घुटनों के बल पर कर दिया, वो अंतरा को डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. उसने अपने तने हुए लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख कर सुपारे से उसकी बुर के दाने को रगड़ने लगा. </p>
<p>अंतरा के मुँह से जोरदार सिसकरियां निकल रही थीं. तभी सोनू ने अपने मूसल जैसे लंड को हल्का सा धक्का दिया, तो उसके लंड का सुपारा भीतर चला गया. </p>
<p>अंतरा के मुँह से ज़ोर से मतवाली सिसकारी छूटी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. सोनू का लंड धीरे धीरे अंतरा की बुर में एकदम भीतर घुस गया.</p>
<p>मुझे अपनी बहन की चुदाई और उसके मजे लेने पर बहुत गुस्सा आ रहा था. अंतरा के मुँह से दर्द और काम से मिश्रित कराह निकल रही थी. थोड़ी ही देर बाद वो खुद अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>दूसरे लड़के भी चुप नहीं बैठे थे, वो भी मैदान में कूदने को तैयार थे. एक ने लंड को अंतरा के मुँह के पास जाकर उससे लंड को मुँह में लेकर चूसने को कहा. अंतरा फट से उसके लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी. उधर सोनू अब फकफ़ाक धक्के लगाते हुए झड़ने को हो रहा था. उसके लंड के गोटे सीधे अंतरा के चूतड़ों पर जा कर ढोलक की तरह ठाप लगा रहे थे. </p>
<p>मेरी बहन के मुँह से जोरदार सीत्कार निकल रही थी, जैसे उस की लंड से चुदाई में मस्त सीटियां बज रही हों. सोनू अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर से धकेलता था, जिससे अंतरा की चीख निकल जाती थी. </p>
<p>इधर अपनी सगी बहन की चुदाई देख कर मेरा मन कर रहा था कि मैं भी अभी अंतरा को चोद दूँ. आगे अंतरा के मुँह में एक लंड से पूरा भरा हुआ था. </p>
<p>तभी सोनू ने आगे हाथ बढ़ा कर अंतरा के मम्मों को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. एकाएक सोनू के धक्कों की रफ्तार बहुत तेज हो गई और उसने अंतरा की चुत में ज़ोर से अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी. </p>
<p>अंतरा की आंखें मस्ती से मुंद गई थीं. सोनू ने अंतरा चुत को चाट कर साफ कर दिया. </p>
<p>अब तीसरा लड़का आकाश, जिसका लंड का सर आसमान पर उठा हुआ था, वो आया और अंतरा की चुत में लंड घुसाने लगा. </p>
<p>उसने अपने लंड को अंतरा की चूत के दरवाजे पर रखा और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. उसका लंड पूरा का पूरा अंतरा की चुत की जड़ में समा गया.</p>
<p>अंतरा ज़ोर ज़ोर से आनन्द से सिसकरियां भर रही थी. </p>
<p>अब उस लड़के का सुनो, जिसका लंड अंतरा चूस रही थी, उसके मुँह से एकाएक आह की आवाज निकली और उसने अपना गाढ़ा सफेद वीर्य अंतरा के मुँह में छोड़ दिया. अंतरा लंड से निकले वीर्य को स्वाद लेकर पीने लगी. फिर भी कुछ माल उसके मुँह से बाहर आकर उसके गालों पर बहने लगा. </p>
<p>मुझे समझ आ गया कि मेरी बहन पक्की चुदक्कड़ है.</p>
<p>उस लंड चुसाने वाले लड़के के हटते ही चौथा लड़का मुन्ना, जिसका लंड सबसे बड़ा था, वो आ गया. उसने तीसरे लड़के की जगह ले ली और अंतरा उसके लंड को चूसने लगी.</p>
<p>अब जो लड़का आकाश अंतरा को चोद रहा था, वो पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था. उसने अंतरा के गोल गोल चूतड़ों को अपनी मुट्ठी में भर रखे थे. वो पूरी ताकत और वेग से चूत में धक्के लगा रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद वो भी झड़ गया और अंतरा की चूत पूरी वीर्य की झील हो गई. </p>
<p>चौथे लड़के मुन्ना ने अंतरा के मुँह को आज़ाद कर दिया. उसने अंतरा को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया. उसकी टांगें अपने कंधे पर रखीं और फ्रंट फॉर्वर्ड पोज़िशन में लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख दिया. इसके बाद उसने एक बड़े ही ज़ोर का धक्का दे मारा. उसका मूसल किस्म का लंड पहले झटके में ही आधे से ज्यादा चूत के भीतर चला गया.</p>
<p>अंतरा की एक तेज चीख निकल गई. लेकिन तीन लंड खाने के बाद अंतरा की चूत खुल गई थी. इसलिए अंतरा ने भी अगले ही अपने हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर नीचे से एक जोर का जबावी धक्का लगा दिया. इस धक्के से लड़के का बाकी लंड भी एकदम जड़ तक समा गया.</p>
<p>फिर उस मुन्ना नाम के लड़के ने अपने दोनों हाथ अंतरा के चूतड़ों के नीचे ले जा कर उनको तकिया जैसा सहारा दे दिया और ज़ोर ज़ोर उसकी चुत का बाजा बजाना शुरू कर दिया. </p>
<p>अंतरा चुदाई के आनन्द के मारे पागल हो गई और अजीब अजीब सी आवाजें उसके मुँह से निकलने लगी थीं. </p>
<p>मुन्ना ने अंतरा को चोदने में पूरा 30 मिनट का टाइम लिया. फिर वो भी आख़िर ‘आह आह..’ करते हुए उसके ऊपर ढेर हो गया. उसने अपने लंड का ढेर सारा गाड़ा वीर्य एक पिचकारी के रूप में अंतरा की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>अंतरा इस दौरान कई बार अपना पानी निकाल चुकी थी. उसे सबके लंड और चूस करके साफ़ करना पड़ा. सब लड़कों ने भी अंतरा की चुत को चाट कर साफ कर दिया. इसी बीच अंतरा फिर से गर्म होकर झड़ भी गई. </p>
<p>मैंने ये सब अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया था. जब मेरी बहन की चुदाई पूरी हो गई, तो मैं वहां से निकल गया. </p>
<p>एक घंटे बाद जब मैं वापस आया, तो अंतरा अपने रूम में बैठ कर पढ़ रही थी. मैंने अंतरा को कुछ नहीं बोला. </p>
<p>रात को मैंने उसे वीडियो दिखा दिया, वो एकदम से डर गई. वो बोली- भैया माफ कर दो.. अब ऐसा नहीं होगा.<br />
मैं- एक शर्त पर माफ कर दूंगा.. तुम्हें मुझसे चुदना होगा.</p>
<p>वो शर्मा गई. मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया.<br />
वो बोली- मैं तो आपसे न जाने कबसे चुदने के लिए मरी जा रही थी.<br />
मैंने पूछा- क्यों?<br />
वो बोली- मैंने आपका लंड देखा है, ये बहुत बड़ा है.<br />
मैंने कहा- तो फिर कभी बोला क्यों नहीं?<br />
वो बोली- मैं शर्म रही थी कि कहीं आप नाराज न हो जाओ.</p>
<p>मैंने कहा- मेरी प्यारी बहन की चुदाई कब से चल रही है?<br />
वो बोली- आज दूसरी बार किया है.<br />
मैंने पूछा- पहली बार किसके साथ किया था.<br />
वो बोली- अब इस सवाल का जबाव बहुत लम्बा है, आपको बाद में सब बता दूंगी.</p>
<p>उसने अपनी सील टूटने का किस्सा मुझे बाद में बताने का वायदा किया. मैं अपनी बहन की सील टूटने की चुदाई की कहानी को आप तक जरूर भेजूँगा.</p>
<h2>मेरी बहन की चुदाई की मैंने</h2>
<p>उसने कहा- अब देर न करो भैया. मुझे बड़ी जोर से मस्ती चढ़ रही है.</p>
<p>मैंने अंतरा की चूत को सहलाया और अपनी बहन को नंगी करके चित लिटा दिया. फिर मैंने अपना लौड़ा निकाल कर अंतरा की चूत में घुसाने की कोशिश की.</p>
<p>लेकिन मेरा लंड उन चारों लौंडों से कम से कम दो इंच लम्बा था और मोटा भी बहुत ज्यादा था. इसलिए मेरा थोड़ा सा ही लंड अन्दर गया था. अंतरा को उससे दर्द तो हुआ, लेकिन वो चूंकि दिन में चुद चुकी थी, इसलिए उसने ज्यादा चिल्लपों नहीं की. मगर मुझे उसकी कसी हुई चूत में लंड पेलने से दर्द होने लगा था.</p>
<p>तब भी मैं किसी तरह से अंतरा की चूत में लौड़ा घुसाने लगा और कामयाब भी हो गया. अंतरा ने भी लंड लेने में मेरी मदद की. उसको खुद ही मेरा लंड लेने में मजा आ रहा था. मैंने अपनी बहन की चूचियां दबाईं और उसके होंठ भी चूसे. </p>
<p>उसके बाद मैं पूरा लंड पेल कर अपनी बहन अंतरा की झटके देते हुए चुदाई करने लगा. अंतरा की चूत अभी भी काफी टाइट थी. बाद में मैंने अंतरा की चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया था. मैं अपना लंड अंतरा की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मुझसे चुदने का खूब मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं अंतरा की चूचियां दबाने लगा, वो भी मुझे चूमने लगी. फिर मैं अपना सुपारा अंतरा की चूत तक बाहर निकाल कर जोर जोर से उसको पेलने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर अंतरा को चूसने को बोला. अंतरा ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी.</p>
<p>अंतरा के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया. कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था. मैंने बिना अंतरा को बताए ही उसके मुँह में ही रस को निकाल दिया. अंतरा भी उसको जूस की तरह पी गई.</p>
<p>फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे. कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे.</p>
<p>अब अंतरा ने कहा- अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी पूरी आग बुझा दो.</p>
<p>मैंने अपना लंड अंतरा की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. मेरा लंड अंतरा की चूत में पूरा अन्दर तक चला गया. </p>
<p>अंतरा जोर से चिल्ला उठी- आऊ.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह. </p>
<p>मैंने अंतरा को बहुत जोर से जकड़ लिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. अंतरा जब चुप सी हुई.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.</p>
<p>अंतरा और जोर से चिल्लाने लगी, मैंने उसकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और अंतरा के होंठों को किस करने लगा. होंठों को दबाने से अंतरा की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई. </p>
<p>उस दिन मैं अंतरा को बीस मिनट तक चोदता रहा. इस दौरान अंतरा दो बार झड़ चुकी थी. फिर मैंने अपना सारा रस अंतरा की चूत में ही छोड़ दिया.</p>
<p>मेरी बहन को अपने भाई के साथ चुदाई में बहुत मजा आया. हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे. हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला. </p>
<p>मुझे अंतरा को और चोदने का मन था, पर इस वक्त हमारी बहन की चुदाई बीच में ही छूट गयी पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा. </p>
<p>दूसरी बार में अंतरा बिना कपड़ों के थी क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था. मैं भी अपने कपड़े खोल कर अंतरा की चुदाई के लिए रेडी था. अंतरा ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया. </p>
<p>उस रात को हमने पूरी रात में तीन बार बहन की चुदाई का मजा लिया. फिर अंतरा ने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>आज अंतरा तो इतनी ज्यादा खुश थी कि वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी. ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा.</p>
<p>इसके बाद बहन की चुदाई का कार्यक्रम आज तक चल रहा है. मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अंतरा की चूत को शांत जरूर कर देता हूँ. जब भी अंतरा अपनी चूत की खुजली से ज्यादा परेशान हो उठती है.. तो मैं उसे कहीं बाहर ले जाकर उसकी चूत चोद कर उसे शांत कर देता हूँ.</p>
<p>आप मुझे मेरी बहन की चुदाई की कहानी पर अपने मेल जरूर भेजें.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की</title>
		<link>https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Desi Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Desi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://freesexkahani.xyz/?p=13299</guid>

					<description><![CDATA[यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली. दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर ... <a title="देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की" class="read-more" href="https://kahani18.com/desi-kahani/bur-chodan-gaon-ki-kunvari-bur-chodan/" aria-label="Read more about देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह देसी कहानी गांव की कुंवारी बुर चोदन की है. मेरे गांव में एक नहर है. गर्मियों में मैं नहाने नहर पे जाता था. एक दिन ऐसे ही नहाने के दौरान मुझे एक कुंवारी लड़की मिली.<br />
<span id="more-332"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम सुमित बिशनोई है। मैं राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला हूं. अभी मैं जयपुर में रहकर रेलवे के पेपर की तैयारी कर रहा हूं. मेरे परिवार में हम दो भाई और माँ-पापा है। माँ हॉउस वाइफ है जबकि पापा किसान हैं। हमारे पास 30 बीघा जमीन है जो कि बिल्कुल नहर के पास है.</p>
<p>मेरी उम्र अभी 22 वर्ष की है। मेरी हाइट पांच फीट और दस इंच है. शरीर से पूरा हट्टा कट्टा हूं. दिखने में भी ठीक हूं. मेरे लंड की लम्बाई साढ़े पांच इंच की है लेकिन उसकी मोटाई काफी है.</p>
<p>मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूं. कई बार मैं इसकी गर्म और देसी बुर चोदन कहानी पढ़ कर लंड को भी हिला लेता हूं. तो मैंने सोचा कि अपने जीवन की एक घटना आप लोगों के साथ शेयर करूं. जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो आज से करीबन 2 साल पहले की है.</p>
<p>मेरा घर गांव में पड़ता है जहां पर मेरे घर के पास से ही एक नहर निकलती है। गर्मियों के दिनों में हम नहर में सुबह शाम को नहाने के लिए अक्सर जाया करते हैं। दोपहर में नहर में लड़के नहीं नहाते तो हमारे पड़ोस की लड़कियां दोपहर में नहा लेती थी क्योंकि लड़के उस टाइम वहां पर नहीं होते थे।</p>
<p>इसी तरह एक दिन मैं घर पर बैठा बैठा बोर हो रहा था तो मैंने नहर में नहा कर आने की सोची।<br />
दोपहर के समय में घर वाले सो रहे होते थे तो मैं नहर पर नहाने आ गया।</p>
<p>अभी नहाते हुए मुझे करीब 10 मिनट ही हुई होंगी कि हमारे पड़ोस की देसी लड़की वहां पर नहाने के लिए आ गई. उस लड़की का नाम मोनिका (काल्पनिक) है. रंग से गोरी है और कमर पतली है बिल्कुल. उसके बूब्स बड़े संतरे के आकार के थे (अब तो मेरे हाथ में ही नहीं आते हैं इतने बड़े हो गए हैं, जो कि मेरा ही कमाल है) उसके साइज के नाप का तो मुझे पता नहीं।</p>
<p>वो जब नहर पर आई तो मैं नहर में तैराकी कर रहा था। वो नहर पर आकर अपने कपड़ों में ही नहाने लगी क्योंकि गांव में देसी लड़कियां सलवार कमीज में ही नहाती थी नहर में।<br />
वो मुझे पानी में डुबकी लगा कर तैरता हुआ देख कर मुझसे बोली- मेरे को भी तैरना सिखा दो।</p>
<p>मैं उसकी बात पर थोड़ा हैरान सा हुआ क्योंकि हम दोनों कभी इसके पहले इतने खुल कर बात नहीं की थी और वो भी ऐसे अकेले में. आज से पहले कभी भी मैंने उसे चुदाई वाली नजरों से नहीं देखा था।</p>
<p>मैं उसके कहने पर उसको तैराकी सिखाने के लिए राजी हो गया. वो मेरे करीब आई और पानी में गोता लगाने लगी.</p>
<p>मैंने उसको अपने हाथों में थाम लिया ताकि वो नीचे डूबे नहीं. मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और वो तैरने के लिए हाथ-पैर मार रही थी। उसी बीच मेरा हाथ उसकी छाती पर चला गया तो उसने कुछ नहीं कहा। मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग रहा था जो कि बड़े आकार के संतरे के साइज के थे.</p>
<p>अब मेरे अंदर कामुकता जागने लगी, मैंने इस देसी कमसिन जवान लड़की के बुर चोदन का मौक़ा देखा तो मैं धीरे-धीरे बहाने से उसके बूब्स को जानबूझ कर छूने और दबाने की कोशिश करने लगा. लेकिन वो इस तरह से व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हो ही न रहा हो. इसलिए मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी.</p>
<p>फिर मैंने उसके चूचों को अच्छी तरह से हाथों में भर लिया तब भी उसने कुछ नहीं कहा. अब मेरा लंड मेरे अंडरवियर में पूरा तन चुका था. लेकिन वो पानी के अंदर था. पानी के अंदर भी मुझे अपने लंड की गर्मी महसूस हो रही थी.</p>
<p>मैंने मोनिका को खड़ी होने के लिए कह दिया तो वो मेरे सामने ही खड़ी हो गई. मैं उसको सिखाने के बहाने से उसकी गांड को लंड से छूने लगा. मेरा लंड तन कर झटके दे रहा था. उसकी गीली गांड में मेरे लंड का टच होना हर पल मेरे अंदर हवस को बढ़ाये जा रहा था.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे करके उसकी गांड पर अपने लंड को अच्छी तरह से सटाने लगा. मगर वो कुछ भी नहीं बोल रही थी.</p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा. न तो वो कुछ कह रही थी और न ही मैं कुछ कह रहा था. फिर वो मुझसे छूट कर पानी से बाहर जाने लगी. मेरे अंदर तो चुदास भर चुकी थी. मैंने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो मना करके चली गई.</p>
<p>मेरे मन में डर भी था कि कहीं ये कुछ घर पर जा कर बता ना दे तो मेरी भी गांड फट रही थी।</p>
<p>उसके बाद मैं घर पर आ गया और मोनिका के साथ हुई उस घटना को याद कर करके मैंने दो बार मुठ मार डाली.</p>
<p>उस दिन तो मैं बस यही सोचता रहा कि किसी भी तरह बस उसकी बुर चोदने को मिल जाये. यही सोचते हुए उस रात मुझे नींद भी नहीं आई. रात को सपने में भी मेरा वीर्यपात हो गया.</p>
<p>अगले दिन संडे था और हमारे पड़ोस में हमारे घर पर ही टीवी था और संडे को फ़िल्म भी आती थी। अगले दिन वो हमारे घर पर टीवी देखने के लिये करीब 11 बजे मेरे घर आ गई। मेरे घर वाले टीवी नहीं देखते थे तो माँ और पापा दूसरे कमरे में सो गए थे।</p>
<p>चूंकि राजस्थान में गर्मी बहुत पड़ती है तो मेरे घरवाले शाम के तीन बजे के बाद ही सोकर उठते थे. टीवी वाले कमरे में उसके और मेरे अलावा कोई और नहीं था. मैं भी टीवी देख रहा था और साथ में बीच बीच में उसे भी। कुछ देर बाद मैं यह सुनिश्चित करने के लिए उठा कि मां और पापा सो रहे हों. मैंने माँ पापा को धीरे से देखा तो वो दोनों नींद में सो रहे थे।</p>
<p>उसके बाद मैं उसके बिल्कुल पास आ कर बैठ गया और धीरे धीरे एक हाथ से उसकी कमर पर फिराने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं अपने हाथ को उसकी कमर से होते हुए उसके चूचों पर ले गया. उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से आगे देखने लगी.</p>
<p>उसको शायद अच्छा लग रहा था. वरना कोई भी लड़की इस तरह से एकदम से शरीर को छूने नहीं देती है.</p>
<p>जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि वो भी बुर चोदन करवाने की तैयारी करके ही आई है तो मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया. उसके चूचों को दबा दिया. तब भी उसने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब तो मुझसे रुका ही नहीं गया. मैंने उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी देसी बुर को छू लिया. उसने एक बार के लिए मेरा हाथ हटाया. मैं थोड़ा सा हिचक गया कि कहीं मैं जल्दी तो नहीं कर रहा हूं लेकिन दोस्तो बहुत बुरा हाल हो रहा था.</p>
<p>मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने दोबारा से कोशिश की और फिर से उसकी बुर पर हाथ फेरा तो मेरे हाथ पर उसकी बुर का स्पर्श हुआ. मुझे पता चल गया कि उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसकी सलवार में हाथ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसने अपनी सलवार के नाड़े को कस कर बांधा हुआ था इसलिए मुझे हाथ अंदर घुसाने में बहुत मुश्किल हो रही थी.</p>
<p>काफी मशक्कत के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के अंदर जा घुसा. मैंने उसकी बुर को टटोला तो उसकी बुर चोदन के लिए गर्म थी. उसमें से हल्का सा गीलापन भी छूटने लगा था. फिर मैंन उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. मैंने अपनी उंगली सीधी उसकी बुर में डाल दी उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.</p>
<p>अब चुदाई का पूरा माहौल तैयार हो गया था. मैंने उससे कहा कि वो ऐसे ही बैठी रहे. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मां और पापा बीच में उठ कर न आ जायें इसलिए मैं दोबारा से चेक करने के लिए उनको देखने के लिए गया. वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे.</p>
<p>जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि उसने अपनी सलवार को घुटनों तक नीचे कर लिया था. मैंने उसके पास बैठते ही उसकी बुर सहलाना शुरू कर दिया. मेरा हाथ उसकी बुर को रगड़ रहा था. दूसरे हाथ से मैं उसके बूब्स को दबा रहा था.</p>
<p>मेरा लंड अब मेरी पैंट में तन कर दर्द करने लगा था. मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया और उसके हाथ को पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया.<br />
उसने लंड को छोड़ दिया.</p>
<p>मैंने धीरे से कहा कि लंड को हाथ में पकड़ लो लेकिन उसने मना कर दिया.</p>
<p>फिर मैंने जबरदस्ती उसके हाथ को अपने लंड पर रखवा लिया और उसके हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. कुछ देर के बाद उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई. वो खुद ही मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>मैं उसको किस करने लगा.</p>
<p>अब बस रुका नहीं जा रहा था और मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया. मैंने उसकी बुर को हाथ से रगड़ा और अपना लंड उसकी बुर के मुंह पर लगा दिया और उसके ऊपर लेट गया. मेरा लंड उसकी देसी बुर में अंदर घुसते हुए रास्ता बनाने लगा तो वो दर्द के मारे गर्दन को इधर उधर पटकने लगी.</p>
<p>उसकी बुर अभी कुंवारी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो उसकी आंखों से पानी आने लगा. लेकिन मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने एक झटका दिया और लंड उसकी बुर में उतार दिया.</p>
<p>वो मुझसे लिपट गई. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … लंड उसकी बुर में चला गया था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो उसकी बुर से हल्का सा खून भी बाहर आ रहा था. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसकी बुर में हल्के से लंड को चलाने लगा. वो अभी भी तड़प रही थी. मगर कुछ देर के बाद वो नॉर्मल होती चली गई.</p>
<p>उसकी कुंवारी बुर पहली बार चुद रही थी और उसमें से जो खून बाहर निकला था उसके साथ में उसका कामरस भी मिल गया था. इस वजह से खून और पानी का वो मिश्रण बन जाने से मेरा लंड अंदर जाने में अब कोई परेशानी नहीं आ रही थी.</p>
<p>चूंकि मैं भी काफी उत्तेजित था तो मेरे लंड से भी काफी चिपचिपा पदार्थ निकल चुका था. दोनों तरफ से ही बराबर चिकनाई हो गई थी और चुदाई मक्खन के माफिक चल रही थी. अब मैं उसकी बुर की चुदाई आराम से करने लगा. बीच-बीच में मैं उसकी कमीज को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को भी मसल रहा था.</p>
<p>मसलने के कारण उसकी देसी चूची टमाटर के जैसे लाल हो गये थे. लंड को बुर में लेते हुए अब उसको भी चुदाई का मजा आने लगा था. उसके मुंह से धीरे धीरे कामुक आवाजें निकल रही थीं और मेरा लंड गप्प गप्प करके उसकी बुर में जा रहा था. उसकी बुर काफी गीली हो गई थी.</p>
<p>दस मिनट तक मैं उसका बुर चोदन करता रहा. फिर मैंने उसको उठा दिया और उसको डॉगी स्टाइल में झुकने को कहा. लेकिन वो मना करने लगी. उसके बाद मैंने फिर से उसको अपने नीचे ही लिटा लिया और ऐसे ही उसकी बुर की चुदाई करने लगा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में कस कर पकड़ने लगी और उसकी बुर मेरे लंड पर कसने लगी. शायद वो उस समय झड़ रही थी. उसका पानी निकलने से चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी और कुछ ही धक्कों के बाद फिर मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों शांत हो गये. लेकिन मेरा मन अभी नहीं भरा था. मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसके होंठों को चूसता रहा. मेरी गांड नंगी थी और वो मेरे नीचे पड़ी हुई थी. उसके होंठों को चूसते हुए मेरा लंड दस मिनट के बाद फिर से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैंने दोबारा से बुर चुदाई करने के लिए कहा तो वो मना करने लगी. मैंने उसको बहुत मनाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. फिर हम दोनों उठ गये. लेकिन मेरा लंड अभी तना हुआ था.</p>
<p>मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा लेकिन उसने लंड चूसने से भी मना कर दिया. फिर मेरा मायूस सा चेहरा देख कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरे लंड की मुठ मारने लगी.<br />
उसके कोमल हाथों में जाकर मेरा लंड फिर से तनतना गया और मुझे मजा आने लगा. वो मेरे लंड की मुठ मारती रही और मैं उसके चूचे दबाता रहा. उसकी चूमता और काटता रहा.</p>
<p>पांच मिनट के बाद फिर से मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी मार दी. उसका हाथ मेरे वीर्य से सन गया. मैंने उसको एक गंदा सा कपड़ा दिया और उसने अपना हाथ साफ कर लिया. फिर मैंने भी अपने लंड को पोंछ दिया और पैंट पहन ली.</p>
<p>मगर वो कहने लगी कि उसको अभी भी बुर में दर्द हो रहा है.<br />
फिर मैंने धीरे से उठ कर उसके लिए एक दर्द की गोली लाकर दी. गोली खा कर वो अपने घर चली गई.</p>
<p>उसके बाद तो लगभग हर रोज ही हम चुदाई के मौके ढूंढने लगे. फिर तो जब भी मौका लगता था मैं उसकी बुर मार लेता था. आज उस घटना को इतना वक्त बीत चुका है और वो अभी भी मुझसे अपनी बुर चोदन करवाती है. मैं भी जमकर उसकी बुर चोदता हूं. मैंने दबा-दबा कर उसके चूचों को काफी बड़ा कर दिया है.</p>
<p>अगली देसी कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने मोनिका की छोटी बहन की बुर चोदन करके उसका भी उद्घाटन किया. आप कमेंट करके बताना कि आपको मेरी चुदाई की देसी कहानी कैसी लगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
