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	<title>First Time Sex &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
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		<title>कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Bur Ki Chudai]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Nangi Ladki]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया. हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। <a title="कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/kunvari-bur-ki-chudai-pahli-bar/" aria-label="Continue reading कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.<br />
<span id="more-324"></span></p>
<p>हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।</p>
<p>मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ। </p>
<p>यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।<br />
मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।</p>
<p>हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।</p>
<p>पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।</p>
<p>कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे। </p>
<p>उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।</p>
<p>अब घर में केवल में और सोनम ही थे।</p>
<p>जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।</p>
<p>उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।</p>
<p>मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया। </p>
<p>जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.</p>
<p>मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।</p>
<p>पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी। </p>
<p>अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया। </p>
<p>सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।</p>
<p>इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।</p>
<p>फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?<br />
मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।<br />
उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।</p>
<p>मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था। </p>
<p>अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।<br />
चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।</p>
<p>कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!<br />
लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।</p>
<p>मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?<br />
वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.<br />
और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।</p>
<p>मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।</p>
<p>मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा। </p>
<p>मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।</p>
<p>पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।<br />
लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।</p>
<p>मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।<br />
उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।</p>
<p>अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी। </p>
<p>अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।<br />
उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।</p>
<p>मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!<br />
सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।</p>
<p>तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।<br />
अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।<br />
सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।</p>
<p>मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।</p>
<p>अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।<br />
अब वो केवल पैंटी में थी।</p>
<p>उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.<br />
मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।</p>
<p>अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!<br />
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।<br />
उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।</p>
<p>अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।</p>
<p>उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।</p>
<p>उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।<br />
मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.</p>
<p>बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।</p>
<p>अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।</p>
<p>सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।</p>
<p>अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।</p>
<p>बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.<br />
वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।</p>
<p>थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।</p>
<p>थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।</p>
<h2>बुर की चुदाई</h2>
<p>मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।</p>
<p>सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।<br />
उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।</p>
<p>मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.<br />
सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।</p>
<p>दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।</p>
<p>सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।</p>
<p>उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।</p>
<p>मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।<br />
मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।<br />
सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?<br />
मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।<br />
उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।<br />
मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।</p>
<p>मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।<br />
जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।</p>
<p>लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।<br />
सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.</p>
<p>मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।</p>
<p>जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।</p>
<p>करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।</p>
<p>मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.</p>
<p>उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।<br />
खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।</p>
<p>उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।</p>
<p>वो घर चली गयी।</p>
<p>अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी। </p>
<p>इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।</p>
<p>अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।</p>
<p>सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।<br />
वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ. </p>
<p>दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें।<br />
मेरा मेल आई डी है [email protected]</p>
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			</item>
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		<title>मेरी पहली चोदाई कहानी-2</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:48:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग मेरी पहली चोदाई कहानी-1 में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था. अब आगे: जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा <a title="मेरी पहली चोदाई कहानी-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-kahani-part-2/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई कहानी-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भाग<br />
मेरी पहली चोदाई कहानी-1<br />
में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था.</p>
<p>अब आगे:</p>
<p>जब मैं वापस घर पर आया, तो मेरा मन ही नहीं लग रहा था. मुझे एक ही ख्याल आ रहा था कि मेरी चूत की चोदाई की कहानी कब पूरी होगी.</p>
<p>पूरा दिन ऐसे ही ख्यालों में गुजर गया. मैं इंतजार करता रहा कि अभी उसका कॉल आएगा, उससे बात होगी. मगर उस दिन उसका कोई कॉल नहीं आया. मैं उसके ख्याल में मुट्ठ मारके सो गया.</p>
<p>मुठ मारने से तनाव खत्म सा हुआ और मुझे नींद भी कब आ गई, पता ही नहीं लगा. </p>
<p>फिर मैं जैसे अचानक उठा. मैंने देखा कि शाम के 7:00 बज रहे थे. मैंने अपने फोन को देखा, तो उसमें बहुत सारे मिस कॉल आए हुए थे. मैंने इतने मिस कॉल देख कर तुरंत उसको फोन किया.</p>
<p>यह सभी कॉल उसी के थे. मैंने कॉल किया, तो मेरे कुछ बोलने से पहले ही वह बोल उठी- कहां थे अब तक? कितने फोन किए … सुबह कुछ करने नहीं दिया, तो क्या नाराज हो गए?<br />
फिर मैंने उसे समझाया कि मैं नाराज नहीं हुआ हूं … मैं तुम्हारा ही वेट कर रहा था और मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं लगा.<br />
उसने कहा कि चलो अभी मेरे घर पर कोई नहीं है, अभी तुम आ जाओ. हम अपना सुबह का अधूरा काम पूरा कर लेते हैं.</p>
<p>उस वक्त रात के लगभग 8:00 बज रहे थे. मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके घर चल दिया. गाड़ी को मैंने दूर खड़ा कर दिया था ताकि कोई देख ना ले. क्योंकि वहां पर मेरी जान पहचान के भी लोग थे. </p>
<p>नजदीक जाकर मैंने उसे कॉल किया और पूछा कि मैं सीधा अन्दर आ जाऊं?<br />
तो उसने कहा कि नहीं … रुको तो … पहले मुझको देखने दो, बाहर कोई है तो नहीं … अगर किसी ने देख लिया, तो मेरा यहां रहना मुश्किल हो जाएगा.<br />
मैंने कहा कि हां देख लो, मैं वेट करता हूं.</p>
<p>थोड़ी देर बाद उसका कॉल आया. उसने कहा कि कोई नहीं है, जल्दी से आ जाओ. </p>
<p>मैं सीधा घर में घुस गया. घर में घुसते मैंने उसे देखा. देखते ही मैं उससे चिपक गया. उसे गले से लगाया और उसको किस करने लगा. उस वक्त मैं पागल हो चुका था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. बस पागलों की तरह से किस किया जा रहा था. </p>
<p>उसने मुझे रोकते हुए कहा- सब कुछ यहीं करोगे क्या? चलो कमरे में चलते हैं.<br />
फिर मुझे होश आया. मैंने अपने आपको संभाला.</p>
<p>हम दोनों कमरे में चले गए. कमरे में जाते ही मैं उसे घुमा कर उसकी गर्दन में चुम्बन करने लगा. तब तक मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैं पीछे से उसकी मोटी गांड में लंड को ठेले जा रहा था. आगे से अपने हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था. मैं इतना जोर से दबा रहा था कि मुझे बस पहली और आखिरी बार दूध दबाने को मिले हों.</p>
<p>वह मुझसे कह रही थी- आह धीरे से करो … मुझे लग रही है.<br />
पर मुझे कहां कुछ सुनाई देने वाला था. मैं तो बस अपने अन्दर के शैतान को जगा चुका था. उसकी एक भी आवाज मेरे कानों में नहीं आ रही थी. उस टाइम तो बस खड़े खड़े मन कर रहा था कि जल्दी से गांड में लंड घुसा दूँ.</p>
<p>मैंने उसकी साड़ी को पीछे से उठा दिया और मैंने अपने लंड को उसके सीधा गांड में सैट करके धक्का मार दिया. बिना किसी अनुभव के लंड पेल देने से लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था. मेरी हरकत से उसको हंसी आ रही थी. </p>
<p>उसने मुझसे पूछा- क्या पहली बार कर रहे हो?<br />
मैंने कहा- हां … मैंने कभी सेक्स नहीं किया है.<br />
तो उसने कहा कि फिक्र मत करो मैं सब सिखा दूंगी.<br />
मैंने कहा- जल्दी से सिखा दो न.<br />
उसने हाथ पीछे करते हुए मेरे गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- चलो हम बाथरूम में चलते हैं … वहां करेंगे. </p>
<p>अब तक हमारे कपड़े नहीं निकले थे. सिर्फ मेरा लंड मैंने पेंट से बाहर निकाला हुआ था. उसने अभी तक मेरा लंड भी नहीं देखा था.<br />
जब मैंने कहा- हां चलो अन्दर चलते हैं.<br />
वह मेरी तरफ घूमी. उसका चेहरा मेरे से चेहरे के सामने आया.</p>
<p>जबी उसकी नजर धीरे से मेरे लंड पर पड़ी, तो उसने कहा कि ओ माय गॉड … तुम इतने बड़े से हथियार को मेरे छोटे से छेद में डालने की कोशिश कर रहे हो, पर तुम्हें तो इतना भी नहीं पता कि उसको कैसे डाला जाता है. </p>
<p>उसके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं थोड़ा सा सोचने लगा कि यह तो कितनी चालू लड़की है … कितनी बेशर्मी से बातें कर रही है. </p>
<p>मैंने उसकी बातों को ध्यान नहीं देते हुए आगे बढ़ना ही अच्छा समझा. फिर वह मेरे लंड को पकड़कर मुझे बाथरूम में ले गई. मैं मेरे लंड के साथ उसके साथ में अन्दर खिंचता हुआ जाने लगा. उस टाइम मुझे ऐसा लगा कि लंड कितने कमाल की चीज होती है. सिर्फ उसने लंड को ही पकड़ा था और मेरी पूरी बॉडी उसके कंट्रोल में हो गई थी.</p>
<p>उसके लंड पकड़ते मुझे झनझनाहट होने लगी थी. यह क्या हो रहा है … ऐसी फीलिंग थी कि उस टाइम कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उसके लंड पकड़ते ही में और जोश में आ गया. </p>
<p>फिर मैं साथ में बाथरूम चला गया. बाथरूम में घुसते ही उसने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड को हाथ में पकड़ कर नीचे बैठ गई. वो उसे देखने लगी. </p>
<p>मैंने कहा- क्या देख रही हो?<br />
उसने कहा- मैं इसी के लिए तरस रही थी और मैंने उस दिन आपको न जाने क्या बोल दिया था. मैंने बात भी नहीं की आपसे.<br />
मैंने कहा- कोई बात नहीं … जो हुआ सो हुआ … अभी आगे का करते हैं. </p>
<p>फिर उसने मेरे लंड को सीधा मुँह में डाल लिया, जैसे ही मेरा लंड उसके मुँह में गया. मैं कांपने लगा, मुझे अजीब सा होने लगा. मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है … क्योंकि उस टाइम पहली बार इस लड़की ने मेरे लंड को छुआ था और मुँह में लिया था. वो मेरे लंड को ऐसे मुँह में ले रही थी, जैसे उसको बहुत मस्त चीज मिल गई, जिसके लिए वो बरसों से भूखी थी. </p>
<p>मेरे दोनों हाथ मेरे बस में नहीं थे, उसकी हाथ मेरी गांड के गोलों पर टिके हुए थे और मेरा लंड उसके मुँह में था. वो हाथों से मेरी गांड को आगे पीछे करने की कोशिश में लगी थी. मुझे समझ में आया कि ये मुझे आगे पीछे होने के लिए कह रही है. मैंने उसके सर को पकड़ कर गांड को आगे पीछे करने लगा, तो उसके मुँह से ओक ओक ओक की आवाज आने लगी थी. </p>
<p>फिर ऐसे ही कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने मेरा लंड बाहर निकाला.<br />
मैंने उससे कहा- मुझे अन्दर डालना है. </p>
<p>इतना सुनते ही वो मुझे किस करने लगी. उसके किस करते करते ही मैं अपने हाथों से उसकी साड़ी उतारने लगा. धीरे-धीरे मैंने पूरी साड़ी उतार दी, वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी. मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला. </p>
<p>मेरे दिमाग में एकदम से घंटी बजी और बचपन का एक डायलाग याद आ गया जब हम कुछ कमीन दोस्त किसी भी बड़े चूचे वाली लड़की को देख कर लव स्कूल कह देते थे. कहीं आज ये वही लव स्कूल तो मेरे सामने नहीं आ गया था. </p>
<p>मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं, इतने नुकीले चूचे मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखे थे. दूध चूसने के लिए मैं पागल होने लगा. मैंने आव देखा न ताव दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. मैं अपने आप ही में पागल हो रहा था कि पता नहीं मुझे क्या हुआ. </p>
<p>उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा. अब तक चूचे चूसते चूसते मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था. उसका एक हाथ मेरे लंड को पकड़कर आगे पीछे कर रहा था. मुझे उस टाइम बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>चूंकि मैं उस टाइम पहली बार चोदाई करने वाला था. यह सब मेरे लिए नया था. फिर उसने मुझे रोकते हुए मेरी पेंट उतारी और टी-शर्ट भी उतार दी. मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था. </p>
<p>वो मेरे शरीर को देख कर पागल हो गई और कहने लगी- मैंने आज तक ऐसा शरीर नहीं देखा … तुम कितने सेक्सी दिखते हो.<br />
मैंने कहा- तुम पहली लड़की हो, जिसने मुझे ऐसे देखा है.<br />
उसने कहा कि अगर कोई तुम्हें देख ले, तो पागल ही हो जाए.</p>
<p>उसके इतना बोलते ही मैं उसे किस करने लगा. उसका ब्लाउज मैंने पीछे से फाड़ दिया क्योंकि उस टाइम मैं बहुत जोश में था. उस समय वैसी सी फीलिंग आ रही थी कि मेरे अन्दर न जाने ताकत एकदम से डबल कैसे हो गई थी. </p>
<p>वो कहने लगी- यह क्या कर दिया तुमने … ब्लाउज ही फाड़ डाला … सब्र तो कर लो … मैं कहीं नहीं जाने वाली. मैं तुम्हारी ही हूं और हमेशा तुम्हारी रहूंगी.</p>
<p>मैंने उसे सीने से लगा लिया. मैं उसको इतना जोर से हग करने लगा कि उसके नुकीले चूचे मुझे अपनी छाती में गड़ते से महसूस होने लगे. जब मेरे सीने से उसके मम्मे लग गए, तो मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे शरीर को मलाई लग रही हो. </p>
<p>मुझे बड़ा मजा आ रहा था. फिर मैंने उसका पेटीकोट खोलने की कोशिश की, पर मुझसे नहीं खुला, तो उसने अपने हाथों से खुद का पेटीकोट खोल दिया. उसने अन्दर पेंटी नहीं पहनी हुई थी. मैं उसको नंगी देखकर नीचे बैठ गया. </p>
<p>एकदम मुलायम मक्खन सी चूत को देख कर मैं पागल हो गया था. जाने मुझे क्या हुआ कि मैं उसकी चूत को हाथों से फैलाने लगा. अन्दर से एकदम गुलाबी थी उसकी चूत. मुझे पता नहीं क्या हो गया कि मैंने अपना मुँह अन्दर घुसा दिया और चूत के गुलाबी होंठों को चूसने लगा. इतना दम लगाते हुए चूत को चूसने लगा कि उसकी सांसें रुकने लग गईं. </p>
<p>तब उसने मेरा सर और जोर से अपनी टांगों के बीच में दबा दिया और वह धीरे-धीरे नीचे बैठे लगी. वो नीचे बैठी, तब भी मेरा सर उसकी टांगों के बीच में घुसा हुआ था. तब तक मैं भी लेट चुका था.</p>
<p>फिर उसने मुझे रोका और कहा- अब अन्दर डाल दो.<br />
उसके ये कहते ही मैंने पोजीशन बनाई और अपना लंड उसकी चूत में रखकर तैयार हो गया.</p>
<p>मैं जैसे ही लंड अन्दर डालने लगा, तभी बाहर से किसी के आने की आवाज आने लगी. हम दोनों बाथरूम के अन्दर थे.<br />
ध्यान से सुना तो रूम में आकर कोई बोल रहा था. </p>
<p>उसने फुसफुसाते हुए कहा- मेरे पति आ गए हैं … अब हम अन्दर फंस चुके हैं. हम बाहर कैसे जाएंगे … आज तो मैं मर गई. </p>
<p>इस तरह की बहुत सी बातें करने लगी. यह सब सुनकर मेरी गांड फटने लगी. मेरा खड़ा लंड कब बैठने को हो गया, मुझे पता ही नहीं लगा.<br />
उस टाइम वो कह रही थी- बाहर जाएंगे, तो वो हमें पकड़ लेंगे. </p>
<p>फिर अचानक उसके पति की आवाज आई- कहां हो तुम?<br />
तो उसने अन्दर से कहा कि मैं बाथरूम में हूं … नहा रही हूं.<br />
उसका पति कहने लगा कि आज इतनी रात को क्या नहाने की जरूरत आ गई?<br />
उसने कहा कि मेरी साड़ी गीली हो गई थी. मैं नहाने लग गई. </p>
<p>यह सब सुनकर मुझे थोड़ी सी तसल्ली हुई. फिर मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा. अब तो शुरू करते ही हैं. </p>
<p>तब तक वह खड़ी हो चुकी थी और मैंने भी लंड को सहला कर खड़ा कर लिया था. मैंने उसे पीछे से झुका दिया और लंड को चूत के छेद पर सैट करके सीधा अन्दर पूरा का पूरा घुसा दिया. </p>
<p>लंड के चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई. उसकी चीख इतनी जोर से निकली थी कि उसके पति ने बाहर से सुन ली. </p>
<p>यह देख के मुझे डर लगने लगा कि कहीं उसका पति अन्दर ना आ जाए. उस टाइम तो माइंड में यही रहता है कि हमारी नजर में कुछ गलत हो रहा है, तो सामने वाले की नजर में भी गलत ही होगा. </p>
<p>बाहर से पति चिल्लाया- क्या हुआ?<br />
उसने अन्दर से खुद को सम्भालते हुए कहा- कुछ नहीं हुआ, मैं जरा फिसल गई थी. </p>
<p>फिर इतना सुनते ही मैं लंड को आगे पीछे करने लगा. वो भी मेरे लंड के हर झटके का मजा ले रही थी. मुझे भी न मालूम कितना मजा आने लगा था. फिर धीरे-धीरे मेरे लंड के झटकों की स्पीड बढ़ने लगी, तो उसने मुझे रोक लिया.</p>
<p>अब उसने कहा- तुमको नीचे लिटा कर करूंगी. </p>
<p>मुझे नीचे लेटने का इशारा किया. मैं फर्श पर लेट गया. वो मेरे ऊपर आ गई. उसने मेरे लंड को चूत पर सैट किया. उसने मेरा पूरा लंड में चूत में ले लिया. मेरी आंखों के सामने ही मेरा लंड चूत में गायब हो चुका था. मेरे मन में ख्याल आया कि चूत के अन्दर कितना गहरा गड्डा होगा, जो इतने बड़े लंड को भी गायब कर दिया. </p>
<p>उसके बाद वो मेरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी. मुझे बहुत मजा आने लगा था … क्योंकि जिंदगी में पहली बार मेरा लंड किसी चूत में घुसा था. </p>
<p>फिर वह इतनी स्पीड से ऊपर नीचे होकर चोदाई करने लगी कि पच पच की आवाज आने लगी. </p>
<p>उस टाइम बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया कि आवाज बाहर भी जा सकती है और बाहर कोई बैठा हुआ है. </p>
<p>वह अपनी ही धुन में मेरे ऊपर नीचे होने लगी. ऊपर नीचे होते होते मुझसे लिपट गई. फिर ऊपर नीचे का खेल खेलना बंद कर दिया. वो मुझसे कस कर लिपट गई और उसने कहा कि मेरा हो गया है. </p>
<p>उस वक्त मुझे समझ में नहीं आया कि वह क्या कह रही थी.<br />
मैंने कहा- हां कोई बात नहीं. </p>
<p>मैंने उसे मेरे नीचे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया. मैं उसकी टांगों में बैठकर चूत को देखने लगा. वो पहले के मुकाबले अभी थोड़ी अधिक उभरी हुई थी. </p>
<p>मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों हो गया है?<br />
तो उसने कहा कि आज पहली बार कोई मस्त डंडा मेरी चूत में गया है और मुझे चोदाई में संतुष्ट किया है … ऐसे में हमेशा इसी लंड से चूत ख़ुशी से फूल कर कुप्पा हो जाती है.</p>
<p>इतना सुनते मैं खुश हो गया और मैंने सीधा अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया. </p>
<p>उसने कहा- क्या हुआ? अब तक तुम्हारा हुआ नहीं था क्या?<br />
मैंने कहा- देखो ना कितना खड़ा है. तुम्हारे अन्दर जाने के लिए कितना तड़प रहा है. </p>
<p>मैंने उसको किस करते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिए. कुछ देर बाद मैं नीचे से गांड और उसकी चूत को देखने लगा. वो गांड उठाने लगी. मैंने स्पीड बढ़ा दी और धकापेल चोदाई करने लगा. </p>
<p>तब तक उसका एक बार और हो चुका था. फिर मैंने फुल स्पीड में धक्के मारते हुए उससे कहा- मेरा पानी निकलने वाला है.<br />
यह कहते कहते ही मेरे लंड का पानी उसकी चूत में निकल गया. मैं थक कर उसके ऊपर ही लेट गया. </p>
<p>फिर मैंने उससे कहा- यहां से बाहर कैसे जाएंगे … आपके पति बाहर बैठे हैं.<br />
तो उसने कहा- मैं निकल कर उनको बाहर भेज देती हूं. उनके जाने के बाद तुम चले जाना. </p>
<p>फिर उसके बाद उसने अन्दर से ही आवाज लगाई कि आप दूध ले आओ ना … तब तक मैं बाहर निकल कर कपड़े पहन कर आपके लिए खाना लगा देती हूं.<br />
उसका पति ‘ठीक है..’ कह कर वहां से दूध लेने चला गया. मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने, उसको किस किया और वहां से चला आया. </p>
<p>उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता है … हम चूत चुदाई का मजा कर लेते हैं.</p>
<p>तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी पहली चोदाई कहानी … मुझे मेल करके जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>मेरी पहली चोदाई की कहानी-1</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:26:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Sexy Story]]></category>
		<category><![CDATA[Hot girl]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर <a title="मेरी पहली चोदाई की कहानी-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/pahli-chodai-ki-kahani-part-1/" aria-label="Continue reading मेरी पहली चोदाई की कहानी-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह मेरी पहली चोदाई की कहानी एक ऐसी औरत के साथ की है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी.</p>
<p>मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर बीच में कुछ रख दिया जाए तो वह भी टूट सकता था. मैं इतनी जोर के साथ झटके लगा रहा था कि उस चूत से पच पच की आवाज आ रही थी. हम दोनों चुदाई में कितने खोए हुए थे कि हमें पता ही नहीं की हम कहां थे … हम भूल गए कि बाहर कोई बैठा हुआ है.</p>
<p>माफी चाहता हूं … मैंने आपको बिना बताए कहानी शुरू कर दी.</p>
<p>यह कहानी मेरी और एक ऐसी औरत के बीच में है, जिससे न मैं कभी मिला था, ना कभी उसको लेकर कुछ सोचा था कि जिंदगी में ऐसी कोई औरत आएगी. </p>
<p>पहले मैं आपको मेरे बारे में बता दूं. मेरा नाम धर्मेंद्र है, मैं उदयपुर में रहता हूं. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है. मैं 24 साल का एक हैंडसम बंदा हूं, जिसे देख कर हर किसी की चूत में खुजली मच सकती है. मुझे देख कर प्रिय पाठिकाओं, तुम सब भी अपनी चूत में उंगली कर सकती हो … क्योंकि ऐसा मुझे बहुत सी लड़कियों ने और औरतों ने कहा है. </p>
<p>मैं जिम करता हूं, इसलिए मेरी अच्छी खासी बॉडी है.</p>
<p>ये मेरी लाइफ की पहली अन्तर्वासना कहानी है. मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी लिखने की सोच रहा था. अन्तर्वासना के बारे में सबसे पहले मुझे मेरे दोस्त ने बताया था. मैंने भी इधर की सेक्स कहानी पढ़ना शुरू किया. मुझे अच्छा लगने लगा, तो मैंने मन बनाया कि मेरे साथ जो हादसा गुजरा है, उसे आप लोगों के साथ शेयर करूं. </p>
<p>चूँकि पहली बार लिख रहा हूँ … अगर कोई समझ ना आए … या कुछ गलती हो तो माफ कर देना.</p>
<p>मैं जब छोटा था, तो मेरा बहुत सेक्स का मन करता था. जब मेरा मन सेक्स करने का होता था, तब मैं छिप छिप कर पोर्न फिल्में देखा करता था. जब मैं गंदी फिल्में देखता था, तब चूत चुदाई करने का मेरा मन बहुत होता था, लेकिन उम्र छोटी थी, उस वक्त शक्ल सूरत भी अच्छी नहीं थी … तो कोई लड़की मुझे भाव ही नहीं देती थी. न ही सामने से देखती थी. </p>
<p>उस वक्त मुझे अपने आपसे बड़ी घिन होती थी कि मैं ऐसा क्यों हूं. मैं क्यों अच्छा नहीं दिखता हूँ. </p>
<p>इन सब वजहों से लड़की पटाने के मामले में मुझे बचपन में बहुत प्रॉब्लम हुई. मैंने अपने हाथ से हिला कर अपने आपको संतुष्ट किया था. जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई, मुझे समझदारी आती गई. हालांकि मुझे अब भी ये नहीं मालूम था कि औरतों को क्या चाहिए होता है … या लड़कियां कैसे खुश होती हैं. लड़कियों को कैसे पटाना चाहिए. </p>
<p>फिर धीरे-धीरे मैंने जिम जाना शुरू किया अच्छी बॉडी बनाई. उसके बाद मुझे अच्छा रेस्पॉन्स आने लगा. </p>
<p>ये एक जीता जागता गुजरा हुआ सच्चा मसाला है. जो कि बिल्कुल ही सच है और इसमें सच के सिवा कुछ भी नहीं है. </p>
<p>एक ऐसी लड़की की जो मुझे अचानक मिली जिसको मैंने कभी देखा तक नहीं था न सोचा था कि ऐसी कोई जिंदगी में आई थी बाद उस टाइम की है जब मैं शुरू शुरू में जिम जाया करता था. जिम के पास में खूबसूरत लड़की थी, जिसका नाम मैं नहीं लूंगा … लेकिन दिखने में वो जबरदस्त कमाल की लड़की थी. उसकी तारीफ जितनी भी करो, कम है. </p>
<p>उसकी आंखें क्या मस्त झील सी गहरी थीं कि बस एक बार देख लूं, तो घायल ही हो गया. उसका फिगर साइज 36-30-36 का था. जब वो चलती थी, तो उसकी गांड क्या मटक मटक कर … उछल उछल कर दिखती थी. क्या मस्त उभरी हुई गांड थी. उसकी गांड को देख कर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाए. उसकी गांड देखकर ऐसा मन करता था कि बस अभी के अभी ही अपना 7 इंच का सरिया अन्दर घुसा दूं. उसकी चीखें निकाल दूं. बस रोज इसी तरह दिन निकलते थे. </p>
<p>जब भी मैं वहां जिम के पास से जाता था, उसे देखने का मौका नहीं छोड़ता था. बस उसको देख कर खुश हो जाया करता था. मैंने उसे देखा बस ही था, अब तक मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता था कि वो कौन है, कहां से आई है … उसका नाम क्या है … वो करती क्या है. मुझे उस टाइम तक कुछ भी नहीं मालूम था. </p>
<p>एक दिन मैं उसे देख रहा था कि उसने भी मुझे देखा. मैंने नजरें नीचे कर लीं और न जाने क्या समझ आया कि जेब से पेन निकाल कर एक कागज़ के टुकड़े पर अपना फोन नम्बर लिखा और कागज को अपनी मुट्ठी से मरोड़ कर फेंक दिया. इसके बाद उसकी तरफ देखा और चला गया.</p>
<p>मुझे बहुत ज्यादा कोई उम्मीद तो नहीं थी, बस एक बार मन ने कहा और नम्बर लिख कर फेंक दिया.</p>
<p>हालांकि उससे कुछ नहीं हुआ. अब मेरा रोज का यही काम था. जिम से लौट कर अपने कमरे में आता था … उसे अपनी कल्पनाओं में देखता था और उसके नाम की मुठ मारके सो जाता था. मैं मन में दुआ करता था कि एक दिन ये मुझे मिल जाए और दबा दबा कर चोद दूँ. मगर हमारी किस्मत तो गधे के लंड से बंधी हुई थी, इसमें कभी कुछ अच्छा होना ही नहीं था. उम्मीद ही लगा रखी थी कि होगा तो कुछ बुरा ही होगा … साला अच्छा तो कभी हुआ ही नहीं है. इतनी अच्छी लड़की कहां से मिलेगी.</p>
<p>लेकिन आपने सुना ही होगा कि अगर किसी चीज को दिल से चाहो, तो सारी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है और यह सिर्फ डायलॉग नहीं है, हकीकत भी है. क्योंकि जब तक मेरे साथ हादसा नहीं हुआ, उससे पहले मुझे लगता था कि चाहने से कुछ नहीं होता है, कोई कायनात वायनात नहीं होती. </p>
<p>फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि मुझे यकीन होने लगा कि ऐसा होता है. </p>
<p>बात को ज्यादा ना घुमाते हुए सीधा पॉइंट पर आते हैं.</p>
<p>मैं रोज की तरह उसके ख्यालों में खोया हुआ था. अचानक मेरे फोन पर एक कॉल आया. उधर से हल्की सी आवाज में कहा गया- हैलो. </p>
<p>मैं एक पल के लिए सोचने लग गया कि ऐसा कौन है, जो मुझे कॉल कर रहा है.<br />
फिर मैंने भी जवाब दिया- हैलो … हां जी बोलिए!<br />
तो उसने कहा कि मैं रूबीना बोल रही हूँ.<br />
(यह उसका काल्पनिक नाम है असली नाम नहीं बताऊंगा)<br />
मैंने चौंकते हुए पूछा कि कौन रूबीना?<br />
तो उसने कहा कि मैं वही रूबीना, जिसे आप रोज देखते हैं और बात तक नहीं करते. आपने ही नम्बर को लिख कर सड़क पर फेंक दिया था न!</p>
<p>इतना सुनते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे और मैं अपने आपके बारे में सोचने लगा कि साला मैंने अब तक उससे क्यों बात नहीं की … जबकि वो तो मुझसे बात करने को तैयार थी.</p>
<p>मैंने अपने आपको संभालते हुए कहा कि मैं तो आपको नहीं देखता हूं … मैं तो बस अपने काम से काम रखता हूं. वहां से गुजरता हूं और वापस आ जाता हूं. </p>
<p>वह बोली- क्यों … चलो अब बनाओ मत … मुझे सब पता है, तुम मुझे क्यों देखते हो?<br />
मैंने भी पूछ लिया- आप मुझे बताओ न … मैं क्यों देखता हूँ?<br />
उसने भी शरारती अंदाज में कहा- अब इतने भोले मत बनो, जैसे तुम्हें कुछ पता ही नहीं है. </p>
<p>इस तरह उस दिन हमारे बीच बातें शुरू हुईं. फिर उसने बताया कि मेरी यहां शादी हुई है, मेरा पूरा दिन इसी घर में गुजर जाता है. ना कभी मैं बाहर निकलती हूँ, ना कहीं जाती हूँ. बस पूरा दिन उसी घर में, घर के काम करने में निकल जाता है. मेरा पति भी ऐसा है, जिसे काम से फुर्सत ही नहीं है कि मुझ पर ध्यान दे … मुझसे प्यार करे … मुझसे सेक्स करे, मेरी जरूरतों को पूरी करे. </p>
<p>मैंने उसके मुँह से सब सुना.</p>
<p>जब उसने ये बताया कि उसका पति उसे वह सुख नहीं दे पाता है, जो उसे मिलना चाहिए. तो मुझे समझ आ गया कि सौदा बिना खतरे का है. सिर्फ मजा लेने देने का मामला है.</p>
<p>इस तरह की हमारी बातें होने लगीं. वो अपने दुख मुझे सुनाती. मुझे भी सुनने पड़ते … क्योंकि मुझे तो उसकी चूत और गांड मारनी थी. </p>
<p>एक दिन मैंने उससे कहा- आप ऐसी बातें मत किया करो, सीधी सी बात है … मैंने जब से आपको देखा है, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं. </p>
<p>मेरी यह बात सुनकर वो गुस्सा हो गई और बोली- तुम मेरे बारे में ऐसी सोच रखते हो … मैं तो तुम्हें अच्छा समझती थी … लेकिन तुम तो ऐसे निकले. आज के बाद मुझे फोन मत करना.</p>
<p>अक्सर होता है ना कि लड़की हमसे कुछ और उम्मीद लगाकर बैठी होती है … और हम कुछ और भी लगा कर बैठे होते हैं. मुझे तो उसके साथ सेक्स करना था, तो मैंने खुलकर कह दिया. उसे भी ना जाने कहीं ना कहीं अपने अन्दर अपने पति से ना मिलने वाले सुख के कारण मुझसे बात करना ठीक लगा था. उसे भी सेक्स की जरूरत थी, पर वह मुझसे कह नहीं पाई. </p>
<p>हालांकि वो इतनी जल्दी सेक्स की बात पर खुलना नहीं चाहती थी. शायद मुझे ये बात करने में कुछ और टाइम लेना चाहिए था. लेकिन मैंने बहुत जल्दी कर दी. </p>
<p>जब उसने मुझसे कहा कि मुझसे बात मत करना, तो मामला फ़ैल गया. उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया.</p>
<p>मैंने सोचा कि कितना अच्छा माल मिला और क्या गड़बड़ी कर दी यार तूने … माल तो तेरा ही था … थोड़ा सब्र रख लेता, तो सब काम हो जाता. </p>
<p>फिर भी टेंशन में टेंशन होती है. मैं उसे पहले की तरह देखने लगा, पर वो रोज की तरह अब मुझे नहीं दिखती. मैं और परेशान होने लगा. </p>
<p>फिर अचानक चार दिन बाद सुबह के 4:00 बजे उसका कॉल आया. उसने कॉल करते ही कहा- जल्दी से मुझे मिलने आ जाओ.<br />
मैंने कहा- इतनी जल्दी? क्या हुआ?<br />
तो उसने कहा- ज्यादा टाइम नहीं है … मेरे पति अभी सोए हुए हैं. आप जल्दी से यहां पर आ जाइए, मैं आपका वेट कर रही हूं. मैं घर के बाहर ही हूं. </p>
<p>जल्दी में उठकर मैंने अपनी बाइक निकाली और उसके घर के पास चला गया. सुबह के अंधेरे में मैं वहां पहुंचा था. मेरे पहुंचते ही वो मुझसे लिपट गई और रोने लगी.</p>
<p>रूबीना- मुझे माफ कर दो, मैंने आपसे बात नहीं की.<br />
मैंने कहा- माफी तो मुझे मांगनी चाहिए. मैंने आपको गलत कह दिया था, मुझे सोच समझकर बोलना चाहिए था कि आप मुझसे क्या चाहती हो.<br />
उसने कहा- मैं वही चाहती हूं, जो आपने मुझसे कहा था, लेकिन पता नहीं मुझे उस टाइम क्या हो गया था. मैंने आपसे बात करना बंद कर दिया. </p>
<p>इतना सुनते ही मैं उसे किस करने लगा. मैं रोड पर खड़ा हुआ था और वह भी मेरे साथ खड़ी थी. वहां मुझे कुछ ख्याल ही नहीं रहा. मैं बस उसे किस करने लगा. ये सब मेरे लिए पहली बार था. </p>
<p>उसे तो सब पता था क्योंकि वो एक शादीशुदा थी. मुझे उस टाइम ऐसा लग रहा था, जैसे मानो मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा सुख मिल गया हो. मैंने ऐसी फीलिंग आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी. </p>
<p>वो मेरे होंठों को इस तरह चूस रही थी, जैसे कई बरसों की प्यासी हो.</p>
<p>उसके होंठ चूसने से मेरी हालत खराब हो रही थी. मेरा लंड इतना कड़क हो चुका था कि अगर दीवार में घुसा दूं, तो दीवार में छेद हो जाए. उसने मेरे लंड को महसूस कर लिया था. </p>
<p>मैंने उसे कसके पकड़ लिया था और लंड को वहीं खड़े खड़े उसके पेट में गड़ाने लगा. जैसे ही मैंने उसके मम्मों को छूने की कोशिश की, तो उसने मेरे हाथों को रोक लिया.<br />
अब उसने कहा- हम सड़क पर खड़े हैं. </p>
<p>तभी मुझे होश आया और मैंने अपने आपको संभाला. </p>
<p>उसने कहा- बाकी सब बाद में … </p>
<p>उस टाइम मुझे बहत ज्यादा गुस्सा आया, पर मैं क्या कर सकता था. मुझे निराश होना पड़ा … मैं वापस अपने घर आ गया.</p>
<p>अब दोस्तो, बाकी कहानी अगले भाग में. मैंने कैसे उसे चोदा और जब चुदाई की, तब उसका पति आ गया और तब क्या हुआ … ये सब आपको अगले भाग में लिखूँगा.<br />
आपके मेल की प्रतीक्षा में आपका धर्मेंद्र<br />
[email protected]</p>
<p>चोदाई की कहानी का अगला भाग: मेरी पहली चोदाई की कहानी-2</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:43:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[First Time Sex]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
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					<description><![CDATA[अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ. आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी <a title="दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/first-time-sex/didi-ki-saheli-panty-chut/" aria-label="Continue reading दीदी की सहेली ने पैंटी दिखा कर चूत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अन्तर्वासना के अभी प्रिय दोस्तों को मेरा प्रणाम. मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं अन्तर्वासना में आने वाली सभी कहानियों को पढ़ता हूँ.</p>
<p>आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ. अन्तर्वासना पर यह मेरी दूसरी सेक्स कहानी है. सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है. </p>
<p>यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था. </p>
<p>उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.</p>
<p>अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था. </p>
<p>मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था. </p>
<p>प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था. </p>
<p>प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था. </p>
<p>जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था. </p>
<p>हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया. </p>
<p>मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.<br />
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?<br />
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे. </p>
<p>मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.</p>
<p>मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया. </p>
<p>प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.</p>
<p>हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा. </p>
<p>अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.</p>
<p>खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे. </p>
<p>तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.<br />
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी. </p>
<p>उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था. </p>
<p>प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.</p>
<p>अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी. </p>
<p>जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?<br />
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया. </p>
<p>दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.<br />
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला. </p>
<p>मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.</p>
<p>हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था. </p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है. </p>
<p>उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था. </p>
<p>थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.<br />
मैंने भी हामी भर दी. </p>
<p>फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.<br />
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं. </p>
<p>इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था. </p>
<p>मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.</p>
<p>तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.</p>
<p>दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.</p>
<p>जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.</p>
<p>मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.<br />
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी. </p>
<p>मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.</p>
<p>कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा. </p>
<p>मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे. </p>
<p>मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा. </p>
<p>फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. </p>
<p>इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था. </p>
<p>इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे. </p>
<p>फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया. </p>
<p>अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे. </p>
<p>जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था. </p>
<p>मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ. </p>
<p>फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.</p>
<p>अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.</p>
<p>इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा. </p>
<p>कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी. </p>
<p>उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.</p>
<p>मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.</p>
<p>हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.</p>
<p>मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था. </p>
<p>इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.</p>
<p>थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया. </p>
<p>इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.<br />
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती. </p>
<p>आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.</p>
<p>मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.</p>
<p>उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.<br />
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे. </p>
<p>आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी, कृपया जरूर बताएं. आपके मेल मिलने के बाद मैं आपको अपनी बहन की कुछ और सहेलियों की चुदाई के किस्से लिखूंगा. अब इजाजत दीजिए, जल्द ही मैं फिर से एक नयी चुदाई की कहानी के साथ प्रस्तुत होऊंगा.<br />
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