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	<title>Group Sex Stories &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:34:19 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Group Sex Stories &#8211; Kahani18</title>
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		<title>ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:34:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग खेल वही भूमिका नयी-6 में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था. अब आगे: फिर खाने पीने के साथ नाच <a title="ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-7/" aria-label="Continue reading ग्रुप सेक्स कहानी: खेल वही भूमिका नयी-7">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस ग्रुप सेक्स कहानी के छठे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-6<br />
में आपने पढ़ा कि न्यू इयर की पार्टी मनाने का माहौल तैयार होने लगा था. हम सभी महिलाओं ने पुरुषों की ताकत को जांचने का एक तरीका अपनाया था, जिसमें कमलनाथ फिसड्डी साबित हो गया था.<br />
अब आगे:</p>
<p>फिर खाने पीने के साथ नाच गाना होने लगा. सभी धीरे धीरे कामुक महसूस करने लगे और फिर तय हुआ कि जिसे संभोग की इच्छा हो रही हो, वो किसी के साथ भी संभोग कर सकता है.</p>
<p>राजशेखर ने मेरे साथ कभी संभोग नहीं किया था, तो उसने सबसे पहले मुझसे ही पूछा. मैं शुरू में तो थोड़ा शरमाई, पर बाकी औरतों के कहने पर मैंने हां बोल दिया.</p>
<p>पर तभी कांतिलाल बोल पड़ा- ऐसा नहीं होगा … हर कोई हर किसी के साथ मजा करेगा.</p>
<p>तो ये तय हुआ कि हर कोई थोड़ी थोड़ी देर संभोग करेगा, फिर साथियों की बदली होगी. इसलिए सबके नाम की पर्ची बनाई गई और एक कटोरे में सभी मर्दों के नाम की दो दो पर्ची बनाई गईं, क्योंकि मर्द चार थे और औरतें 5 थीं. ऐसा इसलिए भी किया गया ताकि पहले चार महिलाओं के हाथ में जो पर्ची आएगी, वो उन मर्दों के साथ पहले संभोग करेंगी. फिर जब मैं पर्ची उठाऊँगी, तो उन्हीं चारों मर्दों में से किसी एक के साथ संभोग करूँगी.</p>
<p>मतलब जिस मर्द के नाम की पर्ची मेरे हाथ में होगी, वो मेरे और उन चारों औरतों में से किसी एक के साथ संभोग करेगा. </p>
<p>तो इस प्रकार सबने पर्ची उठायी और फिर जोड़ी बन गई. </p>
<p>रमा और कमलनाथ,<br />
रवि और निर्मला,<br />
राजशेखर और कविता …<br />
कांतिलाल और राजेश्वरी की जोड़ी.</p>
<p>अंत में मैंने पर्ची खोली, तो उसमें फिर से रवि का नाम निकला.</p>
<p>सबने एक आखिरी पैग उठाया और फिर अपने अपने जोड़ीदार के साथ हो गए. सभी मर्दों ने मिलकर सोफे वहां से हटा दिए और जमीन पर काफी जगह बना ली. </p>
<p>रवि निर्मला और मेरा हाथ पकड़ नीचे जमीन पर बैठ गया. रवि मेरे और निर्मला के बीच बैठ गया. पहले तो वो मेरे स्तनों को दबाने लगा और फिर मेरे होंठों को चूमने लगा. थोड़ी देर मुझे चूमने के बाद वो निर्मला के स्तन दबाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. निर्मला भी उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी. </p>
<p>उधर मैंने देखा राजशेखर ने थोड़ी देर कविता को चूमने के बाद खड़े खड़े में ही उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैंटी उतार दी और खुद घुटनों के बल खड़े होकर उसकी टांगें फैला उसकी योनि को चूमने लगा.</p>
<p>कविता जवान थी उसकी योनि किसी कुंवारी लड़की के जैसे थी. एकदम गोरी, योनि की फांकें चिपकी हुईं और किनारे फूले हुए … मानो उसने कभी संभोग किया ही नहीं था.</p>
<p>मेरे एक तरफ रमा कमलनाथ के साथ व्यस्त हो गई. दोनों काफी उत्तेजक तरीके से एक दूसरे के बदन को टटोलते हुए होंठों से होंठ मिला कर एक दूसरे का रस पी रहे थे.</p>
<p>फिर सामने की ओर राजेश्वरी को कांतिलाल ने पूरी नंगी कर दिया था और उसे चूम रहा था. राजेश्वरी का बदन बहुत सुंदर था. उसे देखकर लग रहा था कि वो भी रमा की तरह ही बहुत ध्यान देती होगी.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद निर्मला उठी और अपनी पैंटी निकाल कर स्कर्ट ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दीं और अपनी योनि रवि के मुँह में लगा दी. रवि ने निर्मला के विशाल चूतड़ों को दोनों हाथों से थपथपाया और अपना मुँह निर्मला की योनि से चिपका कर उसे चाटने लगा. </p>
<p>ऐसा कामुक माहौल देख कर मेरे भीतर चिंगारी सी फूटने लगी. रवि ने कुछ देर के बाद मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग के ऊपर रखा और मुझे उसे हिलाने का संकेत दिया.</p>
<p>मैंने उसके जांघिये को सरकाया और उसके लिंग को बाहर निकाल लिया. उसका लिंग उत्तेजित था, पर अभी उसमें संभोग करने लायक कड़कपन नहीं था. मैंने उसे हिलाना शुरू किया. कुछ देर के बाद वो एकदम कड़क हो गया. </p>
<p>इधर राजशेखर ने अपनी अवस्था बदल ली थी और अब कविता उसका लिंग चूस रही थी. उधर कमलनाथ जमीन पे लेट गया था और रमा उसके ऊपर उल्टी दिशा में चढ़ी हुई थी. एक तरफ कमलनाथ उसकी योनि चाट रहा था और दूसरी तरफ रमा उसका लिंग चूस रही थी. </p>
<p>कांतिलाल ने तो एक तरफ राजेश्वरी को परेशान करके रख दिया था, वो कभी राजेश्वरी को सीधा लिटा कर योनि चूसता, तो कभी कुतिया की तरह झुका कर पीछे से … तो कभी उसके स्तनों को मसलता. इससे उस कमरे में राजेश्वरी की कराह गूंज रही थीं.</p>
<p>कुछ देर के बाद कांतिलाल ने राजेश्वरी को घुटनों के बल खड़ा कर दिया और खुद खड़ा होकर उसका सिर पकड़ कर अपना लिंग जांघिये से बाहर निकाला और उसके मुँह में ठूंस दिया. फिर तेज़ी से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसके मुँह में लिंग अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>देखने में उसकी ये हरकत बहुत क्रूरतापूर्ण थी, मगर राजेश्वरी को आनन्द आ रहा होगा, तभी वो उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>थोड़ी देर बाद निर्मला कराहते हुए झटके खाने लगी. मैं समझ गई कि वो झड़ गई. फिर क्या था उसने अपनी योनि को रवि के मुँह से हटाया और नीचे बैठ कर उसका लिंग गप से मुँह में भर लिया. </p>
<p>इतनी उत्तेजक महिला मैंने कभी नहीं देखी थी. निर्मला तो कामोत्तेजना से भरी दिख रही थी. निर्मला जब उसका लिंग चूसने में व्यस्त हो गई, तो रवि ने मुझे हाथों से पकड़ कर उठने का संकेत दिया और इशारे से मुझे खड़े होकर अपनी योनि उसके मुँह में देने को कहा.</p>
<p>मेरे भीतर भी तो अब वासना की चिंगारी भड़क चुकी थी और जब चमड़ी की भूख हो, तो कोई भी इंसान निर्लज्ज हो ही जाता है.</p>
<p>मैं भी निर्लज्जता से खड़ी हो गई और स्कर्ट का हुक खोल कर मैंने अपने मांसल चूतड़ों को आज़ाद कर दिया. मैंने अपनी दोनों मोटी मोटी जांघों को फैलाया और टांगें रवि के अगल-बगल कर अपनी योनि को उसके मुँह के सामने अड़ा दिया.</p>
<p>उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को सहलाया. फिर पैंटी पर मेरी योनि के उभार को चूमने लगा. उसके चूमने से मैं और उत्तेजित होने लगी और मैंने एक हाथ से उसके सिर को सहारा दे दिया. मैंने दूसरे हाथ से अपनी पैंटी एक किनारे कर उसे अपनी योनि के स्पष्ट स्पर्श दे दिया. मेरी फूली गद्देदार योनि की पंखुड़ियों को पाते ही उसने उन्हें बारी बारी चाटा और फिर अपनी जीभ योनि की दरार में ऊपर नीचे करके मेरी योनि का स्वाद लेने लगा.</p>
<p>उसके इस तरह के व्यवहार से मैं और उत्तेजित होती चली गई और अपनी कमर उसकी तरफ धकेलते हुए अपनी योनि का दबाव उसके होंठों पर बढ़ाती चली गई.</p>
<p>मेरे अगल बगल भी बाकी के लोग धीरे धीरे एक दूसरे के अंगों को सहलाते, चूसते, चाटते हुए एक दूसरे को संभोग के लिए तैयार करने लगे थे.</p>
<p>ये किसी विदेशी अंग्रेज़ी फ़िल्म से कम दृश्य नहीं था, जिसमें लोग सामूहिक रूप से संभोग क्रिया में लिप्त थे.</p>
<p>रवि की जुबान में तो जैसे जादू था, जिस प्रकार वो अपनी जुबान से मेरी योनि के साथ खिलवाड़ कर रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि ये पल कभी न खत्म हो. उसने मेरे भीतर एक अजीब सी गुदगुदाहट के साथ कामुकता भर दी थी. इसी वजह से मेरे अगल बगल क्या हो रहा, मुझे उसकी न कोई चिंता थी, न कुछ नजर आ रहा था.</p>
<p>मेरी व्याकुलता इतनी बढ़ गई थी कि मैं रह रह के झटके खा रही थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे पानी का फव्वारा उसके मुँह में ही छोड़ दूंगी.</p>
<p>मैं संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और पल भर में मेरी अपेक्षा पूरी हो गई. निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर थपकी मारी और मुझे रवि के लिंग के ऊपर बैठने बोलने लगी. </p>
<p>निर्मला- सारिका पहले तुम सवारी करो.</p>
<p>उसकी बातें सुन रवि ने मुझे खुद से अलग किया और मेरा हाथ पकड़ मुझे अपनी ओर खींचने लगा. उसने अपने लिंग को पकड़ कर हिलाते हुए मुझे बैठने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं उसके कंधों पर दोनों हाथ रखते हुए अपनी टांगें उसके अगल बगल फैला कर उसके लिंग के ऊपर बैठ गई. उसका लिंग ठीक मेरी योनि द्वार पर जाकर अड़ गई. रवि ने अपने लिंग को सही दिशा दिखाते हुए लिंग का सुपारा मेरी योनि द्वार में प्रवेश करा दिया. साथ ही उसने मेरे दोनों चूतड़ों को पकड़ लिया. उसका कठोर लिंग मुझे बहुत गर्म महसूस हो रहा था. </p>
<p>फिर मैंने धीरे धीरे अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करके लिंग को योनि में प्रवेश कराना शुरू किया. कोई 3-4 बार ऊपर नीचे होते ही उसका सम्पूर्ण मोटा और कठोर लिंग मेरी मुलायम योनि की दीवारों को भेदता हुआ मेरे गर्भाशय से टकराने लगा. उसके लिंग से चिकास (precum) और मेरी योनि के गीलापन से आसानी से लिंग गुदगुदाहट करता हुआ भीतर चला गया. एक संतुष्टि की कामना जगाते हुए, आनन्द की शुरूआत हुई, तो मैंने पूरी जिम्मेदारी और कामुकता से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करते हुए संभोग की प्रक्रिया शुरू कर दी.</p>
<p>जब उसका लिंग पूरी तरह से जब मेरी योनि में हिल-मिल गया, तो मैंने अपनी नजरें रवि से मिलाईं. उसकी आंखें मस्ती से भरी हुई थीं और चेहरे पर कामुकता भरी मुस्कान थी. मैं जैसे जैसे धक्के देते जा रही थी, वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे. मैंने उसके गले में हाथ डाल कर थोड़ी और गहराई में जाने लायक धक्के देने शुरू किए, तो वो अपने होंठों को होंठों से भींचता हुआ मुझे चूमने को लपक पड़ा.</p>
<p>उसने अपने दाएं हाथ को मेरे चूतड़ से अलग किया और पीछे से मेरे बालों को पकड़ मेरे सिर को खींच कर मेरे होंठों से हाथ लगा कर चूसने और चूमने लगा. उसका सुपारा मेरी योनि के भीतर अब तेज धार धार तलवार सा महसूस होने लगा था, जिससे मैं और अधिक ताकत और मस्ती में अपनी कमर हिला हिला उसके लिंग को अपनी योनि से मलने लगी थी.</p>
<p>रवि के ऐसे उत्तेजक भाव ने मेरे भीतर वासना की एक नई ऊर्जा भर दी थी और मैं पूरे आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी थी. पीछे से शायद निर्मला रवि के अण्डकोषों से खेल रही थी या उनको सहला रही थी, इसलिए मुझे उसके हाथों का स्पर्श कभी कभी मेरे चूतड़ों पर महसूस हो रहा था. मैं अपनी ही धुन में धक्के मारे जाने से मस्ती में और अधिक खोई जा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट हो गए थे और मेरी सम्भोग की खुमारी सातवें आसमान को छूने को थी. तभी निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर 2-3 थपकी मारते हुए कहा- बस भी करो सारिका … अब मेरी बारी है.</p>
<p>उसकी बातें मेरे कानों में पड़ते ही मेरी रफ्तार और मस्ती दोनों पर रोक लग गई. मुझे हल्का निराशा सी महसूस हुई. लेकिन मैं उन सबकी तरह नहीं थी, सो मैंने मुस्कुराते हुए शर्मीले अंदाज़ में उसके कथन का पालन किया और मैं रवि की गोद से उतर गई. </p>
<p>मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो चुकी थी, इस वजह से जब रवि का लिंग मेरी योनि से बाहर निकल रहा था, तो मेरी अंतरात्मा जैसे कहने लगी कि मत हटो, कुछ पल और रुक जाओ. मुझे ये पल ऐसा लगा, जैसे कोई प्रिय वस्तु मुझसे छीनी जा रही है. पर मुझे न चाहते हुए भी रवि से अलग होना पड़ा. </p>
<p>अब मैं बगल में बैठ कर खुद ही अपनी योनि को हाथ से सहलाने लगी. मेरे अलग होते ही रवि ने निर्मला को धकेलते हुए उसे नीचे जमीन पर गिरा कर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें फैला उसके मोटी मांसल जांघों के बीच झुक गया.</p>
<p>रवि ने झुक कर पहले तो निर्मला के थुल थुले स्तनों को दबोच कर चूसना शुरू कर दिया. वहीं निर्मला ने भी रवि के लिंग को एक हाथ से पकड़ हिलाना शुरू कर दिया. उनका ये खेल बस कुछ पल चला और रवि अपने तनतनाये हुए लिंग को निर्मला की योनि में घुसाने को पुनः तैयार हो गया. निर्मला ने भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे दाएं बांए करके अपनी योनि की स्थिति उसके लिए बना ली. </p>
<p>रवि ने लिंग का सुपारा खोल कर हाथ से पकड़ा और निर्मला की योनि की फांकों पर कुछ देर तक ऊपर से नीचे तक रगड़ा. फिर लाल सुपारा उसकी योनि में फंसा कर हल्के हल्के धकेलना शुरू कर दिया. </p>
<p>इस वक्त निर्मला के चेहरे पर दर्द के भाव दिखने लगे, जब रवि अपना लिंग उसकी योनि में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था. लिंग लगभग आधा चला गया था, फिर भी निर्मला असहज महसूस कर रही थी.</p>
<p>कुछ पल और प्रयास करने के पश्चात निर्मला ने रवि के कमर को पकड़ कर उसे पीछे को धकेला और खुद से अलग कर लिया. </p>
<p>जब रवि का लिंग निर्मला की योनि से बाहर आ गया, तब निर्मला ने अपनी एक हाथ में थूक लिया और अपनी योनि के ऊपर मल कर लिंग वापस अपनी योनि में सुपारे तक घुसाते हुए रवि को आगे बढ़ने का संकेत दिया.</p>
<p>मैं समझ गई थी कि हम जिस उम्र से गुजर रहे हैं, उस उम्र में योनि में नमी जल्दी नहीं आती है. निर्मला की योनि भीतर से तो गीली थी, मगर ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां शायद सूखी थीं, इसी वजह से उसे तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>रवि जब अपना लिंग धकेल रहा था, तो उसकी योनि में ऊपरी चमड़ी और पंखुड़ियां भीतर की ओर खिंची जा रही थीं, जिसकी वजह से निर्मला को तकलीफ हो रही थी.</p>
<p>खैर … जब रवि ने संकेत समझा … तो धीरे धीरे करके 3-4 बार में अपना लिंग पूरी तरह से निर्मला की योनि में प्रवेश करा दिया.</p>
<p>फिर दोनों ने एक दूसरे को सजह तरीके से पकड़ कर धक्कों की गति को बढ़ाने लगे. कुछ ही पलों में दोनों एक दूसरे को सुख प्रदान करने में रम से गए. अब निर्मला खुले दिल से रवि का साथ दे रही थी और दोनों ही तेज धक्कों के साथ मादक सिसकियां भरने लगे थे.</p>
<p>दूसरी तरफ बाकी लोग भी संभोग में लिप्त हो चुके थे. एक तरफ कमलनाथ के ऊपर रमा सवारी कर रही थी, तो दूसरी तरफ कांतिलाल राजेश्वरी को घोड़ी बना कर पीछे से धक्के मार रहा था. उधर राजशेखर कविता की एक टांग उठा सोफे पर टिका कर सामने से खड़े खड़े ही धक्के दे रहा था.</p>
<p>सबकी कामुक अवस्था देख मेरी उत्तेजना जरा भी कम नहीं हो रही थी, जबकि मैं फिलहाल अकेली थी.</p>
<p>उन सबको देख कर और कमरे में गूंजती सिसकारियां मेरे हाथों को स्वयं मेरी योनि तक ले जा रहे थे.</p>
<p>कुछ देर के बाद कविता ने असहजता दिखानी शुरू कर दी, क्योंकि उस अवस्था में संभोग कर पाना सबके लिए सरल नहीं होता है.</p>
<p>मैं जहां तक अपने अनुभव से जानती हूं कि इस तरह के आसन में मर्दों को ज्यादा आनन्द आता है … क्योंकि लिंग का ऊपरी हिस्सा योनि के अन्दर सीधे जाता है, जबकि योनि का रास्ता पेट की तरफ होता है. इस वजह से लिंग के ऊपरी हिस्से में योनि कठोर तरीके से रगड़ खाती है, जिससे मर्दों को अधिक आनन्द आता है. वहीं स्त्रियों को आनन्द तो आता है, मगर अधिक समय के घर्षण से पीड़ा होनी शुरू हो जाती है. हालांकि अति उत्तेजना की अवस्था में महिलाएं ये पीड़ा भी झेल लेती हैं.</p>
<p>कविता के आग्रह पर राजशेखर ने कविता की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल लिया और उसे सोफे पर थोड़ा आराम करने दिया. राजशेखर वहीं खड़े खड़े अपने लिंग को हाथ से सहला रहा था कि उसकी नजर मुझ पर पड़ी.</p>
<p>मुझे खाली देख कर वो मुस्कुराते हुए मेरे पास चला आया. उसे मुझसे किसी तरह के विरोध की आशा नहीं थी. क्योंकि ये पहले से तय था. मैं भी इस बात से परिचित थी, सो मैंने भी किसी तरह का विरोध भाव नहीं दिखाया. जैसा कि मैं खुद ही गरम थी, तो मन में भी किसी तरह के विरोध की बात भी नहीं आई.</p>
<p>वो सीधा मेरे पास आकर मेरे सामने बैठ गया और मेरी टांगें पकड़ अपने दोनों तरफ फैलाते हुए मेरे बीच में आ गया. उसने मेरे स्तनों को दबाया और फिर अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आया.</p>
<p>मैंने भी बिना संकोच के अपने होंठ उसके होंठों से लगा कर चुम्बन करना शुरू कर दिया. वो मुझे चूमते हुए धीरे धीरे धकेलने लगा और ठीक मुझे जमीन पर गिराते हुए वो मेरे ऊपर आ गया.</p>
<p>मेरे भीतर वासना की आग तेजी से धधक रही थी और मैं भी उसे अपनी ओर ऐसे खींच रही थी, मानो उसे अपने भीतर छुपा लूंगी. </p>
<p>जिस तरह से वो मेरी जुबान को चूस रहा था और मेरे स्तनों को मसल रहा था, उससे लग रहा था … मानो अब वो झड़ जाएगा. पर यहां हर मर्द इतना तो अनुभवी था ही कि अपनी उत्तेजना को काबू में कर ले.</p>
<p>धीरे धीरे राजशेखर मेरे होंठों को छोड़ कर मेरे स्तनों को चूसने लगा. मेरे दूध का घूंट पीते ही उसमें ताजगी सी दिखने लगी. वो एक हाथ से मेरी एक स्तन को मसलते हुए मेरे दूसरे स्तन का पान करने लगा. </p>
<p>थोड़ी ही देर के बाद वो मेरी योनि तक पहुंच गया और मेरी योनि को चूमने और चाटने लगा.</p>
<p>उधर कविता खुद कांतिलाल के पास गई और उसे राजेश्वरी से अलग होने को कहा. राजेश्वरी भी बहुत अधिक गर्म थी, सो वो ज्यादा देर अलग होकर न रह सकी. जब तक कांतिलाल और कविता ने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू किया, वो कमलनाथ के पास चली गई. कमलनाथ ने भी रमा को धक्के मारना बन्द किया और राजेश्वरी को अपनी गोद में बिठा लिया.</p>
<p>इधर राजशेखर ने जी भरकर मेरी योनि चाटने के बाद मुझे उठाया और मुझे कुतिया की तरह झुक जाने का इशारा किया. मैं उसके निर्देशानुसार कुतिया की तरह झुक गई और मैंने अपना सिर जमीन पर रख अपने चूतड़ों को पूरा उठा दिया.</p>
<p>राजशेखर ने पीछे आकर अपना लिंग एक बार में ही मेरी योनि की गहराई में उतार दिया. उसका लिंग मुझे बहुत ही कड़क महसूस हुआ. उसके लिंग पर नसें एकदम सख्त लग रही थीं और सुपारा आग की तरह गर्म था.</p>
<p>करीबन 7 इंच लंबा और मोटाई 3 इंच लिंग की वजह से जब उसने धक्का मारना शुरू किया, तो मस्ती मैं में कसमसाने लगी. </p>
<p>मैं अभी इतना तो अंदाज लगा सकती थी कि मेरे साथ उसे भी काफी मजा आ रहा था. उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी योनि में आ जा रहा था और मुझे कराहने पर विवश करे दे रहा था.</p>
<p>वो कभी मेरे ऊपर पूरा झुक मेरे स्तनों को दबाते हुए धक्का मारता, तो कभी मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को दबाते सहलाते मजा लेने लगता.</p>
<p>जैसे जैसे संभोग बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे हम दोनों में जोश भी बढ़ता जा रहा था. मैं अब अपने कानों में उसके हांफने की आवाज सुन सकती थी.</p>
<p>करीब 10 मिनट उसने मुझे यूँ ही बिना रुके धक्के मारे और फिर वो रुक गया. कुछ पल के लिए उसने अपना लिंग पूरी तरह मेरी योनि की गहराई में दबा दिया और सांस लेने लगा. इसके बाद उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मुझसे अलग हो गया.</p>
<p>मेरी ग्रुप सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-8</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खेल वही भूमिका नयी-6</title>
		<link>https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Group Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Call Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[कामुकता से भरपूर इस सेक्स कहानी के पांचवें भाग खेल वही भूमिका नयी-5 में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी सहेली के पति ने मुझे रात तीन बजे तक रौंदा था, जिस वजह से मुझे बड़ी थकान हो गई थी. सुबह उठ कर मैं नहायी तो रमा ने मुझे तैयार होने के लिए कुछ <a title="खेल वही भूमिका नयी-6" class="read-more" href="https://kahani18.com/group-sex-stories/khel-vahi-bhumika-nayi-part-6/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-6">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कामुकता से भरपूर इस सेक्स कहानी के पांचवें भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-5<br />
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी सहेली के पति ने मुझे रात तीन बजे तक रौंदा था, जिस वजह से मुझे बड़ी थकान हो गई थी. सुबह उठ कर मैं नहायी तो रमा ने मुझे तैयार होने के लिए कुछ मॉडर्न कपड़े दिए. मगर मैंने साड़ी पहनना ही थी समझा.<br />
अब आगे:</p>
<p>मेरी सहेली रमा बोली- सच में सारिका मैं ही गलत थी, आज जब भेद खुलेगा तो सच में लोग चौंक जाएंगे.<br />
जब हम दोनों तैयार हो गए, तो हम बिस्तर के पास आगे की योजना के बारे में बात करने के लिए चले आए.</p>
<p>वहां पहुंच जब रमा ने बिस्तर देखा, तो चकित होते हुए बहुत जोरों से हंसती हुई बोली- सारिका ये क्या है, रात की कहानी तो ये चादर बता रही है.<br />
मुझे थोड़ी शर्मिंदगी सी महसूस हुई. </p>
<p>पर रमा ने बोला- लगता है कान्ति ने तुम्हें पूरी तरह निचोड़ कर रख दिया. मैं यकीन से कह सकती हूं तुम्हें बहुत मजा आया होगा. खैर … अभी कमरे सफाई के लिए आएंगे, हम दोनों नीचे चलते हैं.<br />
रमा की बात तो सही ही थी कि कांतिलाल ने मुझे निचोड़ कर रख दिया था, पर आनन्द भी उतना ही आया था. </p>
<p>मैं उसके साथ शर्माती हुई चल पड़ी. दोपहर का समय तो हो ही चुका था, पर अभी तक किसी का अता-पता नहीं था. केवल मैं और रमा ही थे. हम दोनों एक केबिन वाले स्विमिंग पूल के सामने कमरे में चले गए और खाने का आर्डर दे दिया.</p>
<p>वहां का नज़ारा ही अलग था. एक पल तो मुझे लगा कि यहां आए सभी लोग हमारी तरह ही मजे करने आए हैं. क्योंकि जितने भी मर्द और औरतें पूल के आसपास थे, सभी आधे नंगे ही थे. औरतें केवल ब्रा और पैंटी में … और मर्द केवल जांघिया या हाफ पैंट में थे.</p>
<p>पर जब ध्यान दिया तो कुछ लोग परिवार के साथ भी थे. तब मुझे धीरे धीरे समझ आया कि ये लोग अच्छे खासे खुले और ऊंचे वर्ग के लोग हैं. हमारी तरह रूढ़िवादी सोच के नहीं हैं.</p>
<p>खैर … जो भी हो … मुझे यहां अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं जैसा जीवन चाहती थी वैसा ही सब दिख रहा था. फर्क ये था कि इस तरह की जीवन शैली हम जैसे सामान्य वर्ग के लोगों के लिए संभव नहीं होती है.</p>
<p>हम दोनों सहेलियाँ खाने के साथ अब आगे की योजना पर बात करने लगी. रमा ने बताया कि आज और कल यानि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सब लोग बहुत मजे करने वाले हैं. हर कोई अपनी अपनी सोच सामने रखेगा, देखा जाएगा कि किसकी तरकीब सबसे बढ़िया है. उसने बताया कि शाम तक बाकी लोगों की बीवियां भी आ जाएंगी और फिर एक अलग कमरे में हमारा नया साल मनाने का बंदोबस्त हो चुका है. </p>
<p>फिर उसने मुझसे कहा कि मैं अभी कुछ देर कमरे में आराम कर लूं, फिर जब वो मुझे बुलाएगी, तब बताए हुए कमरे में जाना.<br />
हम खाना खाने के बाद इधर उधर टहलने के बाद कमरे में वापस चले गए. मैं रात की थकान के वजह से सोफे पे ही बैठे बैठे सो गई. रमा ने मुझे परेशान नहीं किया और सोने दिया.</p>
<p>शाम करीब 6 बजे मेरी नींद खुली, तो मैं कमरे में अकेली थी. मुँह हाथ धोकर मैं फिर से उसी साफ सुथरी घरेलू महिला के रूप में आ गई. मुझे तो पहले से पता था कि आज की रात क्या होने वाला है, सो मैं बस इन्तजार में थी.</p>
<p>करीब 7 बजे मुझे रमा का फ़ोन आया. उसने मुझे बताए हुए कमरे में आने को कहा. मैं उस कमरे की तरफ बढ़ने लगी. पर पता नहीं क्यों मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. </p>
<p>मुझे अंदेशा हो रहा था कि आज कुछ अलग होने को है, बाकी ऐसा तो कुछ नहीं था जो कि मैं पहली बार करने जा रही थी. शायद मुझे उन 3 औरतों की फिक्र थी, जिनसें मैं पहले कभी नहीं मिली थी. पर अब जो होना था, सो होना था. यही सोच कर मैं कमरे तक पहुंच गई.</p>
<p>दरवाजे की घंटी बजाई, तो रमा ने दरवाजा खोला और मुझे पकड़ कर भीतर ले जाते हुए सभी से मुखातिब होते हुए जोर से बोली- फ्रेंड्स ये है आज का तोहफा मेरी तरफ से … ये है मेरी सबसे खास सहेली सारिका.</p>
<p>उधर मौजूद रवि, राजशेखर और कमलनाथ आंख फाड़े देखते रह गए.<br />
तभी राजशेखर बोल पड़ा- क्या यही सारिका है तुम्हारी सहेली?<br />
रमा ने हंसते हुए जवाब दिया- जी हां चौंक गए न … मेरी इस तरकीब से सब … यही है वो सहेली, जिसका आप सब बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे.</p>
<p>रमा ने बाकी के 3 औरतों को संबोधित करते हुए कहा- तुम सब ये नहीं जानना चाहती हो कि तुम तीनों के पतियों के चेहरे ऐसे क्यों हो गए?<br />
इस पर एक महिला ने कहा- हां बताओ … इन सब के चेहरे देख मैं भी सोच में पड़ गई थी कि ऐसा क्या अनोखा हुआ. हम सबको पता था कि सारिका यहां आने वाली है.</p>
<p>तब तक दूसरी महिला ने पूछा- क्या आप सब सारिका को पहले से जानते हो?<br />
तब कांतिलाल ने उत्तर दिया- हां कल रात से तीनों सारिका को अच्छे से पहचान चुके हैं.</p>
<p>तभी रवि ने बोला- रमा जब तुम जानती थी, तो इतना नाटक क्यों किया?<br />
रमा बोली- अरे यार थोड़ी बहुत मौज मस्ती और क्या … मैं सबको चौंकाना चाहती थी.</p>
<p>इस पर कमलनाथ ने कहा- वो तो ठीक है रमा … पर तुम अपनी सहेली को उस चूतिये नेता के साथ क्यों सोने दिया?<br />
रमा बोली- नहीं करती तो तुम सबको बेवकूफ कैसे बनाती और फिर क्या हुआ … कौन सा उस गधे नेता ने कुछ लूट लिया. वो तो जिस्म का भूखा था, सो चला गया. और फिर तुमने भी तो अपनी बीवी के साथ उसे सोने दिया था न … क्या फर्क पड़ता है … ऐसे छोटे मोटे लोगों से. हम सब के मन के साथ उसने थोड़े छेड़खानी की, हम सब आज भी एक दूसरे के साथ हैं और सबकी भावनाएं समझते हैं, सबको सम्मान देते हैं.</p>
<p>इस पर तीसरी महिला ने रमा का समर्थन करते हुए बोला- हां, रमा सही कह रही है, हमारे लिए सेक्स इतनी भी बड़ी चीज नहीं, सेक्स को तो हम अगले पायदान तक ले जाते हैं. जरूरी हम सब का साथ है. एक समान विचार और काम काज से थोड़ा दूर अपने लिए समय निकालना.</p>
<p>उसके बाद वे सब बीती रात की घटना के बारे में पूछने लगी. तब जाकर रमा ने सबको पिछली रात की घटना को बताया. उन तीनों मर्दों को बेवकूफ समझ कर सभी महिलाएं हंसने लगीं.</p>
<p>इस तरह की जीवन शैली में ढलने की वजह से किसी को अचरज इस बात से बिल्कुल भी नहीं हुआ था, न ही किसी में इस बात से नाराजगी थी कि उन लोगों ने मेरे साथ संभोग किया. बल्कि इस रोचक खेल के लाने से रमा की उल्टे तारीफ ही हुई. मेरी अभिनय की भी तारीफ़ हुई कि अब तक उनको पता नहीं चलने दिया कि मैं एक सामान्य महिला हूँ, कोई वेश्या नहीं.</p>
<p>फिर हमारे एक साथ होने की बहुत देर बहस छिड़ी रही. मुझे एक हद तक उनकी बातें सही लगीं, क्योंकि यहां कोई किसी के साथ जोर जबरदस्ती नहीं कर रहा था. सबको एक दूसरे की भावनाओं की फिक्र थी. संभोग न केवल शारीरिक संतुष्टि के मार्ग था … बल्कि मानसिक तनाव से भी दूर करने का साधन था.</p>
<p>मैं तो घरेलू महिला थी, केवल घर के काम देखती थी. पर वे सभी मर्दों के साथ परस्पर उनके कामों में हाथ बंटाती थीं. काम के बोझ से सच में तनाव पैदा होता ही है, सो एक अलग समय निकाल अगर कुछ मौज मस्ती कर ली जाए और किसी को कोई परेशानी न हो, तो क्या गलत है.</p>
<p>अब मैं बाकी की 3 महिलाओं का परिचय करवाती हूँ. जिस तरह रमा ने सबसे मेरा परिचय करवाया था. </p>
<p>पहली महिला निर्मला थी, जो कमलनाथ की पत्नी थी. वो करीब 45-46 की उम्र होगी, उसका कद 5 फुट का रहा होगा. रंग गोरा और शरीर भारी भरकम, लगभग 38 साइज़ के स्तन और कूल्हे अंदाजन 44 के रहे होंगे. कुर्ती और पजामे में वो अच्छी दिख रही थी. वो एक सभ्य समझदार महिला लग रही थी.</p>
<p>वही दूसरी महिला राजेश्वरी, राजशेखर की पत्नी थी और वो भी लगभग निर्मला से मिलती जुलती ही थी. उसकी उम्र भी उसी के आस पास होगी. वो साड़ी पहने हुई थी और वो भी एक सभ्य महिला की भांति दिख रही थी.</p>
<p>तीसरी महिला कविता थी, जो हम सब में से सबसे कम उम्र की थी. वो करीब 35-36 की थी और वो जीन्स और शर्ट पहने हुए थी. उसका बदन भरा भरा था और उस शर्ट में उसके सुडौल स्तन और जीन्स में उसके चूतड़ काफी बड़े दिख रहे थे. वो भी बहुत गोरी थी और हम सबमें से वही एक ज्यादा मॉडर्न दिख रही थी.</p>
<p>यहां मैं बता दूं कि कविता रवि की दूसरी पत्नी थी और उम्र में रवि से बहुत छोटी थी. दोनों ने प्रेम विवाह किया था. ये शादी रवि के तलाक होने के बाद हुई थी. उनका प्रेम प्रसंग पहले से था, शादी से पहले कविता कुंवारी थी और रवि शादीशुदा था. दोनों एक साथ काम करते थे, फिर शादी के बाद खुद का व्यापार शुरू किया.</p>
<p>अब आगे की कहानी बताती हूँ. शाम 8 बजे तक हम सब एक दूसरे से अच्छे से परिचित हो चुके थे. वेटर से सभी खाने पीने और जितनी भी जरूरत की चीज़ें चाहिए थीं, हमने मंगवा कर रख लीं और उन्हें कहलवा दिया कि हमें अब कोई परेशान करने न आए. हम सब नए साल के स्वागत में अपना समय बिताएंगे.</p>
<p>वहां सभी मदिरा पीने वाले थे, पर मैंने आज तक कभी मदिरा को चखा भी नहीं था. मुझे कविता ने छोटी सी बोतल में कुछ दिया और कहा कि शराब नहीं पी सकती, तो कम से कम फ्रूटबियर तो पियो.<br />
मैं तो जानती भी नहीं थी कि बियर क्या होती है … पर फ्रूट सुनकर समझी के फल का रस होगा. मुझे पीने में भी अच्छा लगा, जैसे अनानास का रस पी रही हूँ.</p>
<p>हम सब खाते पीते 12 बजने का इंतजार करने लगे.</p>
<p>तभी कविता ने कहा- चलो अब सारे मर्द एक तरफ हो जाएं और पार्टी के लिए अपने पसंद के कपड़े बदल लें.<br />
सारे मर्द दूसरे कमरे में चले गए और कविता ने दरवाजा बंद कर दिया.</p>
<p>वो हम सभी से कहने लगी- आप सबको मैं जो कपड़े दूंगी, वही पहनना होगा. आज ये सारे मर्द हमें देख कर पागल हो जाएंगे. कविता ने एक बैग निकाला और उसमें से एक ही तरह के 5 जोड़े कपड़े निकाले. </p>
<p>उन कपड़ों को देख राजेश्वरी बहुत खुश हुई और बोली- यार, मैंने भी यही कपड़े आज के रात पहनने की सोची थी.</p>
<p>कविता- तो फिर सोच क्या रही हो … फटाफट पहन लो … इलास्टिक वाले हैं सबको फिट हो जाएंगे … कोई भी लूज़ तो नहीं होगी पक्का … पर टाइट हो सकती हैं. ही..ही..ही..<br />
राजेश्वरी- टाइट देख कर तो हमारे मर्दों का और भी टाइट हो जाएगा … हा हा हा..</p>
<p>कविता और राजेश्वरी ने फटाफट कपड़े अपने उतारे और हमारे सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी होकर हमें कहने लगीं- आप सबको क्या न्यौता भेजना होगा, तब पहनोगी. जल्दी करो पार्टी करनी है.</p>
<p>मैंने देखा कविता और राजेश्वरी ने मैचिंग की ब्रा पैंटी पहनी थी और वो दोनों तो उसी में ज्यादा आकर्षक और कामुक दिख रही थीं.<br />
जब कविता ने अपने कपड़े पहने, तो मैं हैरान हो गई. ये किसी स्कूल की यूनिफार्म थी. शर्ट इतनी कसी थी कि स्तन लग रहे थे, बटन तोड़कर बाहर निकल आएंगे. उसकी स्कर्ट इतनी छोटी थी कि सिर्फ चूतड़ ढके दिख रहे थे.</p>
<p>वो जब तैयार होकर सामने बैठी, तो उसकी पैंटी तो साफ दिख रही थी.</p>
<p>यही हाल राजेश्वरी का था. उसके बाद रमा ने मुझे कपड़े दिए और खुद भी पहन लिए.</p>
<p>निर्मला ने पहना और चिड़चिड़ाने लगी और बोली- इसे पहनने से तो अच्छा है कि मैं नंगी ही रह जाऊं और वैसे भी वो लोग हमें नंगी कर ही देंगे तो पहनने का क्या फायदा.<br />
इस पर रमा ने उसे समझाया कि ये बस पार्टी के लिए है. तुम्हारे मन में भी कोई विचार हो तो बताओ.</p>
<p>निर्मला ने रूखे मन से कहा- ठीक है.<br />
वो मुझसे बोलने लगी- तुम क्यों नहीं पहन रही हो?</p>
<p>वैसे निर्मला इन कपड़ों में थोड़ी थुलथुली दिख रही थी और स्कर्ट उसके लिए बहुत अधिक छोटा था, जिसके वजह से उसका आधे चूतड़ दिख रहे थे.</p>
<p>मैंने तो जीवन में कभी स्कूल जाते हुए ऐसे कपड़े नहीं पहने थे, सो मुझे और अधिक अटपटा लग रहा था.</p>
<p>जब मैंने उस परिधान को पहनने के लिए अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतारे … तो निर्मला बोली- बहुत गठीला बदन है तुम्हारा.<br />
मैंने उसे अपनी मुस्कुराहट से उसका धन्यवाद किया और वो कपड़े पहन लिए. सच में बहुत ही अजीब कपड़े थे, वो पर हम सब जवान लड़कियों की तरह दिख रहे थे … जैसे कि कोई अंग्रेज़ी फ़िल्म की लड़कियां हों.</p>
<p>हम सबकी जांघें और थोड़े चूतड़ तो दिख ही रहे थे. ऊपर की शर्ट तो ऐसे लग रही थी कि अभी ही सबकी फट जाएगी.</p>
<p>हम सब तैयार होकर हॉल में चले आए, तो देखा चारों मर्द पहले से तैयार होकर बैठे थे. उनका हुलिया तो हम सबसे भी ज्यादा हंसाने वाला था. सबने पतली डोरी की जांघिया को पहन रखा था और गले में केवल टाई थी.<br />
हम सब उन्हें देखकर जहां हंसने लगी थी, वहीं वो लोग हमें देख अचंभित होने के साथ कामुक भी होने लगे थे.</p>
<p>सब लोग हमें बारी बारी ललचाई नजरों से निहार रहे थे.</p>
<p>तभी कमलनाथ ने कहा- आज का खेल मैं शुरू करूंगा. </p>
<p>वो भीतर से 5 प्लास्टिक के छोटे छोटे गमले लाया, जिनमें रेत भरी हुई थी. </p>
<p>उसने वो गमले हम पाँचों महिलाओं के हाथ में देकर कहा- तो आज का खेल ये है कि सभी महिलाएं अपने अपने गमलों के ऊपर करीब आधे फुट ऊंचाई से बैठ पेशाब करेंगी, उसके बाद इस खेल का राज खोला जाएगा.</p>
<p>मुझे बड़ा अजीब लगा … पर बाकी की महिलाएं उत्सुक दिखीं और आपस में बातें कानाफूसी करते हुए पेशाब करने की तैयारी करने लगीं.</p>
<p>सबने पहले ही बहुत पानी मदिरा और ठंडा पिया था, इस वजह से हम सबको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही थी. हम सबने अपनी अपनी पैंटी घुटनों तक सरकाया और एक कतार में गमलों के ऊपर बैठ गए. </p>
<p>हम सब जब पेशाब करने जा रही थी तो कमलनाथ ने कहा- सबका पेशाब एक धार में होना चाहिए और रेत के बीच में एक ही जगह गिरना चाहिए, इधर उधर धार नहीं जाना चाहिए.</p>
<p>हम सब उसके दिशा निर्देश अनुसार पेशाब करने लगी और 2-3 मिनट में सब उठकर फिर अपनी अपनी पैंटी पहन सोफे पे आ गई.<br />
अब वो राज जानने की जिज्ञासा सब में थी, जिसके वजह से हमने ये सब किया था.</p>
<p>कमलनाथ ने एक मापने के लिए एक स्केल ली और हर एक गमले में उसे डालकर कुछ नापने लगा.</p>
<p>थोड़ी देर के बाद उसने हम सबके लिए एक परिणाम घोषित किया.</p>
<p>उसने बताया- राजेश्वरी 0.80 इंच, सारिका 0.86 इंच, रमा 0.90 इंच, निर्मला 0.77इंच … और अंत में कविता 1.75 इंच. </p>
<p>हम सब उसके कहने का मतलब नहीं समझ पा रहे थे. इस वजह सबने उससे मतलब पूछना शुरू कर दिया. तब उसने बताया कि ये गहराई वो है, जो रेत में पेशाब की तेज धार से बनी है.</p>
<p>हम सबने पूछा कि उससे क्या पता चलता है.<br />
तब उसने बताया कि इससे ये पता चलता है कि किस औरत में ज्यादा दम है.<br />
उस पर निर्मला ने पूछा- वो कैसे?<br />
तो उसने बताया कि जिसकी योनि की नसें और मांसपेशियां अधिक ताकतवर होती हैं, वो ज्यादा दबाव से पेशाब कर सकती है और रेत में ज्यादा गहरी छाप बना सकती है.</p>
<p>उसका सीधे सीधे ये कहना था कि हम पाँचों में कविता की योनि सबसे कसी हुई थी.</p>
<p>इस बात पर हम सबको बहुत बुरा लगा कि इस तरह का भेदभाव क्यों पैदा करना, जब सब एक मन से यहां आए हुए हैं. सब क्रोधित भी होने लगे, पर कमलनाथ ने सब से माफी मांगते हुए इसे एक तरह का केवल खेल बता कर स्थिति नियंत्रित कर ली. </p>
<p>वैसे जो भी हो हम सभी महिलाओं में कविता ही सबसे कम उम्र की थी, तो स्वाभाविक है कि उसकी नसें और मांसपेशियां हम बाकी की महिलाओं से थोड़ी ज्यादा मजबूत और सख्त होंगी ही.</p>
<p>अभी 9:30 बज चुके थे और अब खेल का दूसरा पड़ाव सामने आया.</p>
<p>कविता ने पिछले खेल का तर्क देते हुए कहा कि यदि उसकी योनि सबसे ज्यादा कसी हुई है, तो उसी मर्द का लिंग भी इसमें आज की रात सबसे पहले जाएगा, जो चारों में से ज्यादा ताकतवर होगा.</p>
<p>अब इसके बाद बाकी के मर्द ये सोच में पड़ गए कि कैसे अपनी अपनी योग्यता साबित करें.</p>
<p>थोड़ी देर चिंतन और मंथन के बाद एक नतीजे पे पहुंचा गया. पर जहां औरतों की बारी होती है, वहां तो परीक्षा लेने में औरतें आगे होती ही हैं. </p>
<p>मर्दों को दो पड़ाव पार करने की चुनौती दी गई. निर्मला जहां सबसे अधिक प्रौढ़ लग रही थी, वही उसका मन शैतानी से भी भरा हुआ था. उसने ही पहले पड़ाव का चयन किया.</p>
<p>निर्मला ने वहां रखी खाली बियर की बोतलों में पानी भर दिया और फिर उसे रस्सी से बांध दिया. अब सभी मर्दों को करना ये था कि उस बोतल को लिंग से बांध कर करीब 5 मिनट तक पूरे कमरे में घूमना था. </p>
<p>सभी अपनी अपनी जांघिया निकाल तैयार हो गए और फिर सबसे पहले रवि ने शुरूवात की. वो इस परीक्षा में पास हो गया.</p>
<p>इसके बाद कांतिलाल ने, जो कि पास हो गया. फिर राजशेखर ने और वो भी पास हो गया.<br />
पर अंत में जब कमलनाथ की बारी आई, तो वो अंतिम पल में हार मान गया. उससे बोतल का वजन सहा नहीं गया. शुरूआत उसने एक खेल से की थी मगर जब कमलनाथ की बारी आई … तो वो पहले ही चरण में विफल हो गया.</p>
<p>कमलनाथ के लिए परीक्षा समाप्त हो चुकी थी. अब बाकी के तीन मर्दों को अगली परीक्षा के लिए जाना था.</p>
<p>अब उन्हें ये काम दिया गया कि सभी मर्दों को अपना अपना लिंग उत्तेजित करना है और फिर उसी अवस्था में पेशाब करना है. जिस किसी का भी लिंग मूत्र निकलते हुए ढीला पड़ने लगेगा, वो हार जाएगा.</p>
<p>ये राजेश्वरी का दिमाग था. हम सब जानते थे कि ऐसा करना असंभव सा है. फिर भी हमने उन्हें ये काम दिया. सभी मर्द तैयार हो गए और इसमें हम महिलाएं उनका कोई साथ नहीं देने वाली थीं.</p>
<p>सबने खुद से अपना अपना लिंग हाथ से पकड़ हिलाना शुरू किया. हम सब जिस वेशवूषा में थे. उससे तो वे सारे मर्द पहले से ही थोड़े बहुत उत्तेजित थे ही, इस वजह से उन्हें लिंग कड़क करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी.</p>
<p>फिर प्रतिस्पर्धा का खेल शुरू हुआ. तीनों ने बहुत जोर लगाया, पर किसी के लिए ऐसी अवस्था में पेशाब करना संभव नहीं था. जब जब किसी ने भी जोर लगाया, उसका लिंग स्थूल पड़ने लगता. </p>
<p>आधे घंटे तक प्रयास करने के बाद आखिरकार सबने हार मान ली और सब बैठ गए. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
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कहानी का अगला भाग: खेल वही भूमिका नयी-7</p>
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