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	<title>अन्तर्वासना &#8211; Kahani18</title>
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	<description>Antarvasna Hindi Sex Story</description>
	<lastBuildDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:28 +0000</lastBuildDate>
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	<title>अन्तर्वासना &#8211; Kahani18</title>
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		<title>पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Padosi]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो … मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और <a title="पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/bhabhi-ne-bacche-ke-liye/" aria-label="Continue reading पड़ोसन भाभी की न्यू सेक्स स्टोरी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन भाभी ने मुझे छत पर मुठ मारते रंगे हाथों पकड़ लिया. फिर कुछ दिन बाद मैं भाभी के घर गया तो …<br />
<span id="more-316"></span></p>
<p>मेरा नाम राकेश है, मैं सोनीपत का रहने वाला हूँ. सभी लड़कियों से गुजारिश है मेरी न्यू सेक्स स्टोरी कपड़े उतार कर पढ़ें और अपनी चूत में उंगली करती रहें व लड़के अपना लन्ड हिला लें।</p>
<p>हमारे पड़ोस में एक पंजाबी फैमिली रहती थी. उसमें एक 25 साल की खूबसूरत भाभी थी, नाम था प्रभा. उनकी शादी को 3 साल हो गए थे पर उनके घर मे कोई बच्चा नहीं था. उनकी सास उन्हें बच्चा न होने की वजह से परेशान करती थी।</p>
<p>हमारी व उनकी छत मिली हुई थी व बीच में एक छोटी सी दीवार थी. एक दिन मैं छत पर एकांत में मुठ मार रहा था. तब प्रभा भाभी एकदम आ गई व उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया. मैं उस समय झड़ना शुरु हो गया था इसलिए रोक भी न सका और मेरे वीर्य की धार निकल कर दूर जाकर पड़ी.</p>
<p>उन्होंने मुझे सख्त धमकाया- ये क्या कर रहे हो? तुम्हारी मम्मी से बताती हूँ।<br />
मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए और माफी मांगी और यह भी कहा कि दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।<br />
उन्होंने बड़े प्यार से मेरे गाल पर एक थपकी दी और बोली- तुम अभी 18 साल के ही हो. ये सब करने से मर्द में कमजोरी आ जाती है.</p>
<p>बात आई गई हो गई पर जब भी वो मुझे मिलती तो उनके गाल लाल हो जाते थे.</p>
<p>एक दिन उनकी सास 6 दिन के लिए शादी में जा रही थी और उन्हें घर पर अकेला रहना था क्योंकि उनके पति भी एक महीने के लिए बाहर गए हुए थे. इसलिए उनकी सास ने मेरी माँ से कहा कि राकेश को कुछ दिनों के लिए रात को सोने को भेज देना क्योंकि घर में बहू अकेली रहेगी।</p>
<p>रात को खाना खाने के बाद मैं उनके घर चला गया. भाभी ने काली नाइटी पहनी थी.<br />
भाभी ने बादाम का दूध पीने को दिया और बोली- अबी तो पहले वाली शैतानी तो नहीं करते हो?<br />
मैं एकदम डर गया और बोला- नहीं भाभी, अब नहीं करता।</p>
<p>भाभी बोली- तुम्हारे भैया भी बचपन से यही करते आ रहे थे; अब उनमें कमजोरी आ गई और अब उनसे बच्चा पैदा नहीं होता।</p>
<p>कुल मिला कर सोने का समय हो गया और हम एक ही बेड पर सो गए.</p>
<p>रात को मेरी नींद खुली तो भाभी मेरा लन्ड सहला रही थी और मेरा लन्ड एकदम फटने को हो रहा था.<br />
मुझे जगा देख कर भाभी बोली- राज, मेरे पति का वीर्य कमजोर है और वो बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं.<br />
उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ सेक्स करके बच्चा पैदा करूँ.</p>
<p>भाभी ने अपनी चूची मेरे मुंह मे दे दी. मैंने बारी बारी से दोनों चूची खूब चूसी. फिर भाभी ने मेरा लन्ड मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो पागल होता जा रहा था.<br />
फिर भाभी ने उंगली के इशारे से चूत चाटने को बोला और हम 69 की पोजिशन में आ गए और खूब चुसम चुसाई खेली.</p>
<p>फिर भाभी बोली- मैं उस दिन तुम्हारे वीर्य की धार देख कर ही समझ गई थी कि तुम ही मेरे बच्चे के बाप बनोगे।</p>
<p>उसके बाद भाभी टांगें फैला कर लेट गईं और बोली- मेरे राज, अब डाल दे अपना हथियार मेरी कचिया चूत में!<br />
मैंने लन्ड के अगले हिस्से पर थोड़ा थूक लगाया और चूत से भी काफी नमकीन पानी टपक रहा था. जैसे ही मैंने लन्ड का टोपा चूत के मुख पर लगाया, भाभी ने बड़ी तेज सिसकारी भरी और चूत ऊपर उठाकर लन्ड चूत में लेने को बेताब हो गईं.</p>
<p>मैंने भी हल्का सा जोर लगाया और चूत में लन्ड अंदर जाने लगा. एक अलग ही एहसास था दोस्तो!</p>
<p>प्रभा भाभी ने नीचे से धक्के मारने शुरू किए और सीत्कार करने लगी. मैं तो जैसे पागल होने को हो गया. मैंने एक तेज झटका मार कर गहराई तक पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और तेजी से शॉट लगाने शुरू कर दिए और साथ में भाभी ने मेरा हाथ अपने स्तनों पर लेजाकर दबाने का इशारा किया.</p>
<p>मैं भाभी की चूचियाँ दबा दबा कर उन्हें मजा देने लगा और मैंने धक्कों की रेल छोड़ दी. 10 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार झड़ गई. उसके बाद हम नंगे ही लिपट कर सो गए.</p>
<p>उस रात मैंने 3 बार भाभी की चूत चुदाई की. उसके बाद 8 दिन में भाभी की कई बार चुदाई हुई.<br />
इस तरह से मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पूरी हुई.</p>
<p>और फिर एक दिन पता चला कि भाभी को गर्भ ठहर गया है.<br />
उसके बाद जब वो मुझे मिली तो मुझे बहुत प्यार किया औऱ मेरी खूब पप्पियाँ ली.</p>
<p>समयानुसार भाभी के घर एक सुन्दर बच्चा पैदा हुआ।</p>
<p>लेकिन बाद में पता चला कि भाभी ने यह बात अपनी बहन ज्योति को बता दी. एक दिन उसने मुझे ज्योति से मिलवाया और बताया कि ये मुन्ने के पापा हैं, तुम्हारे जीजा जी हैं.<br />
मैं शर्मा गया.</p>
<p>शाम को मैं भाभी से बोला- भाभी, इस बच्चे के लिए मुझे भी कुछ गिफ्ट चाहिए.<br />
तो उन्होंने पूछा- क्या?<br />
मैंने बताया- भाभी, उस हनीमून के बाद मुझे सेक्स की भूख पैदा हो गई है और आप बच्चे में व्यस्त हो गई हो तो मेरी सेक्स समस्या का समाधान करवाओ, किसी से मेरा सेक्स करवाओ.<br />
तो वो बोली- मैं ज्योति से बात करती हूं. वो इसी शहर में रहती है और मुझे लगता है उसका तेरे में इंट्रेस्ट भी है. क्योंकि जिस दिन मैंने तुझे उससे मिलवाया तो वो तुझे बड़े ध्यान से देख रही थी और कह रही थी ‘प्रभा, गजब का लौंडा पटाया है तूने!’</p>
<p>दोस्तो, मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पसन्द आयी या नहीं … कमेंट करना.<br />
आपका राज<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Hotel Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और… हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण <a title="होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/hotel-me-sex-boyfriend-se/" aria-label="Continue reading होटल में सेक्स बॉयफ्रेंड से">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने होटल में सेक्स किया अपने बॉयफ्रेंड से ! कैसे? मेरे ऑफिस की सहेली के कई बॉयफ्रेंड्स हैं, वो उनसे खूब चुदवाती है. उसने चुदाई की बातें बताकर मेरी वासना जगा दी और…<br />
<span id="more-291"></span></p>
<p>हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम सोनी है. मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मी पापा और मेरा एक भाई है. मेरा एक साधारण परिवार है लेकिन हम लोग बहुत अच्छे से रहते हैं. मेरा भाई मुझसे बड़ा है. मेरी मम्मी हाउसवाइफ है और पापा का अपना काम है और भाई नौकरी करते हैं.</p>
<p>मैं भी एक अच्छी सी जगह नौकरी करती हूँ जो मेरे भाई ने लगवाई है. मैं और मेरा भाई हम दोनों साथ में ही नौकरी करने जाते हैं. मैं अपने भाई एक साथ ऑफिस जाती थी और अपने भाई के साथ ऑफिस से आती थी.</p>
<p>मैं अपने आपको बहुत अच्छे से रखती हूँ मतलब मैं बहुत खूबसूरत हूँ. मेरा फिगर भी बहुत अच्छा है और मेरी गांड थोड़ी सी सेक्सी है. मतलब कि जब मैं चलती हूँ तो मेरी गांड ऊपर नीचे हिलती है. मेरी चूची भी बड़ी बड़ी है और मैं खाते पीते घर की हूँ तो मेरा फिगर बहुत अच्छा है.</p>
<p>मुझे ऑफिस में बहुत सारे लोग घूरते रहते है. ऑफिस में एक लड़की जिसका नाम मौलीश्री है, मेरी सहेली बन गयी और हम दोनों एक दूसरे से घुलमिल गयी. वो लड़की बहुत चालू थी और उसने ऑफिस में ही कई बॉयफ्रेंड बनाये हुए थे. वो सबसे मजा लेती थी.</p>
<p>ऑफिस में और उसके साथ रहते रहते ऑफिस में एक लड़के जगेश के साथ मेरी भी बातें होने लगी. मेरे भाई को ये बात पता नहीं थी कि ऑफिस में एक लड़का मेरा दोस्त बन गया है. मेरी सहेली मौलीश्री एकदम खुल कर बात करती थी और उसके साथ रहते रहते मैं भी खुल गयी थी.</p>
<p>एक दिन मैं अपने रूम में सो रही थी तो भाई के रूम में लाइट चालू थी. भाई हमेशा अपने रूम की लाइट बंद करना भूल जाते थे इसलिए मैं उनके रूम में उनके रूम का लाइट बंद करने के लिए गयी तो देखा कि भाई अपने मोबाइल में पोर्न देख कर मुठ मार रहे थे.</p>
<p>मैं ये खिड़की से देख कर बाहर आ गयी. भाई को देख कर मुझे भी अपने मोबाइल में पोर्न देखने का मन किया तो मैं अपने मोबाइल में पोर्न देखने लगी.</p>
<p>मेरे मोबाइल में पोर्न पहले से ही था क्योंकि मेरे ऑफिस में जो लड़की मेरी सहेली बनी थी, वो मुझे हमेशा पोर्न भेजती रहती थी. उसके बॉयफ्रेंड उसको पोर्न विडियो भेजते थे तो वो मुझे भेजती थी. मैं उससे दोस्ती करने के बाद ही इतना बिगड़ गयी थी कि मैं रोज मोबाइल में पोर्न देखने के बाद और अपनी चूत में उंगली करने के बाद ही सोती थी.</p>
<p>मैं अपनी ऑफिस वाली सहेली मौलीश्री के साथ रहते रहते कभी कभी भाई से छुपकर घूमने भी चली जाती थी. मौलीश्री मेरे घर से कुछ दूरी पर रहती थी और वो अपनी स्कूटी से आती थी तो हम दोनों सहेलियां जिस दिन हम लोग की छुट्टी रहती थी, घूमने जाती थी.</p>
<p>मैं भी अपने ऑफिस वाले लड़के से बात करती थी और ऐसे ही मौली के कहने पर मैं भी उसके साथ घूमने जाने लगी.</p>
<p>हम दोनों एक दिन घूमने गए थे और जगेश ने मुझे उसकी गर्लफ्रेंड बनाने के लिए मुझे कहा. उस वक्त तो मैंने उसे कुछ नहीं कहा पर अगले दिन मैंने अपनी सहेली से पूछने के बाद उसको हाँ बोल दी.<br />
और अब मैं और जगेश हम दोनों एक दूसरे के साथ रोज बात करने लगे.</p>
<p>मेरी सहली मौली मुझे बताती थी कि वो अपने बॉयफ्रेंड से कैसे चुदाई का मजा लेती है तो मुझे भी चुदवाने का मन करता था और मेरी चूत भी गीली हो जाती थी. मैं मौली से पूछती थी कि ‘कैसे चुदवाती हो’ तो वो सब कुछ खुल कर बताती थी.<br />
मेरे अन्दर की वासना जग गयी थी और मुझे भी चुदवाने का मन करता था. मैं रोज रात को अपनी चूत उंगली करती थी लेकिन अब मेरा उंगली करने से भी ज्यादा सेक्स करने का मन करता था.<br />
मेरी सहेली ने मुझे बताया कि मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स कर लूं क्योंकि वो भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल में जाकर सेक्स करती थी.</p>
<p>एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड जगेश ने मुझे किस करते हुए बोला कि वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता है. हम दोनों बहुत दिन से एक दूसरे के साथ थे. मैं भी सेक्स करना चाहती थी तो मैं भी मान गयी. मेरी सहेली के बताये होटल में जाने का हम दोनों ने एक दिन तय कर लिया. मैं बहुत खुश थी कि आज मुझे लंड से चुदवाने के लिए मिलेगा क्योंकि मैं अपनी चूत में उंगली करते करते एकदम बोर हो गयी थी. मुझे लंड से चुदवाने का मन करता था.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड दोनों होटल में गए और उसने रूम लिया. होटल रूम में जाने के बाद हम एक दूसरे को किस करने लगे. वो मुझे किस करते हुए मेरी गांड को भी दबा रहा था.</p>
<p>तभी हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए और हम नंगे हो गए. मैं इतना गर्म हो गई थी कि मेरी चूत गीली हो गयी थी, मेरी चूत से पानी निकल रहा था.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड जगेश मुझे बिस्तर पर ले गया और मेरी चूची को चूसने लगा. मेरी चूचियों को चूसने के बाद उसने मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और उसे किस करने लगा. मैं भी गर्म होकर सिसकारियाँ लेने लगी.</p>
<p>अब वो मेरी चूत में अपनी जीभ डाल कर मेरी चूत को चाटने लगा. मैं और ज्यादा जोश में आकर सिसकारियाँ भरने लगी उम्म्ह … अहह … हय … ओह … और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाने लगी.</p>
<p>हम दोनों अब होटल के रूम में असली सेक्स करने के लिए बेचैन होने लगे. मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में आधा डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा. मुझे शुरू में दर्द हो रहा था लेकिन जब उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया तो मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी. उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए ताकि मेरी सिसकारियाँ होटल रूम से बाहर नहीं जायें.</p>
<p>वो मुझे किस करने लगा और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर कुछ देर के लिए रुक गया. मैं जब कुछ देर के बाद नार्मल हो गयी तो जगेश मुझे चोदने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी और अपनी गांड उठा उठाकर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी.</p>
<p>हम दोनों प्रेमी सेक्स करने लगे. हम दोनों कभी एक दूसरे को किस कर रहे थे तो कभी एक दूसरे को जोर से गले लगा रहे थे.</p>
<p>मुझे अपनी सहेली की बात याद आ रही थी. वो कहती थी कि सेक्स करने में बहुत मजा आता है और सच में सेक्स करने में बहुत मजा आता है.</p>
<p>मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करने के साथ सिसकारियाँ भी ले रही थी. उसने मुझे चोदते चोदते मेरी चूची को जोर से दबा दिया तो मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गयी. मेरा बॉयफ्रेंड मुझे चोद रहा था और मैं उतावली होकर उससे चुदवा रही थी.</p>
<p>कुछ ही देर बाद हम दोनों सेक्स करते करते झड़ गए और कुछ देर के लिए शांत हो गए.</p>
<p>एक बार सेक्स करने के बाद जगेश ने कॉफ़ी का आर्डर दिया और कुछ देर बाद वेटर हमारे लिए कॉफ़ी लेकर आया. जब वेटर रूम में आया तो मैं बाथरूम में चली गयी क्योंकि मैं नंगी थी और वो कॉफ़ी देकर चला गया और मेरे बॉयफ्रेंड ने उसको टिप दिया.</p>
<p>हम दोनों ने स्वाद ले ले कर कॉफ़ी पी. होटल रूम में एक बड़ी टी.वी. लगा था और हम दोनों टी.वी. देखने लगे. हम दोनों को रोमांटिक गाने बहुत पसंद हैं तो हम रोमांटिक गाने देख रहे थे.</p>
<p>मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दोनों लोग नंगे थे और वो मुझे अपनी बाँहों में लेकर मेरी चूची को दबा रहा था. मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दुबारा सेक्स करने के लिए गर्म हो गए और हम एक दूसरे को चूमने लगे.</p>
<p>मेरा बॉयफ्रेंड होंठ को चूम रहा था और मैं उसके होंठ को चूम रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे को किस कर रहे थे. मुझे किस करने के बाद जगेश मेरे बूब्स को मसलने लगा और उसका मोटा लंड मैं हिलाने लगी.<br />
मेरा बॉयफ्रेंड मेरी चूची को मसलने के बाद मेरी चूत को चाटने लगा और उसके बाद उसने अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.</p>
<p>मैं सिस्कारियाँ लेने लगी और मुझे सेक्स करने का मन करने लगा. उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और जोर से धक्का मेरी चूत में मारा था तो मैं चीख उठी और कुछ देर में मैं सीत्कारें भरने लगी- आह उई उई आह!<br />
और वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा.</p>
<p>मेरी जान ही निकल गयी थी क्योंकि वो बहुत जोर जोर से धक्का मार रहा था. उसका लंड पूरा मेरी चूत के अन्दर जा रहा था और मैं चुदासी आवाजें निकाल रही थी. हम दोनों सेक्स कर रहे थे और मैं अपनी गांड उठा उठाकर अपने बॉयफ्रेंड का लंड अपनी चूत में ले रही थी.</p>
<p>फिर सेक्स करते करते हमने पोजीशन बदल ली, मैं घोड़ी बन गयी और मेरा बॉयफ्रेंड मेरे पीछे आ गया और मेरी चूत को चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. जगेश मेरी गांड को मसल रहा था और मुझे चोद रहा था.<br />
थोड़ी देर में ही हम सेक्स करते करते झड़ गए, हमारा पानी निकल गया था और हम दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए थे. ऐसी जोरदार चूत चोदन करने के बाद कब हमारी नींद लग गयी पता ही नहीं चला.</p>
<p>हम दोनों जब उठे तो शाम हो चुकी थी. मुझे दो बार सेक्स करने के बाद बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.</p>
<p>मैं अपनी चूत को साफ़ करने बाथरूम में गयी, अपने आपको अच्छे से साफ़ किया और उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहन लिए.</p>
<p>जगेश भी जाग चुका था, वो बाथरूम जाकर लौटा और कुछ देर में उसने अपने कपड़े पहन लिये. हम दोनों ने होटल रूम में ही कुछ देर तक बैठ कर बातें की और उसके बाद हम होटल रूम से बाहर आ गए.</p>
<p>मैंने अपने मुंह पर कपड़ा बाँध कर अपना चेहरा छुपा लिया था. हम होटल से बाहर आ कर एक गार्डन में गए और वहां कुछ देर बैठकर एक दूसरे की बाँहों एक दूसरे को किस किया.<br />
और उसके बाद मैं और मेरा बॉयफ्रेंड अपने अपने घर आ गए.</p>
<p>मैंने अपनी होटल सेक्स की बात अपनी सहेली मौलीश्री को बताई तो वो भी गर्म हो गयी थी और वो भी अगले दिन ही अपने बॉयफ्रेंड से सेक्स के लिए होटल गयी.</p>
<p>अब हम दोनों सहेलियां अपनी अपनी चुदाई की बातें शेयर करती हैं. हम दोनों एक साथ ऑफिस में काम करते हैं. मौलीश्री तो इतने दिन में बहुत सारे बॉयफ्रेंड बदल चुकी है लेकिन मैं अभी भी उसी से चुदवाती हूँ.<br />
मेरी सहेली मुझे नए बॉयफ्रेंड बनाने के लिए बोलती है. अगर मैंने कोई नया बॉयफ्रेंड बनाया तो मैं आपको तो अपनी सेक्स कहानी अवश्य बताऊँगी.<br />
आप सबको मेरी होटल सेक्स कहानी कैसी लगी? आप सब मुझे मेल करके बताये. आप सब फीडबैक देंगे तो मैं अपनी और भी कहानी बताऊँगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खेल वही भूमिका नयी-5</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/khel-vahi-bhumika-nayi-part-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:27:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Kamukta]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[अभी तक इस सेक्स स्टोरी के चौथे भाग खेल वही भूमिका नयी-5 तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली का पति कांतिलाल मुझे बेतहाशा पेले जा रहा था. अब आगे: मैं अपनी टांगें बिस्तर पर पटकने लगी और दर्द से छटपटाने लगी. मैं सिर पटकने लगी. मुझे इतनी जोर दर्द हुआ कि पेट में ऐसा लगा <a title="खेल वही भूमिका नयी-5" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/khel-vahi-bhumika-nayi-part-5/" aria-label="Continue reading खेल वही भूमिका नयी-5">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तक इस सेक्स स्टोरी के चौथे भाग<br />
खेल वही भूमिका नयी-5<br />
तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली का पति कांतिलाल मुझे बेतहाशा पेले जा रहा था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मैं अपनी टांगें बिस्तर पर पटकने लगी और दर्द से छटपटाने लगी. मैं सिर पटकने लगी. मुझे इतनी जोर दर्द हुआ कि पेट में ऐसा लगा कि मेरी बच्चेदानी फट गई. मैं अभी संभल भी नहीं पाई थी कि उसने एक ही सांस में उसी तरह के लगातार तीन धक्के मार कर अपना लिंग मेरी योनि के अंतिम छोर तक पेला और मेरे ऊपर रुक गया.</p>
<p>मैं दर्द से छटपटाने का प्रयास भी नहीं कर पा रही थी … क्योंकि उसने मुझे अपनी पूरी ताकत से पकड़ रखा था. मेरी सांस जैसे रुक सी गई थी और मुँह से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी. मैं अपने पैर घुटनों से मोड़ जांघें चिपकाने जैसे करने लगी. </p>
<p>वो मुझे तड़पता हुआ देखता रहा और बहुत समय के बाद जब मैंने अपनी आंखें खोलीं, तो वो मुझे मुस्कुराते हुए देख रहा था. मेरे पेट में नाभि के पास दर्द था, पर अब कम हो गया था.</p>
<p>मैंने उसे गुस्से में बोला- हटो मेरे ऊपर से … आप बहुत बेरहम इंसान हो.<br />
पर उसने मेरे हाथों को और जोर से दबाया और धीरे धीरे लिंग अन्दर बाहर करता हुआ बोला- दर्द में ही तो मजा है सारिका, अभी ये दर्द तुम्हें खुद मजेदार लगने लगेगा.</p>
<p>मैं गुस्से में थी और उसे अपने ऊपर से हटाने का प्रयास करते हुए बोली- कोई इतनी बेरहमी से चोदता है क्या, मैंने क्या मना किया था आपको … मैं आपको सम्भोग तो खुद मर्जी से करने दे रही थी.<br />
पर वो मुझे हिलने तक नहीं दे रहा था और बोला- अच्छा माफ कर दो, अब आराम से करूंगा. क्या करूं, तुम हो इतनी सेक्सी कि खुद को रोक पाना मुश्किल था.</p>
<p>इतना कह कर वो धीरे धीरे मुझे धक्के देते हुए लिंग अन्दर बाहर करने लगा. पर मैं अभी भी उसे अपने ऊपर से हटाने का प्रयास कर रही थी. वो मुझे धक्के मारे जा रहा था और मैं बिना उसे कुछ बोले अपने ऊपर से हटाने का जोर लगा रही थी.</p>
<p>करीब 5 मिनट तो ऐसे ही हम दोनों में लड़ाई चलती रही. फ़िर उसने मेरे हाथ छोड़ दिए और सिर मेरे सिर के पास रख मुझे कंधों से पकड़ लिया. अब तो मैं और भी उसे हटा नहीं सकती थी. उसके धक्के अब मेरे मन को कमजोर करने लगे थे और जैसे जैसे वो मेरे गले को चूमता हुआ धक्कों की गिनती बढ़ाने लगा, मैं भी उसके आनन्द में खोने लगी.</p>
<p>जैसे जैसे धक्के बढ़ते गए, वैसे वैसे मेरी गर्माहट भी बढ़ती गई और मैं उस मस्ती में उसको अपनी बांहों में जकड़ने लगी. कुछ ही पलों मैं उसके लिंग से मेरी योनि में हो रही रगड़ से प्यार करने लगी. मैं खुद ही अपनी पूरी जांघें खोल कर उसे भरपूर जगह देने लगी कि वो आराम से मुझे धक्के मारे.</p>
<p>कांतिलाल अब तेज़ी से सांसें लेने लगा था. वो अब थकने जरूर लगा था, मगर धक्कों में कोई कमी नहीं आने दे रहा था. दूसरी तरफ मेरी भी उत्तेजना में कोई कमी नहीं थी. मैं भी आह आह ओह ओह करती हुई उसका साथ दे रही थी.</p>
<p>तभी मैं उसके चूतड़ों को अपनी टांगों से लपेट कर और हाथों से उसे पीठ को पकड़ अपनी ओर खींच कर बोल पड़ी- कांतिलाल जी … आह आह और तेज़ चोदो और तेज़ धक्के मारो … रुकना मत.</p>
<p>कांतिलाल ने मुझे इस कामुक अवस्था में पाते ही मेरे होंठों से होंठ चिपका लिया. टांगें अपनी सीधी कर और हाथों को बिस्तर पर टिका कर मुझे इतने तेज तर्रार धक्के मारे कि एक पल में ही मैं सिसकते, कराहते हुए उसे पकड़ कर नीचे से उछलती हुई झड़ने लगी.</p>
<p>एक मिनट से कम समय में ही उसने अनगिनत धक्के मारे और मैं झड़ कर ढीली पड़ गई, पर उसके धक्के रुके नहीं. मैं हांफ रही थी और उसकी भी सांसें फूलने लगी थी.</p>
<p>मैंने बोला- थोड़ी देर रुक जाओ कांतिलाल जी. </p>
<p>उसने भी मेरी बात सुनते हुए अपना लिंग मेरी योनि के भीतर ही रखा और मेरे ऊपर लेटा रहा.<br />
वो बोला- अंत तक मेरा साथ दोगी न?<br />
मैं बोली- कोशिश करूँगी, आपने तो पहले ही मेरी ताकत सारी खत्म कर दी है.<br />
उसने बोला- कुछ नहीं होगा, बस कोशिश करती रहो, अभी काफी देर तक करना है और अभी तो दो दिन और यहां रहना है.<br />
मैंने बोला- पता नहीं मैं अभी बिस्तर से उठ पाऊंगी या नहीं … दो दिन तो बहुत दूर की बात है. आपने तो पहले ही मेरी सारी ऊर्जा चूस ली है. मेरी जांघें फैले फैल दर्द होने लगी हैं.<br />
तब उसने कहा- कोई बात नहीं. इतनी सारी तरकीबें सीखी हैं जीवन में, वो कब काम आएंगी.</p>
<p>इतना कह कर वो मेरे ऊपर से उठ गया और घुटनों के बल बिस्तर पर बैठ गया. उसका लिंग बुरी तरह से तनतना रहा था और मेरे योनि के रस में भीग कर झागदार और चिपचिपी दिख रही थी.</p>
<p>उसके उठने से मेरी जांघों को बड़ी राहत मिली और मेरी योनि, जांघें, चूतड़ों को भी राहत सी मिल गई. बिस्तर भी गीला हो गया था.</p>
<p>कांतिलाल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उठाया और बोला- आओ अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ.<br />
मैंने बोला- मुझमें इतनी ताकत नहीं बची है.<br />
उसने बोला- आराम से धीरे धीरे हिलना और जांघें घुटनों से मोड़ लेना, इससे आराम मिलेगा. नीचे से मैं भी जोर लगाऊंगा.</p>
<p>मैं फिर भी नहीं मान रही थी … मगर उसने जबरदस्ती मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और मेरी टांगें दोनों तरफ फैला कर अपना लिंग मेरी योनि में प्रवेश कराते हुए मुझे सीधा होने को बोला.</p>
<p>मैं बिल्कुल 90 डिग्री के कोण में उसके ऊपर थी. लिंग तो उसने घुसा लिया था मगर मुझसे जोर लग ही नहीं रहा था. इसलिए उसने खुद नीचे से हल्का हल्का जोर देना शुरू किया और मेरी कमर पकड़ कर अपने हाथ से मुझे हिलाना भी शुरू कर दिया.</p>
<p>संभोग करते हुए लगभग एक घंटा होने को था और कांतिलाल उन मर्दों में से था, जो अपने अनुसार अपना वीर्य रोक सकते थे. सम्भोग के बीच में अंतराल होने का मतलब था, अब कांतिलाल ने इससे पहले जित्तनी देर सम्भोग किया था, उतनी ही देर संभोग वो बिना झड़े फिर से कर सकता है. मैं बिल्कुल उसके विपरीत थी, मैं और अधिक जल्दी झड़ने वाली थी. </p>
<p>यही हुआ, धीरे धीरे उसके धक्के बढ़ने लगे और संभोग की क्रिया भी आगे बढ़ने लगी. </p>
<p>कुछ पलों के धक्कों में मैं फिर से गर्म होने लगी और मेरी कमर अपने आप चलते हुए लिंग पर योनि धकेलनी लगी. मैं अपने हाथ बिस्तर पर टिका कर जोर लगाते हुए तेज़ धक्के मारने लगी.</p>
<p>कांतिलाल आनन्द से सिसकारियां भरने लगा और पूरी ताकत से कभी मेरे स्तन, तो कभी चूतड़ों को मसलने लगा. मैं उसकी उत्तेजना समझ गई थी और संभोग की अवधि भी बहुत अधिक हो चुकी थी, इसलिये अब कांतिलाल को झड़ना थोड़ा आसान सा लगने लगा था.</p>
<p>मर्दों की कमजोरी ये होती है कि वे औरत की उत्तेजना देख कर बेकाबू हो जाते हैं. अब मेरे लिए सही मौका था और जिस तरह से उसके लिंग की नाड़ियां अभी चल रही थीं, उससे मुझे एहसास हो रहा था कि उसका लक्ष्य समीप है.</p>
<p>मैं भी अब खुद को ज्यादा देर नहीं रोक सकती थी, इसलिए पूरे जोर से धक्के देने लगी ताकि मैं झड़ जाऊं.</p>
<p>पर एक ही पल में कांतिलाल ने मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से गिरा दिया और बहुत तेज़ी में बिस्तर से नीचे उतर गया.</p>
<p>अपनी मर्दानी ताकत का प्रयोग करते हुए उसने मुझे भी मेरी टांगें पकड़ खींचा और बिस्तर से नीचे उतार दिया. उसने मुझसे कुछ नहीं कहा, बल्कि अपनी मनमानी करते हुए मेरी गर्दन पकड़ मुझे बिस्तर पर झुका दिया.</p>
<p>मैं उसके जोर के आगे कुछ समझ ही नहीं पाई और कमजोर महिला की भांति उसके अनुसार बिस्तर पर पेट के बल लेट गई.</p>
<p>मेरा पेट से लेकर सिर तक का हिस्सा बिस्तर पर था और टांगें जमीन पर टिकी थीं. कांतिलाल ने तेज़ी में मेरी टांगें फैलाईं और तुरंत अपना लिंग में योनि में घुसा दिया. ये सब इतनी जल्दी में उसने किया कि मेरे लिए न कुछ समझ पाना आसान था, न खुद को संभाल पाना. </p>
<p>इस तरह के जल्दबाजी से मैं इतना तो समझ गई कि कांतिलाल हद से ज्यादा उत्तेजित था और अब उसके धक्के मेरे लिए बड़ी चुनौती थी.</p>
<p>मुझे अंदाज़ा हो चुका था कि वो झड़ने के क्रम में जो धक्के मुझे मारेगा, वो असहनीय होगा … पर मैं उसके वश में थी और मेरे पास बर्दाश्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.</p>
<p>उसने जैसे ही अपना लिंग घुसाया, पल भर के भीतर ही उसने 20-25 धक्के मार दिए. पर वो धक्के ज्यादा गहराई तक नहीं थे, सो मुझे परेशानी की जगह आनन्द मिला.</p>
<p>इससे मुझे लगा कि कोई डर की बात नहीं है और मैं बेफिक्र हो गई थी. इन धक्कों के बाद दो पल के लिए कांतिलाल रुक गया और हांफने लगा. मैं भी अपनी बेचैनी संभाले अगले पल के इंतज़ार में बिस्तर पर लेटी राह देखने लगी.</p>
<p>हम दोनों अब तक पसीने पसीने हो चुके थे और मेरी जांघों में बहुत दर्द होने लगा था. योनि के भीतर भी बहुत दुख रहा था मगर उस वक़्त चरम सुख की लालसा के आगे हर दर्द सहने को तैयार थी. कांतिलाल का लिंग मेरी योनि के भीतर हिचकियां ले रहा था. उसने अब अपने बाएं हाथ से मेरी कंधे को पकड़ा और दाएं हाथ से मेरी कमर को थामा. फिर एक सुर में उसने धक्के मारने शुरू कर दिए.</p>
<p>उसके इस बार के धक्के इतनी ताकत और तेज़ी से थे कि मेरी सिसकारियां कराहों में बदल गईं. उसका हर धक्का इतनी गहराई तक जा रहा था, जैसे मानो मेरी नाभि भेद कर निकल जाएगा. दो मिनट के भीतर ही मैं अपनी जांघें चिपकाने का प्रयास करने लगी और योनि बिस्तर के किनारों पर दबाने लगी. मैंने चादर को मुठ्ठियों में भर लिया और उसके धक्कों के साथ अपनी आवाजें निकालने लगी.</p>
<p>‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … आह … ओह्ह..’</p>
<p>मैं भलभला कर झड़ने लगी.</p>
<p>मेरी टांगें काम्पने लगी थी और मैं अपनी जांघें आपस में ऐसे चिपकाना चाह रही थी, जैसे मानो अपनी योनि छुपाने के प्रयास करना चाह रही होऊं. पर मेरे लिए संभव नहीं था, क्योंकि कांतिलाल ने अपनी दोनों टांगों से मेरी टांगें फैला रखी थीं और धक्के मारते हुए अपने घुटनों से मेरी टांगें रोक कर उन्हें फैलाये रखा था.</p>
<p>मेरी योनि से रस की झड़ी फूट गई थी और मैं रस को अपनी जांघों से पैर तक बहता हुआ महसूस करने लगी थी.</p>
<p>मैं अगले 20 से 30 धक्कों में पूरी तरह झड़ चुकी थी. मगर कांतिलाल रुकने का नाम नहीं ले रहा था. वो मुझे उसी तेज़ी, ताकत और गहराई से धक्के मारे जा रहा था.</p>
<p>मैं ढीली पड़ने लगी थी और अब विनती करने लगी- छोड़ दो कांतिलाल जी … मैं मर जाऊंगी, अब और नहीं सह सकती.</p>
<p>पर कांतिलाल के कानों में जूँ तक नहीं रेंगी. वो निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा. लगभग 5 मिनट के बाद उसने मुझे एक बहुत ही जोर का धक्का मारा और मैं चीख पड़ी- ओह्ह … म म. … अअअअह..<br />
मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी बच्चेदानी के मुँह में उसका सुपारा घुस गया. उसने उस झटके के साथ एक तेज़ पिचकारी मारी. फिर 1-2-3-4 धक्के मार मेरे पीठ पर निढाल होकर गिर पड़ा और तेज़ी से हांफने लगा.</p>
<p>उसके झड़ने से मुझे बहुत राहत मिली, पर उसका वजन मेरे ऊपर था. उसका लिंग अभी भी मुझे तना हुआ महसूस हो रहा था और रह रह कर हिचकियां ले रहा था. उसके लिंग की नसों में दौड़ता हुआ खून मैं अपनी योनि में महसूस कर रही थी. </p>
<p>काफी देर तक वो मुझे पकड़ कर सुस्ताता रहा. उसका लिंग भी सिकुड़ कर सामान्य हो गया और फिसलता हुआ मेरी योनि से बाहर निकल गया.</p>
<p>लिंग के निकलते ही उसका गाढ़ा वीर्य धीरे धीरे मेरी योनि की अंतिम छोर से रिसता हुआ योनि द्वार से बाहर निकलने लगा.</p>
<p>मैं बहुत कमजोर महसूस करने लगी थी. बाकी के समय तो बदन में इतनी ताकत रहती है कि अपनी योनि की मांसपेशियों को अपने मन मुताबिक सिकोड़ और ढीली कर सकूं. पर मेरे बदन में अब इतनी ताकत नहीं बची थी और न ही मैं जोर लगा पा रही थी.</p>
<p>स्खलन के बाद का समय तो योनि सिकोड़ने और ढीली करने से वीर्य बाहर निकलने लगता था, पर अब तो मुझसे कुछ भी नहीं हो पा रहा था. मेरी योनि का छेद जैसा का तैसा खुला महसूस हो रहा था, जिससे मैं ठंडी हवा का बहाव महसूस कर रही थी.</p>
<p>कांतिलाल का वीर्य इतना गाढ़ा था कि वो बहकर योनि द्वार तक आ तो गया था, पर एक बड़े से बूंदा की तरह मेरी योनि के बाहर चिपक कर झूलता रहा.</p>
<p>थोड़ी देर में कांतिलाल मेरे ऊपर से उठकर बिस्तर पर लेट गया और मैं वैसी ही पड़ी रही. मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था, सो कांतिलाल ने मुझे पकड़ कर बिस्तर पर चढ़ा लिया. पूरा बिस्तर पानी से गीला हो ही चुका था और अब वीर्य के दाग भी लग गए थे.</p>
<p>मैं बुरी तरह थक चुकी थी और ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी योनि की नसें सुन्न हो गई हैं. मेरी टांगों को मानो लकवा सा मार गया था. पूरे बदन में खून रुक सा गया था.</p>
<p>कांतिलाल के मित्रों ने तो अभी तक मेरे साथ केवल संभोग किया था, पर कांतिलाल ने तो मुझे पूरी तरह से निचोड़ लिया था. पता नहीं अगले सुबह क्या होने वाला था, पर अब मैं सोचना छोड़ आंखें बंद करके सो गई. रात के तीन बज चुके थे और कांतिलाल ने करीब डेढ़ घंटे तक मेरे पूरे बदन को रौंदा था.</p>
<p>अगली सुबह मैं 10 बजे उठी, तो कमरे में कांतिलाल नहीं था. मैं अभी भी पूरी तरह से नंगी पड़ी थी. मैंने सामने पड़ा गाउन पहना और स्नानागार चली गई. वहां मैंने शौच किया और गाउन उतार खुद को आईने में देखा. वहां बड़ा सा आइना लगा था, सो मैं उसमें ऊपर से नीचे तक अपने आपको देख सकती थी. अपनी हालात देख कर रात की कहानी पल पल मेरे आंखों के सामने आ गई. वो जो रात नहीं दुखा था, मुझे वो भी दुख रहा था. कांतिलाल का वीर्य सूखकर पापड़ की तरह मेरी योनि के आस पास और बालों में चिपका हुआ था. स्तनों पर हल्के दांतों के निशान थे और छूने से दर्द भी हो रहा था.</p>
<p>मैं कुछ देर में नहा धो कर साफ़ हो गई और बाहर आ गई. बाहर बिस्तर की तरफ गई, तो दंग रह गई. मुझे डर लगने लगा कि कमरे की साफ सफाई के लिए जो भी आएगा, वो समझ जाएगा. </p>
<p>तभी रमा कमरे में आ गई और मुझे अपने गले से लगाकर बोली- क्या एक्टिंग की तुमने कल, आज सब चकित हो जाएंगे.</p>
<p>फिर उसने मुझे पूछा- रात कैसी कटी तुम्हारी?<br />
मैंने उत्तर दिया- ठीक रही.<br />
रमा- कांति ने तुम्हें सोने दिया या नहीं?<br />
मैं- हां सोने तो दिया, पर उससे पहले मुझे निचोड़ कर रख दिया.</p>
<p>रमा हंसती हुई कहने लगी- अरे यही तो असली मजा है. जब तक थक के कोई चूर न हो जाए, सेक्स का क्या मजा. वैसे कांति तुम्हें बहुत पसंद करता है, इसलिए शायद कल ज्यादा ही आक्रामक हो गया होगा.<br />
मैं- जो भी हो, तुम्हारा पति बहुत ताकतवर है.<br />
रमा- हां जानती हूं और मुझे बहुत पसंद है. जब मैं उसकी मर्दानगी देखती हूं, तो मुझे घमंड होने लगता है. कल मेरी इच्छा थी तुम दोनों को देखने की, पर किस्मत में नहीं था. पर आज या कल में शायद मुझे देखने का मौका मिले. मुझे अपने पति की मर्दानगी पर गर्व होता है.</p>
<p>मैं कुछ नहीं बोली.</p>
<p>वो आगे बोली- मैं भी नहा धो लूं, कल रात में हमारा भी दो राउंड चला.</p>
<p>वो नहाने स्नानागार चली गई और मैं शृंगार करने लगी. जब वो बाहर आई तो केवल एक तौलिए में थी और बहुत मादक दिख रही थी. हो भी क्यों न … इतना संजो के रखा जो था. हफ्ते में 3 बार पार्लर भी तो जाती थी. ऊपर से खान-पान भी अच्छा और कसरत भी करती थी. </p>
<p>कमरे में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था, सो वो आईने के सामने आते ही अपने बाल सुखाने लगी और फिर अलमारी से कपड़े निकाल कर आईने के सामने तौलिया निकाल कर नंगी हो गई.</p>
<p>मैं भी एक औरत हूँ और कुछ भी नया नहीं था, सो उसे शायद कोई असहज नहीं लगा. वो नंगी हो गई. मैंने उसे देखा, रमा में पहले के मुकाबले थोड़ा बदलाव आया था, अब उसके स्तन पहले की तरह सुडौल नहीं थे बल्कि झूल रहे थे, उसके चूचुक भी काफी लंबे दिख रहे थे. चूतड़ पहले से बड़े बड़े, पर पेट सपाट था क्योंकि व्यायाम करती थी. उम्र की वजह से ऐसा था, पर अभी भी वो बहुत कामुक और आकर्षक थी. फिर दिल से तो अभी भी वो जवान ही थी. </p>
<p>उसने अपना शृंगार करना शुरू किया. महंगा लोशन और मेकअप लगाया और जीन्स और शर्ट पहन तैयार हो गई. जीन्स और शर्ट में वो किसी 30 साल की महिला के जैसे दिख रही थी. </p>
<p>मैं अभी भी गाउन में थी और उलझन में थी कि क्या पहनूँ. पर जैसे ही रमा तैयार हो गई, उसने मेरी उलझन दूर करने में सहायता तो की, पर वो सब उसकी मर्जी से था … न कि मेरी मर्ज़ी से.</p>
<p>उसने पहले तो मुझे एक टी-शर्ट और स्कर्ट पहनने को कहा, पर वो मुझे जंच नहीं रहे थे.</p>
<p>तो उसने मुझे एक लेगिंग और टॉप दिया. वो वैसे तो मेरे नाप के ही थे, मगर मैंने ऐसे कपड़े कभी नहीं पहने थे … सो मुझे बहुत कसाव सा महसूस हो रहा था. हालांकि उस परिधान में मैं ज्यादा बुरी भी नहीं लग रही थी. पर उम्र के हिसाब से देखा जाए, तो सही भी नहीं लग रहे थे. पर शहरों में तो मुझसे भी बूढ़ी औरतें ये सब पहनती हैं. बाकी बुराई ये थी कि कपड़ों में मेरे उभार साफ दिख रहे थे. मेरे चूतड़ गठीले और काफी बड़े दिख रहे थे और टॉप ऐसा था, जिसकी गर्दन बहुत अधिक खुली थी और उसमें से मेरे एक तिहाई स्तन साफ़ दिख रहे थे.</p>
<p>मुझे जहां तक पता था कि उस होटल से बाहर नहीं जाना था, सो मैंने ज्यादा संकोच नहीं किया. पर जब मैंने गौर से अपने पेट को देखा, तो सच में बहुत लज्जा सा महसूस हुई कि मेरा पेट इतना बड़ा दिख रहा है और दूसरी के मेरी योनि उस लेगिंग में उभर कर दिख रही थी. </p>
<p>इसलिए मैंने रमा से बोला- ये ड्रेस अच्छी नहीं लग रही. मुझे अपने तरीके से तैयार होने दो. </p>
<p>इस पर वो मुझसे नाराज़ होने लगी. तब मैंने उसे समझाया कि जब सबको चौंकाना ही है, तो थोड़ी मेरी भी बात मान लो.</p>
<p>इस बार वो मान गई और फिर मैं अपने तरीके से अपनी साड़ी पहन कर घरेलू और संस्कारी महिला की तरह तैयार हो गई. मुझे इस रूप में देख रमा खुद चकित हो गई. </p>
<p>मेरी इस सेक्स कहानी पर आपके मेल आमंत्रित हैं.<br />
[email protected]</p>
<p>कहानी का छठा भाग: खेल वही भूमिका नयी-6</p>
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			</item>
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		<title>पति के दोस्त ने मेरी कामवासना जगायी</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/pati-ke-dost-meri-kamvasna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:51:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
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					<description><![CDATA[मैं घर में अकेली थी. मेरे पति के दोस्त ने अपना मोटा लंड दिखा कर मेरी कामवासना कैसे जगायी. पढ़ें इस फ्री हिंदी सेक्स कहानी में! दोस्तो, मेरा नाम सपना है. मेरी पिछली कहानियाँ अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज पर प्रकाशित हुई थी. मुझे बहुत अच्छा रेस्पोन्स मिला. आप लोगों के इस प्यार के लिए मैं आप <a title="पति के दोस्त ने मेरी कामवासना जगायी" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/pati-ke-dost-meri-kamvasna/" aria-label="Continue reading पति के दोस्त ने मेरी कामवासना जगायी">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मैं घर में अकेली थी. मेरे पति के दोस्त ने अपना मोटा लंड दिखा कर मेरी कामवासना कैसे जगायी. पढ़ें इस फ्री हिंदी सेक्स कहानी में!</p>
<p>दोस्तो, मेरा नाम सपना है. मेरी पिछली कहानियाँ अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज पर प्रकाशित हुई थी. मुझे बहुत अच्छा रेस्पोन्स मिला. आप लोगों के इस प्यार के लिए मैं आप सभी को धन्यवाद करना चाहती हूं.</p>
<p>बहुत दिनों से मुझे मेल प्राप्त हो रहे थे जिनमें पाठकों की शिकायत थी मेरी कहानियां काफी समय से प्रकाशित नहीं हो रही हैं. मैं आप लोगों से कहना चाहती हूं कि मुझे कहानी लिखने का समय नहीं मिल रहा था इसलिए मैं नई कहानी नहीं लिख पा रही थी. फिर मैंने अपनी ये कहानी आप लोगों को बताने का मन बना लिया.</p>
<p>अब मैं अपनी आज की सेक्स कहानी आप लोगों के सामने रख रही हूं. यह बात मेरी शादी के चार साल बाद की है. यह घटना मेरी जिन्दगी में हुई मेरी चूत चुदाई की सबसे बुरी चुदाइयों में से एक है.</p>
<p>मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. उनको काफी देर तक काम करना होता है इसलिए वो देर रात को ही घर पर आते हैं. कई बार तो उनको अपने काम के चलते शहर से बाहर भी जाना पड़ा जाता है.</p>
<p>मगर यह उन दिनों की बात है जब मैं सेक्स को लेकर इतनी बेसब्र नहीं रहती थी. मेरे पति के ऑफिस में उनके एक दोस्त भी थे. उसका नाम विकास था. चूंकि मेरे पति शहर से बाहर गये हुए थे तो मेरे पति ने उनको बोल दिया था कि अगर मुझे किसी चीज की जरूरत हो तो मैं विकास से कह दूं. विकास कई बार मेरे घर पर भी आ जाते थे और उनको मैं अच्छी तरह जानती थी. </p>
<p>उस दिन जब मेरे पति घर से बाहर दूसरे शहर में गये हुए थे तो विकास का फोन आया था कि अगर आपको किसी भी जरूरत पड़े तो बस मुझे एक बार फोन कर देना. मैं आ जाऊंगा.<br />
मैंने कहा- ठीक है. अगर मुझे कुछ चाहिए होगा तो मैं बता दूंगी.<br />
विकास के साथ मेरी कई बार बात हो चुकी थी इसलिए हमारे बीच में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं था.</p>
<p>एक दिन की बात है जब मेरे घर पर मेरे सास ससुर नहीं थे. मैं उस वक्त अन्दर बाथरूम में नहाने के लिए गयी हुई थी. मैं बाहर से मेन गेट को बन्द करना भूल गई.</p>
<p>जब नहा कर सिर्फ तेलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर आई तो देखा कि विकास पहले से आये हुए थे. मैं उनको देख कर एक बार तो घबरा सी गई और फिर अपने बदन को छिपाते हुए कहने लगी- आप कब आये?<br />
वो बोले- बस कुछ ही देर पहले आया हूं. जब मैं आया था तो घर का मेन गेट खुला हुआ था और घर पर भी कोई नहीं था. मैंने कई बार आपको आवाज लगाई लेकिन आप शायद बाथरूम में होने की वजह से मेरी आवाज को सुन नहीं पाई.<br />
मैंने कहा- हां, मुझे अंदर कुछ सुनाई नहीं दिया.</p>
<p>उस दिन मैंने विकास के लिए चाय बना दी और फिर कुछ देर तक बातें करने के बाद वो चले गये. </p>
<p>मगर उस दिन के बाद मैंने एक बात नोटिस करनी शुरू कर दी कि विकास मेरे बदन को अब घूरने लगे थे. मेरे हिप्स और मेरे बूब्स को अक्सर मैंने उनको घूरते हुए देखा था. कई बार बहाने से वो मेरे बूब्स को टच करने की कोशिश भी करते थे.</p>
<p>लेकिन मैं उनमें कोई रुचि नहीं दिखा रही थी. मैं जानती थी कि उनके मन में मेरे लिए क्या चल रहा है. लेकिन मैंने कभी इस बात को जाहिर नहीं होने दिया कि मैं उनकी हरकतों के पीछे के मतलब को समझ रही हूं कि वो मेरी कामवासना जगा कर मुझे चोदना चाह रहा है.<br />
सच कहूं तो मुझे वास्तव में ही उनके अंदर कोई रुचि नहीं थी इसलिए मैं उसकी हरकतों को अनदेखा कर दिया करती थी. </p>
<p>ऐसे ही तीन चार दिन निकल गये. एक दिन जब घर पर कोई नहीं था तो मुझे बाजार से एक सामान की जरूरत आन पड़ी. मैंने विकास को फोन करके वो सामान मंगवा लिया.</p>
<p>जब वो सामान देने के लिए अंदर आये तो मैंने उनके हाथ से सामान लेने के लिए अपना हाथ आगे किया. मगर पता नहीं कैसे मेरा हाथ विकास की जिप के अंदर लटक रहे उसके लंड से स्पर्श हो गया. या फिर शायद विकास ने जानबूझकर मेरा हाथ उसके लंड से टच करवा दिया था.</p>
<p>उसके लंड को हाथ लगा कर मेरे बदन में एकदम से करंट सा दौड़ गया और मैंने हाथ पीछे खींच लिया. फिर दोबारा से मैंने संभलते हुए सामान लिया.</p>
<p>जब मैं रसोई में सामान रख कर वापस आई तो मैंने नीची नजरों से उसके लंड की तरफ देखा तो उसका लंड खड़ा होना शुरू हो गया था उसके लंड की शेप उसकी पैंट में अलग से ही दिखाई देने लगी थी.</p>
<p>मैं न चाहते हुए भी उसके लंड के आकार को देख रही थी. उसके लंड का साइज काफी बड़ा लग रहा था. पैंट के अंदर तने हुए लंड को देख कर मुझे कुछ-कुछ होने लगा था. मेरी कामवासना जागने लगी थी.</p>
<p>फिर मैंने उनको बैठने के लिए कहा. मैं रसोई में चाय बनाने के लिए चली गई. जब मैं वापस आई तो वो सोफे पर बैठे हुए थे. उनकी टांगें फैली हुई थीं और लंड वैसे ही एक साइड में अगल से दिखाई दे रहा था. वो सेक्स के लिए जैसे मेरी अनुमति मांग रहे थे.</p>
<p>मैंने एक दो बार उनके लंड को देखा तो उनके लंड में एक उछाल सा आ गया. मैं थोड़ी घबरा गई. काफी बड़ा और मोटा लंड लग रहा था विकास का. </p>
<p>फिर मैं उसके सामने वाले सोफे पर बैठ कर चाय पीने लगी. उसके बाद मुझे याद आया कि मैं उनके लिए खाने का कुछ सामान लाना तो भूल ही गयी. मैं दोबारा से उठ कर रसोई में गई और बिस्किट खोल कर प्लेट में रखने लगी.</p>
<p>तभी वो पीछे से आ गया और मेरे चूतडो़ं पर अपना लंड टच करते हुए मुझे अपनी बांहों में लेने की कोशिश करने लगा.<br />
मैंने कहा- ये क्या कर रहे हो आप?</p>
<p>लेकिन वो आगे बढ़ता ही जा रहा था. उसने अपने तने हुए लंड को पूरा मेरी गांड पर सटा दिया था. उसका लंड मेरी गांड की दरार पर सट कर जैसे अंदर ही घुसने के लिए मेरे कपड़े फाड़ने वाला था.</p>
<p>फिर उसने मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया और मेरे चूचों को दबाने लगा. अब मेरा मन भी करने लगा था. मैंने अपनी गांड को उसके लंड पर सटा दिया. फिर उसने मुझे अपनी तरफ घुमाया और हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से सट गये. </p>
<p>उसके बाद हम दोनों ही एक दूसरे के होंठों को जोर से चूसने लगे. कुछ देर तक वहीं रसोई में वो मुझे चूसता रहा और मेरे चूचों को दबाता रहा.</p>
<p>फिर उसके बाद वो मुझे उठा कर बेड वाले कमरे में ले गया. उसने मुझे ले जा कर बेड पर पटक दिया और अपने कपडे़ खोलने लगा. उसने शर्ट उतार दी. फिर वो मेरे ऊपर आ गया और दोबारा से मेरे चूचों को अपने मुंह में भरने लगा. फिर उसने मेरे टॉप को उतारा और मेरी ब्रा को खोल कर मुझे ऊपर से नंगी कर दिया. </p>
<p>मेरे चूचे हवा में आजाद हो गये. वो उन पर टूट पड़ा और मुझे नीचे लिटा कर जोर से उनको चूसने लगा. फिर उसने मेरे पजामे को भी निकाल दिया और मेरी पैंटी को निकाल कर मेरी चूत में उंगली करने लगा.</p>
<p>अब मैं पूरी तरह से गर्म हो गई थी. मैंने उसके लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.</p>
<p>काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के अंगों को इसी तरह सहलाते रहे. फिर वो घुटने के बल आकर अपनी पैंट को खोलने लगा. उसने पैंट नीचे की तो उसके अंडरवियर में उसका लंड बहुत बड़ा लग रहा था. उसने अगले ही पल अपने कच्छे को भी नीचे कर दिया.</p>
<p>अपने पति के दोस्त का लंड देखकर मेरी आंखें हैरानी से फैल गई. उसका लंड मेरे पति काफी बड़ा था और काफी मोटा भी था. एक बात और खास लगी उसके लंड की. वो काफी गोरा भी था. मेरे पति का लंड उसकी तुलना में काफी काला था.</p>
<p>फिर उसने अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाया और फिर मेरे हाथ में दे दिया. मैंने उसके लंड को हाथ में लिया तो वो काफी भारी लंड था. मैंने उसको हाथ में लेकर आगे पीछे करना शुरू कर दिया. वो तेजी से सिसकारियां लेने लगा.</p>
<p>फिर उसने अपना लंड मेरे मुंह में दे दिया. मेरे मुंह से उसका लंड संभाला नहीं जा रहा था. मेरा दम घुटने लगा. मैंने उसको हटाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं रुका और मेरे मुंह में धक्के देता रहा. कई मिनट तक लंड को चुसवाने के बाद उसने मेरे मुंह में ही अपना पानी निकलवा दिया.<br />
मैंने उसके मोटे लंड का सारा का सारा पानी पी लिया. </p>
<p>वीर्य निकलने के बाद उसने मेरी पैंटी को उठाया और अपने लंड को उससे साफ किया. मैंने वासना के वशीभूत अपने पति के दोस्त के लंड को दोबारा से चूसना शुरू किया. सोये हुए लंड को मैं मस्ती से चूसती रही और मैंने पांच मिनट के बाद उसके लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया.<br />
उसके लंड से चुदने की इच्छा अब मेरी भी होने लगी थी. मैंने नंगी फिल्मों में ही इतना बड़ा लंड देखा था.</p>
<p>जब विकास का लंड पूरा खड़ा हो गया तो उसने मुझे बेड पर पीछे धकेल दिया और मेरी टांगें अपने हाथ में ले लीं. उसने अपने लंड को मेरी चूत पर लगा दिया और फिर एक धक्का दे दिया. मेरी जान निकल गई. उम्म्ह … अहह … हय … ओह … इतना मोटा लंड मैंने चूत में पहली बार लिया था. </p>
<p>वो अपने लंड को घुसाता ही चला गया. मुझे काफी दर्द होने लगा लेकिन उसने बिना देरी किये मुझे चोदना शुरू कर दिया. वो गालियां देते हुए मेरी चूत की चुदाई करने लगा. मुझे उसके मुंह से गालियां सुनना भी पसंद आ रहा था. अब मैं भी चुदाई के पूरे मजे लेने लगी थी. </p>
<p>कई मिनट तक उसने इसी पोज में मेरी चूत की चुदाई की और फिर मुझे खड़ी कर दिया. उसने मेरी एक टांग को उठाया और फिर से चुदाई शुरू कर दी. वो गालियां देते हुए फिर से मुझे चोदने लगा.</p>
<p>वो बोला- साली रंडी, मैं बहुत दिनों से तेरी चूत को चोदना चाह रहा था. आज मैं तेरी चूत को इतना चोदूंगा कि तुझे चलने के लायक भी नहीं छोड़ूंगा.</p>
<p>इतना कह कर वो बुरी तरह से धक्के लगाने लगा. मेरी चूत फटने लगी. मुझे चूत में दर्द होने लगा लेकिन वो नहीं रुका. उसके धक्कों से हो रहे दर्द से मेरी आंखों में पानी आने लगा था. मगर फिर भी मैं उसका साथ दे रही थी क्योंकि मुझे भले ही दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत मिल रहा था.</p>
<p>कई मिनट तक मेरी चूत को रगड़ने के बाद उसने मुझे उल्टा कर दिया और फिर मेरी गांड ने नीचे तकिया लगा दिया. मुझे बेड पर उल्टा लिटाने के बाद उसने मेरी गांड पर थूक दिया और मेरी गांड के छेद पर लंड को रगड़ने लगा और फिर अचानक से मेरी गांड में अपना लंड पेल दिया.</p>
<p>मैं तो जैसे अधमरी सी हो गई. मुझे जोर का दर्द हुआ लेकिन वो मेरे चूचों को जोर से भींचने लगा और मेरा ध्यान चूचे दबवाने में चला गया. कुछ ही देर में मेरा दर्द कम होने लगा और फिर वो मेरी गांड में अपने लंड को आगे पीछे करके मेरी गांड की चुदाई करने लगा. अब मैं दर्द से रोने की बजाय हंस रही थी.</p>
<p>वो बोला- साली रंडी, तेरी हंसी को मैं रोने में बदल दूंगा. तेरी चूत तो अब इतनी टाइट नहीं रही लेकिन तेरी गांड तो मस्त मजा दे रही है. मुझे भी गांड में उसका मोटा लंड लेने बहुत मजा आ रहा था. मेरा मन कर रहा था कि मैं ऐसे ही उसके लंड को अपनी गांड में लेती रहूं. </p>
<p>वो बोलने लगा- रंडी तुझे तो रोज़ चोदने का मन करता है.<br />
मैंने कहा- तो फिर इतने दिन से क्यूं रुके हुए थे.<br />
वो बोला- मैं बस सही मौके का इंतजार कर रहा था.<br />
मैंने कहा- जब भी तुम्हारा मन किया करे तुम मेरी चूत की चुदाई कर सकते हो.<br />
वो बोला- मैं तो तेरी गांड की चुदाई भी रोज ही करूंगा साली रंडी. तुझे बहुत बड़ी रांड बना कर छोड़ूंगा साली.</p>
<p>ऐसा कहते हुए वो अपने लंड को मेरी गांड में पूरा घुसाने लगे थे. उसके बाद उन्होंने दोबारा से मुझे सीधा किया और मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया. अब वो दोगुने जोश में मेरी गांड में धक्के लगाने लगे. फिर कई मिनट तक मेरी चूत को चोदने के बाद उसने मेरी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया.<br />
मेरी चूत जैसे फट ही गई थी.</p>
<p>हम दोनों ऐसे ही नंगे पड़े रहे और फिर सो गये. शाम को उठे तो सच में मुझसे चला नहीं जा रहा था. उसने मेरी चूत और गांड का बाजा बजा दिया था.<br />
उसके बाद मेरे सास और ससुर के आने का टाइम हो गया तो विकास चला गया.</p>
<p>जब तक मेरे पति घर नहीं आये मैं विकास के लंड से चूत और गांड की चुदाई करवाती रही. मैंने अपने सास और ससुर की मौजूदगी में भी एक रात को चुदाई करवा ली. लेकिन उस रात को एक बार ही चुदाई हो पाई क्योंकि उनके उठने का डर था. इस तरह विकास ने मेरी चूत और गांड को चोद-चोद कर ढीली कर दिया. </p>
<p>यह थी मेरी कामवासना से भरपूर सेक्स कहानी. कहानी के बारे में मुझे आप जरूर बताना. मैं आपके मैसेज का इंतजार करुंगी.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/sex-after-delivery/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 17:47:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Desi Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Sex Problems]]></category>
		<category><![CDATA[पाठकों के पत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[मुझे एक पाठक का मेल मिला है जिसमें उसने यह जानना चाहा है कि बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें? तो निम्न उत्तर सामान्य जानकारी व बौद्धिक ज्ञान पर आधारित है. मैं कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ नहीं हूँ. अगर आप इस बारे में गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो <a title="बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/sex-after-delivery/" aria-label="Continue reading बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे एक पाठक का मेल मिला है जिसमें उसने यह जानना चाहा है कि बेबी की डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्स करना शुरू करें?</p>
<p>तो निम्न उत्तर सामान्य जानकारी व बौद्धिक ज्ञान पर आधारित है. मैं कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ नहीं हूँ. अगर आप इस बारे में गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से ही संपर्क करें.</p>
<p>इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं दिया जा सकता. इस प्रश्न का उत्तर काफी सारी बातों पर निर्भर करता है.<br />
संक्षेप में कहें तो बेबी होने के पश्चात जब महिला शारीरिक रूप से पूरी तरह से चुस्त तंदरूस्त हो जाये, तभी पति पत्नी को सम्भोग शुरू करना चाहिए.</p>
<p>गर्भावस्था के नौ माह में महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उस पर शारीरिक दबाव भी होता है और मानसिक भी … पहली डिलीवरी के समय तो मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहता है क्योंकि स्त्री प्रसव में होने वाले दर्द से भयभीत रहती है. शारीरिक रूप से भी उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. दो तीन महीने तो उल्टियों वगैरा में ही निकल जाते हैं. उसके बाद पेट का उभार दिखना शुरू हो जाता है, वजन भी बढ़ जाता है. खान पान का भी विशेष ध्यान रखना होता है.</p>
<p>प्रसव होने के बाद यानि बच्चे होने के बाद नारी में स्वाभाविक रूप से कमजोरी आ जाती है और बच्चे के साथ काम भी बढ़ जाता है, जिम्मेदारियां भी … दिन का समय बच्चे की देखभाल, उसकी आवश्यकताएं पूरी करने में निकल जाता है और रात को भी अक्सर जागना पड़ता है इससे नवप्रसूता को आराम नहीं मिल पाता है, नींद पूरी ना होने से वो चिड़चिड़ी होने लगती है. इसलिए सेक्स करने में उतावलापन ना दिखाएँ.</p>
<p>वैसे भी आजकल अधिकतर सीजेरियन विधि द्वारा ही बच्चे का जन्म होता है तो कम से कम तीन महीने तो टांकों पर कोई जोर नहीं पड़ना चाहिए. इसलिए सीजेरियन केस में तो कम से कम तीन महीने सम्भोग से दूर रहना चाहिए.</p>
<p>सामान्य डिलीवरी में भी थोड़ी बहुत चीर फाड़ सामान्य बात है, उसमें भी टाँके लगते हैं तो इस केस में भी तीन महीने का समय कम से कम बिना सेक्स के निकालना अनिवार्य है.<br />
अगर डिलीवरी एकदम सामान्य हुई हो तो भी गर्भाशय में दर्द, योनि का फैला होना, योनि में सूजन, दर्द के कारण प्रसूता स्त्री से सम्भोग करने में उसे तकलीफ होगी. तो बिल्कुल सामान्य अवस्था में भी कम से कम दो महीने तो सेक्स नहीं करना चाहिए.</p>
<p>भारत में तो सामान्य रिवाज है कि प्रसूति के चालीस दिन तक तो स्त्री को पूरा आराम दिया जाता है. वो अपने घर में किसी अन्य स्त्री की देखरेख में होती है. और चालीस दिन बाद वो मायके जाती है तो इस रिवाज से नारी डिलीवरी के बाद सम्भोग से स्वतः दूर रहती है.</p>
<p>डिलीवरी के बाद सम्भोग शुरू करने से पहले महिला रोग विशेषज्ञ यानि गायनी डॉक्टर से जांच करवा के उसकी अनुमति से ही सेक्स करना शुरू करना चाहिए. डॉक्टर से अनुमति लेने के बाद भी जब स्त्री खुद मानसिक रूप से तैयार हो तो ही सेक्स करना चाहिए.</p>
<p>अगर पति कुछ जबरदस्ती करता है तो पत्नी के मन में पति के प्रति वितृष्णा के भाव आ सकते हैं. उसे लगेगा कि पति को उससे नहीं उसके जिस्म से प्यार है. इस लिए सभी पति पत्नी के लिए यह सही राय है कि वे प्रसव के तीन महीने तक संयम बरतें, उसके बाद सब कुछ सामान्य रहने पर ही सेक्स शुरू करें … वो भी सीमित मात्रा में जैसे सप्ताह में एक बार … </p>
<p>डिलीवरी के कुछ माह बाद स्त्री का मासिक धर्म शुरू हो जाता है लेकिन यह अनियमित रहता है इसलिए दोबारा गर्भ धारण से बचने के लिए गर्भ निरोध के साधन इस्तेमाल करने चाहिए. चूंकि बच्चा माँ का दूध पीता है तो दवाई यानि गर्भ निरोधक गोली का प्रयोग मत करें तो बेहतर है.</p>
<p>कंडोम इस समय में सबसे अच्छा उपाय है अनचाहे गर्भ से बचने का.</p>
<p>कई बार प्रसव होने के कई माह तक भी स्त्री के मन में सेक्स करने की इच्छा जागृत नहीं होती तो ऐसी अवस्था में पति को बहुत सहनशीलता, समझदारी से प्यार से अपनी पत्नी के मन में कामवासना जगाने का प्रयास करना चाहिए, उससे जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए.</p>
<p>सेक्स प्रेम प्यार का विषय है, जोर जबरदस्ती, जोश, आवेश, मर्दानगी दिखाने का नहीं!</p>
<p>पति को चाहिए कि वो अपनी पत्नी की परेशानी को समझे. साथ ही पत्नी को भी चाहिए कि वो अपने पति की जरूरत को समझे. आपसी तालमेल से ही पति पत्नी के अद्भुत रिश्ते को निभाना चाहिए. </p>
<p>पाठकों से निवेदन: अगर आप इस विषय पर अपनी राय देना चाहते हैं तो कृपया अपने विचार नीचे डिस्कस कमेंट्स में लिखे.<br />
धन्यवाद.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दोस्त की साली की अन्तर्वासना</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-sali-ki-antarvasna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:41:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Kamvasna]]></category>
		<category><![CDATA[Mastram Sex Story]]></category>
		<category><![CDATA[Train Sex]]></category>
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					<description><![CDATA[नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना. आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. मेरे दोस्त के साथ उसका <a title="दोस्त की साली की अन्तर्वासना" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-sali-ki-antarvasna/" aria-label="Continue reading दोस्त की साली की अन्तर्वासना">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुश है, यह मेरी पहली अन्तर्वासना सेक्स कहानी है दोस्त की साली की चुदाई की … कुछ गलत दिखे, तो मुझे माफ कर देना.</p>
<p>आज से पांच साल पहले मैं और मेरे दोस्त का परिवार एक यात्रा गए थे, तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी. </p>
<p>मेरे दोस्त के साथ उसका पूरा परिवार था और उसके साथ उनकी भांजी और उनकी साली भी थी. दोस्त की साली का नाम नलिनी और भांजी का पिंकी था. नलिनी की उम्र 23 साल थी और पिंकी 19 साल की थी. </p>
<p>आरम्भ में मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि वे दोनों हमारे साथ यात्रा में होंगे. हमारी यात्रा रेल से शुरू हुई. शुरू में सब कुछ सामान्य था. हमें जहां जाना था, वहां पहुंचे, रात को रूम लेकर सो गए. </p>
<p>सुबह उठ कर भगवान के दर्शन किए और वापस अपने रुकने की जगह आ गए. दोपहर को खाना खाने के बाद थोड़ा आराम किया, बाद में हम सब लोग घूमने निकले. </p>
<p>हमें घूमने के लिए आस पास के एरिया में ही जाना था और दो दिन वहीं घूमना था. इसलिए हम सभी ने तय किया और एक बस ले ली. </p>
<p>बस की यात्रा शुरू हुई. मैं सबसे लास्ट वाली सीट पर बैठा था. नलिनी को जगह न मिलने के कारण वह खड़ी थी. कुछ देर बाद वह आकर मेरे घुटनों पर बैठ गई. तब तक मेरे मन में कोई भी गलत विचार नहीं था. </p>
<p>बस चलती रही, वो हिलती रही. उसके स्पर्श ने मेरी भावना बदल दी. इसी बीच मेरा लंड अपने आप ही खड़ा हो गया और उसे टच करने लगा. इस बात को नलिनी भी जान चुकी थी. मैंने उसको उठने को कहा, लेकिन वह न उठी, शायद वो भी लंड के मजे ले रही थी. हम दोनों बिना कुछ बोले मजा लेने लगे. स्टॉप आता, तो उतर कर घूमने लगते और वापस अपनी जगह आकर बैठ जाते. जब भी बैठते, तो वो और भी ज्यादा चिपक कर लंड का स्पर्श पाने की पोजीशन में खुद को बैठा लेती.</p>
<p>ऐसे ही दो दिन की यात्रा समाप्त हुई. बाहर गांव था, नलिनी के परिवार के लोग होने के कारण वहां कुछ नहीं हो सकता था और ना ही कुछ आगे हो सका. बस इतना ही हुआ कि उसने और मैंने एक दूसरे का साथ पाने की लालसा एक दूसरे तक बिना बोले ही पहुंचा दी थी.</p>
<p>फिर हम वापस घर की ओर निकलने लगे. उधर से रात की ट्रेन थी. हमारी कोई भी सीट कन्फर्म नहीं थी. फिर हम लोग ऐसे ही बिना आरक्षण के ट्रेन में बैठ गए. हम सब ये सोच कर बैठ गए थे कि रास्ते टीटीई से मिलकर कुछ जुगाड़ कर लेंगे.</p>
<p>लेकिन हमारा नसीब खराब था या फिर मेरा ही अच्छा था. ये मुझे बाद में पता चला था. </p>
<p>हुआ यूं कि ट्रेन में सब लोग अलग अलग जगह एडजस्ट हो गए. बाद में टीटीई से मिलकर मैंने एक सीट कन्फर्म करवा ली. इस बात को लगभग 2 घंटे निकल गए थे. सब सामान उस सीट के पास रखकर सब फैल गए. उस सीट पर सिर्फ दोस्त की बीवी, मेरी भाभी और उसकी बहन नलिनी बैठ गई.</p>
<p>इस सब में रात के 12 कब बजे, मुझे पता ही नहीं चला. फिर सबको जुगाड़ करके और सबको सुला देने के बाद मैंने सामान के पास जाने का सोचा और उधर की तरफ निकल पड़ा. </p>
<p>वहां पहुंचने के बाद देखा कि भाभी नीचे सो गई थीं और नलिनी ऊपर अकेली पैर मोड़ कर बैठी थी, क्योंकि लास्ट वाली सीट थी और ऊपर के दोनों लोग सो गए थे. </p>
<p>फिर मैं वहीं जगह बना कर बैठ गया.</p>
<p>अब तक नलिनी और मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी, तो उसने मुझे बैठने के लिए रोका नहीं. फिर हमारी कुछ इधर उधर की बातें शुरू हो गईं. कॉलेज से लेकर पर्सनल बातें तक हुईं.</p>
<p>अब तक मेरे दिल में कुछ भी गलत बात नहीं थी, पर एक झटका ऐसा लगा कि कुछ हुआ हुआ यूं कि उसका हाथ मेरे हाथों से जा टकराया. फिर हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, तो वो शरमा गई. </p>
<p>मैंने उसके हाथ को अब तक छोड़ा नहीं था. मैं उसके हाथ को सहलाने लगा. वो कुछ नहीं बोली. बस फिर क्या था. </p>
<p>अब तक रात के करीब 2 बज चुके थे. किसी के देखने का सवाल ही नहीं था. फिर भी मैं सावधानी पूर्वक आगे बढ़ा और उसके पैर को सहलाया. वो कुछ नहीं बोली. इससे मेरी हिम्मत बढ़ी. मैं उसके पाँव को सहलाता रहा. </p>
<p>फिर उसी ने पहल की- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?<br />
मैंने तुरंत ना कहा, जोकि सच था. </p>
<p>फिर ऐसे ही सहलाते हुए गर्मा-गर्मी में सफर चल रहा था. अब मैंने हिम्मत करके उसकी छाती पर हाथ लगाया, तो उसके मुँह से ‘ऊंह … आह..’ की आवाज आई. मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो मुस्कुरा दी. मैंने बेहिचक उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. </p>
<p>ऐसे ही 10 मिनट तक लंड सहलाने के बाद मैंने उसको इशारा किया कि टॉयलेट में चलो. </p>
<p>मैं उसे इशारा करके आगे बढ़ गया और वो भी 2-3 मिनट बाद आ गई. उसके अन्दर आते ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा बंद किया और उस पर टूट पड़ा. जहां जी चाहा, वहां सहलाने लगा.</p>
<p>उसने नाईट पैंट और टी-शर्ट पहनी थी. मैंने उसकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डालकर मम्मों को मसलने लगा. वो चुदासी तो थी ही, एकदम से बहुत गर्म हो गई. </p>
<p>फिर मैंने उसकी पैंट में हाथ डाल कर उसकी चूत में फिंगरिंग की. उसने भी अपनी टांगें फैला दीं … ताकि उसकी चूत में मेरी उंगलियां ठीक से चल सकें. उसकी चूत एकदम से गीली थी.</p>
<p>उसके बाद मैंने उसकी पैंटी नीचे कर दी और नीचे बैठ कर उसकी चूत में अपना मुँह लगा दिया. मेरी जीभ के स्पर्श ने उसे मजा दे दिया. मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल कर उसे मजा देने लगा. वो ऊपर उसका मुँह अपने हाथों से दबा कर ‘उह … ओह …’ कर रही थी. मैं उसकी चूत चाटने के साथ ही अपने हाथ ऊपर करके उसके रसीले मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था.</p>
<p>कुछ ही मिनटों में वो गांड उठाते हुए झड़ गई. फिर मैंने उसको नीचे बिठा दिया और मैं खड़ा हो गया. मैंने अपना 7 इंच का लंड हवा में लहरा दिया. उसने लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी. </p>
<p>मैंने जोर देकर कहा- मुँह में ले लो.<br />
तो वो सर हिलाते ना बोलने लगी.<br />
फिर मैंने थोड़ा जोर देकर कहा- टेस्ट तो करो … मजा आएगा.</p>
<p>इस बार वो मान गई. उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और मुझे मजा देने लगी. कुछ एक मिनट तक चूसने के बाद उसने छोड़ दिया, मैंने भी उससे कुछ नहीं कहा.</p>
<p>फिर वो अपने हाथों से लंड सहलाने लगी. कुछ ही सेकंडों में मेरा रस निकल गया.</p>
<p>फिर हम चुपचाप नजर बचाते हुए बाहर आ गए और अपनी जगह पर बैठ गए. </p>
<p>इसके आगे ट्रेन में कुछ ना हो सका. हम 2 दिन की यात्रा करके वापस अपने शहर आ गए.</p>
<p>वापस आकर मैं अपने काम में लग गया. एक हफ्ते बाद पिंकी का मुझे कॉल आया. उसने मुझपे एक बम गिराया कि वो नलिनी और मेरे साथ हुए सब खेल को जान चुकी है.<br />
उसकी बात सुनकर मैं डर गया.</p>
<p>उसके दूसरे दिन पिंकी का फिर से कॉल आया. पहले तो मैंने नहीं उठाया, फिर डरते डरते कॉल उठाया, तो सामने नलिनी थी. </p>
<p>उसने मुझे बताया कि उसने ही पिंकी को सब बताया है और वो किसी को भी कुछ नहीं बताएगी. तब जाकर मेरी जान में जान आ गई. फिर कुछ सामान्य बात करके उसने कॉल बंद कर दिया.</p>
<p>उसी दिन करीब 4 बजे फिर कॉल आया तो नलिनी बोली- मेरा आपसे मिलने का मन हो रहा है, क्या आप मिल सकते हो?<br />
मैंने उसकी अन्तर्वासना को पहचाना और तुरन्त हां बोला. </p>
<p>फिर हम दोनों ने एक मॉल में शाम के 6 बजे मिलने का तय किया.</p>
<p>मैं समय से पहले ही मॉल के गेट के पास उसकी राह देखने लगा. वो तय समय से दो मिनट बाद सामने से आती हुई दिखी. वो गुलाबी वनपीस ड्रेस में क्या मस्त माल लग रही थी. मैं उसको देखते ही उसी में खो गया. </p>
<p>वो मेरे नजदीक आ गई. मुझे इस हालत को देख कर वो पहले तो खूब हंसी. मैं भी थोड़ा शरमाते हुए हंस गया.</p>
<p>एक दो मिनट यूं ही बात करने के बाद हम दोनों अन्दर आ गए. एक कॉफी स्टाल पर बैठ कर मैंने कॉफी आर्डर की. फिर एक दूसरे के सामने बैठकर बातें करने लगे. अभी सब सामान्य बातें हो रही थीं.</p>
<p>मैंने ही उस रात का जिक्र किया, तो वो क्या शरमाई थी … आह … मुझे आज भी याद है.</p>
<p>तब तक कॉफी आ गई, कॉफी पीते हुए मैंने उससे बोला- आगे क्या?<br />
वो समझ गई, पर कुछ नहीं बोली.<br />
मैंने ही फिर बोला- चलो कुछ मजे करने चलते हैं. </p>
<p>वो कुछ नहीं बोली, मैं समझ गया कि ये राजी है … आज मजा नहीं लिया, तो कभी नहीं मिलेगा.</p>
<p>मैंने कॉफी के पैसे दिए और उसका हाथ पकड़ कर आने का इशारा किया. वो उठी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया. मैं आगे चल दिया, वो मेरे पीछे आने लगी. हम दोनों अपनी मंज़िल पर निकल पड़े. </p>
<p>वो थोड़ा नाटक कर रही थी कि कोई देख लेगा.<br />
मैं बोला- कोई नहीं देखेगा, तुम चलो तो सही. </p>
<p>मैंने अपनी कार निकाली और उसको अन्दर बिठा लिया.<br />
तभी वो बोली- इधर मेरी एक्टिवा रखी है.<br />
मैं बोला- कोई चिंता की बात नहीं है. हम 2 घंटे में वापस आ जाएंगे. </p>
<p>वो मान गई. हम हाईवे के तरफ निकल पड़े. कोई 20 मिनट के दौरान मैंने उसको खूब सहलाया. वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी. हम एक होटल में आ पहुंचे. पहले मैंने अकेले जाकर एक रूम बुक किया और उसको फोन करके अन्दर बुला लिया.</p>
<p>कमरे में अन्दर जाते ही मैंने उसको कसके पकड़ लिया. वो तो पहले से ही बहुत चुदासी थी. इसी वजह से उसने भी मुझे कसके पकड़ लिया. इसी हड़बड़ी में हम दोनों पास के पलंग पर गिर पड़े.</p>
<p>मैंने उसे अपने नीचे दबा कर खूब चूसा.<br />
वो बोली- कपड़े खराब हो जाएंगे.</p>
<p>मैं समझ गया. हमने एक दूसरे के कपड़े निकाले. पहले मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके निप्पलों को अपने होंठों में दबा लिया और मम्मे मसलते हुए निप्पल चूसने लगा. </p>
<p>वो बेकाबू होकर मुझे जकड़ते हुए मेरे सर को अपने दूध पर दबा रही थी.</p>
<p>कुछ देर बाद मैंने अपना मोर्चा नीचे सैट कर लिया. उसकी चूत को खूब चूसा. </p>
<p>थोड़ी ही देर में वो ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ करती हुई स्खलित हो गई.</p>
<p>फिर मैंने अपना 7 इंच का लंड उसके मुँह में देना चाहा, तो साली ना करने लगी. मैंने थोड़ा जोर दिया, तो मान गई और मेरा लौड़ा चूसने लगी. हम दोनों जल्दी ही 69 में हो गए. </p>
<p>उसने चूसना बंद किया और बोली- जल्दी करो … मुझसे अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा.<br />
मैंने भी सोचा कि वक्त कम है, निपट ही लो.</p>
<p>मैंने उसको सीधा किया और चुदाई की पोजीशन बनाई. सुपारा सैट करके धक्का मारा, तो मेरा फिसल गया. मैंने लंड को वापस चूत की फांकों में सैट किया और जोर का झटका लगा दिया. </p>
<p>वो जोर से चिल्ला दी. मैंने हाथों से उसका मुँह दबाया और शांत रहा. अब वो थोड़ी शांत हुई, तो मैंने अपना काम शुरू किया. हालांकि उसकी सील पहले से टूट चुकी थी, पर ज्यादा वक्त गुजर जाने की वजह से चूत अभी बड़ी टाइट थी. उसकी सील टूटने की बात उसने मुझे बताई थी, पर वो कहानी मैं बाद में बताऊंगा.</p>
<p>मैंने अपना काम जारी रखते हुए उसे धीरे धीरे ढीला किया. वो दो मिनट बाद ही मेरे लंड से मजे लेने लगी थी. हम दोनों के बीच धकापेल चुदाई होने लगी. मैं उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत को रगड़ने में लगा था. उसकी अकड़न मुझे बता रही थी कि लौंडिया अब झड़ने की कगार पर आ गई है. </p>
<p>उसने इस वक्त मुझे कसके पकड़ा हुआ था. मैं जोर जोर से उसकी चुदाई कर रहा था. इसी बीच वो निकल गई और निढाल हो गई. मैं अभी भी पूरे जोरों से चुदाई कर रहा था. उसकी गर्मी ने मेरे लंड को चिकनाई दे दी थी, जिससे मेरे झटके और भी स्पीड से लगने लगे थे. इसी बीच वो फिर से चार्ज हो गई और गांड उठा उठा कर लंड के मजे लेने लगी.</p>
<p>करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने के कगार पर आ गया था. वो भी दूसरी बार होने को थी. मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?<br />
तो वो बोली- अन्दर ही निकालो … मैं दवा ले लूँगी.</p>
<p>उसके ऐसा बोलते ही मेरा खून जमा होने लगा. मैं 10-15 करारे झटकों के साथ ही उसके अन्दर ही झड़ गया.</p>
<p>चुदाई के बाद 10 मिनट तक हम दोनों ने आराम किया. फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर आपने आपको साफ किया. फिर अपने अपने कपड़े पहने और होटल से बाहर निकल आए.</p>
<p>यह मेरी पहली अन्तर्वासना कहानी है, आपको कैसी लगी … जरूर बताना.<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मैं अभी तक माँ नहीं बन पाई हूँ, क्या करूं?</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/maa-nahi-ban-payi-kya-karun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:34:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[पाठकों के पत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम रिया है. मैं दिल्ली में रहती हूँ. मैं एक हाउस वाइफ हूँ. मेरी उम्र 25 साल है. मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं. मेरे पति बहुत अच्छे हैं. लेकिन मेरी समस्या यह है कि मैं अभी तक माँ नहीं बन पाई हूँ. मैंने लेडी डॉक्टर से अपने शरीर की जांच कराई <a title="मैं अभी तक माँ नहीं बन पाई हूँ, क्या करूं?" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/maa-nahi-ban-payi-kya-karun/" aria-label="Continue reading मैं अभी तक माँ नहीं बन पाई हूँ, क्या करूं?">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा नाम रिया है. मैं दिल्ली में रहती हूँ. मैं एक हाउस वाइफ हूँ.<br />
मेरी उम्र 25 साल है. मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं. मेरे पति बहुत अच्छे हैं. </p>
<p>लेकिन मेरी समस्या यह है कि मैं अभी तक माँ नहीं बन पाई हूँ. मैंने लेडी डॉक्टर से अपने शरीर की जांच कराई तो मुझमें कोई कमी नहीं मिली. फिर मेरे पति ने अपनी जांच कराई तो डॉक्टर ने उन्हें बताया कि वे कभी मुझे माँ नहीं बना पायेंगे.</p>
<p>ऐसा नहीं कि मेरे पति सेक्स करने के काबिल नहीं हैं. मेरे पति हर रोज मुझे पूरा जवानी का सुख देते हैं. हमारी सुहागरात को तो उन्होंने मुझे चार बार चोदा था. वो अक्सर मुझे चरमसीमा पर पहुंचा कर ही झड़ते हैं.<br />
शादी से पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था. मैंने अपना कौमार्य अपने होने वाले पति की अमानत समझ कर बचा कर रखा था.</p>
<p>उनके वीर्य में ही कुछ कमी डॉक्टर ने बतायी है जो दवाइयों से भी ठीक नहीं हो सकती.<br />
लेकिन मेरे पति की माँ यानि मेरी सास कहती है कि अगर तू मुझे मेरे परिवार का वारिस नहीं दे सकती तो मेरे बेटे को छोड़ दे.<br />
मेरे पति और मैंने उनको पति की कमी के बारे में बताया भी है लेकिन वो इस बात को नहीं मानती.</p>
<p>इस कारण से घर में हर वक्त क्लेश और तनाव का माहौल रहता है. मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी इनसे बहुत प्यार करती हूँ.</p>
<p>मैंने अपनी एक सहेली से इस बारे में बात की तो वो कहती कि किसी  गैर मर्द से सेक्स करके बच्चा पैदा कर ले.<br />
लेकिन मुझे यह बात बहुत बुरी लगी क्योंकि मैं अपने पति को धोका नहीं दे सकती.</p>
<p>लेकिन इसके अलावा मुझे और कोई हल भी नजर नहीं आ रहा क्योंकि हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम महंगे अस्पताल में आई वी ऍफ़ जैसे आधुनिक तरीकों से गर्भधारण का प्रयास कर सकें.</p>
<p>अब कभी कभी मेर मन में ख्याल उठने लगा है कि मैं किसी के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा कर लूं. फिर मुझे अपने पति के प्यार का ख्याल आ जाता है.<br />
मेरे पति मुझे इतना प्यार करते हैं कि वे मुझे किसी गैर की बांहों में जाने का सोच भी नहीं सकते.</p>
<p>अब मैं क्या करूं? इस अन्तर्वासना साईट पर लाखों पाठक हैं और काफी समझदार भी हैं. आप इस समस्या से निपटने में मेरी मदद कीजिए. मुझे आप से बहुत आशा है. मुझे बताइए कि मैं क्या करूं?</p>
<p>गोपनीयता को बनाए रखने के लिए मैं अपनी इमेल आईडी नहीं दे पा रही हूँ.<br />
आप नीचे कमेंट्स में ही अपनी राय लिख कर मुझ तक पहुंचा सकते हैं.<br />
मैं आप सब की बहुत आभारी रहूँगी.</p>
<p>आपसे यह भी मेरा अनुरोध है कि अनाप शनाप बातें लिख कर मुझे और दुखी मत करें. मैं इस साईट की नियमित पाठिका नहीं हूँ. मुझे मेरी एक सहेली ने ही सुझाव दिया था, इस साईट के बारे में बता कर मुझे कहा था कि यहाँ पर अपनी समस्या लिख कर भेज. यहाँ पर काफी लोग बहुत समझदार हैं जो तेरी मदद जरूर करेंगे.</p>
<p>मेरी परेशानी के बारे में पढ़ने के लिए धन्यवाद.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:28:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[College Girl]]></category>
		<category><![CDATA[Gand Sex]]></category>
		<category><![CDATA[Porn story in Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है। मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है। पहले मैं निधि के बारे <a title="दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/dost-ki-girlfriend-chuut/" aria-label="Continue reading दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुत और गांड की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मेरा नाम रवीश कुमार है और मैं रांची का रहने वाला हूं। मैं 25 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।</p>
<p>मेरे दोस्त कुणाल, 25 साल का है और उसकी गर्लफ्रेंड निधि 22 साल की है, यह सेक्स स्टोरी उनके बारे में है।</p>
<p>पहले मैं निधि के बारे में बता दूँ कि निधि बहुत ही खूबसूरत है, सेक्सी हैं, बहुत ही कामुक स्वभाव की है, उसका फिगर बहुत ही अच्छा है बड़े-बड़े चूची हैं, गांड एकदम फैली हुई है। सेक्स की बहुत बड़ी भूखी है वह हमेशा सेक्स करने को आतुर रहती है।</p>
<p>कुणाल ने मुझे पहले भी बताया था कि निधि सेक्स में बहुत रुचि दिखाती है, वह बहुत ज्यादा सेक्स करना चाहती है, वह सब पोजीशन पर सेक्स करना चाहती है। निधि को चूत चुदाई के लंबे लंबे दौर पसंद हैं, उसे तेज तेज धक्के पसंद हैं। वो लड़की अपनी गांड मरवाना भी पसंद करती है. निधि को वाइल्ड सेक्स और रफ़ सेक्स भी पसंद है।</p>
<p>मुझे कुणाल ने यह भी बताया था कि निधि के पहले भी कई सेक्स अफेयर रह चुके हैं और पहले भी बहुत लण्ड ले चुकी थी. कुणाल ने निधि के दोस्तों से पता लगाया था कि वह कॉलेज में बहुत सारे लड़कों के साथ चुदाई कर चुकी थी। चुदाई करना उसे बहुत पसंद था, उसे नए-नए लण्ड के साथ सेक्स करना बहुत पसंद था।</p>
<p>कुणाल हमेशा निधि को चोदने के लिए मेरे कमरे का इस्तेमाल करता था, वह हमेशा निधि को लेकर मेरे रूम पर आता था. वे दोनों दिन दिन भर सेक्स करते थे, उसके बाद चले जाते थे.<br />
लेकिन जब वे दोनों जाती थे तो निधि का चेहरा देख कर लगता था कि कुणाल निधि को खुश नहीं कर पाता था। </p>
<p>एक दिन की बात है, कुणाल और निधि मेरे रूम पर चुदाई कर रहे थे. अचानक से कुणाल को कुछ काम आ गया और उसे निधि को मेरे रूम पर छोड़कर जाना पड़ा।</p>
<p>अब मैं और निधि घर पर अकेले थे तो मैं निधि से बातचीत करने के लिए रूम में गया। कमरे में से कंडोम की सुगंध आ रही थी। बिस्तर की चादर की सिलवटें चुदाई की दास्तां बता रही थी।</p>
<p>निधि रूम में बेड पर लेटी हुई थी, वह थोड़ी उदास लग रही थी।</p>
<p>हम दोनों बात करने लगे. बात करते-करते हम लोग नॉनवेज बात करने लगे। वो अपनी चुदाई की बात बताने लगी, बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि कुणाल उसे खुश नहीं कर पाता है और वह रोने लगी।</p>
<p>मैं बगल में ही बैठा हुआ था उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया। मैं उसे चुप कराने के लिए उसके सिर को सहलाने लगा। समझाते हुए मेरे और निधि के होंठ आपस में नजदीक आ गए, मैं निधि को किस करने लगा, निधि मेरा पूरा साथ देने लगी।</p>
<p>हम लोगों ने लगभग 10 मिनट तक किस किया. निधि पूरे जानवरों की तरह मेरे होंठों पर टूट पड़ी, लग रहा था जैसे वह मेरे होठों को खा जाएगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे निधि ने सालों से किस नहीं किया है.</p>
<p>मैं धीरे-धीरे किस करते करते हुए मैं निधि के चूचे दबा रहा था और वह मेरे लण्ड को सहला रही थी, हम दोनों बहुत मजे ले रहे थे। </p>
<p>निधि के चुचे को दबाते दबाते मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसकी मुलायम चूची को चूसने लगा। वो पूरे मस्ती में अपनी कामुक आवाज उम्म्ह … अहह … हय … ओह … निकाल रही थी.<br />
उसने मेरी पैंट की चेन खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे हाथ से हिलाने लगी.</p>
<p>लड़की के हाथसे लंड सहलवाने में मुझे भी मज़ा आने लगा था, मैंने भी जींस के ऊपर से ही निधि की चूत को सहलाना आरम्भ कर दिया। अब तक निधि बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी.<br />
मैंने उसकी जींस का बटन खोल दिया, फिर ज़िप भी खोल दी और जीन्स को नीचे सरका दिया.</p>
<p>मैंने देखा कि उसकी पैंटी चूत के पास से उससे निकले रस से पूरी गीली हो चुकी थी।</p>
<p>तभी निधि ने मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. निधि मेरे लंड को एकदम रंडी की तरह चूस रही थी, काट रही थी. निधि कभी मेरे लंड को जीभ से चूसती, चाटती तो कभी दाँत से काटती। उसकी कामवासना पूरे उफान पर लग रही थी. शायद मेरा दोस्त उसे छोड़ते छोड़ते बीच में ही छोड़ गया था.</p>
<p>मैंने मौके का फायदा उठाया और मैंने उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया. करीब दस मिनट तक मुख चोदन के बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया वह मेरा सारा पानी पी गई।</p>
<p>उसके बाद निधि ने मुझे अपना चूत चाटने के लिए इशारा किया. मैं भी उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत पहले से बहुत गीली थी. मैं चूत चाटने लगा तो वह मेरे बालों से खेलने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी जिससे मुझे मज़ा आने लगा।</p>
<p>वह मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. लग रहा था जैसे कि वह मेरे मुंह को अपनी चूत के अंदर घुसा लेगी। पांच सात मिनट चूत चूसने के बाद वो झड़ गई, मैंने उसका सारा पानी पी लिया.</p>
<p>लेकिन निधि का मन नहीं भरा था, निधि ने मुझे फिर से उसकी चूत चूसने को कहा. इस बार निधि ने मुझे बिस्तर पर नीचे लिटाया और अपनी चूत मेरे मुंह के ऊपर रख कर बैठ गई, मेरे मुंह को चोदने लगी।</p>
<p>अपनी चूत को पाँच मिनट तक मेरे होंठों पर रगड़ने के बाद पीछे वो घूम कर 69 की पोजीशन में लेट गई। अब निधि दोबारा मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत चूस रहा था।</p>
<p>5 मिनट के बाद उसने मुझसे कहा- रवीश यार … अब मुझे चोद दो!<br />
मैं अपने दूसरे कमरे से कंडोम लेकर आया।</p>
<p>निधि ने एकदम प्रोफेशनल रंडी की तरह मुंह में कंडोम को रख कर, कंडोम को मुंह में फंसा कर मेरे लंड में कंडोम पहनाया. निधि का यह अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा।</p>
<p>मैं निधि के ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी प्यासी चूत पर सेट करके मैंने एक धक्का लगाया. मेरा लण्ड बड़े आराम से एक बार में ही पूरा अंदर चला गया। लेकिन निधि ने झूठ का दर्द होने का दिखावा किया और मना करने लगी, रुकने को कहने लगी. मुझे पता था कि साली रांड नौटंकी कर रही है. और पर मुझ पर सेक्स का भूत सवार हो चुका था तो मैंने उसे गंदी गंदी गालियां देते हुए चोदना शुरू कर दिया।</p>
<p>वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… करती हुई चुद रही थी. उसे मजा आ रहा था. वो मेरे नीचे लेटी हुई अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चूत चोदन में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और मजा ले रही थी.<br />
मैंने निधि को 20-25 मिनट तक लगातार हचक हचक कर कर चोदा। जिसमें निधि दो बार झड़ गयी, जिससे चादर भी गीली हो गयी।<br />
उसके बाद मैं भी कुछ तेज धक्के लगाकर उसकी चूत में ही झड़ गया क्योंकि मैंने कंडोम लगाया हुआ था तो कोई डर नहीं था। </p>
<p>उसके बाद हम दोनों अगल बगल लेट गए और बातें करने लगे. बीइच बीच में हम चूमा छाती भी कर रहे थे. नीचे नीचे मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही थी.</p>
<p>मेरा लंड थोड़ी देर बाद खड़ा हो गया तो मैंने निधि से गांड मारने की बात की, निधि बिना किसी आनाकानी के तुरंत राजी हो गई।</p>
<p>उसने अपने पर्स से वैसलीन क्रीम निकाल कर दी. मैं कंडोम लेने दूसरे कमरे में जाने लगा तो उसने मुझे रोका और अपने पर्स में से कंडोम निकाल कर मेरे लंड पर चढ़ाया और उस पर वैसलीन क्रीम लगा दी जिससे कि लंड आसानी से उसकी गांड में चला जाए।</p>
<p>फिर मैंने उसे घोड़ी बनाकर गांड के छेद पर लंड लगाकर जोरलगाना शुरू किया और मेरे लंड का सुपारा अंदर घुस गया. इस बार शायद निधि को थोड़ा दर्द हुआ, वो रोने लगी और उसकी आंखें बाहर आने लगी।</p>
<p>2 मिनट तक मैंने उसकी नंगी पीठ को सहलाया और किस किया। उसके बाद मैंने फिर से एक जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लंड निधि के गांड में समा चुका था।<br />
निधि बेड पर गिर गई क्योंकि वह इस धक्के के लिए तैयार नहीं थी।</p>
<p>5 मिनट तक रुकने के बाद मैंने धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया लंड अपनी जगह बना चुका था। फिर मैंने धक्के लगाना तेज कर दिया मैं निधि की गांड की जोरदार ठुकाई कर रहा था।<br />
अब मैं लंड को पूरा बाहर निकालता और एक बार में अंदर डाल देता। जिससे निधि को दर्द भी देता और मजा भी आता। कभी-कभी मैं गांड मारते मारते लंड निकालकर अचानक से चूत में डाल देता। चूत में धक्के मारने लगता मुझसे निधि को बहुत मजा आ रहा था। मैं बारी-बारी निधि की गांड और चूत एक साथ चोद रहा था।</p>
<p>निधि की चूत इस बीच एक बार और झड़ चुकी थी।</p>
<p>लगभग आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं निधि की गांड में ही झड़ गया। </p>
<p>इस तरह से मैंने निधि को एक डेढ़ घंटे जमकर चोदा. वो अपनी चूत और गांड चुदाई में मिले आनन्द के कारण बहुत खुश नजर आ रही थी।</p>
<p>उसके बाद हम लोगों ने कुछ देर आराम किया. तब निधि नंगी ही बिस्तर से उठी और उसने अपने आप को बाथरूम में जाकर साफ किया।</p>
<p>थोड़ी देर बाद कुणाल आ गया. उसके बाद निधि और कुणाल फिर से रूम में चले गए, कुणाल और निधि ने फिर से चुदाई की।</p>
<p>चुदाई करने के बाद वे लोग चले गए।</p>
<p>तब से निधि से मेरी सीधी बात होने लगी, अब जब भी हम लोगों को मन करता है, हम लोग मिलकर चुदाई करते हैं।</p>
<p>अगली कहानी में आप लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने और निधि ने अन्तर्वासना पर मिले एक जोड़े के साथ ग्रुप सेक्स किया।<br />
[email protected]</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/munhboli-beti-ki-mammi-ki-chudai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:27:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Best Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Garam Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये। मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है। आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागों <a title="मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/munhboli-beti-ki-mammi-ki-chudai/" aria-label="Continue reading मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये।</p>
<p>मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है।<br />
आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागों<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2<br />
में पढ़ा कि अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली रूपा मेरे साथ खुलने लगी, वो मुझे जीजाजी कह कर हंसी मज़ाक करने लगी तो मैंने मौक़ा ताड़ कर रूपा को चोद दिया और उसके बाद हमारे नाजायज रिश्ता आगे बढ़ा।</p>
<p>रूपा के घर में मेरी हैसियत उसके पति की ही है, आज भी है। रूपा की दोनों बेटियाँ मुझे ही पापा कहती हैं, उन सबकी हर एक ज़रूरत को मैं पूरी ज़िम्मेदारी से निभाता हूँ।</p>
<p>बढ़ते बढ़ते प्रेम इतना बढ़ा कि मैं खुद भूल गया कि मेरे सिर्फ एक बेटा है. मैंने उन दोनों लड़कियों को भी बाप का प्यार भरपूर दिया। उन्हें कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। मेरी बीवी भी<br />
कहती थी कि दोनों लड़कियाँ आपको अपने सगे बाप से भी ज़्यादा प्यार करती हैं।</p>
<p>और यह सही भी था क्योंकि रूपा का पति अपने घर में रोआब रखता था और अक्सर लड़कियों को डांट देना, कम बोलना उसकी आदत थी। मगर मैं लड़कियों से खूब हंस बोल लेता था। जब भी उनके घर जाता, दोनों लड़कियाँ बड़े प्यार से आकर मेरे से चिपक जाती।</p>
<p>मगर मुझे कभी ऐसी फीलिंग नहीं आई कि ये किसी गैर की लड़कियाँ हैं। कुछ मौके ऐसे भी आए, जब खेलते खेलते दोनों लड़कियों को मैंने गोद में उठाया, अपने कंधों पर बैठाया, एक ही बेड पर एक साथ लेट कर मोबाइल पर गेम भी खेली। खुशी तो जैसे चारों तरफ से बरस रही थी।<br />
अब तो मेरी बीवी को भी विश्वास हो चला था कि मैं सिर्फ उन लड़कियों के प्रेम के कारण रूपा के घर जाता हूँ, तो कभी कभी मैं अकेला भी रूपा के घर जा आता था।</p>
<p>बस इतनी बात ज़रूर थी कि रूपा अक्सर कहा करती थी- हम सिर्फ दिन में ही क्यों मिलते हैं। कभी कोई प्रोग्राम बनाओ न, ताकि हम दोनों सारी रात प्रेम का खेल खेल सकें। मुझे रात को आपकी बहुत याद आती है। बहुत दिल करता है कि आप मेरे साथ लेटे हों, और हम दोनों बिल्कुल नंगे सारी रात एक दूसरे को प्यार करें।</p>
<p>मगर अब मेरे पास भी यही दिक्कत थी। बीवी जब घर में हो तो मैं रात बाहर कैसे गुज़ारूँ। और दूसरी दिक्कत रूपा की बेटियाँ। उसके घर में वो दिक्कत … मेरे घर में ये दिक्कत।<br />
मगर किस्मत आपको कब किस मोड़, किस दोराहे या चौराहे पर ला कर खड़ा कर दे, आपको नहीं पता।</p>
<p>ऐसा ही मेरे साथ हुआ.</p>
<p>एक दिन मैं रूपा के घर गया। रूपा रसोई में थी तो मैं सीधा रसोई में गया, अपने साथ लाये गर्मागर्म समोसे मैंने रूपा को दिये और मौका देख कर उसको पीछे से ही अच्छी तरह से अपनी बांहों में भर लिया.<br />
और जब उसने मुंह घुमाया, तो उसके होंठों को चूम लिया, उसने भी चुम्बन का जवाब चुम्बन से दिया।</p>
<p>मैंने पूछा- लड़कियाँ कहाँ हैं?<br />
वो बोली- ऊपर कमरे में बैठी पढ़ रही हैं।<br />
झट से मैंने उसकी नाईटी ऊपर उठानी शुरू की, वो बिदकी- अरे क्या करते हो, कोई आ जाएगा।</p>
<p>मैंने तो सिर्फ उसकी फुद्दी ही देखनी थी, वो देख ली।<br />
उसे मैंने कहा- अच्छा ठीक चाय लेकर ऊपर आ जाओ।</p>
<p>मैं ऊपर लड़कियों के कमरे में चला गया। दोनों लड़कियाँ मुझे देख कर खुशी से चहक उठी और दौड़ कर आकर मुझसे लिपट गई- हैलो पापा, नमस्ते पापा।<br />
मैंने दोनों को प्यार किया और दोनों फिर अपनी अपनी जगह जाकर बैठ गई।</p>
<p>उसके बाद मैंने उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और इधर उधर की बातें की। इतने में रूपा चाय और समोसे लेकर आ गई।<br />
तभी दिव्या बोली- अरे समोसे … सच में पापा, मेरा न अभी समोसे खाने को ही दिल कर रहा था।<br />
मैंने कहा- और देखो तुम्हारे दिल की बात मैंने सुन ली, और अपनी बेटी के लिए समोसे ले आया।</p>
<p>दिव्या ने एक समोसा उठाया और साथ में मुझे एक पप्पी भी दी।<br />
हमने समोसे खाये, चाय पी।</p>
<p>चाय पीने के बाद हम वहीं बैठे बातें करने लगे। पहले बैठे थे, फिर धीरे धीरे खिसकते हुये लेट ही गए।</p>
<p>मैं उन्हें अपने मोबाइल पर कुछ फन्नी सी वीडियोज़ दिखा रहा था, जिन्हें देख देख कर हम सब हंस रहे थे। दोनों लड़कियाँ मेरे अगल बगल लेटी हुई थी और रूपा मेरे पाँव के पास बैठी थी. ये एक विशुद्ध पारिवारिक माहौल था। फिर रूपा बर्तन उठा कर रसोई में चली गई, और रम्या भी उसके साथ चली गई।</p>
<p>कमरे में सिर्फ मैं और दिव्या थे। अब जब हम दोनों कमरे में अकेले रह गए, तो मैं उठ कर बैठ गया, तब दिव्या बोली- पापा एक बात पूछूँ?<br />
मैंने कहा- पूछ, मेरा बाबू, क्या बात है?<br />
वो बोली- आप गुस्सा तो नहीं करोगे?<br />
मैंने अपना मोबाइल बंद करके साइड पर रखा क्योंकि बात कोई गंभीर थी, तभी तो उसने मेरी नाराजगी के बारे में पहले ही पूछ लिया।</p>
<p>मैंने कहा- मैं अपने बाबू की की किसी बात पर गुस्सा नहीं होता, पूछो।<br />
वो बोली- आप मम्मी से प्यार करते हो?</p>
<p>एक बार तो मैं उसकी बात सुन कर सन्न रह गया मगर अब जवाब तो देना था। अब सच बात तो यह थी कि मैं रूपा से कोई दिल से सच्चा प्यार नहीं करता था, सिर्फ मेरा उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण था।<br />
मगर फिर भी मैंने कहा- हाँ करता हूँ।<br />
वो बोली- कितना प्यार करते हो?<br />
मैंने कहा- पहले ये बताओ, तुम ये सब क्यों पूछ रही हो?<br />
वो बोली- मैंने मम्मी की आँखों में आपके लिए बेहद प्यार देखा है। जैसे वो आपको देखती है।</p>
<p>मैंने कहा- देखो बेटा, अब तुम बड़ी हो गई हो, सब दुनियादारी समझती हो। तो मैं तुम्हारे सामने ये बात कबूल कर सकता हूँ कि हाँ मुझे तुम्हारी मम्मी से मोहब्बत है।<br />
वो लड़की एकदम से मेरे से लिपट गई- बस पापा, आप मेरी मम्मी को कभी मत छोड़ना, वो आपसे बहुत प्यार करती है। मैंने मम्मी से पूछ लिया था, वो आपको बहुत चाहती हैं। वादा करो आप मम्मी को कभी धोका नहीं दोगे।</p>
<p>अब उसका दिल मैं कैसे तोड़ सकता था, मैंने भी वादा कर दिया कि मैं उसकी मम्मी को कभी धोखा नहीं दूँगा। पर सच्चाई ये थी कि इस रिश्ते की तो बुनियाद ही धोखे पर रखी गई थी। अगर मैंने अपनी ब्याहता पत्नी को धोखा दिया, तब तो रूपा के साथ मेरे सम्बन्ध बने।</p>
<p>मगर मेरे इस झूठे वादे ने मेरे लिए उस घर में नए दरवाजे खोल दिये। उसके बाद तो मैं पूरी तरह से ही उस घर का सदस्य बन गया। अब लड़कियों के ज़िद करने पर मैं हर रोज़ उनके घर जाता, चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही। दोनों लड़कियाँ मुझे बहुत प्यार करती। अब उनके सामने ही मैं रूपा से हंसी मज़ाक कर लेता, उसे बांहों में भर लेता, कभी कभी चूम भी लेता।<br />
दोनों लड़कियां हमारे इस प्रेमालाप की साक्षी थी और वो दोनों ये देख कर बहुत खुश होती कि उनकी माँ को भरपूर प्यार मिल रहा है।</p>
<p>फिर एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि वो कुछ दिनो के लिए अपने मायके जाना चाहती है।<br />
मैंने क्या मना करना था, दोनों माँ बेटा, 3-4 दिन के लिए चले गए।</p>
<p>जिस दिन वो गए, उसी दिन मैंने रूपा को फोन पर कह दिया कि मेरी पत्नी मायके गई है 3 दिन के लिए, अगर कहो तो तुम्हारे घर रहने आ जाऊँ।<br />
उसने कहाँ मना करना था।<br />
उसी शाम अपने दफ्तर से मैं सीधा रूपा के घर गया।</p>
<p>पहले शाम की चाय पी, उसके बाद उसे और लड़कियों को लेकर बाज़ार गया, सब घुमाया, बाहर ही खाना खिलाया। खूब मज़े कर के हम घर वापिस आए।</p>
<p>तो अब वक्त आया सोने का। अभी रूपा थोड़ा झिझक रही थी कि अपनी लड़कियों के सामने वो किसी और मर्द के साथ सोने के लिए कैसे जाए।<br />
मगर दिव्या ने खुद ही उसे कह दिया- मम्मी, आज आप पापा के साथ सो जाओ।<br />
बेशक कुछ शर्माती, कुछ सकुचाती, मगर रूपा मेरा बेडरूम में आ गई।</p>
<p>मैंने दरवाजा बंद कर लिया और दरवाजा बंद करके रूपा को अपनी बांहों में भर लिया। बस बांहों में भरने की देरी थी कि रूपा भी पूरी शिद्दत से मुझसे लिपट गई। सबसे पहले हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे, और सीधा बेड पर लेटते ही मेरा लंड उसकी फुद्दी में घुस चुका था। उम्म्ह … अहह … हय … ओह …<br />
आज तो जैसे हमारी सुहागरात थी। आज मेरी भी इच्छा थी कि साली रूपा की अच्छे से भोंसड़ी मारूँ।</p>
<p>अब मेरी आदत थी, बिना तैयारी के तो मैं रूपा के पास जाता नहीं था, तो आज भी पूरी तैयारी के साथ आया था। तीन चार मिनट की चुदाई में रूपा का पानी झड़ गया, मगर जब उसका पानी झड़ा तो वो खूब तड़पी, खूब चिल्लाई, खूब शोर मचाया, बिना इस बात की परवाह किए कि साथ वाले कमरे में लेटी उसकी दो जवान बेटियाँ क्या सोचेंगी कि मम्मी की क्या ज़बरदस्त चुदाई हो रही है।</p>
<p>मगर बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। उस रात हम दोनों नहीं सोये, अगर सोये तो थोड़ी थोड़ी देर के लिए। जब भी जिसकी भी नींद खुलती, वो दूसरे को जगा लेता और फिर चुदाई शुरू हो जाती।</p>
<p>उस रात मैंने तीन बार रूपा को चोदा, और वो तो शायद 6-7 बार स्खलित हुई और हर बार उसने बिना किसी शर्म के खूब शोर मचा कर अपनी चुदाई का प्रदर्शन किया।</p>
<p>सुबह 5 बजे हम सोये।<br />
[email protected]</p>
<p>आगे की कहानी:  मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2</title>
		<link>https://kahani18.com/antarvasna/biwi-ki-saheli-part-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:30:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्वासना]]></category>
		<category><![CDATA[Hot Sex Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Jija Sali Sex Story]]></category>
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					<description><![CDATA[दोस्तो, मैं अन्तर्वासना कहानी का बहुत पुराना लेखक हूँ. मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1 में आपने पढ़ा कि मेरा दिल मेरी बीवी की सहेली पर आ गया. वो भी मेरे ऊपर मरती थी तो हमारी बात बन गयी. मैं उसके घर में उसके साथ था. अब आगे: मैंने <a title="बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2" class="read-more" href="https://kahani18.com/antarvasna/biwi-ki-saheli-part-2/" aria-label="Continue reading बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2">पूरी कहानी पढ़ें</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दोस्तो, मैं अन्तर्वासना कहानी का बहुत पुराना लेखक हूँ.<br />
मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग<br />
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1<br />
में आपने पढ़ा कि मेरा दिल मेरी बीवी की सहेली पर आ गया. वो भी मेरे ऊपर मरती थी तो हमारी बात बन गयी. मैं उसके घर में उसके साथ था.<br />
अब आगे:</p>
<p>मैंने थोड़ी और बदतमीजी की और उसके दोनों मम्मे भी पकड़ लिए और दबा कर बोला- साली आधी घर वाली होती है।<br />
जब उसके मम्मे दबाये तो उसने हल्की सी चीख मारी, मगर ये चीख आनंद से ओत प्रोत थी।</p>
<p>दो प्यासे जिस्म, घर में कोई नहीं।</p>
<p>मैंने उसे अपनी और घुमाया और उसे फिर से कसके अपनी बांहों में जकड़ा और उसके होंठों को चूम लिया. जैसे ही होंठों से होंठ मिले, उसने पीछे को हाथ घुमा कर गैस बंद कर दी और फिर उसने भी मुझे अपनी आगोश में कस लिया।</p>
<p>जितना मैंने उसके होंठ चूसे, उतना ही वो भी मुझे चूस रही थी, बल्कि वो तो मेरे नीचे वाले होंठ को काट रही थी, चबा रही थी। बेशक ये मेरे लिए थोड़ा दर्दनाक था मगर इसमे मज़ा भी बहुत आ रहा था।</p>
<p>एक प्यासी औरत कामरस की बारिश में भीगने को आतुर थी।</p>
<p>मैंने उसकी पीठ को भी अपनी मुट्ठियों में ऐसे भींचा जैसे मैं उसके मम्मे दबा रहा होऊँ। फिर उसकी एक टांग उठा कर पास की तिपाई पर रख दी, और फिर उसका वो चूतड़ और जांघ को मैंने खूब सहलाया और उसके चूतड़ पर खूब सारे हाथ भी मारे।</p>
<p>उसके बर्ताव से लग रहा था कि वो मुझे चूस चूस कर ही झाड़ देगी। मगर अब आगे बढ़ने का वक्त था। मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और हाल में ले गया।</p>
<p>हाल में बिछे दीवान पर मैंने उसे लेटाया और खुद भी उसके ऊपर ही लेट गया। उसने खुद ही अपने हाथ अपने सर के पीछे ऊपर को फैला दिये. जब मैं उसके ऊपर लेटा तो उसने अपनी टांगें फैला कर मेरे जिस्म को अपनी जांघों में जकड़ लिया।</p>
<p>एक औरत का पूर्ण समर्पण था ये; हाथ पीछे … ताकि मैं उसके चेहरे उसके स्तनों के साथ कुछ भी कर सकूँ। टांगें पूरी खुली … ताकि मैं उसकी जांघों, उसकी फुद्दी के साथ कुछ भी कर सकूँ।</p>
<p>मैंने उसके दोनों मम्मों को अपने हाथों में पकड़ा। वो वैसे ही शांत बहती हुई नदी की तरह मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैंने उसके मम्मे दबाये, हिलाये, ऊपर को उठा कर उसका बड़ा सारा क्लीवेज उसकी कमीज़ के गले से बाहर निकाल कर देखा।</p>
<p>एक शानदार क्लीवेज, जिसे मैंने अपनी जीभ से ही चाट लिया, और फिर अपने दाँत से ज़ोर से काट कर उसके मम्मे पर अपने दाँतों का निशान बनाया।<br />
वो बोली- अरे दर्द होता है जीजाजी, ये क्या किया, देखो निशान भी डाल दिया।</p>
<p>मैंने कहा- इसी लिए तो काटा है मेरी जान … ताकि कल को परसों को जब भी तू नहाएगी, इस निशान को देखेगी, तो मुझे याद करेगी।<br />
वो बोली- तो फिर एक निशान क्यों, सारे बदन पर निशान बनाओ।</p>
<p>मैं उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दिया, वो भी हंस दी।</p>
<p>मैंने उसकी कमीज़ ऊपर उठाई और उतार ही डाली। हल्के गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी। बदन के गेहुएँ रंग पर गुलाबी ब्रा अच्छी लगी। मैंने उसके हुक खोले और ब्रा भी उतार दी। दो मोटे, गोल मम्मे जिन पर गहरे भूरे रंग के दो उभरे हुये निप्पल।</p>
<p>उसके नंगे मम्मे मैंने अपने हाथों में पकड़ कर दबा कर देखे, वो फिर से लेट गई। मैं भी उसके ऊपर झुक गया, मगर उसके मम्मों से खेलने के लिए।<br />
वो मेरे सर के बालों को सहलाने लगी और मैं उसके मम्मों को चूसने लगा. चूसते चूसते मैंने कई बार उसके मम्मों पर यहाँ वहाँ काटा; ज़ोर से काटा के निशान बन जाए मगर वो भी रब की बंदी मेरे हर बार काटने पर सिसकारियाँ तो भरती मगर कभी भी उसने मना नहीं किया।</p>
<p>उसके दोनों मम्मों पर मैंने काटने के 5-6 गहरे निशान बना दिये।</p>
<p>फिर मैंने उसके पेट पर चूमा, कमर को भी गुदगुदाया। गुदगुदी होने पर वो खूब हंसी। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और खींच कर उसकी सलवार खोल दी और फिर उतार भी दी।<br />
मेरे सामने वो बिल्कुल नंगी लेटी थी। कितने दिनों, महीनों से मैं उसके बारे में ऐसा सोचता था; आज वो दिन आया था, जब मैंने उसे पूर्ण रूप से नंगी देखा था।</p>
<p>वो बोली- क्या देख रहे हो जीजाजी?<br />
मैंने कहा- मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा था, तब सोचा था कि अगर कभी मौका मिले तो मैं तुम्हें नंगी देखना चाहूँगा। आज मुझे वो मौका मिला।<br />
वो बोली- मैं बताऊँ, जब मैंने आपको पहली बार देखा, तब मेरे दिल में भी ये ख्याल आया था; आपसे सेक्स करने का। मगर आप ऐसे बुद्धू कि अपनी बीवी के नाड़े से ही बंधे रहे।</p>
<p>मैंने कहा- अरे यार देखो, अब बात ये है कि मुझे अपनी बीवी से ज़्यादा और कोई सुंदर लगती ही नहीं। तो मैं किसी और को देखता ही नहीं। ऐसी बात नहीं है कि मैं तुम्हारे इशारे नहीं समझ रहा था. मगर क्या करता, हर बार बीवी साथ थी, तो तुमसे अपने दिल बात कहता तो कहता कैसे?<br />
वो बोली- तो अब कह दो; अब तो आपकी बीवी भी आपके साथ नहीं है।</p>
<p>मैंने अपनी कमीज़ खोली, अपनी पैन्ट, बनियान चड्डी सब उतार दी, और रूपा के सामने बिल्कुल नंगा हो गया।<br />
“लो मेरी जान!” मैंने रूपा से कहा- आज मैंने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया.</p>
<p>वो उठ कर खड़ी हुई और मेरे पास आ कर मुझे लिपट गई। हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से जैसे चिपक गए हों। कितनी देर हम एक दूसरे के बदन से चिपके रहे, इस एहसास से चिपके रहे कि जिसको इतने महीनों से देख देख कर मन मसोसते थे, आज वो बिल्कुल नग्न मेरी बांहों में है।</p>
<p>मेरा पूरा तना हुआ लंड हम दोनों के पेट के बीच में अटका हुआ था।</p>
<p>मैंने कहा- रूपा मेरी जान, मेरा लंड चूसेगी?<br />
वो बोली- आज से पहले सिर्फ मेरे पति ने मुझे नंगी देखा है, उनके जाने के बाद मैंने आपको अपना तन मन सब अर्पण कर दिया है। आप बस मुझे धोखा मत देना। सब कुछ आपका है, जो कहोगे, मैंने करूंगी, आपकी बाँदी हूँ, गोल्ली हूँ, नौकर हूँ। जो समझो वो हूँ। आपका हुकुम मेरे सर आँखों पर!</p>
<p>कहते कहते वो नीचे को बैठ गई और अपने हाथ में मेरा लंड पकड़ा और उसकी चमड़ी पीछे हटा कर उसने मेरे लंड का टोपा बाहर निकाला और अपने मुँह में ले लिया। अब मेरी पत्नी थोड़ा नखरे<br />
करती है, रूपा का एकदम से मेरा लंड चूसना मुझे अंदर तक गुदगुदा गया।</p>
<p>बहुत आनंद आया जब उसके होंठों ने मेरे लंड को अपनी आगोश में कस लिया।</p>
<p>मैं दीवान पर ही बैठ गया और वो मेरे सामने फर्श पर बैठी, मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़े और अपने मुँह में मेरा लंड भरे, उसे चूसने में मस्त थी।<br />
हालांकि मेरा लंड कोई बहुत बड़ा नहीं है, सिर्फ 6 इंच का ही है, एक आम साधारण सा ही लंड है। मगर प्यासी औरत को तो ढाई इंच का लंड भी ठंडा कर सकता है।</p>
<p>मैं उसके सर को सहला रहा था, उसके बदन को अपने पाँव से मसल रहा था। मोटी चर्बी से भरी कमर, पेट, जांघें। हिलाओ तो लहरें उठती थी बदन में।</p>
<p>कुछ देर चुसवा कर मेरा भी दिल करने लगा कि मैं भी उसकी फुद्दी चाट कर देखूँ। मैंने उसे कहा- रूपा, ऊपर बेड पर आ कर लेट जाओ।<br />
वो उठी और बेड पर लेट गई।</p>
<p>मगर जब मैं उसके ऊपर उल्टा हो कर लेटने लगा, तो वो मुझे रोकते हुये बोली- नहीं नहीं, चाटना मत। मैं बस एक दो मिनट से ज़्यादा नहीं टिक पाऊँगी। आप अंदर डालो, और शुरू करो।<br />
मैंने उसकी फुद्दी देखी, पानी की दो तीन बारीक धारें उसकी जांघों तक बह आई थी। मतलब वो इतनी गर्म थी, इतनी प्यासी थी कि बिना छूये भी झड़ने के करीब थी।</p>
<p>मैंने उसकी टांगें खोली और अपना लंड उसकी फुद्दी पर रखा, और जैसे ही मेरा लंड उसकी फुद्दी में घुसा, उसने अपने नाखून मेरे कंधों में गड़ा दिये- ओह … मेरे मालिक!<br />
उसकी आँखें बंद, होंठ खुले।</p>
<p>मैंने अपने होंठों से उसके होंठ पकड़ लिए और अपनी जीभ उसके मुँह में घुमाई। कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो मेरी जीभ को चूसने लगी, और नीचे से अपनी कमर भी चलाने लगी।</p>
<p>अभी मुश्किल से एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उसने मुझे अपने आगोश में कस के जकड़ लिया, अपनी कमर ऊपर को हवा में उठा ली और मुझे बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ज़ोर से … और ज़ोर से चोदो जीजाजी मुझे!<br />
मैं एकदम से तेज़ गति से अपनी बीवी की सहेली यानि मुंह बोली साली को चोदने लगा।</p>
<p>और अगले ही पल वो अपनी जांघों से कभी मेरी कमर को जकड़ लेती, कभी छोड़ देती। ऐसा उसने कई बार किया. मैंने भी महसूस किया, जैसे उसकी फुद्दी से बेशुमार पानी बह निकला हो।</p>
<p>मैंने उसके गाल पर काट लिया, मगर हल्के से … कि निशान न पड़े।</p>
<p>पहले तो उसकी तड़प तेज़ थी मगर फिर धीरे धीरे उसकी तड़प शांत होती गई। जब उसकी जांघों की जकड़ ढीली पड़ी तो मैंने फिर से चुदाई शुरू करी। मगर वो बहुत शांत, संतुष्ट मेरे नीचे लेटी थी। उसने अपनी टांगें हवा में उठा ली, जिस से उसकी फुद्दी पूरी तरह से खुल गई। मैं उसे घपाघप चोदने लगा।</p>
<p>अब मैं तो पूरी तैयारी के साथ आया था क्योंकि उस पर धाक जमाने के लिए, मुझे उसे खूब सारा चोदना था।</p>
<p>करीब 5-6 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- मैं घोड़ी बनना चाहती हूँ।<br />
मुझे क्या ऐतराज हो सकता था, मैं पीछे हटा तो वो मेरे सामने घोड़ी बन गई।</p>
<p>अपना लंड मैंने उसकी फुद्दी में डाला तो वो खुद आगे पीछे कमर हिला कर चुदवाने लगी।<br />
मैंने कहा- अरे वाह, तू तो मस्त चुदवाती है।<br />
वो बोली- अरे मेरे मालिक, अभी तो देखते जाओ, मैं आपको कैसे कैसे निहाल करती हूँ।<br />
मैंने कहा- तो रोका किसने है … करो निहाल!</p>
<p>कुछ देर खुद ही घोड़ी बन कर चुदवाने के बाद वो आगे को बढ़ी, मेरा लंड उसी फुद्दी से बाहर निकल गया। उसने मुझे धकिया कर नीचे लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई। मेरा लंड पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रख कर खुद ही अंदर ले लिया। अपने दोनों हाथ मेरे सर के अगल बगल रख कर वो मेरे ऊपर झुक गई।</p>
<p>मैंने उसके झूलते हुये मम्मे देखे तो उसने अपने हाथ से पकड़ कर अपना मम्मा मेरे मुँह में दिया- पियो मेरे मालिक!<br />
वो बोली।</p>
<p>मैंने कहा- अरे यार … ये मालिक मालिक क्या है? मुझे मेरे नाम से पुकारो।<br />
वो बोली- आप मेरे मालिक हो … जैसे कहोगे, वैसे ही करूंगी।</p>
<p>मैंने बारी बारी से उसकी मम्मे चूसे।</p>
<p>एक बात तो है, प्यासी औरत जब खुद सेक्स करती है तो मर्द को वो मज़ा देती है, जो मर्द उसे खुद चोद कर भी नहीं ले सकता। मुझे बिल्कुल ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं जन्नत में हूँ और कोई बहुत ही समझदार औरत मुझे सेक्स करना सीखा रही है।<br />
क्योंकि इतना मज़ा तो मुझे पिछले 26 सालों में मेरी पत्नी भी नहीं दे सकी जबकि मैं उसके साथ भी ये सब आसन कर चुका था।</p>
<p>इस रूपा से चुदवाने का मज़ा ही कुछ और था। ऊपर बैठ कर उसकी फुद्दी मुझे बहुत ही कसी हुई लग रही थी या शायद उसे ही पता था कि फुद्दी को टाइट करके कैसे चोदा जाता है कि मर्द को और मज़ा आए।</p>
<p>थोड़ी देर बाद मैंने कहा- रूपा नीचे आ जाओ!<br />
वो मेरे ऊपर से उठी और बेड पर सीधी लेट गई। मैं उसके ऊपर आया, उसने खुद मेरा लंड पकड़ कर अपनी फुद्दी पर रखा। इस बार हमारा मुक़ाबला बड़े ज़ोर का रहा। वो एक बार झड़ चुकी थी तो दूसरी बार उसने भी खूब टाइम लिया.</p>
<p>इधर मैं तो आया ही खा पी कर था तो मैंने तो लंबा टाइम खेलना था। दोनों में जोश भरपूर था, वो भी अपनी फुद्दी से पानी पर पानी छोड़ रही थी, मेरा भी लंड पूरा पत्थर हो रहा था। इस बार तो मैंने उसे इतने ज़ोर से चोदा कि मैं तो पसीने से नहा गया. नीचे से वो भी अपनी कमर चला रही थी तो उसके चेहरे, कंधों, सीने, पेट और जांघों पर पसीना साफ दिख रहा था।</p>
<p>हमारी चुदाई ऐसे चल रही थी, जैसे दोनों में कोई मुक़ाबला चल रहा हो कि पहले कौन झड़ेगा। मगर वो नॉर्मल थी, तो ज़्यादा जोश में आने से वो फिर से पानी गिराने लगी।<br />
नीचे से कमर उचकाती वो ज़ोर ज़ोर से बोली- चोद साले … और चोद … और चोद … आह, मार ज़ोर से मार मेरी … ले डाल, अंदर तक मार साले, फाड़ इसे, ज़ोर से मार लौड़ा … और ज़ोर से मार।</p>
<p>उसकी तड़प देख कर, मुझे इतनी खुशी हो रही थी, जैसे मैंने आज पहली बार सेक्स किया हो। और फिर उसने अपनी कमर पूरी तरह से ऊपर को उठा दी, और कमान की तरह अपने बदन को अकड़ा लिया। मैंने भी उसके मम्मों को अपने मुँह में भर के ज़ोर से काटा। इतने ज़ोर से कि मेरे दाँत उसके मम्मे में गड़ गए.</p>
<p>वो दर्द से चीखी, मगर उसके स्खलन का आनंद उसके दर्द पर भारी था। मेरी बांहों में वो जैसे बेहोश होकर ही गिर गई थी।</p>
<p>मैंने उसे बेड पर ठीक से लेटाया और जल्दी जल्दी अपना काम भी पूरा किया। उसकी तरफ से अब कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी। मैंने अपना माल उसके पेट पर गिरा दिया। वो सिर्फ शांत लेटी मुझे देखती रही।</p>
<p>उसको चोदने के बाद मैं भी उसकी बगल में लेट गया।</p>
<p>कितनी देर लेटे हम सिर्फ एक दूसरे की आँखों में देखते रहे; कोई बात नहीं की। धीरे धीरे हम दोनों की सांस में सांस आई।<br />
वो मुझसे लिपट गई, उसकी आँखों में आँसू आ गए।<br />
मैंने पूछा- क्या हुआ?<br />
मगर वो बोली कुछ नहीं, बस रोती रही।</p>
<p>काफी रोने के बाद और मेरे बहुत समझाने के बाद वो चुप हुई। उसके बाद मैं उसे बाथरूम में ले गया और वहाँ हम दोनों एक साथ नहाये, फिर कपड़े पहने।</p>
<p>फिर उसने चाय बनाई और हम दोनों ने पी।</p>
<p>उसके बाद मैं अपने घर आ गया। आज इस बात को करीब 6 महीने हो गए हैं और इस दौरान मैं उसे सिर्फ 3-4 बार ही चोद पाया हूँ। मगर इन 6 महीनों में मैं उनके परिवार में इतना घुलमिल गया हूँ कि मुझे लगने लगा है जैसे मैं सच में ही दिव्या का बाप हूँ। वो भी बिल्कुल मेरी बेटी बन गई। मैं उसके साथ उसके कॉलेज में जा रहा हूँ, उसके साथ बाज़ार, मूवी देखने सब जगह।</p>
<p>मगर तब एक दिन मेरी ज़िंदगी में एक नया मोड़ आया।<br />
वो क्या था … बताऊँगा अपनी अगली कहानी में।<br />
[email protected]</p>
<p>आगे की कहानी: मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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