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	<title>XXX Kahani &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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	<title>XXX Kahani &#8211; Kahani18</title>
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		<title>मेरी बहन की चुदाई की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:15:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने? दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने <a title="मेरी बहन की चुदाई की कहानी" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/bahan-ki-chudai-ki-kahani/" aria-label="Continue reading मेरी बहन की चुदाई की कहानी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह बहन की चुदाई की कहानी तब की है जब मैंने उसे एग्जाम के लिए दूसरे शहर ले गया. वहां मैंने अपनी बहन का जो रूप देखा, मैं हैरान रह गया. क्या देखा था मैंने?<br />
<span id="more-340"></span></p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम अभि है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी बहन का नाम अंतरा है. वो दिखने में सांवली है. उसकी हाईट ज्यादा तो नहीं है पर उसके मम्मे बड़े बड़े हैं. उसके मम्मों को देख कर मैं खुद रोज उसके नाम की मुठ मारता हूँ.</p>
<p>अंतरा के एग्जाम चल रहे थे तो उसे परीक्षा दिलवाने लेकर मुझे जाना था. कुल 7 दिनों के एग्जाम थे और परीक्षा केंद्र घर से दूर होने के कारण हम लोगों ने वहीं एक रूम किराये पर ले लिया था. </p>
<p>रूम में पलंग आदि नहीं था, नीचे ही सोने की व्यवस्था थी. रूम के बगल वाले रूम में भी 4 लोग एग्जाम देने आए हुए थे. वे चारों 20-21 साल के ही रहे होंगे. </p>
<p>पहला दिन का एग्जाम हो गया और उसी शाम तक उन चारों लड़कों से मेरी दोस्ती हो गई. चारों लड़कों ने कोई सैटिंग की हुई थी, जिसके कारण उनको एग्जाम में आने वाले प्रश्न उत्तर पहले ही मिल जाते थे. वो सब अपने एग्जाम सही करके आते थे. </p>
<p>दूसरा दिन भी निकल गया. शाम को उन चारों में से एक ने बताया कि मैं आपको प्रश्न और उत्तर दे दूंगा. </p>
<p>ये सुन कर मेरी उन लोगों से और भी अच्छी दोस्ती हो गई. वो मुझे भैया बुलाते थे और अंतरा को नाम से बुलाते थे. </p>
<p>अंतरा उन सबमें छोटी थी और अब उन चारों लड़कों के साथ घुल मिल गई थी. शाम को चारों बैठ कर अंतरा के साथ पढ़ते थे. </p>
<p>आखिरी एग्जाम से एक दिन पहले की बात है. उस दिन रविवार था, इसलिए छुट्टी थी. सब लोग घर पर ही थे. वे चारों मेरे रूम में आकर अंतरा के साथ पढ़ाई करने लगे.</p>
<p>उन लोगों को पढ़ता देख कर मैं अंतरा को बोल कर निकल गया कि मैं मूवी देखने जा रहा हूँ. बस 3 से 4 घंटे में आ जाऊंगा. तुम पढ़ाई करके आराम कर लेना.<br />
यह कह कर मैं चला गया. पर मुझे टिकट नहीं मिली और मैं कमरे के लिए वापस निकल आया.</p>
<p>जब मैं कमरे पर वापस आया, तो घर का दरवाजा बाहर से बंद था. मैं अन्दर गया, तो अंतरा नहीं थी. मैंने सोचा बाथरूम गई होगी या पढ़ने गई होगी. </p>
<p>मैं आराम करने लगा. जब 15-20 मिनट हो गए, अंतरा नहीं आई तो मैं समझ गया कि उन लड़कों के साथ पढ़ाई कर रही होगी. मैं उठकर अंतरा को देखने चला गया. </p>
<p>जब मैं लड़कों के पास गया, तो दरवाजा अन्दर से बंद था, मुझे शक हुआ और मैं अन्दर झांकने की कोशिश करने लगा. पर मुझे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था. </p>
<p>तब मुझे याद आया कि बाथरूम से उनका रूम नजर आता है. मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और बाथरूम के एक छेद से अन्दर देखने लगा. उस छेद से सब कुछ साफ नजर आ रहा था क्योंकि बाथरूम का वो छेद थोड़ा बड़ा था.</p>
<p>जब मैंने अन्दर देखा तो सामने बेड था. बेड पर तीन लड़के पूरी तरह नंगे बैठे थे और अपने अपने लंड सहला रहे थे, पर अंतरा कहीं नजर नहीं आ रही थी. </p>
<p>मैं मोबाइल से उनकी रिकॉर्डिंग करने लगा. तभी मेरी नजर लड़कों पर पड़ी, जो एक तरफ देखे जा रहे थे. मैंने भी उसी तरफ देखा, तो मैं दंग रह गया. </p>
<p>मेरी अपनी सगी बहन अंतरा पूरी नंगी थी और टेबल पर अपनी बुर चुदाई करवा रही थी. जो लड़का अंतरा को चोद रहा था, उसका नाम सोनू था. वो अंतरा की चूची को अपने मुँह में रख कर एक बच्चे की तरह चूस रहा था. वो एक चूचे को चूस रहा था और एक हाथ से उसके दूसरे चूचे को दबाने में लगा था. उसने अंतरा का एक दूध अपने मुँह में पूरा भर लिया था और जबरदस्त तरीके से चुसाई करने में लगा था.</p>
<p>तभी मैंने देखा कि वो अपने दूसरे हाथ को अंतरा की चूत पर ले गया और अपनी उंगली उसकी बुर में घुसा दी. उस लड़के की उंगली गीली हो गई. उसने अपनी उंगली को निकाल कर देखा कि मेरी बहन खुद ही चुदाई को उतावली हो रही थी.</p>
<p>फिर मैंने देखा कि अंतरा ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं. सोनू ने अंतरा की बुर के दाने को मसलना चालू कर दिया. अंतरा के मुँह से मस्त सिसकारियां निकलने लगीं.</p>
<p>लड़के ने उसे उल्टी तरफ घुमा कर उसे घुटनों के बल पर कर दिया, वो अंतरा को डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. उसने अपने तने हुए लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख कर सुपारे से उसकी बुर के दाने को रगड़ने लगा. </p>
<p>अंतरा के मुँह से जोरदार सिसकरियां निकल रही थीं. तभी सोनू ने अपने मूसल जैसे लंड को हल्का सा धक्का दिया, तो उसके लंड का सुपारा भीतर चला गया. </p>
<p>अंतरा के मुँह से ज़ोर से मतवाली सिसकारी छूटी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. सोनू का लंड धीरे धीरे अंतरा की बुर में एकदम भीतर घुस गया.</p>
<p>मुझे अपनी बहन की चुदाई और उसके मजे लेने पर बहुत गुस्सा आ रहा था. अंतरा के मुँह से दर्द और काम से मिश्रित कराह निकल रही थी. थोड़ी ही देर बाद वो खुद अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.</p>
<p>दूसरे लड़के भी चुप नहीं बैठे थे, वो भी मैदान में कूदने को तैयार थे. एक ने लंड को अंतरा के मुँह के पास जाकर उससे लंड को मुँह में लेकर चूसने को कहा. अंतरा फट से उसके लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी. उधर सोनू अब फकफ़ाक धक्के लगाते हुए झड़ने को हो रहा था. उसके लंड के गोटे सीधे अंतरा के चूतड़ों पर जा कर ढोलक की तरह ठाप लगा रहे थे. </p>
<p>मेरी बहन के मुँह से जोरदार सीत्कार निकल रही थी, जैसे उस की लंड से चुदाई में मस्त सीटियां बज रही हों. सोनू अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर से धकेलता था, जिससे अंतरा की चीख निकल जाती थी. </p>
<p>इधर अपनी सगी बहन की चुदाई देख कर मेरा मन कर रहा था कि मैं भी अभी अंतरा को चोद दूँ. आगे अंतरा के मुँह में एक लंड से पूरा भरा हुआ था. </p>
<p>तभी सोनू ने आगे हाथ बढ़ा कर अंतरा के मम्मों को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. एकाएक सोनू के धक्कों की रफ्तार बहुत तेज हो गई और उसने अंतरा की चुत में ज़ोर से अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी. </p>
<p>अंतरा की आंखें मस्ती से मुंद गई थीं. सोनू ने अंतरा चुत को चाट कर साफ कर दिया. </p>
<p>अब तीसरा लड़का आकाश, जिसका लंड का सर आसमान पर उठा हुआ था, वो आया और अंतरा की चुत में लंड घुसाने लगा. </p>
<p>उसने अपने लंड को अंतरा की चूत के दरवाजे पर रखा और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. उसका लंड पूरा का पूरा अंतरा की चुत की जड़ में समा गया.</p>
<p>अंतरा ज़ोर ज़ोर से आनन्द से सिसकरियां भर रही थी. </p>
<p>अब उस लड़के का सुनो, जिसका लंड अंतरा चूस रही थी, उसके मुँह से एकाएक आह की आवाज निकली और उसने अपना गाढ़ा सफेद वीर्य अंतरा के मुँह में छोड़ दिया. अंतरा लंड से निकले वीर्य को स्वाद लेकर पीने लगी. फिर भी कुछ माल उसके मुँह से बाहर आकर उसके गालों पर बहने लगा. </p>
<p>मुझे समझ आ गया कि मेरी बहन पक्की चुदक्कड़ है.</p>
<p>उस लंड चुसाने वाले लड़के के हटते ही चौथा लड़का मुन्ना, जिसका लंड सबसे बड़ा था, वो आ गया. उसने तीसरे लड़के की जगह ले ली और अंतरा उसके लंड को चूसने लगी.</p>
<p>अब जो लड़का आकाश अंतरा को चोद रहा था, वो पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था. उसने अंतरा के गोल गोल चूतड़ों को अपनी मुट्ठी में भर रखे थे. वो पूरी ताकत और वेग से चूत में धक्के लगा रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद वो भी झड़ गया और अंतरा की चूत पूरी वीर्य की झील हो गई. </p>
<p>चौथे लड़के मुन्ना ने अंतरा के मुँह को आज़ाद कर दिया. उसने अंतरा को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया. उसकी टांगें अपने कंधे पर रखीं और फ्रंट फॉर्वर्ड पोज़िशन में लंड को अंतरा की चुत के दरवाजे पर रख दिया. इसके बाद उसने एक बड़े ही ज़ोर का धक्का दे मारा. उसका मूसल किस्म का लंड पहले झटके में ही आधे से ज्यादा चूत के भीतर चला गया.</p>
<p>अंतरा की एक तेज चीख निकल गई. लेकिन तीन लंड खाने के बाद अंतरा की चूत खुल गई थी. इसलिए अंतरा ने भी अगले ही अपने हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर नीचे से एक जोर का जबावी धक्का लगा दिया. इस धक्के से लड़के का बाकी लंड भी एकदम जड़ तक समा गया.</p>
<p>फिर उस मुन्ना नाम के लड़के ने अपने दोनों हाथ अंतरा के चूतड़ों के नीचे ले जा कर उनको तकिया जैसा सहारा दे दिया और ज़ोर ज़ोर उसकी चुत का बाजा बजाना शुरू कर दिया. </p>
<p>अंतरा चुदाई के आनन्द के मारे पागल हो गई और अजीब अजीब सी आवाजें उसके मुँह से निकलने लगी थीं. </p>
<p>मुन्ना ने अंतरा को चोदने में पूरा 30 मिनट का टाइम लिया. फिर वो भी आख़िर ‘आह आह..’ करते हुए उसके ऊपर ढेर हो गया. उसने अपने लंड का ढेर सारा गाड़ा वीर्य एक पिचकारी के रूप में अंतरा की चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>अंतरा इस दौरान कई बार अपना पानी निकाल चुकी थी. उसे सबके लंड और चूस करके साफ़ करना पड़ा. सब लड़कों ने भी अंतरा की चुत को चाट कर साफ कर दिया. इसी बीच अंतरा फिर से गर्म होकर झड़ भी गई. </p>
<p>मैंने ये सब अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया था. जब मेरी बहन की चुदाई पूरी हो गई, तो मैं वहां से निकल गया. </p>
<p>एक घंटे बाद जब मैं वापस आया, तो अंतरा अपने रूम में बैठ कर पढ़ रही थी. मैंने अंतरा को कुछ नहीं बोला. </p>
<p>रात को मैंने उसे वीडियो दिखा दिया, वो एकदम से डर गई. वो बोली- भैया माफ कर दो.. अब ऐसा नहीं होगा.<br />
मैं- एक शर्त पर माफ कर दूंगा.. तुम्हें मुझसे चुदना होगा.</p>
<p>वो शर्मा गई. मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया.<br />
वो बोली- मैं तो आपसे न जाने कबसे चुदने के लिए मरी जा रही थी.<br />
मैंने पूछा- क्यों?<br />
वो बोली- मैंने आपका लंड देखा है, ये बहुत बड़ा है.<br />
मैंने कहा- तो फिर कभी बोला क्यों नहीं?<br />
वो बोली- मैं शर्म रही थी कि कहीं आप नाराज न हो जाओ.</p>
<p>मैंने कहा- मेरी प्यारी बहन की चुदाई कब से चल रही है?<br />
वो बोली- आज दूसरी बार किया है.<br />
मैंने पूछा- पहली बार किसके साथ किया था.<br />
वो बोली- अब इस सवाल का जबाव बहुत लम्बा है, आपको बाद में सब बता दूंगी.</p>
<p>उसने अपनी सील टूटने का किस्सा मुझे बाद में बताने का वायदा किया. मैं अपनी बहन की सील टूटने की चुदाई की कहानी को आप तक जरूर भेजूँगा.</p>
<h2>मेरी बहन की चुदाई की मैंने</h2>
<p>उसने कहा- अब देर न करो भैया. मुझे बड़ी जोर से मस्ती चढ़ रही है.</p>
<p>मैंने अंतरा की चूत को सहलाया और अपनी बहन को नंगी करके चित लिटा दिया. फिर मैंने अपना लौड़ा निकाल कर अंतरा की चूत में घुसाने की कोशिश की.</p>
<p>लेकिन मेरा लंड उन चारों लौंडों से कम से कम दो इंच लम्बा था और मोटा भी बहुत ज्यादा था. इसलिए मेरा थोड़ा सा ही लंड अन्दर गया था. अंतरा को उससे दर्द तो हुआ, लेकिन वो चूंकि दिन में चुद चुकी थी, इसलिए उसने ज्यादा चिल्लपों नहीं की. मगर मुझे उसकी कसी हुई चूत में लंड पेलने से दर्द होने लगा था.</p>
<p>तब भी मैं किसी तरह से अंतरा की चूत में लौड़ा घुसाने लगा और कामयाब भी हो गया. अंतरा ने भी लंड लेने में मेरी मदद की. उसको खुद ही मेरा लंड लेने में मजा आ रहा था. मैंने अपनी बहन की चूचियां दबाईं और उसके होंठ भी चूसे. </p>
<p>उसके बाद मैं पूरा लंड पेल कर अपनी बहन अंतरा की झटके देते हुए चुदाई करने लगा. अंतरा की चूत अभी भी काफी टाइट थी. बाद में मैंने अंतरा की चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया था. मैं अपना लंड अंतरा की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मुझसे चुदने का खूब मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं अंतरा की चूचियां दबाने लगा, वो भी मुझे चूमने लगी. फिर मैं अपना सुपारा अंतरा की चूत तक बाहर निकाल कर जोर जोर से उसको पेलने लगा. मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर अंतरा को चूसने को बोला. अंतरा ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी.</p>
<p>अंतरा के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया. कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था. मैंने बिना अंतरा को बताए ही उसके मुँह में ही रस को निकाल दिया. अंतरा भी उसको जूस की तरह पी गई.</p>
<p>फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे. कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे.</p>
<p>अब अंतरा ने कहा- अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी पूरी आग बुझा दो.</p>
<p>मैंने अपना लंड अंतरा की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. मेरा लंड अंतरा की चूत में पूरा अन्दर तक चला गया. </p>
<p>अंतरा जोर से चिल्ला उठी- आऊ.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह. </p>
<p>मैंने अंतरा को बहुत जोर से जकड़ लिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. अंतरा जब चुप सी हुई.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.</p>
<p>अंतरा और जोर से चिल्लाने लगी, मैंने उसकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और अंतरा के होंठों को किस करने लगा. होंठों को दबाने से अंतरा की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई. </p>
<p>उस दिन मैं अंतरा को बीस मिनट तक चोदता रहा. इस दौरान अंतरा दो बार झड़ चुकी थी. फिर मैंने अपना सारा रस अंतरा की चूत में ही छोड़ दिया.</p>
<p>मेरी बहन को अपने भाई के साथ चुदाई में बहुत मजा आया. हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे. हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला. </p>
<p>मुझे अंतरा को और चोदने का मन था, पर इस वक्त हमारी बहन की चुदाई बीच में ही छूट गयी पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा. </p>
<p>दूसरी बार में अंतरा बिना कपड़ों के थी क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था. मैं भी अपने कपड़े खोल कर अंतरा की चुदाई के लिए रेडी था. अंतरा ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया. </p>
<p>उस रात को हमने पूरी रात में तीन बार बहन की चुदाई का मजा लिया. फिर अंतरा ने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>आज अंतरा तो इतनी ज्यादा खुश थी कि वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी. ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा.</p>
<p>इसके बाद बहन की चुदाई का कार्यक्रम आज तक चल रहा है. मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अंतरा की चूत को शांत जरूर कर देता हूँ. जब भी अंतरा अपनी चूत की खुजली से ज्यादा परेशान हो उठती है.. तो मैं उसे कहीं बाहर ले जाकर उसकी चूत चोद कर उसे शांत कर देता हूँ.</p>
<p>आप मुझे मेरी बहन की चुदाई की कहानी पर अपने मेल जरूर भेजें.<br />
[email protected]</p>
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		<item>
		<title>ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:55:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं. आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल का <a title="ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/behan-ki-chut-me-lund/" aria-label="Continue reading ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं.</p>
<p>आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल  का था और बारहवी में पढ़ रहा था। उन दिनों मैं अपने मामा के घर पर रह रहा था. मुझे क्या पता था कि मामा के यहाँ मैं सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं जा रहा बल्कि एक ऐसे रिश्ते से जुड़ने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन में एक नया मोड़ ले आएगा। </p>
<p>मेरे मामा थोड़े गरीब हैं। उनके घर में केवल एक कमरा अपने बड़े बेटे और बहू के सोने के लिए और एक कमरा बाकी लड़कियों और मामा मामी के सोने के लिए है। उनकी 3 बेटियाँ हैं जिसमें से सबसे बड़ी का नाम पूनम था। वो मुझसे 4-5 साल बड़ी थी इसलिए मैं उनको दीदी कहता था। भगवान ने उनको बहुत सुंदर बनाया है।</p>
<p>मैंने हमेशा उनको दीदी ही तो माना था। आखिर मामा की लड़की भी तो बहन है। ऊपर से उम्र में 4-5 साल बड़ी मगर उनकी हंसने की अदा, उनके गोर चेहरे की मुस्कराहट, उनके गुलाबी होंठ, उनके तीखे नैन नक्श मुझे कम से कम उस समय तक तो नहीं भाये थे जब तक आस-पड़ोस के लडकों में उनको पाने की ललक न देखी थी।</p>
<p>अब एक साथ रहने के चलते हम सब भाई-बहनों का साथ-साथ उठाना बैठना, लूडो खेलना होता था। एक सादगी भरी हसीन अदा उनकी हर हरकत में दिखती थी।<br />
पढ़ाई में लड़कियों से पाला बहुत पड़ा था लेकिन शायद उस समय तक एक लड़की के छूने पर जो अहसास अब हो पाया था वो पहले कभी नहीं हुआ था।</p>
<p>मैं अक्सर उनको सताया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई जानकर बहुत तंग किया करती थी और हम दोनों भाई-बहन ऐसे ही मस्ती करते रहते थे. हम दोनों के बीच में ऐसी ही हल्की-फुल्की शरारतें अक्सर चलती ही रहती थीं.</p>
<p>दीदी मेरा बहुत ख्याल भी रखती थी। लूडो खेलते समय जब एक दो बार उनका हाथ मेरे हाथ से छुआ तो पता चला कि इतना नर्म स्पर्श शायद कभी महसूस नहीं किया था मैंने। फिर मैं जान बूझकर खेल में चीटिंग करता था और पासा लेने के चक्कर में काफी देर तक उनके हाथों का स्पर्श महसूस करता था।</p>
<p>उनको मेरा शहरी पहनावा बहुत पसंद था। मेरी टाइट फिट टी-शर्ट्स और शर्ट्स उनको मेरी अच्छी फिटनेस दिखाती थी। मुझे भी उनका शहरी लड़कियों की तरह कुरता और लेग्गिंग का तालमेल गजब का लगता था।</p>
<p>धीरे-धीरे मेरा ध्यान उनके ऊपरी उभार पर जाने लगा। मेरी चोर नजरें अक्सर उनके उभारों को देखने की ताक में रहने लगी थीं। जब भी हम लोग लूडो खेलने बैठते तो मेरा ध्यान उनके उभारों और उनकी जांघों पर जाता था। जांघों का गदरायापन अक्सर मेरी उँगलियों को बुलाता था और मैं उनकी जाँघों पर अपनी उँगलियां चलाने के लिए मचल जाता था। मैं कई बार उनके हाथों का स्पर्श पाकर रोमांचित हो जाता था। उनके हर अंग से चिपका उनका कुर्ता और कसी लेग्गिंग मुझे आकर्षित करने लगी थी।</p>
<p>एक दिन मैं मामा के अन्दर वाले कमरे में सो रहा था। दीदी भी शायद मुझे सोता हुआ जानकर बेफिक्र सी होकर नहा रही थी। मामा की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से नहावन बस एक बंद दरवाजे के पीछे बना था जिसमें से होकर अन्दर वाले कमरे का रास्ता था जहाँ मैं सो रहा था.</p>
<p>गर्मियों के दिन थे इसलिए गर्मी की वजह से मेरी आँख खुली। मैं जैसे ही उठ कर बाहर निकला मेरी आँखें खुली रह गयीं। दीदी का पूरा यौवन मेरे सामने था। उनका पूरा गोरा नंगा जिस्म देख कर मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा।<br />
दीदी के सिर से गिर रहा पानी उनके लबों को, गर्दन को, उनके मखमली बूब्स को, उनकी पतली कमर को भिगोता हुआ और उनकी जांघों से होता हुआ योनि के रास्ते अपना सफर तय कर रहा था। </p>
<p>कुछ समय के लिए मुझे पानी से जलन होने लगी। मैं भी पानी की तरह उनके नर्म गुलाबी लबों को, उनकी गर्दन को, उनके बूब्स को, उनकी कमर को, पेट पर बनी सुंदर सी नाभि को, उनकी मुलायम जाँघों को और उस योनि को छूना चाहता था।</p>
<p>मेरा मन दीदी को अपनी आगोश में भरने को कर रहा था। एक 23-24 साल की लड़की की भरपूर जवानी, वो हसीं जिस्म, पूरे दूध की तरह सफ़ेद जिस्म पर केवल दो कपडे़, उस समय दीदी को किसी फिल्मी मॉडल की तरह दिखा रहा था। शायद मेरे अन्दर की वासना मेरी पैंट में मेरे खड़े हो रहे लंड से पता चल सकती थी। </p>
<p>मैं उनकी जाँघों के बीच में अपना हाथ रखकर उस नर्म-मुलायम और मखमली अहसास को महसूस करना चाहता था। अचानक दीदी का नहाना पूरा हुआ और मैंने नजरें बचाते हुए दबे कदमों से खुद को वापस मोड़ा और धीरे से चल कर अपने कमरे में वापस आ गया.</p>
<p>मैंने अपनी सोच पर काबू करने की कोशिश की और कुछ दिनों में मेरे दिमाग से गलत विचार जाने लगे। लेकिन रह-रह कर दीदी का यौवन मेरे अन्दर की वासना को फिर जगा देता था। वो जब भी मुस्कुरा कर देखती तो मेरा मनन कहता कि उनके लबों को लबों से भिगो दूँ। उनकी मस्त जवानी को तार तार कर दूँ और उनके जिस्म से खेलूं। मैंने किसी तरह खुद पर संयम रखा।</p>
<p>होनी को मैंने टालने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन होनी तो होकर ही रहती है.</p>
<p>गांव की लचर बिजली व्यवस्था ने भी होनी का ही साथ दिया. मामा के गांव में बिजली दिन में सुबह 4 से 11 बजे और फिर शाम को भी 4 से 11 बजे के बीच में ही आती थी. बाकी के समय में बिजली गुल रहती थी. घर में केवल एक कमरा था जिसमें एक तख्ता और 3 चारपाई आपस में सटकर बिछायी गयी थी। मैं दीदी की चारपाई के बगल वाले तख्त पे सोता था। </p>
<p>उम्र में 4-5 साल छोटा होने से किसी ने मेरे बारे में गलत न सोचा होगा; इतना तो मैं उस वक्त भी जानता ही था।</p>
<p>उस रात को जब हम सब सो रहे थे तो उस समय रात में लाइट न होने से मुझे गर्मी लगने लगी और नींद खुल गयी। मैं हाथ वाला पंखा चलाने लगा तो उसी समय दीदी मेरे हाथ से पंखा लेकर खुद ही लेटे लेटे मुझे हवा करने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि उनका हाथ दर्द कर रहा होगा इसलिए मैंने उनके हाथ से लेने के लिए हाथ चारपाई पर रखा तो उनकी बांह पर हाथ पड़ा। इतनी नर्म और मुलायम बांह पर हाथ पड़ने से मैं कुछ संकुचाया लेकिन पंखा लेने के लिए हाथ पूरी बांह पर फेरते हुए हथेली तक ले गया और पंखा लेकर चलाने लगा। </p>
<p>दीदी ने पंखा वापिस लेने की जबरदस्ती की लेकिन इस बार मैंने उनकी हथेली में अपनी हथेली फंसाकर उनको पंखा नहीं लेने दिया।</p>
<p>लेकिन न मैंने दीदी का हाथ छोड़ा और न ही दीदी ने छुड़ाया। मैं उनका हाथ छोड़ना भी नहीं चाहता था क्यूंकि मेरी नस-नस में अब दीदी को छूते रहने की लालसा थी। पूरी रात दीदी मेरे हाथों पर प्यार की थपकी (जैसे छोटे भाई को दी जाती है) देती रही और मुझे पता नहीं कब नींद आ गयी। </p>
<p>अक्सर रात में दीदी का हाथ मेरे हाथों में रहता था और दीदी के पूरे बदन को छूने की लालसा मेरे मन में हर दिन बढ़ती ही जा रही थी।</p>
<p>लेकिन यह आनंद भरा खेल उस रात को गड़बड़ा गया जब मामी की वजह से मुझे तख्ते से हटकर दूसरी चारपाई पर जाना पड़ा। उस कमरे में 3 चारपाई और एक तख्ता एक साथ एक आयताकार रूप में एक दूसरे से सटा कर बिछाए हुए थे। उस रात को मैं जिस चारपाई पर गया वो दीदी की चारपाई के विपरीत दिशा में थी। अब दीदी और मेरा सिर एक दूसरे की विपरीत दिशा में था। उस रात को दीदी के सिर में तेज दर्द था. </p>
<p>चूंकि मैं उनसे काफी छोटा था तो मैंने सिर दबाने को कहा. बहुत कहने पर दीदी मान गयी और मैं अपनी चारपाई से ही हाथ पीछे करके उनका सिर दबाने लगा। लगभग 15 मिनट बाद जब दीदी और सब लोग सो गए तब मेरी उँगलियाँ दीदी के माथे से होते हुए दीदी के गालों पर पहुंचने लगीं। ऐसा लगने लगा था कि शायद अब मेरी उँगलियाँ किसी रुई के गुच्छे में चली गयी हों। मैंने उनके गाल पर काफी देर तक उँगलियाँ फेरीं और फिर सरकाते हुए उनके गले तक पहुंचा। </p>
<p>मेरे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी क्यूंकि ठीक उसी समय दीदी थोड़ा सा ऊपर खिसकी और मेरी उँगलियाँ उनके गले से सरकते हुए थोड़ा सा नीचे चली गयी और एक मलमल से उठे हुए उनके बूब्स पर पहुँच गयीं।<br />
मेरी उँगलियाँ कुछ कांपी लेकिन तब तक अपनी वासना से इतना मजबूर हो चुका था मैं कि कब उनके एक बूब्स को पूरा हाथ में भर कर हल्का हल्का दबाने लगा मुझे इस बारे में सोचने का मौका भी नहीं दिया मेरे मन में उठ रहे वासना के वेग ने।</p>
<p>वासना जैसे-जैसे बढ़ती गयी उनके उरोज पर मेरा दबाव और पकड़ बढ़ती गयी। थोड़ी देर बाद अहसास हुआ कि टाइट सूट होने की वजह से उनके बूब्स पर हाथ फिराने में जो दिक्कत हो रही थी वो अचानक सूट के ढीला होने से दूर हो गयी। मेरा हाथ उनके बूब्स की घाटियों में पूरा घूमने लगा।</p>
<p>तभी एहसास हुआ कि मेरे हाथों पर उनके होंठों के चुम्बन हुए जिसने मेरे लंड को अपनी उत्तेजना के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया। जिसका सीधा मतलब था कि मैं यौवन की प्यास को जगा चुका था। </p>
<p>मेरे शरीर में उनके प्रति इतना आकर्षण बढ़ गया कि कब मैं अपनी चारपाई से उठकर उनकी चारपाई पर पहुँच गया पता ही न चला। उस समय मैं यह भी भूल गया था कि भले ही घर में पूरा अँधेरा था लेकिन घर में और लोग भी तो मौजूद थे।</p>
<p>बेलगाम घोड़ी होती है ये हवस … एक बार दौड़ना शुरू किया तो दौड़ाती ही चली जाती है.<br />
मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था।</p>
<p>मैं जैसे ही दीदी की चारपाई पर पहुंचा, उन्होंने भी अपनी आगोश में मुझे भर लिया। मेरा सिर उनके उभारों के मखमली और सबसे मुलायम जगह पर था।</p>
<p>अपने मुंह को दीदी के उभारों में घुसा कर उस पहले अहसास के आनंद में ऐसा डूबने लगा कि मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि अब और गहराई में उतरना है. पहली बार दीदी के उभारों को अपने होंठों से छुआ था इसलिए आनंद की कोई सीमा न थी.</p>
<p>मेरा मन कर रहा था कि अब आगे चलूं, आगे क्या होगा. हवस ने मेरे लंड का बुरा हाल कर दिया था और मेरा लंड को फाड़ने के लिए बार-बार पैंट में ही दीदी की जांघों पर धक्के पर धक्के दिये जा रहा था. मगर अभी तक ये समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना है. पहला अनुभव था किसी लड़की के बदन के स्पर्श का. </p>
<p>मगर दीदी को शायद थोड़ा ज्यादा तजुरबा था. उन्होंने मेरे बालों को सहलाया और फिर मेरी गर्दन को हल्के से उठा कर मेरा माथा चूम लिया. बस अब मुझे आगे का रास्ता भी दिख गया था. मैंने अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसते हुए खुद को थोड़ा और ऊपर घसीटा और अपने होंठों को दीदी के होंठों पर रख दिया.</p>
<p>दीदी के लबों से लब मिले तो जैसे चाशनी में डूबी जलेबी का स्वाद जबान को मिलने लगा. मगर पहली बार था इसलिए ये भी नहीं जानता था कि किस कैसे करते हैं. </p>
<p>एक दबे हुए डर के साथ ही आनंद की उन लहरों में दीदी के होंठों को चूसने लगा. जैसा जो भी समझ आ रहा था बस हम दोनों करने में लगे हुए थे. शायद दोनों के ही मन में ये डर था कि अगर चुम्बन की आवाजें बगल में सो रहे लोगों के कानों में पड़ गयीं तो लेने के देने न पड़ जायें इसलिए दोनों ही सावधानी के साथ एक दूसरे को भोगने की राह पर आगे बढ़ रहे थे. </p>
<p>दीदी ने मुझे पूरी तरह अपनी आगोश में भर रखा था और मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रहा था. मेरी छाती दीदी के बूब्स पर कसी हुई थी और लंड था कि दीदी की जांघों में छेद ही करने वाला था.</p>
<p>तभी दीदी ने नीचे से हाथ ले जाकर मेरे लंड को छुआ तो हवस में ऐसी लपटें मेरे जिस्म में उठीं कि मैंने दीदी के होंठों को जोर से काट लिया और शायद दर्द के मारे उनके हल्की सी टीस निकल गयी. लेकिन उन्होंने अपनी आवाज को होंठों से बाहर न आने दिया और अंदर ही दबा लिया. </p>
<p>मैंने दीदी की पजामी पर हाथ मारा तो दीदी की जांघों के बीच में उठी हुई सी वो आकृति हाथ को छू गई.<br />
किसी भी योनि को छूने का यह मेरा पहला अहसास था … बहुत ही कामुक और बेहद आनंददायक।</p>
<p>मैंने एक दो बार दीदी की योनि को उनकी पजामी के ऊपर से ही मसला और फिर उनकी जांघों से पजामी को नीचे खींचने की कोशिश करने लगा.<br />
दीदी भी पूरे उफान पर थी इसलिए मेरी मंशा को भांप कर दीदी ने भी अपनी गांड हल्की सी उठा दी और दीदी की बिना पैंटी वाली योनि पर मेरा हाथ जा लगा.</p>
<p>आह्ह … पहली बार नंगी चूत को छूकर ऐसा तूफान उठा कि मुझसे रहा न गया और मैंने दीदी की योनि में उंगली ही डाल दी. दीदी हल्की सी उचकी लेकिन बिना आवाज किये.<br />
हम दोनों भाई बहन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे. आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी.</p>
<p>दीदी ने मेरी पैंट की चेन खोल दी और फिर मैं समझ गया कि दीदी मेरे लंड का स्पर्श पाना चाहती है. मैंने भी लंड को बाहर निकाल लिया और दीदी के हाथ में दे दिया.</p>
<p>नर्म हाथ में जाते ही लंड में ऐसी लहर उठी कि एक बार तो लगा कि स्खलन हो ही जायेगा लेकिन किसी तरह खुद को रोका और एकदम से दीदी का हाथ हटा दिया. दीदी भी जान गयी कि शायद मैं चरम पर पहुंचने के करीब हूं इसलिए उन्होंने भी दोबारा लंड को छूने की कोशिश नहीं की. </p>
<p>मैंने दीदी की गीली चूत से उंगली निकाली और उसको अपने मुंह में भर लिया. मुझे नहीं पता था कि ये सब करना भी होता है या नहीं, मगर जो भी हो रहा था अपने आप ही होता चला जा रहा था. दीदी का रस चखने के बाद अब उनकी योनि को अपने लंड का रस देने की बारी थी. अब और कुछ सूझ ही नहीं रहा था.</p>
<p>मैंने दीदी के कान के पास अपने होंठ ले जाकर फुसफुसाते हुए पूछा- डाल दूं क्या अंदर?<br />
दीदी ने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा कर अपनी मंजूरी दे दी.</p>
<p>मैंने दीदी की चूत को टटोला और अपने लंड को दीदी की योनि पर फेरते हुए रख लिया. कुछ नहीं पता था कि लिंग योनि में कैसे डाला जाता है. एक बार में ही चला जाता है या कई बार में जाता है. कितना जोर लगाना चाहिए और कब लगाना चाहिए.</p>
<p>मगर सेक्स तो करने से ही आता है. मैंने दीदी की योनि पर लंड को लगाकर हल्का सा धक्का दिया तो लंड फिसल गया. लंड भी कामरस छोड़ कर पूरा टोपा चिकना कर चुका था और उधर दीदी की योनि भी पूरी भीगी पड़ी थी. </p>
<p>मैंने दोबारा से लंड को योनि पर सेट किया और एक धक्का मारा. दूसरी बार भी लंड फिसल गया. अब दीदी को लगा कि उनको ही आगे आना पड़ेगा. दीदी ने मेरे लंड को अपने मुलायम से हाथ में पकड़ कर अपनी योनि के द्वार पर सेट किया और मुझे अपनी तरफ खींच कर ये बताया कि अब धक्का लगा.</p>
<p>मैंने धक्का दिया तो मेरा लंड दीदी की चूत में उतर गया. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … क्या बताऊं यारों, अपनी ममेरी बहन की चूत में लंड देने का वो पहला अहसास … आज भी उस पल को याद करते ही मुट्ठ मारने का मन कर जाता है.</p>
<p>दीदी की योनि में लंड को डालकर मैंने धीरे-धीरे अपने बदन को दीदी के बदन पर घिसना शुरू किया. धक्के कैसे लगाये जाते हैं ये भी मैं बाद में ही सीख पाया लेकिन उस दिन तो बस जैसे तैसे करके मुझे दीदी की योनि का रस पीना था.<br />
सेक्स का मजा कैसे लिया जाता है वो सब मैंने बाद में ही सीखा. </p>
<p>मेरी जवान ममेरी बहन की योनि इतनी गर्म और गीली थी कि मैं दो मिनट से ज्यादा उसमें टिक ही नहीं पाया और जब वीर्य निकला तो ऐसा आनंद मिला कि वैसा आनंद दुनिया में कहीं और मिल ही नहीं सकता।<br />
मैंने दीदी की चूत में अपना पूरा लंड खाली कर दिया.</p>
<p>मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं लेकिन दीदी शायद प्यासी रह गई थी. मगर फिर भी दीदी ने प्यार से मेरी पीठ को सहलाया और मुझे अलग होने के लिए कह दिया. </p>
<p>उस रात से हमारे जवान जिस्मों के बीच में जो संबंध बनने की शुरूआत हुई तो फिर हमने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.</p>
<p>एक रोज भाग्य ने भी पूरा साथ दिया और घर में हम दोनों अकेले ही थे. उस दिन मैंने दीदी की योनि को चाटा भी और चूसा भी। मगर सेक्स तो उस दिन भी पांच मिनट से ज्यादा नहीं चल पाया. फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे मैं पारंगत होता गया तो मेरी और दीदी की जवानी खिलती चली गई.</p>
<p>हम दोनों चुदाई का भरपूर मजा लेने लगे. होते-होते बात यहां तक पहुंच गई थी कि दोनों ने भाग कर शादी करने का फैसला तक कर डाला. मगर ऐसा कुछ हो न पाया। फिर मेरी पढ़ाई वहां से खत्म हो गई और मैं अपने घर आ गया.</p>
<p>मगर दीदी के लिए एक प्यास हमेशा ही मन में उठी रहती थी इसलिए बार-बार बहाना करके मामा के घर पहुंच जाता था. दीदी भी मेरी राह में पलकें बिछाये रहती थी. दोनों जब मिलते थे तो ऐसे मिलते थे जैसे सदियों के प्यासे प्रेमी हों.</p>
<p>फिर दीदी की शादी हो गई और हमारे प्यार का सफर भी खत्म हो गया.<br />
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		<title>खेल वही भूमिका नयी-3</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/khel-vahi-bhumika-nayi-part-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:39:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Call Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[अभी तक मेरी फ्री क्सक्सक्स कहानी के दूसरे भाग खेल वही भूमिका नयी-2 में आपने पढ़ा कि मैं नेता के साथ काल गर्ल बन कर सम्भोग कर चुकी थी. मुझे देख कर बाकी के मर्द भी गर्म हो उठे थे. नेता के जाने के बाद रमा के मित्रों ने मेरे साथ सम्भोग करना चाहा. इस <a title="खेल वही भूमिका नयी-3" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/khel-vahi-bhumika-nayi-part-3/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-3">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तक मेरी फ्री क्सक्सक्स कहानी के दूसरे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-2<br />
में आपने पढ़ा कि मैं नेता के साथ काल गर्ल बन कर सम्भोग कर चुकी थी. मुझे देख कर बाकी के मर्द भी गर्म हो उठे थे. नेता के जाने के बाद रमा के मित्रों ने मेरे साथ सम्भोग करना चाहा. इस पर रमा ने मुझे वेश्या के जैसे ही बने रहने को कहा और अभी राज को गुप्त रखने को कहा. मेरी मदमस्त जवानी से लट्टू होकर कमलनाथ मेरे साथ सम्भोग करने लगा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>अब तक के संभोग में मेरे भीतर भी वासना की चिंगारी आग बन चुकी थी और मन में चरम सुख पाने की तीव्र इच्छा होने लगी थी. मैं जल्दी से उसकी गोद में बैठ कर लिंग को योनि में प्रवेश कराते हुए उसकी गोद में उछल उछल कर संभोग को आगे बढ़ाने लगी.</p>
<p>मैंने खुद को उसके कंधों को पकड़ कर खुद को सहारा दिया और अपने घुटने मोड़ कर ऐसे धक्के देने लगी कि उसका लिंग ज्यादा भीतर जाए.</p>
<p>कमलनाथ ने मेरे चूतड़ों को पकड़ लिया और मुझे धक्के लगाने में सहायता करने लगा. साथ ही बारी बारी मेरे स्तनों का दूध भी पीने लगा. उसे बहुत ज्यादा आनन्द आ रहा था और मुझे भी और मैं भूल ही गई थी कि कोई और भी हमें देख रहा है.</p>
<p>मुझे धक्के लगाते हुए अब 5 मिनट होने को चले थे. कमलनाथ के भी आव भाव बता रहे थे कि अब वो जल्द ही झड़ने वाला है.</p>
<p>जैसे जैसे धक्के बढ़ते जा रहे थे, हम दोनों सिसकारी भरते हुए तेज़ सांस लेने लगे थे. मैं इतनी तेज धक्के मारने लगी कि कमलनाथ समझ गया कि मैं भी झड़ने वाली हूँ. </p>
<p>एक औरत को झड़ते देख कर किसी भी मर्द को अपनी मर्दानगी पर गर्व होता है. यही सोच शायद उसकी उत्तेजना दुगुनी हो गई.</p>
<p>मैं बस और धक्के मारते हुए कमलनाथ से पूरी ताकत से चिपक गई और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करते हुए झड़ने लगी. मुझे झड़ती देख कमलनाथ भी अपने पर काबू न रख सका और वो भी गुर्राते हुए मेरे चूतड़ पकड़ कर नीचे से झटके मारने लगा. कुछ ही पल में हम दोनों एक साथ झड़ने लगे.</p>
<p>एक तरफ जहां मैं पूरी ताकत लगा कर उसे धक्के मारते हुए अपनी योनि का रस उसके लिंग पर छोड़ने लगी, वहीं कमलनाथ भी नीचे से झटके देता हुआ मेरी योनि के भीतर अपने वीर्य की पिचकरी मारने लगा. मैं झड़कर उसकी गोद में ढीली होने लगी और कमलनाथ भी अपने हाथ छोड़ सोफे पे हांफता रहा.</p>
<p>हम दोनों एक बार के सम्भोग के बाद शांत पड़े थे.</p>
<p>तभी पीछे से रवि ने हाथ डालकर मुझे उठाना चाहा. जबकि मैं थक चुकी थी. पर रवि हमारा संभोग देख इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि अब उससे सब्र नहीं हो रहा था. </p>
<p>उसने मुझे जबरदस्ती विनती करते हुए उठाकर सोफे पर झुका दिया और खुद मेरे पीछे आ गया.</p>
<p>मेरी योनि अभी भी वीर्य से लबालब भरी थी, तो रवि ने जल्दी से एक कपड़े से मेरी योनि से टपकते वीर्य को साफ किया और अपनी हवस मिटाने को तैयार हो गया.</p>
<p>वो इतना अधिक उत्तेजित था कि उसने एक बार भी मुझे लिंग चूसने को नहीं कहा. </p>
<p>तभी राजशेखर बोला- रमा अब बर्दाश्त नहीं होता … चलो हम भी बढ़ चलें.<br />
इस पर रमा बोली- अभी तो मुझे मेरे पति का भी प्रदर्शन देखना है. हम बाद में रात भर एन्जॉय करेंगे.</p>
<p>रमा की बात खत्म होते होते रवि ने अपना लिंग एक झटके में मेरी योनि में घुसा दिया. उसके लिंग का जोर इतना तेज था कि मैं अपनी कराह रोक नहीं पाई. रवि का लिंग मैंने देखा भी नहीं था, पर झटके के अंदाज से ये साफ हो गया था कि उसका आकार क्या है और ताकत कितनी अधिक है. मैं अभी भी थकान महसूस कर रही थी, मगर रवि ने मुझे पूरी ताकत से कमर से पकड़ लिया था. मैं अपने हाथ और सिर सोफे पर टिका कर अपना वजन संतुलित करने की कोशिश करने लगी. </p>
<p>रवि का लिंग मुझे थोड़ा मोटा तो लग रहा था और जिस प्रकार से उसने झटका मारा था, मुझे उसका सुपारा मेरी योनि को भरपूर खोलते हुए भीतर घुस गया था. </p>
<p>रवि इतना अधिक उत्तेजित था कि उस झटके के पल भर बाद ही वो तेज़ी से धक्के मारते हुए आगे बढ़ने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था मानो ये कुछ ही पलों में झड़ जाएगा … पर मेरा अंदाज गलत था. वो भी कम अनुभवी नहीं था और कई सालों से संभोग क्रियायों में था. इसलिए इतनी जल्दी उसका भी स्खलन स्वभाविक नहीं था. ये तो उसकी उत्तेजना थी, जिसकी वजह से वो पूरे जोश से धक्के मार रहा था. </p>
<p>उसके दमदार धक्कों के कारण मैं खुद में इतनी कमजोरी महसूस करने लगी कि मेरे मुँह से रोने जैसी कराह निकलने लगी और जिस्म ढीला पड़ने लगा. </p>
<p>रवि एक खूंखार जानवर की तरह मुझमें धक्के मारे जा रहा था और बेरहमी से कभी मेरे चूतड़ों को, तो कभी नीचे से स्तनों को मसलता. उसके धक्के लगातार एक सांस में चल रहे थे और जब कभी उसे थकान लगती, तो लिंग मेरी योनि के भीतर दबा कर मेरे स्तनों, चूतड़ों और जांघों को सहलाकर मेरे बदन का आनन्द लेते हुए थोड़ा सुस्ता लेता. </p>
<p>उसकी इस तरह के संभोग क्रिया से मुझे लगने लगा कि रवि के आगे मैं देर तक नहीं टिक पाऊंगी.</p>
<p>उधर रमा ने ये भी बोल दिया था कि उसके पति का प्रदर्शन भी बाकी है. मतलब साफ था कि रवि के बाद कांतिलाल की बारी थी … और क्या पता कहीं राजशेखर भी उठ खड़ा हुआ, तो मैं तो मर ही जाऊंगी. मैं कमजोरी महसूस करने लगी थी और लड़खड़ाने भी लगी थी.</p>
<p>रवि भी पिछले बीस मिनट से एक ही आसान में संभोग करते हुए थकने लगा था. इस वजह उसमें जोश तो भरपूर दिख रहा था, मगर पहले की तरह वो ताकत नहीं लगा पा रहा था. रवि इस हाल में भी जबरदस्ती मुझे धक्के मारे जा रहा था.<br />
मैं धक्कों की वजह से इधर उधर लड़खड़ाते हुए गिरने जैसी हो रही थी. मेरे गले से रोने जैसी आवाजें निकलने लगी थीं, पर उन लोगों में से किसी ने दया जैसी चीज नहीं दिखाई. शायद वो जानते थे कि औरत हर तकलीफ झेल लेती है और शायद इसी वजह से मैं भी अपना उपयोग होने दे रही थी. </p>
<p>अब झुके झुके मेरी थकान इतनी अधिक हो गई थी कि कमर में दर्द होने लगा था और मेरी टांगें सुन्न सी होने लगी थीं. फिर अचानक मैं लड़खड़ाते हुए सोफे पर गिर पड़ी. मेरा भारी भरकम शरीर रवि नहीं संभाल पाया और मैं उसके चंगुल से निकल गई. सोफे पर गिरते ही मैं हांफते हुए ‘उणहहहहह..’ कर रही थी. </p>
<p>तभी रवि ने मुझे पकड़ कर जमीन पर सीधा पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टांगें फैलाता हुआ बीच में आने लगा. मेरे पास अब उससे विनती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. सो मैंने उससे कुछ देर सुस्ताने के नाम पर थोड़ा समय मांग लिया. मुझे इस बात की ख़ुशी हुई कि उसके भीतर इंसानों वाली थोड़ी बात तो थी. वो वैसे ही मेरे जांघों के बीच अपने घुटनों पर खड़े होकर लिंग हाथ से हिलाता हुआ इंतजार करने लगा. शायद वो भी थक चुका था, इसी वजह से उसने थोड़ी रहम दिखाई. </p>
<p>थोड़ी राहत मिलते ही उसने मुझसे पूछा और मैंने उसे आने को कहा. वो मेरे ऊपर झुक कर अपना लिंग मेरी योनि में घुसाते हुए पूरी तरह से मेरे ऊपर आ गया. उसने अपने घुटने को जांघों तक मोड़ लिया था और मैंने भी अपनी टांग उसकी जांघों पर चढ़ा दिया था. उसने धीरे धीरे से पूरा का पूरा लिंग मेरी योनि के भीतर घुसा दिया था और उसके सुपारे का स्पर्श मैं अपनी बच्चेदानी में महसूस करने लगी थी. उसने अपना पूरा शरीर मेरे ऊपर चढ़ा दिया था और हम दोनों के चेहरे एकदम आमने सामने थे. </p>
<p>मैंने उसके गले में हाथ डाल दिया और उसने मुझे कंधों से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया. अब उसने अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. थोड़ा आराम के वजह से जब मैं अपनी योनि में लिंग का घर्षण महसूस करने लगी, तो अच्छा लगने लगा था.</p>
<p>रवि के धक्के आराम और धीमी गति के थे, जिससे मैं समझ गई थी कि थकान की वजह से जोश और उत्तेजना दोनों ही कम हो गए थे. पर इतना तो मेरे दिमाग में था कि शायद रवि काफी देर तक संभोग करने के बाद ही झड़ेगा.</p>
<p>उधर कमलनाथ पूरा संतुष्ट दिख रहा था और वो मदिरा का स्वाद लेने में मग्न था. दूसरी तरफ रमा, कांतिलाल और राजशेखर काम वासना की आग में जलते दिख रहे थे.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग की क्रिया अपने चरम की ओर अग्रसर होती जा रही थी, वैसे वैसे हम दोनों को अब आनन्द की अनुभूति होने लगी थी. रवि अब केवल धक्के ही नहीं मार रहा था बल्कि धक्कों के साथ साथ मेरे शरीर के अंगों को सहलाकर, दबा और मसल कर उनका आनन्द ले रहा था. वहीं मेरी उत्तेजना भी इस तरह बढ़ चुकी थी कि उसकी हर हरकत का मैं खुले मन से स्वागत करने लगी और साथ ही सभोग में बराबर की भागीदारी देने लगी थी.</p>
<p>रवि के धक्कों में अब फिर से धीरे धीरे तीव्रता आने लगी और मुझसे भी जहां तक हो सकता था, वहां तक अपनी कमर उठा कर उसके लिंग को अपनी योनि में आने देती थी.</p>
<p>कोई 20 मिनट के करीब हो चुके थे और हम दोनों पसीने पसीने हो गए थे. उधर मेरी योनि से झाग सा बहता हुआ मुझे महसूस होने लगा था. दोनों अब एक दूसरे को पूरी ताकत के साथ पकड़ कर लंबी लंबी सांस ले रहे थे. हम दोनों हांफते हुए अपने अपने चूतड़ हिला हिला योनि में लिंग रगड़ते हुए आगे बढ़ने लगे. </p>
<p>मैं अब बहुत जल्द झड़ने वाली थी और ऐसा लग रहा था मानो रवि भी किसी पल पिचकारी छोड़ देगा. मेरी योनि बहुत चिपचिपी और गीली हो गई थी, जिसकी वजह से जब जब रवि लिंग बाहर कर अन्दर धकेलता, तो मेरी योनि से छप छप की आवाज आती.</p>
<p>कुछ पल और संभोग करते हुए रवि के धक्के दुगुनी तेज़ी से लगने लगे और उसने अचानक धक्के मारते हुए ही मुझे पकड़ कर करवट ले ली. उसने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया. वो इस तरह से पलटा था कि उसका लिंग मेरी योनि से बाहर नहीं आया.</p>
<p>मैं भी बहुत गर्म थी, सो मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और मैं बिना रुके धक्के लगाने लगी. रवि ने भी मेरे चूतड़ पकड़ नीचे से जोर लगाना शुरू कर दिए.</p>
<p>अब तो आनन्द दोगुनी बढ़ गई और चरम सुख ऐसा लगने लगा जैसे सामने ही है.</p>
<p>मेरे जांघों में कम्पकपी सी होने लगी और मैं रवि के सीने से चिपक कर अपने भारी भरकम चूतड़ ऊपर नीचे करते हुए धक्के देने लगी. मेरी नाभि से करंट सा निकलने लगा और मेरी योनि तक दौड़ लगाने लगा. मैं अब पूरे जोश में आ गई और मेरे भीतर ऐसा लगने लगा, जैसे ऊर्जा का भंडार फूट पड़ा हो. मैं तेज़ी से धक्के मारने लगी और रवि भी अपने चूतड़ तेज़ी से उछालने लगा. मैं समझ गई कि रवि भी झड़ने वाला है. </p>
<p>तभी मैं अचानक से चीख पड़ी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … माँ मर गई!</p>
<p>मैं झटके मारते हुए झड़ने लगी. मेरी योनि की मांसपेशियां अकड़ने लगीं और योनि की दीवारों से तेज़ तरल रिसने लगा. इधर जब तक मैंने 3 से 4 धक्के मारे थे, रवि भी मेरे चूतड़ और ज्यादा ताकत से पकड़ गुर्राने लगा और फिर एक तेज़ गर्म लावा सी मेरी योनि के बच्चेदानी से टकराया. </p>
<p>बस अब अंत नजदीक था. मैं जहां जहां धक्के मार उसे पकड़ चिपकी रही, वहीं वो तब तक गुर्राते हुए झटके मारता रहा. जब तक उसने अपनी वीर्य की थैली खाली न कर दी. मैं उसके वार झेलती हुई उसके ऊपर लेटी ढीली पड़ने लगी. उसने भी अपनी आखिरी बूंद छोड़ कर शांत लेटा रहा.</p>
<p>मैं अब महसूस करने लगी कि लिंग मेरी योनि के भीतर ढीला हो रहा है. जैसे जैसे लिंग सामान्य अवस्था में आता गया, वीर्य टिप टिप कर मेरी योनि से टपकने लगा. दोनों पूरी तरह सुस्ताने के बाद अलग हुए, तो एक दूसरे को देख ये लगा कि हमने काफी मेहनत की है.</p>
<p>हम दोनों पसीने में लथपथ थे और अलग होने के बाद भी हम लंबी लंबी सांस ले रहे थे. </p>
<p>मैं उठकर नंगी ही स्नानागार में चली गई और खुद को साफ करने लगी. पर जाते हुए समय मैंने देखा कि कांतिलाल और राजशेखर के चेहरे पर वासना की भूख थी. </p>
<p>खुद को साफ कर मैंने रमा से कहा- मैडम मेरे कपड़े तो दे दीजिए.<br />
उधर से जवाब आया- अरे आजा तौलिया लपेटकर … खेल अभी बाकी है.</p>
<p>यह सुन मेरे मन में ख्याल आया कि आज रमा मुझे मरवा के ही रहेगी, इसलिए एक बार सोचा कि सब कह दूँ.<br />
मैंने कहा- अब और नहीं होगा … मुझे घर भी जाना है, रात हो जाएगी तो परेशानी होगी.</p>
<p>रमा मेरे पास आई, तो मैंने उससे बोला कि सबको मेरी सच्चाई बता दे.<br />
पर वो जिद पर अड़ी थी कि कल सबको बताएगी. वो चाह रही थी कि एक बार कांतिलाल और राजशेखर भी मेरे साथ संभोग कर लें. </p>
<p>पर मैं बहुत थक गई थी, इसलिए मैं उससे विनती करने लगी कि अब और नहीं हो पाएगा. लेकिन वो जिद पर अड़ी थी.<br />
तब मैंने उससे कहा कि मैं खुद सबको बता देती हूं.</p>
<p>अब रमा मान गई और बोली कि खाना खाने के बाद सब अपने अपने कमरे में चले जाएंगे और वो आज राजशेखर के साथ सोएगी.</p>
<p>उसने मुझे कांतिलाल के साथ ही रहने को कहा और फिर मुझे एक नए तरह के कपड़े दे दिए.</p>
<p>रमा सबको खाने के लिए बोल बाहर चली गई और उसने मेरे लिए कमरे में ही व्यवस्था कर दी.</p>
<p>मैं रमा के दिए हुए वस्त्र पहन तैयार हो गई, हालांकि ऐसे कपड़े मैंने पहले कभी पहने नहीं थे, पर ये मुझ पर जंच रहे थे. नाइटी के ही जैसी, मगर छोटी सी थी. उसके ऊपर से पहनने का गाउन भी था. </p>
<p>मैं खाना खाकर आराम करने लगी और कब मेरी आंख लगी, पता ही नहीं चला. ठंडी हवा और गद्देदार बिस्तर बहुत ही आरामदायक था.</p>
<p>ठंड की वजह से बार बार पेशाब आने की बीमारी ने मुझे बैचैन कर दिया. नींद से जगने पर आधी नींद में ही मैं पेशाब करने चल पड़ी. पेशाब करके मेरी नींद पूरी तरह से खुल गई थी. जब मैंने वापस आकर देखा, तो मुझे सामने बिस्तर पर कांतिलाल जांघिये में मुस्कुराता हुआ दिखा.</p>
<p>जब मैंने समय देखा, तो एहसास हुआ कि मैं ज्यादा देर नहीं सो सकी थी. अभी 11 ही बज रहे थे. संभोग की संतुष्टि और थकान ने मुझे सुला दिया था … पर अब कांतिलाल के रूप में एक और पड़ाव मेरे सामने आ गया था.</p>
<p>उसके मुस्कुराने की वजह से मैंने भी मुस्कुराते हुए उसका उत्तर दिया. फिर उसने मुझे पास बैठने को कहा और फिर हम बातें करने लगे.<br />
उसने मेरे कामुक बदन की तारीफ करते हुए कहा- तुम पिछले बार से कहीं अधिक कामुक, सुंदर और खुली हुई लग रही हो.<br />
मैंने भी उसे उत्तर दिया- रमा ने ही मेरा सब कायाकल्प किया है … वरना मैं तो पहले की ही तरह हूँ.</p>
<p>फिर उसने मेरे किरदार की सराहना करनी शुरू कर दी और कहा कि उन तीनों को जरा भी शक नहीं हुआ और अगले दिन जब पता चलेगा, तो सब चकित रह जाएंगे.</p>
<p>हम दोनों करीब एक साल बाद मिले थे और बातें करते करते काफी खुल चुके थे. हालांकि उसने मेरे साथ पहले भी संभोग किया था, पर उस समय मैं इतना अधिक खुली हुई नहीं थी.</p>
<p>बातें करते हुए हम एक दूसरे के आमने सामने हो गए थे और मैं एक टांग मोड़कर बैठ गई. लेकिन मुझे जरा भी अंदेशा नहीं था कि ये वस्त्र एक तरफ से कमर के पास से नीचे तक कटा हुआ था और मैंने पैंटी भी नहीं पहनी थी.</p>
<p>सोने के कारण गाउन तो मैं पहले ही निकाल चुकी थी, जिसकी वजह से मेरे स्तनों का अधिकांश हिस्सा दिख रहा था. </p>
<p>कांतिलाल की नजर शुरू से ही मेरे स्तनों पर थी. जबकि कुछ देर पहले उसने मुझे न सिर्फ नंगी देखा था, बल्कि अपने मित्रों के साथ कामक्रीड़ा में संलग्न भी देखा था. </p>
<p>शायद वस्त्रों का एक अलग प्रभाव पड़ता है और इसी वजह से मर्द स्त्रियों को कामुक वस्त्र में देखना पसंद करते हैं.</p>
<p>मैंने ध्यान दिया कि कांतिलाल बात करते हुए बीच बीच में मेरी जांघों के पास देख रहा. मैंने जब अपने नीचे देखा, तो उस वस्त्र के कटे हुए हिस्से की वजह से मेरी एक टांग बिल्कुल नंगी दिख रही थी और एक तरफ से मेरी योनि के बाल भी दिख रहे थे.</p>
<p>मैं चाहा कि उन्हें चुपके से छुपा लूँ, पर कांतिलाल ने टोक दिया- क्यों छुपा रही हो सारिका जी, अब हम दोनों के बीच क्या शर्म और लज्जा … </p>
<p>पता नहीं हम दोनों के बीच पति पत्नी जैसे संबंध भी बन चुके थे, पर बाकी और मित्रों की तरह हम आज भी एक दूसरे का नाम लेने के साथ जी जरूर लगाते थे.</p>
<p>खैर … उसकी विनती करने के बाद भी मैं मुस्कुराते हुए अपनी योनि को छुपाने के प्रयास करती रही. कांतिलाल वैसे भी केवल जांघिये में था. उसके शौक की क्या बात करूं, जैसा उसका जांघिया था, वैसा तो आजकल के नौजवान भी नहीं पहनते.</p>
<p>उसकी जांघिया को देख कर एक पल के लिए कोई भी कह सकता था कि वो औरतों वाली पैंटी है या मर्द के लिए भी ऐसे चलती है. ये सच में पुरुषों का अधोवस्त्र ही था.</p>
<p>हम दोनों यूँ ही बातें करते हुए समय बिताने लगे और मैं बार बार अपनी योनि छुपाने के प्रयास करती रही. मैं इतना तो समझ गई थी कि कांतिलाल मेरा भोग किए बगैर सोएगा नहीं. फिर भी मैं जान बूझकर समय टाल रही थी कि नशे में वो सो जाएगा.</p>
<p>पर ये मेरी भूल थी, जिसके सिर पर किसी महिला के जिस्म का नशा चढ़ा हो, उसे और कोई नशा क्या चढ़ेगा.</p>
<p>धीरे धीरे कांतिलाल मेरे नजदीक आ गया और तकिए पर सिर रख बातें करने लगा. उसने अब मेरे बदन की तारीफ मुझे छू छू कर करना शुरू कर दिया. कभी मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए उन्हें रेशम कहता, कभी बांहों पर हाथ फेर कहता कि आज ये कितनी मखमली लग रही है. कभी मेरी जांघों पर हाथ फेर कर कहता कि कितनी गोरी, चिकनी और गठीली जांघ हैं. </p>
<p>थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपनी ओर खींच कर बगल में लिटा लिया और मेरे होंठों पर उंगलियां फेरने लगा. </p>
<p>मैं ना तो उसे हां कहना चाह रही थी … और न ही ना कर पा रही थी. मेरा किसी तरह का विरोध न पाकर, वो आगे बढ़ गया. वो मेरे गले में उंगलियां फेरते हुए मेरे स्तनों तक जाने लगा. </p>
<p>उसके हाथ मेरे स्तनों पर पड़ते ही मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज और नहीं … मैं बहुत थक गई हूं.</p>
<p>पर कांतिलाल तो बहुत उत्तेजित लग रहा था. मुझे इस रूप में देख कर वो कहां मानने वाला था. उसने मुझसे कहा- कोई जल्दी नहीं है … हमारे पास बहुत समय है. कल कोई काम भी नहीं है. </p>
<p>यह बोलकर उसने मुझे कमर से पकड़ अपनी ओर खींचते हुए अपने सीने से मुझे लगा लिया. उसकी आंखों में कामवासना की आग दिखने लगी थी. </p>
<p>मेरी इस क्सक्सक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]<br />
क्सक्सक्स कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-4</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>किरायेदार से चुद गई मैं</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:32:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ. मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं. मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. <a title="किरायेदार से चुद गई मैं" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/kirayedar-se-chud-gayi-main/" aria-label="Continue reading किरायेदार से चुद गई मैं">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट की पुरानी पाठिका और लेखिका हूँ.</p>
<p>मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ. मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है. मेरी सारी सहेलियां भी मेरी तरह चालू हैं.</p>
<p>मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मैं अपनी इस चुदाई की कहानी में आपको बताऊंगी कि कैसे मैं अपने किरायेदार से अपनी चूत और गांड की आग को शांत किया. हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों लोग कैसे सेक्स कर लेते हैं. </p>
<p>अब मेरी शादी हो चुकी है. मेरे पति सर्विस करते हैं. मेरे अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है. मेरा घर काफी बड़ा है, जिस वजह से मेरे पति ने चार पोर्शन किराए पर दिए हुए हैं. सभी के घरों में सर्विस क्लास के लोग ही थे. किरायेदारों में पति लोग जॉब पर चले जाते थे और उनकी पत्नियां या तो घरों में ही होती थीं, या उनमें से कुछ अपने काम काज के चलते घर से बाहर निकल जाती थीं.</p>
<p>इस तरह से दिन में मेरा पूरा घर लगभग सुनसान ही रहता था. </p>
<p>वैसे मैं अपने सभी किरायेदारों से भी बहुत अच्छे से बात करती हूँ. लेकिन क्या करूं, जब मेरी चूत में खुजली होती है, तो अपने किरायेदार से ही चुदवाने की सोचने लगती हूँ. </p>
<p>मेरे पति वैसे तो बिस्तर में बहुत मस्त हैं. जब भी उनको मौका मिलता था, तो वो मेरी चुदाई कर लेते थे. लेकिन मुझे तो रोज सेक्स करने का मन करता था और मेरे पति ऑफिस में काम की वजह से मुझे सप्ताह में एक दो बार ही चोदते थे. जिससे मेरी चुदाई ठीक से नहीं हो पाती थी.</p>
<p>मैं सुबह से घर का सब काम कर लेती हूँ और जब घर के लोग जॉब करने चले जाते हैं, तो मैं घर में अकेली रह जाती हूँ. मैं दोपहर में अपने किरायेदारों से बात करती हूँ. उनमें से ज्यादातर स्त्रियां घर से जब निकल जाती थीं, तब मैं बड़ा ही बोर फील करने लगती थी.<br />
मेरी सहेलियों की तो मौज थी, क्योंकि वो लोग अपने घर पर ही अपने ब्वॉयफ्रेंड को या पड़ोसी को बुलाकर चुदवा लेती थीं.</p>
<p>मेरे किरायेदारों में एक लड़का भी रहता है. उसका नाम सुरेश है, वो अभी अकेला है. उसकी शादी नहीं हुई है. हम दोनों में जल्दी ही दोस्ती की तरह रिश्ता बन गया था. मैं उसे बहुत पसंद करने लगी थी. हम दोनों एक दूसरे से मजाक भी करते रहते थे. वैसे सुरेश अच्छा लड़का था.</p>
<p>चूंकि वो लड़का रात को जॉब करने जाता है, इसलिए मैं उससे दोपहर में बात कर लेती हूँ. मैं जब भी कपड़े सुखाने के लिए जाती थी, तो सुरेश भी मेरे पीछे आता था और हम दोनों लोग छत पर बातें कर लेते थे.</p>
<p>जब उससे मेरी बातचीत ज्यादा होने लगी, तो वो लड़का मुझे देख कर डबल मीनिंग वाली बातें बोलने लगा था. उसे मैंने ही छूट दे दी थी, इसलिए वो और भी ज्यादा बिंदास हो गया था. मुझे वो अपने लिए एक शिकार जैसा लगता था. मैं उसको अपने हुस्न की जाल में फंसाने की सोचने लगी.</p>
<p>सुरेश मुझे अच्छा लगने लगा था, तब भी मैं अभी उसको अपने घर भी नहीं बुला सकती थी. इसलिए मैं उससे बात करके ही मजे ले लेती थी. धीरे धीरे मेरा और सुरेश का रिश्ता प्यार में बदलने लगा. </p>
<p>वैसे तो मैं हमेशा सलवार सूट पहनती हूँ. जब बहुत गर्मी होती थी, तो मैं मैक्सी भी पहन लेती थी. मैक्सी में मेरी चूची और गांड का आकार बिल्कुल साफ़ दिखाई देता था. सुरेश मुझे मैक्सी में बहुत घूर घूर कर देखता था. सुरेश कभी कभी मुझसे बात करते करते मेरी मैक्सी के अन्दर देखता था, तो उसको मेरी चूची दिख जाती थी. वो मेरी चूचियों को देखने के लिए ही मुझसे करीब होकर बात करता था. मैं भी उसको अपनी तरफ आकर्षित करने लगी थी, तो मैं उसको अब सब कुछ पहले से ज्यादा दिखाती थी. वो भी मेरे पीछे पहले से ज्यादा आने लगा था. मैं ये जानती थी कि मेरा जिस्म सुरेश को पसंद है. </p>
<p>हम दोनों लोग कभी कभी एक दूसरे से बात नहीं कर पाते थे, तो एक दूसरे को देख कर स्माइल कर देते थे. हम दोनों की इस स्माइल में एक गहरा अर्थ छिपा होता था, जो बस मुझे या सुरेश को ही समझ आता था. </p>
<p>किरायदारों से किराया उगाहने के मुझे ही उनके पास जाना पड़ता था. सुरेश की सबसे अच्छी बात ये लगती थी कि वो समय से अपना किराया मुझे दे देता था, इसलिए मैं भी उसको किराये में छूट कर देती थी. मैं कभी कभी सुरेश से बात करने के लिए उसके रूम में भी चली जाती थी. मैं देखती थी कि वो अपना रूम भी अच्छे से रखता था और मेरे पति भी उससे खुश रहते थे. उससे हम लोगों को कोई शिकायत नहीं थी. </p>
<p>उस दिन घर में कोई नहीं था. दो किराएदार अपने परिवार के साथ बाहर गए हुए थे और एक महाशय अपनी ड्यूटी पर गए थे. उनकी बीवी भी दोपहर में किसी जगह पर काम करने जाती थी. उस दिन मुझे बड़ी चुदास चढ़ी थी. मैं नहाकर छत पर कपड़े सुखाने के लिए गयी. </p>
<p>मैं कपड़े सुखा रही थी, तभी सुरेश ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया. मैं उसको मना करने लगी, पर वो मान नहीं रहा था. उसने मुझसे बोला- भाभी, मैं आपके जिस्म का दीवाना हो गया हूँ. मुझे भी पता है कि आप मुझे पसंद करती हो.</p>
<p>उसकी ये बात सच थी कि मैं भी सुरेश को पसंद करने लगी थी. वो मुझे किस करने लगा. मैं खड़ी खड़ी उसे मना तो कर रही थी … पर मुझे उसका मुझे चूमना बड़ा ही अच्छा लग रहा था.</p>
<p>कुछ ही देर में मेरा विरोध खत्म हो गया और मैं उसे सहयोग करने लगी. अब उसने मुझे किस करते हुए मेरी चूची को दबा दिया, तो मैं भी एकदम से गर्म हो गयी. अब मैं भी उसको किस करने लगी. </p>
<p>कुछ देर मैंने उसको किस करने के बाद अपने से अलग कर दिया क्योंकि कभी कभी मेरे पड़ोस के लोग भी छत पर अपना कपड़े सुखाने के लिए आ जाते हैं. अगर कोई पड़ोसी मुझे मेरे किरायेदार के साथ किस करते हुए देख लेता, तो मेरी बदनामी हो जाती थी. </p>
<p>मैं अपने रूम में आ गई. मैं रूम में आकर सुरेश के साथ किस वाले पल को याद करने लगी और मेरी चूत गर्म होने लगी. मुझे भी सुरेश के साथ सेक्स करने का मन कर रहा था. मैं ये सब याद करते हुए लेटी थी कि तभी सुरेश मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा.</p>
<p>मैंने पूछा- कौन है?<br />
उधर से सुरेश की आवाज आई- मैं हूँ भाभी जी.<br />
मैंने दरवाजा खोला, तो सुरेश अंदर आकर मुझे किस करने लगा और मेरी चूची को दबाने लगा.<br />
मैं उससे बोली कि आप अपने रूम में जाओ … मैं अभी आपके रूम में ही आती हूँ.<br />
इस पर वो मान गया.</p>
<p>मैं कुछ देर के बाद सुरेश के रूम में चली गयी. मैंने देखा कि सुरेश इस वक्त केवल एक अंडरवियर में था और उसका लंड अंडरवियर में खड़ा था. वो मुझे खींच कर अपने रूम में बिस्तर पर ले गया और मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया. वो दौड़ कर अपने रूम का दरवाजा बंद करके वापस आ गया और मुझे किस करने लगा. </p>
<p>इस वक्त मैं एकदम फ्री थी. मेरे घर के सभी लोग जॉब करने गए थे और बाकी बचा एक किरायेदार और उसकी पत्नी भी जॉब पर गए हुए थे. </p>
<p>सुरेश ने मुझे किस करने के बाद मेरी मैक्सी को निकाल दिया और मैं ब्रा और पेंटी में हो गयी. उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूची को बहुत देर तक मसला. उसके बाद वो मेरी पेंटी को चाटने लगा. मेरी चूत से पानी निकल रहा था, जिससे मेरी पेंटी भीग गयी थी. </p>
<p>सुरेश अपना लंड पकड़ कर मुठ मारने लगा और उसके बाद उसने मेरी ब्रा और पेंटी निकाल दिया. अब मैं उसके सामने नंगी हो गयी थी. मेरे बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर वो एकदम से मचल गया. वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को मसलने लगा. उसके बाद वो मेरी दूसरी चूची को चूसने लगा और पहली को मसलने लगा. </p>
<p>इसके बाद वो नीचे को हुआ और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. मैं एकदम से चुदाई के लिए बेचैन हो गयी थी. वो मेरी चूत चाटने के बाद मेरी चूत में उंगली करने लगा. मेरी चूत में हल्के हल्के बाल थे, जिससे उसे मजा आ रहा था.</p>
<p>शुरूआती बातचीत के बाद हम दोनों लोग एक दूसरे से बात करते समय अडल्ट जोक और सेक्स के टॉपिक पर भी बात करते रहते थे, इसलिए हम दोनों लोग एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे. </p>
<p>वो मेरी चूत में उंगली करने के बाद मुझे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगा. लेकिन मैंने उसको लंड चूसने के लिए मना कर दिया. वो मन मार कर मान गया. उसके बाद वो मेरी चूत में दुबारा उंगली करने लगा. </p>
<p>मेरी चूत से पानी निकलने लगा था. मैं उत्तेजित होकर उसको अपनी चूत में और अन्दर तक उंगली करने के लिए बोल रही थी. वो जोर जोर से मेरी चूत में उंगली करने लगा था. मैं भी जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी थी. </p>
<p>उसके बाद तो हम दोनों चुदाई करने लिए एकदम रेडी हो गए. मैंने सुरेश से कहा कि अब देर न करो, पहले मेरी प्यास बुझा दो, बाद में खेल लेना. </p>
<p>सुरेश राजी हो गया और उसने मुझे चित्त लिटा दिया. वो मेरी चूत के सामने अपना लंड लेकर चुदाई के लिए तैयार हो गया. </p>
<p>मैंने चूत खोल दी थी तो उसने मेरी चूत की फांकों पर अपना लौड़ा टिका दिया. उसके लंड के स्पर्श से मेरी चूत एकदम से चुदने के लिए मचल उठी.</p>
<p>कुछ देर मेरी चूत पर अपना लंड रख कर वो अपना लंड रगड़ने लगा. उसके बाद मैंने उसे एक आंख मारते हुए चुदाई करने का इशारा किया, तो उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. उसके मोटे लंड के जाते ही मेरी एक सिसकारी निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ लेकिन मेरी चूत ने जल्द ही उसके लंड को सहन कर लिया.</p>
<p>उसके बाद वो मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. हम दोनों लोग सेक्स करने लगे.<br />
कुछ देर बाद उसने मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और मेरी चूत में अपना लंड अन्दर तक डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. </p>
<p>हम दोनों मस्ती से सेक्स कर रहे थे और साथ में एक दूसरे को किस कर रहे थे. चुदाई के दौरान कभी वो मेरी चूची को मसल रहा था … कभी निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगता था.</p>
<p>धकापेल चुदाई होने लगी थी. दोपहर का समय था, इसलिए हम दोनों सेक्स करते करते पसीने से भीग गए थे. मुझे बेहद पसीना आ रहा था. मुझसे ज्यादा तो सुरेश को पसीना हो रहा था. चुदाई के पहले ही मेरी चूत काफी गर्म हो गयी थी और उसका लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था, जिससे मेरी चूत को अजीब सा अच्छा फील हो रहा था. </p>
<p>मुझे बहुत दिन के बाद एक दमदार लंड से चुदने के लिए मौका मिला था. सुरेश ने भी बहुत दिन से सेक्स नहीं किया था और वो बहुत जोर लगाकर मुझे चोद रहा था. जिससे हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था. </p>
<p>सुरेश के लंड से मेरी चूत की प्यास बुझ रही थी … उसका मोटा लंड मेरी चूत को दे दनादन चोद रहा था. </p>
<p>मैंने तो सुरेश से चुदते वक्त ही सोच लिया था कि अगर मेरे पति रोज मुझे नहीं चोदेंगे, तो मैं सुरेश के रूम में आकर सुरेश से चुदूंगी. </p>
<p>सुरेश अपना पूरा लंड अन्दर डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था, जिससे मुझे और भी मजा आ रहा था और साथ में मुझे शांति भी मिल रही थी. मैं गांड उठा उठा कर सुरेश से चुदवा रही थी.</p>
<p>करीब बीस मिनट बाद हम दोनों लोग सेक्स करते करते झड़ने लगे थे. हालांकि वो इस वक्त चरम पर आने को था, लेकिन तब भी वो मुझे पूरा जोर लगा कर चोद रहा था. मेरी सिसकारियां भी तेज होने लगी थीं.</p>
<p>तभी हम दोनों चुदाई करते हुए झड़ने लगे. हम दोनों ने बहुत देर तक सेक्स किया था. इसके बाद दोनों ने ही एक साथ अपना पानी छोड़ दिया था … जिससे दोनों को ही बड़ा मजा आया था.</p>
<p>उसके बाद थक कर मैं कुछ देर के लिए उसके साथ ही लेट गई. हम दोनों लोग की सांसें तेज चल रही थीं. हम दोनों इस वक्त चुदाई के बाद एकदम नंगे पड़े थे. कुछ देर बाद मैं उठी और मैंने अपनी ब्रा पेंटी पहनी, उसके बाद अपनी मैक्सी पहन कर अपने रूम में जाने लगी.</p>
<p>सुरेश ने मुझे रोक कर कुछ देर किस किया और उसके बाद मैं अपने रूम में आ गयी.</p>
<p>अब हम दोनों लोग रोज दोपहर को सेक्स करने लगे. मेरे पति और मेरे घर वाले सब लोग ऑफिस चले जाते थे, तो मैं सुरेश के रूम में जाकर चुदवा लेती थी. वो मुझे बहुत अच्छे से चोदता था. जब भी कभी मेरे पति की नाईट ड्यूटी होती थी, तो मैं पहले से ही सुरेश को बता देती थी. </p>
<p>इसके बाद उस रात को मैं उसके साथ खुल कर चुदाई का मजा ले लेती थी. उसके साथ अब मैं ओरल सेक्स भी करने लगी थी. मुझे उसका लंड चूसना अच्छा लगने लगा था. उसने मेरी गांड भी खोल दी थी. मेरी गांड का उद्घाटन कैसे हुआ, उसकी कहानी मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखूंगी.</p>
<p>हम दोनों आज भी कभी दोपहर में सेक्स करते हैं. सुरेश अभी भी मेरे घर में किराये पर रहता है. मुझे उसको छोड़ पाना अब दुश्वार सा लगता है.</p>
<p>आप सबको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. आप सब मेरी कहानी का फीडबैक जरूर दीजिए. मुझे मेल करके जरूर बताएं क्योंकि इससे मुझे अगली कहानी लिखने में बहुत सहारा मिलेगा. मैं आप सबके कीमती मेल का इंतजार करूंगी.<br />
आपको मैं अपनी अगली चुदाई की कहानी भी जल्द बताऊंगी.<br />
[email protected]</p>
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			</item>
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		<title>दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई</title>
		<link>https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:31:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[XXX Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम। मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी <a title="दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/xxx-kahani/dost-ki-ammi-ki-chut/" aria-label="Continue reading दोस्त की अम्मी की चूत की प्यास बुझाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं. मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम।<br />
मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं. मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं. </p>
<p>मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी है.</p>
<p>यह बात आज से करीब आठ महीने पहले की है. हमारी कॉलोनी में खेल का एक मैदान बना हुआ है. वहां पर मैं कई बार क्रिकेट खेलने के लिए चला जाया करता था. मेरी ही तरह वहां पर मेरी ही कॉलोनी और आस-पास के बच्चे भी क्रिकेट खेलने के लिए आ जाया करते थे. ऐसे ही खेल खेल में मेरी दोस्ती इमरान नाम के एक लड़के के साथ हो गई. </p>
<p>मैंने यहां पर उस लड़के का असली नाम नहीं लिखा है. मैंने उसका नाम बदल दिया है क्योंकि कहानी उसकी मॉम के बारे में है इसलिए मैं नहीं चाहता कि उसकी मॉम की पहचान किसी को पता चले.</p>
<p>उससे दोस्ती होने के बाद हम दोनों कई बार साथ में ही बाहर घूमने के लिए भी चले जाते थे. इसी तरह एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया. जब मैं उसके घर गया तो उसकी मां को देख कर मैं हैरान रह गया. उसकी मां की उम्र लगभग 42 साल के करीब रही होगी. मगर चेहरे पर ऐसी चमक थी कि मैं हैरान था.</p>
<p>वो देखने में एक 30 या 35 साल की भाभी के जैसी दिख रही थी. उसकी मां का नाम तबस्सुम था. यहां पर मैंने उसकी मां का नाम भी बदल दिया है. उसका फीगर करीब 36-32-39 का था. मुझे उसके फीगर का नाप बाद में पता चला था जब मैंने उसके साथ सेक्स किया था. मगर मैं आपकी जानकारी के लिए उसके फीगर का नाप अभी बता दे रहा हूं ताकि आपको पता लग सके कि वो दिखने में कैसी रही होगी. </p>
<p>तो जब मैं उसके घर पर गया तो मेरी नजर उसकी मां से नहीं हट रही थी. मैं इस तरह से उसकी मां के बारे में नहीं सोचना चाहता था क्योंकि इमरान मेरा दोस्त था लेकिन फिर भी उसकी मां के बदन में बहुत ही गजब का आकर्षण था जो बार-बार मुझे उसके बारे में सेक्स के लिए सोचने पर मजबूर कर रहा था. </p>
<p>वैसे तो उसकी मां ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उसी पर नज़र रखे हुए हूं लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी. वो भी कई बार मेरी तरफ देख लेती थी क्योंकि हम दोनों आमने-सामने ही बैठे हुए थे. </p>
<p>फिर उसकी मां के साथ मेरी भी कुछ बात हुई. बातों ही बातों में पता चला कि उसके पापा बैंक में काम करते हैं. वो दिन में घर पर नहीं रहते हैं. फिर कुछ देर के बाद उसकी मॉम से बात करने के बाद इमरान और मैं ऊपर छत पर खेलने के लिए चले गये. लेकिन खेल में मेरा मन नहीं लग रहा था. मैं उसकी मां के बारे में ही सोच रहा था. उसकी मां के गोरे बदन के बारे में सोच कर मेरे लंड में हलचल सी होने लगी थी.</p>
<p>उस दिन घर जाने के बाद मैंने उसकी मां के बारे में सोच कर मुठ मारी तब जाकर मेरे लंड को शांति मिली.</p>
<p>अब तो रोज मेरा मन इमरान के घर जाने के लिए करने लगा था. मैं उसके घर पर जाने के लिए इमरान को उकसाता रहता था ताकि उसकी मां को देख सकूं. मैं उसकी मां को पटाने के चक्कर में था. उसके ख्याल मेरे मन से निकल ही नहीं रहे थे.</p>
<p>जब भी मैं इमरान के घर जाता था तो मेरी नजर उसकी मां के बदन को ऊपर से नीचे तक पूरा नाप लेती थी. कभी उसकी चूचियों को घूरने लगता था तो कभी उसकी गांड को. मैं सोच रहा था कि जब ये बाहर से देखने में इतनी मस्त माल लग रही है तो अंदर से तो ये बिल्कुल कयामत ही लगती होगी, मैं उसकी मां के नंगे बदन को देखने के लिए तरस जाता था लेकिन अभी मुझे ऐसी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी कि मैं उसकी मां को नंगी देख सकूं.</p>
<p>उसकी माँ भी मेरी तरफ देखती तो थी लेकिन उसकी तरफ से मुझे अभी कुछ इस तरह का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा था जिससे कि मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे साथ कुछ करना चाहती है या नहीं. इसीलिए मैं उसके मन को टटोलने में भी लगा हुआ था.</p>
<p>मैं हमेशा तबस्सुम आंटी के आस-पास ही मंडराता रहता था. कभी कभी तो मैं उसको बहाने से छू भी लेता था. वैसे मुझे जहां तक लग रहा था कि वो भी मेरे मन की इच्छा को जान चुकी थी लेकिन कुछ कह नहीं रही थी.</p>
<p>मैं जब भी उसको छूने की कोशिश करता तो ऐसे बर्ताव करता था कि वह सब मैंने जानबूझ कर नहीं किया है और गलती से ही उसको टच हो गया है. मेरी हरकतों पर वो भी हल्के से मुस्करा कर बात को टाल देती थी.</p>
<p>इस तरह से आंटी के लिए मेरी प्यास हर दिन बढ़ती ही जा रही थी. मैं उसको नंगी करके चोदने की फिराक में था लेकिन पता नहीं था कि वो दिन कब नसीब होने वाला है. </p>
<p>एक दिन की बात है जब मैं इमरान के घर गया हुआ था. खेल के बीच में ही इमराने के किसी दोस्त का फोन आ गया और वो मुझे घर पर उसकी मां के साथ ही छोड़ कर चला गया.</p>
<p>उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं उसकी मां के साथ घर पर अकेला ही था. मेरा मन था कि जाकर आंटी के चूचे दबा दूं लेकिन अभी मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर मैं इमरान के कमरे में चला गया. </p>
<p>मैंने उसके कम्प्यूटर में टाइम पास करना शुरू किया. ऐसे ही देखते देखते मुझे उसके कम्प्यूटर में ब्लू फिल्म मिल गई. मैंने देखा कि आंटी अपने किसी काम में बिजी थी तो मैंने सोचा कि इमरान के आने तक ब्लू फिल्म देख लूं. वैसे भी मैंने बहुत दिनों से ब्लू फिल्म नहीं देखी थी. मैं उसके रूम का दरवाजा बंद करके ब्लू फिल्म देखने लगा. मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.</p>
<p>मैं अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगा. फिर एकदम से आंटी दरवाजा खोल कर अंदर आ गई और उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म देखते हुए अपने लंड को हिलाते हुए देख लिया. उनके हाथ में चाय का कप था.<br />
उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर ऐसे रिएक्ट किया जैसे वो मेरी इस हरकत पर गुस्सा हो गई हो; वो चाय को रख कर वापस चली गई.</p>
<p>मैंने सोचा कि इससे पहले कि बात इमरान तक पहुंचे मुझे कुछ करना चाहिए. अगर आंटी ने मेरी यह हरकत इमरान को बता दी तो शायद मैं इमरान के घर पर भी नहीं आ पाऊँगा उसके बाद। इसलिए मैं आंटी को सॉरी बोलने के लिए चला गया.</p>
<p>आंटी रसोई में कुछ काम कर रही थी. जब उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा तो वो नॉर्मल ही लगी.<br />
फिर मैंने हिम्मत करके खुद ही कहा- आंटी मुझसे गलती हो गई. मुझे ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी.<br />
आंटी बोली- कोई बात नहीं इस उम्र में लड़के ऐसे ही काम किया करते हैं.</p>
<p>मैं आंटी की बात सुन कर हैरान था इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने आंटी की गांड को ताड़ना शुरू कर दिया और मेरा लंड वहीं पर ही खड़ा होने लगा. फिर पता नहीं क्या हुआ कि मैंने आंटी की गांड को दबाने के लिए हाथ बढ़ाए लेकिन मैं डर के मारे रुक गया कहीं बात बिगड़ न जाये.</p>
<p>फिर आंटी ने कहा- तुम यहां पर क्या कर रहे हो, बाहर हॉल में चले जाओ.<br />
आंटी मेरे लंड को देख रही थी. आंटी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर बोली- मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूं.</p>
<p>मैं निराश होकर बाहर चला गया.</p>
<p>फिर कुछ देर के बाद आंटी चाय लेकर बाहर आ गई. वो मेरे सामने जब चाय का कप रखने के लिए झुकी तो मैंने आंटी की चूचियों को देख लिया. मेरे मन में एक आह्ह सी निकल गई. आंटी की चूचियों की दरार बहुत मस्त थी. आंटी ने भी मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था. फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी. </p>
<p>चाय पीते हुए आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?<br />
मैंने आंटी को कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो. अगर मैं आपका पति होता तो … कहते हुए मैं रुक गया.<br />
आंटी बोली- क्या?<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं।<br />
वो बोली- बता दो, कोई बात है तो।<br />
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बहुत प्यार करता और आपको किसी बात की कमी नहीं होने देता। </p>
<p>आंटी बोली- तुम्हें मैं इतनी पसंद हूँ क्या?<br />
मैंने कहा- हाँ आंटी!<br />
कहते हुए मैं आंटी के पास ही आकर बैठ गया. </p>
<p>आंटी बोली- मेरे पति तो मुझमें बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं लेते हैं. वो कभी मेरी तारीफ नहीं करते।<br />
मैंने कहा- मैं तो आपको बहुत पसंद करता हूँ.</p>
<p>कहते हुए मैंने आंटी की जांघ पर हाथ रख दिया. आंटी ने मेरा हाथ हटा दिया और कहने लगी- मैं तुम्हारे दोस्त की मां हूँ. तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए.<br />
लेकिन अब मुझसे नहीं रुका जा रहा था, मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और उनको किस करने की कोशिश करने लगा.</p>
<p>आंटी मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी और कहने लगी- तुम उम्र में बहुत छोटे हो.<br />
मैंने कहा- मैं कुछ नहीं जानता आंटी. मैं तो आपको बहुत प्यार करता हूं. मैं बहुत दिनों से आपको ये बात कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पा रहा था.<br />
आंटी मेरी बांहों में कसमसा रही थी. उनकी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गये थे. मैंने आंटी का मुंह अपनी तरफ किया और आंटी को किस करने लगा.  </p>
<p>कुछ देर तो वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन फिर थोड़ी सी देर के बाद वो भी मेरी चुम्मी का जवाब देने लगी. मैंने अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया. मैं उनको जोर से किस करने लगा. फिर मेरे हाथ उनकी छाती पर उनके बूब्स को टटोलने लगे.</p>
<p>लेकिन तभी इमरान की गाड़ी की आवाज आई और हम दोनों अलग हो गये.<br />
आंटी की आंखों में मुझे मायूसी साफ दिखाई दे रही थी. मुझे भी मजबूरी में आंटी से अलग होकर अपने घर वापस जाना पड़ा।</p>
<p>उसके बाद हम दोनों को मिलने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग गया.<br />
आंटी ने मुझे फोन पर ये बता दिया था कि इमरान और उसके पापा दो दिन के लिए बाहर जायेंगे. इसलिए हम दोनों उसी दिन का इंतजार कर रहे थे. बहुत बेचैन रहा मैं इस दौरान आंटी से मिलने के लिए.</p>
<p>फिर जिस दिन इमरान और उसके पापा चले गये तो मैं आंटी से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंच गया. मुझे देखते ही आंटी भी खुश हो गई. </p>
<p>हम दोनों ने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मैं जाते ही आंटी को बांहों में लेकर किस करने लगा. दोनों को ही मजा आने लगा. आंटी भी एंजॉय कर रही थी और साथ में हल्की सिसकारियां भी ले रही थी. </p>
<p>फिर मैंने आंटी को वहीं रसोई के पास ही डिनर टेबल पर लिटा दिया और उनकी कुर्ती को निकाल दिया. मैं उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा. फिर उनके पेट को किस करने लगा. उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैं उनको किस करते हुए अपने कपड़े भी उतारने लगा. मैंने अपने पूरे कपड़े निकाल दिये. फिर मैं दोबारा से आंटी को किस करने लगा. आंटी लगातार ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां अपने मुंह से निकाल रही थी.</p>
<p>मैंने उसके बाद आंटी की सलवार भी निकाल दी और आंटी की जांघों को चाटने लगा. </p>
<p>आंटी की पैंटी को चूसने के बाद मैंने आंटी की पैंटी भी निकाल कर अलग कर दी. उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे.<br />
मैं वहीं पर घुटनों के बल बैठ गया और आंटी की चूत को जीभ से चाटने लगा.</p>
<p>आंटी मचलने लगी, वे बोली- क्या कर रहा है, इतनी गंदी जगह को इतनी मस्ती से क्यूं चाट रहा है.<br />
मैंने कहा- आंटी मुझे तो ये गंदी जगह पसंद है.<br />
कह कर मैंने आंटी की चूत में जीभ को अंदर डाल दिया तो आंटी और तेजी के साथ सिसकारियां लेने लगी.<br />
वो कहने लगी- मेरे पति कभी ऐसा नहीं करते. आज मुझे पहली बार इतना मजा आ रहा है. मैंने कभी अपनी चूत में इतना मजा महसूस नहीं किया था. </p>
<p>उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया और आंटी के हाथ में अपना लंड दे दिया. आंटी पहले से ही काफी गर्म हो गई थी. आंटी ने मेरे लंड को तुरंत हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुट्ठ मारने लगी. वो उसको प्यार से सहला रही थी.</p>
<p>मुझे भी मस्ती सी चढ़ी जा रही थी. मैंने आंटी को अपना लंड मुंह में लेने के लिए कहा तो वो कहने लगी कि मुझसे लंड मुंह में नहीं लिया जायेगा. फिर मेरे बहुत कहने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भी ले लिया.</p>
<p>दो मिनट तक आंटी ने लंड चूसा और फिर बाहर निकाल लिया. उसके बाद वो कहने लगी कि बस इससे ज्यादा मैं नहीं कर पाऊंगी. मैं समझ गया कि आंटी को उनके पति ने लंड चूसने की आदत नहीं लगाई है. अगर वो अपने पति का लंड भी चूसती तो मेरे लंड को बड़े ही मजे से चूस लेती. फिर मैंने आंटी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया और अपने लंड को आंटी की चूत के बीच में लगा दिया. </p>
<p>लंड को चूत के बीच में लगा कर मैंने धक्का मारा तो आंटी की सिसकारी निकल गई.</p>
<p>फिर मैंने आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. आंटी की चूत को चोदते हुए मुझे मजा आने लगा और आंटी के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.<br />
आंटी बोली- मैंने पूरे एक साल बाद लंड का स्वाद चूत में लिया है.</p>
<p>मैं आंटी को पूरा मजा देते हुए उनकी चूत को चोदने लगा. आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी. मेरे धक्कों के साथ आंटी के चूचे भी तेजी के साथ हिल रहे थे. आंटी मस्त हो गई थी.</p>
<p>फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और आंटी की चूत को दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.<br />
मैंने आंटी से पूछा- मैं अपने माल को कहां पर निकालूं?<br />
तो आंटी कहने लगी- मेरी चूत में ही निकाल दो. मैं तुम्हारे माल को अपनी चूत में ही लेना चाहती हूं.</p>
<p>फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा. मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया. आज पहली बार मेरे लंड से इतना सारा माल निकला था. मैंने आंटी की चूत में कई पिचकारी मारी और फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>उसके बाद आंटी ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गये. वहां जाकर हम दोनों ने साथ में ही स्नान किया और आंटी की चूत को मैंने अपने हाथों से ही साफ किया. आंटी ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर धोया.</p>
<p>उस दिन आंटी ने फिर मुझे खाना खिलाया और फिर रात को दोबारा आने के लिए कह दिया. इस तरह से दो दिन तक मैं और आंटी चुदाई का मजा लेते रहे.<br />
आंटी भी मुझसे खुश हो गई और बोली- अब तुम जब चाहो मेरे घर पर आकर मेरी चूत को चोद सकते हो. अब हमें जब भी मौका मिलता है हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं. </p>
<p>दोस्तो, आपको मेरे दोस्त की अम्मी की चुदाई कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल के जरिये जरूर बताना. मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा.<br />
[email protected]</p>
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