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	<title>Teenage Girl &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Thu, 11 Sep 2025 17:53:20 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Teenage Girl &#8211; Kahani18</title>
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		<title>कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:53:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी दो कॉलेज गर्ल के बारे में है दोनों लड़कियाँ टीनएज थी करीब 19 साल की … मैं आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, आशा करता हूं कि आप सभी को मेरी सेक्स कहानी काफी पसन्द आएगी. मैं उत्तर प्रदेश के एक बड़े से शहर में रहता हूं. <a title="कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/college-girl-jism-pehla-sparsh/" aria-label="Continue reading कॉलेज गर्ल के जिस्म का पहला स्पर्श">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी दो कॉलेज गर्ल के बारे में है दोनों लड़कियाँ टीनएज थी करीब 19 साल की … मैं आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, आशा करता हूं कि आप सभी को मेरी सेक्स कहानी काफी पसन्द आएगी.</p>
<p>मैं उत्तर प्रदेश के एक बड़े से शहर में रहता हूं. यहां पर मैं अपने शहर का नाम नहीं बताना चाहता हूं उसके लिए मुझे क्षमा करें. मैं एक प्रतिष्ठित चॉकलेट कंपनी में सेल्स मैंनेजर के पद पर पिछले दस वर्षों से काम कर रहा हूं.</p>
<p>मैंने 20 साल का होने तक भी अपने लंड की मुट्ठ नहीं मारी थी. हां मुझे तो इतना तो पता था कि मुट्ठ कैसे मारते हैं लेकिन मैंने सुना था कि मुट्ठ मारने से लंड की नसों पर दुष्प्रभाव पड़ता है इसलिए मैं मुट्ठ मारने की आदत नहीं डालना चाहता था. </p>
<p>फिर एक दिन की बात है कि मैं अपने दोस्त के रूम पर उसके साथ टीवी पर फिल्म देख रहा था. फिल्म में सेक्स के सीन थे और मेरे दोस्त ने अपनी पैंट से लंड को निकाल कर मेरे सामने ही अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया. उसने मुझसे भी कहा कि तू भी हिला ले लेकिन मैंने मना कर दिया. फिर वो बाथरूम में चला गया और वहां पर अपना वीर्य निकाल कर आ गया. </p>
<p>उस घटना को कई दिन बीत गये. एक दिन मैं घर पर अकेला था तो पता नहीं मेरा मन भी किया कि एक बार तो हस्तमैथुन करके देखना चाहिए कि कितना मजा आता है. शादी के बाद सेक्स तो हो ही जायेगा.<br />
फिर मैंने टीवी ऑन कर लिया और कुछ सेक्सी सामग्री वाले प्रोग्राम खोजने लगा. बहुत देर तक मुझे कुछ नहीं मिला. फिर मैंने फिल्मों के गानों में दिख रही हिरोइन के चूचों को देख कर ही अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया.<br />
उस दिन जब पहली बार मैंने लंड को हिलाया तो मुझे सच में बहुत मजा आया. </p>
<p>फिर तो बस मैंने अपने लंड की रेलम-पेल शुरू कर दी. मजा आता रहा और मैं लंड पर हाथ को चलाता रहा. फिर जब मैं क्लाइमेक्स पर पहुंच गया तो मेरे लंड से वीर्य की इतनी तेज पिचकारी निकली कि वो सीधी टीवी स्क्रीन पर जाकर लगी. उस दिन जब मैंने लंड की मुट्ठ मार कर वीर्य निकाला तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे कितना मजा आया. इस तरह से वीर्य निकलने का मजा मैंने जिन्दगी में पहली बार ही चखा था. </p>
<p>उसके बाद तो जैसे मुझे इसकी लत ही लग गई. मुझे हर लड़की में बस उसकी चूत ही दिखाई देने लगी थी. जब भी कोई जवान लड़की सामने होती थी तो सबसे पहले नजर उसके चूचों पर जाती थी. उसके बाद उसके चूत के ख्यालों में खो जाता था. अब तो मैं चुदाई के लिए तड़पता रहता था. इस सब के चक्कर में पढ़ाई की तो जैसे ही मां ही चुद गई. </p>
<p>मैं अब ऐसा अय्याश बन गया था कि कॉलेज के बचे हुए दिनों में मैंने केवल तफरी ही मारी. न कभी क्लास में गया और न ही पढ़ाई में ही फोकस कर पाया. कॉलेज जाता था तो बस एग्जाम देने के लिए. </p>
<p>अपनी कहानी बताने के चक्कर में मैं आप लोगों को अपने शरीर के बारे में तो बताना भूल ही गया. मैं दिखने में काफी स्मार्ट था. मेरा रंग भी गोरा है और उन दिनों में तो मेरी पर्सनेलिटी भी काफी अच्छी थी. जब मैं अय्याशी की दुनिया में उतरा तो कई लड़कियां मुझ पर फिदा रहती थी.</p>
<p>आप लोगों को एक सच्चाई यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने कभी भी अपनी तरफ से किसी लड़की को प्रपोज नहीं किया था. जिसकी भी चूत में खुजली होती थी वो खुद मेरे पास आकर अपनी चूत को मेरे हवाले कर दिया करती थी. मैं इस मामले में काफी ईमानदार भी था. मैंने कभी किसी लड़की से सेक्स करने के बाद उसकी प्राइवेसी किसी के साथ शेयर नहीं की थी. जब भी किसी की इच्छा होती थी तो वो मुझे बुला कर अपना काम पूरा करवा लेती थी.</p>
<p>मेरे लंड का साइज भी 6 इंच का है और मोटाई 3 इंच की है. मैं ज्यादा बढ़ चढ़कर नहीं बता रहा हूं, जैसा है वैसा ही बता रहा हूं. मुझे तो अपने लंड से कोई शिकायत नहीं थी क्योंकि कोई भी भाभी या आंटी इस साइज के लंड से संतुष्ट हो सकती थी. वैसे भी मैंने अपने जीवन में ये खुद अनुभव किया है कि लंड के साइज से ज्यादा सेक्स करने की क्रिया पर बहुत कुछ निर्भर करता है.<br />
लंड कितना भी बड़ा या मोटा क्यों न हो, अगर किसी को सेक्स करने की कला नहीं आती है तो वह ज्यादा संतुष्टि अपने पार्टनर को नहीं दे पायेगा. </p>
<p>मैंने अपने जीवन में 20 से ज्यादा लड़कियों और भाभियों की चूत बजाई थी. वो आज तक भी मेरी कायल हैं और मुझे याद करती रहती हैं. यह कहानी भी उन्हीं दिनों की है. कॉलेज में एक लड़की थी युक्ता. यहां पर नाम मैंने बदल दिया है. मेरे दोस्त ने बताया कि वो लड़की कई बार दूसरी लड़कियों के माध्यम से मेरे बारे में बात कर चुकी है. मैंने तो कभी उसकी तरफ ध्यान भी नहीं दिया था. फिर मेरे दोस्त ने बताया कि युक्ता की सहेली उसके साथ सेट थी. युक्ता की सहेली ने ही मेरे दोस्त को युक्ता के मन की बात बताई थी.</p>
<p>मेरे दोस्त ने अपनी वाली की ठुकाई कर बार की थी. अब मेरे मन में भी युक्ता की चूत के लिए तूफान उठने लगा था. फिर मैंने और मेरे दोस्त ने साथ मूवी देखने का प्लान किया. साथ में उसकी गर्लफ्रेंड शोभा भी आने वाली थी. दरअसल मूवी का तो बहाना था. यहां पर चूत चुदाई तो युक्ता की होने वाली थी. मैं उसकी चूत चोदने के लिए बेताब सा था. </p>
<p>किसी जवान कॉलेज गर्ल के साथ वो मेरा पहला अनुभव होने वाला था. इसलिए मैं उस दिन हल्का सा नर्वस भी हो रहा था. फिर मैंने सोचा कि जो होगा वो देखा जायेगा. वहां पर जाकर देखा कि शोभा और उसकी सहेली युक्ता चली आ रही थीं. </p>
<p>पास पहुंचने के बाद शोभा ने मेरा परिचय युक्ता से करवाया. काफी खूबसूरत सी लड़की थी वो. जब उसने हाथ मिलाया तो उसका हाथ छोड़ने का मन ही नहीं किया. मैं उसको देखता ही रहा. 32 के साइज के चूचियां थीं और गांड एकदम मस्त और बिल्कुल बाहर निकली हुई थी. रंग ऐसा गोरा कि जैसे अभी दूध में नहा कर बाहर आई हो.</p>
<p>मन तो कर रहा था कि अभी यहीं पकड़ कर चोद दूं. काफी देर तक उसको देखता रहा तो युक्ता ने ही मेरा ध्यान भंग किया.<br />
बोली- कहां खो गये? चलना नहीं है क्या?</p>
<p>मेरा दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड शोभा को लेकर निकल चुका था. फिर मैंने युक्ता को बाइक पर बैठाया और हम दोनों भी उनके पीछे निकल पड़े. रास्ते में चलते हुए मैं बार-बार ब्रेक लगा रहा था. मुझे उसकी चूचियों का स्पर्श अपनी पीठ पर महसूस हो रहा था. वो मुझसे बिल्कुल चिपक कर बैठी थी. शायद उसको भी मजा आ रहा था. </p>
<p>आखिर हम चारों सिनेमा हॉल में पहुंच गये. हमने जान बूझ कर एक बकवास सी मूवी चुनी थी. इसलिए सिनेमा हॉल में इक्का दुक्का लोग ही थे. वो भी सब कपल ही थे. आप ऐसा भी समझ लें कि वो सब शायद इसीलिये उस मूवी को देखने आये थे ताकि मूवी के बहाने बस मजे ले सकें. हमारे आगे और पीछे वाली सीटों पर दूर तक कोई नहीं था. </p>
<p>जैसे ही मूवी शुरू हुई, हम लोगों की एक्टिविटी भी शुरू हो गई. शोभा और मेरा दोस्त दोनों एक दूसरे को किस करने में लगे हुए थे. उनको देख कर हम दोनों भी एक दूसरे के बारे में यही सोच रहे थे कि कैसे शुरूआत हो.</p>
<p>आखिर मैंने उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगा. वो भी समझ गयी और उसने मेरी तरफ देख कर हल्का सा स्माइल किया और मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया. मैंने भी उसको प्यार से उसके गालों पर एक किस कर लिया, ये मेरे जीवन का पहला किस था. </p>
<p>फिर धीरे-धीरे हम दोनों की सांसें एक दूसरे से टकराने लगीं और मैंने ही पहल करते हुए उसके सिर के पीछे से हाथ ले जाकर उसके कंधों पर रख लिया. उसने भी मेरा साथ देते हुए अपने सिर को थोड़ा सा उठा लिया और मेरे हाथ में सिर रख कर मुझसे चिपक गई, फिर मैंने दूसरे हाथ से उसके चेहरे को ऊपर की तरफ उठाया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिया.</p>
<p>अब मैं किसी और दुनिया में था, उसके लब इतने मुलायम थे कि मैं तो उसे चूसता ही रह गया. 5 मिनट बाद वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी, अचानक एक आवाज आई-  उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैंने पलट कर देखा तो मेरा दोस्त शोभा की चूचियों को बाहर निकाल कर उसके निप्पल को जोर जोर से चूस रहा था.</p>
<p>शोभा मुझे और युक्ता को देख कर थोड़ा शरमा गई और अपनी चूचियों को थोड़ा चुन्नी से ढक लिया और मेरे दोस्त से बोली- धीरे से करो, युक्ता और तुम्हारा दोस्त देख रहे हैं.<br />
मेरे दोस्त ने कहा- उसे सब पता है.</p>
<p>शोभा को इस हालत में देख कर मेरा तो लन्ड खड़ा हो चुका था, ये युक्ता ने भी महसूस कर लिया था.</p>
<p>फिर मैंने अपना दाहिना हाथ युक्ता की चूचियों पर रख दिया. उसके बाद मैं उसी हाथ से युक्ता की चूचियों को दबाने लगा. वो भी बहुत गर्म हो गई थी. उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया. बल्कि उसको तो मज़ा आ रहा था.</p>
<p>युक्ता की चूचियां बिल्कुल रूई के जैसे मुलायम थीं. उसके मुंह से हल्की कामुक आवाजें भी आना शुरू हो गई थीं. फिर मैंने अपने हाथ को उसके गले के ऊपर से कमीज को थोड़ा खींचते हुए अंदर हाथ डाल दिया. मेरा हाथ उसकी चूचियों की चमड़ी से टकराया तो मजा आ गया. एकदम गर्म गर्म रुई का गोला. </p>
<p>मैंने तुरंत उसका कमीज ऊपर किया और एक चूची को बाहर निकाल लिया और उसमें अपने होंठों को रख दिया. उसके मुंह से एक सी … सी … आवाज आई और उसने मेरे सिर को अपनी चूची पर दबा लिया और मेरे बालों पर अपनी उंगलियों से सहलाने लगी.<br />
वो दिन मैं कभी भूल नहीं सकता. हमें बिल्कुल भी होश नहीं था कि हम सिनेमा हॉल में एक पब्लिक प्लेस में हैं. </p>
<p>जवानी के जोश में दोनों ही होश खो बैठे थे. लेकिन मैं चाहता था कि शोभा ये देखे कि कैसे मैं उसकी फ्रेंड युक्ता की चूचियों का मर्दन पान कर रहा हूं. यहां तक कि मैं तो शोभा की चूचियों को चूसने के बारे में भी सोच रहा था. बाद में मैंने शोभा के साथ भी चूत और लंड का खेल खेला लेकिन वो वाकया मैं आप लोगों को बाद में कभी बताऊंगा. </p>
<p>उसके बाद मैंने धीरे से युक्ता का एक हाथ पकड़ कर अपने लन्ड पर रख दिया और धीरे से उसको दबा दिया. युक्ता तो जैसे तैयार बैठी थी. उसने तुरंत मेरे लन्ड को पकड़ लिया और उस पर अपने कोमल हाथ से सहलाने लगी.</p>
<p>युक्ता के कोमल हाथ का लंड पर स्पर्श होते ही मुझसे रहा न गया और मैंने अपना लंड चेन खोल कर बाहर निकाल लिया. लंड के टोपे को पीछे खिसका दिया. मेरा लंड जोर जोर से झटके खा रहा था.<br />
हर वो लड़का और लड़की ये अच्छी तरह से जानते हैं कि जब पहला सेक्स होता है और जब पहली बार कोई आपके सेक्सुअल पार्ट्स को टच करता है तो वो पहला नशा एकदम अजीब सा होता है. तन-बदन में सरसराहट होने लगती है. दिमाग काम करना बंद कर देता है. दिल की धड़कनें 2 गुना तेजी से चलने लगती हैं.</p>
<p>उस समय लड़कियों के दिमाग में केवल एक ही सोच दिमाग में हावी होती है कि कैसे कितनी जल्दी ये लन्ड उखाड़ कर अपनी चूत में डाल लें. और लड़के सोचते हैं कि चूत में लन्ड डाल कर उसका भोसड़ा बना दें, इतना चोदें, इतना चोदें कि उसकी चूत के परखच्चे उड़ा दें मगर अफसोस ऐसा हो नहीं पाता.</p>
<p>ज्यादातर लड़कियां ही इसमें विजय श्री हासिल करती हैं. </p>
<p>लेकिन कभी-कभी मां भी चुद जाती है, अगर लन्ड मोटा हुआ और चूत का छेद छोटा होता है तो वहां गांड फटने में समय नहीं लगता. लड़की चिल्लाती है कि बस करो, छोड़ दो. रहम करो. युक्ता के साथ भी बाद में ऐसा ही हुआ. </p>
<p>जैसे ही युक्ता ने लन्ड के टोपे को पकड़ कर पीछे किया और फिर से आगे किया और फिर से पीछे. बार-बार यही करती रही. मैं बहुत ज्यादा उत्तेजना में था और लंड का वीर्य छूटने का डर हो चला था. इसलिए मैंने तुरंत उसको रोका और केवल सहलाने को बोला.</p>
<p>फिर धीरे से मैंने उसकी लैगी में हाथ डाला तो उसमें नाड़ा तो था नहीं. मेरा हाथ सीधे उसकी चूत के ऊपर पहुंच गया था. उसकी पैंटी बहुत गीली हो चुकी थी. मैंने पैंटी को साइड में करके उसकी चूत में उंगली डाल दी.</p>
<p>जैसे ही चूत में उंगली घुसी, युक्ता के मुंह से सी … सी … आह … की आवाज आने लगी और वो अपनी कमर को मरोड़ने लगी. मैंने भी उंगली से उसकी चूत का चोदन चालू रखा.</p>
<p>वो पागलों की तरह मेरे कानों को काटती हुई मेरे बालों में अपनी उंगलियां चलाने लगी और फिर एक जोर से आह भरते हुए अपनी कमर के नीचे जांघों के पास से मेरे हाथ को कस लिया और फिर 2 मिनट तक झड़ती रही.<br />
मैं इस बीच में उसकी चूचियों को दबाता रहा. वो मेरे लंड को आगे पीछे करती हुई झड़ती रही. </p>
<p>उसका सारा माल मेरी उंगलियों से होता हुआ मेरे पूरे हाथ में भर गया. इधर मेरा भी लन्ड अपने उफान पर आ गया और मैंने भी एक जोर की पिचकारी छोड़ दी. वो पिचकारी इतनी जोर से निकली थी कि आगे वाली सीट के बिल्कुल ऊपर तक गई थी. अगर हमारे आगे वाली सीट पर कोई बैठा होता तो उस दिन उसके सिर में शैम्पू ही लग जाना था. एक पिचकारी ऊपर हवा में जाने के बाद बाकी का माल युक्ता के हाथ से होता हुआ उसकी उंगलियों में भर गया.</p>
<p>इस दौरान हम दोनों ये तो भूल ही गए थे कि कोई चुपके से हम दोनों को देख रहा है. वो कोई और नहीं बल्कि शोभा ही थी और मुझे और युक्ता को देख कर हंस रही थी. वो पिछले 10 मिनट से हमारी सारी कारस्तानी पर ध्यान लगा कर देख रही थी.</p>
<p>शोभा भी मेरे लन्ड से खेलना चाहती थी. ये मुझे उसने बाद में बताया और ऐसा हो भी क्यों न … जब एक हैंडसम स्मार्ट सा लड़का अपने गोरे लंड के गुलाबी सुपारे के साथ नजरों के सामने बैठा हो तो चूत को गीली होने में भला कितना समय लगना था. </p>
<p>जब मैंने देखा कि शोभा हमारी तरफ ध्यान लगा कर देख रही है तो मैंने तुरंत शोभा को देख कर स्माइल पास कर दी और अपने लन्ड को ऐसे ही बाहर रखा और धीरे से युक्ता से कहा- हमारा पूरा लाइव शो शोभा ने भी देखा है.</p>
<p>युक्ता बोली- वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ है. मुझे उसकी कोई परवाह नहीं, वो तो बेशर्म है ही लेकिन तुम भी कम बेशर्म नहीं हो.</p>
<p>इन्हीं बातों के बीच में मैंने धीरे से युक्ता का मोबाइल नंबर लेकर अपने मोबाइल में सेव कर लिया और शोभा को धीरे से आंख मार दी. वो समझ गई कि मैं और वो दोनों क्या चाहते हैं. फिर हम चारों वहां से शो खत्म होने के पहले ही निकल गए. बाहर आकर हमने एक अच्छे से रेस्तरां में फ़ास्ट फ़ूड खाया. खाना खाते हुए हम सब एक दूसरे को देख कर मुस्करा रहे थे. शोभा मुझे देख कर कुछ ज्यादा ही फ्रेंक हो रही थी.</p>
<p>एक बात मैंने नोटिस की कि युक्ता को शायद मुझसे कुछ ज्यादा ही लगाव हो गया था. उसकी बातों में मुझे प्यार वाला फील आ रहा था. युक्ता थी भी बहुत सुंदर. उसके बाद हम दोनों दोस्तों ने उन दोनों को ऑटो रिक्शा स्टैंड पर ड्राप कर दिया लेकिन युक्ता की नज़र मुझ पर से हट ही नहीं रही थी.<br />
मैंने उसको बाय बोला और उसे एक फ्लाइंग किस दे दिया. उसने भी रिप्लाई में मुझे फ्लाइंग किस दी और बाय बोल कर चली गई. </p>
<p>वो दोनों तो चली गईं लेकिन मैं इस अधूरी चुदाई से जैसे पागल सा हो उठा.</p>
<p>रात में मैंने युक्ता और शोभा की चूचियों और चूत के बारे में सोच कर मुट्ठ मारी. दो बार लंड से वीर्य फेंका दब जाकर मेरी अन्तर्वासना थोड़ी ठंडी पड़ी. फिर लेटे हुए रात के दो बजे का समय हो गया.</p>
<p>अचानक से फोन का मैसेज बजा तो मैंने देखा कि फोन में मेरे पास दो मैसेज आये हुए हैं.<br />
एक में लिखा था- तुमसे मिल कर मुझे बहुत अच्छा लगा. ये शोभा का मैसेज था.<br />
दूसरे में लिखा था- आई लव यू. (मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं) ये युक्ता का मैसेज था. </p>
<p>दोस्तो, इसके बाद की अगली कहानियों में मैं आप लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने एक साथ युक्ता और शोभा की चुदाई की. उन दोनों की चुदाई उनकी सहमति से ही हुई थी. लेकिन उसके लिए आप लोगों को मेरी अगली कहानी का इंतजार करना पड़ेगा. जैसे ही समय मिलेगा मैं अपनी अगली कहानी लिखूंगा. </p>
<p>फिलहाल आप इस कॉलेज गर्ल स्टोरी के बारे में मुझे बतायें कि आपको मेरी यह कैसी लगी. आपको मजा आया कि नहीं. मैंने अपनी मेल आई डी नीचे दी हुई है.<br />
[email protected]</p>
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			</item>
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		<title>मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:48:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
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		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर <a title="मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/munhboli-beti-ne-seal-tudwai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी</p>
<p>जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।</p>
<p>तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।<br />
एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।</p>
<p>चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।<br />
मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।</p>
<p>चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।</p>
<p>मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।</p>
<p>उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।</p>
<p>अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।</p>
<p>उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।<br />
मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।</p>
<p>मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?<br />
मैंने उससे पूछा।<br />
वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!<br />
वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।</p>
<p>मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।<br />
वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?<br />
मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।</p>
<p>दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।</p>
<p>मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’<br />
अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।</p>
<p>उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।<br />
मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?<br />
वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।<br />
मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।</p>
<p>मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?<br />
मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!</p>
<p>मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’<br />
बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।</p>
<p>उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।<br />
रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।</p>
<p>इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।<br />
वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।</p>
<p>मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।<br />
जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।<br />
वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।</p>
<p>हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.<br />
वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।<br />
मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।</p>
<p>मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।<br />
मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।</p>
<p>मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.<br />
और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।</p>
<p>मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।</p>
<p>एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?<br />
वो बोली- हाँ पापा?<br />
मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?<br />
दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?<br />
मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?</p>
<p>वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।</p>
<p>उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।</p>
<p>मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।</p>
<p>मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?<br />
मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?</p>
<p>मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।<br />
तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.</p>
<p>बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।<br />
19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।<br />
मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।<br />
वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!<br />
वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।</p>
<p>उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।</p>
<p>वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया। मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।</p>
<p>मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?<br />
वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।</p>
<p>मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।</p>
<p>तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.<br />
और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।<br />
पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।</p>
<p>फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।<br />
मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।<br />
मैं तो खुशी से उछल पड़ा।</p>
<p>जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।</p>
<p>मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!<br />
कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।<br />
वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।<br />
मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।</p>
<p>मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।<br />
फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।</p>
<p>मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।<br />
वो बोली- जी पापा?<br />
मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।<br />
वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।</p>
<p>जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।</p>
<p>मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।</p>
<p>तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।</p>
<p>बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।</p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?<br />
वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।<br />
मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?<br />
वो बोली- पता नहीं पापा।</p>
<p>मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।</p>
<p>मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।</p>
<p>और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!<br />
उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।</p>
<p>वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!<br />
मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।<br />
वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।</p>
<p>मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।<br />
एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।</p>
<p>और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।<br />
उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।<br />
मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!</p>
<p>मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.</p>
<p>मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।<br />
जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.</p>
<p>मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।</p>
<p>उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।</p>
<p>थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?<br />
वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।<br />
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।</p>
<p>वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।</p>
<p>मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।<br />
उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।</p>
<p>मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!</p>
<p>मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।<br />
फिर बाहर आई।<br />
मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।<br />
तब कहीं वो सहज हुई।</p>
<p>शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।<br />
मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.</p>
<p>मेरी बीवी ने उसकी अच्छी सेवा की अपनी बेटी की तरह, मगर उसे ये नहीं पता था कि उसका पति और दिव्या का नकली बाप ही उसकी इस हालात का जिम्मेदार है।</p>
<p>[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था. आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और <a title="सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-beti-teenage-girl/" aria-label="Continue reading सगी बहन की बेटी टीनएज गर्ल चोद कर प्यास बुझायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरी टीनएज गर्ल भांजी मेरे घर कुछ दिन रहने आई थी. उसकी उम्र 19 साल की थी. वो देखने में बड़ी मस्त थी. मैंने आज से पहले उसको कभी इस नजर से नहीं देखा था.</p>
<p>आज जब मैंने एक बात नोटिस की कि वह मुझसे बहुत अधिक बातें कर रही थी. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.<br />
मेरी उम्र 42 वर्ष है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बेटा है. </p>
<p>वो सर्दियों के दिन थे, एक दिन शाम को मैं मरी पत्नी और मेरी भांजी बैठे हुए बातें कर रहे थे. हम तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे हुए थे और अपनी टांगों पर कम्बल डाला हुआ था. अचानक मेरा पैर उसकी टांगों के बीच में चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा था. मैंने सोचा कि यह मेरी पत्नी के पैर हैं, लेकिन कुछ टाइम बाद मुझे मालूम हुआ मेरा पैर तो मेरी भांजी की टांगों से टकरा रहा था और वो मेरी इस बात का कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी थी.</p>
<p>बस दोस्तो, यहीं से मेरे मन में उसके लिए विचार बदल गए. मैंने उसकी जांघ पर अपने पैसे से सहलाना शुरू किया, तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. उसके कुछ वक्त बाद हम सोने की तैयारी करने लगे. मेरी पत्नी के बाजू में मेरा बेटा सोया हुआ था.</p>
<p>मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरी पत्नी बहुत ही खुले विचारों वाली है और वह मुझसे सेक्सी बातें खुलकर करती है. दूसरों को चुदवाने के बारे में भी वह कहती है कि आप किसी को चोदोगे, तो मैं आपको देख कर बहुत मजे लूंगी. </p>
<p>इसी बीच मैंने मजाक मैं अपनी पत्नी और अपनी भांजी से कहा- यार, सर्दी ज्यादा ही नहीं बहुत ज्यादा है … कोई हमें भी पास सुला लो. </p>
<p>इस पर मेरी पत्नी ने मजाक में कह दिया- मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो.<br />
तभी मेरी भांजी ने कहा- मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं. आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ … मेरे पास आ जाओ.</p>
<p>देर ना करते हुए मैं तुरंत अपनी भांजी के बेड पर आ गया और उसके साथ लेट गया. मैंने लेटते ही कमरे की लाइट बंद कर दी. मेरी बीवी समझ चुकी थी कि मैं टीनएज गर्ल के कामुक बदन का मजा लूंगा.</p>
<p>करीब 10-15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरी भांजी को नींद आ गई है, वह मेरी तरफ पीठ किए हुए थे. तभी मैंने उसके पीछे से सटकर उसके ऊपर हाथ रखा, तो उसने कोई विरोध नहीं किया. अब मैं उसके बिल्कुल बराबर में पीछे से सट कर लेट गया. मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके चूतड़ों की दरार में लग रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और मेरी भांजी के चूतड़ों पर स्पर्श कर रहा था. वह अब भी कोई विरोध नहीं कर रही थी.</p>
<p>तभी मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मम्मों पर लगाया. आह … बिल्कुल गोल गोल उभार लिए मस्त बूब्स थे. दोस्तों अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी. मैंने एक हाथ उसके सूट के अन्दर डालकर उसके नंगे मम्मों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसका कोई विरोध ना देख कर मैंने उसको सीधा कर लिया. </p>
<p>वह अब सीधी लेटी हुई थी. मैंने धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती को बिल्कुल ऊपर कर दिया और दोनों चूचे नंगे कर दिए. दोनों मम्मों को नंगे करने के बाद मैंने धीरे से अपने होंठ उसके एक चूचे पर लगाए और उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.</p>
<p>उसके दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं. मैं जान चुका था कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है. उसकी सांसें भी तेज हो चुकी थीं. </p>
<p>कुछ देर उसके मम्मों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार में सरका दिया और उसकी चूत पर रखा, तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भीगी हुई थी. मैं समझ गया कि यह बिल्कुल गर्म हो चुकी है.<br />
मैंने सोचा कि यह अभी कुंवारी है, किसी से चुदी नहीं है … यहां पर पूरा खेल नहीं हो पाएगा. मेरा बेटा भी इसी कमरे में सोया हुआ था. बराबर में दूसरा कमरा खाली था. मैंने कुछ टाइम उसकी चूत में उंगली से सहलाया.</p>
<p>जब मैंने महसूस किया कि अब यह पूरी गर्म हो चुकी है, तो मैंने धीरे से उसके कान में कहा- चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं.<br />
मेरे इतना कहते ही मेरी भानजी उठकर बराबर वाले कमरे में पहुंच गई. पीछे से मैं भी कमरे में पहुंच गया. दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने नीचे बिस्तर लगा दिया. </p>
<p>इसी बीच मैंने उस कमरे से दूसरे कमरे में खुलने वाली खिड़की को हल्का सा खोल दिया ताकि मेरी पत्नी भी हमारी चुदाई का आनन्द ले सके. दूसरे कमरे में जाते ही मैंने उसको नीचे लगे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उसने और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे. मेरी भांजी मेरे लंड से चुदने के लिए बिल्कुल बेकरार हो रही थी.</p>
<p>अपनी बहन की बेटी को नंगी करने के बाद मैंने देखा कि वह बहुत ही कामुक और सुंदर नजर आ रही थी. उसके चूचे बिल्कुल गोल और कड़े थे. उसकी चूत बहुत उभार लिए हुए थी. फूली हुई बुर देख कर मजा आ गया.</p>
<p>मैं उसको देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने तुरंत ही उसको चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी.<br />
अब मैंने अपनी भांजी से पूछा- कैसा लग रहा है?<br />
उसने कहा- मामा जी बहुत मजा आ रहा है … आगे करो ना कुछ. </p>
<p>कुछ समय तक उसके मम्मों को चूसने के बाद मैं नीचे आया और उसकी टांगें फैलाकर देखा, तो उभार लिए हुए उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैंने उसकी चूत की दरारों को दोनों उंगलियों से फैला कर चौड़ा किया, तो मजा आ गया.</p>
<p>क्या सेक्सी सीन था … मैं बयान नहीं कर सकता. बिल्कुल गुलाबी चूत थी. उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के रोएं आने शुरू हुए थे. एकदम फूली हुई चूत मस्त पाव रोटी सी दिख रही थी. मैं अपनी बेटी समान भानजी की चूत को देखता ही रह गया. मेरे मन में आ रहा था एकदम से इसकी चूत में अपना लंड पेल दूं, लेकिन मैं जानता था कि अभी यह बिना चुदी हुई है … इसलिए बहुत प्यार से चोदना पड़ेगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मेरा लंड भी 7 इंच लंबा और काफी मोटा तगड़ा लंड है. मैं जानता था कि इसकी कमसिन चुत की ओपनिंग बहुत प्यार से करना पड़ेगी. ये इतना बड़ा लंड आराम से नहीं ले पाएगी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत की दरार को उंगली से फैला कर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.<br />
मेरी जीभ उसकी कुंवारी बुर में लगते ही वह उछल पड़ी.</p>
<p>मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को कुछ अन्दर तक डाल कर चाटना शुरू किया. उसकी चूत पहले ही पानी से भीगी हुई थी … बिल्कुल नमकीन पानी था जिसको मैं चाट कर मस्त हो रहा था. चूत से कोरेपन की भीनी खुशबू आ रही थी. पूरी तरह गीली चूत मुझको चाटने को मिल रही थी. मैं मस्ती में भर कर उसकी चूत को चाट रहा था. वह गांड उछाल उछाल कर सिसकारियां ले रही थी. वो अपने एक हाथ को मेरे सिर पर रख कर अपनी चूत पर मेरे मुँह को दबाए जा रही थी.</p>
<p>तभी उसने मुझसे कहा- मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है … जल्दी से कुछ करो ना!</p>
<p>कुछ टाइम उसकी चूत चाटने के बाद मैंने कहा- मेरी प्यारी भांजी, मेरे लंड को भी तो चाट कर मजा दो ना?</p>
<p>मेरे इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड पानी से भीग चुका था, लेकिन वो पूरे लंड को चाट कर साफ कर चुकी थी. वो आइसक्रीम की तरह मेरे लंड को चाट रही थी. </p>
<p>करीब 5 मिनट मेरे लंड को चाटने के बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और कहा- मामा जी, बहुत मोटा है, मेरा मुँह दुख रहा है … अब नीचे कुछ करो ना प्लीज. </p>
<p>मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया. उसकी टांगों के बीच में बैठकर अपनी हाथ की उंगलियों से उसकी चूत की दरार को फैलाया. अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के मुँह पर सैट किया और हल्के से धक्का लगा दिया.<br />
इस धक्के से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था. </p>
<p>तब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा- हां मामाजी हल्का सा दर्द महसूस हो रहा है.<br />
मैंने उसको समझाया- हल्का दर्द होगा, उसके बाद मजा आने लगेगा. तुम चीखना नहीं.<br />
उसने सहमति से सर हिला दिया.</p>
<p>मैंने उसके एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने शुरू किया और अपने लंड के दबाव को कुछ आगे बढ़ाना शुरू किया. मेरा लंड का कुछ और हिस्सा उसकी चूत के अन्दर समा चुका था, उसको थोड़ी पीड़ा हो रही थी.<br />
फिर मैंने अपने लंड को वहीं रोक कर हल्का हल्का आगे पीछे करना शुरू किया, तो उसका दर्द भी कुछ कम हुआ और उसको मजा आने लगा. अब वह नीचे से कभी-कभी अपनी गांड को उछाल कर मजा ले रही थी.</p>
<p>तभी मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक जोरदार ठाप दे मारी, तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा समा गया. इसी के साथ मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. इस कारण उसकी हल्की सी कराहट निकल सकी. लेकिन मेरा लंड पूरा मेरी सगी बहन की बेटी की चूत में समा चुका था और उसकी सील टूट चुकी थी.</p>
<p>मैं उसकी चूत में अपना लंड फंसा कर उसके ऊपर लेटा रहा और उसके मम्मों को बार बार मुँह में लेकर चूसने लगा. वह कुछ नॉर्मल हुई, तो मैंने अपने लंड को थोड़ा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. </p>
<p>अब उसकी मादक सिसकारियां चालू हो गईं, मैं समझ चुका था कि अब मेरी भांजी चुदाई का मजा ले रही है. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी. </p>
<p>अब मैं और मेरी भांजी चुदाई का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. मैंने अपने आपको रोकते हुए अपना लंड चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का हल्का खून लगा हुआ था. मैंने उसको साफ किया और उसकी चूत को भी साफ किया. फिर दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी.</p>
<p>इसी बीच मैंने खुली खिड़की में देखा तो मेरी पत्नी हम दोनों की चुदाई देख रही थी और मजा ले रही थी. </p>
<p>मैं और मेरी भांजी दोनों पूरे मजे में डूबे रहे थे. मैं अपनी भांजी से धीरे-धीरे बातें कर रहा था और पूछ रहा था- कैसा लग रहा है?<br />
वह चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और बातों का मजा ले रही थी. वो मुझसे खुलकर बातें कर रही थी. लंड चुत चुदाई के शब्द खुल कर बोल रही थी. वो हॉट चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. </p>
<p>इसी बीच मेरी भांजी ने मुझसे कहा- मामाजी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है … और मुझे कुछ हो रहा है.<br />
मैं समझ चुका था कि अभी ये झड़ने वाली है. </p>
<p>तभी उसने मुझको कस कर जकड़ लिया और कहा- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामा जी … प्लीज प्लीज … </p>
<p>तभी वह शांत पड़ गई. मैं समझ गया कि यह झड़ गई. उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया.</p>
<p>फिर मैंने उसको कपड़े पहनाकर दूसरे कमरे में जाने दिया और अपनी पत्नी को इसी कमरे में बुलाकर उसकी चुदाई के मजे लेने की सोचने लगा … क्योंकि मेरे लंड का पानी अभी निकला ही नहीं था. </p>
<p>मेरी पत्नी आते ही नंगी हो गई और उसने सारे कपड़े निकाल दिए. उसने मुझे बताया कि मैं आपकी सारी चुदाई छुपकर शुरू से देख रही हूं. देखो मेरी चूत में कितना पानी है.<br />
मैंने हाथ से देखा, तो मेरी पत्नी की चूत बिल्कुल भीगी हुई थी.</p>
<p>मैंने तुरंत ही अपनी पत्नी को चित लिटाया और उसकी चूत को चाट कर पानी को पी गया. फिर अपना खड़ा लंड डालकर उसकी चुदाई की और उसकी चूत में ही झड़ गया. अब मैं भी शांत हो चुका था.</p>
<p>तभी मेरी भांजी भी उसी कमरे में आ गई. उसने मेरे झड़े हुए लंड को चूस लिया. मेरी बीवी ने उसको बिस्तर पर ले लिया. इसके बाद अगला राउंड मैंने भांजी की चुदाई से शुरू करके बीवी की चूत तक का किया. इस थ्री-सम सेक्स में बहुत मजा आया.</p>
<p>दोस्तो, उसके बाद मैं मेरी पत्नी और मेरी भांजी हम रोजाना मिलकर चुदाई का मजा लेने लगे. यह सिलसिला अभी तक बरकरार है. अभी तक मेरी भांजी की शादी नहीं हुई है और हम तीनों साथ साथ ही चुदाई का मजा ले रहे हैं. </p>
<p>आपको मेरी यह टीनएज गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बहन की चुदाई दोस्त से करवाई</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-chudai-dost-se/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 13:51:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Bhai Behan Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरी इस गर्म हिंदी सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे मुझे अपनी बहन की वासना के बारे में पता चला और मैंने बहन की चुदाई अपने एक दोस्त से करवायी. अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी पसंद करने वाले मेरे प्यारे दोस्तो, मैं एक कहानी लेकर आया हूँ. इस हिंदी सेक्स कहानी में एक लड़का है, जिसका नाम <a title="बहन की चुदाई दोस्त से करवाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/behan-ki-chudai-dost-se/" aria-label="Continue reading बहन की चुदाई दोस्त से करवाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरी इस गर्म हिंदी सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे मुझे अपनी बहन की वासना के बारे में पता चला और मैंने बहन की चुदाई अपने एक दोस्त से करवायी.<br />
<span id="more-136"></span></p>
<p>अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी पसंद करने वाले मेरे प्यारे दोस्तो, मैं एक कहानी लेकर आया हूँ.<br />
इस हिंदी सेक्स कहानी में एक लड़का है, जिसका नाम यश ग्रोवर है. यश की उम्र 20 साल है.<br />
आगे की सेक्स कहानी उसी की जुबानी सुनिएगा.</p>
<p>दोस्तो, मैं यश … मेरे पिता जी एक बहुत बड़े बिज़नसमैन है. उनका करोड़ों का बिज़नस है. जिस सिलसिले में वो विदेशों में अक्सर ही रहते हैं. मॉम भी उनकी ही पार्टनर हैं. वे दोनों अक्सर अपने बिजनेस के सिलसिले में घर से बाहर ही रहते थे.</p>
<p>मैं एमबीए कर रहा हूँ. मेरी कद काठी बहुत ही मस्त है, जिस कारण बहुत सी लड़कियां मुझ पर मरती भी हैं. मेरी बहन की सहेलियां भी मुझपे मरती हैं. </p>
<p>अब पहले मैं अपनी बड़ी बहन के बारे में बता देता हूँ. मेरी बहन का नाम प्रिया ग्रोवर है. उसका कद 5 फुट 7 इंच है, उसे तने हुए मम्मे 38 इंच के हैं. उठी हुई गांड का नाप 38 इंच है. उसका पेट बिल्कुल भी निकला हुआ नहीं है. वो एक तरह से सेक्स बम्ब है, जो भी उसे देखता है, उसका लंड खड़ा हो जाता था. मेरा दावा कि अगर कोई बूढ़ा भी उसको देख ले, तो मेरा दावा है कि उस बुड्डे का लंड भी खड़ा हो जाएगा. हालांकि मैंने कभी भी अपनी बहन को सेक्स की नज़र से नहीं देखा था. </p>
<p>हमारे घर पर कोई भी रोक टोक नहीं है. कोई भी कैसे भी कपड़े पहन सकता है. </p>
<p>एक बार प्रिया मेरे साथ शॉपिंग कर रही थी, तो वो ब्रा पेंटी वाले सेक्शन में चली गई. मुझे देर हो रही थी, तो मैं उसे बुलाने चला गया. मैंने देखा कि वो बहुत ही हॉट ब्रा पेंटी खरीद रही थी. मैं ये देख कर शॉक्ड हो गया. </p>
<p>प्रिया ने मुझे देखकर वो छुपाई नहीं बल्कि शॉप वाले लड़के को और हॉट पेंटी ब्रा दिखाने को बोलना शुरू कर दिया.</p>
<p>उसने सेल्समैन से कहने के बाद मेरी तरफ देखकर स्माईल दी. मैं कुछ नहीं बोला, बस चुप रह गया. उसने बड़ी तसल्ली से अपने लिए ब्रा पेंटी खरीदी और पैक करवाके मेरे साथ वापस आ गई. </p>
<p>जब मैं घर आ गया और खाना खाकर सोने लगा, तो मुझे नींद नहीं आ रही थी. अचानक मुझे प्रिया की याद आ गई कि वो कैसे ब्रा पेंटी बड़े आराम से मेरे सामने ही हाथ में लेकर बैठी थी. मैं अचानक उसके मम्मों और चूतड़ों के बारे में सोचने लगा कि इतने मस्त चूचे और चूतड़ हैं, पता नहीं साली कितनों से चुदी होगी. बस उसकी नंगी जवानी को याद करके मैं मुठ मार कर सो गया. </p>
<p>सुबह जब ब्रेकफास्ट के टेबल पर आया, तो प्रिया शॉर्ट्स में ही थी, जो काफी पतले कपड़े के थे. उसमें से उसकी रेड कलर की पेंटी और ग्रीन ब्रा नज़र आ रही थी. </p>
<p>मैंने उससे बात की- प्रिया दी, आज कॉलेज नहीं जाना क्या?<br />
प्रिया- नहीं भाई … मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात को मैं बाथरूम में गिर गई थी, मेरी कमर में दर्द हो रहा है.<br />
मैं- अरे कैसे हो गया दीदी … और आप अब बता रही हो, पहले क्यों नहीं बताया … तुम बता सकती थी न … मुझे रात को ही जगा लेना था.<br />
प्रिया- अरे बाबू … मेरी डार्लिंग, कोई बात नहीं … मैंने पेन किलर गोली ले ली थी … अब बस कमर में जरा सा दर्द है. अगर तुम मेरी मालिश कर दो, तो मेहरबानी होगी.<br />
मैं- अरे दीदी मेहरबानी की क्या बात है … आओ … अभी कर देता हूँ.</p>
<p>हम दोनों रूम में आ गए. वो मेरे बेड पर उल्टा लेट गई. मैं तो उसके चूतड़ों को देख कर उसी घाटी में खो गया. </p>
<p>तभी दीदी ने आवाज लगायी- अब शुरू भी हो जाओ यार!</p>
<p>मैंने दीदी के शॉर्ट्स को उतारा, तो उसकी रेड पेंटी गांड के अन्दर घुसी जा रही थी. ये देख कर मेरा लंड खड़ा ही हो गया. मैंने जैसे ही उसकी कमर पर हाथ लगाया, मैं तो जैसे स्वर्ग में ही चला गया था. </p>
<p>मैंने अच्छे से दीदी की गांड की मालिश शुरू की. दीदी भी थोड़ा ‘आह आह्ह आह्ह्ह …’ कर रही थी. </p>
<p>दीदी बोली- तुम्हारे हाथों में जादू है, मेरा दर्द कम हो रहा है … दो तीन दिन की मालिश कर देना, मैं ठीक हो जाऊंगी.</p>
<p>मैं रोज दीदी की गांड की मालिश करने लगा. तीन दिन में दीदी ठीक हो गई. लेकिन अब मेरे मन में हमेशा दीदी की गांड ही रहती कि क्या मैं कभी दीदी के साथ सेक्स कर पाऊंगा या नहीं. फिर मैं सोचता कि वो मेरी बहन है. मुझे कुछ तो समाजिक बंधन डरा रहे थे, कुछ अन्दर से भी डर सा लग रहा था.</p>
<p>एक दिन मैं कॉलेज में दोस्तों के साथ मस्ती कर रहा था, तो मेरा दोस्त रोहण भारद्वाज, मुझसे बात करने लगा. रोहण मेरा कॉलेज का दोस्त था. वो काफी बार कई रंडियां चोद चुका था. उसके पिता जी मेरे पिता जी से भी 20 गुना अमीर थे. उसके घर से पैसों की कोई कमी नहीं थी. </p>
<p>रोहण मुझसे बोला कि आज मैं एक नयी रंडी चोदने जा रहा हूँ, साली सील बंद माल है … उसकी चूत का उद्घाटन मैं ही करूंगा. दो लाख में उसकी नथ उतारने का सौदा हुआ है. उसकी चूत को मैं रात भर चोदूंगा, तू भी चल, तू भी अपना लंड उसके मुँह में डाल लेना. </p>
<p>मैंने मना कर दिया … क्योंकि मेरे मन में प्रिया ही थी. मैं घर आ गया.</p>
<p>मैं घर आ कर प्रिया के नाम की मुठ मार कर सोने लगा. पर नींद नहीं आ रही थी, तो मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी पढ़ने लगा.</p>
<p>इसमें रिश्तों में चुदाई की कुछ हिंदी सेक्स स्टोरी का लिंक पर क्लिक किया, तो सामने भाई बहन, बाप बेटी की सेक्स स्टोरी आ गईं. मैंने दो सेक्स स्टोरी पढ़ीं, तो मजा आ गया. फिर मैंने ऑनलाइन सेक्स चैट करनी शुरू की, जिसमें एक लड़की से मेरी चैट शुरू हुई. हम दोनों बहुत ही खुल कर चैट करने लगे थे. वो मेरे ही शहर की थी. </p>
<p>करीब एक हफ्ते तक उस लड़की से सेक्स चैट के बाद मैंने उससे मिलने को बोला कि हम सेक्स करेंगे. लेकिन उसने मना कर दिया. मेरी बहुत मिन्नतें करने पर उसने मिलने की हामी भरी. </p>
<p>मैंने पूछा कि हम एक दूसरे को पहचानेंगे कैसे?<br />
उसने बोला कि मैं ब्लैक टी-शर्ट पहन कर आऊंगी. तुम भी ब्लैक टी-शर्ट में ही आना.<br />
मैंने ओके कह दिया. </p>
<p>हमने मिलने की जगह एक रोज़ गार्डन का वो हिस्सा रखा था, जिसमें कोई नहीं जाता था. मैं सुबह गार्डन में जाकर बैठ गया. मैं फोन पर उससे चैट कर रहा था, अचानक पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा- आ गए जनाब. </p>
<p>मैं जैसे ही पीछे मुड़कर देखने लगा, मेरे तो तोते ही उड़ गए. क्योंकि वो मेरी ही सगी बहन प्रिया थी. </p>
<p>प्रिया भी मुझे देख कर हैरान हो गई. दो तीन मिनट तक तो हमने आपस में कोई बात ही नहीं की. </p>
<p>फिर मैंने बात शुरू की- दीदी, आप ऐसी साइट पर सेक्स स्टोरी पढ़ती हो … क्या आपको शर्म नहीं आती … आप रात भर सेक्स चैट करती हो.<br />
प्रिया- तो तुम भी तो रात भर सेक्स चैट करते हो … कैसे रात को मेरी चूत चाटने की बात कर रहे थे. तुम बोल रहे थे कि अपना 8 इंच का लंड मेरी चूत में डालोगे, रात भर चोदोगे, गांड भी मारोगे. यह सब कुदरत की देन है. इसमें ना आपकी गलती है, ना मेरी. भाई ये प्राकृतिक क्रिया है. मेरा भी चुदने का मन करता है, जब मैं पोर्न मूवी देखती हूँ. आज तो मेरा मन और भी ज्यादा कर रहा है. लेकिन इधर तो तुम निकले.</p>
<p>मैंने उसको खुल कर चूत लंड चुदाई बोलते देखा तो मैंने कहा- तो क्यों ना हम आपस में ही सेक्स करें?<br />
लेकिन प्रिया ने साफ मना कर दिया और बोली- भाई बहन में ये सब नहीं हो सकता. हां, हम लोग खुल कर बात कर सकते हैं.</p>
<p>मैंने पूछा- तुम अभी तक कितने लड़कों से चुदी हो?<br />
प्रिया ने बताया- मैं अभी तक वर्जिन हूँ. मैंने आज तक कभी सेक्स नहीं किया है, लेकिन मेरा मन बहुत करता है. पर मैं भाई के साथ नहीं कर सकती.</p>
<p>तभी मेरे मन में एक ख्याल आया कि क्यों ना मैं प्रिया को रोहण से चुदवा लूं और उससे वर्जिन चूत के बदले पैसे भी वसूल करूं. वैसे भी पापा ने स्पोर्ट्स बाइक लेकर देने को मना कर दिया और बोला था कि खुद कमाओ और चाहे जहाज खरीद लो. </p>
<p>उधर से हम दोनों घर वापस आ गए.</p>
<p>मैंने दीदी के रूम में जाकर दीदी को बड़े प्यार से कहा- दीदी मेरे पास एक रास्ता है … जिसमें आपकी चूत को चुदाई का मजा भी आएगा और हम पैसे भी कमा सकते हैं.<br />
प्रिया बोली- कैसे?<br />
मैंने रोहण के बारे में बताया तो दीदी ने पूछा- कोई रिस्क तो नहीं होगा?</p>
<p>अब मैंने दीदी को बस किसी तरह रोहण से चुदने के लिए मना ही लिया.</p>
<p>अगले दिन कॉलेज जाकर मैं रोहण के सामने जानबूझ कर दीदी की पिक देख रहा था. </p>
<p>रोहण ने प्रिया की पिक देखते ही कहा- वाह क्या माल है यार … ऐसी पटाखा लड़की तो मैंने आज तक नहीं देखी … कौन है यह छमिया?<br />
मैंने बोला- एक टॉप की मॉडल है.<br />
रोहण बोला- इसकी दिलवा दे, मैं तुझे भी खुश कर दूँगा.<br />
मैंने कहा- यह पांच लाख रुपए लेगी क्योंकि यह वर्जिन है.<br />
वो बोला- कोई नहीं यार … बस तू तो इसकी कुवारी चूत दिलवा दे.<br />
मैंने हामी भर दी.</p>
<p>फिर घर वापिस आ कर मैंने दीदी को बताया. </p>
<p>दीदी बोली- मैं होटल में नहीं जाऊंगी, वहां सबको पता चल जाएगा कि मैं कॉलगर्ल हूँ, उसे तुम घर पर ही बुला लो.<br />
मैंने कहा- ठीक है लेकिन उसे पता ना चले कि हम दोनों भाई बहन हैं.<br />
प्रिया बोली- तुम टेंशन ना लो … वो मैं सब हैंडल कर लूंगी.</p>
<p>मैंने रोहण से पैसे लिए और उसे लेकर अपने घर ले आया. रोहण ने पूछा कि किधर ले जा रहा है.</p>
<p>मैंने कहा- तू बस चल … उसको मैंने अपने घर में बुला लिया है.</p>
<p>हम दोनों घर आ गए. मैंने दीदी को मिस कॉल दी, तो दीदी ऊपर वाले कमरे से नीचे आ गई. </p>
<p>इस वक्त उसने एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी. क्या बताऊं, उसे देखकर तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया था. </p>
<p>रोहण ने प्रिया को हग किया और उसके होंठों पर चुम्बन कर दिया.</p>
<p>दीदी ने स्माईल दी और मुझे आंख मारी. वो रोहण से बोली- आप कमरे में अन्दर चलिए, मैं अभी आती हूँ.<br />
रोहण कमरे में चला गया.</p>
<p>प्रिया ने मेरे कान में कहा- आज तुम्हारी 22 साल की बहन की चुदाई होने वाली है, चूत की सील टूटने वाली है, मेरी चुदाई देखना और मजे लेना.<br />
यह कह कर प्रिया कमरे के अन्दर चली गई.</p>
<p>रोहण ने दीदी के कमरे में आते ही उसे पीछे से झटके से पकड़ लिया और होंठों को जबरदस्त चूसने लगा. वो दीदी के मम्मों को दबाने लगा. कभी वो दीदी के चूतड़ों को दबाता और चुम्मियां लेता. </p>
<p>उसकी हरकतों से मेरा तो लंड पूरे ताव में आ गया था. उसने प्रिया की टी-शर्ट और जींस उतार दी. साथ ही उसने प्रिया दीदी की बहुत सेक्सी दिखने वाली पेंटी भी फाड़ दी. दीदी की बिना बाल वाली चिकनी चूत उसके सामने आ गई थी. वो दीदी की चूत चूसने लगा. </p>
<p>वो एकदम से पगला गया था. कभी वो दीदी की चूत में जीभ डालता, कभी चूत के दाने को चाटने लगता. मैंने देखा कि कुछ ही देर में प्रिया दीदी की चूत एकदम लाल हो गई थी. </p>
<p>फिर रोहण ने अपना लंड प्रिया के हाथ में पकड़ा दिया और बोला कि इसे चूस कर खड़ा कर दे.</p>
<p>प्रिया ने लंड चूसने से मना किया, तो उसने प्रिया के मुँह पर चांटा जड़ दिया. मुझे बहुत गुस्सा आया, लेकिन अब पैसे लिए थे, तो क्या कर सकते थे, प्रिया को रोहण का लंड चूसना पड़ा. लेकिन दो मिनट बाद ही मुझे लगा कि प्रिया खुद ही बड़े मजे रोहण का लंड चूस रही थी. वो गले तक लंड लेने लगी थी.</p>
<p>रोहण को भी लंड चुसाई में मजा आ रहा था, वो प्रिया के बाल पकड़ कर मुख मैथुन में लगा हुआ था.</p>
<p>कुछ देर बाद रोहण ने प्रिया की चूत के होंठों पर अपना दस इंच का लंड रखा और धक्का दे मारा.<br />
उसका दो इंच लंड प्रिया की चूत में घुसता चला गया, जिससे प्रिया बहुत ऊंचे स्वर में चिल्ला उठी- उई मां मर गई … मुझे बचाओ उम्म्ह … अहह … हय … ओह …<br />
उसकी आंखों में आंसू आ गए थे.</p>
<p>तभी रोहण ने दूसरा झटका दे मारा, तो उसका आधा लंड चूत में चला गया.</p>
<p>लंड के झटकों के कारण प्रिया दीदी बेहोश हो गई. रोहण भी एकदम से डर गया और उसने लंड डाले हुए रुकना ठीक समझा. उधर ही पास की टेबल पर पानी का गिलास रखा था. रोहण प्रिया के चेहरे पर पानी के छींटे मारने लगा.</p>
<p>कुछ देर बाद प्रिया को होश आया, तो रोहण फिर से शुरू हो गया. कुछ देर बाद प्रिया को दर्द होना बंद हो गया.</p>
<p>रोहण प्रिया दीदी को आधा घंटे तक चोदता रहा. अब प्रिया को मजा आने लगा था. वो एक बार झड़ गई थी, तो उसकी चूत में चिकनाई आ गई थी. इससे रोहण का लंड बड़ी तेजी से प्रिया दीदी की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था. </p>
<p>कुछ देर बाद प्रिया दीदी रोहण के ऊपर आ गई. इससे साफ़ पता चल रहा था कि अब उसे भी खूब मजा आने लगा था. वो रोहण के लंड पर चूत टिका कर बैठ गई. रोहण ने नीचे से कमर उठा कर प्रिया की चूत में पूरा लौड़ा पेल दिया. </p>
<p>कुछ देर बाद प्रिया रोहण के लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी. मुझे पीछे से प्रिया दीदी की उछलती गांड बहुत ही मस्त लग रही थी. </p>
<p>कोई एक घंटे तक दीदी की चूत को दो बार चोदने के बाद रोहण अपने कपड़े पहन कर चला गया. लेकिन वो प्रिया की चूत का बैंड बजा गया था. मेरी बहन की चुदाई जोरदार हो चुकी थी.</p>
<p>प्रिया से उठा भी नहीं जा रहा था. मैंने जाकर उसको उठाया और बाथरूम में ले गया. बाथरूम में ले जाकर मैंने उसकी चूत की सफाई की और तेल लगाया. फिर कमरे में ला कर मैंने दीदी को पेनकिलर गोली दी, ताकि ज्यादा दर्द ना हो. </p>
<p>प्रिया ने मुझे हग किया और कहा- थैंक्स भाई … मुझे लड़की से औरत बनाने के लिए.<br />
मैंने कहा- इट्स ओके.<br />
वो कहने लगी- मुझे रोहण से चुदने में बड़ा मजा आया. आज की पूरी कमाई तेरी हो गई. तू सारे पैसे रख ले.</p>
<p>मैंने फिर एक बार उसकी आंखों में देखा, तो वो मेरी बात समझ गई.<br />
उसने कहा- अभी भी मुझे अपने भाई से चुदने में गलत नजर आ रहा है.<br />
मैंने कहा- इन्तजार सब गलत को सही कर देता है. मुझे इन्तजार रहेगा.<br />
दीदी ने मुझे गले से लगा लिया.</p>
<p>फिर मैंने कहा- दूसरा लंड लेना हो तो बात करूं?<br />
प्रिया हंस दी और बोली- एक दो दिन बाद बताती हूँ.</p>
<p>आपको मेरी बहन की चुदाई और चूत की सील टूटने वाली सेक्स कहानी कैसी लगी, जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/</link>
					<comments>https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:58:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Teenage Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Desi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Real Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं. मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना <a title="टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/teenage-girl/teenage-ladki-classmate-chudai/" aria-label="Continue reading टीनएज लड़की से मुलाकात और चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज मैं टीनएज लड़की के संग अपनी आपबीती आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं पर अपनी आप बीती बताने से पहले अपने बारे में बता देना चाहता हूं.</p>



<p>मैं दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत से हूं वैसे मैं अपने बारे में ज्यादा बताना तो नहीं चाहता पर बस इतना बता देना चाहता हूं कि सोनिपत के कुंडली तहसील के एरिया से हूं। मैं किसी भी लड़की को ये नहीं कहने वाला कि वो मुझे चोदने के लिए संपर्क करे। यह मैं उन पर ही छोड़ता हूं कि मेरी कहानी पढ़ने के बाद वो खुद ही फैसला ले।</p>



<p>चलिए तो मैं कहानी पर आता हूं:</p>



<p>यह मेरे और मेरे पड़ोस के गांव की एक टीनएज लड़की की कहानी है।<br>मैं कुछ अपने बारे में बता दूँ मेरा नाम मोहित (बदला हुआ) है। हाइट 6 फुट भरा हुआ शरीर … मुझे जिम का कोई शौक नहीं है पर दोस्तों के साथ गांव की जिम में चला जाता हूं. वैसे मैं अपने छोटे भाई के बारे में तो बताना ही भूल गया. छोटा भाई मतलब मेरे लंड से है जो 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।<br>चलिए मामला शुरू करते हैं.</p>



<p>कहानी पिछले साल नवंबर की है जब मैंने दिल्ली में सरकारी नौकरी की कोचिंग शुरू की थी।</p>



<p>जब मैंने कोचिंग लेनी शुरू की तो मुझे नहीं पता था कि ये लड़की मेरे ही बैच में एडमिशन ले लेगी क्योंकि मैंने उसे तब देखा था जब मैं अपने दोस्त के साथ एडमिशन के लिए गया हुआ था।</p>



<p>हम दोनों काफी जल्दी घर से निकल गए थे हम दोनों ने काफी सेंटर पर जाकर बातचीत की लेकिन दिमाग तो जैसे बंद ही हो गया था। फिर हमने सोचा कि जहां भी जाएंगे आरपार कर के आएंगे तो हमें वहां अच्छा भी लगा और हमने वहीं एडमिशन ले लिया।</p>



<p>फिर हम दोनों को काफी भूख लग रही थी तो हम दोनों एक होटल में चले गए।</p>



<p>मैंने ऑर्डर देने के लिए वेटर को आवाज़ लगाई तो उसने भी मेरे साथ आवाज़ लगाई। मुझे उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। पर आवाज़ से लगा कि काफी मस्त लड़की होगी। तो मैंने उठ कर उसे देखने की कोशिश की और मैं उसे देखता ही रह गया उसने काली शर्ट और नीली जीन्स डाल रखी थी। मेरा तो मुंह खुला का खुला ही रह गया था. फिर मेरे दोस्त ने आवाज़ दी तो मैं वापस बैठ गया।</p>



<p>उसने पूछा- क्या हुआ?<br>तो मैंने मजाक में कह दिया- बेटा! तेरी भाभी बैठी है वहां।<br>मैंने तो मजाक में ही ये बात कही थी पर वो सच में ही उसकी भाभी बन गई।</p>



<p>20 नवंबर से मेरी क्लास शुरू हो गई। मेरे शुरू के कुछ दिन तो बस यूं ही चले गए कुछ नए दोस्त बन गए थे और मैं भी उस लड़की को भूल गया था। मैं अपनी लाइफ और स्टडी एन्जॉय कर रहा था.</p>



<p>वो मुझे एक दिन डीटीसी की बस में मिली. मैं उसके आगे खड़ा था तो उसने पीछे से कहा- आपको उतरना है क्या?<br>मुझे वहीं आवाज़ दोबारा सुनने को मिली तो मैं भी तुरंत पीछे पलट गया और देखा तो वहीं लड़की मेरे पीछे खड़ी थी।<br>मैंने उससे कहा- नहीं मुझे नहीं उतरना.<br>और मैंने उसे आगे कर दिया।</p>



<p>जब मैंने उसकी गांड को देखा तो मुझे लगा कि ये बिल्कुल सील पैक है। फिर मन में आया कि आज भी कोई बिना चुदे रह सकती है क्या भला?<br>उस दिन तो वो मुझे फिर नहीं दिखी।</p>



<p>पर अगले दिन मैंने उसे सीढ़ियों पर मेरी ही क्लास में जाते हुए देखा.<br>अरे दोस्तो … मैं तो उस हसीना के बारे में तो बताना ही भूल गया।<br>उसका नाम काजल(बदला हुआ) है, उसकी हाइट 5’9″ है। उसका फिगर 32-28-32 है, आंखें तो ऐसी है बस कोई एक बार देखे तो खो ही जाए।</p>



<p>जब मैंने उसे सीढ़ियों पर देखा तो उसने भी मुझे देख लिया और बस हल्की सी स्माइल दी कर बढ़ गई।</p>



<p>जब वो क्लास में गई तो मैंने उसे ढूंढा पर वो नहीं दिखी। जिन भाईयों ने दिल्ली में कोचिंग ली होगी, उन्हें पता होगा वहां कुत्तों की तरह रखा जाता है स्टूडेंट्स को।<br>ख़ैर आगे बढ़ते हैं:</p>



<p>अब उसका और मेरा मिलना लगभग रोज ही होने लगा था। जब वो बस लिए इन्तजार करती थी तो मैं उसके पास चला जाता था और उससे कुछ बात हो जाती थी। बात बात में ही उसने अपना नाम मुझे बताया था और मैंने उससे अपना।</p>



<p>फिर एक दिन वो आजादपुर वाले स्टैंड पर खड़ी क्लास में जाने लिए बस का इन्तजार कर रही थी। उस दिन बस में बहुत भीड़ थी। तो मैंने उसे तो बस में चढ़ा दिया. पर मैं रह गया.<br>मैं जैसे कैसे कोचिंग में पहुंचा. तो पहले तो वो कुछ नहीं बोली।</p>



<p>जाते वक़्त मैं रोज की तरह उसके पास चला गया। पर मैं आज कुछ बोल नहीं रहा था तो वो खुद ही बोल पड़ी- मैं तो आज लेट हो जाती अगर तू ना आता!<br>तो फिर उसने बात ख़त्म करके उसने मुझे थैंक यू कहा।<br>मुझे तो जैसे करंट सा लगा।</p>



<p>फिर बस आ गई तो मैंने उसे दोबारा चढ़ा दिया बस में; उसने फिर से कातिलाना स्माइल दी।</p>



<p>मैं तो बस मरा जा रहा था। अब तक मैंने उसे बस दोस्त की तरह ट्रीट किया था। पर जो वो दिन ब दिन कर रही थी उससे तो मैं उसकी तरफ और भी आकर्षित हो रहा था।</p>



<p>फिर अगले दिन उसने मुझे दूर से ही हलो बोला; जो दो चार बन्दे वहां खड़े थे वे सभी मेरे तरफ देखने लगे।</p>



<p>मैं जल्दी से उसके पास गया और उसे ई रिक्शा में ले गया। पर दिन वो काफी जल्दी आ गई थी।<br>मैंने पूछा तो उसने बताया कि उनकी घड़ी खराब हो गई थी तो उसे टाइम का पता नहीं चला।<br>वैसे मैं भी उस दिन जल्दी चला गया था।</p>



<p>फिर मैंने उससे बातें करना शुरू किया क्योंकि हमरे पास 2 घंटे थे क्लास शुरू होने।<br>उसने बताया कि उसके पापा दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और भाई सब इंस्पेक्टर है।</p>



<p>ऐसे ही मैंने बातों में उससे उसका मोबाइल नंबर मांगा तो उसने मना कर दिया. पर उसने मुझे अपना इंस्टाग्राम आईडी दे दी। अब हम दोनों घंटों बातें करने लगे।</p>



<p>फिर उसने मुझे बताया कि उसका उन्नीसवाँ जन्म दिन आ रहा है।<br>मैंने पूछा- कब है?<br>तो उसने बता दिया।</p>



<p>फिर उसका जन्म दिन भी आ गया। मैंने उसे ट्रीट के लिए कहा तो पहले तो उसने मना किया पर काफी कहने के बाद वो मान गई। फिर जब हम जाने लगे तो मैंने बिल दिया और मैंने उसे एक चॉकलेट दिया और एक गुलाब का फूल।<br>शायद वो भी मेरी फीलिंग्स समझने लगी थी; उसने वो फूल बिना कुछ कहे ले लिया।</p>



<p>हम दोनों सब कुछ एक दूसरे के साथ शेयर करने लगे। फिर हम दोनों ने कभी कभी क्लास भी बंक करना शुरू कर दिया।<br>हम दोनों कभी लाल किला जाते … कभी कहीं … कभी कहीं … हमने सारी दिल्ली घूम ली थी।<br>आखिरकार फरवरी आ गयी।</p>



<p>मैंने 14 तारीख को उसे मुगलगार्डन में परपोज कर दिया और उसने भी हां कर दी।<br>हम दोनों बहुत खुश थे।<br>अब तो बातें और भी होने लगीं।</p>



<p>हमारी कोचिंग ख़तम होने में सिर्फ एक माह रह गया था।<br>मैं उससे अब सेक्स की बातें करने लगा था और वो भी मजे लिया करती थी। पर वो उन बातों कभी भी सीधा जवाब नहीं देती थी।</p>



<p>एक दिन मैंने उससे कहा- चलो ना कहीं पे चलते हैं घूमने!<br>तो उसने हाँ कर दी और हम दोनों पुराना किला घूमने चले गए।<br>मैंने ही यह प्लान बनाया था क्यूंकि मुझे पता था कि पुराने किले के गार्डन में कपल्स बैठे रहते हैं।</p>



<p>तो हम दोनों भी वहीं बैठ गए। हम दोनों एक पेड़ पर कमर लगा के बैठ गए. कुछ दूरी पर झाड़ी में से ‘उह … अहह आराम से करो … दर्द हो रहा है!’ आवाज़ आ रही थी।<br>काजल वहां से जाने को बोलने लगी।<br>तो हमें जाना पड़ा।</p>



<p>फिर हम 1 ऐसी जगह गए जहां कोई नहीं था. तो मैंने उसे किस करना चाहा परन्तु उसने मना कर दिया और कहा- मैं ये सब नहीं करने वाली! ओके?<br>और वो जाने लगी।<br>तो मैंने भी उसे जाने दिया और मैंने उससे बातें कम कर दी।</p>



<p>वो अब खुद ही मुझसे बातें करने का ट्राई करने लगी। तो मैं 1 या 2 बार उससे बोल लेता था। अब उसे भी लगा कि उसे मुझे किस करने देना चाहिए था।</p>



<p>अब हम दोनों फिर से सेक्स रिलेटिड बातें करने लगे। वो भी खुल के मेरा साथ देने लगी। अब वो मुझे किस करने दे रही थी। मैंने उसे जब भी मौका मिलता किस किया करता था। आग दोनों तरफ लगी थी।</p>



<p>मैंने उसे किसी तरह सेक्स करने के लिए मना लिया। पहले तो वो मान नहीं रही थी पर मैं भी कमीना था, कसम दे कर मना ही लिया।<br>फिर काजल ने पूछा- हम कहाँ जाएंगे?<br>मैंने कहा- मेरे दोस्त का फ्लैट है, हम उस पर चले जाएंगे।</p>



<p>फिर मैंने रात को ही अपने फ्रेंड को कॉल किया पर उसने भी हाँ कह दी। अगले दिन हम दोनों 9 बजे ही उसके फ्लैट पे चले गए।<br>उस दिन काजल काफी हॉट लग रही थी।</p>



<p>मैंने रूम का लोक खोला और उसे बेड पे बिठा के कोल्डड्रिंक दी।</p>



<p>अब मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब हम दोनों ने काफी देर तक ऐसे ही आपस में किस करना जारी रखा। मैंने धीरे से उसकी चूची को दबा दिया तो उसने जोर से आह भरी और मुझ से लिपट गई।</p>



<p>मैंने 10-15 मिनट उसे किस किया फिर हम दोनों अलग हो गए। मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी अब वो सिर्फ ब्रा में ही थी। उसने लाल रंग की जालीदार ब्रा पहन रखी थी।<br>मैंने उससे पूछा- ये तो तुम्हारे पास नहीं थी।<br>उसने कहा- कल ही ले ली थी। मुझे पता था कि तुम कहीं ना कहीं का प्लान जरूर बना रहे होगे।</p>



<p>और वो ये कहते ही मुझे किस करने लगी और मैं उसकी चूची दबा रहा था। वो लगातार उम्म्ह … अहह … हय … ओह … की आवाज़ निकाल रही थी।</p>



<p>अब मैंने उसकी ब्रा को निकाल दिया; तो मैं तो जैसे सपनों में ही खो गया; मैंने उसे जोर से किस किया और कहा- इतने मस्त चूचे तो मैंने आज तक नहीं देखे।<br>उस टीनएज लड़की ने कहा- ले ले मोहित … आज के बाद इन पर तेरा ही हक है। ये तो तेरा वेट कर रहे हैं. चूस इनको मोहित और जोर से चूस!</p>



<p>उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब नहीं रहा जा रहा … कुछ कर ना मोहित … मैं मर जाऊंगी।<br>अब उसकी सिसकारियां और भी जोर जोर से होने लग गई थी।<br>मैंने उससे कही- आज तो मैं तुझे अपनी दुल्हन बन कर ही चोदूंगा।<br>उसने कहा- जो भी करना है, जल्दी कर, मुझसे नहीं रहा जा रहा अब।</p>



<p>मैंने उसकी जींस उतार दी और अब वो सिर्फ पैंटी में ही रह गई थी। मैंने पैंटी पर उंगली फेरी तो वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी पैंटी को झट से उतार दिया और उसकी चुत में जीभ डाल कर चाटने लगा.</p>



<p>वो जोर जोर से चिल्ला रहे थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह्ह ऊऊह्ह हाहा हा!<br>उसने अब मेरा सिर में अपनी उंगली फेरनी शुरु कर दी।</p>



<p>5 मिनट तक चूत चाटने के बाद वो अब मेरा सिर अपनी चूत पर दबा रही थी। मैं समझ गया था कि ये झड़ने वाली है तो मैंने उसे और जोर चूसना शुरू कर दिया। वो इतनी जोर से झड़ी कि मेरा मुंह उसके कामरस से पूरी तरह भीग गया था।</p>



<p>वो अब शांत हो गई थी. मैंने उसे अपने लंड की तरफ करके चूसने के लिए बोला तो नहीं मानी. फिर मैंने सोचा कि छोड़ यार … अब तो ये अपना ही माल है, जब मन करेगा तब चुसवा लेंगे।</p>



<p>अब मैं अपना लंड काजल की चूत पर रगड़ने लगा वो फिर से गर्म होने लगी थी।<br>मैंने काजल के पास जाकर उसके कानों में कहा- थोड़ा दर्द होगा, सम्भाल लेना।<br>उसने आंखों ही आंखों में मुझे मंजूरी दे दी।</p>



<p>मैंने धक्का लगाया तो लंड फिसल गया।<br>वो थोड़ा सा मुस्कुरा रही थी। मैंने सोचा ‘उस्ताद ये तो मजाक बना रही है।’</p>



<p>फिर मैंने इस बार दुबारा धक्का लगाया तो सिर्फ टोपा ही उसकी चूत में घुसा था।<br>वो जोर से चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’<br>उसने कहा- मुझे नहीं करना इस बाहर निकाल ले अभी।<br>मैंने उसे समझाया तो वो मान गई और मैंने उसे किस किया तो वो नॉर्मल हो गई।</p>



<p>अब मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब उसकी आंखों में आसूं आ गए थे।<br>मैंने वैसे ही उसे किस किया और जब वो नॉर्मल हुई तो एक और धक्का लगाया। इस बार पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और झिल्ली भी फट गई थी और उसमें से खून भी आ रहा था।<br>मैंने उसे खून के बारे में नहीं बताया।<br>पर अब वो रो रही थी।</p>



<p>मैं वैसे ही 5 मिनट रुकने के बाद आगे पीछे होने लगा। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो कह रही थी – आआह्ह ऊऊह्ह हा हा हा … और जोर से चोद मेरे इस छेद को बहुत आग लगी हुई थी इसमें जब से तुझे देखा था।<br>मैंने कहा- तूने मुझे कब देखा?<br>तो उसने कहा- पहले मेरी आग शांत कर; फिर आराम से बता दूंगी।</p>



<p>मैं भी जोर जोर से उसकी चूत मर रहा था और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। वो अभी तक 2 बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा होना बाकी था।<br>15 मिनट की धक्का पेल के बाद मैं भी आने वाला था। मैंने उससे बस इतनी ही कहा- कहाँ?<br>उसने कहा- अंदर।<br>और मैं उसके अंदर ही झड़ गया।</p>



<p>मैं एक तरफ होकर लेट गया। हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी। हम दोनों पसीने में लथपथ थे। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था।<br>मैंने पूछा- मज़ा आया?<br>उसने कहा- आज से मैं तुम्हारी हूं। और जब तुम कहोगे हम मजे किया करेंगे।</p>



<p>उस दिन हमने 2 बार सेक्स किया। मैंने उसे किस किया और उसके कपड़े उसे दिए। वो बाथरूम में जाकर थोड़ा ठीक ठाक होकर आई तो हम दोनों चल दिए। वो अपने घर चली गई और मैं अपने।</p>



<p>मैंने उसे काफी बार चोदा है लेकिन आज किसी कारण से वो मेरे साथ नहीं है। मुझे पता लगा कि मुझसे अलग होने के दो महीने बाद ही उसकी शादी हो गई थी।<br>अब मैं उसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश नहीं करता।<br>तो दोस्तो, यह थी मेरी ज़िन्दगी की सच्ची कहानी टीनएज लड़की की।<br>mk502038@gmail.com</p>
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