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	<title>Bhabhi Sex &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Oct 2025 16:40:20 +0000</lastBuildDate>
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		<title>पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 16:40:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई. दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, <a title="पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabi-ki-chudai-bathroom/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाबी की चुदाई बाथरूम में">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ें मेरी भाबी की चुदाई सेक्स कहानी में! भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है. मैंने अपने पड़ोस की एक भाबी को कैसे पटाया और उसकी वासना जगाई.<br />
<span id="more-353"></span></p>
<p>दोस्तो, आप सभी को आर्यन अग्रवाल का नमस्कार। मेरी आयु 35 साल, रंग गेहुंआ, सामान्य कद-काठी का और मुझे जिम जाने का शौक है, इसी कारण मेरी शरीर गठीला है। मैं हरियाणा के पानीपत का रहने वाला हूं.</p>
<p>मैं अपनी पहली कहानी इस साईट पर लिख रहा हूं। मेरे लंड का साइज तो 5 इंच का है पर किसी को भी सतुंष्ट कर सकता हूं। मुझे टी.वी. पर ब्लु फिल्म चलाकर भाबी की चुदाई का सपना है, क्योंकि ऐसे करने से दोनों दिल अपनी-अपनी हसरत पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>वैसे तो मैं पिछले करीब 8 सालों से हर कहानी को पढ़ता आ रहा हूं, शायद ऐसी कोई ही ऐसी कहानी होगी जो मैंने नहीं पढ़ी हो. पर मुझे भाबी की कहानियां पढ़ने में अलग ही मजा आता है<br />
क्योंकि आप सब को तो पता है कि भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है.</p>
<p>इसलिए मैं अपने जीवन में घटित हुई असल भाबी की चुदाई कहानी को आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूंः</p>
<p>यह घटना आज से करीब 5 साल पुरानी गर्मी के दिनों की है. उन दिनों अगर कोई दो बार नहीं नहाता तो उसकी हालत मानो एक काम करते हुए मजदूर की तरह हो जाती है।</p>
<p>मेरे पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहने के लिए आया। उस परिवार में विजय कुमार, उसकी पत्नि मीहा (बदला हुआ नाम) और 4 साल का एक लड़का था। विजय और उनके परिवार को हमारा परिवार अच्छी तरह से जानता था क्योंकि भाबी हमारी दुकान पर सामान लेने आती थी और कभी-कभी भैया भी सामान लेने आते थे।</p>
<p>मीहा भाबी को आते-जाते समय मैं नमस्ते करता था। मैंने उनको अपना फोन नम्बर दे दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वे फोन करके हमारी दूकान से सामान मंगवा सकें.<br />
मीहा भाबी की आयु करीबन 24 साल, 34″ के चुच्चे और बाहर निकली हुई उसकी मस्त गांड किसी को भी पागल कर सकती थी. जबकि विजय भाई की आयु करीबन 40 के आस-पास थी।</p>
<p>उसका पति विजय एक सरकारी विभाग में नौकरी करता था। उनकी रोजाना शराब पीने की आदत थी, जिससे उनका स्वास्थ्य बिल्कुल गिर गया था। भैया सरकारी नौकरी होते हुए भी बहुत ही कम नौकरी पर जाते थे।</p>
<p>थोड़े दिन के बाद किसी अनजान नम्बर का मेरे नम्बर पर फोन आया और कहने लगी- मैं मीहा बोल रही हूं। क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?<br />
भाबी ने बाजार से कुछ दवाइयां लाने के लिए कहा। मैं भाबी के घर पर गया तो भाबी ने एक पर्ची और कुछ पैसे दिये।<br />
मैंने बाजार से दवाई और बचे हुए पैसे लाकर भाबी को दिये।<br />
भाबी ने मुझे धन्यवाद कहा और भाई साहब ने भी धन्यवाद किया।<br />
मैंने दोनों को कहा- इसमें धन्यवाद वाली ऐसी कोई बात नहीं। आप लोगों को मेरी जरूरत जब भी लगे, आप मुझे फोन कर सकते हो।</p>
<p>इस तरह से मैं उनसे मिलने-जुलने लगा और उनका मेरे ऊपर विश्वास होने लगा। कभी-कभार तो भाबी मुझसे फोन करके भी घर का सामान लाने को कहती। इसी बहाने से मैं उसके घर पर जाने लगा और कभी-कभी उसके धीरे से टच करता तो कभी अनजाने ढंग से उसके चुच्चे दबा देता। इस पर भी भाबी कभी भी बुरा नहीं मानती थी बल्कि हंस देती थी।<br />
भाबी भी अब मेरे इशारे समझने लगी थी।</p>
<p>मुझ पता था कि भैया की बीमारी के चलते भाबी की चुदाई नहीं हो पाती होगी तो उनकी जवानी प्यासी रहती होगी.<br />
एक बार मैंने उसे मिलने के लिए बोला तो कहा- मैं शादीशुदा औरत हूँ और हमें ये बात शोभा नहीं देती।<br />
पर बार-बार जिद करने पर वो मेरी बात मान गई और रात को 8 बजे घर पर आने के लिए कहा।</p>
<p>मैंने घर वालों को बहाना बनाया कि मैं एक दोस्त के साथ बाहर जा रहा हूं और रात को देरी से आऊँगा।</p>
<p>फिर उसी दिन करीब आठ बजे मैं उसके घर पहुंच गया और विजय भाई से बातचीत करने लग गया.<br />
भाबी ने बात ही बात में मुझे दूसरे मकान में जाने का इशारा किया। उनके घर से पीछे का एक मकान उन्होंने अभी खरीदा है जिसमें वो थोड़े ही दिन में शिफ्ट होने वाले थे। उसने अपने पति को कहा कि वह दूसरे मकान की सफाई करने जा रही है और बाद में नहा कर आएगी।<br />
मैं तो पहले से ही उस मकान में आ गया था।</p>
<p>थोड़ी देर के बाद भाबी आई और मुझे कहने लगी- मैं अभी नहा कर आती हूँ।<br />
भाबी जी ने जानबूझ कर बाथरूम की कुंडी नहीं लगाई।</p>
<p>मुझे बैडरूम में बैठे-बैठे बाथरूम का खुला दरवाजा दिख रहा था क्योंकि बाथरूम बैडरूम के पास ही था।</p>
<p>मैं रूम में बैठे-बैठे यही सोच रहा था कि क्यों ना भाबी के साथ बाथरूम में मजे कर लूं।<br />
मैंने फट से अपने सारे कपड़े उतारे और बाथरूम में जाते ही भाबी के मस्त चुच्चों को पीछे से दबोच लिया। मुझे बाथरूम में देखकर भाबी बहुत खुश हुई। मैं और भाबी दोनों एक-दूसरे को साबुन से नहला रहे थे।</p>
<p>नहलाते समय मैंने भाबी के एक चुच्चे को मुंह में लेकर चुसने लगा और दूसरे चुच्चे की निप्पल को हाथ से दबाने लगा।<br />
भाबी अपने चुच्चे चुसवाते हुए बोल रही थी- और जोर से मेरे राजा … ओह … आह … और जोर से … सारा … सारा निचोड़ दे दोनों को!</p>
<p>अब भाबी ने मेरे लंड को सहलाया और बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी. जैसे ही मेरे लंड को उसने अपने मुंह में लिया मैं तो सातवें आसमान की सैर करने लग गया.</p>
<p>थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने अपना सारा माल भाबी के मुख में छोड़ दिया, वो भी बड़े प्यार से मेरे माल को बूंद बूंद तक गटक गई।</p>
<p>दोबारा हम एक दूसरे को सहलाने में मस्त हो गये और मैंने दोबारा से उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कोई देरी किए मेरे लंड को चूसने लग गई।<br />
5 मिनट बाद मेरा लंड टाईट हो गया तो मैंने उसे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और अपना लंड भाबी की चुत में डाल दिया. चुत में बड़ी मुश्किल से मेरा लंड गया क्योंकि उसका पति बहुत ही कम भाबी की चुदाई करता था.<br />
और उसने कहा- जोर से … जोर से मेरे राजा!</p>
<p>चोदते समय भाबी के चुच्चे ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ की टहनी पर आम लटक रहे हों। मैं उसके एक चुच्चे को मुंह में डालकर चूस रहा था और दूसरे चुच्चे को दूसरे हाथ से दबा रहा था। भाबी भी सिसकारी ले रही थी- आह … आह … आह … जोर से … फाड़ दे मेरी चुत को … आह!</p>
<p>करीब दस मिनट बाद उसकी चुत में अपना सारा माल छोड़ दिया।</p>
<p>उसके बाद हम 10 मिनट तक नहाये और बैडरूम में चले गये।</p>
<p>बैडरूम में जाते ही हम एक-दूसरे की चुम्मा चाटी करने लग गये और भाबी ने कहा- मुझे करने दे जो करना है, तुम आराम से लेटा रहो।</p>
<p>फिर भाबी ने बेड की दराज से शहद की शीशी निकाली और उसे मेरे लंड पर डाल दिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई बालक लोलीपोप चूसता है।</p>
<p>मैंने भी उसके दोनों चुच्चों पर शहद डाल कर चूसा और उसे पागल बना दिया।</p>
<p>उसने मुझे 69 की पोजिशन में आने के लिए कहा। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी के साथ 69 किया। वो मेरे लंड को चूसने में मस्त थी और मैं उसकी चुत को।<br />
करीबन दस मिनट तक उसकी चुत चूसने के दौरान 2 बार अपना नमकीन पानी छोड़ दिया। मैं भी उसका सारा पानी पी गया।</p>
<p>मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत घोड़ी बन गई।<br />
मैं अपना लंड जैसे ही उसकी चुत में डालने लगा तो मेरा लंड फिसल कर उसकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लग गई- उइइइई मां … छोड़ दे मुझे … मर गई मैं तो … आह… बड़ा दर्द हो रहा है।<br />
भाबी ने कहा- मैंने तक आज तक अपनी गांड नहीं मरवाई है।<br />
मैंने उसे कहा- धीरे से करूंगा, अब दर्द नहीं होगा.</p>
<p>फिर मैंने धीरे-धीरे से उसकी गांड मारी। करीब दस मिनट बाद वो खुद मेरा साथ देने लग गई। थोड़ी देर की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।</p>
<p>इस तरह उस रात मैंने तीन बार भाबी की चुदाई की।<br />
मेरी चुदाई देखकर वो बहुत खुश हुई और कहा- तेरे भाई साहब से तो कुछ नहीं बनता। महीने में एक-दो बार ही करते हैं। करते ही साथ में उनका छुट जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ। आज तुमने मेरे जीवन में प्यार का रस डाल दिया जिससे मैं निहाल हो गई हूँ।<br />
इस तरह मैंने उसके साथ मजे लिए।</p>
<p>थोड़ी देर इकट्ठे लेटने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और चुपके से मैं उसके घर से निकल आया।</p>
<p>उसके बाद उसकी अपने पड़ोस में रहने वाली दो सहेलियों को भी मुझसे चुदवाया।</p>
<p>अधिक शराब पीने के कारण उसके पति को मौत हो चुकी है और उसने दोबारा किसी ओर से शादी कर ली है। अब कभी-कभार बाजार में आते-जाते मुझे मिलती है तो मैं गर्दन हिलाकर उसे नमस्कार करता हूं। उसके बाद मुझे उसकी गर्मी शांत करने का मौका नहीं मिला।</p>
<p>मेरी भाबी की चुदाई सेक्स स्टोरी कैसी लगी। मेरा इस साइट पर ये पहला अनुभव था, जिसे मैंने आप लोगों तक सांझा किया। अपने विचार मुझे आप मेल भी कर सकते हैं.<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 11:46:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
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		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का! दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ <a title="भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-chudva-kar/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत चुदवा कर बदला लिया">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपनी भाभी की चूत चुदवा कर उससे बदला लिया. मेरी गांड जलती थी उससे क्योंकि वो मेरी माँ से लड़ती थी. उसके चरित्र पर लांछन लगाती थी. तो मजा लें इस गर्म कहानी का!<br />
<span id="more-309"></span></p>
<p>दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त रूपा … वैसे तो आप मेरे बारे में सब जानते ही होने क्योंकि मेरी कुछ कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं।<br />
मगर एक बात मैंने अभी तक अपनी किसी भी कहानी में नहीं बताई कि मैं एक बहुत ही जिद्दी औरत हूँ। एक बार मेरे को खुन्नस चढ़ जाए तो फिर तो उस खुन्नस को निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ। आज मैं आपको अपनी खुन्नस की कहानी सुनाती हूँ। </p>
<p>हम तीन भाई बहन है। मैं छोटी हूँ, दोनों भाई बड़े हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई तो बाहर दूसरे शहर में रहते हैं। मगर छोटा भाई हमारे पैतृक घर में ही माँ के साथ रहता है। बाकी सब तो घर में खूब खाये पिये मोटे तगड़े हैं। मगर वो पता नहीं क्यों बहुत ही दुबला पतला सा है. और वैसे भी एक नंबर का चूतिया है, हर किसी से हर बार से डरता है।</p>
<p>बीवी उसकी बहुत सुंदर है, देखने में भी अच्छी तगड़ी है। शादी के बाद आते ही उसने भाई को अपने कब्जे में कर लिया। भाई तो बस उसका गुलाम ही बन गया।</p>
<p>जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तब मेरा और भैया भाभी का कमरा बिल्कुल मेरे साथ वाला था. रोज़ रात को मैं अपने कमरे में भाभी की सिसकारियाँ सुनती थी जब मेरा भाई कितनी कितनी देर तक मेरी भाभी की चूत को बजाता।<br />
अब पता नहीं वो उसकी चुदाई करता था या भाभी की चूत चाटता था। मगर भाभी की ‘हाय हाय’ नहीं खत्म होती थी।</p>
<p>भाभी की ‘हाय हाय’ सुन कर मेरी चूत भी पानी छोड़ देती और फिर मुझे भी अपनी गर्म चूत को ठंडा करना करने के लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ता। कभी मेरी उंगलियाँ होती, कभी कोई बाल बनाने वाला ब्रुश, कभी कोई छुपा कर रखी हुई गाजर मूली।</p>
<p>एक बात और थी कि भाभी की मेरी माँ से कभी नहीं बनी। दोनों को जब भी मौका मिलता दोनों आपस में उलझ पड़ती। भाई तो हमेशा भाभी की तरफदारी करता। माँ अकेली पड़ जाती।<br />
मगर मेरी माँ भी कम नहीं थी, उसके आगे भी घर में कोई बोल नहीं पाता था। पूरा रोआब था घर में उसका!<br />
बस यही भाभी थी, जिसने आ कर माँ की सत्ता को चुनौती दी थी।</p>
<p>फिर मेरी भी शादी हो गई, मैं अपने ससुराल आ गई। अब जैसे भाभी की सिसकारियाँ निकलती थी, अब मेरी निकलने लगीं।</p>
<p>समय बीतता गया। एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी। हमारे मोहल्ले में एक छोटा सा धार्मिक स्थल है, जिसकी देखभाल एक मौलवी जी करते हैं। वो अक्सर मोहल्ले भर के घरों में घूम घूम कर चंदा इकट्ठा करते हैं, और उस पैसे से स्थान के काम, रखरखाव करते हैं।</p>
<p>तो वो मौलवी जी हमारे घर भी अक्सर आते हैं और इसी बात का भाभी मुद्दा बनाती हैं। वो पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि मम्मी का न इस मौलवी से कोई टांका है। जब भी वो बुड्ढा आता है। मम्मी उसे बहुत प्यार से चाय बना कर पिलायेंगी, उसकी बड़ी आवभगत करेंगी।</p>
<p>पहले तो यह बात सिर्फ भाभी मेरे को मज़ाक में कहती थी। पर एक बार भाभी और मम्मी की किसी बात पर कहासुनी हो गई, तो भाभी ने खुल्लम खुल्ला ये इल्ज़ाम मम्मी पर लगा दिया कि तेरा उस मौलवी से चक्कर चल रहा है। आज भी बुढ़िया की रंगीन मिजाजी खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मम्मी तो रोने लगी। अब बेटी तो माँ का ही पक्ष लेगी। मेरे दिल में भाभी के लिए बहुत गुस्सा था।</p>
<p>उसके बाद माँ ने मुझे बताया- पता नहीं तेरा भाई इसको कहाँ से पसंद कर लाया। अब एक तो ये अपने उच्च वर्ग होने का हम पर रोआब डालती है, दूसरा सभी घर वालों को जलील करती है, तेरे बारे, मेरे बारे सब के बारे में अनर्गल अनाप शनाप बोलती है। इस कुतिया ने तो जीना हराम कर रखा है।</p>
<p>वैसे तो भाभी मुझे भी कभी कभी कुछ न कुछ सुना देती थी, मगर इस बार तो उसने मेरी माँ के दामन पर छींटे उछले थे। मुझे बहुत बुरा लगा। मेरे दिल में भी आया कि ये जो अपने उच्च वर्ग के होने पर इतना इतराती है, और दूसरे लोगों से इतनी नफरत करती है, अगर इस साल में मैंने इसे किसी विधर्मी से न चुदवाया तो मेरा भी नाम नहीं।</p>
<p>मगर अब ऐसे मैं इसे कैसे किसी ऐरे गैरे के नीचे लेटा दूँ, और वैसे भी कोई आदमी क्यों मेरी बात मानेगा। मगर मुझे इतना जरूर था कि अगर इसने मेरी माँ के दामन को दागदार किया है, तो मैंने भी इसकी शराफत को तार तार नहीं किया, तो मुझे भी चैन नहीं पड़ेगा।</p>
<p>शाम को मैं और मम्मी बाज़ार गई। हमारे मोहल्ले में ही बहुत सारी दुकानें हैं। एक दुकान है, उस्मान पठान की … वो औरतों के सामान की दुकान करते हैं। लिपस्टिक बिंदी पाउडर क्रीम, ब्रा पेंटी ये सब। तो मैं बहुत पहले से उनसे समान लेती हूँ।</p>
<p>वो अक्सर मुझ पर अपनी निगाह रखते, मुझ से कभी कभी मज़ाक भी कर लेते। मतलब ठर्की आदमी।</p>
<p>मगर दिक्कत यह कि एक तो उसका काला रंग, शक्ल कहो तो बदशक्ल … कोई खूबसूरती नहीं पठानों वाली। मगर कद 6 फीट दो इंच, चौड़ा सीना। कद काठी पूरी पठानों वाली थी। रंग रूप छोड़ दो देख कर लगे कि अगर कोई औरत इसके नीचे लेट जाए तो उसकी तो ये माँ चोद कर रख दे।</p>
<p>अब मैं तो बचपन से ही सुंदर हूँ तो जब पहले भी कभी उनकी दुकान से ब्रा पेंटी लेने जाती तो वो मेरी ब्रा और पेंटी पर हाथ फेर कर मुझे देते, जैसे सोच रहे हों, इस ब्रा और पेंटी जिन पर मैं आज हाथ फेर रहा हूँ, कल ये तेरे गोल गोल मम्मो और फुद्दी से लिपटे होंगे।</p>
<p>खैर … ऐसा तो वो सबके साथ करते होंगे।<br />
मगर मुझ पर वो कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थे।</p>
<p>तो जब भाभी ने मेरी माँ पर गंदा इल्ज़ाम लगाया तो मेरी तो गांड जल गई। मैं सोचने लगी कि कुछ ऐसा करूँ कि भाभी कभी भी मेरे सामने सर न उठा सके, ऐसा जलील करूँ कि साली हमेशा के लिए इसकी नज़र नीची हो जाए।<br />
मगर ऐसा क्या करूँ?</p>
<p>एक दिन मैं वैसे ही घर में अकेली थी, बैठी बैठी बोर हो रही थी कि खामख्वाह मेरा हाथ मेरे मम्मों से फिसलते हुये मेरी सलवार में घुस गया।<br />
अब हाथ सलवार में घुसा तो सीधा मेरी फुद्दी पर जा कर रुका, फुद्दी को थोड़ा सहलाया, तो मन बहकने लगा, एक उंगली फुद्दी के अंदर ही घुस गई।</p>
<p>बस फिर क्या था, मैंने अपने सलवार का नाड़ा खोला और लगी उंगली की फुद्दी के अंदर बाहर करने। करते करते सोचने लगी कि आज किस से चुदवाऊँ। तो वैसे ही मन में उस्मान भाई का विचार आया … लंबा चौड़ा, ताकतवर! बस उसको सोच कर मैं हस्तमैथुन करने लगी।</p>
<p>सच में बड़ा मज़ा आया सोच कर के वो कैसी बेदर्दी से मुझे चोद गया। जब मेरी चूत का पानी निकल गया और मैं ठंडी हो कर लेट गई तो वैसे ही ख्याल आया कि अगर ये उस्मान मेरी भाभी की फुद्दी मारे तो एक तो वो जो इन लोगों को नफरत करती है, उसका वो मुंह बंद हो जाए, दूसरा अगर भाभी की चूत मेरे सामने चुदे तो मेरे सामने ज़ुबान खोलने लायक नहीं रहेगी और तीसरा जो उसने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया है, उसका भी बदला मिल जाएगा मुझे।</p>
<p>मगर सबसे बड़ी दिक्कत, उस्मान मेरी भाभी की चूत को क्यों चोदेगा, वो भी मेरे कहने पर। भाभी तो उसे पसंद भी नहीं करती तो फिर वो उसको क्यों पास आने देगी।<br />
बड़ी मुश्किल थी।</p>
<p>फिर दिमाग में एक आइडिया आया कि अगर मैं उस्मान से सेट हो जाऊँ, तो एक तो वो मेरी फुद्दी भी ठंडी करेगा, और अगर मैं उस से कहूँ कि वो मेरी भाभी को पटा ले किसी भी तरह, तो शायद ये बात बन सकती है।<br />
बेशक यह बहुत ही मुश्किल, काम था, अगर भाभी न पटी तो मेरी तो पक्का फटी क्योंकि उस्मान मुझे छोड़ेगा थोड़े, वो तो कहेगा, तुमने कहा, था भाभी को पटा कर चोद दो, वो तो नहीं पटी, पर तू तो आ मेरे नीचे।<br />
मगर कोशिश तो करनी चाहिए।</p>
<p>इस लिए मैंने सबसे पहले उसमान को लाइन देनी शुरू की। मैं अक्सर किसी न किसी छोटे मोटे सामान के बहाने उसकी दुकान पर जाती, वो मुझपे अपनी ठर्क मिटाता और मैं हंस हंस कर उसकी बातों के जवाब देती।</p>
<p>कुछ ही दिन में बात मज़ाक से छूने तक आ गई. वो मेरे हाथ बाजू कंधे को छू लेता, तो मैं ऐसे रिएक्ट करती, जैसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p>तो बस एक दिन हिम्मत करके उस्मान में बातों बातों में मेरे मम्मों को भी छू लिया। छू क्या लिया … ब्रा दिखाते वक़्त उसने ब्रा मेरे मम्मों पर रखी और पूरी फिटिंग करके दिखाई. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।</p>
<p>मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।</p>
<p>मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।</p>
<p>मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.<br />
मैं जान बूझ कर ड्रामा करती रही- रहने दो भाई, कोई देख लेगा, जाने दो, कोई आ जाएगा.</p>
<p>मगर इन कमजोर दलीलों का उस पर क्या असर … उसने दो नींबू की तरह मेरे दोनों मम्मे निचोड़ दिये और मेरी गांड फुद्दी हर जगह हाथ फिरा दिया और बोला- अब सब्र नहीं होता मेरी जान, किसी दिन मिल मुझे तुझे जन्नत की सैर करवाऊँगा।<br />
मुझे पता था कि मुझे चोदने का जुगाड़ कर रहा है ये!</p>
<p>तो मैंने कहा- ऐसे नहीं मुझे आपसे एक और काम भी करवाना है।<br />
वो बोला- क्या काम?<br />
मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि अगर आप मेरी भाभी की चूत को पहले ठोक दो, तो मैं तो आपको फ्री में सब कुछ दे दूँगी.<br />
वो बोला- तेरी भाभी? उससे तेरी क्या दुश्मनी है जो तू उसको मुझसे चुदवाना चाहती है?</p>
<p>मैंने कहा- है बस … आप बोलो आप क्या ये कर सकते हो?<br />
वो बोला- पक्का तो नहीं, पर कोशिश कर सकता हूँ। लगता तो है जैसे उसे भी कुछ चाहिए, मगर अगर वो मान गई तो!<br />
मैंने कहा- वो मान गई तो मैं भी मान गई।<br />
वो बोला- तो अभी के लिए कुछ और भी कर जाओ।<br />
मैंने कहा- और क्या इतना तो नोच लिए मुझे।</p>
<p>उसने अपने पाजामे में अपना लंड हिलाते हुये कहा- इसका कोई इंतजाम कर जाओ।<br />
मैंने दुकान के बाहर देखा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके पाजामे के ऊपर से उसका लंड पकड़ा और दबाने लगी। मोटा सा लंड मेरे थोड़ा सा दबाने से ही खड़ा हो गया। मगर जब मैं छोड़ने लगी, तो उस्मान ने मुझे पकड़ लिया।<br />
मैंने कहा- मुझे जाने दो।<br />
वो बोला- एक मिनट बस।</p>
<p>कहकर उसने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और अपना लंड निकाल कर मेरी तरफ किया और मुझे नीचे को दबाने लगा। मैं समझ गई कि साला लंड के चुप्पे लगवाना चाहता है।<br />
मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और 5-7 बार ज़ोर ज़ोर से चूस लिया और बस फिर तो मैं छोड़ कर भागी।</p>
<p>इससे उसको भी एतबार हो गया कि मैं उससे पट गई, और मुझे भी कि अब ये पक्का मेरी भाभी को पटायेगा।</p>
<p>वक़्त गुज़रता गया, करीब तीन महीने बाद एक बार मैं जब उस्मान की दुकान पर गई, तब वो बोला- सुन … जांघों पर तेल मल ले अपनी!<br />
मैंने पूछा- क्यों?</p>
<p>तो उसने अपने मोबाइल में कुछ पिक्स दिखाई, जिसमें मेरी भाभी उस्मान के साथ किस कर रही थी, उसको बांहों में भर रही थी।<br />
मैंने कहा- उस्मान भाई, बस अब एक काम करो, मेरी भाभी की चूत को मेरे सामने ठोकना, उसके बाद जब कहोगे मैं तुम्हारी।<br />
वो बोला- दिक्कत क्या है, दोनों ननद भाभी को एक साथ ठोक दूँगा, तू बता पहले तू चुदेगी, या तेरी भाभी?<br />
मैंने कहा- पहले भाभी … वो भी मेरे सामने, उसके बाद मैं अपनी पूरी एक रात तुमको दूँगी। उस रात अपनी सुहागरात होगी।</p>
<p>अब एक खूबसूरत नौजवान लड़की किसी को ऐसी पेशकश करे तो भला कौन टाल सकता है।</p>
<p>फिर एक दिन उस्मान ने कहा- कल तेरा भाई बाहर जा रहा है, कल मैं तेरे घर आऊँगा, तेरी भाभी की चूत चोदने! तू बता, तू कल चुदेगी, या बाद में?<br />
मैंने कहा- पूरी रात दूँगी आपको उस्मान भाई, बस मेरी भाभी की माँ बहन एक कर देना, उसको खूब गाली देना, मारना, तड़पाना, जलील करना। बस यही ख़्वाहिश है मेरी!<br />
वो मान गया।</p>
<p>अगले दिन करीब 12 बजे वो आया, तब मैं अपनी माँ के साथ किसी काम से बाज़ार चली गई।<br />
भाभी अकेली थी घर पर!</p>
<p>मगर मैं माँ को उनकी एक सहेली के घर बैठा कर, यह कह कर कि ‘आप बात करो, मैं आधे घंटे में आई।’ वापिस अपने घर आ गई।</p>
<h2>चुद गयी भाभी की चूत</h2>
<p>घर आई तो भाभी के कमरे का दरवाजा बंद था। मतलब उस्मान अंदर था।</p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की सिसकारियाँ सुनाई देने लगी।</p>
<p>मैंने भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से उस्मान ने ही दरवाजा खोला और मुझे अंदर ही खींच लिया।<br />
मैंने जब अंदर देखा, भाभी बेड पर बैठी थी, शायद बिल्कुल नंगी थी क्योंकि बेड से नीचे मैंने उसकी साड़ी, ब्रा और पेटीकोट गिरा पड़ा देखा, उस्मान भी बिल्कुल नंगा था।<br />
काला बदन, मगर बेहद खतरनाक, जैसे कोई जल्लाद हो, लंबा चौड़ा और भयावह।<br />
और उससे भी खतरनाक उसका लंड, जैसे कोई काला नाग हो।</p>
<p>भाभी मुझे देख कर चौंकी- रूपा … तुम तुम कहाँ से आ गई?<br />
शायद वो मेरे सामने अपना ये राज़ नहीं खोलना चाहती थी।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे चिंता मत कर मेरी जान … तेरे बाद उसकी भोंसड़ी भी लेनी है मुझे।<br />
भाभी थोड़ हैरान हो कर बोली- रूपा तू भी?<br />
मैं मुस्कुरा दी- बस क्या बताऊँ भाभी … पता नहीं इनकी बातों में क्या जादू था, मैं खुद को रोक ही नहीं पाई। और जब इन्होंने आपका बताया तो मैंने कहा कि ‘भाभी बड़ी हैं पहले उसको … फिर मुझको।’</p>
<p>भाभी के चेहरे पर एक विश्वास की चमक आ गई कि अगर मैं इसके सामने नंगी हुई हूँ, तो ये भी तो इस पठान से चुदवाएगी।<br />
मैंने भाभी को विश्वास में लेने के लिए अपनी सलवार उतार दी और सामने सोफ़े पर ही बैठ गई।</p>
<p>उस्मान भाभी के पास गया और उसने भाभी के जिस्म से चादर खींच कर उसे नंगी कर दिया।<br />
क्या शानदार जिस्म की मल्लिका है भाभी मेरी … गोरा, बेदाग चिकना जिस्म।<br />
दो बच्चों की माँ … मगर किसी भी मर्द का ईमान बिगाड़ दे, ऐसी सुंदरता।</p>
<p>मगर अब वो किसी इंसान के सामने नहीं … बल्कि एक वहशी के सामने नंगी लेटी थी।</p>
<p>उस्मान सीधा उसके ऊपर जा कर लेट गया और लेटते ही उसने भाभी की दोनों टाँगें खोली, और अपना काला भुसंड लौड़ा भाभी की गुलाबी फुद्दी में घुसेड़ दिया।</p>
<p>भाभी इस अकस्मात हमले के लिए तैयार नहीं थी, शायद वो उस्मान से पहले कुछ प्रेमालाप की उम्मीद लगाए बैठी थी. मगर जब उसने अपना लंड भाभी की फुद्दी में डाला, भाभी की तो चीख ही निकाल गई- अरे … आह उस्मान भाई धीरे!<br />
मगर उसे तो जैसे कोई जन्नत की हूर मिल गई हो और वो उसे जल्द से जल्द चोद कर अपनी हवस मिटा लेना चाहता था।</p>
<p>बस दो चार घस्सों में ही उसने अपना लौड़ा भाभी की चूत में घुसा दिया। मोटा, लंबा और खुरदुरा लंड लेकर भाभी खुश थी।<br />
“उस्मान तेरा औज़ार तो बहुत तगड़ा है.” वो बोली।<br />
उस्मान बोला- क्यों तेरे खसम का छोटा है क्या?<br />
भाभी बोली- छोटा भी, पतला भी, और कमजोर भी। तू तो बहुत दमदार है रे!</p>
<p>उस्मान के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी। बोला- साली अभी तूने मेरा दम देखा कहाँ है, अभी तो सिर्फ पठान का लौड़ा देखा है, जब मैं अपनी आई पे आऊँगा, तब देखना तेरी माँ न चोद कर रख दी, तो कहना!<br />
और वो भाभी के फुद्दी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.</p>
<p>तो मोटे लंड की रगड़ से भाभी भी मस्ती में आ गई और वो लगी सिसकारियाँ भरने। वही सिसकारियाँ जो वो मेरे भाई के साथ सेक्स करते हुये भरती थी।<br />
और अपने सामने प्रत्यक्ष चुदाई होते देख कर मेरी फुद्दी भी पानी पानी होने लगी और मैंने भी अपनी टाँगें खोल कर उनको देखते हुये अपनी फुद्दी में उंगली करना शुरू कर दिया।</p>
<p>उस्मान मेरी और देख कर बोला- अरे तू क्यों उंगली कर रही है मादरचोद। इधर आ … और देख पठान का लौड़ा, तेरी चूत का भोंसड़ा न बना दूँ तो कहना, इधर आ।</p>
<p>मैं उठ कर उनके पास ही बेड पर बैठ गई तो उस्मान ने मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी जांघें और मेरी फुद्दी नंगी कर दी। मेरी हल्की हल्की झांट पर हाथ फेर कर बोला- अपनी कमीज़ उतार! मैंने अपनी कमीज़ उतार दी, अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी।</p>
<p>उस्मान मेरे मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- क्या मुलायम माल है साली, जैसी माँ मलाई, वैसी बेटी मक्खन!<br />
भाभी तो एकदम से बोली- तो क्या उस्मान … तूने मम्मी जी को भी चोदा है?<br />
शायद वो जानना चाहती थी कि कहीं मेरी मम्मी का कोई कारनामा पता चले ताकि कल को वो उस बात को मेरी माँ के खिलाफ इस्तेमाल कर सके।</p>
<p>मगर उस्मान बोला- अरे नहीं, मैंने इसकी माँ नहीं चोदी, पर जब भी देखता हूँ, तो सोचता हूँ कि बुढ़िया इस उम्र में इतनी हसीन है, तो जवानी क्या कयामत रही होगी। हाँ अगर मौका मिले तो मैं तो साली बुड्ढी को आज भी चोद दूँ।</p>
<p>मैंने उस्मान से कहा- पहले जिसको चोद रहे हो, उसको तो चोद लो।<br />
उस्मान बोला- अरे ये अब कहाँ जाएगी, आज के बाद अगर ये अपने पति के पास भी चली जाए तो मेरा नाम बादल देना।</p>
<p>भाभी बोली- अच्छाजी, ऐसी क्या बात है तुम में?<br />
उस्मान बोला- तो ले साली छिनाल, अब देख, तेरी चीखें तेरी माँ को न सुना दी तो कहना।</p>
<p>उसके बाद उस्मान ने भाभी की चूत को खूब पेला, इतनी ज़ोर से पेला कि भाभी का चीख चीख कर गला भर आया, उसकी आँखों से आँसू बह निकले- उस्मान, नहीं धीरे धीरे उस्मान, नहीं, उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई मैं मेरी माँ … नहीं उस्मान धीरे … आह … बस रुक कमीने साले … बस आह।</p>
<p>मगर एक कमजोर औरत जिसको हट्टे कट्टे उस्मान ने अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि भाभी तो हिल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ रो रही थी, चीख चिल्ला रही थी।<br />
उस्मान तो सच में बड़ी बेदर्दी से मेरी भाभी को चोद रहा था।<br />
मुझे तो उसे देख कर अपना डर लगने लगा कि जब ये मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरा क्या हाल करेगा। </p>
<p>जितना भाभी चीख रही थी, उस्मान को उतना ही मज़ा आ रहा था और वो भी उसे उतना ही और तकलीफ दे रहा था- चीख, भैन की लौड़ी, तेरी माँ को चोदूँ, साली कुतिया की औलाद, चीख और शोर मचा, साली कैसे रंडी की तरह ड्रामा करती है, किसने सिखाया इस तरह चीखना, तेरी माँ ने या तेरी बहन ने। साली वो भी क्या ऐसी ही रंडियाँ हैं तेरी तरह? बुला उनको भी … यहीं इसी बिस्तर पर तेरे सामने तेरी माँ चोदूँगा, कुतिया, साली … तेरी बहन की भी इसी बिस्तर पर गांड के चीथड़े उड़ा दूँगा। और ये तेरी ननद, इसकी फुद्दी का फूल भी मैं ही खिलाऊँगा।</p>
<p>और पता नहीं क्या क्या उस्मान भाभी को और उसे खानदान की सब औरतों की गालियां देता रहा।</p>
<p>मगर जैसे उसने भाभी को शिकंजे में कस कर उसकी चुदाई कर रहा था, उसे देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।<br />
मैं भी उनके बिल्कुल पास भाभी की चूत चुदाई देख कर अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी। पांच मिनट में मेरी तो फुद्दी पानी छोड़ गई मगर उस्मान नहीं रुका।</p>
<p>भाभी ने भी थोड़ी देर बाद कह दिया- उस्मान भाई, मेरा हो गया, बस तू भी अपना पानी गिरा दे।<br />
मगर उस्मान बोला- अरे रंडी की औलाद, अभी तो मैं शुरू ही किया है, अभी तेरी माँ कहाँ चुदी है, अभी देख तो तेरी फुद्दी अभी भी सफ़ेद पड़ी है, इसे लाल तो होने दे।</p>
<p>कुछ देर और बैठी मैं उसकी चुदाई देखती रही मगर फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।<br />
उस्मान बोला- अरे तू क्यों कपड़े पहनने लगी?<br />
मैंने कहा- मम्मी को लेने जाना है।<br />
वो बोला- अरे यार ये क्या बात हुई? अभी तो इस कुतिया को चोदने में मज़ा आने लगा था।</p>
<p>मगर मैं चली आई। बाद में शायद उस्मान भी चला गया होगा।<br />
जब मैं मम्मी को लेकर घर आई तो घर पर भाभी ही अकेली थी. मगर उसकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उसकी तसल्ली से पिटाई की हो।</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ, आपकी तो बड़ी हालात खराब लग रही है?<br />
वो बोली- अरे पूछा मत, कहाँ पंगा ले लिया मैंने। तेरे जाने के बाद, साले ने मेरी पिटाई भी करी, और मैंने गुस्सा किया, तो साले ने ज़बरदस्ती पीछे गांड में डाल दिया। इतना दर्द हो रहा है न नीचे, क्या बताऊँ।</p>
<p>बेशक मैं भाभी के साथ उसका दुख सांझा कर रही थी, मगर अंदर ही अंदर मैं खुश थी कि साली तूने मेरी माँ पर इल्ज़ाम लगाया था, देखा उसका नतीजा, गांड फाड़ कर रख दी तेरी।</p>
<p>फिलहाल इतना ही बाकी फिर कभी।<br />
कैसी लगी मेरी भाभी की चूत की चुदाई स्टोरी?<br />
[email protected]</p>
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		<title>भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड <a title="भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chut-mayke-me/" aria-label="Continue reading भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.</p>
<p>यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.</p>
<p>भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया. </p>
<p>मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.<br />
मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.</p>
<p>मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.<br />
हम दोनों में बातें होने लगी.</p>
<p>मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.</p>
<p>भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.</p>
<p>फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.</p>
<p>हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है. </p>
<p>उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.<br />
मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.</p>
<p>तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.<br />
मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.</p>
<p>फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.</p>
<p>भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.</p>
<p>मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.</p>
<p>तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा. </p>
<p>फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.</p>
<p>लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.</p>
<p>वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.</p>
<p>ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. </p>
<p>जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया. </p>
<p>मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.</p>
<p>कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.</p>
<p>फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया. </p>
<p>मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.<br />
उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया. </p>
<p>भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.<br />
धीमी चुदाई शुरू हो गई. </p>
<p>भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था. </p>
<p>कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.<br />
उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.<br />
उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.<br />
भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है. </p>
<p>भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.</p>
<p>भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली. </p>
<p>फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया. </p>
<p>मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.<br />
वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?<br />
भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है. </p>
<p>मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.</p>
<p>दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं. </p>
<p>गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.</p>
<p>काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.</p>
<p>मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की. </p>
<p>भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.</p>
<p>उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है. </p>
<p>फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.</p>
<p>मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा. </p>
<p>जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.</p>
<p>सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.</p>
<p>वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.</p>
<p>अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी. </p>
<p>तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी. मुझे आप लोग मैसेज करके बताना ताकि मैं आप लोगों के मैसेज से प्रेरित होकर आगे भी आपके लिए अपनी कहानी लेकर आऊं.<br />
आपका योगू<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/mastani-figure-bhabhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:22:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्ते अन्तर्वासना के सभी दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी भाभी की चुदाई की है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा. मेरा नाम विशाल शर्मा है. मैं राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला लड़का हूँ. मैं देखने में अच्छा खासा हूँ और मेरे लंड का आकार 8 इंच है. मुझे अन्तर्वासना की <a title="मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/mastani-figure-bhabhi/" aria-label="Continue reading मस्तानी फिगर वाली भाभी की चूत चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्ते अन्तर्वासना के सभी दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी भाभी की चुदाई की है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा.</p>
<p>मेरा नाम विशाल शर्मा है. मैं राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला लड़का हूँ. मैं देखने में अच्छा खासा हूँ और मेरे लंड का आकार 8 इंच है. मुझे अन्तर्वासना की कहानियां पढ़कर बहुत मजा आता है. </p>
<p>यह मेरी पहली कहानी है, इसलिए कोई गलती दिखे, तो प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा.</p>
<p>बात उस समय की है, जब मैं करीब 19 साल का था. उस टाइम हमारे पड़ोस में एक मस्त भाभी रहती थीं. उनका नाम आशा था. उनका पति जॉब करता था, जो सुबह जाता और सीधे रात को ही वापस आता था. मस्तानी भाभी की उम्र लगभग 30 साल की थी और उनका फिगर बड़ा ही मस्त था. भाभी के बूब्स 36 इंच के थे, कमर 30 की थी और उनकी गांड तो इतनी बाहर को निकली हुई थी कि जो भी भाभी को एक बार देख भर ले, उसका लंड तुरंत खड़ा हो जाए. </p>
<p>मैं जब भी भाभी को देखता, तो उनके नाम की मुठ जरूर मारता था. मेरे और भाभी के बीच बहुत बनती थी. वो अक्सर मुझे कुछ न कुछ काम के लिए बोलती रहती थीं. </p>
<p>एक दिन की बात है, उन्होंने मुझसे बोला- विशाल भैया, मुझे मार्किट जाना है क्या आप मुझे ले चलोगे?<br />
मैं बोला- हां क्यों नहीं भाभी … चलो.<br />
फिर उन्होंने बोला- रुको, मैं 5 मिनट में तैयार होकर आती हूँ. </p>
<p>फिर 5 मिनट बाद उन्होंने मुझे आवाज दी- चलो मैं रेडी हूँ.<br />
मैंने सोचा ‘भाभी आप तो आज रेडी हो, मगर मैं तो कबसे आपको चोदने के लिए रेडी हूँ.’</p>
<p>यह सोचता हुआ मैं बाहर आ गया और भाभी को देखने लगा. भाभी बड़ी मस्त लग रही थीं. मुझे यूं घूरता हुआ देख कर भाभी बोलीं- क्या हुआ … ऐसे क्या देख रहे हो … मुझमें कोई कमी दिख रही है क्या?<br />
मैंने पलट कर जवाब दिया- भाभी आप में कोई कमी ही तो नहीं दिख रही है, यही तो समस्या है.<br />
मुझे फ्लर्ट करते देख कर भाभी हंस दीं और बोलीं- अब ये मसखरी छोड़ो और जल्दी चलो. वापस भी आना है.</p>
<p>भाभी मेरे करीब आई और मैंने उनको अपने पीछे बैठने का इशारा किया. भाभी गांड उचका कर सीट पर बैठ गईं. जैसे ही भाभी बैठीं, तो उन्होंने मेरे कंधे का सहारा लिया और बैठते समय उनका शरीर मेरी पीठ से रगड़ गया. मुझे इतने में ही तरन्नुम आ गई थी.</p>
<p>मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. हम बाइक पे चल दिए. बाजार जाकर भाभी ने कुछ सामान लिया और एक शॉप से उन्होंने अपने बेटे के लिए चॉकलेट ले ली. फिर हम घर की ओर चल दिए.<br />
आधे रास्ते में पहुंचने पर भाभी ने मुझसे एक सवाल पूछा- विशाल, आपकी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?<br />
मैंने बोला- भाभी आप ये क्या पूछ रही हो?<br />
भाभी ने बोला- शर्माने की कोई बात नहीं … आप मुझे बता सकते हो.<br />
मैं मना किया कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.</p>
<p>भाभी बोलीं- क्यों नहीं है. कोई मिली नहीं क्या?<br />
मैंने कहा- हां आप ऐसा ही समझ लो कि अभी तक मन की कोई मिली ही नहीं.<br />
भाभी बोलीं- कैसी चाहिए?<br />
मैं बोला- भाभी आप जैसी चाहिए … मुझे अभी तक आप जैसी कोई मिली ही नहीं. </p>
<p>इस पर भाभी ने बोला कि मुझमें ऐसा क्या ख़ास है?<br />
मैं बोला- भाभी सब कुछ तो ख़ास है आपमें … सच में भैया बहुत किस्मत वाले हैं, जो उनको आप जैसी वाइफ मिली है.<br />
फिर भाभी बोलीं- अच्छा जी … पर मुझे पहले ये तो बताओ कि आपको मुझमें ऐसा क्या ख़ास दिखा है … ये बताओगे जरा?<br />
मैं बोला- छोड़ो भाभी. </p>
<p>भाभी ने जिद करते हुए कहा- बताओ ना यार?<br />
मैंने बोला- आपका फिगर … आपका फेस सब कुछ मस्त है.<br />
उन्होंने बोला- अच्छा आपको मेरा फिगर मस्त लगता है.<br />
ये कहते हुए भाभी हंस दीं. </p>
<p>अब तक हम दोनों घर पहुंच गए थे. फिर उन्होंने बोला- चलो … जरा मेरा सामान अन्दर रखवा दो. </p>
<p>मैं सामान अन्दर रखने गया. सामान रख कर मैं वापस निकल रहा था, तो भाभी ने बोला- लो चॉकलेट तो खा लो.<br />
मैंने बोला- ओके भाभी, लाओ दे दो.<br />
फिर मैं बोला- भाभी, आप भी तो खा लो. </p>
<p>तो वो मेरे पास को आईं. भाभी ने चॉकलेट मेरे मुँह में रख कर अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर चॉकलेट खाने लगीं. उनके ऐसा करते ही मेरी तो सांस ही रुक गयी. मैं हतप्रभ था, लेकिन बस चुपचाप उनका साथ दिए जा रहा था. भाभी के गर्म होंठों से मुझे भी बहुत गर्मी चढ़ने लगी. </p>
<p>फिर 5 मिनट बाद मैं भी उनको किस करने लगा. उसके बाद उन्होंने मेरा हाथ ले कर अपने मम्मों पर रखा और ब्लाउज के ऊपर से ही दूध दबवाने लगीं. </p>
<p>कोई दस मिनट तक ऐसा ही चला, फिर भाभी की चूत चुदाई के लिए बेचैन होने लगी तो वो मुझसे अलग होते हुए बोलीं- चलो, रूम में चलते हैं.</p>
<p>मैं भाभी के साथ उनके बेडरूम में आ गया. रूम में जाते ही मैंने रूम का गेट बंद किया और उनको किस करने लगा. फिर मैंने उनकी साड़ी उतार दी और ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियों को दबाने लगा.</p>
<p>कुछ मिनट तक ऐसे ही करने के बाद मैंने भाभी का ब्लाउज और पेटीकोट खोल दिया. अब भाभी सिर्फ पिंक ब्रा और पैंटी में मेरे सामने रह गई थीं.<br />
मैंने भाभी को बिस्तर पर लेटा दिया और उनके ऊपर आ गया. मैं उनको किस करते करते उनके बूब्स दबाने में लग गया. अब तक भाभी भी चुदास से भर गई थीं. वे बिस्तर से उठीं और उन्होंने अपनी ब्रा और पेंटी खोल कर फेंक दी.</p>
<p>इसके बाद भाभी ने मेरे भी सारे कपड़े खोल दिए. पूरी तरह से हम दोनों नंगे हो चुके थे. मेरा लंड छत की तरफ मुँह उठाए खड़ा था.</p>
<p>भाभी बेड पर लेट कर बोलीं- आजा मेरे राजा … खा जा मेरी इस जवानी को.<br />
बस इतना सुनते ही मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूचियों को दबाने और चूसने में लग गया. </p>
<p>भाभी मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोल रही थीं- आह चूस लो मेरे राजा … खा जा इनको … आह और चूस. </p>
<p>फिर मैं थोड़ा नीचे आकर उनके पेट पर किस करते हुए उनकी चूत तक पहुंच गया. पहले तो मैंने उनकी चूत के ऊपर किस किया और फिर उसके आस पास किस किया.<br />
उतने में भाभी सिसकारियां लेते हुए बोलीं- विशाल अब इतना मत तड़पाओ … चूस लो … खा जाओ मेरे चूत को … ये मुझे बहुत परेशान करती है … साली को लंड ही नहीं मिलता.</p>
<p>मैं ये सुनकर थोड़ा चौंका, फिर मैंने भाभी की चूत पे मुँह रख दिया. भाभी की चुत पहले से ही गीली हो चुकी थी. </p>
<p>मैंने जैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत पर लगाई, उन्होंने मेरा सर चूत में घुसा दिया. मैं भी उनकी चूत चाटने लगा.<br />
भाभी मादक सिसकारियां लेते हुए बोल रही थीं- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … हां ऐसे ही चूसो … आह और तेज … हां खा जाओ इसको हां और तेज..</p>
<p>वो मेरा सर जोर से अन्दर डालने लगीं. फिर वो झड़ गईं और मैं उनकी चूत का सारा पानी पी गया. क्या मस्त टेस्ट था यार मजा आ गया. </p>
<p>फिर भाभी खड़ी हुईं और मुझे बेड पर धक्का दे कर खुद घुटनों पर बैठ गईं. अब वो मेरा लंड चूसने लगीं. भाभी लंड चूसते हुए बोल रही थीं- क्या मस्त लंड है तेरा विशाल … तेरे भैया का तो इसका आधा भी नहीं है … उनको चुदाई में मन ही नहीं लगता है, आज तो तू मेरी चूत फाड़ ही देगा.</p>
<p>बस भाभी लंड चूसने में मस्ती से लग गईं. भाभी मेरे लंड को ऐसे चूस रही थीं, जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप चूसता है. </p>
<p>कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनके पैरों को फैला दिया. मैंने लंड को हिलाया और उनकी टांगों के बीच में आकर उनकी चूत पर रगड़ने लगा. </p>
<p>मेरी मस्तानी भाभी तो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी थीं. वे सिसकारियां लेते हुए बोलीं- मेरे राजा और मत तड़पा अपनी भाभी को … जल्दी से डाल दो अपना लंड … अपनी भाभी की चूत के अन्दर पेल दे.</p>
<p>मैंने भी भाभी को ज्यादा तड़पाना ठीक न समझा और बस लंड को उनकी चूत के छेद पर रख कर एक धक्का लगा दिया. इस पहले ही तगड़े धक्के से मेरा आधा लंड भाभी की चूत में अन्दर घुस गया. तभी भाभी की जोर से चीख निकल गयी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह …<br />
भाभी दर्द से तड़फते हुए बोलीं- आह विशाल … बहुत मोटा है… मर गई … इसे जल्दी से बाहर निकालो … आह इसको निकालो. </p>
<p>मैं भाभी के ऊपर पूरी तरह से छा गया और उनको किस करने लगा. उनके मम्मों को दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हुआ, तो मैंने एक और जोरदार धक्का दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया. </p>
<p>फिर मैं कुछ देर भाभी के ऊपर लेटा रहा. भाभी के सामान्य होने के बाद मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए. अब भाभी भी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं और बोल रही थीं- आह और जोर चोद मुझको … हां ऐसे ही … तेरा लंड मेरी चूत की पूरी खुदाई कर रहा है … आह.</p>
<p>यह सिलसिला 30 मिनट तक चला. उसके बाद मैंने बोला- भाभी मेरा आने वाला है, कहां निकालूं?<br />
भाभी बोलीं- मेरी चूत में ही झड़ जा, ये बहुत दिन से सूखी है.</p>
<p>फिर 5-6 धक्कों के बाद मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर लेट गया.</p>
<p>इसके बाद भाभी की चूत मुझे हमेशा ही चोदने के लिए मिलने लगी. कुछ दिनों बाद उनकी गांड मारने की ख्वाहिश भी जोर मारने लगी. मैंने भाभी की गांड कैसे मारी, वो मैं अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.</p>
<p>आपको मेरी मस्तानी भाभी की चुदाई की सेक्स स्टोरी पसन्द आई या नहीं … प्लीज़ मुझे मेल जरूर करना.<br />
धन्यवाद.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chuchi-gand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:25:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Real Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरे प्रिय दोस्तो, मेरा नाम अजय है, मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड बहुत मस्त है, इसकी तारीफ़ मैं नहीं इसका शिकार हुई लौंडियों और भाभियों ने की है. ये मेरी और मेरी एक मदमस्त भाभी की चुदाई की कहानी है. मैं आपको कहानी विस्तार से बताता हूं. मेरा स्कूल खत्म हो चुका <a title="भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-ki-chuchi-gand/" aria-label="Continue reading भाभी के चूचों और गांड का दीवाना बना">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे प्रिय दोस्तो, मेरा नाम अजय है, मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड बहुत मस्त है, इसकी तारीफ़ मैं नहीं इसका शिकार हुई लौंडियों और भाभियों ने की है. ये मेरी और मेरी एक मदमस्त भाभी की चुदाई की कहानी है.</p>
<p>मैं आपको कहानी विस्तार से बताता हूं. मेरा स्कूल खत्म हो चुका था, अब मुझे कॉलेज जाना था. इस वजह से मुझे दूर शहर में भेज दिया गया. मेरी पड़ोस की एक आंटी की बहू और बेटा वहां रहते थे. पापा ने मुझे उनका पता आदि देकर मुझे भेज दिया.</p>
<p>मैं जब वहां गया और उनके घर जाकर मैंने उनका दरवाजा खटखटाया, तो भाभी ने दरवाजा खोला. मैं तो बस भाभी को देखता ही रह गया. उफ्फ्फ क्या मादक जिस्म था. खुले काले लंबे बाल, गोरे गाल, लाल होंठ, बड़े बड़े दूध … सपाट पेट, चौड़ी गांड. मैं तो मदहोश हो गया था.</p>
<p>तभी भाभी ने प्यारी सी आवाज़ में कहा- अरे अजय … तुम आ गए मम्मी जी का फ़ोन आया था कि अजय आ रहा है.<br />
मैं- हां भाभी, मैं आ गया.<br />
भाभी- चलो अन्दर आ जाओ.</p>
<p>यह कह कर भाभी मुड़ीं, तो मुझे उनकी गांड देखी … उफ्फ्फ हिलती हुई गांड बड़ी मस्त लग रही थी. उनके दोनों चूतड़ जब थिरक रहे थे, तो ऐसा लग रहा था … मानो एक दूसरे से बातें कर रहे हों. उनके दोनों चूतड़ों के बीच में छुपा हुआ मज़े से भरा हुआ गांड का छेद कैसा होगा … मैं तो बस इस कल्पना को लेकर सोचता ही रह गया. मैं उनके लावण्यमयी शरीर की मदहोशी में सोफे पर जाकर बैठ गया. </p>
<p>भाभी मेरे लिए पानी लाईं. फिर भाभी बैठ कर मुझसे बातें करने लगीं. भाभी ने बताया कि भैया तो ऑफिस के काम से दस दिन के लिए टूर पर गए हैं, मैं अकेली ही घर में हूँ. उनकी इस बात को सुनते ही मेरे दिल में भाभी को चोदने का ख्याल आने लगा.</p>
<p>इससे पहले मैं आगे बढूं, पहले आप सभी को भाभी के बारे में बता दूँ कि भाभी का फिगर 38-34-36 का है और उनकी उम्र 35 साल की है. भाभी इतनी सेक्सी दिखती हैं कि उनको जो भी बंदा एक बार देख ले, बस वो उसी पल से भाभी को अपने बिस्तर की रानी बनाने की सोचने लगेगा. </p>
<p>चूंकि पिता जी का फोन आ चुका था कि मुझे भाभी भैया के घर ही रहना है, तो भाभी ने मुझे मेरा कमरा दिखा दिया. मैंने अपना सामान रूम में सैट कर दिया और भाभी के साथ बातें करता रहा. </p>
<p>रात में भाभी ने खाना लगाया, तो मैं टेबल पर बैठा था. इस वक्त भाभी ने एक नीले रंग की झीनी सी नाइटी डाली हुई थी, जिसमें से उनका गोरा बदन चमक रहा था. नाइटी जरा चुस्त थी, तो भाभी के मोटे चुचे मानो जैसे अभी बाहर फट पड़ेंगे … ऐसा साफ़ दिख रहा था.</p>
<p>नाइटी में चूचों के निप्पलों के ऊपर वाली जगह में एक स्टार जैसा कुछ चमकदार नग सा लगा था, जोकि उनके चूचों को और भी पूरा दिखाते हुए भी ढक रहा था. एक इस गहरे गले वाली नाइटी में से भाभी मुझे झुक कर खाना दे रही थीं. जिससे मुझे न केवल ऊपर से बल्कि अन्दर से भी उनके पूरे हिमालय के दर्शन हो रहे थे. मैं उनके हाव भाव से समझ गया कि भाभी आज मुझसे चुदने को राजी हैं. </p>
<p>मैंने और भाभी ने खाना खाया और रूम में आ गए. कुछ देर मैं भाभी के रूम में ही रहा.<br />
उसी वक्त भाभी बोलीं- अब तुम सो जाओ … मैं नहा लूं. </p>
<p>मैंने आश्चर्य जताया कि भाभी ये कौन सा वक्त है नहाने का?<br />
भाभी बोलीं- मैं रात में नहा कर ही सोती हूँ. ये कहते हुए भाभी ने दोनों हाथ ऊपर करके अपने चुचे हिला दिए. </p>
<p>मैं तो उनकी इस अदा से पागल ही हो गया. मुझे दीवाना सा देख कर भाभी मुस्कुरा कर नहाने चली गईं. मैं अपने कमरे में आ गया, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी. बस बार बार भाभी के चुचे आंखों में आ रहे थे. </p>
<p>कुछ देर बाद मैं भाभी के पास आया, तो भाभी बिस्तर में लेटी थीं.<br />
मैं बोला- भाभी मुझे नींद नहीं आ रही है … क्या मैं आपके पास सो सकता हूँ?<br />
भाभी ने हां कर दी.</p>
<p>मैं बस अगले ही एक पल भाभी के पास लेट गया और बिना कुछ सोचे उनसे लिपट गया. मुझे उम्मीद थी कि भाभी कुछ विरोध करेंगी. मगर भाभी ने मुझे अपनी बांहों में समा लिया.<br />
मैंने सबसे पहले भाभी की चुचियों में मुँह लगा दिया. उफ्फ्फ … कितने नर्म चुचे थे. </p>
<p>भाभी पहले तो ना ना करने लगीं- क्या कर रहे हो अजय … छोड़ भी दो उफ्फ्फ्फ बदमाश! </p>
<p>मैं भाभी की कुछ नहीं सुन रहा था और भाभी के चूचों से पूरा लिपट गया था. मेरे लगातार चूचे चूसने के बाद भाभी ने मुझे रोकना बंद कर दिया और मुझे अपनी उफनती जवानी में डुबकी लगाने दिया.</p>
<p>काफी देर बाद मैंने भाभी के चूचों को छोड़ा. इसके तुरंत बाद मैंने उनकी नाइटी को निकाल कर फेंक दिया और खुद भी नंगा हो गया. भाभी भी मेरे लंड को देखकर एकदम से मोहित हो गईं. उनकी चुदास भड़क उठी और वो मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगीं.</p>
<p>मैंने कहा- भाभी जी सब्र करो, आज मेरा केला आपको ही मिलने वाला है.<br />
भाभी बोलीं- इसे देख कर तो सब्र ही नहीं होता, पहले एक बार प्यास बुझा दो, फिर बाद में बाकी का खेल कर लेंगे.</p>
<p>मैंने उनकी बात से सहमति जताते हुए उनकी टांगें फैला दीं और दोनों टांगों के बीच में आकर अपने लंड को निशाना दिखाने लगा. भाभी ने लंड को चूत की फांकों में फंसाया और गांड उठा कर सुपारा फंसा लिया. इधर सुपारे का फंसना हुआ और उधर मैंने ठोकर मार दी. </p>
<p>भाभी की माँ चुद गई … उनके मुँह से दर्द भरी आह निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ भाभी की आंखें फ़ैल गईं और उनकी मुट्ठियों ने बिस्तर की चादर को भींच लिया.</p>
<p>मैं बिना कोई परवाह किये पूरा का पूरा लंड भाभी की रसीली चुत में डालने लगा. पूरा लंड पेलने के बाद मैं एक पल के लिए रुका और उनकी चूचियों को पकड़ कर दबादब चोदने लगा. एक मिनट में ही भाभी की चूत मस्त हो गई और मेरे लंड का उछल उछल कर स्वागत करने लगी. </p>
<p>मैं काफी देर तक भाभी को चोदता रहा. उनकी गांड को सहलाते हुए चुचे चूसते और काटते हुए चुदाई की गति को तेज से तेज करने लगा.</p>
<p>भाभी भी मेरे मोटे लंड से चुद कर जन्नत का मजा ले रही थीं. भाभी ने मुझे अपनी चूचियों से चिपका लिया और मेरे बालों में हाथ फेरते हुए लंड की ठोकरों का मजा लेने लगीं. सच में भाभी की चुदाई में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. </p>
<p>कुछ ही देर में भाभी की तेज आह निकलने लगीं और वे झड़ गईं. उनके झड़ने के कुछ पल बाद मैंने भी अपने लंड का पूरा रस भाभी की चूत में ही भर दिया. स्खलन के आनन्द से हम दोनों की आंखें मुंद गई थीं.</p>
<p>एक मिनट बाद जब सैलाब बह गया, तो हम दोनों भाभी देवर सेक्सी बातें करने लगे. मुझे भाभी की नंगी गांड बहुत मस्त माल लगी थी. मैं बार बार भाभी की गांड पर हाथ फेर रहा था और उंगली भी कर रहा था. उंगली के स्पर्श से भाभी अपनी गांड को उचका रही थीं. </p>
<p>कुछ देर बाद एक और दौर चुदाई का चला और हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए. </p>
<p>मैं सुबह उठा, तो भाभी से चिपका हुआ था. मैंने उनकी चूचियों को चूसना शुरू किया और अपने खड़े लंड को एक बार फिर से भाभी की चुत में पेल दिया. चुदाई का जलजला फिर से अपनी छटाएं बिखेरने लगा. मैंने भाभी की चूत चोद दी और फिर से सो गया. </p>
<p>काफी देर बाद जब मैं उठा, तो भाभी रसोई में चली गई थीं. मैं उठ कर रसोई में गया. भाभी को पीछे से पकड़ लिया और मस्ती करने लगा. </p>
<p>भाभी बोलीं- अभी तक मन नहीं भरा तुम्हारा?<br />
मैं- नहीं भाभी … जब आप जैसी सेक्सी माल भाभी हो … तो किस देवर का मन भरेगा.<br />
भाभी- तुम बहुत शैतान हो … यू नॉटी.</p>
<p>तभी दरवाज़े पर दस्तक की आवाज़ हुई. मैं भाग कर कमरे में जाकर अपना बरमूडा पहनने लगा. उधर भाभी ने भाग कर दरवाज़ा खोला और उनको अन्दर बुला लिया.</p>
<p>मैंने वापस आ कर देखा कि ड्राइंग रूम में भाभी की दो सहेलियां अपने 4 बच्चों के साथ आई हुई थीं. सब लोग आपस में मिल कर बात करने लगे. उनकी बातचीत से मालूम हुआ कि उन तीनों को मार्किट जाना था.</p>
<p>भाभी ने मुझसे उन बालकों को शाम तक घर रहने की बोला और वो चली गईं.</p>
<p>इधर मुझे भाभी को चोदने की आग लगी थी. मेरी चाहत जैसी चाहत ही शायद भाभी की भी थी. इसलिए वो अपनी सहेलियों से पीछा छुड़ा कर एक घंटे में ही बाजार से वापस घर आ गईं. </p>
<p>वे अपनी सहेलियों के बच्चों को बाहर वाले कमरे में बिठा कर कमरे में चली गईं. भाभी ने अपने कमरे में जाकर ड्रेस बदल ली. अब भाभी फिर से नाईट ड्रेस में आ गई थीं. मैंने भाभी को पकड़ा और अलग ले जाकर चुम्मी लेने लगा. </p>
<p>उधर भाभी की सहेलियों के बच्चे आवाज देने लगे- आप कहां हो आंटी?<br />
तो भाभी भाग कर उनके पास चली गईं. मैंने भाभी को इशारा किया कि अब नहीं रहा जाता, बस जल्दी से चुदवा लो. </p>
<p>उधर वे चार बच्चे जान की आफत बनाए हुए थे. भाभी से उन सब बच्चों को लुका छुपी खेलने को कहा.<br />
मैंने कहा- सिर्फ बच्चे ही क्यों हम सभी लुका छिपी खेलते हैं न.<br />
मेरी बात सुनकर सब तैयार हो गए. मैं भी साथ में खेलने लगा. </p>
<p>फिर एक जना बारी देने जाता, तो सब छिप जाते. दो बार का खेल तो सामान्य हुआ. तीसरी बार में मैं भाभी को लेकर रूम में ही छिप गया. भाभी इस वक्त मेरे आगे खड़ी थीं. मैंने पीछे से उनकी नाइटी उठाई और पेंटी नीचे करके उनकी चूत में लंड पेल दिया. भाभी बड़ी मुश्किल में अपनी आवाज दबा सकी थीं. मैं भाभी को पकड़ कर चोदने लगा. भाभी मुझे मना कर रही थीं और वे मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं.</p>
<p>तभी मेरी पकड़ ढीली हुई और भाभी उठ कर भागने लगीं. मैंने फिर से उनको पकड़ लिया और एक कोने में ले जाकर पीछे से अपना तन्नाया हुआ लंड उनकी चुत में घुसा दिया. भाभी के चूचों को दबाते हुए मैंने चुदाई के बहुत मज़े लिए. चुदाई पूरी करके मैंने लंड को उनकी नाइटी से ही पौंछा और बरमूडा ऊपर कर लिया. मैं अभी उनको छोड़ना नहीं चाहता था. पर भाभी बाहर भागने को हो गई थीं.</p>
<p>तभी कुछ ही देर में हमारे वाले इस कमरे के बाहर सब बच्चे एक साथ खड़े हो कर आवाज लगाने लगे थे. </p>
<p>भाभी- अजय, अभी इतना ही रहने दो, सब आ गए हैं.<br />
इतना कह कर वे अपनी गांड मटका कर चलते हुए दरवाजा खोलने चली गईं. मैं बेड पर आ गया थ और उधर से ही भाभी की मटकती हुई गांड को देख रहा था. </p>
<p>भाभी दरवाजा खोल कर अपनी सहेलियों के बच्चों से बात करने लगीं.<br />
एक बच्चा बोला- आंटी आप मिल गईं … आपने कितनी देर में दरवाजा खोला … वो भैया कहां हैं?</p>
<p>तभी मैंने पीछे से आकर भाभी की गांड पर दांत से काट लिया. भाभी चिहुँक गईं और मुझे दूर करने लगीं. </p>
<p>भाभी- जाओ अपने अजय भैया को कहीं और ढूंढ लो. वे इधर नहीं हैं.</p>
<p>इतना बोल कर भाभी ने दरवाजा बन्द कर लिया. मैंने करीब आकर भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया. फिर मैं उनकी चूत खोल कर उनको चोदने लगा. में फिर से भाभी की चुचियों से लिपट गया और उनकी मोटी चुचियों को मुँह में भर कर चूसते हुए भाभी को चोदने लगा. कुछ देर में फिर से दरवाज़ा बजने लगा, पर इस बार मैं नहीं रुका. मैं भाभी को ज़ोर से चोद रहा था.</p>
<p>कुछ देर में लंड की पिचकारी पर पिचकारी निकलीं और मैंने भाभी के चूचों को ज़ोर से मुँह में भर कर कस कर माल निकाल दिया. मुझे बहुत मज़ा आया. भाभी की चुचियों पर दांतों के निशान हो गए थे. मुझे भाभी से अलग होने का मन नहीं था, पर होना पड़ा क्योंकि बच्चे परेशान करने लगे थे. </p>
<p>भाभी ने दरवाज़ा खोल दिया. वे नाइटी डाल कर बच्चों के साथ बाहर जाकर बैठ गईं और उनसे बातें करने लगीं. इधर मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गया और बैठ गया. </p>
<p>शाम होने को थी, बच्चे अपने घर जाने वाले थे. मेरा मन तो भाभी की गांड में अटका हुआ था. मैं बार बार जब भी मौका मिलता, भाभी की चूचियों को और गांड को दबा देता था. </p>
<p>फिर उनकी सहेलियां आकर बच्चों को ले गईं. हम भाभी देवर फिर से एक हो गए. </p>
<p>जब तक भैया टूर से वापस नहीं आ गए हम दोनों ने जी भरके चुदाई का मजा लिया. मैंने भाभी की गांड भी मार ली थी. उसकी कहानी मैं अगली बार लिखूंगा. मेरे दिन मज़े से निकलने लगे थे. </p>
<p>इसी बीच मुझे पता लगा कि भाभी अपनी सहेली के भांजे से भी चुद चुकी हैं. ये सुनकर मुझे बहुत जलन हुई कि इतनी सेक्सी सुन्दर भाभी को किसी और ने भी लूट लिया है. </p>
<p>ये कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा. इस बारे में मैंने भाभी को चोदते हुए एक दिन पूछ लिया था और भाभी ने भी मज़े से बता दिया था कि कैसे वो सहेली के भांजे से चुद गयी थीं.</p>
<p>फिर मैंने भी भाभी की सहेली को चोद दिया था. आप अपना प्यार देते रहना, मैं ऐसे ही चुदाई की कहानी लिखता रहूंगा.<br />
मेरा ईमेल है [email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:33:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamukta]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है. रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने <a title="भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/bhabhi-gair-mard-se-chudayi/" aria-label="Continue reading भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है.</p>
<p>रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी. उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने लिए दुकानदार को फोन लगवाकर बल्लू को बुलाया.<br />
वंदना भाभी- हैलो … बल्लू को बुलाएंगे क्या एक बार?<br />
उधर से आवाज आई- आप कौन बोल रही हैं?<br />
वंदना भाभी- बोल देना कि वंदना का फोन है.</p>
<p>दुकानदार ने बल्लू को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा.<br />
लड़के ने कहा- बल्लू सेठ, किसी वंदना का फोन है आपके लिए.</p>
<p>बल्लू ने जो काम था, वो बाजू मे रख कर तुरंत जाकर फोन लिया- हैलो भाभी, बोलो?<br />
वंदना भाभी- बल्लू कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं?</p>
<p>बल्लू- ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं. बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो.<br />
वंदना भाभी- सच्ची बल्लू, मेरे नॉटी बल्लू… गुन्डाराज … मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं</p>
<p>बल्लू- ओह भाभी, तुम भी ना… आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं. लेकिन भाभी तेरा पति भी तो घर पर है. रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है.<br />
वंदना भाभी- बल्लू, मेरे पास एक आइडिया है. आज ये शराब पीने के मूड में है. तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना. मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी. तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना. मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी. </p>
<p>बल्लू- सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा. क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी. मुझे भी भाभी की चूत का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी. आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी. </p>
<p>फोन को रखने के बाद बल्लू ने दुकानदार को देखा.<br />
दुकानदार बोला- क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने बल्लू.<br />
बल्लू- हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती. साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है. कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो न जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है.</p>
<p>दुकानदार- हां बल्लू सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना. इसके पति से बच कर रहना. वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है.<br />
बल्लू- हां, ये बात तो है. चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है.</p>
<p>रात के 11 बजे बल्लू वंदना भाभी के घर पर पहुंच गया और देखा कि वंदना भाभी एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी. भाभी ने बल्लू सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था. उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो. उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था. वंदना का इशारा बल्लू की तरफ था. बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी. भाभी ने बल्लू को आंख मार दी. बल्लू ने बिजली बंद कर दी और भाभी ने बल्लू को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया.</p>
<p>लाइट बंद होते ही वीजू की दारू में भंग पड़ गया. वो उठ कर अपने बेड पर चला गया. पांच मिनट के अंदर ही वीजू के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई. बल्लू भी ताक में था कि कब भाभी का पति वीजू सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा.</p>
<p>जैसे ही बल्लू को पता चला कि वीजू सो चुका है तो पीछे से आकर उसने भाभी को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा. भाभी भी बल्लू की बांहों में आते ही चुदासी हो गई.<br />
भाभी की गांड को छूते ही बल्लू का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और भाभी की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा.</p>
<p>बल्लू ने अपने तने हुए लंड को भाभी की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया. कपड़ों के ऊपर से ही जब बल्लू का लंड भाभी की गांड पर लगा तो भाभी मचल सी गई. उसने पलट कर बल्लू के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. </p>
<p>बल्लू ने भाभी की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया. उसके बाद उसने भाभी को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड भाभी की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर भाभी के मोटे चूचों को दबाने लगा. भाभी के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था. इसलिए भाभी बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी. बल्लू जोर से भाभी के चूचों को दबा रहा था. </p>
<p>उसका लंड अपने पूरे आकार में आ गया था. जब भाभी से रहा न गया तो भाभी ने पीछे हाथ ले जाकर बल्लू के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. भाभी के हाथ में लंड आते ही बल्लू की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो भाभी को बुरी तरह से काटने लगा.</p>
<p>भाभी ने कहा- चलो अंदर चलते हैं. ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला. बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं. </p>
<p>बल्लू ने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया. लेकिन चुदाई की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये. लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है. बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये. </p>
<p>अंदर जाते ही भाभी ने बल्लू की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया. बल्लू का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था. बल्लू ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया. उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो.</p>
<p>फिर भाभी ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर बल्लू की गोद में आकर बैठ गई. बल्लू का तना हुआ लौड़ा भाभी की गांड के नीचे दब गया. गोद में बैठी हुई भाभी के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो. लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी. वो जोर से भाभी के चूचों को पीने में लगा हुआ था भाभी के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे.</p>
<p>बल्लू का लंड भाभी की गांड के नीचे उसकी चूत में जाने के तड़प रहा था. इधर भाभी की गांड भी बल्लू के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी.<br />
फिर बल्लू ही बोल पड़ा- बस भाभी बस … अब और क्यूं तड़पा रही हो. इस पर उछलो ना …<br />
भाभी बोली- आह्ह बल्लू … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो. मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो. मेरी चूत ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है. </p>
<p>फिर भाभी ने अपनी टांगों को फैलाते हुए बल्लू के तने हुए लौड़े पर अपनी चूत को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी चूत में लेते हुए बैठती चली गई. भाभी की गीली चिकनी चूत में बल्लू का लंड उतरने लगा और पूरा का पूरा लंड उतरते ही भाभी और बल्लू के मुंह से एक साथ आह्ह … निकल गई.</p>
<p>लंड पूरा का पूरा चूत में उतर गया था और भाभी अब बल्लू के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी. भाभी ने बल्लू के गले में बांहें डाल दीं और बल्लू के लंड पर उछलना शुरू हो गई. बल्लू ने भाभी के चूचों को मुंह में भर लिया.</p>
<p>“उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म चूत में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं.”<br />
भाभी बोली- स्सस् … मेरे राजा … तुम्हारा लंड मेरी चूत की प्यास और बढ़ा देता है. मैं इसको खा जाऊंगी … आह्ह् … चोदो मुझे मेरे राजा … आह्हह … </p>
<p>दोनों ही मस्ती में सेक्स का मजा लेने लगे. उछलने के कारण भाभी की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं. भाभी की चूत पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह् … आह … कर रही थी. अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है. वो दोनों चुदाई में खोये हुए थे.</p>
<p>लेकिन इसी बीच भाभी का पति वीजू नींद से उठ गया. भाभी की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से आ रही है. साथ में ही वंदना भाभी के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी वीजू ने झट से पहचान ली.</p>
<p>वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा. जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है.</p>
<p>जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो वंदना भाभी और बल्लू की गांड फट गई. दोनों को ही उसके पति ने चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था. वो हक्का-बक्का होकर वीजू को देखते ही रह गये.<br />
उनको अंदाजा नहीं था कि वीजू नींद से जाग भी सकता है. मगर वीजू ने नंगी भाभी को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था.</p>
<p>वीजू बोला- साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है. साली रांड. मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में. वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना. उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया. लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है.</p>
<p>भले ही वीजू ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी बल्लू का लंड वंदना भाभी की चूत में ही था और उसने अपनी मलाई वंदना भाभी की चूत में गिरा दी थी. लेकिन बस वीजू के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे.</p>
<p>वंदना भाभी को भी अहसास हो गया था कि बल्लू का माल चूत में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था. वीजू की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था.<br />
इधर वीजू वंदना को गालियां दे रहा था. साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई. </p>
<p>वंदना भाभी बोली- तो क्या करती मैं? तुम्हारे लंड से मेरी चूत की प्यास नहीं बुझती है. तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो.<br />
वीजू- तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती.<br />
भाभी बोली- मैं तो बल्लू का ही लूंगी. तुमको जो करना है कर लो.</p>
<p>वन्दना भाभी ने बल्लू की तरफ देख कर कहा- तुम रुक क्यों गये. इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है. तुम चुदाई चालू रखो.<br />
बल्लू बोला- लेकिन मेरे लंड का माल चूत में निकल चुका है. </p>
<p>भाभी ने बल्लू के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई. बल्लू भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो वीजू ने लैम्प बल्लू की गांड पर फेंक कर मारा. बल्लू की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया. </p>
<p>उसके बाद वीजू वंदना के कमरे की तरफ गया लेकिन वंदना भाभी ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था. वीजू अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया. </p>
<p>आपको ये भाभी की कामुकता और सेक्स की कहानी कैसी लगी. नीचे दिये गये मेल पर मैसेज करके बताना.<br />
[email protected]</p>
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			</item>
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		<title>बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1</title>
		<link>https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 17:54:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhabhi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे <a title="बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1" class="read-more" href="https://kahani18.com/bhabhi-sex/biwi-ki-saheli-part-1/" aria-label="Continue reading बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, आप मुझे जानते ही होंगे, मैं अन्तर्वासना का पुराना लेखक हूँ. मैंने करीब 200 कहानियां अन्तर्वासना पर लिखी हैं. आज आपको मैं इस नयी साईट पर अपने एक पाठक की भेजी हुई कहानी बताने जा रहा हूँ। इन पाठक महोदय ने अपने अंदाज़ में कहानी लिख कर भेजी थी, मगर मैंने उसे सिर्फ उनसे पूछ पूछ कर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है.<br />
लीजिये पढ़िये।</p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम रत्न लाल है, मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा … बस यही मेरा परिवार है।</p>
<p>अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली बनी। वो औरत हमारे मोहल्ले की दूसरी गली में रहती है। दोस्ती की वजह यह हुई कि मेरी पत्नी और उस औरत, दोनों का नाम रूपा है। उस औरत रूपा के दो बेटियाँ है, बड़ी बेटी दिव्या 20 साल की है, और छोटी बेटी रम्या 18 साल की है। छोटी लड़की तो पतली दुबली सी, साँवली सी है। बड़ी लड़की दिव्या भी पतली है मगर वो गोरी है, देखने<br />
में भी सुंदर है और अभी बी ए कर रही है।</p>
<p>रूपा का पति पहले तो यहीं रहता था और दोनों मियां बीवी छोटे मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते थे तो घर के हालात कुछ खास अच्छे नहीं थे।<br />
फिर रूपा के पति को विदेश जाने का मौक़ा मिला तो वो पैसा कमाने विदेश चला गया।</p>
<p>वैसे तो हमारा एक दूसरे के घर आना जाना हो जाता था। मगर जब रूपा का पति विदेश चला गया तो मुझे रूपा कुछ विशेष लगने लगी। हालांकि रंग रूप में, या शारीरिक बनावट में वो मेरी पत्नी के मुक़ाबले कहीं भी नहीं ठहरती थी मगर पराई औरत तो पराई औरत ही होती है। अच्छी न भी हो, तो भी बस उसके मम्मे, उसकी गाँड, उसकी फुद्दी आपको अपनी ओर आकर्षित करती ही करती है।</p>
<p>मेरे मन में भी कई बार इस बात का ख्याल आया कि रूपा को थोड़ा टटोल के देखूँ, पति इसका पास में नहीं, तो रात को ये भी तो बिस्तर पर करवटें बदलती होगी. अगर किसी तरह से बात बन गई, तो अपने को बाहर मुँह मारने का मौका मिल जाएगा।</p>
<p>हालांकि मैं उसके घर कम जाता था, मैं तो अपने काम धंधे में ही बिज़ी रहता था मगर कभी कभार आना जाना हो जाता था या कभी कभी वो भी आ जाती थी।</p>
<p>अब मेरी बीवी के साथ उसका अच्छा दोस्तना था, वो मेरी बीवी को दीदी और मुझे जीजाजी कहती थी। मगर मैंने कभी उसके साथ साली कह कर कोई हंसी मज़ाक नहीं किया, मैं थोड़ा रिज़र्व ही रहता था. हाँ उसकी बेटियों के साथ मैं हंस बोल लेता था।</p>
<p>पति के विदेश जाने के बाद उसने घर के कई कामों में कई बार मेरी मदद भी ली मगर मैंने खुद आगे बढ़ कर कभी कुछ नहीं किया. मेरे और रूपा के बीच मेरी पत्नी हमारी कड़ी थी। सारा<br />
काम, बातचीत मेरी पत्नी के द्वारा ही होती थी।</p>
<p>मगर एक बात जो मैं नोटिस कर रहा था कि रूपा का व्यवहार अब बदलने लगा था। जब भी मौका मिलता उसे, वो मुझे जीजाजी कह कर खूब हंसी मज़ाक कर लेती। मुझे अक्सर लगता कि वो अपनी आँखों से अपनी बातों से अपने हाव भाव से यह जता रही थी कि जीजाजी हिम्मत करो और मुझे पकड़ लो, मैं आपको ना नहीं करूंगी।</p>
<p>मगर मैं अपनी पत्नी के सामने होते उसे कैसे पकड़ सकता था।</p>
<p>समझती वो भी थी कि जब तक हम अकेले नहीं मिलते तब तक कोई भी सम्बन्ध हमारे बीच नहीं बन सकता था। मगर अकेले मिलने का कोई भी मौका हमें नहीं मिल रहा था।</p>
<p>हमारी दोस्ती या यूं कहो कि दिल में छुपा हुआ प्यार इसी तरह चल रहा था। अपने अपने मन में हम दोनों तड़प रहे थे। मैं कम तड़प रहा था, वो ज़्यादा तड़प रही थी। वो कई बार कह भी चुकी थी- जीजाजी, आपके पास कार है, मुझे कार चलानी सिखाइए। जीजाजी, किसी दिन अपन दोनों कोई फिल्म देखने चलते हैं। मेरी तो इच्छा है कि बरसात हो रही हो, और हम दोनों जीजा साली कहीं दूर तक गाड़ी में घूम कर आयें।</p>
<p>ये सब बातें वो बातों बातों में मेरी पत्नी के सामने कह चुकी थी और ऐसी ही बातों से मेरे दिल में ये विचार आए कि शायद ये मुझसे अकेले मिलने का बहाना ढूंढ रही है।</p>
<p>फिर एक दिन उसने और बड़ा ब्यान दाग दिया।<br />
हुआ यूं कि हम बाज़ार गए थे, वहीं वो भी मिल गई, अपनी दोनों बेटियों के साथ। तो औपचारिकतावश हमने उन्हें शाम के खाने का न्योता दिया।<br />
वो झट से मान</p>
<p>हम एक मिठाई की दुकान में गए, ऊपर उनका ही रेस्टोरेन्ट बना था। सब कुछ शाकाहारी था। हमने वहाँ बैठ कर खाना खाया।</p>
<p>अब उसकी बड़ी बेटी मेरे साथ बैठी जबकि रूपा, उसकी छोटी बेटी, और मेरी पत्नी मेरे सामने बैठी।<br />
दिव्या वैसे भी मेरे से बहुत स्नेह करती थी।</p>
<p>हम दोनों चुपचाप बैठे खाना खा रहे थे, वो रूपा बोली- देखो दोनों कैसे बिल्कुल एक ही स्टाइल से खाना खा रहे हैं, जैसे दिव्या आपकी ही बेटी हो।<br />
मैंने कहा- हाँ, मेरी बेटी है।<br />
अब मैं और क्या कहता।<br />
मगर तभी रूपा बोली- आपकी कैसे हो सकती है, हम कभी मिले तो है नहीं?</p>
<p>मैं तो सन्न रह गया। मिले नहीं मतलब सेक्स नहीं किया। मैंने सोचा- अरे भाई ये तो चुदवाने के चक्कर में है, और मैं यूं ही शराफत में मारा जा रहा हूँ।<br />
मगर उस वक्त मैंने सिर्फ हाथ उठा कर आशीर्वाद देने का ढोंग कर दिया कि दिव्या तो मेरी आशीर्वाद से पैदा हुई बेटी है।<br />
तो दिव्या बोली- मौसा जी, अगर आप बुरा न माने तो मैं आपको पापा कह लिया करूँ।<br />
अब उस बेटी की यह नन्ही सी प्यारी सी गुजारिश को मैं ना नहीं कर सका, मैंने कहा- हाँ, बेटा, मुझे तो खुशी होगी, मेरी कोई बेटी नहीं, तुम मेरी बेटी बन जाओ।</p>
<p>उस दिन के बाद दिव्या मुझे हमेशा पापा ही कहती। मगर छोटी बेटी कभी पापा तो कभी मौसा जी कह देती थी। उसके साथ मेरा रिश्ता ठीक ठाक सा ही था क्योंकि वो चुप ज़्यादा रहती थी।</p>
<p>फिर एक दिन दिव्या ने मुझसे मेरा फोन नंबर मांगा, उसके बाद वो मुझे कभी कभी फोन भी करती, सुबह शाम को कभी कभी मेसेज भी करती और मैं भी उसे अच्छे अच्छे मेसेज भेज दिया करता था जैसा कोई भी बाप बेटी करते हैं।</p>
<p>एक दिन मैं और मेरी पत्नी उनके घर गए, तो उस दिन रविवार था और वो सब लोग सर के बाल धोकर बैठे थे।<br />
फिर दिव्या तेल ले कर आई और तीनों माँ बेटी एक दूसरी के सर में तेल लगाने लगी।</p>
<p>मैंने भी बैठे ने यूं ही कह दिया- अरे वाह, दिव्या, बहुत बढ़िया से तेल लगाती हो तुम तो!<br />
वो बोली- पापा, आपके भी लगा दूँ?<br />
मैंने कहा- हाँ, लगा दो।</p>
<p>जब उनका निबट गया तो दिव्या तेल की शीशी लेकर मेरे पास आई। मैं उनके दीवान पर बैठा था, वो मेरे पीछे आई और कटोरी से तेल लेकर मेरे बालों में लगाने लगी।<br />
“आहह … हह … आहा …” कितना आनंद आया, जब बेटी पिता के सर में तेल लगाये अपने नर्म नर्म हाथों से।</p>
<p>रूपा बोली- अरे जीजाजी, मैं लगा दूँ आपके तेल?<br />
उसकी बात में एक तंज़ मैं समझ गया मगर मैंने कहा- अजी नहीं शुक्रिया, बिटिया बहुत बढ़िया लगा रही है।</p>
<p>उसके बाद उनके घर ही हमने खाना खाया और जब वापिस आए, तो अपनापन दिखाने के लिए रूपा ने पहले मुझे नमस्ते बोली और फिर आगे बढ़ कर मुझे आलिंगन भी किया. मगर उसने आलिंगन करते हुये अपना मम्मा मेरी बगल से अच्छे से रगड़ दिया और मेरी तरफ देख कर शरारत से मुस्कुराई।<br />
वो मुझे साफ से साफ इशारे कर रही थी कि आओ मुझे पकड़ो मगर मैं ही ढीला चल रहा था।</p>
<p>मैंने सोचा कि अब अगर एक भी मौका और मिला, तो मैं रूपा से बात कर लूँगा।</p>
<p>फिर एक दिन मौका मिला, वो हमारे घर ही आई हुई थी, मेरी बीवी रसोई में थी। मैंने पूछा- अरे रूपा, तुमने मेरा मोबाइल नंबर लिया था, पर कभी फोन तो किया नहीं?<br />
वो बोली- आप तो वैसे ही कम बात करते हो, क्या पता फोन पर बात करो भी या नहीं।<br />
मैंने कहा- अरे नहीं, मैं तो बल्कि इंतज़ार कर रहा था कि कभी हैलो हाई, नमस्ते, गुड मॉर्निंग, आई लव यू, कुछ तो मेसेज करो।<br />
वो मेरी बात सुन कर बहुत हंसी, बोली- अच्छा अब करूंगी।</p>
<p>और अगले ही दिन सुबह उसका मेसेज आया ‘गुड मॉर्निंग’ का। जवाब में मैंने भी उसको गुड मॉर्निंग का मेसेज भेजा। और दिन में ही हम दोनों ने 40 करीब व्हाट्सअप मेसेज एक दूसरे को कर दिये।</p>
<p>जितना मैं खुल कर चला, वो उससे भी ज़्यादा खुल कर चली और अपने जीजा साली के रिश्ते की सारी मान मर्यादा तोड़ कर हम दोनों ने एक दूसरे को खुल्लम खुल्ला प्यार का इज़हार तक कर दिया। यहाँ तक के उसने ये भी कह दिया कि अगर आप न कहते तो मैं खुद ही कहने वाली थी।</p>
<p>अब जब प्यार का इज़हार ही हो गया, तो और क्या बाकी रहा। वो पूरी तरह से मेरे साथ सेट हो चुकी थी। मन में खुशी के लड्डू फूट रहे थे कि यार कमाल हाई, 50 साल की उम्र में भी माशूक पटा ली।</p>
<p>उसके बाद तो अक्सर हम फोन पर बाते करते, दो तीन दिन में ही, बातें शीशे की तरह साफ हो गई। दोनों ने एक दूसरे से कह दिया कि अब जिस दिन भी मिलेंगे, अकेले में मिलेंगे, और उसी दिन हम सभी हदें पार कर जाएंगे।</p>
<p>मैंने सोचा, अब माशूक के पास जाना है, तो पूरी तैयारी के साथ जाया जाए। बुधवार की मैंने अपने काम से पहले ही एक दिन की छुट्टी ले ली थी।<br />
मगर मंगलवार को मैंने कुछ और काम भी किया। मैंने आधी गोली *** की खा ली। यह गोली खाने से आप जब कहो, तब आपका लंड आपके इशारे पर खड़ा हो जाता है, और वो भी पूरा कड़क, पत्थर की तरह सख्त। बस इतना ज़रूर है कि ये गोली यूरिक एसिड बढ़ा देती है। मगर इसका असर 2-3 दिन रहता है।</p>
<p>बुधवार की सुबह मैंने एक चने के आकार की गोली अफीम की कड़क चाय के साथ निगल ली। अब सफ़ेद गोली लंड को खड़ा रखने के लिए और काली देर तक न झड़ने के लिए।</p>
<p>हमारा 11 बजे मिलने का प्रोग्राम था। मगर मैं 10 बजे से पहले ही हर तरह से तैयार था। करीब पौने 11 बजे मैंने रूपा को फोन करके पूछा- हां जी क्या हाल हैं साली साहिबा?<br />
वो बोली- बहुत बढ़िया, आप सुनाओ।<br />
मैंने पूछा- मैं तो सोच रहा था, सुबह सुबह आपके दर्शन हो जाते तो, सारा दिन बढ़िया गुज़रता।<br />
वो उधर से बोली- तो आ जाइए, किसने रोका है, आपका ही घर तो है।</p>
<p>मैं तो उड़ता हुआ उसके घर पहुंचा। गेट खोल कर अंदर गया, अंदर घर में वो रसोई में कुछ कर रही थी। मैंने आस पास देखा, घर में और किसी के होने की आहट नहीं थी। मगर फिर भी मैं रसोई में गया, उस से नमस्ते की, उसका, बच्चों का हाल चाल पूछा।</p>
<p>फिर पूछा- बच्चे कहाँ हैं।<br />
वो बोली- बड़ी कॉलेज, छोटी स्कूल। बस घर में मैं अकेली हूँ।<br />
मतलब जो मैं पूछना चाहता था, वो उसने खुद बता दिया।</p>
<p>वो गैस पर चाय बना रही थी, मैं उसके पीछे जा कर खड़ा हो गया। दिल तो कर रहा था कि इसे पीछे से ही बांहों में भर लूँ, मगर फिर भी दिल में एक डर सा था। मगर फिर भी मैंने हिम्मत करके उसको अपनी बांहों में भर लिया।</p>
<p>वो एकदम से चौंकी- अरे जीजाजी, ये क्या कर रहे हो?<br />
वो गुस्सा नहीं हुई तो मेरी भी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने झट से उसकी गर्दन पर एक दो चुंबन जड़ दिये और उसे कस कर अपने से चिपका कर बोला- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी रूपा, अब सब्र नहीं होता यार!<br />
और मैंने उसकी गर्दन कंधो को चूमते हुये, उसका चेहरा घुमाया, और उसके गाल पर भी चूम लिया।</p>
<p>वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो बड़े बेशर्म हो, छोटी साली तो बेटी जैसी होती है।</p>
<p>[email protected]</p>
<p>कहानी का अगला भाग: बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2</p>
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